Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Jan 26 - क्या देवी-देवता सच में होते हैं? 100% चेतना का रहस्य! देवी-देवताओं की काली सच्चाई और सीमाए
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- 0:16धरम चंद कुमारी, शालीन और करीब सैकड़ों लोगों ने प्रश्न पूछा,
- 0:33अलग अलग ढंग से। आपकी सभी बातें समझ में आती हैं।
- 0:43बाबू श्री रामकृष्णा पर मनसे किस माता से कहते थे?
- 0:58कि तुझे दौर पे छे आने का प्रसाद मार दूंगा, तू केशव चंद्र को ठीक
- 1:06कर दे फिर किसे कहते हो? फिर विवेकानंद कु।
- 1:25कि यह माँ आई हुई है, मांग ले उससे धन मांग लेना क्योंकि धन की
- 1:32कमी फिर किस्से कहते हैं विवेकानंद विवेकानंद कहते हैं
- 1:47माता आएगी। पानी भी नहीं पिया जाता।
- 1:54रोटी का एक ग्लास भी नहीं निगला जाता।
- 2:00आप उससे मांग के हम लेते है इतना सा देते है की थोड़ा पानी तो पी
- 2:07सकूँ। थोड़ा एक रास पानी तो खस पीस सको।
- 2:13एक रास रोटी तो खा सको श्री राम कृष्ण किसको कहते हैं कि माँ आई
- 2:29हुई है, इससे मांग ले। बड़ा सुंदर स्वाद है परंतु निम्न
- 2:38स्तर का है। आपने कहा पुत्र के आप ये कहते हैं
- 2:47कि दिव्य देवता होते हैं नहीं, मैंने नहीं।
- 2:55मैंने कहा, ये क्षति रोग बहुत है और अपनी इच्छा से जो भी चाहें रूप
- 3:02परिवर्तित कर सकते हैं, इसीलिए तो आपके 33,00,00,000।
- 3:12किसी ने चूहे पर बैठा दिया किसने बैल पर किसने उल्लू पर बैठा दिया
- 3:17किसने अंश किसी ने मोर पर बैठा दिया?
- 3:22मैंने कभी नहीं कहा कि देव देवता होते हैं, मैंने कहा होती हैं।
- 3:30पर शक्ति रोपा होते हैं और देवता चैतन्य का परफेक्शन नहीं होता है।
- 3:41100% की चेतना नहीं होती। परंतु वो अपनी मन मर्जी से आकार
- 3:52बदल सकते हैं, ये मैंने कहा। यही बात भगवान श्री कृष्ण ने।
- 4:08एक समय श्लोक में कहा यो यो यम यम तनु भक्तः श्राद्धहार चितम 1।
- 4:17क्षति तश्य तश्य अचलाम स्रधाम ताम एव वृद्धामयाँ जो जो।
- 4:27जीस भी रूप में श्रद्धापूर्वक मेरे अर्पित हो जाता है।
- 4:34मैं उसी उसी रूप में उसकी इच्छाओं को पूरी कर देता हूँ।
- 4:42ये बड़ा गहरा विषय। बहुत से लोग मुझे पूछ लेते हैं ये
- 4:54बकरी के बच्चों की बलि देनी होती बेचारे यही मासूम बलि देने के लिए
- 5:03मुर्गा। यही मानवता को मिले।
- 5:11मैं कहता हूँ नहीं यह मानवता को खुद चाहिए।
- 5:16खंड के लिए देवताओं का तो महज नाम होता है अन्यथा सूअर किसी ने नहीं
- 5:24मांग ली। शुगर को भी मांगते है फिर ये क्या
- 5:33है? आइए यह शक्ति है ज्ञान से और जो
- 5:47व्यक्ति। 100% चेतना में चला गया।
- 5:52वह इन शक्तियां का माल बन जाता है।
- 6:00जैसे शंकर महा लक्ष्मी को पुकारना हैं और वह जाती।
- 6:14और शंकरे जारे कहते हैं कि तुम इस विधवा ब्राह्मणी के घर पे बरस
- 6:20इतना बरस वे तीन प्रहर तक बरस अभी तो तुम अपनी इंद्रियों के ही माल
- 6:33का नहीं अभी तो तुम। अपने मन के ही मल अभी तो
- 6:41इन्द्रियां तुम्हें नहीं चाहती, मन तुम्हें नहीं चाहती और तुम
- 6:46इनकी इच्छाएं को पूरी करते हो। ज़रा समझो यह उस तल की बातें हैं।
- 6:57जो व्यक्ति अंतरस्तर पे पहुंचेगा 100%, विश्व युद्ध चेतना 100% और
- 7:03कॉन्शॅसनेस वह आदेश दे सकता है तुम आदेश दे सकते हो।
- 7:18क्यों? क्योंकि तुम्हारी चेतना अभी
- 7:22परिपूर्ण है नहीं है। बिलासपुर कन्सीसनेस है जब ये
- 7:33परिपूर्ण हो जाएगी। तो देवी देवता तुम्हारे भला हो
- 7:36जाएंगे। देवी देवता होते हैं।
- 7:41मैंने कभी न कहा नहीं मैंने का लेखन यह शक्ति रोग होता और यह
- 7:50आकार प्रकार बदल सकते हैं वो ही शक्ति।
- 7:55पंखे को चलाती है, वही हीटर को चलाती है, वही एयर कंडीशन को
- 8:03चलाती है, वही गाड़ियों को चलाती है इलेक्ट्रिक ट्रेन्स।
- 8:14वो ही पानी को ऊपर लेके जाते 10 मंजिल पे 20 मंजिल पे 100 मंजिल
- 8:18पे यह इलेक्ट्रिसिटी का ही प्रारूप है कभी नहीं काम है के
- 8:28देवता होते है। हाँ मैंने ये कहा।
- 8:33वो शक्ति रोग होते हैं वो अपना आकार प्रकार जब चाहे जीस तरह का
- 8:40विचार बदल सकते हैं। तुम अगर कल को कोई और देवी देवता
- 8:46खड़े कर लो, पुरुषों पुकारने लग जाओ प्राप्ति श्रद्धा।
- 8:53श्रद्धार चितम इच्छति है और पूर्ण हो जाए उसके प्रति समर्पित हो जाए
- 9:04तो फिर आपकी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी।
- 9:08लेकिन मसला यह नहीं है। कि इच्छाएं पूरी नहीं होतीं।
- 9:16मसला ये है कि तुम कमांड करने के योग्य नहीं होवे।
- 9:25100% चेतना से संपूर्ण व्यक्तित्व ही हुकम दे सकता है।
- 9:33अभी तुम नकली नकली हुकुमराण बनना चाहते हो, लेकिन हुकुमराण व्यक्ति
- 9:42तब बनता है जब वह हुकुम को मानने के योग्य हो जाता है।
- 9:51अब ये बड़ी बड़ी बात है जब परिपूर्ण रूप से तुम उसके हुक्म
- 9:57को मान लोगे, जो तो द पाप है, सोई पालिका तो परिपूर्ण रूप से तुम
- 10:05संसार के प्रत्येक देवी देवता को। हुकुम जैसे को ये बड़ी उलट बाँसी
- 10:15लगेंगी। ये कैसी पहेली हुई?
- 10:21इसीलिए तो मैं कहता हूँ यह समझ में नहीं आएगा जैसे पेट जितना
- 10:28नीचे जाता है चने। उतना ही ऊपर आसमान में खिल जाता
- 10:32है। तुम जितना उसके हुक्म को स्वीकृत
- 10:37करने में अपनी चेतना को लगा दोगे, उतना ही तुम हुक्म देने के
- 10:45प्रकृति को हुक्म देने के योग्य हो जाओ।
- 10:51बस इसको अभी तो आप एक सर्कल में दे लो, कोई वक्त आएगा जब तुम्हें
- 10:57इसका मतलब समझा जाएगा। वह व्यक्ति जो 100 100% चेतना का
- 11:09पुंज हो गया। ओनली ही कैन कॉमेंट उसके लिए
- 11:21चेतना दासी हो गई। वह परिपूर्ण चेतना हो गया, वह
- 11:33चेतना का असीम और छोर छू गया। फिर छोटी छोटी चेतनाएं उसकी गुलाम
- 11:45हो जाएगी। छोटी छोटी चेतनाओं को हम देव
- 11:48देवता। लेकिन एक बात और भी ध्यान रखना
- 11:54अभी तुम्हारा प्रश्न बाकी है हरि देवी देवता काम कैसे करते है, काम
- 12:05कौन ले सकता है? वो तो मैंने समझा दी।
- 12:08100% सुपरकॉन्शियसनेस में पहुंचा व्यक्ति जो खुद विराट का प्रारूप
- 12:18हो गया वह भूकंप दे सकता है। अभी तो तुम कल्पनाओं में अपने आप
- 12:26को बरात दिखाने निकलते हो। इसे ही मैं देखाबा के अपने आपको
- 12:33सुपर मालिक दिखाना चाहते हो होना नहीं चाहते।
- 12:41संसार के बड़े से बड़े राजनीतिज्ञ अपने आपको सुपर पावर दिखाना चाहते
- 12:48हैं होना नहीं चाहते। दिखाना तो बाहर के द्रव्यों से
- 12:52संभावित है। बाहर के द्रव इकट्ठे कर तुम
- 12:56चक्रवर्ती सम्राट हो जाओगे, आज की भाषा में उसे ऊपर भवर गाते है,
- 13:04लेकिन भीतर की उस कन्सेशन्स को छू लो।
- 13:10100% 100% प्योर कॉशस्नस फिर तुम चेतना के छोटे अंशों को हुक्म
- 13:19देने में सक्षम हो जाते हो और छोटी चेतनाएं क्या है देवी देव?
- 13:27इसलिए अक्सर कहा जाता है कि देवी देवताओं को मुक्त होने के लिए
- 13:32मनुष्य का शरीर धारण करना पड़ता है।
- 13:37आज समझा गई तुम्हें देवी देवताओं को भी मुक्त होने के लिए।
- 13:48मनुष्य के शरीर में आना पड़ता है क्योंकि ये इन्कम्प्लीट
- 13:53कॉन्सेस्नेस है और मनुष्य कंप्लीट कॉन्सेस्नेस तक जा सकता है।
- 14:04ठीक इस। छोटी सी घटना तुम्हें सुनाओ
- 14:14देवताओं को देवी देवताओं को मैं व्यापारी कहा कर्त हूँ जैसे रूसोत
- 14:21ले लिया काम करती हूँ। ऐसी आप मन्नत मानते और राम किशन
- 14:31जानते है की मन्नत तो मांगनी होगी इनकी वो मन्नत मांगते है माता के
- 14:38शिवचंद्र को ठीक कर दे तेरे को ₹1 छियाने का प्रशास।
- 14:47क्या वो कब नहीं कर सकता? बिल्कुल कर सकता है फिर क्यों
- 14:51नहीं करते? बस ये वही बात आ गई है जिसे आप
- 14:57कहते हो कि दो और दो। ये सुपरकॉन्षियसनेस से पूछो कुछ
- 15:02नहीं होता है या तो मैं किसी मैथमेटिशियन से पूछ लूँगा, बड़ा
- 15:11इजी है और ये तो मैं खुद भी जानता हूँ।
- 15:14अगर नहीं भी जानता हूँ बिल्कुल अनपढ़ तो किसी मैथमेटिशियन से पूछ
- 15:19लूँगा। किसी नेहा से पूछ लूँगा वो
- 15:22मैथमेटिशियन की एमएससी है लेकिन सुपर कॉन्शसनेस नहीं है।
- 15:35तुम्हारे सभी टीचर सुपर कॉन्शसनेस में नहीं है, इसलिए मैं अक्सर बोल
- 15:44रहा हूँ। के देवी देवता व्यापारी हैं तो
- 15:56चेतना का छोटा स्वरूप इन कंप्लीट 100% चेतना कुछ हुआ नहीं, इसलिए
- 16:05तो आपके देवताओं के मालिक। स्वर्ग में रहने वाले इंद्र
- 16:10अहिल्या पे मोहित हो जाते हैं। गौतम की धर्मपत्नी अहिल्या बड़ी
- 16:16सुंदर थी। हेतु कहानी।
- 16:28स्वर्ग अधिराज इंद्र का मन विचलित हो उसने कहा इसे भोगें बस ये
- 16:37भोगने की इच्छा ही आपकी सुद्रता को प्रकट कर।
- 16:48तीन गर्लफ्रेंड रख लो देन बॉयफ्रेंड रख लो, ये भोगने की
- 16:52इच्छा है और फिर ऐसे ही लोग स्टबक कर गीता का व्याख्यान करेगा।
- 17:01ऐसे ही लोग उपनिषदों का। व्याख्यान करें।
- 17:12ये अभी खुद के ही मालिक नहीं है। वासनाओं को जीतकर ही कोई व्यक्ति
- 17:20महावीर हुआ करता है। महावीर का नाम तो वर्धमान था,
- 17:26महावीर तो उसको किताब मिला। क्योंकि उसने सभी वासनाओं पर
- 17:30ओवरकम कर दिया था, जो वासनाओं को हुकम दे सके,
- 17:45वासनाय ऊर्जा का शुद्ध रूप और जो वासनाओं को हुकम दे सके, तुम ये
- 17:52काम करो, तुम ये काम करो। अभी तो तुम वासनान का बोलो अभी तो
- 18:00वासनाई तुम्हें वो कम करती है वह लड़का बड़ा अच्छा मसल मैन, वह
- 18:08लड़की बड़ी अच्छी खूबसूरत है ही इस हैंडसम वॉ।
- 18:13शिव योग ये क्या है, छोटी सी बात से ही समझा जा सकता है यह व्यक्ति
- 18:25किसी तो सर पर है। लेकिन फिर राम रामकृष्णा परमहंस
- 18:40क्या पूर्ण नहीं है? अभी नहीं है, अभी नहीं है।
- 18:49अभी सब विकल्प समाधि में हैं इसलिए मिन्नत करते हैं मालिक ने।
- 18:58ये समझ लेना बात बड़ी कठिनतम बात है समझाना।
- 19:04राम किशन परमात्मा तत्वों को नहीं छूए हैं।
- 19:09सह विकल्प समाधि में हैं, निर्विकल्प समाधि में तोने
- 19:13तोतापुरी लेके गए। निर्विकल्प पर समाधि के बाद जाने
- 19:23के बाद वो किसी माता वगैरह की उपासना नहीं करते हैं।
- 19:29कोई चोरी नहीं कहलाते, उसे वो जानते हैं वो विराट छोर में।
- 19:38वह अस्तित्व में ईशा का सीमित सर्ववम्म यथ किंच जगत याम जगत आई
- 19:46एम ओमनी प्रेशेंट ओमनी प्रोटेंट मैं ही हूँ अहम ब्रह्मस।
- 19:57खालक खालक खालक मैं खालक अनल हक तो आपने पूछा फिर क्या ये काम
- 20:10नहीं करते? बिलकुल करते हैं ये पक्के
- 20:15व्यापारी। जैसे हम सेवक से काम लेते हैं और
- 20:22उसको पगार देते हैं। ऐसे ही देवताओं की मनहतों में हम
- 20:25पगार देते हैं और मैं अक्सर करता हूँ करता रहा हूँ।
- 20:35अब तो मैंने बहुत रेयर। यह काम कर दिया, लेकिन कर सकता
- 20:44हूँ जैसे कोई व्यक्ति 50 किलो का वजन उठा के वो उठाए ना बस यही रूप
- 20:57है मेरा। यही हालात हैं मेरे तो रामकृष्णा
- 21:05परमहंस किसकी मन्नत मानते हैं? कल्पना की जो मूर्ति उन्होंने
- 21:15कल्पना में काली की बनाया। काली से बाती अथक है मेरे पास
- 21:22अक्सर लोग पुत्र मांगने आ जाते हैं पुत्री मांगने को आज तक आज
- 21:30तलक मेरे पास एक व्यक्ति आया सिर्फ जिसने बेटे के दिमाग।
- 21:38उसका भी कारण था नाम नहीं लूँगा, लेकिन गांव का नाम जरूर ले दूंगा।
- 21:46तलवंडी उसकी धर्मपत्नी और वह मेरे पास है बाबा।
- 21:57मेरी स्त्री गणपति है और मेरे एक पुत्र पहले है, मैं चाहता हूँ कि
- 22:05अबकी पुत्र ना हो पुत्री हो जाए मैं चौका अरे?
- 22:15तुम ठीक से बोल रहे हो होश में हो कहता हूँ क्या कहा, फिर बोलो कहते
- 22:23मैं पुत्री चाहता हूँ पुत्र नहीं चाहता अच्छा क्यों?
- 22:33बाबा मेरे पास 1012 के लिए जमीन एकड़ अगर पुत्र हो गया तो बटवारा
- 22:41करना पड़ेगा। पांच पांच आये अगर अगर पुत्र हो
- 22:46गया तो और अगर पुत्री हो गयी पुत्री का क्या?
- 22:5010 20,00,000 50,00,000 लगा के एक केला भेज देंगे, एकड़ भेज देंगे
- 22:56और महंगी जमीन लड़की की शादी कर दे वो लड़का सारी उम्र, लोहू भी
- 23:04है, लड़की अपने घर चली जाएगी, संभाल ले।
- 23:11प्रथम बार मुझे समझाया कि लड़की मांगने के पीछे भी नहीं तो
- 23:17स्वार्थ है। मैंने कहा था मैंने काली को।
- 23:33आज्ञा दीजिये। मैंने कहा यह लड़की जब ये तो बाबा
- 23:39लड़का है फिर अब क्या करे अब यहाँ तुम चौंकोगे साइंटिस्ट भी
- 23:45चौंकेंगे कहेंगे, गप को मार रहे हो?
- 23:51और ऐसे गपों से मेरी बायोग्राफी बरी पड़ी।
- 23:57जब बायोग्राफी को पढोगे तुम या तो फेंक दोगे या जला दोगे, गटर में
- 24:01फेंक दोगे, इतना गुस्सा आ गया, लेकिन मैं कहता हूँ नाबिल समझ के
- 24:07पहले इंटरेस्टिंग। क्योंकि आज यह गटर में फेंकने
- 24:17योग्य है, कल को यह पूजने योग्य भी हो जाए।
- 24:22एक बार के में इतना रिएक्शन अच्छा।
- 24:35तो काली बोली यह तो पुत्र है बाबा मैंने रखे से से पुत्र का ठीक हो
- 24:43जाएगा और उसके पुत्री हो गए ऐसे मेरे पास केस आते रहते।
- 24:59यही तो मैं कहता हूँ अगर मैं 25 क्रोग्राफ को दे दूंगा तो इनका
- 25:02क्या होगा? ऐसे केस तो ज्यादा आते है धन
- 25:06मांगने के लिए तो तीन आदमी आते है सतानु में किस सुबह से आते है?
- 25:12अलग अलग इच्छाएं हैं सभी? लेकिन कौन कर सकता है 100%
- 25:23कैन्सेस्नस में उठा हुआ व्यक्ति मालिक हो जाता है अपनी इंद्रियों
- 25:30का और अपने मन का? अभी तो तुम इन्द्रियों के गुलाम
- 25:35अभी तो मन तुम्हें नहीं चाहता है इन्द्रियां तुम्हें नहीं चाहती है
- 25:40सुन्दर पुरुष को देखकर तुम्हारी लार गिरने लगती है सुन्दर स्त्री
- 25:47को देखकर तुम्हारी लार गिरने लगती है अभी तो तुम ऐसे हो।
- 26:02तो किस्से मांगते हैं। इन्हीं छोटी चेतनाओं से इनके अपने
- 26:09भीतर विकार है और इनको विकार रहित होने के लिए।
- 26:15और सुपर कौन सी को छूने के लिए मनुष्य का जामा चाही?
- 26:21इसीलिए बाबा ने कहा गर्मी आवे कपड़ा।
- 26:25यह मानव शरीर उसके रहम से मिलता है।
- 26:31नदरी, मोक ग्वार जब उसकी कृपा हो जाती है।
- 26:36तो मुक्ति मिलती है, अन्यथा तुम बंदे ही रहोगे वासनाओं में, मन की
- 26:43इच्छाओं में जैसे बच्चा कहता है पापा बाजार के आसार छुडकना लेके
- 26:49आए नहीं बेटा मैं तो भूल गया फिर तब क्या खाक लेके आया बाजार से?
- 26:54अगर छोड़ कणा नहीं ले के आया तो क्या खाक ले के आया उसके लिए छोड़
- 27:00कणा ही सब कुछ जैसे प्राइम मिनिस्टर के लिए गद्दी ही सब कुछ
- 27:07होती है। गद्दी में क्या है?
- 27:20सान, दान दंड भेज सभी कुछ करके अपने सभी तरकश के तीर चलाते वे
- 27:30किसी तरह गलती पर बने रहना चाहते हैं।
- 27:32अभी कल अजित डोवाल बोल रहे थे। बा मुश्किल तुम्हें इतना सुंदर
- 27:38नेतृत्व मिला है यह तुम्हारी विविशा ग्रंथि को और ज्यादा मजबूत
- 27:44करना है। यह अब आखिरी मूर्ख आ गया।
- 27:50मोदी जीके तरकश का आखिरी तीर। इसका मतलब चुक गए।
- 27:59कोई मुद्दा नहीं और कोई मुद्दा ही नहीं है।
- 28:01क्या तुम जवानों से कहते हो कि लड़ो तुम में इतना जज्बा होना
- 28:10चाहिए तो मैं तुम से पूछता हूँ। स्वतंत्रता संग्राम में जहे जज्बा
- 28:15को गिरवी रख दिया तक आजादी की लड़ाई में जहे जज्बा तुमने कहीं
- 28:25गिरवी रख दिया, आज इसकी जरूरत नहीं बहुत हो चुका।
- 28:34लोग आग में जल रहे हैं और देखिए भेद की आग असली आग से ज्यादा
- 28:46जलाती है। इसको आप ऑर्डर लाकर।
- 28:51किसी के भीतर भेद पैदा कर दो, वह आग तुम्हारी आग से भेद की आग
- 29:00ज्यादा चिल्लाते और तुम भेद पैदा कर रहे हो।
- 29:08यही तो सियासत थी। अंग्रेजों की डिवाइड एंड रोल
- 29:15तुमने नाम बदल दिए हैं बस। मैं दर्द नु काबा मैं दर्द नु,
- 29:37काबा के बैठा रब न रख देता, पीड़ा दा।
- 29:48मेरे गीत विलोग सुनिंदे ने। फिर आंख सदी देने मेरे गीत भी
- 30:25लोग। सुने देने का फर आंख अभी देने में
- 30:44दर्द नो। का बा के बैठा मैं दर्दनों का बा
- 30:57के बैठा रब। ना रख दीता पीड़ा दा रब ना रख
- 31:12दीता पीड़ा दा कि कुछ। फकीरांधा साडे नदियां बिछड़े
- 31:30निरांधा की पुछ देओ? हाल फकीरांधा?
- 31:48तुम सिर्फ नाम बदल जाता हो मैं दर्द नु काबा कह बैठा हूँ, दर्द
- 31:56का नाम कब रख दिया? जहाँ जाकर सब दर्द गायब हो जाते
- 32:02हैं, उसका नाम हमें कब रख? मैं दर्दनों का भक है बेटा रब ना
- 32:12रखदिता पीड़ा दा जो दर्द होता है हमारे पीड़ा दुख ही से रख उसको
- 32:19मैंने परमात्मा का नाम से। बस यही कर रहे हैं आज के
- 32:27राजनीतिज्ञ लोग देवी देवता 100% चेतना वाले के गुलाम हो जाते हैं।
- 32:42उससे कम चेतना वाला लोग, तो वासन को बुला अभी तो तुम अपने
- 32:51इन्द्रियों को बुलाओ जैसे इन्द्रियां कहते है, वैसे तुम कर
- 32:54लेते हो, जैसे मन कहता वैसे तुम कर लेते हो, लेकिन शांत कौन?
- 33:02जो अपनी वासनाओं को अपने मन को कठपुतली की तरह नचाए वह संत होता
- 33:11है मेरे पास ही हाँ एक परिवार मेरे पास आया करता था।
- 33:28एक लड़की मुझे कहने लगी बाबा ये देखो मेरा बेटा है, डब्बा खड़पा
- 33:32है, उसका सिर छोड़ा था, आँखियों से नाक मुड़ा मुड़ा, फिर बाबा
- 33:44मुझे बेटा चाहिए और बेटा कोई चाहिए मैं?
- 33:54तमन्ना बहुत है हमारे यहाँ, मैंने कहा ठीक मैंने पहले कहा यह है
- 34:03देवी देवता तो स्वयं ही अभी वासनाओं के अभी।
- 34:11तो जैसे शंकर ने बुलाया, कनक धारा स्तोत्र में लक्ष्मी महर्ष कहा।
- 34:23देवी बरसा तो शंकर उसके मालिक थे। देख, केन कमेंट वह हुकम कर सकता
- 34:32है तो मैंने काली को बुलाया, बोलिए, आ गया तो महाराज।
- 34:45इसको बैठा चाहिए और चाहिए मिस्टर चार्ज गोरा चित्तम काली बोली ठीक
- 34:55प्रभु और आज्ञा मैंने कहा जाओ से लेके।
- 35:03बस वर बाप उसके बेटा वह बड़ा सुन्दर बैठा है हे तपोस चल रहा
- 35:11शहीद धीमा कोई डब्बक डब्ब नहीं, लेकिन जिसने मेरे से बेटा मांगा
- 35:24उसके परिवार के लोग। मंदबुद्धि है मंदबुद्धि कौन होते
- 35:31है जो बिना देखे कह देते है की परमात्मा है आस्तिक और जो बिना
- 35:39देखे कह देते है की परमात्मा नहीं है, नास्तिक मार्कर्स जैसे चार जो
- 35:49बिना देखे कहते थे कि वो है कौन आपके भक्तिजन देखना भरे पड़े
- 35:58मंदिरों में, मच्छदों में, गुरुद्वारों में यही तो हैं,
- 36:03मंदबुद्धि लोग हैं तो हैं। जिन्होंने देखा है नहीं मान रहे
- 36:08हैं। अरे भाई तुम किसकी पूजा कर रहे
- 36:10हो? जिसकी पूजा कर रहे हो छठ सो
- 36:14प्रचार पूजन वह है भी ये जानते हो तुम?
- 36:24या कि समय व्यर्थ कर रहे हो? ऐसे ही किसी बात के ऊपर थी उनको
- 36:37जमीन चाहिए थी। 25 किले अपने ससुर घर से।
- 36:44पर कर्मों में ना हो तो मैं क्या करूँ?
- 36:46अपनी घरवाली चमड़े की बेल्टियों से पिट पीटता जा हिस्सा लेके आप।
- 37:00तू ऐसे लोग बिना देखे हाँ और ना कहने वाले लोग आस्तिक और नास्तिक
- 37:08इनको मैं मंदबुद्धि कहता हूँ, अंत भक्त मत कहा करो, इन्हें भक्ति के
- 37:13नाम पर कलंक मत कहा। मंद बुद्धि इनकी बुद्धिमंद है
- 37:19स्वयं कुछ देखा नहीं, बस थोड़ा सा इधर हुआ परड़ा झुका तो कहेंगे
- 37:24परमात्मा है, थोड़ा सा इधर हुआ तो कहेंगे परमात्मा नहीं और उनके
- 37:33परिवार की ही मैं बात करता हूँ। जो खुद मेरे पास आया था, मैंने
- 37:43जैसे कहा था जाओ, तुम्हारे दो बेटे होंगे।
- 37:47वो तो बात मचा और जब पूरा हो गया तो सारा सारा कुल खानदान आना शुरू
- 37:53हो गया। तो कोई बात नहीं बनी तो कहते
- 37:56परमात्मा नहीं ऐसे हैं आपके परमात्मा होने और अना होने के तौर
- 38:07तरीके कोई इच्छा पूरी हो गई? 100 इच्छाएं पूरी हो गई।
- 38:13एक इच्छा पूरी नहीं है तो कहेंगे नहीं होता तो हमारी इच्छा में
- 38:17पूरी हो जाती। 100 पूरी हो गई, वो नहीं देखेंगे
- 38:22एक पूरी नहीं। खैर, उसने आना बंद कर दिया।
- 38:31कहानी सुना रहा हूँ तुम्हारी काम क्या है?
- 38:36यह व्यापारी लोग है, यह बनिए है। कमतर कान्शस्नस वाले लोग इन्हें
- 38:48देवता कहते हैं। यह है व्यापारी है लेन देन होता
- 38:54है व्यापारियों में इनकी न्याजियाँ वगैरह निकालने के प्रति
- 38:59और इनका हिसाब हमें मालूम है तो जब काली न्याज लेने आई मैंने उसकी
- 39:08न्याय दे दी। क्योंकि वह तो बेरी है।
- 39:14पहले उसकी न्याज निकाल दी। बाबा आपको न्याज मैंने कहा मेरी
- 39:19कोई बात नहीं बाबा आपको न्याज नहीं आए, मैंने कहा तुमने क्या
- 39:25लेना है, इससे तुम जाओगे अभी? उसके ही परिवार का एक और बच्चा
- 39:33मेरे पास था। मैंने कहा, यह है लड़की यह है
- 39:37लड़का इस लड़की के पास नहीं रहेगा कहते बाबा क्यों मैंने कहा कल।
- 39:49काली आई मैंने न्याज निकाल दी, उसकी और उसके तौर तरीके ठीक नहीं
- 39:58थे। यह कुछ ऐसा गडबड कराएगी।
- 40:04कि यह लड़का उसके पास नहीं रहे। कुछ वर्ष हुए थे इनके लिए वर्ष
- 40:13समय का पैमाना कुछ अलग है। तुम्हारे इस लोक पे कुछ अलग है,
- 40:20किसी और लोक पे कुछ अलग है। जब तुम अपने भीतर चले जाओगे, वहाँ
- 40:25पर वक्त का पैमाना कुछ और है। वहाँ वक्त हिलता ही नहीं, इसलिए
- 40:31तुम घंटों घंटों तक अपने बेहतर रह सकते हो और जब बाहर आओगे तो कहोगे
- 40:37ये क्या? 4 घंटे बीत गए।
- 40:41वक्त का डाइमेंशन कुछ और है। वक्त वक्त बीता, अब इनको कोई काम
- 40:53तो है नहीं कालिक भी क्या काम है कोई काम नहीं।
- 41:00वह तो लग गई, उसके पीछे झगड़े, जूठे केस वगैरह।
- 41:05आदमी के साथ केस आखिर में केस इतना बिगड़ा वह बच्चे सारे के
- 41:12सारे उसके घरवाले के पास रह गई और वो अपने पेक्के में बैठी है।
- 41:22संत वक्त देता है, संत बदला लेने की बात ही नहीं करता, अजित डोवाल
- 41:32की तरह यह तो दुष्ट लोग। जिनकी चाहतें कुछ और हैं निगाहें
- 41:47कहीं पे निशाना की बदला लूँ के लेकिन संत का सोभा बदला देना है
- 41:59संत का सोभा क्षमक। क्षमा बीरस्यभूषणम यह वीरपूर्ण
- 42:13वीर यही जिसे महावीर कहा गया, जो अपनी वासनाओं पर अधिकार कर ले, जो
- 42:23अपनी वासनाओं को जीत ले। जो अपने मन के ऊपर लगाम लगा ले
- 42:33उसे जिसे जैसे चाहे वैसे काम ले ले वह वीर, तुम तो अंग्रेजों के
- 42:41चरण जुम्बक बनने वालों को बेर का खिताब दे देते हो।
- 42:47तुम्हारी भाषाएँ तो निराली, मद होश करने वाली तो झगड़ा हुआ, तेवर
- 43:05बदले। यहाँ से बह गए उसे, कूट पीट के आ
- 43:11गए भला जमाइयों को कोई कूटता है, पीटता है, पीट के आ गए ये सब
- 43:22कराता है कोई और इन्हें पता ही मैंने काली के तेवर देख लिया।
- 43:30और मैंने उस बच्चे से कहा, तू देख यह बच्चे अपनी माता के पास नहीं
- 43:38रहेंगे, कोई भी कारण बना दे, इसके तेवर ठीक नहीं हैं।
- 43:44यह बाबा का अपमान नहीं सह सकते यह।
- 43:50मेरी भक्त है भाई, मेरा उपमान कैसे सहेगी?
- 43:56मैं अपना अपना सह जाऊंगा क्षमा वीरत से भूषण यही तो मेरा भूषण
- 44:01है, यही तो मेरा गहना है इस गहने को ही उतार दिया।
- 44:10तो फिर मैं वीर क्या रहा? महावीर का खिताब फिर तो ना जाएगी?
- 44:14मिला लेकिन ये लोग मैंने पहले कहा व्यापारी होते हैं।
- 44:25यह तो रिशुद पे काम करते हैं, रिशुद तो नहीं होगा ये पगार पे
- 44:29काम करते हैं, तनख्वाह देते हैं, बस इनका बंदा हुआ तनख्वाह है वो
- 44:36हम जानते हैं, इनको बंदा हुआ तनख्वाह दे दो, इनसे काम करवा लो
- 44:42और दे कैन डू। करीब करीब करीब करीब मैं क्यों
- 44:54कहता हूँ बहुत सी चीजें हैं, लेकिन संसार की करीब करीब सभी
- 45:00चीजें दे सकते हैं। क्योंकि इतनी भी कमजोर हुई नहीं,
- 45:08थोड़ी सी कमतर है। वह शीर्षस्थ कॉन्सेशन का तल नहीं
- 45:17छुआ है, लेकिन फिर भी इतनी कमजोर भी नहीं।
- 45:24आपने कहा कि ये रामकृष्णा परमहंस को कहते हैं।
- 45:33रामकृष्णा परमहंस जब सुख सुखते हैं, मन्नत मांगते हैं, अब वह
- 45:39पूछे हुए नहीं होते। का मतलब निर्विकल्प के अंदर नहीं
- 45:43होते। सविकल्प समाधि भी कोई कमजोर नहीं।
- 45:47वह भी 90 के करीब है। सविकल्प समाधि और निर्विकल्प 100%
- 45:54है, लेकिन सविकल्प को भी मांगना पड़ता है।
- 45:58हे माता तू ये काम करता है? जबकि वह भी इच्छाओं को पूरी करने
- 46:07की सामर्थ्य रखता है। 90% से इतना कोई कम नहीं देवी
- 46:17देवता यह कौन था जिसके आगे? मन्नत मानते शर्म और रामकृष्णा
- 46:26कहते हैं विवेकानंद नरेंद्रनाथ जहाँ माता आई हुई उससे मांग ली
- 46:35तेरे घर में धन का अभाव है पिता जी जब पिता का देहांत हो गया था।
- 46:41पिताजी स्वर्गवास हो गए हैं या तुम लेकिन ठीक किया ठीक क्या
- 46:50किया? विवेकानंद इसके अलावा कुछ कर ही
- 46:53नहीं सकते थे। जब तुम उस शिरशस्थ चेतना के पास
- 46:58पहुंचोगे तो तुम कुछ मांग नहीं सकोगे।
- 47:05यू विल बी अनेबल टु डिमांड तुम अपने आप को मजबूर पाओगे यहाँ बहुत
- 47:14से लोग आ जाते हैं। पापा हम आए थे लेकिन जैसे ही हमने
- 47:19कमरे में एंटर किया भूल गए क्या मांगना है?
- 47:22वह तो भूल ही गए घर जाके याद आता है, तो यहाँ मेरी डेल्टा रेंज का
- 47:28प्रभाव है उस डेल्टा रेंज के मदुभूषी के आलम में तुम भूल जाते
- 47:37हो। बहुत सी बातें तुम भूल जाओगे, कुछ
- 47:41याद रखोगे? थोड़ा सा रिपीट कर ले।
- 47:55कमतर चेतना वाले लोग देवता होते हैं इसीलिए परिपूर्णता के लिए
- 47:59इन्हें। देवता से मानव शरीर धारण करना
- 48:03पड़ता है। मानव शरीर ही 100% की चेतना के
- 48:12शिखर को छू सकता है। देवता कौन है?
- 48:17है तो स्वरूप। और वो जैसे चाहे अपना प्रारूप बदल
- 48:22सकते हैं, पर वह आपकी मनोकामना को पूरा कर सकता है।
- 48:28मैंने आपसे कहा संत पुरुषों की मजार के आसपास यह करोड़ों की
- 48:33संख्या में घूमने मिलेंगे। क्यों लोगों ने मजारों के ऊपर
- 48:38माथा टेका? क्योंकि वहाँ ऐसी रूह होती है जो
- 48:45आपकी इच्छाओं को पूरा कर सके, आप जाके मन्नत मांगोगे वह आपके संग
- 48:51होलेंगे और आपका काम करवा देंगे। यह था असली रहस्य मजारों पर माथा
- 48:57टेकने और। लेकिन संसार एक इच्छा पूरी कर
- 49:00सकेंगे। यह देवी देवता के पास 100%
- 49:04कॉन्सेशन है। ये ही वासना से ग्रस्त है इसलिए
- 49:12इंद्र जाके अहिल्या से संबंध बना लेते।
- 49:18और उसका खनाजा क्या भोगना पड़ता है, देख लो।
- 49:21श्रतानंद को योग परिवर्तन करना पड़ता है।
- 49:29देवी देवता कुन है जिनमें अविभासना शीर्ष है।
- 49:3390% तक की चेतना देवी देवता होते है।
- 49:43उससे ऊपर उठे चेत यह लोग 100% चेतना वाले व्यक्ति को क्यों दान
- 49:57दान सौंपते हैं? उसके कुछ कारण हैं।
- 50:01एक कारण तो ये है कि वह मानता नहीं।
- 50:04मांगता नहीं, लेकिन शरीर तो इसका चलता है।
- 50:08इसको जरूरत पड़ेगी कम से कम खाने पीने की तो जरूरत पड़ेगी पहनने की
- 50:13तो जरूरत पड़ेगी मोजे वगैरह तो चाहिए होंगे ना?
- 50:19फिर जो लोग समझते हैं। जो भगत जन आते हैं वो जानते हैं
- 50:24कि मांगते तो फिर वो खुद दे जाते हैं श्रद्धा स्वरुप श्रद्धा और
- 50:32सामर्थ्य और संत उसे स्वीकार कर लेता है क्योंकि उसे पता है जरूरत
- 50:42तो है। लेकिन वह लोभी नहीं होता।
- 50:53देखियो मुझे बहुत लोग पूछ लेते हैं बाबा इतना नाम संसार में आपको
- 50:59सुना जाता है, फिर भी आप डब्बे बना के क्यों पीटते हो?
- 51:04जब बिल काटते हो, बिल पहुंचा देते हो?
- 51:07मैंने कहा मैं अपने हक की कमाई से जो कुछ खाता हूँ वह अपनी हक की
- 51:15कमाई से और हक की कमाई है। मेरा बेटा डब्बा बनाता है, मिठाई
- 51:24का डब्बा आके पूछ लो यहाँ। तुम आज आओगे खैर, या वीडियो तो कल
- 51:29रिलीज़ होगी तो पूछ लेना यहाँ हम क्या काम करते हैं यह कहेंगे
- 51:35वर्षों से बीसियों वर्षों से ये डब्बे बेच रहे हैं जैसे कबीर आना
- 51:45भाना बनता है। हम अपनी कमाई से अपना घर ग्रहस्ता
- 51:50पालते हैं। आपकी कमाई तो हमने ऐसे वैसे आपके
- 51:55बैठने का तंत्र बढ़ा दिया, आपके आने का जुगाड़ कर दिया, व्यवस्था
- 52:00कर दी। ऐसे खर्च हो जाता है हमारा।
- 52:09तो जब दूसरा कारण क्या है? जब कोई माथा वगैरह टेकता है?
- 52:14कुछ आप देवी देवताओं से मन्नत मानकर बोल जाते थे, चूक जाते थे?
- 52:24लेकिन 100% कॉन्शसनेस वाला जानता है कि इसने देवी देवता की यह
- 52:29मन्नत मांगी थी और इसने पूरी तो 100% चेतना वाला व्यक्ति हम तो
- 52:39चले जाएंगे, कितनी देर है? रोज़ घिसकता जा रहा है शरीर
- 52:45क्योंकि जीने की चाहत रहे जीने की चाहत हो तो दंड बैठ के भी
- 52:50लगाएंगे। लगा सकता हूँ बड़े आराम से दौड़
- 52:52सकता हूँ खाना पीना सुधार कर लूँ अच्छा न्यूट्रिशनल डाइट कम लेकिन
- 52:59बात तो ये है के लिए। जब से पता है चला है कि मैं नहीं
- 53:05हूँ शरीर और मैं तो वह बिराटतम तब से कौन किसको खिलाएगा?
- 53:20तो वह ऐसे 100% चेतना वाले व्यक्ति के माथा टिक जाते हैं।
- 53:28वह व्यक्ति इन देवी देवताओं को इनका जो रहता कर्ज है क्योंकि ये
- 53:36तो बनी है तो व्यापारी वह अपने पास से चुका देता है।
- 53:46और ये देवी देवता ले भी जाते हैं। बहुतों बार मैंने इन देवी देवताओं
- 53:55के कर्जो को लोगों के कर्जो को इन्हें पहुंचाया कि ये ले जाओ
- 53:59आपकी न्याय। ये थोड़ा सा गहरा मसला है।
- 54:10लोगों ने सपनों को क्यों माथा डेका जो जानते थे, कुछ कारण तो और
- 54:18भी थे कि यह खुद न मत सकेगा। थोड़ा बहुत काम करेगा लेकिन हम
- 54:25जितना काम करते हैं, बिल बना लिए बिल आगे पहुंचा दिए, हिसाब किताब
- 54:29लगा दिया, डब्बों का ऑर्डर ले लिया, कच्चा माल, गालिया सब करता
- 54:34हूँ ये मैं करता हूँ। और फिर वक्त पे पैसे मंगवा लिए,
- 54:41फिर आगे पैसे पहुंचा दिए। ये सारा काम मैं करता हूँ और तुम
- 54:47बिल्कुल पूछ सकते हो के क्यों करते हो?
- 54:49जब सब कुछ आता है तो इसका मतलब कबीर के पास कांच के नरेश का है।
- 54:59मैं जा रहा हूँ तीर्थ, ये मेरा एक हीरा है संभाल के रख लेना बड़ा
- 55:05बेस्ट बड़ा बेस्ट कीमती कबीर का चीज़ देखो राजा जी मुझे कुछ हीरे
- 55:14वीरे का कुछ नहीं पता। यहाँ सब संत अर्थ है चोर कोई नहीं
- 55:19अर्थ जहाँ रख जाओगे वहीं मिलेगा इस झुंपिया में किसी भी जो एक घास
- 55:30फूस है उसमें कहीं भी फंसा के रख जाओ।
- 55:34और आके उठा लेना मुझे कोई मतलब नहीं मैं कोई चौकीदार, थोड़ी जब
- 55:41थोड़े से तीक्षण सब आपसे बोले के भी तो राजा वहीं कहीं झोंपड़ी के
- 55:47अंदर छुपा के रख दिया जाना कैसा था उसे?
- 55:54परीक्षा से 10 5 दिन के बाद आया प्रवचन सुनने को आता था काशी नरेश
- 56:06जब आया तो मेरे पास। प्रणाम किया कबीर से कहा महाराज
- 56:15मैं अपना हीरा ले लूँ। उसने कहा भाई देखो ना तो मुझे ये
- 56:20पता तुम कहाँ रख गए ना मुझे तुम ये पता कि हीरा था कि कांच मैं
- 56:26उनसे जोड़ रही हूँ। जहाँ रखा वहीं मिलेगा मैंने आपसे
- 56:30कहा यहाँ चोर नहीं कोई आता यहाँ सभी संत आते हैं और अगर कोई चोर
- 56:36होता भी है ना तो यहाँ आके शांत हो जाता है ये नहीं की बात कह रहे
- 56:42हो यहाँ आके चोर भी शांत हो जाता है।
- 56:59राजा उठा मैं ही गया जहाँ हीरा रख के हाँ, हाथ मारा, हीरा पड़ा था,
- 57:08उसने हीरा उठाया। आके कबीर के पांव में रख दिया ये
- 57:12आप रख लो। कबीर ने कहा मैं मैं नहीं क्या कर
- 57:16रहा है मुझे इसकी कीमत नहीं पता, मैं कोई जौहरी थोड़ी है इसको
- 57:24जौहरी के पास ले के जाओ। यह है देवी देवताओं की सारी कहानी
- 57:42देवी देवता भी चेतना होते हैं, शक्ति के पुण्य होते हैं, लेकिन
- 57:47चेतना पूरी 100% स्तुति नहीं। तो ये आपकी इच्छाओं को पूरा कर
- 58:01सकते हैं। इसलिए मैंने कहा जब यह मजार
- 58:03बनेगी, मेरी खबर जो खुद रही है उसके ऊपर जब तुम आकर कोई सुख सुख
- 58:14होगे मन्नत? तो यह करोड़ों की तादाद में है।
- 58:19ऐसी रेंज को ढूंढती हैं। यह अव्यक्तित्व मन वाली होती है,
- 58:31इनको यहाँ के चैन मिलता है। देखो मुझे कितनी रूही सुनती है वो
- 58:35आपको नहीं दिखता। ऐसा मैं बार बार जब कहता हूँ आपको
- 58:41गप मालूम पड़ेगा क्योंकि जो चीज़ आपको दिखती नहीं वो होती नहीं।
- 58:46आपने मान लिया और यह सबसे गलत से गलत, जिसे मैं कहता हूँ बकवास
- 58:53फॉर्मूला है, यह कोई फॉर्मूला तो नहीं?
- 58:56इलेक्ट्रान, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन कहाँ दिखते हैं, आप कहाँ दिखते
- 59:02हैं आप बहुत सी चीजें ऐसी हैं और ज्यादातर चीजें दिखती नहीं।
- 59:09कम कम चीजें हैं जो दिखती हैं, है तो ये ऐसी।
- 59:15आत्माएं हैं जो अभी वासनाओं से ग्रस्त हैं और अभी मैं इनको
- 59:21व्यापारी कहता हूँ। यह लेन देन में इनकी मन्नत मांगो,
- 59:27इनकी मदद चुका दो लेकिन कर कौन सकता है यह मुश्किल आ जाती है।
- 59:34जैसे आज यूट्यूब के ऊपर बैठे लोग परमात्मा के बारे में बोल रहे हैं
- 59:43नकली है सभी नकली अक्का, सभी नकली।
- 59:50क्योंकि मैं उस महान योगी की बात को कैसे ना कर सकता हूँ जो कहते
- 59:54हैं कोई नहीं है। मैंने कहा श्री श्री ऐसे नहीं
- 1:00:02लगे। बाबा कहते हैं अरे सब से बकवास
- 1:00:08श्री श्री हाँ। मैं तो श्रीश्री को ये व्यापारी
- 1:00:19लोग तो फिर जैसे अध्यात्म के ये बोलने वाले।
- 1:00:28इनका कोई निहेत स्वार्थ वैसे ही ऐसे लोग पैदा हो जाएंगे सिर्फ मैं
- 1:00:35वो आएगी देवी आ गयी, देवता आ गया ये आगे से सबका कंडक्ट बाबा
- 1:00:41बागेश्वर से लेके और एक वसुंड है। वो जीन को ही निकालते रहते हैं।
- 1:00:48जीन जैसे ही है, हम भूल गए उसको तो यह पाखंड करें, जय उस सतल पर
- 1:00:57पहुंचा हुआ व्यक्ति ऐसा पाखंड करेगा, फिर होती होगी वासनाय
- 1:01:04समाप्त, इच्छाएं समाप्त। कुछ भोगनिकी टहलने की, घूमने की
- 1:01:09फिरने की, खाने की, पीने की, किसी प्रकार की कोई इच्छा शीष नहीं
- 1:01:14रहती, कुछ भी शीष नहीं रहती, बस एक में हीन सी परोपकार की इच्छाएं
- 1:01:22रहेंगी। उसको हम करुणा कह देते हैं।
- 1:01:27करुणा जरूर रहेंगी और करुणा जैसे माता को बच्चे के प्रति होती है।
- 1:01:32ममतव वात्सल्य वो रहेंगी, वह है तो वासना लेकिन रहती है संत कहता
- 1:01:40है ये दुखी क्यों है? मैं भी दुखी था।
- 1:01:44अपने आप को जब तक जाना नहीं था, तब तक दुखी था।
- 1:01:47अब इनका दुख मैं नवारण कर जाऊं बस इसे आप वासना कह सकते हो, हैं भी
- 1:01:53वासना लेकिन यह रूपकार की भावना उनमें होती है।
- 1:01:59इसलिए मैंने इतना ग्रंथ बोला, अब मैंने देख।
- 1:02:04राजनीति विकृत हो गई तो राजनीति के उन धुरंधरों पर, जो अपने आप को
- 1:02:12सर्वोच्च मानते हैं। जब मैं देखता हूँ कि ये तो फरे
- 1:02:18पड़े हैं, बस हमसे तो मैं बोलता हूँ, इनके लिए बोलता हूँ।
- 1:02:24आप में से कोई नहीं बोल सकेगा। मैं ही बोल सकूंगा।
- 1:02:28सिर्फ मैं ही बोल सकूंगा। ठीक तरह से उचित प्रकार से मैं
- 1:02:35बोल सकूंगा और मैं बोल रहा हूँ अपना दायित्व पूरा करो।
- 1:02:41अध्यात्म के दायित्व मैंने पूरा कर दिया।
- 1:02:44अब मैं अपना सांसारिक दायित्व पूरा करने जा रहा हूँ।
- 1:02:51ईश्वर की इच्छा होगी, मेरे ही उस आनंद स्वरूप की इच्छा होगी तो
- 1:02:56बुरा हो जायेगा। अगर नहीं इच्छा होगी।
- 1:03:01ज्योति द पावे सोए, पाले खान तू सदा सलामत निरंकार, मैं दर्दनों
- 1:03:10का व के बैठा? रब ना रख देता पीड़ा दा मैं
- 1:03:26दर्दनों का बा कह बैठा रब ना रख देता पीड़ा दा।
- 1:03:38की पुछ देओ? नाल फकीरांदा की पुछ देओल?
- 1:03:48फकीरांदा साडे नदियां बिछड़े निरांदा।
- 1:03:56कि कुछ देओहा फकीरा धन्यवाद सर।