Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Dec 24 - अनाहत नाद में कितने स्वर होते हैं? कैसे सहस्रार में चेतना प्रवेश करती है?
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- 0:03प्रणाम बाबा जे मैंने आपकी सभी वीडियो सुने सुनकर बहुत अच्छा
- 0:18लगा। दिल को सुकून मिला।
- 0:24मेरा एक प्रश्न है बाबा जी कृपया बताने का कष्ट करें।
- 0:33अनहद नाद में कितने स्वर होते हैं।
- 0:39और कौन कौन से होते हैं? प्रश्न तो सुन्दर है, मेरे काम
- 1:00पड़ जाएगा। अन्य दिन में कौनकौन से सर्व होते
- 1:07हैं और कितने होते हैं? किस स्कूल के अंदर?
- 1:23एक इंस्पेक्टर चला गया था। छठी कक्षा के भीतर वो प्रवेश
- 1:34किया। उसने देखा कि टीचर बच्चों को पढ़ा
- 1:38रहे थे, टीचर ने देख कर सलाम किया।
- 1:43बच्चे भी खड़े हो गए तो इंस्पेक्टर बोला, बच्चों मैं
- 1:54तुम्हें आज एक सवाल पूछुंगा अगर तुमने उस सवाल का जवाब दे दिया।
- 2:05तो मैं परीक्षा में तो मैं पास कर दूंगा और परीक्षा में बैठने भी
- 2:11नहीं दूंगा। परीक्षा से पहले ही पास कर दूंगा
- 2:20तो बच्चे कहने लगे पूछिए। अब प्रश्न सुनो कहते मैं चलाता
- 2:29सुबह बैंगलोर से यहाँ तुम्हारे पास लुधियाना में पहुँच गया, जहाज
- 2:38से चला था 1000 किलोमीटर रफ्तार थी जहाज के।
- 2:432 घंटे में पहुँच गया, बताओ बच्चों मेरी उम्र कितनी है?
- 2:55ये किसी बच्चे ने हाथ खड़ा न किया, किसी के समझे नहीं आया।
- 3:05सुबह चला बैंगलोर से चला लुधियाना पहुंचा, 2 घंटे में पहुंचा जहाज
- 3:11की रफ्तार 1000 किलोमीटर पर अवर तो बताओ मेरी उम्र कितनी है,
- 3:20किसने हाथ खिलाना किया? थोड़ी देर में छोटे बच्चों ने हाथ
- 3:25खड़ा कर लिया। उस इंस्पेक्टर की जान में जान आई,
- 3:36थोड़ी सी मुस्कराहट आई हँसी। बोले वाह बेटे मुझे पता था कोई ना
- 3:48कोई तिक्षण बुद्धि बच्चा अवश्य होता है सब क्लासेज में हाँ बेटा
- 3:58खड़े हो जाओ मुझे जवाब दो मेरी उम्र कितनी है?
- 4:08बच्चा बोला जे उम्र है तुम्हारी 44 चुमाली साल अब तो इंस्पेक्टर
- 4:23बड़ा हैरान हो गया। उसकी वाकई उम्र चुमाली सर कहते
- 4:30हैं कहता कमर हो गई शबश जब मैं तुम्हें अभी सातवीं कक्षा में
- 4:43दाखिल करता हूँ। तुम पास हो गए इतने दीक्षण बुद्धि
- 4:47के व्यक्ति ना तो किसी बच्चे को पता था इसने सवाल हल कैसे किया?
- 4:54ना ही टीचर को पता था। वह खुद हैरान था और सवाल सुनकर तो
- 4:59उसके होश जैसे काफूर हो गए थे। सभी हैरान थे लेकिन वो बच्चा खुश
- 5:11खड़ा था। हंस रहा था और इंस्पेक्टर भी खुश
- 5:17खड़ा हंस रहा था तो इंस्पेक्टर ने पूछा।
- 5:26बेटे जवाब तो आपका बिल्कुल ठीक है, तुम पास हुए ये लो, लिख के दे
- 5:34देता हूँ तुम सातवीं कक्षा में प्रवेश हो जाओ, लेकिन एक बात
- 5:42बताओ। तुम्हें पता कैसे चला गुणा भाग
- 5:51तुमने कैसे किया कि मेरी उम्र चुमाली साल है, मेरी उम्र चुमाली
- 5:56साल है, बिल्कुल बिना शक अरे तुम तो बड़े जोशी निकले हैं।
- 6:03तुमने इस सवाल को हल कैसे किया? बच्चा बोला जी बिल्कुल सिंपल मेरा
- 6:17बड़ा भाई है वह 22 वर्ष का है ठीक?
- 6:27और वह आधा पागल है। तुम चमारिस के हुए उस साल यही एक
- 6:41सीधा हिसाब है। दूसरा कोई हिसाब भी नहीं होता।
- 6:50मेरा बड़ा भाई है, आधा पागल है। उसकी उम्र है 22 वर्ष और तुम्हारी
- 7:03उम्र हुई चौंतालीस वर्ष। ऐसे सवाल हल किए जाते हैं, सवाल
- 7:13पूछा है, कोई नाम नहीं राजस्थान से हैं, बस इतना लिखा है
- 7:17इन्होंने। प्रणाम बाबा जी आपकी सभी वीडियो
- 7:22सुनी बड़ा अच्छा लगा दिल को सुकून मिला अन्हते आदमी कितने स्वर्ग
- 7:33होते हैं और कौन कौन से होते हैं? मैखाने में जाकर शराब का एनालिसिस
- 7:55नहीं करना चाहिए। इसका केमिकल फॉर्मूलेशन क्या है?
- 8:06यह बनी कैसे है, कौन सी फैक्टरी में बनी है?
- 8:16ये सब प्रश्न बेहूदा हो जाते हैं जब शराब को देख लिया जाता है और
- 8:25जब उसे गड्डक लिया जाता है। तो फिर सब कुछ व्यर्थ मालूम पड़ता
- 8:31है। अन्हदनाथ में कितने स्वर हैं?
- 8:37कितने भी हो मेरे गुरूजी के पास? एक व्यक्ति चला गया, पूछने लगा,
- 8:49महाराज जी आपने कहा चलते फिरते, उठते बैठते राम राम राम राम करते
- 8:56रहो जो हम बैठ के माला करते हैं वो तो समझ में आता है गिन लेते
- 9:02हैं। लेकिन जो हम चलते फिरते, उठते, बस
- 9:08में चढ़ते, संसार में चलते फिरते, कामधाम करते जो राम राम करते हैं,
- 9:17उनका क्या हिसाब रहता है? तुम्हारा जी बोले आपने राम रम
- 9:32करना है के हिसाब लेना है, हिसाब लेना है तो हिसाब दे देता हूँ,
- 9:43राम रम करना है तो करते रहो। अभी तुम्हारी बारी नहीं आई।
- 9:54देखिये ऐसे प्यार की जी अनंतनाथ। परमात्मा की कृपा जिसके भीतर बरस
- 10:08गई और ऐसा मधुर संगीत बजने लगा जीस मन को ठहराने के लिए तुम?
- 10:23अनेकों उपाय करते थे और मन सहसा ही ठहरने लगा।
- 10:29इसके मधुर आवाज तुम्हारे लिए एक बिंदु बनकर आया जो एक बिंदु पे
- 10:39तुम। सुनते रहोगे?
- 10:41इसकी आवाज को तो बाबा ने कहा सुनिए दुख पाप का नष्ट।
- 10:50इसको सुनने मात्र से सभी पापों का नाश होता है।
- 10:58मैंने देखा है। आजकल लोगों ने अन्नद नाक पर बड़ी
- 11:03वीडियो डालनी शुरू कर दी है और जब मैं देखता हूँ तो इसकी पहचान होती
- 11:12है। इसके नाद शुरू हुआ कि नहीं हुआ।
- 11:18देखता हूँ तो उनके खुद के नाँद अभी शुरू नहीं होता तो मुझे बड़ी
- 11:24हैरानी होती है। यह इतना प्रवचन कर रहा है और बड़े
- 11:32बड़े नाम पर लोग हैं जो प्रवचन करते हैं।
- 11:39नाम वर तो क्या खाक है? जब झूठ बोलते हैं नाद तुम्हारे
- 11:45शुरू नहीं हुआ और तुम अन्हदन के व्याख्या लोगों को कर रहे हो वरनत
- 11:51ऑथेंटिक प्रश्न प्रमाणिक नहीं हो तुम।
- 11:58बोलने से पहले अपने भीतर झांक के देखो क्या तुम्हारी नाद शुरू हो
- 12:05गयी है अगर वो नाद की मधुर झंकार तुम्हारे भीतर छिड़ गयी है?
- 12:15तो तुम अधिकृत हुए बोलने के और अगर अभी नाद ही नहीं शुरू हुआ है
- 12:23तो तुम क्या खाक बोलोगे? तुम्हारी आवाज में वो पैना बनना
- 12:28होगा, तुम्हारी आवाज में वो मिस्री ना खुलेगी।
- 12:33तुम्हारी आवाज में भीतर का वो झलक न आएगा।
- 12:44रूखी, रूखी, सूखी, सूखी। सी बातें हो गई तुम्हारी रस के
- 13:01साथ कोई लिप्तता होगी। तुम्हारे शब्दों में तुम नरजीव से
- 13:07नरजीव से बोलोगे। और उन शब्दों में कोई प्यार झलकता
- 13:12न होगा, कोई मधुरता न आती होगी। बस जैसे एक मैथमैटिकल कैलकुलेशन
- 13:22तुम फार्मूला समझा रहे हो। सबसे नीरस चीज़ मैथ होती है जो
- 13:32खोपड़ी का विषय है लेकिन लोग उसे फिर भी समझाते हैं और सबसे बेकार,
- 13:43सबसे नीरस उसमें कोई रस नहीं होता।
- 13:49बिल्कुल मैथ के फॉर्म मुझे की तरह तुम अनंतनाथ को समझाते हो जिसने
- 13:58पी लिया और एस। जिसकी चेतना उसको पीकर सहसरार में
- 14:13चली गई, प्रतिष्ठित हो गई। वह जानता है इसके स्वार्थ को।
- 14:24इसके रस को वह जानता है अभी कल ही मेरे पास रामचंद्रन गुप्ता उसका
- 14:39एक कमेंट आया बाबा। मैं एक डॉक्टर के पास ज्ञात था
- 14:45कोई ए एनडी स्पेशलिस्ट होगा तो मैंने उससे पूछा ये आनंदनाथ मेरे
- 14:55होता है? उसने कान चेक किया है।
- 15:04कहते तुम्हें कौन कहता है? अनंतनाथ तुम्हारे होता है, देखिये
- 15:16मिस्टर गुप्ता अनंतनाथ नाम की कुछ एज नहीं होते।
- 15:21डॉक्टर साहब बोल रहे हैं ईएनटी स्पेशलिस्ट और तुम्हारा अगर
- 15:30तुम्हारे अनोधनाथ चलता है तो तुम्हारे दिमाग का आधा इलाज होना
- 15:35चाहिए। तुम आधे पागल हो।
- 15:41और जो व्यक्ति कहता है कि अन्न दनाद को सुनने से सभी पापों से
- 15:48मुक्ति हो जाती है, वह पूरा पापश उसके दिमाग का पूरा विचार होने
- 15:58चाहिए। न्स का कमेंट मेरे पास है आ गया
- 16:08से मैंने लटका दिया उसे तुम्हें कोई और काम नहीं है।
- 16:17जब मैंने तुम्हें कह दिया और तुम्हें मुझे गुरु धारण कर लिया
- 16:23तो अब क्या शंका रह गई? डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता
- 16:26क्या थी? तुम बस प्रश्न ही पूछते रहते हो,
- 16:31डॉक्टरों को तुम पूछ्ताछ ही करते रहते हो, तुम मेरे पास क्यों आए?
- 16:36श्रद्धा के बिना गुरु बनाना मूर्खता से बड़ा और कुछ भी नहीं।
- 16:43बड़ी से बड़ी मूर्खता है। तब सिरदास ने लिखा है श्रद्धा,
- 16:48विश्वास, रूप मणुजा, व्यायाम बिना नापश।
- 16:56अगर श्रद्धा ही नहीं है इतनी दूर से चल के मेरे पास आए दीक्षा लेने
- 17:05क्यों झक मार ने आज कुछ होगा ही जो मैं बोल रहा हूँ?
- 17:18और ठीक कहते हैं, वो जिसके खुद के दिमाग गले सड़े होते हैं, उनके
- 17:27दिमागों से ऐसी ही बातें निकलीं कोई आश्चर्य नहीं है।
- 17:34ये बिल्कुल वैसे ही लोग हैं। मैं रोज़ कहता हूँ तुमसे।
- 17:42जे रास ते हैं प्यार के चलना ज़रा संभल के।
- 17:53ये रास्ते हैं प्यार के चलना ज़रा संभल यह लूटते हैं दिल को।
- 18:07अरमा मच्छर मच्छर के केरासते हैं। प्यार के चल न संभल संभल।
- 18:26के। अज्ञात रहे हैं कभी आये नहीं इस
- 18:39रास्ते पे पहली दफ़े चले हो कोई नक्शा साथ नहीं।
- 18:51कोई अंगिथ, कोई इशारा तुम्हारे साथ बहक जाने का बड़ा अड्डा
- 19:01ज्यादा संभावना है कि तुम बहक जाओगे क्यों अनजाने हैं अज्ञात
- 19:07हैं इससे पहले कभी आये नहीं। यहाँ लूटते हैं दिल को और ना मचल
- 19:15मचल के के रास्ते हैं प्यार के चलना ज़रा सा मिल के।
- 19:26लूटते हैं दिल को अरमान मचल मचल के।
- 19:38मचल मचल के अरमान ये मचले हुए अरमानों की बातें जो तुम करते हो।
- 19:50बिल्कुल ठीक कहा से पागल ही ऐसी बातें किया करते हैं, समझदार ऐसी
- 20:01बातें कहाँ करते हैं? एक मारवाड़ी बनिया उसका बेटा दही
- 20:12लेने गया था। बाजार से आठ आने की दही लेने गया
- 20:18था, एक साथ में कटोरी ले गया था। आठ आने की दही ली वापस आ गया।
- 20:28रास्ते में वो दही सड़क के ऊपर जो कटोरी थी उल्टी लग गई, घर पर रह
- 20:40जाते ही किसी बच्चे ने देख ली जो पड़ोसी था।
- 20:46मैं जाके उसके घर पे बोला, ताए जी तुम्हारे बेटे ने दही डोल ली है?
- 20:56सड़क के ऊपर कोली उलटी हो गई है। मार पड़ी बढ़िया तो मारवाड़ी
- 21:04बढ़िया होता है, ऐसा कैसे हो सकता है?
- 21:13मारवाड़ी की औलाद है वो कैसे कोहली को वो उलटी मार देगा?
- 21:22अरे जानके नहीं ताया वो तो इन्सिडेंट्ली ऐक्सिडेंट्ली घर गए,
- 21:30दही बिखर गई, मैं खुद देख के आया कोई बात नहीं आज जाने दो मयड़वादी
- 21:37का बेटा है ऐसे थोड़े ही गिरा देगा वो।
- 21:43बच्चा घर आया, दही थी गोली में ले बताओ, पड़ोसी का आदमी कहता था
- 21:55बच्चा कहता था इसने दही बिखरा दी। या तो दही ले के आ रहा है।
- 22:04तो पूछा उसने पड़ोसी का बेटा कहता था कि दहितु ने बिखेर सड़क पे,
- 22:14हाँ पिताजी ऐसा ही था क्या हुआ? बापू नीचे ₹1 पड़ा था और कई लोगों
- 22:28ने देख लिया था तो मैंने उचित समझा कि अपना कब्जा जमा लो।
- 22:35मैंने दही बिखेर दिया ऊपर। कटोरी ही पूठ ही मारते तो उसने
- 22:42ठीक देखा। झूठ नहीं बोलता वो तो फिर मैंने
- 22:47पिया उठाया, जाके गोली धोई और आठ ने के दही ले आया येलो आठ ने
- 22:54फालतू। इसके कल आ जाएगी।
- 23:05समझदार आदमी तो ऐसे काम करते हैं अरे हम पागलों की बात तुम क्यों
- 23:11पूछते हो? हम तो वैसे ही गए गुजरे।
- 23:20हम पागलों की बातों में जो आएगा ये भी पागल हो जाएगा।
- 23:29यहाँ तो महफिल सजी हुई है। सब आसन बिछा दिए गए है, टेबल पे
- 23:38लगा दिए गए है। और जाम फैला दिए गए हैं।
- 23:45सुरैया हैं, बैग हैं, नमकीन खाने को है, सब है जहाँ महफिल सजी हुई
- 23:53है, बस तुम्हारा इंतजार है, तुम चले आओ।
- 24:02ये कान बान के डॉक्टर ये दूर ही रहे हैं कृपा करके ये टेनीटर से
- 24:08है मेरे पास बहुत से कान के डॉक्टर आ जाते हैं बाबा जी आवाज़
- 24:16आती है दवाई तो खाली। हम तो डॉक्टर हैं लेकिन ये आवाज
- 24:22जाती नहीं, मैं कहता हूँ डॉक्टर साहब ये आवाज नहीं है ये टेनी डस
- 24:30नहीं, ये आनंदनाथ की आवाज है अच्छा?
- 24:36इसलिए दवाइयों का कोई काम नहीं असर नहीं होगा।
- 24:42हाँ हाँ अब समझाया क्या ट्रेंडिंग टस भी होता है भाइयो इससे पहले के
- 24:52तुम अनंतनाथ के सफर पे चलने लगो। पहले डॉक्टर को अच्छी तरह से
- 24:59पोस्ट पड़ताल कर लेना, फिर बस वो सोना दे बाबा डॉक्टर कहता कुछ
- 25:06नहीं और उसने दवाई भी दे दी थी, खा भी रही, कोई फर्क नहीं पड़ा।
- 25:16एक ट्रेनटस है नहीं पाई। यह वो स्वर है जिसका हमारे प्रिय
- 25:25शास्त्रों में कथन है यह किसी विरल्य को।
- 25:33किसी भाग्यशाली को प्राप्त होता है और अगर तुम्हारे डॉक्टर कहते
- 25:39हैं रामनिवास कि तुम आधे पागल हो, तो तुम कहो ठीक येस सर।
- 25:52और कहे कि जीस गुरु ने बताया, वह पूरा पागल तो उसे कहयास्कर पूरा
- 26:00पागल है उससे बहस करना क्योंकि बहस करोगे तो तुम्हारे पास दिखाने
- 26:11को है क्या? कान दिखाओगे?
- 26:15एक कान की आवाज़ तो तुम्हें सुनती है, उसे तो सुनाई नहीं पड़ती।
- 26:24उसके हिसाब से तो यह टेनेटा से है और तुम दिमागी रूप से बीमार हो।
- 26:32तुम आधे बीमार हो और जीस गुरु ने बताया वह पूरा बीमार है।
- 26:38मैंने कहा बिलकुल, हम पूरे बीमार हैं, लेकिन बात सुनो पागलपन का हम
- 26:44इलाज नहीं करेंगे, हम इसे बढ़ाएंगे और बढ़ाएंगे ज़रा सावधान
- 26:48रहना। हमारे पास बैग भी होता है और उन
- 26:53बैगों में ईंटें भी होती हैं। ध्यान रखना मैं सुनाया करता हूँ।
- 26:59मैं गदरवा से भटिंडा जा रहा था, बैग यहाँ लमकाया हुआ था, उसमें
- 27:07कागजात थे। रश बहुत।
- 27:12था। इतना रश था कि एक पैर पे खड़े हुए
- 27:17थे और यहाँ तो बैग टंगा हुआ और हमने दोनों हाथों से ऊपर के हैंडल
- 27:27पकड़ रखे। बस तेज रफ्तार से चल रही थी।
- 27:35तुम मेरे आगे एक नौजवान खड़ा वो देखता रहा मेरे।
- 27:45ये सभी उँगलियों में दो दो होते थे।
- 27:48अब थोड़ा सा कम पागल हो गया हूँ, लेकिन तब मैं ज्यादा था थोड़ा सा।
- 27:53इसमें भी इसमें भी ये ये इसमें इसमें भी इसमें भी सब में दो दो
- 27:59हुआ करते थे तो गौर गौर से देखता रहा कि ये क्या है?
- 28:06ये दो दो उँगलियाँ देखने में ठीक ठाक लगता है।
- 28:14कोई ऐसा पागलपन तो मालूम पड़ता नहीं हिम्मत करके आखिर उसने पूछ
- 28:20के लिया शोर बहुत था चलती गाड़ी? इतना इकट्ठा ऊंचे से बोला कुछ
- 28:31मुझे सुनना भी ऊँचा, सुना ही पड़ता है, कहता ये क्या है, सुन
- 28:39तो मुझे गया था। लेकिन मैं चुपचाप शांत करा ध्यान
- 28:47आस्था आदमी की तरह बुद्ध की तरह मुझसे फिर बोले 2 मिनट के बाद भाई
- 28:56ये क्या है? मैंने कहा अभी ये काम खराब हो
- 29:01गया। क्योंकि खटका ज्यादा है।
- 29:06शोर शराबा भीड़ भी बहुत है। अब मैंने एक प्रश्न का जवाब दे
- 29:12दिया कि स्क्रूज़ होते हैं, राशि के हिसाब से होते हैं।
- 29:18तो ये आखिर तक मेरी जान खायेगा और मैं किसी और बात के बारे में सोच
- 29:22रहा था। सब डिस्टर्ब हो जायेगा फिर ये
- 29:30कहेगा मेरा भी हाथ देख लो, मुझे भी बता दो ये तकलीफ है।
- 29:37अभाव है, बिमारी है तो मुझे एक तरकीब कुछ मैंने कहा देख बा सुन
- 29:49ले गौर से मैं पागल हूँ। और पूरा पागल और अमृतसर के पागल
- 30:07खाने से भाग के आया अगर तू इससे आगे बोला।
- 30:14तो मैं तेरा बोबरा फोड़ दूंगा। मेरे पास ईंट भी है, बैग के भीतर
- 30:20मेरे पास ईंट भी है और वो बैग मैंने दिखाया भरा हुआ था लेकिन ये
- 30:25कागज़ थे उसके अंदर तो वो तो सहम गया।
- 30:39ये कहाँ से पंगा पड़ गया? अब वो पीछे देखे, पीछे जाने की
- 30:44कोई जगह नहीं आगे देखे आगे कुछ खर्चा खर्च खड़े ना सो क्या करूँ
- 30:56आज? रास्ते में बलवाने से आगे उसने
- 31:02कोशिश की कि थोड़ा सा आगे टपक जाऊं।
- 31:07आगे वाला आदमी थोड़ा पीछे हो जाए उसको पता नहीं था ऐसे बात का के
- 31:13जे पागल खड़ा है। वह कोशिश करें आगे जाने की लेकिन
- 31:30आगे कोई जाने ना दे £1 पे तो खड़े हैं, क्या करे बिचारे गिर जाएंगे
- 31:39किस तरह वो? उसकी आँखों में साफ हो गया तो
- 31:44इतना फै कि जैसे बस ये मुझे मार देगा, एक पागल है इसका क्या पता
- 31:51तुझे कि तब मेरे पास ईट भी है, ईट भी है मेरे पास।
- 31:58और बैग वाटे ही लगता था। इसके अंदर ईंट है।
- 32:03जैसे ही बठंडा आया वो तो ऐसे भागा जैसे जेल से आदमी जेल ही छूट के
- 32:11भागता है। जल्दी से बाहर हो गया वो बारिश।
- 32:16कि कहीं ईंट न पटक दे, मेरा फोड़ दे तो डॉक्टर साहब को भी समझा
- 32:25लेना कि हमारे बाबा पागल भी है और आधे दूर है नहीं, पूरे पूरे पागल
- 32:32है ये बात ध्यान में रख लेना। पागल हूँ।
- 32:37मैं बिना यह महफिल सजती नहीं। इस महफिल को सजाने के लिए पागलपन
- 32:49की शराब पीनी पड़ती है, उसके बिना गुजर नहीं होता।
- 32:55उसके बिना बसर भी नहीं होता वो पीनी ही पड़ती है, इसीलिए तुम
- 33:04ज़रा संभल गए। मारवाड़ी का बच्चा तो ऐसा काम
- 33:09नहीं करेगा और जरूर ही तुम्हारे डॉक्टर कोई मारवाड़ी डॉक्टर।
- 33:15अन्यथा ऐसी बातें एक डॉक्टर मेरे पास आ गया।
- 33:23यही बात कही कि ये जो सेंसे की आवाज़ है।
- 33:31तुम जिसे नाद की आवाज कहते हो, उसे नाद की आवाज तो पता ही नहीं।
- 33:35उसे सुनाई पड़े तो पता चले ये सेंस की आवाज और होती है, नहीं तो
- 33:40गर्दन को बिचलो तो सेंस की आवाज आनी शुरू हो जाए।
- 33:44ये नाद और चीज़ होता है। ये ब्रह्म अंदर से चलता है।
- 33:51और कानों के बीच में से होता हुआ अपने अंत स्तर तक जाता है।
- 33:56यह नाक है और बड़ी मधुरा आवाज है। इतनी मीठी आवाज मिस्र जैसी मीठी
- 34:05प्राणों को भर देती है। मन को बोख लेती है, कहता है बाबा
- 34:19मैं डॉक्टर हूँ, कानों का मेरे पास लोग आते हैं और तीन इंटर्स को
- 34:27नाद बताने लग जाते हैं, सौभाग्य से मेरे पास ही आ जाओ।
- 34:33रात का वक्त गुरुशाला मंदिर के सामने खड़ा इधर नहर निकल गई थी
- 34:39छोटी मैंने कहा ठीक है डॉक्टर साहब ये ट्रेन्टर्स है, कहता हाँ
- 34:48ये ट्रेन्टर्स है मैंने कहा फिर सारे संसार को।
- 34:52सारे अस्तित्व को टिनटस हुआ है। मतलब क्योंकि सारे अस्तित्व में
- 34:58यही आवाज गूंज रही है। अभी वैज्ञानिक ने प्रयोग किया।
- 35:06वैज्ञानिक ने सूरज के पास से आवाजें कैच की।
- 35:13वैज्ञानिक ने ब्लैक होल के पास आवाजे कैच की।
- 35:21वहाँ से भी इस हुंकार की। ध्वनि प्रकट होल।
- 35:27बिल्कुल हू हू इससे मिलती जुलती आवाज़ वहाँ से भी रिकॉर्ड हुई।
- 35:34मैंने कहा डॉक्टर साहब सारे यूनिवर्स को तीन इंटरस हुआ है,
- 35:43तुम इस धोखे में मत आ। तो सवाल पूछा है भाई नाम तो रख
- 35:54दिया करो, कोई नाम नहीं वो पांच फूल छाप रखे हैं नाम की जगह अब
- 36:01क्या करूँ? मैं किस को जवाब दूँ?
- 36:06अब थोड़ी बहुत कोई कौड़ी मिट्ठी भी कहनी पड़ती है।
- 36:10अब मैं किस्से कहूँ, ये प्रश्न का पता ही नहीं कहाँ से आया है, बस
- 36:16व्हाट्सएप के ऊपर है नाम कोई नहीं अकेला नंबर है ऐसे मत किया करो
- 36:25अपना नाम पता डाला करो। नहीं, मैं ब्लॉक मार दूंगा, पता
- 36:32तो होना चाहिए ना नाक के भीतर कौन कौन से स्वर्ग होते हैं भाई पहले
- 36:48पी तो लो तुमने तो पहले ही। बातें भगाने शुरू कर दीं।
- 36:56पहले ही डिस्कशन शुरू कर दिया। पीने के बाद डिस्कशन हो जाए।
- 37:00बात अलग है, वह तो डिस्कशन नहीं होता, वह तो शास्त्रार्थ होता है
- 37:08तो तुमने देखा पहले जमाने में विद्वान लोग शास्त्रार्थ करते थे।
- 37:13हमारे शंकर जी ने शास्त्र रथ किया मर्डर मिश्र के साथ वो तो गार्गी
- 37:18बिच में फंस गई तो सब पीए पीए लोग होते थे जनक के दरबार में सब।
- 37:30सुबह से शाम तक ब्रह्म चर्चा करते थे।
- 37:34पीने के बाद तो पता ही नहीं चलता कितना ही बोले जाओ कितनी ही चर्चा
- 37:40किए जाओ, यही मजेदार बात है। पीने के बाद पता ही नहीं लगता।
- 37:48उसकी कितनी सलाहगा रही, उसकी कृपा का कितना व्याख्यान हुआ, उसके
- 37:58आनंद का कितना अहो, भाव से भरा हुआ अनुग्रह हुआ पता नहीं लगता।
- 38:06इसे ही शास्त्रार्थ कहते थे। वो जिसने पीली है, जिन दोनों ने
- 38:14पीली है वो आपस में बैठ के ब्रह्म चर्चा करें।
- 38:19शास्त्रार्थ उसे ही कहते थे। अभी तो तुमने पी ही नहीं है और
- 38:33अभी से शुरू कर दिया तुमने काम कितने स्वर होते हैं इसमें और कौन
- 38:39कौन से होते हैं लगता है। लगता है कि अन्नतनाद तुम शब्दों
- 38:50के धनी हो, तुम्हारे भीतर जागृत नहीं हुआ है, ये पागलपन तुम्हारे
- 38:58भीतर उतरा नहीं, ऐसा लगता है अन्यथा जिसने पीली होती है।
- 39:07वो ऐसे प्रश्न काहे करेगा? भी कर तो उसकी मस्ती का आनंद लेना
- 39:15होता है। कोई बातें थोड़ा भगाना होता है,
- 39:18कोई प्रश्न थोड़े ही पूछना होता है।
- 39:23लगता है अन्तनाद तुम्हें शुरू हुआ नहीं, अन्यथा तुम ऐसे प्रश्न
- 39:30पूछते हैं बहुत से लोग हैं, जो बोलते हैं अन्तनाद के बारे में,
- 39:36लेकिन सिर्फ व्यूस इकट्ठे करने के लिए अन्तनाद उन्हें शुरू नहीं
- 39:41हुआ। आई कैन से विथफुल गारंट क्योंकि
- 39:46अन्नदन के व्यक्ति की आभाही कुछ और होती है वह जब सहस्राल में
- 39:55जाएगी खिलती हुई ध्वनि, कमल की पंखड़ियां फरफराएंगी।
- 40:05देखने वाला देख लेता। इसके भीतर अन्नदन शुरू हो गया है।
- 40:11हर चीज़ के लक्षण होते हैं। कृष्ण ने भी कहा है ज्ञानी के
- 40:17लक्षण होते हैं हम अनितम दंभितम हिंसा शांति राजम आचार्य उपासना
- 40:24शोचम सैरम सा सैरम आत्मा बन रहा इन लक्षणों को देख कर ही ज्ञानी
- 40:32से बात करना तुम्हारे भीतर लक्षण मुझे दिखे।
- 40:40मैंने ऐसा शराब भी नहीं देखा। आज तक जिसने शराब पी के ये पूछा
- 40:47हो कि ये कौन सी फैक्टरी की बनी हुई है और इसके भीतर कंटेंट क्या
- 40:53है? क्या क्या सेंस डाला गया है इसके
- 40:58भीतर? कैसे ये बनाई गई?
- 41:02मैंने कभी पूछता नहीं देखा कोई शराबी बस गटकते देखा है और पीने
- 41:08के बाद दूसरे पैग की तैयारी करता देखा है ऐसा लगता है।
- 41:19जैसे तुम्हारे अभी अनंतनाथ शुरू नहीं हुआ, तुम बातों ही बातों की
- 41:25खाल निकाल रहे हो। यह बाल की खाल निकालने वाला मसला
- 41:31नहीं है। तुम तो परमात्मा तक की खाल
- 41:34निकालना शुरू कर देते हो। राधे राधे राम ये खाल निकालने
- 41:42जैसा है, इसमें कुछ मिलेगा थोड़ी लेकिन बस खाल निकालो बाद में,
- 41:49लेकिन बाद में खाल होती ही नहीं। ऐसे प्रश्न मेरे काम का है।
- 42:01मैंने पहले भी कहा। मैं बताना चाहता था कि तुम जैसा
- 42:07कोई व्यक्ति पूछे और मैं चर्चा कर रहा हूँ अभी शुरू नहीं हुआ अभी
- 42:16प्रश्न पूछना तुम्हारा तुम्हारे अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
- 42:21तुम्हारा कर्तव्य भी नहीं बनता क्यों?
- 42:24क्योंकि अभी तुम्हारा शुरू नहीं शुरू हो जाएगा।
- 42:29फिर तुम पूछने का अधिकार रखते हो, शुरू हो जाने दो, फिर मैं बता
- 42:34दूंगा कितने स्वर होते हैं और कौन कौन से होते हैं?
- 42:38बस उसमें एक ही स्वर होता है। दूसरा कोई स्वर नहीं होता और वो
- 42:44ओंकार से मिलता जुलता है। भीतर से ओंकार की ध्वनि उठती है,
- 42:52अलग अलग रूपों में बढ़ जाती है। किसी को कुछ किसी को, कुछ कभी कुछ
- 42:58कभी कुछ सुनाई पड़ती है। ध्वनि एक ही होती है।
- 43:04वह ओंकार नाभी केंद्र से उठा हुआ मुद्राधार की कुटणनी में से उठा
- 43:12हुआ वह ओंकार का नाद जिसे वुर्ख लोग।
- 43:23ये इंकार? वो।
- 43:26ऐसे कह के भी ये बी के वाले करते हैं।
- 43:30ये नकल है ऐसे नकलची बंदर बनना अच्छा नहीं होता, तुम वहाँ जाने
- 43:38का अभ्यास करो। जहाँ से ये उन्कार की ध्वनि
- 43:43उत्पन्न हो रही है जो मूल केंद्र स्रोत है, इसके उन्कार की नाद का
- 43:52उन्कार का जाप नहीं करना है। उन्कार का नाद मुँह से नहीं करना
- 43:57है। यह तो पारलपन के निशानी है, यह तो
- 44:02उस असली ओंकार को चिढ़ाने जैसी बात है।
- 44:07कुत्तों की तरह मुँह पर उठा लिया जैसे रात को रोते हैं।
- 44:10कुत्ते आसमान की तरफ करते थे। ऐसे थोड़ी भगवान का नाम लिया जाता
- 44:17है। तुम उसके भीतर उतरो गहरे उतरो,
- 44:24गहरे उतरो, उतरते ही चले जाओ, और कोई वेला आएगा, जब तुम उस नाद के।
- 44:37राग के पास पहुँच जाओगे, बाजे नाद अनेक अशखा केते 52 हारे केते राग
- 44:48परिसों के केते गावण हारे बोले शाह कहते हैं कि जब मेरा मत्स्य
- 44:56से जी। डर गया मस्जिद कोलों जोड़ा डरया
- 45:03क्या ठाकुर दे डेरे बड़या जिथे वज दे नाद 1000 इश्क की नमीओ नमी
- 45:11बहार बहुत से ऋषियों ने इसकी महिमा को गाया है।
- 45:18लेकिन सुन के गाया है जैसे शराब को शराबी पीकर कहते आह क्या मज़ा
- 45:28है क्या आनंद है क्या सरूर है तुम तो बिना पिए ही आहा हाँ करते हो।
- 45:36ये तो नकल है। म।
- 45:42ऐसे भ्रांतिया मत फैलाव, पतंजलि ने कहा है सच्चे बनो, महावीर ने
- 45:50भी कहा सच्चे बनो, बाबा नानक ने भी कहा है आध सच्च जुकांत सच।
- 45:57बुधने बिका सत्य बनो, सत्य बनना सीखो, नाद का उच्चारण मत करो, वह
- 46:11उच्चारण करने योग्य नहीं है, उसको सुनो सुनिए सुनिए।
- 46:19और सुनने से क्या होगा? तुम्हारे सारे पापों का जो परिणाम
- 46:25दुख उससे तुम मुक्त हो जाओ, दुख से मुक्त होना तुम्हारी भीतरी
- 46:34इच्छा भी है। और इस नाद को श्रवण करके तुम दुख
- 46:39से मुक्त हो भी जाओ, यही बाबा कहते हैं।
- 46:44सुनिए दुःख, पाप का नाश, ऐसी बातें जो उलझने वाली हैं।
- 46:58मुझे लगता है तुम खुद ही उलझ गए हो।
- 47:02प्रश्न होते हैं उलझन को सुलझाने के लिए लेकिन तुम्हारे प्रश्न ही
- 47:08उलझन बने हुए हैं। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कोई नाम
- 47:13नहीं लिखा कहाँ से हो? कोई व्याख्यान नहीं बस राजस्थान
- 47:22लिखा है। अकेला इससे कुछ भी नहीं होता।
- 47:28ऐसे प्रश्न पूछना वक्त को खराब करना है, लेकिन ध्यान रखना मैंने
- 47:34पहले भी कहा था। मेरे काम आ गया।
- 47:36ये प्रश्न मैंने इसलिए उठा लिया क्योंकि मैं इसके बारे में बोलना
- 47:41चाहता था। कोई इसमें स्वर नहीं होता, अलग
- 47:52अलग होते हैं। सुनाई।
- 47:58आवाज़ एक ही आती है, एक ही बिंदु से आती है, एक ही कुण्डनी से आती
- 48:04है, मूलधार से आती है। वह ऊपर आकर प्रत्येक व्यक्ति को
- 48:10अपने ढंग से सुनाई पड़ती है। स्वर उसमें कोई भी नहीं होता।
- 48:18स्वर सिर्फ ओंकार का होता है। ओह ये स्वर होता है।
- 48:31दूसरा प्रश्न है केशव दास सहारनपुर से।
- 48:40बाबा जिसे आप जंकचर प्वाइंट कहते है मिलन बिंदु उसको थोड़ा सा खोल
- 48:48के समझाने का कष्ट करें। प्रश्न बहुत बड़ा है और वक्त हो
- 48:54चला है। हम इस वीडियो को यहीं समाप्त कर
- 48:57दें। अभी 50 मिनट के लिए हुई है और
- 49:02वक़्त न इधर बचा है और न उधर बचा है।
- 49:07स्टॉप करने ही बनती है। थोड़ा सा वजन गा लें और फिर हम
- 49:13वीडियो को समाप्ति की ओर ले जाएंगे।
- 49:19ये अँधेरा घना छ रहा तेरा इंसान घबरा रहा।
- 49:34यह अँधेरा घना चाह रहा। तेरा इंसान।
- 49:43घबरा रहा हो रहा बेखबर, कुछ न आ। ता नजर सुख का सूरज छिपा जा रहा
- 50:03है तेरी। रौशनी में जो दम।
- 50:11तो अमावस को कर दे, पूनम ने की, पर चलें और बड़ी सेटलें।
- 50:25ताकि। हँसते हुए।
- 50:29निकले दम है मालिक तेरे बंदे हम ऐसे हों हमारे करम।
- 50:47ने के परिचालें और। बदी से टालें ताकि।
- 50:54हँसते हुए निकले दम ए मालिक तेरे बंदे हम।