Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 May 26 - सिर्फ गाय का दूध पीने से मिल सकता है मोक्ष? गाय के दूध में 33 करोड़ देवी-देवता का सच?
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- 0:11प्रसेण जीत बाबजी चरनस्पंश। बाबा जी गाय का दूध से क्यों भैस
- 0:37का दूध क्यों? गाय का दूध दो कारण एक गाय में।
- 1:01कुछ ऐसी आसानी तरंगे निकलती रहती है चौबीसों घंटे इसलिए एक
- 1:15सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन के लिए। हमने कहा कि सारे 33,00,00,000
- 1:21देवी देवताओं गाय में निवास करते हैं।
- 1:28ऋषियों को समझाने का अद्भुत फॉर्मूला था उन्होंने चीजों को
- 1:36भाषाओं में। नहीं रखा क्योंकि वो जानते थे एक
- 1:42भाषाएं एक्सटिंक्ट होती रहती हैं, लुप्त होती रहती हैं।
- 1:48आज कहाँ है मोहनजोदड़ो हड़प्पा शिलालेख बहुत से पढ़े नहीं जाते।
- 1:57इसलिए उन्होंने सिम्बोलिक अब्रीविएशन रख दिए और हमने उन्हीं
- 2:06को पकड़ लिया। उनके गहरे अर्थों में हम जा नहीं
- 2:11सके और हमने उन्हीं को ही व्यख्यायित करना शुरू कर दिया।
- 2:19आज के मार्गदर्शकों की यही कहानी कार्तवीर्य अर्जुन नाम का एक बहुत
- 2:31बड़ा राजा था। वह परशुराम के पिता जमदग्नि के
- 2:38आश्रम में से कामधेनु गाय चुराकर ले गए।
- 2:49जमदग्नि ने उसे रोकना चाहा, लेकिन वह बहुत बलि था।
- 2:57जमदग्नि के पांच पुत्र थे। कहानी को आराम से सुनिएगा ताकि
- 3:03आपको थीम समझा जाए। परशुराम बड़े साहसी थे।
- 3:15परशुराम का नाम था राम तो लोट शिवा ने प्रसन्न होकर उन्हें एक
- 3:23कुहारी दी थी जिसे परसा कहते थे। उस कुहारी के नाम पर वह राम से
- 3:32परशुराम हो गए। वह परशुराम ऐसा शस्त्र था परसा कि
- 3:43वह एक ही बार में अनेकों योद्धाओं का अंत कर सकता था।
- 3:52परशुराम उस शस्त्र को पाकर बड़े शक्ति शादी हो गए तो कार्तवीर्य
- 4:01अर्जुन नाम का एक राजा जमदग्नि के आश्रम में कांधेनू गाय।
- 4:11बल पूर्व के सीन्न के ले गया। जमदग्नि ने अपने पुत्रों से कहा
- 4:21परशुराम क्रोध क्रोध वाले थे, परशुराम ने उस राजा को मार दिया,
- 4:28कार्त वीर अर्जुन। और जब परशुराम ने कार्तवीर्य
- 4:36अर्जुन नाम के राजा को मार दिया तो उसके पुत्रों ने परशुराम के
- 4:43पिता जमलग्नि को मार दिया। यहीं से कहानी चली।
- 4:50के परशुराम को क्रोध आया, लॉर्ड शिवा का उसके पास परसा था।
- 5:00वह ऐसा काम करता था जैसे कृष्ण का चक्र, सुदर्शन चक्र।
- 5:10तो उसने राजाओं के राजा के सभी पुत्र मार दिए, लेकिन फिर भी कोई
- 5:19न कोई बच जाता। कहानी है कि 21 बार।
- 5:27परशुराम ने क्षत्रिय का वध किया, कहानी है इसका मतलब सिर्फ ये
- 5:36बताता है कि वह जो फरसा था, उसके पास वह बड़ा शक्तिशाली शस्त्र।
- 5:45अब ये काम धेनु गाय क्या होती है? काम धेनु गाय।
- 5:59जब मैंने कहा, 10,00,00,000 लोगों को सिर्फ गाय पालन का काम होगा।
- 6:08गायों में कुछ नस्लें होती हैं उन नस्लों में।
- 6:18कुछ नस्लें ऐसी हैं जो मैं आपको गणवाद हूँ, जिनके शरीर से आसनिक
- 6:27रंगें 2400 घंटे निकलते हैं। इसलिए हम गायों को बिलकुल दरवाजे
- 6:38के पास। उसकी खुरली बनाकर वहीं उसको बैठा
- 6:43देते थे। कारण जैसे मेरे पास लोग आते हैं,
- 6:51कितनी कितनी दूर से आते हैं मुझे पता है।
- 6:56रस्ते में लाशानी तिरंगे बिखरी पड़ी है सब जगह हर व्यक्ति
- 7:02समस्याओं से जूझ रहा है, दुखी है, वासनाओं से ग्रस्त है, इच्छाओं से
- 7:12ग्रस्त है, इच्छाएं कभी बढ़ती नहीं।
- 7:17तो वह व्यक्ति जो मेरे आश्रम में आया है, वह उन सब लासानी रंगों को
- 7:23अपने साथ लेके आया है तो मैं उस व्यक्ति को सीधे सीधेने में था।
- 7:37उसको 45 मिनट तक इंतजार करवा दो क्योंकि इतने में उसकी सारी
- 7:42लासानी रंगें और यहाँ के आश्रम की आसानी रंगें न्यूट्रलाइज़ कर देती
- 7:48हैं उन रंगों को। फिर उस व्यक्ति को मैं बुलाता
- 7:53हूँ। यह है मेरा विज्ञान क्योंकि उसकी
- 8:01लासानी तरंगें अगर इस स्थान को दूषित कर दें।
- 8:09तो यहाँ आने वाले दीक्षा लेने वाले व्यक्ति उस आनंद को मान न
- 8:15पाएंगे जो अभी तक मान रहे हैं। कामधेनु गाय के शरीर से रोम रोम
- 8:26से आसानी तरंगें बहती हैं। जो भी 100 घंटे।
- 8:35तुमने आसानी रंगों को न चखा हो तो एक बार मेरे आश्रम में आकर उन
- 8:44आसानी रंगों का स्वाद चखो कैसी होती है तो आप?
- 8:53एक दम से शांत हो जाओगे आपका भटकता हुआ मन ठहर जाए आपका थका
- 9:05हारा मादा। ज़िन्दगी से हारा हुआ दुःखित मन
- 9:18एकदम से यहाँ शीतलता को प्राप्त होता है।
- 9:21एक बार यह सब आसानी रंगों से लथ पथ वातावरण।
- 9:31इसलिए पुराने बुजुर्गों को पता हो या ना पता हो लेकिन ऋषि समझा के
- 9:40गए थे अपने वंशजों को अपनी नस्लों को, अपनी फसलों को।
- 9:49कि तुम्हारे दरवाजे पर एक गाय होनी चाहिए।
- 9:57अब गाय कौन सी होनी चाहिए? मैं आपको तीन नस्लियां बताता हूँ।
- 10:06सबसे पहली नस्ल है राठी राठी गाय हमारे पंजाब में होती है और भी कई
- 10:15जगह पर होती है। हरियाणा में भी होती है एक नस्ल
- 10:20है गिर गिर। ये होती है गुजरात में थार पार्कर
- 10:30रेड संधि, गाय और सहनीवाल इन गायों में से यह देसी नस्लें होती
- 10:41हैं। ध्यान रखना जो विदेशी गायें हैं
- 10:51उनकी नस्ल बदल गई। जैसे पूर्व और पश्चिम का आतिमी की
- 10:57शक्ल, वैसे ही वही नाक, वही कान, भीतर का सिस्टम, सारा भाई।
- 11:03लेकिन बदला गया रेंज बदल गया। पूर्व का व्यक्ति अपने भीतर उतरा
- 11:10अध्यात्म की खोज की है। पश्चिम का व्यक्ति बाहर गया और
- 11:15उसने विज्ञान की खोज की लेकिन वह अये आसीम में उलझ गया।
- 11:20पूर्व का व्यक्ति। अपने भीतर जाकर ब्रह्मचर्य को
- 11:24उपलब्ध हुआ। पश्चिम का व्यक्ति ने संसार का
- 11:31आनंद माना, लेकिन मैं तुमसे ये बात कहूंगा के पश्चिम के व्यक्ति
- 11:39को। संसार के सुख लेने के उपरांत
- 11:43तृप्ति नहीं होंगे और 1 दिन उसे पूर्व की शरण में आना होगा।
- 11:51कितना ही भाग लो तुम पूर्व से पक्षियों की तरफ अंततः पदार्थ सुख
- 11:59नहीं देते। जिसकी तुम्हें जरूरत है, जिसकी
- 12:04तुम्हारी अंतरात्मा प्यासी है, डिमांड कर रही है तो मजबूर होकर
- 12:10तुम पश्चिम से पूर्व की तरफ आओगे। ये मैंने पांच ही नस्लें आपको
- 12:19गिनाईं। जो ऋषि लोग थे वो कहते थे कि आप
- 12:27गाय को आपके दरवाजे में बांध लेना जब कोई व्यक्ति वहाँ से गुजरेगा।
- 12:35गाय क्षण भर में उसकी सारी लाशवानी रंगों को पैरालल कर
- 12:39देंगे। यही कारण था गाय को हम बिल्कुल
- 12:49पहले पहले स्थान पे बिठाया करते थे।
- 12:55उसके कहीं बाद भीतर जाकर उस घर का मालिक बैठा मिलता था, आराम करता
- 13:03था, बातचीत करता था। यह जो कान धेनु गाय है।
- 13:14यह वास्तव में राठी गाय, साहिवाल गिर थर परकर इन गायों से मिलती
- 13:30जुलती थी। लेकिन इनकी नस्लों के प्रतिरूप आज
- 13:40बचे हैं। आपको शायद पता न हो आप कहते हो
- 13:51जड़, जोरू, जमीन। इनके लिए युद्ध हुए हैं तुम्हें
- 13:54पता नहीं असल में इतिहास को गहरी खंगालने वाले लोग पाएंगे के बड़े
- 14:06युद्ध गाय के कारण होए, चौंकना मत।
- 14:15द्रोणाचार्य और धृपद एक ही आश्रम में पढ़ते थे, गुरुकुल में बच्चे
- 14:25थे, मित्रता अच्छी हो गई। ध्रुपद का पिता राजा था तो ध्रुपद
- 14:38ने कहा द्रोण से कि जब मैं बड़ा हो जाऊंगा, पढ़ लिख के जाऊंगा।
- 14:47घर पर तो मैं राजा बन जाऊंगा और मित्र मैं तुम्हें अपना आधा राज्य
- 14:56दे दूंगा। इतनी गहन मित्रता हो गई प्रगाढ़
- 15:00जैसे कृष्ण सुदामा की। अक्सर बचपन के मित्र क्रॉसमेट
- 15:07जिन्हें हम कहते हैं वो बचपन की दोस्ती बड़ी गहरी होती है क्योंकि
- 15:19मासूम बातें, छल विहीन बातें। इनोसेंट बातें इनोसेंट चेहरे,
- 15:28इनोसेंट मन, छल, कपट विहीन मन, गहरी दोस्ती को जन्म देते हैं।
- 15:39ध्रुपद और द्रोण द्रोण भारद्वाज भारद्वाज ऋषि के पुत्र थे।
- 15:48द्रोण भी वहीं पढ़ते थे। द्रोपद भी वहीं पढ़ते थे अपनी
- 15:58पढ़ाई समाप्ति करने के बाद। द्रोण अपने घर आ गए।
- 16:04ध्रुपद अपने घर चले गए। ध्रुपद को उसके पिता परिषत पांचाल
- 16:13देश के राजा थे। परिषत उसके पुत्र थे ध्रुपद।
- 16:20तो परिषत में जब यह बच्चा 25 वर्ष का होकर बच्चा घर लौटता था, यह
- 16:27पहला आश्रम था जिसे हम ब्रह्मचर्य आश्रम कहते थे तो 25 वर्ष का
- 16:33बच्चा राज़ काज को संभालने में योग्य हो जाता है।
- 16:39तो वृषत वृषत इंतजार में था कि मेरा बच्चा गुरुकुल से लौटे और
- 16:49मैं उसका राय तिलक कर दूँ और ऐसा ही हुआ भी ध्रुपद राजा बन गया।
- 17:00ध्रुपद और द्रोण में बचपन की मित्रता और भोली फ़िल्म मासूमियत
- 17:09में एक वायदा किया गया के मित्र जब मैं राजा बन जाऊंगा।
- 17:17पांचाल देश का तो मुझे पता है तुम गरीब हो, ब्राह्मण हो।
- 17:28ब्राह्मण अक्सर गरीब भी हुआ करते थे, बात को समझना अमीरी कहाँ से
- 17:35आई? अमीरी आई जब ब्राह्मणों ने
- 17:40क्षत्रिय के साथ संधि कर ली। क्षत्रिय ने कहा कि तुम हमारे लिए
- 17:50ज्ञान का प्रचार करो, हम तुम्हें धन देंगे।
- 17:57हमारे पास बल है ज्ञान में तुम्हारे पास ज्ञान है, धन नहीं
- 18:04है तो क्यों न ऐसा हो कि आप अपने ज्ञान को हमारे लिए प्रो।
- 18:11हम अपने धन को तुम्हें बांट लेंगे।
- 18:15यह वहाँ से राजनीति चली। ब्राह्मण और क्षत्रिय ब्राह्मणों
- 18:24ने क्षत्रिय का गुण गान करना शुरू कर दिया और क्षत्रिय के पास सुबल
- 18:32था। वैभव था, लूट कसूट की बाहुबली थी
- 18:41कतल हत्या करते वक्त गुरेज नहीं करते थे तो उन्होंने खूब लूटा और
- 18:46लूटकर आधा ब्राह्मण को दे दिया। बाहों से ब्राह्मण अमीर होना शुरू
- 18:51हो गया। ब्राह्मण को खून मुँह लग गया और
- 19:02जब खून मुँह को लग जाता है छूटती नहीं है का फिर मुँह को लगी हुई
- 19:12यह क्यों नहीं राजा लोक गतियों को छोड़ते?
- 19:18क्योंकि हुकुम करने में भी एक अजीब सा स्वाद आता है।
- 19:23वो स्वाद है तृपती नहीं है। उसमें तो ये हाकुम बने ही रहना
- 19:30चाहते है अगर मौत न होती। तो आज तुम पाते कि शायद तुम्हारे
- 19:39तख्तों ताज पर आज भी धृतराष्ट्र बैठे हैं तो धृतराष्ट्र ही
- 19:46क्योंकि चाहे आँखें हैं, लेकिन बुद्धि से अंधे अंधे तो हैं।
- 19:54और बुद्धि का अंधा आँखों के अंधे से ज्यादा खतरनाक होता है।
- 20:05तो जब द्रोण घर आए भारद्वाज के पुत्र थे तो बड़ी गरीबी थी।
- 20:14कार्रवाई। उसकी शादी हुई।
- 20:19उसके पुत्र व अश्वत्था में इतने गरीब थे कि घर में दूध नहीं था
- 20:30दूध के बिना। हमारे ऋषियों ने हमें समझाया कि
- 20:37सब चीज़ के बिना चल जाएगा। दूध के बिना नहीं चलेगा दूध इस
- 20:43कंप्लीट फूड और कंप्लीट फूड के अतिरिक्त दूध में आसानी तिरंगे
- 20:52लबालब भरे होते हैं। पर जिन्हें तुम देख नहीं सकते कोई
- 20:56लैब उसकी जांच नहीं कर सकती। अब थोड़ा यहाँ समझा दूँ तुम्हें
- 21:03बीच में से दूध में प्रोटीन होता है लेकिन ध्यान रखना दूध में भी
- 21:12दो तरह के प्रोटीन होते हैं। ए वन ए टू तुम सदा ही ए टू
- 21:21प्रोटीन को पीना कैसे पता चलेगा? यह लैब टेस्ट हो जाएगा, पता चलेगा
- 21:27और आंतौर से देसी गायों में यह होता है।
- 21:33राठी साहिवाल थार वर्कर गर इन गायों में तुम्हें ए टू अच्छी तरह
- 21:47से समझ लो ए टू प्रोटीन। दूध पीना ये टू प्रोटीन तो मुझे
- 21:58इनकी नस्लों का बहुत पता है और जो गाय ईटी प्रोटीन देगी उसके शरीर
- 22:08से बहुत। वृहद मात्रा में आसानी रंगों का
- 22:16निकास होगा। इसलिए हमने गाय बना दी, उसके ऊपर
- 22:22हमने चित्र खींच दिए। ब्रह्मा बैठे हैं, विष्णु बैठे
- 22:26हैं, शिव बैठे हैं। 33,00,00,000 देवी देवता बैठे यह
- 22:32मात्र एक असेम्बल था, अब्रीवेशन था, हमने उनकी पूजा करनी शुरू कर
- 22:39दी। ऋषि ने ये नहीं कहा था, हमारे ऋषि
- 22:45वैज्ञानिक थे, साइंटिस्ट थे। उनका नाम ऋषि था।
- 22:53भैस के दूध में भी प्रोटीन होता है।
- 22:57ध्यान से सुनना एक बेसिक बात को बेटा कैसिन नामक प्रोटीन होता है।
- 23:03बेटा कैसिन यह अंडे में नहीं होता बेटा कैसिन।
- 23:09यह दूध में होता है, अंडे में प्रोटीन होता है, है लेवल और बड़ा
- 23:20पोषक और बहुत ज्यादा एक अंडे में। छः ग्राम प्रोटीन होता है और 100
- 23:32ग्राम पनीर में 18 ग्राम प्रोटीन होता है।
- 23:37तीन अंडों के बराबर 100 ग्राम प्रोटीन, 100 ग्राम पनीर।
- 23:46लेकिन तुलनात्मक अध्ययन कर रहा हूँ।
- 23:48मैं गाय के सरिय में से जो आसानी तिरंगे निकलती है।
- 24:05वो भैस के शरीर से नहीं निकलते हैं।
- 24:09अब बात को ध्यान से समझ लेना उसे कामधेनु क्यों कहते हैं?
- 24:19क्योंकि वह आपके सभी प्रकार के मनोवांछित इच्छाएं को पूरी कर
- 24:24देता है? जो घिर या राठी या साहिवाल में
- 24:33थार पककर इन गायों का दूध पिएगा। अगर आप सारी उम्र में।
- 24:44उस तल तक नहीं पहुँच सकते जहाँ सुगंध की खुशबू की खुशबू है, आनंद
- 24:52ही आनंद है जहाँ तुम्हें जाकर भेद का पता चल जाता है।
- 25:03मैं वास्तव में कौन हूँ और मैं वास्तव में अपने आप को समझ क्या
- 25:08रहा था वह भ्रांत धारणा ही टूट जाती है तो अगर आप गाय का दूध
- 25:16सेवन कर रहे हो। तो ध्यान रखना 15 वर्ष से ज्यादा
- 25:22नहीं लगेगा आपको कुछ भी ना करो 15 वर्ष सिर्फ आराम से बैठो गाय का
- 25:36दूध। कोई जप, तप, माला, पाठ, पूजा,
- 25:44अनुष्ठान, आरती कुछ करने की आवश्यकता नहीं, अपने दिनचर्या के
- 25:51काम करो लेकिन पुण्य करो। आप किसी से मिलो या ना मिलो।
- 26:02लेकिन याद रखना अपने कर्मों से तुम्हारा अवश्य मेल होता है।
- 26:071 दिन किए हुए कर्म तुमसे फिर मिलेंगे आकार प्रति कर्म के रूप
- 26:15में तो पहला आज का संदेश। नफरत फैलाओगे नफरत मिलेंगे और
- 26:33मज़े की बात यह है तुम नफरत चाहते।
- 26:40तुम्हारे चाहने से कुछ होता है, तुम्हारे करने से कुछ होता है अगर
- 26:50तुम चाहते हो तुम्हें प्रेम मिले यूनिवर्स से इस साल सृष्टि से
- 26:58तुम्हारे ऊपर प्रेम बरसे। तो प्रेम बांटो, करुणा बांटो मुझे
- 27:07किसी ने पूछ लिया कि इस धरती पर आज तलक आप महा करूणावान व्यक्ति
- 27:15किसको मानते हो? मैंने कहा मैं मानता नहीं हूँ ना
- 27:21मैं माना करता हूँ, मैं जानता हूँ इस धरती पर आज तक के सबसे ज्यादा
- 27:30करुणावान व्यक्ति दो ही थे पहले कृष्ण और दूसरे बुद्ध।
- 27:43बुद्ध कलयुग में और ज्वापुर में रश तेरे तो में राम भी हुए, वो भी
- 27:56करणो मानते। लेकिन अगर किन्हीं दो को चुनना हो
- 28:03तो मैं कृष्ण और बुद्धू को चुनूंगा और अगर दोनों में से एक
- 28:08को चुनना हो तो मैं कृष्ण को चुनूंगा तो दूध में ए 1 एयठ।
- 28:25बेटा कैसिन में पाया जाता है। मैं आपको जड़ बताऊँ कि बेटा कैसिन
- 28:34में वो रेंज होती है जीसको हम आसन करते हैं और लबा लबा बड़ा होता
- 28:43है। बेटा कैसे?
- 28:47क्या भैस के दूध में भी होता है अंडे में नहीं होता?
- 28:52अंडे में बहुत हाई फाई लेवल का ब्रोकन सा होता है लेकिन वह भी
- 29:01जरूरत है क्योंकि आपको। दिन में काम धाम भी करना होता है
- 29:07तो बैलेंस डाइट के लिए सुबह के नाश्ते में आप 2003 अंडा सुमार कर
- 29:13लो, आपको 1820 ग्राम प्रोटीन मिल जाएगा तो करीब 48 ग्राम।
- 29:2160 किलो के आदमी को 48 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता पड़ती आधा
- 29:26इसने पूरा कर दिया एक तीन अंडे ने बाकी रात के वक्त आप उतरे एक
- 29:39ग्लास, डेढ़ ग्लास दूध अगर आप पियोगे।
- 29:43तो आपको करीब उतना ही प्रोटीन में जाएगा।
- 29:49यह आपकी प्रोटीन की जरूरत को पूरा करेगा और दूसरा आपका आध्यात्मिक
- 29:58लक्ष्य भी पूरा करेगा। मसर्रत को भी ताक देगा टिशूज को
- 30:03बलवान बनाएगा ताकि आप अपना काम धाम करने में समर्थ रहो अब ये जिम
- 30:12में जाने वाले लोग जिम जो अंडा नहीं खाते वो बहुत बड़ी गलती करते
- 30:18हैं। क्योंकि अंडा बड़ा पोषक है, उनके
- 30:23लिए आवश्यक भी है। तो सुबह नाश्ते में डालो।
- 30:33रात को सोने से पहले दूध का सेवन करो।
- 30:38जितना आप भी सको उतना पी लो। मैं तीन किलो दूध पी जाया करता
- 30:44था, 2 घंटे तक 2000 क्रय योग करता था, सात किलोमीटर की रेस लगाता
- 30:54था, दंड बैठ के भी लगाता था, थोड़ा सा वेट लिफ्टिंग भी कर लेता
- 30:59था। तीन किलो दूध, आधा किलो मलाई यह
- 31:13है मेरा भोजन था क्योंकि घर में दूध, घी की कोई कमी नहीं थी।
- 31:18दूध, दही, घी, लस्सी, प्रोटीन सब कुछ था।
- 31:26तो पैसे की चाहें तंगी रही हो, लेकिन मुख्य चीज़ आहार की कमी
- 31:32नहीं रही। हमें तो रोटी भी मिलती थी तो घी
- 31:39का एक भरा होता था टोपिया। और माता उस रोटी को टोपी के भीतर
- 31:44दबो देती वो गच्च हो जाती जैसी जलेबी गच्च हो जाती है चासनी के
- 31:50अंदर मैट वह हमें दिया जाता कि खाओ ऐसे हमारी परवश हुए।
- 32:01तो कहावत है कि पूत के पांव पालने में पहचान लिए जाते हैं, लेकिन
- 32:07ध्यान रखना पूत के पांव पालने में पहचान लिए जाते हैं, लेकिन पूत को
- 32:14पालने में से ही शुद्ध आहार देना शुरू कीजिए।
- 32:21आपका बच्चा जब 2 साल से 2.25 ढ़ाई साल का हो जाए तो उसको माखन में
- 32:27सर खिलाओ। मैंने बहुत बार कहा था दूध पिलाओ,
- 32:35बच्चा स्वादिष्ट चीज़ मांगेगा। पहले पहले तो आप अगर बच्चे को
- 32:41मिर्ची खिला दोगे अच्छी नहीं लगेंगी उसे, लेकिन धीरे धीरे वो
- 32:45अभ्यस्त हो जाता है तो बच्चे को माखन में से दही दूत चाच ये
- 32:55पढ़ाओ। ऐसे ही कृष्ण नहीं बना करते, ऐसे
- 33:02ही बुद्ध नहीं बना करते। बुद्ध के घर में सब कुछ था।
- 33:07बुद्ध को गाय का दूध प्रचुर मात्रा में मिला।
- 33:12तुम्हें तो पोषण का पता ही नहीं कि बुद्ध कैसे परिपोषित हुए?
- 33:18कोई कमी नहीं थे। राजपुत्र थे, सिंघाशीन के इकलौते
- 33:22वारिस थे और सब कुछ छोड़ के चले गए।
- 33:28अगर बुद्ध को दूध न मिला होता तो बुद्ध शायद घर छोड़ के न जाता।
- 33:4129 वर्ष तक घर में रहे तो मैंने आपसे कहा कि 15 वर्ष में आप
- 33:49एनलाइटन हो जाओगे, अगर कुछ ना करो तो ने कुछ नहीं किया।
- 33:57जिन गुरुओं के पास गया था उनके पास ऐसा ही कुछ था जैसे हमारे आज
- 34:02डेरे वाले गुरुओं के पास होता है या स्वामी प्रेमानंद के पास राधे
- 34:07राधे हैं और राधे राधे करते करते कस्तियों में डूब जाओ, मर जाओ तो
- 34:13बागेश्वर धाम कहेंगे मुक्ति हो गई, मोक्ष हो गया।
- 34:19लोभी गुरु लालची खेला। दोनों नरक में ठेलम ठेला ये भी उस
- 34:26आनंद को कभी प्राप्त नहीं कर पाएंगे और इनके जो लड़ लग गया वह
- 34:32भी आनंद के उस रस को कभी पी नहीं पाएगा।
- 34:35दोनों नर्क में ठेलम ठेला यहीं भुगत लेंगे।
- 34:38नर्क बाहर कहीं नहीं होता। ध्यान रखें बाहर न नर्क होता है,
- 34:45ना स्वर्ग यहीं भोगते हो, तुम हॉस्पिटल्स में नर्क भोगते हो और
- 34:51शहनशाही में तुम स्वर्ग भोगते हो। यहीं तुम उस सतल पर चले जाते हो
- 34:59जहाँ आनंद बरसता है तो वो सच्च खंड है।
- 35:03सच्च खंड बसय निरंकार वह जहाँ तुम आकार से रहित हो जाते हो।
- 35:13वहाँ जहाँ सब वासनाएं छूट जाती हैं, वासना का आकार होता है।
- 35:21कोई प्राइम मिनिस्टर बनना चाहता, कोई सीएम बनना चाहता, कोई बड़ी सी
- 35:24कोठी चाहता, कोई बड़ी सी शिकार चाहता रॉयस होनी चाहिए।
- 35:28बहुत बड़ी वाली। 200 ₹300,00,00,000 की जो नए वाली
- 35:36चली है। अब इनका आकार होता है।
- 35:39वासनाओं का आकार होता है और बाबा कहते हैं सत्यखंड वसाय निरंकार।
- 35:49जहाँ आकार समाप्त हो जाता है, वहाँ सचखंड बैठा है वसा है जिसे
- 35:56स्तिप्रज्ञता कहते हैं कृष्ण सब खो जाता है तुम्हारे धन का आकार
- 36:06है। तुम्हें मान देने वाले, सम्मान
- 36:10देने वाले, आकार से युक्त हैं। तुम्हारी धरती का आकार है, जो
- 36:16चीज़ तुम खाते पीते हो, सबका आकार है, लेकिन जब तुम निराकार में
- 36:22प्रवेश कर जाते हो, वह सचखंड मिलेगा तुम्हें मरने के बाद।
- 36:27ना स्वर्ग, ना नर्क, ना सचकण ना सतलोक।
- 36:31यह आपको गुमराह करने वाले लोग हैं।
- 36:38इन्होंने तुम्हारा जीवन जीते जी नर्क बना दिया।
- 36:46देखिए। जो व्यक्ति उस स्थल पर पहुँच गया
- 36:52वह संतुष्ट हो जाएगा, तृप्त हो जाएगा।
- 36:57फिर जो तृप्त हो गया उसको गुफाएं बनाने की आवश्यकता क्या है?
- 37:04कृपालु जी महाराज हो, डेरा सच्चा सौदा हो।
- 37:11बापू आसाराम कुछ तो कुछ तो शैतानियां रही होंगी, कुछ तो
- 37:28शैतानियां रही होंगी। यूं ही कोई बलात्कारी नहीं कहता
- 37:37कुछ तो मजबूरियां ही नहीं कोई बेवफा नहीं कहता, प्रत्येक
- 37:44व्यक्ति की इज्जत होती है, वह अपनी इज्जत को प्यार करता है।
- 37:52अपनी इज्जत का मजाक नहीं उठने देना चाहता।
- 37:57अगर कोई स्त्रियां सरे आम आई हैं, शिकायत कर रही हैं तो वो गलत
- 38:03नहीं। अभी कल ही एक थोड़ा राजनीतिक में
- 38:15एक दो पार्ट ले लेता हूँ। राघव चिड्ढा कहते हैं, मैं अकेला
- 38:20एक नहीं दो नहीं, तीन नहीं ये गिनती बनाने की क्या जरूरत हुई?
- 38:25सीधा ही कह दो के साथ आदमी। मैं तो गलत हो सकता हूँ।
- 38:31सात तो गलत नहीं हो सकता। कौन सी कक्षा में कौन से कॉनवेंट
- 38:36से पड़े हो मिस्टर चड्ढा, तुम सात कहते हो कि गलत नहीं होते, मैं
- 38:42कहता 7,00,00,000 भी गलत हो सकते हैं।
- 38:46अगर कोई गलत रास्ते पर चल पड़ा है, पूरा सारा संसार गलत रास्ते
- 38:50पर है। तुम कहते हो सात गलत नहीं होते,
- 38:54मैं तो अकेला गलत हो सकता हूँ। सात नहीं सात सात अरब की संख्या।
- 39:05गलत है आज क्योंकि दुखी है, लक्षण बता देते हैं कि यह दुखी है, तुम
- 39:13भटक रहे हो, सिर मार रहे हो, पत्थरों में ढूंढ़ते हो, कामवासना
- 39:22में ढूंढ़ते हो। शैतानियत में ढूंढ़ते हो, नाम
- 39:30ऊंचा करके जाना चाहते हो, पदार्थों में ढूंढ़ते हो, गदम गदम
- 39:39पिल्लों में पिल्लों में ढूंढ़ते हो।
- 39:45वह रस कहीं भी नहीं मिलता, वह रस मिलता है, सच खंड वसय निरंकार।
- 39:55और इन ढोंगियों ने पखंडियों ने लोभियों ने लालचियों ने सचखंड
- 40:00कहीं बना दिया है, भोगोलक दृष्टि से, जबकि वो कहीं भौगोलिक दृष्टि
- 40:06से है नहीं। बाबा ने कहा सचखंड का योजन इतने
- 40:13किलोमीटर है बताए। सूरज है उसको आज भी देखा जा सकता
- 40:22है 15,60,00,000 किलोमीटर्स अवे फ्रम अर्थ देखो अभी भी चमक रहा है
- 40:31वो है। हाथ गंगन को आरसी का उसको देख लो
- 40:41तो मैं कहता हूँ सच गंठ को दिखाने वालों मृत व्यक्ति को अगर रस मिल
- 40:48भी जाए आनंद का। तो वह प्रसन्नता प्रकट कैसे होगी?
- 40:57क्या मृत व्यक्ति उस आनंद के रस को प्रकट कर सकेगा?
- 41:04नहीं कर सकेगा, मृत व्यक्ति नाकाम प्रकट कर सकता है।
- 41:10ना क्रोध, ना लोभ, मोह, अहंकार मत मत स भय कुछ नहीं प्रकट कर सकता
- 41:17मुर्दा व्यक्ति को भय भी तो नहीं लगता, तुम उसको आराम से पटक देते
- 41:24हो और वो बिलकुल नहीं पूछता कि तुम उसके मित्र हो या तुम शत्रु
- 41:29हो। या तुम अपने उसके ही खून हो?
- 41:37मेरी परिभाषा सुन गलत सही उदाहरणों से नहीं होता।
- 41:48गलत सही लक्षणों से होता है ये चड्ढा कहते हैं कि एक गलत हो सकता
- 41:57है साथ नहीं हो सकता। सात अरब गलत हैं।
- 41:59भाई गलत कौन है? जो आनंद से रहित है वो गलत है।
- 42:12यह इतने सोए सोए मुर्छित लोग हैं। इन्हें पता ही नहीं कि गलत क्या
- 42:18और सही क्या जो भेद ही नहीं कर सकता।
- 42:24जहाँ जाकर तुम्हारी अंतरात्मा का रोम रोम बाँछें खिल जाती हैं, वह
- 42:29सही। और सही का मतलब सच और सच खंड वहाँ
- 42:37वशै नरंकार वह कहीं दूर योजन में अरबों खरबों में दूर नहीं यह
- 42:47तुम्हारे लोभी लालचियों के बनाए हुए।
- 42:53पाखंड गलती में ये भी हैं क्यों उस अत्यंत दुर्लभ आनंद को छोड़कर
- 43:05हीरे मोती द्वारा छोड़कर लाल छोड़कर।
- 43:10कंकड़ पत्थर भिंड रहे हैं तो समझदार कौन?
- 43:18सभी सयाने एक मत मूर्ख अपनों अपनी मूर्ख व्यक्ति अलग अलग भाषा में
- 43:25बोलता है, बीके कुछ बोल रहा है। निरंकार खुश बोला है राधा स्वामी
- 43:32खुश बोला है सब मूर्ख है, अव्वल दर्जे के मूर्ख है मैं तुम्हें एक
- 43:39ही लक्षण बताता हूँ जीसको करने से तुम्हारी आनंद भीतर बढ़ जाए, झूम
- 43:45झूम जाए जीरा तुम्हारा। नृत्य करने लगे।
- 43:49शरीर तुम्हारा वही है सच सत्य को सुनकर तो आदमी फूले नहीं आगाहता
- 44:00है सत्य ऐसा कि तुम्हारा रोम रोम अलादित हो जाता है।
- 44:11गुण घनाने लगते हैं। लब कंठ से सुरेली आवाज प्रकट होने
- 44:17लगती है। झूम झूम के नाचों।
- 44:28गाओ खुशी केगी आज किसी की हार हुई है और किसी की जीत रे।
- 44:45गाओ। खुशी के गे झोंके नाचो।
- 44:54आ गाओ आ जब तुम सच को छोड़। तू सुगंधी तेरे ठंडी फिजाओं का
- 45:11आलम तुम्हें मदहोशी के आलम में मगन कर देगा।
- 45:26वह हैं सच तो तुम्हारे रोम रोम से प्रकट होगा लक्षण के रोम ये मरजा
- 45:39इसे जहीर है। ये मरी मरी सी जान, ये मरी मरी से
- 45:48रोज़ के प्रवचन किस बात का सबूत है?
- 45:55एक ही रिकॉर्ड चलता है। इसका मतलब कि इस डेरे में जो
- 46:02व्यक्ति बैठा है इस नॉट एन इनवेंटर, वह खोजी नहीं है, अपने
- 46:08भीतर नहीं गया अन्यथा अपने भीतर जाने वाला व्यक्ति तो हर पल कुछ
- 46:14खोज कर लेता है। क्योंकि वह रोज़ अपने भीतर उतरता
- 46:24है और नई खोज होती है। रोज़ रोज़ नए मार्ग हैं।
- 46:31वह नित्य नूतन है और वह पुरातन से पुरातन है, रोज़ नया है, हर पल
- 46:39नया है। उसकी लीला को तुम समझ सकते हो
- 46:47उसके नाम के ऊपर तुम ठगी मार सकते हो लोगों से, लेकिन ध्यान रखना
- 46:52तुमने पहले अपने आप को ठग लिया। पहले अपने आग को ठगोगे, फिर दूसरे
- 47:01को ठग पाओगे। तुम पहले क्रोधित होकर खुद के
- 47:09भीतर कार्टीसॉल एड्रेनेलीन नामक विषैले तत्व हार्मोन पैदा करते
- 47:15हो, खुद का नुकसान पहले कर लेते हो?
- 47:21और क्रोधित होकर जब तुम दूसरे के मुँह पर थूकते हो उसे तो पता नहीं
- 47:28क्रोध आएगा कि नहीं, तुम जानते नहीं शायद जिसके मुख पर तुमने
- 47:35थूका, वह बुद्ध हो। वह प्रतिक्रिया करेगी।
- 47:41वह अपना रुमाल निकाले और पुंछ से कहे कुछ और कहना है ये तो मैं समझ
- 47:46गया। सत्य के पास पहुंचना है।
- 47:59हमारे राष्ट्रीय चिन्ह के ऊपर लिखा है सत्यमयव जयते, यह कौनसा
- 48:04सत्य है जो जीतता है? यह तुम्हारी मित्र का वो सत्य है
- 48:13जो कभी हारता नहीं उस सदा जीतता है और इसलिए मैंने कहा जब तुम
- 48:18वहाँ पहुंचते हो। तो फिर तुम आनंद से सारा बोर हुए
- 48:24कहते हो। आज किसी की हार हुई है।
- 48:31आज दुख हार गया, दर्द हार गया, आज क्लैश कष्ट हार गए।
- 48:39और किसी की जीत रे। और सुकून जीत गया आनंद जीत गया
- 48:48बहारें जीत गई खजाएं आर्ग तो वह कल कलकत्ता प्रफुटित होगा आनंद का
- 49:02नाथ? और वह झरने के रूप में कोई गाकर
- 49:06प्रकट करेगा, मीरा नाचकर प्रकट करेगी कोई सुरती में अपने ही भीतर
- 49:13खोकर कबीर जैसा कोई नानक जैसा कोई बुद्ध जैसा कोई महावीर जैसा।
- 49:22उसके प्रकटीकरण के ढंग अलग हो सकते हैं।
- 49:27लेकिन जहाँ वो गया है वो तत्व एक है इसलिए बाबा जब बाहर आते हैं
- 49:33समाधि से सबसे पहला अक्षर उनका जाता है।
- 49:38एक ओंकार। आगे जो नो शब्द कहे वो तो मातृ
- 49:45उसी की व्याख्या है। अन्न कम खाओ, दूध ज्यादा पीओ अगर
- 50:00तुम शरीर को थोड़ा सा मजबूत रखना चाहते हो मसाज को।
- 50:06तो अंडा पोलट्री फार्म का अंडा जिससे बच्चा नहीं पैदा होता।
- 50:14अब ये प्रश्न आ रहा है कहते दही दही से दही पैदा नहीं होता पुत्र
- 50:20दूध में जब हम जाग लगाते हैं। उस दूध में जिव पैदा होता है
- 50:27लैक्टिबेसिलस वह जिव पैदा होता है।
- 50:32दूध ने दूध नहीं पैदा किया दूध में लैक्टोबेसिलस पैदा हुआ और वह
- 50:37हमारी आंत्रणियों के लिए गैस्टोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट इसके
- 50:42लिए बढ़िया होता है। लेकिन दूध ने दूध को पैदा नहीं
- 50:47किया। दूध ने जीवन को पैदा किया इसलिए
- 50:51एक शब्द बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। गुरवाणी का जीते दाने आने के
- 51:00जीवाबाज न कोय। तुम अगर कहते हो हम तो अन्न खाते
- 51:06हैं, हम जानवरों को काट के नहीं खाते ठीक है, शुभ है, लेकिन
- 51:14गौरवाणी कहती है कि ये जो तुम खा रहे हो, इससे भी अन्न जीवन पैदा
- 51:19हो सकता है। इसलिए यह भी मांसाहारी है जेब के
- 51:28दाणे अन्न के तुमने अर्थ व्यर्थ कर लिए है तो बाबा क्या करें जी,
- 51:35वहाँ बात जना कोई इससे जीवन उत्पन्न हो सकता है।
- 51:41अंकुरित होता है। गेंहू अंकुरित होता है, बाजरा
- 51:46अंकुरित होता है, ज्वार सब अंकुरित होता है जिसे तुम अन्य
- 51:51कहते हो। इसलिए जीतने बड़े पहलवान है तुम
- 51:57देखना। उनके खाने की थाली में तुम्हें
- 52:02दूध तो प्रचुर मात्रा में मिलेगा। लेकिन आन तो वो गामा पहलवान एक
- 52:11रोटी खाया करते थे। एक रोटी, 1200 किलो, 12 क्विंटल
- 52:16वजन। वह छाती तक ला के और उन्होंने
- 52:21सारे मैदान का चक्कर लगा दिया था। वो आज भी किसी म्यूज़ियम के अंदर
- 52:26रखा हुआ है। ये गामा पहलवान की बात करता हूँ।
- 52:31जिनके शिष्य थे ब्रूस ली, वो गामा के शिष्य थे।
- 52:39जो संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए और द्रोण बड़े गरीब थे, उनके
- 52:56बच्चे अश्वथम को दूध नहीं मिल रहा था।
- 53:00बच्चा दूध मांगता। फिर वह पानी में आटा गोल के दूध
- 53:10जैसा बन जाता है। वो पीने को देती है ये ले दूध पी
- 53:13ले 1 दिन बड़ा दुख हुआ तो याद आया मित्र ध्रुपद ओह वह राजा।
- 53:23उसने वायदा किया था लेकिन सभी वायदे वफा नहीं होते हैं तो उससे
- 53:37मांग लेता हूँ। उसने कहा था हाँ सारा ये ले लेना।
- 53:41मैं तो सिर्फ गाय ही मांगने चला। बच्चे को दूध नहीं मिलता।
- 53:52वहाँ से गाय, गऊ दान का संकल्प का रिवाज पैदा हुआ है।
- 53:59जो व्यक्ति सिर्फ दूध पीता है उसे गऊ दान जरूर करो।
- 54:04ब्रह्मज्ञानी का आहार दोद ही होता है।
- 54:09आमतौर आज तो हर कोई ब्राह्मण फेरो में कहेगा संकल्प करो गऊ दान का
- 54:17और तुम जेब से ₹10 नगाल देते हो, ₹10 में गऊ आती है क्या?
- 54:23हंसो, ₹10 में गउ आती है, तुम्हे भी पता है ठगी मार रहा है, देखो
- 54:33और दूसरे को भी पता है कि ठगी मार रहा है, लेकिन तुम मात्र
- 54:38औपचारिकताएं पूरी कर देते हो। वो कहते संकल्प लो, गऊ दान का
- 54:44संकल्प लो तुम ₹10 निकाल के ये लो गऊ दान का संकल्प हो गया।
- 54:50अब पैसे तो पहले ही खोले होते हैं के 5,00,000 लगेंगे 2,00,000
- 54:57लगेंगे। मैं कहता हूँ कि फेरे वेरे बंद कर
- 55:01दो, कोई देवता नहीं आता, अगर किसी के पास कोई देवता आता है तो वह
- 55:05मेरे पास आ जाए। तुम फेरे तुम लाख मंत्र बोल दो,
- 55:18तुम लाख मंत्र बोल दो। तनकारें खो गई, जिससे देवता प्रकट
- 55:26होता था, वो सूत्र खो गए जैसे तुम्हारे पास मोबाइल तो हो और
- 55:34तुम्हें तुम्हारा मित्र की याद भी आया लेकिन उसका मोबाइल नंबर खो
- 55:39गया, फिर तुम क्या करोगे? कोई ऑप्शन नहीं।
- 55:45तुम चाहते हुए भी उसको पुकार न सकोगे आज कोई ब्राह्मण ऐसा है
- 55:50धरती पे जिसके पास वो कोर वर्ल्ड है।
- 55:55गायत्री मंत्र में मैंने वह तनकार डाली है लेकिन आपको बताई नहीं।
- 56:02और लाखों लोगों के काम हो रहे हैं।
- 56:06क्यों हो रहे हैं सिर्फ उस डंकार के कारण?
- 56:10सुनिए दुःख बाप का नाश सिर्फ उसे सुनो, घर में चलने दो, घर की
- 56:16दीवारें उसे भी जाएंगी। और घर में सुख शांति बनी रहेंगी।
- 56:20जब तुम बाहर चले जाओ उसे चलने दो तो तुम जब दरवाजा खोलोगे एक ठंडी
- 56:30हवा खुशबु भरी तुम्हें छुएगी। तुम्हें पता नहीं यह कहाँ से आई।
- 56:36यह इस गायत्री मंत्र की टनकार से आए, जो निरंतर चल रहा है।
- 56:41यह तुम्हारे बहुत से रोग, शोक, कष्ट, क्लेश, व्याधियां, दुविधाएं
- 56:49जो मानसिक संताप हैं। दैहिक दैविक भौतिकता प रामराज
- 56:55नहीं का हो जाता, उसमें टनकार है। तुम भूल गए हो तुम बुलाते हो गणेश
- 57:07को, मैं नहीं कहता गणेश नहीं है। लेकिन सूंडो वाला गणेश नहीं है,
- 57:13वो तो गोवर गणेश में तुम वो नंबर भूल गए हो जिससे कॅाटाक्ट करना था
- 57:23वो कॅाटाक्ट होता है टनकार्स तुमने शब्द पकड़ लिए?
- 57:28ओं भूर भौ स्वह तत स्वेतर रेणयम भरगो देवस्य धीमी दियो यो नहा
- 57:34प्रछोद्यात स्वह चर कन्यापति कुर। तू चेला ते मैं गुर तरजा आरती
- 57:50करनोटू आला ज मंत्र ज्योति निरंजन एकुंकार रणंकार सोहम सतनम।
- 58:06दशी न किसे पाप लगोगे तो तुमने इतना पाप क्यों कमाया भाई?
- 58:15करोड़ों लोगों को तुमने बता दिया अगर पाप लगता है इसके नाम से
- 58:20बताने से। तो फिर तुमने इतना पाप क्यों
- 58:25किया? कभी सत्य को बताने में भी पाप लगा
- 58:30करता है। झूठ बोलना पाप है ये तो सीखा था
- 58:34हमने लेकिन सत्य को बतलाना कब से पाप हो गया?
- 58:48कौन सा बेला वक्त कवंजीत पाया आकार बेल न पाया पंडती जे लिखया
- 59:01वेद पुराण बेल न पाया कच लिया जे लिखया कुरान।
- 59:10तुम जानती नहीं कोई चीज़ सिर्फ ठगी और याद रखना पहले खुद जलोगे
- 59:19क्रोधित होगे कामग्रस्त होगे पहले तुम खुद शक्ति किसने खोज।
- 59:29अशोक खैरात ने या रूपबारी चाकन कर दोनों ने कोई पाई किसने ने?
- 59:41और 1 दिन ऐसे ही तुम भौंकते भौंकते मर जाओगे।
- 59:57ये इसके दाणे अन्न के जीव और बाज न कोई अन्न में भी जीव होता है।
- 1:00:01भाई तुम उस तर्क को दूसरी तरफ ले आते हो के जीव तो भाई अन्न में भी
- 1:00:11होता है और जीव उसमें भी होता है जीसको तुम काटते हो, लेकिन जीव
- 1:00:15जीव में बड़ा फर्क है और फिर अगर तुम्हें कोई काटे तो?
- 1:00:23यह बराबर बात तुम कैसे कर दोगे? तर्क से लेकिन कर देते हो और
- 1:00:29दूसरा सटिस्फाई भी हो जाता है नहीं।
- 1:00:35बाबा ने कहा कि अन्न के भीतर भी जीव होता है।
- 1:00:38फिर क्या लो? फिर दूध लो दूध से दूध पैदा नहीं
- 1:00:44हो सकता। कणक से हजारों हजारों हजारों गुणा
- 1:00:48पूरे गोदाम भरे जा सकते हैं। एक घने से ध्यान रखना आदम और ई।
- 1:00:56मन्नू और शतरूपा। इस एक जोड़े से आज सारा संसार फिर
- 1:01:01रहा है। यह एक जोड़े की करामत है।
- 1:01:07ऐसे ही एक दाने से सारे भंडार भर सकते हैं।
- 1:01:12बेटा कैसीन यह गाय के दूध में होता है भैस के दूध में भी होता
- 1:01:17है। ए टू प्रोटीन इसमें होता है।
- 1:01:22इतना ही नहीं गाय के अंदर अगर किसी ने सभी देवी देवता के चित्र
- 1:01:29खींच लिए, वह मूड तो थे लेकिन जिसने ये छाप छोड़ी।
- 1:01:36एक सिंबल के हिसाब से वह तो संत की रिसर्च थी, जैसे साइंटिस्ट्स
- 1:01:44ने रिसर्च की और पानी का नाम एच टू ओह रख दिया।
- 1:01:48एच टू ओह गलत नहीं है, लेकिन पानी का नाम भी नहीं है।
- 1:01:53एच टू ओह से प्यास भी नहीं होती। लेकिन उसका मॉलीक्यूलर फॉर्मूला
- 1:01:57है। दो एटम हाइड्रोजन के और एक एटम
- 1:02:02ऑक्सीन का। ये गलत भी नहीं है, ठीक भी है और
- 1:02:06ठीक नहीं भी है। ठीक इस तरह है कि इसकी मोलीक्यूल
- 1:02:11फॉर्मेशन तो ठीक है। दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन,
- 1:02:18लेकिन यह तुम्हारी प्यास नहीं बुझाता।
- 1:02:21ऐसे ये ठीक नहीं है तो इसमें गाय के भीतर सभी 33,00,00,000 देवी
- 1:02:30देवता हैं। यह जीस प्रकार से तुमने चित्रांकन
- 1:02:36किया वैसे नहीं है, यह तुम्हें समझाने का एक सिम्बोरिक ढंग था
- 1:02:48बेटा का राशन कैसे? नामक ए टू प्रोटीन ए वन पे होता
- 1:02:55है। अगर आप इसे लोगे तो वह नॉन
- 1:03:03स्टिम्युलेटर होता है। यह तुम्हें ब्रह्मचर्य को साधने
- 1:03:07में बहुत सहायता देगा। अन्न को खाने से।
- 1:03:12कामवासना पैदा होती है क्योंकि वह स्टिम्युलेटेड है, स्टिमुलेशन है
- 1:03:20उसमें बीटा के सिन और उसमें ए टू प्रोटीन, खास तौर से।
- 1:03:34नॉन स्टिमुलैंट है। ये आपको उत्तेजना नहीं देता।
- 1:03:42वृष्यों ने बड़ी सूक्ष्म प्रणालियाँ से सिंबल्स का प्रयोग
- 1:03:49करके तुम्हें तथ्य समझाने की चेष्ठा की थी।
- 1:03:54तुमने उन सिंबल्स को ही पकड़ लिया।
- 1:04:01आगे ऐसी भ्रांत धरने ऐसे ही भ्रम उतारने अब मैं बताऊँगा तो तुम्हें
- 1:04:15दुख भी होगा शर्म भी आये मैं शंकर मंदिर में जाया करता था।
- 1:04:251 दिन थोड़ा सा लेट हो गया। कई बार लेट हो जाता तो मैं फिकर
- 1:04:29नहीं करता। नींद पूरी हो तो उठ जाओ, दूध पीकर
- 1:04:34दूध में पत्ती पीता रहा हूँ। शुरू से मैं शुरू से बस एक वक्त
- 1:04:42बिना पत्ती का रात को। शुद्ध दू बिलकुल थोड़ी सी चीनी
- 1:04:50मिला के 1 दिन में लेट हो गया तो मैंने देखा एक स्त्री शिवलिंग पर
- 1:04:58अपनी जोनी को घिस रही थी। मैं दृश्य देखकर हैरान हो गया।
- 1:05:07मैं देख कर वह सुमड़ गया, वह है स्त्री, मेरी जानकार थी, इसी शहर
- 1:05:15की थी, उसने बाहर आके मेरे पांव पकड़ लिया।
- 1:05:26कहती किसी को बताना मत। मैंने कहा ये बताने वाली बात तो
- 1:05:31है ही नहीं तुम जाओ लेकिन जो तुम कर रही हो वो मूढ़तापूर्ण कृत्य
- 1:05:39है। मुझे तो किसी तांत्रिक ने बताया
- 1:05:42था। किसी पंडित ने बताया था शिवलिंग
- 1:05:46के ऊपर ऐसे योनी को रगड़ लो। तुम्हारे पुत्र प्राप्ति होगी।
- 1:05:50मैंने कहा ऐसे पुत्र नहीं हुआ करते।
- 1:05:52तुम जाओ नहीं नहीं ऐसे रुख देख। एक व्यक्ति प्रेमानंद जी महाराज
- 1:06:02के पास जाकर कहने लगा मैंने राधा की मूर्ति रखे, राधे राधे बोलना
- 1:06:06शुरू कर दिया और राधा की मूर्ति तुम्हें पता है चित्रकार बनाते
- 1:06:11हैं बड़ी खूबसूरत होती है लाल लाल गालें अब तुम पूजा करने का मन
- 1:06:17करेगा तुम्हारे। तो बेचारा भटक गया, भटक गया तो
- 1:06:25उसने राधे राधे राधे का स्वरूप देखा और वहीं पे मास्टरबेट शुरू
- 1:06:30कर दिया। अब उसके भीतर इनफिनिटी
- 1:06:33कॉम्प्लेक्स आ गया। घर वालों को उसका पता ही ना लगे
- 1:06:38कि रोक क्या है? ऊंट पुटांग बातें करने लगा।
- 1:06:45अंत में उसके घर वाले मेरे पास ले के आए।
- 1:06:49मैंने कहा तुम सभी बाहर चले जाओ क्योंकि जो बात मैं इससे पूछना
- 1:06:54चाहता हूँ। वह मुझे अकेले में बताएगा, मुझ पर
- 1:06:59ही श्रद्धा है तो मैंने पूछा बता बेटी क्या बात है कि हम प्रेमानंद
- 1:07:06के पास कहते ये घर वाले कहते वृंदावन फिर फिर वो कहते राधे
- 1:07:12राधे करते रहो फिर। फिर सभी घरवाले राजराजे करे है
- 1:07:17फिर फिर मूर्ति ले आई आगे ओह मूर्ति बड़ी सुन्दर थी गोरी गोरी
- 1:07:25गाने। हँसता हुआ नूरानी चेहरा।
- 1:07:37हस्ता। हुआ नूरानी चेहरा काली जुलफे रंग
- 1:07:46सुनहरा तेरी जवानी तो ब तो ब। दिलरुबा दिलरुबा दिलरुबा कहता है,
- 1:08:04मैंने तो राजा को पकड़ लिया, मैं तो लगा उससे घडवस्ती कर ले और
- 1:08:11आखिर में स्खरीत हो गया, उसके बाद पागल हो गया पागल ही होना था।
- 1:08:17जब एक मूर्ख व्यक्ति कहता है, ये तो मेरी माते छू रही है, ऐसे
- 1:08:23तुमने पागलों की जमातें पैदा करती हैं जय, आरएसएस वगैरह मेरा राज्य
- 1:08:32आने पर? एक संस्था का मैं जड़मूल से खत्म
- 1:08:36कर दूंगा, क्योंकि वह संस्था बहुत मूड़ताएं फैलाती है।
- 1:08:46अभी एक प्रसिद्ध गायिका मैं उसे तोतली कहा करता हूँ।
- 1:08:51क्योंकि वो ठीक से बोल नहीं सकती। तोतरी बोलती है।
- 1:08:57आशा पारेख नाम की एक अभिनेत्री थी, उसकी फिल्मों बड़ी चली तो मैं
- 1:09:04उसकी फ़िल्म देखने चलेगा। मगर ये तोतरी है तो ये तो तोतरी
- 1:09:08बोलती है। लोगों को भी पता था लेकिन लोगों
- 1:09:16ने सोचा कि इसका अंदाज ही ऐसा है, वो तोतली ही थी आज अभी मरी नहीं
- 1:09:21अभी है तो मैथिली ठाकुर तोतली है तोतल।
- 1:09:30जो बालक कह तो तरी पाता। सुनत देखत हर्षत पितु माता।
- 1:09:38मुझे तो अच्छी लगती है क्योंकि परमात्मा ने सरस्वती कंठ में बैठा
- 1:09:44दी। लेकिन मैं कहता हूँ कहाँ फंस गयी?
- 1:09:49अगर मेरे चार बच्चे होंगे तो मैं चारों आरएसएस को दे दूंगी।
- 1:09:58मैंने कहा यही तो पागलपन सिखाया है।
- 1:10:00इन्होंने के बच्चों का अपना कोई वजूद नहीं होता।
- 1:10:06तुम चार तो पैदा कर दोगी स्त्री पुरूष ने तो अपना स्वाद ले लिया,
- 1:10:13लेकिन आगे जो जन्म जीसको मिला वह तुम्हारा गुलाम है क्या उसकी अपनी
- 1:10:20कोई इच्छा ही नहीं है उसके अपने जीने के ढंग?
- 1:10:24वह आरएसएस में भर्ती होना चाहते हैं कि नहीं?
- 1:10:28इसीलिए मैं कहता हूँ तुम ज़ालिम माता पिता हो, तुम अपने स्वाद के
- 1:10:34लिए बच्चे पैदा करते हो, तुम स्वतंत्रता के लिए बच्चे नहीं
- 1:10:38पैदा करते। स्वय से स्वाद भी बनेगा, स्वय से
- 1:10:41स्वतंत्रता भी बनेगा। तुम अपने स्वाद के लिए बच्चे पैदा
- 1:10:46करते हो, बच्चे चुप टपक जाते हैं। बस तुम बच्चों की परवाह कौन करता
- 1:10:51है? जीस दिन हिंदुस्तान ने बच्चों की
- 1:10:55परवाह करनी। संसार ने बच्चों की परवाह करनी
- 1:10:57शुरू कर दी। अभी पश्चिम में बच्चों की परवाह
- 1:11:00करनी शुरू हो गई है। वो भी कानून के डंडे से।
- 1:11:06अगर बच्चे को तंग करोगे, मानसिक उत्पीड़न करोगे, वह 911 के ऊपर कर
- 1:11:11देगा। मेरा भाई अभी छह महीने की जेल काट
- 1:11:14के आया। अमेरिका में तू चार को दान कर
- 1:11:23देगी, उससे नहीं पूछोगी। ऐसे ऐसे लोग हमारी हरियाणा में
- 1:11:33कहावत है सोना, डंडा, सोना, डंडे को 100 को से पहचान लगे तो मिल गई
- 1:11:41ना आका तो भगवान कृष्ण। रणक्षेत्र में खड़े थे द्रव्य
- 1:11:52श्रम करना। कुंती का भाई आ रहा था, वह भी
- 1:11:58बड़ा बलवान था शल्य। मैं भी लडूंगा सारे भारत के
- 1:12:04प्रसिद्ध योद्धा आ गए थे तो शल्य कहता मैं भी लडूंगा, मेरे भी
- 1:12:12भांजे हैं। कुंती पुत्र हैं कुंती का भाई तो
- 1:12:19आया था। जो के संग मिलने लेकिन दुष्ट तो
- 1:12:25दुष्ट होते हैं, चेकडाउन को खरीद लिया करते हैं और उन विचारों की
- 1:12:31गलती भी नहीं होती, लेकिन डालरों की टनाटन के आदर कोई विश्वामित्र
- 1:12:39टिक नहीं पाता। कितना कोई टिकेगा राधा जैसी
- 1:12:46बेचारी गरीबनी मूर्ति के आगे तुम सकलित हो जाते हो, तुम्हारे अंदर
- 1:12:57कैसे संयम आएगा? कैसे मर्यादा पुरुषों?
- 1:13:00तुम जैसे ही तुम जीवन में कर सकोगे।
- 1:13:0614 वर्ष वनवास में रहे, कोई बच्चा नहीं पैदा हुआ, उस वक्त तो कोई
- 1:13:11साधन भी नहीं थे। मतलब साफ है और ठंडे भ्रम मचे
- 1:13:17रहे। और कभी खाने को मिल गया, खा लिया
- 1:13:26वह कौन परोसता था। शाहना, पकवान कंद मूल फल बेचारा
- 1:13:33लक्ष्मण निकल जाता मिलते तो ले आता।
- 1:13:37नहीं मिलते तो ठीक थका चलेगा। नगर में जाना नहीं है 14 साल ऐसे
- 1:13:4714 वर्ष से गुजार इसे कहते हैं संयम और मर्यादा की जिंदगी।
- 1:13:58आज सब तुम्हारा भगवान पैसा हो गया है तुम्हारा भगवान बड़ी कार्य हो
- 1:14:06गई है राजस्व लंबी कार हो 18 फुट की बिलकुल न्यू ऑर्डर।
- 1:14:16और कुछ तो ऐसी कथावाचिका ही हैं जिन्होंने अच्छा पैसा कमा कर कहती
- 1:14:25अब हम ऐश करेंगे, तुम गलती महापुत्री एस।
- 1:14:35गर्मी आवे कपड़ा नदरी मोख द्वार उसकी कृपा से आती है तुम्हारी कथा
- 1:14:41वाचना से नहीं आती तुम देखना तुम ज़िन्दगी में कैसे कैसे कैसे दुख
- 1:14:48झेलती हो? किशोर की बात कर रहे बाबा
- 1:14:56बागेश्वर। जो व्यक्ति उच्च स्तर पर ज्ञानी व
- 1:15:03पर्ची निकाल रहे है लोगों की ऐसे व्यक्ति को फॉलो करके।
- 1:15:10हम तो डूबे हैं सनम, तुमको भी ले डूबेंगे, जगह जगह प्रचार का,
- 1:15:15हिंदू भ्रष्ट बनाएंगे यह मात्र एक मूडता की पराकाष्ठा अब तो घबरा के
- 1:15:26यह कहते हो कि मर जाएंगे। घर मर के भी चैन न पाया तो किधर
- 1:15:30जाएंगे? अरे हिंदू राष्ट्र तुम बना भी
- 1:15:33लोगे तो मेरी बात याद रखो। जिन्होंने मुस्लिम राष्ट्र बना
- 1:15:38लिया क्या वो सुखी हो गए? ईसाई बड़ी समझदार गुण है दो तिहाई
- 1:15:43वर्ल्ड की। अर्थ के ऊपर उनका कब्जा था, लेकिन
- 1:15:49एक भी उन्होंने चर्च नहीं बनाया। कहीं कैथोली की चर्च तुम्हें
- 1:15:57दिखता है कैथोली की चर्च यानी राष्ट्र।
- 1:16:04ईसाई राष्ट्र नहीं बनाया उन्होंने तुम ज्यादा समय धारा गए थे, आजादी
- 1:16:11के अंदर तो तुम्हारी चिड़ी भी नहीं जख्मी हुई।
- 1:16:13मरना तो बहुत दूर की बात है, लेकिन मुझे पता है।
- 1:16:24तुम ज़ोर जबर से जुल्म करना चाहते हो ज़ोर जबर से जुल्म करना चाहते
- 1:16:32हो और इसलिए तुम्हारे हाथ में जहर ही लगता है अमृत नहीं लगता।
- 1:16:41अमृत को पीने वाला ज़ोर जलम जभर नहीं करेगा और उसके हाथ में अमृत
- 1:16:49ही लगेगा। उसके हाथ में जहर नहीं लगेगा।
- 1:16:56तुम फिरते रहो, लेकिन तुम्हें पता नहीं।
- 1:17:01यह तुम्हें तुम्हारी वासन घूमा फिरा रही, और तुम अपने अंत में
- 1:17:06उतरें नहीं, इसलिए तुम्हें तुम्हारी असलियत नजर आईं भीतर
- 1:17:11उतरो तो तुम्हें पता चले कितनी वासनाओं ने तुम्हें ढक लिया है,
- 1:17:15भर लिया है, गले तक आते हैं वास में।
- 1:17:20है नानक बिन आपाचि। कह न नक बिन।
- 1:17:43आ फ। चि न कह नक बिन आप चिन्ह।
- 1:17:57बिना आत्मज्ञान के बिना अपने आत्मदर्शन के हू आर यू नो दाय
- 1:18:04सेल्फ सेल्फ फ़ॉर मेम्बरिंग के बिना मिटैना भर की।
- 1:18:11खाई। जब तक तुम अपने आप को सत्य इस रूप
- 1:18:22में ऑथेंटिकली नहीं देख लोगे, नग्न आँखों तब तक तुम्हारे भ्रम
- 1:18:28की काई यानी के इल्यूज़न भ्रम आँखों से पर्दा नहीं हटेगा।
- 1:18:35यह है बल्कें। आँखों पर बिछी ही रहेंगे यह पलकें
- 1:18:42उठानी है ओके, अगर इस भ्रम को समाप्त करना है तो तुम सारे संसार
- 1:18:52के चक्कर लगाते रहो, तुम भूल गए हो।
- 1:18:57कि तुम कब से अनंत अनंत जन्मों से ऐसे ही तो चक्कर जगा रहे हो, बस
- 1:19:04इतना है कि संत जानता है और तुम जानते नहीं और संत भी तुम्हारे
- 1:19:10जैसा था कभी आज ये जाग गया। आज उसने पलकें उठा लीं उसको सही
- 1:19:21सत्य नजर आ गया। इससे पहले ये पलकें ढकी हुई थीं
- 1:19:26उन आँखों को जिनसे दिखाई पड़ता है।
- 1:19:35वीडियो बहुत लंबा हो गया है। संक्षेप में बता दूँ, बता दूँ?
- 1:19:44ध्रुपद के पास गए द्रोण कहने लगे, मेरा बच्चा दूध के लिए तरस रहा है
- 1:19:52और तुम्हें पता है। मैं उसको पानी में आटा खोल के
- 1:19:55देता हूँ तुम एक आदत गाय मुझे दे दो तुम आधा छोड़ो आधा राज्य मैंने
- 1:20:03क्या करना करना है, मैं संतुष्ट हूँ, बस जितना मिल जाए ठीक है,
- 1:20:10लेकिन बच्चे की वैसा दिख ही नहीं जाती।
- 1:20:12भूख है। उसे पोषण तो मिलना ही चाहिए।
- 1:20:20तुमने तो आधा राज्य देने की वायदा किया था।
- 1:20:23मुझे द्रुपद गुस्से में आ गया। राजा अक्सर अंगकारी गुस्सा ही कर
- 1:20:30जाता है। उल्टा लटका देंगे अरे हम धरती में
- 1:20:37उल्टा गाड़ देंगे ईशा जी तुम कहाँ फिर रहे हो तुम उल्टा लटकाओगे जो
- 1:20:46की लटका न सकोगे। हम तो उल्टा करके धरती में काट
- 1:20:51देंगे तुम्हें ऐसे ऐसे मोरू को जीसको कभी सुप्रीम कोर्ट ऑफ
- 1:21:01इंडिया ने कहा था कि ये लोग जीती जागती आत्मभान लोगों के लिए।
- 1:21:15प्रज्ञावान लोगों के लिए समाज के लिए खतरा है।
- 1:21:23इन्हें आजाद घूमने मत देना और तुम घूमने की बात करते हो, ये गद्दी
- 1:21:29नहीं है। देखिए तबका सुप्रीम कोर्ट, उसकी
- 1:21:35प्रज्ञा और आज का सुप्रीम कोर्ट। उसकी प्रज्ञा जमीन आसमान का फर्क
- 1:21:43है। ये लोग आज गद्दी नहीं हैं और
- 1:21:51किसने इन्हें सत्तारूढ़ किया? हम जैसे आग्म जो चार बच्चे हो गए
- 1:21:57तो आरएसएस को दे देंगे। दे दो भाई ईश्वर करे तुम्हें
- 1:22:03गंधारी जैसे सोपुत्र मिले लेकिन मेरी भी एक बात सुन लो तुम्हें
- 1:22:10गंधारी के। जैसे सोपुत्र नसीब होंगे, लेकिन
- 1:22:14होंगे दुर्योधन जैसे सभी मृत्यु अकाल मृत्यु को ग्रसित हो जाएंगे
- 1:22:19और तुम उनकी लाशों को अपनी आँखों से देखोगे।
- 1:22:29मूंगड़ताओं में कोई बात कहना शुभ नहीं होता और वो भी संत के आज।
- 1:22:38जीस सुन यह लड़की भाजपा में शामिल हुई।
- 1:22:44उसे मुझे दुख हो। जमीं खा गए आसमान।
- 1:22:54कैसे कैसे जमाने ने मार जमा कैसे कर जमीन?
- 1:23:08खा। गई आसमान?
- 1:23:13कैसे कैसे मैं कहा एक और प्रज्ञा को खा गया यह दुष्ट राष्ट्रीय
- 1:23:24स्वयंसेवक। क्यों नफरत फैलाने वाला व्यक्ति
- 1:23:38वह संस्था हो जा व्यक्ति हो संस्थाएँ ही व्यक्तियों को पैदा
- 1:23:42करती हैं और व्यक्तियों से ही ऐसी चीजें निकलती हैं जो संस्थाओं
- 1:23:48बनाती हैं। गुरु गोलवर कर से ये चीज़ निकली
- 1:23:51हेडगवार इतने बुरे नहीं थे। हेडगवार तो कांग्रेस में ही थे
- 1:23:58लेकिन धीरे धीरे खोपड़ा खराब होने लगा तो 1925 के अंदर आरएसएस की
- 1:24:05स्थापना कर सकते गुरु गोलवर कराये।
- 1:24:09बस वो बिगडेल था, व्यक्ति आज वह किसी हॉस्पिटल में पड़ा हुआ रीढ़
- 1:24:19की हड्डी से ग्रस्त टूट गई है, दुख झेल रहा है उसके बनाए हुए
- 1:24:27कायदे कानून से जो भी। दुखी होगा।
- 1:24:30वह सब पीड़ा प्रकृति उसे प्रदान कर देगी।
- 1:24:33उस तुम्हें पता नहीं है ये दुःख लम्बा कैसे जाता है तुमने बिखेर
- 1:24:41तो दिया अपनी मूलता को। लेकिन जुगों जुगों तक यह तुम्हें
- 1:24:48प्रभावित करेगा। संत बिखेर तो देता है आनंद को
- 1:24:54शांति को बुद्ध शांति बिखेर तो गए, क्षमा बिखेर तो गए, लेकिन
- 1:25:02तुम्हें पता नहीं बुद्ध के करुणा के कारण।
- 1:25:06कितने लोग आनंद को मान रहे हैं और भीतर से दवाएं निकल रही है।
- 1:25:13आँखों से झर झर आंसू बहते हैं और यह बुद्ध की आंतों में स्टोर होता
- 1:25:20है। ऐसे ही गुरु कोर वर्कर मैं जानता
- 1:25:25हूँ। उसका मेरे पास पैगाम भी है, वह
- 1:25:29खुद को अभी जान ही नहीं है। गुरु जो मैं इतने साल से पड़ा
- 1:25:34हूँ, उठ नहीं सकता, बैठ भी सकता मेरी हड्डी रीढ़ की हड्डी टूट गई
- 1:25:42है, कोई अक्सीडेंट हो गया होगा। प्रकृति ऐसे ही देती है।
- 1:25:46आपके फलों का गर्मों का फल कोई मेरे लिए अरदास कर दीजिए।
- 1:25:53मैंने जाँका पीसे धर्मों में पाया गोल गोलवर का तुम्हारी सबक कर
- 1:25:59किसी कुम्हार के घर में बर्तन बना रहे हैं मिट्टी का।
- 1:26:08संत सब जानता है इसलिए संत तुम चीजों से बचना चाहता है जो चीजें
- 1:26:17तुम्हें दुख देती हैं याने पाप? इसलिए पहला शब्द मैंने आज का
- 1:26:23बोला। मन, वचन, कर्म से कृषि का बुरा
- 1:26:26मिला यह तुम्हारे लिए है, मेरे लिए नहीं, मैं निंदा नहीं करता,
- 1:26:34मैं आलोचना करता हूँ एक शब्द को और सुन लो।
- 1:26:45हमारे राष्ट्रपति अब्दुल कलाम उनका एक शब्द है।
- 1:26:53अगर तुम्हें दूसरों की पीड़ा देखकर तुम्हारा हृदय दुखित हो
- 1:26:57जाता है, ध्यान से सुन राजनीति में ऐसा ऐसा महात्मा हुई है।
- 1:27:03है। अगर दूसरे का दर्द देखकर तुम्हारे
- 1:27:07हृदय में दुख पैदा होता है तो समझ लेना कि परमात्मा ने तुम्हें
- 1:27:13बनाकर कोई गलती नहीं की है। ठीक किया है उसने अगर तुम्हारी
- 1:27:21पीड़ा। दूसरों की पीड़ा से आती है।
- 1:27:26जैसे बुद्ध की पीड़ा तुम्हारी पीड़ा से आई तो उसने ईश्वर बनने
- 1:27:32से इंकार कर दिया। उसने कहा मैं आत्म ज्ञानी ही ठीक
- 1:27:37हूँ, ईश्वर तो जब चाही बन जाऊंगा। इतना महा करूणावान व्यक्ति धरती
- 1:27:45पे बस मैंने एक ही देखा है मुझे पूछ लेते हैं लोग आज्ञाकारी मैंने
- 1:27:53कब शुरू इससे ज्यादा आज्ञाकारी नहीं हो सकता।
- 1:27:59और बुद्ध से ज्यादा करनाबान नहीं हो सकता और दोनों अवतारों में
- 1:28:03गिनेंगे। छठे अवतार थी परशुराम और नौ ही
- 1:28:09अवतार गिनने के बुद्ध और अवतारा गिनना ही पड़ना था।
- 1:28:15अवतार क्यों देखिए? तीर्थंकर तो हमारी जैन परंपरा में
- 1:28:22आते हैं, लेकिन अवतार तो हमारे 10 होने थे।
- 1:28:27ब्राह्मणों को उनकी चाल ढाल बात अहिंसक होना इतना पसंद आया कि
- 1:28:35इंकार करते करते भी स्वीकार कर बैठे।
- 1:28:41बाहर खदेड़ा, बाहर निकाला बाबू यहाँ से?
- 1:28:48ना ना करते ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे।
- 1:28:57करना था इंकार, करना था इंकार मगर इकरार तुम से कर।
- 1:29:06बैठे ना ना करते ना ना करते प्यार तुम से कर बैठे।
- 1:29:17आखिर में बुद्ध को ही नमन अवतार घोषित करना पड़ा।
- 1:29:22गालियां देने के बावजूद भी ऐसा व्यक्ति उपेक्षित नहीं किया जा
- 1:29:32सकता। ऐसे व्यक्ति को जा स्वीकार करोगे
- 1:29:36जा इंकार करोगे, उपेक्षित नहीं कर सकोगे तो ध्रुव से कहने लगे वो
- 1:29:46बचपन की बात है, अरे बच्चा है क्या?
- 1:29:50गुरुकुल की बातें बचपन की बातें थी, जाओ।
- 1:29:56कैसा आधारा ज? मैं तुम्हें गाय भी नहीं दूंगा।
- 1:30:00खैर आगे सारी कहानी इस गाय के कारण महाभारत हुआ।
- 1:30:06इस गाय के कारण इस गाय के कारण सत्यवादी।
- 1:30:15युधिष्ठिर को झूठ बोलना मैडम हाथ हो अश्वथामा गजो कीमा नरो गाय के
- 1:30:32कारण बहुत से युद्ध हुए। गाय के कारण परशुराम ने 21 बार
- 1:30:40क्षत्रिय को नष्ट करते। गाय के कारण महाभारत हुआ।
- 1:30:47कोई तो बात है गाय में और यह सिंबल्स के द्वारा हमारे ऋषियों
- 1:30:54ने हमें समझाया, सिंबल यही है। बीटा कैसीन दूध में होता है, ए टू
- 1:31:07प्रोटीन लेना है और गाय को बांधना है।
- 1:31:14बिल्कुल पहले पहले। ताकि कोई आफत आए।
- 1:31:19सबसे पहले गाय को पता चल जाता है। बड़े सहेस्ति प्राणी है, गाय
- 1:31:26मोस्ट प्रोबब्ली। वह उस संकट को टालने का पूरा
- 1:31:31प्रयास करेगी। गाय तुम्हारे पति वफादार है।
- 1:31:38मनुष्य की तरह बेवफ़ा नहीं चड्ढा की तरह फिर चड्ढा के चड्ढा भी तो
- 1:31:46पड़े ही जाते हैं। तुम हसा मत कर, मैं साधारण में
- 1:31:51बात करता हूँ, मेरे बोलने का अंदाज ही ऐसा है।
- 1:32:03गाय तुम्हारे आए हुए कष्ट क्लेशों को सबसे पहले दरवाजे पर बंदी
- 1:32:09होगी। वह उसको न्यूट्रालाइज़ कर देगी,
- 1:32:15खुद भी जाएगी। इसलिए इसको पूजा के योग्य माना
- 1:32:22गया हो। इसके दूध में वह अमृत रसायन है या
- 1:32:28गोबर वगैरह और गाय वगैरह का मूत पीना, यह तो मूर्खता की बात है।
- 1:32:36यह काम मत करना गोबर खाने वाला व्यक्ति।
- 1:32:40हमारे यहाँ कारी गांव में मर गया था मेरे पिता जी सुनाया करते हैं
- 1:32:47खालीनाथ थोड़ा सा अगर अमृत प्रसाद लगता है तो लेकिन ज्यादा मत गलती
- 1:32:52से खा जाना फिर मृत्यु निश्चित है तो तर्क करने वाले बहुत।
- 1:33:00मेरे पास तर्कों की भरमार आई। जब मैंने प्रथम बार कहा कि गाय का
- 1:33:05मूत जो है, वह विश्व से युक्त होता है, क्योंकि सारी रात
- 1:33:11प्रकृति सभी शरीरों की सफाई करके गुर्दों में उन विजातीय द्रव्यों
- 1:33:17को पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है।
- 1:33:19और तुम उसको पी लेते हो, तो मरोगे ही और क्या करोगे बेटा?
- 1:33:23कैसिन ए टू प्रोटीन यह जिन नस्लों में होता है मैंने आपको बता दिया
- 1:33:31यह नस्लिन होता तो भैस में भी है। लेकिन भैस का रंग काला बना दिया।
- 1:33:42परमात्मा किसी न किसी रूप से सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स
- 1:33:48अब्रीवेशन्स सिंबल्स तुम्हें समझाता है रंग के द्वारा।
- 1:34:05तो गाय आपकी बहुत सी दुख, दरिद्रता, कष्ट, क्लेश, व्यर्थ के
- 1:34:15उत्पात जो तुम्हारे मन में तुम्हारा मन चलता है, दिन में
- 1:34:19नहीं रात को सोए पड़े हुए चलता है, ऐसे तो नींद नहीं आती।
- 1:34:24मौत का 1 दिन मोईन है मौत का 1 दिन मोईन है नींद क्यों रात भर
- 1:34:32नहीं आती मर ही जाओगे रोज़? आज तू आके से कल टूर जाना।
- 1:34:42दुनिया इक सरा जो बने आंसू मिट ना आखिर रहना रब दाना।
- 1:34:59जो सा आवे समज घणिमत जो सा आवे समज घणिमत हो रसा की कैना तू बा
- 1:35:15जिंदड़ी दा सदा नी वज देय रहना। तुम बा जिंदड़ी दा सदानि वजह दे
- 1:35:25रहना तुम बा जिंदड़ी दा सदानि वजह दे रहना।
- 1:35:321 दिन तार ने टूट जनाए। 1 दिन तार ने टूट जाना है जद वा
- 1:35:45सिड़ा दे पैना तुम बा जिंदड़ी दा सदा नी वा जदया रहना।
- 1:35:57सादानी वज दे आरे धन्यवाद।