Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 May 25 - जैसे मीरा, श्री कृष्ण में विलीन हो गई थी, तो क्या हम अपने आप को, “आपमें” विलीन कर सकते हैं?
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- 0:00प्रणाम बाबा जी कल के प्रवचन में आपने कहा कि मीरा ने अपने आपको
- 0:09श्रीकृष्ण में इन्सर्ट कर दिया था और हम अपनी आस्था के अनुसार।
- 0:17किसी मूर्ति में भी अपने आप को इनसर्ट या झोंक सकते हैं।
- 0:26बाबा जी मेरा आपसे प्रश्न यह है कि क्या हम अपने आपको आप में
- 0:35इन्सर्ट कर सकते हैं? यह ठीक नहीं होगा।
- 0:45मैंने यह प्रश्न आपसे इसलिए किया क्योंकि आप ये भी कहते हैं कि
- 0:51गुरु सबसे बड़ी चिपकाहट है। कृपया जवाब अवश्य दें, मैं दुविधा
- 1:03में हूँ, मैं आपसे दीक्षित में हूँ और अपने आपको आप जी में
- 1:13झोंकना। निराकार ईश्वर में झोंकने से शायद
- 1:20थोड़ा आसान है, शायद धन्यवाद शबनम यूएसए।
- 1:39शायद मेरी ज़िन्दगी का कठिन संप्रेषण आज मेरे सामने आया।
- 1:58जहाँ मुझे परमात्मा से ज्यादा महत्त्व गुरु को देना होगा।
- 2:05चलिए हम सीढ़ी दर सीढ़ी पायदान खंगालते हैं।
- 2:21मैंने बिलकुल कहा मीरा ने अपने आप को कृष्ण में इन्सर्ट कर दिया और
- 2:34भक्त को अपने आप को भगवान में इन्सर्ट करना ही होता है।
- 2:40फिर वो भगवान जी से भी मानिए हैं उसमें।
- 2:46धन्ना ने अँघड़ पत्थर में इन्सर्ट कर दिया।
- 2:49अपने आप को मूर्तियां भी इसीलिए बनाई थीं, कई कारण थे, ये भी एक
- 3:01कारण था। क्या आप इन मूर्तियों में धीरे
- 3:09धीरे धीरे धीरे श्रद्धा विश्वास को बढ़ाए जाएंगे, हर सुख दुःख के
- 3:17सामने बैठ के करेंगे तो आपको इनसे स्नेह हो जाएगा।
- 3:33और स्नेह होते होते श्रद्धा प्रबल होगी और श्रद्धा के बिना स्वयं को
- 3:44100% झोंकने के बिना यह कोई रास्ता नहीं है।
- 3:48अध्यात्म में न ही संसार में संसार में भी अगर बुलंदियों की
- 3:55ऊंचाइयों को छूना हो तो यू विल हैव टू इन्सर्ट कंप्लीटली इन द
- 4:00ऑब्जेक्ट? थोड़े थोड़े दो खे हैं।
- 4:15सभी जगह तो बाबा क्या हम अपने आपको आप में इन्सर्ट कर सकते हैं?
- 4:29इतनी दूर बैठे हैं। यूएसए दूसरे किनारे पर वहाँ से आज
- 4:41तो न सकेंगे रोज़ लेकिन क्या है सच रेखा?
- 4:53अब आइए एक एक पायदान को खंगालते हैं हम बिल्कुल ठीक है ये प्रश्न
- 5:07के निराकार जिसे हमने कभी देखा नहीं, उसमें श्रद्धा न बन पाएगा
- 5:15और वह मूर्ति। जीसको हमने जाना नहीं, उसमें भी
- 5:21इतनी श्रद्धा प्रबल न हो सके। तुम्हें क्या पता ये सरस्वती माता
- 5:28होती है कि नहीं? फिर तोड़ने वाले बहुत आ जाएंगे।
- 5:38ये लक्ष्मी, ये दुर्गा, ये काली, ये विशु शंकर तुमने कभी जाना तो
- 5:51है नहीं, ये कृष्ण जो चलेगा? तो मूर्ति भी जड़ है और वह जो
- 6:07कृष्ण जिसमें तुम इन्सर्ट कर रहे हो?
- 6:09अपने आप को, वह भी आज तो जड़ है कभी छा।
- 6:17तब आप चुक गए थे तो तब भी लेकिन चुक गए बस तुम चुकते ही चले जाते
- 6:26हो यही तुम्हारी तुमने नियति बना ली।
- 6:32चूकना तुम्हारे जैसे ही स्वभाव हो गया फिर अब क्या रास्ता बचता है?
- 6:43मीरा ने अपने आप को इन्सर्ट किया, रामकृष्णा परमहंस ने भी अपने आप
- 6:49को इन्सर्ट किया। बड़े मज़े की बात है।
- 6:53अंतरिम बातों तक हम जाते नहीं, अंतिम छोरों को हम छू नहीं पाते
- 7:01रामकृष्णा की वो कहानी जोतुर्तापुरी।
- 7:06ने कहा कि काट दो इसकी गर्दन को ये कल्पना है तुम्हारी तो
- 7:13रामकृष्णा का काटू कैसे कृति जैसे काली बनाई कल्पना से वैसे ही
- 7:21कल्पना की तलवार ले लो काली भी कल्पना।
- 7:27और तलवार भी अब तुम कल्पनाओं में बना लो और कल्पना से कल्पना का
- 7:32गला बेच दो धड़ से अलग कर दो, समझ आया उस स्थल पर जाकर रामकृष्णा को
- 7:40पहली बार। और उसने झट से कल्पना की तलवार
- 7:46उठाई और काली का सर धड़ से अलग कर दिया।
- 7:49काली है नहीं, हम तुम्हारी मान्यता है बस यही धोखा है।
- 7:58फिर ये कुरान पैदा हो गया। फिर विष्णु के चार हाथ बनाए
- 8:06जाएंगे। चारों हाथों में अलग अलग अस्त्र
- 8:08शस्त्र होंगे। फिर लक्ष्मी के किसी के हाथ में
- 8:17कमेल का फूल बुक किसी के हाथ में गुलाब।
- 8:22किसी के आस्त में कड़क चक गधा किस्मत हमारी कल्पना है और तुम
- 8:33झगड़ोगे निभाते फिर तुम कहोगे नहीं।
- 8:45और सभी धर्मों में मूड मन ऐसे सोपन खोज लेता है।
- 8:56मुसलमानों ने शिया सुन्नी बना लिया।
- 8:59कौन धर्म जो बचा जैन? कितना अहिंसक धर्म है?
- 9:06उसने दिगंबर से तांबर बना दिए। हिंदू धर्म में शैव और व्यसन हो
- 9:12गए। क्या करोगे?
- 9:15इन मूड लोगों का क्या करोगे? ये तो बगयार्ड को शेर की खाल
- 9:30पहेलाने में ज़रा भी पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि जानता नहीं हूँ तो
- 9:39फिर रास्ता क्या पस्ता है? और फिर तुम्हारे पे आपत्ति आई तो
- 9:46ये कहानियों गढ़ेंगे, नई नई कहानियों गढ़ेंगे, नरसी का बात
- 9:53भरा होगा, लेकिन नरसी की समर्पित भावना तुमने देखी?
- 10:04क्या तुम उस समर्पित भावना में आ सकते हो तो फिर भगवान तुम्हारा
- 10:11बात भरेंगे, कोई शक नहीं। यह अटल सत्य है, लेकिन बात तो यही
- 10:18है। कैन यू इन्सर्ट युअर सेल्फ क्या
- 10:24तुम अपने आप को गवां सकते हो झोंक सकते हो?
- 10:31सवाल ये है तुम अपने आप को गवाने का साहस सकते हो।
- 10:41जैसे परवानम क्षमा में अपने आपको झोंक देता है और आग की भेड़ से रह
- 10:47जाता है, मर जाता है, फना हो जाता है उसकी बसम भी तो नहीं बजती अपनी
- 10:58योग्यता को देखो, तुम डरते हो। कि कहीं आग के भीतर हाथ न जल जाए
- 11:09और तुमने बड़े अंतरिम बातें बोलनी शुरू कर दी।
- 11:12अहम ब्रह्मास्त्र जो जलता नहीं कटता नहीं, गलता नहीं, सूखता
- 11:17नहीं। ये बातें बोलना शुरू कर दिया और
- 11:22इनका जाप शुरू कर दिया एहम ब्रह्मस्त्र, एहम ब्रह्मस्त्र
- 11:28नहीं ऐसा तो नहीं है बहुत से हो गया तुम चीज़ न कब वो तल छूने के
- 11:36लिए राधा राधा करना नहीं होगा। उस चेतना के तल तक जाने का असीम
- 11:42दुस्साहस से जुटाना होगा। यह एक तोले की जीभ हिलाने में
- 11:53जाता क्या है? गैराफी तो कुछ नहीं चलता तो क्या
- 12:03करें बाबा सभी चीजों में अपने धोखे मूर्तियों में अपने धोखे
- 12:18हैं। क्योंकि मूर्तियों में फिर तुम दो
- 12:21हाथ लगाओगे, वो चार लगाएंगे, वो सहत्र हाथ लगाएंगे और फिर वो ही
- 12:27उदयड़ बन और तुम कहते हो, मैं दुविधा में हूँ तो पुत्री तुम
- 12:32दुविधा में ही रहोगे क्योंकि जिसने कहा नहीं, नहीं ये दो नहीं।
- 12:38उसके तो 1000 हाथ है और बात तो उसकी भी ठीक है फिर क्या करोगे और
- 12:50कोई कहेगा सभी हाथ उसके हैं तो बात उसके भी ठीक है।
- 12:55ये ज्यादा ठीक है, सभी हाथ उसके हैं।
- 12:58रामकृष्णा परमहंस को कहा विवेकानंद ने नरेंद्रन माँ से कह
- 13:03दो, पानी भी नहीं पिया जाता, एक अग्रास रोटी भी नहीं खाई जाती,
- 13:11माँ तो इतना तो करते हैं। बाकी तो दुःख भोगने का ज़रा थोड़ा
- 13:20सा पानी गल सूखता है। प्राण कपते हैं पानी के बिना
- 13:27थोड़ा पानी पी सकूँ एक ग्लास रोटी का।
- 13:35क्या तू इतना सह नहीं कर सकते? बहुत दिन कहा सुबह पूछते आके आपने
- 13:48कहा अरे मैं भूल गया नरेंद्र आज कहूंगा।
- 13:57मतलब ये भी कोई बोलने जैसी बात 1 दिन तो हद हो गई।
- 14:101 दिन हद हो गई जब डॉक्टर आए और उनके कैंसर के घोड़े में मवाद भरी
- 14:15हुई थी। और डॉक्टर उसमावाद को निकालने लगे
- 14:25और हाइजीनिक और कॉटन से साफ करने लगे और उस हाइजीनिक कॉटन को से
- 14:31साफ करके उस पानी में रख देते उस कॉटन को।
- 14:40पानी गंदा हो गया, चढ़ा संवारने लगी, दुर्गंध आने लगी।
- 14:46सभी दूर हट गए। नरेंद्र वहाँ खड़े रहे, डटे देखते
- 14:53रहे, वो भीगते रहे थोड़े को। और मवाद निकलती रही।
- 15:05दुर्गंध बहुत ही घनी थी। डॉक्टरों ने नाक पर पट्टी ले ली,
- 15:13लेकिन नरेंद्र वैसे ही खड़े। देखा शीश से दूर हट चूके थे ये
- 15:20कादू कादू सब बाहर हो गए थे। जब खून आने लगा।
- 15:27मवाद खत्म हो गए तो डॉक्टरों ने चैन की सांस ली।
- 15:37और क्या किया अचंभित करने वाला यह वातावरण?
- 15:42नरेंद्र दत्ताए जो गिलास उठाया और गट से भी गए सर, अपन वो गंदा पानी
- 15:50जो मवाद थे, पानी नहीं थे सवन्य रोका अरे?
- 15:59डॉक्टरों ने रोका सभी भाग की आये क्या करता है पागल हो गया है?
- 16:08नरेंद्र की आँखों में आंसू थे गुरु भक्ति से भरा हुआ उसका
- 16:14ह्रदय। जो देखा उस स्तर पर जाकर उदृश्य
- 16:22उसने अपना अफवाह खो दिया, वह जान गया कि मैं हूँ कौन?
- 16:29वह जान गया कि इस सृष्टि को चलाता कौन?
- 16:32जिसने बनाई वो चला था और यह सृजना बड़ी भारी है।
- 16:38इस विराट विलक्षण सृजना का कहीं कोई और छोर नहीं है और उस दिन
- 16:45उसने देख लिया वहाँ जाकर उस छोर पर।
- 16:52कि मैं इस सुगराट संसार में अपने आपको दर्रा भी तो नहीं कह सकता।
- 16:59कण भी तो नहीं कह सकता। कण तो मेरे से बहुत बड़ा है अरब
- 17:04गुणा बड़ा है, मैं करीब प्रिय नेग्लिजिबल हूँ नगण्य हूँ।
- 17:15सारा कैंसर का मवात वो पी गया और बड़े मजाक की बात है।
- 17:25सभी गरीब आ गए उसको दूध उठा के ले गए नरेंद्र को।
- 17:34उसके गले में उंगलियां मारी ताकि उलटी हो जाए।
- 17:37उलटी नहीं हुई और पानी पिलाया। डॉक्टर बैंडेज करने लगे, पट्टी
- 17:48बांधने लगे, काम पूरा करके वो चले गए।
- 17:55शीशों से भूल गए, इसका ख्याल रखना बड़े विषाक्त कटाणु इसने पी लिया
- 18:03तुमसे एक बात है शायद इतनी छोटी उम्र में नरेंद्र का मर जाना
- 18:10उनचालीस उम्र की। कोई उम्र नहीं होती।
- 18:1639। ये भी एक कारण रहा होगा।
- 18:25कहीं ना कहीं उस विष ने घर कर लिया होगा।
- 18:29कहीं ना कहीं उसके कीटाणु बेहतर के लड़े होंगे, नुकसान पहुंचा
- 18:36होगा उसके टिश्यूज़ को। ये भी उसकी अल्प आयु का एक कारण
- 18:42बना। लेकिन इतनी दूर तक आपकी समझी जाती
- 18:48हूँ। भक्तिभाव गुरु का प्रत्येक एक
- 19:02अद्वितीय उदाहरण। तो मीरा भी पति मानती थी कृष्ण
- 19:08को, जबकि कृष्ण को देखा नहीं था, उस निराकार से उस निरंकार से
- 19:17प्रगाढ़ संबंध जीसको जाना नहीं देखा नहीं अनजाना।
- 19:28अज्ञात उसके प्रति प्रेम मुश्किल तो बहुत होता है।
- 19:42मूर्ति से प्रेम करोगे, चिप के जाने का पूरा भय है चिप कही नहीं
- 19:47जाओगे। वरना विखंडित हो जाओगे, आज ये जो
- 19:52हिंदुस्तान पागल होने की कगार पे खड़ा इसका मुख्य कारण मूर्तिवाद
- 19:59है, हमने इतने भगवान बना लिए हैं और रोज़ भगवान बढ़ते ही जाते हैं।
- 20:10हर रोज़ एक नया भगवान खड़ा हो जाता है।
- 20:15हर रोज़ कोई नई माता की खड़ी हो जाती है।
- 20:18ये लड्डू को पार अभी अभी जन्मे हैं।
- 20:27कभी संतोषी माता जन्म लेती है, कभी कोई माता जन्म ले लेती है,
- 20:35किसी को गधे पर बैठा देते हो, किसी को उनलू की सवारी करा देते
- 20:39हो, ये तौहीन नहीं और क्या है? तुमने देवी देवताओं का मजाक तक
- 20:46बना दिया, लेकिन अंधभक्तों ने चिपटना नहीं छोड़ा, तुम छितरों का
- 20:53हार भी पहना दो, जूतियों का टूटी जूतियों का तो भी ये उसकी पूजा
- 20:59करने लग जाएंगे। ये ऐसे शानदार लोग हैं।
- 21:07मैंने एक भक्त को गोबर खाते देखा और यही नहीं उसने गोबर की पार्टी
- 21:15पर डाली और यही नहीं खाने वाले पार्टी पर इन्विटेशन।
- 21:22पाकर बड़े खुशनसीब समझने लगे अपने आप को।
- 21:28मैंने कहा भाई गऊ का गोबर ही तो फिर मानव मल चलने दो, वो ज्यादा
- 21:34बढ़िया होता है। ऐसे ऐसे मूड लोगों की जमात।
- 21:42अगर मैं कह दूँ कि यह पागलपन की कगार और ऐसे ऐसे लोग हमें लीड
- 21:49करने के लिए आह निकले हैं तो फिर क्या होगा?
- 21:56और देश मंगल की सतह के ऊपर खोज रहे हैं।
- 22:00चट्टान टूटी और सल्फाइट है इसके और हम खोज रहे हैं।
- 22:09किसी अमारत के नीचे कोई मंदिर निकले, पूजा का ढंग हमने सीखा
- 22:18नहीं। मंदिरों की संख्या बढ़ाते जाओगे
- 22:24सलीका पूजा का आया नहीं तुम्हें सारी धरती पे मंदिर भी उषाड़ दो
- 22:36मस्जिद भी उषाड़ दो चर्च गुरुद्वारा भी उषाड़ दो।
- 22:40जो कि आज प्रत्येक धर्म की संभावना है।
- 22:44इच्छा है बोल बाला हो हमारा दरअसल में उनका अहंकार कहता है कि हमारे
- 22:52अहंकार का बोल बाला हो। बहाना है मूर्तियां तो बहाना है,
- 22:57मंदिर तो। मंदिरों की आड़ में इनके भीतर ये
- 23:03छिपा है कि मेरा अहंकार प्रॉब्लम हो।
- 23:08मेरा डंका बजाय मेरी ध्वजा फहर आए, इनको कोई मतलब नहीं है।
- 23:14राम से कोई मतलब नहीं हनुमान से। डंका फेहरना चाहिए इनका ये है
- 23:25असली भीतर की कीमियां या क्रोनोलॉजी कह लो, वास्तविकता तो
- 23:34यही है। भक्तजन नाराज तो हो गए।
- 23:41नाराज न हो इसके लिए मैं अग्रिम प्रार्थना करता हूँ और अगर नाराज
- 23:48भी हो गए तो मेरा कोई उगाड़ लो, कुछ है मेरे पास उगाड़।
- 24:02तुमने कहा पुत्री फिर क्या करें? मैंने कहा कठिनतम सवालों में से
- 24:12एक आज मेरे सामने आया क्या हम? गुरु में इन्सर्ट कर सकते हैं।
- 24:20यह भी बड़ा खतरनाक है। मैं कैसे कह दूँ कि गुरु में
- 24:26इन्सर्ट कर दूँ? तो मैंने एक चौथा तरीका सोचा था,
- 24:31पहले जो मेरे से इम्प्लॉयमेंट कर रहा हूँ आज।
- 24:39खुद पर इम्प्लीमेंट कर रहा हूँ, अपने आश्रम पर यहाँ कोई नहीं
- 24:43रुकेगा, कोई कम्युन नहीं होगा और बड़ा किया बाबा ने कम्युन मत
- 24:50बनाना बाबा। और जानते थे, अच्छी तरह जानते थे।
- 24:56फिर गुफाएं बनेंगी, फिर कुमार और कुमारियाँ आपस में एकांत में
- 25:06प्रेमा लाप करेंगे। फिर बाहर होगा श्वेत और भीतर होगा
- 25:16काला और बीच में होगा लाल लहू का रंग समझने वाले समझे जाएंगे ना
- 25:25समझे वो अनाड़ी, जीस सब जगह चलता है।
- 25:34तू इस धूप से इस आग से बचा कैसे जाए?
- 25:40फिर मैंने अपना तरीका सोचा। यह तरीका शुभ रहेगा और मैं बाहर
- 25:45जिद हो गया। नहीं आएगा कोई यहाँ।
- 25:51आएगा तो सिर्फ तब आएगा जब हम बुलाया और समूह में आओगे और
- 25:58दीक्षा लेके अपने अपने घर चले जाओगे, बस यही है व्यवस्था आप भी
- 26:04आई थी पुत्री मुझे पता है। तो अब आप अपने घर बैठी और मुझे जब
- 26:16आपसे कह तुम अपने घर जाओ, मुझे पवन पुत्र के वो शब्द याद आ जाते
- 26:23हैं जो उन्होंने मुझे संदेश दिया था।
- 26:26बिल्कुल वही संदेश मैं आपको सुना देता हूँ।
- 26:29जब मिलेगा घर बैठे मिलेगा तुम यहाँ से चले जाओ यहाँ ठग बैठे हैं
- 26:36सब हरिद्वार में तुम इनसे क्या ढूंढ़ते हो न हरिद्वार में?
- 26:48न कहीं ओह, न रब मके, न रब तीरथ तुम मक्का कर लो या तीरथ कर लो।
- 27:07पुलिस शाह कहते हैं। रब मक्के जाने से नहीं मिलता, ना
- 27:13हज करने से मिलता है, ना तीर्थों पे।
- 27:17जप करने से मिलता है, ना तप करने से मिलता है, ना जप से ना तप से।
- 27:28बुलिश कहते हैं। रब वहाँ नहीं बसता जहाँ केवल
- 27:33किताबें पढ़ी जाती हैं, रब दिलों में वाश करता है, अपने दिल की
- 27:40सफाई कर। तुमने कहा जीवंत गुरु यहाँ आके
- 27:58अटक जाती है इंटेंशन इन पत्थर की मूर्तियों को तो तुम बहुत गढ़ते
- 28:06जाओगे पहले एक शिव की मूर्ति होती थी शंकर।
- 28:12और वो भी मूर्ति नहीं थी वो भी एक सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन जस्ट एस ए
- 28:20अब्रीविएशन जीसको हम लिंग कहते थे चिन्ह साइन वह शिव का चिन्ह था।
- 28:31बस चिन्ह जैसे हेच टू ओह यह पानी का चिन्ह है, सिम्बोलिक चिन्ह है,
- 28:38प्रतीकात्मक चिन्ह है सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन ऑफ वाटर हेच टू ओह
- 28:46इसका मतलब है दो अनु हाइड्रोजन। और एक आनंद ऑक्सीजन, लेकिन हमने
- 28:56उसके बाद क्या विश बना लिया? शंकर की मूर्ति बना ली, फिर शंकर
- 29:02का परिवार बना लिया। पार्वती कार्तिक के गणेश।
- 29:10और फिर दुर्गा बना ली, फिर लक्ष्मी, फिर सरस्वती सब बना
- 29:14लिया। आज झुंड है कहते 33,00,00,000
- 29:17देवी देवता सब भगवान है, फिर तुम इतनी भीड़ भड़के में पागल ना होगे
- 29:28तो क्या संत हो जाओगे? आज सब गडबड हो गया है, ऐसी भीड़
- 29:37भड़के में शोरपुल में खो गया है संत उसे तुमने पागल कहना शुरू कर
- 29:42दिया और ऐसे भीड़ भड़के में तुमने कुछ पागलों को संत कहना शुरू कर
- 29:48दिया। यही दुविधा है तो पुत्री मूर्ति
- 29:54में है तो सब कुछ लेकिन मूर्ति पर तुम कुर्बान हो जाओ, तुम न बचो,
- 30:05इन्सर्ट हो जाओ? लेकिन यह संभव नहीं है प्रैक्टिकल
- 30:12रूप से काव्यत्क रूप से यह है काव्यत्क रूप से यह तथ्य है,
- 30:24लेकिन प्रयोगात्मक रूप से यह नहीं है।
- 30:28और अगर तुम कहो कि कुछ ऐसा भी होता है जो नीम से हट के होता है,
- 30:47बिल्कुल होता है। लेकिन वो बड़े थोड़े लोग होते है।
- 30:54समूह नहीं चल सकेगा तो मूर्तियों को ठुकराना नहीं है, लेकिन
- 31:00मूर्तियों को बस भूल जाना है मूर्तियों।
- 31:08ना तो बेचारी बोलती, ना खाती, ना उनमें आवाज, ना सोती, ना जागती ना
- 31:16तुम्हें कुछ राहत दिखा सकती हूँ। मूर्ति तो जड़ है, क्या करोगे दुख
- 31:25रोओगे? आगे से दुख का जवाब नहीं मिलेगा,
- 31:30रोते रहोगे? कोई जवाब नहीं मिलेगा।
- 31:39मूर्ति मौन है क्योंकि जड़ है तुम लाख प्राण प्रतिष्ठा कर लो।
- 31:46लेकिन वह सिर्फ तुम्हारे डकोसले हैं।
- 31:50पंडितों की चालबाजी पक्षों में प्राण नहीं पड़ते तो कबीर ने कह
- 32:01पत्थर पूजा हरि मेल है तो मैं पूजो, पहाड़।
- 32:05मैं पूरे पहाड़ को ही पूरी देता हूँ लेकिन मिलता नहीं।
- 32:12ना अनघड़ पत्थर में मिलता ना मूर्ति में मिलता हाँ नन्ना
- 32:17पहुंचे, रामकृष्णा पहुंचे बिल्कुल पहुंचे।
- 32:22लेकिन निर्विकाल पर समाधि तक नहीं पहुंचे।
- 32:25वह मूर्ति व अनगढ पत्थर आड़े आ जाता है।
- 32:30अनगढ पत्थर यह मूर्ति या कोई भी ऑब्जेक्ट अब आप समझ लेना इस थीम
- 32:36को अनगढ पत्थर दन्ना निभाया। या मूर्ति रामकृष्णा पर मंच ने
- 32:46पाया या कोई भी ऑब्जेक्ट जिसे कोई भी पहुंचा जे तुम्हें से विकल्प
- 32:55समाधि तक ले जाएंगे बड़ा सुखद मालूम पड़ेगा।
- 33:00तुम इससे संवाद करोगे, हसोगे खेलोंगे इसको खिलाओगे और ऐसे लोग
- 33:05हैं जो इनकी कहानियों बनाएंगे। कृष्ण तुम्हारे लिए पानी भर के ले
- 33:11आएगा, तुम्हारे बाप का गोल रहेगा, कृष्ण तुम्हारे लिए आटा बुसा के
- 33:18ले आएगा। कृष्ण तुम्हारा बात भरेगा नृसि
- 33:24बनके कहानियों हैं संवेदना प्रकट करने के लिए तथ्यगत सत्य नहीं है,
- 33:34मैं तुमसे कह दूँ बेटी इसमें ओरिजिनल मत।
- 33:38का व्यात्व कल्पनाओं में खो जाओगी तुम और हाथ कुछ भी ना आएगा हाथ
- 33:47लगेगा अंधेरा खोजने चलोगी रोशनाई को, क्योंकि इनमें खुद ही चेतन
- 33:55नहीं। अब राधे राधे शब्द में चेतनता
- 34:00नहीं, राधा खुद जड़ता हो गई। शब्द सदा ही जड़ होते हैं, मुझे
- 34:09लोग कह देते हैं गायत्री गायत्री श्रीराम आचार्य ने प्राण
- 34:15प्रतिष्ठित करके। 24,00,000 पुरुष शरण मंत्र करके
- 34:20इसे जागृत कर दिया। मैंने कहा वह मूर्ख था, 3200
- 34:28शस्त्र रच दिए, मैंने कहा उसे जला दो।
- 34:35तो गायत्री परिवार बिखर जाएगा। बिखर जाने दो अगर कुछ मूडों को
- 34:42विदा करना पड़े तो कर दो ये कोई कीमत नहीं चुकाने के लिए ज्यादा।
- 34:53क्योंकि इन्होंने झूठ बोला, उसे इसे कोई नहीं जान पाया और जाना न
- 35:02ही उसे कोई जान पाएगा। उसे जानने का भरोसा दिलाना स्वयं
- 35:09में एक मुड़ता है। बस उसकी झाणी पालेना दूर से वह
- 35:24अवस्था जिसे सतोरी कहा। या तो झाई मिल सकती है तुम्हें
- 35:31सटोरी के रूप में समझो या दूसरे बिटिया जो तुमने कहा इन्सर्ट हो
- 35:37जाओ, उसमें मिलना पड़ता है बूँद बनकर समुद्र में खो जाओ।
- 35:46उसका स्वाद ही चखना होता है। उसे ऐसा पियो की मदहोशी के आरंभ
- 35:53में तुम उसी में समा जाओ उसके साथ एकाकार हो जाओ, बूंद समुद्र को
- 36:01जानती नहीं पीती है, उसका स्वाद चखती है, जान ना और पीना।
- 36:08इसमें बड़ा भारी वेद है और तुम यहीं चूक जाते हो।
- 36:13तुम पीने जो पिया जाता है उसे जानने की चेष्टा करते हो।
- 36:20पीना है स्वाद तुम्हारे भीतर उतर कर तुम्हारे प्राणों की रूह में
- 36:26बस जाता है। और जानना तुम्हारी खोपड़ी में आना
- 36:31मेरा समुद्र कभी खोपड़ी में समाप्त है क्या?
- 36:36ये तो बिलकुल सोक्रेटेज की वही बात हुई के प्यारी में सूत्र को
- 36:40भरने की गागर में सागर को समाने की तुम्हारी व्यवस्थाएँ।
- 36:48सारी गलत हैं इसलिए अगर तुम ये कहते हो कि वह गागर में समा जाएगा
- 36:58सागर तो फिर तुम परमात्मा को मानोगे नहीं समझ लेना?
- 37:05तुम उसको पी भी नहीं पाओगे क्योंकि तुमने बेसिक फॉर्मूला
- 37:10पाया ही नहीं, सर्च ही नहीं किया। अगर इन मूडताओं में उलझे रहे कि
- 37:16हम जायेंगे तो फिर तुम इसे पी भी नहीं पाओगे।
- 37:21शराब को जाना नहीं जाता। शराब को सिर्फ पिया जाता है, उसका
- 37:26लुत्फ उठाना होता है। बस इसके अलावा उसका कोई उपयोग
- 37:33नहीं और सिर्फ यही उपयोग है। अगर देखते रहो, एनालिसिस करते रहो
- 37:39तो तुम्हें मिलेगा क्या ज़रा सोचना।
- 37:45एनालिसिस करने वाले उसके तत्वों को इतने परसेंट, इतने परसेंट,
- 37:51इतने परसेंट, इसके अलावा खोज भी क्या पाते हैं और उसमें कुछ आनंद
- 37:57मिलता है। नहीं मिलता, फिर कोई कहे के मध्य
- 38:02में बड़ा शराब और में बड़ा निशाना होता है।
- 38:08फिर कोई कैसे मानेगा? जब तुमने पी ही नहीं तुमने तो
- 38:12सिर्फ उसका एनालिसिस किया। इतने परसेंट पानी, इतने परसेंट
- 38:17अल्कोहल। इस फैक्टरी की बनी फैक्टरी इतनी
- 38:23दूर है। ये सब सूचनाएं हैं।
- 38:29नाभा की फैक्टरी में बना के भोपाल की कृषि फैक्टरी में बना ये
- 38:35सूचनाएं हैं। और महज सूचनाओं से वो रस नहीं
- 38:39मिलता, शराब तो पीनी पड़ती है। शराब के बारे में जानने की चेष्ठा
- 38:48तो मैं उलझाती के पुत्र जानना मत। अगर तमन्ना है तो पीना और मदहोश
- 39:00हो जाना। बस इनसर्ट का मतलब उजाही था तुम न
- 39:05बचो, तुम्हारा वजूद न बचे बाकी न मैं रहूँ।
- 39:15न मेरी बंदगी रहे, न मेरी बंदगी रहे, न मेरी बात तरह, न मैं रहूँ,
- 39:24बस तू ही तू रहे तो बाकी सब रास्ते बेकार होते।
- 39:33लेकिन एक रास्ता जिसमें आशा की उम्मीद है वह गुरु न मूर्ति
- 39:43बोलेंगे, न सुनेगी, न खायेगी तुम लाख कोशिश करो।
- 39:48एयर कंडीशन में लोग उसको सुला देते हैं, खुद गर्मी में पंखा
- 39:52झेलते हैं। रात को इनसे बड़े मूड मैंने
- 39:56दुनिया में कहीं नहीं देखा। यह है जो लड्डू गोपाल गंदे नाले
- 40:08में फेंकने योग्य था उसको तुम सुलाते हो एसी में।
- 40:14और खुद तुम सोते हो, बिना पंखे के कमरे में ज़रा सोच के देख लू फिर
- 40:24तुम अपने आप को क्या कहोगे? तुमने सेल्फ एनालिसिस किया ही
- 40:28नहीं। आज सारी दुनिया किसी न किसी
- 40:35मूड़ता में उलझी हुई है। ये मूड़ताएं ही तुम्हें गुलाम
- 40:39बनाए रखती हैं। यही तुम्हें उस आनंद तक पहुंचने
- 40:42में बाधा है और मूड़ता कोई भी हो मैंने थोड़े से भारत कटवा ली।
- 40:51नहीं तो बुलाता नहीं। मैं खुद ही काट लेता हूँ तो टेढ़े
- 40:54मेढ़े कट जाते हैं, फिर कोई बाल बड़ा है, कोई छोटा है, कुछ लोग
- 41:05कहते हैं बाबा अच्छे से बुला लिया करो, सुन अच्छे नाई को।
- 41:12और कोई कहते हैं कि ये बाल कटवाए को आपने तो कतल कर दिया अब मैं
- 41:16किसको क्या कहूँ मैं वो तो हूँ नहीं जो दुविधा में होते जाऊं।
- 41:24मैं शांत रहता हूँ। बस जब समझायेगी तो दोनों ही समझ
- 41:33जाएंगे। एक समझ जाएगा कि श्रृंगार में कुछ
- 41:37नहीं रखा, मैंने काट लिए टेड़े मेढ़े काट लिए अगर एक पूरे का
- 41:43पूरा भी सा काट लिया तो क्या फर्क पड़ता?
- 41:45तुम हँसते सिर्फ ज़रा सोचिए क्या कल्पना होती?
- 41:50एक किस्सा पूरा काट देते और फिर बोलता यह मजाक था ना और फिर यह
- 41:59पूरे इतने ऐसे ही कर देता कि यह ऊंट भी दखाई न पड़ते।
- 42:04फिर तुम्हें पता ही नहीं लगता ये सारे ढक लिए जाते।
- 42:09हम कहते हैं ये कौन बोल रहा है, ये आवाज़ कहाँ से आ रही है?
- 42:14ये लंबे लंबे बाल हैं, ये रीच है या बंदा है?
- 42:19मत असुवाई ऐसी मूर्ताओं ने हमको केरल लिया है।
- 42:31जिन केसों को हम कतल करते हैं, उनको रखने का क्या प्रयोजन है?
- 42:39वह भी दू दू करके सबसे पहले जलने में सहायता करते हैं।
- 42:43मुर्दे की। बस एक लकड़ी की शुद्ध लकड़ी की
- 42:46तरह काम करते हैं। वो घने होंगे, अच्छे से जला
- 42:53देंगे। खुपड़िया को और खुपड़ी ही सबसे
- 42:57ज्यादा मुश्किल होती है तभी इसे कपाल क्रिया करके तोड़ना पड़ता
- 43:03है। और शायद भगवान ने इसलिए इतने लंबे
- 43:06बांध लिए ये थोड़े से अच्छे से जल जाए।
- 43:10आखिर तो सभी का आता है वुतन कयामत की रात होती है वो आता है दबे
- 43:26पांव आता है। और वो नहीं देखता कि तुमने मेकअप
- 43:31कर रखा है, चेस बढ़ा रखे हैं या नहीं बढ़ा रखे, तुम कर क्या रहे
- 43:38हो वो तुम गीता पढ़ रहे हो, कुरान पढ़ रहे हो, ग्रंथ पढ़ रहे हो या
- 43:46बाइबल पढ़ रहे हो। वो देखता ही नहीं था क्योंकि वो
- 43:51जानता है पर पर गड्ढे न दिए ते पर पर हुई।
- 43:59अखबार नानक लिखे एक अगर ते बाकी चकणाचार।
- 44:07अब गड्ढे लते रोपड़ पड़ गए, पड़ पड़ हुए ख्वाब होने वाली बात नानक
- 44:16लिखे एक गलत वो एक बात लगती है टेके क्या इस अहंकार को गला दो,
- 44:24यह बात लिखे लग जाती? ते बाकी चकण चार तुम्हारे सभी
- 44:29फिलस्फिकल मेथड्स क्रियाएं विज्ञान भैरव तंत्र के 112 या
- 44:37हजारों सब बेकार हो जाते हैं। रस्ते बस एक ही बात लगती है।
- 44:46तो तुम किसी न किसी तरह उसे केंद्र तक पहुँच जाओ अभी कल मुझसे
- 44:51किसी ने प्रश्न पूछा इसका मतलब बहुत से रास्ते हैं वहाँ तक जाने
- 44:55के लिए, मैंने कहा केंद्र से परिधि तक जाने के कितने रास्ते
- 45:00हैं ज़रा बताओ। प्रत्येक बिंदु में 1000 रास्ते
- 45:04छिपे पड़े। और कितने बिंदु हैं इस फियर पर
- 45:08ज़रा गोला में झांक के देखो एक केंद्र ले लो प्रकार ले लो और उसे
- 45:15एक गोला खेच लो सर्कल, फिर फिर उस सर्कल पर तुम पॉइंट्स बिंदु कितने
- 45:23होते हैं ग। और उस एक बिंदु में 1000 रहते
- 45:28हैं। परमात्मा की तरफ जाना चाहिए।
- 45:30प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है और तुम उसे कहते हो कि आप मुसलमान बन
- 45:35जाओ, आप हिंदू बन जाओ, आप ये बन जाओ, आप ईसाई बन जाओ, लालाक्ष
- 45:44दिखाते हैं। ये व्यक्ति जो लालच दिखाते हैं ये
- 45:47खुद मूड होते हैं, ये पहुंचे नहीं है।
- 45:51अभी बस ये संख्या इन्होंने एक सीखा के पार्टी को जैसे बढ़ाते
- 45:58हैं वैसे धर्म की धार्मिकों की संख्या को बढ़ाएंगे तो दुनिया
- 46:03सुखी हो जाएगी। ये गलती में हैं।
- 46:05इन्होंने थीम को पकड़ा नहीं। बैस को पकड़ा नहीं।
- 46:12तो फिर किस पर विश्वास करें? न तुम मूर्ति न अनघट पत्थर न
- 46:20निराकार को तुम नहीं जाना। न देखा लेकिन गुरु को तुमने देखो
- 46:29यहाँ आकर बात टिकती है यहाँ आकर दिल ठहरता है यहाँ आकर मचलता हुआ
- 46:40दिल शांत होता है। एक गुरु ही बचता है उपाय।
- 46:54इसलिए कबीर बात करते हैं सिर्फ गुरु के।
- 46:57यहाँ से पा। बेन गुरु ज्ञान कहाँ से।
- 47:27दे जो दान हरे गुण ग सब बो नी जान को तो मारा।
- 48:01मन तड़पाते अरे तड़पाते। अरे, दर सने को आ मोरे तुम बिना
- 48:16बिगरे सागर काज? बिनती।
- 48:27करत हो रखे हो लाज मन, ताड़ पात हर इधर।
- 48:43शनि को पहली। बात मन में तड़प हो यहाँ से आगाज
- 48:56प्यास न डूती हो तो पानी अवांछनीय हो जाता है।
- 49:04प्यास प्रथम प्यास में तड़प उठती है और तड़प से उठी हुई प्यास।
- 49:21उससे आप खोजते हो पानी और खोजते हो ये न खो जाते हो, न पायी तो
- 49:30मिल भी जाता है, प्यास की तरफ से भी हो जाती है, प्यास से जगनी
- 49:37चाहिए। मोरू मिल जाएंगे।
- 49:42प्यास से तृप्त कर देगा। गुरु लेकिन गुरु से चिपट मत जाना।
- 49:52मैंने कहा तो मैंने ये नई व्यवस्था खोजी।
- 50:00दीक्षा लो, दीक्षा के वक्त में सब उड़ेल दूंगा, जो तुममें समझ सकता
- 50:06है। जैसा पत्र लेके आओगे, वैसा तुम्हे
- 50:10उड़ेल दिया जाएगा और तुम घर चले जाओगे।
- 50:18ना वनों में मिलेगा ना कंधों में मिलेगा वह तो वर्टिकन है ना
- 50:28पहाड़ों में मिलेगा, ना मठों में मिलेगा।
- 50:36ना तीर्थों पे ना काबा इनमें कहीं नहीं मिलेगा मिलेगा तुम्हें
- 50:45तुम्हारे अंत से और प्यास जगनी चाहिए तो वेतर की यात्रा शुरू हो
- 50:51जाती है अंत तुम्हें जाना नहीं होता जब तक प्यास नहीं जगी होती।
- 50:57तो रो पूछ लेते हैं लेकिन प्यास नहीं जग गिरती तो प्यास के बिना
- 51:04अपने अंत में उतरोगे कैसे? पहले प्यास जगनी आवश्यक पानी की
- 51:10फिर खोज शुरू हो जाती है। नेसेसिटी इस दी मदर ऑफ इन्वेंशन
- 51:21जरूरत कार्ड की माता है खोज की माता है तुम खोज लोगे गुरुपर्ण।
- 51:31निक्षा लेना, वह बैठ मचाना, फिर गुफाएं पैदा होती है, याद रखा
- 51:37मेरे पास फिर आते हैं कृपालु जी महाराज, मैंने तो पूछ के किया सब
- 51:44किया, इधर खाक पूछ के किया। तुमने तोता रिटन की तरह बुलाया,
- 51:56ये खाक पूछना हुआ, पहले वचन ले लिया, मैं जैसा कुछ कहूंगा करोगे
- 52:03हाँ करो, वो आपके वचन में बत गया फिर तुमने कहा ऐसा बोलो।
- 52:09तो बोल दिया फिर उसने कहाँ बोला? तुम्हारे हुक्म ने बनवाया या फिर
- 52:18वो पैदा हो के जिनको उम्र कैद हुई होगी और राजनीति के मोहरे बनकर
- 52:26बार बार आएँगे। क्या ऐसे व्यक्तियों को संत कहना
- 52:35वाजिब है? वहीं से ठगे ठगे आध्यात्मिकता की
- 52:42खोज बंद हो जाएगी। एक मछली सारे तालाब को गंदा कर
- 52:49देती है। यहाँ तो एक मछली ही बची बाकी
- 52:54तालाब गंदा है, उस मछली को चाहिए वह छलांग लगा के बाहर आ जाए और
- 53:01कोई दूसरा तालाब खोज लें। अब बस यही उपाय बचा।
- 53:10गुरु के विनाथ ज्ञान सब गुनी जान पे तो मरा राज़ मन तड़पत हरि
- 53:25तरसंध को आक्षि, जब भी कभी मन तड़प जाए, उसके गृह की अग्नि मेरा
- 53:33गीता है। तुमने कहा मेरा समा गई कृष्णु
- 53:38प्यास इतनी गहरी हो तो पत्थरों में भी इन्सर्ट हुआ जा सकता है
- 53:44लेकिन ये प्यास की क्वांटिटी पे निर्भर करता है।
- 53:51100% प्यास 100। तो भुज ही जाया करती है फिर वे
- 53:59खुद खुदा उतरा करता है गुरु बन के उतरा करता है तुम अपनी प्यास की
- 54:08फिकर करना, तुम गुरु की फिकर मत करना।
- 54:13और दीक्षा लेके अपने स्थान पे चले जाना वहाँ जाके अभ्यास करना, नहीं
- 54:20तो चूक जाओगे। जो मैं ऐसा।
- 54:32जानकी प्रीत किए दुःख। नगर ढिंढोरा की भित नगरियों को।
- 55:14जो मैं ऐसा जान थी प्रेत किए। दुःख हो नगर डंडोरा बीट न करिओ।
- 55:46खो मोहे भूल गए सांवरिया हाँ भूल गए?
- 56:05सावरिया हवन कह गए आज हो न आए, आवन कह गए आज हो न आए।
- 56:25ली नहीं माँ अरे खबरिया माहे भूल गए सांवरिया है भूल गए?
- 56:52और जब तड़प लगेंगी पानी ना मिलेगा, वो तड़पते हुए जीरे से
- 57:01शिकायतें भी उठेंगी। अल्फाज़ भी शिकायत का स्वरूप धारण
- 57:10कर लेंगे। दिल को दिए क्यों दुख बिरहा के?
- 57:28तोड़ दिया। क्यों?
- 57:33महल बना के दिल को दिया क्यों? दुःख बिरहा के तोड़ दिया क्यों
- 57:54महल बना के आस दिला के ओह। वेदर दी आस दिला के ओह वेदर दी,
- 58:18फिर ली काहे नजरिया? फिर लिखा है नजरिया मोहभोलवय
- 58:38सांवरिया। उड़ गए सांवरिया और नैन कहें रो।
- 58:59रोके सजना नैन कै रो रोके सजना देख चूके हम।
- 59:18प्यार का सपना देख चूके हम, प्यार का सपना प्रीत है झूठ प्रीतम।
- 59:38झूठा प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा छोटी है सारी नगरिया।
- 59:59झूठी है सारी नगरिया मोहे भूल गए सांवरिया आह।
- 1:00:17भूल गए सांवैया आवन कह गए आज हो न आय आवन कह गए आज हो न।
- 1:00:37आए ली नहीं माँ रेहरिया मोहे। भूल ऐसा है बिरहा का स्तर इतना
- 1:00:53झुंझला जाती है मेरा। दिल को दिए क्यों दुख वे रखाक
- 1:01:08तोड़ दिए क्यों महल बना के प्रीत है छोटी प्रीतम जोत झूठी है सारी
- 1:01:20न करी। ऐसे उलाने ताने भी उठेंगे, शिकायत
- 1:01:26भी आएगी उठने देना। जय प्रेम का प्रवाह यूं ही तो चला
- 1:01:31करता है इसकी निर्जला में। इसके साथ ही जल जाना चल पड़ना।
- 1:01:43जीस तरफ ये आवे चले इसके बहाव में बह जाना तेरा पाना मीठा लगे और
- 1:01:55जैसे ही तुम बहाव में बह जाओगे। बस गुरु तुम्हें पार उतरते का तुम
- 1:02:04पाओगे अंतिम क्षण में गुरु है नहीं है दूर है पाश है, गरीब है
- 1:02:13कुछ भी है, लेकिन पाओगे गुरु गोबिंद दोनों खड़े।
- 1:02:20का किला घुंका है बलिहारी गुरु आप ने।
- 1:02:36जिन। गोविंददिया आह मिला है गुरु गोंगे
- 1:02:47गुरु पांव रे। गुरु के रहियो दास गुरु जो भेजें
- 1:03:01नरक में तो सर के की रखियो। श्री कृष्ण।
- 1:03:15गोविंद हरे मुरारी। श्री कृष्ण।
- 1:03:22गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:03:31श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारायण
- 1:03:39वासुदेव पितुमात स्वामी सखा हमार। भितुमात स्वामी सखा हमार हेनाथ
- 1:03:54नारा यन वासुदेव। श्री कृष्ण गोविन्द?
- 1:04:02आरे मुरारी हेनाथ नारा। यन वासुदेव व।
- 1:04:15हे विराट त्रि। ढीला कुशला आपका कल्याण हो।