Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Jan 26 - सत, चित, आनंद की व्याख्या! Serenity का असली मतलब: शांति से भी परे क्या है? साक्षी-भाव, नाद
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- 0:11बाबा जी गण जीस तत्व की आप बात कर रहे हैं जो शांति है।
- 0:29आनंद का सागर है जहाँ कोई शोर्ण है, जहाँ सुगंध ही सुगंध है क्या
- 0:45उसको हम? अंग्रेजी में सेरीण की कह सकते
- 0:48हैं, अध्यात्म के लिए अंग्रेजी में।
- 1:10कई शब्दों के सटीक पैरेलल शब्द नहीं होते, सीरनिटी का अर्थ करीब
- 1:26करीब वैसा ही है। उसका अर्थ है अति शांत अवस्था
- 1:38जहाँ आप स्वतंत्र हो और प्रशांति की अवस्था में हो मौन हो।
- 1:49और आनंद का र सिझार रहा है। प्रशांतिक अर्थ होता है जो शांति
- 2:02से भी पार है। प्रशांत जो शांति को भी देख रहा
- 2:14है अन्यथा पता कैसे चलेगा कि यहाँ शांति है।
- 2:27आप बाजार में निकल जाते है, वहाँ शोर होता है, आपको पता चलता है कि
- 2:34वहाँ शोर है, कोई है ना अनुभव करने वाला जीसको पता चलता है कि
- 2:42बाजार में शोर खुले है। और आप उद्यान में चले जाते हैं
- 2:51जहाँ मौन है सन्नाटा। है वहाँ आपके।
- 3:03एकदम बड़ी शांति है शांति का अनुभव जहाँ हो।
- 3:15उससे पार प्रश्नमृत शांति का पार आपने बाजार का गुलाल देखा, भीड़
- 3:30देखें। लोग अपने अपने काम में भागते देख
- 3:36के दौड़ते फिर आप शांत उद्यान में चले गए।
- 3:42वहाँ आराम से बैठ गए। सुगंधित फूल लगे थे, घास के ऊपर
- 3:50बैठ गए। वहाँ कोई शोर शराबा नहीं था तो ये
- 3:57भी आपने महसूस किया और बाजार का शोर भी आपने महसूस किया तो इसका
- 4:08अर्थ क्या हुआ? थोड़ा गहरे में चले।
- 4:14इसका अर्थ ये हुआ कि शोर को भी आप सुन रहे थे, शांति को भी आप देख
- 4:22रहे हो। दोनों ही चीजों के साक्षी हो,
- 4:27लेकिन तुम दोनों से पार। मैंने एक सूत्र आपको दिया था जिसे
- 4:42आप देख सकते हो जिसे आप महसूस कर सकते हो वो तुम नहीं।
- 4:54पीढ़ा को आप महसूस करते हो लेकिन पीढ़ा को महसूस करने वाला पीढ़ा
- 5:06से अलग। जैसी शांति को और कोलाहल को महसूस
- 5:15करने वाला इन दोनों से पार था। और जब पीड़ा खत्म हो जाती है तो
- 5:23आप कहते हो आप पीड़ा नहीं रहे हो। दोनों अवस्थाओं को किस तत्व ने
- 5:29जाना कोई एक तत्व है? वह भीड़ का भी साक्षी है।
- 5:39वह शांति का भी साक्षी है। वह दर्द का भी साक्षी है और वो
- 5:44दर्दहीनता का भी साक्षी है। क्षीरनिटी करीब करीब उस शब्द से
- 5:55बढ़ती है। जाक्या प्रश्नपत्र शांति के पार
- 6:01जो है जो शांति को देखता है। जो शांति का ऑब्सर्वर है, जो
- 6:08शांति को नग्न आँखों से अनुभव करता है, उस अनुभव करने वाले तत्व
- 6:18का वरन करता हूँ मैं उसको नाम कोई।
- 6:27फिर उसे राम कहलो रहीम कहलो अल्लाह कहलो, फिर उसे वह गुरु
- 6:35सतनाम कहलो उसे मेरा कहलो उसे राधा कहलो उसे नान कहलो।
- 6:45जो आपको अच्छा लगे उसका नाम रख लो उसको आप अपना नाम भी दे सकते हो
- 6:52क्योंकि अंत में जाकर तो आप ही वो हो।
- 6:57सत्य के ज्यादा करीब भिड़ेगा राधा राधा करने की बजाय।
- 7:02आप स्वयं का नाम का जप करो। अगर जप करने में ही मज़ा आता है,
- 7:11लेकिन जप तुम्हे थोड़ी दूर तक पहुंचाएगा और उसके बाद जप भी खो
- 7:18जाएगा। फिर संत कहते हैं कि अजपा जब शुरू
- 7:22हो जायेगा अजपा जब जो होते हुए जब को भी निहार सके जो होते हुए जब
- 7:31कभी शर्मन कर सके, दो तरह के अजपा जाता है।
- 7:42एक अजपा जप है जो आप मन में बार बार दोहराते हो वो फिर हो जाता
- 7:47है। फिर जब आप उसको जपना छोड़ देते हो
- 7:52तो वह मन में पुनरुक्ति करता रहता है, घूमता रहता है।
- 7:57एक तोप है जो आपने कीत्र में बनाया था।
- 8:02जैसे आप पहाड़ियों में जाके एक बार ऊंचे से बोलो, शाम तो आवाज
- 8:07आएगी शाम शाम शाम शाम शाम शाम यह अजपाज आप कहते हो वापिस एक तो
- 8:16अजपाजा भी है। एक अजपाजप जो भीतर अपने अंतर के
- 8:22दल पर जहाँ से अनहद का उदगम स्रोत है जहाँ हुंकार का जाप हो रहा है
- 8:29जहाँ हुंकार की धुन बज रही है वाजेनाद होता है।
- 8:36अनेक आशंका के ते 52 हारे के ते राग बड़ी शू के हण के ते गावन
- 8:42हारे इसको बोले शान्वी का मस्शिद घोलू जोड़ा डरया जा ठाक कर दे
- 8:53तेरे बड़या। जिथे वाजदे नाद 1000 इश्क दी।
- 8:58नमन में बहार एक तत्व है जो इस अनहद नाद उंकार की होती हुई ध्वनि
- 9:13को भी सुनता। है।
- 9:15उंकार की ध्वनि से मत चिपट जाना। अभी तो तुम हुंकार का जाप स्वयं
- 9:22से पैदा कर रहे हो, यह तो आहत नाग है, एक अनाहतनाद है जो भीतर से
- 9:32उगता है, उसका उदगम स्रोत है, वो अनहतनाद है।
- 9:39वो भी ओंकार का नाम है लेकिन वो भी एक तल पर जाता है उसको भी
- 9:46महसूस करने वाला क्योंकि वो भी सुनाई पड़ता है उसको भी अनुभव
- 9:54करने वाला एकतत्व जो अनहद से भी पार है, सुन मरे अजपा मरे अनहद भी
- 10:08मर जाए ध्यान से सुन इस बात को। सुन मरे आप पहले सुन जाओगे, अजपा
- 10:20मरे फिर अजपा शुरू होगा और अजपा खत्म हो जाएगा।
- 10:27ये दो चीजें आपने बनाई थीं। दोनों खत्म हो गए।
- 10:32तीसरी जो भीतर से आवाज़ उठ रही है हुंकार के बेहद स्वता से उठ रही
- 10:40है तुम्हारे अंत से वो तुम्हारी मैन मेड नहीं है, वो ऑथेंटिक है।
- 10:51वो सदा ही बज रहा है। जिसके कानों में आना ना बजना शुरू
- 10:56हो गया। वह देखेगा 2400 घंटे मेरे हटाई से
- 11:02हटता है मेरे चलाई से चलता है इश्क पे ज़ोर नहीं।
- 11:17वो आतिश है गालिब जो लगाई ना लगे और बझाई ना बने यहाँ कोई ज़ोर
- 11:31नहीं है आपका अनंतनाथ पर आपका कोई ज़ोर है।
- 11:37आपके लगाने से लगता है आप चाहते तो ये हट जाए तो हटता है, इस
- 11:50अनंतनाथ का भी एक साक्ष्य है। मैंने आपको समझाया भीड़ के शोर
- 11:57गुल को आपने सुना, बाग बगीचे के शांत, सुगंधित माहौल को भी आपने
- 12:08देखा वह शोर नहीं था। फिर यहाँ शोर नहीं, वो भी आपने
- 12:18देखा? अन्न दनाद भी आपने सुना आप इन
- 12:28सबके साक्ष्य हो आप इन सबको देख सकते हो।
- 12:38इसलिए आप बोल नहीं हो नाप शांति हो शोर गुल तो हो ही नहीं नाप
- 12:54सुगंध हो नाप दुर्गंध हो। ना आप अनाज नाद हो आप कौन हो आप
- 13:07इन सब चीज़ के पार जो अनुभव करने वाला तत्व है।
- 13:17जिसने शोर को भी अनुभव किया, जिसने शांति को भी अनुभव किया,
- 13:23उसे प्रशांत कहते हैं। सीरीनिटी जो शब्द है अंग्रेजी का
- 13:32वह इसके करीब पड़ता है। यह वो तत्व है जो शांति को भी
- 13:45देखता है, अशांति को भी देखता है, ये जोड़े होते हैं।
- 13:51जो प्रेम को भी देखता है, जो नफरत को भी देखता है, अनाथनाथ को भी
- 14:01देखता है, अनाथनाथ जब नहीं होता उस व्यवस्था को भी देखता है, फिर
- 14:07वो है क्या? जिन चीजों का जोड़ा है यानी
- 14:14विपरीत है, उनमें से कुछ भी नहीं। शांत, अशांत, रागदोष, काम और
- 14:28ब्रह्मचर्य। क्रोध, क्रोध, परिग्रह, अपिग्रह,
- 14:42सत्य, असत्य, हिंसा, अहिंसा, चोरीदान।
- 14:54इन द्वैतों से जो पार है अद्वैत जो इन सबको देखता है, जो ओब्सर्वर
- 15:06है, जो इनको महसूस करता है। वह वह तत्व है, उसका गुण स्वभाव
- 15:15क्या है? वह चेतन है।
- 15:20पहली बात और वह सत्य है। सत्य नहीं है ये समझ लो सत्य का
- 15:29विपरीत तो असत्य होता है। सत्य का विपरीत है, जो निचोड़ है,
- 15:37जो अल्टीमेट है। सत्य ट्रुथ इस नॉट दी अल्टीमेट
- 15:47सत्य का विपरीत है। असत्य सत्य का विपरीत है झूठ।
- 15:53लेकिन सत्य सत्य जिसे आप समिति हो वो सत्य नहीं है।
- 15:59झूठ का विपरीत वाला सत्य नहीं है, वह सत्य है, यह सत्य है सत्य चित
- 16:09वह चित। वह सत्य है सत्यनिसार निचोड़ रस,
- 16:27सत्यचित् आनंद। इनका उलट नहीं होता।
- 16:32कुछ इनका उलट नहीं होता। कुछ उसका स्वभाव सत चित आनंद है,
- 16:45आनंद बोरा से है, जिसका विपरीत नहीं होता।
- 16:49सुख का विपरीत दुख होता है। क्रोध का विपरीत शांति होती है,
- 17:00तो वहाँ क्या है? वहाँ शांति नहीं है, शांति एक
- 17:08झंझट है। शांति, अशांति का नहीं होना
- 17:15अशांति का अभाव है, लेकिन वह सत नहीं है।
- 17:28उसका स्वभाव शांति नहीं, ये समझ लो आप अब आज मैं बिलकुल आखिरी
- 17:35तत्व की बात कर रहा हूँ। आपने कहा, सीरीनिटी, यह शब्द
- 17:43क्रीप क्रीप भिड़ेगा। हमारी हिंदी में संस्कृत में शब्द
- 17:50इसके बिल्कुल पैरेलल आता है। वह प्रश्नता है, प्रशांति शांति
- 18:01के विपरीत नहीं है, यह शांति से पार है।
- 18:06शांति से विपरीत तो अशांति होती है और शांति के पार जो तत्व है वह
- 18:14पर शांत है। इसको आनंद से समझने की चेष्टा
- 18:22कीजिएगा। तो आपको फर्क साफ महसूस पता
- 18:26लगेगा। यह वो चीजें हैं जो बुद्धिमता से
- 18:32समझी नहीं जाती, जो बुद्धि से और अक्षरों से समझाई नहीं जा सकती।
- 18:38इशारों से थोड़ा सा उसका संवाद किया जा सकता है।
- 18:44इसके लिए अद्वैत शब्द ठीक है जहाँ दो नहीं है जहाँ जोड़ा नहीं है,
- 18:50पैर नहीं है तो पूछा आपने या सीरिनिटी क्या वो ही तत्व है?
- 19:02हाँ ये वो ही तत्व है। जो शांति से भी पार है।
- 19:08प्रश्न शांति के विपरीत अशांति होती है।
- 19:18सुख के विपरीत दुख होता है अभी तो तुम सुख की तलाश में हो?
- 19:26अभी तो मोती मणि है इकट्ठे करेगा धन दोरथ इकट्ठा करने पे जुट गया
- 19:38अभी सन्मान क्या है? फिर अपमान कहाँ जाएगा?
- 19:45जो व्यक्ति सम्मान की इच्छा रखता है ध्यान रखना वह अपमान सहने के
- 19:52लिए तैयार रहे। सलमान की इच्छा ही मत करो ब्लाउज
- 20:03से कहता था। मुझे कोई अपमानित नहीं कर सका।
- 20:07कमल मैं जहाँ बैठ गया वहाँ से मुझे कोई उठा नहीं सका तो शिष
- 20:20उसके करीब आ गए। शिष्य कहते हैं, गुरुदेव।
- 20:25हमें भी बता दीजिए वह फॉर्मूला कि हमें भी कोई अपमानित न कर सके।
- 20:37हम भी जहाँ बैठे हैं वहाँ से हमें कोई उठाये न अपमानित करके।
- 20:49तो लव से कहने लगे मैं सदा वहीं बैठता था जाके जहाँ लोग जूतियां
- 20:54उदासते थे, मैंने कामना नहीं की सिंघासनों पर बैठने की।
- 21:03जो व्यक्ति कामना करता है याद रखना अपने बाहुबल से, अपनी शक्ति
- 21:10से 1 दिन शक्तिहीनता भी आती है। 1 दिन वह अवस्था भी आती है जब
- 21:19तुम। कमजोर हो जाते हो, नरवर हो जाते
- 21:25हो, तुम्हारे मसल कमजोर पड़ जाते है तुम्हारी वाणी जवाब दे देती है
- 21:38तुमने मान च तो अपमान के लिए वे तैयार है।
- 21:45अभी कल ही प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हमारे शंकराचार्य
- 21:56जो हिंदू धर्म के धर्मगुरु हैं शंकराचार्य।
- 22:08वो ये स्नान करने के लिए गए थे। उनका ऊपर का छतर उड़ा दिया गया,
- 22:23उसको हानि पहुंचाई गई। उन्हें दलील दिया गया।
- 22:27उनके शिष्यों को पीटा गया। बालों से पकड़ के घसीटा के ऐसे
- 22:41कृत्य करने से पहले थोड़ा सोचा यह तो फिर भी।
- 22:49हिंदू धर्म का सर्वोच्च शिखर है, जिसकी आदिकाल से हम सम्मान और
- 23:02यहाँ तक की पूजा भी करते रहे हैं। आज भी रुतबा तो वही है, गद्दी तो
- 23:08वही। इनके ध्वज को तोड़ देना, इनके
- 23:18छत्र को तोड़ देना, नुकसान पहुंचाना, प्रतीकों को तोड़ देने
- 23:25के समान। जैसे कोई सिख धर्म की पगड़ी उतार
- 23:29दे और उसके केस काट दे तो क्या होगा?
- 23:34ज़रा सोच के बताइए अगर कोई सिख धर्म के व्यक्ति की पगड़ी उतार दे
- 23:44और उसकी केस आपने पकड़ कर खींची? उसके कोई केस काट दे कतल कर दे तो
- 23:54क्या अंजाम होगा मुझे बताएगा, अंजाम होगा शाम तक आपकी सर
- 24:04तस्करियों में रखे हुए पानी का। और धड़ अलग पड़े हो गए करके देख
- 24:11लीजिएगा। अगर पुष्प हो तो शाम से पहले आपके
- 24:20सर तश्करियों में भेंट किए जाएंगे।
- 24:26राजा हूँ जिसमें यह कुकृत्य जिसके राज़ में हो, कुछ सम्मान की धारणा
- 24:34भी होती है। कुछ सम्मान के सूत्र भी होते हैं,
- 24:40कुछ सम्मान के प्रतीक भी होते हैं।
- 24:51इसलिए मैं कहता हूँ एबी मुक्तेश्वर आनंद हमारे हिंदू धर्म
- 25:01के द्वाज है। उनका छतर तोड़ देना।
- 25:15शिष्यों का अपमान करना, बाल पकड़कर खींचना, सिनान न करने देना
- 25:22मौनी अमावस्या का दिन विशिष्ट होता है, उसके बाद गुप्त नवरात्र
- 25:29शुरू हो जाती है। लेकिन ध्यान रखिएगा।
- 25:46लाउसे का सूत्र यह तो बहुत बुरा हुआ अगर हम प्रतीकों के रूप में
- 25:54देखें, लेकिन हिंदू धर्म। ना खंजर उठेगा ना तलवार।
- 26:10इनसे यह बाजू मेरे आजमाए हुए हैं। मैंने देखे हैं जिनसे हमें आजादी
- 26:25चाहिए थी वो सारा देश इकट्ठा हो गया था।
- 26:28के चरण पकड़ लिया जाके, सबर, कट और वीर कहलाए।
- 26:33अब तुम देखना। जिन लोगों ने यह।
- 26:42घिनौना कृत्य किया है। मैं इसको ठीक नहीं।
- 26:47समझता प्रतीकों को भी तोड़ देना। ठीक नहीं है।
- 26:53प्रतीकों को नकार देना ठीक है, समझे ना?
- 26:57बात को दयानंद ने ही प्रतीकों को तोड़ दिया।
- 27:06लेकिन बोला तो। मैं भी हूँ हिंदू धर्म से कोई
- 27:09पहुँच ना सकेगा। लेकिन मैं प्रतीकों को तोड़ता
- 27:12हूँ, मैं प्रतीकों को नकारता हूँ। नकारने में।
- 27:17और तोड़ने में जमीन आसमान का फर्क है।
- 27:24सभी धर्मों के प्रतीक। है।
- 27:28उन प्रतीकों का। घर तोड़ दिया जाए।
- 27:32नकार दिया जाए बात। अलग।
- 27:35तोड़ दिया जाए बात। अलग हमारे शास्त्रों में तो
- 27:48शंकराचार्य की छाया को पूजने का वास।
- 27:53जहाँ ध्वज की छाया। चली।
- 27:57उस छाया को नमस्कार करो। और जहाँ ध्वज ही टूट?
- 28:05जाए लेकिन हिंदु धर्म कायर को। इसलिए हिंदू धर्म के।
- 28:18इतने टुकड़े हो गए अपनों पर ही इन्होंने भेदभाव का प्रयोग किया।
- 28:26अपनों को ही जिनों। जिनको आप हिंदुओं में शुमार करते
- 28:30हो। उनको सतन टैक्स?
- 28:36वसूला के जबरन सतीप्रथा जबरन सभी कानून जो अंग्रेजों ने यहाँ करे
- 28:50अंग्रेजों का भला हो। अंग्रेजों ने हमारी कम।
- 28:54से कम 10। अंधविश्वास तो है।
- 28:58और जो बहुत घनित है। एक पार्टी के हिसाब।
- 29:15से हिंदू एक पार्टी है लेकिन पार्टी के नेता भी तो?
- 29:20कुछ कद और मान सम्मान रखते हैं। जैसे भारतीय जनता।
- 29:27पार्टी एक पार्ट इसका अध्यक्ष या इसका पीएम कुछ मान तो है उसका।
- 29:33वह देश का सर्वोच्च नेता है। उसका सम्मान करते हैं लोग।
- 29:43इसी तरह ध्वज वाहक हिंदू धर्म का अभी मुक्तेश्वर में उसके साथ जो
- 29:49व्यवहार हुआ वो ठीक नहीं हुआ। वह बिल्कुल ऐसा था।
- 29:56जैसे प्रतीकों को नष्ट करने का। जैसे मैंने आपको समझाया कि किसी
- 30:03भी धर्म के प्रतीक को तोड़ दिया जाए, नकार दिया जाए यह बात।
- 30:10बोलने को आप स्वतंत्र। हैं।
- 30:16धर्म परिवर्तन करने को। भी आप स्वतंत्र हैं।
- 30:26इसी बेईमानी से तंग आकर लोगों ने धर्म परिवर्तन किया।
- 30:36इसी बेईमानी से तंग आकर लोगों ने धर्म परिवर्तन किया।
- 30:43अंबेडकर शुद्ध हिंदू थे, बौद्ध हो गए।
- 30:48क्योंकि बौद्ध धर्म में। ऐसी मान्यताएँ मूल मान्यताएँ हैं।
- 30:53और मेरी दृष्टि। में।
- 30:55अगर कोई धर्म जाकर अपने पीक पॉइंट पे जा के ठहरता है तो वह बुद्ध
- 31:02धर्म है। यहाँ तक का जो।
- 31:06सफर है वो निर्विकारता का है, निर्बाधता का है बिलकुल सीधा सीधा
- 31:14है मैंने। बौद्ध धर्म को कभी नहीं नकारा।
- 31:18इतना जरूर कहा बुद्ध इससे आगे जा सकते थे।
- 31:24और भी राहत हैं। वसल की राहत के सिवा इससे आगे भी
- 31:28राहत हो जाती है अगर चलते लेकिन कारण।
- 31:34जो दुखी हैं उनके। दुख जल्दी से दूर कर दो।
- 31:39यह भी भीतर का। आंतरिक प्रेरणा है या करुणा है?
- 31:47इस करुणा। से प्रेरित होकर।
- 31:52वो उठ दिए वहाँ। से।
- 31:54अपने आप को जानने के बाद भ्रम मिट गया।
- 31:58भ्रांतियां मिट गई मैं। कौन हूँ यह पता चल गया।
- 32:02वास्तविकता से पता चल गया कोई मान्यताओं से पता नहीं चला।
- 32:06दर्शनों से पता चला अनुभव से पता चला।
- 32:14उन्होंने बांटना शुरू कर। दिया जैसे माखन शाह लुबाना ने
- 32:21सिर्फ एक बात को आजमाकर जब गुरु तेग बहादुर ने कहा सुखें सो।
- 32:29दे में दो ये देख मेरी गाँधी देख ये।
- 32:37जख्मी हो गए हैं तो ऊपर जा के। चलाने लगा साधु रे गुरु लाथोरे
- 32:45इससे ज्यादा कुछ देखा नहीं था उसने।
- 32:49लेकिन यही पर्याप्त था कि अगर कोई नवम गुरु है तो वह मुझे मिल जाये
- 32:56और मिल गया। प्रतीकों को।
- 33:02तोड़ देना अपने आप में। प्रतिबंधित होना।
- 33:12चाहिए प्रतीकों को तोड़ना नहीं चाहिए प्रतीकों को नकार देना
- 33:18चाहिए। मैंने यही पर नाली।
- 33:22आजमाई है। मैं कहता हूँ नहीं।
- 33:26मिलेगा। इससे ये रास्ता नहीं है।
- 33:30स्वर्ग है नहीं, सच कंठ कहीं है। नहीं दीज़ आर ऑल दी स्टेटस ऑफ
- 33:37माइंड यहीं जिंदा रहते रहते मिल का मरकर क्या खाक सच कंठ और
- 33:44स्वर्ग जीते जी जीते जी भोग लो? अगर सुख ही।
- 33:50भोगना है। मर कर तू ना सुख?
- 33:54मिले गाना दुख मिले गाना पीड़ा मिलेंगे, न संताप मिलेगा मर।
- 33:58कर कभी किसी ने। घुस पाया है यह अपने आप में।
- 34:06समझाने का एक तरीका है। बुद्ध ने वेदों को।
- 34:11नकारा, नकारा। वेदों का अपमान नहीं?
- 34:20किया। प्रत्यकों को तोड़ा नहीं।
- 34:28उसने हमारी सर्वोच्च धार्मिक किताब है वेद।
- 34:34उनको नकार दिया। नहीं है इसमें कुछ और।
- 34:41वहीं आर्य समाजजी दयानंद ने काले की मूर्ति को उखाड़ दिया।
- 34:46नहीं ये प्रतीक नहीं टूटने चाहिए। यह किसी के लिए बच जानी चाहिए।
- 34:51क्योंकि ये भी। आवश्यक है।
- 34:56मार्क के लिए माइलस्टोन की तरह काम करते हैं।
- 35:02मूर्ति वत हो जाओ। भीतर से अकंप हो जाओ, अडिग हो जाओ
- 35:07कंपाय मान न रहो इस मूर्ति की तरह जैसे माता की मूर्ति।
- 35:15ऐसे हो जाओ। यह एक।
- 35:19हमें सिंपल देती है। प्रतीक देती है भीतर से ऐसे हो
- 35:22जाओ हमने देखा बुद्ध राम। महावीर कृष्ण उनके हमने दड़ी नहीं
- 35:36बनाई। मुंशी नहीं बनाई क्यों?
- 35:40नहीं बनी। यह एक प्रतीक थे।
- 35:49क्यों सदा ही योबना अवस्था में रहते हैं?
- 35:55सदा ही वो। एनर्जिटिक रहते हैं वो वृद्ध नहीं
- 35:58होते कभी? और हमारे भीतर का।
- 36:03अंतर का स्वभाव भी चैतन्य ब्रश शक्ति इन दोनों का।
- 36:10इकट्ठा हो जाना ही इसको ही अर्ध नारिफर कहते है।
- 36:16नारिक शक्तिरुपा। और शिव चैतनरूपा?
- 36:27तुलाव से कहते। कि मेरा कोई कभी अपमान नहीं कर
- 36:31सका। लेकिन तुम अपनी भाषा।
- 36:35से। हर चीज़ को पूछना।
- 36:38चाहते हो अपमानी तो हम भी नहीं होना चाहते, हम भी चाहते है फूल
- 36:42बरसे सबका। जय जयकार हो।
- 36:46उदघोष हो हम डमरू हो जाए। कल ही किसी ने मुझे कहा।
- 36:52कि प्रधानमंत्री डमरू बाजार है। मैंने कहा देखो जो जिसका काम उसी
- 37:00को सज जाए। जो डमरू बाजारना जानता।
- 37:05है वो डमरू ही बाजार का। जो देश चलाना।
- 37:10जानता है वो डमरू नहीं बजाएगा। डमरू बजाना।
- 37:15एक तरह का घोषणा है। क्या भीतर से थोते?
- 37:19हैं। डमरू भीतर से थोत होता है अतः
- 37:23बजेगा नहीं। अगर डमरू थोत ना होगा तो।
- 37:30तो कहती है, प्रधानमंत्री। जी डम रुक जा रहे है।
- 37:34मैंने कहा जीसको जो। आता है जो जीस दीक्षा शिक्षा में
- 37:39प्रवीण होता है, वह वही तो करेगा? वे गाली निकालेगा?
- 37:47अपने विरोधियो को जो। अपनी इच्छा से।
- 37:50विधवा नहीं हुई, उसे कहेगा कांग्रेस की भगवा?
- 37:55उसे कहेगा 50। करोड़ की गर्लफ्रेंड उसे कहेगा
- 38:00मंगलसूत्र भेज देंगे ऐसी वह की वह की बातें।
- 38:05साथी के बाद उन्हीं सुर हो जाता है।
- 38:08अगर वह व्यक्ति प्रबुद्ध न हुआ हो तो यह पागलपन की निशानी है।
- 38:15दे शुड बी ट्रीटेड। मेंटली ऐसे लोगों का मानसिक उपचार
- 38:21होना चाहिए। भला प्रधानमंत्री सारे दिन सूझते
- 38:29रहते हैं? देश कैसे चलाना।
- 38:33है। ऐसे देश में क्या व्याध्य हैं,
- 38:37क्या कमियां हैं, रोजगार नहीं हैं।
- 38:42महंगाई बहुत ज्यादा। रबया जुड़ता चला जा रहा।
- 38:49अफरा तफरी है। ऐसे कांड रोज़ हो रहे हैं आपके ही
- 38:54सांनिध्य में बैठे हुए लोग। रेप कर रहे हैं।
- 39:02और उनको आप। बचा लेते हो अपने प्रभाव से?
- 39:08लेकिन यह प्रभाव कब तक चलेगा? दुनिया तो चलती ही।
- 39:13रहेंगी, बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया यही रहेंगी।
- 39:20पल भर को सांस। ले ले ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया
- 39:25में कम न हो गए अफसोस हम न हो गए 1 दिन तुम भी नहीं हो जाओगे।
- 39:31कोई नहीं बचा। है, कोई नहीं बचेगा।
- 39:36तो जो डमरू बजाना। जानता है वो डमरू भी बजाएगा।
- 39:39वह देश नहीं चलाएगा और जो देश है चलाने जानता है वह डबरू नहीं
- 39:44बचाएगा। जीस कला में जो।
- 39:47दक्ष है, प्रवीण है, वो वही तो करेगा।
- 39:51जो गुंडागर्दी करना। चाहता है, जानता है वह गुंडागर्दी
- 39:55ही तो करेगा। शीषस्त।
- 40:01धर्म के प्रचारक ध्वज का छत्र तोड़ देना।
- 40:16ये किसका काम? गुंडों यह कोई सभ्याचार्य ग्रुप
- 40:22है, यह सभ्यता है, कोई हिंदू धर्म धर्म तो नहीं है आज तो मैं ये
- 40:28कहूंगा हिंदू धर्म कोई सभ्यता हुई नहीं है।
- 40:34ये असभ्य लोग हैं। जिनको इतनी सभ्यता भी नहीं आती कि
- 40:39हमारा धर्म ध्वज। हम उसके छत्र को।
- 40:46तोड़े, उसके प्रतीकों को तोड़े। तुम ज़रा किसी।
- 40:52और के प्रतीकों को हाथ लगा के। आप क्रॉस में लटके।
- 40:59हो ईसा। मसीह को तोड़ के।
- 41:02दिखाओ। तोड़ के दिखाओ।
- 41:07मुसलमान के काव्य का पत्थर। कह दो ये पत्थर।
- 41:13फिर आप उसका आश्रम। देखना क्या होता है और तुम कहोगे
- 41:20तुम कहते अच्छे दिन आएँगे। आ गए भाई, अच्छे दिन आ गए हमें।
- 41:31नहीं पता था। आप उलटे दिमाग?
- 41:34के हो? आप विनाश को।
- 41:38विकास कहते हो, हमें मालूम न था। अगर मालूम महोता।
- 41:43के आपकी डिक्शनरी में विनाश विकास का नाम है।
- 41:51तो फिर हम सोच। समझ के वोट देते थे।
- 42:01एक। तत्व जो शांति, शांति से परे सत्य
- 42:07है। आज सत्य।
- 42:10सत्य नहीं का देखिये बाबा नानक नहीं, सत्य नहीं का।
- 42:15आध सत्य जो आध सत्य। है भी सत्य?
- 42:19नानक होत से भी सत्य सत्य नहीं का सत और सत्य में फर्क है, सत्य
- 42:27बुरा जाता है, सत्य बुरा नहीं जाता सत।
- 42:32अनुभव किया। जाता है।
- 42:35सत्य अनुभव करता। है।
- 42:39चेतनता और। सत्य।
- 42:43अनुभव करते हैं। किसको आनंद को?
- 42:48इसलिए तीनों को मिलाकर हमने टीनीटी बना दी।
- 42:51सत्य चेत आनंद। सत्य दानंद जो शांति को देखता है,
- 43:04जो कोलाहल को भी देखता है, जो ईर्षण को देखता है, जो प्रेम को
- 43:09भी देखता है। जो लाभ को देखता है।
- 43:13और जो हानि को भी देखता है। जो पीड़ा को भी।
- 43:17देखता है। और पीड़ाहीनता को भी देखता है।
- 43:24वह एक तत्व। जो अनुभव करता है जस्ट लाइक ए
- 43:28ओब्सर्वर। वो तुम हो।
- 43:38वो तुम हो तुम्हें। आनंदनाथ।
- 43:44सुनाई पड़ता है। तो आनंदनाथ भी तुम।
- 43:47नहीं जा ठाकर दे डेरे बढ़िया, जिथे वायदे नाद 1000।
- 43:56ये नाद भी आपको सुनाई पड़ेंगे। इसका मतलब नाक को सुनने वालों आप
- 44:01कुछ अलग हो नाक से जीसको यह सुन रहा है।
- 44:08शान्ति जिसे। महसूस हो रही है वह शान्ति से परे
- 44:13है। इसलिए परमात्मा।
- 44:16को शत का। क्षेत्र कहा आनंद कहा, शांति नहीं
- 44:21कहा। वो समझदार लोग थे, वो अनुभवी लोग
- 44:28थे। उन्होंने अनुभव किया।
- 44:32शांति का भी क्या? कहना शांति की अवस्था कोई विधायक
- 44:36तो होती नहीं। शांति तो आनंद का छाया है।
- 44:41आनंद की छाया। की तरह शांति आ जाएगी और आज लोगों
- 44:45की शांति को ढूंढने लग गया। ऐसे धर्म हैं ओम शांत, शांत,
- 44:52शांत। दिल को।
- 44:57ठहराने के लिए यह शब्द तो ठीक। है, लेकिन शब्दों की भाँति ही
- 45:06रहना, चिब्बक मत जाने से शांति तुम्हारी जरूरत नहीं जरूरत है
- 45:12तुम्हारी रस आनंद। शांति को भी तुम।
- 45:18देखते हो अशांति को भी तुम देखते हो?
- 45:23तुम सभी अवस्थाओं। के साक्षी हो।
- 45:30तुम जब सोते हो? तब तुम्हें पता नहीं।
- 45:34किसी गहरे तल पर इस सोए हुए शरीर को भी देखने वाला कोई साक्षी होता
- 45:40है जो लगातार चौबीसों घंटे दिनभर रात जागता रहता है और आनंदमय रहता
- 45:46है। सदा दिवाली सादकी और आठों पहर
- 45:50आनंद। यह साध कौन है?
- 45:54यह वो तत्व है जिसका मैं जिक्र कर रहा हूँ और तुमने पूछा शीरने की।
- 46:03यह वो तत्व है जो अनुभव करता। है।
- 46:12जिसका अनुभव। होता है वह वो नहीं है।
- 46:16अब इसको अच्छे से समझ लो। मैं थीम रूप में बोल रहा हूँ।
- 46:20जिसका अनुभव होता है वह वो नहीं है।
- 46:25सत्य तुम बोल सकते हो। लेकिन जीस सत्य को कहा बाबा नानक
- 46:30नहीं और कृष्ण ने और सभी संतोनी वह सतगुर हैं चित चेतन अब एक धर्म
- 46:40है अंदरनकारी वो आसमान में तलवार चलाएगा, वो कहेगा देखो।
- 46:46नैनम सिदंती संस्त्रण अजीब पर भाषा है भाई तुम्हारी।
- 46:53नैनम दहाती। पांव का वो आग जलाएगा, देखो।
- 46:57यह आकाश जला। नहीं जला तो?
- 47:01कहते बस यही भगवान। है।
- 47:04तो कृष्ण के शब्द। पकड़ लिए नाम।
- 47:06तभी तो भ्रांति खा गए। कृष्ण के शब्दों को।
- 47:12आपने। शब्दों में व्यथित।
- 47:16करने की चेष्टा करके अरग धर्म कड़ा कर लिया।
- 47:19जबकि ये धर्म नहीं है। यह खोपड़ी को हिलाने की बात है।
- 47:27निरहंकारी धर्म कोई? धर्म थोड़ी है, एक पार्टी है,
- 47:31तुम्हारी सभी धर्म एक पार्टी है, इसलिए मैं कहता हूँ ये धर्म कहीं
- 47:36नहीं पहुँचेंगे क्यों? क्योंकि इनके आगाज़ गलत हैं।
- 47:43मार्ग गलत है। श्रद्धा कितनी भी बन।
- 47:47जाए। दूसरा पक्ष।
- 47:51मार्ग से ही होना चाहिए। मार्ग इनके पास नहीं है तो फिर
- 47:55सही कौन? जिसमें श्रद्धा भी है और जिसका
- 47:59मार्ग भी सही है। सिर्फ नाम रख।
- 48:08लेने से नाम बदल लेने से कभी सत्य बदला है।
- 48:13बहुत से लोग अपना नाम बदल लेते हैं।
- 48:16यह राशि खराब दूसरी राशि रख लो। क्या फर्क पड़ता है?
- 48:21कोई फर्क नहीं पड़ता। जन्म के वक्त जो।
- 48:26पहली रेंज आपके ऊपर पड़ी वह फर्क तो डालती है साइंटिफिक व्यक्ति,
- 48:32लेकिन जन्म के बाद अगर आपने अपना नाम बदल लिया, उससे कोई फर्क
- 48:35नहीं। कोई उसको टिंकू।
- 48:38कहेगा कोई उसको जतिन कहेगा? कोई उसको कुछ कहेगा कोई उसको
- 48:43पुत्र ही कहेगा कोई चचा कहेगा, कोई ताए कहेगा, कोई भतीजा कहेगा
- 48:51कोई भाई कहेगा कोई बहन कहेगा ये सब नाम अलग अलग पहचान है।
- 48:58यह सिम्बल हैं, प्रतीक है। जो अनुभव करता है सभी चीजों का
- 49:15द्वैतों का वह अद्वैत तुमको। सीधी सी परिभाषा।
- 49:23में तुम्हें सीरनिटी की पता थी। प्रशांत, जो शांति से पार है।
- 49:32जो शांति का। भी अनुभव करता है।
- 49:36और जो अशांति का। भी अनुभव करता है।
- 49:40खलल बड़ी है, उसका भी अनुभव करता है और खलल थम गई।
- 49:45शांति की अवस्था भी उसको भी वह अनुभव करता है।
- 49:50शांति को खोजने मतलब निकल जाना। बहुत से लोग शांति की खोज करने
- 49:56निकल पड़े। आज बी के वाले शांति की खोज कर
- 49:59रहे हैं। तो शांति को तो।
- 50:03अब। मूर्द घाटों में।
- 50:06बड़े आराम से पा सकते हो। वहाँ सब शांत है, सोए हुए थे, चैन
- 50:12से ओढ़े हुए कफन सोए हुए थे। चैन से उड़े हुए कफन यहाँ भी
- 50:21सताने आ गए। किसने पता बता दिया?
- 50:29जो सब दैतों। से पार, वह अद्वैत।
- 50:34सत चित। आनन्द जिसका स्वभाव है लक्षण नहीं
- 50:38स्वभाव कहता हूँ, मैं ध्यान से समझ लेना।
- 50:42लक्षण और स्वभाव का बड़ा फर्क है। किसी वीडियो में मुझे।
- 50:48इसका फर्क पूछ लेना अभी वीडियो बहुत लम्बी हो कर दिया है तो नाम
- 50:55बदलने से कुछ नहीं होता। आप कद्दू का नाम।
- 51:01सेफ रख सकते हो? मैंने बहुत बार कहा आप केला का
- 51:05नाम संतरा रख सकते हो। संतरा का नाम आप।
- 51:09मूली रख सकते हो, गाजर रख सकते हो और।
- 51:13बदल भी सकते हो? और सब धर्मों ने बदला सब
- 51:17लैंग्वेजेज़ ने बदला। कोई कैरट कहता है।
- 51:21कोई कुछ कहता है, कोई कुछ कहता है सभी धर्मों में कोई आभ कहता कोई
- 51:26नीर कहता कोई जल कहता कोई पानी कहता कोई वाटर कहता, लेकिन इससे
- 51:33पानी के ऊपर क्या प्रभाव पड़ा? पानी बदला।
- 51:38क्या उसका केमिकल फार्मूलेशन बदला एच टू ओह के बजाय एच थ्री ओह हुआ
- 51:44या एच टू ओह टू हुआ नहीं हुआ? आपके नामों से कुछ।
- 51:49भी नहीं होता। जो डमरू।
- 51:56बजाने की कला जानता है। उद्देश्य चलाने।
- 52:01की कला नहीं जानता। जो नाम बदलने की।
- 52:05कला जानता है। वह विकास करने।
- 52:11की कला नहीं जानता। जो कष्ट क्षण।
- 52:19की कला जानता है। उसने बनाई बड़े बड़े इदारें बनाई
- 52:25वह उनको नाम तो रख दिया उनका। लेकिन नाम को।
- 52:32बदलेगा नहीं। नाम को बदलना का।
- 52:36है वो तो एक प्रतीक है। एक बार रखा गया, कुछ भी रख दो
- 52:40आपने भगवान रख दिया, नाम भगवान रख दिया, राम रख दिया, राम रख दिया
- 52:44अब राम ने खुद अपना नाम राम थोड़े ही रखा था ने रखा था।
- 52:51राम ने तो नहीं रखा? राम का नाम नाहीं राजधानी रखा
- 52:54राधा का नाम। ना ही कृष्ण ने रखा कृष्ण का।
- 53:00एक प्रश्न थोड़ा पूछ। रहे थे मुझे कि कृष्ण का असली नाम
- 53:04पहला पहला नाम क्या था? बड़ा विवाद हुआ लोगों।
- 53:09ने बड़ा जवाब दिया उसका। लेकिन मैं तुमसे बताता।
- 53:15हूँ। कृष्ण का नाम कृष्ण ही था।
- 53:18और यह नाम दिया। यशोदरा ने।
- 53:22यशोदरा ने जब। यशोदा मानी जब कृष्ण को वात
- 53:26स्वरूप में देखा तो उसका श्यामल रंग देखकर कृष्ण वर्ण देखकर उसको
- 53:31कह रहे यह तो सांवला है कृष्ण। रंग के ऊपर।
- 53:36नाम रखा गया उसका। उसका पहला नाम था।
- 53:41कृष्ण वो रखा उसकी मैया ने, यशोदा मैया ने।
- 53:51मेरे। गीत भी लोक।
- 53:58सुनिए। ने।
- 54:04मेरे। गीत भी लोक।
- 54:09सुनिन्दने, तेका फार आंख सुदीनने। मेरे गिर भी लोग।
- 54:26सुनने देने देखा फिर आंख। तली।
- 54:40देने। मैं।
- 54:48दर्दनों का बा? कह।
- 54:53है बैठा? मैं दर्द।
- 54:57हूँ का बा कह बैठा। में दर्द नु।
- 55:05काबा कह बैठा, रब ना रख देता, पीड़ा धा।
- 55:20रब। ना रख देता।
- 55:24कि राधा? कि कुछ देओ।
- 55:29ह फकीराधा। कि कुछ देओ।
- 55:38हाल फकीराधा। साडे नदियां बिछड़े निरांदा की
- 55:51कुछ जो फ़कीराना। धन्यवाद।