Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Jul 25 - जपुजी साहिब: परमात्मा के तल से पहली बार जपुजी मूल मंत्र का रहस्यात्मक विवेचन! "एक ओंकार"
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- 0:00रणवीर सिंह यूएसए से पूछ रहे हैं, मैं आपकी वीडियो बड़े ध्यान से
- 0:22सुनता हूँ, प्रेम से सुनता हूँ? मैं अमेरिका की किसी बड़ी
- 0:30यूनिवर्सिटी की? एक बहुत बड़ी पदवी प्रधान आचार्य
- 0:42आपकी बातें सरल सहजता से हृदय में उतर जाती है।
- 0:52लेकिन बाबा एक बात भीतर नहीं उतरती।
- 0:57समझ नहीं आता अगर आप उसका निवारण कर दे तो मेरे सारे द्वंद्व
- 1:07समाप्त हो जाए। मैं सिख धर्म का फलावर हूँ जपजी
- 1:23साहब का मूल मंत्र एकुंकार से शुरू होता है, इतनी स्री होती है।
- 1:37गुरु प्रसाद मिलता है। गुरु प्रसाद से प्रभु अगर गुरु
- 1:49प्रसाद से ही मिलता है। तो मनुष्य को यत्न करने की जरूरत
- 1:58क्या है? बस इस बाधा को समाप्त कर दीजिए।
- 2:08मेरी सारी वादाएं समाप्त हो जाएंगे।
- 2:14अगर गुर प्रसाद से ही मिलता है तो हमारी किसी प्रकार की साधना
- 2:26प्रयास किस काम के रह जाते हैं बाबा कृपया यह स्पष्टीकरण दे
- 2:36दीजिए। पुत्र, सबसे पहले तुमने जपजी साहब
- 2:50के मूल मंत्र को ठीक से परम। आओ गहरे तलो पे मैं उतर जाऊंगा और
- 3:04शिष्य बनने को तुम तैयार हो जाओ तो बात गहरे में उतर सकती है।
- 3:16तुम्हारा शिष्य बनने को उदित होना उतना ही आवश्यक है जितना मेरा उस
- 3:25स्थल पर जाकर व्यर्थ में जहाँ से ये शब्द निकले जपजी।
- 3:35तो आइये शुरुआत करें तुम सहेजे सहेजे बैठ जाओ, आराम से सुख आसन
- 3:44में बैठ जाओ, कोई तकलीफ ना हो बैठे माँ ऍम और मैं अपने भीतर
- 3:52पौधा लगाता हूँ। उस स्तर पे पहुँच जाऊंगा जहाँ पर
- 4:02वह परम आनंद का समुद्र है, वहाँ जाके परम मोहन हो जाऊंगा।
- 4:12फिर तुम्हें संबोधित करने के लिए थोड़ा सा ऊपर उठूंगा जहाँ से भी
- 4:20मैं बोल पाया वहाँ से शुरू करूँगा जपजी साहब का मूल मंत्र।
- 4:36सबसे पहली बात तुम्हे समझानी अवश्य है।
- 4:42यह जो जपजी साहब के जीतने भी शब्द हैं।
- 4:50नो शब्द आपने कभी सोचा नहीं होगा। इसलिए मैंने कहा तुमने ठीक से
- 5:00जपजी साहब को पढ़ाना पढ़ लेते तो यह प्रश्न कभी का समाप्त हो गया
- 5:11होता? जपजी साहब के ये नौ शब्द ध्यान से
- 5:25समझे परमात्मा के पास जाने के लक्षण हैं।
- 5:38ये नो के नो शब्द बताते हैं कि तुम परमात्मा के पास पहुँच जाओगे
- 5:45तो क्या अनुभव करोगे? आइए हम एक एक शब्द को ठीक से
- 5:52देखते हैं। फिर हम गलती कहाँ खा गए?
- 5:59हम गलती यहाँ खा गए, मूल मंत्र के यह नौ हिस्से।
- 6:13हमने प्रयोग करने शुरू कर दिए उसके पास पहुंचने के लिए जबकि ये
- 6:22नौ हिस्से थे, उसके पास पहुंचने के बाद एक कस्बा टी थी।
- 6:31मेज़रमेंट था जैसे सुनार सोने को कसता है क्या तुम वास्तव में
- 6:37पहुँच गया हो? यह जानने का एक कसवट ही था
- 6:44मेज़रमेंट था हमने इसको बना लिया उपाय।
- 6:49परमात्मा के पास पहुंचने का यहीं खा गए गलती जब तुम परमात्मा के
- 7:00पास पहुँच जाओगे परम आनंद परम सुख।
- 7:09वो महत सुगंध उसके पास पहुँच जाओगे तो यह नौ लक्षण तुम्हें
- 7:17मिलेंगे। कौन कौन से लक्षण हैं और हम
- 7:24विस्तार से एक एक लक्षण को देखते हैं।
- 7:28एक ओंकार। है।
- 7:32तुम पाओगे सब कहीं वही मौजूद है और उनका उसकी धुन।
- 7:50वह एक सब जगह मौजूद है और वह एक ही मौजूद है ओंकार है उसकी साउंड
- 8:05ऑफ साइलेंस। जहाँ जाकर तुम चुप हो जाते हो,
- 8:12परम चुप परमान उस एकों का उस एक के पास पहुंचने के बाद।
- 8:25सबसे पहले तुम्हें तो सुनाई पड़ेगी मीठी मीठी ध्वनि और होगी
- 8:33उनका अर्थ एकों का ध्यान से समझते जाना सुनते जाना।
- 8:48और ये निष्ठापूर्वक सुनते जाना। मैंने कहा तुम शिष्य बनो।
- 8:54मैं उस तल पर जाकर बोलती हूँ क्योंकि वह उस तल पर जाकर ही बोला
- 9:00जा सकता है जब तुम उस एक के पास पहुँच जाओगे।
- 9:11तो पाओगे? वह एक ही सब जगह विस्तारित है,
- 9:19उसी का फैलाव है, सब स्थान पर और बाबा ने इसको बखूबी कहा है।
- 9:32बिननामे नाहीं कोठा कोई स्थान नहीं जहाँ वह मौजूद ना हो एकों का
- 9:46है सतनाम। यहाँ फिर उल्टा हो गया तुमने
- 9:58व्याख्या की कि उसका नाम है सतनाम।
- 10:04जबकि बाबा कहते हैं कि उसका नाम सत्य है, बाकी सब झूठ है।
- 10:15थोड़े से गहरे में समझे इसे सत्य नाम?
- 10:24सत नाम उसका नाम नहीं है अगर तुमने सत नाम उसका नाम रख दिया तो
- 10:30उलझोगे क्योंकि कोई कहेगा अल्लाह कोई राम, कोई गॉड अलग अलग नाम है
- 10:41प्रत्येक धर्म के। और करीब 300 धरम है।
- 10:46इस पृथ्वी पर 300 से भी ज्यादा है और सब के नाम हरक हैं सब नाम,
- 11:01उसका नाम। सत्य है नाम कैसे कहते हैं नाम
- 11:10कहते हैं सर्जिना जेता केता तेता। नाम ये जो उसका सारा पसारा है।
- 11:23बाबा कहते हैं वह नाम है अब यहाँ समझना जीस बात पर मैंने
- 11:32शंकराचार्य का खंडन किया वह यहाँ आपको समझाएगी।
- 11:44जेता केता तेता नाम जितना पसारा उसने किया जेता केता तेता नाम
- 11:56जितना पसारा उसने किया। हम उस पसारे को प्रकृति कहते हैं
- 12:04उदरत कहते हैं नेचर कहते हैं बाबा कहते हैं कित्ता?
- 12:12जेता कित्ता तेत्ता न? जितना विस्तार परमात्मा ने किया
- 12:25वह भी सत्य है। सिर्फ परमात्मा ही सत्य नहीं है।
- 12:30अब यहाँ आकर बढ़ी फांस फंसेगी। जड़ और चेतन को दो मानने वालों
- 12:43बाबा कहते हैं जड़ और चेतन दो नहीं जड़ भ्रम नहीं है ये शंकर
- 12:54कहते हैं ब्रह्म सत्यम। जगत मिथ्या लेकिन बाबा नाना कहते
- 13:03हैं। जेता कित्ता तेता ना?
- 13:07बिना ना में नाहीं कोठा उसके बिना कोई जगह नहीं।
- 13:16ही इज़ ओमनी प्रेसेंट जितना पसारा है उसका जीसको तुम कहते हो सर्जना
- 13:26परमात्मा को तुम कहते हो सर्जनहार तो बाबा कहते हैं जितनी सर्जना
- 13:33है, वो भी सत्य है। सत्य नाम नाम भी सत्य है और नाम
- 13:44किसे कहते हैं? पसारे को नाम कहते हैं जगत का
- 13:51फैलाव। को नाम कहते हैं बाबा फिर समझो
- 14:02एकंकार सत्य नाम उसका नाम भी सत्य है।
- 14:11बड़ी कमाल की बात है। तुम तो सतनाम सतनाम का जाप करने
- 14:14लग जाते हो, क्योंकि तुमने कभी अर्थों पे रास पे ख्याल नहीं
- 14:21किया। सतनाम उसका नाम भी सत्य है, वह तो
- 14:28सत्य है ही। उसको अलग कर दिया।
- 14:31बाबा ने पहले शब्द में ही कर दिया एक ओंकार वह ओंकार ही सब जगह है।
- 14:41दूसरी बात है सतना एक ओंकार। वह एक है और सभी जगह मौजूद है।
- 14:59उसका फैलाव अनंत है, कोई उसको माप नहीं सकता।
- 15:09सत्य नाम और नाम भी सत्य है वह भी सत्य नाम भी, सत्य पसारा भी,
- 15:18सत्य, परमात्मा भी सत्य पसारा क्या है?
- 15:23जगत पसारा है? समझिए इसको।
- 15:27जेता कित्ता कित्ता क्या है? जगत जगत ही तो बनाया भगवान ने
- 15:35जेता कित्ता सारा जगत जो उसने बनाया।
- 15:44वह एक है और उसका सारा पसारा। पिता नाम उसका सारा पसारा भी सत
- 15:57है, सत नाम नाम किसे कहते हैं? जेता कित्ता?
- 16:05गीता नाम पसारे को नाम कहते हैं बाबा इस विस्तरण को कहते हैं, इस
- 16:14फैलाव को कहते हैं, जो सभी जगह समाहित है उसको कहते हैं जगत।
- 16:24और जगत के कण कण में विद्यमान है। जगत को बनाने वाला सृजन हारा
- 16:30परमात्मा अब तुम तुम कहोगे दोनों कैसे घुस गए?
- 16:36बस यही दिमाग में नहीं आती बात। यही देखने योग्य बात है।
- 16:41यही अनुभवों में आती है। दोनों ही एकमिक हैं, पंसारे के
- 16:49भीतर खुद परमात्मा है। पंसारे के भीतर क्रियेशन के भीतर
- 16:55खुद क्रिएटर बैठा है और ये बात तुम्हें समझी नहीं आएगी।
- 17:01ये दो कैसे हो सकते हैं? एक के भीतर दूसरा घुस जाए?
- 17:06बिलकुल हो सकते हैं भाई यही तो उसकी करमत है और तुम चैरेंज करते
- 17:14हो परमात्मा को जो एक कण तक भी नहीं बना सकता।
- 17:21वो परमात्मा की सृजना को इतनी बराट सृजना को चैलेंज करता है या
- 17:28सिर्फ तुम खोजने का यत्न भर कर सकते हो?
- 17:35फिर भी नै मालूम? कि खोज पाओगे कि नहीं खोज ये
- 17:43तुम्हारे दावे हैं, तुम्हारा भ्रम है, सिर्फ कि तुम खोज लोगे कैसे
- 17:50महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन।
- 17:56जिन्होंने दुनिया को सिद्धांत दिया ई इज़ इक्वल टू एम सिश वो
- 18:04कहते हैं, परमात्मा ही इज़ अनोनो ए वर्ड वह जाना नहीं जा सकता।
- 18:14इस नॉट ओनली अननोन वह सिर्फ ऐसा नहीं कि अब तक नहीं जाना गया।
- 18:19बट ऑल्सो अननोनबल। वह जाना भी नहीं जा सके, लेकिन
- 18:29दिल के बहलाने को गाली भी ख्याल अच्छा है।
- 18:34तुम दिल को क्या हम कभी खोज लेंगे?
- 18:38ठीक खोज लो तुमने पूछा पुत्र ये गुत्थी अगर समझ में आ जाए तो मेरे
- 18:51सारे प्रश्न चुकता हो जाए, बिलकुल चुकता हो जाएंगे।
- 18:58सिर्फ श्रावक बनकर शिष्य बनकर सुनते रहो एक ओंकार सतना।
- 19:12वह ओंकार भी सत्य हैं। परमात्मा भी सत्य है।
- 19:16सतनाम उसकी सृजना ही सत्य है। जहाँ आकर मैंने शंकर को रिजेक्ट
- 19:25किया, क्योंकि शंकर कहते हैं सिर्फ ब्रह्म ही सत्य है, एकोमकार
- 19:32ही सत्य है। नाम सत्य नहीं है बाबा कहते नाम
- 19:40भी सत्य है, उसका पसारा भी सत्य है, उसकी बनाई हुई संगरेचना भी
- 19:48सत्य। विराट नहीं जो विराट से सजना पैदा
- 19:54भी, वो भी तो सत्य हैं। विराट से व्रत ये तो निकलेगा जैसे
- 20:05मनुष्य मनुष्य को पैदा करता है बिलकुल।
- 20:11अपनी प्रतिमूर्ति ही पैदा करता है।
- 20:15पशु पशु को पैदा करता है। पौधे पौधों को पैदा करते हैं।
- 20:21ऐसे ही परमात्मा ने अपना पिसारा पैदा किया।
- 20:26जैसा परमात्मा का रक्षण गुण वैसा ही प्रकृति का गुण।
- 20:32परमात्मा नहीं मरता तो प्रकृति भी नहीं मरता और साइंस बखूबी तुम्हें
- 20:38कहते हैं। मैटर कैन नीदर बी कैरिएटेड नॉर्थ
- 20:42कैन बी डिस्ट्रॉइड यह पदार्थ न तो बनाया जा सकता है।
- 20:50न मिटाया जा सकता तीसरे शब्द पे आ जाएं एक ओंकार सत्य नाम वह भी
- 21:03सत्य है, एक है सब जगह मौजूद है। धरे धरे में मौजूद है और उसकी
- 21:09बनाई हुई सरजाना वो ही सत्य है। झूठ कुछ भी नहीं, लेकिन यहाँ
- 21:18शंकराचार्य बे न मालूम पड़ेंगे, पढ़ते रहे, जिसने देखा उसे कोई
- 21:25फर्क नहीं पड़ता। वह अपनी बात निसंकोच कह दे तो
- 21:32बाबा अपनी बात निसंकोच कह देते हैं।
- 21:37एक ओंकार सथ नाम वह एक है कण कण में व्याप्त है और उसने जो सजना
- 21:45गढ़ी। वह भी सत्य है, वह भ्रम नहीं है।
- 21:55शंकर कहते हैं, ब्रह्म सत्यम, जगत मिथ्या लेकिन बाबा कहते हैं
- 22:01ब्रह्म, सत्यम जगत सत्यम अभी यहीं आ जाओ।
- 22:10एकुम्कार सत्य नाम नाम की व्याख्या मैंने तुम्हें बता दी
- 22:19गेता केता तेता नाम उसके पसारे को नाम कहते हैं बाबा।
- 22:31नाम को जपना और नाम को पुकारना ये दो बातें हैं।
- 22:38इसका विशेषण मैं फिर कभी करूँगा क्योंकि मु्द्दे से बदल जाएंगे।
- 22:43अब ये मूल मंत्र चल रहा है इकुंकार सत्य नाम।
- 22:51करतापुरक करतापुरक यहाँ आप पूछ सकते हो करतापुरक क्यों कहा करता?
- 23:03इस तरह भी तो कह सकते हो सवाल चाहिए।
- 23:09लेकिन बाबा बड़े समझदार हैं। बाबा इतने समझदार हैं।
- 23:15जीस तो तल से बोलते हैं बस उस तल से बड़ा और कोई तल नहीं होता।
- 23:21बिलकुल तलहटियों में जाकर अस्तित्व में समग्र रूप से।
- 23:29समाहित होकर जहाँ से बोला जा सकता है वहाँ से शुरू करते हैं, बोला
- 23:43करता रुखा वही करता है वहाँ जाकर तुम्हें पता चलेगा ध्यान रखना मैं
- 23:49बोल रहा हूँ वहाँ जाकर तुम्हें लक्षण क्या प्रतीत होंगे उसके?
- 23:57वह एक है, सब जगह है उसका नाम भी सत्य है, क्रिएटर भी सत्य क्रिएशन
- 24:09भी सत्य ऐसे आगे आ जाओ कर्तापुरक। वहाँ जाकर आप ये भी बात पाओगे कि
- 24:18और कोई नहीं करता, वही करता है हमारा करना कराना।
- 24:25सब झूठ करता है तो वही करता है। थु ने पुत्र स्वर पुषा रणबीर अगर
- 24:38वही करता है तो हम क्यों करें? थोड़ा आगे चलो आपका जवाब मिलेगा
- 24:45करता पूरक? करता स्त्री क्यों ने कहा?
- 24:50क्योंकि पुरुष ही शांति का निर्धारण करता है, निर्धारण करने
- 24:59वाला वाइक्रोमोसोम है। स्त्री तो सिर्फ उस बीज को पोषण
- 25:06देती है। बीज पुरुष के भीतर इसलिए उसको
- 25:15पुरुष कहा बाबा ने कर्ता पुरुख बाबा वेदवादी नहीं है ध्यान रखना
- 25:24बाबा सत्यवादी। है, सत्य का अनुसरण करते हैं,
- 25:31सत्य का भाषण करते हैं, सत्य का विस्तारण करते हैं, ब्रॉडकास्ट भी
- 25:39सत्य को करते हैं, सत्य ही जानते हैं कर्ता पूर्वक।
- 25:46पुरुष ही अवधारण करता है निर्धारित करता है इस संसार की
- 25:54संख्या को ठीक इसलिए स्त्री ने ही कहा पुरुष का।
- 26:06एकोका सतनाम कर्तस ये तीन शब्दों का है, वह ही करता है वहाँ जाकर
- 26:14तुम्हें पता लगेगा ये तीनों चीज़ ये तीनों चीजें नहीं, ये नौ की नौ
- 26:18चीजें हैं वहाँ जाकर पता लगेगा। उसको किसी का भय नहीं, भय हमेशा
- 26:37दूसरे का होता है। ध्यान रखना और बैर भी सजा दूसरे
- 26:45से ही होता है। ये भी ध्यान रखो।
- 26:48ज़रा ध्यान रखो ज़रा सोचो अगर दूसरा कोई ना हो तो तुम बेयर
- 26:57किस्से करोगे? अगर दूसरा कोई ना हो।
- 27:06तो तुम भय किस्से खाओगे घर पूँ घर वह वहाँ जाकर ये लक्षण आपको
- 27:20मिलेंगे अब तक हमने क्या खंगाला? एक हुंकार वह एक है और ओंकार के
- 27:31रूप में विद्यमान है। उसकी ध्वनि है, उसके होने का ढंग
- 27:36है, ओंकार का नाद वह एक है और उसके होने का ढंग है।
- 27:44हुंकार की मीठी मीठी धोनी सत्यनाम उसका पसारा भी सत्य है, वह तो
- 27:54सत्य है ही, उसका पसारा भी सत्य है, जगत भी सत्य कर्तापुरख।
- 28:06वही करता है जो करता है वही करता है तुम कुछ नहीं करते वहाँ जाकर
- 28:14पता चलेगा बार बार समझा रहा हूँ, मैं एक शक्ति की तरह तुम जीस तल
- 28:20पर बैठे हो। उस स्थल पर इसे रट मत लेना, यह
- 28:26देखने की चीज़ है। यह जानने की चीज़ है।
- 28:31यह रटने की चीज़ नहीं है, मानने की चीज़ नहीं है।
- 28:34जानने की चीज़ है उस स्थल पर जाकर देखना जो आपने बोला।
- 28:44एकोनकार सतना करता परख वही करता है, निर्भय, निर्भय उसको किसी का
- 28:59भय नहीं है, क्योंकि दूसरा कोई है।
- 29:02और उसको किसी से बैर नहीं है। क्या खुद से थोड़ी बैर करेगा?
- 29:08दूसरा कोई है ही नहीं। अकाल मुरत्ती बड़ा प्यारा शब्द है
- 29:18अभी शब्द पे आके बड़े से बड़े चक्कर आ जाते हैं।
- 29:22लेकिन तुम बड़े सहेजे सहेजे तुम व्याख्या कर देते हो क्योंकि
- 29:26तुम्हें असल व्याख्या का पता नहीं जिसने वहाँ जाके अनुभव किया देखा
- 29:33और सही विस्तार कर पाएगा। व्याख्या भी वही कर पाएगा।
- 29:39अब ये दो शब्द हैं, तुम एक समझ जाओ।
- 29:45एक अकाल एक मुहूर्त है। अकाल परमात्मा के लिए प्रयोग किया
- 29:53गया मूर्ति पदार्थ के लिए प्रयोग किया गया संसार के लिए प्रयोग
- 29:58किया गया। वह तो इम्मोर्टल है ही अकाल उसको
- 30:08काल नहीं डसता काल के वश में वो नहीं पढ़ता।
- 30:15काल उसे ग्रसित नहीं कर सकता। अकाल के परमात्मा की बात है अकाल
- 30:25परमात्माओं से नहीं डस सकता ही इस ए मोटर और दूसरा मूर्ति तुमने कभी
- 30:33ध्यान किया? मूर्ति सदा पदार्थ से बनती है।
- 30:40पदार्थ भी कभी मरता नहीं अकाल वह तो कभी मरता ही नहीं।
- 30:49परमात्मा तो कभी मरता ही नहीं। वह एक कोंकार तो कभी मरता ही
- 30:54नहीं। नाम भी नहीं मरता।
- 30:58यहाँ भी दो चीजें बोली हैं बाबा ने पहले दो चीजें बोली एक तो
- 31:03अस्तित्व में चेतन एक अस्तित्व में जगा एकोंका सतनाम हुंकार अलग
- 31:16और नाम अलग ओंकार परमात्मा और नाम विस्तारण, ओंकार चेतना और नाम
- 31:32सृजना। ओंकार सर्जन हारा नाम सर्जना यहाँ
- 31:42पर आइए उन्हीं शब्दों को दोनों को उठा लीजिए।
- 31:48अकाल एक ओंकार अकाल है। उसको मौत नहीं ग्रसन करती और नाम
- 32:00मूर्ति मूर्ति पदार्थ से बनती है जान का और बाबा कहते हैं कि
- 32:07पदार्थ भी इम्मोर्टल है। ही इज़ इम्मोर्टल नॉट ओनली ही इज़
- 32:15ए मोर्टल, बट मैट्रेस ऑल्सो इम्मोर्टल।
- 32:22वह भी काल को ग्रसित नहीं होता और उसका पदार्थ भी उसकी संरचना भी।
- 32:32काल को ग्रसित नहीं होती फिर काल किसे ग्रसित करता है?
- 32:39ना तो वो मरता है, ना तो क्रिएटर मरता है, ना क्रिएशन मरती है अकाल
- 32:46मूरती न तो परमात्मा मरता है, न उसकी मूर्ति मरती है, न उसका
- 32:54पदार्थ मरता है। परमर्ता कौन है, मरता है सिर्फ
- 32:57ढांचा स्ट्रक्चर मूर्ति के भीतर का पदार्थ नहीं मरता।
- 33:05तुम भी कभी नहीं मरते तुम। जो समझे बैठो वो भी कभी नहीं
- 33:10मरता। यह पांच तत्वों का ढांचा बिखर
- 33:15जाएगा, स्कैटर हो जाएगा कण कण में तब्दील हो जाएगा लेकिन मिटेगा
- 33:24नहीं। पांचों के पांचों पदार्थ तत्व
- 33:30पांचों के पांचों पदार्थ तत्व में मिल जाए।
- 33:35धरतेधड़ते में जल, जल में आकाश, आकाश में वायु, वायु में अगड़े,
- 33:42अगड़े। पांचों के पांचों तत्व विनिष्ट
- 33:47कोई नहीं होगा। सिर्फ ये ढांचा जो उनको जोड़कर
- 33:50बना था ढांचा स्क्रैटर हो जाएगा। नथ्थिंग विल डिस्ट्रॉय।
- 34:02नथ्थिंग विल वैनिश मरेगा कोई तो यह शब्द बड़ा प्यारा उपयोग करते
- 34:10हैं बाबा अकाल मूर्ति यह शब्द का अर्थ आजतक मैंने किसी विवेचना में
- 34:21पाया नहीं। किसी व्याख्या करने इस बात की
- 34:26व्याख्या की नहीं, वह सीधी सीधी व्याख्या करती है।
- 34:31अकाल अकाल कहा गया परमात्मा वह नहीं मरता हिज़ इम्मोर्टल।
- 34:40एंड हिज़ क्रिएशन इज़ ऑल्सो ए मॉडल।
- 34:44वो रती भी नहीं मरती, वह भी नहीं मरता।
- 34:49क्रिएटर भी नहीं मरता क्रिएशन भी नहीं मरती एकोंकर सतनाम करथापुरख
- 35:03निरपुम निर्भय अकाल मोराती आप सबी समझ गए आ गए चले अर्जुन सैपम ये
- 35:20दो शब्द है। अजून शेपम?
- 35:28वह जन्म मरण के चक्कर से इसके तीन अर्थ आएँगे।
- 35:40अजोनी के तीन अर्थ आएँगे पहला वह जन्म मरण के चक्कर से पार है, पर
- 35:49न जन्मता है, न मरता है। दूसरा वह किसी यूँनी विशेष में
- 35:55नहीं आता। वह जन्म मरण में नहीं आता, वह
- 36:03जन्म मरण के चक्कर से बाहर है। पहला दूसरा वह किसी विशेष जूनी
- 36:09में नहीं आता। अजूनी तीसरा।
- 36:14वह सभी योनियों में बराबर समान रूप है।
- 36:19तीसरा शब्द ज्यादा बढ़िया है। अजून किसी विशेष नहीं है।
- 36:31वो सभी योनियों में वो ही है जिधर देखता हूँ, उधर तो ही तू है।
- 36:38वरहा में भी तू है, कछुए में भी तू है मछली में भी तू पापी में भी
- 36:43तू है अन्यथा पापी रह के हत्यारे में भी तू है, बलात्कारी में भी
- 36:50तू है न्यायाधीश में भी तू है मुजर में भी तू है?
- 36:58पापी में भी तू है पुण्यक मैं भी तू है, तू ही तू है, तू ही तू है
- 37:04जिधर देखता हूँ, उधर तू ही तू है, हर जगह में तेरी तू ही तो रूबरू
- 37:12है। सब जगह मौजूद है।
- 37:22अजोनी के तीन अर्थ निकाले कोई विशेष नहीं है।
- 37:28उसके हमने अवतार बनाए, लेकिन हमने नहीं कहा।
- 37:36किसी विशेष अवतार में भगवान होता है नहीं।
- 37:41उतना ही हमने मछली में उतना ही कछुए में उतना ही वराह में, सुर
- 37:45सुर में और मेरी एनलाइटनमेंट के बाद 3 दिन ऐसे गुजरे जब मैंने सुर
- 37:53को गले लगा लिया। उसकी स्मृति मुझे बाद में मिली
- 37:56नहीं। 3 दिन लोग कहते हैं 72 घंटे मुझे
- 38:05उसमें परमात्मा नजर आया और इतना सुंदर परमात्मा नजर आया।
- 38:11मैंने आपको कल भी बताया था जब एल एसटी में इतने रंगीन चित्र खिल
- 38:16सकते हैं। तो परमात्मा के चित्रों की खिलावट
- 38:20का क्या अंदाजा हो सकता है? वो तो इतना मनमोहक है।
- 38:28इतना बड़ा चुम्बक है कि तुम्हें कहीं से भी खींच सकता है।
- 38:37इतना मनमोहक है वो सुधर लेता है सुध बहुत सबहार लेता है का जो
- 38:55किसी विशेष शून्य में नहीं। दूसरा अर्थ सभी योनियों में है।
- 39:06तीसरा अर्थ वह जन्मरण के चक्कर से परे है।
- 39:12तीनों में से जो अच्छा लगे रख लेना।
- 39:16तीनों अर्थ मैंने तुम्हें समझाती, ये तीन ही अर्थ हो सकते हैं,
- 39:23लेकिन सत्य क्या है? सत्य यह है कि वो हर यूनी में
- 39:27विद्यमान है। बराबर मैंने जैसा देखा।
- 39:34हरजूनी में मुझे बराबर मिला अजूनी, अजूनी किसी विशेष शिव नहीं
- 39:44बने हम नहीं कह सकते वह कछुए में हम नहीं कह सकते वह मानव में हैं,
- 39:50हम नहीं कह सकते वह पुरुष में हैं, स्त्री में हैं।
- 39:54सब योनियों में बराबर है, मेरे देख सैपम वो किसी से प्रकाश
- 40:06उदाहरण नहीं लेता, वह सूरज की तरह है।
- 40:13सूरज का प्रकाश है, स्वयं का प्रकाश स्वयंभू है, किसी से
- 40:19उदाहरण नहीं लेता। चंद्रमा का प्रकाश स्वयं का
- 40:24प्रकाश सूरज का प्रकाश चंद्रमा पर पड़ता है और रिफ्लेक्ट होता है
- 40:31प्रतिबिंबित होता है। वो धरती पर पड़ता है, लेकिन ये
- 40:37प्रकाश चंद्रमा के पास का नहीं था।
- 40:41यह प्रकाश रात को सूरज तो था नहीं कहाँ से आया, लेकिन जहाँ भी सूरज
- 40:48था वहाँ से उसने। प्रकाशित किया।
- 40:55मून को चंद्रमा को और चंद्रमा ने रिफ्लेक्ट किया।
- 41:00धरती पे सहपम वो किसी से प्रकाश लेता नहीं, शक्ति लेता नहीं,
- 41:07चेतना कहीं से लेता नहीं हूँ। उसकी स्वयं की ही चेतना है, स्वयं
- 41:13की ही शक्ति है, स्वयं का ही प्रकाश है उसका वो किसी से उदाहरण
- 41:17नहीं मांगता कि चलो फिर चौंका देंगे भाई एक बार थोड़ा सा प्रकाश
- 41:22चेतना शक्ति उधारी दे दो नहीं दूसरा कोई है ही नहीं।
- 41:26जिससे मांग ले सै प। स्वयं से प्रकाशित दूसरे किसी के
- 41:39कारण से प्रकाशित नहीं जैसे चंद्रमा रात्रि को सूर्य के
- 41:43प्रकाश से प्रकाशित होता है। ऐसन सूर्य की तरह प्रकाश माँ
- 41:48सैपम। खुद के ही प्रकाश से प्रकाशित है,
- 41:58ठीक है, समझा दिया। अब हम मूल शब्द पर चलते हैं बाकी
- 42:07सारे शब्द हो गए हैं। एकुंकार सतनाम करतारपुर निरपोह
- 42:18निर्वैर अकाल मूर्ति अजोनी स्यापम अख एक शब्दा का जिसके बारे में
- 42:25प्रश्न है। मुगल प्रसाद अब आ गया तुम्हारा,
- 42:36वो गांठ जो खुलेगी अब मुगल प्रसाद अगर वही करता है सब कुछ।
- 42:47उसके प्रसाद से ही सब होना है तो हम क्यों प्रयास करें, लीजिये
- 42:53शांत हो जाइये मैं आपकी ये गांठ खोलने चला हूँ।
- 42:59गुरु प्रसाद गुरु की कृपा से ही मिलता है।
- 43:05क्या मिलता है? बात आनंद की हो रही है।
- 43:14ये दो चीजें बाबा कहते हैं पदार्थों को तुम स्वयं के प्रयास
- 43:22से पा सकते हो। गौर से सुनी, आपकी गुंडे टूट गई।
- 43:32बाबा कहते हैं, संसार की उपाधियों को तुम स्वयं के प्रयास से पा।
- 43:36सकते हो एक? बार नहीं, दो बार नहीं, चार बार
- 43:44फैल हो जाओगे। फिर आखिर में तो वाह ही लोगे जो
- 43:51स्वयं के प्रयास से पाए जा सकते वो परमात्मा नहीं, लेकिन यह मूल
- 43:59मंत्र परमात्मा के लिए है। यह मूल मंत्र संसार के लिए नहीं,
- 44:08समाधि के फौरन वाद के शब्द हैं और समाधि के फौरन वाद व्यापार किसको
- 44:16समझाएगा, इतनी गहन मात्रा में पीली है?
- 44:223 दिन लगातार बाबा गायब रहे यानी उस मदहोशी को पीते रहे सुरती में
- 44:33कुम्हारी में लीन रहे 3 दिन यहाँ रात भर कुम्हारी में रहते हैं।
- 44:43और 4:00 बजे तक पलक नहीं झपकते बाबा 3 दिन उस परम खुमारी में रहे
- 44:57नाम, खुमारी नान का चढ़ी रहे दिन रात।
- 45:04वह खुमार जो उतरता नहीं कभी उस खुमार में डूबे रहे तो सारा ये
- 45:14मूल मंत्र यह परमात्मा के लक्षण है।
- 45:26उसकी उपासना कहलो उसकी शलागा कहलो उसका वर्णन कहलो कुछ भी कह सकते
- 45:41हो, शब्द हैं, तुम्हारे शब्द हैं। लेकिन हैं ये परमात्मा के लिए ये
- 45:50सारे के सारे शब्द तो मैं समझा गया, अब उसका सबसे निचला रस रस
- 45:59क्या है कि यह सारा परमात्मा? यह मिलता है गुरुप्रसाद से यहाँ
- 46:12संसार के पदार्थ की बात नहीं हो रही है।
- 46:17बात परमात्मा की है और पदार्थ भी पाए तो क्या पाए?
- 46:24पदार्थ पाया तो इस जन्म में तुम खो के जाओगे, जोड़ लो, बंगले बना
- 46:32लो, जहाज ले लो, कारें ले लो, धान धान्य स्मेरो पर्वत जीतने इकट्ठे
- 46:40कर लो। लोगों का अपार असंख समूह हमारे
- 46:47संग हो जाए एक शब्द सुनिए बाबा का हम कहाँ गुम हो गए हम गुम हो गए
- 47:03के पदार्थ अगर। प्रयास से पाया जा सकता है तो
- 47:08परमात्मा भी प्रयास से पाया जा सकता है।
- 47:12इस एक गलती ने हमें उलझा दिया, लेकिन बाबा ने इस गलती का सुधार
- 47:20कर दिया। शब्द हैं।
- 47:23इनको बांचोगे इनको खोलोगे बांचने वाला होगा, खोलने वाला होगा तो
- 47:28उसका अर्थ तुम्हे समझाएगा परमात्मा और संसार का रास्ता दो
- 47:36अलग बताये। अकाल अलग बताया, मूर्ति अलग
- 47:39बताया। तुम्हारे प्रयास से मूर्ति तो मिल
- 47:44जाएगी, तुम्हारे प्रयास से अकाल नहीं मिलेगा अकाल मुहूर्त लेकिन
- 47:55तुमने एक ही चीज़ को दृढ़े से सब पर इम्प्लीमेंट कर लिया।
- 48:03संसार प्रयास से मिलता है तो परमात्मा को ही प्रयास से मिलेगा।
- 48:09करो नाम सुमरन करो, पांच नाम करो 1000 नाम करो राधे राधे राम।
- 48:21यहीं उलझ गया। मानवता की यह गलती भयंकर गलती थी।
- 48:28बाबा उसे सुधार करते हैं। बाबा कहते हैं सर चुप्पी से
- 48:38मिलेगा, वो बोले से नहीं मिलेगा। और तुम्हारा जाप बोलना है तुम
- 48:44चाहे लबों से बोलो या मनुष्य से बोलो चुप है चुप न हो भाई जे लाय
- 48:51राह ले बतार। अगर तुम्हारे ऊंट चुप हो गए और मन
- 49:07बोलता रहा तो चुप्पी कहाँ हो? लेकिन हमने एक ही दरडे में दोनों
- 49:16चीजों को बैठा लिया। संसार प्रयास से मिलता है।
- 49:22गद्दियाँ प्रयास से मिलती हैं बिल्कुल धन के अम्बार सोना हीरे
- 49:29जोहरात की कुर्सियाँ ये कॉम्पिटिशनल एग्ज़ैम्स।
- 49:39प्रयास से मिलते हैं। भाई बिल्कुल प्रयास से मिलते हैं,
- 49:44यहीं अटक जाते हैं लोग। अच्छा बाबा हमने तो प्रयास बहुत
- 49:52किया था, हम क्यों फैल हो गए और वह?
- 49:58क्यों पास हो गया? मैं कहता हूँ नहीं पुत्र, तुमने
- 50:03प्रयास कम किया होगा। संसार में ज्यादा प्रयास करने
- 50:08वाला ही पहुंचता है। कम प्रयास करने वाला नहीं
- 50:12पहुंचता। बस तुम्हें उसका प्रयास दिखा
- 50:14नहीं, ये बात अलग है। उसने किसी और क्षेत्र से प्रयास
- 50:21कर लिया होगा। जकनी और हिसाब से उसके
- 50:26सर्कमस्टैंसेस उसके अनुकूल होंगे। तुम्हारे सर्कमस्टैंसेस तुम्हारी
- 50:32परिस्थितियां तुम्हारे अनुकूल नहीं होंगी।
- 50:38कोई तो कारण है लेकिन मिलता वो प्रयास से है।
- 50:45परिस्थितियां आड़े आती हैं। बिना शक लेकिन परिस्थितियां
- 50:52तुम्हारी ही बनाई हुई हैं। तुम्हारी ही समाज ने बनाई धन की
- 51:01वितरण व्यवस्था जो कि गलत है अमीर का बेटा हर वर्ल्ड तुम्हारी
- 51:08यूनिवर्सिटी में पढ़ लेता है रणबीर।
- 51:14अमीर का बेटा तुम्हारी यूनिवर्सिटी में पढ़ लेता है और
- 51:19गरीब का बेटा यह छोटी सी पाठशाला में जहाँ मास्टर भी अच्छी तरह से
- 51:25ठीक ही जानता नहीं तो कौन आगे निकलेगा?
- 51:30सर अब विदित बात है क्या? हारवर्ड यूनिवर्सिटी ही आगे
- 51:35निकले। अब इस बात को ध्यान से समझना
- 51:42क्योंकि तुम्हारी गुत्थी खुल गई है।
- 51:45थोड़ा विस्तार और कर दो तो यह गांठ खुल जाएगी।
- 51:49दागा सीधा हो जाएगा रडक न रहेंगी धाग जे जुग चार अरजा होर दसगुणी
- 52:01होय जे चार युगों की उम्र दसगुणा और भी हो जाए जे जुग चार अरजा।
- 52:10अब कहते हैं कि कलयुग की उम्र 4,32,000 साल है, प्रत्येक युग की
- 52:19अपनी उम्र काल है। बाबा कहते हैं इन चारों की उम्र
- 52:23अगर 10 गुनी और भी हो जाए जे जुग चारें आर जा।
- 52:29और दुसुनी होए नमाखंडा में जानी है, नाल चले सब को है, नो खंड में
- 52:36तुम्हे जाना चाहिए तुम्हारा नाम और तुम्हारे साथ सभी कोई उठ के
- 52:41चले तो मैं इतने प्रसिद्ध हो जाऊ नमाखंडा मुझे जानी है।
- 52:48नाल चले सब कोय चंगा नाम और खाई क जस कीरत जग ले इतनी जश और कीर्ति
- 52:58तुमको मालूम अच्छा नाम जो सुने तुम्हारे नाम को कहते ठीक है हम
- 53:03जानते हैं। ज्योतिष न धर्णावय बात न उछल
- 53:09लेकिन फिर कोई बात यहाँ परमात्मा की कोई बात नहीं है।
- 53:16तुम्हें बार बार बाबा समझा रहे है यह है संसार की बात है नाम कमाना,
- 53:23गद्दी कमाना। शोहरत कमाना, लोगों से संबंध
- 53:28जोड़ना, फला वर्ष बनाना ये जोकचारे आरजा और दसूनी होय नमाज़
- 53:40खंडा, बच्चे जाणिये इतने लोग तुम्हे जानते हो?
- 53:43वोट देने वाले सभी हो तुम्हें तुम्हें ही वोट दें नाल चले सब
- 53:51कोई जीसको बुला लो तुम्हारे साथ चलेगा सुख हो के दुख हो चंगा ना
- 53:58राखई के जस कीरते जा गले तुम्हारा नाम इतना हो।
- 54:03कि तुम्हारी यश और कीर्ति है, सभी लोगों में दिग धगंतर तक फैल जाए,
- 54:11लेकिन आगे आके अब आगे बात कहते हैं ब्रह्मात्मा की यह संसार तो
- 54:18तुम कमा लोगे, ठीक? फिर फिर तुम समझ न पाओगे इस बात
- 54:23को यह है संसार को पाने की बातें नाम पा लेना, ख्याति पा लेना,
- 54:34सोने के सिंहासन पा लेना, सुंदर रू पा लेना।
- 54:40बल पा लेना, शक्ति पा लेना, बड़ी गददियों के ऊपर बैठ जाना, जीसको
- 54:48बुलाओ, नौकर, चाकर, दास, दासियां सब हाजर नवा घंटा में चलिये।
- 55:00लाल चले सब को है चंगा नौ रखई के जस की रथ गले, लेकिन आखरी बात फिर
- 55:08वही आ जाए, ये तिस न धरे न वही तो बात न कुछ के अब फिर दो दो मरहले
- 55:15कर दिए उन्होंने ऊपर की बात ही संसार के लिए।
- 55:22लेकिन ये जो शब्द है ये है परमात्मा के लिए परमात्मा का आनंद
- 55:29तो तभी मिलेगा जब उसकी नजर होगी तो संसार में तुम्हारे फलावर्ध बन
- 55:37जाएंगे। अब इस को अच्छी तरह से समझ ले ना
- 55:40तुम्हारे हृदय में उतर जाए जब जी दोनों चीजों को इकट्ठा इकट्ठा
- 55:45संबोधित करती है, जोड़ के अलग अलग से वर्णित नहीं करती, उसी बात में
- 55:52दोनों बातों को कह देती है जैसे अकाल।
- 56:00जीत से नजर ना आ रही हूँ या उसकी कृपा ना हो उसकी नजर में ना आए।
- 56:05सच्चा साहब यह नजर करें टकागो हंस करें गांको हंस बना दे, वो कव्वे
- 56:12को हंस बना दे अगर उसकी नजर हो जाए।
- 56:17ये तिस नजर ना मैं त बात ना पूछे के हम इतना कुछ कमा के सब
- 56:25तुम्हारे साथ हैं माँ ना कि तुम्हारे शमशान में तुम्हारे सात
- 56:31करोड़ो। माइकल जैक्सन मरे कहते हैं कि
- 56:40उनकी मृत्यु का लाइव और प्रसारण करीब दो अरब लोगों ने देखा।
- 56:47आज तक का रिकॉर्ड है क्या हो गया? माइकल जैक्सन को इससे क्या मिला?
- 56:57माइकल जैक्सन मर गया मरने के बाद तुम 21 तोपों की सलामी देते हो,
- 57:04किसको देते हो कोई सुनता है? वह तो निश्चिंत पड़ा है।
- 57:17तुम्हारी तोपें आग उगल रही हैं, चिल्ला रही हैं, फट रही हैं लेकिन
- 57:26उसे कुछ सुनाई नहीं पड़ता अगर थोड़ा सा भी सुनाई पड़े।
- 57:29तो इतने धमाके से व्यक्ति थोड़ा सा तो हिल है।
- 57:34वह तो ऐसी निद्रा में खो गया, इसलिए मृत्यु को हमने चिर निद्रा
- 57:40का बस वह निद्रा जिसमें से कोई चढ़ता नहीं।
- 57:53किसको सलामी देते हो, किसके लिए सारी उम्र भर प्रयास करते रहे।
- 57:59हमें 21 तोपों की सलामी मिले। 21 तोपों की सलामी तो मिल गई
- 58:05लेकिन तुम्हारा कान तो ज़रा भी नहीं हिला।
- 58:10तुम्हारा कान तो ज़रा भी नहीं रहा, तुम्हारे भीतर तो ज़रा भी
- 58:15स्पंदन नहीं हुआ तुम तो वैसे ही लकड़ियों पर निषेष्ठ नर जीव पड़े
- 58:21रहे। फिर ये तोहों की सलामी के साथ ही।
- 58:28और अगर तुम कहो के इसके भीतर से वह सुनने वाला तत्व चेतना निकल गई
- 58:35तो याद रखना चेतना को कोई फर्क नहीं पड़ता, चेतना निर्लिप्त है।
- 58:44तुम्हें सलामी मिली कि नहीं मिली? चेतना को कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 58:52वह निर्लिप्त है, उसे तुम्हारी सलामियों की जरूरत नहीं।
- 58:59शरीर को सलामी दी, उसके भीतर कोई बंधन नहीं हुआ।
- 59:03फिर ये सलामी किस लिए? हमारे यहाँ दुर्गा मंदिर के अंदर
- 59:11मेरे मौसा जीके पुत्र थे। पहली घरवाली के धर्म पत्नी का
- 59:15पुत्र दुर्गा मंदिर में सेवा करते थे।
- 59:23यही वहीं से खा को लेते है। कामधम करके थोड़ा।
- 59:27दुर्गा मंदिर में एक कमरा मिला हुआ था।
- 59:29स्टोर के ऊपर से किसी को कुछ कुर्सियां चाहिए या कोई चादर
- 59:34चाहिए, वो सप्लाई कर देता तो बर्तन चाहिए लेकिन उसकी कोई
- 59:39ज्यादा पूँछ नहीं थी और वह मर गया।
- 59:45पर उसके मरने पे कोई भी नहीं आया। आगे की बात तुम्हे थोड़ा सा
- 59:50परेशान भी कर सकती हूँ। हमारे जो पुजारी थे वो थोड़े से
- 59:59ज़्यादा आनंद भाग में रहते हैं, मस्त रहते हैं।
- 1:00:07उन्होंने कोशिश नहीं की के चार व्यक्ति खुद ही लग जाए।
- 1:00:11श्मशान घाट तक छोड़ें वह जो जमादारों की ट्रॉली होती है,
- 1:00:18गंदगी ढोने वह ट्रॉली आ रही थी। चार व्यक्तियों को बुलाया इकट्ठा
- 1:00:26किया, उसका सिर उसमें भटक गया। ऐसा भी अंतर होता है लेकिन याद
- 1:00:37रखो कोई फर्क नहीं पड़ा, हंसा उड़ गयो।
- 1:00:45और पदार्थ को कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:00:49ये जो लोग कहते हैं अपना अपना ही होता है।
- 1:00:52अगर मारेगा तो छाँव में गिराएगा मैं सदा ही कहा करता हूँ अपना ही
- 1:00:59क्या हुआ जो मार दे। अपना तो वो ही होता है जो मारे ना
- 1:01:05और फिर मारने के बाद तुम छाँव में घराओ या धूप में घराओ फिर तो तुम
- 1:01:12उसको आग में ही घरा देते हो कोई पता चलता है कब्र में ही दफना
- 1:01:16देते हो ज़रा भी आह भरता है। अपना वो जो मारेगी ना जो तुम्हें
- 1:01:26तुम मरना जाओ, कहीं इसका फिक्र करे वह है अपना तो चार व्यक्तियों
- 1:01:35ने उसकी लाश को उठाया। और वह जो सफाई सेवक कर्मचारी होते
- 1:01:39हैं उनके ट्रॉली में कूड़ा कड़ा भर के लेके आए थे।
- 1:01:44शिवर वगैरह का उसमें भटक दिया। क्या किया जाए उसका अंत ऐसा भी
- 1:01:51होता है लेकिन तुम कहोगे बहुत बुरा अंत हुआ नहीं, कोई बुरा नहीं
- 1:01:56हुआ। तुम्हें पता ही नहीं हंसा उड़
- 1:02:02गया, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, उसके उतारे गए कपड़ों को क्या
- 1:02:08हुआ, गटर में फेंका गया। या गंगा में शुद्ध किया गया?
- 1:02:14बाहर का कोई फर्क नहीं पड़ता और शरीर शरीर तुम्हारा वस्त्र है।
- 1:02:19वासन की जिरहनानी अथा विहाय नवानि घृणाति नरोपरण तथा श्रीरानी विहाय
- 1:02:28जिरह अनन्याण सैयाति नवानि। दे ही न गल गया अपनी चेतना के उस
- 1:02:38अंश को साथ लेकर पीछे रह गया पार्थव शरीर पंचभौतिक पंचभौतिक का
- 1:02:49एक पुतला। शंभू वह खंडेगा फिर उसको कैसे ही
- 1:02:58खंडाऊ कोई फर्क नहीं पड़ता। पंचभूत पंच महाभूत में मिल जाएंगे
- 1:03:05चंगा नाव रखा है के जस की रते जगले।
- 1:03:10ये किस नजर ना वे इनका बात ना पूछे के ठीक जब उसकी नजर नहीं
- 1:03:22पड़ती तो कोई बात नहीं पूछता किस लोक में उस लोक में, आनंद के लोक
- 1:03:29में तुम इतना सब कुछ कमा लो? पदार्थ कमा लो, धन कमा लो, बंगले
- 1:03:39कमा लो, कार कमा लो, हेलिकॉप्टर ले लो, वायुयान ले लो, विदेशों
- 1:03:44में घर ले लो, फैक्ट्रियां लगा लो सब कर लो चंगा नाव रखा है कि जश्न
- 1:03:52की रतेजा कर ले। जय तिस नदर ना?
- 1:03:56मैं का बात, न उच्छक के अगर आनंद तुम्हें नहीं मिला तो फिर
- 1:04:05तुम्हारा सब। किया धरा बेकार हो गया मूल्य
- 1:04:09डालते हैं बाबा नानक आनंद का। उस आनंद की ही फिराक में।
- 1:04:17उस आनंद के ही प्यास में निकलते हैं नानक और नानक उसको पा भी जाते
- 1:04:24हैं। लेकिन नानक कहते हैं कि तुमने जो
- 1:04:28पाया। वो पाया पदार्थ।
- 1:04:33मूर्ति पाई तुमने कर कर के जो। मिलता वह पदार्थ।
- 1:04:39कर कर के जो। मिलता वह मूर्ति।
- 1:04:43उसकी कृपा से जो मिलता वह आकाश जी भेद कर लेना इस बात को।
- 1:04:50बहुत जगह जगह पे ये दो बातें हैं तुम भेद न कर पाओगे तुम दर्दे से
- 1:04:56ही एक अर्थ कर दोगे लेकिन यहाँ संभल जाओ अकाल मूर्ति अकाल
- 1:05:05परमात्मा के लिए, मूर्ति पदार्थ के लिए।
- 1:05:09ना अकाल मरता है, परमात्मा मरता है, ना मूर्ति मरती है, पदार्थ
- 1:05:13मरता है मैटर कैन नीदर वी करी एंड डिस्ट्रॉइड ऑर परमात्मा ही इज़ ए
- 1:05:19मोटर। दोनों ही अमर हैं दोनों।
- 1:05:32की अमृता को मैंने अच्छे से तुम्हें समझा दिया तुमने एक पाया
- 1:05:38पदार्थ वो भी अमर है लेकिन बाबा कहते हैं वह बेकार है।
- 1:05:48नाई चले सब को है, सिंह का नाव रखा है के जस कीरत जगल है ये तिस
- 1:05:54नजर ना आवें का बात न पूछ के अगर अकाल को नहीं पाया तो मूर्तियां
- 1:06:00कितनी भी इकट्ठी करती रहो, करते रहो बहरहस का।
- 1:06:07रस का प्यारा जड़ेगा नहीं एक अवध को तुम ना?
- 1:06:11पी पाओगे उस रस? के जीसको पीओगे वो महज उत्तेजना
- 1:06:17से झड़ता हुआ सुख होगा। इन शब्दों।
- 1:06:23को ठीक से सूझ लेना। जो पाओगे वो वो तेज नाओं से झड़ता
- 1:06:29हुआ सुख होगा अकाल से निकला हुआ रस्ने का तुम सदा ही मूर्तियों से
- 1:06:39झड़ता हुआ सुख पीते हो? अकाल से झड़ता हुआ।
- 1:06:43रस्ने पीते। और तुम उससे ही संतुष्ट हो जाते
- 1:06:48हो। ठीक नीता बड़ा ओहदे पे बैठ के
- 1:06:53इतना बड़ा धन ये हो गया एक नंबर हो गया लेकिन संतुष्टि।
- 1:06:58नहीं होती है। संतुष्टि होती है।
- 1:07:03कबीर कहता है संतुष्टि जब हो जाती है तो तुम्हारी दौड़ खत्म हो जाती
- 1:07:09है। तुम ठहर जाते हो तुम आनंद को।
- 1:07:15पीने लग जाते हो। आनंद ठहर के ही पिया जा सकता है।
- 1:07:20तुम तो पानी भी धोड़े धोड़े नहीं पी सकते।
- 1:07:22आनंद की तो बात ही छोड़ो। और तुम्हारे गुरु तुम्हे दौड़ ना
- 1:07:27सकाते हैं और। तोड़ो थोड़ा तेज फिर के घुमाओ
- 1:07:32महिला की यही चुक। गए।
- 1:07:37गुरु भी चूक गए भी चूक गए। क्यों चूके, कब चूके मुझे नहीं
- 1:07:44पता, लेकिन समझाने वाले तो बहुत आए।
- 1:07:47बाबा ने ये समझाया, तुम कहाँ समझे ये तिस से?
- 1:07:52ना डर, ना भाई बात ना कुछ। अगर उसके अंदर मैं नहीं तुम आओगे।
- 1:08:00जाने अगर तुमने रस नहीं पिया तो। पदार्थों के साधन तुम करोड़ जुटा
- 1:08:07रहे। हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:08:10सिर्फ लोग तुम्हारे चरण छोड़ेंगे लेकिन नकली ही नकली पूजा करेंगे
- 1:08:14लेकिन नकली ही नकली। जल्दी ही तुम्हें भूल जाएंगे।
- 1:08:21तुम ज़रा एक। काम करो तुम कितना भी प्रसिद्ध
- 1:08:23हो। एक दो महीने थोड़ा सा बाहर निकल
- 1:08:26जाओ बस इतने से ही लोग तुम्हें भूल जाएंगे तुम्हें 13 साल से।
- 1:08:35एक कमरे में बैठे हुए हैं बाजार। में नहीं गया।
- 1:08:39किसी ने मुझे देखा नहीं। इधर से।
- 1:08:43उधर से निकलते कोई। कुछ नहीं पता किसी को और मेरे
- 1:08:47बेटा जाते हैं। बाजार में कई बार पूछ।
- 1:08:49लेते हैं, संकोच भी करते हैं। पूछ लेते हैं बेटा?
- 1:08:55अपने पंडित जी कब हुए, क्या हुए वो पंडित?
- 1:09:01जी देखे नहीं कभी। देखे नहीं वो कब अकाल चलाना करके
- 1:09:09वो कहते है अभी तो नहीं किया अच्छा?
- 1:09:13सॉरी भाई गलती हो गई, अकाल चलाना दिखे तो हैं, तुम चार महीने थोड़ा
- 1:09:24सा परे रहकर देखो, दुनिया तुम्हे भूल जाएगी, वही चरण दो, दो के
- 1:09:30पीने वाले लोग तुम्हे भूल जाएंगे। ज्योतिष नदर नबई त बात न उछल के
- 1:09:41टीटा अंदर केतकर दोषी दोष तरे नानक निर्गुण गुण करे त गुण बंता
- 1:09:49गुण। जिसमें गुण नहीं है उसको गुण दे
- 1:09:57देगा। जिसमें गुण है उसको और ज्यादा गुण
- 1:09:59दे देगा। नानक कन्या गुण गुण करे, ते गुण
- 1:10:03बनते है। गुण दे तेरा कोई न सूझाई ये से
- 1:10:07गुण कोई करे तो हम उसको कुछ नहीं। ऐसा कोई भी नहीं है।
- 1:10:17ऐसा कोई भी नहीं है ज्योतिष। गुण कोई करे जो उसके ऊपर कोई गुण
- 1:10:23कर जाये। तुम क्या गुण कर सकोगे?
- 1:10:27कुछ भी तो नहीं कर सकोगे। उसकी ऑक्सीजन लोगे और बिगाड़ कर
- 1:10:31कर में बदल दोगे। उसका शुद्ध पदार्थ खाओगे और मल?
- 1:10:38मूत्र बनाकर निकाल दो। तुम कोई गुण नहीं कर सकते उस
- 1:10:43परमात्मा। गुण सारे परमात्मा ही तुम पर करता
- 1:10:48है। बाबा ने जगह जगह ये बात ये।
- 1:10:56मैंने तो बताई जगह जगह पर आपको ये शब्द मिलेंगे तो समझा ना यह
- 1:11:02परमात्मा की बात हो रही है। भाई फर्कट आप खुद कर लेना बाबा।
- 1:11:08ने संयुक्त वाणी बोल। तुम समझने की चेष्टा करना कि यह
- 1:11:16पदार्थ। के लिए बोला गया।
- 1:11:18प्रकृति के लिए बोला गया मूर्ति के लिए बोला गया या परमात्मा के
- 1:11:23लिए बोला गया अकालपुर के लिए बोला गया काल के लिए अकाल के लिए बोला
- 1:11:28गया। परमात्मा के लिए बोला गया रस के
- 1:11:30लिए बोला गया यह संसार के लिए बोला गया अकाल।
- 1:11:39गुरप्रसाद बाबा कहते हैं संसार का सब कुछ।
- 1:11:47प्रयास से मिलता है। कोई इंकार नहीं, हम देखते भी हैं।
- 1:11:53प्रयास करने से सब मिल जाता है। करत करत अभ्यास के जड़मती हो तो
- 1:11:58सुजान, रसरी आवत जातते सिल्वर पड़ते निशान।
- 1:12:05अभ्यास करते करते करते। एक वक्त आएगा।
- 1:12:10तुम कंप्यूटर के आगे बोल जाओ, बैठ जाओ, लिखो, लिखना शुरू करो।
- 1:12:15एक वक्त ऐसा आएगा कि तुम्हारे कान कहीं और होंगे और तुम्हारे हाथ
- 1:12:19टाइप करते रहेंगे। और एक्यूरेट।
- 1:12:24ये क्या है अभ्यास? करत करत अभ्यास के जड़मती होत
- 1:12:31सुजान ध्यान कहीं और होगा हाथ अपना काम करते रहेंगे यही कहा था
- 1:12:41हाथ पांव ते काम कर। अगर इतना समाज?
- 1:12:47आए तुम्हारे गहरे में। वो उसकी याद तो हाथ पांव काम
- 1:12:52करेंगे और तुम्हारा चित्र उसमें लीन रहेगा।
- 1:12:57बहुत से व्यक्ति तुम देखना। ये टाइप करने वाले।
- 1:12:59बहुत से लोग होते हैं जब तुम। बोलोगे दिखेंगे वही।
- 1:13:05ध्यान तुम्हारी तरफ होगा उंगलियों की तरफ वो नहीं।
- 1:13:09देखेंगे, उंगलियां पहचानती हैं। उनकी जड़ उंगलियां भी चेतन हैं।
- 1:13:20आखिरी। शब्द हैं गुरबक्ष।
- 1:13:24संसार मिलेगा, प्रयास परमात्मा मिलेगा, प्रसाद से परमात्मा।
- 1:13:31मिलेगा। अप्रया से।
- 1:13:33अब फैसला तुम करो, तुम्हें क्या चाहिए?
- 1:13:39फैसला तुम पर छोड़ते हैं बाबा। तुम्हें क्या चाहिए भाई?
- 1:13:45संसार चाहिए तो प्रयास करो, अगर संसार नहीं चाहिए वो चाहिए जीसको
- 1:13:53पीने के बाद। पानी की इच्छा ही खत्म हो जाती
- 1:13:59है। तो बड़े मज़े।
- 1:14:02की बात है। जंक्चर पॉइंट क्या?
- 1:14:04लोग मुझे कहते थे बाबा तुम मांग क्यों नहीं लेते ये गोल्डन स्वैयर
- 1:14:10खोलते हो तुम तुम विश्व के मालिक हो जाते हो वहाँ जाकर तो।
- 1:14:20सभी सिकंदर हो जाते हैं। विवेकानंद वहाँ पर पहुंचे।
- 1:14:25देखिए थोड़ा सा क्षणिक अनुभव हुआ उन्हें आई कैन डू एवरीथिंग वॉटेवर
- 1:14:36आई वांट जो मैं चाहता हूँ, वो मैं।
- 1:14:40कर सकता हूँ उस स्तर पर जाकर समझाती है, वह संकल्प।
- 1:14:46अपनी घणी बहुत मात्रा। में होता है।
- 1:14:53जैसे चूहे को हल्दी। की गांठ मिल गई हो।
- 1:14:57हल्दी की गांठ मिलने से अपन सारी बन गए।
- 1:15:02ऐसा मत करना तुम गुर प्रसाद वह परमात्मा उसके प्रसाद से मिलता
- 1:15:13है। पहले तो भैस लगाना होगा तुम्हें
- 1:15:16चाहिए क्या वास्तव में? जितनी देर तुम लगाते हो ताश
- 1:15:22खेलने। में मूवी देखने में इधर उधर भटकने
- 1:15:25में हिल स्टेशन देखने में जीसको तुम ऐश कहते हो उसको मनाने में
- 1:15:31जितना वक्त तुम जाया करते हो तुम्हारी ज़िन्दगी के अनमूर लम्हे
- 1:15:35तुम लौटा देते हो जिसके ऊपर। वो ज़रा देखना कि इतना वक्त अगर
- 1:15:46तुमने परमात्मा पे लगाया हो तो तुम्हें कुछ और मांगने की जरूरत
- 1:15:54कहाँ थी? तो मुझे कह।
- 1:15:57देते हैं वहाँ जाकर बाबा आप कह। दो कि हिंदुस्तान गोल्डन।
- 1:16:04बस तुम अपनी खोपड़ी से सोचते रहो। खोपड़ी में भेद होती है वहाँ जाकर
- 1:16:12इंडिया। और सारा विषो अलग अलग नहीं।
- 1:16:19रहते हैं और इसको। छोड़ो धरती मंगल आसमान के सभी
- 1:16:24कार्य और सारा ब्रमाण्ड ईश्वर्य हो जाता है।
- 1:16:31क्या मैं किसी एक? के लिए मांग सकता हूँ।
- 1:16:34जहाँ द्वैत हो? गया जहाँ भेद हो गया।
- 1:16:38वह क्या मैं मांग लूँ के। हिंदुस्तान को सोने की चिड़िया
- 1:16:43बन। क्योंकि मांगने वाला वहाँ खो गया,
- 1:16:49वो तल ही ऐसा है। घर से तो तुम चलते हो ये
- 1:16:55मांगेंगे? वो मांगेंगे, वो मांगेंगे, ये
- 1:16:57कहेंगे मेरे पास भी लोग आ जाते हैं लेकिन यहाँ आकर भूल जाते हैं।
- 1:17:03अरे बाबा भूल गए हमने तो ये पूछा ही नहीं, मैंने कहा वो कोई जरूरी
- 1:17:10बात? नहीं थी जो तुम पूछना।
- 1:17:11चाहते थे। कुछ भी जरूरी नहीं है।
- 1:17:14उस एक के सिवा बस वो ही जरूरी है। वो तुम्हें मिल गया।
- 1:17:23इतना काफी है और कुछ जो तुम। पूछना चाहते थे उसकी कोई?
- 1:17:27आवश्यकता भी नहीं है। गुरु प्रसाद गुरु की कृपा से
- 1:17:34मिलता है परमात्मा की कृपा से मिलता है भय, सर्जन हरा उसकी ही
- 1:17:43सृजना भय। ही दे सकता है अगर चाहित।
- 1:17:50वह कृपालु। है दयादु है।
- 1:17:53लेकिन तुम तो हिसाब। मांगने लग जाती हो।
- 1:17:56उसको क्यों दिया? मुझे क्यों नहीं दिया?
- 1:17:59मेरे में क्या कमी थी तुम्हें यह नहीं पता कि सारा माल मालिक का।
- 1:18:04है। वह किसी को दे न दे।
- 1:18:11तुमको दुखी होते हो वे किसी को? बांटे ना बैठे?
- 1:18:17तो किसी को धृत्य बनाए, कंगाल बनाए या राजा बना दे, तुम्हें
- 1:18:22क्या फर्क पड़ता है? लेकिन उसका कोई नियम तो हो गया
- 1:18:28है। और नीम तो वे ही जाने मुझे लोग कह
- 1:18:32देते हैं परमात्मा ने सृष्टि बनाई क्योंकि।
- 1:18:37वह बना सकता था। ये तो कोई जवाब न हुआ।
- 1:18:40मैंने कहा फिर जवाब तुम बता दो, वह सृष्टि बना सकता था, क्षमता
- 1:18:47रखता था। ही हैड दी कपैसिटी टू।
- 1:18:50करी एट पर। अगर तुम्हारे में कपैसिटी है तो
- 1:18:53तुम बना लो, यही तो जवाब हो सकता है और क्या हो सकता है।
- 1:19:00तुम तुम जवाब मांगते हो बुद्धि को।
- 1:19:04संतुष्ट करने वाला बुद्धि कभी संतुष्ट नहीं होगी।
- 1:19:07ये बड़े विशाल विराट मसले भाई तुम बना लो तुम्हें किसने कहा तुम मत
- 1:19:16बनाओ उसने बनाया क्योंकि वह। बना सकता था।
- 1:19:21तो बना लिया। और ध्यान रखना।
- 1:19:27तुम विनाश भी नहीं कर। सकते यू कैनट क्रिएट एंड यू कैनट
- 1:19:35डिस्ट्रॉट तुम विनाश भी नहीं कर सकते, तुम सर्जन भी नहीं कर सकते।
- 1:19:44मैटर कैन नीदर बी क्रिएट एंड नॉर्थ कैन बी।
- 1:19:46डिस्ट्रॉइड ये तो संसार की बात होगी, परमात्मा की बात, परमात्मा
- 1:19:52की बात तुम क्रियेट नहीं कर सकते और परमात्मा की बात तुम क्रियेट
- 1:19:58भी नहीं कर सकते और तुम डिस्ट्रॉय भी नहीं कर सकते यहाँ।
- 1:20:03तुम डिस्ट्रॉय कर सकते हो तुम चाहो तो बरमातों के पास ना जाओ
- 1:20:12क्रिएट तुम कर सकते हो तुम अगर उसके पास चले जाओ तो क्रिएट कर
- 1:20:19सकते हो। तुम अगर उसके पास न जाओ।
- 1:20:25तो बस डिस्ट्रॉइ तो भौ। क्या नहीं मिलेगा?
- 1:20:28तुम्हें। आखिरी शब्द गुरु प्रसाद गुरु के
- 1:20:33प्रसाद। से मिलता है परमात्मा की कृपा से
- 1:20:35मिलता तुम अपनी कृपा। से याने तुम अपने।
- 1:20:43प्रयास से संसार पालोगे परमात्मा नहीं पा सकोगे जप।
- 1:20:51जी का कुल मूलभूत राशि। यही है।
- 1:20:56आखिरी शब्द गुरु प्रसाद। संसार को तुम प्रयास से पालोगे और
- 1:21:07क्या खाक पालोगे क्योंकि जो। तुमने यहाँ पाया।
- 1:21:13संसार में पदार्थ पाया। आखिरी वक्त तुम्हें छूटना पड़ेगा।
- 1:21:18माटी के ऊपर गिर जाओगे कब्रों में।
- 1:21:22चिंतिये जाओगे या आग? लगा दिए जाओगे, गंगा में फेंक दिए
- 1:21:27जाओगे उससे क्या फर्क पड़ता है? संघ कुछ नहीं जाएगा तुम्हारा यहाँ
- 1:21:34प्रयास करके कमाया हुआ धन। लेकिन परमात्मा की कृपा से जो।
- 1:21:42तुम पाओगे वो तुम्हारे संग जाएगा, परमात्मा की कृपा से तुम क्या
- 1:21:47पाओगे अब यहाँ पर आ जाए आखिर सो ले परमात्मा की कृपा से तुम
- 1:21:53कोनसेस्स की फुलफिलनेस पाओगे। कंप्लीट्ली यू विल बी कॉन्शसनेस।
- 1:22:04तुम पूर्णतया भ्रम हो जाओगे। पूर्णतया फुल कॉन्शसनेस हो जाओगे।
- 1:22:12ये उसकी कृपा से गुरु प्रसाद। गुरु प्रसाद से संसार तो तुम्हें
- 1:22:23तुम्हारे प्रयास से मिलेगा, उसकी कामना भी मत करना।
- 1:22:28तुम तो संसार की चीजों को भी परमात्मा से मांग लेते हो, जबकि
- 1:22:32ये सीधा सा असूल है कि परमात्मा की कृपा से।
- 1:22:35तुम्हें सांसारिक पदार्थ नहीं मिलते, तुम्हारी मेहनत ही मिलते
- 1:22:40हैं एक ही। चीज़ परमात्मा की कृपा से।
- 1:22:44मिलती है जो आखिर में बाप बनेगा गुरप्रसाद आनंद रस, शांति ठहराव।
- 1:22:57तुम खो जाते हो खोजने। वाला?
- 1:23:01वहाँ खो जाता है, जाके रस तुम नहीं कमा सकते धन तुम कमा सकते
- 1:23:12हो। रस से तुम नहीं कमा सकते, सुख तुम
- 1:23:16को मार सकते हो, पदार्थों से सुख मिलता है, वो तुमको मार सकते हो,
- 1:23:23परमात्मा से आनंद मिलता है, वो तुम नहीं कमा सकते।
- 1:23:29और पदार्थ संघ नहीं जाता पदार्थों।
- 1:23:32के सुख संघ नहीं जाते, परमात्मा का आनंद संग जाता है।
- 1:23:37कॉन्शसनेस का परिपूर्ण होना तुम्हारे संग जाता है।
- 1:23:43फिर सुनिए इस। बात को कॉन्शसनेस का।
- 1:23:45परिपूर्ण होना। फुलफिल्डनेस ऑफ कान्शस्नस ये
- 1:23:52तुम्हारी शंख जाता है पदार्थों का झुरमुट झुंड इकट्ठा कर लो वो
- 1:23:59तुम्हारे शंख में जो सुख। उससे तुमने माना।
- 1:24:05वो शंख नहीं जाएगा। क्योंकि सुख एक।
- 1:24:08तरह की उत्तेजना है। दुख भी एक तरह की उत्तेजना है,
- 1:24:14सुख भी उत्तेजना है, लेकिन आनंद का विपरीत कुछ नहीं है आनंद जब
- 1:24:23मिल जाता है। तुम उसमें समाहित।
- 1:24:26हो जाते हो फिर तुम उससे खोते। नहीं हो सुख खोया।
- 1:24:31जा सकता, दुःख भी खोया जा। सकता पदार्थ खोये जा सकते हैं।
- 1:24:36राजा रंग हो सकता है, रंक राजा हो सकता है लेकिन संत कभी असंत नहीं
- 1:24:44होता। संत कभी आनंद को नहीं खोता, कभी
- 1:24:50कभी वह खोया ही नहीं जा सकता वह। ना कटता, ना छिदता, ना गलता।
- 1:25:02ना सोखता ना जलता। वह आनंद है, वह खोया भी नहीं जा
- 1:25:10सकता, वह सिर्फ मिल जाता है एक बार और एक बार का मिला वो सदा के
- 1:25:18लिए रह जाता है अखंड। मैं कभी खंडिश नहीं होता
- 1:25:29गुरप्रसाद अब समझ गया आप बाकी सभी चीजें यह है सारी गुरुबाणी का
- 1:25:36जपजी साहब का मूल मंत्र? परमात्मा के लक्षण बताता है कि
- 1:25:42आखिर में तुम पहुंचोगे तुम क्या देखोगे?
- 1:25:45वह बताया तुम्हें तुम निर्भय हो जाओगे तुम निर्भय।
- 1:25:49हो? जाओगे तुम अकाल मूर्ति हो जाओगे
- 1:25:53तुम अजूनी हो जाओगे तुम अपने ही प्रकाश से प्रकाशित हो जाओगे।
- 1:25:58तुम पाओगे कि वह एक है और वह सर्व व्यापक है और वह उसका नाम भी सत्य
- 1:26:07है, वह भी सत्य है और वही करता है कर्तापुरक अकाल मूरत है।
- 1:26:19से पं। गुर प्रसाद है पर बात प की कृपा
- 1:26:25से मिलता है तुम्हारी करने से मिलेगा।
- 1:26:28जो वो होगा। फिलहाल से तुम्हारी प्रयास से
- 1:26:34मिलेगा जो वह 1 दिन खो जाएगा। उसकी कृपा।
- 1:26:39से मिलेगा जो वह। कभी नहीं खोएगा वह अखंड धारा अखंड
- 1:26:44धारा का अर्थ वह कभी लूटता नहीं, खंडित नहीं होता।
- 1:26:51मैं गुम भी नहीं। होता उसे तुम भूलते भी नहीं।
- 1:26:54कभी। वह तो बस एक बार आया तो आ गया आ
- 1:26:59ही जाता है, लेकिन तुम्हारा पदार्थ तो एक बार आ गया चला जा
- 1:27:05सकता। है चले जाते हैं।
- 1:27:07आज कोई गरीब है, कल को अमीर हो जाएगा, आज कोई अमीर है, कल को
- 1:27:10गरीब हो जाएगा तो तुमने पूछा, पुत्र।
- 1:27:14रणबीर? गुरप्रसाद क्या है?
- 1:27:17गुरप्रसाद परमात्मा के वास्ते कहा गया है, संसार के वास्ते नहीं,
- 1:27:22क्योंकि यहाँ का कोई पदार्थ टिकाऊ नहीं है।
- 1:27:27तुम उसके एक बारगी मालिक तो हो सकते।
- 1:27:29हो कुछ समय के लिए। लेकिन श्रद्धा के लिए उसके मालिक
- 1:27:35नहीं हो सकती। आनंद।
- 1:27:37ही एक ऐसी चीज़ है जिसके तुम। सद के लिए मालिक हो सकते हो
- 1:27:42कॉन्शसनेस का फुलफिलनेस उसके अगर तुम 1 दिन बाद कहोगे तो फिर उसे
- 1:27:48को न पाओगे। यही चीज़ है।
- 1:27:54गुरु प्रसाद गुरु प्रसाद से मिलता है परमात्मा का आनंद और बाबा आनंद
- 1:28:08को ही तरजीह देते हैं, आनंद का ही व्याख्यान करते हैं, आनंद को ही
- 1:28:14पीते हैं, आनंद को ही गाते हैं। उनका जीवन आनंद से ओतप्रोत है।
- 1:28:23वीडियो। लंबी हो गई है उसकी कृपा।
- 1:28:25हो कैसे आखिरी शब्द है क्या उसकी? कृपा होगी अगर तुमने अपने।
- 1:28:32जीवन की नैया की पतवार उसके हाथ में सौंप दी।
- 1:28:38आप ही चलाओ हम ना चला सकेंगे ये बोझा है हमारे लिए।
- 1:28:46आप ही हमारे जीवन की नैया की कवैया बन जाओ।
- 1:28:53हम अल्प हैं। हम पूर्ण नहीं हैं, तू पूर्ण हैं
- 1:28:57प्रभु तू ही हमारी नैया का खवेजा बन जा, तू हमारे अच्छे बुरे
- 1:29:07कर्मों की तरफ मत देख। तो परमात्मा की कृपा हो गयी।
- 1:29:15समर्पण? भाव से परमात्मा की कृपा होती है।
- 1:29:19परिपूर्ण भाव से सम्पूर्ण भाव से उसके समर्पित हो जाओ।
- 1:29:25तो उस करदार की कृपा होती। है।
- 1:29:28गुरु की कृपा होती है। बस तुम उसकी।
- 1:29:32शरण में चले जाओ सच्चे। सच्चे सर्कस नहीं करना है तुम
- 1:29:38उसके चरणों में। बिछ जाओ सिर्फ।
- 1:29:42पूर्ण। समर्पण भाव से बिछ जाओ।
- 1:29:44तुम नर हो, बस वो ही रहे, ये मतलब है इसका।
- 1:29:49अपने मैं को उसके हाथ में दे दो, सर्वधर्माण प्रतिजमा।
- 1:29:54में कम शरण। वृक्ष वो क्या करेंगे तुम्हारे सब
- 1:29:57दुखों को हस लेंगे आम तो आम सर्वपापित मोक्ष स्वामी माँ सुचा
- 1:30:06तो। बाबा कहते हैं।
- 1:30:08के अपने जीवन की नैया को उस खविया के हाथ में पूर्णतः फ्रम दी
- 1:30:17इन्नेस्ट कोट ऑफ़ युअर हार्ट समर्पित कर देना और वह अपना
- 1:30:25प्रसाद बरसा देगा तुम पर। वो गन वेखे।
- 1:30:32साहिब। से कोई।
- 1:30:40ना मेरी। ओह गन वेखे साहिबा ते कोई ने मेरी
- 1:30:51तान जैसे रोम शरीर हो तो हदगुणा। जे तेरा मसरिर दे हो तो वध गुणा
- 1:31:13हो तो वध गुणा रखे चल ना दे कॉल। मेरा वालिया सांयार की चरना निकोल
- 1:31:31मेरा वालिया सांया मेरा वालिया सांया।
- 1:31:41मेरा और। धन्यवाद।