Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Sep 25 - आनंद की बूँद! परमात्मा का “नशा” कैसा होता है?
Transcript
- 0:02प्रेम कुमार अमरोही बाबा जी प्रणव भलो भयो, हरि भी सरो सर से टली
- 0:19बला। जैसे थे तैसे भयो, अब कछु कहा न
- 0:26जाए इस कार्तिक ए भाव। पहले ही कुछ कम न थे इस दुनिया के
- 0:46काम पहले ही कुछ कम न थे इस दुनिया के काम ऊपर से ये कह गयो
- 0:56जपले हरि को नाम। जब आ गए हमराम में जब आ गए हमराम
- 1:13में आराम मिल गया जब आ गए हमराम में आराम मिल गया।
- 1:29तुमने ईश्वर को एक धंधा बना लिया। ईश्वर धंधा न ईश्वर एक स्वाद है।
- 1:44और स्वाद को चखना होता है ना के दोहराना होता है।
- 1:50इस शब्द को फिर समझ लीजिए परमात्मा एक रस है, तुमने इसे
- 2:00धंधा बना लिया है। यह एक रस और रस का स्वाद लेना
- 2:12होता है ना कि दोहराव करना होता है, ना टु रिपीट बट टु टेस्ट।
- 2:25हमने दोहराना नहीं है मीठा, मीठा, मीठा, मीठा, वर्ण मीठा कैसा होता
- 2:36उसको स्वाद को चख ले तुमने धंधा बना लिया।
- 2:43ईश्वर धंधा नहीं, ईश्वर स्वाद है, रस है इसलिए उपनिषदों में कहा रसो
- 2:53वैसा वह रस है पीने के लिए। रेपुटेशन करने के लिए नहीं, नॉट
- 3:06टु रिपीट व्हाट टु टेस्ट उसका स्वाद चखो, दोहराओ मत, यही तो वीर
- 3:18कहते है। यही नानक कहते हैं, सबना जियाँ का
- 3:25एक दाता शो में विसरण जाए, वह मुझको विसरना जाए, तुम तो काम
- 3:37उल्टा कर रहे हो। तुम कोशिश करते हो और तुम्हारे
- 3:42गुरुजन भी कहते हैं, चलते फिरते सोते उठते हैं, काम करते हैं,
- 3:51खाते पीते हैं, नहाते धोते हैं, नाम जप्पू।
- 4:02कहीं कहने में और सुनने में फर्क रहा, क्या तुम्हारे गुरुओं ने इसे
- 4:11धंधा बना दिया और जिन्होंने स्वाद को चखा?
- 4:18उस रस को चखा। वो तुम्हारी मूड भ्रांतियों को
- 4:22तोड़ने की भरपूर कोशिश करेंगे। वो तुम्हें कहें गए तुमने धंधा
- 4:31बना दिया, इस धंधे को छोड़ो, वह स्वाद है।
- 4:38रसोवैसा ईश्वर स्वाद है, नाटू रिपीट बटू टेस्ट दोहराने के लिए
- 4:46नहीं स्वाद लेने के लिए होता है रस पीने के लिए होता है तुम धंधा
- 4:56बना लिए हो। और यही सूचना है कि तुम पहुंचे
- 5:01नहीं। इससे बड़ी सूचना और हो भी नहीं
- 5:06सकते। जब तुम कहते हो जपो जपो तो संत
- 5:12समझ जाता है इसने पिया नहीं। संत समझ जाता है, यह धनदेव आज है
- 5:21इसने जाना नहीं अन्यथा कभी न कहता जब वह यह कहता पी ओह पी ओह पी ओह
- 5:33नानक के कोई गुरु नहीं थे। और आपके जानकर बड़ा आश्चर्य होगा।
- 5:42नानक ने पहला पाठ प्रकृति से सीखा।
- 5:49अभी प्रबुद्ध नहीं हुए थे, लगन लगे थे।
- 5:56लगने लग जाए तो वह दूर नहीं। यही उपनिषदों में लिखा वह पास ही
- 6:06पास है। अगर लगने लग जाए तो लगन ना लगे।
- 6:12तो वह दूर से दूर है। पहला सबक पपी है ने सिखाया रथ
- 6:25बैठे हैं, अपनी लगन लगाएं। मग्न होर है एक पपीहा आवाज देता
- 6:37है पे हो पे हो पे हो। नानक ने कहा पियो पियो।
- 6:50पियो समझ गए नानक और नानक ने पीना शुरू कर दिया।
- 6:59यह प्रकृति का आधिस्ता या उस परम प्यारी का आधिस्ता है जो सच खंड
- 7:08से उतरा था। जैसे नानक को सिखाने आया था।
- 7:14पहला पाठ पियो पियो। वह पीने के लिए है।
- 7:29और यह पीना ही 1 दिन समुद्र बन गया।
- 7:36प्यास और गहरी हो गई पीने के तलब और लग गई बिछोड़ा असहनीय हो गया।
- 7:49नान को लगा अब ये भी थोड़ा सहन नहीं होगा।
- 8:00नान के दिन भर रात कुछ न करते हैं, सिर्फ पीते हैं लगन ऐसी।
- 8:12ऐसी लकड़ लगे जिसे भी लग जाती है ये लगन ही पहुंचा देती है।
- 8:20जप नहीं पहुंचाता सी लगी लगन। मेरा हो गई मगन हो तो गली गली हरी
- 8:37गुण गाने लगी महलों में। बन के जोगन चली मेरा रानी दीवाने
- 9:01कहाने लगी। ऐसी लगी लग्न मेरा हो गई मग्न
- 9:15लग्न लग्न पहुंचा देती है लग्न में मग्न हो जाओ फिर तुम बावरे हो
- 9:24जाओगे। मेरा की तरह है, नानक की तरह है,
- 9:28चैतन्य की तरह है, राम कृष्ण की तरह है, लग्न में मग्न होना भी
- 9:36सूत्र है। तुम्हें लग्न तो लगी है?
- 9:44लग्न में मग्न भी नहीं हुए अभी वो रसधार तो मेरे भीतर उतरे नहीं, जब
- 9:54रसधार उतरती है तो लग्न लगती है। प्रेम की एक बूंद पीने से व्यक्ति
- 10:02पागल हो जाता है। हीर की तरह है, मजनू की तरह है,
- 10:13सोहनी की तरह है, ये लगन का ही प्रमाण है।
- 10:25बुनियाद तो अभी जग्गी नहीं, बातें तुम परमात्मा ही करते हो।
- 10:33लगन में जब तक मगर ना हो तब तक दीवान की न छायेगी और जब तक दीवान
- 10:42की न छायेगी। तब तक तुम बोरियत में ही फंसे
- 10:48रहोगे। मन एक बोरियत है, भटकाता है, कभी
- 10:55इधर ले जाता है, कभी उधर ले जाता है।
- 10:58इसे खुद ही रास्ता पता नहीं कहाँ जाना है?
- 11:05जब वो नहीं पियो रस पीने के लिए होता है, उन्नरुक्ति के लिए नहीं
- 11:16होता, उन्नरुक्ति के लिए होता है, तो और पीने के लिए होता है।
- 11:24और ज़रा सी दे देसाकी और ज़रा सी और ज़रा सी दे देसाकी और ज़रा सी
- 11:39और। कैसे रहूं सुख?
- 11:42मैंने पी ही क्या है वो सभी तक है बाकी और ज़रा सी दे जैसा की और
- 11:57ज़रा सी और। पन्नू होती है पीने की रेपेटिशन
- 12:03होती है पीने की ओर डाल दें मेरे पैमाने को छलका दे साखी अभी तो
- 12:14मैंने भी ही कहा है। हो सभी तक है वाक्य और ज़रा सीधे
- 12:23दशा के जब तक मगन न हो जाए इस लग्न में तब तक मदहोशी न छायेगी
- 12:30उस रस की और उसके रस की मदहोशी ही तुम्हारा लक्ष्य है।