Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Oct 25 - क्या परमात्मा ऐसा नहीं कर सकता कि अभी कर्म करें और अभी फल मिल जाए? Karma Philosophy. Baba Ji Vijay Vats
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- 0:21हरि प्रसाद बाबा जी, चरणस्पर्श। काफी देर पहले मैंने आपसे एक
- 0:37प्रश्न पूछा। क्या परमात्मा ऐसी व्यवस्था नहीं
- 0:45कर सकता की अभी गर्म मिले और अभी फल?
- 0:57क्या परमात्मा ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकता?
- 1:03अभी कर्मों का फल अभी मिल जाए, उससे क्या होगा?
- 1:09बाबा के आदमी पाप करना छोड़ देगा। और वह जान सकेगा कि मैंने ये पाप
- 1:22किया, उसका फल ये होगा आपने कोई नष्ट जवाब दिया।
- 1:42नहीं कुछ मेरी डांट दिल्ली की गालियां वगैरह निकाल देते, दोनों
- 1:55में से कुछ भी नहीं किया आप से है के रह गए?
- 2:04अब तो आपका ग्रंथ सम्पूर्ण हो गया, क्या आप प्रप नहीं करेंगे?
- 2:14मैंने कहा था परमात्मा से। और परमात्मा भी चुप रह गए थे।
- 2:32फिर मैंने ही सोचा की क्या तुम ज्यादा समझदार हो परमात्मा?
- 2:44अगर ज़्यादा समझदार हो तो अपनी सृष्टि स्वयं ही बना लो और जीस
- 2:52तरह की चाहतें हो, उस तरह की बना लो तुम दूसरों के यहाँ तक के
- 3:05परमात्मा के भी। बनावट में दोष निकालने के आदी हो
- 3:13गए हो। अपना हाल देखो तुम्हारा क्या हो
- 3:18गया, कैसा नहीं हो सकता कि परमात्मा अभी कर्म करें, अभी फल
- 3:24नहीं जाए। अब क्या हो रहा है?
- 3:26अब भी तो वही हो रहा है जिसे आप देर कहते हो वह देरी प्रोसेसिंग
- 3:36में है जैसे बीज अभी वो दिया उस बीज का आम बनेगा जाके 20 साल 30
- 3:48साल बाद। 40 साल का प्रक्रिया का अभी शुरू
- 3:57हो जाना ही फल का अभी शुरू हो जाना है।
- 4:09और फिर उस सर्जन हारे से तुम ज्यादा समझदार नहीं, असल में तो
- 4:20तुम मुर्ख हो, अगर ज़रा भी समझदारी है।
- 4:28तो रेत का एक कण बना के दिखा दो नियमों की बात बदलने की बात तो
- 4:33दूर करना नियम तो बाद में देख लेंगे, लेकिन एक रेत का कण एक
- 4:43पानी का बूंद एक हवा का कण। जब बना के तू दिखा तो इतनी बड़ी
- 4:54सृजना को कोस रहे हो? ध्यान रखो तुम्हारे दुख का मात्र
- 5:04यही कारण है। गलतियाँ निकालना आम व्यक्तियों के
- 5:16नहीं परमात्मक सिद्धांतों तक में तुमने गलतियाँ खोज।
- 5:31अगर ऐसा हो कि अभी कर्म करे, अभी फर मिल जाए, क्या तुम अभी कोई केस
- 5:42फाइल करोगे? सुप्रीम कोर्ट में हत्या का मामला
- 5:47अभी फांसी हो जाएगी। वह देरी जिसे तुम कहते हो, देरी
- 5:54कहाँ होती है? देरी तो एक पल के भी नहीं होती,
- 6:01देरी होती है सिर्फ प्रोसेसिंग की और कोई भी कानून बना दो, कोई भी
- 6:10नियम बना दो। बात तो तुम्हारी बदलने की है।
- 6:19संत कहते हैं नियम कुछ भी हो, पाप न करो।
- 6:28और फिर भी जो होता है, अगर बुरा होता है उसे स्वीकार कर लो।
- 6:35अंतः सप्रणों से स्वीकार कर लो, पूर्ण हृदय से स्वीकार कर लो।
- 6:45अब ध्यान से सुनना, बात को नियम कोई भी बना दिया जाए, तुम उसका
- 6:49दुरूपयोग कर ही रहोगे। जो मोहम्मद ने कहा और मुसलमानों
- 7:12ने माना, अल्लाह कहता है मैं बहुत अक्षमा सिर।
- 7:26निश्चित ही मैं बहुत क्षमाशील हूँ, मैं माफ़ कर देता हूँ, बस
- 7:34व्यक्ति गुनाह को कबूल कर ले और तौबा कर ले।
- 7:46स्वीकार कर लो, कन्फेशन और तौबा कर लो, आगे से निकल लो तो
- 7:59परमात्मा ने संदेश बजाया में सेंजर के जरिए मुहम्मद के जरिए।
- 8:11सन्देश भिजवाया कि मैं बड़ा क्षमाशील हूँ समयशील है बिलाक्षक।
- 8:24इतना क्षमाशील की तुम जैसे मूर्ख पैदा कर दिया और उसके क्रियेशन के
- 8:33ऊपर सवाल उठा रहे हैं। मीन मैक कर रहे हैं जैसे चित्रकार
- 8:36ने मूर्ति बना दिया और तुम उसमें गलतियाँ निकालो।
- 8:46सुझाव दे रहे हो? सुझाव किसने मांगा?
- 8:48से परमात्मा ने कभी सुझाव मांगा। अल्लाह ने कहा कि मैं बड़ा
- 8:59मुश्किल हूँ, मैं दयालु हूँ, रहम करीम हूँ।
- 9:06मेरी इनायत बरसती है चहुं और हर वक्त
- 9:20मनुष्य ऐसी शय है के परमात्मा कोई भी नियम बना दे।
- 9:31और परमात्मा कैसा भी हो हम उसमें से कानून की तरह चोर मोरिया,
- 9:39निकाल रहे हो वकीलों की तरह मैं सदा ही कहता हूँ न्याय के नाम पे
- 9:51अदालतों में कुछ भी नहीं होता, फैसले होते हैं।
- 10:01एक व्यक्ति ने दूसरे की हत्या कर दी और जज वहाँ मौजूद नहीं था।
- 10:10तीसरा व्यक्ति फैसला सुना रहा के ही और शी शुड बी हैंग्ड?
- 10:22हाँ शुड बी क्या वह सुनाने के योग्य है जिसने देखा ही नहीं क्या
- 10:33हुआ तुम तो आँखों देखी भी चीजों को गलत माप लेते हो अपने ढंग से।
- 10:44हर चीज़ का अर्थ आप गलत लगा देते हो।
- 10:52अल्लाह ने कहा मैं बड़ा क्षमा शील हूँ, मैं माफ़ कर देता हूँ, तुम
- 10:57गुनाह को कबूल कर लो और तौबा कर लो।
- 11:08फिर तुम गुनाह कर लो, फिर तुम कबूल कर लो फिर तुम दौबा कर लो,
- 11:15तुम गुनाह करते ही चले जाओ पर मैं माफ़ करता ही चला जाऊंगा।
- 11:22इससे बड़ी रिलैक्सेशन मिली मानवता को।
- 11:27मानवता को नहीं मुसलमान ईसाईयत को भी बड़ी रिलैक्सेशन मिली।
- 11:38यहाँ तो तोहफा भी नहीं करना पड़ता।
- 11:40सिर्फ कन्फेशन नहीं करना पड़ता। इसलिए आपको आज ईसाई और इस्लाम
- 11:53धर्म के जीतने अनुयायी मिलेंगे। उतने किसी और धर्म को नहीं
- 12:00मिलेगा। तुम्हारे कहने का मतलब ये है,
- 12:09पुत्र। त्त क्षण उसका फल मिल रहा है।
- 12:18कहीं आरएसएस के तो नहीं हो? इसका मतलब ये है कि नाथूराम गोडसे
- 12:25गोली मारे और तुरंत उसको गोली लग जाए।
- 12:29परमात्मा की तरफ यही मतलब है। ये जो आज न्याय के नाम पर कहते
- 12:39हो, किसी रिकॉर्ड्स में एक व्यक्ति ने आज कतल कर दिया, उसका
- 12:49जीवन तो आज चला गया। लेकिन तुम दूसरे व्यक्ति को फांसी
- 12:56दोगे? 20 साल बाद उसी वक्त गोली मारे।
- 13:01घुटसे और परमात्मा की तरफ से उसी वक्त गोली मार दी जाए।
- 13:08प्रतिक्षण फल मिल गया। क्या तुम ये चाहते हो ये कहाँ?
- 13:15वैसे मैंने कहा था भ्रम मैं तुम्हें से बोल कुछ नहीं ये सोचो
- 13:28तुमने कहा थोड़ा सा कुछ थोड़ी गाली वगैरह निकाल देते।
- 13:33और लोग के पट्ठे मुझे ये बताओ के अगर बीज ध्यान से सुन खेत में बो
- 13:45दिया जा रहा है और उसका तुरंत फल मिलना हो?
- 13:53तो बीज का फल क्या होगा? बीज इधर बीज फेंकेगा, किसान उधर
- 13:59बीज परमात्मा फेंक देगा, ये ले अपने कर्म का फल ले ले।
- 14:11अगर तुम जैसे वैसे तो सभी हैं। मुझे पता है बस बताते नहीं हैं।
- 14:20ऐसे किसी ने बलात्कार किया, उसी वक्त उसे दंड मिल गया।
- 14:34किसी ने किसी नन्नी बालका को रेप करके मार दिया?
- 14:42उसी वक्त वह मर गया? आज क्या फैसले होते हैं ये न्याय
- 14:48होता है। जिसने 20 साल पहले कतल किया उसने
- 14:55उसके जीने की आजादी छीन ली और ज्य सुनाएगा।
- 15:00फैसला 20 साल के बाद तो कातिल को 20 साल और जीने का मौका मिल गया
- 15:06ना? न्याय हुआ क्या?
- 15:13हम्म होगा ऐसी व्यवस्था ठीक रहेंगी, बना दूँ?
- 15:29मैंने कहा गुरु कहाँ गलत होते हैं?
- 15:33गलत तो गुरु के शिष्य हो जाते हैं क्योंकि जो गुरु ने हिमालय की
- 15:42ऊचाईयां छुई होती हैं। वो शिष्य ने नहीं छुई होती इसलिए
- 15:55शिष्य उन बातों का महत्त्व है समझता है एक जमींदार का बेटा खराब
- 16:06हो गया था। खराब समय से मैं खूब पैसे उड़ाता
- 16:13पैसे बहुत थे तो जमींदार ने बेटे से कहा बेटा कुछ काम धाम कर।
- 16:26उम्र बीतती जागती है, अब तो मेरा साया भी उठने को है।
- 16:32थोड़ा बहुत काम धंधा कर लिया कर के तो पिता जी में पढ़ा लिखा तो
- 16:35है नहीं तो पिता कहने लगे तू पढ़ा लिखा नहीं है तो चलो कोई बात नहीं
- 16:41इसमें कसूर मेरा तो है नहीं। लेकिन तू जैसा कुछ होता है, धैडी
- 16:48धब्बा कर रहा है धैडी धब्बा करके आया शाम को एक पैसा लेके आया
- 17:00सस्ते जमाने के बाद। पैसा लाया, बड़े शोक से पिताजी की
- 17:09चरण स्पर्श किया और एक पैसा हाथ पे रखा, पिताजी आज मैं अपनी मेहनत
- 17:14की कमाई पहली बार ले के आया। और पिताजी के हाथ में एक पैसा रख
- 17:23दिया, उन्हें गौर से देखा, गौर से देखा और चूमा।
- 17:32वाह बेटे अच्छा वैसे का इस पैसे को और पास वाले बगल वाले कुएं में
- 17:40डाल दे फेंक दे। सर का शायद कोई होता होगा, पहली
- 17:46सैलरी माता के नाम पर चढ़ती होगी तो कुएं में घरा दू पिताजी गलत तो
- 17:54नहीं कहते तो कुएं में घरा दिया। दूसरे दिन भी यही तीसरे दिन भी
- 18:02यही बहुत दिन बीत गए। बेटा ले के आता शाम को एक पैसा और
- 18:09बाप कह देता जा कुएं में फेंक दे 1 दिन तंग आ गया, बोला पिताजी?
- 18:19अगर कुएं में ही फुकवाना है तो फिर सारे दिन मैं खून पसीना एक
- 18:25क्यों करता हूँ मेरे हक हलाल की कमाई पीता बोरा हाँ पुत्र।
- 18:39जो तू रोज़ गंवाया करता था, वो भी मेरे हक के हलाल की कीमत थी।
- 18:54अपने कर्मों का प्रायश्चित हो रहा है अपने कर्मों का आभास हो जाये
- 19:01मैंने क्या किया है? और ध्यान रखना परमात्मा की सृष्टि
- 19:07में तुम गलतियाँ निकालो, लेकिन गलतियाँ तुम्हें मिलेंगे।
- 19:13ना इतनी ऐक्युरेसी है और मेरे पास बड़े बड़े साइंटिस्ट आ जाते हैं।
- 19:19वो कहते हैं, बाबा अगर ये बिखरा पड़ा होता ना सब कुछ।
- 19:26तो हम परमात्मा का वजूद नहीं मानते, लेकिन इसके इस तरह से
- 19:31एस्टाब्लिशमेंट को देखकर सजावट को देखकर एक नियमों के भीतर अंतर्गत
- 19:40सृजना को सृष्टि को चलती हुई देखकर।
- 19:44हमें यकीन हो जाता है कि कोई है चीजों को बनाना अलग बात है, चीजों
- 19:52को नियमों में अवध करना अलग बात है।
- 19:58राजगद्दी पर तो कोई भी बैठ जाये। लेकिन राजगति पर बैठ कर उस देश को
- 20:05ऊंचाइयों को ऊपर ले जाना छू लेना, यह कलाकारी है सारी दुनिया से
- 20:15इकट्ठा करके एक व्यक्ति को दे देना कोई कलाकारी थोड़ी।
- 20:23ये जो भोंदू पर है दी पुत्र तुमने जो सवाल पूछा मैंने देखो और
- 20:34तुम्हारी डांट भी हल्की कर दी। जवाब भी दे दिया।
- 20:41प्रतिक्षण अगर फल होता तो फिर रेप करने वाले वहीं पर ढेर हो जाते।
- 20:57अर्थ क्या था दुनिया के बनाने का? रौनक ही तब आती है जब प्रोसेसिंग
- 21:10का वक्त दिया जाता है और एक बात को ध्यान में रखना।
- 21:18तुम ये मत समझना कि तुमने बीज होया अक्सर तुम यही भूल कर देते
- 21:23हो तो हमारे कर्मों का फल वैसा ही मिल जाएगा।
- 21:31तुम गलती हो न, यह कोई न्यूट्रान का लाभ नहीं है।
- 21:39यह परमात्मा का कान जैसे एक छोटा सा बीज बोया, 100 वर्ष के बाद वो
- 21:50विशाल वट वृक्ष बन गया। कभी किसी ने सोचा था?
- 21:58इसलिए शांत कहते हैं, पाप मत करना, झूठ बोल कर पैसा मत कमाना
- 22:08जो तुम्हें पता नहीं और लोगों को बताकर।
- 22:12लोगों की वीड़ों को गुमराह करके ये सबसे बड़ा बात होता है।
- 22:16मैंने बहुत बार कहा पापा भजन होवे, इकट्ठी मोया संग न जावे,
- 22:25इकट्ठी करलो तुम। लेकिन पापों के बिना ये इकट्ठी
- 22:35कहाँ होती है? जरूरतें ही पूरी हो जाएं बहुत अगर
- 22:42कोई कर्मकर्ता ये सोचे कि मुझे एक बाजरे का दाना बोया, कनक का बोया
- 22:49चावल का बोया। वही मिल जाएगा वापस वह गलती में
- 22:56वह प्रोसेसिंग में देरी देरी नहीं होती।
- 23:01यहाँ भी न्याय है। प्रोसेसिंग की देरी छोटे से बीज
- 23:08को वट वृक्ष में भी बदलेगी। तुम्हें नहीं पता अगर अब ही कर्म
- 23:15किया अब ही फल मिल जाए तो बिल्कुल उतना ही मिलेगा, क्योंकि देर नहीं
- 23:19हुई। प्रोसेसिंग की देर नहीं लगी तो
- 23:24उतना ही मिलेगा। यह प्रोसेसिंग की देरी बड़ी
- 23:27खतरनाक है। तुम जिसे कहते हो इंतजार करते हो।
- 23:35इसने पाप किया था, 20 साल गुजर गए, इसका कुछ भी नहीं हुआ।
- 23:40ये गलती मत धोखा मत खाजना परमात्मा की दुनिया का हिसाब मैं
- 23:45अच्छी तरह से जानता हूँ क्योंकि मैं।
- 23:48परमात्मा अपनी दुनिया का हिसाब अगर मैं ना जानूंगा और कौन जानेगा
- 24:03अगर बीज का बीज वापस आ जा रहा है फिर तो कोई मज़ा ना हुआ ज़िन्दगी
- 24:11का। कर्मों का फल आया भी आया भी देर
- 24:17से आया। प्रोसेसिंग की देरी उसमें लग गई
- 24:20और आया भी उतना ही 20 वर्ष से पहले।
- 24:30अब गाँधी को मार दिया पर से लेकिन क्या उसी वक्त फांसी लग गई?
- 24:37नहीं तो जिया 30 जनवरी 1948 को होली मारी।
- 24:50गोडसे को फंसी हुई 15 नवंबर 1949 को यह जो वक्त मिला यह गोडसे को
- 25:04क्यों मिला? और फिर वक्त जो मिला उसका बदला।
- 25:18उसने मौत दी उसको भी मौत दे दी गई।
- 25:21क्या ये न्याय है? नहीं, तुम न्याय नहीं कर सकता।
- 25:27मैंने 1000 बार बोला, तुम्हारी अदालतें न्याय नहीं कर सकतीं,
- 25:31फैसला सुना सकते हैं नए कहाँ हुआ? एक आदमी 100 लोगों को गोली मार
- 25:44देता है, मार देता है। हीटर ने 2,50,00,000 लोग मारे तो
- 25:522,50,00,000 बार मरेगा नहीं, इससे भी ज्यादा बार मरेगा।
- 26:00उसकी अपनी प्रक्रिया है। लोग मुझे कहते हैं कि अब वो कब
- 26:09आजाद होगा, मुक्त होगा उसने कर्म ही ऐसा किया है 2,50,00,000 लोगों
- 26:18को मारा तो सोचना चाहिए था, समझना चाहिए था।
- 26:25तो 2,50,00,000 बार मौत मिलेंगे तो हिसाब बराबर होगा और फिर उस
- 26:32मौत मिलने में वक्त बड़ा लगेगा। कितने जन्म लगेंगे?
- 26:362,50,00,000 जन्म लगेंगे फिर मरेगा वो।
- 26:41नहीं नहीं, तुम गलतियों में ये व्यवस्था तुमने कहीं से गलत
- 26:47खोपड़ी की उपजा तुम्हारी, इसलिए मैं तुम्हें बहुत बार कहता हूँ
- 26:54बुद्धि से परमात्मा के तल को व्याख्यायित करने की चेष्टा मत
- 26:59करना। यहाँ तक कि सुंदर शब्दवर्ता करता
- 27:02हूँ, मैं कहता हूँ कि परमात्मा की व्यवस्था को बुद्धि से व्याख्यात
- 27:09करने का कष्ट मत करना, क्योंकि तुम कर नहीं सकोगे।
- 27:16यह बड़ी उलझी हुई बात है। ये वही जानता है जा करता सर ठीक
- 27:24को साझे आप पे जानें सोई यह सिर्फ मैं ही जानता हूँ क्यों बनाया कब
- 27:34बनाया, कैसे बनाया? क्यों कर बनाया, किस लिए बनाया?
- 27:40तुम नहीं जानते। इसलिए परमात्मा की सृष्टि पर तुम
- 27:45सवाल उठाना जानते तो हो, क्योंकि तुम्हारी आदत हो गई, संस्कार बन
- 27:52गए। तुम्हारे हर चीज़ पर तुम सवाल
- 27:55उठाते हो। परमात्मा इस सृष्टि के ऊपर भी उठा
- 28:00दो सॉल। लेकिन ज़रा सोचो क्या ऐसा हो
- 28:09पायेगा? इसीलिए तो उसने बनाया है।
- 28:15उसका हर नियम परफेक्ट है। परफेक्ट 100% परफेक्ट तुम्हें
- 28:24नहीं पता थोड़ा सा इधर उधर हो जाए तो मैं अपने आप को बुद्धिमान समेत
- 28:31हूँ। बुद्धि से उस तल की व्याख्या करते
- 28:36हो, वह तल सिर्फ कृष्ण का नहीं है, वह तल सिर्फ लावजे और कबीर का
- 28:42नहीं, नानक का नहीं, वह तल पर माच का है।
- 28:52या करता? सृष्टि को साझे जिसने इस सृष्टि
- 28:56को बना दिया आप के जाने सोच वही जानता है।
- 29:00उसने क्या बनाया, क्यों बनाया, कैसे बनाया, तुम तो कुछ भी नहीं
- 29:04जानते। प्रश्न उठाना जानते हो और उसका
- 29:08कोई जवाब देना नहीं जानता। इसीलिए तुम प्रश्न पूछ के चले
- 29:11जाते। जब कोई जवाब देने वाला मिल जाता
- 29:17है, तुम्हारी टाट पर जवाब ठोक देता है तो फिर तुम चुप हो जाते
- 29:27हो, ध्यान रखना। संतों ने बड़ा सुंदर वाक्य कहा
- 29:31था, खास तौर से महात्मा बुद्ध। और महावीर उन्होंने जड़ पकड़ ली।
- 29:39वो कहते पाप कर्म ही न करो क्यों अंधे को नोटों के क्यों दो आएँगे
- 29:51अंधे को बुलाओगे ना खाने पे अंधा तो आएगा ही।
- 29:56उसको छोड़ने के लिए एक व्यक्ति और भी आएगा दो आयेंगे क्यों पाप करो
- 30:08और क्यों पापों का फल बहुगुणी तो हो के बहु?
- 30:14यहाँ पर थोड़ा ठहर जाओ बहुगुणित होकर तुम पापों का फल नहीं भोगता
- 30:24जो तुम कह देते हो क्योंकि तुम बारीकी को जानते हो धेर है अंधेर
- 30:33नहीं है। नहीं भाई, देरी कहाँ जब अमूल के
- 30:38ऊपर ब्याज लग गया तो फिर देरी कहाँ?
- 30:43तुम मज़े से और देर करो प्रोसेसिंग इज़ जस्ट लाइक
- 30:49इंट्रेस्ट। वह जो छोटा सा वृक्ष बन गया, बीज
- 31:01भट्ट वृक्ष बन गया, हज़ारों लाखों पंछी उसके ऊपर घोसले बनाते।
- 31:13विश्राम करते हैं और दवाएं देते हैं।
- 31:23अब ध्यान से सुन लेना बात को हमारे गौशाला मंदिर में।
- 31:31बहुत से लोगों के मन को ठेस अलग सकती है तो क्षमा नहीं मांगूगा।
- 31:37मैं क्योंकि नियमों के लिए क्षमा नहीं मांगनी होती, नियमों को
- 31:43व्याख्यात करना होता है, नियमों के लिए प्रयाश्रित भी नहीं करना
- 31:48होता, क्षमा भी नहीं मांगनी होती। बहुत बड़ा वटवृक्ष था उसके नीचे
- 31:53दोना था, कुछ लोगों ने इकट्ठे हो के उसको ढा दिया, वटवृक्ष को काट
- 32:13दिया और इतना बड़ा वटवृक्ष। हजारों की तादाद में वहाँ पंछी
- 32:21अपने घोसले बनाए उनके बच्चे रह रहे थे।
- 32:24वो खुद रह रहे थे और जब वो व्यक्ति काटने का प्रोग्रामिंग कर
- 32:31रहे थे। उसमें मुझे भी बुलाया गया क्योंकि
- 32:39मैं रोज़ जाया करता था मुद्दतों से मैं रोज़ जाया करता था।
- 32:43वो आए या ना आए मैंने जाना ही सारी पंचायत बैठी थी।
- 32:54मैं भी बैठ गया, मुझसे पूछा गया ये वट वृक्ष को काटने की प्रपोजल
- 33:03है, आपका क्या विचार है? मैंने कहा आपका क्या विचार है?
- 33:12हम तो यूनानी मत इसको काटने पे सहमत हैं।
- 33:19मैंने कहा फिर क्या होगा उन पछों का उनका क्या इंतज़ामात किया?
- 33:24उजाड़ क्यों दोगे तुम चला के झोपड़ी हो, महलों को भी उजाड़
- 33:29दोगे। लेकिन वो कहाँ जाएंगे उनकी
- 33:35व्यवस्था रहने की बैठने की कहानी की?
- 33:38तुम्हें पता है ये वट वृक्ष सैकड़ों साल पुराना है।
- 33:42बाबा गिरनार लगा गए थे। कार्ड तो दोगे तुम आरिफ ज्यादा
- 33:52देर न लगेंगी, लेकिन उनका क्या होगा जिनकी पूरी दुनिया जिनकी
- 34:01पुश्ते यहाँ जन्मी और मर गई? उनके भीतर हेले मैं नाम नहीं
- 34:18लूँगा, लेकिन लोगों को पता है। मैंने कहा तुम बात सुन लो मेरी
- 34:28वृक्ष को काटने की बात। सिर्फ वृक्ष को काटने की बात नहीं
- 34:35वो हज़ारों पक्षियों के घर तबाह करना उनके बच्चों को उनके दिए हुए
- 34:41अंडों को फोड़ते ना मारते ना ये हिटलर जैसा काम होगा।
- 34:49मेरी तो ये राय है आप समझ गए होंगे वो कहते बाबा समझ गए लेकिन
- 34:57हम तो यूनानी मसे हैं तो मैंने कहा ठीक फिर लोकतंत्र ही कर लो।
- 35:09लेकिन ध्यान रखना, मैं इस बात से कती सहमत नहीं हूँ और सहमत होऊंगा
- 35:17कि नहीं कभी तुम्हारा कोई गढ़ तोड़ दे।
- 35:23तुम्हें कैसे रखे? इस बेडिंग के भीतर हम बैठे आज
- 35:28बेडिंग कर रहे हैं इसे तोड़ दिया जाए।
- 35:31तुम्हें कैसा लगेगा? उनका तो रैन बसेरा, सारा कुछ वही
- 35:37डाइनिंग रोम है, वो ही बैडरूम है वो ही किचन है, वो ही सब कुछ है
- 35:44उनका। तुमने धराशाई कर देना अभी
- 35:49प्लानिंग कर रहे हो, रुक जाओ, रुक जाओ लेकिन नहीं माने।
- 36:11अक्सर वणिकों का ब्राह्मणों का स्वभाव ऐसा ही हो गया है।
- 36:19तुमने दबा के लूटा है दुनिया को लोकतंत्र के नाम पर हम तो 51 हैं
- 36:29तो 49 का क्या होगा? अगर 51 ने तुम्हें क्यों दिया और
- 36:39तुम्हारा फर्ज बनता है जो 49 तुम्हारे वृद्ध हैं, उनका भी
- 36:43बराबर पालन करो फिर भेदभाव ना करो।
- 36:48जब गद्दी पर बैठ गए तो? जब गद्दी पर बैठ गए फिर कैसे बुध
- 36:55रह गए तुम कैसे महावीर रह गए तुम फिर तो तुम न्यायकारी हो, संविधान
- 37:03की रक्षा के लिए बैठे हो, संविधान की रक्षा करो।
- 37:07फिर अपने आप को बुद्ध बनाने की श्रेष्ठ ना ना करो, यहीं उलझ जाती
- 37:14है कर्मों की व्यवस्था, कर्मों का जाल और तुमने शायद कभी यह प्रश्न
- 37:21किसी से पूछा नहीं होगा। और जवाब किसी ने दिया होगा ये तो
- 37:28मैं उम्मीद भी नहीं कर सकता क्यों?
- 37:32क्योंकि इस सृष्टि का निर्माता ना हो।
- 37:42हाँ हाँ, उस दिन से थोड़ा खराब चल रहा है।
- 37:49अब तो पूरा ही खराब हो गया है। दिमाग मैं ही हूँ सब हम काम सर्वा
- 38:00पापे भैमोक्ष और मेरे से बड़े पागल पहले हुए कृष्ण वो मेरे से
- 38:08बड़े। 5000 साल पहले बड़े पागल हो गए
- 38:11थे, ऐसे ही थे लेकिन उस स्तर पर जाने वाला व्यक्ति तुम्हारा ये
- 38:28अलंकार बड़ा अच्छा लगता है उसे। मीठा लगता है शहद जैसा क्योंकि
- 38:38तुम्हारी दुनिया जिसे पागल कहती है, वही समझदार होता है।
- 38:43तुम्हारी दुनिया जिसे समझदार कहती है उससे बड़ा पागल कोई नहीं होता।
- 38:49मैंने देखे हैं ऐसे लोग। ऐसा परिवार है जो कहता है कि बस
- 38:54सबसे समझदार वह है और उससे बड़ा मूर्ख कोई नहीं ज़रा देखो पंचायत
- 39:02की नौकरी करता है, सरकार उसे तनख्वाह देती है पचासियों बार।
- 39:10उसकी कंप्लेंट हो गई। सरकार बहुत आई, बहुत चली गई और सब
- 39:18जगह के ऊपर ऐप्लिकेशैन दी गई, लेकिन किसी सरकार ने कोई सुनवाई
- 39:22नहीं की। ऐसे न्यायकारी हो तुम राजा लोग?
- 39:34आखिर में मैं उठा तो सब उठकर मेरे पांव छूने लगे, पंडित जी को भी तो
- 39:41मत हो जाना, मैंने कहा तुम्हारा बेड़ा घर खो जाएगा, सबका हैं।
- 39:55थोड़े दिन ठहरे मेरे इन शब्दों के बाद बाबा की बातों पर विचार कर
- 39:59ले, ये बंदा थोड़ा अटपटा है। पता नहीं कहाँ से भूल गया?
- 40:11कुछ दिनों के बाद उस व्यक्ति के बाप की मृत्यु हो गई।
- 40:16थोड़े दिनों के बाद उसकी मृत्यु हो गई और थोड़े दिनों के बाद उसके
- 40:20बेटे की मृत्यु हो गई। तीन पुस्तें गईं खुश ही वक्त के
- 40:25भीतर और वह प्रधान था। सर मोर था, उसी का आदेश था और जो
- 40:34दूसरे उनका भी ऐसा ही है सर वो अगर तू जीने नहीं देगा तो फिर वह
- 40:46कैसे जीने देगा? और एक बात और भी सुन लो।
- 40:55अगर उसके बाद गोट से जिया कितनी देर जिया करीब 21.5 महीने तक
- 41:06जिया। बड़े डाइमेंशन्स इस बात को क्लियर
- 41:17करूँगा। तुमने पूछ ही लिया और मैंने बताना
- 41:20शुरू ही कर दिया तो फिर इस अच्छी तरह से उगाड़ दिया जाए।
- 41:24इस प्रश्न को 21.5 महीने जिया, लेकिन क्या वो जिया?
- 41:38आखिर में उसे यही पुली लेनी पड़ी कि जिसे मैंने मारा महात्मा
- 41:43गाँधी, वह अहिंसा का पुजारी था। देखिए पुली जैसे दिमाग का दीवाला
- 41:51निकल गया हो। और अगर तुम मुझे फांसी पर लटका
- 41:57दोगे, ये हिंसा हो जाएगी तो गाँधी जीके विचारों का हनन हो जाएगा।
- 42:05दिमाग कैसी कैसी शरारतें करता है बचने के लिए?
- 42:16और फिर जिया भी तो कतल करने के बाद जिया भी तो क्या जीना होता
- 42:22है? ज़रा सोचो जो गुनाह के अंदर जेलों
- 42:28में बंद है, उन्हें रोटी अच्छी लगती है, चाय अच्छी लगती?
- 42:34पहली बात तो चाय जैसे दी जाती है रोटी जैसे दी जाती है सब्जी उसको
- 42:42मैं अच्छी तरह से जानता हूँ जेलों के अंदर सप्लाई करने वाला।
- 42:50खाना सप्लाई करने वाला दोनों वक्त और चाय सप्लाई करने वाला एक मेरा
- 42:57मित्र उसका नाम था। करने से नाम बताने में कोई हर्ज
- 43:03नहीं। वह सप्लाई करता था रोटी सब्जी।
- 43:081 दिन मैं वहाँ बैठा हुआ गउ चला गया था, थोड़ा निकल गया, उसके
- 43:15ढाबे पे जाके बैठ कैदियों का खाना बना रहा था और देखा।
- 43:27तो सब्जी काट रहा था, आडू थे, बैंगन थे बैंगनों में कीड़े पड़े
- 43:31हुए थे। अरे डरो मत भाई तुम क्यों डर रहे
- 43:39हो तुम कोई कैद मैं थोड़ी ये मनीष तो मोक मारते ही रहता है, अब देखो
- 43:47शरीर नहीं है फिर भी मोक मार रहा है।
- 43:55बिलकुल सावरकर की तरह तो मैंने कहा कनय सिंह ये क्या कहता है?
- 44:10देखो पंडित जी बात यह है मैं सुबह नहीं जाता सुबह तो वही चीज़ ₹20
- 44:17किलोमीटर की ₹10 किलोमीटर। मैंने कहा फिर शाम को शाम को तो
- 44:23बच खुची जाती। लोग छांट छूट के ले जाते हैं।
- 44:27बनिए लोग, बढ़िया, बढ़िया यही कीड़ों मकोड़ों वाली बजती है तो
- 44:34फिर? फिर क्या बस समूचा भाव मुक जाता
- 44:38है कि अब तो मैं घर चल रहा है। बोल कितना देता है इसका तो मैं
- 44:42उसको कहता हूँ भाई देखो 50 पैसा देता हूँ, आठ हन्ना तो रेडी वाला
- 44:49कहता है चल भट्टे सो कट्टे ला पटक दे चल।
- 44:5550 पीसेज़ देख लेता हूँ ये सब्जी ले के आता हूँ और ऐसे ही आलू, ऐसे
- 45:01ही सब भिंडी वगैरह सब ऐसे ही होता है तो मैंने कहा इसमें कीड़ों में
- 45:09जान नहीं होती नहीं, जान तो होती है।
- 45:13लेकिन हड्डी नहीं होती, जो फंस जाए।
- 45:17गले में हड्डी नहीं होती तो खाने वाले भी आगे ऐसे ही हैं।
- 45:24बनते थोड़ी हैं, पशु हैं वो और पशु तो सब हड़प कर जाते हैं।
- 45:33तो मैं डरा रहा नहीं हूँ तुम्हें मैं सच बता रहा हूँ।
- 45:36ये सत्य बातें हैं इनमें ज़रा कोई गलत नहीं तो सर पट कर देता, सारा
- 45:49बूझ लेता और सारे को इकट्ठे में डाल देता जैसे अन्नकूट बनाते ना
- 45:53आप कितना स्वाद होता है। तुम्हें पता ही नहीं होता अनकूट
- 45:57में क्या कुछ होता है तुम्हें क्या बताऊँ अब मैं तुम्हारी
- 46:00भावनाओं को ठेस लग जाती है। थोड़ा सा देखना जो बैंगन बीच में
- 46:05डाले वो क्या तुमने देख के डाले पूरे के पूरे ठोक देते हो बीच
- 46:10में। और गवर्धन पूजा कह के भगवान कृष्ण
- 46:17का प्रसाद कह के तुम बांट देते हो।
- 46:21कौन सा हड्डी होती है उनमें और बैंकरों में तो खास तौर से कोई
- 46:25कोई मिलेगा तुम्हें बैंकरों में तो तुम्हें आंतौर से कीड़े ज्यादा
- 46:33मिलेंगे। और अन्नकूट में बैंगनी ज्यादा
- 46:38मिलेंगे। हस्ती का ये कर्मों की व्यवस्था
- 46:48है। तुम ही सोचो थोड़ा सा तो दिमाग
- 46:55होगा कि सारे गोबर है? जितना कहें चलो उससे ही सोच लो।
- 47:04अगर तत्व क्षण फल मिलना शुरू हो जाए तो किसान ने बीज बोया और बीज
- 47:09साथ के साथ मिल जायेगा। ले भाई अपना बीज जो ये 1020 किलो।
- 47:16झिंडाया है ये मैं इकट्ठा कर देता हूँ बस इतनी मेहनत कर लेता हूँ और
- 47:20ले जा वापस और गोली मारी तुषक के साथ गोली गोली ही हम तब मारते हैं
- 47:28कि ये तो मर जाएगा अब। हमें फैसला सुनते सुनते लग
- 47:35जाएंगे। 30 वर्ष मैंने बहुत से ऐसे केस
- 47:42सुने हैं, देखें। जिनको फैसला आया न्याय, न्याय तो
- 47:51नहीं मिले न्याय तो कभी किसी को मिलते ही नहीं।
- 47:57ये भूल ही जाओ कि अदालतों में न्याय मिलता है।
- 48:00अदालतों में फैसला मिलता है क्योंकि अदालते।
- 48:06जो आपने पहले से निश्चित किया वही दंड दे सकते हैं।
- 48:15न्याय तब था अगर मरने वाले को अदालत की जिंदा करते हैं तो न्याय
- 48:20हुआ। अगर गोडसे को भी मौद दे दी तो
- 48:29क्या न्याय खा? क्या मौत के बदले मौत और वो भी
- 48:3421.5 महीने के बाद ये तो गाँधी थे तो 21.5 महीने लग गए।
- 48:44यहाँ तो 2020 साल तक मुकदमे के फैसले नहीं आते तो न्याय की तो आप
- 48:53अपेक्षा ही मत करना। फैसले आते हैं देर अबेर सबेर को
- 48:59कब भी आ जाए? थपेड़ों को काटना मात्र इसीलिए
- 49:09नहीं थपेड़ों को काटने के अनेक अनेक दुष्परिणाम है।
- 49:17वह बेचारे पंछियों का गर्व चिढ़ गया।
- 49:21छोटे छोटे बच्चे कहाँ जाएंगे? और वो अंडे जो अभी अभी जिनका जन्म
- 49:27ही नहीं हुआ वो क्या करे जैसे कोख में बच्चे को मार दिया जाए।
- 49:38और फिर पेड़ कट जाएंगे तो कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलेगा
- 49:44तू? इसलिए पीपल के पेड़ को काटना बड़ा
- 49:49पापकारी बताएगा। ये कारण भी था और भी बड़े कारण थे
- 49:55और बड़े सूक्ष्म कारण भी हैं जो तुम्हें पता ही नहीं जो तुम्हारे
- 49:59वैज्ञानिक ना खोज पाए हैं ना खोज पाएंगे।
- 50:05पीपल ऐसा भीड़ है, जिनमें से आसानी तरंगे 2400 घंटे निकलती
- 50:10हैं। पीपल के पेड़ में करीब करीब सभी
- 50:17वक्त करीब करीब कह रहा हूँ। कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में
- 50:23बदलता है, वह सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड की बजाय ऑक्सीजन नहीं
- 50:28छोड़ता है। जो आपके लिए प्राण शक्ति है,
- 50:34जीवनदायिनी शक्ति है और इसके इतर जो पशु पक्षी जिन्होंने घोंसलें
- 50:43डाल दिए हैं, उनके गारू चिड़ेंगे उसकी तरफ तो तुम ख्याल ही नहीं
- 50:47करते। इसीलिए मानवता आज इतनी दुखी है
- 50:54अगर उसने बुद्धि में न्यूरॉन्स को निकाल कर गोबर भर लिया तो उसके
- 50:59दुष्परिणाम भी तो भोगने पड़ते हैं।
- 51:04क्या परमात्मा ने जो व्यवस्था बनाई वो ठीक नहीं थी?
- 51:08जो तुमने न्यूरोन जो को भेजी वो निकाल कर तुमने गोबर भर लिया।
- 51:13क्या वो व्यवस्था जो परमात्मा ने बनाई वो ठीक नहीं थी?
- 51:18बस तुम जैसे लोग ही ऐसी बातें किया करते हैं।
- 51:22अब टाट खुजलाने लग गई कि नहीं खुजलाने लग गई तो मैं बंद कर दूँ।
- 51:32ईश्वर की व्यवस्था पे जिसने ऊँगली उठाई, वह ऊँगली गलत थी, ठीक नहीं
- 51:40थी क्योंकि पहली बात तो जिसका तुम जरिया नहीं बना सकते।
- 51:47उसने इतनी रचना का निर्माण किया और उसके ऊपर तुम किंतु परंतु कर
- 51:52रहे हो तुमसे बड़ा मूर्ख कोई बड़ा अब तुम्हें समझ आ गई बात के।
- 52:06पूरी बारीकी से तुम्हें और अभी मैं बारीक ज्ञान है क्योंकि वो
- 52:11चीजें तुम्हारी समझ में नहीं आई। पीपल ही नहीं सभी थपेड़ों की
- 52:20जड़ें तने इछाल अर्जुन की छाल। वृक्ष होता है कर्ज तुम्हें पता
- 52:29कितने काम आते हैं। आदमी के शरीर का कोई अंग काम नहीं
- 52:35आता है बल्कि उसको भुकने के ऊपर धन बर्बाद होता है बर्बादी का।
- 52:49लेकिन वृक्ष की हर चीज़ काम में होती है।
- 52:52छाल, पत्ते, तने जड़ी तो मैं एक छोटी सी बात बता दूंगी।
- 53:04इशारा करके मेरे सबसे पहले उस्ताद जिसे कहते हैं।
- 53:12वैद्य राम शरण दास उनका इंतकाल हो गया और बस दो चार दिनों में वो
- 53:22मुझे संजीवनी रस बनाना सीखा देते हैं।
- 53:30सारा सामान। लिखा दिया गया था।
- 53:34लक्ष्मण दास बंसारी यहाँ हुआ करते थे जुम्मे अब तो मेरे ख्याल में
- 53:38नहीं है। शायद उनके बच्चों के वहाँ रखवा के
- 53:46आ गया था। वो कहता है बेटा दूसरे दिन कल आ
- 53:49के ले जाना सामान ज्यादा है। कल आके ले जाओ दुकान पे रश बहुत
- 53:55हुआ करता था, जो ईमानदारी से काम करेगा उसकी दुकान पर रश होगा ही
- 54:04होगा। अगर कोई व्यक्ति ये कहे कि मैं
- 54:09सोने की मुर्गी को काट लूँ और सारे अंडे निकाल लूँ तो कुछ नहीं
- 54:13निकलेगा। अगर जिंदा रहेंगी मुर्गी तो रोज़
- 54:17एक अंडा देती जाएगी थोड़ा सा प्रॉफिट रखना।
- 54:26बस जैसे सब्जी में नमक उससे तुम देखोगे चारों ओर बाहर ही लग गए।
- 54:38यह तरक्की का एकमात्र फॉर्मूला है।
- 54:46लो प्रॉफिट लेस प्रॉफिट मोर सेल सेल ज्यादा हो जाएगी और तुम तर्की
- 54:58तर्की तर्की करते रहो। यह एक फॉर्मूला बीच बीच में से
- 55:03बता दिया करता हूँ। मैं इसे नोट कर लिया करो, तुमने
- 55:15कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। परमात्मा बिलकुल ठीक कहा तुमने कि
- 55:24व्यक्ति दुष्कर्म करना बंद कर देगा।
- 55:29ज़रा सोचना सुकर्म भी करना बंद कर जाएगा, क्यों?
- 55:37क्योंकि तुमने किसी को एक रसगुल्ला दान किया और रसगुल्ला
- 55:43तुरंत आपके पास वापस आ गया? क्या तुम दान करो क्या तुमने ₹10
- 55:56किसी को दान दिए? तुरंत ₹10 तुम्हारे पास तुरंत आ
- 56:02गया, ऐट दी वोट बिना कोई देरी के, क्या तुम आगे से दान करोगे?
- 56:13लेकिन ये मूर्ख लोग आरएसएस वाले दिमाग के लोग बुद्धि तो होते नहीं
- 56:24है, ये ही ऐसे प्रश्न पूछ सकते हैं और मुझे खुशी है कि तुम्हारे
- 56:30संस के बंदे। ऐसे ही प्रश्न पूछोगे पीने के लिए
- 56:43गंगा जल है कि गोमूत्र सुबह सुबह को पेशाब पीते हैं व्रत जी सर।
- 56:51ऐसा पागलपन कोई और करता है और मुझे ऐसे ऐसे अब देखना मैं आज
- 56:57बोला हूँ। कल कितने कमेंट हैं, गालियां भी
- 57:02लिखी होंगी। हालांकि गालियों से गोमूत्र अमृत
- 57:06नहीं बन जाते। और अगर गोमूत्र अमृत बन जाता है
- 57:10तो गालियां खूब निकालो। पैथोलॉजिस्ट लॅबोरेटरी में टेकनिक
- 57:24से जो होता है वह आपको कहता है पेशाब टेस्ट करना, सुबह सुबह को
- 57:29लेके आना बिल्कुल निर निकाल जा क्यों?
- 57:33क्योंकि सारी रात शरीर तुम्हारी विजाती है, द्रव्य बाहर निकालता
- 57:39है, वह पीने के योग्य नहीं होते, वो निकालने के योग्य होते हैं।
- 57:46तुम तो उल्टा काम करते हो, रथ कैसे जाते हैं?
- 57:55सुभद्रा बिठा रखी, जगन्नाथ बिठा रखी, वो बिठा के क्या कुछ पाखंड
- 57:59सर्कस करते हो तुम हर वक्त सर्कस ही करते नजर आते हो।
- 58:05क्या है ये एक पत्थर को तुम घी कपूर?
- 58:13देसी घी महंगी, महंगी चीजें इतर छिड़कती है उसके ऊपर और उसी मंदिर
- 58:23के बाहर बैठा हुआ एक छोटा सा बच्चा नन्हा 12 साल का।
- 58:30भूखा है अठड़ियाँ निकल गई हैं। हड्डियाँ निकल गई, बहुत पहले
- 58:36मैंने अपने पुत्र को कहा जांचने के लिए दूध का एक लोटा दे दिया।
- 58:42घर में दूध की कभी कोई कमी नहीं रहती।
- 58:46दूध और घी घर में आम रहा। बचपन से लेके तो मैंने कहा बेटा
- 58:55ऐसा कर इसको शंकर मंत्र में चढ़ाया सावन का महीना चल रहा है,
- 59:06चले क्या? बच्चा बोला था जो स्वर्गवास हो
- 59:10गया स्वर्गवास क्या कहूँ? दुष्टों ने साजिश कर के मार दिया
- 59:18और उनके सभी के नाम मैं जानता हूँ।
- 59:21पहले अगर नाम नहीं जानता होगा तो मैं सर्वज्ञ क्या हुआ?
- 59:27तो इंतजार में हूँ सिर्फ इसी चीज़ में और जितना लेट हो रहा है उतना
- 59:32मैं जानता हूँ। कि चक्रवर्ती चक्रवर्ती ब्याज
- 59:37बढ़ता जा रहा है। प्रोसेसिंग आपके पाप को भी
- 59:43द्विगुणत्व बहुगुण कर देती है। प्रोसेसिंग देर तो है।
- 59:51लेकिन ये मत भूलना कि तुम्हारा बीज भी तो वट भृक्ष बन जाएगा, फिर
- 59:56उसके ऊपर फिर वर्ण लगेंगे और तुमने तो एक बोया था, अब पता नहीं
- 1:00:01कितने हज़ारों हज़ारों आम लगेंगे उसके क्या तुम भोग पाओगे इसको?
- 1:00:16तुम्हारे प्रश्न का निष्कर्ष के रूप में, राष्ट्र रूप में अगर मैं
- 1:00:23चार अक्षरों में जवाब दूँ, अगर तुम्हारा फॉर्मूला लागू कर लिया
- 1:00:30जाए। तो सृष्टि उसी वक्त बंद करनी
- 1:00:35पड़ेगी। काहे पैसा करना सृष्टि को जब कोई
- 1:00:45कर्म करे, उसी वक्त फल मिल जाए। तो फिर तुमने एक लड्डू दान कर
- 1:00:50दिया, लड्डू तुरंत वापस मिल जाएगा।
- 1:00:53क्यों दान कर आगे से दान करोगे? तुम दान ही तो करते हो या तो
- 1:01:02करुणा होती है और अगर करुणा से भी दान किया तो भी वापस हो जाएगा।
- 1:01:10और अगर लाज से के ये 100 गुणा हो जाएगा, 1000 गुणा हो जाएगा तो भी
- 1:01:16वापस हो जाएगा, फिर तुम दान क्यों करोगे?
- 1:01:19ना करुणा पूर्व करोगे, ना लोभ पूर्व करोगे दान ही नहीं करोगे।
- 1:01:25सभी क्रियाएं बंद हो जाएंगी, सब रुक जाएगा।
- 1:01:29क्रियाकलाप सृष्टि का और जब सृष्टि का क्रियाकलाप रुक गया तो
- 1:01:34सृष्टि का औचित्य क्या रह जाता है, ये बता दो।
- 1:01:39सृष्टि बनेगी क्यों सृष्टि बनाएगा, क्यों?
- 1:01:44इसका कारण बताइए मुझे? आखिर में प्रश्न का जवाब तो मैंने
- 1:01:54आपको दे दिया इट्स इम्पॉसिबल अगर सर्जना करनी है तो उसमें यही
- 1:02:03सिद्धांत बनाना होगा। इट इस ए बेस्ट वे।
- 1:02:07इससे बढ़िया कोई उपाय नहीं है। प्रोसेसिंग अगर है तो तुम भूल
- 1:02:15जाते हो। मैं कहता हूँ प्रोसेसिंग में देरी
- 1:02:19लगती है लेकिन मैंने कभी ये नहीं बताया।
- 1:02:23आपने पूछा नहीं, आज पूछ लिया, मैंने बता दिया प्रोसेसिंग मीन्स
- 1:02:31छोटे से बीज का इतना बड़ा वट वृक्ष अनजान हो अगर प्रोसेसिंग
- 1:02:41जितनी देर हो कि। उतना ही व्याज चक्रवर्ती व्याज
- 1:02:48लगता जाएगा। सुख तो सुख यह मत सोचना कि मैंने
- 1:02:55दान किया, मुझे फल नहीं मिला, नहीं नहीं उसका कम्पाउंड में
- 1:02:59इन्ट्रेस्ट लग रहा है। उसकी सृजना कभी ठहरती नहीं है।
- 1:03:04लगातार फैलती जाती है, एक्सपैंड होती जाती है, बढ़ती जाती है बीज
- 1:03:10बड़ा वृक्ष बन के आ वट वृक्ष बन के आ पीपल बन के आ त्रिवेणी बन के
- 1:03:15आ ऐसे ही दान बढ़ता है। ऐसे ही पाप बढ़ता है।
- 1:03:22और तुम क्या सोचते हो कि जिसने पाप किया हीटरर ने पाप किया, वो
- 1:03:27कभी भुक्त पायेगा नहीं, भुक्त पायेगा।
- 1:03:32एक बात और समझ लो अगर वह एनलाइटन भी हो गया।
- 1:03:38तो भी उसे भुगतने में बहुत वर्ष लग जाएंगे क्योंकि एनलाइटन तो हो
- 1:03:45गया। उसने जान लिया कि मैं नहीं हूँ
- 1:03:48शरीर लेकिन कर्म का प्रतिफलन आएगा?
- 1:03:51स्पीयर पे और उसे देखना तो पड़ेगा ना।
- 1:03:56तब तक वह बैन है देखने के लिए कि देख तू क्या क्या कर्म किया था और
- 1:04:04यह कोई मुक्ति जैसी मुक्ति नहीं है।
- 1:04:07मुक्ति चाहिए तो शुभ है लेकिन साथ में उसके पैरलल कर्म भी अच्छे
- 1:04:14कर्म। कर्म अच्छे करोगे और मुक्ति का
- 1:04:21प्रयास करोगे तो कर्मों का फल अच्छा आएगा, शुभ आएगा और मुक्त हो
- 1:04:27जाओगे। जानोगे, ये मैं नहीं भोग रहा हूँ।
- 1:04:30ये दोनों बातें पैरेलल आपको दिखाई पड़ेगी।
- 1:04:33बातें गहरी हैं। बार बार सुनना विचार करोगे तो समझ
- 1:04:38में आ जाएगा। मुसलमान को हम आज क्यों इतनी
- 1:04:45दुष्ट हो गई है? क्यों हो गए बताइए?
- 1:04:53हिंदू को हम आज क्यों दुष्ट हो गए?
- 1:04:55बताइए तो शायद तुम्हें बेसिक कारणों का पता नहीं और बेसिक
- 1:05:01कारणों में तुम जाते हैं तुम्हारी रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए
- 1:05:09तुम्हें? इतना मोहताज कर दिया गया कि तुम
- 1:05:13अपने शरीर की जरूरतों को पूरा करने में पूरा दिन भर रात बता
- 1:05:18देते हो। फिर फुर्सत के लम्हे तुम लाओगे
- 1:05:21कहाँ से? फुर्सत के लम्हों में वो उतरा
- 1:05:25करता है और कुछ नहीं तो राधे राधे करते रहो।
- 1:05:31बट डोंट बी नॉन बीज़ी, ऑलवेज बी बीज़ी ऑलवेज रेमेन बीज़ी राधे
- 1:05:44राधे करो या पैसा पैसा करो। या पदवी पदवी करो कुछ तो करो ये
- 1:05:51आपको दुख देने के डांग हैं और ये दुख देने के यंत्र बैठे हैं।
- 1:05:56सामने चाहे प्रेमान जी महाराज हों, चाहे कोई और हों।
- 1:06:03जो भी कहता है ये करो, वो करो, ये करो, वो करो, वो आपको भटका रहा
- 1:06:08है, आपने जाना है अपने पास और अपने पास जाने के लिए किसी मशक्कत
- 1:06:17की जरूरत नहीं होती जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले।
- 1:06:23दिल के आईने में थी तस्वीरें जास ये सब आपको भटका रहे हैं।
- 1:06:29इनका कोई निजी स्वार्थ होगा और कुछ नहीं इकट्ठा कर लेंगे, लेकिन
- 1:06:43खाएंगे क्या? पर तरकीब है ये तो जैसे भूखे मरने
- 1:06:50वाले होटल वाले के साथ छल किया था कि भाई मैंने ₹100 दिया, वो कहता
- 1:06:57तभी तुने तो 100 नहीं दिया, ऊपर से दूसरा क्या कहता भाई?
- 1:07:01इस झगड़े में मेरे 1000 मत भूल जाना।
- 1:07:06बस यही हैं तुम्हारे उपदेशक आज जिसे तुम सनातन कह लो या हिंदू कह
- 1:07:13लो सनातन एक है वह तो सबका है सबका साझा एक सनातन तुमने नकली
- 1:07:23नकली क्रिएट किया। तो मुसलमान इतने निर्दयी क्यों
- 1:07:27होंगे? ऐसा सोचो कि मैं प्राइम मिनिस्टर
- 1:07:37हूँ ऐसा सोचो मेरी कैबिनेट का कोई व्यक्ति कतल करके आ जाता।
- 1:07:44पांच चार आदमियों को रगड़ के आ जाता थार के नीचे।
- 1:07:50और मैं उसको गले से लगा लेता हूँ पदोन्नत कर देता हूँ।
- 1:07:55हर चीज़ महिया करता हूँ तो जुल्म घटेगा या बढ़ेगा।
- 1:08:04सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का?
- 1:08:12ये लोग गड्ढेगा जब बढ़ेगा नहीं गोडसे की वक्त ये सस्ता थी नहीं
- 1:08:22बा मुश्किल गोडसे को दफनाया गया, जलाया गया बा मुश्किल सात आदमी
- 1:08:28थे। सबकी गर्दनें झुकी हुईं जवाबदेही
- 1:08:36किसी के पास से क्यों मारा? बस फिर कहानियों बनाई थीं मैंने
- 1:08:43गाँधी को क्यों मारा ये कहानी थी सिर्फ बाद के बहाने थे और जेल काट
- 1:08:50के आया उसका भाई। उसने किताब लिखी किताब में बिकी
- 1:08:54बस धंधा था, किसी तरह जिम भी तो जीना है, लेकिन गाँधी जिसने सारी
- 1:09:04उम्र जैसा हुआ किया, छल नहीं किया, कपट नहीं किया, कुछ नहीं
- 1:09:10किया। मुझे लोग पूछ लेते हैं।
- 1:09:13के आपने भगत सिंह को क्यों नहीं छुड़वाया?
- 1:09:18मैंने कहा भाई मैं कोई लाउड इरबान थोड़ी मैं तो खुद गुलाम था।
- 1:09:24गुलाम गुलाम की सिफारिश तो कर सकता है वो तो की लेकिन मालिक ये
- 1:09:29ना छोड़े तो क्या करें? हम खुद ही गुलाम थे भाई ये तुमने
- 1:09:36कभी सोचा नहीं सोचा तुमने कभी कहा कि सब्र करने क्यों नहीं कहा कि
- 1:09:41इसको छोड़ दो, मुझे मार दो, तुम गाँधी ने ठेका ले रखा है,
- 1:09:48तुम्हारे सबकी लिबरेशन कहाँ? गाँधी ने क्यों नहीं छुड़वाया?
- 1:09:53इसकी जगह ये नहीं हो सकता के सब वर्कर ने क्यों छिड़वाया तुम्हारे
- 1:09:57बाप ने क्यों नहीं छिड़वाया तुम्हारा बाप दादा भी तो होगा के
- 1:10:01नॉन बायोलॉजिकल हो तुम ऐसे ऐसे मुड़ताएं आज फैली हुई हैं।
- 1:10:11और जैसे जैसे मुड़ताएं धरती पर बढ़ती जाएंगी, इसे ही बोझ कहते
- 1:10:15हैं। कृष्ण यदा यदा ही धर्म से अगला
- 1:10:18निर्भक्ति भारत जब धरती पर बोझ बढ़ जाता है तो समान नेताओं का।
- 1:10:28गलत तमाम नेताओं का पाखंडों का तब तब मैं जन्म लेता हूँ।
- 1:10:42संतो की रक्षा के लिए जो सत्य कहते हैं उनको बचाने के लिए जो
- 1:10:47असत्य कहते हैं उनको ध्वंस करने के लिए।
- 1:10:51तदात्मानम सर्जा में हम पित्रनाय साधुनाम विनाशाई से दुष्कृतम धर्म
- 1:10:57संस्थापना अर्थाई सत्य क्या है? उसकी संस्थापना के लिए संभवमी
- 1:11:05जोगे जोगे। युग युग में मैं अवधरण होता हूँ
- 1:11:14ठीक है और कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि अंत में तुम पाओगे
- 1:11:21तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं है और जब तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं है तो
- 1:11:26यहाँ किसी का भी कुछ नहीं है। बस एक का ही है।
- 1:11:32उसे एक ओंकार कहते हैं, सब एक का है उसे अहम ब्रह्मास्म कहते हैं,
- 1:11:40उसे आनल हक कहते हैं। खालक खलक खलक मैं, खालक।
- 1:11:54जड़ चेतन में चेतन जड़ में विद्यमान हैं।
- 1:11:58गुथे हुए हैं आपस में यह एक संघर्ष ना है, यह आपस में गुथे
- 1:12:06हुए हैं तो मुसलमानों ने कहा माफ़ तो हो ही जाएगा।
- 1:12:13कर लो आप तुम्हारे भी यही क्षेत्र में डाला गया पंडितों के द्वारा
- 1:12:21माफ़ तो गंगा कर ही देगी इसलिए तुमने घी में देसी घी में सुअर की
- 1:12:28चर्बी मरानी शुरू कर दी। माफ़ तो कर ही देगा खुदा बक्श,
- 1:12:36खुदा बंदा बड़ा दयालु है, रहीम है माफ़ तो कर ही देगा।
- 1:12:50उसकी इनायत हो तो जाएगी फिर पाक कर लो।
- 1:12:56इसलिए मुसलमान आज इतना दुष्ट हो गया है वह 911 कर सकता है।
- 1:13:13क्यों? क्या मोहम्मद गलत थे?
- 1:13:16बिलकुल मोहम्मद से ज़्यादा शुद्ध इंसान शायद ही कोई हुआ।
- 1:13:25ये बिलकुल बराबर के व्यक्ति थे कृष्ण मोहम्मद कबीर खान।
- 1:13:34ईशा खुद मर जाते हैं। मंसूर तो कौन गलत हुआ?
- 1:13:41शिष्य गलत हुआ, नानक गलत है, कहीं नानक के शिष्य गलत है और शिष्य
- 1:13:49क्यों गलत है? क्योंकि नानक ने वह बुलंदियों को
- 1:13:53छूआ, अर्श को छूआ, उस्ताज को छुआ और ताज को छूकर जो देखा उन्होंने
- 1:14:07वो शिष्यों ने नहीं देखा। तो शिष्य ने जो देखा उसी के
- 1:14:13अनुरूप आचरण करेंगे। इसलिए मैं कहा करता हूँ कि ओशो
- 1:14:20कितने भी तार्किक थे। तार्किक थे।
- 1:14:22फिलोसफिकल फिलोसफिकल वर्ड। को कभी भी अस्तित्वगत मत सम चलेना
- 1:14:32एग्ज़िस्टन्स मत सम चलेना फिलैसिफिकल बुद्धि से आता
- 1:14:39एग्ज़िस्टन्स एग्ज़िस्ट से आता जब तुम अनंत हो जाते हो, अनंत में
- 1:14:45समझ जाते हो और तुम कहते हो, मैं ही मैं हूँ।
- 1:14:50तो तुम एग्ज़िस्ट करते हो जब तुम कहते हो, तू ही तू है तो तुम्हारा
- 1:14:56अहंकार विलीन हो जाता है, फिर भी में ही में रह जाते हो।
- 1:15:02बात दोनों के कहने का ढंग अलग है। बातों के बीच में थीम एक ही है तो
- 1:15:10फिर जब परमात्मा रहमोकरी में है रहम तो कर देगा तो काटो मेमनों को
- 1:15:19जश्न मनाओ उत्सव के नाम पर इसलिए मुसलमान।
- 1:15:27अन्यायी होता, चला गया, अन्यायी होता, चला गया क्योंकि उसका
- 1:15:36परमात्मा बड़ा धयालु है बड़ा धयालु है उसका परमात्मा बार बार
- 1:15:43करो। आप करो और मैं बड़ा क्षमाशील हूँ,
- 1:15:50मैं तुम्हें माफ़ कर दूंगा, लेकिन तुम कन्फेशन करो, मानो और तौबा
- 1:16:03करो। मैं फिर से नहीं करूँगा, कबूल करो
- 1:16:09मैंने किया और तौहबा करो, आगे से नहीं करूँगा, फिर फिर करते जाओ,
- 1:16:16मैं बड़ा क्षमाशील हूँ मैं फिर मैं क्षमा कर दूंगा।
- 1:16:20इसलिए मुसलमान कौन दरिंदगी से भर गई?
- 1:16:27क्योंकि उनका परमात्मा बार बार क्षमा करने वाला परमात्मा है,
- 1:16:34तुम्हारा परमात्मा हिसाब लेता है। हिन्दुओं ने भी कोशिश तो बड़ी की।
- 1:16:42लेकिन चल ही नहीं चल रही है। बहुत से मूर्ख हैं जो जाते हैं आज
- 1:16:48भी कुम्भ में स्नान करने, जो आज भी गंगा में स्नान करने जाते हैं,
- 1:16:53लेकिन पाप धुलते हैं नहीं, धुलते हैं गंगा स्नान करके फौरन बाद
- 1:16:59मैंने हॉस्पिटलैज़ होते लोग देखे हैं।
- 1:17:03तो फिर कहाँ गंगा ने तुम्हारे पाप समेटे पाप समेट लेती?
- 1:17:09तो तुम बीमार क्यों होते और इतने सख्त गुहार हो जाते मन के बहलाने
- 1:17:16को गालिब ये ख्याल अच्छा है। तो मुसलमानों का इस्लाम का नहीं
- 1:17:26कर रहा, मुसलमानों का ब्रह्मात्मा कहता मैं तुम्हे क्षमा कर दूंगा
- 1:17:33और अर्थ का अनर्थ करने में तुम दक्ष हो यही तो अर्थ का अनर्थ कर
- 1:17:40रहे हैं आचार्य प्रशांत जैस? तार की शक्ति है इनमे ओशो ने क्या
- 1:17:47किया ये तो कुछ किया गवा दो शक्ति को तो मुर्दा कभी उपलब्ध होता है
- 1:17:54क्या सारी गवा दो फिर थोड़ी क्या गवा।
- 1:17:59गवा दो लिब्रल सिक्स का नाम दे दिया।
- 1:18:02उसने बोला यही कुछ हो रहा है, कहीं रजनीश पुरम खुल रहा है कहीं
- 1:18:07कुछ खुल रहा है, कहीं कुछ खुल रहा है, कहीं घरों में ही सब बना रहा
- 1:18:11है। आदमी को सिर्फ एक इशारा चाहिए पाप
- 1:18:16करने के लिए। तुरंत वो उसको मूर्त रूप दे देता
- 1:18:22है। बस इशारा था आपने कितनी मूर्तियां
- 1:18:25बना ली, परमात्मा ऐसा है, शक्ति रूप है तुमने शक्ति रूप दुर्गा
- 1:18:32खड़ी कर दी परमात्मा सर्प। व्याप्क है सर्वसमर्थ है तुमने
- 1:18:42लक्ष्मी कड़ी पर या धन की देवी है धन देगी तुम मूर्ति बनाने में
- 1:18:48दक्ष हो इसलिए सभी को में किसी न किसी तरह।
- 1:18:57दिरंत जी की सीमा तक पहुँच गई यहोदी का परमात्मा तो शुरू से ही
- 1:19:07कूर है, वह तो कहता मैं बड़ा अत्याचारी हूँ, इस मामले में बड़ा
- 1:19:14कूर हूँ मैं, मैं बख्ता नहीं। मैं जबड़े निकाल लूँगा तुम्हारे
- 1:19:22मैं द्यारू वरु नहीं हूँ मैं तो करू हूँ मेरे से डरो, उससे थोड़ा
- 1:19:31डरे यहूदी इसलिए यहूदियों में इतनी प्रतिभा आई।
- 1:19:39डर के कारण एक भीतर से प्रतिभा उत्पन्न होती है या थोड़ा सा
- 1:19:44विज्ञान तुम्हें बाद में शायद कभी साइंस इस बात को विकसित करे इसकी
- 1:19:50खोज करे। जब डर होता है तो भीतर से एक
- 1:19:54प्रतिभा उत्पन्न होती है। तो यहूदियों का परमात्मा, यहूदी
- 1:19:59को मोने इतने क्यों अवार्ड नोबेल जीते कि उनका परमात्मा बड़ा डराता
- 1:20:06था? मैं तुम्हारी आंसड़ी अंक से
- 1:20:09चलूँगा, मैं बड़ा क्रोधी हूँ। ओह डरे डर के कारण।
- 1:20:17अब ये एक नई बात मैंने आपको बताई जब कभी साइंटिस्ट इसको खोजेंगे कि
- 1:20:24डर के प्रभाव के कारण भीतर से एक रसायन उत्सवन होता है, जो दिमाग
- 1:20:29को अतिथि क्षण बना देता है, डर के वक्त तुम अलर्ट हो जाते हो।
- 1:20:38जितना डर होगा उतना अलर्ट हो जाएगा।
- 1:20:41परमात्मा ने मृत्यु बनाई भी, इसलिए के मृत्यु के क्षण में तुम
- 1:20:46अलर्ट हो जाओ, लेकिन तुम हुए नहीं यहोदियो का परमात्मा।
- 1:20:52तो मैं डराता है इसलिए वो अलर्ट हो के और अलर्टनेस के कारण एक
- 1:20:58प्रतिभा का जन्म होता है। हाँ इनको इनको आप अंडरलाइन करो।
- 1:21:07डर के कारण महा डर के कारण भीतर से एक प्रतिभा का जन्म होता है।
- 1:21:12उस प्रतिभा से उत्पन्न होती है इन्वेंशन्स इसलिए यहूदी धर्म ने
- 1:21:18जितनी इन्वेंशन्स की किसी और धर्म ने नहीं की कारण कारण उनका प्रमाण
- 1:21:29तुम जो खुश हो तुम्हारे परमात्मा की तस्वीरों का असर हो।
- 1:21:38फिर सुन लो इसको तुम जो कुछ हो, तुम्हारे परमात्माओं के चरित्रों
- 1:21:44का तासीर हो उसकी उसके कारण तुम ऐसे हो, जबकि परमात्मा ना तो
- 1:21:52गुस्सैल है। ना करुणावान है ना जैसे तुम
- 1:22:01व्याखयित करते हो वैसा परमात्मा तो सभी गुणों से अतीत है गुणा
- 1:22:09अतीत। और क्रोध हो, चाहे शांति हो, ये
- 1:22:14सब गुण क्रोध हो या दया हो या करुणा हो, ये सब गुण हैं गुण या
- 1:22:23दुर्गुण लेकिन इनसे पार है वो तत्व जो निरलेप है।
- 1:22:33वहीं तुम्हारी मंजिल है वहीं तुमने जाना है जब मान और सम्मान
- 1:22:41और अपमान ये यक सा जान पड़े। जब लुटेरा और दानी जब यक सा जान
- 1:22:52पड़े जब तुम्हें कोई नाजायज तंग करे और तुम्हें नाजायज तुम्हारे
- 1:23:03ऊपर फूलों की बारिश करे। प्रस्तुति करे या निंदा करे।
- 1:23:10इन अविरोधावशों में भी जो शिखर रहता है वो ही उस पर गया परमात्मा
- 1:23:19गुणों से पार है। परमात्मा शब्दों से भी पार है
- 1:23:23इसलिए शब्दों से वो समझाया तो नहीं जाता।
- 1:23:27लेकिन शब्दों से उस ओर इशारा जरूर हो सकता है।
- 1:23:30वो इशारों इशारों में तुम्हें बात करने की चेष्टा कर रहा हूँ।
- 1:23:34शायद तुम समझ जाओ मृत्यु के क्षण को अगर तुम जाग केजी लो।
- 1:23:46तो तुम भीतर से उठते हुए उस प्रतिभा को बिल्कुल अच्छी तरह से
- 1:23:52निहार जाओगे, कांपते हुए शरीर को बखूबी देख सकोगे और तुम्हारा भ्रम
- 1:23:59मठ जाएगा। यह कंपने वाला कोण और महकम्प कोण?
- 1:24:06दोनों का फासला साफ हो जाएगा। यह है कंपनी वाला कौन और यह है जो
- 1:24:13अकंप खड़ा देख रहा है। यह है कौन?
- 1:24:16फैसला मिट गया, लेकिन यह प्रैक्टिकल करना पड़ेगा।
- 1:24:21थ्रोटिकल तो बातें सुनकर। तुम आगे लाउडस्पीकर की तरह
- 1:24:26व्याख्याय कर देते हो, प्रसारित कर देते हो, उससे कोई अर्थ नहीं
- 1:24:31अर्थ है कि तुम्हारी ज़िन्दगी में तब्दीली हो, तुम्हारी वासनाएँ
- 1:24:38खत्म हो, तुम्हारी इच्छाएं खत्म हो।
- 1:24:41और यहाँ तक कि तुम्हारी जरूरतें भी खत्म हो जाएं ये बड़ी खतरनाक
- 1:24:46बात मैंने बोली जरूरतें खत्म हो जाती हैं तुम्हारी एक तल पर जाकर
- 1:24:52तुम्हारी कोई जरूरत नहीं रहती, फिर परमात्मा अगर तुम्हें जलाना
- 1:24:58चाहता है। तो वह तुम्हें जीने के ढंग भेज
- 1:25:02देता है। अगर वह जलाना चाहेगा चलेगी तो
- 1:25:10उसकी मर्जी वह जो तुम्हें देगा ऐन वक्त पे देगा क्योंकि प्रोसेसिंग
- 1:25:19विल हैपन इन बिटवीन फल के आने से पहले और बीज के बोने के बाद
- 1:25:29प्रोसेसिंग विल हैपन देर से आए या जल्दी से आए?
- 1:25:40जो भी आता है, ऐन वक्त भी आता है, तुम उसको जल्दी नहीं ला सकते,
- 1:25:49तुम्हारा जल्दी से लाना देरी भला उत्पन्न कर दे, लेकिन जल्दी आएगा
- 1:25:57नहीं वो। समय से पहले और जीस फल ने जितना
- 1:26:06जीस बीज ने जितना पकना है जितना ब्रॉड होना है, जितनी शाखाएं उसकी
- 1:26:12बढ़नी है जीतने फल लगने हैं, उतने ही लगने हैं।
- 1:26:17उससे एक ज़्यादा नहीं है कम। इसलिए भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं।
- 1:26:24ये भाग्य है उस बीज का भाग्य है जो वो दिया गया किन्हीं
- 1:26:30सर्कमस्टैंसेस में और उन्हें बाकी सब सर्कमस्टैंसेस का सामना किया।
- 1:26:36तूफान भी आए, ओले भी आए, भारत की भी आई।
- 1:26:39धूप भी निकली, ठंडी भी आई, सब हुआ और उसने सब सहा।
- 1:26:48उस बीच से जो फल आया वो भाग्य है उस बीज की प्रोसेसिंग में।
- 1:26:57जो वक़्त लगा उसको तुम देरी नहीं कह सकते, उसको वक़्त कह सकते हो
- 1:27:08तो हर चीज़ वक़्त पे मिलती है एन वक़्त पे मिलती है।
- 1:27:17समय से पहले कुछ नहीं मिलता और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं मिलता।
- 1:27:27जब वो दिया गया जिन सर्कमस्टैंसेस में और जिन सर्कमस्टैंसेस में वह
- 1:27:32बीज निकला। प्रस्फुटित हुआ और वृक्ष बना फल
- 1:27:37लगे फूल लगे यह उसका भाग्य था, फ्रूट था इसलिए जो वृत्ति अपनी
- 1:27:44संपूर्णता को उपलब्ध हो जाता है उसे हम भाग्यवान कहते हैं।
- 1:27:50भाग्यवान शब्द को थोड़ा। थोड़ा छोटा कर दिया जाए तो
- 1:27:54भाग्यवान भगवान बन जाता है, जो अपने पूर्ण फ्रूट तक पहुंचा।
- 1:28:04कभी बीज था, आज फ्रूट तक पहुंचा फल तक पहुँच गया तो हम कहते हैं
- 1:28:09भगवान भाग्यवान। और उससे ज्यादा वह भाग्यवान हो भी
- 1:28:14नहीं सकता। नथ्थिंग मोर इस देर आगे कुछ नहीं
- 1:28:23है। उससे बस उसने अपनी संपूर्णता को
- 1:28:26बांध लिया। 100% प्रतिपर्टी आ गई उसके भीतर।
- 1:28:32यह फ्रूट है फ्रूट को भाग्य कहते हैं, जो वक्त लगेगा बीज से वृक्ष
- 1:28:41बनने को और फल लगने को। उसे कहते हैं वक्त वक्त लगेगा ही
- 1:28:49इसलिए वक्त से पहले। और भाग्य से अधिक कभी कुछ नहीं।
- 1:29:00मैंने इस शब्द का प्रश्न था इसका मैंने इस प्रश्न का बिलकुल से
- 1:29:08विस्तार उल्लेख करके। पूर्ण रूप से विस्तृत कर दिया।
- 1:29:17वक्त से पहले कैसे आएगा जब अभी प्रोसेसिंग इस गोइंग ऑन हैपनिंग
- 1:29:27और जब फल लगेगा जितना फल लगेगा? उसको तुम कैसे बदलोगे?
- 1:29:37तो भाग्य से अधिक कुछ नहीं मिलता और वक्त से पहले कभी कुछ नहीं
- 1:29:43मिलता। भूल जा।
- 1:29:53यही कहते हैं कृष्ण के तू चिंता ना कर बहुत आएँगे, बहुत जाएंगे
- 1:30:03तेरे गुरु तेरे पिता में हैं लेकिन आएँगे चले जाएंगे सदा का
- 1:30:09सिलसिला है। मेरी सृष्टि की यही बनावट है।
- 1:30:19जो चला गया उसे भूल गया। जो चला गया उसे भूल जा वो ना सुन
- 1:30:39सकेगा तेरी सदा। जो चला गया उसे भूल गया तुम्हारा
- 1:30:54बिछाया गया शतरंज का कोई भी मोहरा काम नहीं पड़ेगा उसकी विराट सृजना
- 1:31:02के आगे। तुम नगर नहीं हो।
- 1:31:07नगली जी बल कोई पिल सजा कोई बंदगी न कजा से हाथ।
- 1:31:23छुड़ा सके कोई ए तजा कोई बंदगी नक्जा से हाथ छुड़ा सके।
- 1:31:43किये आदमियों ने बड़े जतन मगर उस के काम न आ सके न कोई धुव।
- 1:32:02ना कोई दवा, ना कोई दुआ, ना कोई दवा, जो चला गया उसे बोल।
- 1:32:26कोई इल्तजा, कोई बंदगी न कजा से हाथ छुड़ा सके कि ये आदमी ने बड़े
- 1:32:36जतन मगर उसके काम न आ सके। ना कोई दुआ, ना कोई दवा, तुम
- 1:32:52कितना भी चतन कर रहे हो वक्त से पहले।
- 1:33:03भाग्य से ज्यादा कभी कुछ नहीं मिलता।
- 1:33:09कब कभी कुछ मिल नहीं सकता श्रीकृष्ण।
- 1:33:18गोविंद। अरे मरा रे हे नाथ नारायण वासुदेव
- 1:33:34श्री कृष्ण गोविंद। अरे, मृ हे नाथ नारायण, वासुदेव
- 1:33:52पितुमाच, स्वामी सखाम। पितु मातृ स्वामी सखा हमार है
- 1:34:09नाथनारा वासुदेव श्री कृष्ण। धन्यवाद।