Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Jan 26 - मैं कैसे पहुंचा? अतीत और भविष्य से मुक्ति का सूत्र | अहंकार तोड़ने का फार्मूला Must Watch
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- 0:16शंभू प्रसाद द्विवेदी बाबा जी आपने कहा हिंदू धर्म के मार्ग पर
- 0:34चलने वाला व्यक्ति कभी नहीं पहुंचेगा क्योंकि हिंदू धर्म
- 0:41कल्पनाओं पर जीता है। आप भी तो हिंदू धर्म में पैदा हुए
- 0:50थे, आप कैसे पहुँच? गए बहुत सुंदर प्रश्न थे।
- 1:05ऐसे चैलेंजिंग प्रश्न करते रहा करो ताकि आपको सत्य को उगाड़ने का
- 1:16मौका मिले। आज भी हमारी रोज़मर्रा की
- 1:26जन्मगानी में। हम एक शब्द प्रयोग करते हैं।
- 1:35कोई व्यक्ति किसी बात के लिए ज्यादा व्यथित हो तो हम कहते हैं
- 1:40अरे क्यों कल्प रहा? है।
- 1:46क्यों कल्प आ रहा है, पुनः जी छोड़ दे, इन कल्पनाओं को कल्पनाएं
- 1:59क्या है? आइये हम थोड़ा सा इसकी बारीकी में
- 2:02चल रहे है। और आज सारा संसार इन कल्पनाओं के
- 2:15जाल में पुलिस गया है, उसे समझ नहीं आता, चारों ओर अँधेरा ही
- 2:21अँधेरा है। बताने वाला कोई नहीं।
- 2:33न चाहते हुए भी व्यक्ति अंधकार की गर्भस्थ में घिरा हुआ है।
- 2:53कल्पना स्वप्न ये एक ही जैसे स्वप्नों से कोई व्यक्ति स्वेत
- 3:08नहीं पहुंचता, वैसी ही कल्पना। से कोई व्यक्ति स्वय तक नहीं
- 3:14पहुंचता और व्यक्ति सुखी तब होता है सही सही मायने में जब स्वय तक
- 3:22पहुंचता है, तुम्हारा स्वय सत्य है, उसके सिवा सब झूठ है।
- 3:36तुम सुखी तब होगे, जब स्वय में पहुँच जाओगे।
- 3:42स्वय से बाहर आए नहीं और तुम दुखी हुए नहीं।
- 3:51और मज़े की बात है। इन शब्दों को सर्किल क्या
- 4:00धार्मिक, क्या राजनीतिक ये तुम्हें कल्पनाओं मिल ही जाता है।
- 4:15कल्पना होती है हमेशा भविष्य को मैं स्वयं होता है, हमेशा वर्तमान
- 4:25में स्मृतियां होती हैं। अतीत में जो गुजर गया।
- 4:34कल्पनाएं होती हैं। भविष्य में जो अभी आया नहीं और
- 4:45तुम जो हो तुम तुम्हारा वास्तविक स्वरूप वह अभी है तुम भटकना चाहो
- 5:00तो भटक सकते हो स्वतंत्र हो। लोग मेरे पास आ जाते हैं।
- 5:13पूछते हैं बाबा दान कैसे करना चाहिए?
- 5:28बड़ा प्यारा पश्न है? अगर तुम दान को ऐसा समझ के करोगे
- 5:37कि यह मेरा है तो वह सै काम करोगे, क्योंकि अगर कुछ मेरा है
- 5:47तो मैं किसी चाहत के अंदर ही दान करूँगा।
- 5:54उसका दूसरा रंग भी है की मेरा कुछ भी नहीं है, इसलिए संत जब पहुँच
- 6:00जाता है मेरा कुछ भी नहीं है, मैं हूँ ही नहीं तो उसका दान सच्चा
- 6:08दान होता है। क्योंकि वह फिर जो दान करता है
- 6:14विद्या और कुछ है नहीं उसके पास वह कुछ वापस से नहीं करता वह
- 6:26सिर्फ बांटने के लिए करता। इसलिए सच्चा दान वही है जो आफ्टर
- 6:36एनलाइटनमेंट हो। तुम जान लो करना तो मैं हूँ ना ही
- 6:44मेरा कुछ है। और अगर तुम कल्पना में बने रहे तो
- 6:50यह कल्पना सो 50 साल से ज्यादा चलने को है नहीं इतरशाही मानव का
- 6:58जी बनाएं। 1 दिन तुम सब छोड़ चढ़ते चले
- 7:03जाओगे। सब तुम्हारी गर्व से बाहर हो
- 7:07जायेगा तुम्हारा अपना शरीर तक तुम्हारी गर्व से बाहर होगा
- 7:22मैं कैसे पहुंचा? धर्म एक मान्यता है, कल्पना भी एक
- 7:34मान्यता है। जैसे तुम कहते हो हिंदू
- 7:38राष्ट्रकारणिक है, अब जो भविष्य में होगा उसका परिणाम तुम्हें
- 7:47नहीं पता। कैसे निकलेगा इच्छाएं तुम्हें
- 7:53कल्पनाओं में दकीलती हैं। ये शब्द बड़े कीमती हैं।
- 7:56ध्यान से समझे इच्छाएं तुम्हे कल्पनाओं में धकेलती हैं, स्वप्न
- 8:05भी तुम्हे कल्पनाओं में धकेलते हैं, और कल्पनाओं में अगर
- 8:12तुम्हारे स्वप्न और कल्पनाएं पूरी हो गई।
- 8:17तो उसका फल क्या मिलेगा ये तुम्हे पता नहीं।
- 8:24इसीलिए कर्षण कहते है। तू सिर्फ कर्म कर तू फल की इच्छा
- 8:28ही छोड़ दे। मैंने स्त्री देखी, उसके कोई
- 8:43बच्चा नहीं हो रहा था, मैंने उससे कहा तू छोड़ अगर नहीं होता तू
- 8:54स्वीकार कर ले। यह जरूरी तो नहीं कि तेरा भी
- 9:01बच्चा हो। वो कहती समाज में भय लगता है,
- 9:08समाज में मुझे गालियां न खास्ता मुझे जड़ से।
- 9:18टूटा हुआ वृक्ष कहते है गला हुआ वृक्ष कहते है तेरी को खारी नहीं
- 9:24होती। या तो समाज की सुन लो या सर्जन
- 9:31हारी की सुन लो। उसने मुझे कहा नहीं मुझे बच्चा
- 9:42चाहिए। ये 40 वर्ष पहले की बात है, ठीक
- 9:50है, मैं प्रार्थना करूँगा। हाथ में तो मेरे कुछ नहीं, हाथ
- 10:02में तो सदा ही उसके है, जिसका यह सारा पदार्थ है सारी हवाएं, सारा
- 10:11पानी, सारी धरती सवार आसमान सब उसका है, मालिक तो वही है।
- 10:19उसकी आगे भिक्षा पात्र फैलाऊंगा तुम्हारे लिए आई विल परे और उसके
- 10:27बच्चा हो गया और 25 वर्ष का होने के बाद उस बेटे ने ही माँ की
- 10:36गर्दन काट दी। यह बिल्कुल सत्य घटना मैंने देखा,
- 10:47कल्पनाएं कल को क्या भूल खिलाएंगे?
- 10:50तुम्हें कुछ भी नहीं पता लेकिन कल्पना?
- 10:57समाज से भयभीत होकर यह समाज की बनाई हुई धारणाओं में बंद कर तुम
- 11:06कल्पनाएं करते हो, इच्छाएं करते हो, तुम वैसे युक्त इच्छा नहीं
- 11:13करते हो, तुम्हारी इच्छा नहीं है। समाज कहता है तुम जड़ से गले हुए
- 11:22रूखो तुम्हारे नहीं होते तुम ठूठो यानी कि तुम्हारी ज़िन्दगी कैसे
- 11:32चले यह भी समाज? यानी दूसरा निर्धारित करेगा।
- 11:39फिर तुम स्वतंत्र कहाँ रहे अगर तुम्हारी ज़िन्दगी का पैमाना हो,
- 11:48दूसरा तय करे हो चाहे समाज हो, चाहे लोग हो।
- 11:54इससे क्या फर्क पड़ता है? तुम स्वयं तो अपनी ज़िन्दगी को
- 11:59नहीं नचला रहे, फिर तुम्हें स्वयंत्र कैसे हुआ है?
- 12:05तुम्हारा तंत्र स्वय का कैसे हुआ, यह तो पर हो गया।
- 12:24मैं कैसे पहुंचा सर्वधर्माण पर तज्जमा में कमी शर्म पर मैंने सभी
- 12:34धर्मों का त्याग कर दिया सभी मान्यताओं का।
- 12:43सभी थपनों का सभी संस्कारों का मैंने त्याग कर दिया छिपकहटे
- 12:57जिनके साथ मैं ही जुड़ा हुआ था, पदार्थ तुमसे नहीं जुड़ता तुम
- 13:03समझना। तुम्हारी वासना पदार्थ से जुड़ती
- 13:07है, पदार्थ कभी नहीं करते, मुझे घर ले चलो किसी पदार्थ ने तुम्हे
- 13:14आवाज दी है कि मुझे खरीद लो और घर ले चलो नहीं पदार्थ अपनी जगह पे
- 13:21पड़े। किसी जमीन ने तुम्हें कहा है मुझे
- 13:24खरीद लो, अपने नाम करा लो, तुम ही दीवाने हो जाते हो, तुम ही खरीद
- 13:44लाते हो जद पी पदार्थ की तुम्हें ज़रा भी रजामंदी नहीं होती।
- 13:53हिंदू धर्म एक मान्यता है कोई मार्ग नहीं है मान्यता है,
- 14:06क्योंकि कल्पना मैंने पहले भी कहा परिधि से केंद्र तक जाने के सारे
- 14:15रास्ते मैं जनता हूँ। ऐसा कोई रास्ता नहीं जो कल्पनाओं
- 14:22से सत्य तक पहुंचा दे। कल्पनाओं से पागल तो हुआ जा सकता
- 14:29है, कल्पनाओं से विक्षिप्त तो हुआ जा सकता है, कल्पनाओं से सवस्थ
- 14:35नहीं हुआ जा सकता। स्वयस्थित नहीं हुआ जा सकता
- 14:42क्योंकि कल्पनाएं भविष्य में धकेलती हैं।
- 14:44तुम्हें कल्पनाओं से तो मैं मुक्त होने की बात करता हूँ, स्वप्नों
- 14:53से मुक्त होने की बात करता हूँ। और यह सब कल्पनाएं हैं जो तुमने
- 15:00थोप रखी है। मान्यताएँ ये सब कल्पनाएं हैं
- 15:05तुमने, कल्पनाएं की थोप रखा है तुमने?
- 15:19चेहरे से सोचोगे तो समझा जाएगा जब कोई कहता है कि हम अमीर हो जाएंगे
- 15:28तो सुखी हो जाएंगे, भला तुम्हें पता है?
- 15:37कबीर तो कहते हैं जो सुख पा हो सुख नहीं।
- 15:55अमीर में मन लागो मेरो रो फकीरी कैसे करते हैं?
- 16:23यार की मर्जी के आगे यार का दम भर के देख अरजे उल्फत कर चुका है ये
- 16:31भी उल्फत करके देख इसे फकीर करता है तो उसकी रजा में राजी होकर
- 16:39चला। वह मालिक है और सत्य है, क्योंकि
- 16:45तुमने तो कुछ बनाया है, ज़रा जाग कर देख लो, अगर तुमने कुछ बनाया
- 16:50हो तो ये कहने सुनने की बातें नहीं हैं, यह प्रैक्टिकल है।
- 16:59अगर तुमने कुछ बनाया तो बता दो, फिर किसने बनाया फिर कौन करता तुम
- 17:14बिना कुछ खंगाले कह देते हो मैं करता हूँ देखो मैं चाहूँ तो इस
- 17:19चीज़ को उठा लूँगा मैं चाहूँ तो उसको मार दूँ।
- 17:22मैं चाहूँ तो उसको चिंता कर दूँ, बस तुम इन तर्कों के बल के ऊपर कह
- 17:28देते हो कि मैं सब कुछ कर सकता हूँ।
- 17:38जीने के दो तरीके हैं। आइए हम इसकी गहराई में चले।
- 17:47मैं कैसे मैंने सभी धर्मों को सभी मार्गों का त्याग कर दिया धर्म
- 17:57मार्ग और मैंने सभी मार्गों को छोड़ दिया।
- 18:09जीने के दो हँसते हैं दो ढंग है राजनीतिक, धार्मिक लोग तुम को इस
- 18:27पल से बाहर ले जाते हैं। इस बात को हर समझ लो राजनीतिक हैं
- 18:36या धार्मिक, यह तुम्हें तुमसे यह पल छीन लेते हैं या तो तुम्हें
- 18:46अतीत मत ले जाओ। उर्मि जैव ने किया, बाबर ने किया
- 18:55लोधी ने यह किया यह अतीत में अगर तुम चले गए तो वर्तमान खो गया जीस
- 19:05शिक्षण में तुम। अतीत में चले जाते हो, समृतियों
- 19:09में चले जाते हो, उस वक्त तुम एक अतीत के कण में जाके वर्तमान के
- 19:18क्षीण को खो देते हो, ये राजनीतिक लोग करते हैं।
- 19:30और धार्मिक लो तो मैं भविष्य में ले जाता हूँ, अच्छे कर्म करो,
- 19:43अच्छे कर्म करो। तुम सुखी हो जाओगे, तुम्हें
- 19:54स्वर्ग मिलेगा और स्वर्ग में बहती हैं शराब के चश्मे।
- 20:07स्वर्ग में मिलिंगिक में हूरे यह स्वर्ग आदमियों के क्रिया से।
- 20:23अगर स्त्रियों ने स्वर्ग का निर्माण किया हो तो तो स्त्रियाँ
- 20:29कहती स्वर्ग में तुम्हें मिलेंगे बड़े मसल में शानदार और लंबे ऊंचे
- 20:35चोडे गनीमत रहे। के स्वर्ग पुरुषों ने बनाया
- 20:48क्योंकि सभी शस्त्र पुरुषों ने हैं।
- 20:55गार्गी को तो जागे बल को बोले ही नहीं थे।
- 21:03यज्ञ बुल्क ड्रा देते हैं गार्की को गार्की तू अब ज्यादा मत बोल,
- 21:13अन्य था तेरी बुद्धी के टुकड़े। तो डर गए कारक स्वर्ग मनुष्यों ने
- 21:28बनाया तो स्त्रियाँ कहाँ गयी? स्त्रियों के लिए कोई अलग से
- 21:39स्वर्ग है? आदमी क्यों करिए?
- 21:44इंद्र आदमी ही क्यों है? इंद्र स्त्री भी तो हो सकता था,
- 21:52स्त्री भी तो अपने वे कारों पर। विजय प्राप्त कर सकती है, बिल्कुल
- 22:04कर सकती है और ज्यादा आसानी से कर सकती है तो सड़कों का निर्माण
- 22:12यहाँ से समझ जाओगे। भाई, यह झूठ है।
- 22:19बनाने वालों ने यहीं पे भेद कर दिया।
- 22:23स्त्रियों के लिए कोई स्वर्ग ही नहीं बनाया, ना ही बच्चों के लिए
- 22:30बनाया। बच्चों के लिए स्वर्ग नहीं बनाया।
- 22:36तो क्या बच्चे स्वर्ग में नहीं जा सकते?
- 22:42क्यों नहीं बनाएं? क्योंकि ये है ही नहीं दिल के
- 22:46बहरहने को गालिब ये ख्याल अच्छा है, हमने देखी है जन्नत की हकीकत
- 22:52लेकिन। गालिब कहते हैं कि हम स्वर्ग की
- 22:58हकीकत को जानते हैं, यह सिर्फ दिल के बहलावे।
- 23:19धार्मिक लोग तुम्हें स्वर्ग का लालच दे के भविष्य में ले जाते
- 23:24हैं और राजनीतिक लोग डोभाल जैसे तुम्हें बाबर का डर दिखा के अतीत
- 23:35में ले जाते। हैं।
- 23:41मोदी जैसे हैं राज्य करने वाले लोग अमित साजस और भी बड़े
- 23:52निकलेंगे। आपको दर्द खाता है?
- 24:00तो राजनीतिक आपको प्रतीत में मिल जाता है और राजनीतिक सदा ही
- 24:11ब्राह्मण का सहारा चाहता है। ब्राह्मण यानी वह मीडिया।
- 24:16जो उसका प्रचार प्रसार कर सके वह ब्राह्मण।
- 24:22ये दोनों की एकजुटता होती है तो सत्ताएँ इनके हाथ में खेलते हैं।
- 24:37एक तुम्हें अतीत में ले जाएगा तुमने देखा नहीं कैसे गज ने भी
- 24:42आंके सोमनाथ मंदिर को लूट के चला गया भाई तुम्हारी मिलिट्री क्या
- 24:46कर रही है? उस वक्त तो हमारी मिलिट्री नहीं
- 24:49थी। आज तो हमारी विधि मत।
- 24:59संसार के अंदर प्रभुत्व जमाई मिलिट्री है, फिर आज कैसे कोई गज
- 25:05न भी आके हमारे मंत्रों को रोक लेगा इंतजाम हमने कर तो लिया है।
- 25:19फिर राजनैतिक सहारा लेते हैं आध्यात्मिक लोगों का, हम हिंदू
- 25:29राष्ट्र पर रहते हैं। अब, समझिये बात को राजनीतिज्ञ
- 25:41तुम्हें वर्तमान के क्षण से वटका के अतीत के क्षण में ले गया,
- 25:52आध्यात्मिक व्यक्ति तुम्हें वर्तमान से वटका के भविष्य के
- 25:58क्षण में ले गया। लेकिन दोनों ने काम एक ही किया।
- 26:02तुम्हें पता नहीं चला बड़ी ट्रिकबाजी है दोनों ने तुम्हें
- 26:09वर्तमान से बहका। है।
- 26:16और जैसे ही तुम वर्तमान से चूक गए।
- 26:20वैसे ही स्वर्ग तुम्हारे हाथों से निकल गया जिससे स्वर्ग की लालच
- 26:26हो। राजनीतिज्ञों ने भरी तुम्हारे
- 26:31पंडितों ने भरी तुम्हारे भीतर अध्यात्मिक लोगों ने भरी तुम्हारे
- 26:36भीतर। इन दोनों ने स्वर्ग छीनने का काम
- 26:40किया था। उनसे एक ने अतीत में ले जा के एक
- 26:46ने भविष्य में ले जा के तुमसे वर्तमान छीन लिया और वर्तमान ही
- 26:51स्वर्ग है। कितनी पैनी चाल है इन लोगों की और
- 27:01कितनी दुष्ट चाल है इन लोगों की स्वर्ग दिखाने के बहाने से?
- 27:13वह जिसमे उतरने से स्वर्ग मिल जाता वह क्षण ही गायब कर दिया यह
- 27:23लोलीपाप। है।
- 27:26किसने अतीत का भेदिका के लोलीपाप दे दिया?
- 27:34किसने भविष्य की कल्पनाएं स्वपंदिका की लॉलीपॉप दे दिया?
- 27:39लेकिन बात ये है स्वर्ग जिसे भी मिला आज तक ध्यान से सुनना बात
- 27:48को। वर्तमान में ठहर के मिला अतीत भी
- 27:55एक वटकन है अतीत की वटकन में तुम खो जाते हो।
- 28:12याद न जा बीते दिनों के याद न जा। बीते दिनों की जब याद आती है
- 28:36तीर्थ की तो तुम वर्तमान के क्षण को खो देते हो।
- 28:44उस घड़ी क्या होता है? तुम वर्तमान के क्षण को खोदते हो
- 28:59और जब तुम्हें या बाबा बागेश्वर कहते हैं हिंदू राष्ट्र पर यह
- 29:11तुम्हें भविष्य में लिखा है। चिलमिल बरसता?
- 29:21सावन होगा ऐसा सुंदर सपना अपना जीवन होगा।
- 29:37ये भविष्य की कल्पना है, लेकिन दोनों में तुमने अतीत या भविष्य
- 29:46दोनों में तुमने वर्तमान को खोया? और वर्तमान ही वो पल है जिसमें
- 29:59अगर तुम रुक जाओ, परिपूर्ण रूप से रुक जाओ, तो मेरे प्रवचनों को
- 30:07सुनते सुनते कभी वर्तमान में ठहरे हुए हो एक पल के लिए।
- 30:14और उस गणित में बड़ा आनंद आया होगा।
- 30:18बस यही छोटी सी तरकीब तुम्हें पता चला आज और यह लुटेरे मैं क्यों
- 30:26कहता हूँ ये अजीत डोभाल जैसे लुटेरे?
- 30:33नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे लुटेरे क्यों?
- 30:39इन्होंने तुमसे वो क्षण छीन लिया जो तुम्हें जन्नत में ले जा सकता
- 30:45था और वह क्षण है वर्तमान। भविष्य की कल्पनाओं को दिखाने पर
- 30:54व्यक्ति पुण्य करो। यह पुण्य अपने लिए करवातें हैं।
- 31:02कोई विशेष दिन पे बुलाएंगे। गुरु पूजा नाम का एक।
- 31:08बर्फ़ रखा हैं गुरु दक्षिणा तो तुम्हे स्वर्ग मिलेगा, हिंदू
- 31:24राष्ट्र बना देंगे जिन्होंने मुस्लिम राष्ट्र बनाया।
- 31:30क्या उनको स्वर्ग मिल गया? वो वहिस्त में होरों को भोग रहे
- 31:37हैं, उनकी स्त्रियाँ मुसलमान को भोग रहे हैं, वहाँ अमृत है
- 31:48जिन्होंने। ईसाई बड़े समझदार थी, ईसाइयों ने
- 31:54सारी धरती पर काबिज होने के बावजूद जॉर्ज पंचम दो तिहाई धरती
- 32:04का मालिक था। ईसाई राष्ट्र तो उससे भी सो जाता
- 32:11था और बना सकता था। बड़े मज़े से कोई ओप्पोसिटीओन था
- 32:15ही नहीं। कोई नारेबाजी करने वाला था ही
- 32:19नहीं। ईसाई राष्ट्र घोषित कर देता लेकिन
- 32:25ईसाई बड़ा सुमेदार है। उन्होंने वास्तव में क्रूसिफिकेशन
- 32:33दिया है। हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना
- 32:39हमेशा जो दिखायेगा तुम देख लेना। उनके इतिहास में किसी व्यक्ति ने
- 32:44कोई कुर्बानी नहीं दी होगी। क्योंकि कुर्बानी से ये डरते है
- 32:56और जो कुर्बानी से डरा वह स्वयं में नहीं पहुँच पायेगा।
- 33:04कुर्बानी साहस से आती है और साहस एक ऐसा तत्व है जो तुम्हें अपने
- 33:10अंत में ले जाता है। एक ने तुम्हें वटकाया वर्तमान से
- 33:18भविष्य की कल्पनाएं दिखा एक ने तुम्हें वटकाया वर्तमान से।
- 33:23अतीत के व्यय दिखाकर लेकिन दोनों ने भटकाया।
- 33:27वर्तमान से दोनों ने तुम्हें वर्तमान से चुक किया।
- 33:34कोई अतीत में ले गया, कोई भविष्य में ले गया।
- 33:40और स्वर्ग मिलता है। वर्तमान में ठहरने से बस यही एक
- 33:49क्षण होता है। छोटी सी बात।
- 34:00और कितने कितने शास्त्र ग्रंथ लिख दिए गए इस छोटी सी बात के आगे
- 34:06तुम्हारे वैद्य, उपनिषद, पुराण, कुरान, बाइबल, ग्रंथ गीता सब
- 34:12बेकार हो जाते। इस छोटी सी बात के लिए छोटी सी
- 34:18बात के। आगे भी जाने ना तू भी जाने ना तू।
- 34:40जो भी है, बस यही एक बल है। जो भी है बस यही।
- 34:56एक बल लिखने वाला लिख गया। शायद उसे पता न हो कि मैं कितनी
- 35:03कीमती अक्सर लिख के जा रहा हूँ। धुन डाल दी गई, गाना गा दिया गया।
- 35:11लेकिन इसके भीतर कितना गहरा? स्वर्ग का रहस्य छिपा था यह वह भी
- 35:17नहीं जानता होगा ना तुम्हें आगे क्या होगा इसका पता है पता है
- 35:28तुम्हें लोगों से पूछते फिरते हो तुम?
- 35:32भती? अतीत में जो हुआ वो भी तुम नहीं
- 35:34जानते। सटीक घटनाओं को आज तक जानने वाला
- 35:39व्यक्ति इस धरती पर हुआ क्योंकि तुम्हें पता ही नहीं होता सत्य
- 35:46क्या है? केनेडी को मार गए रोक।
- 35:52और आज तक 63 के बाद आज तक किसने मारा कैनेडी को सरेआम मारा
- 36:03अमेरिका जैसे मुल्क में कैनेडी के हत्यारे का पता नहीं लगा।
- 36:10कौन था मास्टरमाइंड? नहीं पता लगता।
- 36:18एक संत खंगाल सकता है, लेकिन संत को आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि
- 36:26संत जब भी खंगालेगा ध्यान रखना क्यों नहीं खंगालता संत?
- 36:31इसकी भी आजु व्याख्या कर दूँ तो मैं संत सदा वर्तमान में जीता है।
- 36:41संत वर्तमान से चुत नहीं होना चाहता, इधर उधर हिलना नहीं चाहता
- 36:46पेंडुलम की तरह। क्योंकि वर्तमान में आनंद का वह
- 36:57अमृत है जीसको वह सदा पी लेना चाहता है और अगर वह खंगालेगा तो
- 37:08उसे अतीत में जाना पड़ेगा। और अतीत में दुख है।
- 37:14अगर वह भविष्य में होने। वाली बातों को खंगालेगा तो उसे
- 37:20वर्तमान का क्षण खोना पड़ेगा और वर्तमान का क्षण खोना संत के लिए
- 37:27जहर के बराबर है। इसलिए संत भविष्य में क्या?
- 37:33होगा यह भी नहीं जानना चाहता। अतीत में क्या हुआ?
- 37:40यह भी। नहीं जानना चाहता क्यों?
- 37:42क्योंकि दोनों ही परों को खंगालने में वर्तमान से।
- 37:49हीन हुआ जाता है चुत। हुआ जाता है।
- 37:51वर्तमान से बाहर हो जाता है व्यक्ति और वह अमृत।
- 37:56जो बीता है वह वर्तमान में बीता है, इसलिए संत को तुम सर्वज्ञ कह
- 38:04तो सकते हो। लेकिन इस मायने में नहीं।
- 38:09जीस मायने में तुम सोचते हो तुम्हारी सोच करता है।
- 38:17संत भविष्य में जा सकता। है बिलशक लेकिन वर्तमान के रस को
- 38:23खोकर जा सकता है। और वर्तमान का रस ऐसा।
- 38:28रसीला है। के संत इसको किसी।
- 38:34कीमत पर गंवाना नहीं चाहते। भविष्य में जो होगा।
- 38:41देखा जाएगा। अतीत में क्या हुआ?
- 38:48वह क्यों नहीं करना चाहता क्योंकि अतीत को देखने के लिए वर्तमान को
- 38:53खोना जरूरी है? और वर्तमान क्या खोया?
- 38:59उसका तो जहाँ लूट गया। बा मुश्किल किसी तरह।
- 39:04वर्तमान में उतरे और बा मुश्किल किसी तरह उस आनंद के रस को पीना
- 39:09शुरू किया। क्या वह आपको भविष्य में क्या
- 39:13घटेगा या अतीत में क्या घटा था इन तुच्छ्य बातों के लिए वर्तमान को
- 39:19समर्पित कर दे। नहीं, वह तो समझदार है और समझदार
- 39:25सिर्फ वही व्यक्ति है। जो अमृत को पीता।
- 39:32रहता है किसी भी हाल। इसलिए संतों ने बड़ा।
- 39:39अजीब नक्शा दिया था और अदहोश भी था।
- 39:43क्या हर हाल मेरा जीरा है? जो होता है, होने दे।
- 39:55अगर तुमने ये स्वीकार कर। लिया।
- 39:58तो तुम भविष्य और अतीत से मुक्त होकर वर्तमान में ठहर जाओगे।
- 40:04जो हुआ ठीक हुआ तो अतीत गया जो होगा ठीक।
- 40:09होगा। तो भविष्य गया, फिर शेष कह रह
- 40:13गया, शेष रह गया वर्तमान। इसलिए नानक कहते हैं जो।
- 40:24तुध पांव है सोइप अली कार। मैं न तो अतीत में जाऊंगा।
- 40:31वह गया, उसको बदला नहीं जा सकता। और भविष्य में क्या होगा?
- 40:37यह मूर्खता है क्योंकि आनंद सदा वर्तमान।
- 40:43में रह कर पाया जा। सकता है यह?
- 40:46नानक अच्छी तरह से जानते। है।
- 40:50इसी नानक तुम्हें नहीं बताएंगे। भविष्य में क्या होगा?
- 40:55खुद भी जानने की इच्छा नहीं होगी। उनके भविष्य में क्या होगा?
- 40:58वो कहीं कुछ भी हो अपन तो यहाँ। कुछ है नहीं।
- 41:03अपन ही है नहीं। और अपना भी यहाँ कुछ।
- 41:11नहीं, जो है? वह एक का है और उसका।
- 41:17ही रहेगा उससे। कोई छीन नहीं सकता।
- 41:24फिर मग झकपाई क्यों करना? उस क्षण में कहता है।
- 41:32व्यक्ति शायद, यार। की मर्ज़ी के आगे।
- 41:37यार, कदम भर के देख। उसकी क्या मर्ज़ी है इसमें?
- 41:42जीके देख लो। और उसकी मर्ज़ी में जीने।
- 41:48का मतलब अपनी मर्ज़ी में जीने की इच्छाओं का प्रति त्याग कर देना।
- 41:56यार की मर्ज़ी की आँखें। यार का दम भर के देखा।
- 42:02अरजे उल्फत कर चुका। है।
- 42:06संसार के उर्फत तो तुने संसार। से प्रेम तो तुने बहुत कर लिया।
- 42:13धन कमा लिया, सुविधाएं कमा। ली।
- 42:18बढ़िया सा बंगला बना। लिया जहाँ से 1 दिन तेरी डॉली उठा
- 42:22ली जाएगी। बड़े प्यार से पाला था बड़े।
- 42:27शोक से पाला था। अर से उल्फत कर चुका।
- 42:37है। मेरे भाई अमेरिका चले गए।
- 42:42थे यहाँ जब। आते तो कल ही करते।
- 42:48सजाती घर को ऐसा सजाती। ज़रा भी कहीं गर्द।
- 42:57होता झाड़ फूंक कर देते, सुंदर स्वर्ग की तरह घर को रखते।
- 43:06लेकिन। कोरोना में जल गए अमेरिका।
- 43:12में कितना सुन्दर घर? बनाया।
- 43:16कुछ साथ गया न धर्मपत्नी साथ गया, न पुत्र।
- 43:25साथ गया न पुत्र साथ। और ये अकेले।
- 43:31मैं अपने भाई के लेने का था तुम जीते जी?
- 43:38जिन चीजों को लटकाना चाहते। हो बड़े शिकारे भी हो उसके पास।
- 43:44बड़े से बंगले भी हुए, बड़े बड़े क्षेत्र के अंदर उसने बंगले बनाए
- 43:48थे, बड़े से बैंक भी। लेकिन संघ उसके कोई नहीं।
- 43:55है और फिर अर्थी के साथ तो 10,00,000 लोग हो या 10 लोगों से
- 44:03कोई फर्क नहीं पड़ता। और फिर मरने के बाद।
- 44:08तो कोई 21 तोपों की सलामी दे या गालियां निकाले, इससे भी कोई फर्क
- 44:12नहीं पड़ता। इसलिए हे जुल्म करने।
- 44:16वालों बाद में कोई गाली निकालेगा? या कोई तुम्हारा अच्छा तुम्हें?
- 44:25कहेगा, इसकी फिक्र मत करो, तुम बुरा ही करते रहना क्योंकि।
- 44:36जब तुम्हें पता ही नहीं। कोई दंड देने वाला है तो तुम्हें।
- 44:43तुम्हारे। सारे ग्रंथ से समझाते हैं।
- 44:45कोई अच्छा। को भला करने।
- 44:55भलाई। किए जा।
- 45:01बुराइ के बाद ले भलाई जिया भला। करने।
- 45:21जी अगर इनसे कहेंगे। राजनीतिज्ञों से तो इनके सिर से
- 45:26सिर के ऊपर से गुजर जाएगी। बात।
- 45:31ये कहेंगे मरना तो है उसके। पास 21 तोप की सलामी दे दो।
- 45:36या गालियाँ निकालो या 18 में अध्याय का पाठ सुना दो।
- 45:42कौन सुनता है? सुनने वाले कान थे, लेकिन।
- 45:47कान तब सुनते थे। जब तक चेतना थी, यह पंखा तब तक
- 45:53चलता है। जब।
- 45:56तक इसके भीतर से विद्युत। का संचार जब विद्युत का।
- 46:00संचार इसके। भीतर से निकलना बंद हो गया तो ये
- 46:03पंखा ठहर जाएगा। तो फिर अच्छा भी करें तो क्यों
- 46:12करें? फिर बुराइ ही करना?
- 46:18यह राजनीतिक व्यक्तियों। का दृष्टि को और जो।
- 46:27अध्यात्मिक व्यक्ति है? वो इससे बिल्कुल।
- 46:30उल्टा। सोचता है।
- 46:33अध्यात्मिक व्यक्ति सत्य। मैं कहता हूँ।
- 46:36ये इनके बाबा बागेश्वर व्यक्ति याद में नहीं करता।
- 46:41यह तो पाखंडियों का साथ देता है और इन दोनों की जोड़ी है सदा से
- 46:47बनी हुई लूटने के लिए और देखो कभी कोई।
- 46:53साथ लेकर ज्ञान है। मैं आपसे रोज़ बोलता हूँ।
- 46:59मुझे ही पिछले जन्म में गोली मारने वाला रोज़ मेरे प्रोजेक्ट
- 47:02सुनता है रोज़। कोई गर्व उसको झेलने को?
- 47:07तैयार है। कोई गर्व हिटलर को झेलने।
- 47:12को तैयार है। यहाँ ना पिटोगे तो ऊपर।
- 47:19पिटोगे ऊपर वाले तालियाँ मारते हैं।
- 47:25हिटलर से कहते हैं और। बार 2,50,00,000।
- 47:32मॉल पिटता है, बुरी तरह उसने 6,00,00,000 व्यक्ति मार।
- 47:39दिए लेकिन मैंने तुमसे कहा मैं बदलाव करूँगा सर।
- 47:50और बदलाव भी अहिंसक रूप। से करूँगा।
- 47:56सदा से ही मेरा ये। ध्येय रहा है, हालांकि।
- 48:01इस वर्कर जैसे लोगों ने। भी कहा।
- 48:08गर्म मिजाजी लोग भी थे। लेकिन गर्म मिजाजी लोगों के।
- 48:15आगे याद रखना। एक तो मैं गुंडे ही।
- 48:19समझा देता हूँ यह ज़िन्दगी में काम आये।
- 48:27गुंडी यह है कितना भी? दुष्ट वृत्ति हो उसके आगे।
- 48:32अपने अहंकार का प्रकटवा। मत करना, वह अपने अहंकार को और
- 48:36बढ़ा लेगा, वह तुम्हें दंडित करेगा।
- 48:41अहंकार व्यक्ति के अहंकार। को।
- 48:48तोड़ने के लिए या। कम करने के लिए एक ही तरीका है
- 48:51उसके पांव पकड़ लो। मेरे पास लोग शास्त्र करने।
- 48:59आ जाते हैं। हम देखते हैं तो कितना बड़ा
- 49:01विद्वान है बाबा आजाओ शास्त्र कर मैं उसके पांव पकड़ लेती हूँ।
- 49:08देखो, ब्रो। तुम जैसे विद्वान तो मैंने कभी आज
- 49:12तक ही नहीं देखा जलपान। कर लो।
- 49:17खाना वगैरह खा लो और। तुम्हारी इच्छा मैं पूर्ण किया।
- 49:21देता हूँ। ये लो पांव के हसल खाती मुझे
- 49:25आशीर्वाद दे दो मैं हार गया, तुम जीत गए।
- 49:30अरे मैं कैसा विद्वानु मैं तो मती मंद हूँ मैं तो मोर का हूँ।
- 49:39तुम बड़े विद्वान हो। तुम जीत गए।
- 49:43उसका अहंकार बड़ा हो जाता है और वह चला गया सदा से मैंने।
- 49:49ये किया जब। फॉर्मूला है, यह बाबा ने मुझे
- 49:52समझाया। दूसरे को अहंकार को।
- 50:02तुम 100 साल पुरानी दुश्मनी लेके आओ, जाओ मेरे पास।
- 50:05मैं तुम्हें 110 मिनट में दुश्मनी को खत्म कर के दिखा दूंगा।
- 50:11फार्मूला क्या है? कि तुम्हें समझा भी देता।
- 50:12हूँ क्योंकि कोई पता नहीं बोलते बोलते ही श्वास रुक जाए कोई पता
- 50:19होता। है कभी किसी को।
- 50:20नहीं हमारे। शहर में एक व्यक्ति था।
- 50:25जीस दिन रिटायर हुआ। उस दिन बड़ा खुश था।
- 50:29आज अपने मनपसंद की सब्जी खाएंगे, मनपसंद का आज सलाद दिलाएंगे और
- 50:34सलाद लाने के लिए बाजार चल रहा था।
- 50:37उस दिन ही रिटायर हुआ था और धर्म से गड़बड़ा नौकरी।
- 50:42से रिटायर हुआ। और ज़िन्दगी से भी रिटायर हो गए।
- 50:46पता लगता है तुम्हें भरोसा है कि 2047 का किसको भरोसा है?
- 50:58जो भी है बस यही एक पल है। अभी अभी।
- 51:07नहीं तो कभी नहीं। और अगर तुम अभी में।
- 51:17ठहरने की युवती। बना ली है क्या?
- 51:21युवती है अतीत। की स्मृतियों में मत।
- 51:25भटकको। भविष्य की कल्पनाओं में मत।
- 51:29भटकको। झुकती यह है तो तुम वर्तमान में
- 51:34ठहर जाओ। और जब तुम वर्तमान में ठहर।
- 51:38जाओगे तो अब वह ध्यान में रखना, किसी भी चीज़ को वह ईंट हो, वह
- 51:46पत्थर हो, वह चट्टान हो। तुम धरती के गुरुत्वाकर्षण।
- 51:52के बीच में बिना सहारे के छोड़ देना।
- 51:57धरती उसे अपनी तरफ खींच। लेगी।
- 51:59बस यही तुम्हारे ऊपर भी लागू होता है।
- 52:03तुम अपने आप। को बिना।
- 52:05सहारे के छोड़ दो उस पत्थर की तरह जो आसमान में।
- 52:11छोड़ा। जाता है बिना सहारे के।
- 52:13उसे पकड़ना मत तो तुम। देखोगे वे धरती पे आ।
- 52:17जाएंगे कौन खींचेगा धरती का ग्रैविटेशनल?
- 52:23फोर्स गुरत्वकृष्ण बन। यही फॉर्मूला तुम्हें अपने।
- 52:30अंत में, ले जाने का अंतिम फॉर्मूला है जब तक तुम।
- 52:39छिपते। रहोगे मैं?
- 52:42कहता हूँ चिपकाहटों को। दूर कर दो चिपकाहटें दो ही हैं।
- 52:48दो कालों से। चबकाहटों को दूर कर दो, एक तो काल
- 52:53जो बीत गया अतीत हो गया, एक काल जो अभी आया नहीं आएगा वह भविष्य
- 53:00इन दोनों कालों से अपने आप को मुक्त कर लो।
- 53:04अलग अलग से किसी चीज़ को छोड़ने की आवश्यकताओं कि तुम।
- 53:10बच्चों का मोह रक से। छोड़ो कि तुम धन का मोह रक से
- 53:13छोड़ो कि तुम गद्दियों का मोह अलग से छोड़ो कि तुम मान प्रशंसा का
- 53:18मानने का मोह अलग से छोड़ो, तुम दो कालों का मोह छोड़ो।
- 53:27दो कालों का मुँह छोड़। दो अतीत काल और भविष्य काल।
- 53:34तो फिर तुम उस पत्थर। की भाँति हो जाओगे।
- 53:40जो 100 किलोमीटर ऊपर। छोड़ा गया।
- 53:44और 100 किलोमीटर कोई। कम दूरी नहीं होती तुम।
- 53:52कितने ही दूर निकल गए। परमात्मा से तुम कितने ही दूर
- 53:55निकल गए परमात्मा से? पत्थर कितनी ही दूर निकल गया धरती
- 54:01से लेकिन। है तो धरती का टुकड़ा बच्चे तो
- 54:08तुम उसी को हो तो तुम उसी के नो। तो 100 किलोमीटर ऊपर पत्थर।
- 54:19को छोड़ दो, लेकिन एक शर्त है क्या?
- 54:22बेसहारा किसी भी सहारे से। बिना चिपका।
- 54:35हट ना हो कोई। कोई लेंटर ना लगाओ नीचे।
- 54:42बिल्कुल उसको अकेला। छोड़ दो, पत्थर को नीचे कोई लेंटर
- 54:46ना हो, सहारा ना हो, कोई अविलंबन ना हो, निरा अविलंब छोड़ दो फिर।
- 54:54पत्थर यह नहीं। पूछता कि अब मैं कौन सी साधना
- 54:57करूँ? मैं राम राम करूँ।
- 55:01कि मैं राधे राधे करूँ या मैं पांच से नाम करूँ या मैं 1000 नाम
- 55:06करूँ या मैं गीता का पाठ करूँ या गुरबन साहब पढूं वे गुरु वे गुरु
- 55:11करूँ, सतनाम सतनाम करूँ ओह गॉड ओह गॉड करूँ सो हम सो हम करूँ क्या
- 55:18करूँ? पत्र पूछता है नहीं?
- 55:22क्या है तरकीब? यह तरकीब को आप हृदय।
- 55:27के अंदरूनी क्षेत्रों में सुना ले, यह तरकीब है नीरवलंब तुम
- 55:35कितनी भी दूर निकल गए हो। वासना की गर्ल्स में आके तुम दूर
- 55:40तो बहुत निकल गए, लेकिन किसी भी। दूर हो।
- 55:44तुम परमात्मा के क्षेत्र में ही रहोगे।
- 55:47इस धरती के क्षेत्र से पार तो जाया जा सकता है, लेकिन समझाने के
- 55:51लिए मैं सिर्फ एक उदाहरण दे रहा हूँ।
- 55:55ये धरती? का क्षेत्र तो दो तीन।
- 55:57100 किलोमीटर के बाद न्यूट्रल हो जाता है।
- 56:00वो तो नहीं खेचेगा लेकिन परमात्मा का क्षेत्र तो वह तो सर्वव्यापक
- 56:09है, वह तो तुम्हे खेच ही लेगा। बस तुम निरवलम्ब होना सीख जाओ।
- 56:16बिना। सहारे के होना।
- 56:18सीख जाओ फिर क्या करें कुछ ना करो कोई भी करना तुम्हारा सहारा है।
- 56:29वह राम राम हो। वह अल्लाह, अल्लाह हो।
- 56:33वह सतनाम सिवाह, वह गॉड हो, वह कोई भी तुम्हारा शास्त्र हो, वह
- 56:43तुम्हारा सहारा है और तुमने? बेसहारा है क्यों?
- 56:49वह। जो है ना खीचने वाला।
- 56:51पृथ्वी का इतना बड़ा चुम्बक। वह है ना परमात्मा?
- 56:58सर्वव्यापक वह तुम्हें अपनी और खींच लेगा।
- 57:05माजरा क्या है? माजरा ये है कि तुम अपने आप को
- 57:10नेरवलम छोड़ते ही नहीं कभी। इसीलिए तुम यहीं यहीं चक्कर।
- 57:16लगाते रहते हो? इसीलिए तुम मरते हो और।
- 57:21जीते हो, जन्म लेते हो फिर मौत आ जाती है, फिर फिर तुम यहीं आ जाते
- 57:27हो। और।
- 57:29तुम्हारा जियरा थक गया है। तुम कहते हो बहुत हो गया थक गया
- 57:33अब मैं थक। गई।
- 57:36अब मैं अब मैं इस सारी। सरकना से मुक्त होना चाहता हूँ
- 57:44चाहती हूँ। लेकिन तुम्हें असली रोग नहीं।
- 57:48पता और असली डॉक्टर भी आज कहाँ है।
- 57:53आज डॉक्टर भी तो देखो कैसे? ऊंट पटा।
- 57:59अभी नामदेव की कहानी। कहने वाले आज इरेक्शन की बातें
- 58:03समझा रहे हैं तुम? सीधी सीधी बात।
- 58:13जैसे मैंने कहा पत्थर। 100 किलोमीटर ऊपर जाकर तुम फिक्र।
- 58:19मत करना। कि धरती में कितना बल है तुम्हे
- 58:23धरती इतने बड़े पत्थर को खेच लेगी बल्कि जल्दी खेच लेगी।
- 58:29तुम उसको बेसहारा छोड़। दो।
- 58:34उसको कोई बल से पकड़ो। मत बल पकड़ना सहारा है।
- 58:39उसका द्रौपदी ने जब तक पकड़ा। पांच पतियों को महाबलि
- 58:51विश्वमपतामा को महागुरु और द्रोण को ताज श्री को धृतराष्ट्र को।
- 59:08विद्रुर को। जब तक पकड़ा नीरा।
- 59:14बलंब नहीं हुई। उसने उस पत्थर को।
- 59:19सहारा दिये ही रखा वो पत्थर है तुम्हारे अहंकार का।
- 59:27और तुम सदा चिल्लाते रहते हो। बाबा?
- 59:29ये भीतर कैसे जाए? तुम उस पत्थर की तरह हो जो अपनी
- 59:37गर्भस्थों को छोड़ता। नहीं और प्रश्न सदा ही पूछे रहता
- 59:41है बाबा अब मैं धरती पे कैसे उतरूंगा?
- 59:48बस। ये सहारों को छोड़ दो।
- 59:51जिसने उस पत्थर को थामे रखा है, उन सहारों को हटा लो, फिर पूछने
- 59:57की जरूरत नहीं होगी, तुम दम से नीचे करोगे।
- 1:00:04मैं क्यों कहता हूँ भार। से सारी चेतना की।
- 1:00:09छः पकाहटों को हटा लो, काट लो जब वो कट जाएँगी तो तुम।
- 1:00:18एक स्थान पे आ जाओगे। नहीं, तुम तो कहते हो, हमने तो
- 1:00:22पांच नाम करके कॉन्सन्ट्रेशन करना है।
- 1:00:24अरे भाई ये पांच नाम कॉन्सेंट्रेशन में करते तुम हैं
- 1:00:30पलक झपकते हो तो भी शक्ति लगती है नाम।
- 1:00:35जपते हो तो भी शक्ति। लगती है तो नाम जपने से तुम
- 1:00:40शक्तिहीनता की तरफ़ जाते हो। जीतने घंटे नाम जब्बा या 1 मिनट
- 1:00:45भी जब्बा तो उतनी शक्ति तो कम हो गई ना?
- 1:00:50पलक झपकने में। भी शक्ति लगती है तुम एनर्जी
- 1:00:54लेस्सनेस में आते हो, थोड़ी सी एनर्जी तो गड्डी लेकिन तुम?
- 1:01:00एनर्जीफुलनेस में ही भीतर जा सकते हो।
- 1:01:06मुर्दा व्यक्ति कभी नहीं अपने भीतर।
- 1:01:08उतर सकता क्यों? क्योंकि एनर्जी रेसनेस होता है।
- 1:01:14तुम धीरे धीरे। अपनी शक्ति को नाम जपने में गंवा
- 1:01:19दोगे? एनर्जीलेसनेस हो जाओगे फुल
- 1:01:22एनर्जीलेसनेस हो जाओगे और करीब करीब मुर्दा हो जाओगे या मुर्छित
- 1:01:26हो जाओ ना तो। मुर्दा जा सकता है ना?
- 1:01:30मुर्छित जा सकता है क्योंकि ना तो मुर्छित अपने अवलंबों को छोड़ता
- 1:01:36है ना ही मुर्दा अपने अवलंबों को छोड़ता है।
- 1:01:41तुम सोये पड़े होते हो? क्या तुम निरावलंब होते हो?
- 1:01:45नहीं अविलंबन तुम्हारे 700 जाते हैं तुम सो गए तुम्हारे अविलंबन
- 1:01:52भी सो गए तुम्हारे सहारे भी सो गए तुम जग गए तुम्हारे सहारे भी जग
- 1:01:57गए। सहारा तुम्हारे संग संग छाया की
- 1:02:00तरह चलता है सहारा जहाँ तुम जाते हो वहाँ तुम्हारी छाया भी जाती है
- 1:02:16सहारा। तुम्हारे पीछा कभी छोड़ता है।
- 1:02:22तो यह मत पूछो मेरे। से।
- 1:02:25बहुत से। प्रश्नों के जवाब।
- 1:02:27आज मैंने दे दिया। बाबा भीतर कैसे जाए?
- 1:02:36मेरा अवरम्ब हो जाओ। भीतर जाने की कोई जरूरत नहीं है।
- 1:02:41भीतर तो वह इतना बड़ा विशाल चुम्बक बैठा है जिससे।
- 1:02:46बड़ा विशाल चुम्बक। कोई है ही नहीं।
- 1:02:49बड़ा क्या उसके बराबर भी कोई विशाल चुम्बक नहीं है क्योंकि
- 1:02:53उसका कोई। हानि नहीं है।
- 1:03:00उसका कोई? दुश्मन नहीं है उसका कोई?
- 1:03:08शरीक नहीं। है जो उससे ऐसा माँ है।
- 1:03:13शरीक नहीं है कोई? वह बस अकेला है।
- 1:03:23उससे कोई व्यक्ति अपना हिस्सा। नहीं मान सकता कि मेरा हिस्सा तो
- 1:03:26नहीं उसका कोई शरीक नहीं। वह बस एक है इसलिए वह बनान ने कहा
- 1:03:33एक एक ओंकार वह ओंकार ही है। उसका शरीर कोई नहीं है।
- 1:03:43तो अभी मेरी ही। एक वीडियो को।
- 1:03:49आवाज दे रहे थे मेरे। ही एक शिष्य पता नहीं किसी और के
- 1:03:53भी शिष्य हैं कि नहीं और उन्होंने शब्दों को तोड़ दिया।
- 1:03:59नहीं, नहीं, तुम ऐसा काम मत किया करो।
- 1:04:02ये सभी धर्मों को जोड़ने वाले व्यक्ति घोर मस्तिष्कवादी होते
- 1:04:09हैं। बुद्धि जोड़ती है इस हिसाब से कि
- 1:04:12सब को इकट्ठा कर ले लेकिन तुम्हारे ये इकट्ठा करना बड़ा
- 1:04:17घातक है। अध्यात्म के मार्ग पर यहाँ इकट्ठा
- 1:04:24नहीं करना यहाँ तो सबको छोड़ देना है सबको अपनी अपनी मर्जी में।
- 1:04:29यहाँ सभी को स्वतंत्र कर दो। राजनीतिक तुम्हें भविष्य।
- 1:04:43के सपने दिखाए का दो। 1000 सैंतालीसवें विकसित भारत बन
- 1:04:47जाएगा। विकसित भारत।
- 1:04:53चाहत? तो हमारी भी ही है।
- 1:04:55आज ही बन जाए। तुम 2047 में बना रहे हो शुभ वचन
- 1:05:01है, लेकिन बनेगा नहीं क्यों तुम जैसे महानुभावगतियों पर बैठना।
- 1:05:10और उनके सलाहकार अजीत। डोभाल जैसे और उनके रेसलर।
- 1:05:20जिनको चण क्या कहते हैं वो बैठी है अभी दो।
- 1:05:271047। और फिर परमात्मा सबसे बड़ा।
- 1:05:32दुश्मन तुम्हारा पता नहीं। उजाले अपनी यादों के।
- 1:05:38हमारे साथ रहने दो उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न
- 1:05:46जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए अरे 2047 पागल हुए हो?
- 1:05:57अगला वक्त आएगा नहीं आएगा, कौन जानता है, शुभ है, कभी तो होगा
- 1:06:11लेकिन। 2047 को आ।
- 1:06:16जायेगा। क्यों?
- 1:06:18क्योंकि तुमने 2014 में कहा था अच्छे दिन आ जाएंगे?
- 1:06:23नहीं आए आँखें, पक गई सूज गई आँखें, लाल आँखें जो चीन को
- 1:06:31दिखानी थी, खुद की ही कर बैठी। इंतजार करते करते।
- 1:06:38खुद की आँखें लाल हो। तो राजनीतिक तुम्हें।
- 1:06:47भविष्य के सपने सजायेगा अतीत से दर्द खायेगा वो बाबर ने ऐसे किया
- 1:06:54था लूट लिया। अरे भाई आज वो हिंदुस्तान थोड़ी।
- 1:07:00हिंदुस्तान की सामर्थ्य। से तो इंदिरा गाँधी ने दखला दी थी
- 1:07:04पाकिस्तान के दो टुकड़े कर के अभी तुम्हें शक है क्या?
- 1:07:09अभी तुम बाबर के फिकर क्यों दिखाते हो हमें?
- 1:07:13अभी तुम बाबर का डर हमें क्यों सिखाते हो?
- 1:07:15वो तो इंदिरा गाँधी ने कब खत्म कर दिया?
- 1:07:1871 में ही खत्म कर दिया था कोई तुम एक मुसलमान गजनवी की बात करते
- 1:07:24हो? एक डाकू लुटेरे की बात।
- 1:07:29करते हो? उन्हें तो 1,00,000 के करीब बंदी
- 1:07:32बना लिए थे। कब तक तुम डर दिखाओगे?
- 1:07:36एक एक व्यक्ति का डर दिखा के दुनिया को मरोगे क्या?
- 1:07:421,00,000 कैदी कर लिया। उस शेरनी ने।
- 1:07:47और तुम एक व्यक्ति का। डर?
- 1:07:50दिखाते हो कहीं? ऐसा तो नहीं है कि तुम कायर हो
- 1:07:56ऐसा ही है। तुम अपनी बहदरी दिखा सकते।
- 1:08:03हो मुझे मार के। लेकिन हिंदुस्तान को?
- 1:08:10हिंदुस्तान को हिंदुस्तान को विकसित करके अपनी बहादुरी नहीं
- 1:08:17दिखा सकते। मिस्टर नरेंद्र मोदी मिस्टर अमित
- 1:08:22शाह मिस्टर अजीत अड्डोखाल क्या और तुम्हारी सारी प्रेग्नेंट ज़ोर
- 1:08:27अल्लाह काली क्यों? क्योंकि रस्ता गलत है।
- 1:08:33रस्ता? गलत है जैसे मैं जानता।
- 1:08:35हूँ अपने भीतर उतरने के लिए अगर पत्थर को तुमने अविलंबन कर दिया
- 1:08:41तो पत्थर नीचे नहीं जाएगा, मैं इस नियम को जानता हूँ और मैं
- 1:08:46तुम्हारे नियम को भी जानता हूँ कि तुम।
- 1:08:50जीस तरह से हिंदुस्तान को चला रहे हो।
- 1:08:54दट। इस नॉट दी राइट।
- 1:08:56पाथ। वह सही रास्ता नहीं।
- 1:09:05ना विश्व गुरु। बनने का ना?
- 1:09:07विकसित बनने का। स्वप्नेल सपने सजाए रहो तुम धरातल
- 1:09:14पर आओ साहेब, धरातल पर आओ। लोगों को मूर्ख बनाना छोड़।
- 1:09:22दो लोग बड़ी आशा लगाए बैठे। 11 साल कोई काम नहीं होते और फिर
- 1:09:31तुम्हें भी तो भरोसा नहीं है और लोगों को भरोसा नहीं है।
- 1:09:35किसी को क्या भरोसा है? कोई भरोसा नहीं है, क्योंकि भरोसा
- 1:09:39जीसको है, जिसके हाथ में है वह तुम्हारे हाथ में नहीं है।
- 1:09:45भरोसा परमात्मा के हाथ में है और भगवान तुम्हारे हाथ में नहीं है,
- 1:09:51इसलिए। तुम जल्ला के कहते।
- 1:09:53थे। वो है ही नहीं।
- 1:09:56फिर क्या होगा कबीर का? जो कबीर कहते।
- 1:10:00हैं मैं इस टाइम पर। लगाता हूँ मैं कहता हूँ कौन
- 1:10:02देखें। तुम कहते कागज के लिखे।
- 1:10:08फिर क्या होगा जिन्होंने देखा? अपनी आँखों से।
- 1:10:15क्या उनको ऐनेस्थीसिया लगा? दिया गया था क्या?
- 1:10:20उनको मिर्गी के दौरे पड़ते। थे।
- 1:10:26एक व्यक्ति अपनी बात। को सत्य सिद्ध करने के लिए कितनी
- 1:10:30कितनी जुगाड़ बना देता है। आँखें तुम्हारे पास।
- 1:10:35नहीं है, फूल होते नहीं, यह तुम मनमाने की कोशिश करते हो।
- 1:10:48आँखें तुम्हारे पास नहीं हैं। रंग होते नहीं यह तुम मनवाने की
- 1:10:53कोशिश करते हो कब तक चलेगा? बिल्कुल चलेगा तुम्हारे लिए
- 1:10:57चलेगा, लेकिन हमारे लिए थोड़ी चलेगा।
- 1:10:59हमारी तो आँखें हैं। तो कहा कि तुम कैसे।
- 1:11:06पहुँच गए। हम ऐसे पहुँच गए।
- 1:11:09हमने अतीत को भी झटक दिया। हमने भविष्य को भी झटक।
- 1:11:15दिया अतीत। को झटक।
- 1:11:19दिया। बीती ता ही बिसार दे और भविष्य को
- 1:11:24भी झटक दिया। औरों के घर के झगड़े, ना हक न
- 1:11:28छेड़ दूं तुझको भगा नहीं क्या अपनी अपनी अतीत को भी हमने झटका,
- 1:11:35भविष्य को भी हमने झटका तो हम क्या आये वर्तमान में?
- 1:11:41और जब हम वर्तमान में। आये तो हमारे सब फिकर मिट गए
- 1:11:45क्यों? जो वर्तमान में आया?
- 1:11:50वह पकड़ से रहित हो। गया ऑटोमैटिकली जो वर्तमान में।
- 1:11:59आया? वह पकड़ से मुक्त हो।
- 1:12:03गया। जब तुम ठहरे तो पकड़ से मुक्त हो
- 1:12:08गए। उस घड़ी तुम भीतर उतरते चले
- 1:12:10जाओगे। लेकिन काश।
- 1:12:17तुमने वो वर्तमान का? एक क्षण पकड़ लिया होगा।
- 1:12:23कितनी अजीब बात है कि तुम आज तक इतनी मेहनत करके भी।
- 1:12:31वर्तमान का वो छोटा सा। क्षण पकड़ नहीं पाया।
- 1:12:36इसका प्रमाण है कि। तुम बार बार जन्म लेते हो और मर
- 1:12:40जाते हो। यह प्रमाण यह सिद्ध करता है कि
- 1:12:46तुम उस वर्तमान का थोड़ा सा क्षण कभी पकड़ नहीं पाए, इसलिए तुम आज
- 1:12:53बैठे। जीस दिन तुमने वर्तमान का।
- 1:12:56वो महिन सा क्षण पकड़ लिया तुरंत। तुम पाओगे के।
- 1:13:03पत्थर पे से सारी पकड़ छूट गई और पत्थर धम से आके धरती पे।
- 1:13:14इक। राजा के राज़ दुलार इक राजा के।
- 1:13:31राहज दुलार बन बन फिरते महारे माँ इकराहजाके राजदुलार।
- 1:13:52बन बन फिरते मारे मान हो कर्मगति। तरई न?
- 1:14:14कबू के टाइम होनी। हो?
- 1:14:21कर रहे कर्मगति तरई न का हो? के तार सबके काष्ठ मिटाने वाले।
- 1:14:46सबके। काष्ठ।
- 1:14:50मिटाने वाले कष्ट उठाते हैं। सबके।
- 1:15:05कष्ट मिटाने वाले। कष्ट उठाते हैं।
- 1:15:24को जाते हैं। हो बिग न तेरे।
- 1:15:37लेख। किसी के समझ न आते हैं।
- 1:15:54धन्यवाद।