Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Aug 25 - बाबा, अपनी साधना का रास्ता बताइये! परमात्मा तक कैसे पहुँचे? बाबाजी के जन्मदिन पर विशेष!
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- 0:02निरूपम ग्वालियर से बाबा आप कहते हैं कि आपका ये ग्रंथ सम्पूर्णता
- 0:22की ओर जा रहा है। मैं आपको रोज़ सुनता हूँ करोनाकाल
- 0:35में पहली वीडियो से लेके आए तलक मैं पूरी वीडियो सुन रहा हूँ क्या
- 0:46आप मेरे एक प्रश्न का जवाब देना उचित समझेंगे?
- 0:53पूछिए पत्र आप इतना क्यों बोलें? जबकि वह बोला नहीं जा सकता?
- 1:11आप नहीं कहते हो फिर भी इतना क्यों बोलें?
- 1:29मैं जानता हूँ वह बोला नहीं गया, अभी भी बोला नहीं गया लेकिन फिर
- 1:39भी बोला। नादानगी में बोला, नादानगी में
- 1:58बोला मूर्खता वश बोला, जानते हुए भी ये नहीं बोला जाएगा और आज अपने
- 2:10आप को। थका थका सा हरा हरा सा महसूस कर
- 2:19रहा है जो बोलना चला था मैं। वो आज भी शेष सारा का सारा अधूरा
- 2:35है। उसमें से कुछ भी नहीं बोला था ना
- 2:47दाँ हैं जो कहते हैं क्यों जीते हो गालिब ना दाँ हैं जो कहते हैं।
- 2:56क्यों जीते हो गाली, किसमें किस्मत में हैं मरने की तमन्ना
- 3:04किसी दिन और किस्मत में हैं। मरने की तमन्ना किसी दिन और।
- 3:17वाफा आपने इतना क्यों बोला? मैं जिन राहों पे चला वो राहों पर
- 3:32चलकर जो नतीजा निकला और वहाँ आनंद था।
- 3:42महासुख था, महासुगंध थी, पोलक थी, नृत्य था, संगीत था, ऐसा मदहोशी
- 3:57का आलम था। बयां नहीं किया जा सकता।
- 4:11मेरा खुद का ज़िन्दगी का सफर ऐसा रहा और देखिए इस ज़िन्दगी के सफर
- 4:24में। इस अंजाम तक पहुंचने के लिए मैंने
- 4:29कुछ नहीं किया। कोई तप तपश्यर कुछ भी नहीं किया,
- 4:39कोई जा प्रताप पाठ, पूजा नियम, नृत्य कुछ नहीं किया।
- 4:46नहीं नहीं, मेरा योगदान नगर में जीस राह से गुजरा वही स्वर्ग का
- 5:00जंक रहा, जीस राह से गुजरा वही स्वर्ग का निकला।
- 5:11आज पता चला जब चल रहा था तो मालूम नहीं था, जीस रास्ते पे जा रहा
- 5:20हूँ वो ठीक भी है कि नहीं? लेकिन कोई दुविधा नहीं है, कोई
- 5:30नहीं है। बस चला उस विराट के हाथों में
- 5:38अपने जीवन की नैया के पतवार से और चलता ही चला गया।
- 5:49चलता ही चला गया और फिर जब मिली मंजिल बड़ी शान्ता, क्या जिक्र पे
- 6:05हूँ तुम? क्या बतलाऊ तुम्हे और फिर
- 6:13तुम्हारे कमेंट्स है? बाबा बड़ा दुख है, बड़ा कष्ट है,
- 6:22क्लेश है, तूफानों से घर गए हैं। वे पत्तियों से संकटों से घरे हुए
- 6:29हैं। अब अवग्रस्त मेरी आँखें भी
- 6:37छलछलाईं मेरा हृदय है व्यक्षित। बाबा का आदेश और आपकी करुण पुकार,
- 6:59आपकी करुण कहानी मैं सुन ना सका हृदय पर सीख गया बाबा का हुक्म।
- 7:11तुम बोलो बोलो यद्यपि बोलने की इच्छा तो नहीं है, किसकी इच्छा
- 7:22होती है वहाँ जाकर बोल। ये तुम लक्षण की तरह ले लेना अभी
- 7:36तो तुम दीवारों से बदला रहे हो बतिया रही हो, फिर तुम्हें 10 बार
- 7:44कोई पूछेगा। तो कोशिश करवे कि हाँ और मुँह में
- 7:51बात निपट जाए। कौन उस रस के आरंभ को गंवाना
- 8:02चाहेगा? इक्वल के लिए?
- 8:07जन्मो। जन्मो के दुखों के मारे, इसलिए
- 8:13मानस के जाम में कितनी महत्ता है? सैकड़ों सैकड़ों हजारों हजारों
- 8:21जन्मो में त्रस्त मानव का अर्थ है।
- 8:27क्या मानस के जनम में पहुंचता है तो एक आशा मधती है और बाबा के यह
- 8:34शब्द बड़े शार्थक लगे बड़े बाद में मैंने कर्मी आवे कपड़ा नदरी
- 8:42मुक्त। हमारे कुछ करने से नहीं होगा
- 8:48तुम्हारे कुछ करने से होगा तुम कुछ कर रहे हो तो करते हो, लेकिन
- 9:03परिणाम में पाओगे शून्य। वो ही है चाल बेढंगी जो पहले थी
- 9:13वो अब भी है। दुख, रोग, कष्ट, क्लेश तुम्हारे
- 9:20संग ही चलेंगे, दुविधा बनी ही रहेंगी।
- 9:24संख्या बना ही रहेगा और इस सेंसेना कितनों की बली रहेंगी?
- 9:33मैं बोलता क्यों हूँ? उसके हुक्म मैं बोलता हूँ।
- 9:47और आग की पीड़ाएँ आँख के कमेंट बाबा दुखी ये मन तंग करता है,
- 9:56वासनाय तंग करते हैं, संसार निरस लगता है।
- 10:02जीने का मन नहीं करता। प्रत्येक व्यक्ति को कोई न कोई
- 10:12दगता है। प्रत्येक व्यक्ति को कोई न कोई
- 10:18अभाव। बड़े से बड़ा धनी व्यक्ति धनी से
- 10:27धनी व्यक्ति भी मेरे पास आए। जिनके पास सब कुछ है वो कहते पता
- 10:36नहीं कुछ रह गया है। सब का लिया, लेकिन कुछ अनपया रह
- 10:42गया। सभी प्रकार के लोग आये, राजनेता
- 10:48भी आये, रिटायर्ड जज भी आये, सुप्रीम कोर्ट के जज भी आये।
- 10:59बड़े बड़े औधों से औधों के दौरान भी आये रिटायरमेंट के बाद फिर
- 11:05राजनीतिक लोग भी आये। जन साधारण भी आया।
- 11:12सबका प्रश्न एक था, कुछ चूक रहा। परंतु ये नहीं पता कि क्या चूक
- 11:21रहा है। मुझे तो नहीं पता और ध्यान रखो।
- 11:26जो खुद मरीज रहा हो वह दूसरे मरीज की तकलीफ को बखूबी समझता है।
- 11:35और मैं भी किसी दिन इसी कगार पे बिलकुल यही संकट मेरे ऊपर भी है,
- 11:42इसलिए मैं तुम्हारे दुख को अच्छी तरह से समझता हूँ।
- 11:49जा के पैर। नो फटी विहाई सो क्या जानें फिर
- 12:09फरार? जा के पहला पति विवाह सो क्या
- 12:29क्या? मेरे पैर में भी बवाइयां कटी थीं
- 12:44और रातों की उन तकलीफों को दर्दों को मैंने झेला है।
- 12:49दुःख और दृढ़ता के तूफ़ान मैंने जले उन तकलीफों के तूफ़ान में मैं
- 13:02डगमगाया और ये सब मेरे लिए एक अनुभव की भभौती बन गया।
- 13:18और फिर वह दिन भी आया। सौभाग्यशाली दिन जीस दिन।
- 13:22सभी समस्याओं का निराकरण भी हुआ। स्वयं का ज्ञान भी हुआ।
- 13:33और स्वयं का फैलाव भी देखा और कुछ ही पलों में सारा दुःख यात्रा
- 13:50धीरे धीरे कर जाती रहे और भाग जाते रहे।
- 13:58कष्ट, क्लेश, पीड़ा सब जाती रहे रोग, शोक सब विदा हो गए।
- 14:04काफी हो गए। इन्हीं रोगों से तुम ग्रस्त था
- 14:14यही कुछ आपकी भी। समस्याएं और मैं आपकी समस्याओं को
- 14:22भलीभाँति समझता हूँ। मैं वो रोगी हूँ जिसने तुम्हारे
- 14:30रोग की पीड़ा को झेला है। उस परम का आदेश और आपकी व्यथा
- 14:46दोनों भिड़ गए। फिर मैं बोला नहीं फिर मेरी
- 14:56आत्मा। मेरे भीतर से वो बोला जिसने मुझे
- 15:02आदेश दिया था बोलने का, मैं नहीं बोला, वह बोला और चुप भी होगा तो
- 15:12मैं नहीं होऊंगा, वह होगा। निश्चित ही अब इस ग्रंथ का आखिरी
- 15:27पन्ना लिखा जा रहा है। इससे तुम्हें कुछ मिल जाएगा तो यह
- 15:42मेरा सौभाग्य नहीं है क्योंकि इसमें मैंने कुछ नहीं किया।
- 15:48यह परम की इच्छा है कि इसमें से तुम कुछ राशि निकाल सको।
- 15:59मैं बीच में से हट जाऊंगा, गरंथ पूरा होते ही मैं बीच में से निकल
- 16:05जाऊंगा, फिर आमने सामने तम और तुम्हारा कर्म होगा, आमने सामने
- 16:13तम और तुम्हारा मालिक होगा। मेरा कोई रोल है भी नहीं।
- 16:22जैसे यंत्र यंत्र का रोल तभी तक होता है जब तक उस यंत्र के द्वारा
- 16:33कुछ निर्वहन करना होता है। जब उसका काम समाप्त हो गया तो
- 16:40उसकी जरूरतें भी खत्म हो गयी। इसलिए मैंने तुमसे कहा बात बात
- 16:48कहा तुम समझे नहीं समझे यह मुझे नहीं मालूम।
- 17:02तुमने जैसा क्वेश्चन किया विराट से वैसा ही उत्तर उतरा है उसमें
- 17:12मेरा कुछ होता है, मैं ये चाहता था।
- 17:23कि वो ही तो दर्द है, वो ही तो दुख है, वो ही तो रोग पीड़ा का
- 17:27संतप है, वो ही तो आग है जो मुझे गहरे फिर क्यों ना आपको वो मार्ग
- 17:40बता दिया जाए? जीस मार्ग से चलकर मेरी पीड़ा
- 17:46मोकी। दुख और रोगों का नष्ट हुआ।
- 17:54तड़पते मन को वट वृक्ष की छाया मिली।
- 18:00राहगीर ने विश्राम दिया। भरी दुपहरी की आग से।
- 18:06ठंडी हवाओं में सुकून मिला और वो तो हमारी बड़ी मस्त करने वाली है।
- 18:16इमानदारी से कहूँ और इमानदारी से ही कहता हूँ तो मेरा एक एक लफ्ज़।
- 18:27किसी निहंत स्वार्थ से नहीं निकला।
- 18:32तुम्हारी पीड़ा के कारण निकला और विराट के आदेश के कारण निकला।
- 18:38ये दो ही कारण है। मैं माध्यम था।
- 18:46मैंने ये दुख झेले तब मैं था जब दुख झेल रहा था तब मैं था और जब
- 18:58मैं बांस से पोगरी बन गया। वह चौथा वंश तो उस विराट के लब इस
- 19:14प्रोगरी पे लगे और उसने अपना गीत गुण गुना है ये सारे ग्रंथ का
- 19:20इतिहास। दो शब्दों में आपको बता रहा हूँ।
- 19:25मैं बांस की पोकरी बना और उसने अपने लव से लगा दिया।
- 19:34फिर उसने गीत गाया, जो गाया वह मैंने प्रतिद्वंद्वित किया।
- 19:42और मैंने कुछ नहीं किया। आपकी तकलीफें, आपके कष्ट, आपके
- 19:53कलश रोग और संताप पीढ़ायें किन किन व्याधियों से तुम ग्रस्त हो?
- 20:03बिल्कुल ही ऐसी व्याधियों से मैं ग्रस्त हूँ?
- 20:07पर शायद तुमसे भी एक तो ज्यादा लेकिन पता चला की व्याधियाँ अनेक
- 20:18थी उपचार एक था। ये बड़े मज़े की बात है।
- 20:29व्याधियां, अनेकता, रोग, शोक, कष्ट, क्लेश, पीड़ा, दुख, दर्द,
- 20:36अहंकार यह कष्ट, क्लेश। व्याधिया अनेक सिंह उपचार एक था
- 20:54पर मुझे यह पता नहीं था आपके ही तरह मैं था मुझे नहीं पता कि
- 21:04उपचार एक होता है। लेकिन जब पता चला कि उपचार तो एक
- 21:09है। एक उपचार के आने से सभी पीड़ाएं
- 21:15होती हैं तो कबीर का ये शब्द समझाया एक साधा सब सदा।
- 21:30विराट को जानने वाले विराट में लीन होने वाले अपने शब्दों से कुछ
- 21:37बयां कर जाते हैं जो आने वाले व्यक्तियों को मार्गदर्शन की तरह।
- 21:48राह को सही है ये बताने में मदद करते हैं।
- 21:54वैसे अगर ना भी बताएं तो भी आपका आनंद आपको बता दूंगा।
- 22:02खत्म हुई कहानी क्योंकि जब पीड़ा खत्म हो।
- 22:07जलती हुई आग खत्म, कष्ट, क्लेश खत्म हुए दुख का, दरिद्र का
- 22:12तुम्हें रोग शोक खत्म हो गया तुम कष्ट मुक्त हुए तुम अभाव मुक्त
- 22:25हुए तुम शहनशाही आलम हो गया। तुम्हारी दृद्रता मित्र समझ आया
- 22:39फोक क्या है, रस क्या है, समझ आया फोक क्या है, रस क्या है?
- 22:49बस ये दोनों का ही फर्क अध्यात्म कहलाता है।
- 22:56जब तुम अंत में आओगे इस यात्रा के अंतिम पड़ाव पे तुम पाओगे फौक
- 23:04क्या और लक्ष्य क्या है? पाओगे क्या रस पाओगे पाओगे, एक रस
- 23:14पाओगे और रस को पाने से पता चल जाएगा की फौक क्या था वह जिसे
- 23:22मैंने रस समझा मृगमारी जी की? का?
- 23:26वह फोक था, वह था ही नहीं। कल्पना थी और कल्पना सत्य नहीं
- 23:37कल्पना और वो स्वप्न टूट जाया करते हैं, किसी का सपना सीख रहा
- 23:46है। जगते ही सपना टूट जा सकता है।
- 23:59तुम्हारे रोज़ कमेंट आ रहे हैं 5 साल के करीब और मैं आप सबका आभार
- 24:09हूँ। आभारी इसलिए हूँ।
- 24:15क्या अपने इतने प्रेम से इतनी शांति से इतने आनंद से इतना रस
- 24:21पान करते हुए ये दिन जैसे गुजारी ये तियों की तरह दिन गुजर गए?
- 24:34हमारी सावन की तीजें होती हैं पैदियां डालते हैं हम पींगें
- 24:39डालते हैं, हम नए नए वस्त्र पहनते हैं, हम त्यौहार की तरह मनाते हैं
- 24:44तीजों को तीजों की तरह गुजरे ये 5 साल ज़रा भी तो पता नहीं चला।
- 24:52बस लगा कि अभी अभी तो आए, लेकिन अध्याय समाप्त भी हुआ परंतु इस
- 25:10अध्याय से कुछ सीख लेना यहाँ फंस जाओ।
- 25:18इससे मार्गदर्शन ले लेना। मैंने सब बोल दिया है सब बोल दिया
- 25:25है के अर्थ जो तुम्हारा शोक, कष्ट, क्लेश, दुख, दृद, रोग,
- 25:34संताप, अभाव, पीड़ा। समाप्त करने में सामर्थ्य रखता है
- 25:45अगर तुम इसको जीवन के प्रैक्टिकल में उतार थौथी बातों में मत ले
- 25:55जाना। थोथी बातों में उलझोगे तो विद्वान
- 25:59बन जाओगे, पढ़ लिया, सुन लिया और पढ़ सुन के उसे छोड़ दिया और फिर
- 26:18यात्रा शुरू की। जो यात्रा शुरू करेगा वह 1 दिन
- 26:27मकान हासिल कर लेगा। मुकाम बड़ा प्यार है देखिए।
- 26:40मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूब होते हैं।
- 26:46मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूब होते हैं।
- 26:52ये वो नगमा है जो हर सच में गाय नहीं।
- 27:02मेरी चाहत है कि सारी सृष्टि इस आनंद को इस आनंद का लाभ उठाए,
- 27:09क्योंकि यह सृष्टि आनंद से होता है।
- 27:15कोई भी तो कमी नहीं। तो ठीक कहा था कभी उसने सीढ़ी चोच
- 27:20भर ले गई नदी ना कट जौ दी है, बिखरा पड़ा है आलम में बिखरा पड़ा
- 27:31है चोच तुम भी भर लो। भर सकते हो।
- 27:40फिर चूके क्यों? काहे देरी की वैसे भी तो संसार
- 27:49में दुख और तूफान और कष्ट और क्लेश और रोग और पीड़ा, संताप और
- 27:54चिंता के अलावा कुछ नहीं मिला। तब देखते क्या मैं बोला इसीलिए
- 28:03बोला आपके जैसा ही मैं भी था, बिल्कुल तुमसे जुदा नहीं तुमसे
- 28:17थोड़ा ज्यादा ही दुखियों। लेकिन आज आज ना कहीं जाने का मन
- 28:27है, ना जीने का मन है और ना मरने का मन है ना कुछ खाने और भोगने का
- 28:36मन है। ना कुछ देखने और सुनने का मन है
- 28:42क्यों? क्योंकि वो मिल गया जिसके मिलने
- 28:46से चाहते बैठ जाते हैं वो एक के मिलने से।
- 28:56सभी चाहतें मिट जाती हैं और एक एक न मिला तो सारी चाहतें बरकरार
- 29:07रहती हैं। तीन चीजों को याद रखें।
- 29:20जो तुम्हारे पहुंचने में बाधा बनती है।
- 29:25तुम जानकर हैरान हो गए तुमने कभी ख्याल ही नहीं किया होगा।
- 29:35सबसे बड़ी बाधा है इतिहास, चौंकना मत।
- 29:47इतिहास को न पढ़ें इतिहास के बारे में कोई प्रश्न इतिहास का कोई
- 29:56उत्तर जानने की चेष्टा मत करना, इतिहास को अलविदा कह देना।
- 30:18पहली बात भूल ही जाना किस धरती पे पहले कोई आया उसने कुछ किया उसने
- 30:35कुछ बोला। ये सबसे बड़ा शत्रु है आपका पहले
- 30:44इन शब्दों को ध्यान से संतुलित बस ये शब्द काफी सबसे बड़ी बात है
- 30:55इतिहास। हिस्टरी, अगर तुमने हिस्टरी की
- 31:04किताबों को गलती से खोल भी लिया, तुम ना पांव से पाओगे।
- 31:15और इतिहास क्योंकि मुर्दा की बातें इसके संग संग तुम अतीत को
- 31:25भी तालांजलि दे देना तुम मत चेष्टा करना कि पिछले जन्म में
- 31:31मैं कौन? कोई भी रहे, ऐसे ही कष्ट तूफान
- 31:42झेलें होंगे। तुम कुछ भी रहे।
- 31:49मानस थे कुत्ते, बिल्ले थे गधे घोड़े थे कोई फर्क नहीं पड़ता जो
- 31:53थे ठीक है इतिहास को भूल जाना और अतीत को भूल जाना।
- 32:01अब ये दो बातें अपने अंदर भूल कर भी इतिहास को खंगाल मत लेना।
- 32:11बड़ी से बड़ी बात है, मैं आपको उस स्तर पर पहुंचने के बड़े आसान
- 32:23रस्ते बता रहा हूँ। जीस तरह रास्ते से गुजर गए, मैं
- 32:34उसे चरम मुकाम पर पहुंचा। बिल्कुल वही रास्ता बता रहा हूँ।
- 32:38मैं ज़रा भी इधर उतर ले। और भविष्य की कल्पना ना करना,
- 32:58भविष्य की कामना ना करना कोई सपना ना संझोना यह तुम्हें कॉम्पिटिशन
- 33:08में धकेल लगा। और तुम जो हो, इन शब्दों को हृदय
- 33:21में उतार लेना, हृदय की डायरी में इन्हें लिख लेना, बाहर की डायरी
- 33:28में ना लिखना, हृदय की डायरी में लिख लेना।
- 33:41कल्पना भविष्य के सपने सब छोड़ दे भूल जा अतीत को छोड़ दिया।
- 34:03अतीत के संघ संग इतिहास को छोड़ देना, भविष्य को छोड़ देना,
- 34:15भविष्य के संघ संग भविष्य में भविष्य की कल्पनाओं को छेड़ना
- 34:19छोड़ देना। भविष्य के जो सपने तुमने सजाये,
- 34:38उनका खाका तैयार न करें, ऐसा ऐसा करेंगे, ऐसा ऐसा करेंगे।
- 34:51हमने कोई जंग नहीं जीतना है। सेना खा खा बनाती है ये सेना का
- 34:59काम तुम्हारा काम शब्द वक्त का काम यह है जो मैं बता रहा हूँ।
- 35:21कोई भविष्य की कल्पना या मैप या कोई तजवीज़ मत रचना।
- 35:33इतिहास को छोड़ देना, भविष्य की कल्पनाओं को कांटा मर देना भूल जा
- 35:48और आने वाला कल उसको भी भूल जा। कोई नक्शा तैयार नको, कोई मैप
- 35:55तैयार न कर कोई टाइमटेबल मत बना, ध्यान रखना ये बातें किसी ने बताई
- 36:07नहीं होंगी शायद। और मैं तुम्हें वो ही बताता हूँ
- 36:15जैसे मैं पहुंचा, मैं पहुंचा और इस आनंद तक पहुंचा और परमकुमारी
- 36:26तक पहुंचा और आज मैं वहाँ हूँ। ना जहाँ खुद हूँ बस, खुमारी ना
- 36:43खुद हूँ ना खुदा हूँ एक खुमार का बहता हुआ दरिया।
- 36:56और ऐसा दरिया जो कभी चौखतान और दर्रे दर्रे में न कभी आया न कभी
- 37:08जाऊंगा। में ऐसा इतिहास को छोड़ देना,
- 37:20भविष्य की सभी कल्पनाओं को नष्ट कर देना अगर कोई प्लान नहीं की हो
- 37:29भविष्य के लिए। ध्यान रखना, मैं उस आनंद तक जाने
- 37:34की बात कर रहा हूँ। तुमने कुछ डिग्री हासिल करनी
- 37:40तुमने कुछ बना ना तुमने कुछ बना ना तो ये सब करना, फिर इतिहास भी
- 37:49खंगाल। फिर भविष्य की कल्पनाओं के मैप भी
- 37:53तैयार करना, योजनाएं भी बनाना। लेकिन मैं ये बात कर रहा हूँ मैं
- 38:00इस आनंद तक कैसे पहुंचा? और वैसे भी अगर तुम बड़े से बड़ा
- 38:07ओहदा भी ले लोगे। बड़े से बड़े धनपति भी हो जाओगे
- 38:14सारी दुनिया तुम्हारी चरण वंदन करके तुम्हारे पांव को दो दो के
- 38:18भी पीयेगी तो तुम पाओगे बेकार के असर?
- 38:28नीरस था, थोक था कुछ न मिला मेरा यह प्रवचन वही व्यक्ति सुने तब
- 38:43सुने जब वैराग्य जग गया हो। या संसार पीड़ा देता हूँ और संसार
- 38:58इतनी पीड़ा देता हूँ कि किसी गुरु के पास परमात्मा के पास किसी के
- 39:08पास इसका इलाज? यह वो रोग है जिसका कोई उपचार ना
- 39:18हो तो फिर मेरे इस प्रवचन को सुन बस ये प्रवचन उनके लिए है जो हार
- 39:31गए है जो थक गए। उनको मिला कुछ किया सब मिला कुछ
- 39:46वो इस प्रवचन को सुने और देखो इस प्रवचन को सुनकर।
- 39:53तुम बनोगे कुछ न दुनिया तुम्हारे पांव चूमेगी न तुम्हारे पांव धो
- 40:03धो के पीयेंगे न तुम्हारी जय जयकार होगी, न तुम्हारे फॉलोवर
- 40:11होंगे। न तुम्हें बड़ी बड़ी गद्दियाँ
- 40:14नसीब होंगी न तुम्हारे पास स्मेरु पर्वत जीतने धन अंबार के खजाने
- 40:20होंगे, न बड़ी बड़ी कारें होंगी, न जहाज होंगे, न साधन होंगे।
- 40:30ना बड़े बड़े बंगले होंगे, ना जमीन जायदादें होंगी, ना बैंक
- 40:34बैलेंस होंगे, ये कुछ नहीं होगा लेकिन वो होगा जीसको पाने के लिए
- 40:52तुमने ये सब कट्ठा किया। वह रस होगा गलती से तुमने इस रस
- 41:03को पाने के लिए ये जो सब साधन इकट्ठे किये वो होगा।
- 41:13बाकी कुछ नहीं होगा, वह होगा जीसको पाने की तमन्ना है और
- 41:30इसीलिए तुम्हें जीना पड़ रहा है। क्योंकि वो रस नहीं मिला।
- 41:47उस रस के प्याले की एक घूँट जेसन भर लोगे, जीवन उस दिन सहस से।
- 41:59आज जीवन व्यर्थ है, जीवन की व्यर्थता उस पल में सार्थकता में
- 42:09बदल जाएगी। जीस पल में धन नहीं हो।
- 42:19पदवी नहीं होगी, सम्मान नहीं होगा, डिग्रीज़ नहीं होगी, कोई
- 42:24बड़ी उपाधि नहीं है, बड़ा ज्ञान नहीं होगा, बड़े सुन्दर दृश्य
- 42:32नहीं होंगे, बड़े सुन्दर झंकार नहीं होंगे।
- 42:37खाने को स्वादिष्ट पदार्थ नहीं होंगे, लेकिन वह होगा वह होगा
- 42:45जीसको आज तक तुम चूकते आये सब कुछ होने के बाद जो तुम कहते हो बाबा
- 42:52कुछ कमी। सब हैं जो जो हमारे मन में बुद्धि
- 43:04ने कहा कि इसमें मिल जाएगा, अगर यहाँ नहीं मिला तो यहाँ मिल
- 43:07जाएगा, लेकिन बाबा हमने वो भी। भीतर एक टसक बनी है।
- 43:20आज भी वाकई वो टसक है क्या? बाप बस उसी टसक की बात में करता
- 43:32हूँ वो ही मेरे पास बनी थी। मैं भी इसी का दीवाना था।
- 43:39और कभी खोजा नहीं, कभी खंगाला नहीं, कभी इच्छा नहीं।
- 43:44मज़े से डड्डू काट रहा था। मज़े से कॉकरोच काट रहा था यह
- 43:48मेरा जीवन था और मज़े से भोले भाले रैपज काट रहा था खरगोश।
- 43:56बड़े मज़े से काटता है। लाखे रंग का उसका दिल धड़कता
- 44:01देखता है भीतर का सारा स्ट्रिक्ट ढांचा देखता है, ये लिवर है ये
- 44:09लार्ज इंटेस्टाइन ये स्मॉल इंटेस्टाइन ये रिवर।
- 44:14यह भाई यह ओसोफीगस है, यह पिंकरियास है, यह फला है यह फला
- 44:26है यह शर्मित है ये सब जानता हूँ देखता हूँ बहता हुआ लघु देखता
- 44:32हूँ। तुम कहते हो पुण्य से मिलता है
- 44:42लेकिन मैंने कभी पुण्य नहीं दिया ये देख लो ये पुण्य है कितने ही
- 44:52डड्डू काटे फरोपट हद से तिलक जाते हो।
- 44:57कितनी ही मासूम बड़े प्यारे लगते पहले चूमता उनको इतने प्यारे लगते
- 45:02गोती में उतार लेते सुईत रंग के खरगोश छोटे छोटे बच्चे पहले खेलता
- 45:13हूँ। उन्हें प्यार करता फिर उन्हें
- 45:18काटता लेकिन ना तुझे पता था कि ये पुण्य है ना?
- 45:27ये पता था कि ये बात भेद बुद्धि यहाँ भी होती है।
- 45:33एक भेद बुद्धि ज्ञान से पहले होती है वो ये थी।
- 45:38पता नहीं था ये पाप एक भेद बुद्धि उसके बाद है वह ज्ञान के बाद आती
- 45:52है एक भेद बुद्धि ज्ञान से पहले आती है।
- 45:55तब मैं खरगोश काटा करता था। मुझे नहीं ज्ञान था।
- 45:59ये पाप है या पुण्य है और मैंने कोई।
- 46:02आज देखता हूँ तो कोई बंद नहीं किया उषा पुत्र और बाबा आपने इतना
- 46:10बोर लगा एक प्रयास था विफल प्रयास विफल प्रयास सफल नहीं हुआ।
- 46:34मैं चाहता था इसको बोलता हूँ अलफ़ाज़ मैं इस तरह से सम्पन्न
- 46:38नहीं हुआ है, लेकिन मेरे प्रयोग काम कर गए हैं।
- 46:45कुछ लोगों में वो प्रयोग से क्रिया योग है।
- 46:51वो प्रयोग से जानते हैं वो प्रयोग से योग निद्रा के।
- 46:56ये प्रयोग काम कर गए। करीब 20 लोगों पे पक्के पक्के काम
- 47:00कर गए। बस इतने से ही लोगों पे काम किया।
- 47:07शायद उनके भीतर ये जानने की तमन्ना होगी ज्यादा दुखी होंगे।
- 47:15या आनंद की तमन्ना गहरी रही होगी, जो उन्होंने प्रयोग किए?
- 47:21आप तो सुनते ही रहते हो, मैंने कितनी बार कहा कि चुप हो जाओ मुझे
- 47:33सुनना अच्छा लगता तो सुन लो। लेकिन उसके बाद तो 2400 गड्ढे
- 47:38होते हैं। थोड़ी देर के लिए चुप भी धार लिया
- 47:45करो, ज्यादा नहीं तो पांच 4 घंटे के लिए चुप भी धार लिया करो।
- 47:52तुम चुप नहीं होते तो प्रकृति को जबरदस्ती तुम्हें रात को निद्रा
- 47:56में ले जाकर चुप कराना पड़ता है, लेकिन तुम सीखें कुछ नहीं।
- 48:02प्रकृति तुम्हें पाठ तो बहुत पढ़ाती है।
- 48:06प्रकृति तुम्हें सिखाती है कि चुप हो जा।
- 48:10तुम नहीं होते बोलते ही रहते हो तो रात को प्रकृति तुम्हें चुप
- 48:14करा देती है। उसके पास ढंग है यही जागते जागते
- 48:24अगर चुप हो जाओ तो क्या होगा? प्रकृति तुम्हें उस सतल के करीब
- 48:29ले जाती है जिसे शिशुक्ति कहते हैं और तुम्हें बड़ा फ्रेशनेस
- 48:35महसूस होती है। सुबह उठते हो, खुमार चिढ़ा होता
- 48:39है, तुम बोल नहीं सकते हो और खुमार कहाँ से आया उसके करीब
- 48:45बैठने से आया। जिसकी बात मैं कर रहा हूँ।
- 48:52खुमार की चाहत तो सभी को है लेकिन रस्ता पता नहीं यही मुश्किल है।
- 49:09रस्ता पता नहीं। होना है चुप गुरु सीखा देते हैं
- 49:17शोर अब कैसे भीड़ भडाओगे इस शोर का चुप्पी के साथ।
- 49:36शब्दों के अर्थ के अनर्थ कर लेते हो यह बताता है कि तुम पहुंचे न
- 49:47चाहते हो जब तुमने शब्दों के अर्थ का अनर्थ किया।
- 49:58तभी साफ हो जाता है कि तुम पहुंचना नहीं चाहते या तुम
- 50:04पहुंचोगे नहीं। देखिए 10 सड़के निकलती हैं किसी
- 50:10जगह से और देखने वाला वहाँ खड़ा है और तुमने जाना किसी विशेष जगह
- 50:17पर। और तुमने गलत रास्ता पकड़ लिया तो
- 50:21देखने वाला समझ जाएगा। इसने गलत रास्ता पकड़ लिया, लेकिन
- 50:30जो जानता है तुम थोड़ा सा कष्ट कर रहे हो, उससे पूछ कभी मैंने उस।
- 50:38जगह जाना है कौन सी सड़क जाएगी वह अगर जानता है तो आपको अभी सलाह
- 50:43देगा। नहीं जानता है तो आपको कुमार भी
- 50:49पे डाल देगा। आप बटक जाओगे फिर वापस आना
- 50:52पड़ेगा। मैं बोलता हूँ और सच बोलता हूँ,
- 51:05ईमानदारी से बोलता हूँ और मेरे बोलने का लक्षण आज तुम मेरे जीवन
- 51:18को। देख कर लगा सकते हो मैं चुप हो
- 51:23क्यों? पर मैं बोलता हूँ मैं चुप हूँ
- 51:33क्यों सफर में चुप्पी के पास पहुँच गया मैं चुप?
- 51:3724 घंटों में मैं चुप रहता हूँ, वह मुश्किल 4:00 बजे तक मेरी
- 51:42खुमार थोड़ी थोड़ी उतरती है लेकिन क्या करूँ?
- 51:52जैसी कृषि गृहस्थी के ऊपर कोई कर्तव्य निर्वहन का भार होता है
- 51:57वो भी उतारना होता है। इसलिए यह भी एक बार बाबा ने मुझे
- 52:02सौंपा था। तुम बोल सकते हो, तुम बोलो बाबा
- 52:10और तुम ही बोल सकते हो इसलिए बोलो बाबा, मैंने बोला।
- 52:19जो लोग नहीं पहुंचना चाहते थे, मैं जानता हूँ वह पहुंचे तो नहीं
- 52:24थे, अन्यथा मुझे सुनते मैं किसी को सुनता हूँ।
- 52:30पहुंचा हुआ व्यक्ति किसी को सुनता नहीं है, किसी को सुनने की इच्छा
- 52:35भी नहीं रखता है। मैंने बहुत से मेरे शिष्य सिर्फ
- 52:41इसीलिए ब्लॉक कर दिए। कभी किसी का, कभी किसी का, कभी
- 52:48किसी का वीडियो मेरे पास भेज देते और उनमें से मेरे बहुत करीबी भी
- 52:55होते हैं। मैंने ब्लॉक कर दिया।
- 52:59बताता नहीं, आज बता रहा हूँ ये क्लिप भेज के तुम मुझे ये बता रहे
- 53:07हो के इससे सीख लो, किस्से सीख लो।
- 53:17मैं तो सीखा सिखाया हूँ पहुंचा पहुंचाया जिसने उस परम रस को पा
- 53:23लिया उसको तुम ये के लिए क्यों भेज रहे हो?
- 53:26अर्थ का तुम्हें अच्छा लगा, तुम इसको पढ़ो, इससे कुछ निकाल सकते
- 53:35हो, निकालो। नहीं निकाल सकते।
- 53:41मुझे क्यों कह रहे हो? मुझे भेजने का औचित्य क्या है?
- 53:52इसलिए मैं ड्रॉप मार देता हूँ। ये देखो बाबा ये सच है, झूठ है
- 54:04परमात्मा तक पहुंचने के उस रस तक पहुंचने का एक मार्ग नहीं है।
- 54:12गंतव्य एक है मार्ग अनेक रोग अनेक हैं उपचार एक तो मत पूछो मेरे से।
- 54:31इसे सुनो बाबा यह ठीक या गलत देखिए, मेरे शब्दों के विरुद्ध यह
- 54:36बढ़ता होगा अवश्य, लेकिन मुझे बताने की आवश्यकता नहीं।
- 54:43अगर तुम मेरे शिष्य वाकई हो तो तुम मुझे सुनो।
- 54:50और सुन के गुणों और गुण के बैठ जाओ कमरे में बस तुम वही पा जाओगे
- 54:59तुम्हारी तमन्ना मेरे जैसा होने को है न मैं जानता हूँ यही तमन्ना
- 55:06तुम्हारी भी है। कैसी मदहोशी के आलम में ऐसी
- 55:10खुशबुओं के भीतर मैं भी गुमहोतर हूँ मैं जानता हूँ अच्छी तरह
- 55:14जानता हूँ अन्यथायति दूर दूर से चढ़ते तुम आते नहीं मेरे पास कोई
- 55:20कहाँ से आ रहा कोई कहाँ से आ रहा कोई कहाँ संसार भर के कोनों से
- 55:24लोग आ रहे हैं। कोई इनके दिमाग में खराब भी है?
- 55:31इनके भीतर कोई आग जगी है, वो आग नहीं कर पाती है और मुझे सुनकर
- 55:39कुछ राहत मिलती है। कुछ अमावस्या की रात में जुगुनू
- 55:46की चमक दिखती है। तो जल्दी से एरोप्लेन को बुक करा
- 55:51देते हैं, टिकट को पहुँच जाते हैं।
- 55:55मेरे पास इनके दिमाग में खराबी नहीं है और मैं तुमसे बताऊँ तुम
- 56:00बिल्कुल ठीक हो तुम अगर मेरे पास आई।
- 56:06तो मैं ईमानदारी से तुम्हें कहता हूँ तुम सही रास्ते पे पहुँचो सही
- 56:13मंजिल पे पहुंचे सही गुरु के पास पहुंचे इसे तुम कुछ भी कह सकते हो
- 56:22अपने मुँह मिया मिठू बनना ये भी कह सकते हो।
- 56:28लेकिन कृष्ण जब बोलते हैं तो कृष्ण इसी भाषा का इस्तेमाल करते
- 56:32हैं, क्योंकि ईमानदार हैं। सर्वधर्माण पर तज्जमामी का शर्म
- 56:39प्रच मेरी शर्म। और कृष्ण जानती हैं कि मेरी ही
- 56:46शरण में आजा। इसका अर्थ तुम समझ नहीं सकोगे फिर
- 56:50भी बोलते हैं अनन्या चिंतन तो माँ अनन्या भाव से मेरा चिंतन कर
- 56:57सिर्फ मेरा चिंतन कर और कृष्ण जानते हैं कि मैं कौन हूँ?
- 57:03कृष्ण कौन है ये जायेंगे नहीं ये जानते नहीं लेकिन अगर मेरी गीता
- 57:10पर अमल किया इन्होंने तो ये वहीं पहुँच जाएंगे जो असली कृष्ण है।
- 57:21तमन्ना तो मेरी भी है। और तमन्ना अगर गलत हो तो मुझे
- 57:29छोड़ देना और तमन्ना अगर ठीक हो तो फिर दूसरों को छोड़ देना दो,
- 57:39दो नावों में काम मत रखना पुत्र। तुम गलती खा जाओगे, तुम कभी नहीं
- 57:45पहुंचोगे और ये वेला बार बार नहीं ना संत रोज़ पैदा होता है हज़ारों
- 57:57साल नरगिस अपनी बहनों के। बड़ी ही मुश्किल से होता है।
- 58:06चमन में भी कावर पैदा वह जीसको देखा जा सके, जो देखने योग्य है,
- 58:18बड़ी ही मुश्किल से होता है। अन्यथा माखनशा लुभाना की तरह
- 58:29जिसने शो अशर्तियां मन्नत में मान ली थी, मेरे जहाज को बचा लो।
- 58:38हे नमम पाशाह मेरे जहाज को बचा लो, मेरे माल को बचा लो मुझे बचा
- 58:47लो उम्मीद कोई न थी, तूफ़ान भयंकर था, ऐसा लगता था जहाज डूब जाएगा।
- 58:58कई मीटर ऊंची लहरें और जहाज में पानी भर रहा था उम्मीद कोई शेष न
- 59:07बची थी और जब व्यक्ति की उम्मीद कोई शेष नहीं बचती वह निर्मलम हो
- 59:13जाता है। और निरवलंब होता हुआ व्यक्ति
- 59:17द्रौपदी की तरह पुकार करता है। तुम कहाँ गए महाराज करो मत देरी
- 59:29दुःख हरो द्वारका नाथ शरण में देरी फिर शरण में जाता है।
- 59:35तुम अभी शरण में नहीं जा पाओगे क्योंकि तुम्हारे पास अविलंबन
- 59:40बहुत है, धन है तुम्हारे पास, पदवी है तुम्हारे पास ढेरों सारी
- 59:49तुम्हारे पास सूचनाएं। तुम अभी लाखों छात्रों को पढ़ा
- 59:55सकते हो। तुम निरावलंब हो नहीं और इतनी
- 59:58जल्दी तुम निरावलंब हो भी नहीं सकते।
- 1:00:01ये सब कूड़ा है? ये फेंकना पड़ेगा बाहर, इसलिए मैं
- 1:00:07कहता हूँ कबीर तो पहुंचेगा। लेकिन कबीर की देखा देखी आचारों
- 1:00:18ने जो ये कबाड़ा इकट्ठा कर लिया, यह सपने ले सकते हैं कबीर तक
- 1:00:28पहुंचने के। लेकिन नहीं पहुँच पाएंगे और और
- 1:00:33रोज़ इकट्ठा कर लेते हैं यह कूड़ा सूचना कबीर के पास सूचना नहीं है,
- 1:00:41ना कोई और जिसके पास सूचना ही नहीं होती।
- 1:00:50उसकी बुद्धि खाली होती है और बुद्धि का खाली होना, लिप्तता का
- 1:00:56अभाव, एक एक शब्द को गौर करना, दिमाग का खाली होना।
- 1:01:05लिप्तता का अभाव किस्से लिप्त होगे जब है ही कुछ नहीं न्यूरोन
- 1:01:14आर एपी पुट्टी नथिंग इस देर नथिंग इस देर तो क्लिंक।
- 1:01:24किसके साथ चिपको के कोरा कागज़? इसलिए बच्चा जल्दी सीख सकता है
- 1:01:39छोटे बच्चे को ध्यान सीखाना चाहिए था।
- 1:01:43लेकिन हमने हिंदू मुसलमान सीखा दिया, हम राजनीतिक लोगों की चालू
- 1:01:49में फंस गए। यह व्यक्ति 25 वर्ष का होते होते।
- 1:01:59इतना आनंद का मेहता हुआ भूत बन जाता हूँ कि इसको निहारते ही रह
- 1:02:08जाते आप? लेकिन आज आपने इसके चेहरे पे इतनी
- 1:02:12मलिनता, तनाव, कष्ट, भेद, नफरत। दुख दिया जिसका बखान नहीं हो
- 1:02:21सकता। इसका रोवा रोवा आज दुख से भरा हुआ
- 1:02:24है। ये किसने किया?
- 1:02:31ये धार्मिक लोगों ने किया और धार्मिक लोगों ने आध्यात्मिक
- 1:02:37लोगों से साथ गठ। ध्यान रखना न धार्मिक लोग कुछ
- 1:02:42लेके जाएंगे ना आध्यात्मिक लोग कुछ लेके जाएंगे ना राजनीतिक लोग
- 1:02:49कुछ लेके जाएंगे सोने सोने यहाँ से विदा हो जाएंगे।
- 1:03:01मज़ा तब है जब तुम इस मानस से जामे का लाभ उठा और ध्यान रखना,
- 1:03:13मेरे अल्फाज़ मेरे अनुभव से आते हैं।
- 1:03:28मैं आपको आनंद में डूबाने के लिए इतना त्रस्त हूँ कि किस तरह आप उस
- 1:03:36आनंद को पी लो, इतने हजारों घंटे बोल रहा है।
- 1:03:47मैं जी इस कारण से बोला, तुम कितना समझ पाए यह तो मुझे नहीं
- 1:03:52पता, लेकिन मैं क्यों बोला? यह मज़ा कोई बेहोशी के आलम में
- 1:04:03नहीं बोला। पर ये पूर्ण होश के आलम में बोला
- 1:04:09और अच्छी तरह जानता। मैं क्यों बोला?
- 1:04:14किसी तरह तुम भी गोंड पर रौ सके किसी तरह तुम भी उस आनंद के
- 1:04:24पिएक्कड़ हो जाओ। मेरी तमन्ना तो यही थी और जब तक
- 1:04:33जीऊंगा इस शरीर में यही रहेंगी मानव कल्याण की जब तक तुम
- 1:04:43राजनीतिक हो। जब तक तुम धार्मिक गुरु हो,
- 1:04:49व्याख्यान करते हो टीचर तब तक तुम दुनिया का भला नहीं कर सकते।
- 1:05:01दुनिया का भला? सिर्फ़ एक ही व्यक्ति कर सकता है,
- 1:05:06दुनिया का भला कर सकता है। नानक, कबीर मेरा दादी पल्प दुनिया
- 1:05:17का भला कुछ गिने चिने लोग कर सकते हैं, कृष्ण कर सकते हैं।
- 1:05:22राम कर सकते हैं, तुम न घर पाओगे। साहित्य राम से ज्यादा बड़ा हो
- 1:05:34सकता है। सूचनाएं राम से ज्यादा हो सकती
- 1:05:39हैं। क्योंकि जो आज खोज लिया गया हो
- 1:05:42सकता है राम के वेला में ना खोजा गया, लेकिन सूचनाओं के ज्यादा
- 1:05:48होने से आनंद ज्यादा है। हमारे भीतर यह कोई मेल की बात
- 1:05:54नहीं है। यह बे मेल बात है, राम जीतने मस्त
- 1:05:59हैं। कृष्ण जीतने मस्त हैं उसका ज़रा
- 1:06:02भर भी अगर आपको मिल जाए तो आपके भीतर सहिष्णुता आ जाएगी, परम
- 1:06:11सहनशील हो जाओगे, तुम परम आनंदमय हो जाओगे, फिर तुम दूसरे को ठगने
- 1:06:18की इच्छा नहीं रखोगे। दूसरे को भ्रमित करने की इच्छा
- 1:06:22नहीं होगी। तुम्हारी इतिहास को छोड़ देना,
- 1:06:36भविष्य के नक्शों को पाट देना हमने कुछ नहीं बनना है।
- 1:06:43मैं फिर बता दूँ जो नंदा बच्ची हैं, जो अपरबक्कु मान के हैं वो
- 1:06:55मेरे शब्दों की गहराई को समते हों तो ठीक अन्यथा इस चैनल को छोड़
- 1:07:01दे। छोटे बच्चे जल्द प्रभावित हो जाते
- 1:07:07हैं। मैं आनंद की बात करता हूँ, उनको
- 1:07:16भीतर से टच करती है, यह बात बाबा मैं भी यहाँ पहुंचना चाहता हूँ,
- 1:07:21यहाँ कौन नहीं पहुंचना चाहता। दुनिया का हर प्राणी यहाँ पहुंचना
- 1:07:27चाहता है। यह आखिरी गंतव्य है।
- 1:07:34कौन नहीं पहुंचना चाहेगा इस रस के प्यारे को पीने के लिए तुम अकेले
- 1:07:41ही तो नहीं पीना चाहते? लेकिन ध्यान रखना ये परिपक्व मन
- 1:07:45से तुम जल्दबाजी करोगे। वह छोटे छोटे बच्चे आ जाते हैं।
- 1:07:54बाबा मैं 17 का हूँ, मैं 15 का हूँ, अभी देखिए संसार।
- 1:08:04जीस संसार गुरु डम के चालों में फंस गए तो तुम्हारा जीवन नर्क हो
- 1:08:14जाएगा फिर तुम पांच नाम जपते ही रह जाओ वो एक बांस गाड़ दिया है
- 1:08:20उन्होंने। चढ़ते रहो, उतरते रहो, नाम कभी
- 1:08:28खत्म नहीं होगा, तुम खत्म हो जाओगे, यह वो नाम नहीं जो बाबा
- 1:08:36नाम निकने का यह वो नाम नहीं जो पल्टू ने कहा।
- 1:08:43जो कबीर ने कहा था तुमने नाम की परभाषा बदल दी, मैंने बहुत बार
- 1:08:52समझाया है, नाम चुप्पी का नाम है, सारा संसार चुप है।
- 1:08:59अस्तित्व चुप है और अस्तित्व चुप्पी के भितरे का अनस्ट्रक्टेड
- 1:09:06साउंड उठती है। चुप्पी के भीतर भी एक साउंड है,
- 1:09:11लेकिन बड़ी प्यारी तुम्हारे ऊँट नहीं बोलते।
- 1:09:17तुम्हारा मन नहीं बोलता, लेकिन वहाँ भी एक बोलता है और कौन बोलता
- 1:09:24है वह वो रस का प्यारा बोलता है, उस रस को पीने के तरीके तुम्हें
- 1:09:32बता रहा था। इतिहास की किताबों को आग लगा था।
- 1:09:42बिल्कुल वैसा ही करो जैसे मैं करो, जो इतिहास के बारे में बोले
- 1:09:52उसको सुनना मत और तुम इतिहास को पढ़ना मत।
- 1:10:02ये जितना भी मोटिवेशनल स्पीकर है, ये तुम्हें तुम्हारे आनंद से दूर
- 1:10:09ले जाते हैं। अगर इनके करोड़ों लोग सुनने वाले
- 1:10:18हैं तो मूर्ख करोड़ों में हो सकते हैं।
- 1:10:23यह द्रुव राठी श्याम मीरा सिंह यह कितने ही बुराड़ी है जो इतिहास
- 1:10:33में बोलते हैं तुम्हें रुचि क्यों है?
- 1:10:36इतिहास में, इतिहास में रुचि क्यों है तुम्हें?
- 1:10:44इतिहास गड़े हुए मर्दों के सामान क्या वो वापस आ जाएगा?
- 1:10:51कब्रों में पड़े हुए लोगों को अगर तुम उखाड़ोगे तो सूखी हड्डियों।
- 1:11:03धूल फंसती हुई वो अर्थी जिनमें आज कुछ नहीं बचा, उसके अतिरिक्त
- 1:11:13तुमपे क्या पांव है वहाँ उरंग जेब नहीं।
- 1:11:22और इन जेब से तुम बदला नहीं ले सकोगे सही पूछो तो जब व्यक्ति मर
- 1:11:26गया उसे बदला नहीं लिया जा सकता इसलिए हिटलर बड़ा से है ना?
- 1:11:34हिटलर ने कहा जीता जी तो मुझे बड़ा तंग करेंगे क्योंकि मैंने
- 1:11:39पाप बहुत किया। प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि
- 1:11:43उसने पाप कितने किया है और सही पूछो तो यह राजनीतिक लोग।
- 1:11:52अगर मेरे बाद कोई ऐसा आया जिसने फाइल खुला दी तो 1000 बार फांसी
- 1:11:59की सजा देनी पड़ेगी और 1000 बार फांसी होती ना तो फिर क्या होगा?
- 1:12:05तड़पा के मारना होगा, ये इस चीज़ से डरते हैं।
- 1:12:13गुनाह कर लिया। जो मर गए उनमें जान नहीं थी क्या
- 1:12:19जो तुम्हारी शरारत से तुम्हारी योजनाओं से तुम्हारे गलत इरादों
- 1:12:24से मर गए? क्या उनमें ज़िन्दगी नहीं थी?
- 1:12:27क्या उनके मरने से उनके पारिवारिक जन?
- 1:12:32त्रस्त नहीं हुए। उनके मित्रजन आहत नहीं हुए तो फिर
- 1:12:40तुम क्यों डरते हो? पाप करो तो क्षति भी रखो, पाप करो
- 1:12:46तो क्षति भी रखो उस पाप के भोगने की।
- 1:12:52अन्यथा प्रब न करो। पहली बात इतिहास को आग लगा दो, मत
- 1:13:01जाओ इतिहास में इतिहास की किताबों को आग लगा दो अगर आपके पास पड़े।
- 1:13:07वो किसी की भी हैं, तुम्हें कुछ भी सीखा रही है?
- 1:13:14दूसरी बात भविष्य की योजनाओं को पाट दो, उनको भी आग लगा दो क्यों?
- 1:13:27क्योंकि मैं तुम्हें जहाँ ले जाना चाहता हूँ जीस सदस्य से मैं
- 1:13:34पहुंचा और जो पाया और जो बाकी आज मुझे मदहोशी के आरोप में तुम देख
- 1:13:42रहे थे। मुझे कुछ नहीं चाहिए अगर मुझे
- 1:13:54सुनना अच्छा नहीं लगता तो छोड़ दो मुझे तुम।
- 1:14:06से कुछ भी न चाही ये आनंद की पुकार है।
- 1:14:16इसको ध्यान से सुन मुझे मेरे। हाल पे छोड़ दो मुझे मेरे हाल पे
- 1:14:36छोड़ दो। मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिए क्यों
- 1:14:48अभी जो चाहिए था मुझे खुद से ही मिल गया और जीसको मिलता है जीसको
- 1:14:57तुम ढूंढ रहे हो, वो तुम्हे खुद से ही मिलेगा।
- 1:15:01जीसको मिला उसको खोज से ही मिला मुझे तुमसे कुछ भी न चाही मुझे
- 1:15:20मेरे हाल पे। छोड़ दो बड़ा अवकार होगा आपका
- 1:15:33बड़ा अवकार होगा आपका आशीष दूंगा आपको मुझे मेरे हाल में।
- 1:15:45छोड़ दो मेरा दिल अगर कोई दिल नहीं अगर मेरा बोलना तो मैं ऐसा
- 1:15:57लगता कि इससे तुम कुछ गवा दोगे, तुमसे वो रस नहीं पा सकोगे।
- 1:16:05मैं तो तुम्हें राशि ही बुलाना चाहता हूँ और तुम तुम्हारी तमन्ना
- 1:16:11कुछ और है तो ध्यान से सुन लेना इस लाइन का मेरा दिल।
- 1:16:19अगर कोई दिल नहीं। उसे मेरे सामने तोड़ दो, उसे मेरे
- 1:16:37सामने तोड़ दो। मुझे तुमसे कुछ बिना चाल मुझे।
- 1:16:52मेरे हाल पे छोड़ दो। मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो।
- 1:17:11मुझे तुमसे कुछ भी न चाह, लेकिन तुम्हे अभी कुछ चाहिए।
- 1:17:24इसलिए तुम्हें फंसा लेते हैं नकली गुरु बस मैं तुम्हें यही सावधान
- 1:17:31करना चाहती हूँ तुम्हारी विद्र की तमन्ना अंतरंग तमन्ना।
- 1:17:41अंतर्तल की तमन्ना वही है जहाँ मैं पहुंचा और ये लोग जो सारा दिन
- 1:17:56तुम अपनी शक्ति को खराब करते हैं, ब्रह्मचर्य की शक्ति को खंडित
- 1:18:01करना एक तरफ। और इन ऐतिहासिक तथ्यों को सुनने
- 1:18:08वालों को बोलने वालों को सुन इनमें तुम्हारी शक्ति ज्यादा व्यय
- 1:18:19होती है। जो लोग सारे दिन टेलीविज़न से
- 1:18:23चिपके रहते हैं। वो किसे सुनते हैं, ये मैं बात
- 1:18:28नहीं कहता। किसी को भी सुन वो धार्मिक गुरु
- 1:18:34को सुन और धार्मिक गुरु आज कैसे हैं मैं बखूबी जानता हूँ।
- 1:18:45वो राजनीतिक लोगों को सुने वो इन दोनों को कन्डेम्न करने वालों को
- 1:18:52सुने या वो झूठ बोलने वाले मीडिया को सुने?
- 1:19:01या झूठ बोलने वाले मीडिया का कटाक्ष करने वालों को सुनें,
- 1:19:06तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। इनसे कैसे से मेरी बात को ध्यान
- 1:19:13से समझ लें और ये बात उनके लिए है जहाँ मैं पहुंचा।
- 1:19:22और पहुँच के मदमस्त हो गया और बोलना चाहता हूँ अभी बोल सकता है
- 1:19:34अगर वहाँ पहुंचना चाहते हो तमन्ना तो सभी की यही है।
- 1:19:40इसी तमन्ना को लिए लिए तुम धन जोड़तें हो, इसी तमन्ना को लिए
- 1:19:47लिए तुम सूचनाएं एकत्र करते हो? इसी सूचना को लिए लिए तुम छात्र
- 1:19:54संघ इकट्ठा करते हो, किसी को नाम चाहिए।
- 1:20:00किसी को पूजा चाहिए, किसी को गद्दी चाहिए लेकिन जब संत वेस में
- 1:20:10जाता है तो पता है कि असली तमन्ना तो ये थी।
- 1:20:18तमन्ना का आगाज मूल उदगम स्रोत ये था व्यक्ति चाहता तो ये था भटक
- 1:20:27गया, रास्ता भटक गया या भटका दिया गया?
- 1:20:38मत सुन, नाजायज शक्ति को खराब करोगे नहीं सुन कर मैं सुनने से
- 1:20:48मना भी नहीं करता, बस इतना सा कहता हूँ, सुन लो अगर तुम्हारी
- 1:20:56तमन्ना। यहाँ भर्ती है तो सुन लो, लेकिन
- 1:21:03मेरी तमन्ना तो वहाँ पर ही जाकर जहाँ कुछ सुझा नहीं, जहाँ बोला
- 1:21:18नहीं गया। विश्व के सर्वश्रेष्ठ योगी ने
- 1:21:27मुझे कहा तुमको दुनिया अंधकार तो मैंने हाथ मांगा लिया ठीक है
- 1:21:39क्योंकि मेरा इंकार चलन। जब उन्होंने अंतिम बात कह दी,
- 1:21:49बोलने वाला कोई है ही नहीं, तो मैं इस अपरम शक्ति की बात को मानु
- 1:21:57पर मैं समझ गया था कोई नहीं। इसलिए बेहिचक मय इन लोगों की
- 1:22:02पिटाई करते हैं। थोड़ी सी बात बोलो कल ही एक संत
- 1:22:16तथाकथा संत नकली संत कहते मेरे पास एक छुराने के व्यक्ति।
- 1:22:28मैं डरा नहीं, ये कहने की क्या जरूरत है?
- 1:22:36फिर उसने पिस्टल निकाल मैं डरा नहीं, मैंने कहा चलाओ पहला बार
- 1:22:44तुम्हारा। हमारे पास तो कमंडल में गंगा जल
- 1:22:47है, कमंडल में गंगा जल है। मतलब उन लोगों को आनंद का रस की
- 1:23:03खबर नहीं थी, लोगों को डराती। न तुम दुर्वासा हो, न तुम परसु
- 1:23:21तुम पाखंडी हो, मैं तुमसे पूछता हूँ क्या गंगाजल डिस्ट्रक्शन के
- 1:23:30ही काम आता है? कंस्ट्रक्शन की कमी है क्या?
- 1:23:41विनाश करने के लिए ही काम आता है गंगा चल तो फिर गंगा को धिक्कार
- 1:23:47है दूत्कार तो हूँ ऐसी गंगा को जो सिर्फ डिस्ट्रिक्शन के लिए प्रयोग
- 1:23:55की जाती है। जो कंस्ट्रक्शन के लिए अपना बनी
- 1:24:04तुम्हारे पास गंगा चला है और वो कहते भाग गए।
- 1:24:14अगर इतनी ही शक्ति गंगाजल में तुम्हारे पास मंत्रों में है तो
- 1:24:21डिस्ट्रक्शन की जगह कंस्ट्रक्शन ही कर लो।
- 1:24:23अपने गुर्दे ठीक कर लो, मेरी बात बुरी हुए लगेंगी, क्योंकि
- 1:24:31तुम्हारी मान्यताएँ टूटती हैं तो। जत भी जब तुम अपने भीतर जाओगे
- 1:24:40भीतर जाके यही पाओगे तुम्हें बहुत वटकारा है मैं क्यों बोलता हूँ बस
- 1:24:52अब तो बोलना बंद हो जायेगा कभी कभी बोलेंगे।
- 1:25:03लेकिन मैं ये पूछता हूँ कि गंगा जल विनाश के काम ही आता है।
- 1:25:10लोग गंगा को मांग हैं और गंगा को पाप हरणी माता कहते हैं।
- 1:25:20क्या तुमने गंगा से डिस्ट्रिक्शन का काम देना ही सीखा है?
- 1:25:24बस यही मनोवृत्ति है तुम्हारी यह यही कैपेसिटी है।
- 1:25:29तुम्हारे भीतर डिस्ट्रिक्शन की कैपेसिटी है, तो लोगों को तुम
- 1:25:33अच्छी अच्छी शिक्षा सिर्फ मन बहलावे को देते हो या सलमान पाने
- 1:25:38के लिए? कोई शर्म कर संत के भेष में आके
- 1:25:45ऐसे काम नहीं करने चाहिए। तुमने वहाँ जाना जीस रहस्य मैं
- 1:26:02गया बड़ी सुस्पष्टता से निर्लिप्तता से और बड़े अभाव से
- 1:26:11ईमानदारी से आपके सामने प्रस्तुत कर दिया।
- 1:26:15मैं बोला बिलकुल बोला। जैसा जानता था वैसा बुरा तुम्हें
- 1:26:25मानने के लिए ज़रा भी बाध्य नहीं करता हूँ।
- 1:26:28बहुत से लोगों ने कहा आपकी एनलाइटनमेंट दट।
- 1:26:32इस एलोसिनेशन बाबा मैंने कहा, ओके।
- 1:26:36आप एस्ट्रल ट्रैवलिंग की बात करते हो, यह लोगों को बुद्धू बनाते हो।
- 1:26:42मैंने कहा ओके आप ये जो बाबा की बात करते हो, शंकर ये है ही नहीं।
- 1:26:49मैंने कहा ओके और जो जो मैं बोल रहा हूँ दट इस फेक।
- 1:26:56मैंने कहा ओके, तुम्हारा नुकसान होता है, तुम मुझे अनुकरण ना करो,
- 1:27:10मुझे सुनो ना मैं नहीं कहता की तुम मुझे मैं नहीं चाहता या तुम
- 1:27:22मुझे सुन। क्योंकि श्रद्धा और विश्वास के
- 1:27:27बिना और तुम्हारी भीतर महमूषा ना जगी हो तो मुझे सुनना बिल्कुल गलत
- 1:27:36है। महमूषा जगी हो, प्यास जगी हो, उस
- 1:27:41रस को भी नहीं। फिर मुझे जरूर सुन फिर तो मैं
- 1:27:48तुम्हारी मिन्नत भी करूँगा कि तुम सुन अगर अभी राजनीति करने, पांव
- 1:27:56पूजने, दन के अम्बार लगाने या शरीर का उपचार करने के लिए लोगों
- 1:28:01को भ्रमित करना? तो फिर वो कर लो ज़रा भी तो मेरी
- 1:28:08तरफ से तो बंधन है नहीं, मैं बंधन डाल भी नहीं सकता शरीर से इतना
- 1:28:15कमजोर हूँ कि मैं कोई केली धाम में राधा केली धाम में मैं नहीं
- 1:28:19जा सकता। मैं 50 कदम नहीं कर सकता।
- 1:28:26भोजन न करने की वजह से मैं जानता हूँ शरीर इतना दुर्बल हो गया कि
- 1:28:31बच्चा मुझे ऊँगली भी लगा दे, शरीर की औकात को मैं जानता हूँ, कल
- 1:28:40गिरेगा। आज गिर जाए।
- 1:28:45ये मेरा घर है, मैंने पहचान लिया है पहचान के बोल रहा हूँ, किताबों
- 1:28:50से पढ़ के नहीं बोला कुछ भी नहीं बोला जो किताबों से पढ़ के बोला।
- 1:28:57उसका मैंने स्पष्टीकरण दिया कि भाई कहानी है।
- 1:29:01सुनी है पड़ी है जानता है जो देखा जो जाना ईमानदारी से बोला।
- 1:29:12इसलिए मैंने इतना बोला तुम सुनो न सुनो।
- 1:29:21तुम्हारे ऊपर ज़रा भी ना निवेदन है तुमसे ना तुम पर किसी प्रकार
- 1:29:32का दंड है और ना तुमपे दबाव है। अच्छा लगे तो सुन लेना ना अच्छा
- 1:29:42लगे तो जल्दी से इसके पकड़ दे। यही कहना चाहूंगा बस जो प्रेम रस
- 1:29:52के प्याले के आंशिक हो आ जाओ। आ?
- 1:30:12पीलो। बाकी ऐं मेरेत रोड दे दो, कुठ
- 1:30:29पिला दे सा? बाकी मेरे तिरोड़ दे दो।
- 1:30:42गुट फिला दे सकी। शराब है मेरे पास तुम शराब का
- 1:30:54भंडार। और तुमने तुम्हारे उस शराब के
- 1:30:59भंडार तक पहुंचना कैसे ये मैं भली भांति ही जानता हूँ बस मैं मार्ग
- 1:31:05बता सकता हूँ तुम्हें इसके अतिरिक्त क्वेश्चन?
- 1:31:15अगर पीना चाहते हो तो आ जाओ, प्यास लगी है तो पानी भी है आ जाओ
- 1:31:26फिर भूखे हो भोजन भी है आ जाओ कल। लेकिन ना गद्दियाँ हैं, ना सम्मान
- 1:31:42हैं, ना व्यर्थ की मग्ज़ का पाई है ना सोचना ही है।
- 1:31:49कुछ भी नहीं खाली कोरा का घश? और जब कोई व्यक्ति उस परमरस को पी
- 1:31:58लेता है, फिर उसको व्याख्यान करें तो उसका धन्यवाद करना वहाँ जाके
- 1:32:11तुम पाओगे। किस व्यक्ति ने इतना बोला तो बोला
- 1:32:17कैसे? फिर तुम उसकी कष्ट और तकलीफ का
- 1:32:23जायजा ले सकोगे। कितनी तकलीफ से उसने बोला होगा इस
- 1:32:31वक्त में? मन तो है कि प्यारे ही जाता इसलिए
- 1:32:38वह हचक तो मैं कह देता हूँ जाओ किसी और गुरु को तलाश लो, दुखी भी
- 1:32:45होता हूँ क्यों? और गुरु है नहीं बाबा निका और है
- 1:32:49नहीं। लेकिन करूँ क्या?
- 1:32:53तुम सुनना नहीं चाहती तो मेरे पास कोई ऑप्शन है।
- 1:32:59तुम ऐसा मुझे समझाना चाहते हो कि तुम पहुंचे हो?
- 1:33:04पैरिस फिर पहुंचे हुए को रस पिलाने की जरूरत भी क्या है?
- 1:33:10तुम पहले से ही रस्मग्न हो बस नाचो खेलो कूदो गाओ पियो, नाचो
- 1:33:19अगर तुम परमात्म हो गए हो तो परमात्मा महारस है और जो उस रस को
- 1:33:25पी लेता है। आ रिथिलैया मन मस्त हुआ फिर क्यों
- 1:33:43बोल? मन मस्त हुआ फिर क्यों वो हो ले
- 1:33:56हम सब आयो? मानसरोवर मानसरोवरू।
- 1:34:21ताल तलैया क्यों डोल मन मस्त? फिर।
- 1:34:34क्यों बोले मन मस्त हुआ? फिर क्यों बहू जीसको हीरा मिल गया
- 1:34:46बार बार देख? ले।
- 1:35:01गांठ गठियायो हो हीरफयो। गांठ।
- 1:35:19गति आयो बार बार बको क्यों खोले? मन मस्त।
- 1:35:38फिर क्यों वो हो ल मन मस्त हुआ फिर क्यों वो हो?
- 1:35:47ल? सबर का एक और अर्थ समझ लेना।
- 1:35:59कॉम्पिटिशन खत्म हो जाएगा तो मुकाबला नहीं करूँगा।
- 1:36:09आज मैंने देखे बड़े ग्रुप व्यूस देखते हैं अभी कल ही मुझे किसी ने
- 1:36:14बताएं? एक बड़ी संस्था ने किसी से कहा कि
- 1:36:20हमारे व्यूज फलाने गुरु से ज्यादा फर दिखावे की दुनिया बनावटी फूलों
- 1:36:27की तरह है, उनमें सौगंध नहीं होती, बस दिखाते हैं और उन्हें
- 1:36:34पता नहीं। कि दिखावा कितने दिन चलेगा तुम
- 1:36:39जैसे पैर पुजवा रहे हो वो ना तो वो बचेंगे, ना पैर पुजवाने वाला
- 1:36:48बचेगा। कितनी देर चलेगा ये सिलसिला?
- 1:36:51ये सर्कस से ज्यादा देर चलने वाली है ना?
- 1:36:58कहत कबीर सुनो भाई सा दो। कहत कवि।
- 1:37:22सुनो भाई साधु साधु। साहब मिल हैं सबूरी, मैं सबूरी
- 1:37:49मैं। मन्नड़ोलाग्यो मेरो रो फकीरी में।
- 1:38:18मन लाग्यो हो मेरे हो रहा जो सुख पायो राम भजन मैं।
- 1:38:36जो सुख पायो राम भजनों में, राम भजन में, राम भजन में।
- 1:38:55सो सुख ना हीं अमीरी मैं अमीरी, मैं मनुला जो मेरे।
- 1:39:15फकीरी में फकीरी में? पर कैसा हो जाता है ति?
- 1:39:38न कछु ले, न न कछु देना। ना कछु ले, ना ना कछु देना, ना
- 1:40:01कछु ले, ना ना कछु देना। कबीरा मग्न मग्न मग्न कबीरी मैं
- 1:40:24कबीरी मैं। मंडुलाग्यो मेरो राव फकीरी मैं
- 1:40:37फकीरी मैं। फकीर फकीर वो जीसको।
- 1:40:48बाहर से जो उसके पास है वो बेकार हो गया।
- 1:40:54बाहर कुछ भी है कृष्ण के पास बहुत बहुत कुछ है राजा लेकिन व्यर्थ हो
- 1:41:02गया है वो फकीर फकीर के पर भाषा तुने बदल दिया।
- 1:41:08तुमने कहा जो हद नंगा है, जो नंगा है वो फकीर नहीं फकीर वो जो बाहर
- 1:41:18ऐशो आरंभ ऐश्वर्य के साधन है वो उसके लिए बेकार हो गया व्यर्थ हो
- 1:41:23गए सब है। लेकिन व्यर्थ है, सब है लेकिन
- 1:41:31व्यर्थ है वो फकीर होता है तो कबीर कहते हैं सब कुछ होते हुए भी
- 1:41:40जब व्यर्थ हो जाए, सब कुछ बाहर का हो ना।
- 1:41:46और तुम्हें जो मिले वो कबीरी में ही मिले यही गोरख कहते हैं मरो हे
- 1:41:53जोगी मरो मरो मरण है मीठा ऐसी मरणी मरो।
- 1:42:02जीस मरणी मर्क गोरख जीटा गोरख को गोरख में मिलेगा कबीर को कबीर में
- 1:42:09मिलेगा तुम्हें तुम्हारे में मिलेगा इसलिए नाम जप मत करना अगर
- 1:42:16नाम ही जप करना है तो अपने नाम को जप करना।
- 1:42:25तुम खुदा खुद से हो जाओगे, जाप ही करना है तो संकोच मत करना तुमने
- 1:42:39स्वयं को खोजना है। और स्वयं के नाम से शुरू कर लो,
- 1:42:43कोई हर्जानी यह मार्ग सही भी है दूसरा तुम्हारा नाम पुकारना है।
- 1:42:52तुम उठ जाते हो तो तुम अपने आप को पुकारना है।
- 1:43:00वह खजाना तुम्हें कबीरी से ही मिलेगा, वह खजाना तुम्हें गौरख से
- 1:43:08ही मिलेगा, वह खजाना तुम्हें तुम्हारे भीतर से मिलेगा जब तुम
- 1:43:16वह हो जाओगे। तुम्हारा नाम क्या है?
- 1:43:22खुशी में ही मिलेगा। तुम्हें दूसरे का नाम नहीं जपना
- 1:43:30ही है तो अपना नाम जपो अजामिन की कहानी में मत अटकन।
- 1:43:38अजामिल को जब मिलेगा अजामिल के नाम से मिलेगा नारायण के नाम से
- 1:43:46मिलेगा नारायण को शिव के नाम से मिला है शिव को।
- 1:43:56मुझे मेरे नाम से मिला दूसरों के नाम मैंने बेकार पाए जीसको भी
- 1:44:03मिलता है अपने भीतर से मिलता है जिसका नाम है वो तुम।
- 1:44:16उसके भीतर चेतना तुम्हारी उस चेतन का नाम तुम्हारे से उजागर है, वो
- 1:44:25है तो तुम्हारा नाम, वो नहीं तो तुम घर जाओगे इसलिए उसके पास चली
- 1:44:33जाना। उसी के नाम को ध्यानो, उसके नाम
- 1:44:38को जपना, किसी दूसरे के नाम को मत जपना, जपना ही है तो उसके नाम को
- 1:44:44जपना, नहीं तो ध्यानो बाबा नानक ने कहा।
- 1:44:54जिन नाम तैयार अपने नाम को ध्यान अपने नाम के ध्यान में उतर जाना
- 1:45:02अपने गहरे में उतर जाना समझना पड़ी गहराई से समझा रहा हूँ।
- 1:45:08अपने ही नाम के जब से शुरू करना अगर नाम से ही शुरू करना है तो पर
- 1:45:17अपने ही पास पहुँच ही जाना। कबीर को कबीर से मिला और कबीर
- 1:45:22कबीर को पाक मग्न हो गए। गोरख को गोरख से मेरा और गोरख को
- 1:45:27गोरख को पाके मगन तुम अपने को पाके मगन हो जाओ दूसरे से नहीं
- 1:45:33मिलेगा वटक हो के दूसरा वटकन है मातृ वटकन चढ़ते ही चले जाना।
- 1:45:45जब तक सब्र का प्याला तुम्हें मिलना चाहिए और ये प्याला ऐसा के
- 1:45:53इस प्याले को पीकर सभी तमन्नाएं भर जाएंगी।
- 1:46:01सभी इच्छाएं। पूरी हो जाएंगे होंगी सिर्फ
- 1:46:11तुम्हारे अपने पास पहुंचने से आखिरी शब्द नोट कर लेना तुम्हें
- 1:46:18तुम्हारे पास पहुंचने से। ही मिलेगा सब कुछ आज सुन लो फिर
- 1:46:24सुन लो कबीरा मगन मग्न कबीरी मैं। मन्नड़ लाग्यो मेरा।
- 1:46:42फकीरी में। सब कुछ होगा बाहर तुम्हारे पास
- 1:46:47लेकिन बाहर का सब व्यर्थ हो जाए उसे फकीरी कहते हैं ऐसी फकीरी
- 1:46:54चाहिए। धन्यवाद।