Latest / Baba ji Vijay Vats / 31 Mar 26 - मोह का बंधन और बिछोड़े का दर्द। सत्य की पहचान और समाधान। Must Watch
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- 0:12बाबा जी प्रणव बाबा जी आपने हमारे भीतर के बंधनों को तार तार करके।
- 0:32तोड़ दिया और हमें पता भी न चला, मेरे पुत्र की मृत्यु हो गई।
- 0:53ये बिछोड़े का दर्द इतना क्यों होता है?
- 1:02इस प्रश्न का जवाब और दे दीजिए। मान्यताएँ हैं पुत्र मान्यता तुम
- 1:27इस संसार में आते हो तो तुम निर्बोध हो धीरे धीरे।
- 1:42मान्यताएँ जुड़ती जाती हैं। तुम्हारे मन, मस्तिष्क और जवान ही
- 1:56आते आते, तुम मात्र मान्यताओं का पूंज ही रह जाते हो।
- 2:10तुमने पूछा पुत्र ये बिछोड़े का दर्द इतना क्यों होता है?
- 2:20कहीं चैन नहीं आता और लोग तो कहते हैं।
- 2:29यह बिछोड़े का दर्द शिव भूमि में साथ ही जाता है।
- 2:35श्मशान भूमि में साथ ही जाता है। हाँ पुत्र।
- 2:45अज्ञानी के साथ ही जाता है ज्ञानी के साथ तो उसी वक्त ही खत्म हो
- 2:55जाता है। जीस वक्त वह जान लेता है।
- 3:01ओह एमआइ इन अरे यार। ऑथेंटिकली प्रामाणिकता के रूप में
- 3:12मैं कौन हूँ मान्यताओं के रूप में नहीं मान्यताएँ एक हैं।
- 3:25मान्यताएँ अनेक हैं, सत्य एक है इसलिए संत कहते हैं एक ओंकार वही
- 3:39सत्य है। सतना।
- 3:49बिछोड़े का दर्द तुम्हारी मान्यताओं के टूटने का दर्द है।
- 4:07जब तुम्हारे बच्चा पैदा नहीं होता तो तुम यहाँ कहाँ जाके माथा ढोकते
- 4:15हो? मन्नत मानता बच्चा हो जाता है।
- 4:22उसमें तो मय भाव का आरोपण कर रहे थे।
- 4:29और वह मैं बढ़ता बढ़ता जान से भी प्यारा हो जाता है इसलिए माँ अगर
- 4:42कोई ऐसी परिस्थिति आ जाए के बच्चे के ऊपर तकलीफ हो।
- 4:51तो माँ बच्चे को बचा लेगी खुद मर जाएगी।
- 4:58इसका कारण है। तुमने जन्म लिया तुम्हारी कोई
- 5:12मान्यता नहीं थी, देर बहुत थे, इनोसेंट थे इसलिए जीसस क्राइस्ट
- 5:21ने कहा, ओनली दे विल एंटर इन मैं गार्ड्स।
- 5:27विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चार तुमने जन्म लिया था तो कोई
- 5:41मान्यता न थी धीरे धीरे माँ बाप ने समाज ने।
- 5:50और कुछ देखा देखी कुछ पढ़ा पड़ी कुछ सोना सोने ये मान्यताओं की
- 5:59क्या है? तुम्हारे भीतर निरंतर जुड़ती रही
- 6:03और आज पहाड़ बन गई। मैं भी कहता हूँ सभी संत कहता हूँ
- 6:20जीवन का लक्ष्य इन मान्यता को तोड़ने में है कहाँ टूटती है
- 6:29तुम्हारी मान्यता, कैसे टूटती है तुम्हारी मान्यता।
- 6:35इसके लिए यत्न करना चाहिए। जहाँ तुम्हारी मान्यताएँ टूट
- 6:42जाएं, वो ही तुम्हारे लिए पुण्य भूमि है और वो ही तुम्हारे लिए
- 6:47गुरु भूमि है। जहाँ जाकर मान्यताएँ और दृढ़ हो
- 6:54जाएं, वो तुम्हारे लिए पूर्णभूमि नहीं है।
- 7:07बड़े बड़े बंदरों में जाकर तो तुम्हारी मान्यताएँ बढ़ जाती हैं
- 7:14और एक बात को ध्यान में रख लेना। जितनी मात्रा में मान्यताएँ हैं,
- 7:25तुम्हारी उतनी मान्यता के अनुपातिक रूप से तुम दुखी हो।
- 7:36कम मान्यताएँ हैं तो कम दुखी हो बहुत है मान्यताएँ तो तुम बहुत
- 7:46दुखी हो। बच्चा सुखी क्यों है?
- 7:50क्योंकि बच्चे पे कोई मान्यता नहीं है।
- 7:53क्यों कहा इसने बच्चे की तरह हो जाओ, कोई मान्यता शेष न वचन तुमने
- 8:03पूछा पुत्र ये बिछोड़े का दर्द क्या होता है?
- 8:09लोग कहते हैं ये तो। श्मशान भूमि में साथ ही जाएगा।
- 8:17हाँ अज्ञानियों के तो साथ ही जाएगा पुत्र लेकिन यहाँ से बड़ी
- 8:28बात समझ लेना। ज्ञानी जो जान गया है वस्तु तह
- 8:36तुम कौन हो उसको तो घटना के घटते ही किसी प्रकार का अंतः का दुख
- 8:53नहीं होगा, वह जानेगा। यह माटी के खिलौने हैं।
- 9:02आज नहीं कल टूट जाएंगे लेकिन टूटेंगे कोई गरीबी में टूटा?
- 9:13कोई बिल गेट्स बनके टूटा, कोई बिल क्लिंटन बनके टूटा, कोई थोड़ी
- 9:24उम्र में टूटा, कोई वर्धावस्था में टूटा लेकिन टूट सभी जाते हैं।
- 9:37क्योंकि माटी के खिलौने और माटी के खिलौने 1 दिन टूट जाया करते
- 9:46हैं। बिछोड़े का दर्द इतना क्यों होता
- 9:55है? जितनी चिपकाहटे तुमने अपने पुत्र
- 10:02के साथ बना ली उतनी ही मात्रा में तुम दुखी हो गए।
- 10:11और सांसारिक लोग बहुत कुछ मान्यताएँ बना लेते हैं।
- 10:20अपने बच्चों के बच्चे फिर काँटा चुभता है बच्चे को।
- 10:30दर्द होता है माता पिता को इसका कारण है तुम्हारी मान्यता तुमने
- 10:50एकाकार कर लिया अपने पुत्र के साथ।
- 10:59तुम्हारा पुत्र, तुम्हारा पुत्र नहीं है, तुम ही हो और तुम्हारा
- 11:07पुत्र नहीं मरा है, तुम ही मरे हो।
- 11:16इसका कारण है पुत्र तुमने पूछा क्यों अज्ञान है?
- 11:21इसका कारण यही तो अर्जुन को था। अर्जुन थर्रा रहा है तो कृष्ण ने
- 11:33पहले उसे अपना आफत दिखाया। हे पार्थ तू देख सत्य काहे?
- 11:49और अर्जुन को अपना आपा दिव्या कोई भी व्यक्ति अपना आपा कभी भी देख
- 11:56सकता है। तुम देखना नहीं चाहते वह बात अलग
- 12:06है। तुम पोस्टपोन कर देते हो चीजों को
- 12:15घटनाओं को वह बात हो रहा है इसलिए मैंने बहुत बार कहा प्यास सी जगह।
- 12:29खाली शब्दों को खोपड़ी से खुजलाते खुजलाते मेरे से प्रश्न करोगे तो
- 12:39शब्द तो तुम जोड़ लोगे, सत्य ना जान पाओगे?
- 12:50तुमने पुत्र को मैं की तरह मान लिया और ऐसी ही तुम्हारी
- 12:57मान्यताओं बाहर संसार में। अनंत अनंत चीजों में तुम इन्वेस्ट
- 13:10किए हो अपनी आँखों को तुम कहते हो ये धन भी मैं हूँ इसमें से कुछ
- 13:19चोर चोरी करके ले जाता हूँ। तो तुम रोते हो, छाती पीटते हो,
- 13:33तुम्हारा कुछ गुम हो गया, तुम्हें व्यापार में घाटा पड़ गया।
- 13:40तुम्हारी दुकान को आग लगता है तो तुम छाती पीटते हो।
- 13:47जहाँ जहाँ भी तुमने अपनी चेतना को बांधा, मैं के रूप में यह दुकान
- 13:55में हूँ इस दुकान के अंदर पड़ा हुआ माल मेरा है, यह बैंक बैलेंस
- 14:02मैं हूँ। तो उस बैंक बैलेंस को कोई धोखे से
- 14:09निकलवा ले तो तुम रहोगे चलाओगे भागोगे दौड़ोगे किसी ने तुम्हारा
- 14:23खाता हैक कर लिया? जहाँ जहाँ भी तुमने अपनी चेतना को
- 14:36बांध रखा है, लिप्त कर रखा है, वो पदार्थ हो, वो बेटा हो, वो बेटी
- 14:43हो, वो पत्नी हो, वो जमीन जायदाद हो।
- 14:49जहाँ जहाँ भी तुमने बांध रखा है अपनी चेतना को उस वस्तु के या उस
- 14:58प्राणी के खिसकने से तुम्हारा मैं खिसकेगा तुम कहो कि मैं मरा।
- 15:09और पुत्र यह बिछोड़े का दुख इसका कारण यह है प्राणियों के साथ
- 15:20पदार्थों के साथ में भाव प्रत्यारोपित कर लेना।
- 15:30और पुत्र ये झूठ शक्ति जो मानोगे, तुम और उसको प्राप्त करने का यत्न
- 15:49करोगे तो वह तुम्हें दुख नहीं देगा।
- 15:53वह तुम्हें मुक्त कर देगा। अगर तुमने गलत चीजों को मांग लिया
- 16:02और उसको प्राप्त करने की दिशा में चल पड़े तो तुम दुखी होकोगे
- 16:09क्योंकि वो चीजें हैं। अब कोई विष्णु को सिद्ध करने चला
- 16:19है, कोई ब्रह्मा को सिद्ध करने चला है, कोई अन्नपूर्णा को सिद्ध
- 16:25करने चला है, कोई दुर्गा लक्ष्मी को सिद्ध करने चला है।
- 16:38उनके ये भ्रम टूटेंगे क्योंकि लक्ष्मी दुर्गा ये खुद में ही
- 16:43भ्रम है। दीज़ आर ऑल सिम्बोलिक
- 16:48रेप्रेसेंटेशन्स सिम्बोलिक अब्रीविएशन्स।
- 16:56जैसे हम शॉर्टकट में नहीं रखते, ऐसे ही ऋषियों ने शॉर्टकट में लिख
- 17:01दिया जैसे साइंटिस्ट ने पानी को एच टू ज्यादा सटीक है, रचनात्मक
- 17:11रूप से, रसायनिक रूप से। दुःख गना होता है बिछोड़े का दुःख
- 17:27क्योंकि गलत है, जब टूट जाता है तो तुम्हारे हृदय में टीस उठती
- 17:39है। तुम्हें दर्द होता है, कलेजा चिर
- 17:44जाता है और तुम आग की लपटों में बिरहा की आग की लपटों में तुम
- 17:53लगातार जलने लगते हो। और यह झूठ है आज तलक तुम्हारी
- 18:06कितनी पीढ़ियां हैं पता नहीं हज़ारों लाखों करोड़ों कोई नहीं
- 18:15जान। कि यह दुनिया कब बनी थी, सिर्फ
- 18:22एस्टीमेट्स हैं, क्योंकि अलजेब्रा का सवाल हल करने के लिए कुछ
- 18:33सुपोज़ करना ही पड़ता है। अन्यथा सवाल हल नहीं होगा तो
- 18:40वैज्ञानिक ने सुपोज़ कर दिया, कन्फर्म नहीं है ये कहेंगे ये तो
- 18:51छह अरब साल पहले विस्फोट हुआ था। एक बोला था सडन एक्सप्लोजन हुआ और
- 19:04खंड खंड हो गया, तारा बन गया, सूर्य बन गया।
- 19:08आकाश मंडल ब्राह्मण बन गया। बढ़ता ही जाता है।
- 19:16हिंदू कहेंगे यह चेतना का पुंजतः संकल्प किया एको अहम् भविष्यन वह
- 19:26एक से अनेक हो गए। इस्लाम कहेगा उस एक ने संकल्प
- 19:39किया, हो जा और प्रकृति हो गई। लेकिन पुत्रवाद से मिले सत्य कोई
- 19:53भी नहीं, वैज्ञानिक भी झूठे हैं, धर्म भी झूठा है, किताबें भी झूठी
- 20:06है, शास्त्र भी झूठा है। सब झूठे फिर तुम बिछोड़े के दर्द
- 20:19में बिरहा के गीत गाता। दिल को दिए क्यों दुःख बिरहा के
- 20:39छोड़ दिया क्यों? महल बना के दिल को दिए क्यों दुःख
- 20:55बिरहा के। छोड़ दिया क्यों महल बना के आस
- 21:13दिला के? ओह बेगर दे आंसू दिला के ओह बेहतर
- 21:33दे फिर लिखा। ये नजरिया दिल को दिए क्यों दुख
- 21:52बिरहा के। छोड़ दिया।
- 22:00क्यों महल बना के आंसू दिला के ओह बेदर्दी?
- 22:18आस। दिला के हो बेधर दी आस दिला के हो
- 22:30बेधर दी। फिर लिखा ये नजरिया, फिर लिखा
- 22:50नजरिया। मैं भूल गए, सांवरिया भूल गए
- 23:09सांवरिया। आवन कह गए आज हो न आए आवन कह गए
- 23:29आज हो न आए। ले नाहीं मैं खबरें आ महे हो गए।
- 23:52हमारे यहाँ कॉलेज में। एक लेक्चरर थी, उसको अपने पति से
- 24:02मोह ज्यादा था। संतों ने कहा मोह दुख का कारण है।
- 24:10क्यों? क्योंकि मोह व्यस्त है, झूठ है,
- 24:19सत्य है कि तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं तुम्हारे शरीर तक हमारा कुछ
- 24:25नहीं तुम्हारा शरीर भी तुम्हारा एक वस्त्र मात्र है तुम्हारा
- 24:31शरीर। तो दूसरे का शरीर तुम्हारा कैसे
- 24:35हो सकता है? वासन, शी जिरणानी, अथम, बिहाय,
- 24:44वासन शी जिरणानी, अथम बिहाय। नवानी, घृणाती, नरो प्राण तथा
- 24:53श्री रानी विहार, गिरणा, अनन्याणी, संयाति, नवानिते जैसे
- 25:07तुम प्राणी वस्त्र उतारकर कटे फटे।
- 25:13मैले पहले वस्त्रों को उतार कर नए धारण कर लेते हैं, वैसे ही यह
- 25:27जीवात्मक देह प्राणी वस्त्रों को उतार कर नए वस्त्र धारण कर लेती
- 25:34है। जब तुम्हारा शरीर ही तुम्हारा
- 25:42नहीं तो दूसरे का शरीर तुम्हारा कैसे होगा जब तुम्हारा अपना।
- 25:54शरीर के ऊपर लगा हुआ यह पदार्थ तुम्हारा अपना नहीं है।
- 25:59तुम नहीं हो तो बाहर के पदार्थ तुम कैसे होगे, तुम्हारे कैसे
- 26:05होंगे, यही मोह है और यह मोह दुख का कारण है।
- 26:14तो मैं एक छोटे से बात बताऊँ, तुम चकित मत हो।
- 26:22अदालतों को बंद कर देना चाहिए इसकी जरूरतें नहीं हैं कोई क्यों?
- 26:32क्योंकि तुम्हारे सारे हिसाब हैं, तुम्हारे सब झगड़े पागलपन हैं।
- 26:42दुख ये ड्रामेबाजी है। ये थोप नहीं है ये सत्यिन तुम
- 26:59तलाक का किस करते हो, ये तो घरवाला मेरा था, ये तो घरवाली
- 27:08मेरे से। इसने मेरे से धोखा किया, तलाक की
- 27:16अर्जी दे देते और आगे से न्याय देने वाले जज बड़े उल्लू हैं।
- 27:27तुम छोटे उल्लू हो। यह उल्लू के पट्ठे हैं क्यों?
- 27:44क्योंकि सत्य को जानते नहीं तुम भी माने हो के हाँ यह तुम्हारी
- 27:54घरवाली। और यह भी मान लेता है जीसको तुमने
- 28:03न्याय की कुर्सी पर बैठाया के हाँ, इसने फेरे लिए थे वायदा किया
- 28:13था। उन्होंने पाया नहीं है।
- 28:16फिर जो फैसला होता है वह न्याय नहीं होता, वह फैसला होता है।
- 28:25इस विश्व की कोई भी किच्चे हैरी कोर्ट।
- 28:33कभी भी न्याय नहीं होता और अगर थोड़ा सा मैं ज्यादा सत्य कह दूं
- 28:42तो बस सिर्फ फैसला ही हुआ करता है।
- 28:51तुम कितना ही खुश हो लो। तालियां पिट लो, जश्न मना लो,
- 29:01लेकिन वह न्याय नहीं मिला। तुम्हें फैसला हुआ है सिर्फ।
- 29:12क्योंकि भान्ति में तुम हो जिसने दावा किया भान्ति में ही वह है
- 29:22जिसने फैसला किया दोनों भान्ति से युक्त हूँ तो न्याय होगा ऐसा।
- 29:30न्याय होता है ज्ञानी व्यक्ति के द्वारा जो जानता है सत्यम बिछोड़े
- 29:47का इतना दर्द क्यों होता है? कुछ लोग तो कहते हैं यह श्मशान
- 29:54घाट तक साथ ही जाएगा। हाँ, अज्ञानियों के तो साथ ही
- 29:58ज्यादा, लेकिन ज्ञानियों के साथ साथ का यही नहीं होता।
- 30:07साथ जाना तो बहुत दूर की बात है। गांधारी बड़ी खुश थी कि मैंने
- 30:21वासुदेव को श्राप दे दिया। वासुदेव जानते थे, गांधारी को भी
- 30:32थे। क्योंकि गांधारी समझती है कि वे
- 30:36पुत्र मेरे थे और गांधारी वो पुत्र मेरे थे।
- 30:43इसके लिए हजारों दलील देते हैं, तुम क्या जानो मैं तो ना हूँ।
- 30:54माँ का दर्द तुम पुरुष क्या जानो और गांधारी मशविरा देती है, कृष्ण
- 31:07को मशविरा देती है, कृष्ण जैसे लोगों को मशविरा देने वाले लोग
- 31:14ज्यादा हैं। कृष्ण जैसे लोगों को गलत बताने
- 31:21वाले लोग बहुत ज्यादा है। अब देखना तुम कैसे कैसे कमेंट आते
- 31:26थे ये तो मैंने हल ढूंढ लिया। गोठा लगा देता हूँ चुपचाप?
- 31:37भाई तुम पहले से ज्ञानी हो, वक्त खराब न करो, किसी और गोरों के पास
- 31:49चले जाओ, वैसे भी यहाँ हाउस भुला है।
- 32:01तो कहती माता से पूछना देवकी से जा के जब उसके छह पुत्रों को जन्म
- 32:10लेते ही उसने दीवार से पटका, पटका के मारा था तो पूछना देवकी से?
- 32:26कि यह पीड़ा पुत्र योग होता क्या है जब देवकी के अंडे फूट गए थे?
- 32:42बड़े शान कृष्ण सुंदर गंधारी कहती कि मैंने हे वासुदेव अपनी आँखों
- 32:57से अपने 100 पुत्रों को मरते हुए देखो।
- 33:03अतः मैं तुम्हें श्राप देता हूँ जैसे मैंने अपने कुल्ल् को अपनी
- 33:14ही नगनाओं से मरते हुए देख। वैसे तुम भी अपने फूल को अपने ही
- 33:22आँखों के संग मरते हुए देखो कृष्ण ने गौर से देखा माँ की तरफ कृष्ण
- 33:37ने हाथ जोड़े। चरणी छुए।
- 33:43कर वध करके खड़े हो गए। अब मस्तुमाते ऐसा ही होगा माते
- 34:01क्योंकि कृष्ण जानते हैं कसूर गंधारी का नहीं, गंधारी के अज्ञान
- 34:09का कसूर। और कसूर देवकी का भी नहीं है, ये
- 34:14कहती है कि देवकी से पूछना, देवकी भी कहाँ भी ज्ञानी हो गयी है?
- 34:23वो भी इसी की भांति अज्ञानी है। उससे पूछने की मुझे कोई आवश्यकता
- 34:31नहीं है। मैं जानता ही हूँ, मेरे पिता
- 34:35वासुदेव भी है ज्ञानी इसमें पूछने बताने की कोई जरूरत नहीं है, मैं
- 34:43जानता ही हूँ। तो कृष्ण कहते हैं ए व मस्तु
- 34:49मारते ऐसा ही है लेकिन गांधारी चकित होते।
- 35:08मैंने इतना बड़ा श्राप दे दिया और मैं सदी शास्त्री हूँ, इतने साल
- 35:17से आँखों पर पट्टी बांध रखी क्योंकि मेरा पति धृतराष्ट्र अंधा
- 35:23था। मैंने पति व्रत धर्म का पालन
- 35:27किया। मैं तुमसे एक बात कहूं पति व्रता
- 35:33तो रहना, लेकिन पति व्रता का अहंकार मत पाल लेना।
- 35:42यह अहंकार दंश देगा आपको बट्टिका के।
- 35:49पति व्रत तो रहना, लेकिन पति व्रता का अहंकार मत पाल लेना
- 35:55गांधारी की तरह अब गांधारी कहती है धृतराष्ट्र जन्म से अंधा था।
- 36:09मुझे जब पता चला मेरा पति अंधा है, मैंने देखा शकुणी की बहन थी
- 36:20गांधार्य गांधार्य नरेश की पुत्र। आँखों पे पट्टी बांध रहे मैं
- 36:33गांधारी को महाभारत में सबसे बड़ी मूर्ख मानता हूँ क्यों?
- 36:46अरे मूर्ख? तेरे पति को दिखता नहीं था तो तू
- 36:54भी आँखों पर पट्टी बांध ले यह समझदारी का काम है कि मूर्ख था
- 37:04उसको देखता नहीं था तेरे को देखता था।
- 37:07तुम उसकी आँखें बनके रहती तो अच्छा था।
- 37:12परमात्मा ने तुझे तो आँखें दी थीं, लेकिन कुछ भी बेवकूफों में
- 37:20बेवकूफियां सिखाते रहते हैं और तुम उनको मानते रहते हो?
- 37:26ये देखो पांच नाम जप लो परमात्व में जाएगा और देखो मेरे शब्द
- 37:33रिकॉर्डेड हैं ना कभी किसी को मिला है नाम जब से नाम जब से पांच
- 37:42नाम से छोड़ो। राम हो रहीम हो, अल्लाह हो अकबर
- 37:47वह गुरु हो सतनाम कृष्ण हो कबीर हो राधे हो कृष्ण हो खुश हो नाम
- 38:00जब से न मिला है नयम मिलेगा? और मेरे को ज़रा भी आपत्ति नहीं
- 38:06है। अगर तुम राधे राधे करते रहो मुझे
- 38:10क्या अगर गांधारी आँखों पे पट्टी बांध रे आँखें होते हुए तो
- 38:19परमात्मा मूर्ख है क्या? पर महात्मा ने धृतराष्ट्र को उसके
- 38:26कर्मों का फल दिया तो गांधारी ने कोई स्याणक भरती गांधारी से बड़ी
- 38:34पागल। निकली मैं बनूंगी पिया।
- 38:44जीवन के डगर पे तुम को साथी की जरूरत।
- 39:00होगी। साथी की जरूरत हो दिया।
- 39:10कैसे जलेगा अकेला बाती की? जरूरत होगी, बाकी की जरूरत होगी।
- 39:32मैं बनूँगी प्यार। तेरे।
- 39:38पथ का। दिया मैं बनूँगी पिया तेरे।
- 39:46पथ का दिया दिया पथ पे जलाने दे साथी ना समझ।
- 40:00कोई। बात नहीं मुझे साथ तो आने दे।
- 40:10जसपथ पे चला लेकिन। मूड गुरुओं ने अंत भक्त पैदा कर
- 40:23दिया मंदबुद्धि उन्होंने सिखाया होगा पतिव्रता यह पुरुष की एक चाल
- 40:37थी। पुरुष की चाल थी।
- 40:46स्त्रियां स्वभाव से थोड़ी सी जल्दी समझ जाती हैं, मान लेते हैं
- 40:55इसलिए जहाँ। गुरू डम की बहुत आय तो होगी वहाँ
- 41:01आपको स्त्रियां ज्यादा मात्रा में मिलेंगी।
- 41:03ऐसा नहीं है के पृष्ठ नहीं होते, लेकिन मात्रा ज्यादा मिलेंगे
- 41:12क्योंकि स्त्रियां स्वाभाविक रूप से रिसेप्टिव वृद्धि की होती हैं।
- 41:17गुरु ने कह दिया कि ठीक अब कल ही एक शब्द कोई महाराष्ट्र में महिला
- 41:26आयोग की अध्यक्ष है। के कुछ ऐसा।
- 41:35है। उसकी वीडियो पकड़ी गई।
- 41:42और गुरु का नाम भोंधु नाथ मैंने कहा अभी तू भोंधु कहा तुम तू तू
- 41:49हमसे शरण है, हंस रहा तू भोंतु कैसा रहा क्या रे?
- 41:58तेरी 58 सीडीज़ तो मिल गई, तू तो हमसे सियाणा निकला नाम है
- 42:09बुंदुनाथ और उस स्त्री ने रिजाइन दे दिया और देखिए।
- 42:20नाले चोर नाले, चतुराई उल्टा चोर कोतवाल को नट सफाई दे रही है तो
- 42:32वहाँ से समझा आता है यह जरूर। अंत भक्ति में नीम आनंद में
- 42:44केंद्रित अपने स्वभाव में ठहरी हुई होगी।
- 42:51शब्द क्या थे? वह मेरा गुरु है।
- 42:55भोंदू नाथ उसको खुश रखना मेरा धर्म है।
- 43:09मैं कह तो फिर पति को खुश रखना के सभी को खुश रखना।
- 43:21यही मूड़ मतियाँ तो गुफाओं को बनाने पर बाधित हो जाती हैं।
- 43:32गुरू में हड़पना होता है तुम्हारा प्रश्न और तुमसे वचन ले लेता है
- 43:41कि बोलू तुम्हारा धन। तुम्हारा नहीं है आज के बाद मेरा
- 43:49कहते ठीक बस नाम धन दे दो धन तुम्हारा और वो कहते फिर ठीक धन
- 43:58मेरा हाँ कहा था ना हाँ। तुम सत्यवादी हो ना?
- 44:03हाँ, पहले पक्का कर लेते हो तो ठीक है, फिर तुम जाओ और ऐसी ही
- 44:10कहानियों पैदा होती हैं हरिश्चंद्र, तारामती और सिंघाचीन
- 44:17पर बैठ के विश्वामित्र कहते हैं, जाओ तुम क्या लगते हो?
- 44:24बेचारा हरिश्चंद्र तारामती को साथ लेकर चल पड़ा।
- 44:30यह बुद्धुओं की कहानियों और कितने दुख से है?
- 44:38उसके पुत्र को सांप डस गया। और ये लोग कहेंगे लीला हो रही है
- 44:44लीला तो फिर सब कुछ हो रहा है भाई कोई ऐसा थोड़ी है?
- 44:48जगत में एक लीला होती है और एक कहानी होती है एक जीवन होता है,
- 44:55ऐसा कुछ नहीं होता। फिर लीला है तो फिर पूरी ही लीला
- 45:00है। अगर पूरा जीवन है तो फिर पूरा ही
- 45:04जीवन है कहानी है, तो पूरी कहानी है, तुम संदेश हद मत किया करो।
- 45:22अपने गुरु को प्रसन्न रखना मेरा स्वाधर्म में है और स्वधर्म में
- 45:31निधनम श्रेय पर धर्म में ब्याह क्या कमाल है पुत्री।
- 45:38मैं तो तुम्हारी अक्ल के ऊपर बलिहारी चला गया इतना ही शानदार
- 45:44तक और फिर बताओ मुझे एक बात का जवाब दे दो, अगर गुरु को प्रसन्न
- 45:53करना तुम्हारा धर्म था तो फिर ये छुप छुप के क्यों हो रहा था?
- 46:00बाहर वेड़े में आ जाते हैं। ये छुप छुप के क्यों हो रहा है?
- 46:12ये लोगों को विचारों को अंडरग्राउंड फिक्स कैमरे करने
- 46:16पड़े हैं। अगर गुरु को प्रसन्न करना
- 46:25तुम्हारा धर्म था खुश करना तो पुत्री ये फिर छुप छुप के खुश
- 46:34क्यों कर रही सरेआम खुश कर देते। कुछ और लोग भी खुश हो जाते थे।
- 46:42तुम्हें देख भ्रांतियां भी टूट जाती हैं गुरु को खुश करना।
- 46:52चाहे मेरी जान जाए, चाहे मेरा दिल जाए।
- 47:02पन्ना की तमन्ना है? के हीरा मुझे मिल जाए।
- 47:11चाहे मेरी जान जाए चाहे। मेरा दिल जाए।
- 47:18तर्क तो ठीक है, बेटी। पर यहीं से अंदाजा हो जाता है मंद
- 47:26बुद्धियों का और कोई सींग थोड़ी लगे होते हैं।
- 47:29पागलों के पागलों के सींग लगे होते हैं नहीं।
- 47:35अपनी बातों से ही पहचान में अपनी तर्कों से ही पहचान में आ जाया
- 47:40करते हैं। मूर्खों के संग नहीं होते तो
- 47:46पुत्री अगर गुरु को खुश रख ना तुमने वरदान दिया था वचन दिया था।
- 47:56और तुमने निभाया अच्छा किया, लेकिन फिर ये छुप छुप के क्यों?
- 48:10और फिर क्या तुम्हें पता था कि 58 और भी हैं इसे खुश करने वाले?
- 48:18तुम अकेली नहीं, क्या करेंगे? बेचारे मर्यादा पुरुषोत्तम अगर
- 48:30फिर से आ गए मोदी जी ने राम मंदिर तो बना दिया और कोई वहाँ भक्तिजन
- 48:39पहुँच गया। उसने श्रेष्ठ हृदय से पुकार कर ली
- 48:43और भगवान राम कहीं आ गए तो बिल्कुल सही कहता हूँ।
- 48:49इन महिला मंडल आयोग के प्रधानों को देखकर फिर फिर से सरयू में
- 48:57छलांग लगा ली। पक्का ऐसा मत फिर फिर से छलांग
- 49:09लगा लेंगे। अरे एक पत्नी थी, उसको भी तुमने
- 49:13निकाल दिया, वो भी सिर्फ एक धोबी के।
- 49:18और इलज़ाम तो तुम कितने भी लगाओ लेकिन नाम की गर्मा के ऊपर तुम
- 49:24कोई आगाज नहीं कर सकोगे। राम पर मर्यादा पुरुषों तुम कोई
- 49:31शक नहीं। लेकिन वो इतने शर्मशार होंगे।
- 49:35देवी देवी मेरे तो देवी है यत्र नारीयस्थ पू ज्यंते नेबरसन्ति
- 49:51तत्र देवता। मेरे लिए तो तुम पुत्र हो, तुम
- 49:58अच्छी हो, तुम बुरी हो, लेकिन मेरी ही कायनात की सर्जिना मेरे
- 50:05ही हाथों ने तुम्हें बनाया है, लेकिन अगर कहीं भगवान राम म तो
- 50:15मुश्किल खड़ी। धर्म ध्वजा उनके हाथ में लेकर वो
- 50:21सरयू के गुप्त घाट में वहीं ठुकेंगे फरजा अरे मूरखाना तो
- 50:30तुमने क्या बना दिया मेरी अखंड भारत भूमि?
- 50:40भरत घंटे जम्बू द्वीपे बड़ा जुलूस निकाला तुमने ये भ्रांते ऐसे ही
- 50:59गुफाएं नहीं पैदा हो जाया करती तो फिर अगर ऐसा हो।
- 51:07तो फिर मैं कहूंगा बापू आशाराम को छोड़ देना चाहिए, राम रहीम को
- 51:15छोड़ देना चाहिए। कत्लोगार्थ जो किया है उस मामले
- 51:23पर बाकी तो उन्होंने खुश किया है। छोड़ तो हाँ तो जब गुरु धारण कर
- 51:33लिया तो खुद से करना तुम्हारा धर्म है भाई एक कहाँ कहाँ से सिख
- 51:41आते हैं चाचा जन? दिन तो गुजर जाता है, लेकिन रात
- 51:46के बाद जाता है। कहाँ जा रहा तू जाने बा?
- 52:18कहाँ जा रहा तू? ए।
- 52:29अँधेरा हे मन का? दिया तो जला ले कहाँ जा रहा तू
- 52:46हैं जाने वाले? अँधेरा है मन का दीहा तो जला ले
- 53:01कहाँ जा? कसूर के से कने ना भोंदूनाथ का
- 53:08कसूर है। इस पुत्री का नाम मैं जानता हूँ।
- 53:12लेकिन इतना पता है कि महिला आयोग की अध्यक्ष है।
- 53:19महाराष्ट्र की बस और उसने त्यागपत्र दे दिया।
- 53:24इतनी ही मेरे पास इन्फॉर्मेशन आयी है, मैंने आपको बता दिया।
- 53:31न बंधुनाथ की गलती न इस देवी की गलती गलती है इन शरारती गुरुओं की
- 53:40जिन्होंने तुम्हारे अचेतन अवचेतन, चेतन कोलेक्टिव।
- 53:51अब चेतन अचेतन के भीतर ऐसी बातें को छोड़ दें।
- 53:58तुम्हें पता भी नहीं चलता कि कब कोई आकर तुम्हारे भीतर क्या
- 54:02घुसेड़ देता है और तुम खुले हृदय से उसे स्वीकार कर लेते हो।
- 54:12इसलिए तो दुनिया में ज्ञान कम है। 17 से ज्यादा दुनिया में ज्ञान तो
- 54:22है ही न, सही पूछो तुम ज्ञानी तो दिया।
- 54:27जलाकर ढूंढने वाली बात है। दिन में अज्ञान का ही प्रसार जन्म
- 54:42से लेकर आज तक कर्मजीत पुत्र। बहुत से आस पास के वातावरण में
- 54:58मान्यताएँ तुम्हारे भीतर एकत्रित हो गईं और आज स्थिति ये है।
- 55:08कि ये मान्यताएँ हिमालय पर्वत जैसी हो गईं।
- 55:12अब कौन इसको ढायेगा कौन इसको गलाएगा तो गुरु कहते हैं गुरु तो
- 55:20खुद ही बेचारे इन्हीं हिमालयों से पीड़ित हैं।
- 55:31तुम कहोगे बाद में हम दुखी हैं, वो कहेंगे तुम चरखड़ी थोड़ी सी और
- 55:36गुमना दो हाँ जल्दी मिल जाएगा दुख सो होता है बेटा।
- 55:49लेकिन ज्ञानी को दुख नहीं होता। सर कृष्ण का वंश यदु वंश।
- 56:06मुनियों के श्राप के कारण आपस में लड़ लड़ के कृष्ण की आँखों के
- 56:11सामने मर जाते हैं। कृष्ण के लिए यह एक मूवी है।
- 56:20तुम्हारे लिए जीवन है, कृष्ण के लिए सपना नहीं है।
- 56:25क्योंकि कृष्ण बेहोश नहीं होता। कृष्ण के लिए एक मूवी है जो जागते
- 56:31जागते देखता है क्योंकि वह स्वीकार करके आया था।
- 56:38अब मस्तु माते ऐसा ही होगा और ऐसा ही हो गया।
- 56:45खुद वैसा ही वातावरण क्रिएट कर देते हैं, क्योंकि किसी न किसी
- 56:50अंदरूनी छोर पर तुम अपने आपको बाहर कितना ही गुंडा लुटेरा पखंडी
- 57:00पागल। हत्यारा समझ लो लेकिन तुम्हें पता
- 57:09नहीं है भीतर से तुम वो आनंद के सागर प्रेम स्वरूप परमात्मा ही
- 57:17हो, बस सिर्फ तुमने उसको जाना नहीं है।
- 57:24तुम गुड़ रिद्रा में सोए हुए सपना देख रहे हो और सपने में तुम गुंडे
- 57:30हो के तुम दानी हो के तुम डाकू हो, कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 57:36फिर इस बेटी ने कहा वो सब सपने में कहा गया था।
- 57:45यह सत्य नहीं कितना ही पाप कर मैं पाप को एनर्जी नहीं दे रहा हूँ और
- 57:58नहीं मान्यता। लेकिन जो भीतर तुम्हारी दब गई है
- 58:07वासनाएं साइंटिफिक रूप से समझाने की चेष्टा करना राजा दशरथ जानते
- 58:22थे भीतर दबी हुई यह मान्यताएँ। बाहर निष्कासित हो जानी चाहिए तो
- 58:29उसने एक अलग से कमरा बना लिया था। जैसे तुम पुजारूम बनाते हो।
- 58:37उसने अलग सा कमरा बना लिया था। दशरथ और वशिष्ठ मनोवैज्ञानिक।
- 58:52वो जानते हैं कि बहुत से लोग समाज में अच्छा नहीं समझते, उसको
- 58:56दबाएंगे, लेकिन अलग से कमरे में जाकर उसको कैथोरसिस कर लो।
- 59:02अब मैं तुम्हें कहना चाहूंगा एक शब्द में पहले बोला था क्रायोग।
- 59:10क्रिया योग को करते रहना उसको छोड़ना मत ज़िन्दगी चली जाये तो
- 59:17अपने आप छोड़ दिया जायेगा, लेकिन जब तक तुम जिंदा हो, तुम
- 59:22स्वास्थ्य भी लेते हो और यह स्वास्थ्य ही है।
- 59:26थोड़ा सा लम्बा सवास खेचना और जागृत जागृत होके खेचना ओह सो ही
- 59:31सो स्वास्थ तो तुम सो ही सोए भी लेते हो तो इसको मत छोड़ना
- 59:39क्योंकि इन लोगों ने लालच के वश। जो ये वैक्सीनेशन लगवाई थीं, ये
- 59:50पूनावाला एंड पार्टी ने ₹400,00,00,000 ऐसा ही नहीं दिया
- 59:54था। इन्होंने इसमें कुछ ऐसा तत्व
- 59:59जहरीला मिला दिया है, इनके ऊपर हत्या का।
- 1:00:04मुकदमा चलना चाहिए अनीता बना तुम पुण्य का काम कर रहे हो पैनडेमिक
- 1:00:14का वक्त जबकि लोग कह रहे हैं लाओ वैक्सीन लाओ वैक्सीन।
- 1:00:22और तुम 400,00,00,000 दे रहे हो और भाग्य त्योहार तो मेरी बात सुन
- 1:00:30लो गंभीर है, मैं गंभीर ही रहता हूँ, मैं सत्य बातों को हँसते
- 1:00:37हँसते बोल दिया करता हूँ, लेकिन। तुम मजाक में मत लिया करो।
- 1:00:43बातों को वो जहरीला तत्व लोगों के भीतर उतर गया।
- 1:00:53मेरी आदत है मेरे शिष्यों की आदत है, मुझसे पूछ लेता हूँ।
- 1:01:01कि बाबा ये वैक्सीन लगवाने मैं बाबा से पूछा मैं तो मस्त मोला
- 1:01:11हूँ, दिन भर रात पिए जाता हूँ और जिए जाता हूँ।
- 1:01:23यह है मेरे यह है शराब का पीना, मेरी चुनरिया बेदाग है।
- 1:01:31लगा चुनरी में दा छिपाऊँ कैसे यह लगा?
- 1:01:42चुनरी में जा छिपाओ कैसे घर जाऊं कैसे लगा चुनरी में तुम तो?
- 1:01:59छिप छिप के पीते हो? मैं दरवाजा ही बंद कर लेता हूँ
- 1:02:06क्योंकि दिन भर रात पीता हूँ और इतनी पीता हूँ कि तुम सोच भी नहीं
- 1:02:11सकते, लेकिन यह पीना मुझे मुर्शीत नहीं करता, यह पीना मुझे।
- 1:02:20टोटली अवेयरनेस में ले जाता है। यह वो शराब है जो कभी नहीं उतरती
- 1:02:28एक बार की पी हुई छूटती नहीं है का फिर मुँह को लगी हुई यहाँ सटीक
- 1:02:34बैठता है गालिब का ये श्राप। छूटती नहीं है।
- 1:02:40कासिर मुँह को लगे हुए बस एक बार भी थी।
- 1:02:4385। उसके बाद एक पल के लिए भी मैं इसे
- 1:02:48छोड़ नहीं पाया तो अब जब पिता के घर में जाऊंगा।
- 1:03:06नानक ते मुख उजले कीर्ति छुट्टी नाम तो उजले मुख से जाऊ।
- 1:03:16क्योंकि मैंने तुम्हारी बेहोश करने वाली शराब नहीं पी।
- 1:03:22मैंने होश में लाने वाली शराब पी तो मैंने पूछा बाबा से बाबा ये
- 1:03:33वैक्सीन कहते लगाना भी मत और किसी को लगने देना भी मत जो तुमसे पूछे
- 1:03:41ठीक? जो मेरे दायरे में जिन्होंने मुझे
- 1:03:45पूछ लिया मैंने उनके वैक्सीनेशन नहीं लगने दिया, लेकिन अब सभी ने
- 1:03:51तो मेरे से पूछा नहीं मैं तुमसे बता दूँ लग गई है ये रोजाना हार्ट
- 1:03:58अटैक हो रहे हैं, ऐसे ही नहीं हो रहे।
- 1:04:04कल मेरे धर्मपत्नी का सगा भतीजा सोया था और बस उठा नहीं।
- 1:04:15क्या है ये वैक्सीन? नेशन के दुष्प्रभाव है।
- 1:04:2025 वर्ष की उम्र है। इसके प्रवाह को नष्ट करने के लिए
- 1:04:32बार बार नहीं बोलता। मैं मुश्किल किसी तरह याद आया तो
- 1:04:37बोलो वैसे तो 70% से ज्यादा मुझे सुनने वाले।
- 1:04:45क्रिया योग करते ही हैं। मैं कहता हूँ चाहे मुझे न सुनना,
- 1:04:50कोई बात नहीं, तुम अपने अंत में न झपाओगे लेकिन क्रिया योग जरूर
- 1:04:56करना जैसे तुम एक्सरसाइज करते हो। जैसे एक्सर्साइज़ करते हों, अन्न
- 1:05:07प्राणायाम करते हों, अनुलोम वनु विलोम करते हों, वस्त्र का करते
- 1:05:14हों, यह विशेष तरह के बाबा की खोज है।
- 1:05:20यह मेरी खोज नहीं है। इसलिए मैं तुमसे कह दूँ, अगर नहीं
- 1:05:26आता तो सीख लेना, रोहित से पूछ लेना।
- 1:05:30उसने कई वीडियो बनाई हैं, बस लंबे साँस लेने हैं, नाक से और मुख से
- 1:05:37छोड़ देना है सारा स्वास्थ। इतना सा काम है फिर कोरोना की
- 1:05:49देखें तो मैं बताऊँ, जिसमें जो क्रिया योग करते थे।
- 1:05:53कोरोना काल में उनमें से कोई भी व्यक्ति पीड़ित नहीं है।
- 1:06:01क्योंकि वैक्सीनेशन के दुष्प्रभाव इस स्वास्थ्य पर स्वास्थ्य से
- 1:06:07वातावरण में जाते रहे उनको कोई इफेक्ट नहीं पड़ा।
- 1:06:14लेकिन तुम अफेक्टेड हो और आज वैक्सीनेशन लगी को भी बहुत वर्ष
- 1:06:20बीत गए, जितना खराब हो गए अब और ज्यादा खराब न हो।
- 1:06:27वैक्सीनेशन के दुष्प्रभाव से अब जितना हो सके बच जाओ।
- 1:06:34क्रय योग करो, क्रय योग करना सीख लो जैसे हम स्वास्थ्य लेते हैं,
- 1:06:40सहज प्रक्रिया है, इसका कोई पैसा नहीं लेता हूँ।
- 1:06:43मैं सुदर्शन क्रिया की तरह मैं कोई व्यापारी नहीं हूँ।
- 1:06:48वो दुष्ट लोग हैं जो अपने आप को श्री श्री कह के सुदर्शन क्रिया
- 1:06:54के पैसे लेते हैं। अगर तुम भला करना चाहते हो जनता
- 1:06:58का तो फिर सर्वे शुल्क क्यों नहीं करवा देते?
- 1:07:03क्यों अपने एजेंट जोड़े हैं तुमने सब माया का खेल है भाई तो चाहे
- 1:07:11श्री श्री श्री कह दो। हमें क्या बस सब वक्त के आगोश में
- 1:07:19दफन हो जाएं, राख रह जाएगी, बाकी कफन हो जाएंगे।
- 1:07:31तुम कितने ही श्वेत वस्त्र पहन लो।
- 1:07:36जाओगे तो उससे भूमों में ही दफन हो या दहन हो, इससे कोई फर्क नहीं
- 1:07:42पड़ता। लेकिन अगर अपने आपको संत कहलाते
- 1:07:48हो तो तुम्हें शर्म हनी चाहिए। सुदर्शन क्रिया को लुप्त क्यों
- 1:07:57रखा गया? किसी भी मानव के लिए हितकारी चीज़
- 1:08:05को सार्वजनिक कर देना चाहिए। सुदर्शन क्रिया के पैसे क्यों
- 1:08:12लेते हो? क्यों मेंबर बनाते हो?
- 1:08:18तुम अपने शिष्यों की संख्या को बढ़ाना चाहते हो और तुम अपने आप
- 1:08:26को श्री श्री कहते हो? यह भी एक लोग है, पुत्र।
- 1:08:34यह है देख लो भाई, अपनी संख्या को बढ़ा लेना, इसका मतलब तुम संतुष्ट
- 1:08:43नहीं हो व्यक्तिशाली चूड़ में संतुष्ट होता है।
- 1:08:52गो धन, गज धन वाज धन और रतन धन खान जब आ वे संतोष धन सब धन दौड़
- 1:09:00समा अगर संतोष हो गया होता, पुत्र तो सुदर्शन क्रिया के पैसे न
- 1:09:06मांगते। बस यही लक्षण हैं जो मैं कहा करता
- 1:09:14हूँ, जो कृष्ण ने कहा कि गुरु बनाने से पहले लक्षण देख लेना हैं
- 1:09:24जीस मारा मारी के कारण हम धन कमा रहे हैं डिग्रीज़ कमा रहे हैं।
- 1:09:29मान सम्मान, प्रतिष्ठा सूचनाएं कमा रहे हैं।
- 1:09:34कहीं हम जैसा तो नहीं है? अगर हम जैसा है तो फिर ठीक है,
- 1:09:39फिर तो हम हैं ही और अगर ट्रांसफर्मेशन हैपन हो गया है तो
- 1:09:47फिर उसको गुरु बना लो। क्योंकि कुछ न कुछ कीमियां कुछ न
- 1:09:52कुछ रासायनिक परिवर्तन केमिकल ट्रांसफॉर्मेशन हुआ है।
- 1:09:57इसके भीतर वह गुरु बनाने के योग है।
- 1:10:03ज्यादा दिमाग के प्रबोध मत डालना। लक्षण देखना कृष्ण ने बहुत पहले
- 1:10:08बोल दिया कहीं हमारी ही तरह धन जोड़ने पांव पुजवाने पांव धुलवा
- 1:10:25के पीना। शिष्यों की संख्या बढ़ाना या फिर
- 1:10:33बंधुनाथ जैसे सुकर्म करना बात तो ठीक है, जब आवे संतोष जन।
- 1:10:46दोनों को संतोख मिल गया। भोंदूनाथ को भी संतोख मिल गया और
- 1:10:53इस देवी को भी संतोख मिल गया। ये पुण्य ही तो है नहीं, नहीं 76
- 1:10:59कहाँ मार रहे हो बड़े प्यार से बात करता हूँ भिगो भिगो के कहा।
- 1:11:06नहीं, कोई मलाई नहीं लगाई जब वे संतोष दंद्र देखिए भोंदूनाथ को भी
- 1:11:15संतोष हो गया उस महिला आयोग की, तुमने तो बाकियों की भी।
- 1:11:24तसल्ली करवादी पुतरी अब सही तो देखो जैसे एक प्रधान ने गलती की
- 1:11:30थी आज हमारे गदरबहा में जिसे प्रधान कह देते ना, वो कहते भाई
- 1:11:35देख प्रधान मत बोल कहता क्यों ए गाली मत निकालो?
- 1:11:42बाकी कुछ भी बोल ले तू प्रधान मत बोल।
- 1:11:48एक प्रधान ने यह फ़िल्म रखवाई थी किसी डॉक्टर के दुकान पे और सारा
- 1:11:54शहर समझ गया कि विधायक प्रधान नहीं बोलने बाकी जो मर्जी।
- 1:12:06चैन क्यों नहीं आता? बिछु का दर्द बना क्यों रहता है?
- 1:12:13कुछ लोग तो कहते हैं ये तुम्हारे संग ही जाएगा नहीं अगर तुमने अपने
- 1:12:22आप को जान लिया। टु नो दायस एल।
- 1:12:25सेल्फ रिमेम्बरिंग हू आर यू अगर तुमने वास्तव में जान लिया अगर
- 1:12:31तुमने खुद के साथ टग्गी नहीं मारी पहले खुद के साथ टग्गी मारना होता
- 1:12:36है, फिर तुम लोगों को धोखा देते हो पहले खुद को जलाना होता है।
- 1:12:43और तुम जलते हो, दुख देने वाले, क्रोध जलाने वाले, क्रोध पैदा
- 1:12:50करने वाले हार्मोन क्रिएट होते हैं, एंड्रनलिंग वो तुम्हें जलाते
- 1:13:01हैं, पहले तुम खुद जलते हो। फिर दूसरों को जलाते हो परिणाम
- 1:13:09तुम पहले भौंकते हो, तुम्हें पता नहीं चलता कट्टी साल ऐड नली यह
- 1:13:19तुम्हें जलाते हैं तुम ज़रा इसके इंजेक्शन लगवा के देखना डॉक्टर से
- 1:13:24पूछ ले से। डॉक्टर्स के उस केस के इंजेक्शन
- 1:13:28लगवा ले ना देखो कितनी जलन होती है पहले तुम खुद को दंड देते हो,
- 1:13:40फिर दूसरों को दंड देते हो, लेकिन अगर दूसरा।
- 1:13:47समझदार है तो वह मुस्करा देखो। बुध के ऊपर थूक जाते हैं।
- 1:13:57बुध कहते हैं अच्छा ये तो समझ गया और क्या कहना है भाई अब बता दो।
- 1:14:06तुम असल में किसी को गाली निकालते हो, कुछ ऐसी बात कह देते हो, मैं
- 1:14:14रोज़ देखता हूँ, उसकी ऐसी मिर्ची लग गई, भाई मिर्ची लगेंगी उसको
- 1:14:20जिसके लग सकती है। अब कृष्ण जैसे व्यक्ति को वृक्ष
- 1:14:23ही नहीं लगी, कुछ भी कहे जाओ तो भीतर रासायनिक तत्व और पैदा
- 1:14:38होते हैं। तुम अपने आपको दंडित पहले करते
- 1:14:43हो। ये बंधुनाथ अपने आप को दंड से
- 1:14:46पहले किया। इसने अपने ही भीतर बैठे उस
- 1:14:51परमात्मा का आनंद रथ नहीं किया और बेचारा कितना बेचारा है और कोई
- 1:15:00शब्द ही नहीं है। मेरे पास मैं क्या करूँ?
- 1:15:07बेचारा कितना बेचारा के बंधुपन से ही संतुष्ट होना पड़ता है तो यह।
- 1:15:23तुम्हारे संग नहीं जाएंगे पुत्र कृष्ण के संग नहीं जाते कृष्ण
- 1:15:29कहते हैं, ठीक अब मस्तूम आते और कुल का नाश होने के बाद अपनी
- 1:15:34आँखों से देखकर फिर लेट जाते हैं। और फिर अंत समय आ गया।
- 1:15:43फिर ज़रा नाम के व्याघ्र को कहते हैं कि चल तीर चला दे।
- 1:15:51अब हम अपनी लीला को समेटते हैं और वह ज़रा नाम का।
- 1:16:01शिकारी जहर बुझा तीर जलाता है जिससे कृष्ण की मृत्यु हो जाती
- 1:16:10है। जानते हुए मरो, जागते हुए मरो
- 1:16:19देखते हुए मरो। और अचानक से ये मृत्यु के क्षण
- 1:16:24में नहीं सधेगा तुमने कहा अंत मति सौगति लेकिन सहसा नहीं होगी ये
- 1:16:35सारी ज़िन्दगी में इसे सौंदना पड़ेगा।
- 1:16:39फिर मृत्यु के क्षण में तुम्हें याद आएगा सत जाएगी यह मति कि मैं
- 1:16:47शरीर नहीं हूँ तो वैसी ही गति होगी।
- 1:16:51फिर अगले जन्म में तुम ऐसे ही जागृत जागृत अगले जन्म में अगला
- 1:16:58जन्म ले पाओगे। अंत मति सौगति मति कैसी होनी
- 1:17:03चाहिए अवेयरनेस सांस को आते जाते देखो, देखो यह स्वास्थ्य कौन ले
- 1:17:12रहा है। चलते फिरते सोते उठते जाप नहीं हो
- 1:17:18सकता, चलते फिरते, सोते, उठते, बैठते, खाते पीते जागृति हो सकती
- 1:17:25है अपने गुरुओं से पूछना जो कहते हैं इसे चलते फिरते, उठते, बैठते,
- 1:17:32सोते, जागते करते ही रहना, उससे पूछना।
- 1:17:37कि तुम पहले ही इसे दिखाओ, खाना खाओ और राम राम करो, वो फेल हो
- 1:17:43जाएंगे। मैंने ऐसे ही किया, ओह गुरूजी ने
- 1:17:48हाथ जोड़ लिए, क्या तुम तुमने तत्व पा लिया?
- 1:17:54तुम अपना बस ऐसे ही चलते रहो भगवान भगवान चरई बैती चरई बैती
- 1:18:09चलते फिरते, उठते बैठते, सोते जगते खाते पीते नाम सिमरण नहीं हो
- 1:18:17सकता। अगर तुम्हारा गुरु तुम्हें कहे तो
- 1:18:22उससे पूछना कि अच्छा तुम नाम भी पांच नाम भी जपों और हमें दिखाओ
- 1:18:27ही तुम कैसे? दोनों चीजें जकसा होती है वो फेल
- 1:18:31हो जाएंगे, वो भाग जाएंगे डेरा छोड़ के।
- 1:18:37लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ कोई बात नहीं।
- 1:18:39अगर किसी से गलती हो गई तो व्यक्ति ह्यूमन इज़ टु एरर्स
- 1:18:47मनुष्य गलती का पुतला है तो मेरा कर्तव्य है, मैं इस गलती को सुधार
- 1:18:53करता हूँ, मैं कि इसकी निंदा ही करता हूँ।
- 1:18:59तो चलते फिरते, सोते जगते, उठते बैठते, खाते पीते नाम तो नहीं हो
- 1:19:05सकता, लेकिन जागरण सज सकता है। अब मैं बोल रहा हूँ और देख भी रहा
- 1:19:11हूँ। मैंने ऊँगली उठाई और अनामिका
- 1:19:15उठाई। और बायें हाथ क्यों उठाईं?
- 1:19:20यह भी जल रहा है, जुबां को बोलते भी देख रहा हूँ और शब्द कान सुन
- 1:19:27रहे हैं, ये भी देख रहा हूँ और बोल भी रहा हूँ ये हो गया ना सब
- 1:19:32कुछ इकट्ठा। ये जकसन हो गया ना?
- 1:19:37ये कहा था सही सन्तों ने बिगाड़ाया संतों ने व्यापारी
- 1:19:44संतों ने प्रोपकारीनी व्यापारी सन्तों ने इसे अपने जीवन यापन का
- 1:19:51या वासना को शांत करने का ढंग बना लिया।
- 1:19:55तो यह उनका व्यापार है, लेकिन इसका अर्थ मैं तुम्हें समझा देता
- 1:20:02हूँ चले जाना चाहे ढेरों में मेरे पास इतनी यहाँ जगह भी तो नहीं है
- 1:20:08हम हेल्पलेस है यार, इतने बड़े डेरे मेरे पास नहीं।
- 1:20:15कित्ते से हैं ये तुम ही मिलजुल के मैं तो भीतर बैठा रहता हूँ, कब
- 1:20:21ये बन गया? कब साथ वाला वहाँ बैठोगे?
- 1:20:25वहाँ लाइव पर वचन होंगे। लोग कहते हैं कि हम आपको।
- 1:20:32लाइव सुनना चाहते हैं। मैंने कहा कोई बात नहीं लाइव सुन
- 1:20:35लो, ये भी लाइव है। अभी तो हमारे पास साधन संपन्नता
- 1:20:39नहीं है तो मजबूरी है, वहाँ साधन होंगे तो हम आपके सामने बैठ गए,
- 1:20:46बोल देंगे, बोलना ही तो है। ध्यान रखना मैं कोई
- 1:20:55टेलीप्रॉम्प्टर का यूज़ नहीं करता, मेरे तो भीतर से ही आती है
- 1:21:00सारी सामग्री कैन्टेंट क्रिएटर हूँ मैं ऑथेंटिक कैन्टेंट
- 1:21:06क्रिएटर। तो वह भी तो में ही बना रहे हो।
- 1:21:17खुशी से है अमेरिका से कुछ यहाँ से ये सब इकट्ठे हो के सभी भक्त
- 1:21:23मंडली यह बना रही है अगर जिऊंगा। तो वहाँ बैठ के बोल दूंगा नहीं,
- 1:21:31वहाँ कब्र भी खुलवा रही है। बता रखा है कि भाई अगर श्री राम
- 1:21:39हो जाए तो फिर श्री राम कर देना तो वहाँ कब्र भी खुलवा दिया।
- 1:21:49वहीं बोलेंगे और अगर यह प्राण तो खेलूं, ईश्वर की लीला समाप्त करने
- 1:21:58की इच्छा हो गई तो फिर वहीं दफन कर देना क्योंकि आने वाली नसलें
- 1:22:07इस सदेंह ने जो एनलाइटनमेंट के वक्त अमृत पीया था, इस सबूंध के
- 1:22:14ऊपर सारा समुद्र उंडल गया था और इसका रोमा रोमा अरबों खरबों टनो
- 1:22:22टन अमृत पीया था। रोमा, रोमा वह लाखों लाखों सालों
- 1:22:28तक अव्यवों रेट होता रहेगा और जो भी इसकी जद में आएगा, उसको ध्यान
- 1:22:39में जाने में सुविधा होगी। तो मैं जीते जीते जो बोल रहा हूँ
- 1:22:46बोल रहा हूँ, कोई उपकार नहीं कर रहा हूँ, यह मुझे ड्यूटी सौंपी गई
- 1:22:54है, मेरा कर्तव्य है यह मुझे आदेश है ऐसा जिसे ए लिखे जिसे शरण।
- 1:23:01जेब फरमाए, तेब तेब प। कैसे उसका फरमान हुआ?
- 1:23:06वैसे मैं निभा रहा हूँ, यह गम तो साथ जाएगा।
- 1:23:22जिंदगी भर। हम जुदाई का मुझे तड़पायेगा
- 1:23:39जिंदगी भर गम। जुदाई का मुझे तड़पाया।
- 1:23:55नया निकलेगा, मौसम नया आएगा। हर नया।
- 1:24:02मौसम पुरानी याद ले कर आएगा, ज़िन्दगी भर गमजदा।
- 1:24:21हाँ, मुझे तड़पायेगा। ये तो साथ नहीं जायेगा बेटा अगर
- 1:24:29तुम अपने आपको पहचान लो अगर ना पहचान पाए तो फिर साथ ही जायेगा।
- 1:24:38वो ही। रही वो ही गलियाँ।
- 1:24:47घरी सुनसान हैं हैं वो। ही गलियाँ, वो ही।
- 1:24:58राहें मगर सुनसान हैं तो नहीं तो दिल की सारी बस्तियां वीरान हैं।
- 1:25:16दिल में है जो गम तेरा वो जान लेकर जाएगा ज़िन्दगी भर।
- 1:25:37गमजदा का मुझे तड़पायेगा हर नया मौसम पुरानी याद ले कर।
- 1:25:56जाए ज़िन्दगी भर अब हम जलाये काम मुझे तड़पाये।
- 1:26:19धन्यवाद।