Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Feb 26 - No.1 नहीं "शून्य" बने: परमात्मा का मार्ग, संसार से विपरीत ! उत्तम-दिव्य संतान कैसे प्राप्त
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- 0:14दो तीन प्रश्न लेंगे। हम आज बाबूजी के चरणों में कोटि
- 0:25कोटि नमन शास्त्रों में लिखा है। जननी जननी, भक्त जनें या दाता या
- 0:35सूर्य वरना जननी बांझ रहे। काहे कबाबे नूर बाबा जी हम उत्तम?
- 0:49एवं संस्कारी संतान कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
- 0:54क्या इसके लिए भी कोई विशेष योग या आध्यात्मिक विधान होता है?
- 1:02कुछ दिन पहले आपकी वीडियो आयी थी जिसमें आपने कहा था।
- 1:09ऐसे गर्भ उपलब्ध हो जाएंगे जो हिटलर चंगेच जैसे व्यक्तियों को
- 1:16उत्पन्न कर सकेंगे। कृपया मार्गदर्शन करें कि श्रेष्ठ
- 1:23और पवित्र गर्भ कैसे निर्मित किया जाए।
- 1:27भगवान बुद्ध, भगत सिंह, रानी लक्ष्मीबाई जैसी दिव्य आत्माएं
- 1:32जन्म लेना लोग आदक सदाचार्य शांत बने रहे।
- 1:44देहरादून से अभिषेक भूषण न्यू टेस्टमेंट में एक शब्द आता
- 2:10है संसार की पंक्ति में जो सबसे आखिर में खड़े हो गए परमात्मा की
- 2:24पंक्ति में सबसे प्रथम हो जाएंगे। संसार की प्रकृति में जो सबसे
- 2:40प्रथम होंगे, परमात्मा की प्रकृति में वह सबसे आखिर हो जाएंगे।
- 2:50इस शब्द को जहन में रखना हम आगे चलते हैं।
- 2:57जननी जनेट भक्त जन्म या दाता या सुर ध्यान से समझेगा मेरी बात को
- 3:10जब आप भक्त भक्ति कर्त। तो?
- 3:16क्या होता है भक्ति के उन पलों में तुम ठहर जाते हो जब तुम दानु
- 3:31करते हो तो क्या होता है? दान करने के उन क्षणों में तुम
- 3:38ठहर जाते हो जब तुम्हें साहस आता है तो क्या होता है?
- 3:47साहस के उन क्षणों में तुम ठहर जाते हो।
- 3:53जननी जनें तो भक्त जनें या दाता या सूर तुम देखना गर्भवती स्त्री
- 4:04सामान्य स्त्री से थोड़ी ठहरी हुई मालूम पड़ेगा।
- 4:12कारण क्या है? उसके भीतर एक बच्चा पल रहा है, एक
- 4:26जीवन पल रहा है और वो उस जीवन को बचाने के लिए ठहर गई है।
- 4:34ज्यादा भागदौड़ नहीं करते। विश्व की श्रेष्ठतम घटनाएं तब
- 4:45पैदा होती है जब हमारा मन ठहर जाता है।
- 4:56भक्ति प्रेम प्रेम के आंतरिक लम्हों में तुम परमौन हो जाता
- 5:08प्रार्थना के गहरे लम्हों में। तो मन हो जाता है दान के गहरे
- 5:21लम्हों में जब तुम दान करते हो तुम देखोगे एक सुखा ढाबा का झरोखा
- 5:26था छू के चला जाएगा मैं झरोखा काहे का था?
- 5:36वह आनंद का झरोखा था और वह क्यों आया वह दान करने के कारण आया।
- 5:46भक्ति कक्षणों में तुम आनंदित की पलक।
- 5:53क्यों जुटा लेते हो, क्योंकि तुम ठहर जाते हो, सहस के उन पलों में
- 6:00जब तुम दूसरों को बचाने की चेष्टा करते हो, उन परों में तुम ठहर
- 6:07जाते हो, इसलिए गहरा आनंद तुम प्राप्त करते हो।
- 6:16ये थी भीतर की रासायनिक प्रक्रिया तुम्हारे भीतर ऐसे हार्मोन पैदा
- 6:26होते है जो तुम्हें संतुलन में ले जाते है, डोपामिन, सैराटोन।
- 6:37तुम गहरे आनंद में डूब जाते हो महादानी व्यक्ति डेल्टा वेज़ में
- 6:52पहुँच जाएगा, जहाँ कुतुहल नहीं होता।
- 6:59जहाँ उथल पुथल नहीं होती, समुद्र के ऊपरी तलों के समान जहाँ उथल
- 7:05पुथल नहीं होती, शोर शराब नहीं होता, यही ध्यान के क्षणों में
- 7:12होता है। यही प्रेम के क्षणों में होता है,
- 7:17यही दूसरे के लिए प्रार्थना करते है, उन क्षणों में होता है।
- 7:23इसलिए सभी धर्मों के भीतर जो प्रार्थना हुई उसका मूल स्रोत यही
- 7:30था। हे एश सब सुखिये।
- 7:34कोई न हो दुखार इस भावना के तहत तुम्हारे भीतर एक ठहराव पैदा होता
- 7:47है। उस ठहराव को रस कहा जाता है।
- 7:53उस ठहरा को आनंद कहा जाता है, मैं क्या कहूंगा?
- 8:06मैं आज तुम्हें एक शब्द देता हूँ, कभी भी एक नंबर बनने की चेष्टा न
- 8:13करना। यद्यपि तुम्हें ये संसार से उल्टा
- 8:17लगेगा, तुम्हारे माँ बाप तो कहते हैं, तुम्हारे टीचर भी कहते हैं।
- 8:23हमारा समाज भी तुम्हें सम्मान देता है जब तुम एक नंबर पे आ जाते
- 8:29हो लेकिन ध्यान रखना। जैसे ही तुम एक नंबर पे आओगे,
- 8:38हमारा आनंद खो जाएगा क्योंकि एक नंबर तक पहुंचने के लिए तुम बहुत
- 8:44दौड़े और दौड़ने के उन क्षणों में तुम दौड़ने का अभ्यस्त हो गए।
- 8:53ये तोड़ने के संस्कार पड़ गए तुम में और ये दौड़ने के संस्कार
- 8:59तुम्हारे जीवन के आंतरिक तत्वों को छूटेगा, फिर तुम जीवन भर
- 9:05दौड़ते रहोगे। एक नंबर होने के लिए लोग क्या कुछ
- 9:10नहीं करते। कब लोग भारत कर देते हैं?
- 9:15लाशें बिछा देते हैं और उन लाशों के ऊपर पांव रखकर उन्हें सीढ़ियों
- 9:21की तरह इस्तेमाल करके एक नंबर तक पहुँच जाते हैं।
- 9:26यह भी भला कोई एक नंबर हुआ? लाशों को सीढ़ियाँ बना के एक नंबर
- 9:33हुए भी तो क्या होगा? क्योंकि परमात्मक खेलता तो है है
- 9:46तो सब उसका खेल लेकिन वृहद ईमानदारी से खेलता है।
- 9:54तुम कभी भी पाप करके बच न पाओगे, यद्यपि उसने करवाया है लेकिन फिर
- 10:04भी तुम परिणामों से बच नहीं पाओगे।
- 10:06यही सब कुछ हो रहा है। आज मेरा व्हाट्सएप देखो किसी भी
- 10:12संत का। व्हाट्सएप देखो बर्फ़ पड़ा है,
- 10:19किसी को खुद की तकलीफ है, किसी को पड़ोसी की तकलीफ है, किसी को
- 10:25रिश्तेदार की तकलीफ, किसी को बेटी, बेटे की तकलीफ, किसी को
- 10:30संसार की तकलीफ। संत भी अगर संसार की तकलीफ को
- 10:41अपनी तकलीफ की तरह मानने लगे तो वह भी दुःखी हो जाएगा।
- 10:46यह तो गनीमत है कि संत समझदार होता है।
- 10:52संत संसार की तकलीफ को परमात्मा द्वारा प्रदत्त कर्मों का फल
- 10:59समझता है। जानता है इसलिए उसमें हस्तक्षेप
- 11:04नहीं करना चाहता हूँ। द ना तेरे लेख किसी के समझ न आते
- 11:24हैं। जन जन के प्यो रहा लखन शिव बन को
- 11:44जाती है। या वेदना के लेख मत लड़ना
- 11:54परमात्मा से, क्योंकि वह विराट और तुम कण भी नहीं।
- 12:03विराट के आगे कण की हैसीयत नेग्लिजिबल भी नहीं होती।
- 12:11इसलिए लड़ना मत मेरे पास कितने ही यहाँ रोज़ लोगों की समस्याएं आती
- 12:26हैं। मैं सीधी करती हूँ, लोग खुद भी आ
- 12:29जाते है, मैं प्रार्थना भी करता क्योंकि संत हृदय नवनीत समान हो,
- 12:45हृदय पिघलता है तुम्हारी पीड़ा दुख।
- 12:51तो भीतर से प्रार्थना के अल्फाज़ निकल आते हैं।
- 12:55यह मेरे बस की बात है, लेकिन मैं दुखी नहीं होता।
- 13:00मैं स्वयं पीड़ित नहीं होता। पीड़ा की बजाय।
- 13:10मैं करुणा बांधता हूँ, अगर सोचता हूँ, लेकिन करुणा मेरी पीड़ा नहीं
- 13:13होती, करुणा तुम्हारी हिट से उत्पन्न हुआ बहाव होता है रहता तो
- 13:28मैं मैथ नहीं हूँ। लेकिन फिर लिक्विड फॉर्म में हो
- 13:37जाता हूँ। पहले ठोस में थी, लेकिन रहता हूँ
- 13:41मखन ही तो मैं आज तुम्हें एक शब्द कौन?
- 13:48जीवन में कभी भी एक नंबर बनने की चेष्टा न करें और अपनी औलादों को।
- 13:55ये मत कहना कि तुम एक नंबर बन जाओ।
- 13:58यद्यपि सारा समाज सारा इतिहास एक नंबर वालों का इतिहास है और ये एक
- 14:06नंबर वालों का इतिहास है। सारे का सारा दुखी है।
- 14:15ईसा का ये वचन बड़ा क्रांति काल है।
- 14:31दोज़ हू? विल विल बी लास्ट इन दी क्यू विल
- 14:38बी फर्स्ट इन दी गॉक्स? यहाँ अगर तुम लास्ट हो तो
- 14:57परमात्मा के राज्य में तुम प्रथम हो जाओगे क्यों बड़ा प्यारा शब्द
- 15:03है कोई परमात्मा का राज्य कहीं अलग है क्या?
- 15:07कोई सच्च खंड अलग होता है, नहीं तुम्हारे हृदय की अवस्था ही सच्च
- 15:15खंड होती है। जब तुम आनंद के लभो लिवाज़ से झूम
- 15:22रहे होते हो तो सच्च खंड शर्मसार हो जाता है।
- 15:28तुम्हारी पाखंडियों का सचखंड शर्मसार हो जाता है और तुम उनको
- 15:33अंगूठा दिखाते हो। मरने के बाद सचखंड में ले जाने
- 15:38वाले देखो, मेरी तरफ मैं जीतेगी। सचखंड में हूँ।
- 15:46मैं जीते जी आनंद के रस को पी रहा हूँ हर पल हर घड़ी तुम तो मरने के
- 15:54बाद तुम तो झूठ बोलते हो, मैं पूछ लेता हूँ कि आपको।
- 16:04सच खंड में कुल लेके जाएगा। बाबा के बाबा या बाबा के हजूर चक
- 16:15रह जाते हैं, क्योंकि प्रश्न के उत्तर तो वही दे सकता है जिसने
- 16:22दोनों तन छुए हों। जो बिरहा की अग्नि में से भी
- 16:28गुजरा हो और मिलन का प्रेम का स्वाधवी जिसने चखा हो जिसने दोनों
- 16:36को चखा हो वो ही दोनों को व्याख्या ही कर सकता है।
- 16:43अन्यथा कोई नहीं कर सकता। इसलिए मैं कहता हूँ मुझसे कोई पूछ
- 16:49लेता है। सबसे बड़ा दुनिया में बाप क्या
- 16:54है? किसी की हत्या कर देना, किसी का
- 16:59माल चुरा लेना। सबसे बड़ा पाप क्या है?
- 17:09सबसे बड़ा पाप है जो तुम नहीं जानते उसका प्रचार करना इससे बड़ा
- 17:19पाप। क्योंकि तुम्हारा प्रचार करने से
- 17:28चीजें इतनी ज्यादा प्रसारित हो जाएंगी।
- 17:39वायरल हो जाता है। झूठ बहुत जल्दी वायरल होता है,
- 17:44सत्य धीमा चलता है इसलिए जल्दी वायरल नहीं होता।
- 17:51इसलिए झूठे लोग वायरल हो जाते हैं।
- 17:57वैरल एक बुखार होता है, पांच 7 दिन तो रहता ही रहता है।
- 18:08तुम सभी वैरल होना चाहते हो कोई मेरी इस बात को ध्यान से समझ
- 18:14लेना। जैसे ही तुमने अन्तःसम्मन में
- 18:19वायरल होने की इच्छा की प्रत्यक्ष तुम दुखी हो न शुरू हो गए
- 18:27तुम्हारे कदम दुख की मंजल की तरफ़।
- 18:35उठनी शुरू वायरल होने की चेष्टा कभी मत करना, इच्छा भी मत करना
- 18:48क्यों? क्योंकि अंत में जब तुम।
- 18:58अपने सत्य स्वरूप में पहुंचोगे तो तुम पाओगे मैं ऑलरेडी वायरल हूँ,
- 19:07मैं विराट हूँ, मैं अनंत हूँ, मैं इतना विस्तारित हूँ, मैं इतना
- 19:13प्रसारित हूँ कि इसमें और प्रसार किया नहीं जा सकता।
- 19:19और लड़ी वायरल इसको तुम नकली नकली वायरल करने की चेष्टा मत करना
- 19:31सचमुच में वायरल जहाँ तुम हो। जहाँ तुम्हें पता चलता है शब्द
- 19:39थोड़े गहरे हैं। ठहराव से सुन सत्य में उस तल में
- 19:46उतर जाना जो अकंप है, जो कंपता नहीं जो हिलता डोलता नहीं, जो
- 19:54शिथर है। तो तुम पाओगे, तुम पहले से ही
- 20:03असीम हो, तुम पहले से ही इतने वायरल हो कि जिनका कोई और शोर ही
- 20:09नहीं है, तुम्हारी हाइप का तो और शोर है।
- 20:20यू कैन मेजर दट। लेकिन परमात्मा की हाइप का कोई और
- 20:26छोड़ नहीं है। वो इतना वायरल है।
- 20:34हाँ जाएगा हमें खायेगा। जहाँ भी जाओगे तुमसे।
- 20:55कभी भी एक नंबर बनने की चेष्टा मत करो, क्योंकि ये संस्थान 150 साल
- 21:06का है। इससे पहले लाखों वर्ष बीत गए।
- 21:14और उसके बाद भी लाखों साल बीत जाएंगे।
- 21:18अरबों बीत गए, अरबों बीत गए। 150 साल के लिए वायरल होने का
- 21:26औचित्य क्या है 150 साल के लिए? हाइप होने का औचित्य अरबों साल तक
- 21:40तुम गुम रहे अंधेरे में और मरने के बाद अरबों साल तक तुम अंधेरे
- 21:48में फिर हो जाओगे। कौन जाने गा मुझे फिर वो ही
- 22:00पंक्तियाँ याद आती हैं लेट मी लाइव उन से नो एंड डन लेट मी डन?
- 22:09स्टिल फ्रॉम दी वार्ड एंड नट स्टोन मुझे जीवत जब रहूँ तो कोई
- 22:22पहचान ही ना कि मैं कौन हूँ। लेट मी लाइव उनसीन अननोन।
- 22:30मुझे कोई देखकर ये ना कहे कि तुम कुछ जाने पहचानी से लगते हैं,
- 22:40अडल्ट में लेट मी डार्क और जब मैं मरूँ तो कोई आंख नम ना हो।
- 22:50कोई आंख अश्क ना बिखरे स्टील फ्रॉम दीवार इस संसार से ऐसे चुरा
- 23:01दिया जाऊं। बड़े सुंदर शब्द प्रयोग किए
- 23:05अलेक्जैंडर पोक में एंड नॉट ए स्टोन, कोई स्टोन, कोई पत्थर, कोई
- 23:14शिलालेख ये न बता सके व्हेर आई लाइ मैं कहाँ दफन हूँ?
- 23:25और पता लगता कि नहीं अगर तुम पत्थर लगाओगे दोगे वे बिलॉन में
- 23:29कहाँ है? सिकंदर की खबर बताओ बताओ कहाँ है
- 23:35सिकंदर? ऐसे ही सिकंदर आते हैं चले जाते
- 23:40हैं। नकर इतना तकबर जहाँ 1,00,00,000
- 23:46फानी है तेरी से आला हो गुजरे न कुछ बाकी निशानी है बताओ तो, कहाँ
- 23:56है उसकी 80 पिंजर? ईसा से 326 साल पहले उसके अवशेष
- 24:10कहाँ हैं बताओ? पल दो पल के लिए वायरल होने का
- 24:26औचित्य भी क्या है? तुम बच्चों को कहते हो, देखो बेटा
- 24:33दूसरे नंबर पे मत आ जाना। यही शिक्षा तुम्हारी बच्चों को
- 24:45मार जाती है, ना वो भक्त होता है, ना वो दानी होता है, ना वो साहसी
- 24:55होता है। तुम जीते हो लेकिन मरे मरे से
- 24:59जीते हो। एक बच्चा अपने पिता से कहने लगा,
- 25:09पिताजी आज मैराथन की दौड़ थी, अच्छा बेटा पहले नंबर पे तो नहीं
- 25:18आ सका, फिर बेटा तीसरे नंबर पे आया।
- 25:22चलो शाबाश बेटा, बहुत अच्छा, तीसरे नंबर भी बहुत होता है।
- 25:28तो बेटा प्रतिभागी कितने थे के पिता जी तीन ही थे प्रतिभागी, बस
- 25:39तुम्हें ऐसा होना चाहिए। परमात्मा का रास्ता फूट रहा है,
- 25:48संचार करस्ता दौड़ने का है, परमात्मा का रास्ता विश्राम करने
- 25:55का है। पहले चुन लेना अपनी मंजिल।
- 26:03कि हमने संसार को कमाना या परमात्मा संसार को कमानु तो
- 26:12दौड़ना, लेकिन याद रखना दुखी हो जाओ जितनी दौड़ उतनी दुख।
- 26:25मैं मुल्क को संभालने वालों को गाली भी निकालता हूँ लेकिन
- 26:31अंतःकरण से नमन भी करता हूँ और कहता हूँ।
- 26:39आपको नमस्कार है मेरा मौन मौन नमन करता हूँ अगर तुम जैसे गधे ना हो
- 26:49तो देश का इतना भारत कौन उठाता? कौन गालियां करता इसलिए मैं
- 26:57तुम्हें नमन करता हूँ। और गाड़ियां भी निकालता हूँ लेकिन
- 27:04मेरा नमन ज़्यादा गहरा होता है कि किकोन मूर्ख अपनी शांति को दांव
- 27:11पे लगा के उस कुर्सी के ऊपर बैठना चाहेगा।
- 27:19पल भर के लिए मेहमान यहाँ पल भर के लिए।
- 27:39मेहमान यहाँ मालूम नहीं। मंजिल है कहाँ पल भर?
- 27:53के लिए। तुम्हें।
- 27:58पता ही नहीं मंजिल का है तुम मंजिल को जीते जी तो न पा सके
- 28:11लेकिन परमात्मा तुम्हें मंजिल तक पहुंचा देता है आकर।
- 28:18बस यही कहानी है तुम ध्यान में जागते जागते तो न जा सके, लेकिन
- 28:25परमात्मा तुम्हें सुला के ध्यान में ले जाना चाहता है।
- 28:29रोज़ ये सबक से खाता है निष्चेष्ट हो के ध्यान में जाया जा सकता है।
- 28:37इसको योगियों ने योग नित्रा का नाम दिया और आज कुछ न करने के लिए
- 28:45शिविर लगाए जाते हैं। हैरानी की बात है।
- 28:53तो तुम सारी ज़िन्दगी दौड़ते रहते हो, तुम समझ नहीं पाते कि चैन
- 29:00मिलेगा, विश्राम तुम्हे दोनों का संतुलन बढ़ाना होगा।
- 29:13वो होता है जीवन को सही, संयमित जीने का डंका इसे ही मर्यादा कहते
- 29:19हैं। युक्त आहार बिहार आहार युक्त हो
- 29:34व्यवहार युक्त हो। ज़िन्दगी का मज़ा आ जाता है जीने
- 29:40का तो तुम ज़िन्दगी में ठहरना सीख नहीं सकते रोज़ कोशिश करती है
- 29:52प्रकृति रोज़ कोशिश करता है परमात्मा?
- 29:56कि तुम ठहरना सीख जाओ, तुम्हें रोज़ रात को लोरी दे के सोलाता
- 30:01है, वो के ठहर जाओ लेकिन तुम ठहरने की कला सीखते नहीं, फिर अंत
- 30:08में वह तुम्हें सदा के लिए सुला देता है, ठहरा देता है जिससे हम
- 30:12मौत का नाम देते हैं। वो कहते ठीक है, अब तुम 80 साल तक
- 30:20नहीं ठहरे तो मैं तुम्हें ठहरा देता हूँ, बस यही था लक्ष्य
- 30:27तुम्हारा, लेकिन तुम जीते जी तो न सीख पाए।
- 30:37इसलिए मैं मृत्यु को नमन करता हूँ क्योंकि मृत्यु वो कला है जो तुम
- 30:47जीते जी अगर सीख जाओ तो जीवन। रंग रोशना ही सुभर जाए, सुगंध
- 31:01बिखेरने लगे और प्रतीक का भंवरा तुम्हारे उस खेले हुए पुर पर
- 31:08मंडराने लगे प्यार का मौसम आ जाए। कलियों ने घोंघट खोले, कलियों ने
- 31:26घोंघट खोले हर फूल पे भांवरा ढोल। लो आया प्यार का मौसम।
- 31:42ग्लोबल चार का? मौसम कलियों ने घूँघट।
- 31:53खोली? हर फूल पे घबरा दो।
- 32:02इसे मर जीवडा कहते हैं अगर तुमने जीते जी मरने की कला को सीख लिया।
- 32:17तो तुम ईसा के इन वचनों को सत्य कर पाओगे, ओनली दे विल एंटर इन
- 32:28माइ गॉड्स किंगडम हू विल बी लास्ट इन दी क्यू जो कतार में बिल्कुल
- 32:36आखिर होंगे? अब मेरे परमात्मा के दरबार में
- 32:40सबसे प्रसन्न है यह कला तुम्हें तुम्हारी खोपड़ी कोई जचेगी नहीं
- 32:50बस यही झंझट यह खोपड़ी ही वादा है।
- 32:57ये सबसे बड़ी झंझट है यह कहती नहीं पुत्र तुमने फर्स्ट हो के
- 33:05आने तू सेकंड क्यों आ के बच्चों को कभी ना सका नहीं बच्चों को
- 33:14सिर्फ कहना के तुम प्रयास करो अपनी तरफ से।
- 33:20विदाउट एनी बर्डन। क्योंकि बर्डन तुम्हारी कार्य
- 33:24क्षमता को कम कर देता है। अगर तुम बर्डन से पढ़ोगे तो कार्य
- 33:30क्षमता को कम हो जाओगे। कॉलेज में एक बच्चा पढ़ता था,
- 33:34मेरा साथी था। और मुझको उस पर बड़ी हैरानी होती
- 33:42है। वो पेपर होने से पहले थिएटर में
- 33:49चला जाता, मूवी ये देखता, मनोरंजन करके आता और सीधा बिना पड़े।
- 34:00एग्ज़ैमनेशन हॉल में चला जाता तो सदा प्रथम था, सारा कॉलेज है रन
- 34:07था। मैंने उससे पूछा मित्र जहाँ हम सब
- 34:12रिपीट कर रहे होते हैं। वह तो मूवी देख रहे होते हो गीत
- 34:19सुन रहे होते हो ये क्या मार रहा है फिर भी फर्स्ट आते हो।
- 34:27उम्र तो छोटी थी लेकिन उसने मुझे ये शब्द पढ़ा।
- 34:36अगर तुमने संसार में प्रथम आना है तो पहले ठहर जाओ, ठहरने के बाद जब
- 34:49तुम कदम उठाओगे, उसमें बड़ा रस बहेगा।
- 34:56उसमें बड़े फूल लगेंगे और बड़े फल लगेंगे और फल भी मीठे होंगे।
- 35:02इतनी छोटी उम्र में जिसने भी समझाया उस गुरु और उस पिता मेहता
- 35:08को नमन। सदा ही फर्स्ट आता हूँ, मैं भी
- 35:19तुमसे यही कहता हूँ, ये सब भी तुमसे यही कह के गए और सभी संत भी
- 35:25तुमसे यही कहते हैं तुमने आखिर में वहीं जाना।
- 35:33जहाँ परम ठहरा बोलो गुलजार का मौसम किया प्यार का मौसम जहाँ तुम
- 35:43झूम जाते हो सरस से जहाँ प्रेम बरसता है, झलकता है चारों ओर
- 35:49पैमाने बनकर। और तुम लबालब गटक जाते हो, उससे
- 35:55मदमस्ती में खो जाते हो, उन लम्हों का भरपूर आनंद उठाते हो।
- 36:02लेकिन ये आता कैसे है? खाने का एक ही सूत्र है, दौड़ को
- 36:10बंद कर दो। फिर क्या तुम ठहर जाओगे?
- 36:18नहीं तुम दौड़ोगे नहीं सहज चलोगे और ध्यान रखना तेज चलोगे तो जीत
- 36:28ना पाओगे। सहज पके सो मीठा होय खरगोश तेज
- 36:44दौड़ता है, कछुआ धीमी गति से चलता है, खरगोश नहीं पहुँच पाता।
- 36:55कछुआ पहुँच जाता है दी में दी में पग भरनो दी में दी में डगर डग
- 37:03भरनो डगर तय करना निश्चित रूप से तुम अपने मुकाम पे पहुंचा।
- 37:13जल्दबाजी मत करना यह हरिनेस इस हरसनेस यह उतावलापन तुम्हें कहीं
- 37:28नहीं पहुंचाएगा। तुम्हारी बुद्धि को भ्रमित कर
- 37:32देगा। जिसने ठहरना नहीं सीखा, अपनी
- 37:36ज़िन्दगी में समझो उसने पहुंचना भी नहीं सीखा।
- 37:41पहुंचने का पहला सूत्र है ठहरना, ठहरना जानो कैसे ठहराव होता है और
- 37:49तुम निश्चित पहुँच जाओगे, ये उल्टे शब्द हैं लेकिन क्या करें?
- 37:54भाषा की अपनी सुंदरता है, भाषा की अपनी असमर्थता है।
- 38:03हम दोनों ही चीजें विरोधी स्वरों की एक ही शब्दों से कहनी पड़ती
- 38:09हैं। हू आर हेल्पलेस हम मजबूर हैं इस
- 38:25समय अगर कहा कि जो ठहरता है, जो आखिर में होता है, वह मेरे
- 38:36परमात्मा के दरबार में प्रथम होता है।
- 38:41उसका कुल मात्र रस इतना जो आखिर में ठहरना सीख गया वह ठहरने के
- 38:51कारण ही रस को पा गया। यही रस का मूलसूत्र है ठहर जानो।
- 39:01और उसे ठहरने की अवस्था से क्यों कहा गया?
- 39:06अच्छे अच्छे संतों की महात्माओं की जब तुम गर्भवती हो, साहसी
- 39:14व्यक्तियों की कथाओं और गुण गाथों को सुन?
- 39:19उससे तुम में ठहराव आएगा और ध्यान रखना।
- 39:25जब बच्चा गर्व में बन रहा है वो तुम्हारी एक एक बात को रिकॉर्ड कर
- 39:29रहा है जो बच्चा गर्व में संस्कारित हो जाता है।
- 39:36विज्ञान शायद आज तक नहीं खोज पाया।
- 39:41लेकिन अध्यात्म ने बहुत लाखों साल पहले खोज लिया था।
- 39:47गर्व में जो तुम सीख गए वो सीख गए वहरहा के तुम कुछ नहीं सीखोगे,
- 39:51बेईमानी हेरा फेरी। झूठ कफर तूफान के अलावा तुम बाहर
- 39:59कुछ न सीख सकोगे तो इसीलिए माता पिता को सबसे पहला गुरु बताया
- 40:04गया। बच्चा घर में है।
- 40:13तुम संतो के ठहराव के वचन सुनो, भजन सुनो जो तुम्हें ठहराते मंत्र
- 40:20मुग्ध करने वाले गीत सुनो तुम वीरों की गाथनाएं सुनो।
- 40:36तुम वतन पे मरने मिटने वालों की कथाएं सुनो, भगोड़ों की कथाएं और
- 40:43सुनें उनको तो इतिहास में तुम आज धकेलना चाहते हो जबरदस्ती?
- 40:55आने वाली पीढ़ी से अन्याय कर रहे हो, कहानियों सुनो, विश्व पितामह
- 41:05की कहानियों सुनो महाराणा प्रताप की कहानियों सुनो शिवाजी मरकटक
- 41:13कहानियों सुनो। वीर हकीकत राये की कहानियाँ सुन
- 41:21गीत सुनो जो तुम्हें ठहरा दूं, बस यही है मूल मंत्र तुम निश्चित रूप
- 41:36से देखोगे। जो बच्चा जन्मेगा तुम्हें पहले ही
- 41:41मैंने कहा विज्ञान कुछ तुम्हें सिखाई न सिखाई बताई न बताई संत
- 41:46हमें बहुत कुछ बता गए धरोहर के रूप में बस तुम जो सीखना है, नौ
- 41:54महीने के गर्भवास में ही सीख जाते हो।
- 41:58बाहर आकर तो ठग्गी चोरी, बेईमानी, झूठ, कफर, तूफान इसके अलावा और
- 42:06कुछ नहीं सीखते। तुम उस्तादियाँ सीखते हो शतरंज के
- 42:10मोहरे बसाने की। कब आए?
- 42:15दिन सीखते हो कत लोग गार्थ सीखते हो, राज्य करने के उपाय सीखते हो
- 42:24और कुछ नहीं सीखते और ये सारी बेईमानी से भरी है और ये सारी
- 42:30दुखदायी। सुख कहाँ मिलता है, सुख मिलता है,
- 42:44साहस से सुख मिलता है, ठहराव। सुख मिलता है दान्स क्योंकि इन
- 43:00तीनों चीजों में तुम्हारा मन ठहर जाता है।
- 43:03तुम कभी आजमा के देखो। इसने कहा जननी जनें तो भक्त से
- 43:10जनें। भक्त में प्रेम में तुम ठहर जाते
- 43:13हो तुम्हारी प्रेमता से प्रेम से आँख मिलती है चार होती है आँखें
- 43:21तुम्हें वो ज़िन्दगी भर भलाई नहीं भूलता।
- 43:24क्यों? क्या हुआ था उस बल में?
- 43:29उसको तुम सारी ज़िन्दगी के लिए कंटिन्यू कर सकते हो।
- 43:33अगर तुम ये सीख जाओ कि उस घड़ी हुआ क्या था उस घड़ी तुम ढहर गए
- 43:43थे, तुम्हारा चित्र ठहर गया था, मैं तुम्हें बता देता हूँ।
- 43:50और अगर इस चित्र के ठहराव को तुम अखंड धारा में बहा लिए तो तुम पा
- 43:59जाओगे वो चीज़ जीसको जन्मो जन्मो से तुम तलास हो।
- 44:08तो वीर पैदा के भगौड़े, नकली उत्पादियों से युक्त वीर नहीं सही
- 44:16वर्धमान महावीर इतिहास को बदलने वाले लोग इतिहास को सत्य को
- 44:31बर्बाद करने में। कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ते,
- 44:42लेकिन ध्यान रखें तुम चाहे कोई कोर कसर बाकी न छोड़ो, संत एक बात
- 44:53जानता है और बस वही बात जाननी होती है।
- 45:02एक साधा सब सिद्ध है और वो ही संत जान लेता है और जो वह जानता है वो
- 45:09ही संत है। क्या है, क्या जान लेता है संत?
- 45:24संत जान लेता है कि परमात्मा है, तुम्हारी खोपड़ी कह की नहीं लाख
- 45:34लाख प्रश्न करती है। अगर परमात्मा हो तो फिर हम कच्चे
- 45:40झोंपड़े में क्यों रहते? फिर हम टूटी खटिया में क्यों
- 45:46सोते? हमारे शरीर पे कपड़ा दिया हमारे
- 45:52पेट में भूजन नहीं है तो यहीं तुम चूक जाते हो।
- 46:01और यही तुमने सीखना और यही संत के पास एक चीज़ होती है सीखने के लिए
- 46:11सीखने सिखाने को दूसरा कुछ है ही नहीं वो अगर तुम सीख गए।
- 46:26अल्प अल्लाह न लगा दिल मेरा मेनू भेदी समझना वे एको हम कह एको अहम
- 46:39द्वितीय नाश्ते एको ब्रह्मा द्वितीय नाश्ते।
- 46:44अगर तुम ये समझ गए परमात्मा है तो इससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं।
- 46:56अगर तुमने ये नहीं जाना की परमात्मा है, किताबों से नहीं
- 47:03शास्त्रों से। मुझ से नहीं, तुझ से नहीं, गुरुओं
- 47:10से नहीं, वेदों से नहीं, उपनिषदों से नहीं, गीता से नहीं तो फिर
- 47:19किस्से अपने अनुभव से। अल्फ़ अल्लाह न लगा रसता दिल मेरा
- 47:32मेनू वेदी फिक्र न कह बस फिर दूसरे की फिक्र कोई नहीं होती।
- 47:42तुम्हें आज असली मुकाम बता दिया मैंने तुम्हारा सब कमाया धमाया
- 47:53बेकार अगर तुमने ये नहीं जा न ये परमात्मा है।
- 48:05तो सारी ज़िन्दगी बेकार हो गई अगर तुमने ये जान लिया कि परमात्मा
- 48:17है, वह कौन है? वह क्या है?
- 48:20इस बात की फिक्र मत करना तुम बाकी सारी चीजों का फिक्र करते हो।
- 48:25सारी चीजों के जवाब हैं तुम्हारे पास।
- 48:27बस एक ही चीज़ का जवाब है कि जिसका तुम समंड करते हो, क्या वो
- 48:35है भी? कभी अपने गुरु की आँखों में आँखें
- 48:40डालकर पूछना वो झूठा है वो कहते का हाँ है।
- 48:49तुम कहना के झूठ बोलोगे तो नर्क में जाओगे लेकिन वो कहेगा कि हाँ
- 48:57है तुमने देखा है वो कहेगा हाँ मैंने देखा है लेकिन ये सब झूठ
- 49:02है। क्योंकि अगर परमात्मा को जान जान
- 49:06लिया होता तो गद्दियाँ छोड़ी जाती हैं, पकड़ी नहीं जाती, जिसने
- 49:13परमात्मा को जान लिया गद्दियाँ ट्रांसफर नहीं हुआ करतीं,
- 49:19गद्दियाँ छोड़ी जाती हैं, त्यागती जाती हैं।
- 49:22बुद्ध केन्द्र महावीर की तरह 24 तीर्थंकरों की तरह जो गद्दियो को
- 49:30वारिसना तौर पर दूसरे को सौंप गया।
- 49:38बस एक बात निश्चित है कि उसने ब्रह्मास्त्र को जाना।
- 49:50सब कमा लेना, सब रस देख लेना है भी कि नहीं?
- 50:01लेकिन अगर तुमने एक नहीं जाना तो फिर तुमने कुछ भी नहीं जाना।
- 50:15तू से लिपटके जोरो लेते हम तू से लिपटके जोरो लेते हम।
- 50:33आंसू नहीं थे ये मोती से कम तेरा दामन नहीं तेरा दामन।
- 50:54फिर ये आंसू जले भी तो क्या है? एक तू ना मिला एक।
- 51:11तू ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है?
- 51:25अगर एक न मिला बस इसको आप अंतिम प्रवचन की तरह ले लेना।
- 51:39जो तुमने इकट्ठा किया सब इकट्ठा कर दिया साधु सामान, पदार्थ,
- 51:48सूक्ष सुविधाएं, गतियाँ, मान, सन्मान, रुतबा सब परिया।
- 51:58लेकिन अगर एक न मिला तो सब बेकार है और वह एक क्या है एक है
- 52:12परमात्मा का दर्शन। अगर वो ना पाया तुम तुम्हारे नैना
- 52:22प्यासे ही रह जाएंगे फिर तुम आंसू बहाओगे माशूका के लिए?
- 52:39आशिक के लिए, लेकिन मैं कहता हूँ कि तुम्हारे आंसू बहाएं।
- 52:48परमात्मा के मिलने की खुशी भी आशका आया करते हैं लेकिन उन।
- 52:57अश्कों की गुणवत्ता तुम्हारे आशिक और माशूका के बेरहा की अशको की
- 53:09गुणवत्ता से बिल्कुल अलग होती है। तुमने सब इकट्ठा कर लिया, फिर सुन
- 53:21लो, मैं ध्यान से तुम्हें कहता हूँ ठहरने से मिलता है वह वह
- 53:38जिसके मिलने के बाद। कुछ और पाने को बाकी नहीं रहता।
- 53:49तो से लिपटके जो रो लेते हम आंसू नहीं थे ये मोती से कम।
- 54:07तेरा दामन नह तेरा दामन फिर ये आंसू ढले भी तो क्या है?
- 54:26एक तू नाम मिला। बस अगर तुमने ये नहीं जाना कि
- 54:32परमात्मा है और तुमने देखा है और तुम्हारे पांच न तुम्हारे 1000 न
- 54:39तुम्हारे राधे राधे तुम्हारा श्याम श्याम।
- 54:42तुम्हारा राम राम सब व्यर्थ है, कूड़ा है, फेंकने युग है, आखिरी
- 54:51अल्फाज है ये इन्हें हृदय में संजो लेना उसे याद नहीं करना है।
- 55:02उसे देखना है उसका श्रमण नहीं करना उसे देखना है और देखने से ही
- 55:19कटती है सारी गुत्थी। जब जाते हैं तुम अपने जीवन को
- 55:31भाग्यशाली, तभी समझना तभी तुम भगवान समझना, भाग्यवान समझना अपने
- 55:37आपको जब तुमने यह जान लिया कि वह है बस आगे बात नहीं करता।
- 55:46कैसा क्यों बनाया, क्यों ये सब बातें व्यर्थ हैं ये तुम्हारा
- 55:53ध्यान भटकाने के लिए गुरुओं की दिन है पखनियों के दिन।
- 56:09परमात्मा है यही तुम्हारा अंतिव गंतव्य और लक्ष्य अगर तुमने अपने
- 56:17अनुभव से नहीं जाना परमात्मा है तो सब शास्त्र।
- 56:28सब सब्जेक्ट्स के किताबें सभी शास्त्र बेकार अगर एक।
- 56:45अल्प अल्लाह न लगा दल मेरा मेनू वेदी से करण एकोंग कार।
- 56:57ठाकुर? तुम शरना आया हो, ठाकुर तुम शरना।
- 57:20उतर गए हो मेरे मन का संसार उतर गए हो मेरे मन का संसार।
- 57:41मन का संसार उतर गए हों मेरे मन का संसार।
- 58:00वो तिर गए हो मेरे मन का संसार। संज्ञात्मा भनशती जब तें।
- 58:16जब तै दर सन। पा ठाकुर ठाकुर।
- 58:32तुम सरनाईया ठाकुर, तुम सरनाईया तुम सरनाईया हो।
- 58:54तुम सरनाई आये हो, तुम सरनाई आये हो ठाकुर, तुम सरनाई या।
- 59:11अगर तुमने ये नहीं देखा कि परमात्मा है देखा जब ते दर्शन
- 59:17पायो फिर उतरता है ब्रह्म अन्यथा तुम पांच नाम जपते रहो लाख साल
- 59:26जपते रहो तुम क्या तुम्हारे गुरु, गुरु के गुरु, गुरु के गुरु?
- 59:31उनके मन के किसी अज्ञात कोने में अविश्वास क्षुबा ही रहेगा।
- 59:38कहीं ऐसा तो नहीं है कि वो हो ही ना हम व्यर्थ में जटाई करें ये
- 59:48पांच नम व्यर्थ में। इसलिए गुरु लोग नहीं जपते, इन्हें
- 59:52विश्वास नहीं जपता है। हो जीसको वह जपता है।
- 1:00:14सोई बालक तेरे नाम जब्त है सोई बालक तेरे।
- 1:00:31नाम जप तू हैं सोई बालक तू तेरे नाम जप तू हैं।
- 1:00:47जाकोआपुजफा ठाकुर तुम शरनाई। देखने के बाद शरण हो जाती है।
- 1:01:01अपने आप शर्न का तो होना नहीं पड़ता।
- 1:01:06फिर तुम समर्पित हो जाते हो जैसे अपने प्रेमी को सामने देखकर उसको
- 1:01:11आगोश में ले लेते हो, धन्यवाद।