Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Oct 25 - साधना कैसे होनी चाहिए? तुम्हारे अंदर का सबसे बड़ा चमत्कार! Very Deep & Important.
Transcript
- 0:02कृष्ण और बुध ओशो कृष्ण परमात्मा को जान लेते हैं बुध और ओशो स्वयं
- 0:18को जान लेते हैं। लेकिन उसके बाद भी उनका भोगना
- 0:29क्यों शुरू रहता है? प्रश्न थोड़ा टेढ़ा है, गहरा है,
- 0:41ध्यान से समझिएगा। परमात्मा विराट और इतना विराट है
- 1:00लेकिन उसके एक कण को बनाया नहीं जा सकता।
- 1:09उसने इतना विराट पैदा कर दिया। तुम इतने विराट को खंगाल भी न
- 1:18सकते है, यह एक भूल भलैया है। बुध स्वयं को जानते हैं।
- 1:32ओशो से हमको जानते हैं मैंने कभी इंकार नहीं किया और इंकार करने से
- 1:41कोई बड़ा नहीं हो जाता है। अहंकार का एक मोड़ प्रयास है।
- 1:56कि अहंकार खुद नहीं मचना चाहता, दूसरे को मिटाना चाहता है।
- 2:03अहंकार अपनी लकीर को बड़ा नहीं करना चाहता, दूसरों की लकीर को
- 2:08छोटा करना चाहता है। इन बातों का सत्य तुम्हें सरकारी
- 2:17महकमे में मिल जायेगा। राजगद्दियों में नौकरी पेशा लोगों
- 2:25में कल अलग जो छोटा क्लर्क है। बॉस से घृणा करेगा।
- 2:41बॉस के ऊपर भी बॉस से जो कैपिटल में बैठे हैं, वह अपने बॉस से
- 2:50घृणा करेगा। ऋण तब पैदा होती है जब दूसरे का
- 3:00कद अपने से ऊंचा दिखाई पड़ता है और अहंकार का यह प्रयास है कि मैं
- 3:15मिटे बिना दूसरे का कद कैसे छोटा करता हूँ?
- 3:25और ध्यान रखना, सारी दुनिया इसी प्रयास में लगी हुई है क्योंकि
- 3:32अपने से बड़े को देखकर उसको ठेस लगती है।
- 3:40उसको दुख होता है, दर्द होता है। हीनता का आभास होता है।
- 3:50खुद का मिटना बहुत मुश्किल है। अहंकार के लिए अगर सर्वाधिक कठिन
- 3:57चीज़ है तो वह खुद का मिटना। खुद के मिटने की असमर्थता के कारण
- 4:12यज्ञ पैदा हुए, कर्मकांड पैदा हुए फिर खुद की आहूति नहीं देनी
- 4:22पड़ती, बस नारियल चढ़ा दो। सामग्री की आहूति दे दो तो अहंकार
- 4:31संतुष्ट हो क्या तो इस रस को समझ लेना अहंकार दूसरे को मारना चाहता
- 4:45है? खुद मरना नहीं चाहता और अहंकार को
- 4:50यह पता नहीं है के खुद के मरने से ही आनंद मिलता है।
- 4:59इस मरने से जब डरे मेरे मन आनंद था।
- 5:07मरने ही ते परमानंद। वह दूसरे को छोटा दिखाना चाहता
- 5:22है। दूसरा बड़ा क्यों है उसे छोड़ता
- 5:27है खुद बड़ा हो नहीं सकता। तो फिर उसके पास एक ही उपाय बजता
- 5:36है एक दूसरे को छोटा दिखाना शुरू कर दे और यही सारी दुनिया राजनीति
- 5:48हो या साधारण। जनता को यही कोशिश कर पड़ोसी का
- 5:58घर तुमसे एक मंचरक्षण हो गया तुम रात भर सोना सकोगे दिन में जो
- 6:08ज्ञान झाड़ा तुमने लोगों के संग के संग कोषण भी नहीं जाएगा।
- 6:13हाँ, तुम भूल जाओगे, पड़ोसी नई कार ले आए, तुम्हारा जीना हराम हो
- 6:23जाएगा, जो संसार में लोगों को ज्ञान देते करते हो।
- 6:33कि साइकिल पर चलना सवस्थ वर्धक होता है।
- 6:38ए पड़ोसी की महंगी कार से रात भर सो ना सके।
- 6:46निष्कर्ष रूप से आप समझिए। कि अहंकार अपने से बड़े को देख
- 6:56नहीं सकता और फिर अपने से बड़ा जो कि सिर उठाना शुरू करता है उसको
- 7:04छोटे करने के प्रयास में लग जाता है।
- 7:08खुद तो मित्र सस्ता नहीं है, दूसरे को मिटाना चाहता है, उसका
- 7:16कद छोटा करना चाहता है। सारी धरती पर इसी तरह के मानसिकता
- 7:22के लोग आज हैं। किधर भी ले।
- 7:28अध्यात्म में जैसे अध्यात्म अछूता नहीं।
- 7:33मुझे कुछ दिन पहले मेरी शिक्षा बता रही थी।
- 7:43किसी एक धार्मिक व्यक्ति ने खूब पैसों की ऑफर की कि मुझे नम्बर एक
- 7:52पे ले आओ, पैसे इतने चाही ले लो। इतना प्रचार करो इतना प्रसार करो,
- 8:05इतना प्रचार करो धन संपत्ति जो चाहे ले लो लेकिन एक नंबर पे ले
- 8:15आओ मैं दूसरे तीसरे नंबर पे रहना नहीं चाहता।
- 8:22यही धर्म की आदत यही धनपतियों की आदत यही गद्दीधारियों की आदत।
- 8:40यही आम जन की आदत है। कोई तुम से ऊंचा ऊँचा है तो
- 8:51अहंकार को ठेस लगती है, लेकिन यहाँ कबीर एक शब्द बोलते हैं।
- 9:04क्यों? बुद्ध जब कोई थूक जाता है, उनके
- 9:10मुँह पर तो शांत क्यों हो जाता है?
- 9:15क्यों? बुद्ध जब कोई गाली निकाल जाता है
- 9:19तो क्यों पूछते हैं बनते? ये तुम्हें समझ गया तुम और भी कुछ
- 9:28कहना चाहते हो? इन्होंने एक सूत्र जान लिया जो
- 9:46आपके कद को घटाए वो आपका मित्र और जो आपके कद को बढ़ाये।
- 9:53वो आपका शत्रु है, बढ़िया अजीब बात है।
- 9:59अध्यात्म संसार से बिल्कुल विपरीत है, जैसे आदमी शीर्ष से किए हुए
- 10:04कड़ा। इसे फिर समझ लीजिए जो तुम्हारे कद
- 10:21को बौनाह कर दे वो तुम्हारा करता है जो तुम्हारे कद को आसमान तक
- 10:29पहुंचा दे फल और तुम्हारा शत्रु। इसलिए ये बात ये गुण गान करने
- 10:39वाले श्रुति वंदन करने वाले तुम्हारे दुश्मन कबीर कहते हैं
- 10:46निंदा करने वाला तुम्हारा दोस्त है निंदा पनीर है राखीर आंगन कुटी
- 10:52स्वाद। बिन साबुन वारी बिना सबलमैल धुलजा
- 11:04आज गाँधी जयंती पर इस शब्द को हृदय में उतार लेना।
- 11:16आखिर में जीतता है नॉन रिएक्टिव प्रतिक्रियाहीन व्यक्ति जीतता है।
- 11:31बुध ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
- 11:35और उस व्यक्ति को दूसरे जनाकर चरना में से रखना पड़ा फा के रोना
- 11:40पड़ा अगर तुम जीतना चाहते हो तो यह मार्ग सर्वोत्तम है।
- 11:58सभी शांत कहते हैं। कबीर भी कहते हैं जो तुम्हारी
- 12:04निंदा करता, जो तुम्हारे कद को छोटा करने का प्रयास करता, उसको
- 12:08तो अपने घर के आँगन में ही जगह दे देना अपने पास ही।
- 12:16बैठा लेना, बड़े मुश्किल से ऐसे लोग मिलते हैं और जो तुम्हारी
- 12:23श्रुति वंदन करे उनको भगा देना क्यों?
- 12:33क्योंकि वो तुम्हारे भीतर भ्रम पैदा करे।
- 12:36कि तुम बड़े हो और वास्तव में तुम बड़े होगे नहीं ये भाट लोग ये
- 12:47दुष्प्रचार करने वाला मीडिया तुम्हारा दुश्मन?
- 12:56राजा बुढ़ाई में आ जाता है, धरातल खिस्क जाता है।
- 13:03औंधे में जमीन पर गिरता है। कबीर कहते हैं नींद।
- 13:10राखी के अंगने को भी छवा तुम्हारा सारा अहंकार का कद धूल दूषित हो
- 13:20जाएगा और फिर अहंकार के खोने से जो तुम्हें मिलता है ताकि गल
- 13:28गथियों में जा। रूस की मात्रा बतानी असंभव है।
- 13:38जैसे तुम्हारे दर्द हो रहा है, तुम दर्द की मात्रा नहीं बता
- 13:43सकते, तुम कह सकते हो दर्द बहुत हो रहा है।
- 13:49वो कहेगा कितना? 10 ग्राम 20 ग्राम, आधा किलो किलो
- 13:57एक टन कितना होता है? तुम मात्र यही कह पाओगे, बहुत
- 14:03होता है। क्योंकि दर्द का कोई मेजरमेंट
- 14:11नहीं है। परमात्मा की बनाई हुई किसी भी
- 14:17अनुभव का कोई मेजरमेंट नहीं। मुझसे लोग पूछ लेते हैं परमात्मा
- 14:22में कितना आनंद है, नहीं का कोई मेजरमेंट नहीं है।
- 14:28बस इतना ही कह सकता हूँ घना आनंद और बोला नहीं जा सकता।
- 14:39उसकी कोई मात्रा नहीं है तुम्हारे संसार के पदार्थों की तो
- 14:46मात्राएं। लेकिन परमात्मा के आनंद की कोई
- 14:52मात्रा नहीं है। वह मात्राओं से पर है।
- 15:05इतना विराट है, इतना विराट है तो तुम बाहर का विस्तार भी नहीं नाप
- 15:09सकते, भीतर का आनंद कैसे ना? अब देखी है बुद्ध को गहार त्याग
- 15:28करने की क्या आवश्यकता है? शानू शोकत सम्राट एकमात्र बारिश
- 15:38सुबोधन कर। सब सोती थी लेकिन क्या हुआ विथ रे
- 15:52स्पीड आउट? कुछ लोगों को देखा, कुछ दृश्य देख
- 15:59लिया, वृद्ध व्यक्ति देखा, बीमार व्यक्ति देखा, कमर झुकी हुई, टीबी
- 16:09से ग्रस्त व्यक्ति देखा और मरा हुआ व्यक्ति देखा और चेतक से पूछा
- 16:15ये कौन? सेतु ने कहा राजकुमार मनाही तो
- 16:32बहुत है राजा के, लेकिन तुम्हारी इतनी प्यारी वाणी से पूछ ना मुझे
- 16:40वाद्य करता है तो मैं तुम्हें बता ही दूँ।
- 16:49ये आदमी है तो क्या आदमी बूढ़ा भी होता है?
- 16:53हाँ क्या मैं भी बूढ़ा होऊंगा? हाँ राजकुमार को भी बूढ़ा होता है
- 17:02यह कौन? जो है बीमार, क्या मैं बीमार भी
- 17:10हूँगा ये तो बुरी तरह फसा है। इसको तो सांस आना दूभर हो गया है।
- 17:18हाँ, राजकुमार। ये कमर झुक ही झुक है, ये चल नहीं
- 17:26हो सकता और फिर अंत में अर्थ ही रहता है राम राम सत्य है ये कौन?
- 17:47चैत्र बोला राजकुमार यह आदमी है, मर गया है तो क्या मैं भी मरूँगा
- 17:59चेत प्रसन्न है क्या? हाँ राजकुमार, प्रत्येक मनुष्य को
- 18:07मरना ही होता है। मनुष्य की अंतिम मंजिल शमशान
- 18:14भाती, कब्रिस्तान, शमशान। अंतिम मंजिल है मुश्किल जो जन्मा
- 18:22वह मरेगा तो क्या मैं भी मरूंगा अगर संसार में ऐसा कुछ है?
- 18:42तो जश्न कहा चेतक मैं नहीं जाऊंगा उस उत्सव में यहाँ उत्सव जैसा कुछ
- 18:53मुझे दिखता ही नहीं, किसी मित्र के उत्सव में जा रहे हो।
- 18:59पहली बार निकले थे। सड़क के किनारे पर जनता प्रथम
- 19:04दर्शन के लिए खड़ी थी। इससे पहले कभी राजकुमार की शक्लों
- 19:08सूरत देखी न थी, बहुत सुन्दर बहुत थी, घुंघराले बार बड़े प्यारे
- 19:22मासूम लगते थे। चेतक रथ को बॉक्स मोड़ लो, अगर
- 19:34यही कुछ संसार है तो फिर संसार से पार क्या है?
- 19:44हम ये जानना चाहते हैं। और वो देखे हुए दृश्य उसके भीतर
- 19:53उमड़ घोट रहे थे। उसे चैन नहीं पड़ रहा था, शादी हो
- 20:02चुकी थी। यशोदरा के पुत्र हुए राहुल।
- 20:13बहुत देर से ये परंपरा है कि छठी रात्रि तक एक बच्चा जीवित रह जाए
- 20:23तो उसका नामकरण करते हैं। कारण?
- 20:29तभी एक बिमारी है, आंधी है जो गर्भवती इस को इंजेक्शन बहुत देने
- 20:37पड़ते है। कहीं भी चोट लग सकती है, बाहर की
- 20:43चोट हम देख लेंगे। भीतर भी चोट लग सकती है।
- 20:47बच्चा पांव मारेगा चोट? तो गर्भवती स्त्री को टाइटन्स का
- 20:53इंजेक्शन देना होता है लेकिन तब ये अस्वीकार नहीं होते।
- 21:002500 साल पहले की बात। इसका इफेक्ट छः दिनों में हो जाता
- 21:10है। अगर नवजात शिशु 6 दिन तक बच गया
- 21:16तो फिर यह रोग उसको नहीं होगा। इसलिए छठी रात्रि को उत्सव की तरह
- 21:24मनाया गया। और उसका नामकरण किया गया।
- 21:31अभी देखें तो बच्चा बचेगा की नहीं तो नाम का ही रखना नाम रखेंगे।
- 21:39अगर ये छठी तक बच गया अक्सर शिशु। बहुत से शिशु मृत्यु को प्राप्त
- 21:47होते थे तो छठ का इंतजार किया। बुद्ध ने देखें तो मेरा बारिश
- 21:55रहता है या नहीं। लेकिन बुद्ध का सौभाग्य राहुल बच
- 22:09गया। छठी रात्रि तक उसे कुछ नहीं हुआ।
- 22:13उसका नामकरण कर दिया गया। देखिये ये प्लेनेट वगैरह अब रहा
- 22:25है नक्षत्र नक्षत्रों के चरणों से चार चरण होते हैं।
- 22:32उनसे नामकरण होता है और यह प्लेनेट ईश्वरीय संरचना के भीतर
- 22:39जाते हैं। तुम देख सकते हो नग नाकों से और
- 22:44इनका इफेक्ट पड़ता है जब 15,00,00,000 मील दूर बैठा।
- 22:52सूर्य जाम में प्रभावित कर सकता है गर्मी सर्दी तो ये नक्षत्र
- 22:57क्यों नहीं कर सकते? ये भी कर सकते हैं ग्रह क्यों
- 23:00नहीं कर सकते? ये भी कर सकते हैं।
- 23:10ये हमारे शरीर को हमारे मन को प्रभावित करते हैं।
- 23:16ज्वार, बाटा के दिन सबसे ज्यादा आत्महत्याएं होती हैं, क्यों?
- 23:30क्योंकि समुद्र का पानी और हमारे भीतर का खून दोनों की संग रचना
- 23:36बराबर उतना ही नमकीन हमारा खून, उतना ही नमकीन समुद्र का खून।
- 23:48ज्वार भाषा में अगर इतनी ही ऊंची लहरें उठेंगी तो हमारे खून में
- 23:52क्यों नहीं उठेंगे? चंद्रमा हमारे लिए भी है इसलिए
- 24:02जितनी भावनाओं का आदर्श पूर्णमासी को होता है।
- 24:11उतनी भावनाओं का आवेश सहज दिनों में नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा
- 24:16की कशिश समुद्र के वाणी को खींचती है और हमारे खून को भी खींचती है।
- 24:22बहुत रेजोल होता है। शोरगुल मचता है और उस शोरगुल में
- 24:31जितनी आत्महत्याएं होती हैं, वो इन्हीं दिनों के आस पास होती हैं।
- 24:4013 को हो जाए 14 को हो जाए अमावस्या को?
- 24:44क्षमा करना फूल मासी हो जाए। इन्हीं चार पांच दिनों में आप
- 24:53ज़्यादा आत्महत्याएं करने वाले व्यक्ति भाव यह सहारा प्रभाव
- 24:59चंद्रमा का है ग्रह नक्षत्रों का। जैन धर्म में ग्रहण क्षेत्रों का
- 25:09बहुत ज्यादा प्रभाव बड़ी गहन स्टडी की गई।
- 25:18एक भीतर कतल भी है। एक बाहर की किताब भी है जैसे
- 25:26हमारे शास्त्रों से हम पढ़ते हैं भीतर की बात परमात्मा और भीतर
- 25:31जाकर हम वही परमात्मा देखते हैं जो शास्त्रों में वर्णित है।
- 25:42बाहर भी चर्चा है। परमात्मिक शास्त्रों में लिखी हुई
- 25:49है भीतर वह उसकी उपस्थिति है। भीतर वह मौजूद है।
- 26:05इसलिए सन्तु ने कहा वह जो करता है ठीक करता है उसकी विराट सजना के
- 26:14आगे तुम्हारी औकात क्या है एक ज़रा पहनी और तुम अगर कहो कि मैं
- 26:21करता हूँ वो अच्छा मालूम पड़ता है।
- 26:27संत जानता है कितने बड़े बड़े ग्रह और सिर्फ चंद्रमा और सूर्य
- 26:35का प्रभाव नहीं होता प्लेनेट का प्रभाव नहीं होता वह जो दूर यहाँ
- 26:40से अर्पण खरबों प्रकाश वर्ष दूर है।
- 26:45उसका भी इफेक्ट यहाँ धरती पर भरता है।
- 26:50मैंने बहुत बार कहा है यह सारा संस्थान सारी सजना आपस में गुंती
- 26:58हुई है और आपस में गुंती हुई है तो एक ग्रह का दूसरे ग्रह पे।
- 27:04प्रभाव पढ़ना बिल्कुल सही है। बाहर के गृह नक्षत्रों की
- 27:18स्थितियों को देखकर भी वर्णन किया जा सकता है।
- 27:24भीतर जाकर भी एक तल पर पता लगाया जा सकता है कि भविष्य में क्या
- 27:31होगा। यहाँ छोटी सी कंपनी का है।
- 27:41मखली गोसाल जा रहे थे। भगवान महावीर के साथ बारिश के दिन
- 27:49थे साधन कोई था नहीं, महावीर पैदल ही सलाह करते थे।
- 27:59आज भी महावीर के अन्यायी पैदल ही चलते हैं।
- 28:10मखनी गोशाल बाहर से तो चाहिए सुशील था, लेकिन भीतर से हमेशा
- 28:17कोशिश करता था कि योग्य तो मैं था।
- 28:2124 मिनट तीर्थ संकट है। बना दिया गया।
- 28:24वर्धमान को मेरे साथ अन्याय हुआ है।
- 28:30मैं हर वक्त इस फिराक में रहता हूँ कि मैं कब महावीर की बेसुशी
- 28:36करता हूँ? वर्धमान को कब परास्त कर दूँ?
- 28:441 दिन जा रहे थे रास्ते में एक छोटा सा वो था बूटा, तुम होसार
- 28:55पूछने लग गए भगवान। यह छोटा पौधा अपने अंतरिम प्रणाम
- 29:05तक पहुंचेगा। नहीं पहुंचेगा वृक्ष बनेगा, फल
- 29:09लगेंगे, फूल लगेंगे अपनी अंतरिम पर नीती में पहुंचेगा।
- 29:17नहीं पहुंचा। आज ज़रा अंतर ध्यान मुझे और बताइए
- 29:25अब जो अंतर ध्यान हो सकता है, वह यह भी जानता है कि मखली गौसाल
- 29:33क्योंकि भीतर तो सब इकट्ठा है। कलेक्टिव अनकॉन्शियस माइक वह यह
- 29:42भी जानता है कि मखली गोशाल ने यह बात मात्र उसका अहंकार गिर गया
- 29:51है। उसके अहंकार को चोट लगी है।
- 29:57वह चाहता है कि कैसे मैं वर्धमान के अहंकार को नीचे दिखा दूं।
- 30:04हर वक्त इसी फिराक में रहे महावीर अपने भी तगय को स्थल पर उतरे।
- 30:12इस शक्ति कहानी। महावीर ने कहा, हाँ, यह पौधा अपनी
- 30:21चरम परनीति तक पहुंचेगा, फूल भी आएँगे, फल भी आएँगे लेकिन
- 30:29प्रतिक्षण मखली को साल में। अब पौधा उठाया और दूर तड़प फेंक
- 30:36दिया। बहुत दूर महावीर देखते रहे, बोले
- 30:41कुछ दोनों चले गए, जहाँ जाना था वहाँ ठहरे।
- 30:50कुछ दिनों के बाद वापस आये तो देखा बारिशें बहुत बढ़ गई।
- 31:04उस बारिश के बहाव में पानी में वह जो पौधा गहराया था मखले ने।
- 31:11वह धीरे धीरे धीरे धीरे आता होता, उसकी जगह पे फिक्स हो गया जहाँ से
- 31:15वो फाड़ रहे थे और जब वापस आया तो मखली गोसा ने देखा पौधा तो मैं
- 31:23फाड़ दिया था। ये फिर यहीं पड़ा है।
- 31:32इतनी बरात सृजना की सर्कमस्टैंसेस के आगे तुम कैसे लड़ाई कर पाओगे?
- 31:42तुम्हारी औकात क्या है? यही कृष्ण कहते हैं अर्जुन।
- 31:53अर्जुन तुम नहीं करते जो करता हूँ मैं करता हूँ तू सिर्फ अपना कर्म
- 32:05कर तनुशूठा और युद्ध कर यही तेरा कर्तव्य है।
- 32:14तू रणक क्षेत्र में खड़ा है, किसी साधु के संवाद में नहीं बैठा।
- 32:19जीस तरह से प्रश्न कर रहा है वो धर्म के प्रश्न है, युद्ध के
- 32:24प्रश्न नहीं। यह भी एक सब्जेक्ट है मैथ्स की
- 32:44तरह जालोजी की तरह बंटने की तरह सिविक्स की तरह पॉलिटिकल साइंस की
- 32:49तरह हिंदी पंजाबी उर्स की तरह। यह भी एक सब्जेक्ट है।
- 32:59बुद्ध को इसीलिए बाहर नहीं निकाला गया कि ज्योतिषियों ने उसके
- 33:04प्लांट की संरक्षण देख कर कह दिया था ये बड़ा बुद्धमान बनेगा,
- 33:09चक्रवर्ती बनेगा। देश विदेश में इसकी चर्चा होगी।
- 33:18वह फिर साधु बने या फिर राजा बने चक्रव्रती राजा भी बन सकता है और
- 33:25चक्रव्रती संत भी बन सकता है। लेकिन उसके बाप को मैं जो नहीं था
- 33:34कि संत बन। माता पिता को कहाँ मंजूर होता है
- 33:50कि उसका बेटा संत बने? यहाँ तक माता पिता मंजूर कर लेते
- 33:57हैं, हमारा बेटा दुष्ट हो जाए, कातिल हो जाए या चारा हो जाए, संत
- 34:00नंबर। क्रांतिकारी न बने भगत सिंह न बने
- 34:10गोडसे बन जाए दूसरों को मारते स्वयं न फांसी से।
- 34:19लेकिन यार अपने फांसी को गोडसे को भी चढ़ना पड़ता है।
- 34:25ज़लील होके फांसी चढ़ना पड़ता है और भगत सिंह गौरान्वित होके फांसी
- 34:30चढ़ते हैं गीत गाके फांसी चढ़ते हैं मायनी मेरा रंग दे वसं की।
- 34:46महिरा रंग दे बसंती चो। इन्हें आनंद आता है।
- 35:06कुरबानी में बुद्ध के पास कोई कमी नहीं आती है।
- 35:16लेकिन बुद्ध ने देखा दो का है। दुनिया में क्या सुख भी है?
- 35:24और अगर दुख है तो दुख का कोई कारण है और अगर कारण है तो दुख को दूर
- 35:32करने का उपाय है। बस बुद्ध की सारी साधना इन चार
- 35:36बातों में खत्म हो जाती है। बुध नहीं रही, कहा दुनिया में दुख
- 35:41है। संसार दुख है इस दुख का कारण है
- 35:47क्या मान्यताओं से लगाव तुम जो नहीं है उसको मैं मान लेना ये दुख
- 36:00का कारण। दुख है दुख का कारण है मैं शरीर
- 36:04हूँ, मैं मन हूँ जो तुम नहीं दुख का कारण है और इस कारण को मिटाने
- 36:14का उपाय क्या। साधना साक्षी हो जाओ और अपने आप
- 36:28को जानो तुम कौन सारी साधना हो चुकी इसी के ऊपर?
- 36:41संसार दुख है, दुख का कारण है और दुख के कारण को मिटाने का उपाय है
- 36:51तो तुम इस उपाय को अपना दो भी प्रश्न ना करो और दुख से सुख में
- 36:57परवर्तित हो जाओ। दुनिया एक बहुत बड़ी क्रांति में
- 37:09जी रही है और दुनिया में तुम भी हो जिसने अभी अपना आपा सत्यम नहीं
- 37:19देखा वह बेचारा तर्से योग है। वह दूसरों के शरीर को मार के
- 37:30खर्चे का मैंने उसे मार दिया। यही कृष्ण समझाते हैं न अन्य ते
- 37:35आने माने शरीर। तुम किसी को मार नहीं सकते।
- 37:41मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर कैन बी डिस्कार्ड यह तो बाहर के
- 37:47भौतिकी की बात है। बेहतर एक ऐसा तत्व है जिसे चेतना
- 37:51कहते हैं, उसके लिए ये शब्द बोले हैं कृष्ण न हन्नते अने माने
- 37:57शरीर। यह पदार्थ मरता है।
- 38:00और मरता भी कहाँ है सर? कैटर होता है छिन्न व छिन्न होता
- 38:05है मरता तो यहाँ कुछ भी नहीं है और तुम कुछ कर नहीं सकते।
- 38:21तो तुम्हारी खोपड़ा में ये बात कहे थे की तुम कुछ कर सकते हो
- 38:25तुम्हारा दुश्मन फिर तुम कहोगे इतनी तरक्की कैसे हो?
- 38:33इस तरक्की ने तुम्हे क्या? ओह शांत मग्न दुनिया आज विनाश के
- 38:44कगार पे पहुँच गए किसे राष्ट्रपति कहते हैं दूर धराश कोलहल से चहल
- 39:00पैर से परे शोर शराबे से दुख। एक संत अपनी छोटी सी कुड़ियाँ में
- 39:06बैठा और उस कुड़ियाँ का पहरा दे रहा है शेर सांप जानवर, भिक्षु
- 39:15माँ करते स्वच्छंद स्वतंत्र घूमते हैं और वह अपनी मस्ती के आरोप में
- 39:23झूम रहा है। और बाबा कहते हैं, उस आनंद तक
- 39:37पहुंचना तुम्हारे बस में नदरी मोख दबाव हो तर यहाँ जाकर तुम।
- 39:51सब धारणाओं से मुक्त हो जाते हो मुक्ति का अर्थात समझलो मुक्ति का
- 39:59अर्थ स्वर्ग और नरक की तरह कोई भौगोलिक, सचखंड वगैरह नहीं होता।
- 40:05मुक्ति का अर्थ मुक्ति का असली अर्थ होता है।
- 40:09तुम्हारी मान्यताओं से मुक्त हो जाना यही तुम्हारा बंधन है ये
- 40:17शब्दों के नाम ये पांच नाम ये तरह तरह की लाखों लाखों मान्यताएँ जो
- 40:24तुम्हारे अपने में भर ली यही तुम्हारा बंधन है।
- 40:29और क्या बंधन और कुछ बंधन तुम्हें देखता रहता है जो तुमने मान लिया
- 40:39पहले लोग मानते थे केंद्र है प्रकोप हो जाता है, बारिश फैला
- 40:45देता है, ओले डाल देता है। बिजली चमकती हो इन्द्र प्रकोपित
- 40:53हो गया आज बदल गए पैमाने आज तुम्हारी जंजीरें बदल गईं पहले
- 41:09रस्सियां थीं। आज मेंटल हो गया तुमने जो ढक लिया
- 41:16अपने ऊपर लबादा जो ओढ़ लिया, जो मान लिया इन मान्यताओं की बंधन
- 41:23उसके अलावा और कोई बंधन नहीं है और इसी से मुक्ति का नाम मुक्ति
- 41:29है। ज़रा देखो शब्दों से तो मुक्त
- 41:38कैसे हो शब्द तो इमेज ही नहीं सुन।
- 41:47नाम तो इमेजिनेशन है जो तुमने रखे।
- 41:50यह तो एक भाषा है भाषा से तो मुक्त कैसे होगे?
- 41:57जो मान्यता तुमने मान ली भाषाएँ उससे मुक्त नहीं कर सकती।
- 42:13और बुद्ध जैसे लोग अगर कुछ पा लेते हैं तो इतनी जल्दबाजी इसलिए
- 42:19कर गए मार्ग की ओर से था। कृष्ण तक पहुँच सकते थे, लेकिन
- 42:26बुद्ध ने सोचा कोई कदम रहूं रहूं ना रहूं।
- 42:30अब ये पा लिया है इतना तो बता दो इसके बाद की यात्रा परमात्मा की
- 42:37यात्रा मेरा काम समाप्त हुआ। मैं शरीर नहीं ये जाऊंगा।
- 42:43इसे कहते हैं करोना बुत ने कुछ भी अपने लिए नहीं की।
- 42:53और ये हिंदुस्तान की धरती में पाखंडी रोक उन्होंने बुद्ध को
- 42:58प्रताड़ित करके बाहर भेज दिया तो बुद्ध के तर पे तो आ जाओ।
- 43:07तुम ऐसी शान्ति को निहारोगे जो तुमने जीवन में कभी जानी न थी,
- 43:16थोड़ा बुद्ध के तर पे आके तो देखो आज तुम गाँधी को गली निकालते हो।
- 43:27दक्षिण अफ्रीका में गाँधी बहुत बढ़िया प्रैक्टिस कर रहे थे,
- 43:31वरीष्ठ थे। कोई गाँधी भिक्षापत्र लेके मांगता
- 43:36नहीं था और इसमें कोई गर्व की बात भी नहीं होनी चाहिए।
- 43:42अगर कोई भिक्षा पत्र लेके मांगे तो वह आज अगर राजा हो गया तो जीस
- 43:47कारण से राजा हो गया। उसका धन्यवाद करना चाहिए और वो
- 43:51कारण है संविधान तो संविधान के पर काटना तो नहीं चाहिए ना?
- 44:04तो भिक्षापत्र से मांग लेना कोई गुनाह तोड़े?
- 44:10बेहतर तो यही था अगर तुमने भिक्षापत्र से मांगा तो तुम्हें
- 44:16इतनी तो अकल होती कि तुम दूसरे को भिक्षापत्र हाथ में न पकड़ा दो।
- 44:23तुम दूसरों के रोज़ी रोटी का उपाय करो।
- 44:28इत्ता सा तो बोध होना चाहिए तुम्हें अगर तुमने वास्तव में
- 44:31भिक्षा मांग के कार्य लेकिन गाँधी ऐसा दिखावा नहीं करते।
- 44:39बहुत बढ़िया प्रैक्टिस चल रही है यहाँ पे।
- 44:451893 में बुकड और 1915 में भारत वापस एक बात समझले ना आज गाँधी
- 45:06जयंती। गाँधी गरीब हैं।
- 45:14गाँधी का पिता करमचंद? उसका दादा उत्तम चंद एक दीवान थे
- 45:27अंग्रेजी हकुम। जैसे चीफ मिनिस्टर होता है
- 45:31मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री गरीब होता है पर चलो न ही कम से कम वो
- 45:41भिक्षा पत्र, लेकिन मांगता तो नहीं था सम्पन्न।
- 45:49गाँधी अपने बैरिस्टर का सूट उतार देते हैं, गोपाल कृष्ण गोखले का
- 45:56सन्देश जाता है के मोहन आर्य या जैनों पर उन लोगों की।
- 46:06पद्धति फेल हो गई। जो कहते थे हम शस्त्र उठा के
- 46:10आजादी ले लेंगे, कतलो गार्क से आजादी मिल जाए, लेकिन कतलो गार्क
- 46:19तो उन्होंने किया, लेकिन आज तो। दो हत्याओं के भीतर वो जेल में
- 46:25बंद हैं। कारपंपन यौनतिना की बात मोहन में
- 46:36और विनायक में यही अक्सर बहस होती थी।
- 46:40मोहन कहते थे, अहिंसात्मक कवि से ही जीता जा सकता है।
- 46:46ओनली थिस इस दी वे इतने बड़े सैनिक शक्ति से युक्त देश को
- 46:58हथियारों से नहीं देखा जा सकता पर सावरकर की मान्यता ठीक है।
- 47:06हिंसा के बिना देश आजाद नहीं होगा, हमें गोलियां बरसानी
- 47:10पड़ेंगी और गाँधी कहते थे कितनों को मारोगे?
- 47:16सारी फौज उसके पास है, आज एक देश की फौज है हिंदुस्तान की ओर तुम
- 47:22उठा पाते हो, अपने राज्य के विरुद्ध बात उठा पाते।
- 47:28नहीं, 19 महीने तक तुम इंदिरा गाँधी जेल में रखती हो, तुम क्या
- 47:34कर सकते हो? राजा के पास शक्ति है और फिर
- 47:40अंग्रेजों के पास तो दो तिहाई जमीन की मरकियत थी।
- 47:46उनकी मलकियत में तो सूरज डूबता नहीं, इतनी शक्ति से तुम लड़ोगे
- 47:52कैसे। इतनी शक्ति से तुम अपनी शक्ति से
- 47:56कैसे लड़ोगे? बड़े कमजोर हो, लेकिन कुछ दिमाग
- 48:02की पागलपन। ये तो होता है इसी पागलोपन में
- 48:08मारे गए सब फिर पछताए होते गए जब चिड़िया सूख गई फिर फिर माफीनामें
- 48:17लिखते जाओ। लेकिन गाँधी ने तो मासीनामा लिखना
- 48:20नहीं पड़ा क्योंकि उसने हिंसा की। और यही समझाते थे सदा मोहन विनायक
- 48:27को कि भाई तुम्हारा ये फिलॉसोफिकल गलत है, मामला नहीं मिलेंगे।
- 48:34ऐसे आजादी में तो मूर्ख व्यक्ति दो अतियों पर चलता है।
- 48:45पहली अति की लोगों को मार दिया। कलेक्टर को मार दिया।
- 48:49लंदन में एक व्यक्ति को मार दिया और दूसरी अति की पांव में घर पर
- 48:57है। ये दोनों अति थी लेकिन गाँधी किसी
- 49:02अति पे नहीं थी। गाँधी कहते हैं, मैं मरूँगा बस।
- 49:06जनता को अपने संघ ले लिया। उसने राग पकड़ ली थी।
- 49:14कैसे 3,00,000 लोग 40,00,00,000 लोगों पर राज़ कर सकते हैं?
- 49:21संख्या ज्यादा किसकी? और अगर सावरकर को मलाल था तो कोई
- 49:27नहीं बाकी तो बहा नहीं थी। सावरकर को मलाल था कि मेरी जो
- 49:35पद्धति थी वे वे ऑफ इंडिपेंडेंस वो फैल हो गयी।
- 49:43ये मलाल था गाँधी जीत गया। बस इसी मलाल के कारण ये सब कुछ
- 49:51कांड हुआ गाँधी के हत्या को लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 49:56आज भी लोग कह देते हैं ये सब तोते हैं।
- 50:03और जब मैं कहूं, टेप रिकॉर्डर एक नया नाम रखा।
- 50:09इनमें कैसेट्स भर के डाली गईं जगह जगह पे टेप रिकॉर्डर बज रहे हैं।
- 50:17इनमें किसी की आवाज़ फीड कर दी गई है।
- 50:20वो बोल रही है आज। बस सारा जहान पागल था विद्वान तो
- 50:29अभी आए हैं सब जगह टेप रिकॉर्डर बोल रहे हैं गाँधी बदमाशों।
- 50:40जवाहरलाल बदमाश था। जिन जिन लोगों को इन्होंने देखा
- 50:45कि ये गद्दी के योग्य हैं, उन उन लोगों को तो तू बहना शुरू कर
- 50:49दिया। इन्होंने देख लिया हू कैन चैलेंज
- 50:57हमें चैलेंज कौन कर सकता है? और उस उस व्यक्ति को बस एक ही
- 51:03मीडिया सुनता है हमारे पास और कुछ है तो समझदार व्यक्तियों को जो
- 51:09ऑक्सफोर्ड बगैरा में पड़ा है उसको गप्पू कहना शुरू कर दिया।
- 51:19बस प्रचार ही तो सब कुछ होता है, इन्हें पता नहीं प्रचार कुछ नहीं
- 51:23होता। आखिर में सत्य ही सब कुछ होता है।
- 51:28प्रचार की बरतें 1 दिन आज नहीं कल उगड़ जाती हैं प्रचार ज्यादा देर
- 51:34तक टकाऊ नहीं है सत्य श्रद्धा के लिए।
- 51:39टिकाऊ रहता है और हमने अशोक के स्तंभ पर लिखा है सत्यम एवजा से
- 51:50क्या जरूरत थी गाँधी को गाँधी को बुलाएगी कि भाई देखो वह जो दावा
- 51:56करते थे कि हम ले लेंगे आजादी। वो तो काला पानी की सजा भोग रहे
- 52:02हैं। यहाँ कोई लीड करने वाला नहीं है।
- 52:05तुम आ जाओ और गोखले के कहने से अपनी भरी ब्राई प्रैक्टिस छोड़ते
- 52:10गाती यहाँ पे कोई गरीब नहीं है लेकिन करुणा थी।
- 52:17गाँधी के भीतर करोना दिया। इतना हिसाब मांगो जिनके जिन्होंने
- 52:24जिनके बाप ने जिनके दादाओं ने जिनके पड़ दादाओं ने स्वतंत्रता
- 52:29संग्राम में ज़रा भी ऊँगली में हीमोग्लोबिन टेस्ट करने जितना भी
- 52:34खून नहीं बहाया। वो आज प्रश्न पूछते हैं कि भगत
- 52:38सिंह को क्यों नहीं आजाद कराये? देखो इतना दिमाग में बहुत से लोग
- 52:50मेरे करिंदे हैं तो मेरे गुलाम हैं सभी वैसे ही गाँधी जी भी
- 52:54गुलाम। गाँधी जी मालिक थे क्या?
- 52:59मालिक तो इरविन था? अगर क्रांति का इस समय क्या कसूर
- 53:07है? गाँधी का क्या कसूर क्या गाँधी
- 53:16भगत सिंह की माफी कर सकता था? बताओ जब वह खुद गुलाम और उसका देश
- 53:26गुलाम तो उसके पास क्या है, हथियार है?
- 53:30सर अहिंसा का हथियार है जिसे आदि श्वेत जुल्फों वाले कहते फंसे हैं
- 53:37बेबी हमें आजादी बिना कड़क के बिना?
- 53:42ये भी मीडिया तंत्र है साबरमती के संत तू ने कर दिया कमाल सातों
- 53:48कुमार क्योंकि वो जान गए थे कि इतनी बड़ी सत्ता से लोहा लेना
- 53:55टकराना असंभव है, मुश्किल नहीं है, असंभव है।
- 54:01और गाँधी न तो गाँधी, न गाँधी के पिता करमचंद दीवान थे,
- 54:05मुख्यमंत्री थे और न दीवान। करमचंद के पिता उत्तभ थे।
- 54:12किसी ने भिक्षा पत्र नहीं उठाया। सभी ठीक थे।
- 54:17सड़ते बढ़ते घरानों के थे। गरीबी नहीं थी, मज़े में रहते थे
- 54:26गाँधी जीके पिता की चार शादियां शायद आपका।
- 54:35पहले बच्चे जीतने भी हुए। कोई जी मत न रहा लेकिन गाँधी जी
- 54:41की माता पुतलीगाड़ी चार बच्चे थे। गाँधी जी की एक बहन भी थी, तीन
- 54:49तीन भाई थे। गाँधी जी सबसे चौके थे।
- 54:54इसलिए लॉर्ड प्यार में बने ज़रा सोच जो 1888 उन्यानवे के अंदर
- 55:03लंदन जैसे कॉलेज में जा के पढ़ाई करता है, वो गरीब होगा।
- 55:10वह गरीब हुआ क्या और बैरिस्टर की पढ़ाई करता है?
- 55:18और बढ़िया उसकी डाईट है, उसका जीवन बड़ा शमंतर है।
- 55:25उसने कोई भिक्षा नहीं मांगी, उसने कोई प्रदर्शन नहीं कहा कि मैं
- 55:32गरीब हूँ। गद्दी कोई मांगने की चीज़ है?
- 55:36भिक्षा मांगने की चीज़ है ये? मैंने सारी उम्र भिक्षा मांगी
- 55:41मुझे गद्दी भी भिक्षा में दे दो। या तो कोई तर्क न हुआ तो भिक्षा
- 55:46मांगने वाले तो बहुत हैं या कोई तर्क न हुआ।
- 55:58गद्दी पर हक जताया जा सकता है। कुर्बानी करता है गद्दी भिक्षा
- 56:07में नहीं आती पर अपना भरपूर काम छोड़ के कृष्ण का पार्थ गोखले के
- 56:16कहने पर। वह दक्षिण अफ्रीका छोड़कर 1915
- 56:21में यहाँ आकर वह व्यक्ति जिसके पास सब कुछ था कोट पैंट टाई सब
- 56:35उतार दिया। और क्या उसके पास कुछ नहीं था?
- 56:44क्या वह भी भिक्षा पत्र उठाएगा? प्रश्न पूछने वालो, गलतियाँ
- 56:51निकालने वालो ज़रा मुझे बताओ की क्या वह गरीब था?
- 56:57जो उस वक्त रजिस्टर करता है, लंदन के अंदर पढ़ाई करता है और कोई
- 57:05न्यायालयिक छात्र नहीं था। वो बहुत बढ़िया वकील था।
- 57:09गाँधी जी ने करीब 93% कैसे जीते अपने?
- 57:17प्रैक्टिस के दौरान 19 3% मामूली बघेल भी नहीं समतट देखिये हम
- 57:35दुष्प्रचार तो किसी भी चीज़ का कृत हैं।
- 57:42अक्सर गाली निकालने वाले व्यक्ति ही गाँधी को गाली देते हैं।
- 57:47सीधी से बात है गाँधी किसी को गाली नहीं देता।
- 57:51गाँधी प्रताड़ित करेंगे, गाँधी बात करेंगे तर्क गाँधी कहेंगे,
- 57:56अंग्रेजों भारत छोड़ो। मरो या करो कुट इंडिया मूवमेंट
- 58:04गाँधी विद्रोह करेंगे, अह सहयोग आंदोलन करेंगे लेकिन गाँधी शस्त्र
- 58:10नहीं उठाएंगे। कौन है शस्त्र, उठाएंगे किसके संग
- 58:16कोई मूर्ख थोड़ी? मूर्ख व्यक्ति शस्त्र उठाता है और
- 58:21जेल भोंकता है। फिर चिट्ठियां लिखता है फिर
- 58:25दूसरों के रहमों कर्म पे हो जाता है और फिर सारी उम्र तलवे चाटने
- 58:32पड़ते हैं। आज यही व्यवस्था है सबने तलवे
- 58:40चाटें, शुरू कर दी किसी का 17,000 करोड़ माफ़ कर दिया, किसी को लालच
- 58:46दे दिया, किसी को वैध दे दिया और राजनीति है क्या आज और हम प्रश्न
- 58:54के आज। कृष्ण और और स्वयं को जानने के
- 59:04पश्चात ही भोगते क्यूँ है नहीं भौंकते तुम्हें किसने निकाल
- 59:14भौंकते। कृष्ण भोगते हैं, ये जानते हुए
- 59:23भोगते हैं कि इन्द्रियां भोगते हैं।
- 59:26अब इन बातों को आराम से समझ लेना। क्षेत्र बुद्धि से समझ लेना कृष्ण
- 59:33भोगते हैं, सब भोगते हैं, जो उनके पास अवेलेबल है।
- 59:39लेकिन ये जानते हुए भौंकते हैं कि मैं नहीं भोग रहा, कौशल भी भौंकते
- 59:47हैं लेकिन ये जानते हुए भौंकते हैं कि मैं नहीं भोग रहा, इंद्रा
- 59:55या भोग रहा? बदवे भौंकते हैं जैसा मिल गया था
- 1:00:07सब कुछ था, भौंकते से भी सामग्री थी, राजा थे, लेकिन यह जानते हुए
- 1:00:17भौंकते हैं कि मैं नहीं भौंकता, इन्द्रिय हो।
- 1:00:2429 वर्ष के घर छोड़े छः वर्ष में एन आइवी में डूबे।
- 1:00:28उसके बाद 80 साझे करीब 45 वर्ष तक उन्होंने ये प्रचार किया।
- 1:00:3845 वर्ष तक खाना पिका तो शरीर को चलाने के लिए कैलोरीज की आवश्यकता
- 1:00:45तो पड़ती है लेकिन तब के खाने और राज़ घराने में खाने में गुणवत्ता
- 1:00:54का भर था। पहले बुद्ध खुद भोगते थे, अब
- 1:01:00बुद्ध नहीं भोगते, अब इन्द्रियां भोगती हैं, बुद्ध महज साक्षी हैं,
- 1:01:07उसे भोगने का, बुद्ध भोगती हुई इन्द्रियों को देखते हैं और सब भी
- 1:01:14भोगती हुई इन्द्रियों को देखते हैं।
- 1:01:17कृष्ण भी भौंकते हुए इन्द्रियों को देखते हैं, यह फर्क है फर्क
- 1:01:21बड़ा गहरा कल हड्डियों को छूने वाला फर्क सोने प्रश्न तो होता
- 1:01:30है, बहुत गजब का पूछता है। लेकिन मैं उषा को गलत क्यों कहते
- 1:01:38हैं? मुख्य प्रश्न मुख्य प्रश्न यह है
- 1:01:43कि अगर इतना त्याग करने के बाद भी।
- 1:01:48कृष्ण एक शब्द कहते हैं कि तुम्हारा आचरण ऐसा होना चाहिए कि
- 1:01:55आने वाले तुम्हारे फ्लावर्स, जो तुम्हें अनुकरण करेंगे, तो
- 1:02:03तुम्हारा चरित्र अनुकरणीय होना चाहिए।
- 1:02:07आप इस शब्द को अच्छी तरह से देख लो, जो फॉलोअर्स तुम्हें अनुकरण
- 1:02:15करेंगे, तुम्हारा चरित्र अनुकरणीय होना चाहिए।
- 1:02:24अगर तुम लिबरल सेक्स में ही पढ़ेगा तो क्या उसको जानते है ना
- 1:02:33इन्होंने अपना आप तो खोजा नहीं हमें तो यह साक्षी की तरह लिबरल
- 1:02:41सेक्स कैसे कर पाए? और जिन्होंने अपना आपका जाना नहीं
- 1:02:48तो ओशो कहते हैं कि मेरे प्रचार मंत्री ये बनेंगे तो भला प्रचार
- 1:02:55क्या करेंगे? जो देखा ही नहीं बस यहाँ आके
- 1:03:01गुत्थी फंस जाती है हमारी। अगर ये काम मैंने छोड़ा, मैं समझ
- 1:03:12गया कि उस चीज़ को देखने के बाद अनुकरणीय उदाहरण होना चाहिए
- 1:03:19तुम्हारी चीजों को। जब पता है कि इन्द्रियां स्वाद
- 1:03:30लेती हैं तो स्वादिष्ट भोजन न करो।
- 1:03:34तुम्हें क्या फर्क पड़ता है? जिन लोगों ने तुम्हारा अनु करण
- 1:03:40करना है, वह तो अपने भीतर जाने का प्रयास करेंगे।
- 1:03:47क्योंकि तुम्हारा आचरण अनुकरणीय है।
- 1:03:53अगर तुम लीभर सेग सकाओगे तंत्र में ऐसी बातें कमजोर तंत्र तो
- 1:04:04मैंने भी किया। और तुम कोई प्रमाण भी न दे पाओगे,
- 1:04:11मैं तो पक्के प्रमाण पर दे सकता हूँ।
- 1:04:14तीन वर्ष तक मैंने तंत्र के उपयोग, सिद्धियां वृद्धियां सब
- 1:04:18सीख यहीं के लोकल शमशान पर। बछड़ा यहाँ फंसता है।
- 1:04:27पेड़ जाकर मैंने एनलाइटन मारने से कभी इंकार किया है, मैं आचार्य की
- 1:04:35तरह ये नहीं कहता की एनलाइटन हो एनलाइटनमेंट होती ही नहीं वो तो
- 1:04:40दुआ में उसका वो जानता नहीं तो क्या रहता है और इसलिए मैं सच्चा
- 1:04:45कहता हूँ। तुम कहाँ से वह सच्चा है भाई
- 1:04:52मारकस्मी सच्चा जब एनलाइटनमेंट देखे नहीं तो कम से कम सचो तो बोल
- 1:04:57दो एक गुण तो है उस व्यक्ति में। पेच कहाँ फंसता है?
- 1:05:12पेच कृष्ण पे भी नहीं फंसता क्योंकि कृष्ण राजन है कृष्ण राजन
- 1:05:19ओशो राजन ओशो मध्यवर्गीय परिवार में चल राजाओं की तरह पोषण हुआ
- 1:05:27है। बात?
- 1:05:30लेकिन राजा हैं कृष्ण तो राजा हैं, कृष्ण ने जनता को भी चलाना
- 1:05:39है, अपने साम्राज्य की भी व्यवस्था करनी है।
- 1:05:44उसने ये भी देखना है। के युद्ध में स्त्रियां रहने के
- 1:05:47पुरुष हैं नहीं, उन्होंने संतुलन बैलेंस भी करना है, मेल फीमेल का।
- 1:06:00इसलिए उन्होंने इतने बच्चे पैदा किए, मेल थे नहीं।
- 1:06:05मर गए थे। उस वक्त युद्ध होते थे तो
- 1:06:09मिज़ाइलें नहीं मरती थी, बंदे मरते थे, आज मिज़ाइलें मरती हैं,
- 1:06:14ड्रोन मरते हैं, लेकिन उस वक्त बंदे मरते थे तब आदमियों की जरूरत
- 1:06:20थी और आदमी बच्चा कैसे होता है पैदा?
- 1:06:24या कृष्णन जानते थे सभी बुद्ध पर श्री रामते बस ये बात अलग है कि
- 1:06:35सृष्टी का संतुलन न बिगड़े इसलिए सार्वजनिक नहीं करता है।
- 1:06:41ऐसा नहीं है मेरे पास कैसा? एक छोटी सी कहानी बता दो रोहत की
- 1:06:50बहन मेरे पास आ गई, उसके लड़की है मुझे लड़का चाहिए, मैंने कहा ठीक
- 1:06:59है, लड़का हो जाओ, जाओ लड़का हो गया।
- 1:07:04जिसके औलाज नहीं वो कहते हैं बस मेरे उलाज हो जाये रणकेर की कोई
- 1:07:08मतलब नहीं उसको उसी ढंग की बात बता देते वो करना हमने होता है
- 1:07:16लेकिन सार्वजनिक रूप से बताना। सार्वजनिक रूप से बताएंगे तो
- 1:07:25मनुष्य तो मूड है, वह तो असंतुलन पैदा करने के लिए उत्साहित है कि
- 1:07:33कब मेरे हाथ में कोई टोटका आ जाये और मैं व्यवस्था को असंतुलित
- 1:07:39करूँ। तो कहाँ पेच फसता है पेच फसता है
- 1:07:49सर यहाँ का ओशो स्वादिष्ट चीजें खाती हैं, पकौड़े, चामुन्चुम्गा
- 1:07:59जो भी सब। और जानते हुए कहते हैं कि ये
- 1:08:05इन्द्रियों भोग कर रहे हैं, बस यही आके मैं तुम्हें कहता हूँ जब
- 1:08:10तुम इतना त्याग करती रहो यह थोड़ा सा त्याग और करता हूँ क्योंकि
- 1:08:18तुम्हारे तुम्हें फॉलो करने वाले लोग।
- 1:08:23तुम्हारे शरीर की कर्म प्रणाली को ज्यादा देखेंगे, उसको फॉलो ज्यादा
- 1:08:30करेंगे। अब तुम जो बात को वो कहते कहेंगे
- 1:08:36तो छोड़ो, ये भी वो सुनेंगे। लेकिन वो शो करते क्या हैं उसका
- 1:08:43वो ज्यादा फॉलो करेंगे। कृष्ण करते क्या हैं?
- 1:08:48उसको ज्यादा फॉलो करेंगे, क्योंकि तुम तो बाहरी ढांचों को देखते हो,
- 1:08:54तुम भीतर तक तो पहुंचे नहीं, इसलिए तुम भीतर की बात जानते ही
- 1:08:57नहीं। तो भक्त क्या करेगा, फॉलोवर क्या
- 1:09:02करेगा, शिष्य क्या करेगा? इसमें जीतने भी गुरु हैं।
- 1:09:09उन्होंने अपना चरित्र संभाल के रखा।
- 1:09:16ये नहीं कि वो जानते नहीं थे, जानते थे।
- 1:09:20लेकिन क्या की उम्मीद में त्याग नहीं कर सकते?
- 1:09:23आने वाली जनता के लिए ये तो एक मैं समितियों के खुद घर इतना सा
- 1:09:33त्याग कर दूँ। कि लोग अगर तुम्हारा अनुकरण करने
- 1:09:41के लिए तुम इतने अच्छे भक्त हो और लोग तुम्हारा अनुकरण करेंगे, तो
- 1:09:48तुम्हें पता है क्या होगा आज क्या हो रहा है तुम्हारे नाम पे पता है
- 1:09:53पुरुषों को पता है नहीं पता। आज जगह जगह आश्रम खुल गए हैं।
- 1:10:02छोटे छोटे और मेरे पास से शिकायतें हैं आपकी कि हमारे गुरु
- 1:10:07नाम नाम मैं नहीं बताऊँगा। खैर, हमारे से सेक्स करते हैं।
- 1:10:16वृद्ध हो गए मुंच नंदनी बैठा संधनी सेक्स करना यह सिखाकर गए हो
- 1:10:32तुम लोगों को? यहाँ आकर पिच फंसता है भाई अन्यथा
- 1:10:41होश और बुद्ध बिलकुल समय पिच ये है ये बुद्ध मूर्ख थे क्या?
- 1:11:0035 वर्ष में पहुंचने के बाद 80 में मरते हैं, देह त्याग करते
- 1:11:08हैं, 45 वर्ष तक बोलते हैं तो चरित्र को साधते हैं तो क्या
- 1:11:14मूर्खते हैं? क्या वो जानते हैं?
- 1:11:16क्या इन्द्रियां बहती हैं? मैं नहीं बहता।
- 1:11:20उन्होंने लेबरल सेक्स क्यों नहीं किया?
- 1:11:22तुमको ज्यादा समझदार हो तुमने कोई एक्स्ट्रा कोई मटेरियल पुर्जा लगा
- 1:11:32है बस यहाँ पे ही फर्स्ट है सबसे पहले अब मेरे मुझे सुनने वाले
- 1:11:42लोग। मुझे सुनने वाले, अच्छी तरह सुनने
- 1:11:48वाले लोग मेरी आवाज़ को भी सुनते हैं और संग ये भी कह देते हैं
- 1:11:55आपने जो एन के ली हैं ना नई उनके शीशे सुंदर बनाते हैं।
- 1:12:01ये जो पीछे दवाई पड़ी बाबा बैस्ट्रो जैम कीजिए कुम्भ लेकर
- 1:12:05आपको रोटी नहीं खाते। अब देखिए कितनी पैनी नगाह है इन
- 1:12:10लोगों की। क्या ये मुझे पूर्ण रूप से सुन
- 1:12:15पाती हैं? जीस वक्त तुम मेरी आँखों पर चश्मा
- 1:12:20निहार रहे थे जीस वक्त तुम वस्तु जयम की आँख इतनी दूर पड़ी शीशी
- 1:12:26देख रहे थे भाई घर का कोई और परिवार का मेम्बर भी यहाँ रख सकता
- 1:12:30है ये ज़रूरी तो नहीं है मेरे लिए है।
- 1:12:38लेकिन इसका मतलब वो क्षण तो मैं जो बोला तुम चुक गए, मैंने क्या
- 1:12:44कहा और यही क्षण का चूका चूका तुम बार बार क्वेश्चन पूछते हो वो ही
- 1:12:50जो मैं बार बार बता चूका हूँ। आज मूंछें कैसी हैं?
- 1:12:58आज दाढ़ी कैसी है? आज टोपी के ऊपर गुलबंद क्यों नहीं
- 1:13:04पहना? अगर तुम इन बातों की तरफ ख्याल
- 1:13:11करते हो तो स्पष्ट है उस वक्त को तुम चूक गए जब मैं बोल रहा था
- 1:13:18तुम्हारे लिए आनंद के सूत्र तो निश्चित रूप से तुमने वो सुने
- 1:13:29नहीं तो प्रश्न उठेंगे। पर मुझे कहना पड़ेगा भाई सब
- 1:13:34वीडियो सुनो पिछड़ियां जाके सब सुनो एक एक वीडियो को खंगालो
- 1:13:43कितनी बार बोल चुका हूँ लेकिन अगर तुम यही देखोगे, आज तो पुराने बेड
- 1:13:48पे बैठा है बाबा। आज तो नए बेड पे बैठे हैं पापा
- 1:13:55दान तो लेता नहीं, पर ये कहाँ से आ गया?
- 1:14:02तुम इन्हीं चीजों के ऊपर विचार करते रहोगे तो मुझे क्या सुना
- 1:14:06तुमने मुझे नहीं सुना तुमने? हर मन का प्रश्न है ये और शायद हर
- 1:14:18मन मेरे ख्याल में यूके में रहता है, जहाँ तक मैं सुनता हूँ, क्या
- 1:14:27कभी होशों की ऐसी बातें करते हो? क्या उस स्तर पर पहुंचने के बाद
- 1:14:33भी दुविधा बनी रहती है? नहीं दुविधा नहीं रहती, कोई
- 1:14:35दुविधा नहीं रहती बाहर जाने के बाद, लेकिन बात मैं करता हूँ कि
- 1:14:41एक व्यक्ति का आचरण यही तो तुम देखते हो।
- 1:14:49अगर संत इतना सा त्याग और आपके अगर मैं ना खाऊंगा खाना मुझे कोई
- 1:15:01फरक नहीं पड़ेगा। खाता भी नहीं।
- 1:15:0413 साल हो गए बाहर गया भी नहीं, गोमा भी नहीं।
- 1:15:07किसी जहाज के ऊपर बैठना भी नहीं चाहता।
- 1:15:10क्योंकि जीस जहाज के आनंद को मैं जिन झूठों को ले रहा हूँ उनकी
- 1:15:17व्याख्या कैसे करूँ मैं तुम्हारे बाहर का कोई भी स्थान ढिठ्य सभ्य
- 1:15:25स्थान नहीं तो दी जे है आप। मैं उस स्थान पे बैठा हूँ जिसे
- 1:15:30देख कर निहाल हो गया तो मुझे बाहर के स्थान सब सीखे नजर आते हैं
- 1:15:37कहाँ जाऊं कहाँ जाऊं? उससे बढ़िया कोई स्थान है।
- 1:15:47ये जो सुख छै जूते चबारे ना बल्ख ना बुखार, ये जानते तो हैं हम।
- 1:15:59लेकिन यह चीज़ मैंने नोट की। कि आप व्यक्ति को संत के वस्त्रों
- 1:16:07को, उसके खाने पीने को, उसके आचरण को पहले देखते हो, शब्दों के बाद
- 1:16:16तो फिर अपना आचरण शुद्ध किया जाए। क्योंकि तुमने आचरण का संघ करना
- 1:16:23है आचरण का संघ अगर तुम्हे लुभा गया तो तुम शब्दों का संघ करोगे
- 1:16:33और शब्दों का संघ करोगे तो तुम अपने भे से उतरोगे।
- 1:16:40आज भी लोग पूछ लेते हैं बाबा ये कल परसों किसी लड़की का मैसेज
- 1:16:46आया, ये बाबा ये जो चमत्कार तुमने दिखाया ये मुझे दिखाओ, अलग से
- 1:16:52रियल दिखाओ ये तो फेक है, मैंने कहा तुमने क्या लेना है, फेक है?
- 1:16:58मैं जो बात समझा रहा हूँ उसे तो नहीं समझते तुम नो दायन सर मैं
- 1:17:05चमत्कार दिखाने के लिए थोड़ी ये तो हमारा मन बहला हुआ है फैशन
- 1:17:11खेड़न मन का चउ ये हमारी आपस की। सारे दिन के थके थके अगर थोड़ा सा
- 1:17:20हँस मजाक कर लिया तो तुम्हें क्या मुश्किल है?
- 1:17:24तुम्हें खुद कहूं रियल चमत्कार क्या बंध गया और फिर तुम्हारी पे
- 1:17:30बात रुक जाएगी क्या? फिर तो सारी दुनिया आएगी?
- 1:17:36क्योंकि हमारी आँखों के सामने हमें तो फिर बाबा पागल हो जाएगा
- 1:17:43चमत्कार दिखाते दिखाते और मेरा ये ना दायित्व है, ना ही मेरा
- 1:17:49मन्तव्य है मैं चाहता हूँ तुम्हें तुम्हारा चमत्कार दिखाना।
- 1:17:54एक बहुत बड़ा चमत्कार तुम्हारे भीतर बैठा है, उसे देखो जो आनंद
- 1:18:08तुमने कभी किसी चीज़ में नहीं जाना उसे अनंत गुणा आनंद वहाँ
- 1:18:16मिलेगा इससे बड़ा चमत्कार रोड का अवसर है।
- 1:18:21बाहर का चमत्कार तो कुछ भी नहीं है।
- 1:18:23बाबा कहते हैं, पाता न पाता लख लेकिन इससे भी बड़ा चमत्कार है
- 1:18:33हमारे अंत में छपा पड़ा। मैं तुम्हें वो चमत्कार दिखाने के
- 1:18:40लिए यक्त निशील कैसे तुम उसकी एक झलक पालो।
- 1:18:56कैसे तुम एक नजर उसको जो जिससे मैं सतूरी कहता हूँ एक नजर उसको
- 1:19:03भर आँखों से देख लो बस इससे बड़ा चमत्कारों को ये हवा में चीजें
- 1:19:10पैदा करना वगैरह मैं खुद ही कहता हूँ ये चमत्कार न्यूज़।
- 1:19:16इनमें उलझना भी मत बैठ जाए। यह तो हंसने खेलने के तरीके हैं
- 1:19:23हमारे अब देखो मैं मजाक करता हूँ, चुटकीला सुनाता हूँ तो मैं क्यों
- 1:19:27सुनाता हूँ, मेरी कोई आदत थोड़ी है, मेरे को चुटकीला सुनने वाला
- 1:19:31आदमी थोड़ी है। क्योंकि ये इतना सब्जेक्ट गहन है
- 1:19:36की आपकी खोपड़ी थक जाती है, आपके तन तू थक जाती है, तो उनको
- 1:19:40रिलैक्स करने के लिए कोई न कोई चुटकला कोई न कोई ऐसी बात जो उबर
- 1:19:45खाबड़ों जिससे आप तो आपका सारा तनाव दूर हो जाता है।
- 1:19:52जी गहन गहन से गहनतम बात समझा रहा हूँ तुम्हें और बीच बीच में
- 1:19:58तुम्हें रिलैक्स करना आवश्यक है, इसलिए बीच बीच में हल्के हल्के
- 1:20:04चुटकले सुनाता रहता हूँ। यह कारण तुम कुछ और समझ जाओ बात
- 1:20:11न। लेकिन मेरा मतलब ये है कि कैसे
- 1:20:16तुम रिलैक्स हो जाओ। तुम हँसते हो तो तुम रिलैक्स हो
- 1:20:19जाता है फिर आगे मैं गंभीर बात वही छेड़ देता हूँ।
- 1:20:24आसानी से समझ आ जाती है वेतर उतर जाती है, बात तब समझिए।
- 1:20:33महावीर अहिंसक हो जाते हैं, उसी तल पे जाके बुद्ध अहिंसक हो जाते
- 1:20:43हैं, उसी तल पे जाके। लेकिन अहिंसक हो जाते हैं या नियम
- 1:20:51नहीं हैं? समझना बात को आनंदित हो जाते हैं
- 1:20:56या नियम और आनंदित व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहेगा,
- 1:21:04लेकिन एक बात और भी नोट कर लेना। अगर शिशु पाल की तरह कोई अति करे
- 1:21:11तो उसकी गर्दन काटने में क्षण भर भी जरी नहीं करेगा।
- 1:21:16जिसके 100 गुना हम माफ़ कर लिए इतना सहनशील व्यक्ति कृष्ण है।
- 1:21:24तुम तो एक गुना भी माफ़ नहीं कर सकते किसी को।
- 1:21:27जीते जी तक तुम्हें लगी रहती है कि उस वक्त मुझे गाली दिया था,
- 1:21:33लेकिन कृष्ण सो गुनाह हम माफ़ करते हैं और फिर उसका शीश काट
- 1:21:38देते हैं तो कहते हैं ऐसा क्यों किया?
- 1:21:39ये तो हिंसक हो गया नहीं, तुम्हें पता नहीं इस बात को।
- 1:21:49हिंसक होना प्रमाण नहीं है। वहाँ जाने का या हिंसक होना
- 1:21:53प्रमाण नहीं। एक ही प्रमाण है वहाँ जाने का
- 1:21:58आनंद तो होना कृष्ण आनंद तो आप राष्ट्र जाते हैं, मुरडिया बजाते
- 1:22:05हैं। निधि वन में राधा संग गोपियों के
- 1:22:10संग रास अच्छे होते हैं, बस यही अनिवार्य लक्षण है।
- 1:22:19मात्र। हिंसा अहिंसा को वक्त और
- 1:22:24सर्कमस्टैंस के हिसाब से पैदा हो जाती है।
- 1:22:28दीज़ आर ऑल, एक्शन्स एंड रिएक्शन्स यह भी सर्कमस्टैंशनल।
- 1:22:42प्रक्रिया थी जो कृष्ण कहते हैं मेरे मरे हुए लोगों को मार दे
- 1:22:46अर्जुन अब ये अहिंसा है क्या? 40,00,000 लोग मरवा दिए और
- 1:22:55बिल्कुल कृष्ण ने मरवा दी अर्जुन तो लंगोट कैसे बैठा था?
- 1:23:00ये कब भाग जो बड़े बहाने किये उसने?
- 1:23:02लेकिन कृष्ण ने भागने नहीं दिया। वहाँ जाकर अहिंसक हो जाएगा, ये
- 1:23:16जरूरी नहीं। वहाँ जाकर व्यक्ति हिंसक हो
- 1:23:20जाएगा, ये भी जरूरी नहीं। वहाँ जाकर व्यक्ति दानी हो जाएगा,
- 1:23:25ये भी जरूरी नहीं। वहाँ कृपाण हो जाएगा, ये अभी
- 1:23:29जरूरी नहीं है। ये तो बाहर की बातें हैं, ये तो
- 1:23:34बाहर के तुम्हारे कायदे कानून हैं।
- 1:23:39तुम्हारे दिमाग में उमड़ी हुई ये भावनाओं हैं।
- 1:23:44किसी वक्त तुम दान करना चाहते हो? किसी वक्त तुम छीन लेना चाहते हो,
- 1:23:49लेकिन भीतर जाने का एक ही लक्षण है जो भीतर चला गया।
- 1:23:54बुद्ध भी आनंदित हो जाते हैं, महावीर भी आनंदित हो जाते हैं और
- 1:24:00इतने आनंदित हो जाते हैं कि बैठे हुए ऐसा लगते हैं कि पाशाण हो।
- 1:24:07मूर्ति वख्त और कृष्ण कृष्ण मुरली अब जाते हैं भीतर का जो आनंद है
- 1:24:23आनंद पीने के बाद। व्यक्ति प्रकट कैसे करेगा इसका
- 1:24:28कोई अंदाजा इसको अच्छे से समझना, भीतर के उस तत्व को तल्प को छूने
- 1:24:38के बाद बाहर आके व्यक्ति उसे प्रकट कैसे करेगा, इसका कोई
- 1:24:43अंदाजा नहीं। यह व्यक्तिगत है यह संस्कारों के
- 1:24:48हिसाब से अलग अलग सब की खोपड़ियां अलग अलग, कोई कैसा बोलेंगे कोई
- 1:24:55चाइना में बोलेंगे, कोई फ्रेन्शस बोलेंगे, कोई संस्कृति में
- 1:24:58बोलेंगे वो हिंदी, पंजाबी में बोलेंगे।
- 1:25:02प्रकृति कारण अलग हो सकते हैं। लेकिन दर्शन अलग नहीं होते।
- 1:25:06दर्शन तो एक है, देखा तो उसी तत्व को है प्रकृति करण अलग अलग बातों
- 1:25:15से होता है तो मैं क्यूँ कहता हूँ उस को भी कहता हूँ, कहीं कोई गलत
- 1:25:21नहीं है। मैं सिर्फ यही बात कहता हूँ कि आज
- 1:25:30तुम देखो तुम्हारी हालत क्या है? तुम्हारी शीशों की हालत क्या है,
- 1:25:37क्या ये उपदेश दे पाए क्या इनका उपदेश?
- 1:25:45व्यक्ति के अंतर को छू पाएगा? प्राणों को आनंदित कर पाएगा।
- 1:25:52इनका उपदेश जिन्होंने अपना पुतला छुआ क्या प्राणों को रस, शहद जैसा
- 1:26:00मीठा? पिला पाएंगे ये लोग?
- 1:26:05क्या ये लोग होठों पे पांवरी रख कर बंसरिया की मदर धुन निकाल
- 1:26:12सकें? क्या इनके हृदय में संगीत बजा
- 1:26:19नहीं बजा? तो आपने क्यों कह दिया?
- 1:26:21कि जब मेरे पैरोकार बनेंगे गलत कह दिया, यही मैं कहता हूँ इसलिए मैं
- 1:26:27तुमसे कहता हूँ मेरे टेप रिकॉर्ड मत बन जाना, टेप रिकॉर्ड में तुम
- 1:26:35अपना समय बर्बाद करोगे, लोग तुम्हारे पांव तो पूछेंगे, लेकिन
- 1:26:40याद रखो ये पांव। मिट्टी के हैं तुम्हारे नहीं ये
- 1:26:47पांव पदार्थ के हैं, पदार्थ इसका मालिक है तुम नहीं पैर फुजवाते हो
- 1:27:00जैसे तुम शंकर की पिंडी को फुजवाते हो जैसे महाकार की पूजा।
- 1:27:05कितने कितने महंगे महंगे पदार्थ बहाये जाते हैं वहाँ और बाहर गरीब
- 1:27:12व्यक्ति जिसकी अंतड़ियाँ निकली हुई हैं महाकाल मंदिर के बाहर
- 1:27:16बैठा है रोटी को मजबूर यह पूजा नहीं।
- 1:27:22पूजा है कि पहले बाहर बैठी तो तुम रह जाओ, उसकी भूख को मिटाओ, फिर
- 1:27:29अगर फालतू बच जाए तो बहा दो, कोई बात नहीं।
- 1:27:35वैसे तो बहाना नहीं चाहिए। द्रव्य है कीमती द्रव्य है, संभाल
- 1:27:43के रख लो फिर काम आ जाएगा कल काम आ जाएगा भूख सरोज झलकती है कहाँ
- 1:27:51आकर आंकड़ा 36 का आता है 36 का आंकड़ा यहाँ आता है बिल्कुल जब
- 1:28:00खाते हैं आरओसो। स्वादिष्ट पदार्थ, पकोड़े, कोड़े
- 1:28:05सब खा जाते हैं, लेकिन इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।
- 1:28:13वो जानते हैं कि जीवा के टेस्ट बड्स मुझे बताते हैं कि स्वाद?
- 1:28:21और यही जानना था, वो जान रहे थे कौन बोल रहा है?
- 1:28:26वो जानते हैं ये यंत्र बोल रहा है संभोग कौन कर रहा है वो जानते हैं
- 1:28:35इंद्रिया कर रहे हैं। आनंद किसे आता है?
- 1:28:41हाँ आनंद उस व्यक्ति को नहीं आता। आनंद तो वो है ही जो भीतर बैठा
- 1:28:51हुआ तत्व है आनंदित तो वो पहले से ही शिव हम है।
- 1:28:58आनंद उसका स्वभाव है। सक्त चित् आनंद।
- 1:29:01उसका स्वभाव है तुम्हारी इंद्रियों से लिया हुआ स्वाद उसका
- 1:29:07आनंद बढ़ाएगा नहीं, न ही घटायेगा इसलिए उपनिषदों में कहा गया।
- 1:29:17उणस्य पूर्ण माताएँ पूर्ण मेगा प्रशिक्षक हैं।
- 1:29:23उस पूर्ण को न बढ़ाया जा सकता, न घटाया जा सकता।
- 1:29:28मैं तो जितना है सृष्टि के कण कण में वह व्याप्त है।
- 1:29:34इससे ज्यादा और क्या बढ़ेगा? वह घटाया भी नहीं जा सकता।
- 1:29:40उसको सारी दुनिया की यकसा पीले तो भी वो ज़रा भी नहीं घटेगा।
- 1:29:47पूर्ण से पूर्ण में दाय पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लिया जाए पूर्ण
- 1:29:52में वापस। पुन ही बचेगा।
- 1:29:55सारी दुनिया भी एक बार की गुंट भर ले तो भी वो रत्ती ही कम होने को
- 1:30:01नहीं। ये उसका स्वभाव है।
- 1:30:05बस बात यहीं अड़ती है आकर तुम देख लो फिर आज क्या हो रहा है?
- 1:30:13दो बातें और कर दो, उस परम आनंद तक पहुंचने का कोई रस्ता नहीं।
- 1:30:25पाथ लेस रस्ता विघीन रस्ता क्यों? क्योंकि अंत में पाओगे कि तुम भूल
- 1:30:38जाना कोई पाप नहीं होता, बस उसे रिमेम्बर करना, तुमने खोया नहीं,
- 1:30:47तुम भूले और भूला। याद कर ले तो मिल गया किसी प्रकार
- 1:30:56की विज्ञान भैरव तंत्र की 112 को दिया।
- 1:31:00ये जो भी हो शो बता दे या जो भी विज्ञान भैरव तंत्र में दिखाओ वह
- 1:31:06व्यर्थ हो जाता है। जब तुम पहुंचते हो।
- 1:31:10जैसे सीढ़ी व्यर्थ हो जाती है जैसे तुम छत पर पहुँच जाते हो पर
- 1:31:15उसकी कोई जरूरत रहती है और वहाँ तो भीतर का मसला तो कुछ अजीब है
- 1:31:24वहाँ जाकर तुम्हें पता लगेगा कि सीढ़ी की कोई आवश्यकता नहीं है।
- 1:31:30मैं था ही तुम्हें आनंद बनना नहीं है, तुम आनंद हो, यह जानना है नो
- 1:31:42दाय है सर, इसलिए कहा अपने आप को जानो, तुम्हीं हो तत्व मशी छेद
- 1:31:47के। अनल हक अहम् ब्रह्मस्म इन शब्दों
- 1:31:55का अर्थ क्या होता है? मेरा विचार मैं ही हूँ ब्रह्म मैं
- 1:31:59ही हूँ आनंद शिबो हम वो आनंद में ही इनका अर्थ क्या होता है?
- 1:32:05अनल हक इसका अर्थ क्या होता है? तत्व और नसीब श्वेत की अर्थ क्या
- 1:32:09होता है? आखिर में तुम ये ही भागोगे, इसलिए
- 1:32:15किसी प्रकार की न नाम जप न पांच नाम जप न जात ये सब बकवास है, कोई
- 1:32:24रास्ता नहीं। ज़ोर न जोगती।
- 1:32:27छूट संसार इस संसार से मुक्त होने के लिए किसी प्रकार की ज्योति की
- 1:32:35आवश्यकता नहीं है। क्यों?
- 1:32:38क्योंकि तुम ऑलरेडी मुक्त हो यू आर ऑलरेडी लिबरेटेड तुम बंदे हो
- 1:32:42ही नहीं स्वप्न में बंदे तो क्या बोलते?
- 1:32:48ओके, सच में बंधना थोड़ी होता है उसे खाव आया।
- 1:33:07कब सादे का था हम जब आँख खुली तो टूट गया जब आँख खुली तो टूट गया।
- 1:33:27प्यार तुम्हें स्वप्न बनकर मुझे प्यार तुम्हें स्वप्न बनकर तड़पाय
- 1:33:42कभी तो। मत रो होना ये प्यार तुम्हें
- 1:33:51स्वप्न बनकर तड़पाये कभी तो मत रो होना हम।
- 1:34:05मैं फिर बस ऐसे ही महफिल को जोड़ देना भरी भराई महफिल को छोड़ के
- 1:34:12तुम 1 दिन अलविदा कह के चले जाते हो बड़ी मुश्किल से पाला था।
- 1:34:26लेकिन सपना था तुम कभी अपने आप को खोया नहीं हो, तुम सदा से आनंद
- 1:34:35हो, चिंता मत लो, पहले भी आनंद थे आज सच।
- 1:34:44आज भी आनंद हो जुगाड़ सच है भी सच और भविष्य में भी आनंद हो गए।
- 1:34:54नानक हो सिंह भी सच तुम आनंद थे जुगों जुगों से आनंद थे।
- 1:35:03आनंद ही आज हो, आनंद ही सरदार होता है आज सच दुखा सच हैप्पी सच
- 1:35:14नानक होसेंगी सच सभी साधनाएं बेकार।
- 1:35:26सभी साधनाएँ बेकार है ना भी करो तो तुम तुम्हारा स्वभाव आनंद कभी
- 1:35:37खो नहीं पाओगे भूल जाते हो, भूलना और खोना ये दो चीजें।
- 1:35:44धन्यवाद।