Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Mar 25 - Japji Sahib Paudi 2nd Part - शक्ति, चेतना और जड़ता – अध्यात्म में इनका क्या महत्व है?
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- 0:00हुक्मी होवन आकार हुक्म न किया जाए हुक्म होवन जी हुक्म मिले
- 0:12बड़ाई हुक्म उत्तम नीच। बड़ी शानदार रेश्यो के साथ चलते
- 0:22है बाबा क्या अद्भुत रेश्यो है स्टेप ब्य स्टेप इसलिए जपजी में
- 0:34पूड़ी सीढ़ी दर सीढ़ी। तो बाबा शुरुआत करते है हुक्म
- 0:43होवण आकार उसके हुक्म से जड़ पैदा होता है और आकार जड़ का होता है
- 0:56हुक्म। होवन आकार सबसे पहले जड़ होता है
- 1:02और जड़ आकार होता है, साकार होता है।
- 1:08हुक्मन न के आचार्य ये बात समझ लेना कि ये जो शब्द मैं बोल रहा
- 1:15हूँ। इसको आप अपनी बुद्धि से समझ नहीं
- 1:20पाओगे। बस जैसा मैंने देखा वैसा या तो
- 1:26तुम भी देख लेना या फिर तुम मेरी बातों पर यकीन कर लेना।
- 1:33क्योंकि बाबा अच्छी तरह से जानते है कि तुम यकीन नहीं कर पाओगे,
- 1:41कितनों को तुमने चूका कितने नानक इससे पहले आए?
- 1:47यद्यपि उनके रंग रूप आकार पहरावा बोली अलग लेकिन तुमने पहचाना नहीं
- 1:57उस एक तत्व को जो अपना खेल खेल रहा है हुक्म में जड़ पैदा होता
- 2:07है हुक्म होम आकार। हुकुम न किया जाए हुक्मि होवण जी
- 2:15पहले जड़ पैदा कर दिया, फिर उसके भीतर उसमें चेतना डालते उसके
- 2:24हुकुम से उस पदार्थ में पंचभोतक शरीर में चेतना को डालता है
- 2:30परमात्मा। यह परमात्मा ध्यान रखना यह जीस
- 2:37जीव की बात करता है वह चेतना की बात है जहाँ बड़ा भ्रम पैदा हुआ
- 2:43है अभी से ऐसा समझना जी। जिससे जिसकी शक्ति से यह कठपुतली
- 2:57प्राण में होती है, जिसकी शक्ति से यह कठपुतली चलती है।
- 3:06जैसे आप देखते हो पक्का? पंखा ठहरा हुआ है ये जड़, लेकिन
- 3:15फिर उसमें विद्युत छोड़ी गई, पावर छोड़ी गई, बटन ऑन किया तो पत्थर
- 3:23पंखे ने घूमना शुरू कर दिया। लेकिन एक तीसरी चीज़ भी है।
- 3:31जीसको आप चूक रहे तो कर्म वाइज बात करते है पापा हुक्म होवण आकार
- 3:39हुक्म न के आ जाए हुक्म होवण जी पहले तो बनाता है पंच भौतिक शरीर
- 3:47जड़। पर उसके भीतर डालता है वो शक्ति
- 3:54जी शक्ति जीस शक्ति से ये पंखा चलता है यहाँ तक समझाते आप चलिए
- 4:03आगे चलते लेकिन यहाँ बात खत्म नहीं होती।
- 4:09पंचभोतक शरीर और उसके भीतर एनर्जी और उस एनर्जी के आगे भी कुछ है।
- 4:18इन तीनों चीजों का संगम जब होता है पदार्थ का शक्ति का और उससे
- 4:26आगे चेतना का। इन तीनों चीजों को दिमाग में बसा
- 4:30लेना है। आप चूकते रहे हो सिर्फ इसी वजह से
- 4:38के आपके मार्गदर्शकों ने ठीक से जाना नहीं और इसलिए।
- 4:46जैसा उन्होंने जाना वैसा आपको बता दिया हुक्मी हों जी, तो मैंने कहा
- 4:57है कि तीसरी चीज़ भी है, देखिये पंखा ठहरा हुआ है जड़।
- 5:06दिखाई पड़ता है तो जब हम बटन ऑन कर देते है तो वह बिजली दिखाई
- 5:13नहीं पड़ती, विद्युत दिखाई नहीं पड़ती, पंखा घूमता है, लेकिन हम
- 5:18अंदाजा लगा सकते है। समथिंग इस देर वहाँ कुछ है।
- 5:26और अगर हाथ लगाते हैं तो वह हमें शोक करती है, नुकसान भी पहुंचा
- 5:35सकती है। ये क्या हुई ये हुई शक्ति?
- 5:43अब तीसरी चीज़ क्या है? अब बाबा समझाते है थोड़ी सी आप
- 5:49अपनी बुद्धि को महिन कर महिन करोगे तो तीसरी बात को समझ पाओगे
- 5:58तीसरी क्या है? पंखा जड़ है।
- 6:04और ऊर्जा शक्ति है, लेकिन ध्यान रखना शक्ति चेतन नहीं है।
- 6:16समझाए शक्ति चेतन नहीं है। चेतना का अर्थ क्या होता है?
- 6:26चेतना का अर्थ जो स्वतंत्र है, जो स्वतंत्र इच्छा कर सकती है वह
- 6:31चेतना, लेकिन पंखा अपने आप से नहीं चल सकता शक्ति के बिना चलेगा
- 6:40नहीं। तो शक्ति भी अपने आप से पंखे में
- 6:45प्रविष्ट नहीं हो सकती। उसे कोई तीसरी शक्ति चाहिए जो बटन
- 6:55को ओन करे और पंखा चढ़ाये समझना थोड़ी सी गहरी।
- 7:01बारीक दिमाग को करके समझना है। पंखा जड़ बटन छोड़ा, उसमें
- 7:12विद्युत का संचार हुआ, गति पकड़ी, पंखा चलना शुरू हुआ।
- 7:19यह क्या है? यह एनर्जी है।
- 7:22इसे विद्युत कहते हैं। पदार्थ भी हो गया, विद्युत भी हो
- 7:26गई, शक्ति भी हो गई। लेकिन तीसरी चीज़ यह है क्या यह
- 7:32बटन अपने आप तो ऑन हो नहीं सकता। यह बटन किसकी इच्छा से ऑन हुआ?
- 7:41ये तीसरी शक्ति है चेतना चेतना ने हुक्म किया ये तीनों का जब संगम
- 7:49होता है त्रिवेणी संगम इसी को कहते हैं हम तो जाके स्नान कर
- 7:54लेते हैं त्रिवेणी संगम। लेकिन यह त्रुवेणी संगम नहीं है।
- 8:01त्रुवेणी संगम ये है शरीर जड़ है शरीर के भीतर जो शक्ति इसका
- 8:09संचालन करती है वह ऊर्जा है, लेकिन मात्र ऊर्जा।
- 8:17और पंचभौतिक तत्व। इससे ही तो सब कुछ नहीं होता।
- 8:22एक तीसरा तत्व भी है जो आज्ञा करता है, शक्ति को आज्ञा करता है
- 8:31कि तू ऐसा कर और वह वैसी ही आज्ञा।
- 8:36का पालन करती बड़ी गहरी बात है, बड़ी गहरी बात है।
- 8:41इसको बड़े महीन दिमाग से समझना होगा।
- 8:44बार बार इस सब प्रवचन को आप कम से कम 10 बार अवश्य सुनें तो आपको
- 8:51समझ में आएगी। कि शक्ति चेतन नहीं है, शक्ति
- 8:57सिर्फ शक्ति है, शक्ति में चेतना नहीं है।
- 9:05चेतन जाने जो स्वतंत्र है, शक्ति भी स्वतंत्र नहीं है, ये गलती मत
- 9:12खा जाना। शक्ति भी स्वतंत्र नहीं है।
- 9:16पदार्थ भी स्वतंत्र नहीं है क्योंकि अगर शक्ति स्वतंत्र होती
- 9:21तो शक्ति जिसे चाहे मारती थी, जिसे चाहे छोड़ती थी, ना तो
- 9:28पदार्थ, ना ही शक्ति। दोनों स्वतंत्र है लेकिन त्रिवेणी
- 9:34संगम फिर तीसरी कौन सी सत्ता है? तीसरी सत्ता है चैतना यह चैतन्य
- 9:42की धार यह चैतन्य की धारा यह त्रिवेणी संगम को पूरा करती है।
- 9:52तो इन तीन बिंदुओं को याद कर लेना यह शरीर जिसके जरिये मैं बोल रहा
- 9:57हूँ, लेकिन मैं वो नहीं जो बोल रहा हूँ।
- 10:02यह एक ही जंत्र है और अगर इस शरीर में शक्ति ना होती।
- 10:11तो मेरा हुक्म ये शरीर ना मानता तो फिर किस चीज़ की जरूरत पड़ेगी?
- 10:16शक्ति, ऊर्जा, ऊर्जा के बिना शरीर जलता नहीं, लेकिन ऊर्जा स्वयं से
- 10:27शरीर को संचालित नहीं कर पाते। ऊर्जा को संचालित करने वाली एक
- 10:36चेतना है ध्यान रखना आपके पावर हॉउस में ऊर्जा भरा पड़ा है, आपके
- 10:42एटोमिक पावर प्लांट में ऊर्जा भरा पड़ा है, लेकिन चेतना उसमें
- 10:47बिल्कुल भी नहीं? क्या है?
- 10:52चेतन नहीं, वह स्वतंत्र रूप से क्रियाकिलाप कर सकता है।
- 10:57नहीं कर सकता तो चेतना इस समथिंग एल्स?
- 11:03तो मैंने तीनों चीजों का विश्लेषण कर दिया, एनालिसिस कर दिया।
- 11:08पदार्थ पदार्थ के बाद शक्ति शक्ति के बाद क्षेत्र में ऐसा समझ लो कि
- 11:21चेतना अपने कामों को सम्पूर्ण करने के लिए उसको दो चीजों की
- 11:28आवश्यकता पड़ती है। एक तो शक्ति है और एक जिसके
- 11:35द्वारा उसने शक्ति से काम लेना है यंत्र मैं शरीर को हिलाऊंगा मैं
- 11:44बोलेंगे मैं देखूंगा लेकिन आँखें नहीं होंगी तो मैं देख क्या
- 11:49सकूंगा? तो यंत्र भी आवश्यक है, शक्ति भी
- 11:54आवश्यक है और मेरी इच्छा भी आवश्यक है।
- 11:59ये तीनों चीजों का जब संगम होगा तो देख पाऊंगा मैं इस शरीर के
- 12:07द्वारा। लेकिन अगर ये शरीर ना रहा अगर ये
- 12:14शक्ति ना रही मैं फिर भी देख पाऊँगा तो मैं स्वतंत्र हूँ, बिन
- 12:25पग चले ही सुनाई बिन कान। एक दो है।
- 12:32अगर पैर भी ना रहेंगे तो मैं चलूँगा और ताज ना रहेंगे तो मैं
- 12:41सुनूंगा। पैर ना रहे तो मैं चलूँगा।
- 12:52और विविध प्रकार के कर्म भी करता हूँ कराइं कर्म बहुविधिणा बहुत
- 13:09प्रकार के कर्म भी करता हूँ। अगर मैं चेतना के इस रूप में
- 13:16अकेला भी रह गया, तो फिर भी मैं कर्म कर सकता हूँ, फिर भी मैं चल
- 13:25सकता हूँ फिर भी मैं सुन सकता हूँ मैं देख सकता हूँ मैं स्पर्श कर
- 13:30सकता हूँ यज्ञ भी? मेरे पास ये इंद्रिया न रहे तो
- 13:38इंद्रियों का काम क्या है? इंद्रियों का काम है।
- 13:42कठपुतलियों को कठपुतलियों से बातचीत करने का एक ढांक तरीका
- 13:50बड़ा गहन विषय है। इसको बार बार सुनना तो आपके समझ
- 13:54में आ जायेगा। हुक्महोम आकार यह पदार्थ उसके
- 14:01हुक्म में बनता है। इस्लाम में एक शब्द है कि अल्लाह
- 14:06ने कहा हो जा और यह कायनात हो गई। क्या हो गया, पदार्थ हो गया, कहा
- 14:15किसने संकल्प किसने किया चेतना उस चेतना और होने के भीतर प्रकृति के
- 14:26होने के भीतर किस चीज़ ने काम किया?
- 14:29किसके द्वारा काम किया? शक्ति के द्वारा काम किया, ऊर्जा
- 14:34के द्वारा काम किया, परमात्मा ने संकल्प लिया और यह सृजना हो गई,
- 14:44लेकिन यह सृजना काम तब करेगी जब उसे उर्जा मिलेंगे।
- 14:53हुक्मी होवन आकार हुक्म न के आ जाए हुक्म होवन जी पदार्थ के भीतर
- 15:01फिर जी डाल दिया यानी शक्ति डाल दी पंखे के भीतर।
- 15:07विद्युत का प्रवाह जारी कर दिया। हुक्मी मिलय बढ़ई अब तीसरी बात
- 15:15है। ये चेतना से संबंधित है आकार
- 15:24पदार्थ से संबंधित जीव। ऊर्जा से संबंधित और तीसरी चेतना
- 15:32भूकंप मिलय बढ़ आई। यह मान प्रतिष्ठा यह अपमान यह
- 15:42चेतना के संकल्प से होता है। वह जो चाहता है।
- 15:48वह ही होता है और वह चाहता क्यों है इसका विश्लेषण?
- 15:58बाबा कहते हैं, हमसे मत पूछना, यह तो वही जानें।
- 16:05जिसकी सर्जना है, हुक्मन्ना की आशा है, लेकिन वह समझदार बहुत है,
- 16:18जो हुक्म लिखता है आपके न्यायालय में बैठे हुए जज हुक्म लिखते हैं।
- 16:26लेकिन ऐसे ही तो हुक्म नहीं लिखते।
- 16:30आपने कभी देखा है हुक्म आखिरी अवस्था है?
- 16:35किसी भी केस की सूट की हुक्म आखिरी अवस्था है, लेकिन उस हुक्म
- 16:44लिखने से पहले? जज सिर्फ हुक्म ही नहीं लिखता।
- 16:48जज बहुत कुछ देखता है, बयानात होते हैं, ग्वाहियां होती हैं,
- 17:00सारे रूफ देखता है। कागज पत्र सब फलोरता है खंगालता
- 17:06है। सब कुछ देखने के बाद न्यायाधीश
- 17:13लिखता है आखिर में हुकुम तो परमात्मा यूँ ही हुकुम नहीं कर
- 17:19देता, इस बात का भी ध्यान रखना यह आगे जाकर बात साफ हो।
- 17:25अगर वह कुछ हुक्म करता है तो उसका कोई कार्य इस बात को आप अंडरलाइन
- 17:34कर ले। यह कभी फिर खुलेगा दरवाजा यह अभी
- 17:40बंद रहने। जज हुक्म लिखता है ऐसे ही नहीं
- 17:49लिख देता। फिर तो वो उच्च शंकन हो गया।
- 17:54फिर तो वो तानाशाह हो गया। नहीं पहना तो तानाशाह है।
- 17:59ना उशंकल है, वह बड़ा बड़ा शानदार उसका अस्तित्व है।
- 18:10वह हुक्म करता है, लेकिन ऐसे ही हुक्म नहीं कर देता हुक्म करने से
- 18:17पहले जज। 1000 बार देखता है, कागज पड़ताल
- 18:24करता है, गवाह देखता है, व्यानात देखता है, प्रमाण देखता है अगर
- 18:34कोई कतल हुआ तो किस्से हुआ। कौन सा हथियार बरता, क्या तरीका
- 18:41अपनाया गया वह सब देखता है। अगर कोई हथियार के ऊपर खून लगा
- 18:47है, उसकी फोरेंसिक जांच करवाता है।
- 18:53हुक्म लिखने से पहले न्यायाधीश। 1000 प्रकार के तौर तरीकों में से
- 18:58गुजर जाता है। तब जाके कहीं हुकम लिखता है यह जो
- 19:05आप कहते हो कि उसके घर देर है, देर का मतलब बस यही है।
- 19:11प्रोसेसिंग में देर लग जाती है। यह सारा माजरा देखना है इसलिए बीज
- 19:22तो हम आज बोते हैं। हमें पता है इसका फल क्या होगा?
- 19:27गेंहू, बीजी, गेंहू, उगेगी, बबूल, बीजा, बीजा।
- 19:33कबूल उगेगा आम बीजा आम ये तो पक्का पता है, लेकिन कब उगेगा ये
- 19:43हम नहीं चाहते तो कर्म हम कर देते हैं, लेकिन उसका फल कब मिलेगा?
- 19:56ये हम नहीं जानते इसलिए हम अक्सर उस जनम में जीस जनम में हमने कोई
- 20:04बुरा कर्म नहीं किया होता। पाप भी भोक सकते है और हम बड़े
- 20:08मज़े से तर्क भी दे सकते है मैंने इस जनम में तो कुछ किया नहीं फिर
- 20:12मैं दुखी क्यों? तुम्हें पता नहीं तुम तो वो ही हो
- 20:16ना घर ही तो बदले कर्म तो वही रहे ना, कर्म तो साथ नहीं किया है,
- 20:26बीज तो वही रहे ना बीज तो अंकुरित भी हुए भी हुए।
- 20:33और फूल और फल भी आए, लेकिन वक्त रख गया।
- 20:42इन सबके भीतर वक्त रख गया, हुकम मिले बढ़िया।
- 20:49अगर वो चाहता है तो आपको बढ़िया ही मिलती है।
- 20:54लेकिन मिलती है उसके हुक्म में जैसे जज हुक्म लिखता है, इसको जेल
- 21:01होनी चाहिए। यह इज्जत वही होना चाहिए, हुक्म
- 21:09में लैब बढ़ जाएगी। हुक्म में उत्तम नीच उसके हुक्म
- 21:17में है, तुम उत्तम स्थिति को प्राप्त करते हो और उसके हुक्म
- 21:24में है, तुम नीचे स्थिति को प्राप्त करते हो।
- 21:32यहाँ उत्तम नीच का मतलब वर्ण व्यवस्था से नहीं है, इस बात का
- 21:38ध्यान रखें। उत्तम का मतलब है आपकी वो अवस्था
- 21:45जिसमें आप शीर्ष स्थान पे होते हैं।
- 21:49चेतना जहाँ आप आनंद की अवस्था में वास करते हैं, जहाँ आप खुद खुदी
- 21:56में हो जाते हो वो आपकी उत्तम अवस्था है और अगर आप पदार्थ में
- 22:05उलझे रहते हो। धन में, मान में पदगियों में तो
- 22:11फिर वो नीच क्षुद्र, जो क्षुद्र में उलझ गया, वह नीच, वह उत्तम
- 22:21में चला गया वह ऊच। यह स्थितियों की बात कही है।
- 22:27बाबा यह वर्ण व्यवस्था की बात है। हुक्म मिले, बढ़िया हुक्म उत्तम
- 22:35नीच बड़याई भी मिलती है तो उसके हुक्म में मिलती है और अगर आपकी
- 22:43गति। नीच हो गई है और उच्च हो गई है तो
- 22:50ये भी उसके हुक्म में अगर आप जेल में बंद हो गए तो भी अगर आप
- 22:55कारागिरी से छोड़ दिए गए, तो भी होता उसके हुक्म में।
- 23:00इसलिए संत कहता है कि जो होता है। बिल्कुल ठीक होता है और तुम्हारे
- 23:08भले के लिए होता है, लेकिन इसका अर्थ यह जाना था संतो ने और यह
- 23:19आरोपण कर लिया असंतो ने। आज असंत इन शब्दों का दुरूपयोग कर
- 23:26रहे हैं। खुद तो जाना नहीं उदघोषणा इस बात
- 23:33की करते हैं कि जो होता है वह अच्छे के लिए होता है।
- 23:39हालांकि जब बुरा होता है तो यही लोग।
- 23:43गालियाँ निकालते है, रोते है, भगवान की व्यवस्था पे शक उठाते
- 23:48है, दुःखित होते है और यही लोग कहते है जो होता है अच्छा होता
- 23:57है। जब संकट आ गया, जब दुःख आ गया तो
- 24:01फिर कहेंगे भगवान ये क्यों दे दिया?
- 24:05जब सुख आ गया तो खुश हो गए। भगवान तो बड़ा दयालु है।
- 24:12जब दुख आ गया तो भगवान दुष्ट है नहीं, वह हुक्मी है, उसने हुक्म
- 24:20किया है। और उसके हुक्म का कोई कारण है।
- 24:24मैंने पहले भी बताया, वह ऐसे ही हुक्म नहीं लिख देता।
- 24:31हुक्म लिखता है उसका कारण हुक्म मिला, बढ़िया हुक्म, उत्तम नीच।
- 24:40हुकमल लिख दुख दुख सुख पाई है जो उसने लिख दिया आपके दुख लिख दिया,
- 24:50आपके सुख लिख दिया आपको वही भोगना पड़ेगा लाख कोशिश कर।
- 25:01भोग न पड़ेगा हुकुम लिख दुख सुख पाई एक न हुकुम वक्षिश एक हुकुम
- 25:13सदा बवाई है परमात्मा है। एक व्यक्ति के जीवन में अपना
- 25:23हुक्म लिख दिया कि यह ऐश करेगा, यह राजा की गद्दी पर होगा और एक
- 25:34व्यक्ति के जीवन में लिख दिया। कि यह दुख अस्पतालों में वह क्यों
- 25:45लिख दिया? फिर तुम कहते हो, वह तो न्याय कर,
- 25:49वह तो दयालु है, फिर ये क्यों लिख दिया उसने बताता हूँ।
- 25:57उसका कोई कारण है? बार बार कहता हूँ मैं इसका कोई
- 26:03कारण है। बिना कारण के जज फैसला नहीं
- 26:07लिखता। फैसला लिखा है तो उसका कोई कारण
- 26:13हुक्म मालिक दुख सुख पाई है। इतना हुक्मी बख्शिश एक व्यक्ति को
- 26:19हुक्म बख्शिश दे देता है एक हुक्म सदा पब आई है, एक भोंकता फिरता
- 26:25रहता है ये क्या क्या यह पार्शलिटी नहीं है परमात्मा की?
- 26:35संत कहता नहीं ये पार्शलिटी नहीं है, बड़े मज़े की बात है तुम्हारी
- 26:42समझ में ये बात आती भी सांसारिक लोग इसे समझते नहीं इसे समझते
- 26:54हैं। लाउसे वादी लाउसे इसे समझते हैं
- 27:00नानक इसे कबीर समझते हैं, इसे समझते हैं महावीर बुद्ध।
- 27:15इसे समझते हैं मोहम्मद वो जानते हैं वो कोई श्रृंखला नहीं उठते।
- 27:31एक हुक्मी सदा पवाई है, एक उसके हुक्म के अंदर भौंकता रहता है, एक
- 27:39जेल में बंद है, एक ऐश कर रहा है, एक बाप के दो बेटे किस्मत जुदा
- 27:46जुदा है, एक भीख मांगता है, एक राज़ कर रहा है।
- 27:50एक बाप के दो बेटे हैं, उसी बाप के बेटे हैं, उसी माँ के जय के
- 27:57समस्त जुदा जुदा है, एक भीख मांगता है, एक राज़ कर रहा है
- 28:04क्या हुआ ये पार्शलिटी हो गई? नहीं है, पर शर्ट वह न्यायकारी
- 28:16है, बड़े मज़े की बात है यहाँ से बाबा शुरू करते है हुक्म होवण
- 28:24आकार हुक्म होवण जी। हुक्म मिले बड़याई हुक्म उत्तम
- 28:31नीच हुक्म एक दुख सुख पाई गया, एक न हुक्म बक्शी एक हुक्म।
- 28:50बाबा कहते है ये सब कुछ जो आप देख रहे हो, यह हुक्म के अंदर ही हो
- 28:59रहा है। हुक्मय अंदर सबको बाहर हुक्म ना
- 29:06कोई। तुम अगर कहो कि ये हुकुम से बाहर
- 29:13हो गया। हुकुम अंदर सबको बाहर हुकुमना को
- 29:20है, ये सारी सृजना है, उसके हुकुम में चल रही है।
- 29:27सुख है, दुख है भोंकना है, राज़ करना है ये सब उसके हुक्म है,
- 29:37बाहर हुक्म ना कोई और देखिए किसी की कोई मजाक नहीं।
- 29:44कि उसके हुकुम से बाहर हो जाए। तुम लाठ चेष्टा उसके हुकुम के
- 29:54विपरीत तुम जा ही ना सकोगे जाओगे, उसके हुकुम न जाओगे।
- 30:02साइंटिस्ट ने इतनी इन्वेंशन की। इन्वेंशन की।
- 30:08ये मानव का शरीर अठ्ठानवे एक असर छह डिग्री के ऊपर बिल्कुल सवस्थ
- 30:14होता है। उसको कोई बुखार नहीं होता, ये
- 30:21आपने जाना। लेकिन क्या आप ऐसा भी कर सकते हो?
- 30:26क्या आप नॉर्मल टेम्परेचर 120 डिग्री सेंटिग्रेड बना दो?
- 30:32ये आप नहीं कर सकते क्या आप ये भी कर सकते हो कि डाइस्टोलिक और
- 30:38सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर? 80120 जो नॉर्मल गिना जाता है
- 30:44उसको आप 200 और 500 बना दो नहीं, आप ये नहीं कर सकते तो बाबा यही
- 30:50बात कहते हैं कि तुम्हें हुक्म के अंदर रहना पड़ेगा।
- 30:56तुम चाह कर भी हुक्म से वार नहीं हो।
- 31:01विज्ञान खोज करता है कि परमात्मा ने यह संरचना को हुक्म क्या दे
- 31:08रखा है। हुक्म यही दे रखा है कि अठ्ठानवे
- 31:11का सर्चे है तो व्यक्ति ठीक है बुखार में।
- 31:18अगर बुखार 108 हो गया, 10 हो गया तो यह नॉर्मल नहीं।
- 31:28अगर डाइस्टोलिक और सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 80120 है इट्स नॉर्मल और
- 31:35अगर नीचे वाला ब्लड प्रेशर। 200 हो गया और ऊपर वाला 500 हो
- 31:41गया। भ्रष्ट हो जाएगा, यहाँ तक आते आते
- 31:47कहीं पहले भ्रष्ट हो जाएगा। यही बाबा कहते हैं कि आप सिर्फ
- 31:53भूकंप को इंवेंट करते हैं। हुक्म कर नहीं सकते और हुक्म में
- 31:59इधर उधर भी नहीं कर सकते। हुक्म से इधर उधर अधेला भी नहीं
- 32:05कर सकते। आपकी कोई औकात नहीं हुक्म है।
- 32:09अंदर सबको आपको हुक्म के भीतर ही इन्वेंशन भी करना पड़ेगा।
- 32:15सेब नीचे करता है नीचे करेगा। अगर तुम ऊपर गिराना चाहते हो तो
- 32:24आपको उसके पीछे कुछ फोर्स लगाने पड़ेगा, वह भी उसके हुक्म में
- 32:30होगा ध्यान रखना। बाहर हुक्म न कोई अगर तुम ये कहो
- 32:37तो चाह कर भी उसके हुक्म से बाहर नहीं हो सकते हो कर दिखा दो हुक्म
- 32:46के बाहर कोई चाह कर भी हुक्म नहीं हुक्म के बाहर नहीं हो सकता।
- 32:54हुक्मय अंदर सबको बाहर हुक्म न खोल नानक हुक्म जे मुझे तब मैं कह
- 33:03न कह जो व्यक्ति उस हुक्म को पहचान गया।
- 33:11नानक हुक्म में ये बूझ है जिसने बूझ लिया जिसने देख लिया, जिसने
- 33:19जान लिया उस हुक्मी को तहों में कहे ना कहे, वह दुखी नहीं।
- 33:32दुखी तुम क्या होते हो होममे के कारण तुम दुखी होते हो मैं के
- 33:40कारण तुम दुखी होते हो तुम कहते हो ये सारी कायनात मेरी चलाई
- 33:48चलती। ये सारी कायनात मेरे हुक्म में
- 33:52चलती पसीने तुम चूक खा जाते हो बाबा कहते नहीं, तुम तो चाह कर भी
- 33:59उसके हुक्म से बाहर नहीं हो सकते और तुम ही नहीं सारी सर्जना उसके
- 34:05हुक्म के अंदर ही चलती है, चलना पड़ता है।
- 34:09हुक्म अंदर सब को बाहर हुक्म न कोय।
- 34:12नानक हुक्म जय बुझे तो हो, मैं कहीं ना कहीं जो उस हुक्म को भूज
- 34:21लेता है, जान लेता है, उस हुक्म को जान लेता है।
- 34:29उसके हुक्म को जान लेता है। उसका होम में कह ना कह वह दुखी
- 34:39नहीं होगा क्यों? क्योंकि उसका मैं मिट जाएगा, उसकी
- 34:45होम में मिट जाएगा। जब मिट जाएगी होम में तो कह कैसे
- 34:53पाएगा के मैंने किया ये बस यही जड़ है तुम तुम्हारे दुःख की जड़
- 35:02तलाश में निकले हो, तुम दुखी क्यों हो?
- 35:08ये जड़ तलाशने में निकले हो तो बाबा जड़ बता रहे है।
- 35:15बाबा तुम्हारी जड़ को काट भी रहे है, बता भी रहे है इस दूसरे कौड़ी
- 35:24में उन्होंने बता दिया। कि तुम दुखी हो क्यों हुक्म के
- 35:30हुक्म के कारण होम में के कारण अगर होम में तुम्हारे भीतर न रहा
- 35:40हो तो तुम दुखी नहीं हो। जहाँ होम में है वहाँ दुख है जहाँ
- 35:52होम में गया वहाँ सुख आया बड़ा सरल सा सूत्र पापा बताते हैं, यह
- 36:04सारी सर्जना। पहले उसका आकार प्रकार बताया कैसे
- 36:10पदार्थ है पदार्थ में शक्ति डाली गई शक्ति के बाद चेतना और चेतना
- 36:16चाहती है, जो वह होता है और सब कुछ वो कम में होता है।
- 36:26और हुक्म ही बड़ा सयाना है और तुम्हे उसका हुक्म मानना पड़ेगा।
- 36:34और अगर तुम उसका हुक्म नहीं मानोगे तो दुखी रहोगे।
- 36:40नानक हुक्म जी मुझे। जब तक तुम मैं कहते रहोगे, होम
- 36:47में कहते रहोगे ये मैंने किया, तब तक तुम दुखी हो तो तुम्हारे दुख
- 36:56का आगाज क्या हुआ? तुम्हारे दुख का कारण क्या हुआ
- 37:01मैं? जब ये कहता कि मैं करता तब ये
- 37:08गर्व योनी में पड़ता जब तुम ये समझते हो कि मेरे चराने से ये
- 37:17सृष्टि चलती। मेरे कहें से सूरज उगता है, मेरे
- 37:28कहें से सूरज छिपता है, मेरी इच्छा से चंद्रमा कलाई बदलता है,
- 37:35मैं चाहता हूँ तो बारिश पड़ती है। मैं चाहता हूँ तो हवाएं चलती और
- 37:43अगर मैं नहीं चाहता तो हवाएं थम जाती है।
- 37:50कितने बाबा कहते है ये सत्य नहीं ये तुम्हारे मैं का उद्घोष?
- 37:58और मैं बहुत बड़े बड़े उदघोष करता है ऐसे ऐसे उदघोष करता है और मैं
- 38:06पागलपन का दूसरा नाम है। मैं कहने वाला व्यक्ति भ्रमित
- 38:13होता है जिसने कहा मैं। बाबा कहते उसने पाया दुःख जिसने
- 38:23कहा तू बाबा कहते उसने पाया सुख और जिसने कहा तू ही तू बाबा कहते
- 38:32उसने पाया आनंद। तो बाबा आपकी जड़ को बाहर निकलकर
- 38:40निकालकर आपको दिखा देते हैं कि जी है जड़ आपकी इस जड़ को अच्छी तरह
- 38:49से देख तुम्हारा होम में ही तुम्हारे दुख के कारण है तुम्हारे
- 38:55दुख की जड़। तुम करते कुछ नहीं, तुम कर कुछ
- 39:01सकते नहीं और तुमने व्यर्थ में ये मैं फंसा लिया बस यही तुम्हारी
- 39:10मूर्खता समझो या मूर्खता समझो या पागलपन समझो।
- 39:16गलती समझो जब तुमने कहा मैं तब तुम हुए दुखी जब तुमने कहा मैं
- 39:28नहीं वह वहीं ही वह तब तुम हुए सुखी।
- 39:35और बाबा कहते है करता तो वही है, सब वही करता है, उसके चलाने से ही
- 39:47धरते घूमते है अन्यथा तुम्हारे पास इतनी शक्ति कहाँ है?
- 39:53तुम तो दो कंटर बार भी नहीं उठा सकते, तुम तो दो कंटर बार उठाने
- 39:58वाले को स्ट्रॉन्गेस्ट मैन ऑफ दी वर्ल्ड हेवी वेइट लिफ्टर का खिताब
- 40:10और वह। कितने भार को रोटेट कर रहा है और
- 40:15बिना तारों के समाये हुए और ये धरतियाँ ये आकाश, ये आकाश गंगाएं
- 40:23ये सारा यूनिवर्स ये ब्लैक बॉल्स यह बिना किसी लैंडर के खड़े है।
- 40:31इनके ऊपर किसी ने खम्भे नहीं लगाए।
- 40:34आपने देखे कोई सपोर्ट देखी नहीं? बिना सपोर्ट के घूम रहे हैं।
- 40:43फिर ये कौन सी शक्ति है जो इन्हें घूमा रही है, बस उसी शक्ति को
- 40:48चेतना कहते हैं। बाबा कहते हैं ये जो तीसरी बात
- 40:53मैंने कही पहले पदार्थ जड़, दूसरा जीव शक्ति और तीसरी चेतना।
- 41:01अगर शक्ति में चेतना ना डाली जाए तो शक्ति में शक्ति तो है, लेकिन।
- 41:11उसमें समझ नहीं है, वह पागल है, वह पागल शक्ति पागल होती है हमेशा
- 41:21नानक हुक्मय के पूछेता हूँ, मैं कहे न कोय जिसने होम में कहना बंद
- 41:28कर दिया। अपनी प्रज्ञा के साथ अपने अनुभव
- 41:32के साथ जो उसकी शर्म में चला गया, जिसने जाना मैं कुछ भी नहीं, मैं
- 41:40हूँ ही नहीं वह सुखी हो गया और तुम्हारी आंतरिक इच्छा।
- 41:49सुखी होने की। मेरी फरियाद तेरे दरगे और सुना
- 42:04कैना। मेरी फरियाद तेरे दरगे और सुनावा
- 42:16के नौ खोल न दफ्तर ऐबा वाले। दर्दो तक ना मैंने खोल ना दफ्तर ए
- 42:34बा वाले दर्दो तक ना मैंने दर्दो तक ना मैंने रखे।
- 42:46चरना दे कोल मेरोवलिया संयार कि चरना दे कोल मेरोवलिया।
- 43:06रखें, चरना दे खोल रखें, चरना दे, खोल रखें।
- 43:23चरना देखो मेरा वालिया सैया रखिए चरना, देखो।
- 43:40तेरे जेहा में नु हो न कोई मेरे जेह लख तनु तेरे जेह।
- 43:58मैनू और न कोई मेरे जे है लख तैनु जे मेरे बीच है भुना होने दे।
- 44:17तू बख्शें दा केहूं जे मेरे विच ऐब नोंदे तू बख्शें दा केलो।
- 44:35तू वक्षेदा के नूरकीं चरिना दे कोल मेरा वालिया वालिया।
- 44:53सांईया रखीं रखीं चरनाद कोल मेरा वालिया।
- 45:09तेरे जेहा में नु हो होर नक मेरे जे हैं लक ते नु मेरे जे हैं।
- 45:29लख तनू जे मेरे विच एम् बुलु हूँ। दे एम् बुल हूँ दे तुम।
- 45:43बख्शे दा के नु। तुम बक्शे दा कैनो रखिये, चरना,
- 45:58देखो चरना, देखो मेरा वाले। वालिया, सांया, सांया, रखि, चरनाद
- 46:18कोल मेरा वालिया धन्यवाद।