Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Dec 25 - महात्मा गांधी अपनी पोतियों के साथ नग्न क्यों सोते थे? मुझे पाप नहीं लगता ! उल्लू का महत्व! Baba ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:14रघु वीर प्रसाद बाबा जी लक्ष्मी का वाहन उल्लू क्यों रखा गया
- 0:30सरस्वती का अंश। गणेशी कछुआ कृपया करके हमें इनके
- 0:54आंतरिक रहस्यों का उद्घाटन करने को कष्ट करें।
- 1:03दीज़ ऑल वर सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स।
- 1:10प्रतीकात्मक चिन्ह से सब क्योंकि प्रतीकात्मक चिन्ह ज्यादा देर
- 1:18टकाऊ रहते हैं। वर्ण देखा जाए तो श्रद्धा के लिए
- 1:22टकाऊ रहते हैं। तुम्हारी भाषाएं बदल जाती है,
- 1:43लेकिन प्रतीक नहीं बदलता जैसे पानी को।
- 1:54कोई नीर कह देगा, कोई जल कह देगा, कोई आग कह देगा, कोई वाटर कह देगा
- 2:00अपनी अपनी भाषाओं में बदल गया, इसलिए रहस्य को कहने के लिए।
- 2:14ऋषियों ने प्रतीकों का उपयोग किया है।
- 2:19रहस्य सदा के लिए है, प्रतीक सदा के लिए है और भाषाएं बहुत सी
- 2:33भाषाएं आज लुप्त हो गई। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा इनके
- 2:40शिलालेखों पर क्या लिखा है? भाषाओं के अर्थ समाप्त हो जाया
- 2:47करते हैं और भाषाएं अनेक हुआ करती हैं।
- 2:58जैसे धर्म तुम्हारे अनेक होता है लेकिन स्वभाव थोड़ी अनेक होता है।
- 3:04स्वभाव तो एक ही होता है तो हमारा बुद्धू बन यही है, पर ऋषियों ने
- 3:14इसलिए प्रदीप चुने भाषण ही नहीं चुने।
- 3:26उल्लू को लक्ष्मी का वाहन चुना गया।
- 3:38सरस्वती का वाहन हंस बड़ा प्यारा प्रतिक है।
- 3:50और आपने पूछा पत्र कि उल्लू क्यों सुना गया?
- 4:04लक्ष्मण का बात है कुछ कारण तंत्र के अलग ही हो गए हैं।
- 4:20अगर पक्षियों में सबसे ज्यादा। उपयोगी चीजें बता दूँ तो आप कुछ
- 4:29जानकर हैरानी होंगे। वह उल्लू उल्लू का प्रतिक अंक
- 4:43विश्वजनक पाठ है। किसी न किसी सांसारिक पर्पज के
- 4:48लिए होता है, लक्ष्मी सांसारिक पर्पज के लिए होती है।
- 4:55परमात्मा नहीं मिलता उससे लेकिन सरस्वती से परमात्मा मिल जाता है,
- 5:05इसलिए सरस्वती का। वाहन चुना गया।
- 5:10हंस विस्तार नहीं करूँगा। बड़े शैतान लोग भी सुनते हैं।
- 5:22मुझे वो विनाशकार की चीजों को चुन लेंगे।
- 5:30अन्नू का उपयोग एटम बम को बनाने में करेंगे।
- 5:38परमाणु से नियंत्रण ऊर्जा के लिए नहीं प्रयोग करेंगे यही मोडों की
- 5:43निशानी में उल्लू की विष्ट। जीस घर में रखी होती है बस एक दो
- 6:01ही बताऊँगा सर उस घर के किसी अंधेरे कोने में लष्ठ के लिफाफ
- 6:14में उल्लू की विस्ट्रा डाल कर रखना।
- 6:21वह अन्न धन का अभाव नहीं रहेगा। उल्लू के तांत्रिक वृक्ष, उल्लू
- 6:27के नाखून, शत्रु को श्रृंगारण के काम आते हैं।
- 6:36लेकिन ये तंत के प्रयोग है और खतरनाक है तुम्हारे पास अगर
- 6:41लक्ष्मी आ भी जाएंगे फिर उससे तुम परमात्मा तक पहुंचने के।
- 6:55उपाय नहीं खोजोगे उससे तुम अन्य अन्य चीजों को खोजोगे, सबकी
- 7:06लक्ष्मी जरूरी है परमात्मा के रास्ते में।
- 7:17उपयोगी है, लेकिन वह वासना का केंद्र न बन जाए, इतना सा इकट्ठा
- 7:26कर लो जितना सा तुम्हारा परिवार भी पड़ेगा और साधु संत।
- 7:35आने वाले सन्यासी भी भूखा न जाए साइन इतना देखिये जा मैं कूट मत
- 7:47समाये, मैं भी भूखा न रहूँ संत न भूखा जाए।
- 8:03लक्ष्मी का वाहन उल्लू उल्लू का प्रत्येक अंग है, इतना का और ऐसे
- 8:16गहरे तंत्र के प्रयोग। मुझे बताने की निश्चितता है जिन
- 8:28प्रयोग को करने से क्षण भर ही रखता है शत्रु को मारने के लिए,
- 8:37लेकिन ध्यान रखना। संत पुरुष ऐसा करता नहीं क्यों
- 8:44अपनी ही सृष्टि को संघारित कोण करता है तुम्हारे पास पिस्टल है,
- 8:51तुम्हारे पास चाकू है, क्या तुम उसे अपने शरीर का अंग काट लेते
- 8:57हो, सब्जी ही काटते हो ना? फल रोटी करते हो, लेकिन अगर किसी
- 9:09बच्चे के हाथ में रोल पर दे दिया जाए तो वह खुद का भी संहार कर
- 9:15सकता है क्योंकि ना समझे इसलिए संत बड़े करूणावान थे।
- 9:23और संतों ने जाना कि तुम बच्चों के समान हो इसलिए मैंने अंधभक्तों
- 9:30का नाम मंद बुद्धि रख दिया है। मंद बुद्धि के हाथों में पावर
- 9:36नहीं आनी चाहिए। अगर उनके हाथों में आपने पावर दे
- 9:43दी तो आज जो हिंदुस्तान का रंग ढंग है वो आप देख सकते हो, दिखाने
- 9:51की जरूरत नहीं है। अंधों को नहीं दिखता मात्र आँखों
- 9:59वाले तो देख ही लिया करते हैं। मंद बुद्धियों को चाहिए की
- 10:13सिंघाशणों की कामना न करे। हालांकि बड़ी बड़बना है।
- 10:17सिंघाशलों की कामना ही मंदबुद्धि किया करता है।
- 10:23यह बड़ा विपरीत जान पड़ेगा, लेकिन सत्य है।
- 10:29मैं कुछ चाहूंगा किसी के ऊपर शासन करना, मैं तुम्हें सुखी करना
- 10:39चाहूंगा। ये ठीक संत हृदय नवनीत सम्मान
- 10:48तुम्हारे दुख और दर्द से। नवनीत बिगड़ जाता है।
- 10:56मेरा हृदय ज़्यादा उठता है, इसलिए मैं शक्ति का प्रयोग तुम्हारे
- 11:04दुखों को दूर करने के लिए करता हूँ।
- 11:09तुम पर आधिपत्य जमाने के लिए नहीं तुम पर राज़ करने के लिए नहीं तुम
- 11:16पर हुकुमरान बनने के लिए नहीं वर्ण मानव से पहले से दुखी है यह
- 11:24खोपड़ी क्या मिली। यह दुधारू तलवार है।
- 11:33इसका आचार्य प्रशांत की तरह प्रयोग किया जाए तो यह विनाशक है।
- 11:45विकास सर दिव्यकीर्ति की तरह उपयोग किया जाए तो यह विनाशक है।
- 11:58और अगस्ती की तरह अगर उपयोग किया जाए तो यह श्रेष्ठतम है।
- 12:09याज्ञ की तरह उपयोग किया जाए तो यह श्रेष्ठतम है।
- 12:14गार्गी बार बार प्रश्न पूछेगा। जग बल्क फ्रौंचित लहज़े में बोलते
- 12:29हैं गार्गी बस तू और मत पूछ कहीं ऐसा ना हो।
- 12:40कि मेरी बुद्धि विनाशता की ओर लग जाए।
- 12:47तू चुप कर जा और गार्गी समझदार थी।
- 12:50चुप करके जा ल नीर आप पानी। वाटर बदल जाएंगे, आज नहीं कल
- 13:07लेकिन ध्यान रखना जैसे मैंने कहा धर्म अनेक जैसे जल के नाम अनेक
- 13:15पानी के नाम अनेक लेकिन साइंटिफिक फॉर्मूलेशन से।
- 13:25सब जगह सामान है वैज्ञानिक प्रतीक दो एटम हाइड्रेशन के एच टू एक एटम
- 13:40ऑक्सीजन का ओह। एच टू ओह यह प्रतीक नहीं बदलेगा,
- 13:49समझ लिया जायेगा अगर प्रतीकों को हम सही समझ सके तुम प्रतीकों से
- 13:56भी छिप के जाते हो यही तो मुश्किल है।
- 14:01फिर वो तोड़नी पड़ती हैं। संत को आकर अन्यथा तुम लक्ष्मी को
- 14:07उल्लू के ऊपर ही बिठाये रखते हो। दीज़ ऑल वर दी सिम्बोलिक
- 14:14रेप्रेसेंटेशन्स एंड यू कैन कॉल्ड अब्रिविएशन।
- 14:29एच टू ओह दो एटम हाइड्रोजन के और एक ऑक्सीजन का जहर नहीं बदलेगा,
- 14:39भाषाएं आएंगी, सृजित होंगी, विनिष्ट हो जाएंगे।
- 14:47एच टू ओह नहीं बदलेगा? इसलिए जिसे तुम धर्म कहते हो, वह
- 14:52नहीं बदलता। आज कितने धर्म हो गए?
- 14:58रोज़ इनकी संख्या बढ़ती जाती है जैसे खोपड़ी में खुजलाट हुई।
- 15:08नया धर्म रोज़ पैदा हो जाता है। ये बीके वगैरह इन चीजों का ही
- 15:15उत्पाद है रोज़ नया धर्म, और क्योंकि बहकी बहकी बातें करते
- 15:32हैं। तो बह की बह की बाते शराबी आदमी
- 15:38को बड़ा आकर्षित करते है और सभी भक्त बन जाएंगे, समझेंगे नहीं,
- 15:47सोचेंगे नहीं बुद्धि काम की है। अगर इसे काम दिया जाए तो?
- 15:56तो संसार के सर्वेक्षण में ये काम आती है, लेकिन अगर तुम संसार से
- 16:03परेशान हो गए तो संत कहते हैं। जैसे मंदिर में जाते हम जूते उतार
- 16:13के आते बस वहाँ पर अपनी बुद्धि को रख आना वहाँ तर्क काम नहीं करता,
- 16:21बुद्धि को छोड़ देना, संत जो बोल रहा है ठीक तुम्हारी बलि के लिए
- 16:25बोल रहा है। तुम बच्चे हो, अभी तुम जिद करो,
- 16:42अभी तुम्हारे हाथ में रिवॉल्वर देना खतरनाक विध्वंसक है।
- 16:54उल्लू तंत्र के प्रयोग में उल्लू का प्रत्येक अंग यहाँ तक के पंख
- 17:04चौंच विष्ठत कम आती है। लेकिन सबसे खतरनाक चीज़ तंत्र में
- 17:19अगर कोई है तो वह उल्लू है और उल्लू की सवारी क्यों दी गई?
- 17:29लक्ष्मण को आपने पूछा तो पुत्र इसीलिए?
- 17:38जे शो चंदा उग्विं के सुर से चढ़े 1000 ऐसे चंदन हो गया गुरबीन कोर
- 17:49अंधार। किसको प्रकाश में न दिखे वह उल्लू
- 17:59संत उसकी कामना करता है। संत कहता है हीश्वर तनसो माँ
- 18:07ज्योतिर्कम है। इस अंधकार से छुटकारा दिला दे
- 18:16ज्योति की और ले चल लेकिन उल्लू कभी नहीं चाहेगा उल्लू तड़क भड़क
- 18:25पे। ज्यादा रोष नहीं मैं अर्थ के
- 18:33अनर्थ कर लेता है उसे ठीक से दिखाई नहीं पड़ता इसलिए उल्लू दिन
- 18:40को सोता है कोई फायदा नहीं है जब दिखना नहीं है।
- 18:46रात को जागता है तमश में गुरु बिन कोर अधार तुम तमश में पड़े रहना
- 19:02चाहते हो, उल्लू की तरह और लक्ष्मी की कामना करते हो।
- 19:08लक्ष्मी का वाहन उल्लू इसलिए बनाएगा।
- 19:12आप तंत्र की ज्यादा बातें मत पूछो, मेरे पास आ जाते हैं।
- 19:15एक मानसा से मेरे पास आया गुरूजी मुझे बता दो लोग मारा कैसे करते
- 19:21हैं? मैं इन दुष्टों को मारना चाहता
- 19:24हूँ, जो राजकीय हैं और विनाश कर रहे हैं।
- 19:27मैंने कहा तुम बहाने बाज़ी मत करो, इससे बात मेरे पास मत।
- 19:32क्या मैं खुद नहीं कर सकता क्या तो मैं बताऊँगा।
- 19:37मुझे कोई पाप नहीं लगता। मैं बहुत तत्व हूँ जिससे कोई
- 19:43अग्नि नहीं जला सकती जिससे कोई पाप का दंश डस्ता नहीं।
- 19:51ना ही जीवन की खुशी उत्सव में बदलती है।
- 19:58मैं जो इन सब से परे तुम्हारा मन तो कहेगा, जल्दी से इकट्ठा करलो
- 20:10और सबसे पहले पड़ोसी को मर। एक हरियाणा का बेटा कह रहा था माँ
- 20:18अगर मैं साणीगर बंगन टेढ़ा पिछवाड़ा पहले कुटुंगा तो माँ
- 20:26कहती बेटा पर बात न करे तू कभी तानीगर बनी हुई ना?
- 20:35ये बड़ों का आशीर्वाद जरूरी होता है।
- 20:39बड़ों के पास टिश्यूज़ कम सक्रिय हैं, लेकिन अनुभव बड़ा गयन है और
- 20:48काम तो अनुभव करता है। मसल काम थोड़ी करते हैं, एक इतनी
- 21:02चाँदनी में उन लोग को दिखाई नहीं पड़ता।
- 21:12गुरु जो शब्द बोलता है तुम्हारी बुद्धि के ऊपर से गुजर जाता है,
- 21:18स्वभाविक भी है गुजरेगा है क्योंकि तुम्हारी आँखें इस ढंग से
- 21:27व्यवस्थित की गई हैं कि वह अंधकार में ही देख सकें।
- 21:36इसलिए उल्लू मज़े से अंधकार में उड़ सकता है।
- 21:39चल सकता है जब सारी दुनिया सो जाती है तो या तो तुम्हारे अंतस
- 21:47का वह तत्व जागता है। जो कभी सोता नहीं है या उल्लू
- 21:52जागता है, दो ही चीजें जागा करती हैं, फिर देखो उल्लू की तरह जागना
- 21:57है। रात्रि जागरण में माँ माँ कहती
- 22:01हुई चलाना है या उस तत्व पर जाना है जो रात को और दिन में सदा ही
- 22:06जगा रहता है, वह कभी सोता ही नहीं है।
- 22:19तुम्हें यह समझ नहीं आता जैसे लक्ष्मी को समझ नहीं आई लक्ष्मी
- 22:27खुद ही मूर्ख है तुम्हें विध्वत्ता क्या देखी विध्वत्ता
- 22:32देगी तुम्हें सरस्वती गायन? किताब ये वो नगमा है जो हरसाज पे
- 22:42गाया नहीं जाता। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस
- 22:47होते हैं। मोहब्बत के वीणा के ऊपर ये साज़
- 22:57छिड़े जाते हैं। तुम्हारे तो सुर नहीं सर, तुम
- 23:10अंधकार का इंतजार करते हो चोरों की तरह और मेरे शब्द को उलट मत ले
- 23:22लेना मैं कहता हूँ चोर मत बन गोट चोर डाकू बन जा।
- 23:33हिटलर डाकू था और मैं उसे साहसी। उसने 2,50,00,000 लोगों का वध
- 23:40किया, लेकिन दिन में जागते हुए किया लोग देख सके और ऐसे लोगों का
- 23:47वध कर सकते हैं। क्योंकि आगे जो देश हैं वो भी
- 23:54उल्लू है जो अपने आँखों से देख लेगा कि यह पाप कर रहा है उनके
- 24:03लिए मिस्टर मित्र देश भी बन जाएंगे।
- 24:08और दूसरे शत्रु देश भी बन जाएगा, लेकिन कुछ ऐसे हिटलर होते हैं
- 24:17जैसे आज यह मार भी देते हैं और पता भी नहीं चलता।
- 24:26ऐसे हिटलर ज्यादा खतरनाक और आज तक के इतिहास में सबसे गलत, सबसे
- 24:33बुरा हिटलर अगर पैदा हुआ तो अपूर्ण देश में आज पैदा हुआ यह
- 24:40मार्ग भी देता है और सबूत भी नहीं रहने देता।
- 24:44हीटर मार देता था और उसके सबूत आज तक जिंदा है देख वो गैस चेम्बर है
- 24:52जहाँ तड़पा के मारा करता था। लोगों को कई व्यक्तियों की तृष्णा
- 24:58होती है भीतर से। उन्हें दूसरों का दुख, दूसरों को
- 25:08दुख देने में आनंद आता है, अपने अपने स्वभाव की बात है, मेरे
- 25:23द्वार के आगे तुम हवाई जहाज रख दोगे।
- 25:29तो जीस व्यक्ति ने अपने घर का अपने कमरे का दरवाजा ही नहीं
- 25:34खोलना, उसके आगे जहाज रख दो या गाड़ी रख दो या सैकल रख दो सब
- 25:39बेकार है। जहाजों का उपयोग तो वो लोग करते
- 25:46हैं जो राष्ट्रपति भवनों में बैठा होता है।
- 25:52कब वो उल्लू हैं? उनको दिन के उजाले में नजर नहीं
- 25:58आता। उनको रात के अंधकार में ही नजर
- 26:02आता है। तो यही बात कही बाबा ने।
- 26:09उल्लू के लिए तो जितनी रात गहरी होती जाएगी उतना ही मज़ा आता है
- 26:13उन लोगों को। इसलिए अमावस्या की रात को जो
- 26:17घोरतम अंधकार से युक्त होती है दीपावली।
- 26:21तब उल्लू के वाहन के ऊपर आके लक्ष्मी तुम्हारे गर्व में दस्तक
- 26:26देती है। तुम इस प्रतीकों को समझ न सके अगर
- 26:33सरस्वती के क्षण में ना गए। फिर तुम्हें अमावस्या की रातों का
- 26:41इंतजार करना होगा। अमावस्या घोर काली रात होती है,
- 26:49ज़रा भी चाँद भी नहीं होता, दूज का चाँद भी नहीं होता।
- 26:59छोटी सी एक पतली लकीर भी नहीं होती।
- 27:08अमावस्या की काली रात, बस चुप करके लोगों को मरवाते जाओ और सबूत
- 27:17मिटाते जाओ, लेकिन कहाँ सबूत मिटते है?
- 27:24इसीलिए तो मैं इन लोगों को लो कहता हूँ मंद बुद्धियों को इन्हें
- 27:30पता नहीं है, सबूत सदा ही व्यक्ति के भीतर रहते हैं।
- 27:35तुम नारक को कराओगे तो ये खुद ही बता देंगे नारक को कराने के बाद।
- 27:44सभी मंदबुद्धि बोलना शुरू कर देते हैं।
- 27:49मैंने ये किया हरिश्चंद्र बन जाते हैं सत्यवादी युधिष्ठिर बन जाते
- 27:55हैं। फिर वो झूठ नहीं बोलता।
- 27:59नार्को टेस्ट इज़ एव्री सोडियम पेंटाथोनो सॉल्ट होता है, इंजेक्ट
- 28:05करना होता है और भी माध्यमों से देना होता है उसमें क्या होगा?
- 28:18जो बुद्धि दबाती थी, सत्य को तथ्यों को कतल पे कतल करके, कतल
- 28:26पे कतल करके वह खत्म हो जाती है और बेहतर सत्य तो छिपा पड़ा ही
- 28:34है, वह तो स्टोर है आपके भीतर। तो कौन रोकता है इस शक्ति को
- 28:42प्रकट न हो जाए इसको कौन रोकता है यह बुद्धि अगर बुद्धि को शून्य कर
- 28:54दिया जाए उस अचित अवस्था में? गहन अचेतन भी न हो और चैत में तो
- 29:05बिलकुल ही न हो वसिति ही हो कि सत्य को प्रकट कर दे।
- 29:11इसलिए सत्य बोलने वाले युधिष्ठिर या राजा हरिश्चंद्र को मैं
- 29:15ज़्यादा समझदार नहीं समझता। इस चरित्र के।
- 29:19सैन्य मित्र चेहरे में कितनी समय थी?
- 29:27बहुत कम और को जंग जीतने के लिए उसके चेहरे का उपयोग करना पड़ता
- 29:34है। उल्लुओं के चेहरे का भी उपयोग
- 29:36करना पड़ता है। और कृष्ण को सबसे ज्यादा मुशक्कत
- 29:41जो के सत्यवादी चरित्र का हनन करने में ही लगा यो को समझा ही
- 29:50नहीं पाए। अरे तुम मर जाओगे, कहते कोई बात
- 29:56नहीं। इतने ज्ञानी हैं ये रोग जैसे
- 30:01आत्मा का पता चल गया उसे और कृष्ण की तरह जानते है कि युधिष्ठिर को
- 30:06आत्मा का जहर भी पता नहीं, बस बुद्धिहीन लोग है यानी मंद बुद्धि
- 30:14है थोड़ी थोड़ी। मंद आग होती है फिर तेज अग्नि भी
- 30:19हो जाती है मंद, आग में तो मुर्दा भी नहीं चलता 800 डिग्री सेल्सियस
- 30:28सब दाह गृह का तापमान होता है इलेक्ट्रिक।
- 30:34घोर घोर ज्वाला, घोर अग्नि घोर हिट टेम्परेचर।
- 30:46इसलिए चरित्र को संवारने वालों को चरित्र से लगाव नहीं करना चाहिए।
- 31:00सत्यवादी हरिश्चंद्र ने चरित्र से लगाव किया तो विश्वामित्र को उसकी
- 31:06एकल टिकाना करनी पड़ी। सत्यवादी युधिष्ठिर को मनाना पड़ा
- 31:16कि तुम झूठ बोल ले। जब एक व्यक्ति इतना कुशल प्रवीण
- 31:21है कि तुम्हारे अर्जुन तक को धन और विद्या में निश्रण कर सकता है,
- 31:29वह तुम्हें मार देगा सबसे घातक ध्यान है उनके पास।
- 31:35उस जमाने में गुरु द्रोण के पास एटम नाम था मिजाई थी आज की भाषा
- 31:43में गर्म ऐसी विद्यार्थी दूर से आपको पता है धनुष अस्त्र होता है,
- 31:53शस्त्र नहीं होता। शस्त्र के ऊपर संधान करना पड़ता
- 32:02है। अस्त्र को तीर को और फिर वो तीर
- 32:07जा के मुकाम पे लगता है और पता ही नहीं होता कहाँ से आया है ऐसे हम
- 32:13आज अस्त्र शस्त्र को? वैज्ञानिक ने देखा ये होता क्या
- 32:20है? ये सब चीजें सनातन की देन है तो
- 32:27बुद्धियों ने इनका उपयोग किया बुद्धियों ने कहता हूँ, बुद्धियों
- 32:31ने? और देखा ये अस्त्र होता के तो पता
- 32:41चला ये मिसाइल होती है अस्त्र फिर यहाँ से बैठे बैठे रिमोट कंट्रोल
- 32:48एसी चला लो या चंद्रयान टू थ्री या जीतने भी हैं।
- 32:54मंगलयान वगैरह। इनको यहाँ बैठे बैठे रिवॉल्व वो
- 32:57करते रहो और वो चीजें तुम्हें दिखाई भी नहीं पड़ेंगी कि ये कहा
- 33:02से आया इस चंद्रयान को थोड़ी पता होता है हूँ इस कमांडिंग जैसे
- 33:08तुम्हें पता नहीं तुम कहते हो कहा है पर मातम हम करते है सब कुछ।
- 33:15क्योंकि तुम्हें वो अज्ञात रेंज दिखती नहीं और उल्लुओं को दिखती
- 33:20मैंने लेकिन वैज्ञानिक को दिखती है और वो प्रयोग करना जानते हैं।
- 33:30लेकिन मज़े की बात ये है ये बनी कैसे?
- 33:32ये वो नहीं जानते हैं। तुम सृष्टि की परिभाषाएं तो पढ़
- 33:41लोगे लेकिन एक बात तुम्हें बता दूँ जो सदैव रहेंगी।
- 33:47सृष्टि बनाई कैसे बनाने वालों ने ये तुम कैसे कभी भी नहीं पहुँच
- 33:52पाओगे। बनाने वाले ने इस सृष्टि को बनाया
- 33:57कैसे यह नहीं, तुम्हें पता चलेगा। थोड़ा सा सूत्र विश्वामित्र ने
- 34:02खोज लिया था तो इसलिए विश्वामित्र सबसे बड़े गुरु कहे जाते हैं आज
- 34:10तक के। मैं कुछ बोलता हूँ जो व्यक्ति
- 34:18जानते नहीं कुछ वो ही कमेंट करते हैं मात्र जैसे कि सब कुछ जानते
- 34:25हैं, मुझे मेरे शिष्य पूछ लेते हैं।
- 34:34बाबा जी नो कमेंट आ गए, एक व्यक्ति के और सब नेगेटिव है क्या
- 34:39करें या कुछ ना करो अपनी बुद्धि का परिचय दे रहा है।
- 34:43देने दो जब थक जाएगा तो अपन डिलीट कर देगा, ऐड कर देगा बस।
- 34:52आइडी क्यों कर देगा? उनकी ये तो मंदबुद्धि हम जानते ही
- 34:57हैं। जो श्रद्धा भान हैं उनकी श्रद्धा
- 34:59को ठीक से ना लगे। उनके लिए बड़े घातक हथियार सिद्ध
- 35:03होंगे। ये कल भी मैंने बोला था श्रद्धा,
- 35:08विश्वास, रूप नौजा ब्याम बिना ना। अगर श्रद्धा को आपने समाप्त कर
- 35:15दिया या तो श्रद्धा को समाप्त मत करो।
- 35:20श्रद्धा के साथ मार्ग को भी +2 श्रद्धा के साथ मार्ग को भी +2 यह
- 35:33मार्ग जयपुर जाएगा। यह सड़क बॉम्बे जाएगी।
- 35:38यह सड़क दिल्ली जाएगी। या तो एक आधा सत्य हो गया, लेकिन
- 35:45आधा सत्य क्या है? बिना श्रद्धा और विश्वास के तुम
- 35:50इन रास्तों को तय न कर पाओगे। इसलिए मैं कहता हूँ मार्क से
- 35:56चलेगा ही नहीं क्योंकि श्रद्धा ने उसकी कुंठित बुद्धि ने मान ही
- 36:05लिया है कि परमात्मा है नहीं और बड़े मज़े की बात है।
- 36:12कबीर कहते हैं। मैं कहता, आंखन देते और कबीर सत्य
- 36:22और लक्ष्यों से पता चल जाता है। मुझसे लोग कह सकते हैं बाबा आप 13
- 36:30वर्ष से अनगुन खारे। इतनी सुरीली सृजना बनाई है आपने?
- 36:40आप कहते हैं आम ब्रह्मास्व फिर इसका आशीर्वादन क्यों नहीं करते?
- 36:48जी बिलकुल अन्त भक्तों के लिए। बात तो गहरी है, बस इतनी सी
- 36:54बुद्धि काम करते मुझे लोग पूछ लेते हैं महात्मा गाँधी ने सत्य
- 37:00के प्रयोग क्यों किया? ब्रह्मचर्य के बड़ा मजेदार स्वाद
- 37:06क्या दिमाग में फर्क था? नहीं, फिर?
- 37:11पर सत्य के प्रयोग क्योंकि छोटी छोटी बच्चियों के साथ जो पोतियों
- 37:16जैसी थीं, पोतियाँ ही थीं, उनके साथ नागरिक होते थे।
- 37:25यही मजेदार बात है। इसे ही आत्मा अवलोकन कहते है।
- 37:36आत्मा निरीक्षण कहते है समय समय पर थोड़ा ठहर के देख लेना चाहिए
- 37:43कि हमारी अध्यात्म उन्नति कितनी सी हो गई?
- 37:50वो ठहर का अवलोकन कर रहे थे। वह सिर्फ संसार का काम ही नहीं कर
- 37:56रहे थे। टु लिबरेट इंडिया इसके साथसाथ अहम
- 38:06रोक तो उनका स्पर्चरिज्म का था। सत्य में गाँधी को आप राजनीतिक
- 38:13दृष्टि से सोचने ही मत क्योंकि राजनीतिक अगर गाँधी होते तो फिर
- 38:17उनके लक्षण बाद में पता चलता। जब वो पैंट कोट पहन लेते और गद्दी
- 38:22पे बैठ जाते बस फिर गाँधी को। किसी भी बात का
- 38:44प्रशंसित करने का कोई कारण ना रह गया था।
- 38:47फिर तो उसने किसी कारणवश ये काम किया।
- 38:54वह कारण था लोप गद्दी का। तो ज़िन्दगी के लक्षण बता देते
- 39:01हैं। जीने गए कि तुम्हारी आत्मा की
- 39:06तरक्की कितने प्रतिशत हो गई और गाँधी जी बड़े शानदार सादक थे,
- 39:13पहुंचे नहीं सादक बड़े शंकर थे। वक्त वक्त पर देख लेते थे और वह
- 39:22अच्छी तरह से जानते थे। उनके गुरु ने उन्हें बड़ा शानदार
- 39:31सबक दिया था। वक्त वक्त पर ठहर जाना और आत्म
- 39:35अवलोकन करते रहना। तो तुम पाओगे कि कहाँ त्रुटि है
- 39:43वहाँ ठहर जाना, उसको बदल लेना मार्ग को भटकोगे सही मार्ग
- 39:50मिलेगा, फिर भटकोगे फिर ठहरोगे देखोगे?
- 39:54फिर सही मार्ग मिलेगा ऐसे ही। वक्त वक्त वह शब्दों को सुनते
- 39:59जाना, गहरे ठहरते रहना, अवलोकन करते रहना, प्रसारित मत करना अपने
- 40:08आपको या मूर्खों के लक्षण। आत्म अवलोकन करना लोग क्या कहते
- 40:15हैं इसकी तरफ ध्यान मत करना, लक्ष्य देखना तुम्हारा लक्ष्य
- 40:21क्या है तो लक्ष्य को देखने के लिए कि मंजिल अभी कितनी दूर है
- 40:27इसमें ब्रह्मचर्य। सबसे पहला अवलोकन है व्यक्ति का
- 40:39बड़ी प्यारी बात है, गहराई की बात है अब थोड़ा ठहर के सुन लेना वैसे
- 40:44तो सारी वीडियो उसको आप ठहर के सुना करो, इसलिए मैं इतने हलके
- 40:49अलफाज़ो में बोलता हूँ। और तुम इसको ज्यादा तेजी चलाने
- 40:53लगते हो वहाँ चूक जाते हो जो प्रयत्न मैंने किया था तुमने
- 40:59निरर्थक कर दिया और बेकार कर दिया।
- 41:04मैं अगर तेज बोल रहा हूँ तो मैं भी जानता हूँ पट पट बोल सकता हूँ।
- 41:13लेकिन धैर्य से क्यों बोलता हूँ कि तुम भी ठहर पाओ?
- 41:22उन दो शब्दों के बीच में जो मौन है वो दिख जाए तुम्हें?
- 41:28और यही मैं समझाना चाहता हूँ तो मैं शब्दों शब्द तो सिर्फ लालच है
- 41:32तुम्हारे लिए लॉलीपॉप दो शब्दों के अंतराल के बीच में जो मौन का
- 41:39एक थोड़ा सा गैप काश वो पकड़ में आ जाये वही मंजल है।
- 41:50बात कह रही है तो फिर वही शब्द बोलूँगा मैं अमान्यतुम लक्षण
- 42:08दंभितुम अहिंसा? शांति राजुम आचार्य उपासना शौचम
- 42:23स्थिरियम स्थिरता, आत्म विनग्रह ये आत्म विनग्रह।
- 42:31स्वयं का अवलोकन करते रहना मैं कहाँ पहुँच गया?
- 42:36गाँधी राजनीतिक तो मजबूरी थे जैसे मेरे लिए मजबूरी बन जाए लेकिन सही
- 42:47मायने में गाँधी कई जन्मों से प्रयासरत थे।
- 42:51और कई जन्मों के प्रयास के बाद इस जन्म में आकर वो किसी ने कमेंट
- 42:58किया था। बाबा ने कोशिश तो बड़ी की लेकिन
- 43:00ये बड़ी जल गई। राहुल गाँधी वाले बस ये
- 43:05मंदबुद्धियों के पहचानने के लक्षण हैं।
- 43:10पहचान लिया करो। इन्हें मेरी हर कोशिश तुम्हें तीर
- 43:18की तरह इंगित करने की होती है उस चैतन्य की तरफ जो स्थिर है
- 43:26स्थिरयम। आत्मा अवलोकन करते थे।
- 43:36गाँधी और ब्रह्मचर्य सबसे पहला आत्मा अवलोकन करने का तरीका है।
- 43:48फिर जब व्यक्ति पूर्ण ब्रह्मचर्य को उपलब्ध हो जाता है।
- 43:53फिर वह नग्न स्त्रियों के बीच में भी आराम से सो सकता है।
- 43:59बिना किसी उत्पात इंद्रियों के उत्पात उसे सताते बस किसी चीज़ को
- 44:08परखने के लिए गाँधी नग्न। बच्चियों से लड़कियों से यानी योग
- 44:15नवस्था के चरम पर जो पहुंचे 16171518 यहाँ तक की लड़कियों के
- 44:23साथ शुचिता कृतलानी आचार्य जैविक कृतलानी की धर्मपत्नी आ जैविक
- 44:30कृतलानी बड़े समझदार से है। गाँधी कहने लगे जेपी कृप्लानी से
- 44:37कि सुचेता कहती है तुम्हारे साथ सोना है, आचार्य का प्लान तो
- 44:44आचार्य ही ठहरे तो नहीं, बापू नहीं, नहीं उसे नहीं सुन देना।
- 44:52गाँधी बोले क्या हरजा क्या है? हरजा कुश्नी जैवी कृपलानी आचार्य
- 45:01जैवी कृपलानी अच्छी तरह से जानते हैं गाँधी को एक जागृत व्यक्ति
- 45:05हैं। और जागृत व्यक्ति ही जब भी कभी
- 45:09देश की आपदाओं को हल किया है, जागृत व्यक्तियों ने किया है, वो
- 45:15सती प्रथा हो, वो बाल विवाह हो, ऐसी प्रथाएँ अगर खत्म की है तो
- 45:23जागृत लोगों ने की है अंधकार तो। अंधों में होता ही है।
- 45:32किसी ने अंधे से कहा था अंधे सो जा तो अंधा बोला, देखो आँखें तो
- 45:39बंद ही हैं, बस चुप ही कर रहे ना? और तो कुछ करना ही नहीं।
- 45:46तो जेपी के प्लानिंग कहने लगे। ये बड़ी शानदार बात है जो मेरे
- 45:50पास बहुत बार आई है। अगर आप गाँधी हैं तो इस बात का
- 45:54जवाब तो आज कुदरतन ये प्रसंग आ गया बीच में।
- 46:08आत्मनिरीक्षण स्वयं की आत्मा कितनी ऊंची पहुँच गई यह देखने के
- 46:17लिए तो जैबी कृपाणी के गलत कहने पर भी कौन श्री मानती है?
- 46:24अपने पति की बात हाँ, ऐसा मत कहो। प्रत्येक अक्षर में बड़ा गहरा
- 46:33समुद्र का तत्व मिलेगा। तुम्हे अगस्त से पूरा समुद्र कोई
- 46:46आती है, कमाल की बात नहीं है। 28।
- 46:52अक्तूबर 1985 को पूरा समुद्र ही पी के यह समझाने के लिए एक
- 47:01सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन था। तुम्हारी बुद्धि कहे कि कैसे हो
- 47:07सकता गप है? अगस्त पेट इतना बड़ा कैसे होगा?
- 47:14समित्र को पी जाए, लेकिन यहीं तुम चूक जाते हो।
- 47:18जब रहस्य की बातों को तुम बुद्धि से व्यख्यायित करने की चिष्टा में
- 47:25संलग्न हो जाते हो तभी तुम नाम तो चाहे आचार्य रख लो, कोई बात नहीं।
- 47:31लेकिन पट्टिका लगाओगे भूतपूर्व आईएएस इसने इसने पिंडा कहाँ
- 47:38छोड़ा? इसलिए पट्टिका पहले देखिए।
- 47:43लोग तो कभी सरपंच रहे होंगे। उनके बाप दादा।
- 47:51अब भूल गए 50 साल हो गए तो लिख लेते है भूतपूर्व सरपंच ये भूत
- 47:56होने में बड़ा मज़ा आता है कृप्लानी कहते नहीं सुचेता की बात
- 48:07नहीं मानी। अब ये बातें आपको इतिहास में नहीं
- 48:11मिलेंगे। सुचिता कृपलानी आचार्य जेपी
- 48:16कृपलानी की धर्मपति इस बुड्ढे को सिर का क्या पता लगता है?
- 48:24मतर सवाई। कब घोड़ा हीन हीना जाएंगे पता
- 48:31लगता है इसको कितनी सुलाना है उसको लेकिन वो सुचेता कहती है
- 48:39तुम्हारी मांगता कौन है? रामलीला किया करते थे।
- 48:56तो धनुष शिव जी का धनुष उठाने के लिए बड़े लोग आते हैं।
- 49:01हालांकि वो पता ही है अभी ये तो एक सर्कस है सर्कस को सर्कस की
- 49:08तरह देख लेना। यह है आत्मनिरीक्षण और सर्कस को।
- 49:15शक्ति की तरह देख लेना, ये है मूढ़ता मंदबुद्धि तुम संसार को
- 49:22शक्ति की तरह देख लेते हो, जैसे उल्लू के ऊपर, लक्षण, रात के
- 49:32अंधकार में। उल्लू को दिखता है और उल्लू के
- 49:37बिना लक्ष्मी जाएगी कहाँ? अमावस्या की रात को चुना गया
- 49:42दीपावली की रात जो सबसे ज्यादा काली होती है।
- 49:48लेकिन सुचेता कृपाणी गाँधी के साथ सोई नगर।
- 49:53बिल्कुल नग्नि न आती गाँधी सही पूछो तो आत्म अवलोकन गाँधी का
- 50:04प्रयोग बिल्कुल सफल रहा शोप्रतिशत।
- 50:09यह आपको सत्य की प्रयोग किताब में गाँधी के द्वारा लिखित नहीं
- 50:12मिलेगा। लेकिन गाँधी की तरफ से मैं बोल
- 50:19रहा हूँ कि 100% कामयाब हुए नहीं तो गाँधी इतने ईमानदार थे।
- 50:27कि वो कहने में ज़रा भी नहीं चेक करते, बट बटावा लें बहन गलत हो
- 50:35गया, सब मैं बहक गया। गाँधी इतने ईमानदार हैं और इतने
- 50:42सजग हैं कि अपनी सारी भूल चौकों को, गलतियों को।
- 50:46बता देते हैं मेरा पिता मर रहा था ही वास् ऑन डेथ बेड और वो कहता
- 50:52मोहन को बुलाओ कर्मचंद्र जी कहते है मोहन को बुलाओ और गाँधी कहते
- 50:58है, आई वास् ऑन दी बेड मैं फादर वास् ऑन दी डेथ बेड एंड आई वास्।
- 51:05ऑन दी बेट विथ कस्तूरबा कितनी स्पष्ट हो जाता है यहाँ का
- 51:12एपिस्टम कांडा हो जाता है और फिर भी हम कहाँ मानते हैं?
- 51:17हम थे अरे भाई अगर नहीं। मुक्त हो गए।
- 51:26तुम वासना से तुम दिखावा क्यों करते हो?
- 51:29यह दिखावा तुम्हे ही उलझा लेगा, तुम्हे ही बांध लेगा, ये
- 51:33भ्रांतियां बन जाएँगी। तुम कहोगे हम तो ब्रह्मचर्य को
- 51:36उपलब्ध हो गए और फिर उपलब्ध हो गए तो फिर उपलब्ध होने की जरूरत क्या
- 51:40है? शब्द कह रहे हैं।
- 51:45आराम से सुन लेना, पार पार रिवाइंड करके सुन अगर तुम उपलब्ध
- 51:51ही होगे, ऐसी धारणा बना ली तुमने तो फिर उपलब्ध होगे कैसे?
- 51:55सत्य में नहीं होगे, वह मार्ग को अवरुद्ध कर देगी, ब्रह्मचर्य के
- 52:00मार्ग को अवरुद्ध कर देगी और ध्यान रखना।
- 52:03ये ओशो के सिवा बोलते रहे लिबरल सेक्स वगैरह।
- 52:07इसी मूर्खता के कारण ओशो को आज मुझे सुनना पड़ रहा है।
- 52:14हालांकि जी आपको गप लगेगा तुम कहोगे गप है और मैं कहूंगा हाँ
- 52:19बिलकुल गप है। क्योंकि जब सुनने वालों को घप
- 52:23लगता है तो मेरी एस्ट्रल ट्रैवलिंग मेरी एनलाइटनमेंट मेरा
- 52:28सारा कुछ गब्बा है तो मैं कहूँगा बिलकुल तो मेरे शिष्यों को मैं
- 52:34कहता हूँ, मंदबुद्धियों से कभी डिस्कशन मत करना अगर तुमने ऊंचा
- 52:40उठना है तो। अन्यथा तुम मंदबुद्धि जैसे ही हो
- 52:44जाओगे। फिर तुम ऐसी ही चीजें मुझे शेयर
- 52:51करोगे जिन चीजों का कोई अर्थ नहीं ये गीता प्रेस, गोरखपुर जो हनुमान
- 52:58चालीसा ₹1 में बेच देती है, आज बंद होने के कगार पे है।
- 53:02टू टू इकोनॉमिक का प्रॉब्लम कृपा करके उसे आर्थिक सहयोग करें तो
- 53:09हनुमान चालीसा एक कृपा में अगर कोई बेचता है तो इससे बुरी बात और
- 53:15क्या हो सकती है वह। अंधकार फैला रहा है धरती पे सूरज
- 53:26को निकल लिया बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनो लोक भयो अँधि आर।
- 53:35इससे बड़ी बेवकूफी और क्या होगी? क्यों?
- 53:38क्योंकि वो जानते ही नहीं कि तुम ऐसे खिलाड़ी हो जो शब्दों से चिपक
- 53:42जाओगे तो फिर दो तरह के अंत भक्त होते हैं।
- 53:46यानी मधोती एक उसके विपक्ष में खड़ा होगा, एक उसके पक्ष में खड़ा
- 53:51होगा। बिलकुल उन्होंने मुँह फैलाया और
- 53:54सूरज को निकल लिया। वो भी मंदबुद्धि है और जो कहेंगे
- 53:57कि ये कैसे हो सकता है, वो भी मंदबुद्धि है।
- 54:03सत्य को देखने वाला व्यक्ति दोनों के बीच में खड़ा रहेगा।
- 54:09पेंडुलम को इधर उधर जाते हुए देखता रहेगा और मध्य के केंद्र
- 54:13बिंदु में स्थापित रहेगा। ना इधर जाएगा ना उधर जाएगा तो वह
- 54:21ना बहस करेगा, ना कहेगा ये गलत है ना कहेगा ये ठीक है, वह
- 54:26केन्द्रस्थ रहेगा, आत्मस्त रहेगा सुचिता कृपनानी के साथ गाँधी सोय।
- 54:36और सुचिता कृपाणी अपने वक्त की सुंदरतम स्त्रियों में से एक थी।
- 54:43लेकिन मज़े की बात है गाँधी सफल रहे।
- 54:48गाँधी ने हेले यही ब्रह्मचर्य का बल उनके जीवन को ही नहीं, जीवन
- 55:03गाथा को भी अमर कर गया क्योंकि तुम देखते हो चरित्र।
- 55:12बीके की छोरियां कितना ही श्वेत साड़ी पहन ले लेकिन बात तो ये है
- 55:19क्या वो काम से मुक्त है? मुझे मत बताओ, मुझे तो आके बहुत
- 55:27बीके बता देती हैं। मुझे बताने की आवश्यकता है।
- 55:33श्वेत वस्त्र पहनने से कभी कोई ब्रह्मचारी को उपलब्ध हुआ है तो
- 55:38बड़ा आसान रस्ता है। श्वेत वस्त्र पहन लो बस ठीक है,
- 55:45ये जैन में डालती ही नहीं है श्वेत वस्त्र, लेकिन मुझे पता है
- 55:49ना मैं कहा करता हूँ। अगर तुम जगत गुरु क्या है नाम मत
- 55:59ज़्यादा मत पूछा करो नाम ये जो सूरदास तो हम सुन्दर नाम देते हैं
- 56:05अंधा मंद बुद्धि नहीं अंत बुद्धि है ये एकबार की बात है।
- 56:10कुछ तो मंद बुद्धि है, मंद बुद्धि के भी बाबा होते है अंधबुद्धि
- 56:15भद्र हाँ राम भद्र चर्या बाबा बाघेश्वर धाम के गुरु ये मंद
- 56:23बुद्धि नहीं ये मंद बुद्धि से भी गए गुजरे है।
- 56:26ये अंध बुद्धि है और भगवान ने इसलिए।
- 56:29इनकी आँखें भी छीन ली। तुम प्रतीकों को समझ नहीं पाते जो
- 56:35परमात्मा के द्वारा दंडित लोग है, किसी के गुर्दे फेल हो गए तो तुम
- 56:39जाके चरण स्पर्श करते हो। परमात्मा के द्वारा दंडित व्यक्ति
- 56:45को नमन करने का अर्थ क्या रह जाता है?
- 56:50माखन चोर वो नन्द की शोर जो कर गयो मन्नू की छोर रे।
- 57:29सत्य की बात थोड़ी सी मुश्किल लगती है, कड़वी होती है, फिर ये
- 57:35लिखा है सत्य कड़वा होता है, बिलकुल थू कर देते हो, तुम कहती
- 57:43हो बोलने वाला गंदा है। हाँ हाँ बिलकुल गंदा है।
- 57:47क्योंकि उसने सत्य बोल दिया। गाँधी जब ब्रह्मचर्य को उपलब्ध हो
- 57:56गए तो उन्होंने प्रयोग किए। क्या वास्तव में मैं उपलब्ध हो
- 58:00क्या यह देखने के लिए यह आत्म अवलोकन था।
- 58:06इसकी जरूरत क्या थी? इसी की तो जरूरत है आत्म अवलोकन
- 58:12क्यों बोला? भगवान कृष्ण इसी की आवश्यकता है,
- 58:20तुम बड़े बड़े आचारों को पाओगे। 3344 गर्लफ्रेंड होते हुए सही
- 58:31संख्या बताई मेरे को ओशो ने 283 के करीब गर्लफ्रेंड थी मेरी बस
- 58:40इससे ज्यादा मैं नहीं बोलता। होशों के अनुयायी बुरा मान जाते
- 58:47हैं तुम सत्य को सुनने की क्षमता जुटाओ, ऐसे काम चलेगा नहीं।
- 58:55जब सत्य को सुनने की क्षमता खो देते हो तो तुम गाली गिरोह चित्ता
- 59:00को भी गुजरते हो। यहीं चूक जाते हो।
- 59:04यही वक्त था होश में आने का। गाँधी ने ब्रह्मचर्य के प्रयोग
- 59:13किए वेदर मैं उपलब्ध हो गया हूँ और नहीं।
- 59:24तो आज परिणाम तुम्हे मैं बता देता हूँ 100% खरे उतरे गाँधी इन
- 59:30प्रयोग तुम बुरा मानोगे? ऐसा क्यों किया उसने अगर किया अगर
- 59:35किया भी था तो पर्दे में एपिसटन कांड की तरह।
- 59:39पर्दे में रखा होता लेकिन नहीं पर्दे में ही रखा होता तो आदम
- 59:46अवलोकन का अर्थ कहाँ शेष रह जाता है, खो जाते हैं अर्थ बहुत बड़ी
- 59:56चीज़ सौंप के गए। गाँधी तुम्हे जाते जाते।
- 1:00:00लेकिन तुम नहीं समझ सके तो ये तुम्हारी मंदबुद्धि की तकलीफ है?
- 1:00:05गाँधी जी की तकलीफ नहीं है और उसी का परिणाम हुआ के गाँधी प्रसन्न।
- 1:00:24दृष्टि कोण पे सत्य उतरे क्वालिफिकेशन पे समझलो यू कैन से
- 1:00:32इट खरे उतरे अगर मैं बोलता हूँ तो ओशो के नैया भी कहते है सेक्स आप
- 1:00:40बदनाम कर रहे हो भाई मैं क्यों बदनाम करूँगा कैसे?
- 1:00:44जब मुझे खुद 200 कहते हैं, आप बोलो जो पागलपन मैंने ही छोड़ दिए
- 1:00:50वो आप बोलो बाबा देखिये कमाल की बात और आप कमेंट पे कमेंट ठोकते
- 1:01:00चले जाते हो। आप ठहरकर अगर नहीं सुन सकते, गर्म
- 1:01:06हो जाती है मशीनरी फिर मत सुना करो, देखिये इससे ज्यादा कड़वी
- 1:01:11बात और कोई कह सकता है मैं कितनी बार कहा है और फिर अगर तुम नहीं
- 1:01:17पिचा छोड़ते तो मैं ब्रोक कर देता हूँ।
- 1:01:21इट मीन्स कृपा करके मत सुनो तुम फिर सब्सक्राइब करते तो फिर सुनने
- 1:01:26लगता हूँ ये ये मेरी तकलीफ नहीं है, ये तकलीफ तुम्हारी बंद बुद्धि
- 1:01:32की है। मेरी तो ज़रा भी तकलीफ नहीं है।
- 1:01:40तुमने पूछा मैंने आज जवाब दे दिया।
- 1:01:47ब्रह्मचर्य के प्रयोग किए थे। ब्रह्मचर्य को उपलब्ध होने के बाद
- 1:01:54तब तक हो चूके थे उपलब्ध कसौटी पर खड़ी।
- 1:02:00उतरने के लिए सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी।
- 1:02:07सीता ने कहा अग्नि परीक्षा लोग क्योंकि मर्द के दिमाग में स्त्री
- 1:02:14के प्रति सदा ही घृणा रहती है। तुम कहते हो राम ने अग्निपरीक्षा
- 1:02:19ली नहीं है, सीता ने अग्निपरीक्षा दी कल को मैं अयोध्या की रानी
- 1:02:31बनूँगी और क्या मैं अयोध्या की रानी बनने के योग्य हूँ?
- 1:02:37यह परीक्षा तो हो ही जानी चाहिए ना तो राम ने कह के सीता ने कह के
- 1:02:46अग्निपरीक्षा दी और मज़े की बात देखिये राम की अंधता जहाँ गालता
- 1:02:53है कोई व्यक्ति गलती को हुआ। अग्नि परीक्षा सीता के कहने पर ली
- 1:02:59गई और अग्नि परीक्षा में खरी उतर गई।
- 1:03:08फिर उसके बाद अगर कोई राम सीता का त्याग कर दे, क्या ये ठीक बनता
- 1:03:15है? आय चलने के हिसाब से?
- 1:03:19यहीं चूक गए। मैंने कहता हूँ राम के जैसे लोगों
- 1:03:23को राजगद्दी पर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि उन्हें व्यवस्था चलानी
- 1:03:30नहीं आती, मैं क्यों कहता हूँ मैं कोई गद्दी नहीं लूँगा क्योंकि
- 1:03:33मुझे भाई व्यवस्था चलानी नहीं आती।
- 1:03:37मैं तुम्हें मार्गदर्शन तो ऐसा दूंगा कि बस कोई नहीं है दुनिया
- 1:03:42में, लेकिन गद्दी का उपभोग मैं क्यों करूँगा?
- 1:03:47मैंने उस गद्दी का उपभोग कर लिया जहाँ जाकर व्यक्ति तृप्त हो जाता
- 1:03:53है उसका रूआ रूआ तृप्त हो जाता है।
- 1:03:55मैंने वो गद्दी पाली। फिर मैं तुम्हारी गल्तियों की
- 1:03:58कामना क्यों करूँगा और तुम सही अपने ही लेवल पे बोलते हो?
- 1:04:04मुझे ये भी पता है इसलिए मैं चुप करता हूँ।
- 1:04:08ये बोलेंगे ही भाई क्योंकि इनकी व्यवस्था इनकी।
- 1:04:15कॉन्शसनेस का लेवल ही इतना ऊंचा है तो यहीं तक उससे ऊपर की बात
- 1:04:20करना तो मूर्खता है। लक्ष्मी का वाहन उल्लोका बसों से
- 1:04:34अंधकार प्रिय है और प्रिय नहीं है उसकी व्यवस्था।
- 1:04:40ईश्वर ने बनाई ही अंधकार के लिए सो ये जो अडानी जैसे लोग धन को
- 1:04:46इकट्ठा करने में लगे हुए हैं, यह कोई विचारणीय बात नहीं है।
- 1:04:57इनके भीतर की संरचना ही परमात्मा ने असीब है, इनके वश में कोई
- 1:05:02थोड़ी है। तो ये करेंगी ही, क्योंकि इनके
- 1:05:07भीतर की संरचना उल्लू जैसी है। इनको रात ही पसंद है जैसे वैश्य
- 1:05:12को रात ही प्यारी होती है। काम मुख्य व्यक्तियों को रात ही
- 1:05:19प्यारी होती है। दिन अच्छा नहीं लगता हमें।
- 1:05:29क्योंकि रात ही उनके लिए रंगीन राते होते है और रंगीन तो
- 1:05:35उन्होंने ही जानी है। जिनके उजाले की रंगीन उन्होंने
- 1:05:39जानी नहीं, यह उनका दुर्भाग्य है, तो फिर?
- 1:05:48रात के अंधकार की ही वो तैयारी रखेंगे।
- 1:05:54ना इंतजार करेंगे कब रात हो? मुझे किसी ने कह दिया कि आपकी
- 1:06:00इंटरव्यू लेने के लिए आप इंटरव्यू देते क्यों थे बाबा?
- 1:06:06मैंने कहा इंटरव्यू की क्या आवश्यकता होती है?
- 1:06:08मैं खुद ही बोल देता हूँ, कहता आप किसी बड़े चैनल को इंटरव्यू दे दो
- 1:06:18ना मैंने कहा क्यों भाई पूछेगा कौन मुझसे ये सवाल तुम्हारे सवाल
- 1:06:26मेरे लिए बेकार हो गए, गिर गए। और मैं जानता हूँ कि जब तक सवाल
- 1:06:33तुम्हारे मन में हैं, तब तक तुम मंदबुद्धि हो?
- 1:06:42सही जागर तो अवेयर तो तुम तब होगे जब तुम उस तल पर पहुंचोगे।
- 1:06:49जिसे अष्टावक्र कहते हैं वो तुम हो ही।
- 1:06:53इसे उपनिषद कहते हैं। उस आचार्य के करीब पर से हो जा के
- 1:06:59वो है आचार्य सही आचार्यों का आचार्य तो मैंने कहा इंटरव्यू कौन
- 1:07:08पूछेगा? अक्षय कुमार पूछेगा।
- 1:07:12पूछेगा क्या पूछेगा कि मैं आम को खाता कैसे हूँ?
- 1:07:16चूस के या काट के तो आपको जवाब पता ही है मेरा मैं आम खाता ही
- 1:07:23नहीं। अब इस बात को ध्यान से सुन ले
- 1:07:30पत्रकार। जो स्वाभाविक मनोवासनाओं के कारण
- 1:07:39बिक जाए, वह तो माफी के योग्य है, क्योंकि ईश्वर ने काम वासना दी।
- 1:07:49और ब्रह्मचर्य को आप उपलब्ध नहीं हुए तो ये सहज है कि आप काम वासना
- 1:07:55के हाथों में भी जाओ जो कि प्रत्येक स्त्री और पुरुष उस स्तल
- 1:08:00पर पहुंचने से पहले बिक ही जाता है।
- 1:08:04तुम चाहे कुछ भी कह दो। घोषणा तुम कुछ भी कर दो लेकिन
- 1:08:11गाँधी जैसे सत्यवादी न हो पाओगे। तुम घोषणा कर सकते हो, लेकिन कांड
- 1:08:20पकड़े जाएंगे, फिर चर्चाएं होंगी। नहीं वक्त तो मैंने कहा वो वैश्य
- 1:08:35क्या पूछेगी? मेरे से आपने वैश्य क्यों कहा?
- 1:08:39मैंने कहा जो स्वाभाविक परमात्मा प्रदत्त विकृमियों के दाम पे बिक
- 1:08:48गया। वह तो स्वभाव, वह तो माफी के
- 1:08:51योग्य है। तुम सभी रोज़ रात बिकते हो क्या
- 1:08:57पुरुष के इससे फिर लेकिन उनको मैं वैश्य ही नहीं कहता, वो स्वभाविक
- 1:09:06है। भूख लगती है, खाना खा लेते हो
- 1:09:09क्या? बाप है नहीं काम उत्साह है
- 1:09:14ब्रह्मचर्य को उपलब्ध नहीं हुए तो भी और फिर तुम झूठ बोलोगे और झूठ
- 1:09:19बोलना सबसे बड़ा बाप है और हमारी तकलीफ मंदबुद्दियों की ये क्या हम
- 1:09:26सबसे झूठा व्यक्ति ही? गद्दियों पर बैठा देते मैंने कहा
- 1:09:34अगर तुम विकार के कारण इन शब्दों को सुन लेना पत्रकारों मेरे
- 1:09:40बच्चों इसे सुन लेना। जो प्राकृतिक विकारों के स्वभाव
- 1:09:47के अधीन आकर बिकेगा। उस पे तो तुम रो सारी बिकते हो
- 1:09:53लेकिन पैसे के कारण बिक जाए वो वैश्य, वैश्य हम कैसे कहते हैं?
- 1:09:59वह विकार के कारण तो बिकी नहीं क्योंकि वैश्य के पास?
- 1:10:04एक लोग तो आएगा हैं और इतने कड़वे शब्द कोई ही बोल पायेगा देखे
- 1:10:14बोलने के लिए भी अनुभव होना चाहिए।
- 1:10:18मैं भी बिका हूँ तुम पर दोष थोड़ी लगाता हूँ।
- 1:10:23जब तक मैं प्रकृति के स्वभाव के अंतर्गत था, प्रकृति के पार नहीं
- 1:10:28गया था, तब तक मैं भी काम के मोल बिका।
- 1:10:33क्रोध के मोल बिका, लोभ के मोल बिका मुझको भी इन वासनों ने खरीद
- 1:10:39लिया था, अब तुम्हें समझा जाएगा। तो मैंने खुद पे ले लिया, अब देखो
- 1:10:44कुछ हो रहा है, मैं भी बिका लेकिन एक पल ऐसा आया कि वह खरीद लिया
- 1:10:58गया। जीसको खरीदने की क्षमता किसी एक
- 1:11:02व्यक्ति में होती है फिर बेकार स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
- 1:11:07इसलिए कृष्ण का लक्षण देख लो। बड़ी प्यारी बात थी तुम हजारों
- 1:11:16सालों से गीता को पढ़ते हो? लेकिन पढ़ते हो सिर्फ पाठ करते हो
- 1:11:22तुम गुरु ग्रंथ साहब का जप जी का मतलब क्या है ये कहाँ समझ पाया
- 1:11:27कोई जप जी का अर्थ पूछना तो किसी ज्ञानी संत से पूछो, वह तुम्हें
- 1:11:36सही अर्थ बताएगा हर। आध्यात्मिक शास्त्र के वस्तविक
- 1:11:41गीता हो जपजी साहेब हो जब कृष्ण की गीता हो, उपनिषद हो व्यसन में।
- 1:11:56और साधारण गृहस्थ स्त्री में क्या फर्क है?
- 1:12:01अब ठीक से समझ लेना जो वासना के वश से बिक जाए।
- 1:12:09वासना को तृप्त करने के लिए क्या करें?
- 1:12:11मजबूरी है या फिर झूठे हो के तुम कहोगे नहीं, नहीं।
- 1:12:15हम तो सती हैं फिर तुम झूठे हो गए और ये सबसे बड़ा पाप कर दिया
- 1:12:19तुमने? इसलिए संतों ने पतंजलि हो, बुत
- 1:12:25हूँ या महावीर हूँ? सबसे पहले अष्टांग योग का प्रथम
- 1:12:31यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
- 1:12:34का। यम का प्रथम अंग क्या था?
- 1:12:37सत्य सत्य से शुरू करना होगा अगर प्राथमिक तुम प्राइमरी ही पास
- 1:12:43नहीं हो कथा पे नहीं आता फिर आगे मत चलना।
- 1:12:46फिर पीएचडी तो हो रही फिर तो पीएचडी की डिग्री किसी प्रेस से
- 1:12:52छिपानी पड़ेगी। और डिस्ट्रीब्यूट करनी पड़ेगी?
- 1:13:01अगर तुमने सीखा नहीं तो पीएचडी तुम कैसे करोगे, कैसे बांछ पाओगे?
- 1:13:07उन चीजों को नहीं बांछ पाओगे। तो जो अब इसको मैं क्यों बार बार
- 1:13:14बोल रहा हूँ? समझ लो ये अब शब्द तुम कई बरसों
- 1:13:17से बूझ लो मेरे को मैं सन 85 में कहा आई एम महात्मा गाँधी रणधीर
- 1:13:24सिंह धीरा नाम का हलवाई यहाँ पर आज भी है सहयोग वश।
- 1:13:31कि मैं महात्मा गाँधी था तो आगे उन्होंने जो रिस्पांस देना चाहिए
- 1:13:38था, मुझे ज़रा भी ताज्जुब नहीं हुआ।
- 1:13:41मेरे बड़े भाई हैं, वो समान नहीं हैं, बड़े भाई हैं देखो तुम पर
- 1:13:45हस्ती हो, मेरे बड़े भाई हैं वो। बड़े भाई समान नहीं है।
- 1:13:51लोग तो पिता को पिता समान कहते हैं, ये तो फिर अफीम का के बोलने
- 1:13:58वाली बातें हो गई ना मेरे पिता समान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह
- 1:14:07बादल जी अब मैं साफ ही बोल दूंगा। ये तो फिर पता है ना गोला पूरा चक
- 1:14:12लिया सुबह सुबह तो मुझे उन्होंने रिएक्शन के रूप में दिया कुछ
- 1:14:23अल्फाज़ जो आज भी मुझे याद है तो कहते भैया।
- 1:14:28ऐसे ही बुलाते हैं बड़े प्यार से बोलते हैं भैया यह तरीका सबसे
- 1:14:35शांत और तरीका है गद्दी हथियाने का।
- 1:14:39अब देखिए आदमी की लालसा पता चल जाता है ना कि इसकी लालसा गद्दी
- 1:14:45हथियाना है। तो मुझे भी ऐसा तभी उस चीज़ को
- 1:14:53तुम प्रकट करते हो। ये सबसे बढ़िया मार्ग है।
- 1:14:56गलती अचानक मैं महात्मा गाँधी था। इससे बढ़िया ढांग और कोई हो ही
- 1:15:07नहीं सकता। मुझे आज भी याद है अल्फाज़ जो
- 1:15:12रिएक्शन के रूप में आए। मैंने कहा मैं महात्मा गाँधी था,
- 1:15:19इस समय अनुभव अनुभव किया क्या बुरी बात है?
- 1:15:24मैंने कहा मैं भी काम के हाथ बिका था भाई।
- 1:15:28क्रोध के हाथ बिका था, लोभ के हाथ बिका था, क्या बुरा है?
- 1:15:33प्रकृति के हाथों से बिकी जाना जो प्रकृति के अधीन रहेगा तब तक तो
- 1:15:39बिकेगा ही बिकेगा भाई यह कोई बुरा नहीं है, ऐसे पाप मत समझो, ये पाप
- 1:15:46नहीं है। पाप क्या है?
- 1:15:48पाप है के कारण अन्यथा सभी स्त्रियाँ बिकती हैं, रोज़ बिकती
- 1:15:53हैं सभी पुरुष बिकते हैं रोज़ बिकते हैं रामभद्राचार्य अगर कह
- 1:15:59दें कि देखो मुझे अंधा वंधा समझो मैं माल खाता हूँ और फिर देखो।
- 1:16:06शाखाओं में ये छोटे छोटे बच्चों को क्यों सुसाइड करना पड़ता है?
- 1:16:12बड़े हो गए 2627 वर्ष की उम्र में केरला में कांड हुआ था पेश उसका
- 1:16:19कारण है प्रकृति के हाथों में। वासनाओं के अधीन बिक जाना स्वभाव
- 1:16:27है। मेरे शब्दों को आप अच्छे से गडा
- 1:16:30लेना, हृदय के भीतर वासनाओं के हाथों में बिक जाना, प्रकृति के
- 1:16:37अंतर्गत जब तक तुम रहोगे इसको पाप मत समझ लेना।
- 1:16:41और प्रयाशित मत करने लग जाना बैठकर ये स्वभाव है इसे आप मंजूर
- 1:16:45कर लेना कन्फेस ये भाई ठीक है, क्या करूँ?
- 1:16:51मैं भी प्रकृति से ऊपर उठा ही नहीं मैं अभी इंद्रियों के वश में
- 1:16:56ही हूँ। मैं अभी इन्द्र हुआ ही नहीं।
- 1:17:00इन्द्र वह जो इन्द्रियों का मालिक हो जाए, अभी तो तुम्हें
- 1:17:03इन्द्रियां नहीं चाहती हैं, अभी तो इन्द्रियां राजा हैं और तुम
- 1:17:08उनके गुलाम हो, धन भी इकट्ठा करोगे, एपस्टीन कांड भी करोगे, सब
- 1:17:13कुछ करोगे पक्का है और गद्दियाँ भी हथियाओगे, हथियाओगे और जी अपने
- 1:17:18हथियाई। अपने बड़े भाई का कतल और सारे भाई
- 1:17:23मार दिए और कई बार प्राकृतिक प्रवृत्तियाँ ऐसे जघन्य अपराध भी
- 1:17:33करवा देती है। वह संत व्यक्ति बेचारा।
- 1:17:38और इन जेब से बड़ा दारा सीखो। शाहजहाँ ने अपने जीते जी अपना
- 1:17:55वारिस अपने बड़े पुत्र दारा सीखो को घोषित कर दिया और ये ठीक भी
- 1:18:00था। अगर औरंगजेब ने दाराशिकोह को न
- 1:18:05मरा होता तो आज हिंदुस्तान की तस्वीर कुछ और हो गई होती।
- 1:18:13वह संत स्वभाव का व्यक्त था। औरंगजेब ने गद्दी हदियानी थी।
- 1:18:20अब क्या करें? फिर जब हदियानी है गद्दी तो जो
- 1:18:24सही वारिस घोषित किया उसको मारना ही पड़ेगा ना और दारा शेखों को
- 1:18:30औरंगजेब ने मार दिया, बाकी भाइयों को भी मार दिया।
- 1:18:32खैर, शाहजहाँ को भी कैद कर दिया अपनी बहन।
- 1:18:40को भी कैद कर दिया। गद्दियों के लिए रोक कैसे कैसे
- 1:18:46पुण्य कर दिया करते हैं? या तो जब सिस्टम उगडेगा तब पता
- 1:18:52चलता है ना? जीसको अभी भी काम बसना सताए कोई
- 1:18:59चाहत सताए क्षमा करना ऊपर से उतरते नहीं हैं शब्द इसलिए
- 1:19:10क्योंकि आँखें तो काम नहीं करनी। वह वहाँ कहाँ कब पहुंचा?
- 1:19:21जहाँ जाकर सब तृष्णाएं और वासनाएं विषय विकार समाप्त हो जाती है
- 1:19:29वहाँ पहुंचाने ऐसीधी सीधी पर भाषा तुम्हें बता दूँ लक्षण कह दो पर
- 1:19:34भाषा कह दो। जो अभी भी तीन गर्लफ्रेंड रखता
- 1:19:37है। पक्का है कि वह गीता बोलने के
- 1:19:39योग्य नहीं है। पक्का है कि वह अष्टावक्र उपनिषद
- 1:19:44का परिभाषा करने के योग्य हुआ नहीं आता है।
- 1:19:48उसे चुप हो जाना चाहिए। इसीलिए नहीं हाँ नहीं, नहीं
- 1:19:51इसीलिए नहीं के मेरे फॉलोअर्स की संख्या बढ़ जाएगी नहीं।
- 1:19:54मेरे फ्लवर्स को तो मैं खुद ही एक्सपेल कर देता हूँ, मुझे चाहिए
- 1:19:59मुमुक्षु जिन्हें प्यास न लगी हो, मेरे पास न नहीं बहुत बार का है
- 1:20:04क्योंकि मेरे पास पानी है, खोपड़ी की खुजलाहटों को मैं व्यर्थ से
- 1:20:09समझता हूँ तो ऐसे प्रश्न पूछना यह कोई?
- 1:20:15किसी प्रकार का पत्रकारता नहीं है।
- 1:20:20जैसे अक्षय कुमार ने पूछा ऐसे ही ये पूछा है आप पत्नी के पास एक
- 1:20:25कमरे में सोते हो तो मैं काम बासना कभी सताती है, इससे ज्यादा
- 1:20:31प्रश्न नहीं पूछ सकती। मुझे पता है।
- 1:20:34इसलिए फिर मैं बुलाऊ तो कैसे बनाऊं?
- 1:20:38क्यों नहीं बुलाता? और जो इंटरव्यू के लिए आना चाहता
- 1:20:42है, मैं उन्हें रोक देता हूँ कि मत आओ, प्रथम पड़ाव के ऊपर पाप को
- 1:20:48अगर समाप्त कर दिया जाए तो ज्यादा बढ़िया रहता है।
- 1:20:52मंद बुद्धियों को अगर रोक दिया जाए तो ज्यादा बढ़िया रहता है।
- 1:20:57अतः ये ही काम मैं कर रहा हूँ मंद बुद्धियों को मैं नहीं आने देता
- 1:21:01या अगर गलती से आ जाए कोई नाम फिर भूल गया अनिल मूल चंदानी तो फिर?
- 1:21:12गाहे बगाहे वो पहचान में आ जाते हैं फिर एक्सपेल कर दिए जाते हैं।
- 1:21:22अब और भी कुछ पूछना था उल्लू। उल्लू का शरीर का प्रतीक बाल तक
- 1:21:34उल्लू के बाल पंखों के बड़े काम आते हैं।
- 1:21:39तुम्हारे संसारिक कामों का जी फिर जरूरत नहीं है ऐसे कामों करने की
- 1:21:47जिनको तुम अपने। दुश्मनों का वध कर दो और बाद में
- 1:21:52वो कांड खुलते हुए बेचारे जजों को परेशान करते हो।
- 1:21:57जिसने देखा नहीं। कारण कुछ और बुद्धि से ये फैसला
- 1:22:01करेगा और वह भी जानते हैं कि न्याय हुआ कहाँ?
- 1:22:07दोनों पक्षों की दलीलों में जिसके तर्क ज्यादा कामयाब रहे वो जीता।
- 1:22:13यानी बुद्धि के तर्क जीते हैं। सत्य तो नहीं जीता ना मैं सदा से
- 1:22:18कहता हूँ अदालतों में तुम्हारे फैसले आते हैं, न्याय नहीं होता
- 1:22:24क्योंकि फैसला देने वाले। बुद्धि से आगे नहीं बढ़ पाए।
- 1:22:29उनकी मजबूरी है तो मेरे ख्याल में शायद मैं आपके प्रश्नों के जवाब
- 1:22:39सारे दे दिए, फिर भी कोई हो तो मुझसे पूछ लो, मैं इसीलिए तो हूँ।
- 1:22:49उल्लू की सवारी लक्ष्मय और हंस की सवारी सरस्वती सरस्वती जस पर
- 1:23:01मेहरबान? वह अपने अंत स्थल तक पहुँच जाएगा।
- 1:23:11अंधभक्तों से ज्यादा अच्छा मैं विकास की विकृति और प्रशांत को
- 1:23:19कहता हूँ। आचार्य कम से कम ये लक्ष्मी से।
- 1:23:25सरस्वती की तरफ तो यह एक पड़ाव है।
- 1:23:31लक्ष्मी से सरस्वती तक आना और सरस्वती का हमने जो वाहन चुना वो
- 1:23:38चुना। हंस और थोड़ा सा वक्त भी ज्यादा
- 1:23:43हो गया। जब सरस्वती की कृपा होती है उससे
- 1:23:54पार जाकर पहले मंद बुद्धि से पहले अंत बुद्धि से मंद, बुद्धि और मंद
- 1:24:02बुद्धि से। बुद्धि के पार ये तीन पड़ा हुआ है
- 1:24:07पहले अंत बुद्धि रामभद्राचार्य फिर मंद बुद्धि फिर मंद बुद्धि है
- 1:24:18जो आम लोग बिना जानी। कमेंट के नीचे लिख देते हैं
- 1:24:26अज्ञानी लेकिन उससे आगे बुद्धि से भी पार जाना।
- 1:24:37तो यहाँ तक ही बोला जा सकता है शब्दों में और यहाँ तक ही बोले।
- 1:24:42फिर वो कहते है की देखो, सौभाग्यशाली हुए तो शब्दों के
- 1:24:48पीछे इशारे हैं। अभी इशारों को अगर तुम पकड़ जाओ
- 1:24:53तो तुम भगवान हो गए यानी भाग्यवान हो गए।
- 1:24:57अन्यथा तुम अभागे ही रहे हंसपयो मानसरोवर हंसपयो के लक्षण।
- 1:25:15कैसे तो नहीं बुद्धि से पार हुआ या नहीं हुआ?
- 1:25:19फिर बुद्धि की सारी चीजों से गुजर के जाएगा।
- 1:25:22वो उससे ज्यादा अनुभवी व्यक्ति नहीं होता क्योंकि बुद्धि सभी
- 1:25:26रास्ते उसने पैदल तय कर लिए। कहाँ कीकर का पेड़ है, कहाँ आम का
- 1:25:31पेड़ है? कहाँ रस्ता कटकीला है, कहीं रस्ता
- 1:25:36राजपथ है, कहाँ उबड़ खाबड़ यमीन है, सब जानता है।
- 1:25:40संत बुद्धि के रास्ते से होकर जाता है, सारी बुद्धि को तय करके
- 1:25:44बुद्धि के पार हो जाता है तो इसीलिए संत से ज़्यादा अनुभवी और
- 1:25:51कोई नहीं होता। अनुभवी और समझ से आई हुई अनुभव
- 1:26:01हंसा पायो ये हंस जो सरस्वती का है मानसरोवरु।
- 1:26:12ताल तलैया क्यों ढोलें मन मस्त हुआ फिर क्यों बोलें मन मस्त हुआ
- 1:26:29हाँ फिर क्यों बोलें? हंसा पायो मानसरोवर फिर ताल तलैया
- 1:26:43कहा कबीर ने। लोई उसके पास ही सोती है कबीर के
- 1:26:46पास जरूरत के लिए बच्चे पैदा करता है।
- 1:26:53हम सापयो, मानसरोवर सांसारिक पदार्थों को वो कामना नहीं करेगा,
- 1:27:06सांसारिक पदार्थ की कामना नहीं करेगा क्यों उसे?
- 1:27:12सांसारिक पदार्थों में यह रस आता है।
- 1:27:15वह बेकार लगने लगा। इन्द्रियां व्यर्थ हो गईं तो राम
- 1:27:21ने अपने आपको सहयोग के हवाले कर दिया।
- 1:27:29हम सफ़यो मानसरोवर ताल तलेया क्यों ढोले मन मस्त हुआ हुआ, फिर
- 1:27:46क्यों बोल? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले जब
- 1:27:53तुम वहाँ तक पहुँच गए फिर क्यों रात रात ही करोगे पागल हो गए
- 1:27:57क्यों राम राम करो फिर क्यों बोल रहे?
- 1:28:03इसका मतलब पहुंचा ही नहीं अभी। धन्यवाद।