Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Jan 25 - Incredible facts about SHIVA! हम ईश्वर से कैसे जुड़े हुए हैं? | DIKSHA | INERTIA |
Transcript
- 0:14बाबा जी कोकोटिकोटि प्रणब मेरे गांव के तीन तरफ तीन संत पुरुषों
- 0:27का स्थान है। नंबर 110 किलोमीटर उत्तर दिशा में
- 0:42मोती गिरी बाबा नंबर दो पांच किलोमीटर पूर्व दिशा में स्वामी
- 0:49बाबा नंबर तीन। दक्षिण दिशा में दो किलोमीटर
- 0:54जगन्नाथ बाबा इन तीनों में से कौन परम सिद्ध थे, जिनकी समाधि पर
- 1:01जाकर बैठने से पूर्ण लाभ प्राप्त हो जाता।
- 1:04है। ये प्रश्न मैंने इसलिए उठाया ये
- 1:14प्रश्न इनेरशिया से समझ देता है और आजकल जो प्रसंग चल रहा है वो
- 1:23इनेरशिया का है। अब ध्यान से समझना इस बात को जो
- 1:31व्यक्ति जितना गहरा होगा, वह उस इनेरतीय के करीब होगा और उसकी
- 1:40रेंज ब्रॉडकास्टिंग रेंज उतनी बढ़ जाएगी, जो अपने भीतर जितना गहरा
- 1:48जाएगा। ब्रॉडकास्टिंग रेंज उतनी बाहर बढ़
- 1:52जाएगी, जो बिल्कुल इनर्शिया के भीतर चला जाएगा।
- 1:58स्थिति प्रज्ञा जैसे कह देते हैं स्थिति प्रज्ञता स्थिति प्रज्ञता।
- 2:05जो ईश्वर के स्थल पर चला गया। जिसने निर्माण किया सारे सिस्टम
- 2:10का, फिर उसकी ब्रॉडकास्टिंग पावर समस्त विश्व में हो जाएगी, वह
- 2:22सेंसार के कण कण में वजूद होगा उसका।
- 2:29जहाँ भी पुकारोगे वहाँ वह आपकी बात सुनेगा अब समझना बहुत से
- 2:39प्रश्न बीच में कवर करूँगा एक प्रश्न है कि शेपवा।
- 2:47आप कहते हैं कि शिव कैलाश में बैठे हैं, क्या वह भी बुद्ध की
- 2:53तरह करूणावश? कुश वासना को बचाकर शेष रखें के
- 3:05लोगों का उद्धार हो सके। या कोई और बात?
- 3:10है। नहीं कोई और बात है बुद्ध अपनी
- 3:18वासनाओं को बचा कर। लोगों को उपलब्ध होते हैं और
- 3:30लोगों को सही मारकर दिखाते हैं। ये बुद्ध का काम है।
- 3:35शिवा अब समझना थोड़ा सा मुश्किल है, इसलिए बुद्धियों को सूक्ष्म
- 3:40कर लो। जैसे एटोमिक पावर प्लांट होता।
- 3:47है। वहाँ से कनेक्शन जाता है।
- 3:51सीधा आजकल तो तारों के द्वारा जाता है वक्त आ जाएगा।
- 3:57जल्द ही क्योंकि परमात्मा की सृजना में ऐसी व्यवस्था है।
- 4:04कि जहाँ पर बिजली पैदा हो, वहाँ से बिना रेंज के दूसरे स्थान पर
- 4:11बिजली शिफ्ट की जा सके। यह वक्त आ जाएगा, जल्दी ही साइंस
- 4:18इसे खोज लेंगे। तारों की आवश्यकता न पड़े जैसे
- 4:22आपने देखा होगा। पहले जमाने में जिसके टेलीफोन
- 4:28लगता था उसके दो गोल ठप्पे से लग जाते थे गोलाकार और उसमें से तारे
- 4:37आँखें फंस जाती थी। उसमें से कनेक्शन होता था तारों
- 4:41से। लेकिन आज क्या हुआ?
- 4:46आज इंटरनेट है, कोई तार की आवश्यकता नहीं, जहाँ से नंबर कमाओ
- 4:52उसी का मिलेगा। ऐसे ही बिजली की विद्युत की पावर
- 4:59की व्यवस्था होने वाली है। जल्दी ही साइंस खोज लेगी,
- 5:08प्रोड्यूस करना पड़ेगा। बिजली को वो एटोमिक से हो, वह
- 5:16कोयले से हो या किसी भी चीज़ से हो, सीधी शिफ्ट हो जाएगी सेंटर।
- 5:23सेंटर से सेंटर सेंटर से सेंटर पर वो अपने घरों में आ जाएगी।
- 5:30आप इस व्यवस्था को समझ गए ना? ऐसा ही परमात्मा की एक व्यवस्था
- 5:36है, क्या नहीं है उसके संसार में क्या नहीं है?
- 5:44विराट संसार और अगर तुम मार्कर्स जैसे लोग कहते हो की वो है नहीं
- 5:53तो ठीक कहते हो, क्योंकि जो चीज़ खोपड़ी से बाहर हो जाती है, तुम
- 5:59कह देते हो वो है नहीं। ये मनुष्य की प्रकृति है क्योंकि
- 6:06मनुष्य अपने आप को कभी अज्ञानी साबित नहीं करना चाहता जबकि
- 6:12मनुष्य से बड़ा अज्ञानी कोई है नहीं।
- 6:15जो ज्ञान का भ्रम पालता है, उससे बड़ा अज्ञानी कौन हो सकता है।
- 6:23परमात्मा का कनेक्शन शिव के साथ। है।
- 6:30अब मैं बहुत ज्यादा आपको समझाना सकूंगा, शब्दों में इशारों से समझ
- 6:35लेना और वह परमात्मा सर्वव्यापी है।
- 6:42और इस धरा का शिव एक है दूसरी धरतियों के अलग अलग शिव हैं उनके
- 6:54सबके अपने कनेक्शन है विराट के साथ।
- 6:57अब ये थोड़ी गहरी व्यवस्था आ गई। इसको एक बार समझ लेना, शायद कभी
- 7:05इससे ज्यादा खुल के बात मैं कर सकूँ।
- 7:08परमात्मा से शक्ति लेकर प्रत्येक ग्रह का शिव और ग्रह एक नहीं है।
- 7:17ग्रह अनंत हैं। अनंत का मतलब अगर खरबों भी कह दिए
- 7:22जाएं तो उचित नहीं होगा। ज्यादा है।
- 7:27इससे प्रत्येक ग्रह का अपना एक शिव है।
- 7:34शिव तक जाता है परमात्मा का कनेक्शन और शिव आगे ट्रांसफॉर्म
- 7:43करता है, ट्रांसमिट करता है। ब्रॉडकास्ट करता?
- 7:46है। शायद समझ में आ गई होगी बात
- 7:52परमात्मा। फेंकता है अपनी शक्ति को शिव के
- 7:58पास ज्ञान को, प्रत्येक ग्रह का अपना शिव है इस ग्रह का अपना शिव
- 8:06है पृथ्वी का और शिव बांटते हैं आगे।
- 8:16अब यहाँ तक आपकी समझ में आ गई होगी आपने देखा नहीं इसलिए सिर्फ
- 8:22मान लेना कि यह व्यवस्था क्या है? आपने कहा ये तीन संत हैं।
- 8:36एक दो किलोमीटर, पांच किलोमीटर 10 किलोमीटर कौन सा संत सही है,
- 8:43किसकी समाधि पर जाकर बैठा जाए, प्रश्न तो ठीक है?
- 8:52लेकिन कोई भी व्यक्ति यह जान नहीं सकता कि कौन कितना गहरा गया था,
- 8:59कौन कितना गहरा इनर्शिया में प्रवेश किया था जो जितना गहरा
- 9:06अपने भीतर की इनर्ष्या में प्रवेश कर जाएगा।
- 9:10उसकी ब्रॉडकास्टिंग पावर उतनी ही हो जाएगी।
- 9:13थोड़े से डिफिकल्ट शब्द हैं। अगर एक बार में समझना है तो दो
- 9:22तीन बार सुन लीजिए। जितना गहरा व्यक्ति चला गया अपने
- 9:30भीतर इनेरसिया के क्रीब उस सेंटर को आज मैं इनेरसिया कह रहा हूँ,
- 9:39जिसे मैं सदैव केंद्र कहता हूँ, आज मैं उसको इनेरसिया कह रहा हूँ।
- 9:49उस इनेरतीय के करीब व्यक्ति जितना गहरा हो गया, करीब हो गया, उतना
- 9:54ही ज्यादा प्रगाढ़ ब्रॉडकास्टिंग संयंत्र बन गया इंस्ट्रूमेंट।
- 10:03तो कौन कहाँ था ये मुझसे मत पूछिए, इसका जवाब मैं नहीं दे
- 10:09पाऊँगा, लेकिन थोड़ा और समझा दूँ आपसे आप जब यहाँ आते हो दीक्षा
- 10:19लेने के लिए। तो मैं जब दीक्षा देता हूँ, आपको
- 10:28कनेक्शन दे देता हूँ अपने साथ मेरा कनेक्शन आप तक जाता है,
- 10:35वायरलेस कोई तार नहीं होती, ये धागे बड़े पक्के हैं, उद्देश्य
- 10:42हैं। प्रेम के धागे कभी देखे हैं कोई
- 10:50दिखता नहीं प्रेम लेकिन धागे बड़े पक्के होते हैं।
- 10:57सच्चा प्रेम। कोई तार नहीं जाएगी वहाँ तक लेकिन
- 11:06तांगे बड़े पक्के हो गए। प्रेमी प्रेमिका से मिलने के लिए
- 11:11प्रेमिका प्रेमी से मिलने के लिए सभी हदें क्रॉस कर देते हैं।
- 11:18सोनी कच्चे घड़े में तूफानी रात में कच्चे घड़े पे सवार हो जाती।
- 11:25है। किसी भी आशिक की बात देखो प्रेम
- 11:32से बंधा हुआ वह अपनी जिंदगानी की फिक्र नहीं करता।
- 11:39क्यों उसे कुछ विराट दिख गया अपने अस्तित्व से पार उसे कुछ दिख गया
- 11:48जो बड़ा प्यारा है जो बड़ा मैग्नेटिक है, जो खेचता है अपनी
- 11:54तरफ। एक दूसरे में वह नजर आने लगा।
- 12:03यह बंधन नहीं है यह मैग्नेटिक पाब।
- 12:10है। लेकिन।
- 12:13ऐसा बांधती है जैसी धरती धरती का ग्रुत्वाकर्षण बल ग्रेविटेशन
- 12:20फोर्स किसी को दिखाई दिया नहीं दिखाई देता, लेकिन महसूस किया
- 12:27जाता है जब आप चीज़ को ऊपर उछालते हो तो नीचे आ जाती हो।
- 12:34ऊपर से गिराते हुए नीचे आ जाती है इट इस ग्रैविटेशनल फोर्स बस इसका
- 12:41आभास हो सकता है। ऐसे ही परमात्मा दिखाई नहीं
- 12:46पड़ता। बहुत से मूर्ख कह देते हैं।
- 12:48अगर परमात्मा है तो दुखाओ मैंने कहा, गुरुत्वा कृष्ण बाला है तो
- 12:51दुखाओ। कितनी वो तो अनुभव की बात है तो
- 12:55ये भी अनुभव की बात है। जब उसकी बनाई हुई चीज़ अनुभव की
- 13:01बात है तो वह इतना विराट जिसने यह अदृश्य शक्ति पैदा कर दी वह कैसे
- 13:08दिखेगी तुम्हें? जैसे गुरुत्वाकृष्ण बल देखा नहीं
- 13:15जाता, वैसे गुरुत्वाकृष्ण बल को बनाने वाला भी देखा नहीं जा सकता।
- 13:19तुम मज़े से कह सकते हो, नास्तिक हो सकते हो, तुम मज़े से कह सकते
- 13:23हो कि वह नहीं है, लेकिन बात सुनो।
- 13:30अगर तुम कहोगे वह नहीं है तो दसवीं मंजिल से छलांग लगाओगे,
- 13:36हार्ड पांव में टूट जाएंगे, मर भी जाओगे, वो है ज़रा कूद के जो
- 13:45देखते हैं उन्हें पता लगता है। संत उन्हें देखते हैं।
- 13:52संत अनुभव करता। है।
- 13:55किसी एक विशेष स्तर पर जाकर और अनुभव करके जब स्पष्ट अपनी नग्न
- 14:01आँखों से देखता है अनुभव करता है। कि वह सिर्फ है नहीं, सब जगह वही
- 14:09है। इस शब्द को फिर सुन लो, तुम पूछते
- 14:15हो क्या परमात्मा है? संत कहता है परमात्मा के सिवा कुछ
- 14:20और है। बिन ना में ना ही कोठा हूँ वही तो
- 14:30है सब जगह वही है तो ही तो तू ही तो जितना किता तेता नाउ जितना
- 14:40पिसारा सौरा विराट। वो वही है, नाम कमतल परमात्मा और
- 14:48आज नाम के उपरिते झगड़े होते है कोई कहता है अल्लाह है कोई कहता
- 14:53है सतनाम बगुल कोई पांच नाम गिनाता कोई चार नाम गिनाता कोई
- 14:58राधे राधे करता है इस पागलपन में। तुमने ज़िन्दगी के वो अनमोल लम्हे
- 15:04खो दिए जिसमें तुम आनंद में नाच सकते थे जिसमें आनंद में तुम नहा
- 15:11सकते थे उस भीतर के तीर्थ में स्नान कर सकते थे वो अनमोल लम्हे
- 15:16तुमने गमा दिया। ये तू सिर्फ राजनीतिक लोगों की
- 15:26स्वार्थ, राज़ करने की भावना और ये भी राज़ ना कर सकेंगे।
- 15:31राज़ करेंगे हुकम चलेगा इनका, लेकिन तुम्हें पता है?
- 15:37ये नकली हाकम है, एक असली हाकम भी है जो सदा मौज में रहता है, जिसकी
- 15:46खुशहाली कम नहीं होती, छीने नहीं जाती और ये नकली हाकम है।
- 15:52ये असल की रीस करना चाहते हैं, इसलिए दुखी हैं।
- 15:58ऐसा मत सोच लेना। मैं अक्सर कहा करता हूँ कि पीएम
- 16:03सीएम बनने की कभी इच्छा मत पालना, बहुत दुखी हो जाओगे परमात्मा बनने
- 16:13की इच्छा तो तुम्हें। घोर नर्क में ले जाएगी।
- 16:19कुम्भ भी पाक नर्क के जो बनाया पंडितों ने वो कम पड़ जाएगा।
- 16:25हाकम बनने की इच्छा तुम्हें नर्क में ले जाती है और विडम्बना ये है
- 16:33कि तुम हाकम बनना चाहते हो। सब कोई है।
- 16:37तुम हुकुम को मानना नहीं चाहते, हुकुम करना चाहते हो?
- 16:42हुकुम करना अहंकार का स्वभाव है, परमात्मा हुकुम नहीं करता,
- 16:51परमात्मा इनरश्य है। आज व्याख्या हो रही है इनर्शिया
- 16:59की तो तुम जब यहाँ आते हो, मैं तुम्हें कनेक्शन दे देता हूँ।
- 17:06मेरा कनेक्शन सीधा शिव से आता है और जब तक।
- 17:12ये पंचभौतिक शरीर है तो शिव से कनेक्शन लेके उसकी आज्ञा लेके
- 17:19आपको कनेक्शन दे देता हूँ, आपको कह देता हूँ जाओ घर जाओ सुबह उठ
- 17:28के क्रिया योग करो। ध्यान करो कुछ न करो, उसका मतलब
- 17:37है ध्यान करो और अपने भीतर चलते जाओ अपने भीतर उतरते जाओ 1 दिन
- 17:44तुम उस इनेरतीय को पा जाओगे इनेरतीय मतलब पैसिविटी।
- 17:52जीवंत पैसे बटे जीवंत निष्क्रियता मर जीवडा बहुत बार समझाता हूँ एक
- 17:59एक चीज़ को ताकि आपको साफ हो जाए वह हाकिम तो है, लेकिन हुकुम करता
- 18:10नहीं है। ये बड़े मज़े की बात है।
- 18:14हुक्म उसके भीतर से आता है, उसका होना हुक्म है, उसका होना हकुम
- 18:20है, हुक्म अंदर सबको बाहर हुक्म ना कोय।
- 18:27नानक हुक्म, जय बुजय तो मैं कहे न को है और परमात्मा कभी नहीं कहता
- 18:35कि मैं मैं हूँ, कभी नहीं कहता जबकि वो ही है सब जगह उससे कहने
- 18:43की आवश्यकता भी कोई नहीं है तो तुम जहाँ आ जाते हो मैं तुम्हें
- 18:48कनेक्शन दे देता हूँ। मेरी तरफ से बात खत्म हो गई, फिर
- 18:55तुम मेरी तरफ भागते हो, क्यों भागते हो?
- 19:02मैं अच्छी तरह जानता हूँ। वो उस घड़ी का इनेरसिया का आनंद
- 19:09तुम्हें यहाँ खेंच देता है, लेकिन मैंने तुम्हें अपने भीतर जाने का
- 19:17सूत्र दे दिया। तुम्हारा मन तुम्हें बाहर का
- 19:21सीखता है। चलो बाबा के पास चलें।
- 19:27वहाँ बड़ा चयन मिलेगा। तो फिर तुमने दीक्षा लेने का कोई
- 19:32लाभ नहीं उठाया। कनेक्शन तो यहाँ से ले गए, लेकिन
- 19:37मैंने तुम्हें अपने भीतर जाने को कहा।
- 19:41यह कनेक्शन जो दिया वह आपको अपने भीतर उतरने में।
- 19:45सहायता करेगा। मैं बचना चाहता हूँ आपकी तकलीफों
- 19:51से आप आप दुख ही मत हो। आने जाने में आपको कनेक्शन दे
- 19:59दिया, अपने घर में बिजली जलाओ, मोटर चलाओ।
- 20:06हीटर चलाओ, एसी चलाओ लेकिन फिर आप यहाँ भागते हो, वही पुराना रिवाज,
- 20:16वही पुराने मन के संस्कार हमारे यहाँ गरीब के अंदर एक चेला होता
- 20:23था सिर मारता था। मैंने उससे पूछा कि ये तो ठीक है?
- 20:30चलो ये तो मैं समझ गया लेकिन आप जिनको कुछ बता देते हो वो तकनीक
- 20:37भी मुझे पता है जैसे आप बताते हो जिसकी भैस काली है।
- 20:45वो खड़ा हो जाए, 810 खड़े हो जाते हैं नहीं नहीं।
- 20:49जिसकी पूँछ भूरी है तो ऐसे तकनीक से ये एक व्यक्ति रह जाता है।
- 20:55आखिर में कई बार तो फैल भी हो जाता है, आइडिया है।
- 21:03तो मैंने कहा ये तो चलो ठीक लेकिन आप ये चौंकी भरने को क्यों?
- 21:07कहते हो कि सात चौंकियां भर दो पांच चौंकियां भर 211 चौंकियां भर
- 21:12दो, इसका क्या अर्थ हुआ? मैंने कहा देखो अपनी ठगी को पूरा
- 21:19समझा देना मुझे। कहते देखो बाबा आप से क्या छुपा?
- 21:24है। अगर हम बुलाएंगे सात बार 11 बार
- 21:29पांच बार तो जितनी बार वो आएगा कुछ दे के ही जाएगा इसलिए बुलाते
- 21:36हैं। मैंने कहा हाँ बस समझा गया, ठीक
- 21:40हो गई बात। लेकिन भगतो मैं तो आपको चौकी भरने
- 21:47को कहता नहीं, मैं तो आपसे कहता हूँ दीक्षा ले गए, घर बैठो क्यों
- 21:55तोड़ते हो? अभी 20 दिन पहले एक मित्र का फ़ोन
- 22:04आया पुराना मित्र बाबा मैं पहाड़ों वाली के दर्शन करने चला
- 22:14हूँ अच्छा मैंने कहा हिल स्टेशन देखने चले हो गंदा हो?
- 22:25घरवाली से तंग होता घरवाली उसकी थोड़ी सी नरम स्वभाव की है।
- 22:34वैसे लड़ाई करती रहती है, वैसे थोड़ी सी धार्मिक है।
- 22:40ये धार्मिक लोग अक्सर लड़ाईयों में रुचि बहुत लेते हैं।
- 22:44उसको उससे लड़ा दो, उसको उससे लड़ा दो धार्मिक है लेकिन झगड़ा
- 22:52करती रहती है तो मैंने कहा फिर तंग हो गए थे तुम?
- 23:00तो फिर जब वो तंग हो जाता, वो कहता मैं तो पहाड़ों वाली के
- 23:02दर्शन कर रहा हूँ। असल में वो उससे तंग आ जाता था,
- 23:11फिर पांच 710 दिन लगाता था। माता के नाम का बहाना करके घूम
- 23:18लेता खूब। हिल स्टेशन को और कहता माता के
- 23:23दर्शन करे वहाँ जाते ही नहीं मैंने कहा ये तुम्हारा हिसाब ठीक
- 23:29है औरों को भी बताऊँगा जो बेचारे तंग आ जाते हैं उनको भी बताऊँगा
- 23:36लेकिन अब के दाब उल्टा पड़ गया। कहता है बाबा मैं चला हूँ पहाड़ों
- 23:46वाली के दर्शन करने के लिए माँ के जाओ फिर तंग करने लगी हाँ जाओ,
- 23:55लेकिन अब के धुंध ज्यादा था। रास्ते में मेरे को टक्कर मार
- 24:02गया। राम राम सत्यह हो गया तो मैं इन
- 24:13चीजों से बचता हूँ, मेरे पास क्यों चौकी भरने आते हो?
- 24:18जब मैं बुलाता नहीं आपको। मैंने अपना काम कर दिया ऑनेस्ट्ली
- 24:23ईमानदारी से अब घर बैठो जब आप पहुंचोगे तो पाओगे कि मैं अपने
- 24:33भीतर से ला गया हूँ जो मिलेगा तुम्हें अपने भीतर से मिलेगा।
- 24:41मेरे से मिलेगा राग मेरे से मिलेगा सिर्फ दर्शन किस चीज़ का
- 24:49कि जब यह व्यक्ति आनंद में बैठ सकता है तो मैं भी बैठ सकता हूँ
- 24:53कोई कमी नहीं है मेरे में। यह शिक्षा ले के जाना यह पाठ पढ़
- 25:00के जाना यहाँ से जब मैं एक स्थान पर बैठ सकता हूँ कहीं जाने की
- 25:07इच्छा नहीं है, कुछ खाने की इच्छा नहीं है, बस आनंद में हूँ।
- 25:17यहाँ से यही पाठ लेके जाना कि जब यह व्यक्ति आनंद में बैठ सकता है,
- 25:23चौबीसों घंटे इतने इतने वर्षों तक तो मैं क्यों नहीं बैठ सकता
- 25:30तुम्हारे भीतर भी वही आनंद का खजाना है।
- 25:35तुम्हारे भीतर भी परमात्मा कोट कोट के भरा हुआ है, लेकिन तुम
- 25:42बदनसीब। हो मैं।
- 25:50कोई कोर कसर नहीं छोड़ता। तुम्हें ताड़ने की कोई कोर कसर
- 25:58नहीं छोड़ता हर तरफ से तुम्हें ताड़ता हूँ, लेकिन फिर भी तुम
- 26:05यहाँ भागने की तैयारी करते हो आ जाओ, लेकिन।
- 26:11उस वक्त आ जाओ जब बिल्कुल लगे कि हम भटक गए हैं, फिर आके देख लो
- 26:20मैं तो वहीं बैठा हूँ, उसी तरह बैठा हूँ।
- 26:28वो ही है चाल मस्तानी जो पहले थी वो अब भी है उसी खुशी से बैठा
- 26:38हूँ, उसी आनंद से बैठा हूँ, उसी अनर्शिया में बैठा हूँ।
- 26:52इनर्शय हमारे भीतर का वो केंद्र का तत्व जिसे मैं परमात्मा कहता
- 26:59हूँ, वह तुम्हारे अपने तत्व से पार है थोड़ा।
- 27:06तुम जहाँ स्वयं का बोध करते हो, जहाँ समाधीष्ट होते हो, वहाँ से
- 27:11आगे निकलना होता है उस साक्षी का भी एक साक्षी।
- 27:18है। और उस साक्षी का भी एक साक्षी
- 27:23परमात्मा है। तुम चाहो तो साक्षी बरकर सकते हो
- 27:31तुम्हारी सारी दुनिया की शरीर की दैहिक दैविक भौतिक तापा।
- 27:38राम राज़ नहीं कहो व्याप्ति। सब खत्म हो जाएंगे।
- 27:43जब तुम स्वादिष्ट हो जाओगे, तुमने अपने आप को जाना, तुम्हारे सभी
- 27:48ताब खत्म हो गए, तुम चाहो तो यहाँ रुक सकते हो।
- 27:51बुद्ध यहाँ रुक गए हैं, लेकिन एक बात तुम्हें आज साफ कर दूँ, बुद्ध
- 27:58यहाँ रुक गए हैं। सिर्फ इसलिए नहीं रुके इसलिए वासन
- 28:11को नहीं रखा। के मेरी जरूरत पड़ेगी, थोड़ी सी
- 28:17वासन बचा लूँ। यह कारण तो है लेकिन दूसरा भी एक
- 28:22कारण। है।
- 28:25इसे अब समझ लेना ठीक से क्योंकि यह आज तक मैंने कभी बताया नहीं तो
- 28:32आप ठीक कहते हो बाबा आप रोज़ बदल लेते हो, वक्तव्य रोज़ बदलते हो
- 28:37ठीक? मैं सीढ़ियों बदलता हूँ, सीढ़ियों
- 28:42बदलना, वक्तव्य बदलना होता है जैसी सीढ़ी बदली वक्तव्य बदल गया,
- 28:50इसलिए मुझे आप सदा झूठा पहुँच गए जो मैंने पहली पूढ़ी पे कहा।
- 28:59वो छहवीं सीढ़ी पे मैं नहीं कहूंगा बारहवीं पे नहीं कहूंगा
- 29:04अट्ठारहवीं पे नहीं कहूंगा, बदलता जाऊंगा रोज़ इसलिए मुझसे मुझसे
- 29:09बड़ा झूठा कोई है नहीं और मैं जानता हूँ कि ये जो बोलता हूँ ये
- 29:16आज। ये झूठ बोलता है ये बिल्कुल उस
- 29:21मास्टर की तरह हूँ मैं जो पहली कक्षा में बच्चों को पढ़ाता है,
- 29:26बच्चों ए अनार होता है, बच्चे कहते हैं ए अनार होता है, बच्चों
- 29:34ए सिर्फ अनार का ही होता है। हाँ मास्टर जी, ये सिर्फ अनार का
- 29:40ही होता है और मास्टर अच्छी तरह से जानता है कि ये सिर्फ अनार का
- 29:45नहीं होता। वहीं मास्टर जब जाके पीएचडी को
- 29:51पढ़ायेगा। मस्त डिग्री को पढ़ायेगा तो वह
- 29:55कहेगा ए सिर्फ अनार का नहीं होता ए बहुत सी चीजों का होता है तो
- 30:02कहेंगे बिलकुल ठीक है। तो जब वो पहली कक्षा को पढ़ा रहा
- 30:06था तो जान रहा था कि मैं झूठ बोल रहा हूँ।
- 30:10इससे आगे भी पढ़ाव है। और भी राहतें हैं वसल की राहत के
- 30:17सिवा लेकिन क्या करूँ? आज उन बच्चों को बढ़ाना है और
- 30:23दिमाग में जचा देना है एक बार ये जचे जाए फिर आगे की बात छोटे
- 30:28बच्चों को हम डराते हैं कि बेटा बाहर में जाना मामू है।
- 30:32आबू है और जानते हैं कि झूठ बोल रहे हैं।
- 30:38बस ऐसी ही मेरी बात है। बुद्ध के भीतर सिर्फ ये वासना
- 30:44नहीं है कि मैं लोगों के काम हूँ, ये तो है एक दूसरी वासना भी है।
- 30:51बुध ने अभी पूर्ण तत्व को पाया नहीं।
- 30:54जो महावीर ने पा लिया वो बुध ने ने पाया।
- 30:58महावीर अंत तक पहुंचते हैं, कृष्ण अंत तक पहुंचते हैं, बुध अभी और
- 31:06जन्म ले गए हैं। बुद्ध बुधध्व से आगे जाएंगे,
- 31:11परमात्मा हो जाएंगे 1 दिन तब नहीं कह सकेंगे परमात्मा नहीं है।
- 31:17आज कहते हैं और वो जानते हैं कि मैं जो कह रहा हूँ ठीक नहीं कह
- 31:25रहा हूँ। और भी पड़ाव हैं आगे।
- 31:29बखूबी जानते हैं क्योंकि समाधि के तल से साफ साफ, पारदर्शी नजर आता
- 31:36है। के आगे कुछ है, बुद्ध कर्णवान है।
- 31:44बुद्ध एक एक सीढ़ी चढ़ते हैं। बुद्ध कहते हैं कि दुनिया तो यहाँ
- 31:48भी नहीं है अगर यहाँ तक आ जाये दुनिया तो सारी दुनिया संतोष के
- 31:57आनंद में लिपटा उस रस में नहाई हुई खुशियां माने।
- 32:07यहाँ तक भी अगर दुनिया आ जाए तो बुद्ध ठहर जाते हैं।
- 32:12बुद्ध अपना ही फिलॉसोफिकल वक्तव्य बनाते हैं।
- 32:17वो तुम्हें समझाते हैं कि नहीं हैं, परमात्मा छोड़ दो लेकिन उनका
- 32:21ये कहना कि नहीं है परमात्मा। मार्कस के कहने जैसा नहीं होता,
- 32:26मार्कस ने तो बिल्कुल मार्कस तो चले ही नहीं।
- 32:29बेचारे वो अपने ढंग से कहते हैं वो भी करनाबान है।
- 32:35वो वितरण प्रणाली को लेकर करनाबान है।
- 32:40वो कहते हैं, एक व्यक्ति के पास सारा धनु।
- 32:42इसका कोई अर्थ भी नहीं बनता। सिर्फ अहंकार का बढ़ावा है।
- 32:48क्या करेगा? एक व्यक्ति सारी संसार की सम्पदा
- 32:51को इकट्ठा करके बाकी भूखे मर जाए। यह मानवता नहीं है तो मार्क्स
- 32:58अपने हिसाब से करुणावान है लेकिन वो सही हैं।
- 33:02बुद्ध अपने हिसाब से करुणावान लेकिन वो सही हैं।
- 33:07बुद्ध तो तुम्हारे सारे दुखड़े खींच लेंगे क्योंकि बुद्ध कम से
- 33:11कम उस अंतरिम तल के छोर पे आ जाएंगे जहाँ जाकर आपके सारे दुख,
- 33:17दर्द, तकलीफ। इल्ल्यूशंस भंग हो जाएंगे बस वो
- 33:24एक चीज़ खुद भी जानते हैं वहाँ जाना है अभी बाकी और वो है लेकिन
- 33:30वो कहते हैं परमात्मा नहीं है और बखूबी जानते हैं कि परमात्मा है।
- 33:38कौन मूर्ख होगा, जो उस तल पर खड़ा होकर ट्रांसपेरेंसी से देख नहीं
- 33:42पाएगा के आगे है? बिल्कुल स्पष्ट दिखता है साप शीशे
- 33:48के भीतर से उसकी गतिविधियों नजर आती हैं, उसकी प्रजेंस महसूस होती
- 33:56है। कैसे कह सकता है?
- 33:59लेकिन आपको कह सकता। है।
- 34:01उस टीचर की तरह जैसे कहता है अनार का होता है बेटा।
- 34:09इसलिए बुध रहेंगे मैत्री के रूप में आएँगे और बुध आपको बताएंगे।
- 34:18कि इससे आगे भी एक पूरा है। 2500 साल बीत गए।
- 34:24जब भी आयेंगे तो वह परमात्मा का संदेश देने आयेंगे।
- 34:31फिर वो ये नहीं कहेंगे कि परमात्मा नहीं है।
- 34:34फिर वो ये कहेंगे कि परमात्मा है। और फिर वो ये कहेंगे मैं परमात्मा
- 34:39हूँ, अहम् ब्रह्मस्व फिर कृष्ण की भाषा बोलेंगे, लेकिन आज उनके लिए
- 34:48यही कहना शुभ है। जब आग लगी हो तो सारे संकट भूल
- 34:56जाने होते हैं। आग बुझानी होती है, फिर दुकान पर
- 35:01गह का आया उसको सम्मान देना है, किसी से उधारी लेनी है, ये सब भूल
- 35:07जाता है। व्यक्ति आग बुझाता है।
- 35:10सबसे पहले आपके घर को आग लगी है। आप जानते नहीं ये दर्द है किसको?
- 35:19आप भ्रम पाले हो? कोई दर्द मेरे को है।
- 35:23इस भ्रम को तोड़ना अनिवार्य है, क्योंकि यह व्यर्थ है और बुद्ध जन
- 35:29गए हैं कि यह व्यर्थ है। यह व्यक्ति भ्रम में है।
- 35:34मृत्यु होती नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति करता है कि मृत्यु होती
- 35:38है। यह शरीर है नहीं, लेकिन फिर भी
- 35:42मानता है कि मैं शरीर हूँ। बुध भी कभी मानते थे कि मैं शरीर
- 35:46हूँ इसलिए झटका लगता है जब चेत उसे कहता है।
- 35:53कि यह व्यक्ति मर गया। है।
- 35:56यह व्यक्ति रोगी हो गया है। यह व्यक्ति वृद्ध हो गया है, इस
- 36:03व्यक्ति को निमोनिया है, इसको ट्यूबरकुलोसिस है।
- 36:09बुद्ध कहते हैं कि मैं भी मरूंगा। तब तक बुद्ध जानते हैं, अपने आपको
- 36:13शरीर क्षेत्र कहता हूँ। राजकुमार तुम भी मरोगे और 1 दिन
- 36:21मरे। बस उसी दिन वो मर गए, फिर तो वो
- 36:28बाट जोने लगे। अकेले थे पता था?
- 36:32कब जाने देंगे मुझे मुझे जाने नहीं देंगे मैं केला बारिश हूँ,
- 36:38लेकिन किसी तरह रात को छुपते छपाते 12:00 बजे गोरा अंधकार में
- 36:43अर्ध रात्रि को निकल जाते हैं। घर से छटपटाहट इतनी है।
- 36:52तो फिर यहाँ अगर मृत्यु है, विनाश शीद है सारा संसार तो फिर देखूं
- 36:58तो जो यह संतों ने कहा कि कुछ ऐसा भी है जो नहीं मरता क्या वो है और
- 37:07वो खोज लेते हैं खुद को? अब हम इनेरसिया पे आ जाये जब
- 37:16व्यक्ति उस इनेरसिया के गहनतम तल पे पहुंचता है, तो पूछते हो दो
- 37:25किलोमीटर, पांच किलोमीटर 10 किलोमीटर।
- 37:30सब दूरी समाप्त हो जाती। है।
- 37:32उपनिषद कहते हैं, वह पास से पास से।
- 37:36है। और वह दूर से दूर।
- 37:39है। तो क्या दूरी करोगे?
- 37:44फिर कौन पहुंचा जगन्नाथ पहुंचा था कि श्रीचंद पहुंचा था कि कौन
- 37:48पहुंचा था? कोई पहुंचा था, कोई नहीं पहुंचा
- 37:54था। इसे आपने क्या लेना है?
- 37:58आपने खुद खुशहाल होना है। आपने खुद आनंदित होना है, खुद वो
- 38:06रस पीना है जिसके बिछोड़ों में आप तड़प रहे हो, जिसके बिचोड़ों में
- 38:13आप दर्द में हो, तकलीफ में हो आपने वो जानना है।
- 38:23कैसी जन हो गए किसी संत पुरुष की जीवनी को देखो, उसके शरीर को बोल
- 38:33चाल, उसका व्यवहार, खाना पीना सब देखो।
- 38:39वहाँ से तुम्हें थोड़ा सा हल्का सा झलक मिलेगा कि ये जहाँ क्यों
- 38:45बैठा है। क्या मिला इसे जो जब बैठ गया
- 38:53कोरोना काल से पहले मुझे लोग कहते हैं, बाबा क्यों बैठे हैं?
- 38:57थोड़ा सा घूम फिराया करो, ऐसे तो जोड़ जुड़ जाएंगे, मैंने कहा कोई
- 39:03बात। नहीं।
- 39:05जुड़ जाने दो 1 दिन तो जोड़ मरेंगे भी, आग भी लगेंगी, आप बैठे
- 39:15कैसे हो जाना? बाहर जाया करो, घूम लिया करो
- 39:20कितनी सुंदर श्रिस्टी है कुछ लोग कह देते हैं बाबा मौज ही
- 39:30तुम्हारी। है।
- 39:33कुछ करना नहीं, कुछ धरना नहीं, आराम से बैठे हो, कोई काम नहीं,
- 39:38कोई काम नहीं। उन्हें यह नहीं पता था कि मैं
- 39:43खाना नहीं खाता, मौज ही तुम्हारी ऑलरेडी रहते हो, जाओ मतलब मज़े से
- 39:50हाँ करोना आया, लॉक लगा अब पुलिसवाले बाहर निकलने नहीं देते।
- 40:00और उनका मन कहता है चलो बाहर चलो घूम आओ बाहर घूमने निकल गए, पुलिस
- 40:10वालों ने पिछवाड़ा सुझा दिया डड्डू परेड कर भाई वापस आके कहते
- 40:18हैं बाबा। चौथा दिन था, आज बैठा नहीं गया,
- 40:23आप कैसे बैठे हो इतना सालों से मैंने कहा मज़े में बैठा हूँ और
- 40:28क्यों बैठा हूँ? कुछ करना नहीं, कुछ धरना नहीं अरे
- 40:32नहीं बाबा ये तो बड़ा मुश्किल है। आप अपने वक्तव्य बदल लेते हो,
- 40:41आपको असलियत का पता नहीं होता इसलिए मैं कहता हूँ बस एक बार जब
- 40:48मुझे देख लो कि ये यहाँ बैठा क्यों है, उसके बाद वैसी ही तड़प
- 40:53पैदा हो जानी चाहिए कि मैं भी ऐसे ही बैठ जाऊं।
- 40:58करण धरना यहाँ क्या होता है, कुछ नहीं करना होता।
- 41:04अगर ये लोग कहते हैं तीन बच्चे पैदा करो तो इनका स्वार्थ है,
- 41:09क्योंकि तीन बच्चे तुम पैदा करोगे तो इनकी फौज में जमा कर लेंगे।
- 41:14फिर इन्होंने जो करवाना है आप जानते ही हो।
- 41:20इसलिए कहते हैं तीन बच्चे पैदा करवाओ, तुम्हारे फायदे के लिए
- 41:25नहीं कहते हैं पालना तुम्हें पड़ेगा जन्म देने का दर्द।
- 41:29प्रश्न पीड़ा तुम्हें सहनी होगी। बाप सुबह निकलेगा, शाम को काला
- 41:35पीला होके लौटेगा घर इन बच्चों के पेट पालन करने हैं पढ़ाई लिखाई ये
- 41:41कोई काम नहीं करेंगे, न पढ़ाएंगे न लिखायेंगे न विश्वविद्यालय
- 41:44खोलेंगे, बीमार हो जाए तो न चिकित्सालय खोलेंगे, ये कुछ नहीं
- 41:49करेंगे ये तो बस कहेंगे तीन बच्चे चार बच्चे पैदा कर दो।
- 41:56और इनकी जिंदगी की तरफ देखना सब मुष्टंडे में नहीं गया।
- 42:02किसी ने बच्चे नहीं पैदा किया, पता है बच्चे, बच्चे बाहर होते
- 42:08हैं बच्चे जन्म लेना। अपना हुलिया बिगाड़ लेती है
- 42:15स्त्री उसके बाद पालन पोषण, मलमूत्र करना उसका फिर बड़ा होके
- 42:23उसको स्टैंड करना हम कह देते हैं माँ बाप को आपने क्या किया?
- 42:31करते तो बहुत हैं बहुत, लेकिन मैं कहता हूँ तुम पैदा ही न करो।
- 42:38वैसे भी जनसंख्या बहुत हो गई है। एकबारगी अब हिंदुस्तान तो कम से
- 42:47कम यह मांगता है के और बच्चे पैदा न करो।
- 42:52इस व्यक्ति की बात मत मानो तीन बच्चे का एक विनमय रखो, शादी करनी
- 43:01है, करो नहीं तो लीव इन में रहो, आनंद भी तो लो जिंदगी की।
- 43:07इंडिपेंडेंस का स्वतंत्रता का आनंद क्या होता है?
- 43:10अब तक तुम्हें पता ही नहीं, कुछ पीढ़ियां अनंत भाव में तो गुजार
- 43:18दें। अकेले इंडिपेंडेन्ट स्वतंत्र।
- 43:25इन मुरलों का कुछ नहीं बिगड़ता, ये कह देंगे ये तो पांच कह देंगे
- 43:28तो 10 कह देंगे इनका कुछ नहीं बिगड़ता इनकी खुद की ज़िन्दगी की
- 43:33तरफ देखो ये कोई बच्चा पैदा नहीं करते, इनको पता है, अच्छे तरह से
- 43:39बच्चा पैदा किया तो 1000 तकलीफें हैं।
- 43:43वो बात दूसरी है कि घूमा के ले जाएंगे, हमने देश के लिए त्याग
- 43:52किया। कहने का सलीका है भाई, तरीका है
- 43:59दूसरे कौन सा बर्बाद कर रहे हैं जिन्होंने बच्चे पैदा किए।
- 44:04उन्हें आज आप कह रहे हो कि तीन करो तो उन्होंने कोई बुरा कर
- 44:09दिया। इनर्शिया आपके भीतर चले जाओ और ये
- 44:18दो किलोमीटर पांच किलोमीटर 10 किलोमीटर।
- 44:23ऐसा कोई मसला नहीं होता। संत के करीब एक बार जैसे कुएं के
- 44:30भीतर बाल्टी गई भर के आएँगे, पूरी तरह से भर लो, फिर उसको ले जाओ।
- 44:43फिर उसको धीरे धीरे प्यास लगने पर पीओ।
- 44:47जब तक तुम्हें अपने भीतर का कुंआ न दिख जाए तब तक जदा गदा जब लगे
- 44:54कि प्यास है, पानी नहीं है तो गुरु दर्शन कर लो।
- 45:03वैसे आपकी नॉलेज के लिए आपको बता दूँ आम तौर पे जो व्यक्ति
- 45:09इनर्शिया में उतर जाता। है।
- 45:12उसकी तो कोई सीमा नहीं होती है, लेकिन एक व्यक्ति।
- 45:18जो इनर्शिया के ऊपर के तर पर होता।
- 45:20है। जिसे मैं जंक्चर प्वाइंट कहता
- 45:23हूँ। अब यह जंक्चर प्वाइंट का नाम आपने
- 45:26शायद किसी शास्त्र में सुना नहीं होगा, पढ़ा भी नहीं होगा।
- 45:35इस जंक्चर प्वाइंट में जो व्यक्ति पहुँच जाता है।
- 45:40उसकी जो आभा मंडल होती है, वह करीब दो किलोमीटर तक होती है।
- 45:47अगर कोई व्यक्ति से जंक्चर पॉइंट को छू के भी प्राण त्याग गया तो
- 45:52दो किलोमीटर तक उसकी रेंज जाएगी। और जो व्यक्ति हृदयस्थल पे पहुँच
- 45:58गया जिसे हम अनाहत चक्र कह देते हैं वह करीब एक फरलांग, एक फरलांग
- 46:09यानी आठ फरलांग में एक मील होता है।
- 46:14ये सब बाबा की बताई बातें हैं। इनको ये मेरा अनुभव नहीं है,
- 46:22लेकिन बताया है उस महायोगी ने जो व्यक्ति हृदय स्तर पर पहुँच जाता
- 46:28है, एक फर्लांग की दूरी तक उसकी रेंज काम करती है।
- 46:35और जो उससे ऊपर जाता है वह शुद्धि पे पहुँच जाता है।
- 46:42वह ऐसा समझ लो कि करीब दो तीन किलोमीटर तक उसका काम होता।
- 46:51है। रेंज बढ़ती जाती है।
- 46:54जैसे जैसे तुम्हारे चक्र ऊपर जाएंगे, तुम इनेरसिया के भीतर
- 46:59जाओगे, वैसे वैसे तुम्हारी ब्रॉडकास्टिंग पावर बढ़ती जाएगी।
- 47:05अब ये हिसाब गणित की बात। है।
- 47:09लेकिन एक्यूरेट नहीं है। कुछ थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है।
- 47:14मेरा कहने का मतलब सिर्फ इतना है संत के दर्शन कर लो, वह ऐसे बैठा
- 47:20क्यों है? क्या मिल गया उसे व्हाट ही है
- 47:27अचीव्ड? उसने पा क्या लिया, क्यों ठहर
- 47:33गया? वो क्यों नहीं दौड़ता वो दुनिया
- 47:36के साथ क्यों नहीं? इसकी कोई उमंग क्यों नहीं?
- 47:42इसके भीतर कोई तरंग, लेकिन तुम? संत को देखकर उससे ये सबक नहीं
- 47:54सीख सकते। प्रत्यक्ष को प्रमाण की तरह तुम
- 47:58लेते नहीं तुम कुछ और और सोच लेते हो, नहीं तो मोज़ कर रहा है, कुछ
- 48:06करना नहीं पड़ता, कोई डरना नहीं पड़ता।
- 48:11नहीं, ऐसा नहीं इनर्शिया में पहुंची हुए व्यक्ति की पहचान वह
- 48:19ठहर जाएगा, उसकी अपनी कोई कामना नहीं बचेगी।
- 48:29क्यों? अगर कोई कामना होगी, वह ततक्षण
- 48:32पूरी हो जाएगी, लेकिन उसकी कामना होगी नहीं कोई अगर वह करुणा के
- 48:41अधीन होकर कोई कामना करेगा। दूसरों के हेतु वह जेन्चर प्वाइंट
- 48:48और इनर्शिया के बीच का प्वाइंट है।
- 48:51जहाँ जाकर वह जो कह देगा वह पूरा हो जाएगा।
- 48:55यह विराट उसे मान लेगा जिसे आप ब्राह्मण कहते हो।
- 49:01यह जेन्चर प्वाइंट। और इनर्शिया के भीतर का एक बीज का
- 49:06एक पॉइंट है। वहाँ जब व्यक्ति जाता है, संत
- 49:09पहुंचता है तो वहाँ जो बोल देगा, जो सोच लेगा वो मिल जाएगा।
- 49:14इसलिए हमने संतों के पास अपनी तकलीफों को कहना जारी रखा।
- 49:19क्यों राजा जाते हैं संतों के पास?
- 49:22जो बाहर एकांत कुटिया में बैठते हैं क्या मतलब था क्योंकि राजा
- 49:30जानता है प्रत्येक राजा का एक धार्मिक गुरु होता है।
- 49:40और प्रत्येक व्यक्ति का राजा का एक सिंहासन के पास बैठा हुआ
- 49:46धार्मिक व्यक्ति होता है। जब वह अतीत तकलीफ में होता है तो
- 49:50बाहर जाता है। एकांत वाले के पास बताता है कि
- 49:55राज्य में ये संकट हो गया। मेरे पे ये संकट आगया बताओ इसका
- 50:00क्या हाल है? वह व्यक्ति एक्यूरेट समाधान दे
- 50:05देगा आपको और अगर समाधान नहीं होने वाली चीज़ होगी तो वो परम से
- 50:11फरियाद कर देगा। बेराट से इसका ये काम ठीक कर दो।
- 50:18राजा योग्य होता है इसके क्योंकि राजा निष्कलंक होता है और
- 50:26निर्लिप्त होता है, निर्लोभी होता है।
- 50:30वह जो करता है, प्रजा के लिए करता है।
- 50:33इसीलिए वह जो बाहर बैठा संत है। वह फरियाद करेगा।
- 50:38उस विराट के आगे आपको ये बातें एक सोपन की तरह लगेंगी लगेंगी
- 50:45क्योंकि आप कभी गए नहीं उन चीजों पे लेकिन सुन लेना शायद कभी इस
- 50:52मुकाम पर कई बार। अचांचक भी व्यक्ति आ जाता है,
- 50:57अकसमात भी आ जाता है तो आपको कुछ शायद आपने सुना होगा तो समझ आ
- 51:02जाएगी। बात।
- 51:09जो अपने उस तत्व में पहुँच गया वह उसकी सारी अंकाक्षाएं।
- 51:19वासनाय तो छोड़ दो वासनाय तो बहुत पहले समाप्त हो जाती हैं,
- 51:23अंकांक्षाएं समाप्त हो जाती हैं, वह कुछ बनना नहीं चाहता, उससे कुछ
- 51:31छीना नहीं जा सकता, उसे कुछ दिया नहीं जा सकता।
- 51:37अब इन तीनों चीजों को आप अच्छी तरह से समझ लेना संत को तुम कुछ
- 51:43नहीं दे सकते क्योंकि संत सर्व व्यापक है।
- 51:50क्या दोगे? उसको सर्वज्ञ है और सर्वशक्तिमान
- 51:55है। नहीं उससे कुछ छीन सकते हो
- 51:59सर्वज्ञ से सर्वशक्तिमान से तो क्या छीनोगे कुछ नहीं छीन सकते जो
- 52:04छीनोगे वह वह है नहीं, शरीर छीन सकते हो ईसा का और क्या करोगे?
- 52:11मैसूर का शरीर छीन लोगे जो कहेगा अहम ब्रह्मस्म।
- 52:18संत का कुछ न तो छीना जाता है, न कुछ उसको दिया जाता है।
- 52:23संत जीवित है तो अपने कारण नहीं, वह अकारण जीवित है।
- 52:31वह उसकी इच्छा से जीवित है। जब तक वह चाहता है जीता है जब वह
- 52:39चाहता है कि न जिए तो नहीं जीता, वरना तो सभी को होता है तुम इच्छा
- 52:46करोगे मैं 1000 साल जीऊं नहीं जी पाओगे।
- 52:51हालांकि सभी की इच्छा होती है कि मैं मरू ना अमर हो जाऊं।
- 52:55लेकिन इससे बड़ी मूर्खता कोई है ही नहीं।
- 53:01इनेरतीय बीच में एक प्रश्न और आ गया।
- 53:11अगर आप कहते हैं कि बाबा ने आपसे कहा और जो सिद्धाए थे, उन्होंने
- 53:15कहा कि कमीन मत बनाना, लेकिन महावीर और बुद्ध तो अपने साथ करीब
- 53:2350,000 वृक्षों का कमीन साथ लेकर चलते हैं 50,000।
- 53:31और हमारे पास तो इतने बड़े कमीने हैं भी नहीं।
- 53:36बुद्ध उस जमाने में 2500 साल पहले 10,000 भिक्षुओं को 50,000
- 53:45भिक्षुओं को 30,000 भिक्षुओं की फौज हर उत्तर।
- 53:54और तुम कहते हो कमीन मत बनाना। इसका कारण समझ लो कोई व्यक्ति
- 54:02परमानेंट रूप से बुद्ध के साथ नहीं रहता, कुछ लोगों को छोड़कर।
- 54:09यही 102050 लोग पर मन उसके साथ थे।
- 54:14बाकी जीस गांव में जाते थे। वहाँ के गांव साथ जुड़ जाते थे।
- 54:18पीछे के लोग साथ आगे ऐसे 50,000 हो गए 30,000 हो गए 20,000 हो गए
- 54:25फिर अपने अपने गांव में वापस जाते थे।
- 54:27नए जुड़ते गए पुराने अपने घरों में लौटते गए परमानेंट तो उसके
- 54:32साथ यही 203050 लोग जाते थे, पक्के पक्के उसके पास लोग नहीं
- 54:38थे। आपको ये पता नहीं है इन बातों का
- 54:41पक्के पक्के लोग जो आनंद जैसे लोग ऐसे उसके पास थोड़ी थे।
- 54:48और उससे कोई कमी नहीं बनता। वो तो एक छोटी सी जमात होती है और
- 54:52वो भी जब ध्यान करते हैं तो बुध का आदेश है कि 25 गज की दूरी से
- 54:58क्षमा करना, 25 फिट की दूरी पे बैठना एक सन्यासी दूसरे सन्यासी
- 55:05से। कम से कम 25 फिट की दूरी पे
- 55:08बैठें। जब सन्यासी चले तो छह फुट की दूरी
- 55:13तक देखें। उसके अपने नियम हैं बुद्ध के जब
- 55:21वो ध्यान करें तो 25 फिट की दूरी तक बैठे।
- 55:25बुद्धि जानते हैं कि इनकी मार इतनी दूर तक है, उससे आगे ये बिगन
- 55:32नहीं डाल सकेंगे। दूसरे को इतने से लोग होते हैं
- 55:37203050 उनको वो बिखेर कर बिठा देते हैं।
- 55:43उसके साथ सिर्फ आनंद रहते हैं, जो यह वचन लेकर बना था कि मैं आपका
- 55:49भिक्षुक बन जाऊंगा, लेकिन श्रद्धा आपके संग्रहभ फिर अगर 50,000 लोग
- 55:59उसके पास आते हैं तो वह इसीलिए आते हैं।
- 56:03कि बैठो इस अनरसिया का रेंज अपियो जब वो सामूहिक रूप से बोलते हैं
- 56:13तो भीतर से आई हुई तरंगों को पिलाते हैं सबके ऊपर और फिर।
- 56:19जब पूरी तरह से बिखेर देते हैं, फिर उन्हें कहते हैं कि अब आप घर
- 56:22जाओ, पिछले गांव के वापस चले जाते हैं, अगले गांव के साथ जुड़ते
- 56:28जाते हैं। ऐसा होता था, पक्के पक्के नहीं
- 56:31होते थे। उनके पास कम्यून नहीं बनाते थे।
- 56:38बुद्ध नहीं बनाते थे बुद्ध के पास बस थोड़े से शिष्य थे, वह पक्के
- 56:44थे, अगला प्रश्न भी आ गया गुरु नानक देव तीर्थ किसे कहते हैं?
- 56:59इसी इनरसिया को वो तीर्थ कहते हैं, तीर्थनामा जेतेष्पावय
- 57:08बिनपाणी की नाई करें बिना उसकी इच्छा के उस तीर्थ में नहाया नहीं
- 57:16जाता। बाबा हर चीज़ उसकी मर्ज़ी पे गिरा
- 57:21देते हैं और बाबा गिराते हैं ऐसी बात नहीं है।
- 57:25सभी संत करते हैं आखिर में जो तत्व निकलता है वो यही निकलता है
- 57:33वो करता। है।
- 57:36सारी सजना का वो करता। है।
- 57:40सब वो ही करता है उसके अलावा और कुछ नहीं करते तुम अगर तुम अगर ये
- 57:46कहते हो कि मैं करता हूँ तो ये तुम्हारी मूडता।
- 57:50है। लाव्ज़े भी यही कहते हैं।
- 57:55गुरु नानक भी यही कहते हैं। कबीर भी यही कहते हैं।
- 57:58सभी संत यही कहते हैं, कृष्ण भी यही कहते हैं, तू कुछ नहीं करता।
- 58:07जब ये कहता कि मैं करता तब यह गर्भ यूं नहीं में पड़ता।
- 58:14तू करता तो कुछ है नहीं, तू कर सकता कुछ है नहीं मेरी इच्छा के
- 58:19बिना एक पत्ता पे नहीं हिलता करता तो मैं हूँ तुम इतना नहीं सोच
- 58:25सकते, जिसने इतनी सृजना बनाई, एक एक जगह बनाया।
- 58:36उसके तुम करता कैसे हो जाओगे, जिसने बनाया सर्जना का एक एक अंग
- 58:48तुम बुरी से बुरी चीज़ का एक अंश नहीं पैदा कर सकते इवन वन पार्टी
- 58:53का। एक एटम भी आप पैदा नहीं कर सकते।
- 58:57इतने समर्थ नहीं है तुम्हे फिर तुम करता कैसे बन गए?
- 59:03निर्माता ही करता होता है। सर्जन हारा ही चलाता है,
- 59:09करतापुर्ख है। जा दाता जा करता सिरठी को सा जय
- 59:18आप पे जाने सोई। वह इस सृष्टि का निर्माण करता है
- 59:27और वही इस सृष्टि को बनाता है। वही चलाता है।
- 59:32मुझे लोग कह देते हैं अक्सर कि बाबा आप जैसे लोग दुनिया को
- 59:41एक्रमान्यता में धकेल रहे हो, कुछ न करने की तरफ अग्रसर कर रहे हो।
- 59:50लेजीनेस फैला रहे हो परमात्मा के नाम पर उसे कर्ता बनाकर मैं तुम
- 1:00:01समझने में गलती कर गए तुम ये बताओ क्या सूरज घूमता नहीं है?
- 1:00:11क्या चंद्रबन अपनी कलाई नहीं बदलता?
- 1:00:16हवा चलती नहीं है क्या? बीज ऊगकर वृक्ष नहीं बनता है,
- 1:00:21क्या फल नहीं लगते, फूल नहीं लगते क्या?
- 1:00:24फूल में सुगंध नहीं आती? तो सारे कर्मों को कौन करता है?
- 1:00:36सूरज घूमता है, घूमता तो है ना? ले दी नस्मत ने बैठा और इतना तेजी
- 1:00:43से यह पृथ्वी इतनी तेजी से घूमती है 1000 किलोमीटर पर अवर।
- 1:00:511 घंटे में 1000 किलोमीटर कितनी तेज़ दौड़ती है?
- 1:00:56काम तो करती है ना लेकिन आपको हो के पृथ्वी करती है नहीं जा करता
- 1:01:06सर ठीक को सच जैसे ने बनाई। वो ही चलाता है।
- 1:01:15तुम्हारा भ्रम है, पृथ्वी को भी भ्रम हो सकता है कि मैं घूमती हूँ
- 1:01:22हो सकता है कोई बड़ी बात नहीं है तुम पृथ्वी के ऊपर रहने वाले
- 1:01:26पृथ्वी वासी लोग जब भ्रम खा जाते हो के हम करते हैं।
- 1:01:30तो किसी दिन पृथ्वी के भीतर भी यह भ्रम जाग सकता है कि मैं घूमती
- 1:01:34हूँ, जाग सकता है, कोई अनहोनी बात नहीं है और अगर वो कहेगी सत्य को
- 1:01:44जान लेगी कि मैं तो नहीं घूमती। मुझे कोई घमने वाला है तो क्या वह
- 1:01:50लजीनेस होगी? घूमती तो वो रहेंगी जो कहता है कि
- 1:01:57परमात्मा करता है, जो करता है क्या वो कोई काम नहीं करता?
- 1:02:04मैं अगर कहता हूँ। कि परमात्मा करता है तो क्या मैं
- 1:02:09कुछ नहीं करता? मैं बोलता भी हूँ, संतो के वचन भी
- 1:02:17तुम्हें सुनता हूँ, गीता के सलूक भी तुम्हें सुनता हूँ, तुम आते हो
- 1:02:23तुम्हें दीक्षा भी देता हूँ। तुम्हें सही रास्ता जो मैं जानता
- 1:02:28हूँ जो मैंने देखा, मैं तुम्हें बताता हूँ कि पड़ा ही रहता हूँ
- 1:02:35सारे दिन नहीं, ऐसा नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति कुछ न कुछ करता
- 1:02:42है। तुम सिर्फ काम इसी को कहते हो कि
- 1:02:47इंडस्ट्रीज चलाओ, वो ही काम है या कोई मैन्युफैक्चरिंग करो वो कम या
- 1:02:55एक नंबर के अमीर हो जाओ वो काम या मंगल पर जाने की सोचो वो काम?
- 1:03:02तुम्हारी बुद्धि से यह काम होता होगा लेकिन संत जब देख लेता है उन
- 1:03:09अदृश्य चाहतों को तो वह जानता है कि मैं करता तो हूँ मुझसे होता है
- 1:03:18कराता वो है। कर्म करता हूँ मैं करता नहीं हूँ
- 1:03:28अक्शन्स हैपन लेकिन मैं करता नहीं हूँ करता वो है करता वो है कभी
- 1:03:37संत। ऐसे तो फिर जो संत हैं बाबा नान
- 1:03:41के चल के जाते हैं मक्का मदीना, वो पड़े रहते हैं क्या घर में
- 1:03:47नहीं सभी कुछ न कुछ काम करते हैं कबीर चदरिया बनते हैं, काम करते
- 1:03:57हैं। छोटा मोटा काम सभी करते हैं, खेती
- 1:04:02करते हैं नानक सभी संत कुछ न कुछ छोटा मोटा काम करते हैं, वह लेज़ी
- 1:04:09नहीं हैं, लेकिन तुम्हें तकलीफ होती है तुम कामों से समझते हो के
- 1:04:15बैंकरों में पैसा जमा हो। खूब घनी सी जमीन ज्यादा बड़ी सी
- 1:04:20बिल्डिंग हूँ, अच्छे से करें, तुम इसे काम करते हो, नहीं उनके
- 1:04:26तृष्णा मर गए। उनकी अपेक्षाएं, उनकी वासनाएं
- 1:04:33खत्म हो गए। क्या पहनना है, क्या खाना है?
- 1:04:36कहाँ जाना है, कहाँ घूमना है? सब व्यर्थ होने लगा।
- 1:04:41उन्होंने जो मंजर देखा आनंद का, वहाँ जाकर कहीं से भी आनंद पाने
- 1:04:50की कामना समाप्त हो गई। इस शब्द को फिर सुन लेना।
- 1:04:57वो जब उस तल पर उतरे वो मंजर देखा वहाँ जाकर उन्होंने तो उसको देखने
- 1:05:04के बाद जो खुशी उन्हें मिली वो आज तक कभी जमाने में किसी भी वस्तु
- 1:05:10में पदार्थ में काम में पाई नहीं थी।
- 1:05:16तब से वो करते तो हैं लेकिन कराता परमात्मा है।
- 1:05:25अगर तुम खुद करते हो और तुम करते रहो तुम्हें कौन रोकता है संत
- 1:05:31तुम्हें ये नहीं कहता। संत तुम्हे एक सत्य बताता।
- 1:05:35है। संत तुम्हे सत्य से परिचित करवाता
- 1:05:39है के सत्य तो है ये कर्तापुरख एकुंकार सत नाम कर्तापुरख
- 1:05:50कर्तापुरख तो वह है। लेकिन अगर तुम करता बने रहना
- 1:05:54चाहते हो तो मज़े से बने रहो तुम कर सकते हो आखिरी शब्द मोरल रूप
- 1:06:02में कह दूँ, जो व्यक्ति अपने भीतर इनेरसिया के जितना करीब होता है।
- 1:06:11उसकी संकल्प की शक्ति उतनी बढ़ती जाती है और इनर्शिया के भीतर उस
- 1:06:18तत्व के भीतर उस केंद्र के भीतर प्रवेश करने से वह सर्वशक्तिमान
- 1:06:24सर्वसंकल्पवान हो जाता। है।
- 1:06:29तो बुद्धि से नीचे आकर हृदय स्थल और हृदय स्थल से नीचे आकर जैसे
- 1:06:35जैसे आप गहरे जाओगे, तैसे तैसे आपकी संकल्प की शक्ति बढ़ती
- 1:06:40जाएगी। संकल्प बुद्धि से कभी लिया नहीं
- 1:06:44जा सकता और बुद्धि के संकल्प सदा फैल होते हैं।
- 1:06:51संकल्प हमेशा तुम्हारी सत्ता से आते हैं।
- 1:06:57तुम अपने भीतर जैसे जैसे उतरोगे, वैसे ही ज्यादा संकल्प करने के
- 1:07:04योग्य हो जाओगे। वह संकल्प जिसमें तुम करोगे कुछ
- 1:07:11नहीं, सिर्फ संकल्प करोगे और काम हो जाएगा इसको व्याख्यात किया
- 1:07:18हमारे पुराने संतो ने कल्प वृक्ष की तरह कल्प वृक्ष क्या है?
- 1:07:26कल प्रवेशक्ष के नीचे बैठकर आप जो सोचोगे वो ततक्षण आ जाएगा जो खाना
- 1:07:33पीना करना जो कुछ तुम चाहोगे वो आ जाएगा।
- 1:07:38यह अवधारणा वहाँ से उठाई गई है इनरशिया से।
- 1:07:45तो शास्त्रों में संतो ने वचन तो लिखे लेकिन उन वचनों के अर्थ में
- 1:07:52आज समझ नहीं आता क्योंकि बीच का संपर्क सूत्र हो गया।
- 1:07:58लेकिन ऐसा नहीं है कि वो संपर्क सूत्र कभी आएगा नहीं।
- 1:08:02कभी कभी संपर्क सूत्र आते हैं और तुम्हें इनके मतलब समझाते हैं आगे
- 1:08:07पीछे तो यह मूर्ख बनाने वाले लोग ही तुम्हें मूर्ख बनाते।
- 1:08:16रहते हैं। जैसे जैसे भीतर जाओगे वैसे वैसे
- 1:08:26तुम जो सोचोगे वो ही हो जाएगा। बहुत से प्रश्न आते हैं मुझे
- 1:08:32लेकिन उनमें से 99% तो कबाड़ा होता।
- 1:08:37है। फिर बाबा आप सोच लो कि चीन खत्म
- 1:08:41हो जाए। फिर चीन में कोई बैठा व्यक्ति ये
- 1:08:45भी सोच सकता है कि हम खत्म हो जाए, ऐसी बातें क्यों सोचते हो?
- 1:08:52मूर्खानंद ही ऐसी बातें सोचा करते हैं।
- 1:08:56ये सब तुम्हारी बुद्धि के तर्क हैं।
- 1:08:58इनमें सत्य ज़रा भी नहीं है। ऐसी मूर्खता भरे प्रश्न मेरे पास
- 1:09:03बहुत आते हैं। मैं छोड़ देता हूँ वो मैं उठाता
- 1:09:07नहीं वो जवाब देने के योग्य नहीं होते।
- 1:09:11वो सिर्फ बुद्धि सी आती है और बुद्धि कुछ भी नहीं जानते बुद्धि
- 1:09:16से बड़ी मूर्ख। और कोई वस्तु नहीं है।
- 1:09:20धरती भाई इसलिए जब तुम मंदिर में जाते हो तो अपनी जूती उतार के
- 1:09:27जाते हो तो साथ में बुद्धि को भी रख जाया करो।
- 1:09:33वहाँ बुद्धि के साथ नहीं जाया जाता है।
- 1:09:37बुद्धि को रख जाया करो, जूतियों के पास और जब वापस आओ मंदिर से
- 1:09:45यही होना चाहिए लेकिन ऐसा तुम करते नहीं हो।
- 1:09:49तुम बुद्धि को साथ लेकर जाते हो जब बाहर जाओ संसार में तो जूतियां
- 1:09:54डालने के साथ साथ बुद्धि को भी साथ।
- 1:09:56सिर पे रख लिया करो कि चलो भाई तुम भी अब काम तुम्हारा शुरू हुआ
- 1:10:06प्रश्न पूछा था कहाँ बैठूं, कहीं मत बैठो किस को ढूंढ़ते फिरो के
- 1:10:16व्यक्ति की बहार की तमन्ना सदा रहती है।
- 1:10:19बस बैठुंग और मिल जाए तुम्हें तुम्हारे भीतर से मिलेगा, बाहर से
- 1:10:27इमदाद मिल सकती है तो सिर्फ जीवंत गुरु को खोजो, उसका सांनिध्य
- 1:10:36प्राप्त करो। यही भगवान कृष्ण ने कहा आचार्य
- 1:10:41उपरासनम आचार्य के संपर्क में थोड़ी देर पल दो पल थोड़ी देर
- 1:10:51बैठो, उसके दायरे में बैठो और फिर वापस घर आ जाओ।
- 1:11:00यह एनरसिया बड़ा संक्रामक है। संक्रामक समितियों तो तेजी से
- 1:11:08फैलता है। एक बार तुम संत के पास चले गए,
- 1:11:15जैसे रोग फैलता है तेजी से। वैसा ही ध्यान फैलेगा, तेजी से
- 1:11:22फैलेगा। संक्रामक रोग की तरह जैसे कोरोना
- 1:11:26फैलता था, सिर्फ टच कर दो, कोरोना जगे।
- 1:11:33आज तो उदाहरण ही आनी शुरू हो गई हमारे पास।
- 1:11:37पहले बीमारियां थी प्लुर सी थी ट्यूबरक्लोसिस थी, हैजा था ऐसे
- 1:11:44संक्रामक वैसे ही ये संक्रामक होता है, इनर्शिया संक्रामक है,
- 1:11:54दूर दूर तक इसका फैलाव होता है। तुम्हें पता नहीं चलता तो इन
- 1:12:01मज़ारों को मत ढूंढ़ो, कोई पता नहीं कौन क्या था, कौन क्या नहीं
- 1:12:06था, मगज खपाई मत करो, संत के क्रीब बैठ जाओ, क्रीब का मतलब यह
- 1:12:13नहीं कि उसके पास ही जाकर बैठ जाओ नहीं।
- 1:12:17उसके दायरे में बैठ जाओ। अगर उसके पास स्थान है तो उसके
- 1:12:22दायरे में बैठ जाओ। अब यहाँ आने को तो सभी शीर्षक
- 1:12:27तैयार हैं, लेकिन तुम भी जानते हो मजबूरी है हमारे पास स्थान कुछ
- 1:12:34लोगों का है। दो चार लोग यहाँ पर रह सकते हैं।
- 1:12:39ज्यादा लोग नहीं रह सकते पर हम लोगों से ऐसा काम नहीं लेते कि
- 1:12:44तुम यहाँ आओ, प्याज काटो, चटनी बनाओ, रोगियों बनाओ, संतों को
- 1:12:51खिलाओ। भक्तों को खलाओ ये काम हम नहीं
- 1:12:56करते। हम लोगों से काम नहीं लेते, जो
- 1:12:59यहाँ आते हैं उनको सिर्फ दीक्षा देकर भेज देते हैं, संपर्क देकर
- 1:13:05भेज देते हैं कि जब अपने घर अब तुम जाकर वहाँ पर अभ्यास करो,
- 1:13:11यहाँ लंगर पकाने की कोई जरूरत नहीं है।
- 1:13:15लेकिन कुछ जगह पे ऐसा होता है क्या करें?
- 1:13:18भीड़ ज्यादा है, खिलाना पिलाना भी पड़ेगा तो स्वयंसेवक बन जाते हैं
- 1:13:25उनको दिया जाता है कि यह पुण्य है, पुण्य पुण्य कुछ नहीं होता।
- 1:13:29ये धर्म पार्टियों की तरह है। जैसे पार्टियों में स्वयंसेवक
- 1:13:35पार्टियों को चलाते हैं, वैसे ही इन धर्मों को स्वयंसेवक कोई प्याज
- 1:13:40चिरेगा, कोई टमाटर चिरेगा, कोई चटनी बनाएगा, कोई छोंक लगाएगा,
- 1:13:46कोई रोटी बेलेगा, कोई पेड़ा बनाएगा।
- 1:13:51ये स्वयंसेवक है जब पार्टी बाजी में चलता है।
- 1:13:56संतों के घर ऐसा कुछ नहीं होता। संत आपको शक्ति देता है,
- 1:14:02मार्गदर्शन देता है और आपको कहता है कि आपको भीतर से मिलेगा।
- 1:14:11बार बार बदोमत मेरे साथ वह आपको मुक्त रखना चाहता है मुक्त करना
- 1:14:19चाहता है अपने घर जाओ जीसको मिला जीसको भी मिला कोई व्यक्ति न दो
- 1:14:28जीसको भीतर से न मिला हो बाहर से मिलाओ।
- 1:14:31कोई एक व्यक्ति नहीं मिला, बाहर से किसी को नहीं मिला।
- 1:14:37जीसको मिला, अपने भीतर से मिला और जीसको मिलेगा उसको अपने भीतर से
- 1:14:43मिलेगा। मेरी ये बात याद रखना, यहाँ आना।
- 1:14:51यहाँ आकर दीक्षा लेकर चले जाना, इसलिए मैं कहता हूँ 7 दिन अकेले
- 1:14:57कमरे में बैठ जाना बहुत बार काम है, क्योंकि उस वक्त उस शक्ति का
- 1:15:05प्रवाह बड़ा तेज होता है जितनी पीलोगे वह आपके भीतर अभिना अंग बन
- 1:15:10जाएगा। और उसके बाद थोड़ा थोड़ा संसार
- 1:15:16में भी काम करो, संसार में भी बने रहो और अपने भीतर भी जाते रहो।
- 1:15:23ये दोहरी यात्रा है। संसार में कर्तव्य निर्वहन करते
- 1:15:27रहो। और अपने भीतर अपना लक्ष्य
- 1:15:32निर्धारण करते रहो। ये दोनों काम बराबर चलेंगे।
- 1:15:38ये आलस की कोई बात नहीं है। संत कभी आलस्य नहीं सीखाता लेजी
- 1:15:44नस निः सीखाता संत तुम्हें सही रास्ता बताता है।
- 1:15:49मार्गदर्शन वो कभी ना तो अपने से ही चिपकाना चाहेगा के यहाँ भी
- 1:15:54पांच ही चौकियां भर दो, सात चौकियां भर दो।
- 1:15:56ऐसा कुछ नहीं होता क्योंकि लोभ नहीं है, आलोभ ही है, कोई वासना
- 1:16:03नहीं है। कोई इसकी इच्छा नहीं है।
- 1:16:08उसकी जिंदगी से तुम अच्छी तरह से सबक ले सकते हो।
- 1:16:17अभी इनर्शिया की बहुत बातें बाकी रह गई।
- 1:16:23श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:16:41गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:16:50वासुदेववा पितुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:17:02पितुमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव हे नाथ नारायण?
- 1:17:20वासुदेवव श्रीकृष्णवण हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:17:41श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वसुदेव।
- 1:17:58श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:18:18धन्यवाद।