Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Aug 25 - चांदी के सिक्के का रहस्य! गायत्री का 24वाँ शब्द! ओशो के संन्यासी! सिक्का लाखों साल तक..
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- 0:03बाबाजी शारदापुर नवतोष सिंह कैलिफोर्निया।
- 0:21बाबा आपने जो चांदी का सिक्का मंगाया, चांदी का ही सिक्का
- 0:29मंगाया क्या हम सोने का सिक्का लेके आ सकते हैं?
- 0:39नहीं? बहुत सी बातें जिनका अर्थ पता
- 0:52होता है उनके लिए सार्थक होती है। उजीन को अर्थ नहीं पता होता है,
- 1:04उनके लिए सार्थक तो होती है, लेकिन वो तुम्हे भ्रमों में डाल
- 1:12देते है ये बाबा नानक ने कहा ज्योतिषी नहीं होता।
- 1:26जब सत्य को मान्यताओं के आधार दे दिए जाते हैं तो सत्य विकृत हो
- 1:32जाता है, फिर फैलती हैं दुष्यमान्यताएँ और दुष्मान्यताएँ।
- 1:44आपके लिए हानिकारक है कब्रों को पूजना मड़ियों पर जाकर माथा टेकना
- 1:58मन्नत मांगना। कभी सार्थक हुआ करता था अभी
- 2:10सार्थक काम तो करता है, लेकिन तुम्हें उसके अर्थ नहीं पता है।
- 2:20भगवान कृष्ण राम। यह भी एस्ट्रोलॉजी के आधार पर
- 2:25वृतरण कर लेते हैं। लेकिन बाबा ने किस कारण से कहा,
- 2:34कारण था कि सत्यभ्रम में तब्दील हो गया।
- 2:40सत्य भ्रम में तब्दील हो गया जैसे हम कहें पानी का फॉर्मूला एच टू
- 2:46ओह और प्यास लगने पर बोर्ड पे लिखा हुआ एच टू ओह को राम जीवा से
- 2:55पीने लग जाएं कि प्यास बजा देगा ये दुश्मन नेताएं होते हैं।
- 3:10मैंने कहानी सुनाई थी अब से एक जोशी सड़क के किनारे बैठा रहता।
- 3:18हमारे यहाँ डाकखाना था डाकखाने के सामने पोस्ट ऑफिस के सामने।
- 3:26वह एक नाम रख लेता, कोई भी रख लो 1 दिन मैं जा रहा था तो उसने आवाज
- 3:39लगाई, अरे भाई लाल सिंह बाद सुन। तेरे भविष्य को मैं जानता हूँ,
- 3:48आजा मेरे से पूछ ले और सभी को कह देता।
- 3:58लाल सिंह भी आ गया। बात को समझी नहीं।
- 4:09और वह जब गया तो उसकी जेब उठा लेती लूट लिया उसने एक मान्यता के
- 4:18आधार पे मैं दूर दरार से आया। इसने मेरा नाम कैसे जान लिया?
- 4:28वह गंगसर जैतू से था। जब सत्य मान्यताओं में तब्दील हो
- 4:40जाते हैं, तब भ्रम बन जाते हैं और भ्रम आपके ऊपर बोझ।
- 4:49जब भी कोई असली संत इस धरती पर आता है, वह तुम्हें सत्य बतलाएगा
- 4:57ब्रह्मों का खंडन करेगा। नवतोष सिंह आपने पूछा कि मैंने
- 5:09चांदी का सिक्का ही कम कराया क्योंकि वह जो शक्ति इन्सर्ट करनी
- 5:18मैंने। चांदी के सिवा किसी धातु में वो
- 5:22इन्सट नहीं होते इसलिए आपने देखा होगा कि दीपावली पूजन पर हम चांदी
- 5:39के सिक्के रख लेते हैं, उनकी पूजा करते हैं।
- 5:45असल में यह क्या था? कभी था सत्य, आज यह भ्रम हो गया
- 5:57कभी किसी संत पुरुष ने ऐसी पद्धति जांडी हो गई।
- 6:04और वह प्रवाहित होता है। सिर्फ चांदी से तो चांदी का
- 6:11सिक्का उसने मांगा लिया वह किरणें उसमें छोड़ दी होंगी।
- 6:21अब वो सता के लिए रहेंगी उसमें। ऐसा ही खबर थे।
- 6:30समाधि थी। इनमें संत पुरुष को क्यों तोपेन
- 6:37किया जाता है? हिंदुओं में भी संत पुरुषों को
- 6:41तोपेन किया जाता है। जबकि जलन का महत्त्व है।
- 6:48निश्चय ही आपकी खोजी बुद्धि कोई और उत्तर विक हो सकती है, लेकिन
- 6:58सही अर्था की इसने किसी वक्त। अगस्त्य की भांति वो कहानी पर
- 7:04सुनाऊंगा, आपको समुद्र को ही पी लिया था, अब ये बातें कुछ है ऐसी
- 7:12क्या? आज तो मूड मान्यता बन गई और जवाब
- 7:19देने वाले आचार्य बहुत पैदा हो गए।
- 7:24पता किसी को भी नहीं है। एक व्यक्ति समुद्र को पी कैसे
- 7:31सकता है? इस तर्क के आधार पर शास्त्र का
- 7:36खंडन कर दिया जाएगा। लेकिन।
- 7:40यह सत्य है वह उस वेला में इतने आनंद की रस धार को पी लेता है कि
- 7:52युगों युगंतर तक वह निष्कर्षित होती रहती है।
- 8:02जैसे मैंने कुंभ की वेला पे बताया आपको ये चार स्थान है स्थित जहाँ
- 8:08पर अलग अलग वक्त पर ऋषियों ने उस परम को विराट को अनंत को विशाल को
- 8:18अखंड को पीया था। अब यहाँ से कभी भी वाइब्रेशन जब
- 8:33सत्यब्रह में तो डील हो जाता है और सत्य के अर्थ हो जाते हैं।
- 8:41तो तुम्हारे दिमाग पर बोझ बन जाते हैं और उन बोझों को तोड़ने के लिए
- 8:48संत अवतरित होते हैं। सद्गुरु नानक के जनमया मिट्टी
- 8:58तोंद जग चा न होया। प्रकट होते हैं।
- 9:08दुंद बैठ जाती है संतों से लाभ उठा लेना, क्रिटिसाइज़ मत करना
- 9:15संत कहते हैं, आपके काम की बात कहते हैं।
- 9:20पहले शांति की परीक्षा लेना लोग ये लालची तो नहीं है, पाखंडी तो
- 9:25नहीं है, किसी हेतु के लिए तो नहीं बोल रहा है और परीक्षा लेने
- 9:32के बाद जब वह संपूर्ण परीक्षाओं में खरा उतरे।
- 9:37तो समझो उसके भीतर रहस्य भरा पड़ा है।
- 9:42फिर ये रहस्य ही है जो आपकी नैया को पार करेगा।
- 9:49डोपामिन सेरेटोनिन के हैप्पी हार्मोन्स आपकी नैया को पार नहीं
- 9:53करेंगे। आनंद की वो बूंद आपकी नैया को पार
- 10:02लगाती है जिससे श्रद्धा उत्पन्न होगी जिससे विश्वास उत्पन्न होगा।
- 10:08जिससे कहा तुलसी ने श्रद्धा, विश्वास, रूप न या व्यायाम भी ना
- 10:12ना प्रश्नते। उसके वे नहीं दर्शन होते।
- 10:16उसके मुझे लोग पूछ लेते है, बाबा तुलसी की बड़ी बरतस न करता, पर
- 10:28उन्हीं के शब्द भी उठा लेते है तो मैं कहता हूँ शब्द उठाने योग्य
- 10:31है। लेकिन वह प्रबुद्ध नहीं था।
- 10:39इधर से उधर से आचारों की भांति उसने इकट्ठा कर ली थी।
- 10:44कहीं की हिट, कहीं करोड़ा, भानुमति ने कुनबा जड़ा।
- 10:50कुछ लोग पूछ लेते हैं जो के 1000 जो जन पर भानु फेल होता ही।
- 10:58कैसे पता चला उन्हें युग सहस्त्र योजना परभान के सूर्य पृथ्वी से
- 11:07इतनी दूरी पर बैठा है 15,60,00,000।
- 11:22उस वक्त तुलसी को कैसे पता चल गया?
- 11:25दिव्य दृष्टि थी, उस वक्त भी गणितज्ञ थे, उस वक्त भी पहुंचे
- 11:33व्यक्ति थे जैसे आज मेरे चैन से कैन्टेंट चोरी हो जाता है।
- 11:40मैं साफ देख रहा हूँ आपको बताता हूँ।
- 11:43इसको बिगाड़ तिगाड़ के पेश करके उस वक्त संत थे जो जानते थे,
- 11:52जिन्होंने एस्टरल ट्रैवलिंग किया और ऐसे व्यक्ति के पास संत आते
- 11:57जाते रहते हैं। जैसे रामकृष्णा के पास तोतापुरी आ
- 12:00गई तो किसी ने बता दिया होगा नहीं।
- 12:06जो ताहि मधुर फल जानू जोग्य सहस्त्र योजना परवानु तुलसीदास की
- 12:13खुद की खोज नहीं है ही वास नॉट इन्वेंटर, वह अन्वेषक नहीं था।
- 12:19कोई अन्वेषकों से बदला गया था, वही चीज़ उसने मांड दी।
- 12:25बस तुम्हारा कल्याण इसलिए कर गया हूँ कि लोगों से इकट्ठा किया हुआ
- 12:30सामान एकाग्र करके एक ग्रंथ बन गया।
- 12:38इसलिए शब्द उठाने पड़ते हैं। यह पद्धर रूप में है।
- 12:42इनका भी हम लाभ उठाएंगे, इनकी भरतशना भी करेंगे क्योंकि
- 12:49प्रबुद्ध नहीं है। इनकी शिलागा भी करेंगे, क्योंकि
- 12:53प्रबुद्ध व्यक्तियों के शब्द बोले हैं।
- 12:58समझा के प्रबुद्ध व्यक्तियों के शब्द बोले हैं इसलिए इनकी शिला कर
- 13:06नहीं बनती और व्रत सना क्यों कर रहे हैं?
- 13:11क्योंकि खुद यह प्रबुद्ध है? चांदी का धातु है जो हम विशेष तरह
- 13:26की तरंगें इसमें प्रवाहित करते हैं।
- 13:28बस हम टच करेंगे सर किसी विशेष पद्धति से और सदा सदा के लिए वो
- 13:38सिक्का। अमर हो जाएगा सदा सदा के लिए वो
- 13:44सिक्का फैलाव करता रहेगा। सुरक्षा कवच बन के ये लक्ष्मी
- 13:51पूजन में हम पुरातन बुजुर्गों के दिए हुए सिक्के क्यों रखते हैं?
- 13:57इसका यही मात्र कारण था और सिक्का कहीं दूर किसी पीढ़ी से चला आ रहा
- 14:06है और बुजुर्गों ने बुजुर्गों से जैसे सत्य।
- 14:14शृत्तियों में आते हैं, समृतियों में फीड हो जाते हैं, वैसे कभी
- 14:20चला होगा किसी पीढ़ी में किसी संत ने किसी को यह सिक्का सौंप दिया
- 14:24होगा। इसको संभाल के रखना जहाँ यह होगा
- 14:29वहाँ शुभ ही शुभ होगा। मंगल कार्य होगा।
- 14:37वह सिक्का एकाधरोहर के रूप में चलता रहता है।
- 14:40हम उसको खरचते नहीं हैं। बड़े बूढ़े बड़े सयाने होते थे,
- 14:47कहते थे तुम्हारे पर कितने भी कष्ट तकलीफ आ जाए।
- 14:50तुमने इस सिक्के को नहीं बेचना है पैसे इस सिक्के के रहते हुए ऐसा
- 15:05होयेगा नहीं। इसलिए मैंने चांदी का सिक्का
- 15:18मंगवाया था। यह वीडियो की एक कटिंग हमारे चैनल
- 15:24कंट्रोलर ने काट ली। नौ तारीख को एडिट कर रहा 11 तारीख
- 15:31को हमने लोग बुलाये थे। अफरा तफरी फैल जाएगी।
- 15:38वैसे भी जन्मदिन के कारण रशिंग बहुत होगी।
- 15:43संभालने वाले हम हमारे पास गंदी के लोग हैं।
- 15:50ज्यादा सेबक हम रखते भी नहीं सब्जी बनाने के लिए।
- 15:53पूरी दिलाने के लिए, रोटी बेलने के लिए यहाँ डेरों में सेवक आते
- 16:00हैं, कामगार नहीं आते, ये समझ लेना बात डेरों में सेवक नहीं
- 16:10आते, कामगार आते हैं। नाम जपते रहेंगे, रोटी बेलते
- 16:14रहेंगे, फर्क कुछ नहीं पड़ेगा, जो आज भ्रम बन गए हैं।
- 16:21कल वो सत्य थे और उसे सिक्के के पीछे का राज़ वो जानते थे।
- 16:27जैसे ही किसी ने सिक्का दिया, अपनी आने वाली पीढ़ी को बदला गया।
- 16:33ये संभलकर खाना इसमें पड़ा रहस्य छिपा पड़ा है इसलिए सही संत कभी
- 16:43सोना नहीं पहनेगा। उसकी सभी रिंग्स चांदी में हूँ।
- 16:55मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा अब सोने में मुरा लिया करो, सोना हम
- 16:58लेके आते तो मैं हँस देता हूँ, ये सोने में चलेगा कनक कनक तेसो गुना
- 17:10मादकता अधिकाएं। ओह खाये बहुराय है वो पाये बहुराय
- 17:18एक सोना हम पहनते हैं तुम्हें पता नहीं होता जाने अनजाने तुम्हें
- 17:24अहंकार आ जाता है तुम सोने की चीज़ को दिखाने को।
- 17:31बाहर निकाल लेते देखो ये नई ज़ंजीर है मेरे पति ने गिफ्ट की
- 17:39थी सोने की एक अंगूठी बनाई थी किसी झोपड़ी वाले ने।
- 17:54कहीं से माल हाथ लग गया होगा तो उसके पति देव ने खुश होकर सोने की
- 18:04एक अंगूठी बना दी अपनी पत्नी के लिए।
- 18:13अब वो बड़ी कोशिश करती समझाने की सीधा बता नहीं सकती कि मैंने सोने
- 18:18की अंगूठी पहन रखी जब बहुत दिन बीत गए और किसी ने पूछा नहीं,
- 18:27स्त्रियाँ तो ऐसी ही होती हैं, पूछ लेती हूँ यह साड़ी का रंग
- 18:31बड़ा मैच कर रहा है। कहाँ से लेके आया?
- 18:34किसी चीज़ को मशहूर करना, उन्हें तो स्त्रियों के संगत पंगत बुला
- 18:39लेना, बस ये तबका ही ऐसा है। चुटकलों में सबसे फर्स्ट जो चुटकल
- 18:49आया वो ये था। एक बच्चा बोला, मैंने देखा चार
- 18:53स्त्रियाँ बैठी थी और चारों चौप थी और इस चुटकुले को फर्स्ट दे
- 18:58दिया गया। स्त्री चुप नहीं बैठ सकता, पुरुष
- 19:07बोलता है तो किसी काम से बोलता है।
- 19:13तो उसने बहुत कोशिश की, लेकिन कोई उसकी सोने की अंगूठी को जाने ही
- 19:21नहीं देखा ही नहीं तो तंग आकर उसने ह्रेसमेंट में झोंपड़ी को आग
- 19:27लगा दिया। अब आग ले ही देख के तो सब भागे
- 19:33जिसके पास जो था पात्र पानी भर के लेके आये आग तो बुझा दी लेकिन
- 19:47औरतों ने पूछा ये आग लगी कैसे? जिसका घर सूखा था।
- 19:57वे औरत कहने लगी देखो मैं तो इस बच्चे को सुला रही थी इसमें डाली
- 20:02हुई थी। येस?
- 20:08अचानक आग लगी, मुझको भी नहीं पता मैंने बा मुश्किल बच्चे को बचाया
- 20:16अब देखने वाले को क्या मत की नजर रखते है?
- 20:21अब स्त्रियों ने सभी नहीं देख लिया।
- 20:22अरे इसमें तो गुट्ठी पहन रखी सोने की।
- 20:30तो सखी सहेली पूछने लगी यह सोने की गोठी तुमने कब बनवाई?
- 20:38बोली अगर तुम पहले देख लेती तो झोंपड़ा तो ना फूंकती मैं किसी का
- 20:48ना देखना तो झोंपड़े को फुकवा गया।
- 20:54तुम पहले ही देख लेती तो झोंपड़ा के फूंकते स्त्री दिखावा करना
- 21:01चाहती है स्त्री मन दिखावा करना चाहता है, भीतर कुछ हो ना हो।
- 21:12दिखना चाहिए। इसलिए देखा सभी मेकअप का सामान
- 21:20स्त्रियाँ लेके जाते हैं। कभी पुरुष गया है, कभी पुरुष कभी
- 21:28मेकअप का सामान लेने गया। वो ही जाएगा जो जोरों का गुलाम
- 21:36होगा। सब सौंदर्य प्रसाधन स्त्री के लिए
- 21:43बनाए गए क्योंकि स्त्री दिखावा करते हैं।
- 21:48यही पूर्व और पश्चिम के साथ घटा पूर्व अपने भीतर उतर गया और जो
- 21:58भीतर उतर गया वो दिखावा निकरता ना बेजयंती माला, ना दाढ़ी को पीली
- 22:03काली करेगा। ना गालों पे लाली लगाएगा ना तरह
- 22:10तरह के वस्त्र आभूषण पहनेगा। मैं इनको देखते ही समझ जाता हूँ
- 22:23और एक व्यक्ति ने तो मेरी बातें सुनकर फटा कुर्ता पजामा पहन लिया।
- 22:30हम तो कोई ब्रेकअप नहीं करते है ना, लेकिन लोग तो उसके पास भी
- 22:33नहीं आए। पहले पहले आए लेकिन देख रखे है तो
- 22:36मोर का है फिर अब बचा रहा, पता नहीं कहाँ चला गया कोई चैनल चला
- 22:44रहा है कि नहीं चला रहा है। पति सर्वत्र वर्जे है।
- 22:52किसी भी चीज़ की अति करोगे तो दुख पाओगे, लोग बैठ सकते हैं ये कहने
- 23:00से कि मेरी शादी शप नहीं। जो दिखावा कर रहा है समझ लेना
- 23:12भीतर थोत चना बाजी गाना ज्यादा बेचता है वो थोत होती है बेहतर।
- 23:28मैं आपको सत्य बातें बता रहा हूँ या मढ़ी मशीनों को बुझना क्यों
- 23:38प्रबुद्ध लोगों ने मना कर दिया। सती प्रथा कभी ठीक थी, कभी एकाध
- 23:45से स्त्री हुई। लेकिन उसका कारण तो कुछ और था।
- 23:51कभी कोई स्त्री इतने प्रेम में डूब गई होगी जैसे अर्ध नारिक और
- 24:04उसका पति चल बरसा होगा। वह कोई एक व्यक्ति होता है।
- 24:15एक स्त्री प्यार में इतना डूबी के खाक हो गया जब उसका पति मरा।
- 24:26तेरे बिना भी क्या जीना तेरे बिना भी क्या जीना?
- 24:37इतने प्यार में अब तू चला गया मैं जीके अभी क्या करूँ क्या?
- 24:45वह साथ ही सती हो गई होगी। वह प्रेम की अनन्य धारा है।
- 24:55यह एक भावना है, भीतर से उठी है, लेकिन जब सत्य को कर्मकांडों में
- 25:03डाल लिया जाता है। जिसका पति मर जाए, उसे सती होना
- 25:07पड़ेगा तो विकृतियाँ आती हैं इनको पाखंडवाद कहते हैं वह कभी कोई
- 25:15किसी के प्रेम में आदम भी जा सकता है और सती नहीं तो सता हो जाएगा।
- 25:26जैसे राजा आज हो गए हिंदुमती के जाने का गम नहीं बर्दाश्त कर सके।
- 25:31भगवान राम के दादा हिंदुमती से इतना प्यार था की हिंदुमती 1 दिन।
- 25:43मर गए और राजा आज उसका बिछोड़ा सैन्य कर सके।
- 25:50कुछ ही दिनों में उसके वयोग में प्राण त्यागती है।
- 25:54सत्ता भी हो सकता है, शक्ति भी हो सकती है लेकिन ये दीज़ आर
- 25:57एक्सेप्शनल केसेस तुम इनको नियम मत मान लेना विकृसियां तभी पैदा
- 26:08होती हैं जब तुम इनको नियम मान लेते हो।
- 26:13अब आज मरियो मजारों को पूजने वाले ईसाई धर्म में मुसलमान धर्म में
- 26:19सभी को दफन किया जाता है। क्या वो सभी एनलाइटन होते हैं?
- 26:22नहीं विकृतियाँ आ गई ना? अब तुम कैसे पहचान करोगी?
- 26:33शांति का सिक्का कभी किसी ने किया होगा।
- 26:377000 साल पहले ही इस गायत्री को टांग तोड़ दी गई।
- 26:41इसके 7000 वर्ष के बाद बाबा ने यह गायत्री का एक शब्द मुझे दिया
- 26:49उच्चारण करने का ढंक बताया। तू ज़रा सोचिए इसकी कीमत क्या
- 26:56होगी? पहले तू जीसको मिला, वो कितना
- 27:02रिसेप्टर होगा, जिसके ऊपर इतनी महत शक्ति बिखरी?
- 27:167000 साल के बाद वो अक्षर बताया गया और गुणगनाहट बताई गई और उसके
- 27:25बाद इसका तरीका। जब किसी ने मुझसे पूछा कि घर के
- 27:31अंदर तो चलो हम सेफ हो गए बाबा? लेकिन हम तो घर से बाहर भी जाना
- 27:36होता है, आजकल तो स्त्रियां वे काम पे जाती हैं, फिर क्या करें?
- 27:45तो बाबा ने कहा फिर ऐसा करो फिर सिक्का तो पहला वीडियो मैंने डाला
- 27:51कि गायत्री को चलता रह। जिन्हें ज्यादा मीठा चाहिए,
- 28:00ज्यादा चीनी को डाल लो, इन्हें कम मीठा चाहिए।
- 28:04कम चीनी डालो जितनी मात्रा में तुम चलाओगे चलाना लेकिन फिर घर के
- 28:14भीतर तो हम ठीक। बहुत से लोग आज भी कहते हैं हम जब
- 28:19घर में प्रविष्ट होते हैं तो संसार के झूठे झगड़े, बास, नफा,
- 28:27नुकसान सब भूल जाते हैं। गायत्री का प्रभाव दीवारें पी
- 28:31गईं। तो तुम अलग ही डाइमेंशन में
- 28:36प्रवेश कर गए। बाहर से थका मांदा आता है व्यक्ति
- 28:40काम धाम से कोई बॉस ने डांट डबटी लगा दी, फिर किसी ने जवाब दे
- 28:46दिया। नौकरी से कोई प्रताड़ित कर दिया,
- 28:51कोई कमेंट कस दिया। तुम दुखी होते हो।
- 28:54घर में आते ही वातावरण बदल गया। न्यू डायमेंशन में प्रवेश कर गए।
- 29:00धीरे धीरे आपकी सब चिंताएं लुप्त हो जाएंगे, लेकिन बाहर हम क्या
- 29:05करें? बाबा घर में तो हो गया।
- 29:11तो फिर बाबा ने ये बद्धति बताई कि चांदी के सिक्के में आप अपनी
- 29:17शक्ति को प्रवासित कर देना और ये सिक्का लाखों लाखों सालों तक
- 29:25संभाल के रखा ना पश्तों के लिए। ये वो सिक्का था मेरे नाना मेरी
- 29:34माता को एक सिक्का दे कर गए थे। ऐसा ही जान देगा।
- 29:40एक बार बाबा मुझे कहने लगे अपनी माता से और कुछ मत मांगो माता से
- 29:44कह दो बस मुझे अलग करना है तो चांदी का सिक्का दे तो पहचान मैं
- 29:49लूँगा। पहचान तो उसकी बिलकुल अलग ही होती
- 29:59लेकिन माँ ने वो सिक्का देने से इंकार कर दिया।
- 30:04बात उस दिन समझाई जब इसका राज़ खुला।
- 30:09पीढ़ी दर पीढ़ी कैसे ये सिक्का कमाया क्या?
- 30:12और आज भी लक्ष्मी पूजन में हम इस सिक्के को रखते हैं।
- 30:20मैं एक आध प्रेमी के घर कभी कभी प्रेम से भला लेता हूँ और लक्ष्मी
- 30:24पूजन करता तो मैं देखता हूँ। उसमें एक सिक्का होता है।
- 30:30वह जो बुजुर्गों से आया हुआ है, वह सिक्का कीमती है।
- 30:36वह किसी संत ने अपनी धारा इसमें बिखेरी है।
- 30:40मुझे पता चल जाता है लेकिन मैं चुपचाप चलाता।
- 30:51अब किसी दिन ये चीज़ पाखंड हो जाएगा।
- 30:54किसी दिन इसकी मान्यता खत्म हो जाएगी।
- 30:56कभी चांदियों में भी ऐसा कुछ होता है, भाग्य भी तो कोई चीज़ होती
- 31:00है, बहुत मन तर्क देता है और वह परमात्मा तर्कतीत है तर्क से पार
- 31:08है। इसलिए मैंने तुम्हें कह रहस्य तो
- 31:12बोल दूंगा। प्रश्न मत पूछना कुछ श्रद्धा
- 31:18विश्वास हो, यहाँ आकर श्रद्धा काम करे तुमने पेड़ गन्ने हैं या आम
- 31:25खाने हैं, आम खाने हैं तो श्रद्धा।
- 31:30कश मार्क्स कहता है परमात्मा नहीं है, मैं कहता हूँ परमात्मा है।
- 31:39कबीर कहते हैं स्टेम्पल पर मैं कहता हूँ आँखों देख न न के छोड़
- 31:46देते हैं सब कुछ। खेत खलिहान सब छोड़ देते हैं,
- 31:54उदासियों भी निकल जाते हैं। ओके, राज़ जानते हैं राज़ उनमें
- 32:04उतर गया। नदियां के किनारे बैठे देखिये
- 32:12बड़े मज़े घटना दोनों बैठे हैं। मरदाना भी और नानक भी नानक के
- 32:19भीतर उतर जाता है। वो मरदाना के भीतर नहीं उतरता।
- 32:25यह पात्र के भीतर उतरता है। इसलिए मैंने एक चांदी का सिक्का
- 32:38कहा। इसको मेरे पास ले आना लेकिन तभी
- 32:47ऐसी घटना घट गई। बाबा कह गए तो फिर कुछ लोगों ने
- 32:55कहा मेरे परिवार जन ने और इस हिस्से को काट दो, ये बाद में
- 33:03कहीं प्रकाशित कर देंगे तो हमने वो हिस्सा बाद में प्रकाशित किया।
- 33:13यद्यपि हो एक प्रवचन का हिस्सा था मुझे पहले से बता दिया गया था
- 33:23जन्मदिन से बहुत पहले है जन्मदिन पर।
- 33:28लोग आएँगे, उनसे कहना एक सिक्का लिया।
- 33:32ये बाहर आपको सुरक्षित रखेगा। यह ऐसा कवच है कि प्रत्येक
- 33:41व्यक्ति को अपने साथ रखना चाहिए। यह अमूल्य निधि है, इसको गवाह मत
- 33:53देना, यह अमूल्य निधि संभाल के रखा, ना अपने पृश्तों के लिए।
- 34:06बहुत से लोग कह देते हैं बाबा इकट्ठे लिए हैं।
- 34:082050 क्यों भाई आने वाली पीढ़ियों के लिए ले आओ, मुझे तो कोई फर्क
- 34:19नहीं पड़ता, लेकिन इतना लालच भी ना खाओ ना।
- 34:26अच्छा नहीं होता। आप एक दो ले आओ, घर के जीतने
- 34:30मेम्बरान हैं उनके लिए एक एक ले आओ ये वाजिब है लेकिन आने वाली
- 34:36पुश्ते हैं, उनको सौंप जाना ना फिर यही आप साथ थोड़ी लेके जाओगे
- 34:43इसको। ये जो सिक्के हम लक्ष्मी पूजन में
- 34:47रखते हैं दीपावली पे ये वही सिक्के कुछ लुप्त हो गए।
- 34:53कुछ बिक गए बाजारों में कुछ डाल दिए गए।
- 34:57टक्सलों में कुछ बचे रहे गए। जो बचे रह गए वो आज भी हैं और उस
- 35:06घर में आप देखोगे शोहरत भी है, संपन्नता भी है सब है कार्य उनको
- 35:16पता नहीं, कर्म भी कर्म करते हैं, भाग्य भी काम करता है।
- 35:23सिक्का कहीं ज्यादा काम करता है, एकदम से जो तकदीर बदल जाती है,
- 35:32तुम्हें पता नहीं होता कहीं से कोई चीज़ तुम्हारे तक आई होगी वो
- 35:38उस व्यक्ति को। पता नहीं इसकी कीमत क्या है?
- 35:46रहमन हीरा कब कहें, लाख टका है, पोल बड़ा बड़ाई ना करें, बड़ा न
- 35:54बोले बोल। रहमान हीरा कब कहें, लाख टका है
- 35:59मोल उसको पता नहीं होता बेचारे को कोई विपत्ति काल में कोई किसी काल
- 36:05में जिसने विपत्ति का आहरण करना था, वह बेच दिया।
- 36:13इसलिए मैंने चांदी को कहा, आपने कहा विस्तार से।
- 36:16नवतोश सिंह कैलिफोर्निया से विस्तार।
- 36:19मैंने बता दिया ऐसी ही सब्य मान्यताएँ जो आउट ऑफ रेंज हो गई
- 36:25हैं। तो आज तुम्हें शंध नहीं आती, वह
- 36:29भ्रम बन गई इन भ्रमों के पखंडों को तोड़ने के लिए।
- 36:36ही संत अवतरित होते हैं। पृतृणय साधु गुणा सही चीजों को
- 36:42बचाने के लिए बिना सहाय से दुष्कर्म और आपके भ्रम जो बन गए
- 36:47हैं, कभी सत्य थे, आज भ्रम हो गए उनको तोड़ने के लिए।
- 36:59धर्म संस्थापना था। सत्य क्या है, उसकी संस्थापना के
- 37:05लिए शंभवामी युग युग मैं युग युग में प्रकट होता हूँ इसका जी अर्थ।
- 37:26मेरे चले जाने के बाद सीख गए तो बहुत होंगे लेकिन सिक्खों में
- 37:34प्राण फुंकने वाला नहीं होगा। आज हम मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा
- 37:39करते हैं। खो गए वो लोग जो मूर्तियों में।
- 37:43प्राण प्रतिष्ठा कर सकते थे, आज दिखावा रह गया है।
- 37:47कभी थे ऐसे लोग आज वो खो गए और जब खो गए तो फिर जब स्त्री का
- 37:58सुंदरता नष्ट हो जाता है वो गहनों का सहारा लेती है।
- 38:04भगवान राम और लक्ष्मण ढूंढ रहे थे सीता, कहा लापता हो गए कोई जंगली
- 38:13शेर खा गया लेकिन अचानक देखा के गहने पड़े।
- 38:23राम कहते लक्ष्मण से भैया देखना चेहार ये झुमके यह बोर यह कर्ण
- 38:36फूल तुम्हारी भाभी के हैं। लक्ष्मी बोले भैया मैं सिर्फ इन
- 38:52पाजीबों को पहचानना हूँ जब सुबह उठकर मैं मातों के पांव की धौंक
- 39:00करता था। तो मुझे ये पायजे नजर आते हैं
- 39:09तुम्हें वो ही नजर आता है जो तुम्हारे भीतर होता है।
- 39:12तुम्हें गाँधी में भी अपनी पोतियों के कंधों का सहारा लिए
- 39:17हुए काम ही नजर आता है तो इसको। तुम ऐसा समझ लेना कि तुम
- 39:22कामग्रस्त से व्यक्ति हो अन्यथा गाँधी के वैतरणीता गाँधी तो नग्न
- 39:28स्त्री के 700 जाते हैं तो प्रबल तुम हुए के गाँधी और तुम्हें
- 39:36कन्धों पर हाथ लगाकर चलना। 178 साल के बूढ़े व्यक्ति को।
- 39:42तुम्हें ये काम वासना से ग्रसित व्यक्ति लगता है यथा दृष्टि तथा
- 39:49सृष्टि ये समझना बात को तुम्हारे भीतर काम विकार है।
- 39:58पूर्व कूद गया, अपने भीतर और अपने भीतर की चीजों को विकसित किया,
- 40:03चेतना को विस्तार दिया और पश्चिम कूद गया, बहरमुखी हो गया उसने
- 40:11बाहर की खोज की जितनी खोज है, ये इलेक्ट्रिसिटी या परमाणु?
- 40:17सब खोजें पश्चिम की हैं, क्यों? क्योंकि पश्चिम बेहर मुखी है पशु
- 40:25नहीं यही करती क्या है? पश्चिम की संस्कृति को पूर्व में
- 40:30लिया है और गाल मार हो गया। ना पूर्व बचा ना पश्चिम बचा
- 40:37हिप्पी बचे वो ना पूर्व के थे, ना पश्चिम के थे दम मरोदम ये बचे ना
- 40:49खुदा हिमेला ना बसाले सनम, ना इधर के रहे ना उधर के रह।
- 40:55अगर बड़े से बड़ा गलत काम किया है, गलती जानबूझ के नहीं तो यही
- 41:02किया है। पश्चिम में निकल गए, पश्चिम
- 41:05बर्दाश्त नहीं कर सका, पश्चिम ने इनको निकाल दिया कर सके, लेकिन
- 41:12पश्चिम में अपनी छाप छोड़ आये। यही गलती हो गई ना पूर्व ठीक से
- 41:21बचा ना पश्चिम ठीक से बचा इसलिए तुम देख लेना।
- 41:25ओशो के अनुयायी कहीं नहीं पहुँच पाएंगे, इधर वो ध्यान करेंगे, इधर
- 41:32वो अपनी शक्ति को काम वासना। बहा बहा देंगे, ब्रह्मचर्य को
- 41:40सीखा नहीं है। सगा और पाश्चात्य सभ्यता में जो
- 41:47विकृतियां थीं, वो पूर्व में गजोड़ गया।
- 41:55मैं सच को सच कहूँ जहाँ पर आप भ्रमित ना हों, जो आज भ्रम हैं,
- 42:07कभी वो सत्य थे, लेकिन आज तुमने उनका मूल उद्गम बदल दिया।
- 42:15तो मान्यताएँ शेष रह गई। जो तुम्हारे दिमाग पर पोज़ हैं।
- 42:18इसलिए तुम विखंडित हो गए थे तो अखंड हो गए विखंडित ऐसा ही ओशो के
- 42:26साथ और तुम देख लेना ओशो का कोई सन्यासी।
- 42:34कभी नहीं पहुँच पाएगा। कितने ही रजनीश फ़िल्म खोल लो तुम
- 42:41वो जानते थे स्वाद को उधर की पीते थे मैं और जानते थे 1 दिन रंग
- 42:47लाएगी हमारी फका मस्ती 1 दिन। इसलिए पहले ही कह गए मेरे जाने के
- 42:55बाद सब जीवत ढूंढ लेना। एक काम की बात कह गए लेकिन तुने
- 43:02ढूंढा कहाँ? पर लोग चले गए जब मूर्तियों में
- 43:07प्राण डाल सकते थे, मैं चला जाऊंगा।
- 43:11सिक्के तो बहुत पड़े रहेंगे तुम्हारे पास ये सुनारों की दुकान
- 43:16पर ये सिक्के भरे पड़े हैं, लेकिन सिक्कों में जो जान डाल सकता था,
- 43:23प्राण डाल सकता था वो चला गया और तुम्हें ज़रा भी गम नहीं होगा।
- 43:31क्योंकि तुम जानते ही नहीं हो उसके पास क्या था।
- 43:35इसलिए तुम ईशा को स्लीप दे देते हो?
- 43:39मंसूर जो कहता है ऐनाल हक हाथ पांव काट लेते हो स्वकृति जब जान
- 43:45गया जहर का प्याला पुला दिया तुमने वो।
- 43:50आउट ऑफ रेंज समझा व्यक्ति और ऐसे व्यक्ति आउट ऑफ रेंज ही होते है।
- 43:57तुम्हारी डायमेंशन से बाहर हो गया।
- 43:59जो व्यक्ति मंसूर कहते है, आन अल हक मैं खुद खुदा हूँ, मेरे सिवा
- 44:06कोई खुदा नहीं। और उसको दंड मिलता है, उसका अन्न
- 44:12कट जाता है लेकिन वह हँसता है कहता है, अनलहक अहम् ब्रह्मस्म
- 44:21मैं खुद खुदा आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा।
- 44:30छोटी चेतना का स्वरूप पूर्णता को उपलब्ध नहीं हुआ।
- 44:34तब के ये शब्द हैं आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं लेकिन खुदा के
- 44:41नूर से आदम जुदा नहीं। यह जब चेतना का छोटा सा जो दही के
- 44:49साथ चलता है, जो अपने विराट तक पहुँच जाता है, जिसकी बात मैंने
- 44:53कल के प्रवचन में कही कि आप किसके आगे फरियाद करते हैं, उस विराट
- 44:59स्वरूप के आगे जो मेरा ही अपना रूप है?
- 45:01विराट ये समझने का मसला नहीं है, समझ में आएगा भी।
- 45:06समझ में नहीं आएगा और तर्क उत्पन्न होंगे और तुम मुझको सुनना
- 45:10छोड़ दोगे, बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं कर सकते।
- 45:17लेकिन नुकसान किसका हुआ है तुम्हारा?
- 45:24मेरा तो लाभ हो गया। जो होना था उससे ज्यादा लाभान्वित
- 45:27मैं हो भी नहीं सकता भाइयों जी। मैंने राम रतन धन पा।
- 45:44पायो जी मैंने। इससे बड़ा धन कोई?
- 46:05महाराजा गंगासिंह की माता मर गए थे महाराजा गंगासिंह बड़े प्यारे
- 46:14व्यक्ति थे। राजा हो तो ऐसा हो।
- 46:21लोगों को बड़ा दुख हुआ है। वृद्ध स्त्रियाँ उसके पास हैं।
- 46:31बोली, राजा जी फिकर मत करो, हम तुम्हें माता सा स्नेह देंगे,
- 46:37माता साहब वाता सा ले देंगे, तुम रहो मत।
- 46:45आस पास के सभी वृद्ध स्तर हैं। कहेंगे राजा तुम ये वर्लाप छोड़ो
- 47:00हमसे वर्लाप करते हुए राजा को देखा नहीं जाता।
- 47:05हम माता सा स्नेह तुम्हे देंगे तो महाराजा गंगा सिंह बोले माते पा
- 47:17तो तुम्हारी ठीक है। लेकिन तुम फिर भी राजा कहोगी अभी
- 47:27मुखातिब हो मुझसे तो बोल रही हो राजा तुम चिंता मत करना, रोना
- 47:32धोना मत करो फिर लाप मत करो हम तुम्हें माता स सनेह देंगे बता सा
- 47:37लेने के मम्मत वो देंगे। लेकिन मैं रोता उसके लिए हूँ गंगू
- 47:52कहने वाली मर गई उस समय के लिए रोता हूँ मैं।
- 48:00तुम मुझे गंगू नहीं कह पाओगे, मैं जानता हूँ गंगू कहने वाली एक ही
- 48:12थी पर वो चली गई तुम फिर भी मुझे महाराजा कहोगी राजा कहोगे वह तो
- 48:19वह थी। इसलिए माताओं के लिए कहा गया मामा
- 48:26टंटियां छमा गंगू कहने वाले मर गए तुम मुझे गंगू नहीं कह सकोगे माते
- 48:34हैं मैं उसके लिए वीरलाप करता हूँ मेरी माता मुझे।
- 48:49मूल या डेढ़ कह देती है मूल या डेढ़ नाम नहीं लेते।
- 48:57ज्यादा कुप्पी तो हो जाती है तो मूल या डेढ़ के कपरात डेढ़ है।
- 49:06अब किसकी औकात? बस उसी की उकत इसलिए कहा है कि
- 49:13जननी के पांवतले स्वर्ग की महानता होती है।
- 49:18स्वर्ग की झंडी इच्छाएं होती हैं, कल्पवृक्ष होता है, माँ बाप वो
- 49:27हीरे हैं। जिनके जाने के बाद उनकी कदर का
- 49:30पता चलता है। आपका एक दांत जब टूट जाता है तो
- 49:36उसकी महत्ता का पता चलता है। बार बार जीवा उस तरफ जाती है।
- 49:40जीस तरफ दांत टूटा होता है। क्या हुआ आज तक तो सभी थे तो उसकी
- 49:46कीमत का पता नहीं। जिसने चले गए, उसने महत्ता को पता
- 49:56चला। अब जीवा बार बार उसको खंगाल रही
- 50:00है, लेकिन वो दांत तो चला गया, अब तो नकली डब्बे का कैसे गंगू कहने
- 50:06लगे। तुम मुझे गंगा सिंह ही कहोगे माता
- 50:11गंगू कहने वाली मर गई और मैं उस गंगू कहने वाली के लिए हीरोता हूँ
- 50:24जीसको उसका असरा मिल जाता है। परम का उसके लिए संसार के सारे
- 50:31आश्रय। आश्चर्य नहीं रहते मेरा आश्रित हो
- 50:38जाता है वह जो जान लेता है की इस धरती को इस सृष्टि को इस ब्राह्मण
- 50:45को कोई शक्ति थामे बैठी है। जीसको रामधन मिलके।
- 50:52उसे और धन की आवश्यकता नहीं, उसकी सब चुहल पहल खत्म हो जाएगी,
- 50:58भागदौड़ खत्म हो जाएगी। नाम कमालू, पदवी कमालू, धन कमालू,
- 51:06जमीन कमालू, जायदाद कमालू। पुत्र, पुत्र, अधिक मानू सब
- 51:10तृष्णाएं बट गयी, जिसकी जीसको रामधन मिल गया।
- 51:19कहा तू मलोकदास? छाड़ दे पराईया कहत मलोकदा छोड़
- 51:41दे पराईया। राम धन पायी क थिरकाकी शरण जायी।
- 52:04रामधनपाई के रिका की शरण जाए का की शरण जाए।
- 52:24देना बंधु देना ना। मेरी सुध लीजिए, मेरी सुध लीजिए।
- 52:43नीना बंद। हो दीनाना मेरी सोध लीजिए, मेरी
- 52:55सोध लीजिए। दीनाबंधों दीनान धन्यवाद।