Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Feb 25 - आनंद! किसे और कैसे मिलता है वह आनंद? जिसे तुम समझते हो वह असलीआनंद नहीं है! Japji Sahib Pauri 33rd.
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- 0:20गुरनाम सिंह इटली से आप अक्सर जपजी साहब की एक शब्द दोहराते हैं
- 0:43अखन जोर। चुप है ना जो कृपया इस कोड़ी का
- 0:54विस्तार से बंद करने का कष्ट करें उससे पहले एक छोटा सा प्रश्न जो
- 1:05रह गया था। मोरल ग्यारहवें अध्याय के 323334
- 1:21या तीन श्लोक, इनका मोरल क्या है, बाबा इनका मोरल ही है।
- 1:36कि आप उसके हाथों में अपनी नाव की पतवार सूख दो, वो सुख दे तो फूल
- 1:54मत जाना, वो दुख दे। तो रोने मत लग जाना सहज स्वीकृत
- 2:06होना चाहिए। आपका जीवन जैसा वो करे ठीक करे।
- 2:22वो दर्दो में रखे वो खुशियों में रखे मानवता ने आज हर चीज़ से
- 2:41लड़ाई मोड़ ले ली है और मानव कहता है कि मैंने जीत लिया है।
- 2:49ठीक जीत लिया लेकिन सब कुछ जीत के भी वो नहीं पा सका जिसकी जरूरत है
- 3:06और यही बदनसीबी है। है तुम मांगते हो खुशियाँ मिलती
- 3:18हैं बदनसीबिया। तुम होना चाहते हो आनंद के गर्त
- 3:33में गिर जाते हो दुख ये हमारी बदनसीबी, जो नहीं तो और क्या है
- 3:44के उसी के हो गए हम। जो न हो सका हमारा कोशिश की थी
- 3:53दुखनय और दुख ही आ गया जीवन एक दुख हो गया ग्यारहवें अध्याय के।
- 4:06323334 ही अर्जुन ये सब मेरे मारे हुए लोग इनको तू मार दे और उनका
- 4:21श्रेय ले ले उल्टे शब्द हैं। और भाषा अल्पज्ञ है इसलिए ऐसे
- 4:29बोलने पड़ते हैं कृष्ण भी मजबूर सभी संत भी मजबूर भाषा में जो
- 4:37समाता है, गागर में जो समाता है वो सागर नहीं होता, इसलिए गागर
- 4:43में जो होता है? उसी से संतोष करना चाहिए।
- 4:46गागर को इन तीन शलूकों का यही अर्थ जब मैंने आपको बताया कि करता
- 5:03तो मैं हूँ तुम बोझा उठाते हो अपने सर के ऊपर।
- 5:11इस ओझे को पटक दो न तुम कुछ करते हो न तुम कुछ कर सकते हो संतो का
- 5:20दर्शन संतो का अनुभव यहाँ आके ठहर जाता है इसलिए संत।
- 5:31हर दशा में राजी होता है संत औरंगजेब के सामने बैठ के उसकी
- 5:42लंबी नंगी तलवार से शीश कटवाना। ठीक समझता है जो तो पाब है, लेकिन
- 5:58संत फूलों की सेज के ऊपर उसकी रजा के बिना नहीं सोना चाहता।
- 6:06संत उसकी रजा में रहना चाहता है। और ज़रा भी उसे तकलीफ नहीं होती।
- 6:16इसमें वो अपनी खुशनसीबी समिता है पर महात्मा का हुक्म मानना हो संत
- 6:25के लिए खुशनसीबी है। यही है उसकी अर्थ एक उदाहरण से
- 6:38मैंने समझाया था कि तुम परीक्षा देते हो परीक्षा के नंबर यह
- 6:43तुम्हारी समझ में आ जाता है। वो फल तुम्हें दे देता है, लेकिन
- 6:49दूसरा भी समझाया था कि जीसको वह मार देता है, वह मारने योग्य है,
- 7:08इसलिए मार देता है, हिसाब मत मांगो।
- 7:12हिसाब मांगोगे तो दुखी रहोगे और सारी दुनिया सारा विश्व सुख चाहता
- 7:21है। राह पकड़ ली उसने दुख की इच्छा है
- 7:28उसकी सुख। ये कभी पूरी नहीं होगी।
- 7:34प्रश्न पूछते हो कि मुक्त होने के बाद भी अगर कोई बूंद उड़ गई,
- 7:40संसार में आ गई, संसार से इतना डर लगता है?
- 7:46यहाँ तो बहुत से लोग मैंने देखे जो मुक्त होना चाहते हैं।
- 8:00जब व्यक्ति मौन हो जाता है, उसकी एक निशानी है।
- 8:06प्रश्न खत्म हो जाते हैं। जीस घड़ी तुम पर मौन में उतर
- 8:11जाओगे सबसे पहला लक्षण तुम पर मौन में उतर जाओगे तुम प्रश्न न पूछो
- 8:21मिल गया सब कुछ। जो मिलने जैसा है मिल गया और कुछ
- 8:29ही न रहा अपने जीवन की बागडोर उसके हाथों में दे दो और तुम
- 8:39निश्चिंत हो जाओ, सर्वधर्माण प्रतिज्ञ माँ मैं कम शर्म पर।
- 8:46तुम निश्चिंत हो जाओ, अह तुम सर्व पाप्य भव मोक्ष श्याम माँ सूचक तू
- 8:55फिक्र मत कर, तुम मुझे सौंप दे अपने जीवन की बागडो।
- 9:06जपजी साहब के तैंतीसवीं पोड़ी इटली से पूछा है लेकिन इसका मैं
- 9:16व्याख्यान तो पहले भी कर चुका हूँ।
- 9:19एक गुजारिश है। कि मैं मल्टीडाइमेंशनल अर्थ दिया
- 9:28करता हूँ पहले अर्थों को कंगाल जी मतलक्षण सर तो वही पाओगे।
- 9:39लेकिन परभाष थोड़ी बदल जाएंगे। तो आइए हम तैंतीसवीं पौड़ी में
- 9:46चलेंगे। सब जीस, हिसाब के आँखन जोर चुप्पे
- 9:51न जोर जोर न मंगन दे, न जोर। बाबनानक ज़ोर किसे कहते हैं ज़ोर
- 10:09की परभाषा क्या है? जपजी साहब में ज़ोर शब्द का
- 10:22अर्थवाव बनान करते हैं। आनंद से ज़ोर का मतलब आनंद आइए
- 10:33आगे चलते हैं। जहाँ ज़ोर शब्द बोलूं वहाँ आनंद
- 10:40समझ लेना है साधो आनंदपया मन मोरा।
- 10:47है। अखन ज़ोर छुपे न ज़ोर ज़ोर न मंगन
- 11:00देन न ज़ोर। तुम जो कहते हो, तुम जो चुप्पी
- 11:12करते हो उन दोनों में आनंद नहीं है।
- 11:20बाबा कहते हैं तुम्हें आनंद की तलाश और तुम्हारी चुप्पी में भी
- 11:30ज़ोर नहीं है। ध्यान रखना ये कहते हैं कि
- 11:35तुम्हारी चुप्पी जो तुम चुप होते हो और तुम्हारे बोलने में भी अँखन
- 11:44ज़ोर चुप पै न ज़ोर ज़ोर न मंगण। तुम जो मांगते हो उसमें भी आनंद
- 11:55नहीं है। तुम तो दुनिया भर की चीज़ें मांग
- 12:00लेते हो, ये भी चाहिए, वो भी चाहिए वो भी सही है मंगल ज़ोर।
- 12:16छीनने में भी ज़ोर नहीं है। ना मांगने में ज़ोर है, ना छीनने
- 12:23में ज़ोर है। आंखन ज़ोर चुप है ना ज़ोर।
- 12:30ज़ोर न मोगन देन न ज़ोर दान में भी ज़ोर नहीं मांगने में ज़ोर
- 12:39नहीं दान में ज़ोर नहीं आनंद नहीं तुम दान करते हो आनंद के लिए आनंद
- 12:46के लिए दान नहीं होता। तुम्हारी सभी भ्रांतियां तोड़ रहे
- 12:51हैं। बाबा मांगने में भी आनंद नहीं,
- 12:58दान में भी आनंद नहीं ज़ोर न जीवन मरन न ज़ोर।
- 13:13तुम जो जीने की कामना करते हो, उसमें भी आनंद नहीं है।
- 13:19मरने की कामना करते हो, उसमें भी आनंद नहीं है।
- 13:25आखन ज़ोर चुप पे ना ज़ोर ज़ोर ना बंगन देन ना ज़ोर।
- 13:31ज़ोर न जीवन न मर न ज़ोर तुम्हारे जीवन के भीतर भी कोई आनंद नहीं
- 13:39है। बताओ अगर किसी ने जीवन में आनंद
- 13:42लिया हो तो जीसको तुम आनंद कहते हो वो सुख होता है।
- 13:52और जीसको तुम सुख कहते हो वो इंद्रियों की स्टिमुलेशन है।
- 14:00ध्यान से समझना तुम कोई स्वादिष्ट पदार्थ खाते हो तो तुम्हारे टेस्ट
- 14:08बड्स। स्टिमुलेट हो जाते हैं, उत्तेजित
- 14:10हो जाते हैं बस उसको तुम कहते हो सुख तुम कहते हो मज़ा आया।
- 14:18बाबा कहते हैं ये मज़ा जो तुम कहते हो ये सुख आनंद नहीं है।
- 14:27आनंद की परिभाषा इतनी गहरी बाबा ने इस पोड़ी में कर दी शायद ही
- 14:33किसी ने की हो ज़ोर न जीवन मरण न ज़ोर तुम जीने की इच्छा करते हो
- 14:46या तुम मरने की इच्छा करते हो, दोनों में आनंद नहीं।
- 14:54जीने की कामना से तुम लोगों के जीवन के पदार्थ ही छीन लेते हो,
- 15:05लेकिन उसमें सुख नहीं है। उसमें आनंद नहीं है।
- 15:10या तुम लोगों के जीवन के लिए दान देते हो, उसमें भी आनंद नहीं है
- 15:19या तुम मरने की तमन्ना करते हो? उसमें भी आनंद नहीं है।
- 15:28ज़ोर नाराज राज़ करने में ज़ोर तुम्हारी बड़ी इच्छा होती है कि
- 15:36मैं दूसरों पर हुकुम चलूँ मेरे कंधों पर स्टार लगे हो फीते लगे
- 15:43हो घने सारे। करते हो ना बाबा कहते हो उसमें
- 15:50आनंद नहीं ज़ोर न राज़ राज़ करने में ज़ोर नहीं है आनंद नहीं है
- 16:01माल धन इकट्ठे। माल कहते हैं, दानु को माल में
- 16:09ज़ोर नहीं है, धन इकट्ठा कर लो, कितना ही इकट्ठा कर लो, लोगों को
- 16:16भूखे मार रहे हो, पाप कर रहे हो। तुम्हारा धन ट्रंक में पड़ा हुआ
- 16:24बैंकरों में पड़ा हुआ सड़ जाता है घरों में पड़ा हुआ सोना तुम्हारा
- 16:32किसी काम में, लेकिन कोई गरीब भूख मर जाता है, उसका पाप तुम्हें
- 16:40लगता है? तुम किसी का छीन लेते हो मांगना
- 16:46और बात है, छीनना और बात है ज़ोर नाराज माल मन सोर बड़ा प्यारा
- 17:04शब्द हैं, मैं रोज़ बोलता हूँ। तुम्हारे मन के शोरगुल में आनंद
- 17:10नहीं है। मौन झील देखे तुमने कभी यू हैव
- 17:21सीन साइलेंट लेख क्या होता है? उसमें कोई तरंग नहीं होती तरंग।
- 17:30यानी शौर निस्तरंग झील मन होती है।
- 17:43उसमें कोई तरंगा नहीं होता, उसमें कोई शोर नहीं होता।
- 17:46झील के साथ कान लगाकर देखना ज़रा भी शोर नि में लगाओ।
- 17:52समुद्र तो दूरों से ही गर्जना करनी शुरू कर देता है।
- 17:57समुद्र का गर्जन तो तुम्हें दूर से डरा देता है, लेकिन झील के साथ
- 18:03कान भी लगाओगे वो भी शोरने में लगा।
- 18:11ज़ोर न माल दान इकट्ठा करो, राज़ किसी पर कमांड करने की इच्छा करो,
- 18:21भूकंप चलाने की व्यवस्था करो, मन शोर मन में शोर करो।
- 18:28अब ये शोर के शोर मैं जो रोज़ कहता हूँ तुम्हें समझ तुमको मगर
- 18:35नहीं आता शोर शोर है। मौन झील में अगर तुम कंकड़ कराओगे
- 18:49तो भी तरंग उठेगी और ध्यान रखो मौन झील में अगर तुम कोहिनूर हीरा
- 18:55कराओगे वो तो कीमती बड़ा है। कंकड़ का कोई मूल्य नहीं है लेकिन
- 19:02मौन झील में अगर तुम हीरा भी कराओगे।
- 19:05कोहिनूर तो भी जी लो रंग खा जाएंगे, तुम जान बूझ के मूर्ख
- 19:19बनते हो। यद्यपि किसी को शोर से आनंद आया
- 19:27नहीं। इसलिए प्रकृति तुम पर इतनी कृपा
- 19:32है। वो जानती है कि तुम शोर में
- 19:38उतेजित होते हो और उत्तेजना को तुम सुख समित हो, उत्तेजना को तुम
- 19:44आनंद समित हो, जबकि उत्तेजना आनंद है नहीं।
- 19:48तो प्रकृति रोज़ तुमपे उपकार करती है जो तुम रोज़ कह देते हो
- 19:55परमात्मा ने हमें क्या दिया? प्रकृति ने हमें क्या दिया?
- 19:59यह जो रात को तुम आराम की नींद सो जाते हो यह नियामत परमात्मा की
- 20:05है, यह प्रकृति की ही नियामत है। परमात्मा न्यायकारी है और दयादु
- 20:15भी है। दयादु है दिनभर तुम शोर मचाते हो,
- 20:21काम धंधे में किसी को व्यापार का। शोर है किसी को ऑफिस का शोर है,
- 20:35लेकिन शोर तो शोर है और प्रकृति जानती है शोर हीन अवस्था में तुम
- 20:44जा नहीं सकते। उस अवस्था में तो तुम आज भी
- 20:51देखभाल कर रहे हो। किस गुरु से मिल जाएगा?
- 20:56किस गुरु के पास जाऊं? ये मन शोर करना बंद करता है, मन
- 21:01बड़ा चिल्लाता है। नहीं चलाएगा।
- 21:10शोर मचा मचा के कई जन्मों से इसे संस्कार पड़ गए हैं।
- 21:19शोर करने के यह एडिक्टेड हो गया है शोर करने का।
- 21:25लत लग गई है मन को शोर करने की और उस लत को ही तुम सुख समझ लेते हो।
- 21:41बाबा कहते हैं ज़ोर न राज़ हुक्म चलाने में आनंद नहीं है।
- 21:49एक एक शब्द को बड़े ध्यान से गहराई से सुनोगे, तो एक शब्द ही
- 21:59तुम्हें पार ले जाएगा एक शब्द कोई भी उठा दो जब जी का एक एक शब्द।
- 22:10तुम्हें पार लगा देगा कोई शब्द उठा लो, तुम्हारे पास इतनी अतुल
- 22:16संपदा है और तुम भाग रहे हो। डेरों में शर्म की बात है।
- 22:25यह शोर है, इनको पता ही नहीं उस संत पुरुष के शब्दों को त्याग कर
- 22:3610 संतो की वाणी को त्याग कर श्री गुरु गोविंद श्री गुरु ग्रंथ
- 22:45साहब। श्री गुरु अर्जुन है।
- 22:53इनके शब्दों को त्याग कर तुम डेरों के शोरों में उधर जाते हो।
- 22:58क्यों मैं जानता हूँ क्यों? क्योंकि तुम्हें शोर की लत है,
- 23:04तुम्हें मज़ा आता है शोर में यह विडम्बना नहीं है कि तुम शोर की
- 23:12तरफ खींचे जाते हो। तुम देखना तुम सदा उस दुकान पे
- 23:17जाओगे। जीस पे ज्यादा ग्राहक है।
- 23:20बचपन में मेरी का आदत थी। कोई घर का सामान लेने जाता तो जीस
- 23:28दुकान पे रश होता। मैं वहाँ नहीं जाता लोग कहते हैं
- 23:33यहाँ सस्ती मिलती है मैं उस दुकान पे जाता जो बेचारा इधर के बट्टे
- 23:39उधर रखा। बट्टे साफ कर रहा होता कोई ग्राहक
- 23:43नहीं आया उबासी ले रहा होता, मुँह में मक्खी घुस जाती है या अपने
- 23:54कंडे तोल तराजू को साफ कर रहा होता और करे का बचा उसके पास जाता
- 24:01मैं ले भाई ये सामान दे दे। हाँ कितने प्रैसे बन गए इतने बन
- 24:07गए बेचारे ने, उसने भी तो कर चलाना है तुम तो उसके लिए
- 24:15परमात्मा बन के गए, वह तुम्हें कितना आशीर्वाद देगा?
- 24:20हम आज हर चीज़ ऑनलाइन बनाना चाहते हैं।
- 24:25हम उन गरीब छोटे व्यापारियों को सोचते ही नहीं जिनका घर आपसे चलता
- 24:30है। फिर हम कहते हैं सेट नहीं होनी
- 24:35चाहिए। सेट तो हम बनाते हैं, अगर सभी
- 24:40व्यक्ति थोड़ा सा कष्ट कर ले। परचून के दुकानदारों से सामान
- 24:46लेना शुरू कर दें और सस्ता मिलेगा तुम्हें और महंगा भी मिल जाए तो
- 24:54ताजा तो मिलेगा देख कर के तो लेके आओगे।
- 25:01और उस गरीब का घर चला जाएगा। तुम्हें नहीं पता तुम कितना पुण्य
- 25:06कमा सकते हो, गँवा देते हो लेकिन पुण्य तुम्हें चाहिए नहीं इसलिए
- 25:13तुम ऑनलाइन मांगा लेते हो? आजकल तो खाना भी ऑनलाइन होना
- 25:20शुरू। हो गया है ऐसा?
- 25:25रहा तो दुकानें बंद हो जाएंगी। ये सारा पाप आपके जिम में लगेगा,
- 25:36खरीदारी कीजिए। कम से कम ग्रोसरी की खरीदारी तो
- 25:43बाजार से कीजिए। ये बिचारे तुम्हारे लिए बैठे हैं,
- 25:50इनका परिवार चल जाएगा। कितने जीवों की बेसबरी से इंतजार
- 25:56आपकी है? तो मैं सदा उसके पास जाता है
- 26:01जिसके पास कोई ग्राहक ना होता दो पैसे ज्यादा लगा लेगा, लेकिन इस
- 26:09गरीब का घर तो चल जाएगा। सोच उलटी थी, सुर से खोपड़ी उलटी
- 26:16थी। आज भी थोड़ा थोड़ा पागल ज्यादा ही
- 26:18हो गया। पहले थोड़ा कमती था, अब थोड़ा
- 26:25ज्यादा हो गया शोर न राज़ माल मनसोर हुक्म चलाने में ये बार बार
- 26:41मैं क्यों बोल रहा हूँ? मुझे कई बार कमेंट पहले आ जाते
- 26:47थे, अब तो लोग समझदार हो गए। ज़ोर नाराज हुक्म चलाने में आनंद
- 27:03नहीं माल धन इकट्ठा करने में। एक एक शब्द कपड़ा गहरा अर्थ है।
- 27:11तुम तो पढ़ देते हो। 28 मिनट में ये बात अलग है धन
- 27:18इकट्ठा करने में बड़े बड़े सेठ बनने में।
- 27:28क्या करोगे भाई? सेट बन के एक नंबर के सेट बन के
- 27:30क्या करोगे? कितने आए और कितने चले गए इन हीरे
- 27:37मोतियों को लॉकर के भीतर जोड़कर क्या करोगे?
- 27:47तेरे पास हैं हीरे मोती मेरे मनमन।
- 28:02दिल में जो तू। तेरे पास है मेरे मन मन अंदर में
- 28:21ज्योति। कौन हुआ धनवानरे बन दे कौन हुआ
- 28:39धनवानरे बन गए? जोठी तेरी शान रे मत कर तू
- 28:57अभिमान। मत कर तू अभिमान र बंदे मत कर, तू
- 29:13अभिमान। तेरे पास है हीरे मोती।
- 29:20मेरे मन मंदिर में ज्योति बड़ा सुन्दर सवाल है और लेखक पूछता है
- 29:29बताओ कौन हुआ धनवान धनमान कौन है तुम जैसे धन समते हो बाबा कहते
- 29:39हैं वो धन है नहीं। ज़ोर न राजमाल मनसोर हुक्म चलाने
- 29:47में गद्दियो में आनंद है नहीं तुम मौज से चलाओ तुम्हें कोई नहीं रोक
- 29:53दो, झूठ बोलो, प्रचार करो, पार्टियों के दफ्तर खोलो।
- 30:00लोगों को लूटो, कोई नहीं रोकता जिसकी लाठी उसी की भैस लेकिन एक
- 30:07बात बाबा के ध्यान से सुन लेना जीस आनंद की तलाश तुम्हारा अंतर
- 30:14चाहता है वो न मिलेगा और वो न मिलेगा।
- 30:19तो फिर कुछ भी ना मिला। एक तू ना मेरा?
- 30:38एक तू ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है मेरा दिल ना?
- 30:58खिला मेरा दिल ना खिला सारी बगिया खिले भी तो क्या है एक?
- 31:19तू ना मिला? अरे बहुत रस्ती ना मिले, आनंद
- 31:27मिला, रस ना मिला तो सारी दुनिया फीके रस के बिना।
- 31:37नी रस सारी दुनिया बाबा यही बात तुम्हे समझाना एक जप जी को बोलते
- 31:49हैं, आनंद नहीं है, राज़ में आनंद नहीं है माल में।
- 32:01आनंद नहीं है मन के शोर में तुम भी चाहते हो इस मन के शोर को कैसे
- 32:08विदा कर दें मेरे पास 99% मरीज। इसी रोग के आते हैं बाबा मन शांत
- 32:19नहीं होता और फिर फिर तुम उन लोगो के बादशाह ते हो जो बताये नाम दान
- 32:26देते हो। नाम एक सौर है।
- 32:32मैंने कहा मौन झील में कंकड़ फेंको या कोहिनूर हीरा।
- 32:37लहरें तो उठेंगी वो लहरें ही शोर हैं।
- 32:45शोर की परिभाषा को ठीक से समझ लो तो बाबा कहते हैं तुम्हारी चुप्पी
- 32:52में भी कोई ज़ोर नहीं है। तुम्हारी चुप्पी में आनंद नहीं
- 32:55है। क्योंकि तुम्हारी चुप्पी बनावटी
- 33:00है, बोलने में तो है ही नहीं, तुम्हारी चुप्पी में भी आनंद नहीं
- 33:14है। ज़ोर नाराज माल।
- 33:21मन शोर सारी दुनिया आज इस व्याधि से ग्रसित है मन के शोर से ग्रसित
- 33:30है और तुम्हें पता नहीं तुम भूल जाते हो यहाँ से सुन के जाओगे
- 33:37दुकान पे जाके भूल जाओगे। ऑफिस में जाके भूल जाओगे, यह मन
- 33:45का शोर है और अगर मन का शोर मट जाए तो भरी भीड़ के बाजार में
- 33:55खड़े रहो। तुम अलबेले मस्ताने आनंद से भरे
- 34:03पूरे स्थिर खड़े रहोगे, तो मैं कोई चीज़ विचलित नहीं कर सकती।
- 34:14मन का शोर हट जाये, मन खुद ही शोर है।
- 34:22मन का शोर हट जाए तो भरी भीड़ में भी तुम शांत रह सकते हो।
- 34:29यही तो तुम्हें आता नहीं है ज़ोर नाराज माल मन सो एक एक शब्द को
- 34:39सुनना। और एक एक शब्द को जिसमें आनंद
- 34:42नहीं उसको त्यागना ये सिर्फ सुनने के लिए नहीं, इस पर अमन भी करना
- 34:52होता है। तभी मिलेंगे वो मंजल जिसकी तलाश
- 34:58में जब जी लिखी गई। बाबा ने पाके लिखी और जो पाके
- 35:06लिखता है वो ही सच्चा संत होता है जो पहले बोल देता है और पता होता
- 35:12नहीं वह तो झूठा होता है इसलिए आज।
- 35:19जूठों की कतार लगी है। जानता कोई नहीं, मैं जानता हूँ
- 35:25उनकी तकलीफ दो हर्षों में बोल दूँ?
- 35:31पापी पेट का सवाल है, क्या करें? विचार परिवार उन्होंने भी पालना
- 35:39है। ओर कोई ऑप्शन बची नहीं तो फिर झूठ
- 35:46बोलो, झूठ बोलो, जितनी बोल सको उतनी बोलो, फिर ही तुम रोज़ राज़
- 35:54कर सकोगे अन्यथा तुम राज़ नहीं कर सकोगे।
- 35:58फिर ही तुम धन जोड़ सकोगे अन्यथा तुम धन नहीं जोड़ सकोगे।
- 36:05फिर ही तुम्हारा अगर मीडिया बोलेंगे तुम्हारा गुणगान करेगा।
- 36:11पाण पूजेंगे लोग आके और तुम शोर में खुश हो तो?
- 36:18जीतने ज्यादा फॉलोवर्स उतने तुम प्रश्न होते हो।
- 36:29कहते हैं बाबा हुक्म चलाने में आनंद नहीं हुक्म मानने में आनंद
- 36:35है, हुक्म मानने में आनंद है। गौर से सुनना मेरी बात मैं बीच
- 36:44में आपको मन के शोर को हटाने की जुगत भी बता रहा हूँ।
- 36:57हुक्म अंदर सबको बाहर हुक्मन्ना को।
- 37:04यह एक सत्य जीवन का प्रत्येक संत देखता है, अपने जीवन के आखिरी छोर
- 37:10पे क्या हुक्म है अंदर सोको तुम कहते हो मैं करता हूँ मेरे बिना
- 37:27कैसे कोई करेगा? बाबा कहते हैं, तुम अपनी इच्छा से
- 37:32मर भी तो नहीं हो सकते? बताओ किसकी इच्छा से जन्म हुआ?
- 37:41आज एक बाबा बोल रहे थे। जो माँ बाप अपने बच्चों को खुश न
- 37:52दे सके, उनको बच्चे पैदा करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
- 37:57अब इस मूर्ख को यह नहीं पता कि माँ बाप बच्चे तो पैदा कर देते
- 38:02हैं, तुम इतने बड़े जो हुए हो, कुछ और भी तो उन्होंने किया होगा।
- 38:10लेकिन दुनिया ल ल ल ल करके उसके पीछे पड़ी है और मैं हैरान हूँ
- 38:18इसके दिमाग का उपचार होना चाहिए इसके दिमाग को कसौटी पे कसना
- 38:29चाहिए। मेरी दृष्टि से यह व्यक्ति नशेड़ी
- 38:33है, मेरी दृष्टि से अन्यथा ऐसी खतरनाक बातें गर्व करते हैं।
- 38:44माँ बाप जीवन देते हैं, ठीक है। कुछ अपेक्षाएं होती हैं माता की
- 38:52पिता की दे दिया होगा जन्म लेकिन उसके बाद वो रात में तुम भूल गए
- 39:06जो माँ खुद सर्दियों में। गीले बिस्तर पर सोए तुम्हें सूखे
- 39:12बिस्तर पर सो ले। तुम भूल गए वह पिता जिसने सारा
- 39:17इंतजाम किया तुम्हारा आज तुम बोलने के योग्य हो गया तो आज
- 39:24तुमने फब्तियां कसनी शुरू कर दी। लोगों को बताना शुरू कर दिया।
- 39:28बड़ा महत्वपदेश है बाबा इतना महत्वपदेश तो कभी किसी ने किया
- 39:35नहीं था और अच्छा है अगर लोग आपकी बात को मान ले लेकिन कौन मानता
- 39:46है? भारत तो वैसे भी जनसंख्या को
- 39:48घटाना चाहता है ये दोगले लोगों से सावधान एक व्यक्ति तीन बच्चे पैदा
- 39:58करें और कहते जनसंख्या घटानी है। कैसे घटेगी भाई?
- 40:05जनसंख्या हमारे पास थोड़ा सा एरिया है।
- 40:09हमारी जनसंख्या बहुत ज्यादा है तो इन जनसंख्या को जमीन की संख्या के
- 40:19हिसाब से घटाओ। बाहर भेजो कुछ करो, थोड़ी घटाओ
- 40:25इसको या प्रोस्पटी लेके आओ ज़ोर नाराज माल मनसोर।
- 40:43हुक्म में अंतर सकूँ बाहर हुक्म न को एक सत्य अगर तुमने जीस दिन जान
- 40:52लिया यह सत्य तुमने जीस दिन जान लिया।
- 41:04अपनी नगण आँखों से, किसी शास्त्र से या व्यक्ति से सुन के नहीं,
- 41:11मुझे सुन के नहीं या तुम्हारे किसी गुरु से सुन के नहीं संदेह
- 41:20बना ही रहेगा। अगर मेरी बातों पे यकीन करोगे
- 41:24इसलिए मैं कहता हूँ यकीन मत करना चल के देखना मैंने बोला ताजमहल है
- 41:31तो कोई ज्यादा दूर नहीं है, ये रहा अगर बैठो गाड़ी में देखो
- 41:40ताजमहल है। फिर यकीन करो यकीन तो हो जायेगा
- 41:46क्योंकि संतो ने अपनी आँखों से देखा और संत झूठ नहीं बोलता,
- 41:50बोलेंगे भी तो उसकी अपनी कोई इच्छा नहीं है, झूठ भी काहे
- 41:55बोलेंगे? बाहर हुक्म ना खोए।
- 42:10बाबा कहते हैं, हुक्म के बाहर कुछ नहीं है और सारे संत कहते हैं
- 42:17कर्ता वही है, करतार वही है, तुम गुस्सा कर सकते हो, तर्क कर सकते
- 42:24हो, कैसे पूछ सकते हो? या जो कल व्यक्ति झारखंड से
- 42:29प्रश्न पूछा, ऐसा प्रश्न पूछ सकते हो, क्योंकि तुमने इतनी लंबी लाइन
- 42:36छेड़ ली है। पागलखानों की उस लाइनों से प्रश्न
- 42:43नहीं उठेंगे और प्रश्नों में से प्रश्न नहीं उठेंगे।
- 42:46तुमने समाधान तो कभी दिया नहीं तुम रुके तो कभी है ही नहीं कहीं
- 42:51तो रुको जाके बुध जाकर रुक गए आत्मा पे कि तुम शरीर नहीं, तुम
- 43:04मन नहीं। यह भी बहुत बड़ा फार्मूला था।
- 43:11तुम्हें शांत करने का मन तो शांत हो गया, मन तो चुप्पी को उधार
- 43:18लेता है और मन की चुप्पी महत्त्व उपलब्धि है मन को अगर तुम चुप
- 43:26कराने में। कामयाब हो गए तो यह तुम्हारी
- 43:31महत्त्व उपलब्धि होगी। हुक्मे अंदर सबको इन शब्दों को
- 43:49मैं बार बार आपके भीतर भेजने की कोशिश कर रहा हूँ, किसी ना किसी
- 43:54तरह। यह तुम्हारी खोपड़ी को चीर के
- 43:57तुम्हारे अंत स्थल में उतर जा रहा है क्योंकि यह सत्य है और आँखों
- 44:05देखी सत्य है इसलिए बार बार चेष्टा करता हूँ कि यह सत्य किसी
- 44:12ना किसी तरह है। तुम्हारे प्राणों को भेद जाए।
- 44:17और तुम देखने पर उतारू हो जाओ, अभी तो तुम चलते नहीं बातें करते
- 44:22हो, चले तो है न नानक हुक्म जे बुझै बूझना बूझना का मत लो जो मिल
- 44:40गया। जिसने ये सत्य पा लिया, क्या की
- 44:48करता वही है, तुम कुछ नहीं करते, तुम कुछ नहीं कर सकते, यह संत
- 44:56कहता है। और संत?
- 44:59साथ में ये भी बात कहता है कि तुम मेरी बातों के पीछे मत चल लेना,
- 45:08वह शांति तो होगी लेकिन नकली शांति होगी।
- 45:13ये बिलकुल वही फूल होंगे जो राजनीतिक तुम्हें देते हैं।
- 45:17लफ्जी के। अच्छे दिन आएँगे।
- 45:23ये लफाजी के फूल हैं, इनमें खुशबू नहीं होती अच्छे दिन कभी नहीं
- 45:27आते, मैंने अपने हाथों से ₹128 तोला सोना खरीदा।
- 45:39अपने हाथों से ₹128 का 10 ग्राम आज क्या बात है?
- 45:47अच्छे दिन तो कब के आ चूके हैं तो कभी नहीं आएँगे।
- 45:55सरकार कोई भी आ जाए। इसलिए मैं कहता हूँ सब लूटेरे
- 46:01मुझे पूछ लेते हैं लोग बाबा आपने वोट डालते हैं।
- 46:05मैंने कहा सब लूटेरे जो बैठे हैं उनको बैठे रहने दो, नहीं ज्यादा
- 46:13लूटेंगे। क्योंकि 1520 साल से लूट हुई
- 46:20नहीं। पेट खाली हो गए, खजाने भी खाली हो
- 46:24गए। जिन्होंने लूट लिया, उनके पेट भर
- 46:27गए। वो थोड़ा कम लूटेंगे, इनको ही
- 46:30बैठे रहने दो। जो नए आयेंगे वो पहले अपना पेट
- 46:36भरेंगे। एक राजा के मंत्री ने बहुत बड़ा
- 46:43घपला कर दिया था, पकड़ा गया, राजा ने उसको बर्खास्त कर दिया।
- 46:56उसकी धर्मपत्नी को उसने राजा के पास भेजा कि तू एक प्रार्थना लेकर
- 47:01जा कि तुम्हारा महामंत्री तुम्हारे से एक बार मिलना चाहता
- 47:07है, तुम चाहे घर आ जाओ। नहीं तो मैं तुम्हारे दरबार में आ
- 47:13जाता हूँ राजा कहने लगा ठीक है, एक बार उसको दरबार में भेज दो
- 47:21दरबार में चला गया महामंत्री घुटनों के पर बैठ गया, हाथ जोड़
- 47:28के। कैसे महाराज एक बात कहूं देश हित
- 47:34में है अगर मानो तो कहो घपला तो मैंने किया है पकड़ा भी गया हूँ,
- 47:45इंकार भी नहीं करता हूँ। ये जो मैंने इतनी बिल्डिंगें
- 47:49बनाई, शीश महल बनाई, ये बनाई लोगों का था, टैक्स का माल था,
- 47:59मैं खा गया लेकिन बात सुनो। मैंने अपना कोटा पूरा कर लिया,
- 48:10मेरा पेट भर गया, डकार आ गई। अब मैं संतुष्ट हुआ।
- 48:16अब मैं चाहूंगी तो मेरा मन नहीं करता।
- 48:19बेईमानी करने को मेरा पेट दाब गया, मैं राज्य गया, मैं तरफ तो
- 48:26हुआ। अगर कोई नया तुम चुनोगे वह फिर से
- 48:32लूटेगा, फिर से अपना पेट भरेगा, फिर से दाग पीएगा, फिर से रचेगा,
- 48:37फिर से तृप्त होगा तो बड़ा नुकसान कर बैठोगे आप देश का इससे अच्छा
- 48:43मेरे को ये प्लान। राजा को बात चीत, राजा कहते ठीक
- 48:51बात तो समझ में आई समझदारी की है, ठीक है तुम ही आ जाओ जिन्होंने
- 49:00लूट लिया है, बिलकुल लूट लिया है। प्रमाण है तुम्हारे पास 70,000
- 49:08करोड़ का घपला और अगले दिन वित्त मंत्री बन जाता है भाई ठीक है,
- 49:13बने रहो, चलो तुम दाब गए हो और तो नहीं करोगे चलो तुम बने रहो।
- 49:25हम तो जानता हैं पता नहीं तुम्हारी नजर जोगी, हम।
- 49:39तो लूट गए तेरे प्यार में। जाने तुमको हो जाने तुमको खबर कब
- 49:52होगी? लूटते जाओ, कोई बात नहीं, हम तो
- 49:58लूटने वाले हैं, लूटते ही रहेंगे, हम राज़ करने से रहे।
- 50:04हम ये गोरखधंधे आते नहीं हैं, बेईमानी के मजबूर हैं।
- 50:11हुक्म में अंदर सब को बाहर हुक्म में न कोई नानक हुक्म में जे वो
- 50:17जे बड़ा प्यारा संत है। बाबा नान कहते हैं कि जिसने ये
- 50:22बूझ लिया बूझ लिया का मतलब मान लिया नहीं होता।
- 50:28ये किशोरियां कहती फिरती हैं मान लो मान लो मत, ये खतरनाक है ये
- 50:36बाद में लेदर के वो महंगे महंगे। एअरपोर्ट पे पकड़े जाएंगे।
- 50:46कहानी सुनाने के लाखों ले लेती हैं कहानी सुनाने के सत्य उनमें
- 50:51होता नहीं और सत्य सुनाने वालों को आप दंडित करते हो।
- 51:00कमेंट करते हो भाई इतने ही पहुँच गए हो तो मत सुना करो ना न कहुक्म
- 51:07जे बुझे ता हूँ मैं कहे न कोर बाबा जड़ पकड़ते हैं मैं इस एक
- 51:16अर्थ पे क्यों खड़ा हूँ इतनी देर से?
- 51:21इन दो शब्दों के साथ मैं क्यों चिप के गया हूँ?
- 51:24क्योंकि ये तुम्हारे जीवन मरण का सवाल है, ये दो शब्द किसी तरह
- 51:33तुम्हारे अंत में उतर जाए तुम्हारे प्राणों को बेंध के तीर
- 51:36की तरह। तुम्हारे हृदय को व्यर्थ के भीतर
- 51:40उतर जाए इसी कोशिश। में।
- 51:45ठीक किया। गुरनाम ने यह प्रश्न पूछ के।
- 52:00बाबा कहते हैं कि अगर तुम अपनी आँखों से देख लो, वह ही चलाता है
- 52:11तो तुम्हारा भ्रम खत्म हो जाएगा और तुम भ्रम के कारण ही दुखी हो।
- 52:16तुम्हारे दुख का कारण इल्ल्यूशन है।
- 52:21भ्रम टूट जाएगा तुम्हारे देखने से सत्य असत्य के भ्रम को तोड़ देता
- 52:29है। शब्द को एक एक शब्द को गहरे से
- 52:34समझना तो पैर लग जाओगे। बड़ा मज़ा है, बड़ा आनंद है वहाँ
- 52:45हम तुम्हारे लटके जेहरों को देख देख कर रोते हैं कोई वक्त आएगा
- 52:54तुम भी हमारे बच्चे हो कोई वक्त आएगा।
- 52:59जब तुम हमारी तरह भीतर से आनंदित हो, पुलकित हो के अश्रु धाराएं
- 53:08बहेंगी, विभलता की करुणा के सागर की तरह तुम्हारी आँखें अश्कब
- 53:16आएंगी। कभी ऐसा वेला आएगा?
- 53:23संत तुमसे कुछ मांगता नहीं, वही संत है संत तुम्हें।
- 53:40भ्रम से मुक्त करना चाहता है और संत तुम्हारा भ्रम अच्छी तरह से
- 53:45जानता है कि तुम भ्रम के कारण दुखी हो।
- 53:53ये दो अल्फ़ाज़ बाबा का कौनसा अल्फ़ाज़ है जो तुम्हें भ्रम से
- 53:57मुक्त नहीं करता। एक एक शब्द की चोट और तुम आनंद
- 54:04में चले जाओगे, लेकिन तुम समझते नहीं हो तुम अक्षरों से चिपड़
- 54:08जाते हो और कई बार तो तुम मेरे अक्षरों को ठीक करने में लग जाते
- 54:14हो बाबा आकाश नहीं आगाज़। आकाश नहीं आकाश क्या फर्क कब आया
- 54:24तुम व्याकरण को शुद्धि देखने आए थे या आनंद लेने आए थे?
- 54:33ऐसे ऐसे श्रावक भी मेरे पास होते हैं।
- 54:39हुक्म मैं अंदर सोको फिर सुन लो, इसी हृदय में उतार लो, मैं बाधित
- 54:46हूँ कि किस तरह ये उतर जाए, ये पंक्तियाँ जपजी की।
- 54:55तुम्हारे भीतर उतर जाएं और तुम चल पड़ो और देख लो अपनी नग्न आँखों
- 55:02से और तुम्हारे सब भ्रम के जाले टूट जाएं, ये काई हट जाए, भ्रम की
- 55:09स्वच्छ पानी के निर्मल पानी के दर्शन हो जाए, तुम्हारी प्यास हो
- 55:14जाये। हुक्म में अंदर सब को बाहर हुकुम
- 55:21न कोई, ये सत्य की बात है, कोई गाने के शब्द नहीं हैं ये ये वो
- 55:31सत्य। जो अंतरतम गहराइयों में झाँका
- 55:35गया, देखा गया संतों के द्वारा जिन्होंने अपने अहंकार को ध्वस्त
- 55:46किया, अग्नि में बसम किया और वहाँ पहुंचे राख बने पहुंचे।
- 55:56और अपनी नगण आँखों से देखा इसलिए कबीर कहते हैं तुम कहते कागज की
- 56:02लिखी और मैं कहता आँखों देखी मैं आँखों देखी।
- 56:10कहता हूँ तुम्हें। आँखों देख लोगे तो लटके हुए चेहरे
- 56:20बड़े आनंद से हो जाएंगे। बड़ी खुशहाली है बड़ी मौज मस्ती
- 56:34है झूमोगे वहाँ जाकर ज़रा एक बार। बाबा की बात मान लो जिसने माना वह
- 56:45आनंद के गहरे समुद्र के तले में उतर गया।
- 56:50जिसने नहीं माना वह किनारे पे बैठा बैठा, दुखी होता रहा।
- 57:02हुक्म अंदर सब को तुम कहते हो, मैं करता हूँ बाबा कहता है नहीं,
- 57:08तुम नहीं करता हो बाबा ने देखा अपनी आँखों से तुम्हें खोपड़ी से,
- 57:15तुमने खोपड़ी से अनुमान लगाया हनुमान गलत हो।
- 57:22दर्शन गलत नहीं होता, बाहर हुक्म ना कोई कुछ भी नहीं है जो हुक्म
- 57:32से बाहर हो। मैंने तुम्हें बताई अपनी ज़िन्दगी
- 57:36की बातें हैं। ओह मैंने ज़िन्दगी में अनुभव भी
- 57:40किया। कोई परीक्षा की बात नहीं थी।
- 57:45ये घटित हुआ उसकी ही कृपा और जसपुर वो कृपा कर सच्चा साहब जे
- 57:54नजर करे तेकागो हंस करे कौवे को हंस बना देता है वो।
- 57:59अगर वो कृपा करे लेकिन वो पानी तो पीला दे तुम अंजलि भी तो बांधो
- 58:10तुम झुको भी तो तुम झुकने को तैयार नहीं होते और चाहते हो
- 58:15प्यास बुझ जाए, ये दुविधा है तुम्हारी।
- 58:21सभी धर्म तुम्हें झुकना सिखाती हैं, वो चाहे नमाज़ हो, वो चाहे
- 58:26परिणाम हो, वो चाहे दंडवत परिणाम हो, सभी धर्म तुम्हें झुकना
- 58:32सिखाते हैं, लेकिन तुम झुक नहीं पाते, तुम्हारा शरीर झुकता है,
- 58:37तुम नहीं झुकता है। तुम पोस्चर बना लेते हो, शरीर का
- 58:41झोंकने का अंकार तो और मजबूत हो जाता है, हम झोंके और मजबूत हो
- 58:51जाता है। नानक हुक में जे मुझे जिसने नगन
- 59:01आँखों से ये सत्य देख लिया कि वह ही करता है ये चाँद तारे, ये
- 59:07हवाएं, ये पत्ते, ये खुशबू दार फूल ये आनंद की घड़ियाँ।
- 59:14यह प्यार की बारिश सब उसके कहने से होती है।
- 59:28वह ना चाहे तो कुछ नहीं होता, वह चाहे तो दिन निकलता है, वह चाहे
- 59:36तो रात होती है। उसकी इच्छा के विन वाक्य ही पता
- 59:42नहीं हिलता, लेकिन तुम्हारी बुद्धि इस बात को मानने को तैयार
- 59:46है, इसलिए मैं कहता हूँ बुद्धि बड़ी से बड़ी रुकावट है, इतना
- 59:52आनंद तुम झरने पी सकते थे आनंद। बुद्धि ने तुम्हें मार दिया
- 1:00:01बुद्धि ने तुम्हारा चैन सबर, सोरोस खुशी सब छीन ले।
- 1:00:11तुम्हारी बुद्धि सबसे बड़ा रोड़ा है।
- 1:00:13तुम्हारी अपनी ही बुद्धि नानक को हुक्म है।
- 1:00:20जे पूछे देखिये, नानक कहते हैं, देखना पड़ेगा अपनी आँखों से मानने
- 1:00:27वाने से कुछ नहीं होगा। मानने से शुरुआत हो सकती है,
- 1:00:32लेकिन शुरुआत मंजिल नहीं होती। शुरुआत मार्ग के पहले छोर से करनी
- 1:00:42होती है और मंजिल मार्ग के अंतिम छोर पे होती है।
- 1:00:49जो बूझ लेता है इस बात को आँखों से देख लेता है होम में कहे न कोई
- 1:00:57वह फिर नहीं कहेगा कि मैं करता हूँ अकर्ता बनने की कोशिश मत करना
- 1:01:04इस सत्य को देखने की चाहत करना कैसे देख लूँ मैं भी सत्य।
- 1:01:11संत छुपाता नहीं तुमसे कुछ क्योंकि संत जानता है मैंने जब
- 1:01:16देखा अपनी आँखों से वही सत्य है और तुम भी देखोगे तो पाओगे सत्य
- 1:01:21यही है और तुम्हारे भ्रम टूट जाएंगे, लेकिन देखने के बाद।
- 1:01:28तो चलने की कोशिश करो सबसे पहले जो चला वो पहुंचा जिसने खोजा उसने
- 1:01:36पाया ज़ोर न मार मान ज़ोर न राज़ माल मंदसौर आनंद नहीं है।
- 1:01:52राजगद्दियों में माल में मन के शोर में मन का शोर, मन का शोर
- 1:02:02होता है और कुछ भी हो लाउडस्पीकर लगाकर जागरण कर लो, कोई भी नाम
- 1:02:10झपरो कोई भी नाम झपरो। तुम राधे करने से तर जाओगे
- 1:02:15मुसलमान अल्लाह करने से तर जाएंगे सिख वह गुरु करने से तर जाएंगे।
- 1:02:24सबकी मान्यताएँ हैं, लेकिन कोई कुछ कहने से नहीं डरता।
- 1:02:30यह डूबने वाली बेड़िया हैं। नाम कोई जहाज नहीं होता, नाम डुबो
- 1:02:35देता है नाम के जहाज पर भूल के मत बैठ जाना है पार नहीं उतारेगा ये
- 1:02:49कागज़ के जहाज। कागज़ की कस्तियों पे गलती से
- 1:02:54सवार मत पहुंचना डूब जाओगे। ऐसे ही बने रहना ज्यादा बेहतर है।
- 1:03:08ज़ोर न राज़ माल मंदसौर। ज़ोर न सुरती ज्ञान विचार तुम जो
- 1:03:15सुरती लगाते हो, कॉन्सेंट्रेशन करते हो, उसमें भी कोई आनंद नहीं
- 1:03:20है। एक चीज़ को एक एक भ्रांति को।
- 1:03:29पूरे हथौड़े घाणा मार मार के तोड़ते हैं बाबा ज़ोर न सुरते तुम
- 1:03:36सुरते लगाते हो मुझे रोज़ फ़ोन आ जाते हो बाबा ध्यान लगाएं किसपे
- 1:03:43मैंने कहा किसी पे नहीं ध्यान को खुला छोड़ दो।
- 1:03:48यह शक्ति है जहाँ जाए जाए तो फिर फिर तो यह गलत मार्ग पे ले जाएगी
- 1:03:55कैसे ले जाएगी तुम इसके पीछे मत चलो ना गलत मार्ग पे तुम चलोगे तो
- 1:04:03ले जाएगी नहीं वासन नहीं तो उठेगी।
- 1:04:07सबके उठती हैं लेकिन संत वासना को नचाता है और तुम वासना तुम्हें
- 1:04:16नचाती हैं। इतना ही फर्क होता है अल्फ़ाज़
- 1:04:20उल्ट पुल्ट किए। ज़ोर न सोरती।
- 1:04:26तुम कॉन्सेंट्रेशन करते हो, उसमें आनंद नहीं है बात सुनो आनंद की
- 1:04:31बात कर रहे हैं बाबा ज़ोर शब्द का अर्थ मैंने बहुत अर्थ पढ़े हैं
- 1:04:39संतों के लेकिन मुझे आनंद शब्द नहीं मिला कहे।
- 1:04:47ज़ोर का बल पावर नहीं यहाँ ज़ोर का मतलब आनंद है ज़ोर न ज़ोर न
- 1:04:59सुरती ज्ञान विचार बड़े ज्ञान इकट्ठे किए तुमने।
- 1:05:07बड़े विचार करते हो, तुम इस तुक का ये अर्थ है?
- 1:05:15इस तुक का ये अर्थ है इस तुक का ये ज्ञान है।
- 1:05:20पापा कहते हैं कोई इसमें आनंद नहीं है छोड़ दो इनको।
- 1:05:24जिसमें आनंद नहीं, बाबा कहते हैं उनको छोड़ दो।
- 1:05:31ज़ोर न सुरती ज्ञान, विचार ज़ोर न जुगती, छोटा संसार ये सब जुगतियाँ
- 1:05:40हैं। आसन लगाओ, प्राणायाम करो, मतलब
- 1:05:48स्यासन करो, चक्रासन, करो सब झुकतियां, नाचो गाओ झूमो खेलो,
- 1:06:05कूदो सब झुकतियां। बाबा कहें थे कोई युक्ति काम नहीं
- 1:06:11पड़ेगी, बाबा सब युक्तियों पे पोछा फेर देते हैं।
- 1:06:18यहाँ विज्ञान भैरव तंत्र की 112 विधियों हैं जो शंकर ने बताईं।
- 1:06:25शिव ने बताईं। उन पर पोचा स्वाइप ऑफ कर देता है।
- 1:06:32इसमें कोई ज़ोर नहीं आनंद नहीं है, इनमें छोड़ दो इनको बड़ी
- 1:06:44हैरानी की बात है, बड़ी क्रांतिकारी शब्द है।
- 1:06:49ज़ोर न झुकती छोटे संसार तुम्हारी किसी भी जुक्ति में नाम भी एक
- 1:06:54जुगती है। सुमरन भी एक जुगती है, अखंड पाठ
- 1:07:01खुलाना भी एक जुगती है। तुम इनको बिगाड़ लेते हो।
- 1:07:11शुरुआत इनकी किसी और ढंग से थी। स्मरण उसकी याद आए।
- 1:07:17उसको स्ममरण में डाल दिया गया। ध्यान रखना स्मरण का मतलब उसकी
- 1:07:24याद आए जैसे प्रेमिका कोई याद आती है प्रेमी की।
- 1:07:30और प्रेम को याद आती है प्रेम का हीर को राँझा और राँझा को हीर याद
- 1:07:35आती है। ऐसे याद आई वह सुमन और सुमरण जो
- 1:07:42तुम करो जो हीर बैठ के राँझा राँझा कर है।
- 1:07:48जो रांझा बैठ के हीरे हीरे करे, वो तुम करते हो वो सुमरण जो याद
- 1:07:54आता है, सोता है वह स्मरण स्मरण को बिगाड़ दिया गया।
- 1:08:00बस मनुष्य की यही मुड़ता है। मनुष्य हर उसकी कृपा को कर्मों
- 1:08:06में डाल लेता है। तुम क्रियाएं में डाल लेते हो है,
- 1:08:10उसकी कृपा उसकी कृपा से याद आता है वो संत कभी कभी मुझे मेरे घर
- 1:08:21वाले कहते हैं आप अचानक कैसे कर लेते हो, किसको करते हो, होता तो
- 1:08:25कोई है नहीं। और कौन?
- 1:08:29है उसके सिवाय मैं जब। ऐसे कर लेता हूँ।
- 1:08:36बस उसकी याद आई है तो मैंने प्रणाम।
- 1:08:41कर लिया। यही।
- 1:08:43कहा था तुलसी ने। सियाराम में।
- 1:08:50सब जग जानी, कर्म प्रणाम ज़ोर जुगबानी।
- 1:09:06राम सियाराम। सियाराम ज राम, सियाराम।
- 1:09:20सिया राम जय जय। राम वो याद आता है।
- 1:09:26याद आ रही। है तेरी याद आ।
- 1:09:28रही है। तुम याद करते हो, लेकिन जैसे।
- 1:09:34याद के बाद वादा करते। हैं वो याद आती है।
- 1:09:40समन? को तुमने सुमरण बना लिया।
- 1:09:43तुमने शब्दों का अर्थ का अनर्थ कर दिया है इसलिए दुखी हो बाबा कहते
- 1:09:49हैं तुम। दुखी मत हो।
- 1:09:52बाबा से तुम्हारा दुख देखा नहीं जाता है छोड़ो।
- 1:09:58क्यों छोड़ो 112 विद्या क्यों? छोड़ो ये शिव।
- 1:10:03ने बोली, क्योंकि तुम। अर्थों का अनर्थ कर दोगे?
- 1:10:08बाबा अच्छी तरह से जानते हो? शिव ने गलत नहीं की।
- 1:10:15लेकिन बाबा अच्छी। तरह से जानते हैं कि।
- 1:10:18तुम ऐसे मूर्ख हो कि तुम विधियों। को गलत करने लगोगे।
- 1:10:26विधियों, कुछ और। कहती होंगी, कहती होंगी।
- 1:10:29शमण तुम करोगे सुमरण इसलिए बाबा कहते छोड़ दो।
- 1:10:33इनको नहीं। है इसमें कुछ।
- 1:10:35बाबा एक बड़ा सौखेला रास्ता बताते हैं तुम्हें?
- 1:10:42बड़ा सुंदर रास्ता है वो सीधा सीधा रास्ता।
- 1:10:49चलो आगे चले ज़ोर नजुगती छोटा संसार।
- 1:10:55किसी भी युक्ति में कोई ज़ोर नहीं है।
- 1:10:59जीस हाथ ज़ोर कर वेख। सोई बाबा कहते हैं तुम्हारे हाथ
- 1:11:05में कोई ज़ोर नहीं है जिसके हाथ में ज़ोर है जिसने तुम्हें जो
- 1:11:12आनंद। तुम्हें दे सकता।
- 1:11:13है वह कौन? वह करता करतार सजनहार, वह
- 1:11:21क्रिएटर। जीस हाथ जोड़कर वेख।
- 1:11:28होये। जो तुम्हें आनंद प्रदान कर सकता।
- 1:11:35है, वह तुम्हारे जर्रे जर्रे में साक्षी की तरह विद्यमान है जिसे
- 1:11:45हथजोर जो तुम्हें आनंद प्रदान कर सकता है।
- 1:11:50कर विख करतार भी वही है और देखता भी वही है कर विख सोई वो ही करता
- 1:11:59भी है और वो ही देखता भी है। अब इसका अर्थ अनर्थ कर लिया।
- 1:12:03होगा क्या करें इसको? कुछ और का और ही।
- 1:12:07मिलता है इसका। अर्थ।
- 1:12:10बाबा कहते किसी चीज़? में कोई ज़ोर नहीं जो।
- 1:12:13मैंने पहले बोला तो। किसके हाथ में आनंद है जीस हाथ
- 1:12:22जो। जिसके पास आनंद है, जो आनंद का
- 1:12:29समुद्र है। कर करता।
- 1:12:35है वो वो ही करता है तुम। नहीं।
- 1:12:40विखे वही साक्षी सोई। जिसके हाथ।
- 1:12:46में आनंद है, जो तुम्हें आनंद दे सकता है।
- 1:12:51वह ही करदार। है।
- 1:12:54और वह ही विख। है वही साक्षी।
- 1:12:57है। नाणक उत्तम नीच न कोई।
- 1:13:07बाबा कहते हैं, वह तुम्हें वहाँ पहुंचा देगा।
- 1:13:13तुम क्या करो जिससे तुम वहाँ पहुँच जाओ उसके।
- 1:13:19हाथ में आनंद है। किसी पदार्थ।
- 1:13:23में आनंद नहीं। ओहदे में नहीं, मान सम्मान में
- 1:13:28नहीं, किसी युवती में नहीं। है जो तुम्हें आनंद दे।
- 1:13:36सकता है। जीस हथजोर कर वह करता है वेख वह
- 1:13:44साक्षी है सोई वही साक्षी है और वही करता है।
- 1:13:50नानक। उत्तम।
- 1:13:53निशा न कोय, वो ही करता है वो। ही देखता है।
- 1:13:59उसके हाथ में आनंद है, वह आनंद दे सकता है और वह आनंद देगा तुम
- 1:14:08क्या। तुम अपने जीवन की नैया।
- 1:14:15जो कि तुम्हारी है नहीं वास्तव में, लेकिन क्योंकि तुम्हें यह
- 1:14:21भ्रम हो गया कि यह जीवन मेरा है, मैं हूँ यह जीवन तो कोई बात नहीं
- 1:14:26तुम्हारे ही अल्फाज़ व्रत लेते हैं।
- 1:14:31तुम अपने जीवन की नैया की परिवार। उस विराट के हाथ।
- 1:14:37में दे दो जो करता। भी है और जो साक्षी भी है।
- 1:14:44फिर वो तुम्हें पहुंचा देगा जहाँ। जहाँ आनंद ही आनंद है।
- 1:14:51नानक अगर। तुमने अपने जीवन की पतवार उसके
- 1:14:57हाथ में सौंप दी है तो पहले से ही।
- 1:15:01उसके हाथ में तुम्हें भ्रम। है कि मैं चलाता हूँ।
- 1:15:05लेकिन बाबा कहते। हैं कोई बात नहीं।
- 1:15:09तुम सत्य को नहीं। जानते, क्षमा योग्य हो।
- 1:15:13कोई अपराध नहीं किया तुमने जितना एक अपराध।
- 1:15:17किया है उसका फल तुम्हें? मिल रहा है।
- 1:15:19दुख के रूप में ये लटके हुए चेहरा हैं।
- 1:15:25ये चारों तरफ 17 ही त्रा है। ये दीन दुखियों की पुकार है।
- 1:15:34या लुटे हुए लोग या। पीटे हुए लोग हर जगह चिल्लाते वे
- 1:15:41दीर्घ स्वरों में। चितकार करते हुए ये फल मिल तो रहा
- 1:15:47है तुम्हें किसी बेरूखी। का परिणाम ही तो है।
- 1:15:53तुमने एक। गलत सत्य को।
- 1:15:55माना जो सत्य नहीं था उसके कारण तुम परेशान हो।
- 1:16:02बाबा कहते हैं अपने। जीवन की बागडोर।
- 1:16:06नैया की पतवार उसके हाथों में सौंप दो, वैसे।
- 1:16:14तो पहले भी पतवार उसके। हाथों में है, बेक करता है।
- 1:16:18पहले शब्द में ही। बाबा बोलते हैं जब जी।
- 1:16:21के कुंकार सतनाम कर्ता पुरख। और फिर बार बार तुम्हें याद कराते
- 1:16:29हैं के। कर्ता वो है, तुम नहीं।
- 1:16:34जीस हथजोर जो आनंद। तुम्हें दे सकता है।
- 1:16:39कर वह करता है विख है वो शख्स है सोई वही है जो देखता है जो करता
- 1:16:50है नानक उत्तम निशा न कोई उसके हाथों में अपने जीवन की पतवार
- 1:16:56सुनता हूँ। तो वह तुम्हें वहाँ।
- 1:17:01ले जाएगा जहाँ सब। वेद खत्म हो जाता है।
- 1:17:06न कोई उत्तम रहेगा, न कोई नीचे रहेगा, न कोई छोटा।
- 1:17:12होगा न कोई बड़ा होगा। न कोई ब्राह्मण होगा।
- 1:17:16न कोई शुद्ध होगा कोई भेदना। होगा जहाँ जाके तुम अभेद।
- 1:17:22हो जाते हो इसे अद्वैतवाद कहते हैं जहाँ एक रह जाता है एकंकार
- 1:17:31यहीं से शुरू किया बबन। और बार बार यही ले आते।
- 1:17:36हैं। बस बांचने वाला चाहिए समझ नहीं
- 1:17:40आती तुम्हें उसके हाथ में सौंप दो अपने पतवार को तुम में इतनी समर्थ
- 1:17:49नहीं कि तुम एक ज़रा बना दो। लेकिन फिर भी खुद।
- 1:17:54को तुम करियर डरमाने। बैठे हो ये गलत है।
- 1:18:02तुम ये सारा ढांचा सौंप दो उसके हाथ।
- 1:18:04में अपने जीवन की पतवार दे दो उसके हाथ में।
- 1:18:10वह सच्चा साहब तुम पे नजर। करेगा और तुम्हें कुएं से हंस बना
- 1:18:16देगा। नानक।
- 1:18:21उत्तम नी से न कोय। जब तुमने अपनी पतवार उसके हाथ में
- 1:18:26सोंप दी तो वह तुम्हें अभेद में प्रवेश दे देगा।
- 1:18:31जहाँ तुम्हारे लिए कोई। उत्तम न होगा अब कोई।
- 1:18:34नीचे न होगा भेद दृष्टि खत्म हो जाएगी सब तरफ आनंद ही आनंद होगा
- 1:18:40आनंद ब्यो मेरी माए धन्यवाद। ओखे बेले को नहीं।
- 1:19:04न बाबुल। वीर न।
- 1:19:06माँ। ओखे बेले को नहीं।
- 1:19:16ना? बाबुल वीर ना मावा।
- 1:19:22सबय तक का दे व दे कोई ना पकड़े। कोई न पकड़े वो।
- 1:19:36रखे चरना दे कोई न पकड़े वो रखे चरना दे कॉल मेरा वाले।
- 1:19:52वालिया। मेरा।
- 1:19:54वालिया मेरा वालिया रखीं चरना, देखोल मेरा वालिया सांईया सांईया
- 1:20:10रखें। चरना दे कोल मेरा वालिया सांया
- 1:20:18सांया कि चरना दे कोल मेरा वालिया।
- 1:20:32सतनाम श्रीवाहेकरों धन्यवाद।