Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Sep 25 - मैंने 18 साल पहले एक मन्नत मांगी थी! किसी कारण मन्नत पूरी नहीं कर पाया, अब क्या करूँ?
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- 0:19पर भौजी गुरुदेव आपके चरणों में असंख्य नमन।
- 0:31प्यारे बाबा जी। मैंने जॉब।
- 0:34लगने से पहले। मन्नत मांगी थी।
- 0:40दो जगह से एक तो राजस्थान में जहाँ हम पहले जाते थे।
- 0:51सीकर। नीम का।
- 0:52थानो। और दूसरी।
- 0:57वैष्णो देवी की मन्नत मांगी थी कि मैं।
- 1:06पहली सैलरी। चढ़ाऊंगा लेकिन आज तक नहीं चढ़ा
- 1:13पाया। और।
- 1:16मुझे जॉब लगे। 18।
- 1:17साल होने वाले। हैं मालिक अब अपनी कृपा के और
- 1:25अपनी। शरण में ले लिया।
- 1:28मैं क्या करूँ? देखो कुछ समझ में आता।
- 1:32एक दो बार। पैसे निकाल कर भी।
- 1:34रखे। लेकिन ऐसे हालात बन जाते।
- 1:39क्योंकि खर्चा आ जाता है। मेरा मार्गदर्शन करें।
- 1:49कोटी कोटी नमन यो जो। जाऊं जाऊं तनु भक्तः श्राद्धार
- 2:01चितम इक्षिती तश्य तश्य अचलां सतांमेव वैदता में हम।
- 2:25इस सृष्टि। के कण कण।
- 2:26में मैं ही विज्मान हूँ, दुजा कोई नहीं।
- 2:44एक नाता राम जी से दूजा नाता तो मेरे सिवा यहाँ कोई भी नहीं सब
- 3:01मेरे ही बाल बच्चे हैं। ओह, वैष्णो देवी हो वो राजस्थान
- 3:17में, सीकर में जो तुमने। किसी की भी।
- 3:27मन्नत मांगी मेरे से जुड़ा। मेरी ही अंश।
- 3:41मेरी ही बाल विच पहली बात तो। घबराना छोड़ दो जब मेरी शरण में आ
- 3:57गए हो और तुम्हें घबराने। की आवश्यकता।
- 4:05अब किसकी? सृण में जाके।
- 4:18और जीस जिसकी भी तुमने। मन्नत मांगी।
- 4:23एक रूप में। मेरी ही मन्नत मांगी क्योंकि
- 4:28दूसरा यहाँ कोई है ही नहीं। ऐसे ही चलते रहो।
- 4:41चलते चलते तुम पाओगे। एक ही है।
- 4:53एको ब्राह्मण। द्वितीय नाश्ते, दूसरा कोई।
- 4:58और वो तुम हो तत्व मसीह स्वेत को। चलते चले जाओ इसी तरह।
- 5:08चलते चले जाओ। और अच्छा किया तुमने पैसे जुटाए।
- 5:18भी? चढ़ाने के लिए।
- 5:22और वो खर्च? हो गए।
- 5:27ओके? गौर से।
- 5:27देखोगे तो तुम्हारे यहाँ कुछ भी नहीं।
- 5:37कोई कितना भी अपना मानता। रहे अपनी।
- 5:39गद्दियाँ अपने पैसे, अपना धन, अपना अंबार, अपने रथ घोड़े, अपना
- 5:45परिवार मकान। किसी का कुछ नहीं है।
- 5:57सब सब। मेरा इसलिए बिल्कुल।
- 6:06चिंता मत करो, राम कक्कर। जीस जिसकी भी।
- 6:17तुमने मन्नत मांगी है जो जो जाम जाम।
- 6:24तस्य तस्य। अचलाम संतान और मैं ही था और मैं
- 6:37ही हूँ जैसे मैं कहता हूँ। ये पांव का अंगूठा मैं।
- 6:50हूँ यद्यपि सिर्फ। पांव का अंगूठा ही नहीं।
- 6:56और अगर। तुमने यह गलती कर ली के।
- 6:59पांव के अंगूठे को ही मैं समझ लिया तुमने?
- 7:03मुझे तुमने पांव का। अंगूठा ही समझ।
- 7:05लिया। तो तुम सिर्फ महज।
- 7:07गलती खाये हो इसमें पाप कोई? नहीं।
- 7:13जबकि ये सत्य। है कि पांव का अंगूठा मात्र।
- 7:17मैं नहीं हूँ। अखांडे विषय में लोग।
- 7:25कुछ है? और सब मैं हूँ और सब मेरा है।
- 7:35और उसी रास्ते पे, मैं तुम्हें। ले के चला।
- 7:44उन्हीं खुशहालों की शादियों में चलो मेरे।
- 7:47साथ। सितारों में।
- 8:24चलो मेरे संग। समय तुम कहीं मेले में भटक गया?
- 8:31हो कोई पाप नहीं किया। कोई गुनह नहीं।
- 8:33किया महज। एक गलती है।
- 8:38और ह्यूमनिस्टु है। जो अलग हो गया परमात्मा से वह
- 8:43गलती। करेगा ही करेगा।
- 8:48और जैसे ही वो अलग हुआ। अंग परमात्मा के साथ जुड़ गया।
- 8:54उसकी सारी गलतियाँ क्षमा हो जाएंगी।
- 8:57यही कहती हैं कुरान। तू घबरा मत मैं बड़ा त्यार लूँ,
- 9:09मैं रहमो करी। मैं बड़े से बड़ा।
- 9:14पाप भी तेरा माफ़। कर चुका हूँ।
- 9:17तू बस तौबा कर ले। जो शरीर।
- 9:30का अंग। शरीर से अलग।
- 9:32हुआ तो महज। उसे जोड़ ले इसे ही रोग कहते हैं।
- 9:44कर्मकांड में मत उलझा ये ब्राह्मणों के लोभ के।
- 9:51कारण वैष्णो। देवी मेरी पुत्री।
- 9:59है मेरा ही अंश हे नवधुरु। जिनकी तुम पूजा।
- 10:17करते हो? मेरे ये बालविच है।
- 10:28इनको मुझसे अलग मत जानो जीस। जीस रूप।
- 10:35में भी तुमने उसकी मन्नत। मानी उस तुम्हें ज्ञात नहीं है,
- 10:42सिर्फ। ओह मन्नत तुमने मेरी ही।
- 10:45मानी। और ये भ्रम।
- 10:51आज तक का है। उस दिन टूट जाएगा।
- 11:01जीस दिन तुम मेरे उस अखंड असीम। अस्तित्व के भीतर।
- 11:09समा जाओगे, एकाकार हो जाओगे, अभी तुम मुझसे जुडाव।
- 11:16प्रयास करो, प्रयास करो कि कैसे टूटा हुआ ये।
- 11:23अंग। शरीर के साथ जुड़।
- 11:27जाये। योग हो जाए।
- 11:34और जैसे ही योग होगा तो। हमारे सारे गुनाह हम आपको जानते
- 11:39हैं ये कोई। गुनाह है मन्नत।
- 11:45मांगली ठीक? और।
- 11:50वैसे भी मन्नत? थी के पहली तो पहली तो गई।
- 12:00पहली सैलरी रहूंगा। पहली सैलरी तो कब किया होगा?
- 12:04सही मन तो तुम्हारी। तो पार लगती अगर तुम पहली और फिर
- 12:10किसको चिढ़ाते हो। क्या आंधी आंधी करते है?
- 12:18आदि वेशनों को चढ़ा देते है। आदि राजस्थान में चढ़ा देते हैं।
- 12:26तो फिर? भी तुम्हारी मन्नत।
- 12:27पूरी न हो क्योंकि बाकी मन्नतें ही गलत होती हैं।
- 12:39इस जिसने। भी मन्नत मांग।
- 12:40ली। अबराम?
- 12:45मन्नत तो मेरी ही है। और मैं बड़ा दीयालु।
- 12:53सब मेरा। दाता दे लेंदा थक प तुम थक जाओ।
- 13:02खाते खाते थक। जाओगे लेकिन।
- 13:05मेरा भंडारा नहीं। झुकेगा जुगा जुगांतर?
- 13:09खाय खाय। मेरा पथ रौशनी से भरा ही।
- 13:19रहेगा। तुमने किसी की भी मेरे पास रोज़
- 13:30आते हैं, मैंने लालम वाले? पीर मैंने खालम वाले।
- 13:34पीर इसकी। मन्नत मांगी चिढ़ाई है?
- 13:39मैं कभी कभी। बीमार हो जाया करता हूँ यहाँ के
- 13:44सर मारने वाले थे। चेला माता उसके पास।
- 13:48चली जाती है। अब उनको पता होता है किस किस से
- 13:53देवी। देवताओं को यह मानते हैं देवी
- 13:56देवताएं तुम्हारे भ्रम हैं। हर बार कह।
- 14:00देते हैं। गुड़गांव।
- 14:01माली माता। उसकी तुम्हारे ऊपर।
- 14:15चाय है वो कोपी तो हुई है। तो माँ।
- 14:23इन्हीं के लिए शो में पड़ी रहती है मैंने मतों को।
- 14:29समझाया माँ। इनसे मैं निपट।
- 14:33लूँगा तू फिक्र मत किया कर। नहीं, मैं।
- 14:39चेले से कुछ के आई थी तू लाख कुछ के आई।
- 14:43इनसे मैं निपट। लूँगा माथे तू आराम कर, घर में
- 14:48बैठ कर। वृद्ध हो गई है।
- 14:52अब तू गुड़गांमा वाली का? पीछा छोड़ दे।
- 14:55इनसे मैं निपट लूँगा, ये मेरे बाल बच्चे हैं।
- 15:00मेरे घर में। आकर तो बाहर ही निकालती है।
- 15:02गुड़गांव में वाली। माता।
- 15:06तो उसको बैठ कर। उसको पता नहीं है घर।
- 15:15माँ तो और घबरा। गई, नहीं तो बच्चा पागल हो गया।
- 15:18मेरा बातें तो पागल वाली है आपको कभी कभी लगते होंगे कृष्ण।
- 15:24पागल। जो ऐसी ही ऐसी बातें करते।
- 15:29हैं। धर्मों को छोड़।
- 15:33दे मेरी शरण में आजाए। हम तुम सर्वपापित।
- 15:36हो मोक्ष। यामी माँ सूच तुम्हे पागल जैसे
- 15:40लगेंगे। क्योंकि जो खोपड़ी के पार हो जाए।
- 15:45समझ में। ना आए, वो तो पागल है या या
- 15:49भगवान। तुम जनता मत करो।
- 16:02तुम मज़े। से रहो ये सारी मन्नतें मुझे दे
- 16:11दो। मैं संभाले सारे।
- 16:24संसार की मन्नतें। मैं अकेला।
- 16:27संभालना तुम छोड़ दो मुझ। पे तुम जश्न।
- 16:35मनाओ जिंदगी जीने। के लिए है।
- 16:41यह ऋण चुकाने के लिए नहीं होता। और तुम्हारे ऊपर कोई।
- 16:45ऋण है भी नहीं, तुम्हें जन्म मिला है ज़िन्दगी मज़े से जीने के लिए।
- 16:50जी। कोई बाधा है, तो।
- 16:56मुझसे पूछो इनसे मैं ये पूछ। लूँगा इनके ना चिंता करो।
- 17:05नहीं तो सभी मेरे बाल। अच्छे हैं।
- 17:08सांज ढली मेरे पांव तो बात है तो मैं इनकी फिक्र ना।
- 17:15करो, मैं समझा दूंगा। और ध्यान रखना, मैं पागल नहीं
- 17:30हूँ। हमारे शहर में दो राम लीलाएं होती
- 17:44थीं, एक बस स्टैंड। वाली एक।
- 17:48वाली गंगा राम मैं दोनों में ही श्रीराम।
- 17:53जी का रोल कर लेता था। यहाँ भी क्या भेद?
- 17:57दिखाना। अभिनय तो ही कर लो।
- 18:04इधर कर लो ओके उधर कर लो तो किसी बात के ऊपर बस स्टैंड।
- 18:13वाली रामबीला में एक महानुभाव हुआ करते थे, उनका नाम था।
- 18:18बल देगा। यहाँ बलवंत बाबा।
- 18:20सिर वाले हुआ करते थे, उनके भाई थे।
- 18:23वो शायद कार वगैरह चलाया करते थे, को बात चली।
- 18:31मुझे याद नहीं है अब। क्या चली बात?
- 18:35चली श्याम बाबा की मैंने कहा श्याम काका की बात करता है।
- 18:39कहता नहीं है। श्याम बाबा की मैंने कहा श्याम
- 18:43काका? मेरे तो काका है, बच्चे हैं मेरे
- 18:47तो उसकी तो आँखें। फट गयी।
- 18:54आँखें। फट के गई।
- 18:57आँखें। लाल मिर्ची जैसी लाल हो गई और लगा
- 19:02सिर। बगाने मैं उजाड़ दूंगा, मैं
- 19:07विध्वंस कर दूंगा, पता नहीं क्या? शुक्र है मैंने कहा देख बात सुन
- 19:13ज़ोर घना है। एक थप्पड़ मार।
- 19:15दूंगा। तो चारों।
- 19:19खाने चित हो जाएगा तू? आप में आजा कहता श्याम।
- 19:25बाबा बोल रहा हूँ मैंने कहा कोई? बात नहीं।
- 19:31तू जो कुछ करना है तू कर ले। ये सामने खड़ा बाद में करना बाद
- 19:36में कर ले। सात दिनों बाद उसका एक्सीडेंट
- 19:40होगा मेरे को। ये श्याम काका?
- 19:46को मानने वाले ऐसे ही हुआ करते हैं।
- 19:50बात। का सही मतलब नहीं समझते।
- 19:54इसके द्वार के ऊपर नाक। रगड़ते मर जाए।
- 19:58इस चहत में क्या हम धनपति हो जाएं?
- 20:02लेकिन बात तो। कुछ और थी।
- 20:04तुमने? श्याम बाबा के चरित्र से तो को
- 20:06सीखा नहीं, श्याम बाबा ने जीवन जीया।
- 20:14और जीवन जिया आज भी तुम कहते। हो सीस।
- 20:21के दानी महा दानी जो। बात सीखने वाली।
- 20:28थी वो तो तुमने सीखी नहीं? वो तो चुक गए।
- 20:33कृष्ण के पास गए। मैं महाभारत में।
- 20:36क्या होता है? देखना चाहता हूँ कृष्ण कहते
- 20:41बिल्कुल देख लोगे। चर्मचक्ष्यों।
- 20:43से नहीं देख। पाओगे दिव्य।
- 20:46चक्षुओं से देख। पाओगे और।
- 20:48दिव्य चक्ष्यों के। लिए मुझे।
- 20:50क्या करना होगा? बर्बरी थान का नाम दीपवज्जक्षक।
- 20:59पाने के लिए। अब जब बातों को ध्यान से समझेना
- 21:07तुम्हें। शीश का बलिदान देना होगा।
- 21:10सी सिया ने अहंकार। और तुमने?
- 21:17तो चित्र ही बिना सीस के। बिना यथार्थता को।
- 21:25तुमने चित्रों में गढ़। लिया यही बेवकूफ़।
- 21:27हुई सनातन। और।
- 21:31सनातन हिंदुत्व में कन्वर्ट हो। गया।
- 21:36यथार्थ। को तुमने चित्रों।
- 21:38में कर दिया। पावर को तुमने शेर पर बिठा दिया,
- 21:45पावर को तुमने उल्लू पे बिठा। दिया।
- 21:47पावर को तुमने गधे पे बिठा दिया। जिसका जी जिसका जी किया उस पर।
- 21:53बिठा दिया तुमने शीतला माता। को गधा दे दिया।
- 21:57लक्ष्मी को तुमने उल्लू दे दिया दुर्गा को।
- 22:03तुमने शेर दे दिया। असली।
- 22:11रस असली तथ्य तुम समझ ही नहीं पाए।
- 22:17बिजली की कोई आकृति होती है विद्युत की पावर की पावर।
- 22:24ये जो पावर तुम्हारे घरों में सब कुछ।
- 22:28पंखा भी ऐसी भी मोटर। भी पंपेबल हीटर भी।
- 22:35इसकी कोई आकृति। होती है।
- 22:37इसकी कोई सवारी होती है और सवारी तो जी।
- 22:41और बिना सवारी के भी आने लग जाएंगी।
- 22:43थोड़ी देर ठहर। ये सवारी है इसकी तार कापर वार
- 22:51विद्युत, कापर वायर की सवारी करके आपके।
- 22:54घर में पहुंचती है। और कोई वक्त ऐसा आएगा?
- 22:58जब सीधी, सीधी ये ट्रांसमिशन हो जायेगा इसका।
- 23:06वहीं हमसे। वो दिन ज्यादा।
- 23:09दूर। नहीं है।
- 23:12वायरलेस सिस्टम जैसे। आज मोबाइल हो गया है।
- 23:19ऐसे ही पावर। कैन बी।
- 23:20कन्वर्टेड कैन बी ट्रांसमिटेड। कैन वी वर्क।
- 23:26कास्ट तो फिर। फिर इसकी कोई?
- 23:35सवारी न रहे। इस महाशक्ति?
- 23:41की सवारी। कोई न रही।
- 23:43आय तो का परवायर है। कल को बिना का परवाह किया।
- 23:49सीधे वहाँ से। हम ब्रॉडकैस्ट करेंगे।
- 23:52और आपके घर पहुँचेंगे? पावर।
- 23:59की कोई सवारी नहीं होती, लेकिन तुमने क्षेत्र बना लिया।
- 24:03उसका कारण। तुम अभी बच्चे।
- 24:07हो? तो जैसे बच्चों।
- 24:10को हम सिखाते हैं कायदा ए एप्पल। ए का एप्पल।
- 24:14से कुछ लेना नहीं। ए।
- 24:18उतना ही एप्पल उतना। ही आँठ का?
- 24:24भी? उतना और सेब।
- 24:26का भी। लेकिन बच्चों को समझाने।
- 24:30के लिए ये। एक सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन
- 24:34अब्रीविएशन दे और तुमने उन्हीं को पकड़ लिया यही गलती?
- 24:42खा गया सनातन। और फिर वो बन गया हिंदू।
- 24:50तो आज। हिंदू धर्म में पागलों की जमात
- 24:54मूर्खों की जमात, जिन्होंने। पिक्चर्स को पकड़।
- 25:00लिया। जैसे बच्चा सेब को पकड़ लिया और
- 25:04बच्चा कहे कि ये है ए। एप्पल ना कहे ये।
- 25:09ये है। ऐसा ही तुमने कर लिया।
- 25:13है। गच्चा खा गए।
- 25:20मेरे सिवा संसार में। कोई कुछ नहीं।
- 25:25तुम लाख कमाते जाओ, लेकिन मेरी मृत्यु अंतिम वेले में तुम्हें
- 25:33दिखा देगी कि तुमने क्या कमाया? मौत इसीलिए ही बनाता।
- 25:39हूँ मैं। तुम देख पाओ बस।
- 25:47सत्य का और जूट का। अंतिम वेला में तुमने?
- 25:52क्या? कमाया क्या बनाया?
- 25:54पता चल जाएगा। बना तो तुम कुछ सत्य।
- 25:56में। चित्रकार मूर्ति।
- 26:01बनाता है तो सामान यहाँ से रॉ मटेरियल यहीं से लेना पड़ता है।
- 26:06चित्रकार भी। स्वयं से कुछ बनाता नहीं है।
- 26:11सिर्फ गढ़ता है। सामान सारा।
- 26:15यहीं से। इकट्ठा किया वृक्ष।
- 26:18यहाँ से लिया रंग यहाँ से लिया। कागज़।
- 26:22पेंसिलर यहाँ से लिया सब कुछ यहीं से लिया या मूर्तिकार माटी?
- 26:27यहाँ से। ली।
- 26:29सारा सम्मान यहीं से लिया, तुम कह देते हो हमने बना दिया नहीं तुम
- 26:35कुछ बना तो सकते हैं यू कैनट ए क्रेडिट एनिथिंग।
- 26:40एंड यू कैनट डिस्ट्रॉय। एनिथिंग तुम मिटा।
- 26:44भी नहीं सकते और तुम बना भी नहीं सकते।
- 26:46तुम कितने असमर्थ। हो असहाय हो उस तल पे?
- 26:58पहुँच जाओ। जीस सतल पर।
- 27:03तुम भी यह जान। सको सब।
- 27:10मैं अहम ब्रह्मस्मा। मैं ही खुद खुदा हूँ, अंडर हक।
- 27:25उस स्तर पर पहुँच जाओ रोज़ स्तर। पर जाने के क्या क्या ढंग है?
- 27:29मैंने सारे बोले वीडियो में सुन लो, आज हूँ।
- 27:37इस आकृति। में।
- 27:39कल आकृति टूट जाएगी। लेकिन मैं।
- 27:45मैं जो आपसे मखातिब हूँ, अब वह सरदार रहूंगा और ऐसा ही।
- 27:51रहूंगा जैसे हूँ, ज़रा भी तबदीली नहीं होगी तो चिंता छोड़ो।
- 28:01ये चिंताएं ही तो तुम्हें निगल जाएंगी।
- 28:06इन चिंताओं ने तो तुम्हारा जीवन नर्क बना दिया है।
- 28:13थोड़े। जागो ये जो।
- 28:16पाखंड लाज दिए हैं इन। ब्राह्मणों ने स्वार्थ बस।
- 28:22पाखंडियों ने लांचियों ने। छोड़ दो इनको।
- 28:29कुछ नहीं है सब हाथ की सफाई और जिसके पास कुछ है।
- 28:36वो मान्यता। नहीं चाहता।
- 28:38दाता दिलहंदा थकपा वह आपसे कभी मानता है कुछ आप कुछ दे ही नहीं
- 28:44सकते। आप।
- 28:45बच्चे का परिपोषण। करते हो?
- 28:51ये जानते हुए कि बच्चा हमें कुछ नहीं लौटा सकता।
- 28:56और। बच्चा जो तुम्हें लुटाएगा।
- 29:00उसका। एहसान तुम कभी।
- 29:01चौंका नहीं सकते। बच्चा जब खिलखिलाएगा।
- 29:08छोटे छोटे नन्हे नन्हे हाथ पर मरेगा जब तुम्हारे भीतर जो
- 29:13हीमोग्लब्न। बढ़ जाएगा।
- 29:16उसकी कोई कीमत नहीं। जो तुम्हारे भीतर?
- 29:19खुशी छा जाएगी बच्चे को। देखकर अपने बच्चे को बोलते देखकर।
- 29:23हास? पांव चलाते देखकर तुम निहाल।
- 29:26हो जाओगे। बच्चा तुम्हें आंतरिक।
- 29:30खुशी दे सकता है और आंतरिक। खुशी से बड़ी सौगात तुम्हारे लिए
- 29:35कुछ भी नहीं है। जब ब्राह्मणों ने तुम्हें दो।
- 29:39दिन दिखा दिया। और बच्चा?
- 29:43तुम्हें हँसी। मुस्कान आनंद।
- 29:47की चहल पहल। गूंज।
- 29:49घर में कलकारियाँ। बच्चे, बच्चे।
- 29:53के बिना घर सुना है। इसलिए माता तड़पती।
- 29:59है जिसके कोई। बच्चा नहीं।
- 30:04जीस घर में बच्चे की गलकारियाँ न कुछें वो घर नहीं।
- 30:11होता।