Latest / Khushei Ki Duniya / The Promise Part 2
Transcript
- 0:00सुहाई गाइस युअर होस्ट कौन दोस्त खुशी इस बेक अगेन विथ पार्ट टू ऑफ
- 0:06दी प्रॉमिस एंड काफी सारे लोगों के काफी डिफरेंट डिफरेंट
- 0:11पर्सपेक्टिव थे कि कुछ लोगों ने कहा कि हम तो अपने पेरेंट्स के
- 0:15साथ हैं या फिर कुछ लोगों ने कहा कि अपने दिल की सुन्नी चाहिए।
- 0:20सब अपनी अपनी जगह ठीक है, कोई अपनी इमोशनल मेच्युरिटी से कह रहा
- 0:24है तो कोई अपने बचपन से या बचपने से।
- 0:27इस कहानी में क्या होता है? वो मैं तुम्हें आज सुनाने जा रही
- 0:30हूँ। चलो तो अपने कानों में लगा लो
- 0:35दुनिया से थोड़े से दूर हो जा लेट मी स्टार्ट दी स्टोरी।
- 0:38अच्छा बता स्टोरी से पहले एक बात बताऊँ क्या हुआ था बताये हम मधु
- 0:42मैं बताये ना फंक्शन दी फैमिली में इट वास् मैं पेरेंट्स जो है
- 0:47मेरे उनकी ट्वेंटी सिक्स्थ एनिवर्सरी थी, तो हम लोग अच्छे से
- 0:51सेलिब्रेट किए काफी वो स्टेज वगैरह पे।
- 0:54जो होस्ट थी उसने यूँ बोला, पता है मैं होस्ट बनने वाली थी पर
- 0:57मेरी आवाज इतनी खराब हो गई थी कि मेरे घर वालों को बताओ कोई और
- 1:00होस्ट रखना पड़ा। समझ रहे हो मेरे होत में और
- 1:03इसीलिए मेरी आवाज बिलकुल बंद थी तो फिर क्या हुआ?
- 1:06उसने स्टेज पे बोला की हूटिंग करने के लिए बोला की हूट करो किसी
- 1:09बात पे? तो एक बार क्या हुआ कि काफी सारे
- 1:12लोग कर रहे थे तो मैंने एकदम से किया ना तो जय से तो मैं बोली और
- 1:16एकदम से मेरे गले से एकदम वो शांत वाली आवाज नहीं आती एकदम ओय एकदम
- 1:23से मेरा गला मैंने कहा यार ऐसा तो नहीं भाई मैं कभी ना बोल पाऊ।
- 1:28मेरे को सच में एक बार को बहुत टेंशन हो गयी थी गन्दी वाली मैंने
- 1:32कहा यार चिल्लाने में ऐसा ना हो की बेटा अब तो तुम निकल लिए बस हो
- 1:35गया तुम्हारा काम और मेरा तो सबसे बड़ा ही हथियार ही मेरी आवाज़ है
- 1:40तो मैंने कहा बेटा अब तो गए और फिर 2 दिन आवाज़ भी नहीं निकली
- 1:43थी। देन जब थर्ड डे मेरी आवाज़ निकली,
- 1:45आई वास् लाइक ओके? थैंक गॉड आवाज़ तो निकली मतलब भाई
- 1:50मैं बहुत गंदा हालत ढक गई थी। आवाज़ निकलेगी भी या नहीं, पर हाँ
- 1:54आप गले में दर्द हो रहा है अभी कंप्लीट्ली फाइन नहीं हुआ अभी गला
- 1:57मेरा पर चलो इसका पार्ट टू में क्योंकि मुझे पता नहीं ना, फिर
- 2:00मैं वापस बिल्कुल सही हो जाएगा तब आउंगी तो मैंने तीन रिकॉर्ड कर
- 2:03लिए दो तब तक काम चल जाएगा जब तक मेरा गला ठीक भी हो जाएगा।
- 2:06तो हो गई रामायण खत्म अब तू अपने कानो में लगा लियो तो चलो कहानी
- 2:11सुनो तो पिछले पार्ट में अपन सुने थे कि निधि एक ऐसी लड़की है जो
- 2:15बहुत अच्छी है, सबकी केयर करती है।
- 2:18बचपन में उसकी माँ ने उसे प्रॉमिस लिया था कि कभी भी किसी के प्यार
- 2:21में नहीं पड़ना, लेकिन जिंदगी और जिंदगी के अलग अलग खेल जिसमें से
- 2:27अब वो एक लड़के से उसका पुराना क्लासमेट जिसे प्यार करने लगी है
- 2:30तो अब उसकी जिंदगी में क्या होने वाला है वो बताने के लिए तो निधि
- 2:38को जब ये रियलाइज हुआ कि वो दक्ष से प्यार करने लगी थी तो उसके दिल
- 2:43में डर था। डर ना सिर्फ अभी उसे इस बात का डर
- 2:47नहीं था कि उसने अपने माँ पापा को प्रॉमिस किया था।
- 2:49उसे डर था इस बात का फिर क्या दक्ष उसके लिए सेम फील करता है और
- 2:55इसे जानने का उसके पास कोई तरीका नहीं था।
- 2:58उसने कभी भी यह प्यार जैसे फीलिंग को अपने आसपास भटकने तक नहीं दिया
- 3:01था, लेकिन इसी वजह से अपनी जिंदगी के उस मोड़ पर जब वो अराउंड साल
- 3:08की थी, उसे अकेलापन महसूस होने लगा था।
- 3:11उसे महसूस होने लगा था की जिंदगी में कोई इंसान ऐसा भी होना चाहिए।
- 3:16जिससे हम वो सारी बातें कर पाए जो माँ बाबा से नहीं कर पाते हैं।
- 3:20बहुत सारी छोटी मोटी बातें, बहुत सारी फनी बातें, बहुत सारी सीरियस
- 3:24बातें, ऐसा इंसान सबके पास होना चाहिए तो कहीं ना कहीं निधि का
- 3:30दक्ष के लिए फॉल करना। उसका एक रीसन ये भी था।
- 3:34उसकी जिंदगी में कभी उसे ऐसा कोई इंसान नहीं मिला था जिसे इतना समझ
- 3:39पाए जितना शायद अब दक्ष समझने लगा था।
- 3:43कहीं ना कहीं वो जानती थी कि इसका अंजाम बहुत बुरा होने वाला है
- 3:49लेकिन फिलहाल के लिए बस वो प्यार में पागल थी।
- 3:53वो चाहती थी उसके टेक्स्ट से उसका मूड सही या खराब हो जाता था।
- 3:58वो चाहती थी कैसे ना कैसे बस दक्ष से बात होती रहे, लेकिन दक्ष का
- 4:04भी और बिहेव्यर से समझ नहीं आता था।
- 4:06कभी वो इतना अच्छा होता कि बस उसी का है मानो और कभी बस एक रूट सा
- 4:12इंसान। जिसके बारे में निधि कभी समझ ही
- 4:14नहीं पाई थी। जानती थी उस स्कूल टाइम से उससे
- 4:18कि वो काफी अच्छा इंसान था। अब थोड़ा सा रूट जरूर लगता था
- 4:22शुरुआत में लेकिन वो था नहीं। लोगों से एप्रोच करने से डरते थे
- 4:26लेकिन एक बार जान जाए तो उससे अच्छा दोस्त नहीं था।
- 4:30लेकिन फिलहाल। जहाँ निधि थी वहाँ उसे समझ ही
- 4:33नहीं आ रहा था कि करे क्या ना तो वह किसी भी और इंसान को इस बारे
- 4:36में पूछ सकती थी और ना ही किसी से डिस्कॅस कर सकती थी।
- 4:41फिर उसके दिमाग में ख्याल आया। अंजलि का अंजलि, उसकी वही दोस्त
- 4:46जिसने कई सालों पहले अपने लवर के साथ अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की
- 4:50थी। उसने उसे फ़ोन मिलाया और उसे
- 4:53बताया कि यार आजकल कुछ अजीब हो रहा है।
- 4:57आजकल मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा है।
- 5:00उसका एक टेक्स्ट आता है तो मुँह पर तो बड़ी सी स्माइल आ जाती है
- 5:05और अगर उसने कोई रूट से बात कह दी तो गुस्सा ऐसा आता है कि मानो उसे
- 5:10ही पीट दूँ। समझ में नहीं आता है कि जिंदगी
- 5:13कहाँ है और तुम जानते हो कि मेरी माँ कैसी है?
- 5:18वो कभी भी प्यार और सबको एक्सेप्ट नहीं करेंगे।
- 5:22फिर भी तुम्हारी तरह जीने को मन चाह रहा है सिर्फ एक बार खुद के
- 5:27लिए सिर्फ एक बार। मुझे नहीं पता कि वो मुझे प्यार
- 5:32करता है या नहीं। मुझे नहीं पता कि मेरा मैसेज
- 5:35देखने के बाद उसके चेहरे पे वो बड़ी सी स्माइल आती है, नहीं,
- 5:38मुझे नहीं पता पता है तो इतना कि मैं उसे चाहने लगी हूँ, मैं किसी
- 5:45को नहीं बता सकती। अंजलि, तुम्हारे अलावा तुम मुझे
- 5:49बताओ मैं क्या करती? तो अंजलि ने उससे कहा कि उससे बात
- 5:53कर लड़के को बता ऐट लिस्ट माना कि अगर ये सब आगे बढ़े ना बढ़े, वो
- 6:00सब आगे की बात है। उससे बात तो कर उसे बता तो सही की
- 6:03व्हाट यू फील फॉर हिं और उसने भी सोचा कि ठीक है आज मैं उसे जाके
- 6:07बता दूंगी। अंजलि का कॉल काटने के बाद उसने
- 6:12लक्ष्य को कॉल मिलाया। हिम्मत चाहिए थी उसका इन्ज़रवेटिव
- 6:16फैमिली में रहने वाली लड़की, जिसे लड़कों से फ़ोन पर बात करना तो
- 6:20दूर टेक्स्ट पर भी बात करना अलाउड नहीं था।
- 6:22वो उसे कॉल पर बात कर रही थी। छुपते छुपाते किसी और दोस्त का
- 6:26नाम लगाते उसने उसे फ़ोन मिलाया। और फिर वो जब उसे बताने वाली थी
- 6:32कि तभी सामने से दक्ष ने कहा कि यार ना मेरी एक कोलीग है, मेरा
- 6:38बड़ा मन करता है उससे बात करूँ उसे वहाँ जानू पर समझ ही नहीं आता
- 6:43है कि कैसे एप्रोच करूँ निधि का ये सुनते ही मानो दिल टूट गया।
- 6:49उसे लगा जैसे उसका दक्ष जो अब तक उसका हुआ भी नहीं था।
- 6:53पहले ही उससे किसी ने छीन लिया। वह चाहती थी कि कुछ वक्त के लिए
- 6:58ही साहिब जी ले, हंस ले, खेल ले, प्यार में पड़ ले।
- 7:02अरे ये क्या दक्ष तो शायद अब किसी और का हो जाएगा और उसका क्या?
- 7:10ये बात सोचते सोचते निधि ने फिर भी कैसे ना कैसे उस कन्वर्सेशन को
- 7:13पूरा किया और फिर कॉल कट की उस दिन कॉल कट करने के बाद 1 घंटे तक
- 7:19बेतहाशा हुई हो? उसे लगा जैसे वो एक फीलिंग नहीं
- 7:24होती। आई डोन्ट नो।
- 7:26बट एक फीलिंग होती है ना की कोई इंसान हमारा कभी था नहीं पर वो
- 7:30इंसान लगता था जैसे हमारा ही था वो फीलिंग ना हम उस इंसान पे हक
- 7:35जता सकते हैं ना हम उसे ये बता सकते हैं कि वो कितना
- 7:39इम्पोर्टेन्ट है बस एक दोस्त समझ के रखते हैं।
- 7:43पर हमें पता होता है कि वो हमारा सिर्फ एक दोस्त तो नहीं है, उसे
- 7:48बताएं तो ये सोच के घबरा जाते हैं कि कहीं वो दोस्ती तो खत्म नहीं
- 7:51हो जाएगी और उसे ना बताएं तो वो हक कैसे जताए?
- 7:56वो हक जो। हमें चाहिए वो हक जहाँ हमें मन
- 8:00करता है उसे पूछने का कि तुम कहाँ हो, किसके साथ हो?
- 8:03मुझे बताया क्यों नहीं क्या किया पूरे दिन पर नहीं पूछ सकते,
- 8:08क्योंकि आखिर के हक से पूछोगे तुम उससे और वो वाला हक नहीं था निधि
- 8:15के पास दक्ष के ऊपर। इसीलिए उसने भी अपना मन बना लिया
- 8:21की ठीक है ज़िन्दगी में हर कुछ चीज़ हासिल नहीं होती है अपनी
- 8:26ज़िन्दगी में आगे उसने बहुत सारे साक्रिफाइज़ेस किये थे।
- 8:30वो अपने पेरेंट्स की खुशी को हमेशा टॉप पर रखती थी, पहली बार
- 8:34ज़िन्दगी में खुद के लिए जीना चाहा था उसने।
- 8:38खुद के लिए कुछ करना चाहा था। उसने उसे जानती थी वह कि यह सब
- 8:44शायद उसका एक सपना है जो कभी पूरा ना हो लेकिन वह सपने को फिर भी
- 8:48जीना चाहती थी। जबरदस्ती अपनी आँखों को बंद रख के
- 8:53वह चाहती थी कि माना ये आगे ना भरे बस।
- 8:56एक महीने ही सही या दो महीने उसे भी पता लगे कि प्यार क्या होता
- 9:02है, प्यार आखिर क्या होता है, क्या होता है प्यार में जब इंसान
- 9:07होता है और आखिर क्या नहीं होता है?
- 9:11क्या प्यार सब कुछ होता है या प्यार कुछ भी नहीं होता है।
- 9:15वो सब कुछ एक्सपीरियंस करना चाहती थी।
- 9:17अपनी जिंदगी में सिर्फ एक बार खुद के लिए जीना चाहती थी लेकिन
- 9:22जिंदगी ने उसे शायद ये मौका ही नहीं दिया और फिर कुछ दिन बाद
- 9:27दक्ष का उसे एक टेक्स्ट आया कहाँ है?
- 9:30इतने दिन से गायब है, ना कोई टेक्स्ट किया, ना कोई मैसेज किया।
- 9:33आखिर हुआ क्या है? तो से नॉर्मल्ली बात की कि नहीं?
- 9:37कुछ भी नहीं। बस ऐसे ही पर दक्ष को शायद निधि
- 9:41की वो कमी खली थी। कहीं ना कहीं और अब निधि नहीं
- 9:46चाहती थी कि वो वापस से दक्ष के लिए कुछ भी फील करें दो।
- 9:50वो बात अलग है कि वो पुरानी फीलिंग्स कभी कहीं गई ही नहीं थी।
- 9:54वो आज भी वही थी। लक्षु पहला इंसान था जिसके लिए
- 9:58निधि ने अपने उस प्रॉमिस को कहीं ना कहीं उस प्रॉमिस से चीट करने
- 10:03की कोशिश की थी। लेकिन निधि नहीं जाते थे उसका
- 10:07अंजाम। इसीलिए उसने खुद को समझाया कि भले
- 10:10ही किसी के लिए फील करना हमारे बस में हो या ना हो।
- 10:14लेकिन उन फीलिंग्स को बढ़ाना या घटना हमारे बस में जरूर होता है।
- 10:18धीरे धीरे दक्ष से बातें करना कम कर दिया।
- 10:22अब दक्ष को निधि की कमी महसूस होने लगी।
- 10:25शायद कहीं ना कहीं दक्ष निधि के होने पर उसकी इम्पोर्टेंस को शायद
- 10:31समझ ही नहीं पा रहा था। लेकिन जब निधि वहाँ नहीं थी तब
- 10:35उसे समझ आया कि वो कलिक नहीं निधि वास् दी वन पर अब क्या होगा
- 10:41जिंदगी में? क्या उसे निधि मिलेंगे या नहीं?
- 10:45अगर तुम्हें ये जानना है तो आई डोन्ट नो इसका कोई पार्ट आएगा या
- 10:48नहीं आएगा पर तुम यू नो। क्लिफ हैंगल को छोड़ के जा रही
- 10:54हूँ मैं तुम्हें। अब तुम्हें क्या लगता है कि क्या
- 10:58लक्ष्य निधि को मना पाएगा या क्या उनका साथ रहना पॉसिबल भी है?
- 11:02बिकॉज़ अगर मेरा मानना है तो नहीं कोई ऐसी चीज़ जो तुम्हें पता है
- 11:07कि तुम्हें सिर्फ दर्द देके जाएगी?
- 11:08वो चीज़ को अगर तुम बढ़ावा दे रहे हो तो तुमसे बड़ा पागल कोई नहीं।
- 11:12पर कहते हैं इश्क में पागल ही रहते हैं, ज्यादातर तो आई डोन्ट
- 11:17नो इस कहानी का अंजाम सच बताऊँ तो मैंने अब तक नहीं सोचा है और मैं
- 11:23बस मुँह उठा कर आ गई थी। ये कहानी सुनाने आई डोन्ट नो इट
- 11:27इस गाना हैपन और ना मैं जानती हूँ ना तुम जानते हो तो इसे यहीं छोड़
- 11:32देते हैं। अगर मुझे किसी ने बहुत ही अच्छा
- 11:35सा क्लाइमैक्स भेजा तो मैं फिर भी कहीं ना अच्छा।
- 11:38पर हाँ, इसका क्लाइमैक्स अच्छा नहीं हो सकता है तो कोई ये मत
- 11:42सोचना चलो मैं तुम इसका क्लाइमैक्स सुना देती हूँ।
- 11:45बात करते करते आ गया तेरे को दिमाग में इसका हानि का ना सिर्फ
- 11:49एक ही क्लाइमैक्स हो सकता है। निधि।
- 11:52दक्ष से प्यार करने लगी थी और दक्ष निधि से दोनों ने कभी एक
- 11:57दूसरे को नहीं बताया ये सोचकर कि सामने वाला अगर हाँ या ना में अटक
- 12:02के रह गया तो दक्ष बहुत अच्छे से जानता था कि निधि के ऊपर कितनी
- 12:06रेस्पोंसिबिलिटीस थी और वो जानता था कि निधि किस हालत में है।
- 12:12अगर वो भी उसे बता दे कि वो उसे प्यार करता है और फिर उसका दिल
- 12:15टूटे, ये सोचकर क्योंकि वो कभी भी इस रिश्ते में आगे नहीं बढ़ सकती
- 12:19थी। निधि ये बात अच्छे से जानती थी।
- 12:22उसकी फैम्ली उसका बैकग्राउंड कुछ भी था ही नहीं।
- 12:26दक्ष के बराबर। तक्ष बहुत रिच फैमिली से बिलौंग
- 12:30करता था और निधि एक मिडिल, खास फैमिली से और प्यार मोहब्बत, इश्क
- 12:36मुकम्मल होते हैं तो सिर्फ टीवी में रियल लाइफ में नहीं।
- 12:41अगर ये कहानी में रियल लाइफ से जोड़ूं तो निधि और दक्ष कभी नहीं
- 12:45मिल पाएंगे। लेकिन।
- 12:47ये कहानी अगर मैं खुशी की दुनिया से जोड़ूं तो मैं हर कहानी को एक
- 12:51अच्छा ट्विस्ट देती हूँ पर इसे नहीं दूंगी क्योंकि कुछ कहानियों
- 12:56अगर हमें रियलिटी बताती हैं तो उन्हें उस रियलिटी को मान लेना
- 13:00चाहिए। असल जिंदगी में प्यार का मिलना
- 13:03बहुत मुश्किल होता है। हर किसी में इतनी हिम्मत नहीं
- 13:07होती जो अपने प्यार के लिए लड़ जाए और जो हिम्मत दिखाते हैं
- 13:11जरूरी नहीं की उनकी हिम्मत कामयाब हो।
- 13:14कुछ कहानियों बस यूं ही दफन होकर रह जाती है।
- 13:19जैसे शायद निधि और दक्ष की दक्ष ने कभी निधि से जहर नहीं किया और
- 13:24निधि ने भी। जान लिया कि अगर उसने वो इजहार
- 13:28किया होता तो शायद वो अपने आप को नहीं रोक पाती और अंजाम बहुत ही
- 13:33खराब होता। ना वो अपने माँ पापा को धोखा दे
- 13:35पाती और ना ही दक्ष को मना कर पाते।
- 13:39वो जिंदगी को खत्म करने से बेहतर था।
- 13:41जिंदगी को एक दुख के साथ जीना इस दुख के साथ कि।
- 13:45और इस उम्मीद में जीना कि शायद लक्ष्मी को नहीं पसंद करता होगा।
- 13:49वह जानती थी कि वह करता था, लेकिन फिर भी ताकि बस एक संतुष्टि रहे
- 13:54कि उसने कभी कहा तो था ही नहीं ना, क्योंकि निधि अपनी बाउंडरीज़
- 13:59को कभी क्रॉस नहीं करती। उसने जो प्रॉमिस अपनी माँ से इतने
- 14:03साल पहले किया था। उस प्रॉमिस को कभी नहीं तोड़ते।
- 14:07नाउ आई नो बहुत सारे लोग कहेंगे कि यार दी प्यार तो ऐसा ही होता
- 14:12है ना? पेरेंट्स को समझना चाहिए अगर वो
- 14:13हमसे प्यार करते हैं कि हमारी खुशी किस चीज़ में है, लेकिन यार
- 14:17ऐसा ही है। कुछ चीजें बस होती हैं।
- 14:20कुछ चीजें हमें बस एक्सेप्ट करनी होती हैं।
- 14:23उनमें क्वेश्चन मार्क नहीं लगा सकते हम की आखिर ऐसा क्यों या ऐसा
- 14:26क्यों नहीं वो चीजें बस एस इट इस होती है जैसे माँ पापा उनसे कितना
- 14:33भी प्यार कर ले लेकिन कुछ चीजों पर वो अड़ जाते हैं जैसे प्यार,
- 14:37मोहब्बत और अगर तुम उनसे उतनी ही मोहब्बत करते हो।
- 14:41तुम शायद। उनकी खुशी के लिए अपनी खुशी दफना
- 14:45देनी चाहिए। आई डोन्ट नो थिस इस राइट ऑर रॉंग,
- 14:49आई डोन्ट नो ना? शिद्दत वाला प्यार जिसने किया है
- 14:53वो जानता होगा मुझे नहीं पता पर फिर भी।
- 14:59माँ बाबा हमारे लिए बहुत कुछ करते हैं, अगर तुम्हारे माँ बाबा उतने
- 15:02अच्छे हैं, आई गेस उनके लिए अपने प्यार को दे दो यार आहूते में मैं
- 15:07क्या बोलूं? मेरे पास इस चीज़ का जवाब नहीं
- 15:10है। मेरे पास आई गेस मैं सोचती थी
- 15:12मेरे पास हर सवाल का जवाब है, पर इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि
- 15:17अगर कभी माँ बाबा और अपने प्यार के बीच में चलना पड़े तो किसे
- 15:20चुनोगे? लेकिन फिर भी आई गेस पेरेंट्स
- 15:25पीयूष जिन्होंने हमें पाला गुस्सा है, इतना बड़ा किया है, जानते हैं
- 15:31भाई मुझे नहीं पता सच बात ये है चलो।
- 15:36इस कहानी को अगर तुम कोई अच्छा सा ट्विस्ट दे पाओ तो तुम मुझे भेज
- 15:40सकते हो मेरे इ मेल्स पर या फिर मेरी इंस्टा आइडी पर व्हिच इस के
- 15:45हेच यु अंडरस्कोर एस हेच ए आई अंडरस्कोर पर और मिलती हूँ मैं
- 15:52तुम्हें अगली कहानी के साथ। िल देन टेक केयर एंड बाई बाई एंड
- 15:56रही बात इस कहानी की तो मैंने पहले ही सोच लिया था कि नहीं यार
- 16:00वो कम्मल तो नहीं हो सकती? कुछ कहानियों बस अधूरी ही रहती
- 16:04है। सही वाली भी थोड़ा बहुत रियलिटी
- 16:07चैक ले लेना चाहिए ना दोस्तों इसीलिए दे दिया बस।
- 16:12और चलो मिलती हूँ एंड वॅन मोर थिंग अरे यार इसमें ना एक नया
- 16:16फीचर आया है। क्या बोलते है वीडियो?
- 16:19रील वाला कुछ तो तो मुझे ना उसके लिए ऐडिया दोगे कि कैसे हम उसमें
- 16:23कुछ कर सकते हैं। मतलब अगर तुम्हारे पास कोई ऐडिया
- 16:26हो मुझे नहीं पता। मैंने तो वो पोडकास्टर का जो ऐप
- 16:29है वो देखा था तो उसमें लिख रहा था कि यार यू कैन इन्क्रीज़ युअर
- 16:32इंगेजमेंट समथिंग लाइक दट। तो तुम्हें अगर कोई ऐडिया हो कि
- 16:36दी इस चीज़ को आप रील वाले वे में पोस्ट कर सकते हो तो बना के भेज
- 16:40देना रील मैं पोस्ट कर दूंगी। एस यू नो यार मैं बहुत बीज़ी चल
- 16:44रही हूँ तुम देख रहे हो मेरा गला इतना खराब है फिर भी मैं तुम्हारी
- 16:47वजह से आ रही हूँ बोलने तो प्लीज़ थोड़ी सी मेरी इतनी हेल्प करना कि
- 16:50थोड़ा बहुत पार्ट अगर तुम रील में कॉनवर्ट कर दो तो मुझे भेज देना
- 16:53सो मैं अपना स्पोडिफाइ पे डाल 200 दट।
- 16:55उससे इंगेजमेंट आएगी एंड तुम्हें सच बताऊँ यार एक दिल की बात अभी
- 16:59ना। बहुत बीज़ी बीज़ी चल रही हूँ वो
- 17:01सब ठीक है लेकिन ना अभी फिलहाल कोई इन्टर्नशिप नहीं है।
- 17:03ठीक है विश्व में थी, वो हो गई। खत्म तो ना बहुत अजीब लग रहा है
- 17:07यार कि कोई इन्टर्नशिप भी नहीं है, कोई काम ही नहीं है।
- 17:10मतलब काम है, बट वो वाला काम नहीं है जो तुम समझ रहे हो तो मुझे ये
- 17:14था कि अरे वौइस् ऊपर के फील्ड में कोई काम तो मिले।
- 17:16अच्छा सा कोई काम ही नहीं मिल रहा।
- 17:18फिलहाल तो बहुत मतलब ऐसा लग रहा है की यार कुछ तो कर तुम मेरा जो
- 17:23है माइक उसकी बैटरी चली गयी है तो मेरे को नॉर्मल माइक से रिकॉर्ड
- 17:27करना पड़ रहा है। बट मतलब मुझे यही था की यार तुम
- 17:29कुछ बना दो मगर यू नो, कोई ऑडियो वाडियो मतलब वीडियो रील टाइप तो
- 17:34में स्पॉटिफाइ पे भी डाल दूँ और यूट्यूब पे भी डाल दूँ।
- 17:39बाकी तो चलो मिलती हूँ तुमसे अगली कहानी में।