Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Jun 25 - KARMA PHILOSOPHY: मेरी जिंदगी का सबसे आखिरी और सबसे भारी कर्म! भगवान शंकर का मार्गदर्शन!
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- 0:00बाबा जी सुरेन्द्र कुमार शुरू में आपका राजनीतिक चैनल देखने के बाद
- 0:21मुझे बहुत खुशी हुई। कि अध्यात्म से जुड़ा कोई
- 0:26उपन्यात्मा राजनीति में प्रवेश कर रहा है, लेकिन आपको ये चैनल बंद
- 0:36नहीं करना चाहिए था। बल्कि अध्यात्म वाला चैनल बंद कर
- 0:48देते तो कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वहाँ तो वैसे ही आपने
- 1:02अनेक अनंत। वीडियो आज के समय में लोगों की
- 1:11कीमत रोटी और शान के आज घर में तो बाद की बात है यही।
- 1:23पौषो का भी मानना था प्रिय पुत्र सुरेन्द्र कुमार अगर आप मेरे नीम
- 1:40शराबों को। तो आपको पता होगा, मैंने अपने
- 1:46पिछले प्रोचनों में एक बात बोली है मेरे सारे कर्म भुगते लिए गए,
- 1:55लेकिन एक बहुत भारी कर्म जब मैं। राजा था नेपाल को।
- 2:08तब मैंने एक निर्दोष व्यक्ति को यह जानते हुए कि यह निर्दोष है,
- 2:16बड़ी बेरहम से उसका कतल करवाया था।
- 2:20करवाया था। क्योंकि ये करने वाले लोग तो महज
- 2:33खिलौने होते हैं, जो पीछे से ताकत करवाती है, जिम्मेदारी उसी की
- 2:41होती है। आपको याद होगा और पिछले इन दिनों
- 2:55में जो घटा वो स्वयं मेरी समस्याबा है।
- 3:04ये 13 दिन ये 13 दिन। कैसे बीते हैं तुमने ठीक कहा आज
- 3:22की जरूरत है रोटी और शान। राजनीतिज्ञों को मैं एक सबक
- 3:34सीखाना चाहता हूँ कि अगर देर का कालिख राज़ करना हो तो अपने देश
- 3:41में शांति न होने दे। और अपने देश में।
- 3:50कुछ गिने गिने लोगों की संपत्ति को बढ़ाती है, तो तुम्हारी
- 3:59राजसत्ता जल्दी नहीं जाएगी। देखिए, पाप का अंत तो हुआ करता
- 4:07है। लेकिन अगर तुमने ये फॉर्मूला
- 4:09आजमाया की तुमने शांति ना बनने दी और कुछ एक गिने चुने लोगों की
- 4:21संपत्ति को बढ़ाता चला गया। तो तुम उन गिने चुने लोगों की।
- 4:32नेट एसेट के बेसिस पे विश्व गुरु कहला सकते हो ये कनकास।
- 4:46तुम विशु गुरु सच में हो पाते। गाँधी जी का मसला कुछ दूर था।
- 5:01तुम्हें तो शायद इतिहास में जब आती हो ना आती हो, मैंने इतिहास
- 5:06पढ़ा है इतिहास लिखने वाले सदा बाद में लिखते हैं।
- 5:15और तब तक उनके रिश्तों को भी नहीं पता होता कि वास्तव में घटा क्या
- 5:29सही पूछो तो 10 दिन के बाद नहीं पता चलता।
- 5:3210 मिनट के बाद नहीं पता चलता क्या हुआ, वास्तव में क्या हुआ
- 5:41अगर किसी व्यक्ति ने। जो मेरे हम उम्र हो राष्ट्रपति
- 5:46केनेडी की हत्या को देखा है क्योंकि मैंने देखा है जीस
- 5:52व्यक्ति ने ऊपरी मंजिल से सुराग कर के राष्ट्रपति।
- 6:01कनपटी पे होली चले। को शूटर रहा।
- 6:08उसको गोली मारने के बाद वही निपटा दिया गया जब वो भागने लगा और वह
- 6:15निपटाने वाला भी निपटा दिया गया। जब वो भागने लगा।
- 6:19और जब वो भागने लगा तो उसे भी निपटा दिया गया।
- 6:24ऐसे सात लोगों को निपटाया गया। वैसे ये है पॉलिसी कभी मुस्कबहार
- 6:34नहीं आएगा। किसने मारा, क्यों मारा?
- 6:41और अदालित मानती है सबूत अदालत का अंत फैसला सबूतों के अभाव में हम
- 6:51इस अभियुक्त को तथा कथित अभियुक्त को वरीय करते है।
- 6:57तो कहीं चले जाओ। अंत में तुम न्यायालय की श्रेणी
- 7:03में जाओगे और न्यायालय 20 साल के बाद फैसला देगा।
- 7:09के अभाव में अदालत से बरी कर दी है।
- 7:16बाबा जब 82 में मुझे विदेश देने लगे।
- 7:18राजनीतिक को मैं बड़ा चकित हुआ। बाबा चला के सर आप ज्ञान के सराह
- 7:28कर दे बाबा नमस्कार। आफ्टर एनलाइटनमेंट तुम्हें कभी
- 7:37जरूरत पड़ेगी इसकी तब तो मुझे ना पता था 85 में मुझे वो घटना घटी।
- 7:52शरद पूर्णिमा के राग 28 ऑक्टोबर में निहार हो गया।
- 8:02मेरा रोम और वहाँ तर्क तो रुक गया और फिर आज की कहानी बाबा का आदर्श
- 8:21आपने ठीक कहा, पुत्र? और अगर वो 28 अक्तूबर शरद
- 8:29पूर्णिमा की रात 1985 का साल मुझे वो घटना न होती, मैं तुम्हारी
- 8:37बातों के ऊपर अमल भी कर रही हूँ। और तुम्हें कहने की आवश्यकता नहीं
- 8:42थी, मैं हाथ में झंडा उठाई, फिर। मैं खुद से ही।
- 8:48अपनी पार्टी क्रिएट कर रही हूँ। अभी तो बाबा को हुक्म आया और इस
- 8:56मामले में उसके हाथ की कठपुतली? बाबा का उचरित एक शब्द मेरे लिए
- 9:06प्राण है बाबा का शब्द और मेरा प्राण उसे मान लेता है।
- 9:21लेकिन ये 13 दिन कैसे बीते? मैंने चलाया गोल्डन स्पैरो नाम का
- 9:33यह है चैनल आज भी मौजूद कुछ एक वीडियो डायलिंग।
- 9:47मुझे किसने कुछ नहीं कहा? पर मैं वो ही हूँ जीसको मारने के
- 9:53लिए मेरे कमर में रुवाल पर लेके व्यक्ति को सर पर मैं कहता हूँ ला
- 9:59मुझे दे दो। तो क्यों गोडसे की तरह मर रहा है?
- 10:04मैं खुद ही कनपटी पर रख लूँगा, इटलर की तरह तू भाग यार बस ये
- 10:13प्रणाली गाँधी की प्रणाली बदली नहीं है।
- 10:19और कभी बदलने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
- 10:22यह सदा सदा सदैव ज्वलंत रहेंगी। कभी इसकी लौ बुझेगी और व्यक्ति की
- 10:34मुख्यतः जरूरत है। शांति तुम्हें 2 दिन रोटी ना
- 10:39मिले, चल जाएगा लेकिन दो रात नींद ना मिले क्योंकि नींद में तुम्हें
- 10:46शांति। मिलती है तो नहीं चलेगा?
- 10:51और चाइना में खूंखार अपराधी के लिए एक सजा होती है।
- 10:55इसको 9 दिन तक सोने ना दिया जाए। जब ये सोये तो उसको ठूटे मरे जाए
- 11:02और कुछ नहीं। इसको खाने को देना है जो मांगे
- 11:09खेलने देना है, सोने नहीं देना। ज़रा ध्यान रखना जीसको सोना नसीब
- 11:20नहीं हो, वह ऐसा तड़प तड़प के मरेगा।
- 11:29उसका हाल तो वही जान सकता है। 28 अक्तूबर 1985 को पटना करती
- 11:41मेरा फैलाव अनंत तक फैल गया। उस आनंद का वर्णन नहीं किया जा
- 11:49सकता। वो भावना ने भावनाओं में भी नहीं
- 11:58समाता, वह उचरित भी नहीं हो सकता, वह पारदर्शित भी नहीं हो सकता तो
- 12:09तुम समझो तो बोलने वाले की। भीतर की आवाज़ के रसधार को पकड़
- 12:15के समझ सकते हो, इतना सा लक्षण है, लेकिन बोलने में भी वो चीज़
- 12:23करोड़ों गुणा कम हो के आती है। तुमने कितना लुत्फ उठाया उस क्षण
- 12:30में जाकर? ये तो वही जान सकता है जो गंगा
- 12:36गुड़ खाई के कहे कौन मुख स्वाद। बहुत से लोगों।
- 12:41के अच्छे कमेंट भी आए। समझ में आया कि इन लोगों को शांति
- 12:47चाहिए। इनका मन भजकता है, वह रोटी भी किस
- 12:58काम की है, जो गुलामी की जिंजीरों से बांध के आई हो?
- 13:09और बहुत से कमेंट ऐसे गए की बाबा हम आपके चैनल को छोड़ रहे है।
- 13:16बिलकुल छोड़ दो बेटा तुमको आने को किसने कहा था?
- 13:25मेरे प्रवचनों को आप सुनेंगे तो पाएंगे।
- 13:29यह बिलकुल बेघर से बनता है। बोलने को लगता है जबकि मौन में वो
- 13:37रस है के बोलना दूभर हो जाता है। जब तुम पर मोल में जाओगे तो
- 13:55तुम्हारा मन नहीं करेगा। बोलने का तुम्हारा रोया, रोया
- 14:01शांति से भर जाएगा और तुम इतने शीतल हो जाओगे।
- 14:08वो शीतलता का अनुभव तुमने आज से पहले कभी जन्मो जन्मो तक चखा
- 14:13नहीं, ऐसा सीख वैसे ही तुम अगर नहीं भी जाओगे, बने भी रहोगे तो
- 14:30कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि मैं तो चला और वैसे भी
- 14:41तुम मुझे कहाँ सुनते हो जो जाने वाले हो वो भी पांच चार चैनल
- 14:50कंगाल लेते हो। कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ मुझे ही
- 14:55चाहिए, जो मेरी वाणी की मधुरता अपने हृदय में अंतरंग बसा लेते
- 15:04हैं, ऐसे भी वो कभी जाएंगे भी नहीं।
- 15:10और ऐसे भी लोग हैं जो कहते हैं बाबा हमें एक सपना देखा, भोर वही
- 15:19तो टूट गया, एक ख्वाब सा देखा क्या?
- 15:29जब आंख खोली तो टूट गया, यह आपने क्या किया होगा?
- 15:38मैंने कुछ नहीं किया। ना मैंने अपनी इच्छा से चैन खोला,
- 15:45ना मैंने अपनी इच्छा से बंद किया। मुझे संकेत आना शुरू हो गए और महज
- 15:5013 दिन का वक्त जैसे मैंने गुज़ारा, वो तुम्हें बयां नहीं कर
- 15:57सकता, ना उस रात की खुशी ब्याह होती है ना?
- 16:01ये 13 दिनों का परम दुख भी छोड़ा ब्याह होता है।
- 16:06ये दोनों चीज़े शब्दों में नहीं आएंगी।
- 16:10और तू जले दी पक्के फिर भी ना जाए मेरे।
- 16:46त मन मेरा मन, मेरा मेरा। एक मन मेरा फिर भी न जाए, मेरे
- 17:14हैं घर का मेरा तड़पती। एक फल ज से एक युग ई ता एक फल ज
- 17:57से एक युग। बी ता युग बीते मुझे नी ना आई
- 18:14पूछो ना के ऐसे मैंने रे। एक पल जैसे एक युग गीता एक क्षण
- 18:31जैसे एक युग देखिए युग कितना होता है?
- 18:37और 13 दिन बताये। कितना कष्ट ना सहा?
- 18:43होगा। लेकिन ये पता कब चलता?
- 18:46है होश आने के बाद होश में आता है बनता ठोकरें खाने के बाद रंग लाती
- 18:56है हीना पत्थर पे घिस। तुम्हें कोई नहीं बताएगा सच में
- 19:11ये जो तुम्हारा मन इधर उधर के खिलवाड़ करता है वास्तव में चाहता
- 19:16क्या है तुम्हारा मन सदा भटकता रहेगा जब तक।
- 19:24कि उसको पर्याप्त वस्तु मिलने जाएगी और वह पर्याप्त वस्तु तुम
- 19:33खोज नहीं पाते। तुम्हारे मार्गदर्शक तुम्हे बता
- 19:36नहीं पाते, यही वडम्बना है संसार की, जो कोई बताता है।
- 19:44वो तुम्हें अच्छा नहीं लगता। है।
- 19:49तुम्हारी जरूरत इसी शांति को है और जो तुम्हारी शांति को भंग करे।
- 20:01तुम्हारे कोंचों में तुम्हारे गलियारों में आग लगा दे।
- 20:05उसकी तुम छाती का महत्त्व बताते हो अजब तेरी दुनिया अजब तेरे खेर
- 20:17छिछुंतर के सिर में चमेली का तेल। तुम्हें पता है कि।
- 20:29कैसे तुम्हारा चीन चैन छीना जाता? है।
- 20:35कैसे तुम्हारी शांति झपटी ली जाती है क्षण पर?
- 20:47और वह जो तुम्हें चाहिए एक बूंद के लिए तरसने वाला, वह जानता नहीं
- 21:00कि मैं खुद खुदा हूँ अनल। यही विडंपना है, यही भाग्यहीनता
- 21:10है इसलिए जिसने जाना अनलहक उसे ही हम भाग्यवान कहते हैं, उसे ही हम
- 21:20भगवान कहते। उससे पहले तुम भगवान नहीं हो सकते
- 21:27दुनिया चाहे तुम्हें पूजे दुनिया, सूर्य शिव विचार पूजन करे फल फूल
- 21:34चढ़ाई, मंदिर बनवाई तुम्हारी लेकिन काश।
- 21:42काश तुम इससे योग्य हो जाता। तुम्हारी पत्थर की मूर्तियां गड
- 21:49ली जाएंगी, लेकिन तुम मरोगे पत्थरों की तरह जड़ होगे।
- 21:59मरना होता है। भगवान राम की तरह जो खुद अपनी
- 22:06मृत्यु का वर्णन कर ले। वो भी क्या आकर्षण थे जब भगवान
- 22:17राम ने यह झोंढोरा पटाया के आपके राजा राम?
- 22:24कल सुबह सरयू नदी में विलेन हो जाएगा और मुझे हैरानी।
- 22:40है। राम के मानने वाले इस देश में
- 22:44आत्महत्या अपने कपरा। ये तो मेरी एक शिक्षा जो जज रही
- 22:53उसने मुझे बताया। बाबू?
- 22:55ये 2024 में यह कानून खत्म कर दिया अन्यता मैं भीतर बैठा क्या
- 23:02जनता हूँ मैं कोई कानून की किताब थोड़ी ही पढ़ता हूँ।
- 23:08किताब तो में कोई भी नहीं पड़ता। होश में यात्रा है बंदा ठोकरे
- 23:19खाने के बाद रंग लाती है कि नो पत्थर पे घिस आने के बाद।
- 23:30मैं प्रार्थना करता हूँ भगवान शिव से तुम्हे भी वो मुकाम और मंजिल
- 23:35दिखा दे, उसके बाद तुम्हारा भी पल पल ऐसे ही उजरेगा एक पल जैसे एक
- 23:48युग। बेता एक पल जा से एक युग इ ता युग
- 24:02वि ते मुझे नी। दे ना पूछो ना कैसे मैंने अभी तो
- 24:22तुम्हारे पास भेद करने के लिए दो चीज़े है नहीं।
- 24:28और भेद करने के लिए कौन ज्यादा बेटर है?
- 24:37कंपैरिजन करने के लिए दो चीजों का होना आवश्यक।
- 24:41है अभी तो तुम बोला। और वीडियो में झगड़ा हुआ।
- 24:48वह गुलाम क्या समझे? आजाद की कीमत जो उन्मुक्त हुआ
- 24:55छलांगें लगाता है, मस्ती में विभोर हुआ गीत गाता है।
- 25:02जो सुधबुध को खो देता है। उस परम प्यारे की याद में इसकी
- 25:14भीतर की मनोज दशा को वह कैसे जान पायेगा, जिसने वो स्वाद का रंग एक
- 25:21बार देखा? अभी तो तुम फासला ना कर पाओगे,
- 25:30लेकिन उस व्यक्ति की दशा देखी है जिसने वो अनंत समुद्र का रस से भी
- 25:36लिया और उसे 13 दिन तक उस रस से वंचित रहना पड़ा।
- 25:47उसकी दशा शायद तुम अनुमान भी न लगा सको क्योंकि अबे तुम्हे
- 25:52कंपैरिजन में दूसरी चीज़ दिखती? यही है कारण अगर एक पल के लिए मैं
- 26:01तुम्हे बहुत बार करती हूँ कि सटोरी की घटना ही देख लो।
- 26:08फिर तुम्हारे पास कोई आने को लालायित रहेगा।
- 26:11अब तो तुम ढूंढ़ते हो कि किसके पास जाके वक्त?
- 26:14बिताए लेकिन तुम्हें पता नहीं है। जब तुम्हारे भीतर वो चयन आ जाएगा।
- 26:25तो लोग तुम्हारे पास आना चाहेंगे और तुम हाथ जोड़ लोगे, क्षमा करो,
- 26:35लोग कहेंगे ऐसे ना करो, हमें थोड़ी देर सुकून से बाहर ही बैठ
- 26:41जाने दो। कुछ बितर से ऐसी आसानी तरंगों का
- 26:47सैलाब आएगा। ये बाहर बैठा हुआ यात्री मस्त हो
- 26:54जाएगा और जब मन मस्त हुआ फिर क्या बोले फिर क्यों बोल रहे?
- 27:04बाबा मेरे पास आए। इसको एक अब्रीविएशन के रूप में ले
- 27:15लिया करो क्योंकि मैं सारी चीजों को समझा नहीं सकता।
- 27:25अनेबुल टु एक्सप्रेस ये कुछ ऐसा मुकाम है जो वहाँ जाते ही पता
- 27:31चलता। है।
- 27:3913 दिन बीते कुछ ऐसे शकुन आने लगे।
- 27:46मैंने अपने शिष्यों से कहा कुछ ऐसा लगता है बाबा मुझसे
- 27:49कम्यूनिकेट करना चाहते जैसे तेसे हिम्मत जुटाई।
- 27:56मैंने बाबा से बात की। बाबा क्या क्या है बाबा?
- 28:07मैंने तुम्हें कहा था तुम्हारा ये आखिरी पत्थर?
- 28:15जो राजा के जन्म में तुमने पाप किया जगान्य प्राप्त किया वो
- 28:21भुगताना बाकी है। लेकिन तुम चिंता मत करो, मैं इसको
- 28:29स्वयं ही भुगता दूंगा, तुम्हे पता भी नहीं चलेगा।
- 28:36फिर बाबा भुगतान हो गया, हो गया कैसे हो गया, कैसे हो गया कोई
- 28:48टांग वाने टूटी? कुछ भी तो नहीं हुआ।
- 28:57ऐसे कैसे भुगतान हो गया? पापा कहते हैं अगर टांग वहाँ टूट।
- 29:04जाती, वह तो टूट ही क्यों गयी थी? चूक ना टूट गया था तुम्हारा।
- 29:13चूकने टूटने में तुम्हारी हड्डी डेसोलोकेट नहीं हुई थी तो थोड़ी
- 29:18हिल गई थी, हिल गई थी, बस थोड़ी सी हेयर टाइप फ्रैक्शन आ गई थी।
- 29:28बाल के समान थोड़ी सी रेखा खीच गई थी।
- 29:34दरार मैंने खवाब इससे बड़ी तकलीफ हुई।
- 29:43वो दिन भी कैसे बताये? लेकिन वो दिन तो कुछ भी नहीं।
- 29:47शरीर की तकलीफ तो मैं जानता हूँ, शरीर में घोर दुख हो रहा था, दर्द
- 29:55हो रहा था और मैं हॉस्पिटल में बैठा हुआ रोहित वीडियो अपना रहा
- 30:01था। प्रश्न पूछ रहा।
- 30:02था। जब से जाना है?
- 30:08मैं कौन हूँ? तब से सब दुखड़े खत्म हो गए सब
- 30:14बोझ अंतर ध्यान हो गए कफूर उड़ गए।
- 30:20सब समझ में आया तो झूठ भी समझ में आया।
- 30:26दोनों चीजें यकसा समझ में आती। है तब तुम्हें पता चलता है कि
- 30:32सत्य क्या है। तब तुम्हें ये भी पता चलता है कि
- 30:35झूठ क्या है? ऐट दी स्पॉट सिक्के के दोनों पहलू
- 30:40यक्सा दिख जाते हैं। बाबा कैसे भुगतान हो?
- 30:48याद करो कैसे गुजरे क्या पूछो बाबा।
- 31:00अगर कोई लाख बार मुझको फांसी चड़ा।
- 31:06वह ज्यादा सुकून दायक होगा। लेकिन ये भी छोड़ा यह तो अत्यंत
- 31:12दुख दायित्व एक फल जैसे एक युग भी था, युग भी थे।
- 31:24पूछो मैं कैसे मैंने रहने देता 13 दिन तेरा रात कैसे बताएगा?
- 31:36मैंने कहा इतने से भुगतान हो गया अब और नहीं अब और।
- 31:43तो बाबा थोड़ा खुलासा कर दो क्योंकि जाते जाते मैं सब बता
- 31:50जाना चाहता हूँ जो मुझे मालूम जो बताया जा सकता है, जो अनुभवी नहीं
- 31:56आता वो घी बताने की चेष्टा तो करता हूँ।
- 32:01लेकिन अल्फाज़ कम पड़ जाते हैं अल्फाज़ शुद्र हो जाते हैं मुझे
- 32:08बोल बाबा बोले और तुम भी अगर यहाँ तक पहुँच गए हो तो मेरे इन शब्दों
- 32:21को जरूर समझना, पूरा सुनना वीडियो कॉल तुम्हारे भीतर के पुत्र
- 32:33सुरेंद्र और तुम्हें अतीत की समृतियों के झरोखे में ले जरूर
- 32:44गाँधी जी साउथ अफ्रीका में थे। एक पत्र गोपालकृष्ण गोकुल उसकी
- 32:58भाषा बड़ी संवेदनशील थी, उनके एक एक लफज में।
- 33:09दर्द भरे आंसू से मित्र और तुम मेरे गुरु के हो ये जो तुम दूसरे
- 33:27देश में क्रांति कर रहे हो सत्याग्रह आंदोलन कर रहे तुम।
- 33:32और तुम्हारा अपना देश गुलामी की जंजीरों से त्राहिमाम त्राहिमाम
- 33:40कर रहा है यह 1914 के दिसंबर के आखिरी सप्ताह की।
- 33:54जैसे मेरी स्मृतियों से मैं देखा अतीत के स्मृति के जो रूख मैंने
- 34:04वो पढ़ा क्षमा करना, गाँधी जी ने वो पढ़ा।
- 34:11सत्य सहज ही बरबस फूट जाया करता है।
- 34:16लबों से कई बार गलतियाँ होंगी, लेकिन क्षमा प्रार्थ।
- 34:35क्योंकि बहुत से लोग आ जाते है। सिद्ध करो की तुम मैं खुद सिद्ध
- 34:40करू गाँधी जी ने जो किया उसके लिए मैं कुछ मांग रहा हूँ ओके, वो तो
- 34:47गाँधी ने खुद ही नहीं मांगा। नवा खाली में फिर रहित वो अकेले
- 34:54और इनके साथ कोई चिड़ी परिंदा नहीं, अकेले अपना लठ लिया बड़े
- 35:00मगन थे बरोबयोहरि भी सरोसा सेठली मेरा काम।
- 35:08पूरा। तुम कैसे मिलते हो?
- 35:16अगर गाँधी जी आज के नेताओं की तरह होते जो कोई भी इवेंट अपने नाम
- 35:21करा लेना चाहते। हैं।
- 35:24गाड़ी बनाई हो। इंजीनियर्स ने दिन रात की मशक्कत
- 35:28करके लेकिन झंडी तो यही दिखाएंगे। हर इवेंट को क्योंकि कुछ कर नहीं
- 35:35पाए जाता, बेचारे तो भीतर की आत्मा को चोटती भी है।
- 35:42अरे कुछ तो करो तो दंगा करवा दिया, फिर आग लगा दी, फिर किसी से
- 35:50कहलवा दिया। चार अक्षर जूरी को बोल दो सुप्रीम
- 35:53कोर्ट ऑफ इंडिया और अगर तुम ये करके आ गए तो तुम चिंता ना करो,
- 36:01मैं बैठो, संविधान बनाने के योग्य हूँ।
- 36:08और कुछ नहीं तो इमरजेंसी तो लगा ही सकता हूँ।
- 36:13सेना मेरे बस में हर दीपावली को उनके साथ मनाता हूँ।
- 36:19दीपावली और चाहे बाहर बाहर से ही सही, ईद की नमाज़ भी वादा करता
- 36:28हूँ। दिल ना मिले छाती है तो मिल जाती
- 36:34है सौगाते साहिब यह तो दिया तो गाँधी जी ने पढ़ा वो पत्र भावनाओं
- 36:51से वो प्रेत। देश की करूणाव्यथा का गायन उन
- 36:59शब्दों में पुकार रहा था गोपाल कृष्ण गोखले का आ जाओ, वो देश है
- 37:07तुम्हारा बसेरा नहीं। यहाँ आ जाओ इस देश को तुम्हारी।
- 37:13जरूरत है। हम्म ऐसा ऐसा।
- 37:26कोई नहीं है नहीं जो लोग कहते हैं।
- 37:33आजाद कराएंगे भारत? वो कालापानी में बैठे हैं।
- 37:39हच ऐसा ऐसा और कोई और कोई नहीं इतनी पावरफुल।
- 37:54सत्ता से कौन टकराए? फिर मैं जानता हूँ तुम्हारे हाथ
- 38:01में ना खड़ग है, ना तलवार है, सुन लो सफेद जुल्फें, बालो तुम ही बोल
- 38:08रहा हो। प्ले दी।
- 38:11हमें आजादी बिना खड़े हुए बिना है ढाल साबरमती के संत तुने कर दिया
- 38:17था। जैसे तुम इंजन का पुरजा पुरजा
- 38:26जोड़ के गाड़ी कोई बनाता है। और तुम उसका सेहरा अपने नाम झंडी
- 38:31करके ले लेते हो। उन्होंने तो पविश्रय मांगा, लेकिन
- 38:40लीड तो किया बस लीडिंग की ही नहीं है हमारे देश में।
- 38:50यहाँ आए 2 जनवरी 2015 शमाकरण 1915।
- 38:56की बात है। 9 जनवरी आज भी 9 जनवरी का दिन
- 39:03प्रवासी भारतीय रूप में मनाया जाता है।
- 39:07एक सेलिब्रेट होता है वह दिन भूल ना जाए हम उसकी याद सदा बनी रहे
- 39:20यहाँ आए हाल चाल देखा जब तक प्रत्यक्ष आँखों से निहार नहीं।
- 39:25लिया जाता तब तक सत्य का पता नहीं चलता।
- 39:31दुखड़े समझे जन जन से मिले जन जन। आक्रोशित।
- 39:49चूहों को मलाल है कि बिल्ली खा जाती है।
- 39:51चूहों और चूहों ने सभ बुलाई के बिल्ली के गले में घंटी डाल दिए
- 40:00जाए। जब बिल्ली आएगी तो घंटी का पता चल
- 40:06जाएगा। और दबोच नहीं पाए कि हम बिलों में
- 40:09घुस जाएंगे का जवाब दे रहा हूँ। मैं श्रोता में पूछा, लीडिंग
- 40:20कपैसिटी की आवश्यकता क्या है? तो प्रश्न उठा के बेली के गले में
- 40:26घंटी वहाँ देखूं। कौन बांधेगा कौन बांधेगा, बताओ
- 40:36यही होती है लीडिंग। कैपेस्ट।
- 40:40तो बिल्ली के गले में घंटी बांधने का श्रेय दिया गाँधी ने।
- 40:45बस इतना सा काम किया तुम देखो क्या किया था बिना खड़क बिना ठान
- 41:01बिल्ली के गले में घंटे बांधते और तुम कहते हो बाबा।
- 41:08चैनल बंद नहीं करना चाहिए। वह तो मेरी आपकी दुख का खुलासा
- 41:16मैंने किया। ये 13 दिन मैंने जैसे बताए, ओह
- 41:27मेरी आंख में ही जानती है, लेकिन तुम कितने आए?
- 41:371963 चैनल के ऊपर सब्सक्राइब आए 1963 तो वायदा खिलाफी किसने
- 41:52तुम्हें प्यास लगी? और छी कहने से कभी कोई पानी
- 41:57मांगता प्यास से लगनी जरूरी होती। है।
- 42:05समझ आया कि तुममें प्यास भी नहीं। और लीडर मैं बनना नहीं चाहता।
- 42:14लीडिंग कपैसिटी होने के बावजूद भी क्यों?
- 42:20क्योंकि तमन्नाएँ। जब से देखी है तेरी झील सी आँखें
- 42:43वो झील का नीलापन नासूर बन गया क्या पता तुम्हे चुका अवश्य चुका?
- 42:59ये थोड़ी सी थ्रेड ही तो थी। हड्डी तो डिस्लोकेट हुई ही नहीं,
- 43:06वो भी कितना भारी दुख देख बस एक बाल जितना थोड़ा सा फासला, अगर
- 43:19तुम्हारा भी रह जाएगा उसके। और तुम्हारे बीच में तो तुम शांत
- 43:25नहीं हो पाओगे, उस रस को पी ना पाओगे, इतनी सूक्ष्म अवस्था है
- 43:31प्रकृति की गाँधी गाय सारा देश हजूम की तरह उमड़ पड़ा।
- 43:40प्यास लगी थी, भूखे थे हजारों सालों से रो रही थी कायनात ए
- 43:56नरकिस अपनी बेनरी पे रो रही थी हजारों साल।
- 44:03नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में
- 44:09गीता भर बैठा गाँधी आए तो गोपालकृष्ण गोखले अगर सच में देखा
- 44:18जाए तो भारत माता की बेड़ियों को काटने वाला।
- 44:23उसका सही श्रेय मिलना चाहिए। गोपाल।
- 44:25कृष्ण? को गाँधी तो मत गाँधी का तो लीगल
- 44:35प्रैक्टिस इतना चला बड़े शानदार प्रसिद्ध वकील बन गया।
- 44:47और ऐसे माहौल में से छोड़ के आना एक अनिश्चिता की तरफ अनिश्चित
- 44:54माहौल अनिश्चित भविष्य कांटों से भरे गिराएं धूल भरी आंधियां चारों
- 45:01तरफ और वो सत्ता। जीस असता का?
- 45:04दो तिहाई पृथ्वी पर सामरज हो जिसके समरज्य में सूरज न डूबता हो
- 45:12उसके साथ ये ढ़ाई मुट्ठी का आदमी है कैसे लड़ेगा?
- 45:24यहाँ चपंजा इनकी छाती नहीं काम करती भाई, भाग गए सभी, लेकिन
- 45:34जिन्होंने कोशिश की उनमें दिमाग कहा था।
- 45:38बद दिमाग थे ये लोग ये कहते हैं शस्त्र के बिना क्रांति नहीं होती
- 45:45और शस्त्र के बिना क्रांति नहीं होती।
- 45:49इसका ब्राह्मण नोय चकली कलेक्टर को मार दिया गया।
- 45:591910 में पुलिस पकड़ के ले गयी। चल कालापन सुनवाई हुई दो उम्रकैद
- 46:08की सजाएं हुई बिड़ी सावरकर। को।
- 46:23बड़ी मुश्किल पेश है। दो खाएंगे, दर्द आएँगे, सब कुछ
- 46:28आएगा, झेलना पड़ेगा जेलों में बंद रहना पड़ेगा आजादी खत्म खाने पीने
- 46:39की सुविधा। खत्म।
- 46:41और गाँधी कोई मामूली ग्रह से नहीं आते थे।
- 46:45गाँधी का पिता दीवान था। अंग्रेजों कर्मचार्ज दीवान यानी
- 46:56जैसे चीफ मिनिस्टर होते हैं, हमारे इतनी पावर थी।
- 47:01गाँधी के पिता दीवान कोई कमी न थी, किसी चीज़ की कमी न थी, पानी
- 47:09मांगते दूध मिलता फिर भी वो आए। ऐसे हालातों में तो क्यों आए?
- 47:22कोई राज़ करने की नियत थी, कोई किसी को दबाना था, किसी से वोट
- 47:32नहीं मांगा है तो फिर उन्होंने इतना कुछ क्यों किया?
- 47:38सिर्फ वो भी। जिसके कारण संत बोलते हैं संत
- 47:44हृदय नवनीत सम्मान पिघल गया हृदय माखन के समान थोड़ी सी शेख लगा।
- 47:53ये करुणा भी बड़ी ज़ालिब है। ये बुद्धों तक को अटका देती है
- 48:002500 सालों के बुद्ध करुणा की वासना को लिए लिए करते हैं।
- 48:09देखिए कैसा जुनून ये वासना है की मटके।
- 48:19ये करना हमें बोलने पे मजबूर करता है।
- 48:23बहुत से लोग मुझे गालियां निकाल देते हैं।
- 48:25मैं कहता हूँ भाई तुम क्या लगे हो, मैं तो लेक्चरर हूँ तो 40
- 48:31मिनट के भाषण का क्या लेते हो बाबा मैं तो ₹2,00,000 लेता हूँ।
- 48:37तो मैं तुमसे क्या लेता हूँ चुप हो जाती है भाई अच्छा नहीं लगता
- 48:45तो मत सुनो, कितनी बार मैंने कहा तुम सुनो ना सुनो मैं उन अज्ञात
- 48:54के लिए बोलेंगे। जो मुझे सुनने को बेताब है असंख्य
- 49:01संख्याओं में लोग तुम ना सुनोगे, एक भी ना सुनेंगे तो मैं उनके लिए
- 49:06सुनो, उनके लिए बोल रहा हूँ नहीं जरूर उन्होंने भटकन देख ली, वो
- 49:13तड़प रहे हैं वो जल रहे हैं। उनके लिए तो बोलना ही होगा और
- 49:18सत्य में पूछो। तो मैं उनके लिए बोलता हूँ, उनकी
- 49:23तादाद बड़ी भारी तुम्हारी तादाद। बहुत कम है।
- 49:31इस चैनल पर 52,000 सब्सक्राइबर है।
- 49:34और मुझे सुनते कहते हैं मुश्किल से 20,000 वह भी 48 घंटों में,
- 49:41लेकिन मुझे इसकी कोई शुक्र जिसे पानी चाहिए, प्यास लगी है, पानी
- 49:50तो मांगने की बात करते हो, कुआं खोद लेगा।
- 49:55वह कुआं खोदने में लग जाता है। अगर पानी कहीं से भी नसीब न हो।
- 50:02बस एक ही बात ये 1963 गोल्डन स्पैरो पे सब्सक्राइब पर आए।
- 50:10यह इस बात की शिनाख्त थी कि अभी तुम्हें प्यास लगी।
- 50:14है। अभी भूख लगने अभी शब्दों के जार
- 50:19को। तुम तोड़ नहीं पाए।
- 50:25और शब्दों का जार उस दिन टूटेगा। जीस दिन प्रजा अत्यंत व्यतीत हो
- 50:30जाएगी इन कारीगरों से इन कलाकारों।
- 50:33से समझती है मेरी बात। ये सर्कस करने वाले।
- 50:42लोग। एक कहावत है।
- 50:53अगर असत्य को ऊंचे से बोल दिया जाए, रगों में बस उसको सत्य समझ।
- 51:02लिया जाता है। और ऐसा कितनी बार बोला गया है?
- 51:13पूरा हुआ, मैं तुम्हें बड़ी शांति से पूछता हूँ।
- 51:18मेरे भीतर कोई उध्वलता नहीं उध्वलता नहीं कभी पूरा हुआ अच्छे
- 51:25दिन आएँगे। तुम प्राइम मिनिस्टर से आज कोई
- 51:32सवाल नहीं पूछ सकते और मुझे एक कहानी याद है जहाँ पर गीदड़ बहा
- 51:38में जवाहर लाल नेहरू आए और इत्तफाक से मैं भी चला गया।
- 51:43इत्तफाक। और यहाँ पर रेस्ट हॉउस में आए
- 51:52प्रवचन हो रहा था। भाषण थोड़े से लोग थे।
- 51:56सुनने वाले कोई बड़ी मुश्किल से पांच, 402 प्राइम मिनिस्टर ऑफ
- 52:02इंडिया आए सुनने वाले पांच 400। लेकिन किसी को शराब की बोतल देके
- 52:091500 देके अपने व्हीकल मुहैया कराके कोई व्यक्ति बुलाया नहीं
- 52:13गया। एक भी आए सिर्फ सुनने के लिए आए
- 52:19जो वास्तव में श्रोता है। को आएगा ढूंढ ढूंढ के आएगा।
- 52:29जिसे वास्तव में प्यास लगी वो खोज करेगा, पानी कहाँ से मिलेगा, नहीं
- 52:35मिलेगा तो कुआं खोदे लेकिन प्यास तो हो जाएगी वैसे भी अगर प्यास ना
- 52:43बुझाई तो प्यास से मर। पता है डिहाइड्रेशन हो जायेगा,
- 52:50खून जम जाएगा तो पानी तो चाहिए ही चाहिए लेकिन तुम्हें अभी प्यास
- 52:56लगी, कुछ ऐसा ही लगा मुझे मुझे किसी ने कुछ नहीं किया।
- 53:03तेरी जुल्फों से रिहाई तो नहीं मांगी थी?
- 53:22कैद मांगी थी। रिहाई तो नहीं मांगी थी तेरी
- 53:36जुल्फों से। रिहाई तो नहीं मांगी थी, कैद
- 53:48मांगी थी, रिहाई तो नहीं मांगी थी?
- 53:58हेरी जुल हाँ से श्री जीके जीवन का एक संत स्मरण बता रहा था, किसी
- 54:03स्थान पे चले गए। बड़ा अमीर घराना था तब तक
- 54:11प्रसिद्धि के चरम पे तो नहीं पहुंचे थे, लेकिन प्रसिद्धि बहुत
- 54:16थी। उन्होंने बड़ा मान सत्कार किया।
- 54:21उनके घर में सोने की कुर्सी गाँधी जी से कहा अब विराज जी, सोने की
- 54:31कुर्सी ये सुनने वाली बात है शायद तुम्हारे इतिहास की किताबों में
- 54:38ना मिले। खंगाल हो गए।
- 54:42लगता है नहीं मिलेगा, क्योंकि कुछ अत्यंत निजी पल वही व्यक्ति बता
- 54:50सकता है जिसके साथ व्यक्ति होती है।
- 54:57तो गाँधी जी सोने की कुर्सी पर नहीं बैठे, नीचे बैठे जमीन पर
- 55:02बैठे वही लंगोटी। नवा धोती सर्दी का?
- 55:10वक्त। तो उस घर के मालिक ने कहा प्रभु
- 55:21ऐसा न करो हमारी। कुर्सी को सुशोभित कर।
- 55:29दो गाँधी जी, कल फास्ट ध्यान से सुन लेना और हृदय में उतार लें।
- 55:34गाँधी जी बोले। जब तलक मेरे देश का एक एक बच्चा
- 55:40इस। सोने की कुर्सी।
- 55:42पे बैठने के लायक नहीं हो जाता। गाँधी जी नहीं बैठे मेरे देश का
- 55:51एक एक बच्चा। जब तक इस सोने की कुर्सी पर बैठने
- 55:57के लायक नहीं हो जाता तब तक गाँधी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।
- 56:01सोने में नीचे बैठेगा जैसे गाँधी जी।
- 56:18आस्तें जब गुजर जाती हैं तो तकरीर करने वाले कहा करते हैं नहीं, यह
- 56:26तो छोटी सी धूल भरी आंधी खुद ही चली जाती है।
- 56:35आज बताने वाले लोग। निश्चित ही जनता और बलदानियों की
- 56:45कुर्बानी को मैं नमन करता। हूँ।
- 56:49लेकिन जनता आई 1900 त्रेष्ठ व्यक्तियों का।
- 56:54गोल्डन स्पैरो पे सब्सक्राइब कर देना ये क्रांति का द्रोतक है
- 57:00क्या मैंने 30,00,00,000 सब्सक्राइबर मांगे थे,
- 57:06140,00,00,000 की जनता में से तुमने कितने दिए?
- 57:16लेकिन जब जनता जब सोई पड़ी हो या उनको कुछ सुंघा दिया गया हो, मादक
- 57:24द्रव्य किसी भी चीज़ का तो वह। किसी अच्छी चीज़ को जो
- 57:31सर्वहितकारी है, उसको आगे शेयर। भी नहीं कर सकते।
- 57:46लेकिन बाबा ने जो बात बताई उसे। सुनकर मैं शांत हूँ तो मेरे 13
- 57:53दिनों की। जिनको मैंने दीक्षित किया, सभी
- 57:59अपसेट हो गए, सभी को पूछा बाबा अपसेट एक हफ्ते से अपसेट ध्यान
- 58:05नहीं लगता। मैं समझ गया ब्रॉडकास्टिंग
- 58:09ब्रॉडकास्ट सेंटर। रुक क्या है?
- 58:17सीज़ हो। गया है बाबा है, मैंने पूछा बाबू
- 58:26बताओ? क्या हुआ?
- 58:28अब क्या हुकम है? बाबा कहते हैं, बस।
- 58:33तुम तुम्हारे पुराने जन्मों का जो एक बड़ा पत्थर था भारी उसका
- 58:41भुगतान करवा दिया मैंने मेरा आखिरी काम समाप्त हुआ, मैंने
- 58:48वायदा किया था, मैंने कहा बाबा कैसे खत्म?
- 58:53थोड़ा सा बता दो, मैं भी अपने शिष्य गणों को बता दूँ, सब बांट
- 58:58के जाऊं, कुछ लेकर नहीं जाऊंगा। वैसे तो कोई भी यहाँ से कुछ लेकर
- 59:04नहीं जाता। भ्रम होता है कि हम इतने करोड़ की
- 59:10असिड साथ लेकर जाएंगे। ज़रा गया कभी किसी के साथ।
- 59:16जर सिकंदर का यहीं पर रह गया जर सिकंदर का यहीं पर।
- 59:31रह गया। मरते वक्त लुकमान भी ये कह गया,
- 59:42मरते दम लुकमान भी ये कह गया, क्या कह गया?
- 59:51ये घड़ी ये घड़ी हरगिज न टाली जाएगी जब तेरी तेरी तेरी।
- 1:00:08धोली निकाली जाएगी बे मुहूर्त के उठा ली जाएगी जब तेरी जब तेरी साथ
- 1:00:24लेके जाओगे का बाबा? संत होने पे पक्की मुहर लग गई न
- 1:00:37होने पे साहब क्योंकि जीसको यही नहीं पता कि इकट्ठा कि असंग नहीं
- 1:00:44जाएगा, वह इकट्ठा करना छोड़ देता है।
- 1:00:51यह एक अल्टीमेट लॉ ऑफ गॉड ऑफ फर्नीचर परमात्मा का अटल नियम है।
- 1:01:02जीसको पता चल गया, संघ नहीं जाएगा, वह इकट्ठा क्यों करेगा?
- 1:01:08तुमने क्या कथा किया? लेकिन वासनाओं को शुगर कोटेड
- 1:01:15बनाकर कुनिन को लोगों को खिला दिया जाता है।
- 1:01:19मीठी लगती हैं। लेकिन जब वो कड़वी होती।
- 1:01:23है। मीठा चाट लिया जाता है तो पता
- 1:01:27चलता है रे थू। अब तो गई पेट में मैंने कहा बाबा
- 1:01:40ये क्या था तेरा दिल का भी छोड़ा इतना गहन भी छोड़ा मैं अपने अंत
- 1:01:48में नहीं उतर सका। मैं था उसके करीब।
- 1:01:55जैसे मेरी हड्डी चूकने की बिल्कुल करीबती डिस्लोकेट नहीं हुई थी,
- 1:02:01लेकिन बीच में एक बाल के समान दरार से बस उतने से ही।
- 1:02:11चूक हो गई। मैंने कहा इतने से भूख तो भुगता
- 1:02:17गया सब कुछ। मैंने कहा फिर ये राजनीतिक रोग
- 1:02:25जीवन का एक परमात्मा के दरबार की बातें कहीं नहीं जाती।
- 1:02:36और सुनी भी नहीं जाती क्योंकि समझ में नहीं आता।
- 1:02:42मैंने कहा फिर ये राजनीतिक लोगों का क्या होगा?
- 1:02:47ये तो बरसों बरसों अपना जीवन दांव पे लगा देते हैं, ये तो भीतर नहीं
- 1:02:53जा सकते हैं, कहते नहीं। फिर बाबा ये गुफा में बैठ।
- 1:02:59के। जो साधना करते है, बाबा कहते है
- 1:03:05कभी एक आंख खोल के ध्यान लगा करता है मैं समझी सारी बात।
- 1:03:14आँखें तो मस्ती में बंद ही हो जाती हैं और उस आनंद का वर्णन
- 1:03:21कैसे करें जो मुझसे 13 दिन दूर रहे?
- 1:03:27आफ्टर एनलाइटन पहले तो सभी से दूर रहता है।
- 1:03:32पहले तो कंपैरिजन का नहीं पता। कंपैरिजन के लिए दोनों अनुभव होने
- 1:03:37चाहिए, तो मैं तो फर्क का पता चलता है।
- 1:03:43और अब कंपैरिजन आ गया। क्योंकि जैसी राजनीति आज है
- 1:03:50धोखाधड़ी की, बेईमानी की जूट कफर तूफान की कतलोक गारज की
- 1:04:00बेईमानियों के शतरंज हैं। मोहरे बदले जाते हैं, ऐसी कभी
- 1:04:12नहीं थी। मेरे जमाने में तो कभी नहीं थी,
- 1:04:17हमारे इसी जमाने में नहीं थी कभी शतरंज की बेसात जौहरलाल ने नहीं
- 1:04:22बनी तो जौहरलाल की बात में सुना रहा था, बोल रही थी।
- 1:04:26मैं बच्चा ही था बोले एक व्यक्ति वृत था।
- 1:04:36ग्रामीण व्यक्ति लट्ठ लिए मेरी तरफ मंच पे झड़ने लगा सुरक्षा
- 1:04:47गार्डों ने रोक दिया। उसे सुनने वाली बात है बड़ी
- 1:04:50मजेदार बात है। यहाँ तो सेवेन लेयर्स में छिपे
- 1:04:54हुए व्यक्ति तक पहुंचना ही मुश्किल होता है।
- 1:04:58हवाएं भी नहीं पहुँच सकती वहाँ तक तो लेकिन मौत पहुँच ही जाएगी
- 1:05:03ध्यान। रखना।
- 1:05:05गोली नहीं पहुँच सकती, मृत्यु पहुँच जाएगी।
- 1:05:09एक संत ने कहा था जो व्यक्ति समझ में ना आए ध्यान से सुनना मेरी
- 1:05:14बात जिसकी बातें समझ में ना आए वह जातो देव पुरुष है यह पागल है कुछ
- 1:05:26समझ में। रगों में कभी सिंदूर दौड़ा करता
- 1:05:33है और दौड़ेगा तो उसके परिणाम क्या होंगे?
- 1:05:46जीसको इतनी भी अकल लाई नहीं जाएगा साथ।
- 1:05:50कुछ। वह सत्ता की मल्कियत को भी क्यों
- 1:06:02जोड़ेगा? आज प्रवचन बहुत लंबा हो रहा है।
- 1:06:11मैंने कहा बाबा फिर ये राजनीतिक। बाबा बोले ये अपने कर्म भोगो को
- 1:06:19भोग नहीं आते बाबा कर्म भोग अच्छे वाले, बुरे वाले नहीं नहीं, बुरे
- 1:06:26वाले, बुरे वाले इन्हें तो गद्दियाँ मिलती हैं, इन्हें तो
- 1:06:31सुख सुविधाओं के सारे साधन मिलते हैं, ऐसे ही मिलता है भत्ते मिलते
- 1:06:35हैं। जाने के लिए जहाज सब कुछ तो मिलता
- 1:06:39है। फिर मैं अपने कहा हाँ जी यही तो
- 1:06:47गलतफहमी है। जीसको उड़ने के लिए जहाज मिलते
- 1:06:52हैं जीसको सोने के लिए गद्दे मिलते हैं।
- 1:06:56जीसको एयर कंडीशन्ड रूम मिलते हैं।
- 1:07:00जीसको सलाम मिलते हैं जिसकी चारों तरफ होवा होवा ही होती है तो बाबा
- 1:07:08कहते हैं जो अपने यहाँ आते हैं गद्दियो पे ये पाप।
- 1:07:15भोगने के लिए आते हैं। मैंने कहा बाबा मेरा तो फिर सोचना
- 1:07:19गलत नहीं था क्योंकि अनुभव में आज प्रथम बार।
- 1:07:25आया? जब मैं अपने अस्तित्व से दूर हुआ
- 1:07:31और दूर भी कितना बस एक बाल भर। तुम भी सोच लो तुम इस राह पे चले
- 1:07:40तुम्हें इतनी सी भी दरार ना रह जाए और मैं बहुत कोशिश करता हूँ
- 1:07:47देखना मेरे अलफजों से भी चिपक मत जाना उस गौतम की तरह।
- 1:07:53जो वर्धमान के चरणों से छिप। कर गया था।
- 1:07:58ये दरार भी बाकी न रह जाए। इतनी सी दरार भी तुम्हें बहुत
- 1:08:03कष्टकारी होगी। तुम अपनी सब बेड़ियों को तोड़।
- 1:08:08देना। तुम अपने सब चिपकाहटों को
- 1:08:12क्लिंगिंग नेसेस को तहस नहस कर देना।
- 1:08:18यहाँ तो कुछ दो शब्द बोल दिए जाते हैं तो कमेंट्स आ जाते हैं।
- 1:08:25बाबा ये तो तुम्हारा घर होते हैं। एनलाइटनमेंट तो होता ही नहीं,
- 1:08:31मैंने कहा भाई तुमने क्यों सुना मेरा?
- 1:08:35मैंने पी रहे चावल भेजे थे। तुमने क्यों सुना?
- 1:08:42वो जब होता ही नहीं तो बस ठीक है पर होता ही नहीं।
- 1:08:48ऐसा कहो ना कि देखा ही नहीं तो मेरा एक शब्द यह नोट रखना श्रद्धा
- 1:08:54के लिए चार बार कहेगा, कर्म विधान नहीं होता, नो अक्शॅन रिएक्शन
- 1:09:05कर्म का कोई विधान नहीं। होता।
- 1:09:09बस ऐसा कहना चाहिए की मैंने जाना नहीं एक कर्म का विधान होता है,
- 1:09:15चरवाक कहता है और मार्कर्स कहता है कि भगवान भगवान एक अफीम का नशा
- 1:09:23है तुम्हारा। एक ढंग से फीम का नशा है, क्यों?
- 1:09:33अगर भगवान को धर्म की तरह मान लिया जाए धर्म की बूटी सुंघा दी
- 1:09:38जाए तो वह फीम का नशा ही है? अब इन बातों को ध्यान से समझ लें
- 1:09:50धर्म को अगर धर्म को अगर मूर्तियों से बांध लिया।
- 1:10:00जाए। कल्पनाओं से बांध लिया जाए।
- 1:10:09तो वह नशा है। अफीम का नशा धर्म को चित्रों के
- 1:10:14साथ बांध लिया जाए तो वंश और धर्म को विचित्र के साथ बांध लिया जाए।
- 1:10:22देखिए चित्र के आगे वीर लगा दो। चित्र तो तुम्हारे हाथ का बनाए
- 1:10:30हुए लेकिन विचित्र तुम्हारे हाथ का नहीं बनाया हुआ विचित्र तो
- 1:10:34उससे अलग है जो चित्रों से पार चलाता वह विचित्र।
- 1:10:44धर्म को अगर सम्प्रदाय से जोड़ दिया जाए तो वह अफीम का नशा ही
- 1:10:57होता है। दूसरी बात की सुनलो धर्म को अगर
- 1:11:01आनंद से जोड़ दिया जाए धर्म मतलब आनंद।
- 1:11:08मुझे लोग कहते हैं मैं कौन से धर्म में जाऊं?
- 1:11:10मैंने कहा जहाँ आनंद मिले जहाँ जलन न रहे शेष जहाँ आनंद मिले,
- 1:11:19आनंद ही आनंद मिले चुहंग और आनंद की खुशबू।
- 1:11:24फैले। नाचें और वेग वर्ष है पृथ्वी से
- 1:11:36जलने को हो जाए। और तुम्हें ना जाए सारा मल नर्मल
- 1:11:42कर जाए। धर्म को सदा आनंद से जोड़ना,
- 1:11:50चित्रों से मत जोड़ना। अब इसको आप सरकार में ले लो।
- 1:11:55आपसे कैसे धर्म अगर चित्रों से जुड़ जाए?
- 1:12:04तो वह फीम का नशा धर्म अगर आनंद से जुड़ जाए आनंद तो वह असली धर्म
- 1:12:15है पर तुम्हारा स्वभाव बस इस बात को याद रखना।
- 1:12:22तुम चित्रों की पूजा करते हो या उस विचित्र की पूजा करते हो जो
- 1:12:27चित्रों से पार चढ़ाते। है।
- 1:12:34मैंने कहा बाबा फ्री है। पाप होगने आते हो?
- 1:12:41बात तो ठीक है। अगर 13 दिनों का वेलगाम मुझे भीतर
- 1:12:49से आग लगा सकता है हेतु जन्मो जन्मो तक राजनीतिक बने रहते हैं,
- 1:12:56लेकिन फर्क तब पता चलता है जब कंपैरिजन में दूसरी चीज़ खड़ी
- 1:13:02पहले अज्ञानी था। ज्ञान के बाद ही पता चला कि कितने
- 1:13:08कष्ट में? था।
- 1:13:11पर वही दरार फिर से आ गई 13 दिन के लिए पर मैं चला राजनीतिक चैनल
- 1:13:19बना लिया और तुम कहते हो, पुत्र। कि तुम्हें दूसरा चैनल बंद कर
- 1:13:28देना चाहिए था दूसरा चैनल हमारे भीतर की जरूरत।
- 1:13:34है। दूसरा चैनल आनंद देता है।
- 1:13:40राजनीति आनंद से अलगाव देती है। ये एक दरार है।
- 1:13:46आनंद और तुम्हारे भीतर एक दरार पड़ जाती है।
- 1:13:49राजनीति को ही राजनीति का दुःख मैंने जेला 13 दिन तक मैंने कहा
- 1:13:56बाबा फिर ये भुगत लेते हैं। तो क्या मुक्त हो जाते हैं?
- 1:14:01कहते हैं यही तो विडंबना है। जब ये भुगतते हैं तो भुगतते
- 1:14:10भुगतते ये और ज्यादा अपराध कर देते हैं।
- 1:14:14जैसे ही व्यक्ति के हाथ में सत्ता आती।
- 1:14:20तो उसको सत्ता का गर्व और अभिमान हो जाता है और उस अभिमान के कारण
- 1:14:25वो और ज्यादा पाप करता है और पहले से भी ज्यादा बोझिल हो जाता है।
- 1:14:34देखो। बाबा तुमने जब बड़े से बड़ा अपराध
- 1:14:42किया वो कब किया? जब आम इंसान थे या जब राजनीतिज्ञ
- 1:14:49थे? मैंने कहा बाबा जब मैं राजनीतिज्ञ
- 1:14:53था राजा। राजा अंशु वर्मा है।
- 1:15:03शिव राजा थे महाराज अधिराज लेकिन वो उनके सिपहसा लाभ।
- 1:15:13राज़ वो ही करते थे क्योंकि शिव अस्वस्थ रहते थे।
- 1:15:201605 से 1621 तक उन्होंने राज़ किया।
- 1:15:24है। क्षमा करना, 605 से छि वंश थे
- 1:15:31संबंधित थे। और उस काल की यह घटना आज टूटी है।
- 1:15:40हजारों वर्षों तक यह भार मेरे कलेजे पर रखा मेरे अचितन मन में
- 1:15:49यह भार मेरे रखा। और फिर मैं सोचता था कि इसका
- 1:15:56अंजाम? क्या एक कतर का अंजाम है?
- 1:16:04बेदर्दी से निर्दोष व्यक्ति की तुम ज़रा सोच?
- 1:16:12क्या होगा वो सर निहत्थे, निर्दोष, 78 साल के वृद्ध जो बिना
- 1:16:23सहारे के चल भी नहीं सकता और प्रार्थना सभ में तीन गोली मार दी
- 1:16:29जाती है। और उस कारण के लिए जो के कारण था
- 1:16:38कारण बताते हैं कि ₹55,00,00,000 पाकिस्तान को क्यों देने की जिद
- 1:16:43की? भाई नया नया देश आजाद हुआ।
- 1:16:53और यह जब पारटिशन हुई तो उसमें लिखित की गई थी कि पाकिस्तान के
- 1:17:00पास हिस्सा थोड़ा कम गया, उत्साधन कम गए।
- 1:17:06इसकी एवज में हिंदुस्तान को ₹55,00,00,000 देना होगा।
- 1:17:11यह एक वायदा था। क्या वायदा खिलाफ़ ही कर देते
- 1:17:14हैं? तुम तो चाहते हो तुम्हारी तो
- 1:17:19ड्रेस ही बता देती है तुम तो भागने को।
- 1:17:27तो क्या गाँधी भी भाग जाते? गाँधी ने क्या पाप किया?
- 1:17:33इतना पाप किया की तुम गोली मार आज भी होड़ से किया था।
- 1:17:43प्रयास की आग में जल्दी जल्दी क्या किया क्यों किया उस दुष्ट ने
- 1:17:53मुझे गुमराह कर दिया। नाम नहीं बताऊँगा तुम जानते हो जो
- 1:17:58बच गया। देखिए जो पीछे से तीर जलाता है
- 1:18:04किसी के कांडों पर वह सदा छुपवा ही रह जाता है और अदालतें कह देती
- 1:18:11हैं। परमाणु के अभाव में अदालत व इज्जत
- 1:18:18भरी पड़ती है, मजरम नहीं। बस ऐसा ही लेकिन गोडसे की
- 1:18:26अस्थियां तो पुकारना। अखंड भारत का निर्माण कौन करेगा?
- 1:18:35605 से 610 तक। सिपहसालार थे, उससे पहले राज़
- 1:18:44किया अंशु वर्मा जीस व्यक्ति को इतने साल तक करीब 25 साल।
- 1:18:58तक। 16 साल तो ये पक गए और उससे पहले
- 1:19:02भी राजकीय इसलिए मैं कहता हूँ ज्यादा देर तक सत्ता एक व्यक्ति
- 1:19:09के हाथ में नहीं रखनी चाहिए। जब बम गिराया गया हिरोशिमा,
- 1:19:14नागासाकी पे। तो अमेरिका की राजतंत्र की
- 1:19:24प्रणाली जो थी, उन्होंने एक बैठक बुलाई तो कहने लगे देखिए डी
- 1:19:32रोजवेल्ट वास् ए बेटर बेस्ट। ऐडमिनिस्ट्रेटर्स बड़ा ईमानदार
- 1:19:40ऐडमिनिस्ट्रेटर्स था, थोड़ा सा अपाहिज था कुर्सी पे बैठा है चल
- 1:19:47फिर सकता हूँ और वह चार बार चुन लिया गया।
- 1:19:55चार बार लेकिन कौन जाने ये तबाही जो मची आज कल को कोई मूर्ख बैठा
- 1:20:04दिया जाए, फिर क्या होगा? तो उस कांग्रेस ने यह प्रस्ताव
- 1:20:14पैदा कर दिया। पारित कर दिया कि दो भक्तों से
- 1:20:22ज्यादा कोई व्यक्ति एक बार में अपने जीवन में राष्ट्रपति नहीं बन
- 1:20:29सके। 8 साल के लिए।
- 1:20:36बड़ा शानदार कदम था। मनुष्य की सायकोलॉजी के साथ अगर
- 1:20:42तुम 8 साल से ज्यादा किसी व्यक्ति को राज़ दे दोगे, उसका दिमाग
- 1:20:48बिगड़ जाएगा, बिलकुल बिगड़ जाएगा। ऐसे ही मेरा भी दिमाग 605, 621 ये
- 1:21:00तो था ही उसे अतिरिक्त भी था। महाराजाओं की महाशक्ति शाली लोगों
- 1:21:12में गणना होती। मेरी ऊँगली का इशारा और हिल जाता
- 1:21:18था। सब कंपल जाता था और जब गुनाह हो
- 1:21:22गया और देखिए कितने साल अचेतन कितने जन अचेतन में यह पाथर पड़ा?
- 1:21:32और ध्यान रखना तुम्हारा अचेतन जितना गहन भरा होगा उतने तुम्हें
- 1:21:37मुक्त होने के लिए बड़ा वक्त ज्यादा लगेगा।
- 1:21:39मुझसे लोग पूछ लेते थे मैं बाबा से पूछा बाबा कहते सिर्फ इसी पाप
- 1:21:46के कारण तुम इतने हो गए, तुम इतने चुभते चले गए?
- 1:21:51इतने जनम तुम्हें ज्यादा लेने पड़े यह पत्थर तुम्हारे चेतन से
- 1:21:55निकला नहीं भुंकता जा नहीं सका इतना भारत अब भुंकता गया क्योंकि
- 1:22:04दरार पड़ गई तुम्हारे और तुम्हारे कुछ आनंद घोर आनंद के बीच में।
- 1:22:11और यह दरार बड़ा काम करके तो फिर यह भुगतने के लिए आते हैं।
- 1:22:21मतलब हर व्यक्ति अपने पापों का भुगतान करना चाहता है यह जो कतार
- 1:22:28में लगे बैठे हैं। ये टोंगी, फुंगी ये सब कतार में
- 1:22:36लगे बैठे हैं कि भुगतें जद पी इन्हें पता नहीं है, ये कहते हैं
- 1:22:40मज़े ले ले और जब सत्ता हाथ में आ जाएगी तो ये पाठ जाएंगे, आपका खो
- 1:22:48बैठे है। निर्णायक क्षमता ना रहेंगी।
- 1:22:56सत्ता का जुनून सिर पे नाचेगा और फिर क्या पाप हुआ?
- 1:23:03समझ में नहीं आएगा। बाबा बोले आज ये जो राजनीतिक
- 1:23:11उन्माद ज्यादा पैदा हो रहे हैं, इसका और कोई कारण है ज्यादा पापों
- 1:23:18का अचेतन में इकट्ठा हो जाना। यह इन्हें कुराह में एक मार्ग में
- 1:23:28ले जाता है। पहले लोग और थे जिनके अचीतन बड़े
- 1:23:33हर के थे, दूर जा के बैठ जाते थे। एकांत झोपड़ी के बीच में जीस राजा
- 1:23:40को परामर्श की जरूरत पड़ती वो उनके पास चढ़ के आता।
- 1:23:47लेकिन आज आज झोपड़ी में बैठने वाली गद्दी पर बैठने पर लालट है।
- 1:23:56ये इनका अंतः अछूतन मन भरा पड़ा है पापों के कारण।
- 1:24:03इसलिए आज कितना पागलपन जुनून है? राजनीति के प्रति?
- 1:24:08मैं समझ गया कि आज लोग आते तो हैं लेकिन मुक्त होने की कामना कोई
- 1:24:20वरला ही लेके। आता?
- 1:24:22है। देखिए वह मुझकर 20 लोग निकले,
- 1:24:26इतनी सरलता से बोला, इतनी सरलता से बोला फिर भी सिर्फ 20 उनमें से
- 1:24:36भी पूर्ण रूप से तीन या चार, लेकिन मुझे खुशी है।
- 1:24:43हर्ष अपने बाद इस दीपक के बूझ जाने के बाद दीपक जलते हुए छोड़कर
- 1:24:53तो जाऊंगा। बस यही चीज़ सुकून का कारण बनता।
- 1:24:59है। गाँधी जी आए।
- 1:25:02सारा देश उन्माद से भरा पड़ा था। जरूरत ही लीडिंग पावर की बिल्ली
- 1:25:12की गर्दन में घंटी कौन गांजा? है या कपार कृष्ण गोखले का पत्र?
- 1:25:21असली श्रेय उनको जाना चाहिए। वह इस व्यक्ति को साउथ अफ्रीका से
- 1:25:27लेके 9 जनवरी 1915 को ही पहुंचा। उसके बाद देखा सारे देश की हालत
- 1:25:39देखी। अवदेश के हालात देखने के बाद फिर
- 1:25:45त्याग दिया अपने से कुछ एकलंगों जीस दिन मेरा बच्चा हिंदुस्तान का
- 1:25:52एक एक बच्चा पैंट टी शर्ट। टाई मोजा, जूता पहनने के योग हो
- 1:25:59जाएगा। उस दिन मैं पहनूंगा वो आज भी
- 1:26:06किसी। ट्रंक में पड़ा।
- 1:26:07होगा। बैरिस्टर से बढ़िया दुकानदारी चल
- 1:26:13निकली थी। प्रसिद्ध थे।
- 1:26:18लेकिन कोई अज्ञात पुकार इसे बुला रही थी।
- 1:26:23आ जाओ अब तुम्हारी जरूरत। है।
- 1:26:28कोई बड़ी बात नहीं अगर तुम में प्यास होती, इतनी प्यास होती के
- 1:26:34प्राण निकले ही निकले जाते। तो फिर ये चैनल गोल्डन स्पैरो 13
- 1:26:42दिनों में 30 करोड़ लोगों को। लिया था।
- 1:26:46कितने दिन लगे देश को इकट्ठा करने में, तुम्हें जानकर हैरानी होगी।
- 1:26:53एक महीना भी नहीं लगा। सारा दिल इकट्ठा हुआ।
- 1:27:03प्यास। थी।
- 1:27:04जंजीरों का दुखद यंत्रणा थी। दुख से भरा हुआ रोम रोम था।
- 1:27:10तड़प रहा था ताजा ताजा कांड। किसी को गोली मार दी, किसी को दफन
- 1:27:20कर दिया, किसी को ये कर दिया किसी को वो?
- 1:27:24कर दिया। और आए तो 4 साल बाद जलियाँ वाला
- 1:27:32कान हो गया बडी। निर्दयता से मार दिए गए लोगों को
- 1:27:37लोगों को छुपने के लिए जगह नहीं तो कुं में कूद गए मर तो वो भी गए
- 1:27:41कुएं में कूद गए। ऐसा भी बस से कांट देते हैं
- 1:27:51क्रांति की आत्म थर। सारे देश को इकट्ठा किया नहीं आज
- 1:28:02हम सब की यूनिटी आज की जरूरत और जब तक आपने कुछ सूंघ रखा है।
- 1:28:13तो कोई बात नहीं ये 18% लोग ना आए ना लेकिन जो बाकी के 82% 80% हैं।
- 1:28:23आए तो उस वक्त भी नहीं थे। इतने इतने लोग अंत भाग थे उस वक्त
- 1:28:30भी। चरण चुम्बक बन गए थे क्योंकि लीडर
- 1:28:36जब जेल में थे लेकिन अगर तुम 30,00,00,000 मेरे को सब्सक्राइबर
- 1:28:44देते थे तो कोई बड़ी बात नहीं। मैं इधर उलझी जाता।
- 1:28:51फिर ये दुख काहे का मैं संवाद भी ना कर पाता लेकिन मुझे थोड़ा सा
- 1:28:59चैन आया। होश आया जैसे बेहोशी से कोमा से
- 1:29:04व्यक्ति बाहर निकलाओ और मैंने बाबा से संवाद किया बाबा।
- 1:29:09क्या है? मैं जीता क्यों हूँ सारा पर्दा
- 1:29:16फुल क्या आज हर व्यक्ति राजनीति में प्रवेश करना चाहता है और कोई
- 1:29:23कारण नहीं? तुम्हारे किए हुए पाप अचेतन में
- 1:29:27घुस गए हैं? और वो भोगने को लालाई तो राजनीति
- 1:29:34का सहारा जल्दी तुम इस मलाल में रह जाओ कि हम शक्ति संपन्न हैं बस
- 1:29:46ऐसे ही। वक्त गुजर जाएगा।
- 1:29:51अपना वक्त तो गुजर। गया है।
- 1:29:54अपना सब लेना देना कंप्लीट हो गया, कुछ थोड़ा सा बचा जो कुछ
- 1:30:01कमाया शमशान में बैठ और बांट जाएंगे।
- 1:30:07और यहाँ से विदा हो जाएगा नहीं नहीं, अब तो ऐसा नहीं हो पाएगा।
- 1:30:14ये सूक्ष्म से स्वाद लगता है कि अब अगर 30 की बजाय 100,00,00,000
- 1:30:21लोग हो जाए अब तो चाहे तुम सारी दुनिया फिर ले आओ।
- 1:30:26क्योंकि कंपॅरिज़न सामने है। उस वक्त मैं भटक गया था।
- 1:30:31भटका हुआ व्यक्ति और भटकाया जा सकता है।
- 1:30:37अब तो कोमा से बाहर आ गया भाई, अब तो प्यार से विदा।
- 1:30:48यही रात अंत यही रात भर यही रात अंत।
- 1:31:03यही रात भर बस एक रात की अब कहानी है सारी बस एक रात की अब कहानी है
- 1:31:21सारी। यही रात अंतिम यही रात भारी यही
- 1:31:31रात अंतिम यही रात भारी बस एक रात की अब।
- 1:31:40कहानी है सारी बस एक रात की कहानी है सारी यही रात अंतिम यही रात
- 1:31:55भारी। यही रात अंत यही रात भाई बस एक
- 1:32:05रात की अब कहानी है सारी यही रात अंत जही रात भा।
- 1:32:26धन्यवाद।