Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Dec 24 - आत्मा को कैसे महसूस करें? चेतन को खाली करने का उपाय! गीता का ज्ञान!- वासांसि जीर्णानि
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- 0:03दिव्य आकांक्षा बाबा जी आपने परमात्मा।
- 0:15की दो। व्याख्याएं की हैं।
- 0:20एक व्याख्या परम आनंद। खुशी।
- 0:27वो तो मुझे मिल गया लेकिन एक दूसरी बात चकित कर देने वाली है।
- 0:41दूसरी परभाषा तुने की सृजन हरा क्या कोई व्यक्ति सृजन हरा भी बन
- 0:51सकता है? देवरांकाक्ष पानीपत से।
- 1:09ये जो तुम कहती हो कि मुझे आनंद की वो जहाँ खुशबूएं हैं, खुशबू
- 1:19हैं जो मांगती हो, मिल जाता है। किसी चीज़ का अभाव नहीं, तृप्ति
- 1:34है, खुमारी है, खुशहाली ही खुशहाली है।
- 1:47लेकिन दूसरी पर भाषा आपने की? कि वह सर्जन हारा ही है, ज़रा
- 1:59बताइए कि मैं सर्जन हारा कैसे बन जाऊंगा?
- 2:04क्या मैं बन सकता हूँ? पति गहरा सवाल है।
- 2:18बिल्कुल बन सकती। है कौन रखता है?
- 2:24इससे अगला पड़ाव। जैसे तुम्हारी खोपड़ी से बाहर
- 2:29दुखी दुख था, रुगुणता ही रुगुणता थी।
- 2:36क्लेश, कष्ट, चिंताएं, चिंतनय, ज्वालाएं आग ही आग थी, समस्याएं
- 2:44ही समस्याएं थी देवी। तुम अपने भीतर उतरे भीतर उतर के
- 2:53कितने तल तुमने छुए हृदय पे आयी हृदय से पार गयी जंक्चर पांव पे
- 3:03पांच सबसे खतरनाक पॉइंट। अगर यहाँ से व्यक्ति निकल गया।
- 3:14इस जंक्शन से अगर व्यक्ति निकल गया तो उसने जीत लिया।
- 3:21सब कुछ, वह सही विजेता वह। सही वीर वही है जिसने उस जंक्चर
- 3:30प्वाइंट को क्रॉस। कर दिया।
- 3:36तुम जानते नहीं हो? जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर?
- 3:43इसी स्थिति में पहुँच गए थे। ये बात रख है।
- 3:54कि कोई इस स्थिति की बात को बाहर मीडिया की तरह फैलाये या ना?
- 4:02फैलाये और बात रख है। लेकिन जैनियों को भी इसका पता
- 4:08नहीं। है।
- 4:10इसलिए महावीर के जो मेरे मन में है, श्रद्धा है वो किसी और के
- 4:18प्रति नहीं है। कृष्ण के बराबर भड़ाता हूँ महावीर
- 4:25को। इस मामले में बुद्ध और महावीर का
- 4:35जो प्रयोग है वो यकसां लगेगा, लेकिन यकसां होते हुए भी इससे आगे
- 4:43निकल जाते हैं। महावीर थोरा।
- 4:47ध्यान रखना मैं ये भी कहूंगा कि ये अनार होता।
- 4:54है और मैं ये भी कहूंगा कि ये अनार नहीं होता।
- 5:02वहाँ तुम्हारी समझ काम करनी चाहिए।
- 5:06जब मैं कहता हूँ ए अनार होता है तो समझो मैं छोटे बच्चों को पढ़ा
- 5:11रहा हूँ जब मैं कहूंगा। ऐ?
- 5:17अनार ही नहीं होता सिर्फ तो समझो मैं बड़े।
- 5:21बच्चों को पढ़ा रहा हूँ। मैं भाषा से कह रहा हूँ जोड़ना।
- 5:29किसी वक्त मैं ये भी कहूंगा कि बुद्ध और महावीर का दोनों का
- 5:36मार्ग संकल्प का मार्ग। है।
- 5:40और ये ठीक भी है। लेकिन किसी वक्त मैं ये भी कहूंगा
- 5:48कि बुध वहीं रुक जाते हैं। लेकिन महावीर आगे निकल जाते हैं,
- 5:58महावीर वहाँ पहुँच जाते हैं। जहाँ कृष्ण पहुंचे कृष्ण के बराबर
- 6:09छोर पर रखता हूँ मैं महावीर को लेकिन विरोधी छोर पर रखता हूँ।
- 6:20विरोधी शोर अब ये बातें बड़ी गहन है इनको बड़े एकांत में सुनना
- 6:28वैसे तो मैंने बहुत बार कहा मेरी सभी वीडियो को बिल्कुल एकांत में
- 6:32सुनना किसी बाग बगीचे में। रात के ठहराव में सोने की तैयारी
- 6:43में हो। कुछ काम शेष नहीं बचा बस अब सो ही
- 6:50जाना है तो मेरी वीडियो उसको लगा लो, नींद नहीं आती तो आ जाएगी।
- 6:59अमेरिका से बहुत मेरे पास मैसेज आते हैं कि बाबा किसी गोली ने काम
- 7:06नहीं किया। आपके वीडियो काम करके आपके वीडियो
- 7:11को लगाव के कान में सो जाते। हैं।
- 7:16और सुबह ही पता चलता है कि 6:00 बज गए, 7:00 बज गए।
- 7:21ऐसा क्या जादू है इसमें? क्या कुछ तुमने इसमें नशीला?
- 7:29पदार्थ डाल रखा है हाँ, बिल्कुल वह।
- 7:35इतना नशीला जो तुम्हें बहका देता है जो तुम्हें धीरे धीरे धीरे
- 7:44धीरे अपने आगोश में ले लेता है और तुम सो जाते है।
- 7:52आज तो बहुत से। सुनने वाले दिन में एक वीडियो
- 7:57सुनते हैं और रात को सोते हुए भी वीडियो को एयर प्लग कान में डाल
- 8:04कर सो जाते। हैं।
- 8:06वीडियो अपने आप बंद हो जाती है और उन्हें नींद आ जाती है।
- 8:10इतनी गहरी नींद आती है। इससे पहले कभी नहीं आई थी।
- 8:16क्या है इसमें ऐसा? इसमें उस अंतरिम तल की तिरंगें जो
- 8:26तुम्हें मदहोश कह जाती है। देखो जो तरंगें तुम्हें इतना नहला
- 8:32जाती हैं। इतनी खुमारी में तुम डूब जाते हो
- 8:39क्या? उनसे लिपट कर आई हुई लिपट कर आई
- 8:42हुई तरंगें तुम्हें सुला नहीं पाएंगी इसलिए तुम सो जाते।
- 8:50हो? चेस के भीतर का।
- 8:54रासायनिक बेसन कर रहा हूँ मैं मेरी आवाज का जात हूँ सिर्फ
- 9:05शब्दावली ने शब्दों के पार भी कुछ लिवड़ते बढ़ के आता है।
- 9:13और वो लेबडतेबडके जो आता है वो ही तुम्हें अपने आभूष में ले के
- 9:20तुम्हें सुला भी देता। है और तुम्हें मदहोशी भी दे देता
- 9:25है। लोग मुझे कह देते हैं बाबा तुमने
- 9:36शराब की लत तो छुड़ा दी लेकिन अब तुम्हारी वीडियो उसकी लत लग गए।
- 9:41क्या करे? कुछ न करो।
- 9:47करना भी क्यों है शराब की लत तुम्हारे?
- 9:53जैगर को खराब करेगी, क्रिटनेस को खराब करेगी, आर्ट को खराब करेगी,
- 9:59लंग्स को खराब करेगी और बहुत से ऑर्गन्स को खराब करेगी।
- 10:04लेकिन मेरी नशीली आवाज इन सभी अंगों को ज्यादा पौष्टिक।
- 10:12बनाई तुम्हारे ब्रेन को रिलैक्स करेगी अगर तुम पागलपन की समस्या
- 10:20से जूझ रहे हो, जो कि सारी धरती पागलपन की समस्या से आज जूझ रही
- 10:27है। मान्यताओं के भीतर हो जाना एक
- 10:31प्रकार का पागलपन है। और तुम सभी ने कुछ न कुछ मान लिया
- 10:35है, तुम सभी पागल हो। खुशी का सागर हो गयी हो।
- 10:51थोड़ा सोहर आगे निकलना। होगा।
- 10:57तुम सजन हारा भी हो जाओगे, सृष्टि की संरचना को करने में सक्षम हो
- 11:04जाएंगे। ये बात बड़ी अर्थ होता।
- 11:09है। तुम शास्त्र मत फरो न शास्त्रों
- 11:16में जवाब नहीं मिले। क्या तुम किसी वेद, पुराण, ग्रंथ
- 11:24इनमें मत कंगाल? किसी में तुम्हें ये शब्द नहीं
- 11:28मिलेंगे। बनक मिलेंगे सिर्फ थोड़ी सी बनक
- 11:35कहाँ कृष्ण की गीता में और कृष्ण की गीता ही बोल रहा हूँ?
- 11:42इसलिए ये बहुत गहरे भेद खोल रहे हैं।
- 11:51तुम इस खुमार में पहुँच गई हो, आनंद से झूम रही हो, रोज़मर्रा के
- 11:58दैनिक कर्तव्य भी करती हो और पड़ेगा आनंद में।
- 12:08निश्चित ही तुमने वो तल छोड़ दिया जो तुमने लिखा सारे शब्द हूबहू उस
- 12:18तल की खबर देते हैं कि तुम पहुँच। गया हो।
- 12:23लेकिन इससे आगे निकलना चाहती हो तो तुमने मुझे बहुत गहराई से सुना
- 12:27होगा। नहीं तो इतना गहरा प्रश्न कोई कर
- 12:35भी नहीं सकता था कि मैंने दो व्याख्याएं की परमात्मा के दूसरी
- 12:44सजन हरा कंस्ट्रक्टर। जेनरेटर अब मैं वहाँ क्या करूँ?
- 13:01कैसे बनूं सर्जन आरा कैसे बनूं जब तुम यहाँ पहुँच गयी हो?
- 13:10देखिये सतौरी की झलक से यहाँ आना होता है सतौरी की झलक में तुम्हें
- 13:16साफ साफ दिखाई पड़ता है कि जो होता है परमात्मा की इच्छा से
- 13:23होता। है।
- 13:25यह पहला स्टेप। है।
- 13:28और परमात्मा खुशी का सागर है। खुमारी आनंद का खजाना है।
- 13:37तुम उसके पास पहुँच गई, अब तुमने तीसरी बात उठाई जो शायद कभी न
- 13:43उठता है। मानवता के ऊपर तुमने उपकार किया
- 13:47है देवी। मैं शब्द प्रयोग कर रहा हूँ देवी
- 13:56आज मैंने तुम्हारे लिए बेटी शब्द इस्तेमाल नहीं।
- 13:59किया क्योंकि तुम? संसार को कुछ देके चली।
- 14:08हूँ इस प्रश्न के द्वारा। यह बड़ा अबूझ?
- 14:12प्रश्न है, भर गई आनंद से भर गई खमारी से भर गई सब जगह चारों
- 14:29तरफ़। उसका ही गहरा है।
- 14:34अब मैं सर्जन हार कैसे बनूँ? इससे अगला पार्ट सर्जन हार है।
- 14:49जिसने ये सारी सृजना को निर्मित किया, सारी सृष्टि का निर्माण
- 14:55किया, अगला पहलू उसी का? आएगा।
- 15:02ऐसा नहीं है कि तुम पहेली हो, जिसने यह प्रश्न पूछा।
- 15:10एक पहले भी महानुभाव हो चूके हैं जो हो ही गए थे सर्जनहार और बहुत
- 15:19से लोग बहुत से संत सर्जनहार हो गए।
- 15:24पता ना चला बताया ना कुछ। मेरे बड़े भाई कहा करते।
- 15:31थे। कि जैसे जैसे आदमी कीमती होता
- 15:36जाता है, वैसे वैसे उसकी बाहर की परिवेश बदलनी शुरू हो जाती है।
- 15:44वह हँसी हँसी में कहा करता था कि अगर यहाँ कहीं परमात्मा फिरता
- 15:49होगा तो अवश्य ही चीनी होती है ना दाना दाना।
- 15:56चीनी शुगर उसका बैब होता है। उसने भोलेपेट लिया रखा होगा।
- 16:05वस्त्र जैसे शंकर मृग चारधा वो ऐसे ही पढ़ता होगा और ऐसे व्यक्ति
- 16:16की तरफ हम कोई विशेष ध्यान नहीं करते।
- 16:19हम ध्यान करते हैं। जिसने मउर, मोक टलकाया हो वह
- 16:25जयंतीमाला हो, उसकी तरफ अकस्मात ध्यान खींच जाता है।
- 16:35जैसे जैसे तुम अति महत्त्व के व्यक्ति होते चले जाओगे।
- 16:39वैसे वैसे तुम ये पहचान बताता हूँ वैसे वैसे तुम खोते चले जाओगे
- 16:44अपने आप में अकेले होते चले जाओ अकेला हूँ ना सबसे?
- 16:55बड़ा वरदान है। टू बी अलोन
- 17:11एक पहली भी व्यक्ति हुई है। शास्त्रों में शायद आपने पढ़ा
- 17:18होगा विश्वामित्र ने अपने स्वर्ग का निर्माण कर लिया था।
- 17:26तुम सबने पढ़ी होगी। यह बात शास्त्रों में प्राणों
- 17:29में, लेकिन तुम इसका अर्थ नहीं समझोगे।
- 17:34इसका अर्थ यही था कि वह सृजन हार हो गया।
- 17:41उससे पहले वह बहुत व्यक्ति। हुए।
- 17:44आज से ही पांच 400 साल पहले दो चार व्यक्ति ऐसे हुए जो इस श्रेणी
- 17:50में आते थे। पांच 400 वर्ष पहले की बात करता
- 17:54हूँ यदाकदालोक। इस स्तर पर पहुंचते रहते हैं।
- 18:08रहेंगे यह कोई अतिशोक नहीं। है।
- 18:17यह तल है और यहाँ पहुंचा जा सकता है।
- 18:24तुम पहुँच सकती हो देवी, लेकिन किसी वक्त मैं तुम्हें वो
- 18:36फॉर्मूलेशन समझाऊंगा। यह सार्वजनिक करने वाला फॉर्मूला
- 18:42है। तुम आज का प्रश्न यहीं समाप्त कर
- 18:50दो हुआ जा सकता है। बिलाशक तुम भी हो जाओगी, क्योंकि
- 18:56जब इस स्तर पे पहुँच गई तो थोड़ा सा दूर एक कदम दूर।
- 19:02वह सजनहार तुम हो जाओगे अब कल के प्रवचन से आगे शुरू करें हम कल
- 19:19दूसरे अध्याय पे आगे से वासांक्षी जीर्णनीयता विहार नवानी घृणाति
- 19:27नरोपराण। तथा श्री रानी विहाय जिरनान नय
- 19:33आणी सैयाति न वाणी देही? दो शरीर हैं फूल शरीर ये मेरी
- 19:46आकृति प्रकृति सब देखते हो तुम बोल चाल।
- 19:53ये शरीर फूल शरीर है इसके भीतर एक शरीर।
- 19:57और बैठा है सूक्ष्म शरीर है। तीसरी आत्माएं अब देखिए इसको घोर
- 20:06से समझिए। इस स्त्री मूर्ति को बड़े गौर से
- 20:12समझना ये स्त्री मूर्ति ये है आत्मा कहीं नहीं जाती है, हेल्ती
- 20:19भी नहीं, स्थान नहीं बदलती जाती, नहीं आती नहीं, वो ठहरी हुई है,
- 20:28परम ठहराव उसे ही कहते हैं। वहीं पहुँचना होता है।
- 20:32तुमने आकर में परम ठहराव में जाना होता है, उसी को आत्मा कहते है।
- 20:41स्वयं उसी को कहते हैं अगर स्वाध्याय यह नाम दिया गया पतंजलि
- 20:48के द्वारा। तो स्वाध्याय का मतलब यह था स्वय
- 20:52का अध्ययन। पहले उसको पढ़ो, फिर उसमें उतरो,
- 21:07सोच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्राणी था।
- 21:12ये पतंजलि के दूसरे सूत्र में आता है।
- 21:15यम और नियम में आता है। जे तो तीन चीजें हैं ये
- 21:23त्रिमूर्ति सबसे पहले आत्मा, वह दृष्टा।
- 21:30है। उसके बारे में तुमने सुना बहुत
- 21:33होता है। वहाँ तक पहुंचते भी हो रोज़ रात
- 21:40को नींद में, लेकिन जानते कुछ नहीं हो उसके बारे में वहाँ जागते
- 21:46जागते तुम। अपनी प्रज्ञा में अदृष्ट कभी हुए
- 21:50नहीं और कृष्ण यही कहते हैं कि अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जा
- 21:58स्थिति प्रज्ञ हो जा यही मोटो है यही उनका अंतिम लक्ष्य है।
- 22:08आत्मा उससे ऊपर सूक्ष्म शरीर, सूक्ष्म शरीर मैंने कल भी कहा था
- 22:15विद्युती। है।
- 22:20कैसे इलेक्ट्रिसिटी। होती है।
- 22:25इलेक्ट्रिसिटी होती है और तीसरा तीसरा ये फूल शरीर सूक्ष्म शरीर
- 22:32को भी तुम नहीं देखते तुम सिर्फ फूल शरीर को देखते हो।
- 22:41और तुमने धूल शरीर के साथ और सूक्ष्म शरीर के साथ इतनी करीबी
- 22:50बना ली है इतने चिपट गए। हो?
- 22:53इतने चिपक गए हो? इसके साथ इतने एकाकार हो गए हो कि
- 23:00तुम ये कहने लग गए हो कि मैं शरीर हूँ इतना अपनत्व कर लिया है तुमने
- 23:12ये शरीर अगर कुरुप है तो तुम कहते हो मैं कुरु।
- 23:17ये शरीर सुन्दर है और तुम कहते हो मैं सुन्दर हूँ शरीर बीमार है, तो
- 23:23तुम कहते हो, मैं बीमार हूँ, शरीर सुडोल है, सवस्थ है, तो तुम कहते
- 23:33हो मैं सवस्थ हूँ। मैं सुडौल हूँ इतनी करीबी तुमने
- 23:39बना ली है शरीर के साथ और सूक्ष्म शरीर के साथ भी तुम चिपके रहते
- 23:49हो, हालांकि सूक्ष्म शरीर को तुमने जाना नहीं।
- 23:53लेकिन फिर भी सूक्ष्म शरीर से तुम चिपकते हो सूक्ष्म शरीर में
- 23:59तुम्हारी भावनाओं, तुम्हारे विचार, तुम्हारी मान्यताएँ,
- 24:03तुम्हारी अतीत की स्मृतियां, पिछले जन्म की अगले जन्म की
- 24:07कल्पनाएं अंकाक्षाएं। ये सब सूक्ष्म शरीर है।
- 24:16तुम जो मानते हो उसको अगर कोई उससे विपरीत बोल दे तो तुम कहोगे
- 24:26मुझे तुमने ठेस पहुंचाया, मेरी भावनाओं को तुमने ठेस पहुंचाया।
- 24:33और भावनाई भी तुम बन जाते हो विचार भी तुम बन जाते हो और कृष्ण
- 24:38यही बात कहते हैं कि ये तुम नहीं हो वासांक्षी जिरनान ये सिर्फ
- 24:49तुम्हारा वास है। जैसे ही ये ये कपड़ा, ये मैं नहीं
- 24:56हूँ, मैं स्नान करूँगा, ऐसे बदल दो, दूसरा डाल दो, जीर्ण शीरण हो
- 25:05जायेगा और दूसरा डाल दूंगा। भगवान कृष्ण इतना ही सिंपल बताते
- 25:12हैं मृत्यु को जैसे ये बोद्धा हो गया, पुराना हो गया, मैला हो गया,
- 25:23हम इसे उतार देते हैं। कृष्ण कहते हैं कि वैसे ही।
- 25:28तुम इस शरीर को बोधा हो जाए, बीमार हो जाए, जर दर हो जाए,
- 25:33निर्बल हो जाए तो तुम इसे छोड़ देते हो।
- 25:39कृष्ण कहते हैं, तुम कुछ अलग हो, ये कुर्ता पजामा मैं थोड़ी हूँ।
- 25:47मैंने तो बहुत बार इसको बदला है और मैं जानता हूँ यही कृष्ण कहते
- 25:53हैं कि तुमने इसको जो अपना मैं समझते हो ये तुमने बहुत बार बदला
- 26:01है। एक से दूसरा, दूसरा से तीसरा।
- 26:08इन्हीं को तुम जन्म और मरण कहते। हो?
- 26:12इसको उतार देना तुम मृत्यु कहते हो और इसको ग्रहण कर लेना तुम
- 26:19जन्म कहते। हो?
- 26:25आत्म आत्म से ऊपर सूक्ष्म शरीर फिर तोल शरीर।
- 26:31आत्मा की बात हो गई स्तूल शरीर की बात हो गई स्तूल शरीर हमारा लिबास
- 26:39है, वह शान से जीरणानी जब ये जीर्ण शीन्ह हो जाता है, बोधापरण
- 26:46हो जाता है तो हम इसे उतार देते है।
- 26:51नया डाल देते हैं। अब तीसरी बात आ गई सूक्ष्म शरीर
- 27:02जब रमन कहते हैं कि नोट आया सेल्फ, तुम जानो तो मैं हो कौन?
- 27:14महर्षि कहते हैं, हू आर यू तुमको दो तलह में अभी तो तुम सूक्ष्म
- 27:31शरीर हो। यात्रा सारी यात्रा सूक्ष्म शरीर
- 27:40की यात्रा है और जो कबीर कहते हैं जीस मरने से जगघरे मेरे मन आनंद
- 27:50हो बड़ी प्यारी बात। है।
- 27:54वे किसके बारे में कहते हैं? सूक्ष्म शरीर ही मरता है, सारी
- 27:59यात्राएं सूक्ष्म शरीर की यात्राएं, स्कूल शरीर की यात्रा
- 28:03नहीं आत्मा यात्रा करती नहीं, स्कूल शरीर यात्रा कर नहीं सकता,
- 28:09ढेर हो जाता है। सारी यात्राएं आज तक जितनी भी
- 28:16तुम्हारी हुईं, जब तुम पिछले चरण में जाओगे तो पाओगे कि सारी
- 28:23यात्राएं सूक्ष्म शरीर नहीं। तुम अपने साथ लेके चलते हो अपनी
- 28:29पोटली वासनाओं की, विचारों की, समृतियों की।
- 28:34अंकाक्षरों की अतिरिक्त भावनाओं की विचारों को साथ लेकर चलते
- 28:40हुसैन सागरों के। इसी की यात्रा होती है।
- 28:46इसी को साथ लेके तुम मरते हो बाहर निकलते हो इसी को साथ लेके तुम
- 28:51जनमते हो इस रीढ़ में प्रवेश करते हो।
- 28:54सारी यात्रा इसी की यात्रा है अगर संक्षेप में मैं कहूँ कि अब अब
- 29:00तुम सूक्ष्म शरीर हो। अगर महर्षि रमन पूछे हू आर यू तुम
- 29:12बड़े आराम से कह सकते हो, मैं सूक्ष्म शरीर हूँ इस वक्त तुम हो
- 29:20भी सूक्ष्म शरीर। बड़ी सिंपल करके बात को समझा रहा
- 29:26हूँ, फिर डीप लूँगा, छलांग लगाऊंगा।
- 29:32फिर मैं अपने सही प्रश्न का भी आ जाऊंगा।
- 29:37तुम इस वक्त सूक्ष्म से ही रहो। और इस वक्त तुम यात्रा के पढ़ाओ
- 29:47एक शरीर से दूसरा दूसरे से तीसरा इतने कितने ही जाम में तुमने बदल
- 29:51ली और बदलते चले जाओगे। कब तक जब तक यह शरीर सूक्ष्म शरीर
- 29:59मरता नहीं पिघलता नहीं, गलता नहीं।
- 30:08यात्रा आत्मा नहीं करती। यात्रा शरीर नहीं करता।
- 30:17यात्रा एक ही शरीर करता है वो है सूक्ष्म शरीर।
- 30:26और सूक्ष्म शरीर के भीतर तुम्हारी अनकॉन्शियस माइंड सबकॉन्शियस
- 30:36अनकॉन्शियस दोनों एक ही बात है जो फ्रॉड ने भ्रम डाल दिया तुम्हें
- 30:42उसने दोनों को बाइफरकेट कर दिया, दो हिस्से कर दिए।
- 30:47हैं ये एक ही अनकॉन्शियस इसके भीतर आपकी सारी बात सुनाएँ
- 30:56अपेक्षाएँ मैंने कल भी कहा था तुम्हारे वेव कृत्य।
- 31:04जो तुम पूर्ण नहीं कर सके। सोच लिया तुमने कि मैं इसको मार
- 31:11दूँ, मार नहीं सकूँ, यह सोचना भी तुम्हें फल देगा।
- 31:20वह तुम्हें सूक्ष्म फल देगा। मैंने कल शुरू की थी बात फिर खत्म
- 31:24करनी पड़ी समय के अभाव के कारण, क्योंकि तुमने सोचा बहुत है 99%
- 31:33जो सोचा वह पूरा नहीं किया 1% पूरा किया।
- 31:38वो 99% जो तुमने सोचा तो पूरा नहीं किया वह दब गया, वह दब गया,
- 31:51आज वह कत्थक से सो रहा। है।
- 31:57इसलिए सारी दुनिया आज मानसिक रूप से पीड़ित है।
- 32:04मनुष्य में दबी हुई चीजें तुमने सोचा था, पूर्ण हुआ नहीं कतर से
- 32:09सुवा नहीं या तो वो काम पूरा कर लेते फिर कतर से सो जाते।
- 32:19पूरा नहीं किया। समाज के डर से कानून के डर से तो
- 32:24वो दब गया। दब गया तो कभी निकलेगा स्टोर में
- 32:30जो चीज़ तुमने डाल दी, कभी तो स्टोर खाली करोगे ना?
- 32:34जब स्टोर बिल्कुल भर जाएगा। हाउसफुल हो जाएगा फिर क्या करोगे?
- 32:39स्टोर में चीजें बाहर फेंकेंगे वो बाहर फेंकना अपने आप से हो रहा
- 32:45है। इतना स्टोर फुल हो गया कि तुमने
- 32:49तो किया नहीं तो अब वो अपने आप से स्टोर खाली हो रहा है।
- 32:57और वो ही है तुम्हारी जो ये तुम सिर मारते हो न देवी आ गयी हो आ
- 33:01गया जी आ गया जेन्ना गया, भूत आ गया, प्रेत आ गया और ये एक सबसे
- 33:10अच्छा भी है कामिन का तुम्हें निजात दिला देते हैं।
- 33:13लेकिन निजाद तो दिला देते हैं लेकिन एक भ्रम तुम्हें पाल देते
- 33:17हैं क्योंकि इनकी दुकानदारी है। था कुछ नहीं, ये तुम्हें अकेला
- 33:25150 लोगों को अकेली भीड़ को इकट्ठी कर दे कि सिर मारो, जो आता
- 33:30है वो करो। ऐसा पागलपन तो तुम ओशु आश्रम में
- 33:34भी देख सकते थे, बहुतों के पागलपन उसने निकाले।
- 33:38हैं। क्योंकि वह साकारोजिस्ट था ओशु
- 33:45साइक्लोजिस्ट जानते थे कि दबी हुई भावनाओं पहले निकलवा दूँ।
- 33:53फिर ये अपने भीतर प्रवेश करेंगे। अभी तो भरा इतना पड़ा है कि जा ही
- 33:56नहीं सकते, ये खुद भी नहीं जा सकते अपने भीतर और जो ओशो आश्रम
- 34:03में तुम सिर मारते थे, चिल्लाते थे, चीखते थे, रोते थे।
- 34:10कामवासना को भौंकते थे, बस यही गलती खाके वो ओशो नगर जीव ने कोई
- 34:18गलती की तो ये की बिलकुल नग्न फिरते रहो।
- 34:27जो दिल में आया करो, ये स्वच्छंदता हो गई।
- 34:32स्वतंत्रता के नाम पर व्यक्ति इतना मूर्ख है, स्वतंत्रता के नाम
- 34:39पर स्वच्छंदता करने लग जाता है और यही स्वच्छंदता ले बैठी उसको।
- 34:51ओशो का खिताब आज कृष्ण के बराबर होता।
- 34:54है। लेकिन उसकी एक ये गलती उसकी एक ये
- 35:03गलती। ओशो की छवि को नुकसान पहुंचाते
- 35:08है। उसने कहा जो मन में आता है करो
- 35:13वैसे यही गलती मन को इतनी स्वतंत्रता देना ओपन में अपने
- 35:22बेडरूम में तो तुम सब कुछ करते हो।
- 35:25सब कुछ करते हो चूमा चाटी करते हो उलट पुलट करते हो करते हो ना, अरे
- 35:31चुप हो जाओ। पागल।
- 35:36तो लेकिन स्वच्छंद रूप से बाहर नग्न करना है।
- 35:39जीसको चाहे पकड़ लेना, ये चीज़ ओशो को बदनाम करके।
- 35:48कुछ तो होना चाहिए, जिससे समाज ने स्वीकृति नहीं दी।
- 35:58और इतना गहरे में बैठ गया वो और तुम्हारे एकांश बन गया।
- 36:06तो बजाए विद्रोह करने के तो उसे मान्यता दे दो कि भाई अगर
- 36:14तुम्हारे दिल में आता है तो करो लेकिन तुम्हारे लिए वो कमरे बना
- 36:20दिये हैं, वहाँ जाके करो जो करना है।
- 36:22ओपरे में मत करो इतनी सी बात थी यहाँ गच्चा खा गए हो, मैं उस के
- 36:31स्थान पर बैठा हुआ था तो मैंने यही कह था कि ठीक है, कैथोड से
- 36:37काम तुमने बहुत दबाया रोक तुमने बहुत दबाया।
- 36:43सब कुछ तुमने दबाया जीसको समाज ने प्रताड़ित किया तुम्हारे संतों ने
- 36:48प्रताड़ित किया तुम्हारे मार्गदर्शकों ने जिसे गलत कहा,
- 36:53उसको तुमने दबा दिया और कोई ढंग भी नहीं था दबाना पड़ा।
- 37:00तो फिर वो उभरेगा, उभरेगा तो कह देना जो चाहे करो।
- 37:06फिर वहाँ चोरियां भी हुई, लोगों की जेबें भी काटी गईं और एक बड़ा
- 37:13चोर भी आया और सब कुछ लूटपाट के ले गया।
- 37:18अब नाम तुम जानते ही हो। ओशु को मैं अबोशु को याद करता हूँ
- 37:33पहले दिन जब सिद्धों की श्रेणी मुझे जगानी आई, क्या बोलूं?
- 37:40मैंने कहा नहीं मैं नहीं बोलेंगे। 35 वर्ष हो गए उस मदर रस को पीते
- 37:45हुए अब इसकी लत लग गई भाई बार तो बिलकुल ही नहीं आया तो उस झुंड
- 37:52में सिद्धों के उस झुंड में उस। और ओशो के प्रति मेरी इतनी कोई
- 38:00श्रद्धा नहीं थी। मैं तो मैं सत्य बताता।
- 38:04हूँ। लेकिन जब सिद्धों के साथ भगवान
- 38:09शिव के साथ जब ओशो को देखा। तो मेरी धारणाएं टूटे कि
- 38:23विलक्षणता है कहीं चूक हो गई। संसार में किसी कर्म से चूक हो गई
- 38:30जिसके कारण इसे बदनाम झेलनी पड़ी। उस दिन मेरा ये विचार भंग हो गया
- 38:39जब मैंने शिव के साथ ओशु को देखा, कहने लगे बोलो सारी बात मेरे
- 38:47बायोग्राफर। में लिखी है।
- 38:51मैंने ओशु से पूछा। तुम्हारा इतना बड़ा कम है उसको
- 38:58कहते कमीन मत बनाना। वो इसका मज़ा ले चूके।
- 39:06थे। और मैंने कमीन बनाये हुए है घर
- 39:10बैठो अपने। 1 दिन के ले आओ मेरे से शक्ति ले
- 39:16जाओ, तुम मुक्त हुए, तुम अपने घर जाके आये यहाँ मत इकट्ठा हूँ यहाँ
- 39:29कोई आता है। और फिर घर में जाओ, गृहस्थी के
- 39:37सारे कामकाज करो, कोई बैन नहीं, लेकिन अपनी शक्ति को बचाए रखो,
- 39:47इसका अर्थ आप सब जगह ले सकते हो। व्यर्थ की शक्ति व्यर्थ के कामों
- 39:54में मत लगाओ, व्यर्थ की शक्ति सार्थक करो, उस शक्ति को काम की
- 40:02शक्ति फेंको मत, ओज में प्रवर्तन करो।
- 40:06कैसे परिवर्तित होगी ओज में? क्रय योग करो।
- 40:12धीरे धीरे धीरे धीरे एक बार काम का वेइट ज्यादा होगा।
- 40:18लेकिन तुम एक फॉर्मूला जो मैंने तुम्हें बताया आज फिर बता देता
- 40:24हूँ क्योंकि ये बड़ा अहम फार्मूला है।
- 40:29जब भी तुम्हारे मन में ये जो सट विकार बताये, ये इनमें से कोई भी
- 40:36उठे तो वो विकार आएँगे। तुम्हारे चेतन में अब इसको बहुत
- 40:43गौर से देख लेना, ये तुम्हारी ज़िन्दगी का सवाल है।
- 40:48यह तुम्हारी बहुत सी शक्ति को बचा लेगा।
- 40:52जब भी कोई विचार आए वो काम का है। क्रोध का है लोभ मो।
- 40:57अहंकार मद मद का भी एक विकार होता है।
- 41:03शराब पी लू। निशीला पदार्थ का ये मद।
- 41:08है। तो तुम उसको आने देना, रोकना मत
- 41:15दबाना मत इस दबाने ने ही तुम्हें आज इस नव तक पहुंचा दिया कि तुम
- 41:23पागल। हो गए हो।
- 41:24किसी के भीतर देवी आ रही है, किसी के भीतर 52 बैरंग आ रही है।
- 41:32किसी के भीतर लाला बाला पीर आ रहा है, किसी के भीतर खेत्रपाल आ रहा
- 41:36है, किसके भीतर जंड वाला आ रहा है?
- 41:41किसी के भीतर काली आ रही है या हनुमान आ रही है, ये सभी पागलपन
- 41:49आज दबाने के कारण हैं तो मैं कहता हूँ दबाना कुछ ना उसको आने देना
- 41:58यहाँ आएगा। वो।
- 42:01तुम्हारे चेतन में आएगा चेतन में आएगा और तुम उसे देखोगे तुम,
- 42:12हिलना जुलना मत बस यहीं तुम गलती खाओगे यहीं तुम गलती खाते हो सदा।
- 42:21काम का वेग ज़ोर पकड़ेगा और तुम साक्षी बने रहना यही तुम्हारी
- 42:32परीक्षा है, जैसे अंधेरी। या तूफान में दीया जलता हुआ अपनी
- 42:49लोह को? संभालना है कितना मुश्किल?
- 42:50होता है बहुत मुश्किल होता है। लेकिन अगर उसके ऊपर चिमनी ढक दी
- 43:00जाए। तो वह हवा का झोंका या आंधी उस
- 43:08लोगों को हिलाएंगे इन्हें बुझा नहीं सकेंगे।
- 43:12तो जब वो तूफान आए कोई भी है जिसे विकार कहते।
- 43:15हैं। तो उसको आने देना रोकना पड़ता।
- 43:20है। नहीं तो वो दब जायेगा और फिर कल
- 43:23को देवी हनुमान, यप्पा खंडी, ये लाला वाला पीर और फलाना वाला पीर,
- 43:29ये मलेर कोटला वगैरह ये बन के आयेंगे सब दुकानदारियां हैं सब
- 43:36पाखंड। हैं।
- 43:44इसको दबाना मत, इसको देखना विटनेस इट ऑब्जर्व इट तुम अपने साक्षी
- 43:54में सिधर रहना क्योंकि तुम ही शक्ति दोगो देओ के इसको भोगने की।
- 44:05अगर तुम सिर्फ अपने आप में बने रहे शितर अकंपलू की तरह और तुम इस
- 44:13वासना के साथ घुल मिल नहीं गए एकाकार नहीं हो गए तुम इस वासना
- 44:20के साथ। आइडेंटिफिकेशन कर लेते हो।
- 44:25तुम्हें भी मज़ा आता है ये क्यों आता है मज़ा है नहीं इसमें इतनी
- 44:30शक्ति को खोकर थोड़ा सा मज़ा ले लेना कोई मज़ा थोड़ी होता है मज़ा
- 44:37लेना है तो उससे कंठ साला करो और भी।
- 44:43राहते हैं। वसल की राहत के सिवा सिर्फ यही
- 44:48राहत नहीं है तो इस फॉर्मूले को बार बार मैं समझाता हूँ।
- 44:56हर पक्ष से इसे अच्छी तरह समझ लेना।
- 44:59बस इसे यह समझना कि आज के वीडियो में यही आपके लिए है, तो यह आपके
- 45:05जीवन से संबंधित है जब बेकार आए यह तुम्हारे क्षेत्र में।
- 45:16आएगा। तुम्हें पता चलेगा धीरे धीरे धीरे
- 45:19धीरे आएगा क्रोध। आ रहा है आ रहा है।
- 45:22तुम्हारे क्षेत्र में आज यार तुम आग बबूला हो जाते हो कब होते हो
- 45:27जब तुम उस क्रोध के साथ एकाकार होते हो अगर तुमने उस क्रोध को
- 45:33साक्षी भाव से देख लिया और देखते ही रहे उस क्रोध को अपनी शक्ति न
- 45:41दी? तुम अपने आप में रहे, वह क्रोध
- 45:47कुछ क्षण के लिए आएगा और धीरे धीरे चला जाएगा।
- 45:52काम का वेग कुछ क्षण के लिए आएगा, लेकिन तुमने अगर उसका संघ साथ न
- 45:58दिया। तो वह धीरे धीरे चला जाएगा।
- 46:06उसे कहते हैं जे सी नार्द ने कहा मैंने कामदेव को जीत लिया, ऐसे
- 46:15जीतोगे तुम कामदेव को ऐसे जीतोगे तुम क्रोध को।
- 46:21जैसे विश्व मित्र क्रोध को जीत लेते हैं, विश्व के मित्र हो जाते
- 46:25हैं तो इस प्रैक्टिकल को आप बार बार सुनना।
- 46:35मैं क्या कहता हूँ? क्रोध आए, काम आए, लोभ मोह,
- 46:40अहंकार मद आए उसको आने देना मत रोकना।
- 46:47वो स्वतंत्र है जैसे हवा चलती है, अंधेरी चलती है, तूफान चलता है,
- 46:53तुम रोक नहीं सकते, मूसलाधार वर्षा होती है, रोक नहीं सकते,
- 46:58घने काले बादल आते है। तुम रोक नहीं सकते तो इन्हें भी
- 47:02रोकना मत आने देना। ये कहाँ आएँगे चेतन में आएँगे
- 47:08तुम्हारे और तुम्हें देखेंगे वो तुम्हें देखेंगे तो उसे सिर्फ
- 47:16देखते ही रहना उनके संग मत बोलेंगे अगर तुमने ये कलाकारी कर
- 47:22ली तो तुमने रद्द हो। गया।
- 47:29ये कलाकारी पहले पहले तो बड़ी असंभव लगेंगी फिर मुश्किल लगेंगी।
- 47:36फिर आसान हो जाएगी और 1 दिन तुम कह पाओगे नार्थ की तरह कि मैंने
- 47:54कामदेव को जीत लिया। आप तो नजदीक से नजदीक तर आते गए,
- 48:10आप तो नजदीक से। नजदीक तर आते गए पहले जा फिर जाने
- 48:27जा फिर जाने जाना हो गए। रफत रफत हो, मेरी हस्ती कसम हो
- 48:47गए, रफत रफत हो, मेरी। हस्ती कसम हो के धीरे धीरे धीरे
- 49:01धीरे धीरे धीरे एक दो बार चुप हो गया हार भी जाओगे हार भी जाओगे गम
- 49:07ना करना कोई बात। नहीं।
- 49:11अगली बार फिर जब तूफान। आएगा।
- 49:14तो ज्यादा सचेत हो जाना तुम्हारी सचेतता तुम्हारी कॉन्शसनेस की
- 49:24प्रगार्थता तुम्हारा ठहरा मैं बात बात में कहता हूँ, ठहरों ठहर जाओ।
- 49:33और इतने ठहर जाओ के भाई ठहरे जाओ तुम ठहरे रहे अपने आप में साक्षी
- 49:39तुम्हें तो ये बेकार तुमसे बहुत दूर खड़े हो, तुम्हें दिखाई
- 49:48पड़ेंगे तुम इन्हें देखते रहोगे। तुम इनका साथ नहीं दोगे तो ये
- 49:56जाखु मार के निकल जाएंगे। वातावरण में ऐसे तुम नारद हो
- 50:01जाओगे, ऐसे तुम कामदेव को जीत जाओगे।
- 50:09फिर जब तुम अपने शरीर की शक्ति को बचाते ही चले गए, अब ये जो धारणा
- 50:16है, पाश्चात्य की भोगो जितना भोग सको, भोग शरीर उतना काम करेगा।
- 50:27शरीर उतना पैदा करेगा। ठीक है बात तो पहलवान भी यही
- 50:35फार्म आजमाते हैं। के मसल को स्ट्रांग करो रिपीट करो
- 50:43दंड बैठ के मरो, बहे अंग तुम्हारे।
- 50:47बलिष्ठ हो जाएंगे मैंने। बहुत।
- 50:49अपनी ज़िन्दगी में बड़ा व्यायाम किया है, बड़ी खुराक खाई है।
- 50:54मैं इस महरलों में से गुजरा हुआ हूँ।
- 50:594050 किलो की चाकी का वाट चक्की होती है ना?
- 51:03आटा पीसने वाली उसका एक वाट पड़ा था हमारे।
- 51:09उसको मैं उठाता सीधा नीचे। से और ऊपर ले जाता हूँ।
- 51:14कितनी बार 1000? बार।
- 51:17यक्त लक्ष्य बीच में कोई आराम नहीं मुझे वर्जिश करते देखते हुए
- 51:23लोगों को। मेरी मासी जी का लड़का गश खा करके
- 51:29पड़ा, मुझे लोग कहते नहीं इतने मत किया करो, वर्चू फट जायेगा, अभी
- 51:38तक कुछ नहीं हुआ। हर चीज़ को मैंने अती में गया।
- 51:47और तुम्हारे शास्त्र कहते हैं अति सर्वत्र वर्ष मैंने अति ही किया
- 51:54और फिर उससे मुक्त हो गया। मैं।
- 52:02परिश्रम भी अति में किया और विश्राम भी अति में कर रहा हूँ।
- 52:07बरसात हो गया। साइंटिस्ट मुझे कह देते हैं कि
- 52:13तुम झूठ बोलते हो। बाबा?
- 52:17तीन वक्त सिर्फ दूध पीकर पांव, डेढ़ पांव दूध पीकर कोई व्यक्ति
- 52:23नहीं चिंता रह सकता धरती पे। मैंने कभी मैं तो जिनता।
- 52:29हूँ। कहते हैं हम नहीं मानते तुम मत
- 52:33मानो, मैं जीता हूँ। मैं कोई परीक्षा परीक्षा देने को
- 52:44तैयार नहीं हूँ। मुझे कोई गोल्ड मेडल नहीं चाहिए।
- 52:48लेकिन इतना तो मैं समझा दूं मैं झूठ नहीं मेरे आस पास जो लोग आते
- 52:56हैं मेरे पास आते हैं, मुझे जानते हैं मेरे घर के सदस्य मेरे जाने
- 53:01के बाद उनसे पूछ लेना कि क्या आहार था पिछले 1012 वर्षों में
- 53:06बता देंगे। खैर, सारी यात्रा सूक्ष्म शरीर की
- 53:27यात्रा है। न स्कूल की यात्रा है स्कूल न
- 53:31सिर्फ तुम्हारा घर है आज इस घर में हो कल उस घर में हो परसों उस
- 53:35घर में हो शरीर यात्रा नहीं करता तुम यात्रा करते हो तुम कौन हो
- 53:40आत्मा भी नहीं हो तुम अभी तुम आत्म नहीं हो आत्म जब होगे तब पता
- 53:48चलेगा। अभी आत्मा मत मानो अपने आप यही
- 53:51गलती खा जाते हो, तुम संतों की बातों को तुम आज ही लागू कर लेते
- 53:59हो। ताजा ताजा कतल करके आया हुआ
- 54:03व्यक्ति कहता है कि मैं निर्दोष हूँ, मैं परमात्मा हूँ।
- 54:07नहीं भाई अभी तो तुम कातिल? हो?
- 54:12अभी तुम पूरे नहीं हो अभी तुम पवित्र नहीं हो अभी तुम कातिल।
- 54:15हो? तो तुम अभी तो सूक्ष्म शरीर हो,
- 54:22हाँ, इस सूक्ष्म शरीर को गला दो। इस मैं को बुला दो, फिर तुम आत्मा
- 54:31हो जाओगे और फिर आत्मा से आगे तुम परमात्मा हो जाओगे।
- 54:37जो उस देवी ने प्रश्न पूछा फिर तुम सजन आराम हो जाओगे, यू कैन
- 54:43क्रिएट एव्रीथिंग? उसका थोड़ा सा उदाहरण विश्वामित्र
- 54:49का मिलता है कि विश्वामित्र ने यमराज से किसी बात पर खटपट हो गई
- 54:56तो उसने अपना स्वर्ग अलग से निर्मित कर दिया।
- 55:03ही हैड दी कैपेसिटी टु जेनेरेट टु उसमें शक्ति थी क्रिएट करने की।
- 55:11खैर, ये बड़े गहरे मसले हैं, लेकिन तुम्हें समझाता सुनो इससे
- 55:15बात में कोई समझा नहीं पाएगा। इसलिए बीच बीच में बोल जाता हूँ
- 55:19कह अब तो कोई बात नहीं, अब तो कुछ शिक्षणों की बात है।
- 55:29अभी तुम सूक्ष्म शरीर हो और तुम्हारी सारी यात्रा इस सूक्ष्म
- 55:33शरीर की यात्रा। है।
- 55:36फिर ये शुरू कब हुई? आज जो इतना फैलाव हो गया भर गया,
- 55:43हाउसफुल हो गया स्टोर। ये शुरू कब हुआ?
- 55:47ये शुरू हुआ बहुत पहले से मैंने कहा तुम्हारे भीतर याददाश्त है,
- 55:53पत्थर की पानी की थपेड़ों की, फिर यूनीसेल्युलर ओर्गनिस्म्ज़ फिर
- 56:01मल्टीसेल्युलर फिर दो पैर वाले। चार पैर बजाएं करते करते तो
- 56:10मनुष्य रूप में आ गए और बाबा कहते हैं कर में आवे कपड़ा के मानस का
- 56:21जामा तुम्हें उसकी कृपा से मिलता है।
- 56:25वैसे तो सब कुछ उसकी कृपा से मरता है तुम बीच में घुस जाते हो धक्के
- 56:32से है तुम्हारा जाम कुछ भी नहीं आखिर में जब तुम पाओगे आखिर में
- 56:41बड़े बड़े। सिकंदर मरते मरते आखिर में तो कह
- 56:47जाते हैं। की गलती हो गए।
- 56:54मेरे हाथ जनाजे से बाहर निकाल दे जो धन दौलत मैंने लूटी, इकट्ठी
- 57:01की। अर्थी के ऊपर से फेंक देना और जिन
- 57:08हकीमों ने वादा किया करते थे दावा किताबें खोलकर।
- 57:25उन हकीमों से ये पूछो बोलकर ये दवा हरगंज न।
- 57:37खाली जाएगी जब तेरी डोली निकाली जाएगी बे मुहूर्त के उठा ली।
- 57:55जाएगी। आखिर में जाती जाती क्या है?
- 58:00नहीं कुछ नहीं लेकिन उसका कोई। फायदा नहीं होता।
- 58:06क्योंकि जैसे ज़िन्दगी में तुमने नहीं माना था सिकंदर तुम लूटपाट
- 58:11करते रहे, वैसे ही ये करेंगे मरते वक्त ये भी कहे जाएंगे।
- 58:16और उसका कोई फायदा? भी नहीं है।
- 58:22मरते वक्त कोई बात कहे जाना किसी के कमी कौन रुका?
- 58:28सिकंदर चला गया अकूत संपत्ति को इकट्ठा किया मार काट के द्वारा।
- 58:34और अकूत संपत्ति को छोड़ गया और आखिर में हाथ फैला के चला गया।
- 58:41धन को मेरी आरती के ऊपर से जिनाजे के ऊपर से वार देना और हकीम
- 58:46जिन्होंने मेरा इलाज किया था, लुक्मान जैसे ओह मुझे कंधा दे।
- 58:52ताकि दुनिया यह समझ सके कि हकीम भी से बचा नहीं पाई।
- 58:57अकूत दौलत भी से बचा नहीं पाई और इसका बलिष्ट होना सिकंदर बड़ा
- 59:04बलिष्ट। था।
- 59:07भी इसे बचा नहीं पाया। किसे बचा पाया है?
- 59:13किसी को भी नहीं बचा पाता और जीते जी तुम में यही गुरुर रहेगा जाने
- 59:23वाले चाहे कुछ भी कह जाये और मेरे बात सुन लो जाते हुए तुम भी यही
- 59:29कहो की यही अलफाज़ दोहराओगे। लेकिन तुम्हारी भी बात आने वाली
- 59:36पीढ़ी नहीं सुनेंगे क्योंकि हमेशा अनुभव सीखाता है।
- 59:42सिकंदर को अनुभव हो गया, तुम्हें अभी अनुभव नहीं हुआ।
- 59:45तुम नहीं मानोगे मानना भी नहीं चाहिए।
- 59:50इसलिए मैं कहता हूँ कि इकट्ठा करो।
- 59:52खूब करो खूब करो जब ये धन धन न लग के बोझ लगने लग जाए जब तुम्हें
- 1:00:02ऐसा लगे धन नहीं है बोझ जो मैंने अपने सर के ऊपर इतना बोझ क्यों?
- 1:00:09रखा हुआ है। फिर तुम पटका के मर गए अभी कल ही
- 1:00:13खबर आई 40,000 करोड़ रुपये का बारिश साधू हो गया, क्या हुआ?
- 1:00:28पीछे से कोई वृहद आत्मा आई होगी। सब देख दखाई कर आगे होगी सब भोग
- 1:00:34लिया होगा। कुछ नहीं है।
- 1:00:37तो यहाँ 40,000 क्रो को उसने क्या करना?
- 1:00:39है। वैराग्य की भावना को साथ लिए लिए
- 1:00:42जन्मा है। ऐसे ही तुम्हारी भी यात्राएं होती
- 1:00:45रहती। हैं।
- 1:00:50तो क्या संत हो गया नहीं है कुछ ये पीछे से जान के है या कबीर
- 1:00:54जैसे लोग पीछे से जान के आते हैं नहीं है, कुछ छोड़ देते हैं बस
- 1:01:01चौधरी आप उन लोग रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी कर लो।
- 1:01:08रूखी सुखी खाई के। ठंडा पानी पी।
- 1:01:11देख पराई चौपड़ी मत ललचावे जी दूसरों को चौपड़ी हुई खाते देखना
- 1:01:21जियरा को मत लड़ जाना तुम तो रूखी सूखी खा गए।
- 1:01:29अगर तुम अपनी सही यात्रा पर निकल जाओ, वहीं तुम्हारा सौभाग्य है।
- 1:01:34रूखी सूखी खाना तो अब खाया सुबह निकल जाएगा लेकिन जो तुम साथ लेकर
- 1:01:41जाओगे, अनुभव के नहीं है। कुछ भोगों में यह बड़े काम का है।
- 1:01:49यह तुम कमा लेना, बस यही कमाई तुम्हारे साथ जाएगी।
- 1:01:56यह कमाई वैराग्य नहीं है, कुछ यह तुम्हारे अनुभव से आनी चाहिए।
- 1:02:02शास्त्रों से नहीं शास्त्र तुम्हारे जीवन की।
- 1:02:08रास्तों को तय करें ये गलत है, ये तुम्हें भटका देंगे।
- 1:02:13शास्त्रों में लिखा किसी ने जाना होगा तुमने, तुम खुद जानो बहुत
- 1:02:21तुम्हें लगी है, तुम खुद रोक दिखाओ।
- 1:02:25प्यास तुम्हें लगी है तुम खुद पानी पीओ आज क्या हो रहा है आज
- 1:02:32फार्मूलेशन के ऊपर बहस हो रही है एच टू।
- 1:02:35ओह, पानी होता है। एच टू ओह पानी होता है जबकि एच टू
- 1:02:42ओह पानी नहीं होता। एच टुवो पानी की फॉर्मूलेशन है,
- 1:02:47वो तुमने बनाई है एच टुवो वो परमात्मा का बनाया हुआ पानी नहीं
- 1:02:52है जो गंगा में बहता है, गोमुखी से निकलता है, गंगोत्री के बीच
- 1:02:59में से हो के आता। है।
- 1:03:01वह एच टुवो नहीं है। ये तुम्हारा बनाया हुआ काल्पनिक
- 1:03:05अब्रीविएशन सिम्बोलिक रीप्रेसेंटेशन है।
- 1:03:16कुछ महीने पहले मेरे पास आश्चर्य से एक जोक आया।
- 1:03:22ज्योति साथ में थे, लिव इन में रह रहे थे।
- 1:03:29दोनों दीक्षा लेने आए थे। मेरा काम दीक्षा देना है, व्यर्थ
- 1:03:33की बात नहीं करना तो नाम भी नहीं पूछता जो मेरे से यहाँ दीक्षा
- 1:03:38लेके गए, मैंने उनसे नाम गम शायद ही कभी पूछा होगा क्या पूछता हूँ?
- 1:03:46बहनों ने दीक्षा दी। 2 मिनट के लिए बाबा बात कर सकते
- 1:03:54हैं। मैंने कहा नहीं कहते बस थोड़ी सी
- 1:03:59बात। है।
- 1:04:02मैंने कहा देखो बात। एक तो कुमारी आनंद की खुमारी ऊपर
- 1:04:09से यह आनंदनाथ का स्वर इसका गुंजार आवाज बताता हूँ तो मैं
- 1:04:16मुझे ऊंचा क्यों सुनता है? भीतर से ओंकार की आवाज का मज़ा।
- 1:04:24और वो मदमस्ती की फुहार इन दोनों को सुनो कि तुम्हारी आवाज सुनो,
- 1:04:30तुम्हारी आवाज फीकी लगती। है।
- 1:04:35इसलिए मैं ज्यादा ध्यान भी नहीं देता।
- 1:04:38मैंने कहा चलो बताओ क्या पूछना चाहती।
- 1:04:41हूँ। ये बाबा आपका सेक्स।
- 1:04:45के बारे में क्या ध्यान ख्याल है? मैंने कहा ठीक है, मतलब मतलब मुझे
- 1:04:55भोग लेना चाहिए। हाँ, बिल्कुल भोग लेना चाहिए।
- 1:05:02जिसके लिए बना है वो काम रोहित है टेस्ट वर्स जीवा ये पांच
- 1:05:14ज्ञानेन्द्र हैं पांच कर्मिंद्र। जीव से स्वाद लो नमकीन है, मीठा
- 1:05:22है, कड़वा है, जहरीला है पता चल जाएगा कान से सुनो मधुर संगीत
- 1:05:29सुनो कुछ भी सुनो ये सेंटर से हैं हमारे यहाँ।
- 1:05:40यह जो सेक्स है, इसमें जो वीर है, वीर है, स्पर्म और राजा इनका क्या
- 1:05:48काम है? मुझे बताओ इनका काम बच्चा पैदा कर
- 1:05:53रहा है, फिर तुम इन्हें व्यर्थ को मंगवाते हो।
- 1:05:57जब वीर का काम और राज्य का काम बच्चा पैदा करना है, फिर तुम
- 1:06:03नाजिम को झोंक देते हो, तुम्हें पता है ये तुम्हारे ही बच्चे हाँ
- 1:06:10बाबा पता तो नहीं था लेकिन अब। समझ में आई बात हमारे ही बच्चे है
- 1:06:16और हम इन्हीं बच्चों को नदी में फेंक देते।
- 1:06:19हैं तुम फेंकते? हो तुम जन्म से पहले इनको दंडित
- 1:06:25कर देते हो, और गटर? में फेंक देते हो?
- 1:06:31और बताओ और क्या विचार है? मैंने कहा भोगने के लिए नहीं है
- 1:06:37ये ये बच्चे पैदा। करने के लिए है।
- 1:06:42कहता है हमारे पाश्चात में तुम अपने पाश्चात को छोड़ो, तुम मुझसे
- 1:06:45बात। कर रहे हो?
- 1:06:50ठीक है बाबा, फिर। यह काबू में नहीं आता।
- 1:06:53यह तुम्हारे संस्कारों के कारण काबू में नहीं आता।
- 1:06:57तुमने रत लगा दिया इसके अगर कोई व्यक्ति कहे कि सिगरेट को धुएं को
- 1:07:03अंदर बाहर अंदर बाहर ले के जाता हूँ और यह लत लग गई है छूटती
- 1:07:09नहीं। अब मैं क्या करूँ तुझे अंदर बाहर
- 1:07:15अंदर बाहर का ही सिलसिला काम का है तो बसने लगा।
- 1:07:20यही नहीं होता सेक्स में क्या करते हो तुम अंदर बाहर अंदर बाहर?
- 1:07:27तुम कहते हो बड़ा मज़ा आता है तो ठीक है, मज़ा आता है ठीक है
- 1:07:30स्मोकर को भी तो मज़ा आता है ये तुम्हे लत पड़ेगा इस लत को चाहे
- 1:07:38छोड़ दो, नहीं पीते रहो कोई बात नहीं, मैं तुम्हे नहीं कहता छोड़
- 1:07:41दो मैं क्यों कहूँगा तुम्हे? मेरी शरण में आओगे पूछोगे स्पेशल
- 1:07:52और कुछ भावना होगी भीतर पूछने की अभी तो भावना मुझे लगती नहीं, अभी
- 1:07:56तो लगता है तुम कुछ पाश्चात्य की भावनाओं को मुझपे थोपना चाहते हो,
- 1:08:02ऐसा कुछ नहीं है। जो चीज़ जिसके लिए ब्रह्मात्मा ने
- 1:08:06बनाई। है।
- 1:08:10उसका उपयोग ऐसे। करो आँखें देखने के लिए कान सुनने
- 1:08:17के लिए नाक सूंघने के लिए जीव स्वाद लेने के लिए खट्टा है मीठा
- 1:08:23है। गुप्त इंद्रगण ये मूत्र की निकासी
- 1:08:28के लिए है, लेकिन यह बच्चे पैदा करने के काम भी आता है मेरे को भी
- 1:08:35बाहर निकालते हैं, लेकिन तुम मूत्र कम निकालो और मेरे ज्यादा
- 1:08:39निकालो। फिर क्या हो जायेगा?
- 1:08:42ये ठीक होगा। लेकिन बाबा ये रुकता नहीं, ये
- 1:08:46तुम्हारी समस्या है ना भाई, रुकता नहीं तो वो ही तो मैंने कहा
- 1:08:51सिगरेट पीने वाला स्मोकर कहे कि नहीं?
- 1:08:55मैं तो पांच डब्बी रोज़ की पीनी है।
- 1:08:58मैं तो नहीं रुक रहा तो मत रुक। बाबा इससे नुकसान क्या है?
- 1:09:04डॉक्टर कहते हैं कोई नुकसान नहीं तो है ना नुकसान तो करते रहो नहीं
- 1:09:10तुम्हारे हिसाब से मेरे हिसाब से तो सारा ही नुकसान है, ज़रा देखो
- 1:09:16जो बीरे तुमने निकाल दिया। प्रकृति सबसे पहले री प्रोजेक्टिव
- 1:09:21सिस्टम को आगाह करती। है।
- 1:09:23जो वीर्य निकल गया, सबसे पहले जो खाना खाओगे, उसका वीर्य बनेगा
- 1:09:27क्यों? क्योंकि प्रकृति अपने अंश को खत्म
- 1:09:30नहीं होने देना चाहती। प्रकृति सबसे पहले वीर्य पैदा।
- 1:09:37करेगी। बाद में कुछ हो और तुम उस वीर को
- 1:09:45फिर फेंक दोगे। तो?
- 1:09:48प्रकृति को नाजायज काम करना पड़ता।
- 1:09:51है। अब समझना बात को है।
- 1:09:56जितना वीर और रज को तुम बाहर निकालोगे बे, वजह निकालोगे अगर
- 1:10:03वजह से निकालोगे, बच्चा पैदा करने के लिए, करे तो ठीक बे, वजह
- 1:10:08निकालोगे तो प्रकृति को एक्स्ट्रा काम करना पड़ेगा, जो बिना काम का
- 1:10:12काम है, कोई जरूरत नहीं थी उसकी। सिर्फ स्वाद के कारण यही तो संत
- 1:10:23कहते हैं स्वाद जो इधर लेते हो वहाँ देखो उसका चस्का एक बार लग
- 1:10:29गया फिर भूले से भूल नहीं पाओगे। मेरा कैसे दीवानी हो जाती है?
- 1:10:37मेरा शादीशुदा थी भोजराज, उसका घर वाला था, मर गया था विधवा हो गयी
- 1:10:43थी और मेरा कैसे नाचती है मेरा वो कभी काम की याद नहीं आती और वह
- 1:10:50संत क्या? जैसे काम की याद आ जाये नहीं आती
- 1:10:53याद मजबूरी हो सकती है बच्चे पैदा करना यह मजबूरी है वंश को चलाना
- 1:11:03है आगे प्रकृति के वंश को, अपने वंश को।
- 1:11:10यह रुकता नहीं है। तुम्हारी समज से आए लत पड़ गई भाई
- 1:11:14स्मोकर भी तो यही कहता है तो भाव इसमें क्या बुराइ है हमारे तो भाव
- 1:11:22राह चलती है सड़क के ऊपर हम अगर कोई अच्छा लगता है अगर कोई अच्छी
- 1:11:26लगती है तो हम बाहों में झपड़ लेते हैं तो झपड़ लो भाई।
- 1:11:32मैंने तुम्हें कब कहा मत झकड़ो झकड़ो फिर बाबा ये अपराध है नहीं
- 1:11:40अपराध नहीं नेचुरल है, लेकिन मैं तुम्हें इतना कहता हूँ कि तुम
- 1:11:49जितना शरीर से नाजायज काम लोगे, जो काम नाजायज है, क्योंकि जो वीर
- 1:11:56है तुमने घरा दिया। प्रकृति उसका फिर निर्माण करेगी
- 1:12:01और व्यर्थ में वो गिसेगी उसके भीतर के अंश घिसते हैं, तुम्हें
- 1:12:04बता दूंगा। अगर तुम कोई कार खरीदने कभी गए हो
- 1:12:09ना याद रखो, मेरी बात को थोड़ा सा गौर से समझना।
- 1:12:15अगर तुम कार बाजार में कभी कार खरीदने कभी गए हो तो तुम सबसे
- 1:12:21पहले उसकी दशहरा देखोगे कि देखने में कैसी लगती है।
- 1:12:27फिर तुम उसका पूछोगे, मॉडल मॉडल भी ठीक है, अब 2024 चल रहा है, ये
- 1:12:352023 की बनी है। ऊंचा मॉडल है, ठीक है, ऐसा देखने
- 1:12:41में भी ठीक है, फिर तुम एक बात। पूछ दो।
- 1:12:481 साल में फर्ज करो एक गाड़ी 50,000 किलोमीटर चलती।
- 1:12:56है। तुम मुझसे पूछो के बीच ये चली
- 1:13:00कितनी हुई? है।
- 1:13:03वो मीटर देखेगा। तो भाई 50,000 के बजाय 5,00,000
- 1:13:08चली हुई। है।
- 1:13:1110 गुना ज्यादा चालू है। तुम क्या कहोगे ज्यादा घिसी हुई।
- 1:13:17है। बस जो ज्यादा घिस गई।
- 1:13:23उसकी म्याद कम है, ड्यूरेशॅन कम है आगे चलने की और मिस्त्री भी
- 1:13:29देख लेगा घिस गए हैं पुर्जे वगैरह बूढ़े हो गए हैं इंजन वगैरह ये
- 1:13:33सारा पुर्जा पुर्जा घिस गया है, उस कार की वैल्यू कम हो जाती है।
- 1:13:42तुम अपना ही बिगाड़ रहे हो कितनी देर काम करेंगे तुम्हारी कटनी
- 1:13:47तुम्हारा दीवार घास जाएंगे इसलिए छोटी छोटी उम्र में तुम गिसटते कर
- 1:13:58रहे हो बीमारियों से। कुछ पिछले जन्म के कर्म होते हैं।
- 1:14:04तुम ठीक कहते हो उसके कारण भी होते हैं, लेकिन तुम जानबूझ कर तो
- 1:14:09मत घेसाओ ओवर येटेड ये चाऊ मनचुंगा क्या है ये ये पिज्जा
- 1:14:19बर्गर? ये इडली डोसा ये क्या है?
- 1:14:26ऋतुओं के हिसाब से देशकाल के हिसाब से जो परंपराएं ऋषियों ने
- 1:14:31लागू की हैं, वो ज्यादा बड़े वैज्ञानिक से तुम्हारे से तुम
- 1:14:35इतना गुमान मत करो। अगर दो चीजों का तुमने फॉर्मूलेशन
- 1:14:39खोज लिया है तो वो मन मत करो, वो ज्यादा खोजते हैं, वो आदि से लेकर
- 1:14:46अंत तक खोजा हुआ है। बहुत खोजा जो तुम खोज नहीं सकोगे
- 1:14:52तो सामाजिक परंपराएं हैं। मैंने अभी कहा।
- 1:14:57ये गलती खा गई जहाँ ओशो अगर तुम्हे एक छूट ये देनी थी तो कम
- 1:15:03से कम इतने छूट दे देते कि चलो ठीक है, लेकिन तुम उन कमरों का
- 1:15:07इस्तेमाल कर रहे? हो?
- 1:15:10समाज में प्रदूषण मत पलाओ ये प्रदूषण।
- 1:15:12है एक तरह का। प्रदूषण के सिर का, स्वछंदता का
- 1:15:17स्वतंत्रता के नाम पर हमारा मन स्वछंदता बरतने लगता है।
- 1:15:23स्वतंत्रता जैसे हम एक प्राइम मिनिस्टर सुन ले, वह स्वतंत्र रूप
- 1:15:27से कार्यभार करे। कानून के हिसाब से वह स्वतंत्रता
- 1:15:30है और वह कल बंदरों की तरह शालियाँ मारना शुरू कर दे।
- 1:15:34वह स्वछंदता है, जो चाहे वो पास करवा दे काम वह स्वतंत्रता नहीं
- 1:15:39है, वह स्वतंत्रता है तो हमारा गला घोंट दिया के बहुत स्वतंत्रता
- 1:15:43है तो स्वतंत्रता के बनाए हुए नियमों को जो हमारे ऋषियों ने
- 1:15:51बनाई। उनको स्वच्छंदता में मत बदलो और
- 1:15:58दूसरा अगर तुम कहते हो कि ये तो नेचुरल है तो नैचुरल तो विध राह
- 1:16:03जलते तुम्हें टॉयलेट। भी आ सकता है।
- 1:16:06वहीं सड़क में बैठ जाएगा। ये सूथन पजामा खोल दिया करो पैंट
- 1:16:12वहीं बैठ जाया करो मूत्र वेग होता है हमारे यहाँ कहते हैं लघु शंका
- 1:16:22और दीर्घ शंका लघु शंका कहते हैं पेशाब की आजत तो वहीं कर लिया
- 1:16:28हमने क्या? तुम कहोगे यह स्वतंत्रता है, हम
- 1:16:35आजाद हैं ठीक आजाद और दिल के सिंह का अजय, मलमूत्र, मूत्र और मल मल
- 1:16:43का विसर्जन वहीं पड़ के बैठ लिया करो, पड़ो चल हो गया काम।
- 1:16:49तुम्हारी बस चले तो तुम यह भी कर रहे हो, ये तो सरकारों हैं
- 1:16:54सरकारों कहेंगे, साफ करे इसको हरामखोर, इसका जाना दे चर, अदालती
- 1:17:00में चर, कुछ मर्यादाएं बनाई हैं। कुछ कानून के हिसाब से डाल दी गई।
- 1:17:10कुछ समाज के हिसाब से डाल दी गई और तुम इन दोनों को मर्यादा में
- 1:17:16रख कर चलो तो जीवन बड़ा सुंदर हो जाएगा।
- 1:17:20जो कुछ समाज ने वर्जित किया है, वह मानव।
- 1:17:25कि वह प्राकृतिक वेद है, काम का भी प्राकृतिक वेद है।
- 1:17:31क्रोध का भी प्राकृतिक वेद है। ये सब प्राकृतिक वेद है।
- 1:17:35मैंने क्यों कहा कि कोप भवन में जाकर निकाल लिया करो क्योंकि फिर
- 1:17:41दमन करो। मूत्र का वेग आया तो भाई टॉयलेट
- 1:17:47चले जाएगा, दीर्घ संकाय तो टॉयलेट चले जाएगा, लोग सड़क के ऊपर
- 1:17:54बैठोगे तो फिर फिर क्या हो जाएगा? सभी बैठेंगे।
- 1:18:00यह मर्यादाओं का पालन सामाजिक रूप से भी करना होता।
- 1:18:03है। और कानूनी रूप से भी करना होता
- 1:18:06है। कानून कानून तुम्हारे माल और जान
- 1:18:12की रक्षा करता है। आजादी की रक्षा।
- 1:18:14करता है। और समाज, समाज कुछ गहरी चीजों की
- 1:18:19रक्षा। करता है।
- 1:18:20तुम्हारे चरित्र के लिए। कुछ ऐसी चीजों के जिन्हें कानून
- 1:18:26चूक गया है उसको समाज कवर करता है और मनुष्य को दोनों चीजों को
- 1:18:34ध्यान में रखकर ही चलना चाहिए। चुप हो।
- 1:18:40गया बात तो ठीक है तुम्हारी बाबा। हम तो वहाँ पर पेंट खोल कर धर्घशन
- 1:18:46का भी कर सकते हैं। लघु शंका भी कर सकते हैं।
- 1:18:51अगर आती जाती लड़केलड़की को तुम पकड़ सकते हो तो धर्घशन का भी
- 1:18:56वहीं कर लिया। था।
- 1:19:02वक्त फिर बीत जाता है। एक घंटा 20 मिनट हो गए हैं और तुम
- 1:19:15सुन नहीं सकते इतना बात काम की है, लेकिन करूँ क्या?
- 1:19:21मेरे लिए अपनी मजबूरी है, तुम लिख देते हो, मुझे पता है।
- 1:19:25बाबा तुम बोलते रहो, हम सुनते रहें, ऐसे ही जिंदगानिया भी जाएं
- 1:19:31बिल्कुल ठीक है ये तुम्हारी भावना बिल्कुल दुरुस्त है, लेकिन क्या
- 1:19:36करूँ? और भी तो लोग?
- 1:19:37हैं। जिन्हें काम धाम भी होते हैं।
- 1:19:40वक्त कम होता है विचारों के पास। उनको भी सुननी होती है तो सभी
- 1:19:46चीजों को मर्यादा में रखकर ही चलना होता है।
- 1:19:51श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुराद। हेनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:20:12गोविंद हरे मुरहरी। हेनाथ नारायण वसुदेव पितमात
- 1:20:30स्वामी सखा हमारे पितमा। अत स्वामी सखा हमारे हेनाथ नारायण
- 1:20:48वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी हिनाथ नारा यन वासुदेव
- 1:21:07धन्यवाद।