Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Jan 25 - अध्यात्म की सबसे बड़ी गांठ - साक्षी कैसे हों? | Sakshi Part 2nd | तुम कैसे साक्षी होगे?
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- 0:23कल के प्रसंग से आगे है तुमने कहा कि मैं हर क्रिया का साक्षी रहता
- 0:35हूँ, हर विकास का भी साक्षी रहता हूँ, लेकिन फिर भी।
- 0:44उन विचारों की पकड़ में आ जाता है।
- 0:48कामवासना के साक्षी रहने के उपरांत भी कामवासना से घर जाता
- 0:55है। उसे छोड़ नहीं पाता।
- 1:07कहीं कोई गलती है? कल मैंने कहा था गलती क्या है?
- 1:11अब इसके ऊपर चर्चा करें। एस।
- 1:19समझो कि तुम बिजली की नंगी तार को हाथ लगाने जा रहे हो।
- 1:27होश में आँखें खुली हैं। बिजली के तार नग्गी तुम देख रहे
- 1:33हो तुम्हारा हाथ बढ़ रहा है शने शने उस तार की तरफ बस तुम्हारा
- 1:45प्रश्न ऐसा ही है। तुम कहती हो फिर भी मैं उस नंगी
- 1:52तार को हाथ लगा देता हूँ। देखिये एक आध बार तो ये चलता है
- 2:03क्योंकि तुम्हें उसका परिणाम नहीं पता होता।
- 2:08लेकिन अगर हल्का सा करंट लगा और हाथ खींच गया तो फिर से तुम उसे
- 2:16हाथ नहीं लगाओगे। कामवास न उठे क्रौद उठा।
- 2:28सभी बेकार उठे तुम कहते हो, मैं उनका साक्षी हूँ, साक्षी हो लेकिन
- 2:41सिर्फ साक्षी रहने से कुछ नहीं होता।
- 2:46क्या करना होगा? तुम नंगीकार को हाथ लगाने जा रहे
- 2:51हो, उसके तुम साक्षी हो, इतने से बात बन जाएगी क्या नहीं क्या होगा
- 3:03तुम्हें हाथ पीछे कैसे होगा? अन्यथा तुम आगे थोड़ा सा और और
- 3:13चिपक जाओगे। बिजली से यही होता है तुम्हारे
- 3:17साथ। बड़ी बारीक फर्क है।
- 3:27साक्षी तो मैं और साक्षी जब क्रिया में ढल जाता है इसे फिर
- 3:39समझो नगदी तार को तुम हाथ लगाने जा रहे हो तुम कहते हो मैं इसका
- 3:45साक्षी हूँ। यहाँ तक तो ठीक है, हाथ आगे आगे
- 3:50बढ़ा रहे हो, यहाँ तक भी ठीक है लेकिन फिर तुम कहते हो कि मैं उस
- 3:58काम वासना की गृहस्थ में आ जाता हूँ।
- 4:00क्रोध की गृहस्थ में आ जाता हूँ, यह मूर्खता है।
- 4:06फिर तुम साक्षी नहीं रह पाते, फिर तुमने ये देखा नहीं कि क्रोध के
- 4:12बाद वह सता पाएगा। क्रोध के बाद अगला भी क्रोध
- 4:17करेगा, जिसके ऊपर घृणा का क्रोध फेंका, वह प्रत्याउत्तर देगा।
- 4:26काम वासना से तुम झरे तो शक्ति तुम्हारे क्षण होगी वो पल नहीं
- 4:33तुमने नहारे वह अनुभव तुम्हारे संग न रहा और ध्यान रखना।
- 4:45ब्रह्मचर्य को साधने के लिए है, शरीर के ब्रह्मचर्य को साधना
- 4:52आवश्यक है और खें विरोख जो कहते हैं, भोगो खूब भोगो।
- 5:04और सिर्फ साक्षी बने रहो, मैं कहता हूँ मुर्खें वो रोख सिर्फ
- 5:12वोगो और सिर्फ वोगो और साक्षी बने रहो ऐसे तो तुम साक्षी बनके गाड़ी
- 5:19के नीचे। फिर तुम्हारे अनुभव ने कहाँ काम
- 5:26किया? अनुभव कहीं भी काम नहीं आया, तुम
- 5:35जानते हो गाड़ी के नीचे सर दंगे सर कट जाएगा।
- 5:40फिर भी दोगे नहीं दोगे साक्षी तो तुम रहो लेकिन साक्षी रहने का कुछ
- 5:51लाभ भी उठाओ वो साक्षी रहने का पूर्ण लाभ उठाओ।
- 6:02एक छोटी सी कहानी अपनी बात को शुरू करो, फिर हमारा एक प्रश्न
- 6:09बहुत देर से लटका आ रहा है। नागार्जुन का धन्यवाद उसमें भी
- 6:17जाएंगे। श्री कृष्ण का गुरु दुर्बासा
- 6:28यमुनापार दूर एक छोटी सी झोंपड़ी में बैठे हैं और कृष्ण कहती हैं
- 6:37अपनी गोपियों से सखियों से। मेरे गुरुदेव आए हैं क्या उनसे
- 6:49मिलना चाहोगी? बिल्कुल बताओ कहाँ हैं हम अवश्य
- 6:56मिलेंगे उनके लिए सुद्ध स्वाद भोजन पकाकर लेके जाएंगे।
- 7:03कृष्ण ने कहा कि गंगा जमनापार है वो सामने दायें बाएं मुड़ के ऐसे
- 7:12उनकी झोंपड़ी आजाएगी गोपियाँ घर गई गुरूजी के लिए पकवान।
- 7:19पकाए जाने की तैयारी में थी। देखा यमुना उफान पर है।
- 7:28पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। पुल नहीं दिखाई पड़ता।
- 7:37वापस कृष्ण के पास हैं, जमुना बड़े उफान पर है।
- 7:42क्या किया जाए? कृष्ण कहने लगे, देवियो माँ गंगा
- 7:55से प्रार्थना कर दो, क्षमा करना गंगा निकल जाती है, मेरी माँ गंगा
- 8:01ही है, माँ यमुना से प्रार्थना कर दो कि अगर।
- 8:08हमारा कृष्ण बाल ब्रह्मचारी है, अखंड गर्म जारी है तो माँ हमें
- 8:17रस्सा दे दे। अपने उफान को शांत कर तो सभी को
- 8:26अपने हंसने लगे। सखी हंसने लगी, राधा भी हंसने
- 8:29लगी। असंभव है।
- 8:36जो रोज़ राशन चाहता है, उसके बारे में फरियाद की जाए तो मूर्खता है
- 8:46नहीं, लेकिन कई बार दिखने वाली चीजें।
- 8:52होती सत्य हैं लगती मूर्खताएं फिर भी कृष्ण इतना प्यारा था घर गई
- 9:03पकवान पकवाए अकी माँ से प्रार्थना के।
- 9:09माँ अगर हमारे प्रिय कृष्ण बाल ब्रह्मचारी हैं, उन्होंने कभी भी
- 9:17ब्रह्मचर्य खोया नहीं तो हे माँ यमुना हमें रास्ता दे दे अपने
- 9:24उफान को शांत कर। इतना कहते ही यमुना नीचे बैठ के
- 9:40पुल साफ दिखाई देने लगा। उसका उफान शांत हो गया।
- 9:47हैरान तो सभी थीं, देखा कृष्ण की तरफ, लेकिन।
- 9:56हँसी भी और इस आश्चर्य से प्रभावित भी हुई है।
- 10:03ये क्या है? जीसको हम रोज़ सरेराह नंगा देखते
- 10:10हैं। वह बाल हम जा रहे हैं।
- 10:15हाँ ऐसा भी होता है कि बहुत गहरी बातें हैं।
- 10:24अभी कुछ दिन पहले मुझे एक व्यक्ति ने कहा कि हमारे प्राइम मिनिस्टर
- 10:27ऑफ़ इंडिया कहते हैं कि मैं नॉन बायोलॉजिकल हूँ।
- 10:34मैंने कहा ठीक है सर, क्यों? मैंने कहा नॉन बायोलॉजिकल सभी नॉन
- 10:43बायोलॉजिकल ही है हम जो हमारा अंतःस्वरूप है।
- 10:51उसका न कोई माँ है, न कोई पिता है।
- 10:55हम नॉन बायोलॉजिकल हैं। सभी माता पिता तो शरीर के होते
- 11:01हैं, माँ बाप होते हैं, शरीर के वो बायोलॉजिकल होते हैं।
- 11:10तुम्हारा शरीर आया बायोलॉजिकल पिता से और बायोलॉजिकल माता से और
- 11:18किन्हीं अज्ञात तलों में जा के भीतर हम नॉन बायोलॉजिकल हो जाते
- 11:22हैं। वह जो माता पिता से नहीं आया।
- 11:30जो सैपम है, जो खुद से प्रकाशमान है इसको बाबा नानक ने कहा सैपम
- 11:38गुरु प्रसाद वो नॉनबालोजिकल है उसका माता पिता कोई नहीं, मुझे
- 11:46लोग पूछ लेते हैं, ये है शंकर। इसके माँ बाप मैंने कहा कोई नहीं
- 11:52है इस नॉन वैलिजबल तो एक अर्थ में मैंने कहा ठीक कहते हैं जिसने
- 12:02अपने अंतश को छू लिया और अपने अंतश को अच्छी तरह से देख लिया,
- 12:08टच कर लिया। वह जानेगा कि मैं नॉन बायलजिकल
- 12:14हूँ मेरे शरीर को उत्पन्न किया होगा बिल्कुल किया है माँ बाप ने,
- 12:22लेकिन जो वास्तव में मैं हूँ वह नॉन बायलजिकल हूँ वह माता पिता से
- 12:27नहीं आया। चलो आगे चले सखियां चली गईं, गुरु
- 12:38के पास जाकर प्रणाम किया, परीक्षा दिया क्या आपके शिष्य?
- 12:48कृष्ण ने हमें भेजा है हमारे प्रिया हाँ पुत्र को बैठ जाओ, एक
- 12:56थोड़ा सा भोग लगा लो हम कुछ पकवान लेके आये हैं, ले आओ।
- 13:04सभी सखियां थालियां भर के ले गयी थी।
- 13:13और प्रत्येक थाली का ओखार है श्रद्धर वश थाली आई हड़प थाली आई
- 13:20हड़प सब खाली अब पहला वो चमत्कार दूसरा ये चमत्कार सारा खा गया।
- 13:33इतनी तालियां थोड़ा थोड़ा भोग लगाने के लिए लेके आए थे ये
- 13:38बिलकुल ऐसे जैसे तुम प्रसाद लेके जाओ लिफाफा भर दे और जीसको भोग
- 13:46लगाने के लिए लेके जाओ वो सारा खा जाए ऐसा ही हुआ।
- 13:55गुरु ने सब चट कर दिया थालियां साफ हो कर चरणों में प्रणाम किया,
- 14:04आशीर्वाद लिया। गोपियाँ बोलीं गुरुदेव।
- 14:12हम वापस जा रहे हैं, लेकिन एक मुश्किल है माँ यमुना उफान पर आती
- 14:24हुई तो हमें रास्ता मिल गया था, अब जाते हुए क्या करें?
- 14:34उफान पर होगी। तब रास्ता दे दिया था और दुर्वा
- 14:39सब बोले पुत्री को तुम ऐसा करो माँ यमुना से प्रार्थना कर देना।
- 14:51अगर हमारे प्रिय कृष्ण के गुरु देव दुर्वासहारी से पब्नाहारी
- 15:01हैं, उन्होंने कभी कुछ सिखाया नहीं तो माँ।
- 15:07अपने उफान को शांत कर हमें रास्ता दे दे और ये तीसरा अजूबा वहीं से
- 15:14कहावत बनी के कानों सुनी तो गलत हो ही जाती है।
- 15:18आँखों देखी भी गलत हो जाती है। सभी हंसने लगी।
- 15:28मुँह में दुपट्टे देके हँसी रुक नहीं रही थी।
- 15:31सारा चट कर गया मोला और कहते की मैं पवना हारी हूँ, कभी कुछ खाया
- 15:37नहीं और कह दो यमुना से माँ हमें रसता दे दे और वो रसता दे दे।
- 15:45कैसी संभव है? लेकिन गईं किसी तरह जा के माँ यब
- 15:51न फिर वो फ़ोन पे थे हाथ जोड़ के खड़ी हो गईं प्रार्थियों की कि
- 15:59माँ? अगर हमारे प्रिय कृष्णन के
- 16:04गुरुदेव धुर्वा सा ऋषि भावना हारी है, उन्होंने कभी कुछ कहा नहीं तो
- 16:09अपने उफान को शांत कर हमें रास्ता दे दे और जमुना हट गई।
- 16:19उफान शांत हो। रास्ता मिल गया।
- 16:29गोपियाँ पुल पार कर गईं, परले पार आ गई, लेकिन एक कुतुब हल बना रहा।
- 16:35ये क्या हमने आँखों से देखा? आँखों से देखा झूठा हो गया, अपने
- 16:45हाथ से चला के अपने हाथ से पकाया। यह शोपन तो नहीं था आँखों में जल
- 16:54के छिड़के मार गए अपने बाल पाड़ लिए देखें जागृत हैं, किसु सूक्त
- 16:59हैं। लेकिन नहीं जागृत है।
- 17:10ये क्या हुआ? दोनों ही बातें मिथ्या और दोनों
- 17:17ही सत्य माँ जमुना तो झूठे नहीं होते माँ जमुना ने राष्ट्रपति जी।
- 17:28अब हम विषय पर है एक बेहतर का तत्व वह सदा से ब्रह्मचारी है
- 17:38वहाँ पहुंचना है हमने जहाँ से कुछ कभी खंडित नहीं होता, जहाँ से कुछ
- 17:45कभी खोया नहीं जाता। वहाँ की शक्ति सदा सी है आद सच
- 17:52जुगाद सच हेवी सच नानक और उसी भी सच उतनी ही रहेंगी।
- 17:58एक बूंद उसमें से निकाली नहीं जा सकती और एक बूंद उसमें और डाली
- 18:04नहीं जा सकती। मैंने कहा जब मैं सिक्स पढ़ता था,
- 18:08सबसे पहला सिद्धांत आया मैट्रिक कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर कैन बी
- 18:13डिस्ट्रॉइड मैं बड़ा हरानी हुआ। फिर तुम क्या करते हो?
- 18:22वैज्ञानिक किसलिए है? जब तुम कुछ बना नहीं सकते और कुछ
- 18:28विनिष्ठ भी नहीं कर सकते तो तुम काहे कुछ और लगा रहे हो?
- 18:34तुम्हारी सत्या क्या है? तुम्हारी औकात क्या है?
- 18:39तो हमारे प्रोफेसर ने हंसकर कहा बस इतनी ही औकातें हैं हमारे।
- 18:46मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड न कैन बी डिस्ट्रॉइड हम न कुछ बना सकते
- 18:52हैं, न कुछ विनाश कर सकते हैं ऐसा हमारा भीतर का वह अस्तित्व है।
- 19:01वहाँ जाकर तो ब्रह्मचारी हो ही जाता है, व्यक्ति और वहाँ जाकर जब
- 19:07जान जाता है कि मेरे स्वरूप में से कण निकाला नहीं जा सकता और कण
- 19:15डाला नहीं जा सकता, यह सदैव से एक रूप है।
- 19:20समरूप है, समरस है, सदाथा है, रहेगा, लेकिन ध्यान रखना वहाँ
- 19:38पहुँच ही जाओगे तब की बात है। कोरे स्वपन देखना अच्छा नहीं होता
- 19:46शुरू करना होगा ब्रह्मचर्य से इस बायोलॉजिकल शरीर के ब्रह्मचर्य से
- 19:52नॉन बायोलॉजिकल ब्रह्मचर्य तक पहुँचोगे बायोलॉजिकल शरीर के
- 19:56ब्रह्मचर्य से यह असंभव है। अगर कोई व्यक्ति कहे कि मैं सिर्फ
- 20:03साक्षी हो के ब्रह्मचर्य को साथ लेता हूँ, शकलित होने देता हूँ,
- 20:08अपने आपको शकलित होने देती हूँ अपने आपको और मैं ब्रह्मचारी हूँ,
- 20:13गलत शरीर के ब्रह्मचर्य से सद्ता है।
- 20:20अस्तित्व का ब्रह्मचर्य शरीर के ब्रह्मचर्य से शुरू करना होगा,
- 20:26अस्तित्व के ब्रह्मचर्य तक होगा और ये जानने के बाद के वास्तव में
- 20:35मुझ में से कुछ एक कण भी कभी। जहरित नहीं होता, फिर तुम कृष्ण
- 20:42भी हो सकते हो, वो तुम्हारी अपने संसाकारों की बात है।
- 20:48मैंने पिछली वीडियो में बात की। एक शब्द कहा तुलसी ने उसको अपने
- 20:57हृदय पटल पर लिख लेना। समृथ को नहीं दोष को सुनें यह
- 21:05समृथ हो जाता है जो और समृथ कौन होता है जो उस जंक्चर पॉइंट के
- 21:12नीचे उस लास्ट। इन्नर मोस्ट बॉटम को छू लेता है,
- 21:18वह समृद्ध हो जाता है, समृद्ध को नहीं दोष उसमें तो फिर वह शिशु
- 21:26पाल का वध कर दे। 18 अश्विनी सेना 40,00,000 लोगों
- 21:31को उग्रवादी। लेकिन उसे कोई दोष नहीं लगता,
- 21:44लेकिन ध्यान रखना इन शब्दों से बंद मत जाना समृद्ध जो आदमी हो
- 21:53जाता है जंक्चर पॉइंट को पार कर देता है।
- 22:00उस बॉटम पे लाइन को छू लेता है। अंतरिम तल को वहाँ जाकर अदृष्टित
- 22:06हो जाता है जिसे भगवान कृष्ण कहते हैं स्तुति प्रज्ञ हो जा अपनी
- 22:11प्रज्ञा में सद्व ठहर जा। बस वही ठहराव है, उससे आगे तो
- 22:16जाया भी नहीं जाता जाया जा नहीं सकता।
- 22:28वह अल्टीमेट ब्रह्मचर्य है। जो व्यक्ति समृद्ध हो गया, उस
- 22:38इन्नर मोस्ट बॉटम को छू गया। उसको कोई दोष नहीं लगता।
- 22:48तुम कहोगे ये अन्याय है, नहीं, ये अन्याय है, तुम वहाँ पहुँच जाओ,
- 22:52जाके देखो। अब इसका थोड़ा सा विस्तार कर दें
- 23:04तो आपको समझा जाएगा। जो व्यक्ति इन्नर मोस्ट बॉटम पर
- 23:08पहुँच जाता है, वह समृद्ध हो जाता है।
- 23:11मतलब समृद्ध हो जाता है। मतलब वो जो भी कुछ करता है।
- 23:20नियमों के दायरे में करता है। ये जो तुम्हें फल मिलते हैं, मर
- 23:28जाते हैं, अक्सीडेंट हो जाते हैं, ये जो सब अनहोनी घटनाएं होती हैं,
- 23:37ये ईश्वर प्रभाता है। हाँ, करवाता तो सुना है लेकिन
- 23:44तुम्हारे कामों का फल देकर फल तुम्हारे होते हैं साक्षित्व वो
- 23:50होता है उसके सामने तुमने किये। और उसके सामने ही तुमने भोगे और
- 23:58तुम सुर सुर भोगे गहरा है। थोड़ा समझना अगर समझ न आए तो बहुत
- 24:05बार सुनना पड़ेगा। जो तुमने कर्म किए, उसकी मौजूदगी
- 24:11में किए फीड हो गए। अगर वो देखता ना होता तो फिट ना
- 24:16होता। उसका फल भी उसकी मौजूदगी में
- 24:20भुगतना होगा। अप्पे भुज्जय, अप्पे खा।
- 24:27बाबा नानक ने कहा खुद ही बेचता है, खुद ही कहता है।
- 24:32बीजते भी उसकी मौजूदगी में हो और खाते भी उसकी मौजूदगी में हो।
- 24:39वह सदा साक्षी रहता है, इंटरफेयर नहीं करता।
- 24:45तुम्हारे ही कामों का फल अपनी मौजूदगी में तुम्हें ही दे देता
- 24:51है। इसलिए उसे न्यायकारी भी कहते हैं।
- 25:02बड़े से बड़ा न्यायकारी वो है जबकि सब उसका है।
- 25:08खेल तमाशा है लेकिन स्वछंद नहीं है।
- 25:13स्वतंत्र है उश्रिंकल नहीं है। सवाधीन है कुछ श्रृंकर नहीं है वो
- 25:21आप वो नहीं है कोलाहल नहीं है कर्मों का फल है सटीक फल है।
- 25:37आकर प्रार्थना की। यमुना ने रास्ता दे दिया, वापस आ
- 25:42गई। कृष्ण के पांव पकड़ लिया है, ये
- 25:46क्या है? कृष्ण ने कहा यही सत्य है देवयो।
- 25:54ये जो सभी गोपियों के साथ एक आकृष्ण होता है, यही मेरी लीला
- 26:00है, अन्यथा एक गोपी के साथ कृष्ण होता है, राधा के साथ कृष्ण होता
- 26:07है। यही लीला है सभी के साथ कृष्ण है
- 26:14मतलब मैं सब जगह मौजूद हूँ, मैं किसी एक स्थान पे नहीं हूँ, मैं
- 26:24सिर्फ राधा के साथ नहीं हूँ, मैं सभी कोपियों के साथ हूँ।
- 26:32मेरा रूप विराट है, मैं सीमित नहीं हूँ संकुचित नहीं हूँ, मैं
- 26:43विराट हूँ असीम हूँ। बस यहाँ आकर उसकी वराटता का पता
- 26:53चलता है। बिना देखे शस्त्र पड़े तो तुम
- 26:58नमस्कार कर लोगे, समझ कुछ नहीं आएगा और मैं कहता हूँ शस्त्र बेशक
- 27:06न पढ़ना समझ लेना। जिसने पहले समझा बस उसे शस्त्र
- 27:16पढ़ने की जरूरत नहीं। फिर वो शास्त्रों की व्याख्या
- 27:19करने के योग्य हो जाएगा। तुम शास्त्र पढके व्याख्या करते
- 27:24हो? मैं कहता हूँ दर्शन करके
- 27:28शास्त्रों की व्याख्या करना सही व्याख्या होगी, सटीक व्याख्या
- 27:36होगी, पहले दर्शन फिर व्याख्या तुम पहले व्याख्या पढ़ लेते हो,
- 27:43फिर दर्शन की कामना करते हो नहीं हो सकेगा।
- 27:46ये उल्टा है गंगा की तरह उल्टा बहने लगी।
- 27:52ये नहीं होता साक्षी होते हो जब शरीर विकार में आया किसी भी विकार
- 28:08में आया। अगर तुम वास्तव में साक्षी हो तो
- 28:15ध्यान रखो, तुम्हारी आँखें हैं अगर तुम प्लेटफार्म के करीब खड़े
- 28:19हो और साक्षी हो के गाड़ी आ रही है पटरी पे तो तुम छलांग नहीं
- 28:25लगाओगे, तुम ठहर जाओगे। बस ऐसा ही होगा।
- 28:32अगर तुम वास्तु में साक्षी हो तो तुम्हें आँखें मिल गई।
- 28:38रेल का इंजन रेल गाडी गुजर रही है, तुम ढेर जाओगे, इसे गुजर जाने
- 28:44दो, जब गुजर जाएगी तो हम गुजर जाएंगे।
- 28:50बस यही करना है, यही है सूत्र जब कोई भी बेकार आए तुम तो बड़ा
- 28:58मुश्किल समझते हो, ये इतना मुश्किल है हो नहीं पाता।
- 29:03बहुत बार कोशिश की नहीं। इतनी कोशिश करने की क्या आवश्यकता
- 29:08है? आँखें ही तो खुलनी होती हैं।
- 29:15अगर तुमने जान लिया यह हाई वोल्टेज करंट की धार है।
- 29:25और ये तार नंगी है। इसके ऊपर प्लस के कोटेड नहीं है।
- 29:29और अगर मैंने हाथ लगाया तो छिप जाऊंगा और मर जाऊंगा तो भला फिर
- 29:35भी तुम हाथ लगाओगे, तुम्हे पता है गाड़ी गुज़र रही है।
- 29:40क्या तुम फिर भी रेल पार करने की रेल लाइन पार करने की चेष्टा
- 29:44करोगे? नहीं करोगे?
- 29:48बस इसी तरह अगर तुमने देख लिया के शरीर काम में ग्रस्त हो गया, शरीर
- 29:55क्रोध में ग्रस्त हो गया, फिर भी तुम काम की अवस्था में झेरोगे
- 30:01असंभव। या किसी मूर्ख ने विधि बना दी?
- 30:09साक्षी का परिणाम भी तो आना चाहिए।
- 30:12फिर वही बात जो मैंने कल कहा था। मैंने कहा बार बार बोलेंगे, याद
- 30:19करूँगा तो मैं। परिणाम भी तो आना चाहिए, लक्षण भी
- 30:23तो आने चाहिए अगर तुम्हारे पास आँखें हैं और तुम्हें दिख रहा है
- 30:30गाड़ी गुजर रही है, तुम साक्षी हो गए अगर तुम्हारे पास आँखें हैं और
- 30:36तुम दिख रहा है ये हाई वोल्टेज नग़न तार है।
- 30:41तो न तुम रेल की पटरियों को पार करोगे, न तुम नंगीता तार को हाथ
- 30:47ले आओगे क्योंकि तुम जानते हो उसका अंजाम क्या होगा?
- 30:54तुम झट से ठहर जाओगे बाहर। ये तुम भूल जाते हो तुम कह देते
- 31:06हो हम साक्षी हैं नहीं, साक्षी नहीं होते तुम जैसे ही तुम्हें
- 31:14पता चला कि गाड़ी आ रही है, तुम दो कदम पीछे खिसक जाओगे।
- 31:21अब गलती कहाँ होती है? ये भी सुन लो गलती होती है तुम
- 31:27साक्षी बनाते हो, नकली श्वास को आते जाते देखने में तुम साक्षी
- 31:35बनाते हो नकली। जबकि वास्तव में तुम्हारा
- 31:40अस्तित्व साक्षी है, तुम बजाए अस्तित्व के ऊपर छोड़ देने के खुद
- 31:49साक्षी हो जाते हो, ये गलती है तुम्हारी अगर तुम बाबा नानक की
- 31:54बात को मान लो पर्यटों की बात को मान लो।
- 32:02मेरी तो यही अर्जी कर वही जो तेरी मर्ज
- 32:17हो, अब यहाँ बुद्धियों को सूक्षम कर लेना, अब मैं बिलकुल पॉइंट के
- 32:22ऊपर रहूंगा जहाँ तुम्हें निचोड़ बता दूंगा, रस से निकाल के।
- 32:31अति जाति श्वास को देखना क्रियाएं को देखना है।
- 32:36ध्यान से सुनने बात को अति जाति श्वास को विपश्यना ध्यान जोबुद्ध
- 32:42ने बताया श्वास आई गई आई गई। स्वास्थ्य क्रिया है, क्रिया को
- 32:48देखना है लेकिन काम क्रिया नहीं है, क्रोध क्रिया नहीं है, क्रोध
- 32:56बेकार है, यही फर्क पड़ जाता है। तुम श्वास को आते जाते देख कर
- 33:04साक्षी रहते हो, ठीक समझ आ गई। कि शरीर में नहीं हूँ, शरीर
- 33:10स्वास्थ्य ले रहा है, स्वास्थ्य छोड़ रहा है यहाँ चलेगा कौन
- 33:15व्यवधान डालता है? कोई भी नहीं लेकिन जब वासनाओं का
- 33:21तूफान उठे। तो तुम वासना को तूफान को एक काम
- 33:30वासना उठी शरीर के अंग उतेजित होने शुरू हुए और तुम साक्षी ही
- 33:37बने रहे नहीं तुम साक्षीत को। तुम ब्रह्मचर को खो दोगे, अगर
- 33:46साक्षी रहे तो तो क्या करना होगा? आम क्रिया में चल जाएगा यह जानने
- 33:53के लिए कि मैं शरीर नहीं हूँ, यहाँ तो काम करेगा विपश्यना
- 33:58तुम्हारे बुद्ध की यहाँ काम करेगी।
- 34:03साक्षीद व। ओशो का यहाँ काम करेगा क्रिया के
- 34:07बीच में लेकिन वासनाओं के तूफान में यह काम नहीं करेगा।
- 34:16यहाँ कुछ अलग करना भी है तो क्या करना होगा?
- 34:20हमें हम क्यों फैल हो जाते हैं? खुद ओशो फैल हो गया।
- 34:25हो गए ना हो गए ना फिर नहीं ले जा सके।
- 34:33अपने आपको उस स्तर पे ले जा सकते थे।
- 34:39इसके बाद बाद में बात करूँगा। लेकिन तुम उसकी इसी बात पर ठहर गए
- 34:46हो। शौक के साक्षी बने रहना तुम बने
- 34:49रहते हो, लेकिन मैं कहता हूँ परिणाम आते हैं।
- 34:54फिर वही बात पूर्व ही। शान।
- 35:02वो ही गम, वो ही तनहाई है, फिर वो ही शाम।
- 35:13वो ही परिणाम आए नहीं आए तुम झड़ गए।
- 35:21तुम क्रोध कर गए, क्रोध का तूफान दूसरे पर बरस गया और उत्तर
- 35:26प्रतिउत्तर का सिलसिला शुरू हो गया तो कहाँ कमी रह गई?
- 35:31तूफान तो अपना काम कर गया, कहीं कमी रह गए।
- 35:42कमी कहाँ रह गई? तुमने जो नकली साक्षी बनाया था,
- 35:47उसको हटाना पड़ेगा। यहाँ से नैचुरली यू आर साक्षी बस
- 35:56उस नकली साक्षी को हटा लो। तुम असली साक्षी रह जाओगे, जैसे
- 36:04हो वैसे बने रहो बनो मत बने रहो अब ये शब्द बड़े उलझन बाजी हैं,
- 36:16लेकिन समझ आ जाएगी तुम्हें। अगर बार बार सुनोगे तो साक्षी बनो
- 36:23मत ये जो साक्षी तुमने बनाया श्वास को आते जाते देखने के लिए
- 36:30वो तुमने पैदा किया दैट इज़ यूर ओन क्रिएशन।
- 36:37इसने देखा श्वास आ रही है, श्वास चल रही है और उससे फर्क तो पता
- 36:42चलेगा कि मैं शरीर नहीं हूँ श्वास आते हुए देखता हूँ जाते हुए देखता
- 36:48हूँ, ठहरते हुए देखता हूँ यह श्वास लेता हुआ यंत्र मैं नहीं
- 36:53हूँ, यहाँ तक तो काम करेगा। ये तुम्हारा साक्षी जो तुम भी
- 36:58पक्षण में सीख के आते हो, लेकिन क्या होगा काम के तूफ़ान का क्रोध
- 37:08के तूफ़ान पर? वहाँ ये साक्षी काम नहीं करेगा।
- 37:17वो समझाने की चिष्ट तो की लेकिन तुम समझी ना?
- 37:28आम क्रियाएं में तुम साक्षी बने रहना चलते हो जानो।
- 37:33पांव उठा, दूसरा पांव उठा, पहला पांव उठा, दूसरा पांव उठा लेफ्ट
- 37:40राइट लेफ्ट राइट हो रही है, तुम देखते रहो हाथ हिला हाथ पीछे गया,
- 37:46दूसरा हाथ आगे आया, दूसरा हाथ पीछे गया, तुम आगे चले सब देखते
- 37:51रहो। इसके साक्षियों ये यंत्र चल रहा
- 37:54है। रोबोट की तरह और तुम देख रहे हो
- 37:59यह क्रियाएं में तो काम करेगा, बेकारों में काम नहीं करेगा इसलिए
- 38:05क्रिया को बेकारों से अलग कर दिया गया है।
- 38:09ये था कारण संतो ने विचारों को अलग किया हालांकि वो भी कर रहे
- 38:13हैं। क्रोध भी तो करते हो तुम लेकिन वो
- 38:18बेकार है वो आम क्रियानी वो तूफानों का विकार है।
- 38:26फिर बहना क्या करें वहाँ साक्षी क्या करें अब इसको समझो अनिवार्य
- 38:34रूपिन अस्तत्व रूपिन ऑलरेडी यू आर साक्षी।
- 38:46तुम्हारा अस्तित्व साक्षी है, अस्तित्व साक्षी है, इसीलिए
- 38:53तुम्हारे सभी कर्म रिकॉर्ड हो जाते हैं।
- 38:56बिना देखे तुम ज़रा देखना जो कर्मों का फल तुम भुगत रहे हो।
- 39:05वो जब रिकॉर्ड हुए थे तो तुम साक्षी बने थे, नहीं बने थे तो
- 39:13कौन था साक्षी उस वक्त जिसके कारण ये रिकॉर्ड हुआ बिना साक्षी के
- 39:18रिकॉर्ड नहीं होता वो साक्षी तुम्हारा स्वभाव है।
- 39:26जो स्वभावगत साक्षी है, जो जन्म के साथ तुम ले के आये हो, वह
- 39:33तुम्हारे सभी कर्मों का बराबर साक्षी है।
- 39:36वह कर्मों का तो साक्षी है, जब सो जाते हो तो सोने का भी साक्षी है।
- 39:42वह देखता है कि तुम कितने मज़े से विश्राम कर रहे हो, कितनी गहरी
- 39:49निद्रा आई तुम्हें आई, आज निद्रा नहीं आई।
- 39:53हल्की उथली उथली ये दोनों चीजों को तुमने हारते हो।
- 39:59जब स्वप्न आता है मनुस पटर पे तुम उसे भी देखते हो वह कौन है देखने
- 40:04वाला वह तुम्हें जन्मजात अस्तित्व ने दे रखा है साक्षी अस्तित्व ही
- 40:12साक्षी है। जेता कित्ता तेतता नाम?
- 40:17इस नाम को साक्षी को कहते हैं नाम जो तुम जब रहे हो बिना नावें ना
- 40:24ही कोठाव यह साक्षी हर जगह मौजूद है कोई स्थान ऐसा नहीं जहाँ
- 40:31साक्षी ने। जितना कित्ता जितना पसारा तेत्ता
- 40:41नाउ वो ही नाम है। बाबा समझाते हैं, लेकिन तुम फिर
- 40:45भी झबते रहते हो बिन नामे नाहीं कोठां वह साक्षी हर जगह मौजूद है
- 40:52कोई ठांव ऐसी नहीं। जहाँ वो शक्ति नहीं तुम कहीं चले
- 40:56जाओ जो कर्म करोगे उससे छुपा नहीं रहेगा बेहड़ जंगलों में चले जाओ
- 41:02घोर सन्नाटों में चले जाओ, घोर अँधेरी रातों में चले जाओ, परम
- 41:07उजाले में चले जाओ कंदराव में चले जाओ बर्फ़ों में चले जाओ।
- 41:12पूरी गरमाहट में चले जाओ लेकिन वो साक्षी बराबर है सब जगह है बिन
- 41:17नामे ना ही कोठाओ यह साक्षी को नाम कहते हैं बाबा अब क्या किया
- 41:23जाए अगर तुम मोरू हो जाओ तुमने कभी नहीं सोचा।
- 41:32के इस प्याली में सुंद्र नहीं आएगा।
- 41:36तुम इस विराट को अपने परिश्रम के द्वारा कमा नहीं पाओगे।
- 41:42तुमने कभी नहीं सोचा तुम्हारा अहंकार सदा ही ये सोचता रहा कि
- 41:49मैं उसको भी जीत लूँगा। इतना नाम जपूंगा इतना नाम जपूंगा
- 41:54कि मैं उसको भी जीत लूँगा, वो कभी जीता जाता है क्यों बाबरे हो
- 42:02क्यों पागलपन में पड़े हो? क्यों वक़्त खराब कर रहे हो वो
- 42:06वक़्त जो तुम आनंद में गोते लगा के मस्त हो सकते थे?
- 42:11वो वक्त तुम करने में गुजारते हो, दुख की बात है, दुखद बात है वो ही
- 42:24वक्त जो तुम आनंद में अटकलियाँ खा सकते थे, वो ही वक्त तुम बकवासों
- 42:29में गुजारते थे। संतों को दुख होता है।
- 42:42अस्तित्वगत साक्षी तुम्हें शुरू से मिला हुआ है।
- 42:46याद रखा तुम साथ लेकर कुछ भी नहीं आया, तुम्हारा कुछ भी नहीं आया।
- 42:52यह शरीर प्रकृति देती है। यह साक्षी प्रतिकृति देती है पर
- 42:56महात्मा देता है। ये सारे अंग उसके देने वाले हैं।
- 43:02तुम अपने से कुछ नहीं बना सकते और अगर वो कोई विकार पैदा कर देता
- 43:08है, जूझते जाओ तो हम उसे ठीक नहीं कर पाते।
- 43:18क्योंकि वह बेहतर जानता है कि तुमने क्या किया है और तुम्हारे
- 43:26कियों को उसने कैसे भुगतान करवाना है।
- 43:32बार बार तुम्हे अलर्ट कर दू? वह जानता है के भुगतूँगा मैं ही।
- 43:38मेरे ही बनाए हुए पदार्थ भुगतेंगे, लेकिन फिर भी इतना
- 43:42ईमानदार है कि भुगतवाता है, उसकी ही बनाई हुई संरचना भोगती है और
- 43:51उसका ही बनाया हुआ नियम भुगतवाता है।
- 43:54ये शब्द सारे गहरे हैं। सारी गहरी वीडियो हैं और तुम्हें
- 44:03बड़े एकांत में सुननी पड़ेगी। जहाँ ज़रा भी पेन ड्रॉप साइलेंस
- 44:08हो, ज़रा भी शोर न हो। किसी एक तल पर तुम सदा प्रवासी
- 44:16हो, किसी एक तल पर तुम सदा ब्रह्मचारी हो और वह एक तल
- 44:23तुम्हारे भीतर अंतःष में है ऐट दी बॉटम लाइन।
- 44:34उस स्तर पर जहाँ ब्रह्मचारी बैठा है, तुमने जाना है ब्रह्मचारी
- 44:43होके जाना होगा मैंने कहा सामान को समान रूप से जाना जाता है।
- 44:49पानी में पानी ही मिल सकता है। पानी में नमक मिल नहीं सकता, घुल
- 44:54सकता है। मैंने बहुत बार उदाहरण दिए।
- 44:58तुमको ब्रह्मचारी में मिलने के लिए ब्रम्हचारी होना पड़ेगा तो इस
- 45:09बायोलॉजिकल शरीर से ब्रह्मचारी होना पड़ेगा।
- 45:13इट इस नेसेसरी अगर कोई कहे कि भोगे जाओ और तुम पहुँच जाओगे तो
- 45:21मूर्ख है, तुम्हें भी मूर्ख बना रहा है।
- 45:25उसके बाद तुम्हें मत आना, वो ना खुद पहुंचा इसके जरिए।
- 45:32किसी और साधना से पहुंचा जाता है न तुम्हें पहुंचने देगा।
- 45:39पाश्चात्य का ये बखीडा ऐसा हुआ कि तुम्हें उलझा दिया।
- 45:50ये सेगमेंट फ्राइड का हुआ है। उसने तुम्हारी बुद्धियों को तो
- 45:54लूट लिया, लेकिन तुम्हारी आत्मा तक पहुंचने नहीं दिया।
- 45:59तुम्हें ये बड़े से बड़ा नुकसान था जो पश्चिम ने पूर्व का किया।
- 46:07उसने तुम्हें थोड़े से ज्ञान के बदले सूचनाओं के बदले तुम्हारा
- 46:12अमृत रूपी आत्मा छीन लिया और तुम बिक गए माटी के मोल तुम माटी के
- 46:24मोल बिक गए तुमने आत्मा को बेच दिया कुछ पदार्थों के बदले।
- 46:31सिक्कों के बदले तुमने आत्मा को भेज दिया अगर कुछ गठित हुआ अगर
- 46:40कुछ बुरा हुआ, अगर कुछ आघात दिया पश्चिम ने पूर्व को तो बस एक यही
- 46:47आघात दिया। उसने सिक्के थमा दिए, तुम्हारे
- 46:52हाथ में आत्म छीन ली, तुम्हारी चैन छीन लिया, आनंद छीन लिया,
- 46:59संतोष छीन लिया, तृप्ति छीन ली। और यही चीजों की कीमत होती है
- 47:05सिक्कों की कभी कीमत होती है। सिक्कों की कीमत तो तुम डालते हो
- 47:11यह पांच का है, यह इक्का है यह सु का है ये कीमत तुम्हारी डाली है।
- 47:18ये कीमत परमात्मा की डाली है संतोष आनंद, तृप्ति, खिलखिलाहट वो
- 47:24परमात्मा की। ये तुम्हारी और पश्चिम ने बड़े से
- 47:35बड़ा नुकसान यही किया। मानव के बनाए हुए सिक्के तुम्हें
- 47:41देकर ईश्वर की बनाई हुई तृप्ति तुमसे छीन लिया।
- 47:48ईश्वर के लिए बनाई हुई संतोष तुम से छीन लिया और तुम हँसते हो,
- 47:59अपनी आत्मा को गमा के तुम हँसते हो, ये सब मैकाले का जादू है।
- 48:11तुम्हारी व्यवस्था को छीनने वाला मैकाली आज माँ बाप कॉनवेंट स्कूल
- 48:18में छोटे बच्चों को दाखिला देने के लिए लाखों रुपए खर्च करने को
- 48:22तैयार और वो जानते हैं इनका भविष्य क्या होगा?
- 48:27वे आत्मा से वंचित रह जाएंगे। सुख मिलेगा लेकिन असली सुख नहीं
- 48:33मिलेगा, फूल मिलेंगे लेकिन कागजी मिलेंगे, वो फूल नहीं मिलेंगे जो
- 48:42धरती की छाती फाड़ के गर्भ फाड़ के बाहर आया और सुगंध बिखेर रहे
- 48:47हैं। ये कॉनवेंट स्कूल में पढ़ने वाले
- 48:51बच्चे फूल तो बनेंगे लेकिन कागज़ी होंगे, उसके ऊपर इतर भी तो बिखेरा
- 49:04होगा वो भी परफ्यूम होगा भीतर से। धरती की छाती पढ़ के नहीं आई वो
- 49:12सुगंधा, यही पश्चिम ने नुकसान किया।
- 49:18पूर्व कहा अब हम मूल मु्द्दे पर आ जाए।
- 49:26क्या करना है उस वक्त? क्रियाएं के तो तुम साक्षी हो गए
- 49:30ठीक यहाँ तक तो ठीक हो गया लेकिन जब आए विकास, विकास भी तो आते।
- 49:35हैं। जिंदगी में गम भी मिलते हैं वो
- 49:46समझौता। गमों से कर लो, ज़िन्दगी में गम
- 49:54भी मिलते हैं हो? गम भी तो आएँगे ये तूफान भी तो
- 50:03आएँगे आवैग भी तो आएँगे। काम के क्रोध के फिर क्या करोगे
- 50:09जनाब? यह विकार तुम्हें बहाने पर तत्पर
- 50:19है। तुम्हें अपने भाव में खेंच लेने
- 50:23को तत्पर हैं। क्रियाएं तक साक्षी होना तो
- 50:27बिल्कुल ठीक तुम समझ गए सब? आगे चलो चलो आगे चलो बात है
- 50:39बेकारों की, वह विकार जब आएँगे तो हमें उड़ाकर ले जाएंगे।
- 50:45बेकारों का तूफान कुछ और धार के आया है।
- 50:50वह तूफ़ान तुम्हें उड़ाने के मंसूबे से आया है तुमने क्या करना
- 50:57है तुमने देखा जब घने तूफ़ान आते हैं, बड़े बड़े बोहड़ घर जाते
- 51:06हैं, बाबा बोहड़ घर जाते हैं? लेकिन हल्की सी घास कोमल सी नरम
- 51:12नरम घास वो नहीं टूटी भयंकर से भयंकर तूफान भी आ जाएगा बड़े बड़े
- 51:22पेड़ गड़ते हुए देखोगे आप लेकिन कोमल सी घास।
- 51:31बिछ ही जाती है, टूटती नहीं बस यही है, उसकी तकनीक बोहर झुकता
- 51:42नहीं पड़ा रहता है। डटा रहता है तूफानों में और
- 51:48तुम्हें यही सखाया जाता है जिंदगी कितनी भी तकलीफों से भरी हो, फंसे
- 51:57रहे ना अरे भाई टूट हो गया। मूर्ख संदेश देते हैं, साहब डटे
- 52:08रहे ना कामयाब हो जाओगे मैं कहता हूँ जिसे तुम कामयाब कहते हो उनकी
- 52:14उनकी छाती से पूछो वह सुख जो कबीर न लिया।
- 52:22जो सुख पायो राम भजनों में जो सुख पायो।
- 52:42राम भजन में वो सुख न हीं अमीरी में अमीरी में।
- 53:00मन्नड़ लाग्यो मेरा फकीरी मैं फकीरी मैं मन्नड़ लाग्यो मेरा।
- 53:21जो कबीर एक क्षण में आनंद पा लेता है तुम्हारे कामयाब व्यक्तियों से
- 53:29पूछो पूरी ज़िन्दगी भर। गदियों पे बैठ के सुमेरु पर्वत
- 53:38जीतने धान इकट्ठे करके इसे कामयाब कहते हो उससे पूछो कि पूरी
- 53:48ज़िन्दगी में जो कबीर ने एक क्षण में सुख।
- 53:55पा लिया वो तुमने पूरी ज़िन्दगी में कुछ भी कमा के पाया एक बूंद
- 54:02भी पाया नाक कट जाए तो शर्मो शर्मो वो कह सकते हैं हाँ भगवान
- 54:10दिग्ग्या दिखता विकता नहीं? लक्षण बता देते हैं, परिणाम बता
- 54:19देते हैं। एक बार का चुना हुआ राष्ट्रपति
- 54:26ट्रंप फिर मांगता है गद्दी मतलब तृप्ति नहीं होए।
- 54:34साफ है। मैंने कहा परिणाम बता देता है,
- 54:41लक्षण बता देते हैं लेकिन कबीर नहीं मांगता।
- 54:46कबीर कहता है जब वे संतोष धन सब धन दूर समान।
- 54:55कभी कबीर ने कहा और चाहिए मुझे यह और का पुंगा खाना तुम्हारे संसार
- 55:04में होता है यह मन मांगे मोर, लेकिन कबीर का मन नहीं बचा।
- 55:12कबीर का मन नहीं तो वह मांगे मोर नहीं होगा, तुम्हारा मन बचता है
- 55:22तुम्हारे तथा कथित। जो तुम सक्सेसफुल लोग कहते हो, वह
- 55:33कामयाब हो गए। अरे मन ठहरो जल्दी क्या है अभी से
- 55:39मत मरो, बहुत वक्त आएगा, तुम भी कामयाब हो गए वक्त सबका आता है आ
- 55:45जाएगा। सुख पालोगे कामयाब व्यक्ति हो
- 55:52जाओगे, लेकिन मैं कहता हूँ कहाँ कामयाब होगे?
- 55:57कबीर कहते हैं फिर भी तुम कामयाब नहीं होगे।
- 56:01नानक कहते हैं, नहीं होगे, तुम कामयाब हो।
- 56:05मीरा कहती हैं, नहीं होगे तुम कामयाब हो क्योंकि कामयाबी मिलती
- 56:13है। एक ही तल पर जिन तलों पर बैठे तुम
- 56:18कामयाब होते हो होने का सपना देखते हो सच में नहीं होते।
- 56:27कामयाबी मिलती है वहाँ जहाँ तृपती आती है और जहाँ तुम कहते हो, हम
- 56:35कामयाब हो गए वहाँ तृपती नहीं होती, तुम पूछ लो जिनसे कामयाब हो
- 56:39गए। अगर कोई सच्चा व्यक्ति होगा तो वो
- 56:44कहेगा नहीं नहीं मिलते। झूठे व्यक्ति तो श्रद्धा कहेंगे,
- 56:48लेकिन उनके लक्षण बता देंगे। फिर वही बात परिणाम बताते हैं वो
- 56:55कहेंगे ओह धन और चाहिए। मैं दो नंबर पे क्यों?
- 57:01मैं एक नंबर पे आ गया लेकिन फिर फिर वही एक नंबर पे बने रहना
- 57:07चाहता हूँ कोई दूसरा आगे ना निकल जाए कॉम्पिटिशन, कॉम्पिटिशन
- 57:14ज़िन्दगी में कामयाब कहाँ हो भाई अभी तो झगड़ रहे हो, लड़ रहे हो?
- 57:19अभी तो इलेक्शन लड़ रहे हो नहीं कामयाब हुआ है।
- 57:23जो कामयाब हो जाता है वो आराम करता है।
- 57:35मेरे पास यहाँ लोग आ जाते हैं। फ़ोन नहीं जाते हैं।
- 57:40बाबा व्यस्त हो। मैंने कहा नहीं और मैंने कहा मस्त
- 57:46हूँ तो मेरी बात का जवाब दोगे नहीं क्यों मस्त हूँ, उन्हें कुछ
- 57:53समझ नहीं आता। व्यस्त व्यक्ति तो शायद जवाब दे
- 57:57दें लेकिन मस्त कहाँ जवाब दे पाएगा मस्त?
- 58:04अगर बोलना भी चाहे तो कहाँ बोल पाएगा?
- 58:09अटक जाएगा बीच में, अब समझो क्यों?
- 58:14व्यस्तता तुम जब चाहे छोड़ सकते हो, लेकिन मस्तता तुम जब चाहे
- 58:21नहीं छोड़ सकते, मस्ती तो वो रीच है जिसने तुम्हें अपने बहु पोश
- 58:27में जकल लिया, वो तो जब छोड़ेगी तो छोड़ेंगे।
- 58:34संत अपने उस अंतरिम तर से बाहर आता आता खोपड़ी तक घंटों लगा देता
- 58:43है, जो लोग पूछ लेते हैं बाबा 4:00 बजे क्यों शुरू करते हो?
- 58:49साँझ ढलने को है, सुर छुपने को है?
- 58:53और तुम कहते हो 4:00 बजे के बाद दीक्षा दूंगा, पहले नहीं पहले मैं
- 59:00होता नहीं भाई, पहले मैं मस्ती की गिरफ्त में होता हूँ, अगर व्यस्त
- 59:09होता तुम व्यस्त हो। व्यस्तता का अर्थ है जब चाहे
- 59:14छोड़ी जा सके, तुम एक काम कर रहे हो, दूसरा जरूरी आग एक काम में
- 59:20व्यस्त हो, दूसरा ज्यादा जरूरी आगया।
- 59:23तुम उसके व्यस्त को छोड़ दोगे, दूसरे में व्यस्त हो जाओगे।
- 59:27तुम्हारे हाथ की बात है। व्यस्तता के तुम मालिक हो।
- 59:33लेकिन मस्ती के तुम मालिक ने मस्ती तुम्हारी मालिका यह उल्टी
- 59:40गंगा है मस्ती तो तुम्हें ऐसा जकड़ लेती है जैसे शुब्या की
- 59:47नेत्र तंद्रा। आँख खोलते हो फिर मिच मिच जाती
- 59:52है। रात भर की नींद पूरी हो गई हो,
- 1:00:00लेकिन ये ठंडी हवाएं कहाँ सोने देती हैं?
- 1:00:05कहाँ जागने देती हैं? फिर फिर लुढ़क जाते हो?
- 1:00:12आंखें खोलने की चेष्टा करते हो, लेकिन इतना सुंदरवत पर मस्त मस्त
- 1:00:20हवाएं चलती हैं तो मैं फिर लुढ़का देती हूँ।
- 1:00:27ये है मस्त। वो नहीं समझ पाते।
- 1:00:32मैं जानता हूँ कह देते हैं बाबा समझ गयीं बाबा समझ गया नहीं
- 1:00:38समझाता मैं जानता हूँ क्योंकि जिसने मस्ती चखी न हो वह समझेगा
- 1:00:43क्या खाक? समझ में आने के लिए पीना भी तो
- 1:00:49जरूरी होता है। पी तो है नहीं तुमने तुम क्या
- 1:00:56समझोगे उस मस्ती की गिरफ्त में आ जाते हैं कभी।
- 1:01:07कबीर कहते हैं, हम मेरे कोई वश नहीं है, अब मैं बिल्कुल तृप्त हो
- 1:01:17गया, सब रहा गया, सबूरी आ गए, अब मेरे वश में कुछ न रहा, बस एक ही
- 1:01:27रहता है। या तो व्यस्तता रहती है या मस्ती
- 1:01:31रहती है। दोनों में से कोई भी चुन लो।
- 1:01:36अगर तुम व्यस्त रहोगे तो याद रखना मस्त कभी नहीं हो पाओगे।
- 1:01:45व्यस्तता मस्ती के दुश्मन है। बिज़िनेस दुश्मन है मस्ती के उलझा
- 1:01:54देती है तुम्हें वो बीज़ी तुम किसी भी चीज़ में हो क्या करें जब
- 1:02:04बेकार हो जाए? बेकार आता है।
- 1:02:07तूफ़ान की तरह बिकार हवाओं की तरह नहीं आता।
- 1:02:15तूफ़ानों की तरह आता है अब मैं अंतिम मोरल पे आ जाऊं इसको अच्छी
- 1:02:24तरह से समझ लेना है। अंतिम वाक्य आपके जीवन को स्वर्ण
- 1:02:30बना देंगे। बिना खोये सब पा जाना बड़ी
- 1:02:38मज़ेदार बात है। कुछ खोते भी नहीं और सब पा जाते
- 1:02:44हो। और काम में तो तुम बहुत कुछ खो
- 1:02:49देते हो और बातें थोड़ी सी होगी, लेकिन यह एक अजीब अलकेमी है।
- 1:02:56यह रसायन विद्या है। खोते भी कुछ नहीं है।
- 1:03:00बिना खोए पा भी सब जाते हो। तो क्या करना है?
- 1:03:10वह जो नकली साक्षी बनाया तुमने श्वास आयी श्वास गयी श्वास आयी
- 1:03:15श्वास गयी वह उस पेड़ की तरह है। वट वृक्ष की तरह है जो अकड़
- 1:03:24केकड़ा है। तूफानों में वह गिरेगा निश्चित
- 1:03:32गिरेगा, घास की तरह नमक हो जाओ क्या करो उस नकली को हटा लो, इस
- 1:03:41अकड़ को हटा लो। वह जो नकली साक्षी बनाया श्वास
- 1:03:48आई, श्वास गई, उसको नेचुरली जुआ साक्षी और तुम देखोगे, तुम कूद गए
- 1:03:55अपने असली साक्षी में। अब ये प्रोसेसर कहने में बड़ी
- 1:04:03आसान है, लेकिन नकली साक्षी की इतनी पकड़ हो गई है।
- 1:04:10विपश्यना करते करते तुम और नकली साक्षी भी तुम्हारा।
- 1:04:22संस्कार बन के रहते हैं, छूटती नहीं है, काफी मुँह को लगे हुए है
- 1:04:30अब तुम यहाँ पक गए हो। सास को आते जाते देख लो, अब इससे
- 1:04:35पीछा छुड़ाना पड़ेगा। जब विकार आया तो मैं तुम्हें कहता
- 1:04:40हूँ, जिन्हें तुम संत कहते हो। क्या वह परिवर्तित हुए, परिणाम
- 1:04:49आया नहीं आया क्यों नहीं आया? साक्षीत में डटे रहे हैं।
- 1:05:02साक्षीत से नीचे नहीं उतरे तो नकली साक्षितों को हटाना होगा।
- 1:05:10जैसे ही तुम नकली को हटाओगे असली में जंप कर जाओगे और असली में जंप
- 1:05:18करते ही असली का मज़ा आना शुरू हो जाता है और मज़ा ही तो तुम्हें
- 1:05:26चाहिए। नकली साक्षी को तोड़ते ही तुम
- 1:05:37असली में जंप कर जाते हो और असली साक्षी में मज़ा बड़ा है असली
- 1:05:45साक्षी तुम हो। तुम्हारा अंतम अंतरतम छोर लबालब
- 1:05:52भरा पड़ा है आनंद से और तुमने एक स्टेकल बना लिया नकली साक्षी करो
- 1:06:03अब ये तुम्हारा संस्कार बन गया हर्षगा या आड़े आएगा?
- 1:06:08पहले वस्तुएं आड़ियाँ आती थीं। अब वस्तुओं का साक्षीत वो आड़ियाँ
- 1:06:12नहीं लगा लेकिन बाधा तो वही रहा है।
- 1:06:21अब इस बाधा से निपटना पड़ेगा। इसीलिए तुम परिणाम नहीं आता तुम?
- 1:06:33इसलिए तुम बदलाहट में नहीं आते, लक्षण नहीं आते तुम्हें फिर वही
- 1:06:39चाट पकौड़े, फिर वही पकौड़े शुकौड़े फिर वही भोग।
- 1:06:52लेकिन भूल जाते हैं ये गुरु लोग के शिष्य भी क्या अनुकरण करेंगे?
- 1:06:57कृष्ण ने बड़ी प्यारी बात कही है। श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण करता है
- 1:07:04उसका अनुकरण उसके शिष्य किया करता है।
- 1:07:11श्रेष्ठ पुरुष जाने जिन्हें गुरु माना जाता है वो जैसा अनुकरण करते
- 1:07:16हैं, आचरण करते हैं, शिष्य उनका अनुकरण करता है।
- 1:07:23अब जब गुरु ही अपनी कुटिया में। गुफाओं के भीतर पाया गया तो शिष्य
- 1:07:32क्या करेंगे? तुम समझ सकते हो असंत गुरु जैसा
- 1:07:42आचरण करेगा वैसा ही तो शिष्य अनुकरण करेंगे।
- 1:07:50गुरु का आचरण शिष्य का अनुकरण बन जाएगा।
- 1:07:55पर गुरु अगर गुफाओं में पाया जाता है बहुत से मूर्ख तो आज हुए हैं
- 1:08:05बहुत से मूर्ख तो आज भी सोचे हैं गुरु बाहर आएगा तोड़ के
- 1:08:08कुचमतकारों का। कहाँ भगाने बेटे आने देते हैं
- 1:08:14लोहे के सलाखे कहाँ आने देते हैं? बहुत जगह पे परमिशन लेनी पड़ती है
- 1:08:23तो कहीं बाहर आ पाते हैं लेकिन मैं कहता हूँ बंधन में बंधे ही
- 1:08:27क्यों? जो अभी वासनाओं से मुक्त नहीं हो
- 1:08:31सका वो गुरु कहलाने के योग्य है न जो वासनाओं से मुक्त नहीं हो सका,
- 1:08:44जो अभी गुलाम है, जो अभी गुलाम है, फिर से सुन लो।
- 1:08:51जो अभी गुलाम है, वह स्वतंत्र कैसे गुलाम कभी स्वतंत्र होते
- 1:08:57हैं, गुलाम कभी आज़ाद होते हैं। तुम वासना के गुलाम हो तो तुम
- 1:09:03मुक्त कैसे हुए? तुम आज सीखो के पीछे गुलाम हो।
- 1:09:10तो तुम स्वतंत्र कैसे हो? तुम मुक्त कैसे हो?
- 1:09:12तुम तो अपनी इच्छा से बाहर भी नहीं जा सकते बाहर जाने के लिए
- 1:09:16तुम्हें पैरोल की जरूरत पड़ती है। बहुत से बंधन हैं इस छोटे से
- 1:09:26खोपड़े पर। लेकिन मूर्खों की मेरी बात को
- 1:09:34मेरी बात समझ नहीं आएगी। यह थोड़ी सी समझदारी का जन्म
- 1:09:39अवशेष है। वह मेरी बात को समझ जाएंगे।
- 1:09:42पकड़ जाएंगे, नकली साक्षी को तोड़ना होगा।
- 1:09:48वो जांड की अकड़ गरानी होगी, घास की तरह नमन करना होगा, बीच जाना
- 1:09:55होगा घास का कुछ नहीं बिगड़ता, तुम भी ऐसे ही काम के तूफान से बच
- 1:10:01जाओगे अगर इस नकली साक्षी को करा दिया।
- 1:10:06नकली साक्षी को गिराके इतनी सारी फिलॉसोफी मैंने बता थी प्रैक्टिकल
- 1:10:14फिलिस्पी शाब्दिक फिलिस्पी नहीं है, ये शब्दों का जकना जार नहीं
- 1:10:20है यह ज़िन्दगी की। व्याख्या है, ज़िन्दगी का छलांग
- 1:10:27है, जंप है नकली साक्षी जो तुमने बनाया, श्वास आयी, श्वास गई इसको
- 1:10:33तोड़ना पड़ेगा भाई यही गलती रह गई कहीं सुनने में लेकिन तुम्हारे
- 1:10:42लिए तो वो। एक आदर्श बन गई जाने क्या तुने
- 1:10:51कही जाने कहाँ मैंने सुनी बात कुछ?
- 1:11:00बनी गई। जाने क्या मैंने कही जाने क्या
- 1:11:09तुने सुनी बात कुछ बन ही गई जाने क्या तुने कही?
- 1:11:21क्या कहा, क्या सुना? लेकिन बात बन गई तुम अनुकरण करने
- 1:11:26लगे, पहुंचे कहीं और मैं फिर से तुम्हें कहता हूँ परिणाम देखना
- 1:11:35चेहरे पे खुशी आई ये लटके हुए चेहरे खेले, बुद्ध का चेहरा तो
- 1:11:40खेला। उर्स का चेहरा खेला तुमसे कहाँ
- 1:11:47गलती हुई कहने सुनने की गलती हुई, मैं तुम्हें साफ कर दिया यह नकरी
- 1:11:56साक्षी को हटाता हूँ। तोड़ दो इस नकली साक्षी को ये
- 1:12:02तुम्हारी पैदाश है और उस परमात्मा के साक्षी में कूद जाओ और
- 1:12:10परमात्मा के साक्षी में आनंद ही आनंद है।
- 1:12:15बहार ही बहार है। फिजाओं का आनंद झूमती हुई हवाएं
- 1:12:25खिलते हुए फूल बिखेरती हुई सुगंधी तुमको उस दरवाजे पे घसीट ले जाएगी
- 1:12:35जिसके लिए तुम जन्मो जन्मो से तरस रहे थे।
- 1:12:39तड़प रहे थे बंदरों से आति तो मुक्त हो जाओगे जैसे ही तुमने
- 1:12:45नकली साक्षी को कराया वासना खो जाएगी क्योंकि वासना थी क्या,
- 1:12:52आनंद पाने की जम्प लगा के महा। आनंद में महाकुंभ में तुम कूद गए
- 1:13:03वासना कहाँ ठहरेगी जनाब बस यही ये सारा सिद्धांत प्रैक्टिकल नकली
- 1:13:12साक्षी से कुछ नहीं मिलेगा। परिणाम तुम्हारे सामने है।
- 1:13:18लक्षण तुम्हारे समझे असली साक्षी से सब मिलेगा एक साध्य सब साध्य
- 1:13:31असली साक्षी में कोचा जो तुम्हारा बयान नहीं है।
- 1:13:36ये तुम्हारा सादा नहीं है, परमात्मा का बनाया है और आनंद से
- 1:13:42भरा पूरा समुद्र है आनंद का फिजाएँ झूमती हैं वहाँ फूलों की
- 1:13:51खुशबों में बाग बगीचे आनंद की लहरें।
- 1:13:56तरंगश सराबोर हो जाओगे तुम धनवथ। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:14:18हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण?
- 1:14:26गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारा।
- 1:14:36यन वसुदेव पितुमात स्वामी सखा हमारे पितुमात स्वामी।
- 1:14:54सखा हमारे सखा, हमारे हमारे, हमारे।
- 1:15:13बिद्वात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद
- 1:15:29हरे मुरारी। हे नाथ नारा यन वासुदेव जब जब
- 1:15:39बाहर आए और फूल मुस्कुराए। मुझे तो याद आये, मुझे तो याद आये
- 1:16:04श्री कृष्ण गोविंद अरे मुरारी। हे नाथ नारा यन वासुदेव।
- 1:16:15श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी यन वासुदेव।
- 1:16:28जब जब ये चाँद निकला जब जब ये चाँद निकला और तारें मुस्कुराए।
- 1:16:46मुझे तो याद आई मुझे तो याद आई हरे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए
- 1:17:04नाथ नारा। यन वासुदेव पितुमात, स्वामी सखा,
- 1:17:15हमारे पितुमात, स्वामी सखा हमारे। कृष्णा कृष्णा कृष्ण।
- 1:17:43श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारायण
- 1:17:51वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:18:01हेनाथ नारायण वासुदेव व। धन्यवाद।