Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Feb 26 - गुरु का आखिरी वार: अहंकार पर घन की चोट!! अहंकार से आत्म-दर्शन: आध्यात्मिक यात्रा
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- 0:22एक नगर की सीमाओं से बहुत दूर हरे भरे वृक्षों के बीच में एक ऋषि का
- 0:37आश्रम था। वहाँ वो गुरुकुल चलाते थे और
- 0:52गुरुकुल में उन्होंने कह रखा था कि यहाँ जो भी व्यक्ति आएगा मात्र
- 1:03पांच वर्ष में। मैं उसे आत्मा दर्शन और सात वर्ष
- 1:11में मैं उसे परमात्मा दर्शन करवा दूंगा।
- 1:21यह बात सारे नगर में फैली हुई थी दूर धरा से।
- 1:29साधक उसके पास आते है लेकिन ज्यादा दिन तक कई साधक ठहर ना
- 1:45पाते कोशिश करते है। कोई साल 2 साल, 5 साल लेकिन
- 2:01बिलकुल आ घर में आ के बस सिरा देखना ही रह गया था।
- 2:12तो वह कोई न कोई उपद्रव खड़ा कर देता।
- 2:26ध्यान रखना जैसे ही तुम। उस तत्व के पास घने पहुंचना शुरू
- 2:37हो जाते हो तो कुछ बड़ी बाधाएं आती हैं।
- 2:44ये स्वाभाविक है। और उन बड़ी बाधाओं को तुम स्वीकार
- 2:54नहीं कर पाते। अक्सर वह गुरु शिष्यों की
- 3:08बेइज्जती करता, अनुशासन में न रखता, लेकिन उनकी बेइज्जती बहुत
- 3:20करता हूँ। और तुम्हारा रोग ही ये है कि तुम
- 3:30जहाँ जाते हो वहाँ जाते हो इज्जत कमाने के लिए गुरु के वाश पे तुम
- 3:42जाते हो तो यह सोच के जाते हो। के गुरु तुम्हे इज्ज़त दे छोड़ो
- 3:54गुरु को तुम यमराज के पास भी जाते हो।
- 3:59मरने के बाद लोग सोचते है, इज्ज़त में लेके।
- 4:08तुमने इतना धनदान किया, तुमने इतनी धर्मशालाएं बनाई, इतने कुएं
- 4:12खुद वाए, इतने गौओं को दान किया, इतने अनाथ आश्रम बनाया।
- 4:30किसी न किसी तरह तुम्हें इज्ज़त मिल जाए और वह गुरुथ वैसा था के
- 4:39जैसे इज्ज़त देना जानता ही नहीं था।
- 4:49एक शिष्य ऐसा आ गया और जैसे जैसे वक्त बीतता गया बस वह कवार पे था
- 5:04और गुर भी जानता है। कि अब यह कगार पर आ गया।
- 5:13अब इसे बहुत साहस की जरूरत होगी। आत्म बलिदान की जीसको यह मैं
- 5:18मैंने माने हैं वह मैं झूठ आए। फिर इसमें उतनी इम्युनिटी भी होनी
- 5:26चाहिए कि मैं इसके मैं को छोड़ूं और वह आसानी से टूट जाए और यह
- 5:35तुम्हारी अंतिम अड़चन है कि तुम्हारा वो एक दृढ़ में।
- 5:45शरीर हूँ विचार हूँ भावनाओं हूँ जय नहीं मिटता धन तुम छोड़ सकते
- 5:55हो जैन मनी हो सकते हो इज्जत तुम छोड़ सकते हो।
- 6:03गलतियाँ तुम छोड़ सकते हो गर्भा तुम छोड़ सकते हो भरी सर्दी में
- 6:15एक लंगोट बांध के बैठ सकते हो भरी गर्मी में तुम सूरज के सामने।
- 6:22तपती हुई दुपहरी में रेतीले आग में बैठ सकते हो ये सब कुछ तुम कर
- 6:31सकते हो लेकिन इससे ज़रा भी ईश्वर का संबंध नहीं है।
- 6:38ये तो सर्कस है। ईश्वर का संबंध है उस एलियोजन से
- 6:48उस भ्रामण से जीसको तुम तोड़ नहीं पाती अंतिम पांच वर्ष के।
- 7:07गुरु तुम्हारे बनाए हुए मैं को तोड़ेगा पहले तुम्हारे बाहर के
- 7:16मैं को तोड़ेगा। अमीर हूँ मैं गरीब हूँ, मैं राजा
- 7:23हूँ, मैं सेवक हूँ मैं रानी हूँ पिता हीरा जोहरा इतना सोना इतना।
- 7:39लॉकर्स में भरा हुआ सामान इतना बैंक बैलेंस इतनी जमीन जाएगा,
- 7:45इतने बच्चे, इतने पशु धन ये सब मेरा है, यह तुम छोड़ सकते हो?
- 7:59इसमें कोई ज्यादा परेशानी नहीं आती, लेकिन गुरु जानता है परेशानी
- 8:07कहाँ? क्योंकि अगर इतना कुछ करके भी तो?
- 8:17उस परमात्मा के सबसे बड़े पारी तो से विहीन हो जाते हों तो उसका कोई
- 8:28कारण तो होगा ही। उसका सबसे बड़ा पारितोषक क्या है?
- 8:34इनाम क्या है? मेरे पास एक भागवत कथा का प्रचार
- 8:43करने वाली व्यक्ति आग है। अच्छा नाम लोग पूछते थे लोग पांव
- 8:52धो के पीते थे? मेरे पास आ गए, कुर्सी पर बैठ गए,
- 9:03मैंने नहीं निगाह बैठो, बैठ गए मैंने जलपान करवा दिया।
- 9:16मैंने कहा आजकल क्या काम करते हो? कहता भागो तो प्रचार करता हूँ,
- 9:25मैं तो जैसे चोंका मैंने कहा भागो तो प्रचार करता हूँ, भागो तो हाँ,
- 9:33भागो तो प्रचार करता हूँ। भागवत प्रसार करते हो मतलब मतलब
- 9:44भागवत प्रसार करता हूँ, भागवत की कथा कहता हूँ, बड़े निराले अंदाज
- 9:51में कहता हूँ, बड़े भक्तजन आते हैं, बड़े स्रोत आते हैं, भी
- 9:57मुक्त हो जाते हैं। और उनके करुणा में आंसू देख कर
- 10:04मैं भी भाव विभोर हो जाता हूँ। इतनी प्यारी कथा मैंने कहा वो तो
- 10:12ठीक है लेकिन बात सुनो। क्या भगवान से पूछ लिया था कि
- 10:22तुम्हारा प्रचार करूँ? वो तो चौंक गया, चाय का गिलास हाथ
- 10:32से छूट गया। भगवान से पूछा था कि जिसका प्रचार
- 10:41करने चले हो, जिसका प्रसार करने चले हो, आपका प्रसार कर दूँ कि न
- 10:50कर दूँ या पूछ लिया था? नहीं, उससे तो नहीं पूछा था
- 11:04ईमानदार तब तो फिर बिना पूछे ही प्रचार करना शुरू कर दिया।
- 11:11अगर उसको प्रचार की आवश्यकता ना हो तो?
- 11:17क्या तुम ये नहीं जानते कि उससे ज्यादा प्रसार हो ही नहीं सकता,
- 11:21जितना उसने कर लिया? वह सहभम है, खुद से ही प्रसारित
- 11:28हो जाता है उसे प्रसार करने के लिए तुम्हारी कोई आवश्यकता नहीं।
- 11:37मैं देख रहा हूँ उसके हाथ कब रहे थे।
- 11:42मैंने कहा तू चाय को नीचे रख दे, हाथ कपड़े हैं तेरे यह भी गिर
- 11:51जाएगा। चाहे तो मैं और मंगवा दूंगा, बात
- 11:55तो ये चाहे गर्म है, तुम्हारे ऊपर गिर गई पर मुश्किल हो जाए।
- 12:09फिर मुझे सिल्वर नाइट्रेट की क्रीम मंगानी पड़ेगी।
- 12:12ठंडी होती है। हफोला नहीं होता उससे जिसका
- 12:21प्रचार कर रहे हो। भागवत कथा के प्रचार को उससे
- 12:30पूछना क्या आपने? उसकी अनुमति ले ली।
- 12:39क्या वह प्रचार करना चाहता है? क्या वह प्रचार करना चाहता है?
- 12:47क्या तुम उसको प्रचारित करोगे? भगवान ने कंठ मिटा दे दिया, भगवान
- 13:02ने आवाज़ में मधुरता डाल दी मिश्र की तो इसका मतलब ये तो नहीं कि
- 13:10तुम लोगों को छलने लग जाओ। और ऐसे ही ऊल जलूल अन्त शन्त
- 13:16बातें करते रहो भगवान ने कब कहा कि मेरा प्रचार करो?
- 13:37थ्योरी जुलफों से जुदाई तो नहीं मांगी थी, कैद मांगी थी?
- 13:55रिहाई तो नहीं मांगी थी। तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं?
- 14:13मांगी थी। कैद, मांगी थी, रिहाई तो नहीं
- 14:24मांगी? थी।
- 14:26कहा मांगा था मैंने की मेरा प्रचार करो, मेरा प्रचार करो।
- 14:33मैंने तुमसे ये कहा था अपने भीतर जाओ, तुम मेरा प्रचार करना शुरू
- 14:41कर दिया है। बेना पूछे बेना आगया रही है।
- 14:57ये तो मैंने मांगा नहीं था, कैद मांगी थी अरे हाय तो नहीं मांगी
- 15:03थी तेरी जुल्फों से जो दायित्व नहीं मांगी थी।
- 15:20कहाँ कहा मैंने मेरा प्रचार कर कुबेर कुछ सास्तक, कोई पुराण, कोई
- 15:27कुरान, बाइबल ग्रंथ गीता कुछ लिखा बोला मैं और मुझे प्रचार की जरूरत
- 15:37है। मुझे प्रसार की जरूरत है,
- 15:55लेकिन तुम तुम मनमुखी हो तुम्हारा मन जैसे कहता है उसके पीछे तुम लग
- 16:07जाती हो तुम गुरमुखी हो न। गुरु नहीं कहता मेरा प्रचार करो,
- 16:19गुरु कहता है अपने भीतर चले जाओ वहाँ तुम्हें तुम्हारा प्रचार
- 16:26दिखेगा मेरे प्रचार की प्रसार की। फ़िक्र मत करो, मैं ही हूँ और
- 16:38मेरे सिवा कुछ नहीं। तुम मेरी फ़िक्र छोड़ो, तुम अपनी
- 16:44फ़िक्र करो तो मैंने देखा। वह भागवत प्रचार कर रहा था।
- 17:01फिर अब क्या होगा? मैंने कहा वही जो मंजूर है, खुदा
- 17:07होगा वह तुमसे। उसका सर्वश्रेष्ठ पारदर्शक जो वह
- 17:15दे सकता है वह छीन लेगा भगवान उसका सर्वश्रेष्ठ पारदर्शक क्या
- 17:22है आनंद जहाँ तुम बोलना नहीं जहाँ तुमने चुप होना है।
- 17:32सबसे बड़ा पुरस्कार है उसका तुम उसकी शिलाघा करते हो उसके ही
- 17:43यंत्रों से उसकी ही जीवा से उसके ही कंठ से तुम उसी की सलाह करते
- 17:51हो और मानते। हो की ये मेरा है शलागा कहाँ हुई
- 18:03शलागा तो उसकी तब होगी जीस दिन तुमने जान लिया मैं कौन हूँ
- 18:10मुझमें इतनी क्षमता नहीं है। कि मैं उस विस्तार को ढंग से
- 18:16कैबिस हूँ, ना कथा से, ना कहानी से, ना उदाहरण से मैं किसी श्लोक
- 18:24से ना किसी रिचार्ज से बह कहा जाता।
- 18:36जीस दिन तुम ये जान चाहोगे उस दिन कथा कहानियों कहनी बंद कर दो और
- 18:44ध्यान रखो अगर करते हो तो करते रहो, लेकिन वह अपना सर्वश्रेष्ठ
- 18:52उपहार तुम्हें नहीं देगा। उसका सर्वश्रेष्ठ उपहार है मौन
- 19:02मून का व्रश मून का वो आलम मून की वो सुगंध।
- 19:13मोन का वो शांत वातावरण जहाँ आनंद के फूल खिलते हैं उससे चुप जाओ
- 19:33करो कहानियों करो। सुनने वाले सुनते, आएँगे, आए हैं
- 19:39और रहेंगे। तुम भी मोड़ हो, तुम्हारे
- 19:46श्रोतागण भी मोड़ हैं न तुम्हें पता।
- 19:58कि भगवान को प्रचार प्रसार नहीं चाहिए, भगवान का प्रचार तुम
- 20:04करोगे, बस हिंदू धर्म में यही पाप है और कहाँ आज हिंदू सुखी है?
- 20:18जब तुम गलत रास्ते पे होगे तो वह दाँट देगा।
- 20:23तुम टेढ़े मेढ़े चलोगे लव करेगा ट्यूशन का।
- 20:31नियम नहीं मानोगे तो तुम गिर जाओगे।
- 20:34यह दंड है उसका, तुम भागवत प्रचार करोगे भागवत प्रसार करोगे वह दंड
- 20:42स्वरूप तुमसे आनंद छीन लेगा बस फिर तुम्हारे पास रह जाएगी लोगों
- 20:48की मान्यता चरण दो दो के दिन। क्या करोगे इसका तुम्हारे भीतर तो
- 20:59ज्वाला भड़की हुई है। तो पांच वर्ष गरीब होने गए और वह
- 21:19गुरु उसे ज्यादा तंग करना शुरू कर दिया, क्योंकि अंतिम वेला ऑन दी।
- 21:28लास्ट जंपिंग पॉइंट। जब तुमने कूद जाना है उस गहरी खाई
- 21:40में जिसका कोई और है तो तुम्हें बड़े साहस की जरूरत पड़ेगी।
- 21:53और वह साहस तुमने दान में, स्त्री में, परिवार में, मित्रों में,
- 22:00रिश्तेदारों में, जमीन जायदाद में।
- 22:05मान सम्मान कमाने में डिग्री इकट्ठी करने में सूचनाएं एकत्रित
- 22:11करने में इन्वेस्ट कर रखा है तो तुम्हारे पास बचा भी कितना ही है?
- 22:23थोड़ा सा बचा है तुम्हारे पास। बाकी तो तुमने पहले से ही निवेश
- 22:31कर रखा है। गुरु तुम्हारे अहंकार को वक्त
- 22:45वक्त पे तोड़ेगा अगर वह सच्चा होगा।
- 22:53अगर वह लोभी होगा लालची होगा। लोभी गुरु लालची ठेला दोनों नरक
- 23:03में ठेला गुरु भी दुख होगेगा। शिष्य भी नर्क भौंगेगा ये जो भाग
- 23:18दौड़ है भला नर्क इससे अलग कुछ हो सकता है तुम्हारा भागना तुम्हारा
- 23:27दौड़ना। तुम्हारा ये इकट्ठा कर लूँ वो
- 23:32इकट्ठा कर लूँ यह कमा लूँ वो कमा लूँ यह नर्क नहीं तो और क्या नर्क
- 23:38है कोई कुम्भी पाक नर्क से अलग हुआ करता है सच पूछो तो कुम्भी
- 23:45कुम्भी पाक नर्क में। इतनी सड़ाध नहीं होती जितनी सड़ाध
- 23:51तुम्हारे जीवन में है। इसमें वो गुलस्ता है।
- 24:05जीस गुलस्ता में भांति भांति के फूल लगे।
- 24:14और आज तुम्हारा जीवन नर्क बन गया है तो इसका कारण है ये प्रचार
- 24:21प्रसार करने वाले तुम्हारे भागवत कथा के वाचक तुम इनको डिग्रीज़ दे
- 24:30के सम्मानित करके और पाप कर देते हो।
- 24:34फिर इसका आकार ज्यादा फूल जाता है गुब्बारे की तरह, लेकिन ध्यान
- 24:39रखना सिर्फ हवा ही भरी जाती है। गुब्बारे का आकार तो वही रहता है,
- 24:49हवा भरने से फूल जाता है। लगता है आकार बहुत बड़ा हो गया
- 24:54है, लेकिन हवा है जब अब्बल है फूट जाएगा।
- 25:20गुरु ज्यादा तंग करने लगा और गुरु तंग ही क्या करता है?
- 25:27समझलो नकली गुरु आपके हिसाब से बोलेंगे नकली गुरु तुम्हारे मैं
- 25:41को तोड़ेगा नहीं। नकली गुरु तुम्हारी मई को बढ़ाएगा
- 25:49वो तुम्हारी प्रश्न से करेगा, नकली गुरु तुम्हें से न मान देगा।
- 26:03असल में नकली गुरु तुम्हारे हाथ की कठपुतली?
- 26:08ये देख जैन धर्म के प्रचारकों की तरह बिल्कुल ऐसा वैसा नहीं कुछ
- 26:15करेंगे जो तुम नहीं चाहते। मेरे पास एक जैन धर्म के गुरु?
- 26:22कई गुरु आ जाते हैं कभी कभी वो अपनी व्यथा सुनाती हैं।
- 26:28हमे बाबा देखो हम फ़िल्म देखना चाहते हैं, मैंने कहा फिर देख लो
- 26:36कौन रोकता है, आँखें हैं कहते वो सब ठीक।
- 26:42लेकिन अगर फ़िल्म देखने चले जाएंगे, हमारा रोटी पानी बनता है,
- 26:48पढ़े लिखे तो हम है नहीं और पेट रोटी मांगता है और अब भले अच्छे
- 27:01हैं। तो कहते हैं, समझा लेते हैं, बुझा
- 27:05लेते हैं अपने आप को ये क्या पड़ा है?
- 27:16कुछ भी तो नहीं, अश्लील सामग्री है सारी यहीं बैठे रहो, अन्यथा ये
- 27:25लोग तुम्हें मान देना बंद कर देंगे।
- 27:29मैंने कहा फिर गुलाम कौन हुआ है? हम तो मज़े से जब चाहे वो फ़िल्म
- 27:38देख लेते हैं और तुमसे ज्यादा तो जिनको तुम लफंगा कहते हो।
- 27:52बहुत ज्यादा स्वतंत्र हैं। उनके ऊपर कोई बीड़ी नहीं है।
- 27:55किसी की तुम्हारे ऊपर तो बहुत भगतों की बेड़िया है, ऐसे बोलोगे
- 28:00तो तुम्हें सम्मान मिलेगा, ऐसे बोलोगे तो तुम्हें जूतियां
- 28:04मिलेंगी, अपमान मिलेगा। तुम मधे हुए हो
- 28:24तुम से ज्यादा तुम नरजरा की बात करते हो तुम से ज्यादा स्वतंत्र
- 28:32तो आम इंसान है जीसको तुम बदमाश कहते हो?
- 28:40लुच्चा कहते हो, वह ज्यादा स्वतंत्रता का सुख भोग रहा है।
- 28:47स्वतंत्रता में अलग तरह का सुख होता है।
- 28:55तुम तो कैद में हो स्थान से बाजार में चले गए।
- 29:01भिक्षा मांगा, वहाँ से यहाँ आ गए। तुम तो इनके कारण कैद में हो,
- 29:16मुझे देखो मैं अपनी इच्छा से कैद में बैठा हूँ।
- 29:22यह ठहराव है जो उस परम तत्व को उसमें विलीन होने के बाद ठहराव
- 29:32आता है परम ठहराव ज़रा भी दौड़ने की आवश्यकता नहीं।
- 29:37जब ज़रा भी दौड़ने की इच्छा कोई उमंग नहीं, कोई तरंग नहीं मैं
- 29:49तरंग होके बैठा हूँ एक जगह लेकिन मुझे किसी ने।
- 29:58दंड नहीं दिया। मैं जब जाऊं चल सकता हूँ, फिर तुम
- 30:06सारे दिन बाहर घूमने वाले। तुम तो आम आदमी से भी ज्यादा बंदर
- 30:15में हो तोड़ दो भेड़िया कहते वो तो ठीक लेकिन फिर भूख तो सांझ को
- 30:24लगेंगी, मैंने कहा सांझ को भूख लगेंगी, मेरे पास आ जाना।
- 30:33भोजन में खिला दिया करूँगा लेकिन ये बेड़िया, ये तोड़ दो नहीं, वो
- 30:43तो ठीक है, लेकिन ये लोग जो आके चरण दोते हैं आह हाँ हाँ, बड़ा
- 30:50आनंद आता है। मैंने कहा ये काम तो मैंने कर
- 30:53सकता देखो तुम अपनी ही बेड़ियों में जकड़े हुए हो, फिर तुम कहोगे
- 31:02पर्युषण पर्व पर तुम्हारी आरती उतारते हैं फिर तुम वो सब कुछ
- 31:08मेरे से डिमॅंड करोगे। तुम बंधन में हो और जानते भी नहीं
- 31:17हो कि तुम बंधन में हो तुमसे अच्छा तो गारिब है उजर के पीते थे
- 31:23मैं उधार की शराब पीता था गालिब कहता मैं जानता हूँ।
- 31:30पूजर की पीते थेमे और जानते थे कि हाँ रंग लाएगी हमारी फाका मस्ती 1
- 31:37दिन 1 दिन उधारी रही है तो मांगनी भी आने के लोगों को रंग लाएगी
- 31:44हमारी फाका मस्ती 1 दिन। परमात्मा प्रचार नहीं मांगता भाई,
- 31:59पहली बात तो भागवत कथा के सुनने वालों तुम इन अरब बालों को खुद ही
- 32:08सेहड़ते हो और मज़े की बात है पैसा देके।
- 32:17जरूरतमंद को यही पैसा दान किया होगा।
- 32:23कहाँ तक न गिनवाएं सभी ने? हमको लूटा है सभी ने हमको लूटा
- 32:41है। यह कुष्ठ रोगी है, वृद्धाश्रम जगह
- 32:52जगह। पर भूखे मृत्यु बच्चे ये पशुवंशी
- 33:04जिनका विचारों का आवाज़ भी नहीं। ये मुखर नहीं हो सकते।
- 33:15इन्हें प्यास लगी तो कह नहीं सकते, प्यास लगे इन्हें भूख लगे
- 33:19तो कह नहीं सकते, भूख लगे बेजुबान हैं तुम्हें ये कोई नहीं दिखता।
- 33:33तुम्हे बस यह कथाकार ही दिखते हैं।
- 33:35नहीं तुम्हारी लोभ ही वृत्ति को यह दिखते हैं तुम नहीं बुलाते न
- 33:48तुम्हे लोभ ही वृत्ति बुलाते तुम चाहते हो।
- 33:53कि हमारे घर में सुख शांति रहे और ये लाख कोशिश करें अगर वह नहीं
- 34:02चाहता जिसका हुक्म चलता है। जीसको हकम कहा जाता है सच्चा हकम
- 34:14अगर वह नहीं चाहता नदरी मोख दवार कि तुम्हारे घर में शांति हो तो
- 34:25तुम्हारे जाने से कुछ नहीं होगा, ना ही इन ब्राह्मणों के।
- 34:29भागवत कथा कहने से कुछ होगा इनके खुद के घर लड़ाई झगड़े होते मैंने
- 34:36देखे स्त्री बेलन मार देती है, आदमी जूती उठा लेता है, गालियां
- 34:51बोली जाती हैं। ऐसा कुछ होता है इनके घरों में
- 34:59तुम्हारे घर में शांति करने के लिए भागवत कथा को ली है इन्होंने
- 35:06इनके खुद के मन को देखो, घरों को भी छोड़ दो।
- 35:10इनके खुद के मन उत्पाद से भरे हैं, इनके खुद के मन वासनाओं से
- 35:18ग्रस्त हैं, विचारों से ग्रस्त हैं, भरे हुए हैं।
- 35:25इनके मन रोगी हैं। इनका खुद का मन रोकता नहीं मेरे
- 35:34पास शाम तक बहुत से ऐसे व्याख्यान करने वाले आ जाते हैं।
- 35:39वापस सुबह व्याख्यान करना मन है कि बड़ा शोरगुल मचाया जाता है।
- 35:45कोई थोड़ा शांत कर दो, हम आ जाए तुम्हारे पास या तुम दूर से ही
- 35:52जड़ लगा दो वह मोर पंख वाला, मैंने कहा तुम वहीं बैठे रहो, मैं
- 36:01मोर पंख वाला लगा देता हूँ। ये तुम्हें कैसे खाएंगे?
- 36:18इनके मन में तूफान उठा जाता है। तुम इन्हें सम्मान देते हो
- 36:28क्योंकि कथाकार अच्छे कहानियों। झूठी कहानियों, गप्पे अच्छी भगा
- 36:38लेते हैं, बस यही इन पवित्र योग्यता है क्वालिफिकेशन।
- 36:53तुम एक बार देख जाओ अगर कहीं मन में उठे के भागोत कथा का पाठ
- 36:58खुलाना जो तुमने खर्च करना है किसी कोष्ट आश्रम में जाना किसी
- 37:10विधवाश्रम में जाना। किसी वृद्धाश्रम में जनो, किसी
- 37:15अनाथ आश्रम में जनो, किसी भूखे बेलखते बच्चे का पेट भर देना,
- 37:26किसी रोते हुए बच्चे को खिलौना दिलवा देना और तुम देखना।
- 37:33भागवत कथा तो तुम्हे दुख के सिवा और कुछ नहीं दे पाएगी।
- 37:38बच्चे को तुम रोते हुए को खिलौना दिला दो की यार बाप के पास पैसा
- 37:42नहीं है खिलौना दिलाने को तो वह जब बच्चा हसेगा तो बच्चा नहीं
- 37:53हसेगा तुम ऐसे गलती में मत रहना। परमात्मा, हँसेगा और परमात्मा जब
- 38:02हँसता है तो उसका पारि दोष कब बरसता है, उसका इनाम बरसता है तुम
- 38:11पर तुम परमात्मा को हँसाना। और परमात्मा को खुश कर देना
- 38:18शब्दों से ने कर्मस भगवत कथाओं से ने अपने शुभ कर्मण से।
- 38:34बेहुशिबा बरमोहि ए शुभ कर्म मनुष्य कब होना करो।
- 38:54जब जाएं लरो निश्चय कर अपनी जी करो देभूषवा वरमो।
- 39:13हे वो शिवा बरमो तो शिव का वरदान आता?
- 39:22है, लेकिन ध्यान रखना इन कागज के पन्नो का।
- 39:32सप्तः मत खुला लेना, लेकिन मुझे पता है तुम फिर भी खुलोगे क्योंकि
- 39:41तुमने उस बच्चे को रोते हुए को, जिसके बाप के पास पैसा नहीं था,
- 39:46खिलौना दिलाने के लिए तुमने परमात्मा को प्रसन्न नहीं किया।
- 39:52और ठीक कहते हैं ईशा ओनली दे विल एंटर इन मैं गॉड्स किम रम विल बी
- 40:00इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाइल्ड बच्चा ब्रह्मात्मा होता है, इनोसेंट
- 40:08होता है। और वह सभी परमात्मा होते हैं।
- 40:11अब इस बात को ध्यान रखो जिनमें वेद, बुद्धि नहीं होती।
- 40:18दुष्ट कोन और राक्षस कोन जिनमें वेद बुद्धि होती है तो राजनीतिक
- 40:27लोग दुष्ट होते हैं। भेद बुद्धि होती है।
- 40:30अगला चुनाव कैसे जीते, किसको तोड़ें, किसका हवाई क्रैश कराएं,
- 40:37किसको मारें और उसको मारकर सबूत कैसे मिटाएं?
- 40:43सारे दिन इसी काम में गुजर जाएगा तो विकास कब करोगे?
- 40:48भक्त ही नहीं बचेगा। परमात्मा की इस धरती पर 24 घंटे
- 40:54के दिन रात होती है। 25 घंटे का कभी नहीं होता तो जब
- 41:00तुम खरापात करने में दिन भर रात गुजार दोगे तो विकास कब करोगे
- 41:05पुत्र? वेला तुम्हारा आ गया है तुम्हारा
- 41:15वेला आ गया है, पुत्र। अगर तुम सभी बड़े होशियार हो,
- 41:30पहले से ही दबा देते हो, पहले से ही अपनी आरतियाँ करवानी शुरू कर
- 41:35देते हो, बढ़िया खेत लेते हो, नेपाल का खेत लेते हो, चुनाव आयोग
- 41:42खरीद लेते हो। बड़े बड़े इजारे खरीद लेते हो जो
- 41:46हमें मनुष्यता को स्वतंत्रता देने के लिए बनाए गए थे।
- 41:51बोला मुझे ये बताओ जनता को अपना नुमाइंदा चुनने का हक है कि नहीं
- 42:02है? अपने ढंग से चुनने का बिल्कुल है
- 42:09तो फिर वह चाहे वॉलेट पेपर से ही चुनें या ईवीएम से सुनें।
- 42:15तुम कौन होते हो दिशा निर्धारण करने वाले कि हम तो ऐसे ही
- 42:19कराएँगे देओ रसायन? चलो हम किसी और को चुनेंगे, हमने
- 42:26चुनना है, अपना प्रति अपने हिसाब के मुताबिक चुनना है और हिसाब
- 42:33हमारा क्या है कि जीस व्यक्ति को भी हमने वोट दिया, बिल्कुल उसी के
- 42:39पास पहुंचे। बिना किसी हेरा फेरी के तुम्हारा
- 42:45कोई ज्ञान चंद तुम्हारा कोई राजीव चंद उसमें हेरा फेरी ना करे आज तो
- 42:57तुम हो कल का भरोसा किसी का भी नहीं।
- 43:04लेकिन लोकतंत्र की परिभाषा ही लोग अपना प्रतिनिधि चुनें, अपने ढंग
- 43:12से चुनें, अपने हिसाब से चुनें। अपनी प्रक्रिया क्या होगी यह खुद
- 43:19निर्धारण करें। तुम मात्र जनता के टुकड़ों पर
- 43:31पलने वाले सेवकों फिर सुन लो। तुम मात्र जनता के टुकड़ों पे
- 43:42पलने वाले सेवक हो, वो चाहे चुनाव आयोग है, चाहे सीजे आई है, तुम
- 43:55अगर बड़ी कुर्सी पर बैठ गए हो तो याद रखना।
- 44:00रात भर का है मेहमान अँधेरा किसके रोके रुका है सवे?
- 44:181 दिन तुम भी उठोगे इस कुर्सी से कितने आये और उठ गए और चल गए?
- 44:23हिसाब होगा जो इस कुर्सी से उठकर राज्यसभा की कुर्सी पे बैठ गए।
- 44:32हिसाब होगा और मेरी बात सुन लो। मैं रहूं ना रहूं, हिसाब निश्चित
- 44:41हो किसने तुम्हें अधिकार दिया?
- 44:59भावनाएँ सब की हैं, एक अकेले किसी झुंड की भावनाएँ नहीं होती, दूसरे
- 45:12पक्ष की भी भावनाएँ होती हैं। वो कहते कि मैं जब न्याय पे नहीं
- 45:19चला था चंद्र छोड़ जी कहते कि मैंने परमात्मा से पूछा परमात्मा
- 45:28बड़ा पीछे का मसला है, तू ही बता मैं क्या करूँ?
- 45:33मैंने कहा थोड़ा सा अल्लाह से भी पूछ लिया।
- 45:42थोड़ा सा अल्लाह से भी पूछ लिया होता कि क्या फैसला दूँ?
- 45:48मात्र भगवान से पूछ के फैसला दे दिया, बनते ठीक नहीं किया।
- 46:02लोग मुझे कह देते है तुम कौन शुद्ध ब्राह्मण हो?
- 46:05बुद्ध ब्राह्मण हो तो तुम ऐसी बाते क्यों करते हो?
- 46:09मैंने कैसे लिया की मैं इंसान हूँ सभी वेदों से दूर सब ध्रह्माण्ड
- 46:18पर तज्जमामी का मिश्रण? हम तो हम सर्वबा पे दो मुख्य मैं
- 46:25सभी धर्मों से दूर हूँ मैं सभी जातियों से दूर हूँ सभी भेदों से
- 46:31दूर हूँ मैं अभेप हूँ कोई मुझे ब्राह्मण न कहे।
- 46:39कोई मुझे शूद्र और मुझे क्षत्रिय व्यक्षनों कहें कोई मुझे हिंदू,
- 46:45ईसाई, मुसलमान, सिख धर्मों, जातियों में मुझे ना बांटे, मैं
- 46:51इन सब से दूर हूँ, मैं अभेद्य हूँ, मैं अद्वैत हूँ।
- 46:59मुझे द्वैत में घसीटने की चेष्टा मत करो, मैं इनसे दूर हूँ, मैं
- 47:05इनका साक्षी हूँ एंड ऑब्सर्वर्स तो पांच वर्ष बीते।
- 47:16बीते प्रत्येक व्यक्ति उस स्थल पर चला जाता था और आखिरी।
- 47:25कुछ दिन बड़े मुश्किलात के दिन होते थे, क्योंकि यही तो रोग है।
- 47:35तुम्हें जब इलाज करते करते कैंसरिटिस का पूरा पक जाएगा तो
- 47:42ऑपरेट तो 1 दिन ही होगा ना? तो ऑपरेट करने से पहले डॉक्टर
- 47:49तैयार करता है तुम्हे कि तुम ऑपरेट के योग्य हो जाओ चीरा तो एक
- 47:59ही दिन देना होता है ना? वह अंग जो सड़ गए हैं, कैंसर
- 48:08राइटस के टिश्यूज़ जो सड़ गए हैं उनको निकालना होता है।
- 48:12सर्जे कर वह दिन आ जाता है और उसी दिन के लिए मशक्कत करता है गुरु।
- 48:28लेकिन तुम थोड़ी थोड़ी बातों पर जो रोज़ रोज़ जाते हो तो मैं समझ
- 48:38जाता हूँ। कि अभी इसे दुख और सहने की इच्छा
- 48:44है। अभी दुख की इम्तहान नहीं हुई।
- 48:54अभी सुखी है ये जीस दिन दुख की इम्तहान हो जाए।
- 49:04उस दिन यह खुद ही मेरी शरण में आ जायेगा और आ जाते हैं डिटे सब
- 49:13बैठा नहीं तो द जे है आप कहीं भी चले जाना।
- 49:26तुम खुद अपनी अच्छे से चले जाते हो, लेकिन यहाँ तो मैं खुद अपनी
- 49:31इच्छा से अंगूठा लगा दिया, मुझे पता है अभी नहीं पहुंचा होगा अभी
- 49:40भरा पड़ा है सारा गंदगी का मवाद तुम्हारे पिता।
- 49:46चेतन भी भरा पड़ा है। देखो अचेतन तो भरा ही पड़ा है।
- 49:50अब चेतन अचेतन तो भरा ही पड़ा है। सामूहिक अचेतन भी भरा पड़ा है।
- 49:59अभी कोई उम्मीद नहीं तुमसे, इसलिए मैं चुपके से अंगूठा लगा देता
- 50:05हूँ। यह सडान्त ले के किसी के पास भी
- 50:14जाओ बहुत बैठे हैं यहाँ तुम्हारे ही सडान्त जैसे जिनको तुम में से
- 50:22सडान्त आती है देखो कितने लोग हैं जो कहते हैं मैं हूँ।
- 50:31मैं हूँ, मैं हूँ तो मुमकिन है उनके पास चले जाओ, वो तुम्हें सब
- 50:44कुछ देंगे, लेकिन जिसे मैं परमात्मा का परम पारितोषिक कहता
- 50:52हूँ। रस।
- 50:58वह तो विचारों के पास उनके पास भी नहीं है।
- 51:04देंगे कहाँ से पहले तो खुद पिएंगे और याद रखना।
- 51:12बुद्ध कच्चे कच्चे क्यों उठ गए? अगर उस रस के पास पहुँच जाते तो
- 51:20कहाँ उठा जाता है? सतक्षण 40 साल में से 35 साल तो
- 51:30मैं पीता ही रहा। ओह, ज़रा सी दे दे सा की और ज़रा
- 51:41सी ओह, और ज़रा सी दे दे सा की और ज़रा सी।
- 51:51कैसे रहूं चुप के मैंने पी ही क्या है वो अभी तक है बाकी और
- 52:01ज़रा सी दे रे साखी और ज़रा सी। और ये प्यास ऐसी।
- 52:13के बुझाये ना मुझे कितनी ही पिए जाओ तुम बस प्यास सोचती है आखिर
- 52:28में। जब तुम उस में मर्ज हो जाते हो
- 52:33जीसको कभी कोई प्यास नहीं लगती उस सागर में जब तुम समज आते हो बूंद
- 52:40समान ही समद में तो फिर मिटती है प्यास।
- 52:45उससे पहले प्यास नहीं मिटती। तुम टॅच कर लेते हो, आनंदित हो
- 52:49सकते हो, लेकिन व्यस्त तो फिर भी नहीं मटेगी जैसे जैसे करीब जाओगे
- 52:56तुम्हारा मन होगा कि मैं इसमें इन्सर्ट हो जाऊं और बार बार
- 53:01इन्सर्ट होने की तुम्हारी भीतर से अभीवसा उठेगी।
- 53:09बार बार उसमें घुस जाने का मन होगा।
- 53:14इसे ही कहते हैं जीवेशणा का मिठियां कौन जीता है?
- 53:27तेरी जुल्फ के सर होने तक आह को चाहिए एक उम्र, असर होने तक कब
- 53:39समझेंगे ये लोग? और फिर ये समझेंगे और बहुत है वो
- 53:55घर में उतरते ही चले जाएंगे और उनको भी कोई गुरु चाहिए।
- 54:02इतनी भीड़ है इतनी भीड़ है ज्ञानियों की।
- 54:07कितने गुरु चाहिए? और गुरु है कि रोज़ झूठा गुरु
- 54:12पहला हो जाता है। कोई क्या करे आह को चाहिए एक उम्र
- 54:21असर होने तक कौन जीता है तेरी जुल्फों के असर होने तक।
- 54:27बाबा कहते रुक जाओ अभी वो तो कहती कि मैं तो इसमें मर्ज होके रहना
- 54:35है, यह बड़ा प्यारा है, बाबा कहते रुक जाओ अभी और भी है।
- 54:49और भी गम हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं बसल की
- 54:54राहत के सिवा तुम तो राहत में चले जाओगे।
- 55:07तो तुम्हारा धन्यवाद भी है और तुम्हें आशीष भी है तुमने मेरे
- 55:14कहा हुआ बिलकुल शब्दवाशब्द पूरा किया, अब थोड़ा सा ये भी कर जाओ।
- 55:27मैं कहता हूँ मेरे से नहीं हो सकेगा बाबा अब अब तो मुझे जाने
- 55:34दो। गुरु के पास तुम आते क्यों हो?
- 55:47इसका तुम्हें कारण नहीं है जब कोई व्यक्ति यह समझ लेता है कि मेरा
- 55:54अहंकार मेरे दुख का कारण है और मैं दुःखी हूँ और स्वयं से मैं
- 56:00अपना दुख मिटा नहीं सकता। अहंकार से अहंकार कैसे कटेगा?
- 56:08तो जीस कारण से दुखी हूँ वह अहंकार तो कोई गुरू को ही तोड़ेगा
- 56:13इस कारण से तुम्हें आना चाहिए। तुम गलत ढंगो से आ जाते हो, तुम
- 56:17गलत कारणों से आ जाते हो। तुम आ जाते हो कुछ पाने के लिए और
- 56:25दुखी होने के लिए अभी तुम पूरे दुखी हुए नहीं पुत्र अभी तुम पूरे
- 56:32दुखी हो लो जब चीख निकले भीतर से। और तुम चिल्ला के कहो बचा लो
- 56:49द्रोपदी के तरह फिर मैं आऊंगा तुम कह के महाराज।
- 57:01और कृष्ण पास ही खड़े हैं। कृष्ण कभी कहीं नहीं जाते ईशा
- 57:07वासमीदम सर्वमम जाते किंच जगते हम जगते कृष्ण देख रहे हैं कभी पांच
- 57:15पतियों के ऊपर? इसका अवलंबन टीका अभी तातीश्री पर
- 57:23भीष्म पितामह, पे गुरु द्रोण पे, अभी राजा पर।
- 57:34कि वो रोक लेगी। मना लेगी मुझको, मैं ये सोचकर
- 57:50उसके डर से उठा था के वो रोक लेगी।
- 57:58मना लेगी मुझको हवाओं में लहरा था आता था दामन के दामन पकड़ के।
- 58:17बैठा लेगी। मजुम कदम ऐसे अंदाज से उठ रहे थे
- 58:29की आवाज़ देखकर। बोला ले की मुझको मगर उसने रोका
- 58:46ना मुझको बैठाया। ना दामन ही पकड़ा, ना मुझको
- 58:57बुलाया ना बाजिहीदी ना वापस बुलाया मैं आई था।
- 59:10आहि रिश्ता बढ़ता ही आया या हाथ के उससे जुदा हो गया?
- 59:28जुदा हो गया। मैं जुदा हो गया तुम।
- 59:38सोचो तो कुछ भी तुम्हारे सोचने से क्या होता है अहंकार के कारण तुम
- 59:48दुखी हो। गुरु की तलाश तुम तब करना जब
- 59:53वास्तव में तुम किसी वस्तु के अभाव के कारण दुखी नहीं बात सुन
- 1:00:02गौर से सुन लेना मेरी बात। आज सारी दुनिया गुरुओं के आश्रमों
- 1:00:10में बैठी है, झूठे हैं ये लोग किसी को बल चाहिए, किसी को धन
- 1:00:22चाहिए, किसी को गद्दी चाहिए, सम्मान चाहिए।
- 1:00:26सबकी अलग अलग लेकिन मैं तुम्हें कहता हूँ कि मेरे पास तो कुत्ता
- 1:00:33बना है, ये सोच कर उसके दर से उठा था।
- 1:00:44बस तब उठना तुम उसके दर से संसार तुम्हें नहीं रोकेगा जब तुम संसार
- 1:00:54में कुछ न पाओ बुद्ध के तरह महावीर के तरह छोड़ देना कपिल
- 1:01:01वस्तु को। कब आना मेरे पास ये धोखा मत दो ये
- 1:01:11धोखा तुम पर ही भारी पड़ेगा। प्यास जग ही नहीं।
- 1:01:19प्यास है अभी धन कमाने की बड़े सेठ बनने की गद्दी नशीं होने की
- 1:01:26सोने की रंगों के ऊपर सोने की इच्छा है तो फिर पहले वो पूरी कर
- 1:01:34लेना। तब तलक मेरे पास मत आना जब तलक
- 1:01:41तुम्हें सच्ची प्यास नहीं लगी और सच्ची प्यास मैं रोज़ बोलता हूँ
- 1:01:45क्या सच्ची प्यास है कि सब है तुम्हारे पास?
- 1:01:56परंतु तुम्हें फिर भी कुछ और चाहिए वह और क्या है यह तुम्हें
- 1:02:02पता नहीं। सब के रहते लगता है ऐसे कोई नहीं
- 1:02:15है। मेरा कोई नहीं है मेरा ए धन ए
- 1:02:30दौलत। ये लॉकर, ये सोना, ये हीरे जौहरत,
- 1:02:34ये मान ये सलमान, ये गद्दियाँ कोई सुकून न दे सका, फिर तुम मेरे पास
- 1:02:47आना। उससे पहले मेरे पास मत आना।
- 1:02:57सूरज को छूने निकला था। परम रौशनी को छूने निकला था।
- 1:03:11तुमसो माँ जो तिर्ग में हे प्रभु मुझे इस अंधकार से निकाल ले।
- 1:03:20आया हाथ अंधेरा। में संतकार में डूब गया हूँ कोई
- 1:03:34नहीं है में द्रोपदी को यही नजर आया ना पांच पति उसके ना भीष्म
- 1:03:43पिता में। न गुरु द्रौण, न ता तशरी न पिरो
- 1:03:50सत्यवादी लेकिन सभी गर्दन दुका ही बैठे सूरज।
- 1:03:58को। छूने निकला था, आया हाथ अंधेरा।
- 1:04:15जब तक तुम संसारिक इच्छाओं से मुक्त नहीं होता।
- 1:04:19और मुक्त कैसे हो? उनका रस निकालो, उनका रस निकालो
- 1:04:26और तुम जब पाओ, बुद्ध की तरह बेकार है संसार दुख है संसार
- 1:04:34कांटे जो होता है। ये दिखने में अच्छा लगता है लेकिन
- 1:04:41इसका प्रणाम अंतः दुखदायी है, जब तक तुम यह निचोड़ न निकालो।
- 1:04:56तब तक मेरे पास मत आना दुकानदार तुम्हें बुलाएंगे वहाँ चले जाना
- 1:05:05मेरे द्वार बंद हैं तुम्हारे लिए। जब सच्ची ब्यास लगे जब तुम मेरे
- 1:05:21पास आना प्रिय तो मेरा द्वार खुला हुआ मिलेगा, मेरा दिल खुला है।
- 1:05:33खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए।
- 1:05:45जब ये गदियां जब ये धन, संपत्ति या डायलर या सोना या चांदी।
- 1:05:53ये मान सम्मान, ये प्रतिष्ठायें, ये डिग्रीज़, ये शस्त्र, ये
- 1:06:02शस्त्र पढ़ाने वाले लोग सब मान्यताएँ तुम्हें सुख न दे सकें।
- 1:06:17दुख ही दे बरण तुमको फिर आना मेरे पास ऐसे मत आना।
- 1:06:26इसलिए मैंने कहा था 500 व्यक्ति लेकिन ज्यादा के।
- 1:06:36देखो मैं दुकानदार नहीं हूँ सिर्फ मेरे पास प्यासों की जरूरत है
- 1:06:45मुझे और प्यासे ही पहुँच पाएंगे विवेकानंद अभी प्यासे नहीं
- 1:06:53पहुंचा। बस यही साबित किया उन्होंने जब
- 1:07:02रामकृष्णा ने सिर के ऊपर हाथ रखा और डेल्टा वेव्स छोड़ दी तो
- 1:07:07कांपने लगे और कांपने लगे। फिर चीख मारी उन्हें स्वामी जी।
- 1:07:16मेरे माँ बाप भी हैं, घर बार भी है की चुपके से हाथ उठा लिया।
- 1:07:25जानते हैं रामकृष्णा यह पल? यह बैरियर तोड़ना बड़ा मुश्किल
- 1:07:32है। कौन तोड़ पाएगा इस सुनहरे ख्वाब
- 1:07:41को कि मैं शरीर हूँ मैं मन हूँ मैं विचार हूँ मैं भावना ही हूँ
- 1:07:49तुम कहोगे कितना सुंदर तो है। चितन गुरु कहेगा देखो ये धोखा है
- 1:07:58अभी तुम मेरे पास मत आना जब तुम इससे लाचार हो जाओ ये दो नयना,
- 1:08:06सुंदर, सुंदर इनसे दिखना बंद हो जाता है।
- 1:08:13जड़ जाए दांत मोतियों जैसे फिर शरीर की त्वचा बल खा जाए और
- 1:08:28तुम्हारे पास जो सामग्री पड़ी है। जीने के लिए तुमने इकट्ठी की थी
- 1:08:32सुख के लिए, वो तुम्हे सुख न दे सके, फिर उस गहरी खामोशी में दर्द
- 1:08:44नाक अवस्था में नर फल के बलराम हुआ करते हैं, फिर तुम मेरे पास
- 1:08:51चले जाना एक सारा सदा ही बाकी रहता है।
- 1:08:55और वो सहारा मैं हूँ, मैं हूँ ना मेरे पास आजा।
- 1:09:17तुम गुरु के पास आ जाते हो भीतर तुम्हारे लोभ होता है बिना कुछ
- 1:09:23किए परमात्मा के पास पहुंचा उस सुखद अनुभूति को प्राप्त करो, उस
- 1:09:31परम सुखद अवस्था में पहुंचा। लेकिन मैं मूर्ख थोड़ी हूँ जिसमे
- 1:09:47ब्राह्मण समाज आया जिसका कोई और शोध जो विराट है, जो अनंत है जो
- 1:09:55वसीम, वह बलम तुम्हारी इन तुच्छ प्रवृत्तियाँ को जान न सके।
- 1:10:08इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ तुम तभी आना जब तुम्हें प्यार से लिख के
- 1:10:14हो, उससे पहले आकर तुम किसी और का समय ऐसा नहीं कि यहाँ प्यासी नहीं
- 1:10:25है। बहुत हैं लेकिन क्या करे उन
- 1:10:31प्यासों को गलत गुरूओं ने उलझा रखा कोई डेयरी में बैठा कोई कहीं
- 1:10:41बैठा कोई कहीं बैठा और सभी गुरू कहते हैं।
- 1:10:46मैं गुरु माखन शाह लोबाना की तरह लेकिन सच्चा गुरु तो कहता सुख है
- 1:10:55सो तो देवें दो बस पहचान वहाँ होती।
- 1:11:11तुम्हें जब तक प्यास न लगे तब तक तुम मेरी तरफ़ मुक मत करना, पीठ
- 1:11:21ही रखना, संसार को भोग लेना, वह भी बड़ी प्रिय कृति है।
- 1:11:27मेरी मैंने बड़े प्रेम से बनाई है।
- 1:11:33और संसार के प्रत्येक झरने पर मेरी छाप है।
- 1:11:37मैंने अपने हाथों से क्रिएट किया उसे वह भी बड़ा प्यारा है, इसीलिए
- 1:11:44तू इतना खेंचता है। लेकिन फिर भी अगर तुम्हारी चेतना
- 1:11:51इतनी ऊंची में उठ जाए कि मेरी ही बनाई हुई इस सिरजना को जिसके कण
- 1:11:56कण पे मेरी मोहर लगी है, वो तुम्हें सीखी नजर आने लगे तो फिर
- 1:12:00तुम मेरे पास आना मेरा दर्द खुला है, खुला ही रहेगा।
- 1:12:08तुम्हारे लिए ऐसा ही छोटी छोटी भावनाओं को लेकर मेरे पास होता
- 1:12:16है। अच्छा गायक बन जाऊं, उसके दो ही
- 1:12:24पाट दूँ, उसका सिर तोड़ दूँ? बाबा जो लोग कहते हैं तुम इन
- 1:12:35राजनीतिज्ञों को मार क्यों नहीं देते?
- 1:12:38मने फिर जो आएँगे वो ईमानदार। पहले वो ही तो थे।
- 1:12:47तुम इन्हीं को क्यों नहीं सुधार लेते?
- 1:12:54जो आएँगे वो दूध से धुले आएँगे। नस्लों फसल वही है।
- 1:13:12मैं हूँ मैं रहूँगा सदाशिव था। कृष्ण कहते हैं कि तुम्हारी से
- 1:13:21पहले मैंने यह कथा सूरी को सुनाई। अब सूरी कब था हे अर्जुन।
- 1:13:32यह कथा मैंने तुमसे पहले सूर्य को सुनाई, क्या कहते हैं वो?
- 1:13:41तुमने कभी इसके ऊपर कोई कमेंट किया ही नहीं?
- 1:13:45मैं भी यही कहता हूँ तुमसे पहले भी मैंने।
- 1:13:51तुमसे पहले भी मुझे खरब हूँ खरब हूँ खरब हूँ, खरब हूँ साल पहले
- 1:14:00यही बोला था और वो तुम जैसे ही थे जिनको बोला था।
- 1:14:15तो तुम कमेंट मत करना क्योंकि तुम जानते नहीं हो जहाँ अज्ञानियों से
- 1:14:22भरा पड़ा देश जिसने खो जाने वो कहता परमात्मा है ही मार्कस।
- 1:14:31जिसे संसार के नियम नहीं पता है। अब रिएक्शन दर यूनिकु एंड ऑपोजिट
- 1:14:35ट्रैक्शन, वो कहता है सब उधारी ले लो, शराब पी लो आज आज वो जो घी पी
- 1:14:43लो। आज आज किसी और का राज़ है जो सांज
- 1:14:48को शराब पीता है। ऋणम कृतवा गीतम पीवित जदा जीवित
- 1:14:54सुखी जीवित भस्मभूतत से देहत से पुनर आगमनम को ताहा।
- 1:15:06यदा जी वे सुखी जी वे ऋण कृत्वा मयं पी वे सराफ पीर बस भूत से
- 1:15:17देहस जिसे कर्ज उठाया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से।
- 1:15:25या किसी से भाग जाओ देश से बाहर गरीब कंगाल बना जाओ, देश को बसव
- 1:15:35भूत से देहस्य पुनर आगमनम कुतह फिर कौन आएगा तुम्हें ढूंढने तुम
- 1:15:40मज़े से बैठे होगे गाजा पत्ते में।
- 1:15:48इसराइल दोस्त यूएई में अब्बू धाबी में कौन आएगा तुम्हें खंगाले और
- 1:15:58किसको पड़ी है? प्रणम कृत्वा मयं विवेक बस वो त
- 1:16:08से देह से पुनर आगमनम कुतह फिर कोई नहीं आता तुम्हें वापस
- 1:16:14बुलवाने के लिए, लेकिन याद रखना यह संविधान।
- 1:16:23मूर्खों के संविधान मूर्खों ने अपने लिए बनाई तुम्हें नहीं पता
- 1:16:35राहतें और भी हैं फसल की राहत के सिवा।
- 1:16:40यहाँ नियम समाप्त नहीं होते। यहाँ तो कानून की निगाह में पट्टी
- 1:16:46बंधी थी। अभी उतारी एक नियम साक्षात एक
- 1:16:54नियम ऐसा दो शास्वत है। तो तुमने नहीं बनाया तुम्हारे तो
- 1:17:04सब के अलग अलग नियम है। जहाँ और मिलेगा पाकिस्तान में और
- 1:17:10मिलेगा चाइना में और मिलेगा जापान में और मिलेगा फ़्रेंच में और
- 1:17:15मिलेगा यूएई में और मिलेगा यूएस में और मिलेगा।
- 1:17:21तुम्हारी संविधान अलग अलग, लेकिन एक संविधान मेरा भी है, वह शाश्वत
- 1:17:28है, वह किसी एक देश का। और स्थान पर लागू नहीं होता।
- 1:17:41वह सब जगह लागू है। अलग अलग से संविधान तो मूर्खों के
- 1:17:47दिन एक संविधान मेरा भी है जो तुम्हारे संविधान से बिल्कुल अलग।
- 1:17:58और तुम मेरे जैसा संविधान कभी बना भी ना पाओगे और तुम मेरे जैसा
- 1:18:03न्यायकारी और मेरे जैसा करुणा मैं रहमो करी।
- 1:18:18और मेरे जैसे न्यायकारी तुम कहीं भी न पाओगे बस इसे खोपड़ी से मत
- 1:18:24सुलझाना यह शब्द ही कुछ ऐसा है तुम्हें विपत्ति में डाल देगा
- 1:18:30मेरे जैसा रहमो करीम और मेरे जैसा करुणा मान।
- 1:18:35पर मेरे जैसा न्यायकारी कोई भी तो नहीं?
- 1:18:40मैं न्यायाधीश हूँ, परम न्यायाधीश हूँ इस संसार में रहने के लिए
- 1:18:48तुम्हें तुम्हारे बनाए हुए संविधान के भीतर ही रहना होगा।
- 1:18:54लेकिन अगर तुम ये मुल्क बदल लो तो फिर यह तुम्हारा संविधान थोड़ी
- 1:19:01काम करेगा, वहाँ का संविधान काम करेगा, लेकिन एक संविधान ऐसा जो
- 1:19:06सभी जगह काम करे और वह संविधान मेरा है।
- 1:19:13जो बुध ने कहा लॉज आर सफीशिएंट वो मेरा संविधान है और प्रत्येक देश
- 1:19:26के संविधान के अनुसार वाहनों के न्यायाधीश न्याय करते हैं।
- 1:19:35सच पूछो तो नहीं नहीं करते, फैसला करते हैं, उन्हें पता ही नहीं
- 1:19:38होता क्या? नहीं तो उनके बाप बूढ़ों को भी
- 1:19:43नहीं पता क्या है? फैसले होते हैं लेकिन इतनी देर
- 1:19:48फैसले करने में क्यों लग जाती हैं?
- 1:19:52आदमी मर जाता है तो फैसला आता है। वक्त बहुत हो गया।
- 1:20:02मैं कहानी भी सुनाऊं तो इतना वक्त नहीं एक्सियो नो नाम का एक
- 1:20:12व्यक्ति। हीरे जो हैरातों का व्यापार करता
- 1:20:15था 1 दिन रात को उसकी घरवाली का सपना आया कि उसके पति देव के बाल
- 1:20:25सफेद हो गए। लियो टोलो स्ट्राइक की ये कहानी।
- 1:20:33109 ने आज जाना था घेरे ज्वारत बांध लिए थे विदेश में जाके बेच
- 1:20:41के आना था। उसके धर्मपत्नी कहने लगी आज मत
- 1:20:49जाओ क्यों ऐसा न पुषण लगा, धर्मपत्नी कहती है मुझे रात को
- 1:21:02स्वपन बड़ा भयंकर आया क्या स्वप बनाया प्रिया?
- 1:21:08आपके सारे बाल सफेद हो गए, हालांकि कोई भी एक भी बाल सफेद
- 1:21:13नहीं है। आपका पर महात्मा ने हमे कोई होने
- 1:21:22वाली घटना से आगाह किया है। ऑल दी इवेंट्स अरे फ्री जस्ट टाइम
- 1:21:37वो कहते नहीं सपने तो आते ही रहते हैं, सपनों का क्या है मैं गया और
- 1:21:42आया। एक्सोनो चला गया, किसी सराय में
- 1:21:51जाके रुका, रात भर रुका, सुबह शोर मचा हुआ था धर्मशाला में सराय
- 1:22:06में। किसी व्यक्ति का कतल हो गया और वह
- 1:22:11अक्शैन ने बिल्कुल पड़ोस के कमरे में था, जिसका कतल हुआ था और इस
- 1:22:23छानबीन कर रही थी। सबके सामान की तलाशी ले रही थी।
- 1:22:30अक्से नौ के बैग की भी तलाशी ली तो उसमें से एक छुरा निकला छुरा
- 1:22:40खून से सना था। के सामने सारी तलाशी हुई तो थर्रा
- 1:22:51गया उसको अपनी पत्नी का। वशोप ने कहा आज दी इवेंट्स अरे
- 1:23:00फ्री डस्टांड तुम कहते हो मैं करता हूँ और बोलिए यह क्या है?
- 1:23:14तुम तो अपने आपको बेकसूर बता रहे थे।
- 1:23:17109 कहता वो तो मैं अब भी कहता हूँ।
- 1:23:22मैं बड़े मज़े में सोया रात को फिर यह किसने किया?
- 1:23:27यह तो तुम्हारे बैग में है और खून बिल्कुल उसी व्यक्ति का है।
- 1:23:39109 कुछ बोल न सका, अदालत में सुनवाई हुई।
- 1:23:53उसको ताब उमर की कैद कर दी गई। बस अब वो कैदी बनकर रह गया।
- 1:24:12उससे दो चार कमरे आगे। 1 दिन वो टहल रहा था, बस अब तो
- 1:24:19उम्र यहीं बीतेगी। उसने देखा कुछ आवाज हो रही है कुछ
- 1:24:29लोग मिलकर। सुरंग खोद रहे हैं।
- 1:24:34जेब से भागने के लिए उसने अपनी आँखों से दृश्य देखा।
- 1:24:50देख कर अपने कमरे में जा के सो गया।
- 1:24:56अब उसे जेल हो चुकी थी। वह सुरंग फाड़ कर जाना चाहते थे
- 1:25:08और वह व्यक्ति पकड़े गए। उन व्यक्तियों ने कहा कि सभी यहाँ
- 1:25:18लोग जो रहते हैं उनसे पूछ्ताछ करें।
- 1:25:25जो खाई खोद रहे थे। उन्होंने कहा, यह व्यक्ति ने अपनी
- 1:25:29आँखों से देखा है। यह व्यक्ति कह देगा कि हाँ, मैंने
- 1:25:35देखा है इन लोगों को खोजते हुए। सबसे पूछा गया 109 के पास भी आये
- 1:25:53तुमने किसी को यहाँ पर? गड्ढा खोदते हुए देखा है।
- 1:25:57सुरंग कितनी लंबी सुरंग बन गई? हमें किसी ने बताया कि वहाँ सुरंग
- 1:26:06खोदी जा रही है और मकार नाम के किसी व्यक्ति ने खोदी है जेल से
- 1:26:13फरार होने के लिए? और उसको एक देख रहा था और मैं भी
- 1:26:17देख रहा था मकार नाम का वह व्यक्ति ही असली का तल्प था,
- 1:26:26जिसने उसके पड़ोस में रहते हुए व्यक्ति को मारा था और वह छुरा
- 1:26:32चुपके से। खिड़की में से खोलकर खिड़की उसके
- 1:26:39बैग में रखकर जब घूँघ सोया हुआ था तो बाहर चला गया।
- 1:26:46कातिल था मकार पल्ले पड़ गया, एक सीन हो के।
- 1:26:56एकसोनोव जेल काट रहा था तो जब पूछा गया, एकसोनोव से जीस व्यक्ति
- 1:27:05ने शिकायत की थी कि मैं भी देखा और एकसोनोव ने भी देखा।
- 1:27:10मकार गड्ढा खोद रहा था। सुरंग मकार ने बनाई तो बात यहाँ
- 1:27:18खत्म हुई कि एक्सो नोब जो कह देगा, वह सत्य माना जाएगा।
- 1:27:23वह शरीफ है उसको कभी अलवाद करते हमने देखा नहीं, शरीफ था।
- 1:27:33हीरो का व्यापारी था, एक से नौ को बुलाया गया।
- 1:27:43जब सेहबान ने पूछा एक से नौ बाइबल के ऊपर हाथ रख के कहो, जो कहोगे
- 1:27:51सत्य को हो गए, उसने बाइबल पर हाथ रखा।
- 1:27:55मैं जो कहूंगा, सत्य कहूंगा, सत्य के सिवा कुछ नहीं कहूंगा, तो बताओ
- 1:28:01क्या तुमने मकार को सुरंग बांटते हुए गड्ढा खोदते हुए देखा?
- 1:28:07अपनी आँखों से वो कहते हैं। नहीं देखा।
- 1:28:16नहीं देखा तो यह व्यक्ति कहता है कि ने भी देखा यह झूठ बोलता है।
- 1:28:33मकान को पक्का पता था क्योंकि इसने देखा है और मैंने उसको देखा
- 1:28:38है। और बिला शक की यह व्यक्ति ईमानदार
- 1:28:44नजर आता है और फिर सौगंध भी खाली है के ऊपर हाथ भी रख लिया।
- 1:28:51अब तो बिल्कुल झूठ नहीं बोलेंगे लेकिन एक्शन वो कहता नहीं, मैंने
- 1:28:55नहीं देखा। इसने नहीं खोदी सर मैंने नहीं
- 1:29:00देखा। मकान को दोष मुक्त कर दिया गया।
- 1:29:09फाइल बट्टे खाते कर दी गई। जैसे आज कल होते हैं।
- 1:29:24लेकिन मकान को रात को नींद नहीं आयी।
- 1:29:28दोषी को कहाँ नींद आती है इस बात को गहरे से समझना।
- 1:29:35जब बुद्ध के ऊपर कोई थूक जाता है तो वो मज़े से सोते हैं।
- 1:29:43लेकिन वह नहीं सो पाता। जिसने थूका था उसके ऊपर वह सारी
- 1:29:50रात जागता रहा। अगर वह मुझे एक गाली निकाल देता
- 1:29:55तो हिसाब बराबर था। अब उसने तो कुछ भी नहीं कहा।
- 1:29:59उसने कहा बनते यह तो मैं समझ गया। और भी कुछ कहना है सारी रात
- 1:30:09कर्बटे सुबह होने का इंतजार करता है।
- 1:30:132:00 बजे घर से चल पड़ा, पता था 3:00 बजे उठते हैं, पेड़ के
- 1:30:21किनारे पर छुप गया। जब वो तो उठे तो जा के चरण पकड़
- 1:30:26लिया, रोने लगा प्रभु मुझसे गलती हो गया, मुझे क्षमा कर दो, वो
- 1:30:36कहता क्षमा क्षमा तो मैंने तभी कर दिया था मित्र जब तुम में कोई दंड
- 1:30:43नहीं दिया मैंने। क्षमा तो उस वक्त हो गए थे,
- 1:30:46अन्यथा मैं तुम्हें दंड दे देता नहीं प्रभु मुझे एक क्षमा कर दो,
- 1:30:53ऐसा ही होता है। जब तुम नॉन रिऐक्टिव हो जाओगे तो
- 1:30:58ऐसे ही परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।
- 1:31:04मकार सारी रात करवटें बदलता रहा। सुबह हुई कोर्ट खुले मकार कोर्ट
- 1:31:21में पहुंचा। मैजिस्ट्रेट के सामने जाके सरेंडर
- 1:31:28कर दिया, मेरे बयानात दर्ज किए जाएं।
- 1:31:33प्रभु मैंने कहा झूठ बोला कल यानी आने वाला जो पहले बीत गया वह
- 1:31:43सुरंग मैंने ही खोदी थी। और ने मुझे खोदते हुए देखा था और
- 1:31:50मुझे का भरोसा था कि वह झूठ ने पूरे, लेकिन उसने बाइबिल की कसम
- 1:31:56खा के भी झूठ बोल दिया। मैं जीस क्षेत्र कहती हूँ, मैं
- 1:32:10कैसे एतबार करूँ? उन्होंने सारी प्लान बताये, कैसे
- 1:32:15क्या मैं इत्तफाकन वह अलमारी खोली हुई थी, मैंने थोड़ा सा पुश किया।
- 1:32:24अलमारी खुल गई। मैं उसके कमरे में घुसा, मैंने
- 1:32:27बैग को ना छोरा रख दिया वह कतल मैंने किया था।
- 1:32:36100 109 बिल्कुल। बेकसूर है, नाजायज दंड भोग रहा
- 1:32:47है, जो मुझे भोग नहीं चाहिए जब किसी दोषी की आत्मा जगती है, ऐसी
- 1:32:56ही जगह करती है यह पापों का प्रायश्चित।
- 1:33:04मैंने ये किया, तुम मुझे दंड दो, तुम मुझे क्षमा मत करो, जब तुम
- 1:33:10क्षमा मांगते हो तो तुम अपने आप को ये साबित करते हो कि मैंने
- 1:33:16गुनाह नहीं किया, बस यही तो मुसीबत है।
- 1:33:20तुम कहते हो परमात्मा से? मुझे क्षमा कर दो, मैंने यह किया
- 1:33:28है नहीं, क्षमा मांगने का मतलब है कि तुमने कसूर नहीं किया।
- 1:33:36अगर तुमने कसूर किया होता तो तुम कहते कि मैंने कतल किया है।
- 1:33:43मैंने हीरेन पांडा को मारा, मैंने तुलसी प्रजापति को मारा, मैंने
- 1:33:49लोया को मारा, मैंने और भी किसानों को मारा, मेरे ही कानून
- 1:33:55बनाने के कारण 750 किसान। यहाँ मर गए, पर रूहों पे बैठे
- 1:33:59उनका कोई कसूर न था। अगर मैं कानून न बनाता तो वो यहाँ
- 1:34:05क्यों आते? मुझे दंड दो जीस दिन तुम ये कहोगे
- 1:34:13मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको।
- 1:34:19वो है कन्फेशन, तुम्हारा कन्फेशन अभी गलत है, तुम्हारा कन्फेशन भी
- 1:34:26तो सही नहीं है, तुम मात्र घटनाओं को दोहरा देते हो, पाप को नहीं
- 1:34:31दोहराते। यही तुम्हारे कन्फेशन में कमी रह
- 1:34:36जाती है। कन्फेशन ये कि तुम एक एक बात को
- 1:34:40साथ बताओ, हाँ मैंने मरण था अब तुम मुझे टांगो मरना तो 1 दिन है
- 1:34:48ही फिर विकसित भारत बनाके क्यों मर है?
- 1:34:54फिर अपराध के कारण मरे फिर जनता दंड दे।
- 1:34:58वो चाहे दंड दे जो चाहे दंड दे, लेकिन तुम होशियार बन के जीने की
- 1:35:06चेष्टा करते हो लेकिन बाबा कहते हैं उसके दरबार में होशियारी कहाँ
- 1:35:12चलती है? सह से क्षणपण लग्को हुए ताई कनश
- 1:35:15ले नाल तो एक्शन और कहता की मैंने किया है क्षमा करो, मकार कहता
- 1:35:25मैंने किया है कतल और ऐसे किया है सब बता दिया।
- 1:35:31और मैं क्यों कहूंगा? क्योंकि ने मुझे देखा जब तुम नॉन
- 1:35:38रिएक्टिव हो जाओगे, जब तुम अपने शत्रु से भी प्रेम पुरो का
- 1:35:45व्यवहार करोगे तो फिर तुम। उसके दिमाग पे नहीं उसके दिल पे
- 1:35:51राज़ करोगे वो होता है असली राज़ तानाशाह दिमागों पर राज़ करता है
- 1:36:01और कृष्ण जैसा प्रेमी हृदयों पे राज़ करता है मैं चला जाऊंगा।
- 1:36:08लेकिन याद रखना आज भी राज़ कर रहा हूँ कल मैं तुम्हारे दिमागों पे
- 1:36:15राज़ नहीं करूँगा मैं तुम्हारे ह्रदयों पे राज़ करूँगा तुम मेरी
- 1:36:23राहत में आंसू बहाओगे तुम्हारा। एक एक अल्फाज़ को याद करके एक एक
- 1:36:36अल्फाज़ को याद करके। मकार कहता मुझे दंड बताओ, कहानी
- 1:36:52अंतिम मोड पे आ रही है। ध्यान से सुन सब इन्वेस्टिगेशन
- 1:37:01पूरी हो गई। और जज साहब ने ऑर्डर देखा एक्शन
- 1:37:08नो शुड बी रेलिस्ट फ्रम दी ग्रेड ऑर्डर कर दिया।
- 1:37:29अपने अहलमद को ऑर्डर भेज दिया कि जाओ उसको रिलीज कर दो चाहे भी
- 1:37:35वहाँ से ले जाओ और रिलीज कर दो उसके कोठड़ी का दरवाजा खोल दो,
- 1:37:41मगर कहता मैं जाऊंगा सब क्यों? मैजिस्ट्रेट बोला तुम कब जाओगे
- 1:37:52कहते जीस जिससे जोरंभ हुआ है उसके चरण पकड़ के रोऊँगा।
- 1:38:07जी भर के रहूँगा, फिर मेरे पाप का बोझ हल्का होगा।
- 1:38:14ऐसे कहने से पाप का बोझ तो नहीं? हल्का हुआ दिल तो मेरा अभी भी भरा
- 1:38:19हुआ है। जस्ट साफ कहने लगे ठीक जाओ, साथ
- 1:38:30में जाओ, दरवाजा खुल गया उसको रिलीज करने का ऑर्डर लेके अहिलोवन
- 1:38:41से चला है साथ में मकार है मकार की?
- 1:38:48अब ये लाशा थी उसके चरण पकड़ो का दरवाजा खोला, कोठरी का द्वार
- 1:39:01खोला, अहलमद भीतर गया, आराम से लेटा हुआ था एक से नौ।
- 1:39:16ऑर्डर ऑफ दी रिलीज, वास इन हिज़ हैंड्स।
- 1:39:22उसने आवाज लगाई, अहलमद ने एकसोनोक जागो तुम्हारे लिए शुभ सूचना है।
- 1:39:36तुम्हें मुक्त कर दिया गया तुम्हें निर्दोष घोषित कर दिया
- 1:39:42गया तुम्हें जेल से रिलीज किया जाता है, लेकिन बोलने से वह उठा
- 1:39:54नहीं। अहल में तो नहीं झंझोड़ा ज़ोर से
- 1:40:07झंझोड़ा ज़ोर से झंझोड़ा तब लुढ़क गया।
- 1:40:21डियर टालस्थाइल लिखते हैं व्हेन दी ऑर्डर ऑफ एक्शन ऑफ व्हेन दी
- 1:40:27ऑर्डर ऑफ रिलीज़ ऑफ एक्शन ऑफ केम एक्शन, नो वासन नो मोर।
- 1:40:39जब 109 को जेल से छूट जाने का ऑर्डर हाथ में दिए हुए व्यक्ति
- 1:40:47गया, उसे हिलाया और उसको सुनाने वाला था, 109 जा चुका था, इस धरती
- 1:40:57से नहीं। आसमान से परे जा चुका था।
- 1:41:09मकार फूट फूट के रोए, उसके चरण पकड़ लिए।
- 1:41:22मकार खूब रोए मेरे कारण तुमने इतने बरसे जले।
- 1:41:35गुरु तुम्हें यही सीखाता है अगर सब कुछ भोग लेने के बाद सर्जना को
- 1:41:43भोग लेने के बाद तुम्हारे मन में बुद्ध जैसा महावीर जैसा बैरंग आ
- 1:41:49गया। तभी तुम गुरु की तलाश करना, उससे
- 1:41:56पहले तुम गुरु की तलाश न करना, उससे पहले गुरु की तलाश करना
- 1:42:04बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे प्यास लगे नहीं और तुम पानी को ढूंढने
- 1:42:08लगे रहो। भूख लगी नहीं और तुम भोजन को
- 1:42:13ढूंढने लग जाओगे। थोड़े से लोग मेरे पास आने चाहिए
- 1:42:21जो वृथ में ही जहाँ फंस गए हैं, किसी लोभ के वश उन्हें तुरत फुर्त
- 1:42:27निकल जाना चाहिए। उनकी इच्छाओं के अनुरूप उन्हें
- 1:42:33गुरू ढूंढना चाहिए और अपनी अभिलाषाओं को अंजाम देना चाहिए।
- 1:42:41मेरे पास उनको कोई काम नहीं है। मेरे पास सिर्फ वो ही रुकें जो
- 1:42:51मेरी आवाज़ के साथ लेबड जबड के वो रास्ता आता है जो उसको पीने की
- 1:42:57आंतरिक का भी राशा रखे अन्यथा अगर तुम उससे संतुष्ट नहीं हुए।
- 1:43:07तो फिर अभी तुम संसार से संतुष्ट बोलो, संसार को बोलो संसार को
- 1:43:16भोगने से अगर तुम्हें कुछ मिल जाये तो बहुत अच्छा है बुश रजना
- 1:43:22भी मैं बन गई मेरी ही करियक्शन। लेकिन मुझे पता है नहीं मिलेगा
- 1:43:31फिर तुम मेरी तरफ़ फालो बे होगा। असली बदलाव उससे पहले कोई क्रांति
- 1:43:40घटित नहीं होती। क्रांति घटित होती है जब संसार
- 1:43:44व्यर्थ होता है। जब इन्द्रियां व्यर्थ होती हैं,
- 1:43:48तो व्यक्ति आत्मघात भी कर ले तो कोई दोष नहीं है, क्योंकि जान
- 1:43:54लेता है केन्द्रियों से मैंने करना क्या है?
- 1:43:59राम मरे लेकिन आत्महत्या नहीं थी यह संसार ले के।
- 1:44:05जैन मुनि मर जाते हैं, आत्महत्या नहीं होती।
- 1:44:09इन्द्रियां इनके लिए बेकार हो गई। अब इन्होंने इन्द्रियों से करना
- 1:44:13क्या अभी तो इन्द्रियों से जिन्होंने कुछ करना है ओह बाबा
- 1:44:22रामदेव से दवा लेते रहे। इंद्र को मजबूत करते रहे।
- 1:44:39गुरु तुम्हारे अहंकार को तोड़ेगा क्योंकि गुरु जानता है क्या
- 1:44:43तुम्हारे दुख का मूल कारण तुम्हारा अहंकार अगर तुम तुम्हारे
- 1:44:48अहंकार को टूटने नहीं देना चाहते? तो गुरु के द्वार पे मत जाना, तुम
- 1:44:59पूरी तैयारी करके जाना जैसे कोई तीर्थ यात्रा बजाता है।
- 1:45:11लप्पो लवास अपना पूरा पैक करके जाना पता नहीं फिर वापस मुड़ गए न
- 1:45:24ऐसा ही थोड़ा सा झिड़क दिया, ऐसा ही थोड़ा सा अल्फाज़ कह दिया।
- 1:45:31तुमने आगे से प्रत्युत्तर कर दिया कमेंट कर दिया बिना जाने पहचाने
- 1:45:37मैंने कब बुलाया था भाई। नवाज ही दी ना वापस बुलाया।
- 1:45:51मैं आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता ही आया, यहाँ तक के उससे जुदा हो
- 1:46:05गया। मैं।
- 1:46:07अगर तुम्हें अभी वैराग्य नहीं जगा, संसार से तो जुदा हो जाओ,
- 1:46:14निकल जाओ यहाँ से अभी यहाँ तुम्हारा कोई काम नहीं है।
- 1:46:23संसार को अच्छी तरह से भोग लो। जब तुम्हें ये संसार एक पचड़ा नजर
- 1:46:31आने लगे के गले में किसी ने मरा हुआ सांप डाल दिया, तब तुम गुरु
- 1:46:42की तलाश करना, उससे पहले तुम्हारे गुरु की तलाश करना व्यर्थ है।
- 1:46:49फिर जैसी तुम्हारी तमन्ना वैसे ही तुम्हें गुरु मिल जाते हैं।
- 1:46:53पांच इनाम देने वाले राधे राधे करने वाले, राम राम करने वाले खुद
- 1:46:59भी गए हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले ही डूबेंगे।
- 1:47:13संसार में अगर अभी भी तुम्हें हीरे मोती चमक नज़र आती है तो
- 1:47:22बिल्कुल भूल के भी परमात्मा को पाने की चेष्टा मत करना, क्योंकि
- 1:47:26परमात्मा तो आखिरी मुकाम है, वहाँ जाकर तो सब खो जाता है।
- 1:47:35वहाँ जाकर तुम्हारा छाया भी तो नहीं बचता?
- 1:47:45ऐसे ही विदा हो जाना जैसे एक्स यू नो विदा हो गया।
- 1:47:50व्हेन दी ऑर्डर ऑफ़ इस रिलीज़ केम 109 बास नौ मोर 5 साल होने से
- 1:48:05पहले गुरु ज्यादा परेशान करेगा और इसे समर में रखने।
- 1:48:16क्योंकि अंतिम वेला में उसे पता है कि बड़े साहस की आवश्यकता
- 1:48:21पड़ेगी। जन्मो जन्मो से, जिससे चिपकाहट को
- 1:48:25साधा, अब उसे तोड़ने का समय आ गया और यह तोड़ना करीब करीब।
- 1:48:34नेक्स्ट टु इम्पॉसिबल और मेरा पागलपन वजन बढ़ता ही जाएगा उन
- 1:48:43लोगों के प्रति तुम होशियार रहे ना खबरदार रहे।
- 1:48:55मेरा रवैया थोड़ा सख्त हो जाए। उसका कारण भी रहमदिली है।
- 1:49:10गुरु जानता है अब आखिरी बंधन तोटा है और आखिरी बंधन बहुत मजबूत है।
- 1:49:16जन्मो जन्मो का है, बाकी बंधन तो तुमने कभी बनाई ज्यादा पुरानी
- 1:49:25नहीं है, वो टूट जाएंगे। टूट गए।
- 1:49:30लेकिन ये आखिरी बंदन बहुत मुश्किल है।
- 1:49:38इसको तोड़ने के लिए बड़े साहस की आवश्यकता है और तोड़ना तुम्हें ही
- 1:49:42पड़ेगा। इसलिए गुरु तुम्हें साहस देना
- 1:49:50चाहता है। और साहस आएगा तुम्हें गुरु
- 1:49:54तुम्हारे अहंकार पर तीव्र आघात करेगा, सुनार की चोट नहीं करेगा,
- 1:50:00लोहार का गन बरसाएगा तुम बार बार देखोगे, गुरु तुम्हें बुला लेगा।
- 1:50:13नहीं गलती मत खा जा, गुरु की रहम दिली भित्र है गुरु तुम्हारे
- 1:50:26अहंकार को वाष्प विभूत करना चाहता है।
- 1:50:33वह तुम्हारी इच्छाओं को पूरी करने के लिए नहीं बैठा है, वह तुम्हारा
- 1:50:42लक्ष्य साधने को बैठा है, इन शब्दों को ठीक से समझो, वह
- 1:50:46तुम्हारी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए नहीं बैठा है।
- 1:50:51वह तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य साधने के लिए बैठा है कि कैसे तुम अपने
- 1:50:55लक्ष्य को सध लो, इसलिए गाना उठायेगा भाई, क्योंकि वह जानता है
- 1:51:04अब तो गाण की जरूरत पड़ेगी, तुमने देखा कभी मिस्त्री को काम करते
- 1:51:07करते? कभी उसे थोड़ी की जरूरत पड़ती है,
- 1:51:10कभी पेचकस की जरूरत पड़ती है, कभी हलके सामान की, कभी भारी
- 1:51:18इन्स्ट्रुमेंट की। और जब ज्यादा भारी चीज़ तोड़नी
- 1:51:21होती है तो घण उठाता है लोहार का बस अंत में गुरु के पास।
- 1:51:29तुम्हारा अहंकार तोड़ने के लिए एक चीज़ बचती है जब सिर्फ तुम्हारा
- 1:51:35अहंकार बच जाता है शुद्ध मैं शरीर हूँ, मैं मन हूँ मैं भावनाई हूँ,
- 1:51:45मैं विचार हूँ। फिर उसे गान उठाना पड़ेगा, फिर
- 1:51:53अंतिम प्रहार उसका बड़ा भारी होगा।
- 1:52:00अगर तुम तब संभल गए। यही रात अंतम रही रात भारत यही
- 1:52:19रात अंतम। यही रात भा बस इस रात की अब कहानी
- 1:52:33है सारी यही रात अंत। यही रात भा बस एक रात की अब कहानी
- 1:52:49है सारी यही रात अंत यही रात भा। आखरी घण जो चोट मारेगा गुरु इतनी
- 1:53:15बर्दाश्त सख्त में होनी चाहिए। अगर तुममें सहन शक्ति नहीं है,
- 1:53:24अपने ही अहंकार को तोड़ने, फिर देखो यह आखिरी प्रहार तुम्हारी
- 1:53:34ज़िन्दगी और मौत का सवाल। या तुम्हें दो जख में ले जायेगा
- 1:53:39या तुम्हें जन्नत में ले जायेगा और तुमने देखो कौन सा पार्सल
- 1:53:46चुनना है, तुम्हारी इच्छाएं गुरु नहीं पूरी करेगा।
- 1:53:53गुरु तुम्हारा लक्ष्य पूरा करना चाहता है।
- 1:53:56तुम्हारी वासनाएँ तुम्हारी इच्छाएं, तुम्हारे मोह तुम्हारी
- 1:54:01पकड़े, तुम्हारी मान्यताएँ वो सब तोड़ देगा।
- 1:54:15कि वो रोक लेगी, मना लेगी मुझे। मैं ये सोचकर उसके डर से उठा था
- 1:54:32के वो रोक लेगी, मना लेगी मुझको हवाओं में लहरा था।
- 1:54:44आता था दामन के दामन पकड़ कर बिठा लेगी मुझको कदम ऐसे अंदाज से उठ
- 1:55:00रहे थे। कियावा ये देखकर बुला लेगी मुझको,
- 1:55:14मगर ने रोका। ना उसने मनाया ना दामन ही पकड़ा,
- 1:55:29ना मुझको बिठाया, नवाज ही दी ना वापस बुलाया।
- 1:55:41मैं आहे सा आहे इसका बड़चा यहाँ तक के उससे जुदा हो गया।
- 1:55:58जोधा हो हो गया, जोधा हो गया अगर तुमने ऐसा किया तो इस जीबन मरण के
- 1:56:12चक्कर में फंसे रह जाओगे। अब ये मौका है।
- 1:56:19आखिरी मौका अगर गुरु ने गाणा उठा लिया है तो तुम अपनी सहनशक्ति को
- 1:56:28बढ़ाओ, तैयार रहो। अब तुम्हारी आखिरी मान्यता तोड़ने
- 1:56:37को चला सौभाग्य का वो दिन आया जब तुम भाग्यवान हो जाओगे और तुम्हें
- 1:56:44लोग भगवान कहेंगे। धन्यवाद।