Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Mar 26 - सांसारिक vs ईश्वरीय न्याय: एक बलात्कारी को उम्र कैद, दूसरे को सर्वोच्च सत्ता?
Transcript
- 0:14नरेंद्र प्रसाद बाबा जी प्राण यह कैसा संविधान है?
- 0:32के एक बलात्कारी को उम्रकैद। और एक बलात्कारी को देश की
- 0:43सर्वोच्च सत्ता यह कैसा संविधान है?
- 1:02आशाराम, राम रहीम जैसे लोग जेल में बंद हैं।
- 1:13आरोप हैं इनके ऊपर बलात्कारक। और एक व्यक्ति देश की सर्वोच्च
- 1:24सत्ता पर विराजमान है। आरोप उसके ऊपर भी है।
- 1:34उनके ही अपने नेता कह रहे हैं। की स्त्री को मानसिक सोने को
- 1:45जंजीरों में झगड़ा किया, उसको तंग परेशान किया गया।
- 1:50आखिर में वो सारा परिवार लापता है।
- 2:01यह कैसा संविधान है? इसमें संविधान का कोई कशोर नहीं
- 2:07होता। संविधान का रखवाला अगर सत्ता के
- 2:19साथ मिल जाए। संविधान का रखवाला पहरेदार
- 2:27चौकीदार पैरोकार अगर सत्ता के साथ मिल जाए तो इसमें कोई आश्चर्य की
- 2:36बात नहीं है। फिर संविधान की ऐसी ही व्याख्या
- 2:39होगी। संविधान गलती नहीं।
- 2:45संविधान को क्रियान्वित करने वाले गलत हैं।
- 2:56खैर, ये बातें मुझसे नहीं पूछनी चाहिए लेकिन फिर भी पूछ लिया है।
- 3:07क्योंकि मेरे लिए तो उसके हुक्म में ही होता है।
- 3:14मैं अगर राजनीति में बोलता हूँ तो तुम्हारे लिए बोलता हूँ।
- 3:21मेरे लिए तो चौबीसों घंटे वह आनंद बरस रहा है, मैं अगर उस आनंद को
- 3:30आपको पिलाना चाहता हूँ तो यह आपके दुख के कारण।
- 3:41इसमें मेरा ज़रा भी हित या अहित नहीं देखिये, ये तो बिल्कुल ठीक
- 3:57है। व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण भी करना
- 4:04चाहिए। यहीं कृष्ण भगवान ने कहा है
- 4:15अमानितुम दम्भेतुम हिंसा शांतिराजम आचार्य उपासनां
- 4:24सर्वचुम। सैरम आत्म पे न कर रहा लेकिन बात
- 4:35ये है कि नास्तिकता हमें शक्ति का दर्शन नहीं करवाने देते।
- 4:47तुम जानकर हैरान मत होना दुनिया में कुछ लोगों को छोड़कर सारी
- 5:02दुनिया नास्तिक है। इसकी असल वजह यह वह समझाया जा भी
- 5:15नहीं सकता। वह समझ में आता भी नहीं, वह
- 5:22शब्दों में नहीं आता। लेकिन फिर भी उसका रस ही इतना
- 5:31निराला है कि शांति चाहता है वो रस सभी पी जाए क्योंकि बिल्कुल
- 5:40मुफ्त मिलता है, उसमें लगता कुछ नहीं है।
- 5:46तुम्हें कोई दाम नहीं चुकाना पड़ता।
- 5:57अगर दाम चुकाना भी पड़ता है, तो वह नकली नकली दाम है।
- 6:09तुम्हारा स्व मेड अनुकार स्व निर्मित अनुकार।
- 6:24तुमने ठीक पूछा पत्र होना तो यही चाहते है कि प्रत्येक अपराधी को
- 6:36दंडित होना चाहिए और प्रत्येक। अच्छा कर्म करने वाले श्रेष्ठ
- 6:44पुरुष को पुरस्कृत होना चाहिए। तो मैं तुमसे पूछता हूँ पुत्र ऐसा
- 6:55ही होता है अगर यहाँ से न्याय चूक जाता है।
- 7:02जो कि अक्सर चूक जाता है तो एक दरगाह और भी है जिसके लिए मैं तुम
- 7:12सब को बोलता हूँ कि तुम नाश्ते हो।
- 7:21अगर तुम्हें वो ही देख जाए तो तुम्हारे भीतर अभेद दिया जाए।
- 7:31तुम उसके नियम, कायदे, कानून सब जान जाओ उसके घर में कोई।
- 7:39वेद नहीं होते पार्शल एक के लिए जीवन भर की जिर और एक के लिए
- 8:02राजगत्ती। एक हत्यारे के लिए मृत्यु दंड
- 8:16क्योंकि उसने अपराध के सारे सबूत मिटा दिए और एक हत्यारे को फांसी
- 8:25पर लटकाए। क्योंकि उसकी हत्या के सारे सुराग
- 8:29मिल गए। पहले दिन से मैं तुम्हें यही समझा
- 8:38रहा हूँ। यह सारा अस्तित्व एक संरक्षण में
- 8:46घुसा हुआ है। अगर कोई अपराधी यहाँ से बच जाता
- 8:54है तो सच्ची कचहरी एक है, ये हमारी तो कचहरियाँ नहीं है।
- 9:08अब मैंने सीबीआइ से कहा कि मैं 72 लोगों का आपको नार्को टेस्ट कर
- 9:13दिया। प्रार्थना करता हूँ और उन्हें पता
- 9:18है कि उनका नाम भी बीच में है। वो कैसे जानते थे व्यक्ति अगर
- 9:29पवित्र अगर कोई मुझे कहे तो मेरी नार्को टेस्ट?
- 9:34मैं कहूंगा बिलकुल करो, क्या दिक्कत है, लगाओ सोडियम पेंटा
- 9:47थिनल का इंजेक्शन पूछो क्या पूछते हो?
- 9:58अगर मैं कहता हूँ कि सीजाई साहब मैं 72 लोगों के नाम देता हूँ,
- 10:08उनका नर्क हो कराओ तो वो जानते हैं।
- 10:10उस 72 लोगों में उनका विनम है। और खुद के लिए अगर तुम पूरे
- 10:23ईमानदार हो इतनी ऊंची पथवी तक पहुंचे हो, तो निश्चित ही तुम कह
- 10:28सकते हो ठीक है करवाओ, लेकिन। इस सत्य से रोबरू कौन हो पायेगा
- 10:47जो सच्चा होगा, जो झूठा होगा? वह तो ना अपना नार्कोक रहेगा, ना
- 10:55दूसरों का करने रहेगा। यह प्रथा अगर एक बार चली गई तो
- 11:00फिर रुकने वाली है नहीं राजनीतिक लोगों के लिए।
- 11:14धार्मिक लोगों, धार्मिक, अध्यात्मिक, नीकरण, धार्मिक लोगों
- 11:21के लिए संसार पर जितना कष्ट आए, जितना क्लेश हों, जीतने युद्ध
- 11:31हों। जितनी महामारियां हैं और
- 11:36राजनीतिज्ञ क्या चाहता है? कुछ भी नहीं चाहता क्योंकि उसकी
- 11:45फंसी हुई जान इस बहाने से निकल जाती है।
- 11:51कुछ वक्त आराम से गुजर जाता है। इसलिए राजनीतिक लोग सदा ही चाहते
- 12:02हैं कि अस्थिरता बनी रहे क्योंकि कुछ अपवादों को छोड़कर हर
- 12:11राजनीतिक व्यक्ति गुनाहगार। असल में सच कहूं तो राजनीति में
- 12:21व्यक्ति शरण तभी लेता है जब वह अपराधी होता है।
- 12:30वो कहते हैं, कानून पर मेरा शिकंजा।
- 12:34व्यवस्था पर मेरा शिकंजा मैं इनके अधीन क्यों रहूँ?
- 12:39मैं चुनाव जीत रहा हूँ और सोच बिल्कुल सही है।
- 12:49सोच बिल्कुल सही है कि मैं आपसे वोट क्यों मांगू?
- 12:58मैं घर घर जाकर बस सिर्फ दिखावा करूँगा, रोड शो कर दूंगा, कुछ
- 13:06जलसा जुलूस निकाल लूँगा, कुछ जनता से मखाति हो जाऊंगा।
- 13:16लेकिन जब मैंने मुझे बताया कि मैंने ज्ञानचंद खरीद लिया तो कौन
- 13:23जहमत करेगा तुम्हारी मेहनत करने की, कौन जहमत करेगा विकास करने
- 13:30की? ये विकास क्यों नहीं होते?
- 13:37तुम रोज़ पीटते जाते हो? विकास कहाँ गया?
- 13:42विकास कहाँ गया? हुआ नहीं, अच्छे दिन आए नहीं,
- 13:46मैंने कहा भाई वो नहीं आएँगे, मत घूमो।
- 13:55क्योंकि विकास लाने वाले महापुरुष खुद गुनाहगारी के आरंभ से आएं
- 14:04कतलोगरत करके आए इसी के बचने के लिए है तो उन्होंने सुप्रीम।
- 14:14पावर होना चाहा है। अब तुम तो जानते नहीं पुत्र,
- 14:24लेकिन हम तो जानते हैं इस बात को मैं आपसे वो उठ के।
- 14:35जब मैंने ज्ञानचंद राजीवचंद खरीद लिया है तो मुझे पता है आज नहीं
- 14:46कल। जीत तो मैं जाऊंगा।
- 15:03एक व्यक्ति ने किसी गरीब व्यक्ति के पॉकेट मार लिया था, उतने ही
- 15:13पैसे थे बेचारे के पास। सोने की अंगूठियां थीं, कुछ सामान
- 15:18था, बेझबूझ के आया था और पर से किसी ने मार लिया।
- 15:30जीवन भर के एक माई थी उसके और ये पॉकेट मर बड़े चल बाज होते हैं।
- 15:44जिसने शांति से सारा नीतियों का निर्माण किया हो वो जानता है
- 15:51भागना कैसे कब भाग रहे हैं क्योंकि उसने बड़ी शांति से सारी
- 15:59शास्त्र चालू और तुम्हें पता नहीं है तुम अशांत हो गए, तुम्हारा पाप
- 16:06मार लिया। तुम एक दम से उथल पुथल हो गए तो
- 16:17ऐसा ही वो बेचारा उथल पुथल हो गया।
- 16:25उसकी आत्मा बड़ी दुखी हुई कि मैंने तो शादी करनी थी, बेटे की
- 16:34और भी कुछ काम थे, दवा बूटी या इलाज भी करना था।
- 16:40उसके लिए सारी जेवरात हुई थी। और यह किसी ने मेरा प्रॉफिट चोर
- 16:47दिया। तुम बड़ा दुखी हो जिसने पॉकेट
- 16:59मारा था। वह पक्का दुकानदार था।
- 17:08इस मसले में तो जिसका जेब कटा था वो गालियां निकालने लगा।
- 17:20आखिर में उसने शराब दे दी। जिसने मेरा पॉकेट मरा, उसके बाल
- 17:27बच्चे मर जाए तो बड़ी भीड़ कटी हाय तौबा मचा रहा था, चिल्ला रहा
- 17:39था जिसके जीवन भर की कमाई खत्म हो गई।
- 17:47लड़की की शादी बिमारी का इलाज वो कहते हैं जिसने पोकुट मारी उसके
- 17:59बाल बच्चे मर जाए तो जिसने पोकुट मारी थी।
- 18:07वो आगे की आग जला देते हैं, खुद बा खड़े रहते हैं, वो तो बटुआ
- 18:17मारा और आगे की आगे चला दिया, वो तो कहीं और चला गया, वो नहीं
- 18:21मिलेगा तो वह व्यक्ति से रहा नहीं है, वो कहता है।
- 18:33कि अगर खाते पीते मरेंगे तो साले कल नहीं आज मरे हैं।
- 18:41अरे खाते पीते भी कोई मरा करता है, चोर ऐसे पकड़े जाते हैं।
- 18:51अब उसकी तलाशी ले लो, कुछ नहीं मिलेगा, नहीं तो बड़े शांति से
- 18:58शालीनता से शांत दिमाग से यह सारी रचना गढ़ी थी।
- 19:08वो कहते हैं, अगर खाते पीते मरते हैं तो मर जाना, मैं भूखे नहीं
- 19:14मरने दूंगा। तो पुत्र मैं सदा से ही करता हूँ।
- 19:30राजनीति में सिर्फ वो ही व्यक्ति जाएंगे जो मात्र अपराधी हो गए।
- 19:45किसी। न किसी अपराध की भावना से चिंतित
- 19:50हो गए। शुद्ध, स्वच्छ, ईमानदार व्यक्ति,
- 19:57राजनीति में जतन। क्योंकि ईमानदारी का आनंद ही इतना
- 20:03है कि राजनीति का हुक्म करना उसको अच्छा नहीं लगता।
- 20:13आनंद, पीए या व्यवस्था को मैनेज करे, हुक्म चलाए।
- 20:22नहीं, वह तो आनंद बिहेगा, बशर्ते कि उसे आनंद मिल गया है एक बात
- 20:35ध्यान से सुन लेना। सच्चा संत, कवि राजनीति में मार्ग
- 20:46दिखायेगा जैसे पुरातन कार्य में जब राजाओं पर भीड़ आ जाती।
- 20:58तो अपने गुरुओं के पास जाते थे गुरूजी अकाल पड़ गया ये मुसीबत आ
- 21:06गई रास्ते में तो वो राय दे देते ऐसा कर लो पुत्र ठीक हो जाएगा।
- 21:16भगवान राम, भगवान कृष्ण जैसे लोग ऐसी आपातकाल में अपने गुरुओं के
- 21:23पास सजाते रहे। वह राजनीति में खुद नहीं आएगा, वो
- 21:31दा नहीं लेगा। और अगर कोई राजनीति में आ गया, वह
- 21:39अभी पहुंचा नहीं। समझा पहुंचने का मतलब उसने वह
- 21:45आनंद का रस पिया और यह बात उसके दिनचर्या में दिखाई पड़ेगी।
- 21:54स्पष्टता। वह कोई दिखावा नहीं करेगा, वह कोई
- 22:03एक्टिंग सूट नहीं करेगा, वह आपको धोखा नहीं देगा, वो कोई फ़िल्म
- 22:11नहीं बनाएगा। वह कोई भांड नहीं खरीदेगा।
- 22:20भांड समझते हो? ये झूठा प्रचार करके पैसे से
- 22:29बिकने वाली वैश्य या वैश्य पुरुष भी होते है।
- 22:35जो पैसे से बिक जाए, जो पैसे से बिक जाए वह है वैश्य।
- 22:43मैंने पहले भी कहा था कोई पैसे से न्याय भेज देता है।
- 22:52और न्यायपालिका है, कोई पैसे से जमीर बेचता है, सत्य के बजाय झूठ
- 23:08बोलता है, जो जानता नहीं वो बोलता है।
- 23:14क्योंकि उसको वह वह जानता, कुछ नहीं।
- 23:21वह टेप रिकॉर्डर की तरह उसके भीतर जो भर दिया गया स्विच ऑन करते ही
- 23:26वह बोलना शुरू कर देगा उनकी अपनी कोई जमीर नहीं।
- 23:31जिंदा जमीरे क्रांति किया करते हैं, भ्रांति पैदा नहीं किया करते
- 23:42हैं, जिंदा जमीरे बल्कि दान किया करते हैं, समझौते नहीं किया करते।
- 23:54जिंता जमी रे समझौते करके पेंशन नहीं लिया करते, ₹60 महीने के
- 24:06देखिए, देश की आजादी के लिए। ₹60 ज्यादा होती हैं।
- 24:12क्या देश की आजादी कम कीमत रखती है ₹60 से, लेकिन ऐसे दुष्ट होते
- 24:30हैं। हे भी दात तेरी दाता हे प्रभु यह
- 24:37भी तेरी दात राजनीतिज्ञ कभी शांति नहीं चाहता, लेकिन कुछ अपवाद होते
- 24:52हैं। जैसे मैं सदा ही कहा करता हूँ,
- 24:57लालबहादुर शास्त्र या वो जिंदा जमीरें जिन्हें 250 साल की
- 25:06गुलामियां। सही जलियांवाला बात का गांठ था और
- 25:17मैंने क्यों कहा कि ज्यादा वक्त एक राजा को नहीं गद्दी पर बिठाना
- 25:23चाहिए? क्योंकि फिर उसे यह भ्रांति हो
- 25:27जाती है। भ्रांति ही तो है।
- 25:31कि यह तुम मेरा है। ज्यादा देर तक अगर आप किसी को
- 25:38मकान दुकान कराए फिर दे दोगे तो याद रखना आपको अदालतों की ठोकरें
- 25:44खानी पड़ेगी, वह छोड़ेगा नहीं, वह कहेगा तुम कौन?
- 25:52पूछ लो कब से तो मैं बैठा हूँ जाओ जो होता है कर जिन्दा जमीरे
- 26:09क्रांति क्या करती हैं जिन्दा जमीरे बरिदान दिया करते हैं
- 26:13समझौते नहीं क्या करती? देश के लिए कोई भी कीमत कम है और
- 26:25मुझे हैरानी होती है जो वही लोग नमामि सदा वत्सलय मात्र पहुंचे।
- 26:40बस फोका फोका नमन है तुझे फोका फोका नमन है तुझे हम देना कुछ
- 26:51जानते नहीं लेना जानते है। इसलिए मैंने पुत्र आपसे कहा आज
- 27:02नहीं कल हम चले जाएंगे, चले जाएंगे यह कोई हमको चला देगा
- 27:15लेकिन मेरी एक बात को याद रखा है। सच्चा देशभक्त मैं कोई किताब पढ़
- 27:26रहा उस अर्थ नहीं लिखा कि अगर महात्मा गाँधी कहीं वापस आ जाए।
- 27:36तो जीस देश के लिए उन्होंने 1,00,000 किलोमीटर पैदल चले अपनी
- 27:42बैरिस्टर की डिग्री ठुकराई। पिता दीवान थे, दादा दीवान थे, घर
- 27:48बार छोड़ा पुत्रपुत्रादि छोड़े अपनी धर्मपत्नी को साथ लेके जेलों
- 27:54को भुगते रहे। वह अपने देश की दुर्दशा देख कर
- 28:00माथे पर हाथ मरेंगे और उसने जब मैंने वह पुस्तक पढ़ी, मैंने माथे
- 28:06पर हाथ मारा किंतु कितना दूर अनदेशी व्यक्ति था।
- 28:14कि इन लोगों के लिए हमने अगर भगत सिंह आज आ जाए, गाँधी तो
- 28:22अहिंसावादी थे भगत सिंह आ जाए तो तुम्हारे चीर चीर के टुकड़े कर
- 28:29देंगे। लेकिन सच्चा देशभक्त अगरभक्ति
- 28:41सीखनी जापानियों से सिखों। तेरे दान आयें।
- 29:05अन्हमा को सलाम, जुबा। को।
- 29:23जीस प्यार तेरा नाम तेरे को सलाह चुननों में उस जुबां को
- 29:54जीस दिल कुरवा है मेरे प्यारे वतन ए
- 30:30मेरे बिछुड़े चमन। तू जूपे दिल कोरबा।
- 30:45सच्चा देशभक्तों का हृदय इस मातृभूमि के लिए न्योछावर होने
- 31:01में। एक क्षण की देरी भी नहीं कर सकता।
- 31:09माफीनामा मांगना कायरो का काम है। तुम कितना ही वीरों की उपाधि दे
- 31:17दो, इतिहास कभी भुलाया नहीं जा सकता।
- 31:27तुम्हारी सभी कायरों को वीर कहने वालों की छवि ऐसे कृत्य करके तुम
- 31:38अपनी ही छवि को धूमिल कर लोग समझ जाएंगे।
- 31:45यह दिखा विभाजी और जो व्यक्ति अपने बुद्धि के तल से अपने
- 31:56अंतःस्तर तक गया है, उससे बड़ा साइकोलॉजी स्टोर कोई नहीं होता।
- 32:03बड़ी शांति से गया वो। मेरे बच्चों एक बात को हर्धन में
- 32:14बसा लेना यूं ही कोई किसी का अंत भक्त हुआ नहीं करता।
- 32:26इसको सर्कल में देके इसको हृदय के अंदर रख लो, कुछ तो मजबूरियां
- 32:37रहीं होंगी, यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता।
- 32:46अगर कोई किसी का अंत भक्त है, मंदबुद्धि है तो कुछ मत बोलिए।
- 32:57या तो उसे भेद दिखाया गया या उसे लोभ दिखाया गया।
- 33:03तीसरी कोई बात ही नहीं। बाकी तुम्हारे मुखौटे हैं, बाकी
- 33:15तुम्हारे लेबल हैं, तुम्हें अपने माथे पर छिपा रही हूँ।
- 33:24जैसे ही तुम कायरों को वीर का खिताब देना शुरू करोगे और इतिहास
- 33:31को पढ़ने वाले इतिहास पढ़ेंगे और उनकी।
- 33:34कैराना हरकतों को देखेंगे कैसे? फ्रांस के अंदर टॉयलेट से कूद गए
- 33:40वो जात समुद्र के बीच में लेकिन पकड़ लिए गए।
- 33:49यह वीरों का स्वभाव नहीं होता। वीर कभी ऐसे भागा नहीं करते, मुझे
- 34:00बहुत लोग कह देते हैं गॉड से बड़ा वीर था मैं निकल गॉड से वीर तब
- 34:06होता अगर बाहर मिलिट्री ना हो। बाहर 350 लोग मिलिट्री के खड़े थे
- 34:18और धमाकों को सुनकर ज्यादा लड़ हो गए थे और चारों तरफ से उसे भागने
- 34:24कौन देता है उसे बताता हूँ। क्योंकि वह दीवार फांदकर आया था।
- 34:37यह वीरता की निशानी नहीं है या कायरता की निशानी है, जैसे सावरकर
- 34:47ने किया। अगर मौका मिल जाता तो वह भाग
- 34:50जाता। सावरकर को मौका मिला।
- 34:55तो वह कूद गया, टॉयलेट में से कूद गया और गॉड से कोई भी मौका मिल
- 35:02जाता है, वो कूद जाता है, भाग जाता है तो तुम वीरों की परिभाषा
- 35:11बदल लेते हो, हमें कोई आपत्ति नहीं।
- 35:19लेकिन परिभाषाएं तो सत्य में वही हुआ करती हैं जो हुआ करती हैं।
- 35:29तुम्हारे बदलने से कुछ भी तो नहीं होता।
- 35:38तो राजनीति में जो चला गया अप वादों को छोड़कर कुछ अप वाद मैं
- 35:45फिर बोलेंगे लाल बहादुर शास्त्र गरीब घर में जन्मे गरीब थे।
- 35:56प्रधानमंत्री बना दिया गया लेकिन गरीबी में ही जीए गरीबी में ही
- 36:04मरे कर्जदार थे जब वो चले। अब्दुल कलाम हमारे राष्ट्रपति।
- 36:19इन लोगों की मिसाल ये राजनीति में आई, लेकिन यह सिर्फ अपवाद है।
- 36:34अपवादों से नियम तय नहीं होते। यह हर कोई कोई भूल चूक से आ जाता
- 36:43है और खेती दे रहा है। 18 महीने रहे तो गोड़ से भाग नहीं
- 36:57पाया इसलिए नहीं भाग संवर कर भाग गया क्योंकि भाग सकता था।
- 37:02बाद में भी पकड़ा गया। उसे तुम लाख सड़कों के नाम बदल
- 37:09लो, लाख प्रधानमंत्री निवास के नाम बदलो तीर्थ रख लो, कोई फर्क
- 37:21नहीं पड़ता। लेकिन बात तो तय होती है।
- 37:27कर्मों से नामों से कभी बात तय होती है, बात तय होती है कर्मों
- 37:35से जिसके भीतर मातृभूमि की पीड़ा न हो।
- 37:44मेरी माता गुलामी की जिंजीरियों में जकली हुई है और मेरे भाई,
- 37:51बहन, मेरे पुत्र, पुत्र आदि मेरे माता पिता जुल्म का शिकार हो रहे
- 37:58हैं। फिर भी अगर तुम्हारी आंतों में
- 38:08बलिदान का जज्बा न आया तो तुम कायर हो, तुम सबर करो।
- 38:14मैंने कायरों का नाम ही सबर कर रखा है।
- 38:19मैं दर्दनों का बाके बैठा, मैं दर्दनों का बाके बैठा, रब ना रख
- 38:28देता, बीड़ा का तुम्हारे नाम बदलने से कुछ नहीं होता।
- 38:40फिर तो प्रत्येक व्यक्ति अपने बच्चे का नाम श्री कृष्ण श्री राम
- 38:47रास्ते का लेकिन वैसे ही मर्यादा थोड़ा ही होंगे।
- 38:54वैसे धीर अरण धीर थोड़ी होंगे वैसे ही आनंदित थोड़ी होंगे।
- 38:59नाम रखने से कुछ होता है क्या? वह तो ऊपर की पॉलिश है अगर
- 39:13तुम्हारे भीतर गुलामी की आग? ने तुम्हें चड़पाया नहीं तो तुम
- 39:23मातृभूमि की बात करने के योग्य ही नहीं हैं।
- 39:29तुमने मातृभूमि की बेड़ियों को स्वयं की आत्मा की बेड़ियां जब तक
- 39:35जाना नहीं है, तब तक तुम बलिदान नहीं कर सकोगे।
- 39:40बलिदान मातृभूमि तुम्हारा मांगती है, औरों का नहीं।
- 39:53तेरे आए। उन हवा को सलाम, तेरे को सलाम चूम
- 40:26लूँ मैं उस जुबां को सिर्फ जैसे।
- 40:45जों पर उसका नाम आ जाता है उसको चूमने का मन करता है।
- 40:54मेरा भाई मुझसे एक बात कहा करता था पहले न्यूयॉर्क में था, फिर
- 41:01इंडियाना सिटी में चला गया, मुझे कहा करता था भाई अपनी मातृभूमि
- 41:14ऐसी होती है। कि अगर यहाँ का कोई कुत्ता भी
- 41:22वहाँ चला जाएगा, उसको भी हम गले लगाते हैं, चूमते हैं, पुच गाते
- 41:28हैं, खाना खिलाते हैं, आँखों से आंसू बहते हैं।
- 41:35यह मेरे देश का है, यह मेरी मातृभूमि का है।
- 41:42माँ का दिल बन से लग। जाता है तू माँ का?
- 41:59दिल बन के कभी सीने से। लग जाता है तू और कभी।
- 42:13नन्ही सी बेटी। बन गया दाता है तू चित्तना याद
- 42:27आता है मुझको। इतना तड़पाता है तू तुझ
- 42:59मेरी शान है मेरे प्यारे वतन। हे मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल
- 43:19कुरबा। राजनीति गलोक।
- 43:34पापी होते हैं, दुष्ट होते हैं, कहते मूर्ख मल पख खा यह मूर्ख लोग
- 43:54गंदा खाना खाते हैं। अभी कल ही मुझे ने कहा कि हरदीप
- 44:05पुरी की लड़की ने 10,00,00,000 का माप जमा का है, किस लिए?
- 44:17मेरे बाप की बेइज्जती हो गयी है। मैंने कहा बेइज्जती तो तो होते ही
- 44:25अगर ने तारा हो जाता पुत्रे तू मेरी भी बच्ची है?
- 44:33मैंने नार्को की मांग की है और बीच में हरदीप सिंह पुरी का नाम
- 44:36सबसे ऊपर है। अग्रगणी।
- 44:47अगर इतना दन है तो 10,00,00,000 का ये माल तो ₹5 छः आने का है।
- 44:53विज्ञान के हिसाब से कितना कैल्शियम कितना फास्फोरस, कितना
- 44:59झेंक कितना पेटैशियम, कितना कैल्शियम, ये सारा कितना है?
- 45:04₹5 छः आने का माल है। और 10,00,00,000 का कोई बात नहीं
- 45:12दे देंगे। तुम पुत्री 100,00,00,000 भी
- 45:17मांगे तो दे देंगे। मुझे पता है आज का ज़माना दिखावे
- 45:30का ज़माना है। क्या तुम समिति हो?
- 45:34क्या इन बातों के कहने से कोर्ट में जाकर ये फ्री देने से या
- 45:43कोर्ट में जाकर एक? एप्लिकेशन देने से तुम्हारा पिता
- 45:50इस दाग से धुल जाएगा। नहीं दाग से धुलेगा?
- 46:00जब सर्फ़ एक्सेल में निखरेगा। जिद्दी से जिद्दी दागों को भी दो
- 46:09डांटता है तो पुत्रे आओ तुम भी आ जाओ, तुम्हारा भी नाम है बीच में
- 46:18हाँ बिलकुल तुम्हारा भी नाम है। और तुम जिसकी सीजेआई की अदालत में
- 46:35तुम दरखास्त, डालोगी या डालती है उसका भी नाम है कुछ में।
- 46:43मैं इतना बेखौफ़ क्यों हूँ? क्योंकि आई ऐम कैनफर्न 100%
- 47:00कन्फर्म हूँ। मैं तुमने पुत्री मेरे पिछले
- 47:05लेक्चर सुने नहीं। मैं तीन जगह से त्याग की बात करता
- 47:11हूँ और सिग्नल मिलने से हरा सिग्नल मिलने से फिर मैं बोला
- 47:18करता हूँ अन्यथा लब्शीय रखता हूँ एक जुबां खुलती है।
- 47:26लब खुलेंगे तो फिर झूठ नहीं है फिर वो सच ही निकलेगा तो तुम
- 47:39कोर्ट में तो डाल दो कोई बात नहीं।
- 47:42वो तो तुम्हारी संवैधानिक प्रक्रिया है, उसको भी चलने तो
- 47:49थोड़ा मेरी तरफ ख्याल करो। राजनीतिज्ञ भी तुम्हारा ध्यान
- 47:58भटकाते हैं, मैं भी तुम्हारा ध्यान भटकाता हूँ, थोड़ा सच्चाई
- 48:03की तरफ आ जाओ। राजनीतिज्ञ कहते हैं लॉकडाउन करना
- 48:08पड़ेगा। राजनीतिज्ञ कहते हैं यह ईरान हमें
- 48:15तेल नहीं दे रहा, मैं कहता हूँ फिर विदेश नीती फेल किसके है?
- 48:22गुट नरपेक्ष आंदोलन यक दम सापेक्ष आंदोलन कैसे बन गया?
- 48:34क्या कारण है? जीता हुआ युद्ध?
- 48:4526 लोगों को मारकर तुम्हारे ही अपने चार बंदे और तुम ड्रामेबाजी
- 48:54करते हो। हमने नरेंद्र मोदी को सुना।
- 49:04ओके तुमने अपने नाम पर वोट मांगा और जिसने वोट डाली वो तुम्हारा
- 49:13नुमाइंदा है। हमारी निगाह में दोनों जिम्मेदार।
- 49:32देश को धमकाना छोड़ो, कारौना में भी तुमने यही किया था।
- 49:41अगर सत्य दिल में आग थी तो देश का प्रधान सेवक।
- 49:50गंगा में बहती हुई लाशें देखेगा या पश्चिमी बंगाल में होता हुआ
- 49:55चुनाव देखेगा? सच्चा देशभक्त चुनाव हारना मंजूर
- 50:02कर लेगा। गंगा में बहती हुई लाशों का जीवन
- 50:08कैसे बचाया जाए? लाशें होने से कैसे बचाया जाए और
- 50:13अगर वो मर गए हैं तो उसे सह सम्मान विदाई कैसे दी जाए?
- 50:17तुम तो सह सम्मान विदाई भी नहीं दे पाते।
- 50:21शर्म की बात है देश का वह। शानदार व्यक्तित्व जिसने देश को
- 50:33बड़ी कठिनतम परिस्थितियों में वायरस 2008 में जब वर्ल्डवाइड
- 50:40मंदिर डॉ। मनमोहन सिंह।
- 50:46उसको तुमने दफन नहीं करने दिया उसको तुमने सिंपल जैसे आम लोगों
- 50:51को दफन किया दहन कर दिया गया। ऐसी तो तुम्हारी मनोहर थी, तुम मर
- 51:03कर भी दुश्मनी नहीं छोड़ते। और राजनीतिक बिल्कुल ऐसे ही हुआ
- 51:09करते हैं। सारे गुण और राजनीतिज्ञ के हैं,
- 51:15यही बताए हुए हैं। उस मूर्ख के चणक में उसे मूर्ख
- 51:21कहा करते हैं क्योंकि राजनीतिक व्यक्ति।
- 51:28मूर्खता का जीता जागता उदाहरण हुआ करता है।
- 51:33चाणक्य की बातों में मत आ जाना अगर नीती ही चलनी है तो विदुर
- 51:40नीती से चलो चाणक्य नीती से मत चलो।
- 51:47बिदुल का असर क्या हुआ? तेख और चाणक्य का असर क्या हुआ?
- 51:54छः महीने तक अध जली अवस्था में सुबन्धुओं ने उसकी कुटिया के ऊपर
- 52:03मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी।
- 52:05आधा जल गया, आधा बच गया ना मरा, ना जिया और आखिरी वक्त में माफी
- 52:16मांगता रहा। परमात्मा से अपने गुनाहों का
- 52:20बश्ताप करता रहा। यद में कोई नहीं सुन रहा था।
- 52:28तथापि में तो सब जगह मौजूद था। एम प्रेज़ेंट अबरवर ओमनी
- 52:38प्रेज़ेंट मैं सुन रहा था वो क्या कहता है तुम उस चाणक्य के शिष्य
- 52:47बनकर? चाणक्य नीतियों के बरसात मोहरे
- 52:50बसते हैं। क्या मैं जानता नहीं जानता हूँ,
- 52:57लेकिन चुप हूँ क्यों क्योंकि एक बहुत बड़ा।
- 53:06अंतिम सत्य मैं जानता हूँ के भोगती इन्द्रियां हैं जीस दिन तुम
- 53:18भी जान गए उस दिन ये सारी आपदा की छूट जाएगी।
- 53:25जीस दिन तुमने नगण आँखों से देख लिया अनुभव अनुभव किताबों से किसी
- 53:31आचार्यों को सुनकर किसी सर को सुनकर विकास दिव्य कृति को अजामल
- 53:38की कथाएं कहते हुए उनसे कह दो अपनी लिमिट्स में रहो।
- 53:46तुम हमें सूचनाएं महिया, करो ज्ञान नहीं चाहिए आधा अधूरा ज्ञान
- 53:56नीम हकीम खतरा ए जान इनको चाहिए। ये दिमाग से काम लेने वाले आचार
- 54:10बस जारवा की तरह मार्कस की तरह नीचे की तरह एक्सप्लेन किया, कबीर
- 54:20की तरह स्टेम्प मत लगा देना, तुम झूठे कहलाओ।
- 54:26स्टाम्प लगाने वाले कबीर तो कभी कभी हुआ करते हैं और हुआ करते
- 54:32हैं। जो दिन भर रात आनंद की उस सराफ को
- 54:46मय को। पीते हैं मदहोशी के आलम में कहीं
- 54:51भटकते नहीं, कोई वासन नहीं होती उनके तुम जिन वासना से त्रस्त हो
- 55:04वो उन्हें ज़रा भी। ठेस नहीं पहुंचाती।
- 55:11उनकी आँच मुझ तक नहीं पहुंचती, सफ़र पे रह जाती जिससे पता चल
- 55:24गया। वास्तव में हूँ, एम आर मैं हूँ और
- 55:36यही तुम्हारी अंतिम टारगेट है लक्ष्य।
- 55:43अपने आप को जान लेना, पुनः प्राप्त कर लेना यद्यपि तुम कभी
- 55:49खोये तो नहीं थे भूले थे और भूले थे तो स्मरण करना होता है और तुम
- 55:59ऐसे बुधु। तुम सुमर्ण करने लगते हो तुमने
- 56:07कहा गया था कि स्मरण करो री मेंबर क्या ढूंढ रहे हो री मेंबर?
- 56:21और तुम वहगुरु वहगुरु करना शुरू कर देते तुम अल्लाह हो अकबर तुम
- 56:32शिव भोले, शिव भोले जय विष्णु, जय ब्रह्मा।
- 56:37जय दुर्गा जा पार्वती ऐसी बकवास करनी शुरू कर देते है।
- 56:51नाम को दोहराना स्मरण नहीं होता। स्मरण होता है मैं तुम्हें याद
- 56:58कहूँ कि याद करके बताओ तुमने कल सुबह क्या खाया ध्यान से सुन ना
- 57:12मेरी बात को मैं तुमसे कहूं, याद करके बताओ कि तुमने कल सुबह क्या
- 57:18खाया था? सब्जी क्या थी नाश्ता में या लंच
- 57:29में? तुम एक घड़ी सोचोगे, याद करोगे
- 57:35समस्ती में जाओगे। फिर झट से बता दोगे कि मैंने ये
- 57:43सब्जी खाई थी, क्योंकि याद आ गई तो खाई थी तो याद आ गई ना खाई
- 57:52होती तो तुम कह देते हो। मैंने खाई ही नहीं थी, यह भी एक
- 58:00याद है तुमसे कहा गया संतों के द्वारा के स्मरण करो अपने आप का
- 58:11रिमेम्बर यूरसेल्फ़ नाम स्मरण नहीं करना है।
- 58:20अरे मेंबर यू आर सर्च अपने आपको याद करो भला कभी सोचा तुमने जिसकी
- 58:33सुगंधी तुमने कभी सोंची ही नहीं। नसा पूठों में जीसको, आपने सुगंधी
- 58:41ने आनंद न दिया हो, उसको तुम एक्सप्लेन कैसे करोगे?
- 58:52लेकिन यह है मूढ़ता विश्व व्यापी है।
- 58:57कोई गॉड कह रहा है कोई अल्लाह कह रहा है कोई सतनाम वह गुरु कह रहा
- 59:02है कोई राम रहीम कह रहा है कोई शिवशंकर विष्णु कह रहा है सबके
- 59:09अपने अपने थोपे हुए। मान्यताएँ देखा देखा तुमने कुछ
- 59:19नहीं क्या खाक स्मरण करोगे? स्मरण हमेशा उस चीज़ का होता है
- 59:27जो तुमने पहले देखा परमात्मा तुमने देखा है भूल गए?
- 59:42आज यही मैं तुमसे कहने वाला था चर्चा चाहिए मैंने कहीं से शुरू
- 59:49किया तुमने परमात्मा को देखा ही नहीं तुमने परमात्मा को जिया भी
- 1:00:01है। तुमने परमात्मा को जिया ही नहीं,
- 1:00:07तुमने परमात्मा को पिया भी है, तुमने परमात्मा को पिया ही नहीं,
- 1:00:14तुम परमात्मा को हो अभिन्न अंग हो।
- 1:00:21तुम उसका भिन्न अंग ही नहीं वर्ण तुम तुम ही परमात्मा है।
- 1:00:28अहम् ब्रह्मस्म तत्वमसी शित केत। एको अहम् बहु श्याम किसी एक ने
- 1:00:44कहा था मैं बहुत हो जाऊं याद करो बहु एक कौन है।
- 1:00:59लेकिन तुम भूल गए एक कभी देखा था कभी जाना था, कभी उसके भीतर
- 1:01:09अटकेलियां खाईं थीं, कभी गोते लगाए थे, कभी उस रसा नन्द को पीया
- 1:01:13था लेकिन आज? हम भूल गए और फिर ये व्यापारी लोग
- 1:01:22कहते हैं कि याद करो सुमरण करो, किसको करें?
- 1:01:26फिर कोई भी नाम बता देते हैं कद दो करेला कुछ भी बनाते हो इसको
- 1:01:34याद करते रहो परमात्मा मिल जाएगा। क्या खाक मिलेगा?
- 1:01:40कभी? कद्दू करेला कहने से परमात्मा
- 1:01:42मिला करता है। यही तो चालबाजियां हैं जादूगरी,
- 1:01:50यही तो इवेंट्स हैं पूर्व नियोजित।
- 1:01:57कि हमने जिसे प्रधानमंत्री चुना है, मनेजमेंट के लिए वह गंगा में
- 1:02:03बहती हुई लाशों को नहीं देखता। वह ये नहीं देखता कि मुझे असाधारण
- 1:02:10परिस्थितियों में विकट परिस्थितियों में प्रलंककारी
- 1:02:17परिस्थितियों में मैनेज करने के लिए चुना गया था।
- 1:02:24वोट मांगने के लिए फिर अगर तुम जो शुरू से करते रहे हो।
- 1:02:34प्रचार पहले आरएसएस का प्रचार किया, अब तुम पार्टी का प्रचार कर
- 1:02:42रहे हो। हम तो अपनी मस्ती में लगे बस्ती
- 1:02:49में। तभी तो इतने लोग करुणा में मारे
- 1:02:56जाते हैं, मारे जाते, कोई बात नहीं, लेकिन तुम कोई उपाय तो
- 1:03:06करते। एक व्यक्ति अपना ध्यान एक तरफ ही
- 1:03:11रख पाता है। या तो वोट मांगोगे या ऑक्सीजन का
- 1:03:18इंतजाम करोगे, तुमने क्या किया? देखिए हम अंधे तो नहीं हैं, कल को
- 1:03:27पता नहीं क्या हो जाए। हमने ये सारा वाकया तो देखा गंगा
- 1:03:35के भीतर बहती हुई लाश और तुम झूठ पे झूठ बोले जा रहे दोनों दृश्य
- 1:03:44भरी आँखों के सामने। याद हैं क्योंकि मैंने देखी हैं
- 1:03:50इसी तरह परमात्मा है। परमात्मा तुमने कभी देखा है और
- 1:03:58देखा है तो तुम्हें याद आ जाए थोड़ा।
- 1:04:05याद को प्रभावशाली ढंग से कायते नियम से उसको खंगालना होगा।
- 1:04:15वह याद आएगा कैसे नाम शरण से याद नहीं आता।
- 1:04:26तुम्हे मैनेज करना चाहिए था दवाइयाँ, ऑक्सीजन, ऑक्सीजन जिसके
- 1:04:34बिना 12 मिनट से ज्यादा व्यक्ति जीवित नहीं रह सकते।
- 1:04:39ज्यादा कहती है मैंने बहुत ज्यादा कहती है, मुझे पता है ब्रेन डेड
- 1:04:42हो जाएगा। और तुम क्या कर रहे थे?
- 1:04:51दे दे ओह दे दे। अगर इतना ही शोक था प्रचार का तो
- 1:05:03फिर प्रचारक ही बने रहते। देश को गुमराह काहे किया?
- 1:05:13अगर एबस्टीन के साथ बातचीत करने का इतना ही मज़ा था तो अपनी
- 1:05:21धर्मपत्नी को छोड़कर भागे क्यों? फिर उसको यक तरफ़ा कर देते हैं,
- 1:05:28ना खुदा ही मेला ना बसा है। सोनम ना इधर।
- 1:05:33ना उतरते रहे उसे कह देते हम चल वह बेचारी इंतजार की उमारी आज भी
- 1:05:50उम्मीद लगाए बैठे कि बस? मुझे पुकार हम आ जाएंगे।
- 1:06:18तुम ना जाने कैसे जहाँ खोवे। तो न जाने किस यहाँ में खो गए हम
- 1:06:39भरी दुनिया तुम ना जाने किस यहाँ। में खो दुनिया जानती है और समझदार
- 1:07:02व्यक्ति। जो मंदबुद्धि नहीं है, वो जानता
- 1:07:06है तुम रोज़ क्यों जहाज उठा लेते हो।
- 1:07:08इजराइल के लिए रोज़ क्यों जहाज उठा लेते हो?
- 1:07:18अमेरिका ने अगर तुम्हारे ऊपर प्रतिबंध लगाया था तो किसी कारण
- 1:07:22से लगाया हो। अगर यही कुछ करने का शौक था तो
- 1:07:31भारत भूमि की नमन करने के योग्य तुम नहीं हो तुम्हारे मुँह के ऊपर
- 1:07:40थूक दिया जाए, तुम ऐसे योग्य हो। नमामि सदा वत्सले मातृभूमि नहीं,
- 1:07:49तुम कहने के योग्य नहीं तुम माँ भारती को प्रणाम करने के योग्य
- 1:07:59नहीं, क्योंकि इसके लिए तुमने कुछ नहीं किया झूठ बोलने के बाद।
- 1:08:12और प्रचार करने से क्या होता है? प्रचार करने से कुछ भी तो नहीं
- 1:08:19बदला करता। कौन बदल गया?
- 1:08:26पीएमए का नाम बदल दिया गया। सेवा तीर्थ रख लिया गया, लेकिन
- 1:08:30तीर्थ बन गया। क्या कुछ शर्म का हम उसी का अंश
- 1:08:42हैं तो याद करेंगे। और याद आएगा वे, लेकिन उसका एक
- 1:08:56कायदा कानून है उसमें चलना होगा। नीम करेले का नाम लेने से
- 1:09:06परमात्मा जाग नहीं आएगा, जो तुम्हें स्वयं हो, उसको स्वयं की
- 1:09:17तरह ही देख लेना, उसे आत्मबोध और परमात्मबोध।
- 1:09:26ये बोध हो जाए यह सूचना ही न बन के रह जाएं।
- 1:09:31तुम्हारी नेवरांज में वर्ण यह तुम्हारा प्रत्यक्षदर्शी अनुभव बन
- 1:09:37जाए। फिर आएगी हृदय में शांति, फिर
- 1:09:42आएगी त। सटिस्फैक्शन गोधन, गज धन वाज धन
- 1:09:56और सकल धनखान जब आवै संतोषजन जब तृप्ति का धन मिल जाता है।
- 1:10:08सब धन दूर असमान, फिर तुम एपस्टीन के आइसलैंड पे नहीं रहोगे तुम
- 1:10:18एपस्टीन का आइसलैंड छोड़ो, तुम सड़क पे नहीं।
- 1:10:26तुम छोड़ो, तुम्हारी ज़रा भी सब्जी को मशरूम को तुम उस मस्ती
- 1:10:36को ही पीना शुरू रखोगे। क्योंकि उसका नशा ऐसा है।
- 1:10:46नाम कुमारी नान का चड़े रहे दिन रात जने नशे जहाँ दे उत्तर चाँद
- 1:10:53पर भारत। बाकी तो सभी उतर जाते हैं।
- 1:11:00एक इसी खुमार को यह खुमार तुम्हें अपने रंग में रंग देगा, फिर कोई
- 1:11:11वासन नहीं बचेगी। फिर तुम लड़ोगे नहीं।
- 1:11:13वासन से मुझे रोज़ प्रश्न आता है। बाबा क्या करूँ?
- 1:11:17हार गया हूँ मैंने कहा तुम लड़ते हो जो लड़ेगा वो हारेगा, अपनी ही
- 1:11:29वासनाएँ हैं तुम्हारी उन वासनाओं में तुम्हारी अपनी ही ऊर्जा है।
- 1:11:35और लड़ने वाली भी तुम्हारी ही ऊर्जा है।
- 1:11:38अपनी ही ऊर्जा से लड़ोगे तो हार निश्चित है।
- 1:11:44जीत की कोई गुंजाइश नहीं है। उसे ही याद करना होता है जिसके
- 1:11:53तुम अंश हो। स्टेप वाइ स्टेप और वो मिलेगा
- 1:12:01तुम्हें तुम्हारे भीतर बाहर खेतों खलिहानों में, वणों में, कंधरावों
- 1:12:11में, हिमालयों में, ऋषिकेश में। बद्रीनाथ में केदारनाथ में वह
- 1:12:18नहीं मिलेगा। यह तो मूर्खों के बनाए हुए तीर्थ
- 1:12:24जिसने सच्चा तीर्थ नहीं पाया, वह किसी भी जगह को तीर्थ बना देता
- 1:12:29है। जैसे पीएमओ वास को आज सेवा तीर्थ
- 1:12:32बना दिया गया। तो कभी ये तीर्थ बनता बनता यही
- 1:12:38तीर्थ हो जाएगा। जीस तीर्थ में कभी राजनीति ग्रह
- 1:12:48करते थे, राजनीति की गोटियां बिछाया करते थे, ऐसे ही तुम्हारी
- 1:12:55तीर्थ। लेकिन वह तीर्थ तुमने अभी तक देखा
- 1:13:02नहीं और काश तुमने वो तीर्थ से देख लिया होता तो बाकी सब तीर्थ
- 1:13:09बेकार हो जाएंगे। उसके देखते ही पल भर में।
- 1:13:14पर आ जाएंगे, सब खत्म हो जाएगा, सब बनावटी चेहरे खाक हो जाएंगे।
- 1:13:23दूर दूरस्त हो जाएंगे, शुद्ध शुद्ध बची जाएगा, अशुद्ध सब बिखर
- 1:13:29जाएगा। तो राजनीतिक व्यक्ति के लिए
- 1:13:44पैनडेमिक आ जाए, जब कोई जंग लड़ जाए तो वह बड़ा सुखी रहेगा।
- 1:13:59वहीं नोबेल मांगने वाला शांति पुरस्कार नोबेल पाने के लिए
- 1:14:07प्रज्ञा चढ़ शांति की प्रज्ञा वहीं आज विश्व युद्ध पर उतारु?
- 1:14:21अब इन्हें क्या कहिएगा जनक एपस्टीन कांड के हर पन्ने पर इनका
- 1:14:29तीन बार ना और जनता कितनी समझदार है अमेरिका की?
- 1:14:40तो जनता चाहती है ना कि ऐसे कांड होते रहे।
- 1:14:47जनता का संघ है इन लोगों के साथ, अन्यथा इसको गले से पकड़ा होता और
- 1:14:55नीचे उतारा होता। और इतने लाखों लोग तुम इकट्ठे हुए
- 1:14:59थे 30,00,000 लोग इसको गले से पकड़ के बाहर निकाला होता, इसकी
- 1:15:05धुनाई की होती और इसको दिखाए होते वो सारे चरित्र ये देख तेरे
- 1:15:13कारनों में। फिर बात एक तरफ़ा हो जाती, फिर यह
- 1:15:23इतना विनाश नहीं होता तो बहाने है निरपराध ईरान वार्तालाप कर रहे हो
- 1:15:34तुम। जंग नहीं करने के लिए और तुमने
- 1:15:42बहाना बनाया वो ही भेड़िया बाला के डेला, तुमने मुझे गाली निकाली,
- 1:15:55नहीं तो तुम्हारी बाप ने निकाली होगी?
- 1:15:58बाप ने नहीं निकाली तुम्हारी माँ ने निकाली होगी लेकिन गाली तो
- 1:16:03निकाली है तो फिर उसको खा गया निगाहें कहीं पे निशाना कहीं पे
- 1:16:14तो तुमने ऐसे खींच लिया होगा बाहर।
- 1:16:1930,00,000 लोगों के आगे मिलिट्री क्या करेगी?
- 1:16:25मिलिट्री से हाथ जोड़ो, उससे पूछो कि आपकी माई बहन बेटी नहीं है
- 1:16:31क्या कि वो चुप हो जाते है? और इसको तुम पकड़ के जूरी के अंदर
- 1:16:44पेश करते हैं। ये देखो सारा और इसको दंड दो
- 1:16:53कानूनी व्यवस्था से मैं रक्तहीन क्रांति चाहता हूँ।
- 1:16:59लेकिन क्रांति चाहता हूँ तुम उसके अंश हो, जिससे बिछड़े
- 1:17:16हों, इसीलिए उसकी बार बार याद आती है तुम्हें सब कुछ भी मिल जाए,
- 1:17:26अभी मिला नहीं इसलिए पता नहीं। बुद्ध को सब कुछ मिल गया तो उसने
- 1:17:30घर बार छोड़ दिया और पक्का है कि जीस दिन तुम्हें सब कुछ मिल जाएगा
- 1:17:37जीसको भी सब कुछ मिल जाएगा, घर बार छोड़ देगा क्यों?
- 1:17:44क्योंकि वो नहीं मिला जिसके मिलने से तृप्ति आती।
- 1:17:49मैं कहता हूँ इस जन्म में सौभाग्य है तुम्हारे रात शराबी है, मौसम
- 1:18:00गनाबी वक्त भी है, गुरु भी है, तुम अपने भीतर प्रयास जगाओ।
- 1:18:11सिर्फ कमेंट करने से बदलाहटें नहीं हुआ करती हैं।
- 1:18:20कमेंट तो मूर्ख लोग किया करते हैं।
- 1:18:28अपने भीतर उतरा और पाओ उस बात शाहत को जो तुमने कभी खोई नहीं,
- 1:18:36जिसे सिर्फ बोले और रिमेम्बर करना है, उसे तुम उसको भूल गए हो।
- 1:18:46खोया वो जा नहीं सकता। स्वभाव कभी खोया जा सकता है, जो
- 1:18:51तुम खोती ही हो उसको खो ही नहीं सकते।
- 1:18:54कोई चारा नहीं तो उसको याद करना रेमेम्बेर याद कैसे होगा उसके पास
- 1:19:03जाके याद आएगा। वो कहाँ है बाहर नहीं है भीतर है
- 1:19:12फिर वहाँ कैसे जाए जाए। सारे वीडियो देखो अपने ही भीतर
- 1:19:19उतरना है, कुछ नहीं करना नथ्थिंग टु डू।
- 1:19:29अपने आप को रिलैक्स करके बैठ जाओ नसीब नहीं है।
- 1:19:37छोड़ दे सारी दुनिया। किसी।
- 1:19:43के लिए छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के
- 1:20:00लिए। तुम कहोगे अभी तो दफ्तर भी जाना
- 1:20:05है, अभी तो बच्चे छोटे हैं। प्यार से भी जरूर कई।
- 1:20:16काम है। प्यार सब कुछ।
- 1:20:22नहीं जिंदगी के छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए।
- 1:20:42लेकिन जहाँ तुमने जाना है उसके लिए दुनिया को छोड़ना नहीं होता।
- 1:20:48किसी ने गलत समझा दिया है, तुम्हें यह भी कोई सेवा तीर्थ
- 1:20:53सवालों ने समझा दिया होगा। कृष्ण सब भौंकते हैं और सबके बीच
- 1:21:05में बैठे रहते हैं सब भौंकते हुए, सबके बीच में बैठे रहना निर्लिप्त
- 1:21:13दबाव से। क्योंकि जिसके पास जाना है वह
- 1:21:20निर्ले पर है, भीतर मिलेगा जाकर कैसे भीतर जाना है?
- 1:21:26बाहर की चिपकाहटों को छोड़ दो। बी रिलैक्स टोटली रिलैक्स
- 1:21:32यूरसेल्फ अपने आपको। कंप्लीट्ली रिलैक्स कर दो अभी तुम
- 1:21:38अपने भीतर छलांग नहीं लगा पाए तो इसका सीधा अर्थ है के देर इस सम
- 1:21:46क्लिंगिनेस कुछ चिपकाहटें बाकी हैं अभी, अन्यथा तुम धर्म से धड़म
- 1:21:54से। अपने स्वभाव के भीतर घर जाते हैं,
- 1:21:57एक पर ही रहता है, मौसम गुलाबी है, रात शराबी है, वक्त भी है, उस
- 1:22:15स्थिति तक पहुंचा हुआ गुरु भी है। और गुरु घोषणाएं नहीं किया करता।
- 1:22:24गुरु मात्र मौजूद रहा करता है। कैटेलिटिक एजेंट की तरह करता
- 1:22:31वर्ता कुछ नहीं उसकी मौजूदगी ही केमिकल रिएक्शन्स को हैपनिंग होने
- 1:22:38में। कारण बनती है तो गुरु है कमी,
- 1:22:47कहाँ है कमी? तुम्हारी प्रयास में तुमने चाह
- 1:22:57नहीं तो पहुंचे। अगर सदा के लिए इन आफतों से
- 1:23:07चिंताओं से, चिंताओं से, दुखों से, कष्टों से, क्लेशों से,
- 1:23:13दुनिया के महू से सब विचारों से, सब विचारों से, सब विषयों से
- 1:23:22निजात चाहते हो? तो अब वेला है और इससे बढ़िया
- 1:23:27वेला है। पता नहीं फिर कब आए ना तुम्हीं
- 1:23:36अभी इसी वक्त का लाभ उठा बहुत जन्म बीते मेरे माधव ए जन्म
- 1:23:42तुम्हारे देखे। यह जन्म मेरे लेखे लगा दो।
- 1:23:49तुम जहाँ बैठे हो वहाँ बैठकर सिर्फ अपने भीतर उतर जाओ, कहीं
- 1:23:57नहीं जाना, न तीर्थ, न कोई राजनीति करनी।
- 1:24:04अपने दान उपार्जन करो, जिससे तुम अपने कर्ज फर्ज पूरे कर सको, पर
- 1:24:16महात्मा ने तुम्हें सवस्थ शरीर दिया है सवस्थ मन दिया है हाथ
- 1:24:21पांव ठीक हैं तुम्हारे काम करो। फिर तुम कहते हो रोजगार नहीं तो
- 1:24:27रोजगार देने वाली सरकार चुनी, यह तो नहीं देगी 12 सालों में जिससे
- 1:24:34कुछ नहीं हुआ मात्र लांछणों की जिसने कुछ कमाया नहीं, लांछन ही
- 1:24:40लांछन लगी और किते लांछन तुम लगवा पाओगे तुम खुद से भारत।
- 1:24:45भूमि पर जीसको रोज़ नमन करते हों, नमामि सदा वत्सले मातृभूमि तुम उस
- 1:24:54पर रहम नहीं कर सकते, तुम खुद से कुर्सी छोड़ दो हम हाथ जोड़कर
- 1:24:59विनती करते हैं मोदी जी छोड़ दो रहम कर दो मातृभूमि पर।
- 1:25:07नमन करना बंद करो, रहम करना शुरू करो तुम्हारे कारण ही सारा संकट
- 1:25:17तुम ही हो संकट का बुनियादी कारण। तुम और तुम्हारे संग जो लुटेरों
- 1:25:24की एक फौज है, इन सबको अलविदा कह दो और समझा दो कि अब तो मुल्क को
- 1:25:33अपनी रहम पर छोड़ दो, अब तो गन्ने की तरह सारा रूस जूस निकाल लिया
- 1:25:37है तुमने, अब तो कृपा करो। नमामि सदा वत्सरे मातृभूमि फिर
- 1:25:48माता अपने आपको मुक्त महसूस करेगी बहुत लहू पी लिया तुमने अच्छा
- 1:25:54अच्छा लहू पी लिया। इस भारत भूमि को अगर इस वक्त कोई
- 1:26:08सोने की चिड़िया बना सकता है तो वह सिर्फ नरेंद्र मोदी बना सकता
- 1:26:14है और उसकी कैबिनेट और आरएसएस और बीजेपी।
- 1:26:21इसके अलावा कोई व्यक्ति माँ भारती को सोने की चिड़िया नहीं बना
- 1:26:28सकती। कैसे मैं तुम्हें करवधू प्रार्थना
- 1:26:34करता हूँ तुम 80 पे दे देंगे केदारनाथ निकल जाओ।
- 1:26:41बद्रीनाथ निकल जाओ, तुम इस सेवा तीर्थ को छोड़ो, तुम उस तीर्थ पे
- 1:26:47निकल जाओ, सारा भारत वश तुम्हारा ऋणी रहेगा।
- 1:26:59तुम पीछा छोड़ो तुम ही चीचड़ हो और तुम जहाँ गए हो वहाँ बर्बादी,
- 1:27:10वो गणना की बात मैं अंकल सुन रहा, अब तुम इजरायल के पास गए
- 1:27:15नेस्तनाबुद हो गया तेल अभी। अब तुम ट्रंप के साथ दोस्ती
- 1:27:21निभाई, वो देखो बेचारा मारा मारा फुरा वो कहता है, हम तो जीत गए
- 1:27:27राय बहन, वह तुम ऐसे जीता जाता है क्या?
- 1:27:32अरे शब्दों से जीता जाता है। इसलिए युद्ध नहीं करेंगे हम।
- 1:27:42वो कहते हैं, हम तो हम तो तुम्हारी अकल ठिकाने करेंगे जो
- 1:27:49पेट की गहन जो गिर गई है वो ठीक करे, तुम रहम खाओ, मोदी जी रहम
- 1:27:56खाओ। राजनीतिक लोक संकट अगर परमात्मा
- 1:28:02का तो कभी कभी आता है पैनडेमिक लेकिन फिर जब ये देखते हैं कि
- 1:28:08हमारी सत्ता खतरे में है तो यह है इवेंट मनेजमेंट करके।
- 1:28:16पैनडेमिक खड़ा कर लेते हैं। यह इवेंट रिएक्शन है।
- 1:28:23ईरान ने कह दिया एम् प्रभु हमसे लड़ाई मत करो, हम गरीब आदमी हैं,
- 1:28:32मेहनत करते हैं। अपनी रोज़ी रोटी कमाते हो, तुम
- 1:28:37तुम्हारा क्या देते हो, लेकिन तुम नहीं माने नहीं तुम्हे बनाने नहीं
- 1:28:45देंगे अणु बम अयातुल्लाह। अली खोम नहीं कहते हैं कि इस्लाम
- 1:28:59में अणु बम बनाना हराम है। वो बात अलग पाकिस्तान ने बना लिया
- 1:29:06तो वे हराम हो गया तो किसी को क्या कहे फिर भी तुम नहीं मानना।
- 1:29:15फिर तुमने कहा नहीं तुम्हारे पास और तुमने सब कुछ बम घरा घरा के
- 1:29:20देख लिया कहीं कुछ नहीं मिला तुम कहते हो तुम्हारे पास समवर्धित
- 1:29:26यूरेनियम है 440 किलो। अयातुल्ला अली खान नहीं कहते हैं
- 1:29:32भाई वो तुम ले जाओ। हम जब अनुभव बनाएंगे नहीं, हम
- 1:29:37इससे सिर्फ ऊर्जा के संसाधन पैदा करेंगे।
- 1:29:40अब तुम्हें हमारी तरक्की नहीं मंजूर तो ये भी ले जाओ, लेकिन
- 1:29:45तुमने फिर भी उनके ऊपर हमला कर दिया।
- 1:29:49क्यों? कारण?