Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Apr 26 - अंत मति सो गति: जानिए आपके संस्कारों का सच और दान का असली महत्व!
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- 0:13बाबा जी, प्राण मेरा खुद का ऐसा मानना है कि आप से पहले इस पृथ्वी
- 0:28पर कोई भी संत ऐसा नहीं आया। जिसने उस अज्ञेय का उल्लेख एवं
- 0:37वर्णन इतने सरल शब्दों में किया। हालांकि सभी संतों ने उस विराट का
- 0:50उल्लेख एवं वर्णन किया। मेरा छोटा सा एक प्रश्न है
- 1:00गुरुदेव अंत मति स्वगर्दी इस शब्द का अर्थ ज़रा और गहरे रहस्य।
- 1:12एवं सरल शब्दों में समझाने की कृपा कीजिएगा।
- 1:18गणेश कुमार, आग्रा ऐसा नहीं है पुत्र प्रत्येक संत
- 1:45उसी तल को छूता है जो आनंद के सरोवर में लबालब भरा पड़ा है।
- 1:58खुशबू से, रस से मस्ती से, बस तुमने सुना नहीं होगा, तुमने
- 2:16सिर्फ आज के आचार्यों को सुना होगा।
- 2:26आज के साधुओं को सुना होगा सदगुरुओं को सुना होगा जिनके भीतर
- 2:39वोकबुलरी बहुत हैं। लेकिन आनंद का रस मैंने पहले भी
- 3:03आपको समझाया कि मनुष्य विभिन्न प्रकार की योनियों में से होकर
- 3:16मनुष्य के चोले में आता है, आखिरी चोला यही है।
- 3:24देवताओं का चोला भी मनुष्यों के चोले से कमता है।
- 3:41अंत मति सुगति ध्यान से समझना सारी जिंदगी भर तुम कोई एक काम
- 3:51करते रहो। उस एक काम का संस्कार बढ़ जाएगा।
- 4:03वह पाथर पे खींची हुई। लकीर रोज़ गहरी होती जाएगी, इसी
- 4:12को संस्कार कहते हैं। धीरेधीरे ये संस्कार इतने गहरे हो
- 4:20जाते हैं कि पत्थर टूट सकता है लेकिन वो लकीर नहीं बैठते।
- 4:35इसे ही मंदबुद्धि कहते हैं। मंदहुदी व्यक्तियों से कभी
- 4:49शास्त्रार्थ मत करना, डिस्कशन मत करना, बहस मत करना, वह समय और
- 4:59शक्ति की बर्बादी है। उनसे तो हाथ जोड़ लेना, पांव छू
- 5:09लेना, आशीर्वाद मांग लेना, जल पान करवा देना, खाना खिला देना।
- 5:23और कह देना कि मैं हार गया, आप जीत गए, मैं ऐसा ही करता हूँ
- 5:33क्योंकि मैं जानता हूँ ज्ञानी और अज्ञानी के भीतर का भेद।
- 5:40जो अभिज्ञानी हुआ है, उसे शब्दों से समझाया नहीं जा सकता, उसे
- 5:54रास्ता दिखाया जा सकता है अपने भीतर जाने का लेकिन जाना उसे ही
- 6:00पड़ेगा। मेरे पास लोग आ जाते हैं, बगल में
- 6:13बहुत ही होती है बाबा शास्त्र अर्थ करो, मैं कहता हूँ नहीं।
- 6:29तुम शास्त्रार्थ में जीतने आए हो, मैं तुम्हारी इच्छा पूर्ण कर देता
- 6:36हूँ, तुम जीत गए यह पोथी को बगल में ही रखो।
- 6:46उसके चरण स्पर्श कर लेता हूँ, क्षमा मांग लेता हूँ और उससे कह
- 6:56देता हूँ कि मुझे आशीर्वाद दो। बस उसका सारा ज्ञान धरा धरा रह
- 7:06जाता है। मूर्ख से कभी भी बहस और मैं कभी
- 7:18मूर्ख से बहस करता हूँ। तो मैं ये मशवरा देता हूँ,
- 7:30परमात्मा के प्रति तो बहस करना ही, क्योंकि परमात्मा के बारे में
- 7:39तो हम भी। फिर ठीक नहीं लग सकता।
- 7:48कितना बड़ा भगवान कृष्ण भगवान शंकर कितना बड़ा ज्ञान?
- 8:03परमात्मा के बारे में दो अल्फाज़ ही बोल पाए और वो अल्फाज़ होंगे
- 8:15बड़ा मस्त है रस है रहस्य। बोला नहीं जा सकता पीओगे तो स्वाद
- 8:28बड़ा निराला है मत, मस्त हो जाओगे झूमोगे नाचोगे गाओगे यही गौरख ने
- 8:38कहा हँसी बो खेल बो दरिबो ध्यान। ज्ञान कुछ अलग से चीज़ नहीं है।
- 8:56ज्ञान होने के पश्चात भी तुम सांसारिक दायित्वों का निर्वहन कर
- 9:02सकते हो। और बड़े मज़े की बात है के ज्ञान
- 9:14होने के बाद तुम अपने सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन ज्यादा
- 9:23निपुणता से कर पाओगे। मस्ती का आलम मदहोशी का आलम
- 9:35तुम्हारा रोमा रोमा उस आनंद को पीते पीते और तुम्हारे हाथ पांव।
- 9:42इतनी निपुणता से चलेंगे, प्रवीणता से चलेंगे
- 9:57जैसा कि तुमने कभी ज़िन्दगी में इतनी दक्षता से कोई कामना किया।
- 10:15सारी उम्र एक ही काम करते करते है, उसकी लकीर पड़ जाती है उसे
- 10:23संस्कार कहते है। पत्थर के ऊपर तो कोई चीज़ लगातार
- 10:35घिसाते रहो। रसरी आवत जातते सिर पर पड़त निशान
- 10:43करत करत अभ्यास के जड़मती होत सजा रहीम कहत।
- 10:54कि जड़ मती से मैं मधबुद्धि करता हूँ अभ्यास करते करते वह भी
- 11:05बुद्धिमान हो जाता है। जैसे रसरी आवत जातते सर पर बढ़ता
- 11:12निशा। पत्थर की एक शीला के ऊपर पहले
- 11:22जमाने में कुएं होते थे। कुएं की रस्सी उस शीला के ऊपर
- 11:27चलती थी, आती थी जाती थी। और उस पत्थर की शिला पर निशान पड़
- 11:33जाता था। बस ऐसा ही संस्कार है अगर तुम
- 11:41सारी उम्र झूठ बोलते। तो किसी का कोई नुकसान नहीं होगा।
- 11:54सबसे पहले नुकसान तुम भला सोचो, जिसने आदमी ने परमात्मा का गहरा
- 12:10से चखा। उपनिषदों में लिखा है रसोब ऐसा वह
- 12:19रस रूप है ऐसा रस जीसको पीने से रोमा, रोमा।
- 12:30आनंद से जो मख्सता है, अगर तुम झूठ ही बोलते चलेगा तो तुम कभी
- 12:43रसने लोगे और आज की सारे कुरु। रसविहीन उपदेश दे रहे हैं मुझे
- 13:03बात अपने अनुभव से करता हूँ जब बाबा ने मुझे कहा बोलो।
- 13:18मैंने कहा बाबा मज़ा बढ़ाना है और पी लेना तो थोड़ी सी किसी और की
- 13:27जिम्मेदारी लगवा दो, इतना बड़ा संसार है।
- 13:35बाबा बोले और कोई है वो शब्द आज ही मेरे कानों में।
- 13:47जैसे पहाड़ियों में हम कोई शब्द बोल देते हैं पुनः पुनः वह
- 13:52परिवर्तित हो के आता है ऐसे गूंज रहा है उस दिन से सभी गुरुओं के
- 14:00ऊपर से। मेरी श्रद्धा विश्वास हो, क्या
- 14:14मैं बेहोश हो के कह सकता हूँ? ऑल आवर क्रिमिनल्स टु ह्यूमनट।
- 14:26मानवता के लिए सभी दोषी क्योंकि जिसे तुमने देखा नहीं जीसको तुमने
- 14:35जाना नहीं जीसको तुमने पिया। जिसका तुमने स्वाद नहीं चखा, उसको
- 14:50लोगों को बांट रहा है फिर ये नीरस नीरस शब्द ये तो रह जाते हैं
- 15:01तुम्हारे पले। सबसे पहले तुम चुकते हो क्योंकि
- 15:09तुमने पिया नहीं पीना दोतरफा फायदा करता है, पीकर पहले तुम
- 15:19निहाल हो जाते हो। फिर सुनने वाला निहार हो जाता है
- 15:26क्योंकि तुम्हारे शब्दों के जरिए वह भी ज़रा ज़रा पीता है।
- 15:40शब्द मेरे आज भी गुंज रहे हैं। और कोई नहीं है, तुम्हें ही उठना
- 15:47होगा। अभी 3 मई आने वाली है, 6 साल हो
- 15:56जाएंगे। हमने यह चैनल शुरुआत किया है
- 16:02लगातार रोज़। सुबह 5:05 पर हमारा प्रोविशन होता
- 16:09है, कभी कभी धोबी आ जाती है अगर तुमने सारी जिंदगी काम वासना में
- 16:28गुजार। फिर जाती जाती हो तुम काम वासना
- 16:39को ही साथ लेके मरो मैंने सुना है।
- 16:52एक व्यक्ति मोदी नाम का एक व्यक्ति मर गया।
- 16:57वह कुछ ज्यादा ही शौकीन घरवाली को छोड़ दिया।
- 17:10अच्छा रुतबा कम आए। अच्छा हाथ में शक्ति ले लिया।
- 17:22उस शक्ति के बलबूते स्त्रियों को अपने सोने अपने साथ सोने के लिए
- 17:28मजबूर करते, लालच देता, मंत्री भी बना देता।
- 17:36पक्का था जुबान का तो मर गया तो उसकी अर्थी का रास्ते में एक
- 17:50स्त्री दिखी। उसे मर गया था, लेकिन आत्मा साथ
- 17:57के साथ चली थी। शमसान घाट तक जाती है, अभी ताजा
- 18:03ताजा मरी होती है, उसे पता नहीं होता मैं मर गया तो नहर के किनारे
- 18:11आकर आगे शमशान घाटता हूँ। वह एक सुंदर स्त्री जाती हुई
- 18:16देखें। और वह अलर्ट मुवड में आकर अंत
- 18:26मति, सुगति और अंत मति कैसे हो पाए?
- 18:37अगर तुम सारी उम्र उसी चीज़ को दोहराते रहोगे तो संस्कार बन
- 18:41जाएगा। रसरी आवत जागते सिर पर भरते निशा
- 18:57फिर तो बूढ़ा भी अलर्ट मूड में आ जाता है।
- 19:01कब्र में पांव होते हैं, मर ही जाता है।
- 19:08परीक्षण कर लेना चाहिए। शायद बूढ़ा उठ जाए कोई पता चलता
- 19:19है। अंत मति तब बनेगी अगर सारी उम्र
- 19:31वही वही वही वही किया हो। संस्कार बन जाएगा व्यक्ति उस काम
- 19:37का संस्कृत हो जाएगा रसरी बार बार आएगी गिसेगी पत्थर के ऊपर लकीर
- 19:46पड़ जाएगा। उसे संस्कार कहते हैं।
- 19:54जीस व्यक्ति ने सानिया मार जी देखा हो कि मैं सुन्दर स्त्रियों
- 20:05को भोग सकता हूँ। फिर वायदा खिलाफी करने में हर जगह
- 20:17ऐसा व्यक्ति बेजमान का व्यक्ति उसका कोई वायदा नहीं होता।
- 20:29जो फेरों में लिया था उसने उसका कोई चरित्र चाल चलन नहीं होता तो
- 20:39अंत तक आते आते मति वो ही बनेगी जो तुमने सारी उम्र किया।
- 20:48सारी उम्र तुमने झूठ बोला, तुमने किसी मित्र से पैसे ले लिए।
- 20:57जब उसको जरूरत पड़ी उसने मांगी तुमने उसको थाना के चेहरी बना
- 21:04लिया, उसके पैसे और खराब। इस तरह के व्यक्ति संस्कारित यह
- 21:18कभी सुधरते नहीं संस्कार बनते हैं।
- 21:27सारी जिंदगी के प्रयास से। अजामिल की कथा कहती है के पुत्र
- 21:38का नाम नारायण रख दो गोविंद रख दो राधे रख दो कृष्ण।
- 21:47अंत समय में जब तुम भगवान का नाम लोगे, कहानी है कि विष्णु के
- 21:56पार्षद भी आ गए। कहानी है कि सारी उम्र बुरे कर्म
- 22:03की अर्थ। खेतों झाड़ियों में लेकर छुप जाया
- 22:11करता था स्त्रियों को। ये रोज़ का काम था उसका और पुत्र
- 22:30का नाम नारायण ने रख दिया। जब वह मृत्यु हुई तो उसने कहा
- 22:40नारायण। अरे, मेरे प्राण निकले जा रहे हैं
- 22:48तो कहानी कहती है तुम्हारे चोरों की बदमाशों की, व्यापारियों के
- 22:59पाखंडियों की। ये भागो तो प्राण की कथा कहने
- 23:04वाले लोग कल ही मुझे एक फ़ोन आया बाबा मैं तो भागो तो प्राण लेके
- 23:14बैठी हूँ कोई सुनने ही नहीं आता मैंने।
- 23:22इन्होंने इतना निचोड़ लिया नींबू को अब इस मिरा से है ही नहीं अब
- 23:31कोई नहीं आएगा भूला भटका कोई आ जाए और ऊपर से बेरोजगारी।
- 23:40इतनी मशक्कत करनी पड़ती है आदमी को दो वक्त की रोटी जुगाड़ करने
- 23:46में तुम्हारी कथा सुनने कौन आएगा बेटी फिर बाबा मैंने कहा इसको
- 23:57आराम से। रेशमी रुमाल चढ़ा अलमारी में बंद
- 24:04कर दे कोई काम धाम और खोज ले अब कोई कथा सुनाने सुनने आएगा ये
- 24:15धंधा चोपुट हो जाता है। धीरे धीरे धीरे राजनीति भी चौपट
- 24:20हो जाती है। वही व्यक्ति जो पांव छूते थे और
- 24:26पांव की जूती निकाल लिया करते क्या जा मेरे बाप के साले?
- 24:38क्योंकि जब तुमने सारी जिंदगानी सेवा करने के नाम पर आए थे, अपने
- 24:52ऑफिस का नाम भी सेवा तीर्थ रख लिया, लेकिन काम?
- 25:02झूठ कफर चले हैं। दूसरे देशों से अनुबंध करने और
- 25:10पता चला कि वो तो पहुंचे हुए हैं आइलैंड पे।
- 25:22ऐसे संस्कार पड़ जाते हैं पुत्र इन संस्कारों को मति कहते हैं।
- 25:38इन पाखंडियों ने बड़े सरल तरीके बना लिए हैं वह रस।
- 25:47इल्ल्यूशन को खोए भी ना मिलता नहीं, उसको हवन में आहूत करना
- 25:54होता है। हवन में आहूत अहंकार होना नहीं
- 26:04चाहता। अहंकार आखिरी दम तक प्रयास करेगा।
- 26:13वह यहाँ तक भी प्रयास करेगा कि मैं कैसे गुरु को गलत साबित कर
- 26:20दूं ताकि मरने से बच जाऊं। कबीर कहते हैं, जीस मरने से जग
- 26:34डरे मेरे मन आनंद मरने ही सेफाई है पूर्ण परण परमानंद।
- 26:49एक बार आज सुन लो पहला सबक। मोया बाज न मिल दा सजन वे उस मलिक
- 27:16दा प्यार। मोय बाज ना मिलता सजन वे अंकार के
- 27:34मरे बिना परमात्मा नहीं मिलता। आज सुन लो फिर सुन लो मुझ से सुन
- 27:43लो किसी और सही गुरु से सुन लेना, लेकिन पाखंडियों से मत सुन लो
- 27:51पाखंड कहेंगे राधे राधे जप लो, परमात्मा मिल जायेगा।
- 27:57पांच नाम जप लो। भागवत कथा सुन लो, मंदिर जाओ
- 28:04तीर्थ जाओ हजारों नुखते हैं उनके पास, लेकिन भटकना जान एक छोटा
- 28:14नुख्ता मेरा हृदय के भीतर समल लेना।
- 28:20पर नुकता है मरे बिना अहिंकार के मरे बिना वह रस सब रिवर्ट नहीं
- 28:39होता तुम वेद पर। तुम उपनिश्चित पर तुम गीता
- 28:48स्टार्ट कर गीता पर तुम 1000 किताबें पर पड़ पड़ गड्ढे लग दिए
- 28:55ते पड़ पड़ होई ये ख्वाह। नानक लिखे एक गलत है, बाकी चकना
- 29:02चाह वो लिखे वाली एक बात कौन सी? होया बाज ना मिल दा सजन वे उस
- 29:25मालिक दा प्या होया बाज। मरना तो पड़ेगा ही तुम्हारे
- 29:41मार्गदर्शक तुम्हारे अहंकार को मारने की कोई तरकीब नहीं करता।
- 29:48वर्ण इसको और ज्यादा पुष्ट करने की तरकीब करता।
- 29:56बेवकूफों की लंबी कतार रोज़ मुझसे मुखातिब होते बाबा मेरा बैंक में
- 30:08एक अरब। राम नाम पड़ा है एक अरब अच्छा और
- 30:19जिसका एक अरब डॉलर पड़ा है उसको ये एक अरब राम नाम वाले।
- 30:29बड़ी ओछी नजरों से देखते हैं। इसने भी क्या खाक कमाया?
- 30:37हमने नाम कमाया इसका पैसा तो यही रह जाएगा, सड़ जाएगा बैंकरों में
- 30:48पड़ा पड़ा। बाल बच्चे गुलछर्रे उड़ाएंगे।
- 30:54संघ नहीं लेके जाएगा लेकिन हमारा नाम तो संघ जाएगा।
- 31:02बस इन्हीं बेवकूफियों के कारण तुम्हारे गुरु ने समझाया है।
- 31:09संघ कुछ नहीं जाता, संघ जाता है तुम्हारा नाम जप स्मरण नहीं, वह
- 31:20भी संघ नहीं जाता। वर्ण तुम्हें और ज्यादा अंगारी
- 31:26बना देता है। बाकी तो तुम में अहंकार जो था, वो
- 31:30था मुख्य अहंकार। मैं शरीर हूँ मन हूँ विचार हूँ
- 31:36भावना यह तो शुरुआत से ही है उसके अतिरिक्त मेरे पास यह गुण विद्या
- 31:45है। मैं प्रिन्सिपल हूँ, मैं सीएम
- 31:51हूँ, मैं पीएम हूँ, मैं मला हूँ, मैं एमपी, मैं सानेदार हूँ, मैं
- 31:56डीएसपी हूँ, मैं डीजीपी हूँ यह अहंकार तुमने वो और तुम्हारा वजूद
- 32:08मल्टीडायमेंशनल हो गया ज़रा सोचो इतने नाम मैंने बनाए इनमें से तुम
- 32:14कौन हो क्वारिफिकेशन तुम हो? यह जो सूचनाएं सर लोगों ने इकट्ठे
- 32:27की, वह तुम हो एक व्यक्ति कहता कि मैं 24 भाषाएँ बोल सकती हूँ क्या
- 32:39वो 24 भाषाएँ हैं नहीं? जो भी सभाषायें जानता हूँ बोल
- 32:48सकता हूँ फ्लुएंटली बोल सकता हूँ यह उसके अहंकार में जमा हो गया
- 32:58पहले से ही अहंकार बहुत। तुमने और एक अहंकार जोड़ लिया है
- 33:09ऐसे ही अहंकार तुम रोज़ बढ़ाते चले जाते हो कर कर जो करता है।
- 33:23तुम सारी उम्र करते ही रहते हो अहंकार को बढ़ाने की यात्रा में
- 33:32और अब दूसरी बात ध्यान में रख लेना।
- 33:38तुम रोज़ कहते हो बाबा हम दुख। जितनी ज्यादा मात्रा में तुम
- 33:49अहंकार को इकट्ठा किया है, उतनी ही ज्यादा मात्रा में तुम दुख हो,
- 33:55यह एक प्रोपोर्शन न टली मापदंड आपको मेज़रमेंट आपको दे दिया
- 34:02अनुपातिक रूप से। आपको स्वयं की कसौटी पर अपने आपको
- 34:06कस लेंगे। क्या तुम वास्तव में दुखी हो,
- 34:12दुखी हो तो कितने दुख जितनी मतियाँ तुमने बना ली?
- 34:28अंत में तुम बाइफरकेटेड मल्टीफरकेटेड हो के मरते हो,
- 34:35इसलिए तो मरता हुआ आदमी सिधर नहीं होता क्योंकि अगर तुमने।
- 34:47एक अरब रुपया कमाया या एक अरब नाम जप कमाया या तो छोड़ना पड़ेगा नाम
- 34:56जब भी साथ नहीं जाता और छोड़ते वक्त।
- 35:04तुम इधर उधर देखोगे। विष्णु के पार्षद आए कोई पार्षद
- 35:09नहीं आएगा, कोई यमराज तुम्हें लेने नहीं आएगा, तुम अकेले ही
- 35:22जाओगे। 1 दिन पड़ेगा जाना क्या वक़्त,
- 35:34क्या ज़माना कोई साथ देगा? सब कुछ यही रहेगा।
- 35:49होंगे यही झमेले होंगे यही झमेले ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया में
- 36:03कम ना होंगे अफसोस। संत कहते हैं तुम क्या ले जाओगे?
- 36:19तुम लेके भी कुछ नहीं आये थे बात ठीक है, दे ही अपने साथ स्मृतियां
- 36:28और संस्कार वगैरह वगैरह लेके आता है।
- 36:36और जब तुम जाओगे तब जो तुमने यहाँ किया वह समृद्धि बन के तुम्हारी
- 36:44स्मृति में ऐड हो जाएगा तुमने कोई कर्म किया अच्छा बुरा।
- 36:56तुमने नाम जप किया, पूजा पाठ किया श्योर सुपजा पूजन किया, यज्ञ
- 37:01किया, हवन किया। यह सब तुम्हारे कृत्य है जो
- 37:09तुम्हें करने होते हैं। जो तुम करते हो परिश्रम वह साथ
- 37:24नहीं जाएगा परिश्रम से तुमने धन कमाया।
- 37:31परिश्रम से सूचनाएं कमाई, गद्दियाँ कमाई मान सन्मान कमाया
- 37:43यह तुमने कमाया। कमाई परिश्रम के द्वारा होती है
- 37:53या तुमने जब नाम यह कमाए, यह तुम्हारी स्मृति में फिर हो जाये
- 38:05तो फिर पूछा है। कि क्या साथ कुछ भी नहीं जाता है
- 38:11जाता है साथ क्या जाता है साथ जाता है आनंद हरक।
- 38:28और ध्यान रखना रस परिश्रम के द्वारा नहीं कमाए जाते।
- 38:36रस एफर्ट, लेस होकर कमाए जाते, परिश्रम विहीन होकर।
- 38:45अपने आप को छोड़कर उस विराट के हाथों में जिसे तुमने देखा और
- 38:57जिसे तुम कभी देख नहीं पाओगे। तो सही कहा अल्बर्ट आइंस्टीन इस
- 39:05नॉट ओनली अन्नोन बट ऑल्सो अननोएबल।
- 39:09वह कभी जाना भी नहीं जा सकेगा। साइंटिस्ट था, वैज्ञानिक था
- 39:16परमात्मा की अभूतपूर्वक बैठा करके।
- 39:24तुम प्रयास से जो कमाओगे वो तुम्हारा यही रह जाएगा जो तुम
- 39:39कमाओगे अप्र्यास से एफर्टलेसनेस से।
- 39:44ठहराव से ठहराव कोई प्रयास नहीं, रात्रि को तुम विश्राम करते हो
- 39:53क्या वो है परिश्रम से आता है जब रात को तुम नींद में चले जाते हो।
- 40:05परमात्मा की सभी दांते हैं इसको अब सर पर नजर आए परमात्मा की सभी
- 40:12दातें बड़ी दांते बड़े गिफ्ट्स परिश्रमहीनता की अवस्था में।
- 40:21एफर्टलेसनेस में वो नींद हो, वो भूख हो, वो ध्यान हो वो समाधि।
- 40:37तुम कोई परिश्रम नहीं करते तो तुम्हारा हृदय धड़कता है क्या
- 40:40करते हो परिश्रम जिंतगानी यह जीवन बिना परिश्रम के चलता है।
- 40:49तुम कुछ नहीं करते रात को स्वयं अन्यथा कब की राधे राधे हो जाती।
- 41:04परमात्मा का भूरेहद वरदान उन घड़ियों में मिलता है जो
- 41:15प्रक्षमहीनता की घड़ियाँ होती हैं।
- 41:21व्हेन यू आर एफर्टलेसनेस? गहरी नींद आती है जब तुमको ये
- 41:28एफर्ट नहीं करते अगर सोए सोए तुम्हारे भीतर थोड़ी सी भी।
- 41:41कोई गुंडी फंसी रही। तुम इतने गहरे से नहीं सोपोगे
- 41:47नींद उथली उथली आये और नींद उसका सबसे बड़ा पुरस्कार है।
- 41:53इस जीवन में जो तुमने जाना है, बड़े से बड़ा पुरस्कार उसका नींद
- 41:59है। और इसी नींद को तुम्हारे मूड गुरु
- 42:06छीन लेते हैं मेरे पास रोज़ ऐसे मर ही जाते हैं बाबा नींद नहीं
- 42:14आती इनका पुत्र। नींद तो परमात्मा की देन भूख हो
- 42:23के नींद हो के ध्यान हो के साथ न समाधि हो के सरस का बरस न हो।
- 42:30यह परमात्मा की कृपा से आता है। कर्मी आवै, कपड़ा नदरी मोख दवार।
- 42:42उसकी कृपा के बिना भ्रांतियों से तुम्हें छुटकारा नहीं मिलता और
- 42:54भ्रांतियां जो तुमने सारी उम्र माना।
- 43:01उन्हीं का अगाध रूप अंत वेला में अंत मती बनकर तुम्हारे सामने खड़ा
- 43:09होता है तो अंत मती धीरे धीरे सारी उम्र में साधनी पड़ती है।
- 43:18अगर दानी हो तुम तो अंत समय में तुम प्राणों को भी आराम से दान कर
- 43:26दोगे। दान का ये अजूबा महत्त्व मैं आज
- 43:33तुम्हें समझा रहा हूँ। छोड़ने की वर्ती गहन होती जाएगी।
- 43:44आज तुमने पैसा टका दान किया, छोड़ने की वर्ती पैदा हो गयी।
- 43:53कल तुम व्यसन छोड़ोगे परसों तुम झूठ बोलना छोड़ोगे धीरे धीरे धीरे
- 44:03धीरे अगर सदगुरु तुम्हें मिल गया तो वह तुम्हें कोशिश करेगा।
- 44:10इन इंद्रियों से इस मन से इन चपकाहटों से इन सूचनाओं से भी तुम
- 44:20अपने आप को छोड़ना सीख लो। रेमो आज दी क्लिंगन नेसेस सभी
- 44:28चपकाहटों को हटा दो। ये शुरू होगा।
- 44:33संत बड़े समझदार थे, वो जानते थे कि धन छोड़ना सबसे आसान होता है,
- 44:41हाथ के मैल है। तो छोड़ने की वृत्ति संशकार बन
- 44:53गई। मैंने आपको कल ही एक प्रवचन में
- 45:01सुनाया कि मेरी जेब में कोई पैसा नहीं होता, पंछियों को भूखा मरता
- 45:08देखा। मैंने उधारी उठानी शुरू कर दी और
- 45:158.25 किलो रोज़ मैं सामान लेकर जाता हूँ।
- 45:20सात प्रकार के अनाज कीड़ों के लिए, एक पांव भर तिल, चावल,
- 45:29शक्कर। सर्दी में शक्कर गर्मी में चीनी
- 45:40दाना खांट ध्यान रखना गर्मी के अंदर शक्कर मत ले के जाना।
- 45:51क्योंकि 45 डिग्री सेंटिग्रेड में वह शक्कर पिगल जाएगी और वह बेचारा
- 46:00कीड़ा मीठा बहुत अच्छा लगता है उसे कीड़ी कीड़ा।
- 46:07उस शिखर में मुँह मारेगा, वह शिखर पिघल गई होगी।
- 46:16वह तो एक प्रकार की अधहसी बन गई तो कीड़ा उसके बीच में चिपक के रह
- 46:23जाएगा और प्रण त्याग देगा। बचाना था तुमने जान, भूखे कीड़े
- 46:30को तुम भोजन देने गए थे तुमने उसके प्राण ले लिए बारीक वाते हैं
- 46:39पांच सात पैकेट उस वक्त ₹1 का पैकेट?
- 46:51घर भेंसों के लिए ले जाता है कुत्ते वो भी सारी रात के भूखे
- 46:57होते हैं। उन्हें एक एक बिस्कुट दो तो
- 47:03बिस्कुट जितना खाते पास खड़ा हो जाता वो उनको मैं बिस्कुट खलवाता
- 47:10हूँ। यह प्रकृति का एक उपहार होता है।
- 47:30संत के हृदय में हर वक्त करूणा। दया बहती है जीवों के प्रति और यह
- 47:41दया ही हमें बनवाती है। अन्य सातों लोग एक लेक्चर करने
- 47:51का। दो ₹2,00,000 महीना ले लेते है,
- 48:00वो व्यापार है, देखो भाई तीन पीरियड लगाएंगे 40 मिनट का कृपया
- 48:073,00,000। यह है व्यापार, संत तुमसे कुछ
- 48:15नहीं क्योंकि संत के हृदय के भीतर करुणा बहती है, निरंतर बहती है,
- 48:26एकलक्षण के लिए भी वह आनंद। से खाली नहीं होता और जो व्यक्ति
- 48:35आनंद से खाली नहीं होता वह कभी करोड़ों से भी खाली नहीं होता।
- 48:42इसलिए सदा दिवाली सादगी और आठों पहरा।
- 48:52भौखे पंछियों को देखकर फिरता रहता बहुत से लोग मुझे कह देते हैं
- 49:03बाबा तुम्हारे आध्यात्मिक प्रवचन, बड़े मेट।
- 49:10तुम राजनीति में कटु शब्द मत बोला करो, मैं कह दे तुम्हें पुत्र
- 49:18मुझसे तुम्हारा दुख दिखा नहीं, मेरी मजबूरी है, मेरे भीतर करुणा
- 49:26बहती है, तुम लोगों के लिए। और उन दुष्टों के लिए मेरे भीतर
- 49:36क्रोध रहता है कि इनकी गर्दन मरोड़ के मार्ग इतना क्रोध?
- 49:48हालांकि उन्होंने मेरा कुछ नहीं पकड़ा।
- 49:53मेरे लिए तो वह विचारे हैं, लेकिन जो व्यक्ति उस विराट तक पहुँच गया
- 50:03है अब इस बात को अंडरलाइन कर। जीस व्यक्ति ने अपना विराट देख
- 50:14लिया जब वह भूखा मरता हुआ बच्चा बड़ा वृद्ध देखेगा।
- 50:24तो वह उसमें अपने ही स्वय के दर्शन करे, क्योंकि ही इज़ ओमनी
- 50:33प्रेसेंट वह उस भूखे में भी है, वृद्ध में भी है, जवान में भी है,
- 50:42इसलिए उसे तरसा है। बिकॉज़ ही इस ओमनी प्रेसेंट तो वो
- 50:54मेरा ही स्वरूप है। मेरा स्वरूप सिर्फ यही नहीं है।
- 51:00यह भी भौतिक तत्वों से बना और वह जो भूखा मरता है बच्चा वह भी
- 51:07पंचभौतिक तत्वों से बना। जब तक तुम विराट तक नहीं पहुंचते
- 51:15तो तुम दो हो भेद है। जब तुम विराट तक पहुँच गए तो भेद
- 51:23खत्म हो गया। तुम एक हो गए, बाबा नानक का भेद
- 51:28मच गया। उन्होंने पहला शब्द कहा, एक होगा,
- 51:36मैं एक हूँ। अहम् ब्रह्मास्म एको अहम् द्वितीय
- 51:44और नास्त बस मैं ही मैं हूँ दूसरा कोई नहीं है तुम पुत्र कहते हो
- 51:54क्योंकि तुम जानते हैं। ऐसे शब्द ऐसे प्रश्न अज्ञानता के
- 52:02कारण उठते हैं, स्वभाविक है, इसलिए मैं अक्सर लोगों से कह देता
- 52:11हूँ, ऐसे प्रश्न मत पूछो। कल ही किसी व्यक्ति ने प्रश्न पूछ
- 52:19लिया आपने गीता इतने शास्त्रों का इतने शास्त्रों का अध्ययन क्यों
- 52:31करना पड़ा? अब ये प्रश्न तो पूछ लिया, लेकिन
- 52:37उसे पता तो है। मैं तो खरगोश काट के आया था।
- 52:43भाई किसी शास्त्र को पढ़ने का सवाल ही नहीं कह रहा होता, किसी
- 52:50शास्त्र का मुख भी नहीं देखा था। शास्त्र तो उसने मुझे पढ़ाया जा
- 53:03पर कृपा राम की होजी ता पर कृपा करें सब वह विराट मेरे पे बरस
- 53:11गया। मैं तो खरबोश को काटना जानता था,
- 53:19खरब को काटना जानता था, कोकरोज़ को काटना जानता था, मुझे क्या पता
- 53:29अनन्या चिंतन तो माम यह जनपुरु पास्ते नहीं पता था।
- 53:38यह तो एनलिटमेंट के बाद लोगों से मखाते हुए होने के लिए जैसे टीचर
- 53:52कक्षा को पढ़ाने के लिए सुबह तैयारी कर के आता है।
- 53:59सब कुछ उसे याद नहीं रहता है, शुभ है, वो रिक्वेस्ट कर लेता है और
- 54:09फिर क्लास में जा के बसकता है। यह मैंने बाद में पढ़ा है, पहले
- 54:16नहीं पढ़ा था आपको बताने के लिए जब बाबा ने मेरी ड्यूटी लगा दी
- 54:25बोलना पड़ेगा आपको जब कोई दूसरा है ही नहीं।
- 54:37बस एक दीपक जला, एक दीपक से सारी धरती के दीपक जल जाएंगे तुम इतासा
- 54:47काम कर और अभी कल ही मुझे पता चला के 23 दीपक जल गए।
- 54:56बड़ी खुशी के बाद से बाबा ने एक कहा उन्होंने प्रयास नहीं किया।
- 55:05स्वयं तक पहुंचने का आह प्रयास में उतर गई।
- 55:10उन्होंने मेरी बात पर श्रद्धा की विश्वास।
- 55:17इस मामले में तुलसी ठीक श्रद्धा, विश्वास, रोपणो या व्यम बिनानो
- 55:23परश्न खरगोश काटना परमात्मा तक ले जाया करता है।
- 55:34क्या नहीं? लेकिन फिर परमात्मा मुझ पर
- 55:42मेहरबान तो हूँ क्यों? उसने गाड़ी का इंसिडेंट करवाया?
- 55:54बस अगर ये इंसिडेंट न होता तो मैं आज भी किसी हॉस्पिटल में किसी के
- 56:04गैस्ट्रो एंटेस्टिनर सर्जरी कर रहा हूँ।
- 56:17लेकिन उसको कुछ और मंजूर था। यह कहिए कि उसने मेरे पिछले जन्मो
- 56:25के कुकर्म जो निष्काम कर्म मैंने कल समझाया कि एक यूपी का बच्चा।
- 56:36एमए बस काम करता शाम को तनख्वाह ना लेके जाता जीस दिन मैंने कहा
- 56:47रे तू पैसे नहीं लेके जाता। गाँधी ने जो भी कुछ किया।
- 56:57तो शुक्र है मैं फिर से आ गया आते तो आप भी फिर फिर से हो इसीलिए तो
- 57:05इसको चक्कर कहा गया संसार चक्र लेकिन आपको पता नहीं चलता कि
- 57:12पिछले जन्म में भी मैं था। सौभाग्य ऐसा हुआ कि ऑस्कर
- 57:18एनलाइटनमेंट मैं अपने पिछले जन्मों में जाकर सारे जन्म देखे।
- 57:26देखिए पिछले जन्मों की गाथा बुध ने भी।
- 57:34बुद्ध ने अपने 500 से ज्यादा जन्म गिनाए।
- 57:39उसकी एक पूरी की पूरी ग्रंथ रचना है।
- 57:43उसके पिछले जन्मो महावीर भी अपने पिछले जन्मो में गए।
- 57:50क्या संत झूठ बुरा करता है? काहे को बोलेंगे?
- 57:56अब लोग समझने लगे हैं बाबा आपकी बातों पर यकीन हो गया।
- 58:04आप झूठ बोलोगे तो काहे को बोलोगे? कुछ खाते नहीं, कोई शौक नहीं, कोई
- 58:18घूमने का कोई दुर्व्यसन नहीं, सिर्फ वह हमारे उद्धार के लिए
- 58:27आत्मसुभा प्रवचन करता है। इतनी सी चाय पीता है।
- 58:35अविष्कार आज भी खोल दो डॉक्टरों ने मुझे कहा कि तुम एक वर्ष दो
- 58:45वर्ष तीन वर्ष नहीं जीताओगे। और इस 2425 मई को पूरे 14 वर्षों
- 58:56जान गए। अन्न का एक कोर भी नहीं खाया।
- 58:59वही तीन वक्त की चाय मेरे परिवार के रोक सूखकर काँटा हो गए इस फिकर
- 59:11में। कि यह सबसे बड़े हैं।
- 59:15मर जाएगा फिर हमारा कौन रखवाला होगा?
- 59:22इनको ये नहीं पता था कि जिसका रखवाला वह विराट हुआ करता है।
- 59:32उसके परिवार को फिकर करने की आवश्यकता नहीं थी।
- 59:38अब मेरे शिष्य मेरा परिवार है अहम तवांग सर्ब पाप्य भव मोक्ष स्वामी
- 59:46माँ सुचक। अनन्या चिंतित तो माँ ये जनह
- 59:56परिपास्तय तेशाम नित्यभुक्तानाम योग से म वाह में जिसने बनाया
- 1:00:08वैसे भी वही दे रहा। तुम्हारा तो महज मानना है कि हम
- 1:00:16काम नहीं करेंगे तो फिर क्या रोक दिया कर तुम्हारे?
- 1:00:28मुँह में कोई ग्रास डाल देगा, श्रद्धा परिपूर्ण होनी चाहिए।
- 1:00:34ऐसा भी हो सकता है। नथिंग इस एम पॉसिबल इन एस वर्ड
- 1:00:41श्रद्धा विश्वास तो बोलो या व्यायाम बिना ना।
- 1:00:51लोकदास की एक गात है। संतों से सुनते सुनते जो करता है
- 1:01:03वही करता है तो फिर आज देखते हैं आज माँ का हम कुछ नहीं खाएं।
- 1:01:14और ऊपर बैठ गया पेड़ के देखता हूँ आज वह खाने को कैसे देता है पेड़
- 1:01:29के ऊपर बैठ गया, वहाँ से डाकू निकले गए वहाँ से राजा निकला।
- 1:01:41कहानी लंबी चली जाएगी। संक्षेप में समझा देता हूँ तो
- 1:01:51डाकू बहुत सा माल ले के आए थे। लूट के खाने पीने का सामान ऊपर
- 1:02:02उन्होंने देखा। कि कोई बैठा है तो जरूर ही यह कोई
- 1:02:08राजा का छोड़ा हुआ जासूस होगा। उसने कह रे नीचे आ मलोक दास नीचे
- 1:02:19आ गए। कहते कौन है तू?
- 1:02:26कुछ नहीं बोले हम बोलेंगे भी नहीं, हम खायेंगे भी नहीं, हम
- 1:02:34कितने ही भूखे हो जाए प्राण छोड़ देंगे, खाएंगे नहीं देखते हैं
- 1:02:39कैसा खिलाता है कहानी है इस बात को ध्यान में रख लेना।
- 1:02:45जब कहानियों को तुम सत्य समझ बैठते हो जब सिम्बोलिक
- 1:02:52रेप्रेसेंटेशन्स को तुम सत्य समझ बैठते हो जब एच टू ए के फार मोले
- 1:02:59को तुम पानी ही समझ बैठते हो। तो एच टू के फॉर्मूला से पानी तो
- 1:03:05हमारी प्यास नहीं गुजरता तो कहानी का मतलब यह होता है कि कहानी है
- 1:03:13इसके भीतर कुछ तत्व है करता तो वही है।
- 1:03:21जर्रा भी तुमने तुम्हारे बाप दादों ने नहीं बनाया?
- 1:03:28बनाया भी उसने चलाया भी उसने तुम्हारी सिर्फ भ्रांति है कि हम
- 1:03:35चलाते हैं और अगर हमने नहीं चलाया तो फिर कौन चलेगा?
- 1:03:40और तुम्हें इतना भी नहीं पता, तुम्हें पक्का पता है कब ये शरीर
- 1:03:51प्राणविहीन हो जाए, फिर कौन कमाएगा?
- 1:03:54फिर कौन कहलाएगा पक्का पता है? अगले साल तुम जीओगे कि नहीं जीओगे
- 1:04:04किस से कोनी? तुम मलूकदास से बोले, तुम कौन हो?
- 1:04:14कुछ ना बोले। पक्ष ने कहा कुछ लूट के लिए आए
- 1:04:22थे। यह राजा का होगा और यह जो हम ले
- 1:04:25के आई हैं, भूख तो लगा है तो इसे खाने में कहीं जहर न मिला हो।
- 1:04:38और कहते तू ऐसा कर ये खाना खा के दिखा क्योंकि अगर ये खाना खायेगा
- 1:04:47तो वो मर जाएगा। इसमें अगर जहर है तो तो बुर्की
- 1:04:52उसके मुँह में ठूसे मलूक दास जीवन को बंद कर दांत।
- 1:04:59उन्हें जबरदस्ती पक्का विश्वास हो गया।
- 1:05:02यह तो खाना जहरीला है। उन्होंने गांत के बीच में से ओजार
- 1:05:09फंसा के उसका गांत खोला, जीभ खोलकर ग्रास मुख में डाल दिया,
- 1:05:14उसे वो गटर हो गया। तो उन डाकुओं ने स्वादिष्ट भोजन
- 1:05:24जो 3600 प्रकार के लेके आए थे। ठूस ठूस के कलेक्ट तो मलूकदास
- 1:05:33बोला। उनके पांव पकड़ लिए कहते देखो
- 1:05:42सारी कहानी सुनाई, मैं तो भगवान की परीक्षा ले रहा हूँ।
- 1:05:51रोज़ संत कहते हैं। कि परमात्मा ही सबका खिलाने वाला
- 1:06:00है, देने वाला है मैं देखता हूँ अगर मैं काम ना करूँगा तो
- 1:06:04परमात्मा कहाँ से खिलाएगा? कहानी है, मैं बार बार कहूंगा।
- 1:06:12फिर शब्द बोलते है अजगर करे न जा कर अजगर करे न जा करी।
- 1:06:30पंछी करे नकाम अजगर करे न चा करे पंछी करे नकाम।
- 1:06:50कहत मलूका दास जी सबके दाता। अजगर करे नचा कर, पंछी करे न काम
- 1:07:12दास मलू का दास जी सबके दाता ये तो हमारा अंहकार।
- 1:07:25कि तुम कमाओगे नहीं तो फिर आएगा कहाँ से?
- 1:07:32क्या तुमने यह बनाया था? सब कुछ कहाँ से आ गया?
- 1:07:42फसलों को उगाने के लिए सूरज की जरूरत थी।
- 1:07:45किसने बनाया? 15,00,00,000 माइल रवैया फ्रॉम द
- 1:07:55अर्थ जलता हुआ सूरज का कोरस, जिसमें 3,00,000 पृथ्वीयां समा
- 1:08:07सकती हैं। कौन से ऐसे हाथ हैं जिनके हाथ जले
- 1:08:11नहीं और उसने बिल्कुल ऐन सही जगह पे वो एस्टाबलिश कर दिया तुमने
- 1:08:19किया यह धरती तुमने बनाई जीसको ब्लो करते हो, पानी देते हो, खाद
- 1:08:27देते हो? बीज देते हो और वट वृक्ष बन जाता
- 1:08:32है यह पानी तुमने बनाया यह ऑक्सीजन या कार्बन डाइऑक्साइड
- 1:08:41तुमने बनाई। भक्ते सूरज की रौशनी में
- 1:08:47क्लोरोफिल का निर्माण करते हैं, क्या यह है सूरज के भीतर से
- 1:08:52फोर्टान तुमने निकाले तुमने किया क्या?
- 1:09:00और फिर भी तुम कहते हो, अगर मैंने ना किया तो?
- 1:09:13तो मैंने डॉक्टर से कहा मुझे कुछ नहीं, क्योंकि मैंने वह रस पी
- 1:09:21लिया जीस रस की शक्ति से। उस रस के भीतर आनंद भी है और
- 1:09:31एनर्जी भी है आज मैं बात खोल ली जांच वह जो रस मैंने दिया वह दो
- 1:09:42चीजों का मिश्रण। आनंद की सुगंध और उसकी शक्ति से
- 1:09:58शरीर चलता है अन्यथा इधर से दूध पी के कोई 2 घंटे 4 घंटे बोल पाए।
- 1:10:07और इतने गहरे गहरे प्रसंगों का विवरण सटीक रूप से प्रकट कर देना
- 1:10:18बिना कान्शस्नस और एनर्जी के बिना संभव कैसे नहीं संभव है।
- 1:10:28तो अगर मैं खाना नहीं खाता तो पीता सा दूध इससे जितनी शक्ति
- 1:10:37मिलती है बस हृदय के धड़कने के लिए फेफड़ों के श्वास लेने के
- 1:10:45लिए। जो दूध चाय मैंने पिया उसको
- 1:10:50डाइजेस्ट करने के लिए एंजाइम को बनाने के लिए भीतर के सारे और कंस
- 1:10:55को प्रोपरली फंक्शन करने के लिए वो काम आता है लेकिन और भी तो
- 1:11:02बहुत कुछ है। बोलने पर कितनी शक्ति वह होती और
- 1:11:12ज़रा भी प्रसंग से इधर उधर नहीं जाना होता।
- 1:11:20बहुत से लोग तो मुझे कह देते हैं बाबा।
- 1:11:24तुम जैसे अनशन रखने वाले लोग है ना और रात को चुपके से खा लेते
- 1:11:31हैं। मुँह मरोल के आ जाते हैं, किसी को
- 1:11:35क्या पता तुम खाते, मैंने कहा तो मैं कौन सा तुमसे?
- 1:11:43श्रेय मांगता हूँ मुझे श्रेय मत दो लेकिन मेरे परिवार के चेहरों
- 1:11:53की तरफ देखो, वो साक्षी हैं, वही तो ला के देते हैं मैं तो उठता भी
- 1:12:00नहीं। मैंने घर का दरवाज़ा शायद कभी
- 1:12:05वर्षों के बाद खोलता हूँ। वर्षों के बाद यह दरवाज़ा खुलता
- 1:12:12है। पहले वाला मेरे कमरे वाला जो भी
- 1:12:17कुछ आता है वर्ष आता है और यहाँ तुम आते हो।
- 1:12:25तुमने कभी देखा सुगंधित व्यंजन की थाली परोसी हुई मैं खा रहा हूँ
- 1:12:35नहीं, मेरा मन ही नहीं करता। डिट्ठा सभ्यता नहीं तो दीजिएगा।
- 1:12:45जिसने वह परम रस भी लिया, उसके लिए बाहर के सब स्वादिष्ट भोजनों
- 1:12:49के रस इंद्रियों के द्वारा भोंके गए सबरस बेकार हो जाते हैं, यही
- 1:12:57उसका लक्षण है। मुख्य।
- 1:13:09तो डॉक्टर से मैंने कहा तुम निश्चिंत रहो।
- 1:13:1414 वर्ष के बाद भी जब वो आते हैं तो हैं और वो तो जानते हैं घर के
- 1:13:19मेंबर हैं। कि जो मैंने बताया वही मैं लेता
- 1:13:28हूँ। उसके सिवा मैं कुछ नहीं करता।
- 1:13:33रसो व्यस्सा हम जो भोजन करते हैं उस भोजन को पाचन करके रस बनता है।
- 1:13:45रस रक्त मांस मच हड्डी क्या बनता है मुझे वो रस सी ध सा परमात्मा
- 1:13:55के आनंद स्वरूप में रस रूप की शक्ति भी मिल जाती है।
- 1:14:04और वह काम चलाने के लिए काफी हर वक्त झलकता रहता है।
- 1:14:17मैं अगर चल नहीं सकता तो वो तो चलने की आदत खत्म हो गई।
- 1:14:21तुम्हारे मसल काम करना बंद कर देंगे।
- 1:14:24अगर तुम 5 साल चल जाएंगे तो अभ्यास खत्म हो गया तो मैं थोड़ी
- 1:14:30दूर चल पाता हूँ। वह मुश्किल घर की बाहरी गहली सक
- 1:14:35अगर जाना भी। जैसे चूकना टूट गया, वेक्सरे मशीन
- 1:14:47तो यहाँ आती नहीं तो हॉस्पिटल जाना पड़ेगा ना तो उसके लिए चल के
- 1:14:54बाहर भी जाना होगा। फिर सहारा लेके जाना पड़ता है
- 1:15:01लेकिन पांव से चला नहीं जाता। क्योंकि टिशूज आर टू मच वीक यह तो
- 1:15:12एक साइंटिफिक प्रक्रिया है। तुमने पूछा पुत्र?
- 1:15:27अंत मति सोगते अंत में मति वह बनेगी जो सारी उम्र का तुम्हारा
- 1:15:33संस्कार है, वह संस्कार रोज़ दृढ़ होगा रसरी आवत जागते सिर पर पड़
- 1:15:42तनिष्। यह लोग कहने वाले के मरते वक़्त
- 1:15:49हम तुम्हारे पास आएँगे, तुम्हारी ऊँगली पकड़ेंगे, सच खंड ले जाएंगे
- 1:15:54तुम देखना जब ये शरीर छोड़ेंगे बड़े छटपटाएंगे क्यों इन्होंने
- 1:16:02लोगों से लूटना सीखा? अडानी, अंबानी जैसे लोग ये
- 1:16:10कथावाचक तुम्हें बुद्धू बनाकर तुम्हारे भीतर जहर फेलक मिस
- 1:16:20कन्सेप्शन्स फैला के तुम से धन बटोर लेते हैं।
- 1:16:25इन्हें बांटना आता नहीं। बांटने के नाम पर कूड़ा करकट बांट
- 1:16:33देते हैं और कूड़ा करकट तो रखने योग्य भी नहीं होता, तो मल मुत्र
- 1:16:40रोज़ त्याग नहीं करते, उसको त्याग कहोगे क्या?
- 1:16:45उसको दान कहोगे नहीं, बहुमूल्य चीज़ दान करनी होती है।
- 1:16:54धन को दान करो, भोजन को दान करो। कोई सड़क पे जाता हुआ गिर क्या
- 1:17:07उसको उठाओ काम बाद में हो जाएगा किसी को चोट लगी है उसे जल्दी से
- 1:17:17उठा के हॉस्पिटल लाइव ही करवाओ। अगर भीतर तुम्हारे हृदय में है,
- 1:17:25लगातार करुणा का भाव बह रहा है, तो तुम ऐसा ही करोगे और ऐसा ही
- 1:17:32करोगे वह संस्कार रोज़ गहरा होगा और अंत में तुम पाओगे, तुम्हें
- 1:17:38कोई प्रयास नहीं करना पड़ा, वह संस्कार इतना गहरा हो जाएगा।
- 1:17:43तुम बड़े आराम से प्राण त्याग करते हो छटपटाओगे तुम देखना मैं
- 1:17:53शायद रहूं ना रहूं और शायद मैं इनके प्राण त्याग करते वक्त इनके
- 1:17:58पास हूँ ना हूँ लेकिन जो भी कोई होगा तुम देखना।
- 1:18:07यह बड़ा शोर वोर मचाना यह आसमान को सिर के ऊपर उठा नहीं इसलिए
- 1:18:17ऋषियों ने। मनुष्य को दान करना सिखाया सात को
- 1:18:24चाय और अगर बाल बच्चों के लिए जोड़ जाओगे ऊत कपूत तो क्यों धन
- 1:18:33संचय वह खराब कर देगा। ऊत सपूत तो क्यों धन संचय।
- 1:18:41वह खुद जोड़ लेगा। क्या कोई टुंडा पांका पैदा किया
- 1:18:45है? क्या तुम इसलिए तुम्हारा संचय
- 1:18:52करना ग्रंथ है? जीसको उसका दर्शन हो गया उस दर्शन
- 1:19:00से। विश्वास ही नहीं होता, श्रद्धा
- 1:19:03होती है, जो देख लिया जाता है, वह श्रद्धा होती है, जो मान लिया
- 1:19:10जाता है वह विश्वास होता है। दोनों का फर्क समझ लेंगे और जब
- 1:19:18श्रद्धा विश्वास। विश्वास श्रद्धा में ढल जाता है।
- 1:19:24यानी तुम्हारी मान्यता देख लेती है कि मैंने जो माना था वो ठीक
- 1:19:31है, तुम वैसा ही दर्शन करके भी पाती हो।
- 1:19:40फिर तुम्हारी भ्रांति खत्म हो जाती है।
- 1:19:45यहीं पर आकर बाबा कहते हैं मरने का वह कर्ण विचार।
- 1:19:55मरने की गति कहीं न जाए, जे को कहें पाक्ष्य पर छुपाई कागज कलंव
- 1:20:05न लिखनहार मरने का वह कर्ण विचार। एक ने कहने सुनने से शास्त्र
- 1:20:16पढ़ने से मान लिया परमात्मा है, लेकिन काश तुम्हारे जीवन में कोई
- 1:20:24इंसिडेंट हो जाए कि तुम्हें मानना ही पड़े, मुझे मानना ही पड़ा।
- 1:20:34कुछ है अन्यथा कौन 7080 किलो की बॉडी को इतना ऊंचा पटक के गाड़ी
- 1:20:44के प्लेटफार्म में पटक देता है? मेरा पैंट शर्ट सारा घर दो गवार
- 1:20:52से लिपट गया। सास चढ़ गया मेरा घबरा कौन सा
- 1:21:02पुणे कर गया हैं? उन्हें सात फिसले।
- 1:21:11गालियां निकालने वाले तुम थोड़ी ज्यादा निकालो, क्योंकि तुम्हारी
- 1:21:19गालियों का फल तुम्हें ही मिलेगा। मैंने जो किया निष्काम करम पिछले
- 1:21:28जन्म में। उसका परिणाम मेरे सारे भीतर बाहर
- 1:21:33के बंधन तोड़कर परमात्मा ने मुझे फल दे दिया तोड़ दी सभी उसने
- 1:21:42जंजीर की मनुष्य की शरीर की भावनाओं की।
- 1:21:49तुम्हारी बनाई हुई समाज की तुम्हारे बनाए हुए ऋषियों,
- 1:21:53मुनियों की गलत ऋषियों, तुम्हारे धर्म मेरे लिए बेकार हो गए
- 1:22:03तुम्हारे देवता, तुम्हारी माताएं मेरे लिए एक।
- 1:22:08छलावा हो गया क्योंकि मैंने सत्य को जान दिया।
- 1:22:19हमने श्रेय नहीं लेना है। तुम मुझे खूब गालियाँ निकालो,
- 1:22:24गाँधी जी को खूब गालियाँ करो, मुझे क्या एतराज?
- 1:22:33लेकिन ध्यान रखना निष्काम कर्म का फल मनुष्य नहीं दिया करते।
- 1:22:39निश्चय, काम, कर्म का फल वह दिया करता है जिसने सृष्टि का निर्माण
- 1:22:45किया और उसने फल दे दिया, मेरे सारे बंधन काट दिए।
- 1:22:52मैंने कुछ प्रयास किया, जितना भी किया और वो सभी लोग मुक्त हो
- 1:22:57जाएंगे, वो चाहे सुभाष चंद्र चाहे भगत सिंह हो, राजगुरु सखदेव हो,
- 1:23:05जीतेन्द्र दा हो। जतिं ता।
- 1:23:10जिन्होंने दूसरों की भेड़िया काटने का प्रयास किया, ईमानदारी
- 1:23:18उनको परमात्मा मुक्त कर देगा, उनकी भेड़िया कर देगा।
- 1:23:25मैं तुमसे कुछ उम्मीद भी नहीं रखता।
- 1:23:36और मैं उससे भी कोई उम्मीद नहीं रखता क्योंकि मैं जानता हूँ उससे
- 1:23:43उम्मीद रखना बेकार है, उसकी न्याय प्रियता और प्रणाली इतनी शानदार
- 1:23:50है कि वह किसी का किया हुआ पुण्य या बाप।
- 1:23:56उसका ज़रा भी फल अपने पास नहीं रखता, भुगतार दिया करता है इसलिए
- 1:24:04तुम स्यानो ने कहा कि नेकी कर दरिया में डाल बहुत सुंदर प्रवचन
- 1:24:13था। तू भूल जा क्योंकि फल देने वाला
- 1:24:19कोई और है तू नेकी करके भूल जा, तुम तो सारी उम्र याद रखते हो,
- 1:24:26मैंने तो फलां वक्त तुम्हारी यह सहायता की थी नहीं, फिर परमात्मा
- 1:24:32का खा के जगह। जब तुम अपने ही मन में गुरु बनाती
- 1:24:38रहे कि मैंने उस वक्त ये पुण्य किया था, मुझे इसने फल नहीं दिया।
- 1:24:45नहीं आदमी आदमी को फल नहीं दिया करता, फल देता है परमात्मा।
- 1:24:52कर्म ने बाध्य का रस्ते माँ फलेशु कदाचन फल मैं दूंगा तू कर्म करके
- 1:24:59भूल जाओ, नेकी कर दरया में डाल इसलिए दान का इतना महत्त्व होता
- 1:25:06है दान करते करते अंतिम वेला में। तुम्हें छोड़ने का प्रवृत्ति
- 1:25:16छोड़ने की मती छोड़ने का संस्कार गहनतम हो जाएगा, और यह सबसे
- 1:25:22सुंदरतम संस्कार है। काश तुम यह भ्रम भी छोड़ पाते कि
- 1:25:28तुम शरीर नहीं। अंत में इसी भ्रम को छोड़ना होता
- 1:25:33है। तुम मन नहीं हो विचार नहीं हो
- 1:25:36भावनाओं नहीं हो यह मान्यताएँ तुम नहीं हो, तुम यह सिर्फ एक सीमित
- 1:25:43शरीर नहीं हो वर्ण तुम विराट हो, यह शुरू होगा दान से।
- 1:25:52धन नहीं है तो सेवा कर ईसाईयत यही कहती है, हॉस्पिटल्स में चले जाओ
- 1:26:03वहाँ कराहते हुए मरीज तुम्हें मिलेंगे, वृद्ध मिलेंगे, जिनका
- 1:26:08कोई वारी वर्ष नहीं। अनाथ आश्रम में चले जाओ,
- 1:26:13वृद्धाश्रम में चले जाओ, वहाँ जाकर सेवा करो, तुम्हारे पास धन
- 1:26:20नहीं है, कोई बात नहीं सेवा करने के लिए शरीर है, इसको सेवा का
- 1:26:26साधन बना लो। यह तुम्हारे भीतर छोड़ने की मत को
- 1:26:39संस्कार को गहरा पड़ेगा और अंत अंत में यह संस्कार इतना गहरा
- 1:26:45होगा अंत मति सोगति। तुम बड़े आराम से इस शरीर को छोड़
- 1:26:52पाओगे और जब इस शरीर को छोड़ोगे तो तुम्हें साफ पता चलेगा कि मैं
- 1:26:57अपने घर को छोड़ रहा हूँ और मैं ये घर नहीं हूँ, वह वेला बड़ी
- 1:27:03महत्वपूर्ण होती है, अंतिम वेला बड़ी महत्वपूर्ण होती है।
- 1:27:10अंत वेला में सच कच पकाई। ओथ पाई नानक गया जा पे जाई, अंत
- 1:27:17वेला में पहचान होती किसने सारी उम्र किया क्या अर्थ?
- 1:27:25लोगों को ठगा था। वो तो यहाँ रह जाए।
- 1:27:29लोगों को गुमराह किया था, वो भी यहीं रह जाएगा।
- 1:27:34तो फिर क्या किया था अगर पुण्य किया था यानी पुण्य का मतलब
- 1:27:38दूसरों के निमंत्रक उपकार करना। सहायता करना तुम्हारे हृदय में
- 1:27:48करुणा बहती रहे, हर वक़्त तुम सहायता करते रहो, यह संस्कार गहरा
- 1:27:58हो जाएगा और अंतवेला जब तुम शरीर छोड़ोगे।
- 1:28:03तो वह बड़ा नाज़ुक विला होगा। तब जग जाना शरीर को जागे जागे
- 1:28:13छोड़ना बस फिर तुम्हारा सिर्फ एक जन्म होगा।
- 1:28:21जिसने जगते जगते, शरीर छोड़ दिया, वह एक झलक पा गया कि यह जो छोड़ा
- 1:28:30वह मैं नहीं हूँ। इसको छोड़ने के बाद भी मैं तो बना
- 1:28:35रहा और यह तुम्हारी। गहनतम स्मृति में छा जाएगी बात
- 1:28:44क्योंकि अंत में जो मती के भीतर गहरी स्मृति होती है वह अग्रय
- 1:28:49जीवन में अंत का विचार अगले जीवन में पहला विचार होता है।
- 1:28:57पहला विचार तुम्हें होगा कि मिश्र मरते वक्त तुमने यह जाना कि मैं
- 1:29:07शरीर नहीं हूँ क्योंकि ये छोड़ दिया है मैंने और फिर भी मैं बना
- 1:29:11हुआ हूँ। नए ग्रह में प्रवेश करोगे तो
- 1:29:18जानोगे। कि मैं नए ग्रह में प्रवेश कर रहा
- 1:29:23हूँ नए गर्भ में प्रवेश कर रहा हूँ, इस जागते जागते मरने और
- 1:29:29जागते जागते जन्म लेने की प्रक्रिया को ही।
- 1:29:36संतो ने आपको सदा से समझाया जीस मरने से जग डरे मेरे मन आनंद मरने
- 1:29:49ही से पाई है पूर्ण परमानंद अगर तुम ठीक से मर रही है।
- 1:29:55तुम्हें मरना भी तो नहीं आता? जीना भी नहीं आता, तुम्हें मरना
- 1:30:02भी नहीं आता तुम्हें अगर जाकर मर गए तो उस वेला में तुम पाओगे, यह
- 1:30:08जो मैंने छोड़ा यह साँप की केंचुलू की तरह था, जैसे साँप
- 1:30:14केंचुलू को छोड़ता नहीं। क्या रोता चिल्लाता है नहीं,
- 1:30:19क्योंकि वह जानता है यह अक्चवली मैं नहीं और मेरे शरीर का कोई भाग
- 1:30:26भी नहीं है। यह मेरे से जुदा है।
- 1:30:32अन्त वेला में अगर तुमने यह जान लिया यह जान गए तुम यह एक अनुभव
- 1:30:40की बात है तो फिर अगला जन्म पुनः जन्म न होए फिर अगला जन्म एक ही
- 1:30:48होगा सर। तुमने पूछा, पुत्र अंत मति शो
- 1:30:56करते, बस अंत वेला महान निर्णायक वेला होता है, वही तय करता है कि
- 1:31:05तुम्हारे अगले जन्म कैसे होंगे और यह होगा निश्चय कर्म।
- 1:31:14कर्म कर पुण्य कर्म कर और भूल जा नेकी कर कुएं में गैर नेकी कर
- 1:31:27दरिया में डाल भूल जा। यहाँ हर चीज़ का पाई पाई का वह
- 1:31:33हिसाब देता है बनाने वाला तो उसके ऊपर छोड़ना सीख तोड़ा सा तो सिर्फ
- 1:31:40सारी चीजों को अपने ऊपर ही मत ले। इसी मूड ताऊ के कारण।
- 1:31:46आज तू संसार में आज भी भटक रहा है इंशाल्लाह तुम्हारा अंत ऐसे ही हो
- 1:32:02तुम जब इस शरीर को छोड़ो तो तुम जानो कि मैंने साँप की तरह खिचड़ी
- 1:32:07को छोड़ा है, वह कैसुअली मैं। फिर तुम पाओगे ऐसी मरणी जो मरे
- 1:32:16बहुर जन्म न होए फिर उसका दूसरी बार जन्म नहीं होता।
- 1:32:20एक ही जन्म होगा तुम्हारा ऐसी मरणी जो मरे।
- 1:32:27बहू रे जनम न होय उसका फिर जन्म नहीं होता फिर तुम्हारा अंतर्मन
- 1:32:36नाचक मधुवन में राधी का नाच। रे मधुबन मधुबन में राधी का नाच
- 1:32:57रे, गिरधर की मुरलिया वाजे। गिरधर की मुरलियां बाजरे मधुबनी
- 1:33:16में राधी का नाचे। धन्यवाद।