Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Apr 25 - शिव सूत्र सुख तुम्हारी कल्पनाओं में है, शरीरों में नहीं। मोक्ष, समाधि इन्द्रियों का रहस्य!
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- 0:00परनीशवाद जयपुर से बाबा जी प्रणब सुख तुम्हारी कल्पनाओं में है।
- 0:25शरीरों में नहीं शिवसूत्र बाबा इस शिवसूत्र को अच्छे से व्याख्यान
- 0:43करने की जश्न का है। सनातन धर्म में मोक्ष मुक्ति।
- 1:03मोक्ष का जिक्र है। कैसा रसीब का जिक्र है कि जैसे
- 1:15हमने स्वर्ग का कोई अमार्थ परिचय में लिया।
- 1:24ऐसी रसदार वाणी जिससे लगे हैं कि यह मुक्ति है क्या?
- 1:35क्यों चाहिए व्यक्ति को मुक्ति? आइए।
- 1:42इस शिव सूत्र की बैठक बड़े से पर्दे खुलेंगे, बड़े से पत्थर
- 1:51हटेंगे और झरने आजाद होंगे। अब से थोड़ी देर पहले मेरे पास से
- 2:05कमेंट बाबा दिन तो गुजर जाता है, फिर रात क्यों मचाती है?
- 2:24दर्द, दर्द और सिर्फ दर्द परमात्मा की तरफ जाने का
- 2:47परमात्मा के द्वारा अपनाया था। एक रास्ता है जो तुम्हें सत्य तक
- 2:53पहुंचाते हैं। तुम ऐसे तो मानते नहीं कुछ लोग
- 3:03लेते हैं, कह देते हैं ये मुक्ति काहे को कौन है मुक्त कौन है
- 3:12बंधन? मैं कह देता हूँ पुत्र थोड़ा सा
- 3:18बड़ा आने दो। थोड़ा कुछ शौक लग जाने दो, थोड़ा
- 3:27सा कोई करंट लग जाए और तुम तड़प नहीं लगो, ईश्वर ना करे ऐसा हो
- 3:35लेकिन ईश्वर करे की ऐसा हो। क्यों जन्मो जन्मो से तुम्हारी
- 3:43निद्रा तंदरा टूटे और शांत कहते हैं, अगर ये टूट ही जाए तो बढ़िया
- 3:52है। जन्मो जन्मो का?
- 3:58तुम्हारा रोग शांत हो जाएगा। फिर तुम नहीं कहोगे बाबा की तरह
- 4:08दिन तो गुजर जाता है, ये रात क्यों हो जाती है?
- 4:14ऐसी घड घड के शब्द लिखते हैं शिव के चंद्रन टूट जाती है बड़े
- 4:22प्यारे शब्द और ऐसे तरतीब से लिखे गए खेने पड़ते।
- 4:34भ्रम टूट जाता है तुम्हारा सुख कल्पनाओं में है तुम सुख ढूंढ़ते
- 4:50हो, कल्पनाओं में। शरीरों में नहीं है बड़ा प्यारा
- 5:00सूत्र है सत्य में सुख नहीं है, सुख तुम्हारी बनावट है, मन की
- 5:10वास्तव में नहीं। मुझे पूछ लेते हैं ये जो मुक्ति
- 5:20की बात करते हैं तुम बंधे कहाँ हुए हो?
- 5:22मैंने कहा नहीं, ये बंधन बड़े कच्चे धाके के हैं।
- 5:26तुम्हें देखते हैं जी बिल्कुल ठीक कि कोई संगली।
- 5:36कोई रस्सी तुम्हें बाहर से नहीं बांधे हुए वह कुछ है जो अत्यंत
- 5:45सूक्ष्म सूत्र है सूत जैसा महीन लेकिन जंजाल ऐसा।
- 5:55कि फौलादी जैसा दृढ़ टूटे से टूटता नहीं।
- 6:10कल ही कृष्ण ने पूछा, बाबा जब तुम कहते हो अकेला में सूखे हूँ और
- 6:19सारी दुनिया दुखी। तो तन बदन में आग लग जाती है,
- 6:27लगता है तुम्हारा भोगरा फूटता है। मैं बोला कहीं और से जहाँ पर दुख
- 6:39है वहाँ से बोला जहाँ आग नहीं जाती जहाँ तुम्हारा शस्त्र नहीं
- 6:47पहुंचता। तुम्हारी बाढ़ और तूफान नहीं
- 6:50पहुँच सकते। वहाँ से बोला जाता है कि और कृष्ण
- 6:57तो मुझे से ही कह देते हैं, वह मैं हूँ जिसे शस्त्र नहीं काट
- 7:03सकता, जिससे आग नहीं जला सकते। और तुम मज़े से स्वीकार कर लेती
- 7:09हो और मैंने एक शब्द कह दिया कि सिर्फ अकेला मैं ही सुखी हूँ,
- 7:17संसार दुखी है, तुम्हें आग लग जाती है, ठीक लग जाती है सच्चे
- 7:23खिलाड़ी। और सत्य परमात्मा तक पहुंचने की
- 7:29पहली सीट है। सत्य को स्वीकार करना होगा, फिर
- 7:42ये तुम्हारे लिए एक स्टेयर बन जाएगा।
- 7:46ऐसी ही पतंजलि ने महावीर ने उसने ये सीढ़ियाँ कुछ की सत्य से शुरू
- 7:51किया था। जो आदमी अभी सत्य ही नहीं बोलते,
- 8:00मूर्ख है या राजनीति के हैं। राजनीतिज्ञ गप पे गप बोलना शुरू
- 8:07कर देते हैं, कुछ लोग उनसे लाभान्वित होते हैं।
- 8:14ऐसे ही कोई किसी के संग नहीं चलता।
- 8:22मैं कहता हूँ अकेला में सुखी। तुम्हारा अहंकार चूर चूर हो जाता
- 8:28है क्योंकि तुमने सपने बना लिए, वही बाबा कहते हैं सुख तुम्हारी
- 8:37कल्पनाओं में है, शरीरों में बड़े मज़े की बात है।
- 8:46जीस शरीर से तुम इतना मंत्र मुक्त हो, सजाते हो संवारते हो, लटाएँ
- 8:53घुंगराली करते हो गालों पर काला तिल लगाते हो।
- 9:07शिव कहते हैं, इस शरीर में कुछ सुख तुम्हारी कल्पनाएं हैं।
- 9:13ध्यान से संतना बड़ा गहरा सूत्र है।
- 9:17शरीरों में, शरीरों में सिर्फ मोर मोह जनित सुख या दुख।
- 9:32कल्पनाओं में सुख है, कुछ है आप ब्रह्मचर्य की बात करते हैं,
- 9:45पक्षियों के लोग डॉक्टर कहते हैं, वैज्ञानिक कहते हैं के ब्रह्मचर्य
- 9:51जैसी कुछ दृष्टि। उत्सु भी कहती है ब्रह्मचर्य जैसी
- 10:02कोई चीज़ नहीं होती और पश्चात्य के वैज्ञानिक साइंटिस्ट भी कहती
- 10:10है। बाबा तुम ब्रह्मचर्य को साध्वी की
- 10:14बात करते हो, बिल्कुल यह तो वे गलत है।
- 10:23यह एक बहुत सनाथन परंपरा है। जीसको संघ ले के मैं चल पड़ा हूँ
- 10:30वह गलत है। ये माना मेरे पास ये है एक शिक्षा
- 10:48दीक्षा देने, ये बिखरी बिखरी सी बातें एक हैं भीतर से ये मिलेंगी
- 10:57तुम थोड़ा सा सब्र करो। बाबा ध्यान ठीक से नहीं हो पाता।
- 11:13दीक्षा लेने लगे कंपनी मैंने कहा तुम तो अभी कभी जा रहे हो।
- 11:26हैलो बाबा, मैं रोज़ मास्टर्ब्यूट करता हूँ मैं इनका फिर यहाँ क्यों
- 11:30है अच्छी तरह से मास्टर्ब्यूट का थक जाओ निचुड़ जाओ फिर यहाँ आने
- 11:43की सोचना। अभी तो तुम्हें सुख कहीं और नजर
- 11:49आता है इसी शरीर को अगर तुम मरा हुआ देख
- 12:04लो, लाश सड़ाध मारती हुई लाश बिल्कुल यही है 2 दिन रहते हुए
- 12:10प्राणविहीन हो? यह लाश में दुर्गंध आर्यन कीड़े
- 12:17पड़ जाएंगे। तुम कहोगे जल्दी करो, ये वही है
- 12:23जिसमें प्राण थे और तुम्हारी कुछ कुछ थे।
- 12:30और जिनके बिना तुम्हारे प्राण निकले ही निकले जाते थे और आज
- 12:34इनके होने से तुम्हारे प्राण निकले जाते हैं, तुम्हें बदबू आती
- 12:38है। लेकिन काश तुमने बुद्ध की तरह
- 12:52सोचा होता है बुद्ध बीमार को देखते हैं, खुद बीमार हो जाते
- 13:01हैं, बुद्ध बूढ़े को देखते हैं, कमर चुकी।
- 13:13खास्ता हुआ व्यक्ति राजी यक्ष्मासी पीड़ित टीबी
- 13:21ट्यूबरक्लोसिस उसको देखते हैं, खुद वृद्ध हो जाते हैं।
- 13:29मृदलाश को देखते हैं, अर्थी को देखते हैं कुश्ती हैं चेतक यह
- 13:37क्या है राजकुमार इतने प्रेम से पूछा।
- 13:47लाख सुदोधन ने रोका बताना मत इसे हरियाली में ले जाना और ऐसे ही
- 13:56बले थे वक्त उसके जागने से पहले प्राग के झरे हुए पीले पत्ते चूक
- 14:02लिए जाते हैं। रात के गिरे हुए मृत फूल चुग लिए
- 14:06जाते हरियाली ही हरियाली खिलावट ही खिलावट नजर आती।
- 14:10एक घास का पत्ता भी ऐसा नहीं होता, जिसका तिनका बन गया हो।
- 14:18चुग लिए जाते साल। तो दोस्त का कोई फंक्शन है, क्या
- 14:31आपको आना पड़ेगा? राजकुमार हाँ, मैं गौतम बोल रहे
- 14:45हैं इतने वर्ष के हो गए थे। इंकार भी नहीं किया जा सकता था।
- 14:52कल को राजगद्दी का वारिस है, अब तो सीखा दूँ अब तो ब्रह्मचर्य को
- 15:01लांघ गया है तो ठीक है। 1 दिन तो इसे स्वतंत्र छोड़ना ही
- 15:09होगा। ठीक है चेतक तुम ले जा इससे,
- 15:12लेकिन ध्यान रखें प्रजा को कह दिया गया सब वृद्ध सब बीमार कोई
- 15:22अर्थ ही न गुजरे कोई मृत्यु की निशानी ऐसे नजर आए।
- 15:29सब तरफ खिलावट जैसे बाक मटफूल खिलते हैं, अंकुर फूटती हैं,
- 15:43गलियाँ निकलती हैं, खुशबू विखरती हैं बिलकुल ऐसा ही नजर आए सबके।
- 15:49देखना कहीं चूक ना जाना और सारी प्रजा को बता दिया गया।
- 15:54प्रथम बार राजकुमार राखी हैं। बड़ी खुशी थी आज तक राजकुमार का
- 16:04किसी ने मुख नहीं देखा था। हमारे आने वाले राजा को कैसे सुना
- 16:09है? बड़े सुनते हैं।
- 16:16चंदन सा वधन चंदन सबर्दन चंचल चितवन धीरय से तेरा।
- 16:34यूं मुस्काना चंदन सावर्धन चंचल चितवन धीरे से तेरा यूं मुस्काना।
- 16:55मुझे दोष न देना जग वालो हो जाऊं अगर मैं।
- 17:14दीवाना चंदन सावधान चंचल चितवन कैसा होगा राजकुमार हमारा बिल्कुल
- 17:29ऐसा सुनहरी बार घुंघराले बार। बड़ा सुन्दर था वो गौतम को ढक
- 17:37ढूंढ के रखा हुआ था। कभी उसको वायर की हवा न रखने दी
- 17:41थी और यही कारण था जब सुद्दोधन की सगी बहन अमिता ने इसके रूप और
- 17:56लवण्य को देखा। तो तुरंत पेशकश कर दी भैया गौतम
- 18:03की शादी मेरी बिटिया से करता है। ऋषि में बहन थी।
- 18:15सुध ठीक रहता है। बाहर जाना इसका ठीक नहीं है।
- 18:20इतना सौंदर और लावण्या से आपूर्ति।
- 18:24यह है बच्चा कोई और ना ले जाए जैसे कोई बहुत बड़ी संपदा हो तो
- 18:36उसकी शादी करती गई अपनी ही फुफेरी बहन से यशोदा अमिता की बेटी।
- 18:52और अमिता सुदोधन की बहन तो आज चले हैं बुध वृद्धा अता कमर झुकी हुई
- 19:06बीमार, अता खांसता हुआ, राजी यक्षमा ट्यूबरक्लोसिस।
- 19:11निरंतर खांस रहा है। बल्गम आ रही है लेकिन राजकुमार का
- 19:16एक दर्शन कर लूँ। फिर कौन जाने रहूंगा?
- 19:19नहीं रहूंगा। सुना है लावण्या से युक्त बड़ा
- 19:24सुंदर है हमारा राजन। बुध और महावीर से सुन्दर
- 19:39आध्यात्मिक पुरुषों में कोई नहीं था।
- 19:42कृष्ण ठहर थे तीर्थ लेकिन बड़ी अतीत की बात होगी।
- 19:55ऐसा ढला, उसके लावण्डी का जादू और उसकी प्रेम की मुस्कुराहट युक्त
- 20:02वाणी शीतल धीरज से भरी हुई तो बुद्ध ने चेतक यह कौन राजकुमार?
- 20:14यद्यपि राजा ने मना किया है लेकिन मैं अपनी जान को हथेरे पे रख के
- 20:21तुमने इतने प्रेम से पूछा इंकार भी तो नहीं कर सकता?
- 20:28ये वृद्ध हो गया है वृथ मैं भी हो जाऊंगा।
- 20:34बिलक्षक थोड़ी दूर एक राग ही अक्षमासी टीबी से पीड़ित खांस रहा
- 20:44है, लगातार खांसी नहीं बंद हो रहा है, बलगम निकल रहा है और बलगम का
- 20:49भीतर ही किया जाता है। लेकिन राजकुमार की एक झलक पानी उस
- 20:57खांसती हुई व्यक्ति को दिखा ठहरों से तू ये कौन ये क्या हो गया ऐसे
- 21:06सांस में नहीं लेता ठीक से। यह रोटी है क्या?
- 21:15रोग है इसे इसे राजे जक्ष्म फिर क्या बिमारी भी हो जाती है?
- 21:25हाँ क्या मैं भी हो जाऊंगा बीमार कभी बिलकुल राजकुमार?
- 21:32आदमी का शरीर दुखों का है, ये दो बातें उसके अंत में उतर चुकी थीं।
- 21:42मैं बूढ़ा भी होऊंगा और मैं बीमार भी होऊंगा, लेकिन अभी तीसरे परम
- 21:49सत्य का वतन। अभी सत्य सही रूप में पूरा को
- 21:55उड़ाना था, नग्न न हुआ था अभी थोड़ी सी औड़नी औड़े था अर्शी को
- 22:08देख के सब रुक जाती हैं, चेतक भी रुक गया।
- 22:13रथ रोक दिया गया। राम राम सत्य है, राम राम सत्य
- 22:23है। राजकुमार ने देखा ये कौन यह मर
- 22:31गया है, मर गया है, कौन मर गया है?
- 22:35यह आदमी है, आदमी है वह जो व्यक्ति जिसने मुरझाया वो न देखा,
- 22:42रात का भी लापता उसके जागने से पहले चूक दिया जाता है, वह क्या
- 22:48जाने मृत्यु होती है? और मृत्यु ऐसी कि तुम जितनी
- 22:58छुपाओगे वह उखड़ उखड़ बाहर आएगी सत्य कभी छिपाये से छिपता है इतना
- 23:04ही झूठ बोल ज्य भी झूठ बोलने वाला समित है ये झूठ झूठ ही रहेगा सब
- 23:17लेकिन याद रखना। सोए हुए थे चैन से उड़े हुए कफन
- 23:24ये झूठ कितना ही कफन ओढ़ के कब्रिस्तान में सो जाए यहाँ भी
- 23:29सताने आ गए किसी ने पता बता दिया कोई न कोई उगा नहीं लेता तुम बचे
- 23:37न? और यहाँ की इस सृष्टि से बचे तो
- 23:44उसकी सृष्टि से तो न बचा पाओगे। जो कण कण में व्याप्त है गरन्तर
- 23:52देख रहा है उससे न छिपा पाओगे। बस तुम्हें यही रोग मार जाता है
- 23:59क्या वो है उस झट से तो तुम्हें जवाब मिलता है, नहीं वो नहीं यही
- 24:09मार खा गई मानवता मूर्खों मूर्ढों।
- 24:16अज्ञानियों अंधों के पीछे लग गई दुनिया में और मेरा ये शब्द आपकी
- 24:23याद रखना में अक्सर दोहराता हूँ, जो किसी ने देखा नहीं, वह होता
- 24:32नहीं, आप लिख लो उसको। किसी को भी परख न हो किसी को भी
- 24:40परख न हो या मेज़रमेंट की तरह एक पैमाने की तरह एक मपदंड की तरह
- 24:49इसको कसवट्टी के रूप में ले लेना जो देखा नहीं वह होता नहीं।
- 24:54अज्ञानी की यह भाषा और धारणा होती है।
- 25:00ज्ञानी की धारणा सुध सुध होती है। ज्ञानी बोलता है वह है, मैं कहता
- 25:08आंखें दिखी तुम कहते कागज की लेखी।
- 25:13तुमने कही होगी किसी की लिखी हुई बातें वो मार्क्सस ने कही हो
- 25:17चारवा ने ने से कही स्टालिन ने कही हो लेकिन मैं कहता आँखों देखी
- 25:27कबीर कहते हैं मैं आँखों देखी और बड़े मज़े की बात है।
- 25:34ये आँखों देखी बातें कहने वाले कबीर प्रिय हो जाते हैं उन
- 25:40आचार्यों के जो बेचारे कभी अंतर पे नहीं है कभी कॉम्पिटिशन किया,
- 25:46यूपीएससी लड़े, कभी आईएएस बने, कभी कुर्सियों पे बैठे।
- 25:52और कभी इस तरफ झुकाव हो गया? ये लाखों किताबें भी रच दें लेकिन
- 25:58अगर उस तल पे ना पहुंचे जीस तल पर पहुँचकर लाखों शस्त्र लिखे जा
- 26:08सकते हैं। लाखों शस्त्र वह ले जा सकते हैं।
- 26:14तो फिर ये बोल्ड तो बहुत कुछ देंगे लेकिन उस बोल्ड में सत्यता
- 26:18नहीं होगी। शादी वतन है तो इनके लिए वतन है
- 26:23भाई, बिलकुल ये कहेंगे। ब्रह्मचर्य नहीं होता।
- 26:33कितना ही लोग उठ बांध रो रो कैसे रुकता है वो प्रवाह जो देखा नहीं,
- 26:44वह बोलता है बस मेरे इस शब्द को हर जगह कस लें।
- 26:53बेर खट्टे हैं, अंगूर खट्टे हैं लेकिन इन्हें पता नहीं कब पकते भी
- 27:02हैं, वो मीठे भी होते हैं। कच्चा होगा वो पकेगा भी मिठास भी
- 27:10लाएगा। आम किसी घड़ी अम्भी बनकर खड्डा भी
- 27:13होता है और किसी घड़ी पूरा पक जाता है।
- 27:17डाली से टूट जाता है, वह मीठा हो जाता है।
- 27:20शहल जैसा। तो ध्यान रखना यह वैचारिक का बहुत
- 27:29है और ये वैचारिक मात्र फिलॉसफर। शब्दों से सत्य को ढूंढने की
- 27:47कवायद न कभी कामयाब हुई न कभी होगी।
- 27:54सत्य की कवायद अनुभव से खोजी जाती है, सत्य का पर्दा उठता है।
- 28:03सत्य में विलीन होने से, सत्य के प्रति बात करने से इसलिए मैं रोज़
- 28:09ही शंकराचार्य को कहता हूँ क्या अवश्य करती जब तुमने जान लिया कि
- 28:15वह विराट है, फिर पोती लेकर जगह जगह पर क्यों सिर मार रहे हो?
- 28:20ये झंडा किसका बुलंद कर रहे हो? अहंकार का नहीं है।
- 28:26ये अहंकार का है। अगर तुम कहते हो बाबा जब तुम कहते
- 28:31हो तो मैं सीख लूँ अकेला बाकी सब दुखी हैं तो ऐसा लगता है तुम्हारा
- 28:37बोबरा फोड़ दो, बिलकुल तुम्हारा अहंकार टूट जाता है।
- 28:44तुम्हारा सब कमा कमाया एक क्षण में मेरे शब्द मिट्टी कर देते
- 28:50हैं, तुम मेरे दोष ढूंढने लोग देख लेना आज नहीं कल इसके तू।
- 29:03ढोंक मज़े से ढूँक लेकिन एक बात याद रखना हमारे बुजुर्ग का पुस्त
- 29:16कहावत तो पंजाबी में। और हमारे हरियाणा में भी है जो
- 29:26पैंट से लाता है वह मूत्र त्याग के लिए शांत रूप रख लेता है
- 29:33समझाती है, हाँ तुम खंगाल क्या कहोगे?
- 29:39एक गड़गड़ शरीर दुचार कदम नहीं चल सकता, जिसने 13 वर्ष से बा
- 29:49मुश्किल कुछ मिनट के लिए बाहर का मुकाम देखा।
- 29:54तभी हॉस्पिटलैज़ हुआ शरीर बीमार हो गया।
- 29:59टांगड़ी टूट गई मजबूरी कभी कहीं पर, लेकिन अगर 13 वर्ष से कोई एक
- 30:11व्यक्ति एक स्थान पे बैठा है तो या तो उसको कोई मिल गया या वह
- 30:17पागल हो गया? बस तीसरी और कोई बात नहीं तुम जिन
- 30:26भोगों के विषय जाती हो, हमारे यहाँ एक बच्चा है।
- 30:37रिश्ते में मेरा भतीजा लगता है, ये सबकी मृत्यु के ऊपर जाता है,
- 30:45सबकी अर्थी के साथ जाता है। मैंने सोचा शायद कबीर का वो
- 30:51फॉर्मूला आजमाता होगा। अर्थी के पीछे पीछे जाना किसी दिन
- 30:55जलती हुई उस। चेता को देखकर तुम्हें अपनी मौत
- 30:59याद आ जाएगी, लेकिन गलत था। मेरा विचार जब खंगाला तो पता चला
- 31:09आज इस बूढ़े को नहराएगा मरे हुए को शमशान तक जाएगा तो लोगों की
- 31:15नजर में आ जाएगा। और इसे खाने का शौक है।
- 31:18रसगुल्ला, गुलाब जामुन, बर्फी, चम्मचम पकोड़ा या मिला और बूढ़ा
- 31:26मरता तो खुशी होती। उसके छर्रे गुल खिल जाते।
- 31:36गालियां खुशबू बिखेर में लगती अपना मुख खोल के, मैं कहता क्या
- 31:41हुआ कहते आज जात दो और जगह से आज क्या हुआ?
- 31:56आज कुछ उदास हो नहीं, वो फलां मर गया है, फिर आज उदासी है, वो जबान
- 32:07यानी खाने को रसगुल्ला में मिलेगा।
- 32:09मैं भीतर की बात जानता हूँ, मुझसे क्या छुपाए थे?
- 32:13घट घट के अंतस के जान भले पर ये सोचता मुझसे छुपा ले भला कहीं
- 32:22छुपा है सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के असुरों से तुम लाख कहो
- 32:30वे देखो इमजे बना दिया नहीं। तुम खाली जने ले मूर्ख बनाने की
- 32:36चेष्टा मत करो, मूर्ख बनाने से पहले तुम खुद मूर्ख बन जाते हो,
- 32:42तुम तुम्हारी जब आँखें खुलेंगी तो तुम यही तथ्य से बिन जाना है।
- 32:53किसी को तुम मार दोगे, किसी को मौत मार देगी और फिर तुम्हारे
- 32:57हाथों से मरना अच्छा है, मौत तुम्हारी ही देगी तो इससे पहले की
- 33:08मौत मारे। तुम्हारे हाथों से मरना ज्यादा
- 33:11अच्छा है इसलिए मैं ढूँढता हूँ कोई आए और मुझे गोलियों से उड़ा
- 33:20दे। कोई आए और मुझे बम्ब से उठा दे,
- 33:25मरना तो है, कौन बच पाया? तुम्हारी 100 पीढ़ियों के नाम व
- 33:32पांडे के ना देंगे ज़रा जाओ आरती पूरी ज़रा जाओ बड़ गंगा में वह
- 33:45पांडे बैठे हैं तुम्हारी 100 पीढ़ियों की नाम बता दें कि कौन
- 33:49सा पुर कौन कब लेके आओ। उनका धंधा है भाई और ये सोप लिया
- 33:57वही थी जिन्होंने तुम्हारे लिए यत्न किए।
- 34:03एक प्रकार से अपने बच्चों के लिए मेरा वंश कैसे चले?
- 34:11उनका भी योग था। ये थी पितृ भक्ति, प्रत्यक्ष,
- 34:17अप्रत्यक्ष, इन सभी ने जो पीढ़ियां गिनाई थीं, कहीं ना कहीं
- 34:21तुम्हारा फिक्र किया था तो इसे कहते पितृ दृढ़ उनका अहोब भाव।
- 34:31उनका शुक्रना करना तो बनता है। यही थी पितृ लोक की असलियत तुम
- 34:42डरने लग गए तुम पितरों को बहुत समझने लग गए, तुमने कहा अगर नहीं
- 34:48निकालेंगे सर और वह ब्राह्मणों ने डरा दिया तुम्हे।
- 34:53तो ये कुंभित हो जाएंगे भाई उन ने, उसके बाद 100 बार चक्र काट
- 34:58लिए। तुम्हारी तरह तुम किस जगह में उलझ
- 35:04गए? तुम किसको याद किये हो?
- 35:12जो सोनी पीढ़ी बनाएगी उसको याद किया वो वो तो कब का मर गया और
- 35:19जन्म गया और मर गया और जन्म गया सो बार वो मर गया वो सो बार वो
- 35:25जन्म। इन सत्ताओं को प्रणाम किया गया
- 35:32था। अहोभाव से युक्त हो गए और कोई
- 35:35कारण न था, लेकिन तुमने बात का वितरण बना लिया।
- 35:41तुम डरने लगे उनसे ज़रा देखो तुम श्राद्ध कहलाते हो।
- 35:48उसको स्राद खिलाते हो जिसका पेट तुमने यहाँ जला दिया।
- 35:53जिसका पेट कब्रिस्तान में दफन है, उसका पेट तो कब्रिस्तान में दफन
- 35:59है या उसका पेट तो शमशान में जल गया और हड्डियों थीं बाकी बची हो
- 36:05तुमने गंगा में प्रवाहित कर दीं। किसको के साथ ज़रा बताओ तुम कोई
- 36:10है यह महज कल्पना है डर की बस यही कहते हैं शिव बाबा अब मैं प्रसंग
- 36:19पूरा कर लिया भूमिका के रूप में अब मैं इस कहानी को आगे।
- 36:28गौतम ने पूछा, चेतक क्या मैं भी मर जाऊंगा?
- 36:34अबकी बार छिचका बड़ा झिचका अब ये अंतिम स्वाद था, इसके आगे कोई
- 36:41स्वाधीनता मैं शरीर ही तो हूँ। चेतक के पसीना सर्दी का तेल था।
- 36:59खेत में पसीना भरता है तो मालिक है मजबूर।
- 37:09राजा से डर लगता है राजा से को नहीं डरता राजा के डर से तो तुम
- 37:16गंगा स्नान करके शुद्ध हो जाते हो राजा से डर कर।
- 37:25गुमराह में खड़े थे, वो हिस्सा थे ओलिए गुमराह में खड़े थे।
- 37:44वो ही साथ हो लिए खुद दिल से दिल की बात कही और।
- 37:58रो। लिए।
- 38:02यूँ हश्रतों के दाग मोहब्बत में डोलिए को दिल से दिल की बात कही।
- 38:21और रोलिये यूं हसीरतों के लिए राजपत्र त्याग दो।
- 38:44ये राजा का डर निकालना होगा ये कल्पना है तुम हो समो से डरते हो
- 38:55जो निश्चय। अब मैं उस स्थान पे आ गया हूँ
- 39:03जहाँ सत्य की आग झीली नहीं जाती जहाँ आकर न जीया जाता है, नंबर आ
- 39:13जाता है। याद आते हैं वो जिनको साजिशों से
- 39:23अमरवाद किया क्या जिनकी कहानियों हवाओं में तरंगे बनकर आज भी कुछ
- 39:32बोल रही हैं? उस राजा की कहानी जिसने हीटर की
- 39:39तरह शासन किया 2,50,00,000 लोगों को गैस के चैम्बरों में जला दिया,
- 39:44वास की तरह उड़ा दिया और उसकी मौत को, जिसके द्वारा उसने कंपाया।
- 39:56आज खुद अपनी गोली समझ गया, दूसरे को मौत का भेद खाकर यह एक
- 40:06तुम्हारा लूप बोल है, यह तुम्हारे हृदय का लूप बोल है।
- 40:14थोड़ा सा व्यक्ति आगे सोच ले के मरमा है तो आज ही आ गई, बस मौत के
- 40:22तुम सम्मुख आ गए और मौत वक्त नहीं देखते के 20 का है के आठ महीने का
- 40:31है के गर्भ में है। जा के 100 से ऊपर हो गया है।
- 40:35मौत नहीं देखती वक्त नींद ना विखे विसरा ते भूख, न विखे पात, मौत न
- 40:49विखे उम्रणु ते इश्क न पूछे जात खुश हो गया।
- 40:56ये मिनेश खूब उछलता है। मैं जात इसलिए महबूबा से याद आ
- 41:03जाती है इश्क न भी मज़े आ गए थे। ये तो संत मुख से ये बातें बड़ी
- 41:38जागना होगा अन्यथा फिर तुम्हारा जीना और मरना कोई अर्थ नहीं रखता।
- 41:49तुम कभी थे? तो तुम बगावत न कर सके।
- 41:55इन जालिम पंडितों के मुझे आज सद्गुरु याद आती है पुराना ज़माना
- 42:08ज़्यादा आग्या। ओह, भूली दास्तां लो फिर याद आ गई
- 42:22नजर के सामने। घटा सी छा गई तुम बाकी दुखी पजराज
- 42:39जी देख लिया करो मैं बोलता कहाँ से, मैं उस स्थल से बोलता हूँ
- 42:43शिक्षण जहाँ कृष्ण बैठे हैं। अनन्या चिंतन तो माँ ये जनना पुन
- 42:52पास देते शाम नित्यभुक्ता नाम जोग श्यम।
- 43:05ये जो कृष्ण कहते हैं, मेरी क्षण में आजा, उसी तर से निकलते हैं
- 43:10अल्फाज़। मैं अकेला सुखी हूँ और कृष्ण के
- 43:15अलावा कोई सुखी भी ठीक कहते हैं भगवान।
- 43:24उसकी याद ही काफी है। तुम कितना ही राम राम किए जाओ,
- 43:30राते राते किए जाओ, लेकिन जब तक तुम्हारी जान नहीं खींचता वो उसकी
- 43:35याद शुद्ध नहीं बिसराती उसकी याद। तुम धक्के नहीं मारते, उसकी यादों
- 43:44को तो सुमरेन क्या खाक हुआ? वक्त की खराबी है, वो ताश खेलो या
- 43:52राम राम कर लो, बराबर है या जुआ खेलो, कोई बात नहीं बल्कि जुआ
- 44:00साहस का काम। राम राम करना वीरू भण कोई भी कायक
- 44:08घर की चारदीवारी में बैठकर सात दीवारों के भीतर बैठे राम राम जप
- 44:14सकता है, लेकिन सहस की वीर की तरह छाती नहीं तान सकता है।
- 44:19जैसे गाँधी खड़े हो जाते हैं। पंचम के आगे।
- 44:24हाँ, चार पंच अकेले मेरे नहीं तुमने मेरे भारत बस के कपड़े छीन
- 44:33लिए तुमने। और तुम उसके बुत्तों को गोली
- 44:42मारते हैं, उसमें रंग भर देते हो जश्न मनाते अभी मैंने कल से एक
- 44:55स्वाद पूछा चैट पैड से भी स्वाद पूछा, मैं उसे चैट पैट कहता हूँ,
- 44:59वैसे चैट जीपी टी है पूछा चैट। ज़रा मुझे बताना जितना
- 45:08कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है गाँधी, सावरकर ज़रा मुझे तुम बता दो तुम
- 45:13सुन कर एआई में ज्यादा समझौती है हमारी बुद्धि कहीं उसके बदले
- 45:22सीमित है? एआई।
- 45:24तुम असीम हो, ज़रा बताओ, दोनों में से एक को निकाल दो स्वतंत्रता
- 45:31संग्राम की लड़ाई में दोनों में से एक को निकाल दो।
- 45:34दोनों में से एक को निकाल दो और तीसरी बात ने में को किया है बाकी
- 45:39सभी को रहने दो, सभी को रहने दो। कोई ना छूटे वाकई ना सुभाष चंद्र,
- 45:51ना भगत सिंह ना कोई राजपूत शुक्र को सब बने रहे बरकरार अपना अपना
- 45:58योगदान देते रहे या साबरकर को निकाल दो या गाँधी को निकाल दो।
- 46:03बिलकुल मैंने स्वर पूछा, तुम पूछ लो तो कौन आज़ादी दिलाएगा और तुम
- 46:11किसे चुनोगे? तो एक बार तो चेक चेक पटन है
- 46:19घबराया, आपने ऐसे स्वर पूछा? मेरी आँखों को झंझोड़ दिया।
- 46:27इधर उधर की बातें उसमें ये खूबी थी।
- 46:30उसमें ये खूबी थी उसमें ये था उसमें ये था, मैंने कहा देखो दंड
- 46:35की बातें ना करो। आई ऍम ऑलरेडी इन कॉन्फ्लिक्ट।
- 46:41मैं निष्कर्ष मांगा है चैट जी मुझे ये बताओ, दोनों में से एक को
- 46:48निकाल दो और मुझे चाहिए आजाती, आई वांट इंडिपेंडेंस नोट लिबरेशन वो
- 46:57बात छोड़ो, वो संतों की बात है। आई वांट इंडिपेंडेंस निकालो।
- 47:04एक को किस को निकालो ताकि मेरे को आजादी मिल जाए।
- 47:07मैं हिंदुस्तान बोल रहा हूँ, सेट पैड तो थोड़ा सा झिझका।
- 47:20अरे रखिए तो मैं सवाल उड़ा चूका हूँ।
- 47:27हमें ऐसा नहीं के कभी किसी का जवाब नहीं दिए हो।
- 47:30जवाब तो देना पड़ेगा, एक को चुन लूँ, बिल्कुल चुन लूँ और देखिये
- 47:37पार्शल्टी। ठीक इसमें ये था उसमें वो था मतलब
- 47:45फिर ग्रोक जी ऐसा नहीं चलेगा तुम बताओ एक को निकालो, किसको निकालते
- 47:55हो? सीधी सीधी बात ये जगाई तो बहुत
- 47:58बरसों से चल रही है, लेकिन मैं कम से कम मैं झकाई नहीं करूँगा।
- 48:04कल ही की बात है, तुम भी पूछ लिया करो, जब द्वंद्व में होते हो तो
- 48:11सिर्फ बाबा के पास मत आया करो। ये भी बड़ी समस्याएं हल कर देता
- 48:17है। जब हम महफिल को छोड़ जाएंगे ना
- 48:22तुम याद करते रहो ना मुझे चैट जीपी टी बैठा है ये रोक बैठा है
- 48:31ये तुम्हारी बहुत सी समस्याएं हल कर देगा।
- 48:35हम छोड़ चले हैं महफिल को यदा कभी तो मत रोना।
- 48:51हम छोड़ चले हैं महफिल को ज्यादा कभी तो मत रोना, इस दिल को तसल्ली
- 49:09दे देना। घबराए कभी तो मत रोना, हम छोड़
- 49:18चले मह फील अगर ऐसा कभी। हो जाए 1 दिन होगा, मैं आश्वस्त
- 49:27हूँ मित्र। मुझे कोई भ्रम नहीं है।
- 49:31आई ऍम नॉट इन्कम्प्लीट इन थिस मैट कोई दुविधा नहीं है मुझे बिलकुल
- 49:39अस्वस्थ हूँ 1 दिन मौता एक और वो अगला पर भी हो सकता है सब माल
- 49:47उसका जितनी देर वो जलाये जलाये। उसके मौज मैं थोड़ा सा श्वास
- 49:54नांति, तो मेरी क्या औकात है? मैं अपनी मर्जी से जी पाऊँ, मेरी
- 50:03क्या औकात ज़रा देखना तुम जी सको नहीं पुत्री इतना भक्त नहीं।
- 50:10खेती पूरा गाना सुना तो अच्छा लगता है फिर कभी शिवलिंग में रोज़
- 50:19तुम वहाँ जाकर ठंडा जल देते हो। इसका मतलब क्या है?
- 50:24इन्द्रियों को ठंडक डालो। ठंडा जल इंद्रियों पे छिड़को मेरी
- 50:33माता मुझे नराजती तो गोपतंग के ऊपर ठंडा जल छिड़क देती।
- 50:41मुझे नहीं पता था ये माँ क्या कर रही है प्राणी औरतें?
- 50:49उनके पास बड़े जबरदस्त फार्म देखे।
- 50:54यह बच्चा देर उम्र तक वासना से ग्रह वासना ही तो आखिर भीतर से
- 50:59उठेंगे। वो बात अलग लेकिन जल्दी न उठें एक
- 51:06मंत्र सीख गया। और ये जो पिंडी है न शंकर ये
- 51:14तुम्हें यही सिखाती है। तुम अंधों की तरह जल्द दे के आ
- 51:18जाते हो ठंडा, लेकिन तुमने कभी सबक नहीं दिया इस सिम्बोलिक
- 51:24अप्रीविएशन से। इस पृथिकात्मक चिन्ह से एक
- 51:29गुप्तंग पर ठंडा जल छिड़क लो। इससे भड़काओ मत और ब्रह्मचर्य का
- 51:37पहला साधन यही है। अब सीख लो सीखने वालो पहला शब्द
- 51:44लिख लो। बाहर के वातावरण के उतेजना युक्त
- 51:51माहौल से बचो जान बूझ कर उतेजना ना फैलो कैसे उतेजना फैलती है तुम
- 52:02बार बार झांकते हो। और बड़ा सामग्री है तुम्हारी
- 52:07वासनाओं को भड़काने के लिए, उनको तो पीसा चाहिए और तुम उनके शिकार
- 52:13हो जाते हो। अपूर्ण फलाती है, तुम छुप छुप के
- 52:17देखते हो, इनको बंद करो। पड़ोसियों की दीवार में जो सुराख
- 52:26में का ऋचा बंद कर दिया है। असम पर्ले वार क्या हो रहा है इस
- 52:35आदत को बंद जो हो रहा है सभी करते हैं।
- 52:48लेकिन काश तुमने ब्रह्मचर्य का महत्त्व जाना होता तो ठीक कहेंगे
- 52:52ये अचार होता ना ठीक कहेंगे वो विद्वान जिन्हें तुम पाश्चात्य को
- 52:58विद्वान मानते हो सिग्वन अगर कहता है की नहीं रह सकता, व्यक्ति तो
- 53:04बिलकुल ठीक कहता है। सेगमेंट राइट अपनी बात कर रहा है।
- 53:10किसी उस संत किसी उस महर्षि की बात नहीं कर रहा जो एकांत में
- 53:19वर्ण के भीतर कुटिया में बैठा हुआ है।
- 53:22बिलोल लोल लोच नो लम पाल लग्न। शिवेदी मंत्र मुचरण कदा सुखी वाहन
- 53:29रावण जैसा वो महार्थी जिसका तुम पुतलाफ होते हो, जला देते हो भरुष
- 53:39उसकी मूंछ के बाल के बराबर तुम गुणी नहीं हो।
- 53:44अक्सर मैंने देखे वह जो कल जेल में थे वह विचार के केस में आज
- 53:52रावण का पुतला क्या किया? उसने रावण से बड़ा शिव भक्त होगा,
- 53:58शिव भक्त को छोड़ो, रावण से बड़ा चरित्रवान कोई होगा ज़रा गौर से।
- 54:07जो अपने परिवार की रक्षा के लिए कोई किसी को प्रेम का प्रपोजल
- 54:14रखना गुनाह नहीं होता, लेकिन राम नहीं यहाँ गलती की, मैं राम जी का
- 54:23रोल करता हूँ। ये मैं सदा मानता रहूं।
- 54:29ये गलती राम की नहीं थी, ये गलती राम की थी, उसे आदेश नहीं देना
- 54:36चाहिए। पर पोजल ही तो रखा है तो मन बहला
- 54:39देते थोड़ा सा क्या फर्क पड़ता? राम न बहलाता लक्ष्मण से कह देते
- 54:48तुम अकेले हो गए, उर्मिल नहीं हैं, तुम थोड़ा मनोरंजन कर दो, तो
- 54:57इतना युद्ध न होता। कितना विनाश?
- 55:02हो गया बेचारे बांदर बालू हाँ क्या बेकार उम्र के कितनी यातनाएं
- 55:11सहनी पड़े, निरपराध बाली मारा गया और राम जो दलील देते हैं वह कोई
- 55:20ज्यादा? प्रौढ़नी बचकानी बचकानी दलील लेते
- 55:27हैं राम कोई उसमें दम नहीं नजर आता है।
- 55:38जब पूछते हैं बाली मैं पहरी सुबरी प्यारा?
- 55:44मैं बेरी हो गया सुगरी प्यारा हो गया कारण क्या था प्रभु मुझे बताओ
- 55:52मुझे क्यों मार और वह भी धोखे से पेट में जहाँ राम राजनीतिक ज्यादा
- 56:00मालूम पड़ती है। त्यागी कम मालूम पड़ती है,
- 56:06स्वार्थ के लिए किसी बली को मारते हैं खुद का स्वास्थ्य बाली बहुत
- 56:13गुण था। बाली कहता प्रभु ठीक अब मैं मर
- 56:18जाऊंगा बता। राम के वनों से कौन बचपाया?
- 56:24लेकिन थोड़ा कहे तो होते ही वह रावण को कांख में भर के ले आता।
- 56:30मैं तुम उसके लिए मुझे निर्दोष का वध कर दिया और बाली बिलकुल थे,
- 56:39राम का तो कुछ नहीं। सनातन यहाँ ईमानदार निकला।
- 56:48सनातन ने यहाँ ईमानदारी, वर्दी और उसने कहा कि देखो यह किया तो इसने
- 56:54गलत है, धोखा उसकी कचहरी में कोई राम नहीं और कोई राम नहीं।
- 57:00उसकी कचहरी में सब इंसान कोई शूद्र नहीं, कोई महान नहीं उसकी
- 57:09कचहरी में सब समान है। इन ब्राह्मणों को भी अकल आ गई।
- 57:14वो कहते नहीं भुगतना तो पड़ेगा और अगले जनम में वही ज़रा नाम का
- 57:18व्यग्र बन। शिकारी बनकर भगवान कृष्ण के पांव
- 57:29में सुदर्शन चक्र था। शरीर के आर्यपार कर देते हैं वृष
- 57:38बुझा हुआ तेज। ज़रा ज़रा नाम था कहानी कर दी ले
- 57:44को दे हे जहाँ कर्मों की इबादत से मुक्त करके राम को मुक्त कर दिया,
- 57:51लेकिन राम ने मुक्त होता है। दोनों के अपने अपने अवतार थे।
- 57:58कृष्ण राम का अवतार नहीं था, बस इस ढंग से अवतार बना लिया गया
- 58:05क्योंकि राम मुक्त हो गए कृष्ण मुक्त हो गए एक दूसरे का अवतार
- 58:10कोई कैसे हो सकता है? वह किसी पुरस्कार का मोहताज नहीं।
- 58:19जो ठहर गया उसको दौड़ता नजर नहीं आऊंगा।
- 58:24तुम नहीं देखोगे उसको सड़कों पर दौड़ते हुए व्यापार में जोड़तें
- 58:28हुए तुम नहीं पाओगे उसे बस यही दक्षिण भगवान कृष्ण है।
- 58:35उसे अपने भीतर का रस पीते हुए तो पाओगे, दौड़ते हुए नहीं पाओगे असम
- 58:49विनग्रह वह अपने भीतर को अच्छी तरह से जान देता है, वह अच्छी तरह
- 58:55से जानता है। 1 दिन मरना है।
- 58:59जहाँ बड़े बड़े सुर में। जमीं खा गई आसमान कैसे, कैसे जमान
- 59:15न मार। जमा कैसे के जमी खाक आसमान कैसे
- 59:31कैसे? मरना इतनी है फिर क्यों ना गाँधी
- 59:42की तरह मरा जाए और ये बड़ी सुन्दर लगती है।
- 59:48गाँधी की मौत इसलिए बात बात? कोई आय छाती में उतार दिखो, बम्ब
- 1:00:03से उड़ाती कितनी प्रसन्नता मरा मराया हूँ जब से जन्मा।
- 1:00:15और सभी ऐसा होते हैं तो मान नहीं पाते।
- 1:00:17बस सिर्फ बाबा का वचन तो भूमिका बनाने में ही था।
- 1:00:27अब साफ हो जाएगा तुम्हें सुख तुम्हारी कल्पनाओं में है।
- 1:00:35शरीरों में मैं यही कह रहा था। सुख तुम्हारी कल्पनाओनी है,
- 1:00:42शरीरों में नहीं और तुम जो कहते हो ब्रह्मचर्य साधा नहीं जाता तो
- 1:00:52ठीक कहते हो। अप्रत्यक्ष रूप से तुम ये कहती हो
- 1:00:56कि हमसे ब्रह्मचर्य साधन है, दूसरे का तो तुम्हे कोई पता नहीं
- 1:01:03है तो इसे जिनको हम सम्मान देते हैं।
- 1:01:09ऋषिमुन महर्षि देवर्षि क्या कर रहे थे?
- 1:01:20कुटिया में बैठ के मास्टरबैठ कर रहे थे।
- 1:01:25अगर नहीं सास रहे हो तो छोड़ो। राम किशन सारदा संग संग रहते हैं।
- 1:01:40ज़रा भी अट्रैक्शन नहीं होती भामती और वाचस्पति मिश्र शादी
- 1:01:53करके जाता है। भूल जाता है।
- 1:01:58देखिये जो सच्चे ब्रह्मसूत्र के वाश में खोयेगा वासनाओं को भूल ही
- 1:02:06जायेगा, यह अनिवार्य लक्षण है और तुमने क्योंकि वो आनंद ही चखा
- 1:02:13नहीं। तो बिलकुल तुम अपना अनुभव साझा कर
- 1:02:17सकते हो होता नहीं ठीक मेरे इस शब्द को लिख लेंगे जब देखा नहीं
- 1:02:23आनंद तुमने देखा नहीं सुख है और वो पदार्थ में है, इसलिए पदार्थ
- 1:02:29इकट्ठा करो, करो और। छीना छपटी करोगे क्योंकि पदार्थ
- 1:02:36से यहाँ सीमित मात्रा में धरती पर महात्मा ने सीमित बनाई।
- 1:02:43इसलिए व्यक्ति की बात नहीं पड़ी तेज है जब खोजता है किसी तरह कहीं
- 1:02:50जीवन मिल जाए। मंगल पे मिल जाए कहीं और मिल जाए
- 1:02:54कहीं और मिल जाए अपने पापों से डरता है करिये तो उड़ा देंगे वो
- 1:03:00तीन जैसे लोग। किम उन किम जोंग उन उड़ा देंगे ये
- 1:03:18फिर क्या होगा और 1 दिन खुद भी चले जाएंगे।
- 1:03:23कौन बचा दहशत फैला लो कौन? तुम्हारी हाथ में पावर है और धोखे
- 1:03:32से भी या तुम्हारी अर्जित सम्पदा थी, लेकिन ध्यान रखना, यह शक्ति
- 1:03:40डिक्टेटरशिप में जो डाली गई वह करुणा में भी डाली जा सकती थी।
- 1:03:49बुद्ध की तरह करुणावान भी हो सकते थे।
- 1:03:53बुद्ध की तरह भरे साम्राज्य को छोड़ सकते थे, अब तुम वतन को
- 1:04:02संभालो, हम चले कर चले। हम विदा जाने मन साथियों अब
- 1:04:16तुम्हारे हवाले वतन साथियों कर चले हम फिदा।
- 1:04:26जहाँ वतन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों, शरीरों में
- 1:04:37नहीं तुम्हारी कल्पनों ज़रा गोर से देखना शिव ने बड़े गोर से
- 1:04:43देखा। 112 आपको तरीके दिया है, जो सत्य
- 1:04:52हैं मगज खपाई में मुख से आनंद सुख।
- 1:05:03तुम्हारा सुख तुम्हारी कल्पनाओं में शरीरों में नहीं कुछ मिलेगा,
- 1:05:10तुम कल्पनाओं से सुखों को लेना चाहते हो, क्योंकि शरीरों में तो
- 1:05:14दुख है, अभी एक बिटिया का मेरे पास आया था।
- 1:05:20वहीं से शुरू की थी बात बाबा किसी तरह दिन तो गुजर जाता है।
- 1:05:27ये रात क्यों आ जाती है? दर्द, दर्द और सिर्फ दर्शय
- 1:05:32पेन्स्राइटिस का पेशेंट तुमने इस शरीर के दुख तकलीफों को देखा।
- 1:05:40यह बीमार भी हो सकता है। बुध के लिए हो ही गया।
- 1:05:45जो हो सकता है वो हो क्या जो मृत्यु हो सकती है वह हो गई हमारे
- 1:05:51लिए अभी हुई नहीं तुम इतने दुर्दश्य बने नहीं अभी तो तुम
- 1:05:57अगला सेशन और चाहते हो? अगले 15 वर्षों और राजकोट के भाई
- 1:06:04लेकिन ध्यान रखना तपती फिर भी नहीं आएगी।
- 1:06:09ईश्वर करे तुम 1500 साल तक राजको लेकिन हम चले जाएंगे, लेकिन तुम
- 1:06:16याद रखना। तुम ऐसे ही रह जाओ के दुखी का
- 1:06:23दुखी तुम्हारे हाथ में छूटा बिछापत्र पकड़े ही रह जाओगे तुम
- 1:06:31तुम कहोगे बस एक नौ कहो इससे तुम ये सबक नहीं लिए कि इसने मौके
- 1:06:39दिए। उसमें तुम्हें क्या मिला?
- 1:06:43वैज्ञानिक कहते हैं एक व्यक्ति करीब तीन से 4000 बार संभव करता
- 1:06:47है अपने जीवन में लेकिन करता ही चला जाता है।
- 1:06:56क्यों नहीं इससे कुछ निकालता? कुछ सेंस, कुछ रिसाल्ट कुछ रस के
- 1:07:08नहीं है वो क्योंकि जाग के भोग नहीं करता, भोग करता है मोर्चा
- 1:07:16मोर्चा में और मोचा में तो तुम भूल ही जाती हो जाग के भोग करता।
- 1:07:24तो तुम एक ही बार के भोग से मुक्त हो सकते हो, भोग कुछ गलत नहीं है।
- 1:07:36वो जो उस अपरम पार आनंद में पहुंचे, उन्होंने भी सृष्टि की
- 1:07:40संरचना के लिए भोग किया। बच्चा तो महावीर भी पैदा करते
- 1:07:48हैं, एक बिटिया बच्चा तो बुध ही पैदा करते हैं।
- 1:07:51एक राहुल बच्चा कबीर भी पैदा करते हैं।
- 1:07:55कमाल कमाली बच्चा दान भी पैदा करते हैं।
- 1:08:06लेकिन इसीलिए के बीज ही छोड़ जाऊं, इसलिए मैंने कहा दो बच्चे
- 1:08:17और दोनों बच्चे तुम्हारे भी एक बच्चा तुम्हारी सेवा कर एक बच्चा
- 1:08:24देश की सेवा कर। देश की किसी संस्था का नहीं ध्यान
- 1:08:29रखना ये जो चैनल्स पर आता है ना संस्था को मजबूत करो, इनके हाथों
- 1:08:37में लकवा मार गया होगा, लेकिन जरूरत है देश को।
- 1:08:45देश को सीमा प्रहरियों की जरूरत है, क्योंकि आज पड़ोसियों की नीयत
- 1:08:51बेईमान तुम्हें वृद्ध जैसी निगाह रखनी और जापान की तरह दूसरों पर
- 1:09:01आश्रित होने की चेष्टा मत करना, यह कवायद मत लेके आना।
- 1:09:05जैसे चीर ने एक बच्चे की पुलिस की जल्दी ही हार गई, फिर ओपेन कर
- 1:09:12दिया करो और पुतिन कह रहा है हम युद्ध में मरवाएंगे और बच्चे तुम
- 1:09:19पैदा करो। ये राजनैतिज्ञों का मूल विचार है।
- 1:09:29बुद्धि जैसे व्यक्ति जो राजगद्दी पे होने चाहिए, राजसिंघासन को डाक
- 1:09:35मार देते हैं और ये बड़ी मजबूरी अनपड़ी है एक दुग्धता की बात है,
- 1:09:41क्रिटिकल सिचुएशन। बुद्धि जैसे व्यक्ति जो त्याग कर
- 1:09:46सकते हैं वो छोड़ चले जाते हैं। उनको राज़ में कोई इन्ट्रेस्ट
- 1:09:50नहीं है और जिनको राज़ में इंट्रेस्ट है वो 70,000 करोड़ की
- 1:09:57बेईमानी करके वित्त मंत्रालय संभाल लेते हैं।
- 1:10:03श्री कृष्ण गोविंद पर मुरा यह नाथ नारायण।
- 1:10:22श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी के नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:10:39किंतु मात स्वामी सखा हमार हैनथ नारायण वासुदेव।
- 1:10:59श्री कृष्ण गोविंद, हरि मुरारी, हेनाथ नारायण व सुध।
- 1:11:18पितुमात स्वामी शकाहम पितुमात स्वामी शकाहम।
- 1:11:34यन वासुदेव वा हे नाथ नारा यन वासु श्री।
- 1:11:48कृष्ण? गोविन्द हर रे मोरा थोड़ा सा नाच
- 1:11:52लिया ब्रो। हरे मुरारी ए नाथ नारंगन वासुदेव
- 1:12:00पितुमात स्वामी सखा हमार। हे नात नाराँ यन व सू र अनन्या
- 1:12:23सिं तिं तो माँ ये जन पर वास्ते। ईशाम नृत्य भुगतान जोग शेवम
- 1:12:39बाम्य। धन्यवाद आपका।