Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Jul 25 - चेतना की सम्पूर्ण गाइड! अंतर यात्रा का रहस्य! राधा कोई स्त्री नहीं थी! असली राधा क्या है?
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- 0:02एनी सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स में एक नाम आता है राधा तुमने
- 0:16पूछा पुत्र? राधा और रुक्मणी एक हैं, उसका
- 0:24जवाब दीजिए। अब हमने पेंडिंग सवालों के जवाब
- 0:29देने शुरू कर दिए हैं। अगर कोई मैंने वायदा किया हो के
- 0:35सवाल मुझसे फिर पूछ लेना, मैं जवाब दे दूंगा।
- 0:38तो आज तू शुरू जैसे दुर्गा शिवाक्षमा दात्री जनता काली,
- 0:50महाकाली भद्रकाली कपालिनी। ये नाम नहीं है किसी के।
- 0:57ध्यान रखना नाम हम नहीं रखती जैसे परमात्मा का कोई नाम नहीं।
- 1:04हम अपनी सुविधानुसार कुछ भी नाम रखते हैं।
- 1:07रिकग्निशन के लिए पानी का नाम पानी नहीं आता।
- 1:15पानी का नाम एच टू वह भी नहीं होता।
- 1:18हमने अपनी सुविधा के अनुसार नाम रख दिया है वस्त्रा उसका कोई नाम
- 1:23नहीं, वह अलग है, दिखता नहीं, वह अनामी है, उसका कोई नाम नहीं।
- 1:33जैसे ही तुमने नाम दिया, जैसे ही तुमने रूप दिया, कैसे ही परमात्मा
- 1:39का मुख्य कारण तुमने खत्म कर दिया।
- 1:46वह निराकार है, वह चेतन है। वह आनंद स्वरूप है और तुम माटी
- 1:58पत्थर की मूर्तियां कर देते हो। क्यों न तो चेतन है न उनमें आनंद
- 2:04है और न साथ हैं। आज हैं।
- 2:08कल को कोई आएगा ठोकर मारेगा, तोड़ देगा राधा इसी भ्रांतियों से एक
- 2:27और नाम जुड़ गया राधा। राधा एक काल्पनिक नाम है।
- 2:36यथार्थ में ऐसी कोई स्त्री नहीं हुई, जो जन्मी थी।
- 2:44किसी मनुष्य और स्त्री के द्वारा विश्ववानव वगैरह जो भी गप शप मारी
- 2:49जाती है। जो बरसाना के अंदर ऐसा कुछ नहीं
- 2:54था। राधा नाम की कोई स्त्री कभी जगत
- 2:59में कृष्ण के संपर्क में आई ही नहीं आई होगी तो कोई ग्वालन।
- 3:12लेकिन मैंने कहा क्षमा शिवा दात्री मंगला भद्रकाली कपालिनी
- 3:23जयंती धात्री। दुर्गा ये सिर्फ गुण हैं तुम गौर
- 3:35से देखो इनके अर्थ निकलो इनके अर्थ निकालो गुणों को धारण करने
- 3:43के बजाय। तुमने मूर्तियां बना दी या गलती
- 3:48हो गई? इंसान से इंसान से नहीं हिंदुस्थ
- 3:58और निश्चित है जो होना था बीज बोया गया तुमने अखंड को खंडित कर
- 4:06दिया। बाकी धर्मों का खुदा परमात्मा
- 4:15गौड़ एक है सिख कहते हैं एक ओंकार।
- 4:29ईसाईयत कहती गॉडेस, 1 ए सलामी कहती अल्लाह एक है लह लह हिल
- 4:47अल्लाह। वह एक है और वही दूज ने।
- 4:59इसलिए तुम देखोगे हम इतने विखंडित हो चूके हैं कि हम एक तरह से मर
- 5:08चूके हैं। जैसे ही कोई चीज़ विखंडित हुई, वह
- 5:14मर गई। तुमने एटम को विखंडित कर दिया,
- 5:20परमाणु दिमाग का हुआ कहाँ बचाया? अब एटम की रेडिएशन बची है, वो
- 5:29घातक है, वो मार्क है। ऐसी ही रेडिएशन बची है तुम्हारी।
- 5:35विकेरणता बची है तुम अगर जिंदा है तो सनातन जिंदा है, वो जिंदा ही
- 5:48रहेगा क्योंकि सनातन कहता है एको ब्रह्मा द्वितीय बनोस्ती आज भी
- 5:54कहता है और सनातन को माना। हिंदुओं ने हिंदुओं ने भगाड़ दिया
- 6:03ब्रांचेसकर् जब तक सनातन सनातन रहा तब तक वो कामयाब रहा।
- 6:15लेकिन जैसे ही सनातन। हिंदू की ग्रस्त में आ गया, वह मर
- 6:19गया भाई फरकित हो गया मल्टी फरकित खंड विखंड विखंड विखंड और टूट गया
- 6:27कण कण में बिखर गया आज कहाँ है हिंदू धर्म?
- 6:32तुम बताओ पूछो। कोई कहेगा मैं शुद्र हूँ, कोई
- 6:38कहेगा मैं ब्रह्म हूँ, कोई कहेगा मैं वैश्य क्षत्रिय हूँ, कोई
- 6:42कहेगा मैं कुछ हूँ, कोई कहेगा मैं कुछ हूँ हिंदू को धर्म तो बाकी भी
- 6:53बई फरक है। लेकिन इतना ज्यादा नहीं हिंदुओं
- 6:59के तो मैं आपको बताया कि घर में पांच पांच भगवान कोलकाता, जय
- 7:05हनुमान, कोलकाता जय शिवे ऐसा पागलपन हर घर में देखने को मिलता
- 7:12है। तुम्हारे भगवान भी एक नहीं है,
- 7:18तुम एक कैसे हो? तुम भीतर से खंडित हो गए हो और
- 7:27मनोविज्ञान कहता है कि जो खंडित हुआ वह पागल हुआ है।
- 7:33वह रस पूर्ण आनंद से पूर्ण कभी न हो सकेगा।
- 7:40वह घृणा, द्वेष, नफरत इसमें बट जायेगा।
- 7:46प्रेम एक करता है, घृणा अनेक करती है।
- 7:51और आज वही वही हो रहा है। तुम एक से अनेक हो गए और इसको तुम
- 8:02विशेषता मान रहे हो, जबकि विशेषता कहाँ है।
- 8:12तुम विशेष नहीं हो, तुम पागल हो तुम्हारा इलाज होना चाहिए जब तलक
- 8:24हिंदू धर्म अपने पुनः जब तक गंगा। गंगोत्री की तरफ नहीं चलती, तब तक
- 8:34उसका बचना मुश्किल है। उसे गोमुखी की तरफ विपरीत धारा
- 8:43में फिर से चलना होगा। अपने आगाज़ में मिलना होगा।
- 8:50सनातन में समाना होगा जहाँ से निकला सनातन और तुमने उसको भी
- 9:00भक्त किया। हिंदू सनातन हिंदू हुआ।
- 9:07तो बटा बटा और पागल हुआ आज पागल हैं सनातन जब तक रहा भगवान कृष्ण
- 9:20एक बात कहते हैं, वो कभी बांटने की बात नहीं।
- 9:29वो कटवा देंगे, मरवा देंगे लेकिन बात एक ही पहेंगे जो वाटर सत्य
- 9:34हैं नैनम छिद्दन तीर्थशस्त्रमणि नैनम दाहती बाघ कहा और तुमने ऐसी
- 9:47ऐसी कहानियों गड़ ली? एक स्त्री को एक माता को कुछ गिने
- 9:53चुने राक्षसों को मारने के लिए कई दिन लग जाते हैं।
- 9:57कोई क्या करेगा? ऐसा भी क्या भगवान हुआ आज
- 10:04तुम्हारी मिजाई पल भर में ठिकाने लगा देती है शत्रु को।
- 10:11साइंस ने ऐसेऐसे आविष्कार कर दिया है कि तुम्हारा दुश्मन बच नहीं
- 10:15सकता और तुम्हारे अवतारों से राक्षस लोगों का ये कितने कितने
- 10:20दिन तक जोध करते हैं। क्या खाक अवतार थे?
- 10:30राधा नाम की कोई भी स्त्री कभी पैदा नहीं हुई जो कृष्ण के जीवन
- 10:40में आई हो। पहली बात तो इसको इस भ्रम को।
- 10:51जिन लोगों को पता नहीं है, जो लोग अनपढ़ हैं, गवार हैं, शास्त्र की
- 11:02बात को छोड़ो, शास्त्र पड़े होंगे।
- 11:07पहली बात तो शास्त्र ही नहीं पड़े।
- 11:10और पड़े भी हो तो छोड़ो, मैं उनको अभिमान नहीं देती।
- 11:14भीतर का शस्त्र पड़ा होना चाहिए। जिसने भीतर का शस्त्र नहीं पड़ा,
- 11:23उसने कुछ भी तो नहीं पड़ा। पड़ पड़ गड्ढे लगदिये ते पड़ पड़
- 11:30हुए अखवार पड़ पड़ गड्ढे लगदिये ते पड़ पड़ हुए अखवार नानक लिखे
- 11:37एक गल ते बाकी चकना चार बस लेखे एक ही बात लगती है क्या?
- 11:44तुम्हें अपने अंतःस्थ में उतरकर खुद को ही बांटना होगा अन्यथा तुम
- 11:50संसार के सारे शास्त्रों को बांच दो तो तुम सर्व हो सकते हो, तुम
- 11:58आचार्य हो सकते हो। बिलाशक तुम सारी धरती को अपने
- 12:06अनुयायी बना सकते हो, लेकिन ध्यान रखना तुम 1 दिन पागल होने को,
- 12:16क्योंकि इतनी इतनी सूचना ही। जो समाहित करेगा वो भ्रष्ट हो
- 12:23जायेगा। तुम्हारे न्यूरोस 1 दिन इस बार को
- 12:27सह न पाएंगे और ये भ्रष्ट हो जाएंगे।
- 12:32फूट जाएंगे, धमाका हो जायेगा परमात्मा के नाम पर तुमने इतनी।
- 12:42सूचनाएं एकत्रित कर ली हैं कि तुमसे कुछ और बड़े मज़े की बात है
- 12:52जहाँ शास्त्र पड़ा है जीवन का वह तुम कभी उतरे।
- 13:01पढ़ना होता है। ये तो मैं भी कहता हूँ पढ़ना होता
- 13:04है लेकिन भीतर का शस्त्र पढ़ना होता है।
- 13:10बाहर का शस्त्र नहीं पढ़ना होता, भीतर का शस्त्र जिसने नहीं पढ़ा,
- 13:17नानक लिखे एक गल। ते बाकी चकड़ा चार तुम भीतर का
- 13:29शस्त्र नहीं पढ़े बाहर के शस्त्र अगर तुमने पढ़ भी लिया कितने पढ़
- 13:36पाओगे इतने तो तुम्हारे न्यूरोलॉजी में नहीं होते।
- 13:42जीतने शास्त्रों की संख्या है। तुम्हें पता ही नहीं और एक
- 13:47शास्त्र में अरबों अरबों खरबों खरबों शब्द लिखे हुए हैं।
- 13:53कैसे समाहित करोगे तुम? फिर तुम न पागल होगे।
- 14:00क्या संत पागल हो गए? जो संत कहते हैं नो दाई सर
- 14:06रिमेम्बर यूरसेल्फ़, हू अरे यू वो पागल होंगे या तुम पागल हो
- 14:17रिमेम्बर यूरसेल्फ़ इस जगह पे। तुम याद कर रहे हो श्रोतियो
- 14:23समृतियों को तुम याद कर रहे हो शास्त्रों की बातों को फिर पागल
- 14:32कौन हो परमत में बरस से आना है उसने कोई शास्त्र?
- 14:40क्योंकि जानता है पढ़ने के लिए एक शास्त्र दे तो दिया तुम्हें एंड
- 14:47दट इस सुफ्फिसिएंट और क्या क्या है पढ़ने के लिए एक शास्त्र
- 14:56ऑलरेडी देयर? उसमें उतरो और उसको बाचो, बाहर के
- 15:08शास्त्र चाहे सारे पढ़ लो, जिसने भीतर का शास्त्र नहीं पढ़ा, बाहर
- 15:16के सारे शास्त्र बेकार हो जाते हैं।
- 15:18अब सुन लो काम। बाहर से तुम धन कमाओ, पतबी कमाओ
- 15:27सलमान कमाओ औलाद कमाओ पुत्र पोतरादि कमाओ रिश्ते कमाओ नाते
- 15:34कमाओ, भीड़ कमाओ। कुछ भी सुनाओ बाहर का बेहरमुखी
- 15:44होके जो कमाया जाता है अभी शब्द को आप कहाँ हो इसको सर्किल में दे
- 15:50दो बेहरमुखी होके जो भी कमाया जाता है वो झूठ है।
- 16:01वो तुम्हारी प्रॉपर्टी कभी नहीं बन पाएगा।
- 16:04बस इसको आप गांठ दे देना हीरे की तरह बाहर से आप जो भी कमाओगे एक
- 16:11एक करके छांटते रहे तुमने आज तक जो बेहरमुखी हो के कमाया।
- 16:20वो तुम्हारे संग नहीं जाएगा, वो तुम्हारी जायदाद नहीं बनेगा, वो
- 16:25तुम्हारी मल्कियत नहीं बनेगा और अंतर्मुखी होकर तुमने जो कमाया,
- 16:32अंतर्मुखी होकर तुमने जो पाया। अंतर्मुखी हो के जो तुमने खंगाल
- 16:39के सर्च के जो तुमने पढ़ा है मात्र वही तुम्हारे संग जाएगा,
- 16:54इसलिए बाहर। लाखों जन्मों को भटकने के बाद कुछ
- 16:59नहीं पाते तुम बहुत जन्म बीते मेरे मर्दों ए जन्म तुम्हारे लिख
- 17:10एक जन्म अपने लेखे करना ही होगा। और वो जन्म अपने तक पहुंचने का
- 17:18जन्म होगा स्वयं तक पहुंचने का स्थिति प्रज्ञा होने का, अपनी
- 17:28प्रज्ञा तक पहुंचने का, अपनी प्रज्ञा को स्थित होने का।
- 17:38यह जब तक अटल तुमने नहीं खोजा बाहर तुम कुछ भी खोज लो वायुयान
- 17:45खोज लो रियाकश खोज लो चंद्रमा पे चले आओ, मंगल पे चले आओ कोई और
- 17:50ग्रह खोज लो। अब साइंटिस्ट कहते हैं कोई और
- 17:54धरती खोजेंगे भाई, उपहास की बात है ना अरे उल्लू के पट्ठो तुम इसी
- 18:06धरती को क्यों नहीं स्वर्ग बना लेते?
- 18:08इसको दूषित क्यों किया था? क्या यह धरती जीवन के योग्य नहीं
- 18:16थी? यह धरती से सुन्दर धरती और कोई
- 18:22जीवन के योग्य है ही नहीं। बसरते के यहाँ की बनाई हुई
- 18:28व्यवस्थाएँ ठीक हो। हमने व्यवस्थाएँ गलत पैदा की हैं।
- 18:34परमात्मा ने सृजना गलत नहीं पैदा की।
- 18:38परमात्मा ने पृथ्वी ग्रह को बनाकर कोई गलती नहीं की।
- 18:43उसने परफेक्ट ग्रह बनाया है, यहाँ सब कुछ है।
- 18:48लेकिन अगर तुम अपनी गलत वृत्तियों के कारण तंत्र गलत पैदा कर दो
- 19:01नीतियां गलत लगा दो व्यक्ति को इतना।
- 19:12अयोग्य अपना सके कि वह जीवन जीने के लिए लालायी हो के मैं सिर्फ
- 19:17मेरे को ज़िन्दगी दे दूँ। बुरी से बुरी अवस्था जो एक धरती
- 19:24पर हो सकती है पे हो सकती है वो तुमने पैदा करती है।
- 19:30एक दूसरे के ऊपर दोष जमाने के लिए तुमने शक्ति को इकट्ठा किया, यही
- 19:35से गलती होगी। जब एक व्यक्ति शक्ति को इकट्ठा
- 19:41करता है तो पड़ोसी उससे ज्यादा शक्ति को इकट्ठा करता है।
- 19:48इससे कॉम्पिटिशन नहीं तो मैं मरवा दिया और आज भी आचार्य कहते हैं
- 19:52कॉम्पिटिशन करो, मुकाबला करोगे, मुकाबला करोगे तो सम्पन्न होगे
- 20:03भाई अगर सम्पन्न हो गए तो सम्पन्न जो लोग होंगे।
- 20:07जो सर्वश्रेष्ठ से एक नंबर के धनी हो गए या एक नंबर की पथवी से
- 20:13युक्त हो गए। चक्रवर्ती सम्राट हो गए रहे तो वो
- 20:18भी नहीं धरती तुम बल को इकट्ठा करके करोगे क्या?
- 20:26ये जो तुम लोगों को समझा रहे हो, इसका अर्थ क्या है?
- 20:38इकट्ठा करके तुम क्या पिलाना चाहते हो लोगों को जहर?
- 20:54यहाँ आचार्य मुर्गों को पक्षियों को पक्षियों को बचाने की गुहार कर
- 21:01रहे हैं। मैं नहीं कहता कि उनको बचाना नहीं
- 21:03चाहिए, लेकिन सबसे पहले तो मानवता को बचाना चाहिए।
- 21:10एक अमानव बच गया। तो सब बच गए।
- 21:16मानव ही है जो अपने बल के ऊपर सब पैदा कर ले और अगर मानव ही ना रहा
- 21:24तो फिर तुम क्या उम्मीद रखते हो? फिर वो ही अमीबा काल में पहुँच
- 21:30जाएंगे। राधा नाम की कोई इश्क कभी नहीं
- 21:40हुई, जो कृष्ण के जीवन में आई अन्यथा थोड़ी सी जिंदगी की असलियत
- 21:50की तरफ विचढ़। मेरे श्रोताओं में से किसी ना
- 21:59किसी को कभी प्रेम गुरु हुआ होगा और तुम एक बात को अच्छी तरह से
- 22:07जानते हो के प्रथम प्यार भुलाया नहीं जा सकता।
- 22:16मुझे पूछने की आवश्यकता नहीं है कि मैं ठीक बोल रहा हूँ के गलत
- 22:18बोल रहा हूँ, मैं ठीक ही बोलता हूँ, गलत बोलते हैं, प्रथम प्रेम
- 22:26कभी भुलाया नहीं जा सकता, तुम कहते हो कृष्ण की प्रेम का थी
- 22:31राधा। तो राधा को कैसे भूल गए राधा?
- 22:37कैसे भूल गए कहाँ है वो राधा तुम शास्त्रों की ही मानते हो कौन से
- 22:45शास्त्र में राधा का नाम हरिवंश प्राण में है बागत प्राण में है।
- 22:52महाभारत में है श्री मत भागवत में तो बात ही छोड़ो, वह तो किताब ही
- 23:01अध्यात्मिक है और किसी उरान में है राधा का नाम।
- 23:09और उसको छोड़ो प्राणों में है के नहीं है शास्त्रों से हमने क्या
- 23:14लेना देना है? कृष्ण को ही क्यों नहीं ज्यादा ही
- 23:18है कृष्ण ता जिंदगी कृष्ण ता जिंदगी कभी एक बार भी राजा था।
- 23:30अरे मूर्खो जिससे प्रेम होता है वो रोने रोने में बस जाता है।
- 23:40ईदो ने मैनु आंखो रन झा। तीदो नी मेनू आँखों रंझा हीर ना
- 23:48खै खोए तीदो नी मेनू आँखों रंझा और ना हीर ना खै को राजन रांझण कर
- 23:57दी मेहता अब भी रांझण। और कृष्ण ने कभी राधा का नाम नहीं
- 24:11लिया, कहीं तुम्हारे ही किसी पागल ने कोई संरचना किताब करके रख ली
- 24:19हो। छुपा के तो बात।
- 24:23अनीता कृष्ण के जीवन से देखो तुम तुम तो ऐसे पागल हो कि अपनी
- 24:28ज़िन्दगी की बातें शास्त्रों से पूछते हो तुमसे बड़ा पागल और कहाँ
- 24:33है अपने जीवन की बातें कि मैं अपने भीतर कैसे जाऊं यह तुम्हारी
- 24:40ज़िन्दगी से संबंधित प्रश्न है। और तुम शास्त्रों में खोज रहे हो
- 24:44जो शास्त्र बोलता नहीं, जो सुनता नहीं, जो गाता नहीं, जो चिल्लाता
- 24:48नहीं, जिसके मुख ही नहीं हैं, उस शास्त्र से तुम पूछते हो जीवन की
- 24:58बातें शास्त्रों से पूजते हो? मैं कौन हूँ यह बना शास्त्रों से
- 25:07पूछने का सवाल है मैं कौन हूँ इसको तुम जानोगे या शास्त्र से
- 25:15पूछ के जानोगे? आज शास्त्रों से पूछकर जाने वाले
- 25:22लोग महिमा मंडित होने के प्रयास में आपको मूर्ख बना रहे हैं।
- 25:32खुद का जान निर्मल होता है। खुद का जाना प्रमाणिक होता है,
- 25:41खुद का जाना ऑथेंटिक होता है। कबीर सिरे की बात बोल जाते हैं,
- 25:53तुम कहती कागज की लेते हैं। तुम शास्त्र प्रमाणित बातों को
- 25:58कहते हो मेरे लिए बेकार है और मैं कहता हूँ आपका थोड़ी सी बात में
- 26:08सारा कुछ कह के मैंने अपने शास्त्र को खुद बांचा।
- 26:14मैंने अपने शास्त्र तक खुद पहुँच चुकी, मैंने अपने शास्त्र को खुद
- 26:19पढ़ा, खंगाला पढ़ा, जिया नाचा कूदा, मस्त हुआ पालिया पो आनंद का
- 26:35समुद्र। और चुप हो गया।
- 26:43तुम शास्त्रों से मानसरोवर की बातें पूछते हो?
- 26:51कबीर कहते हैं मैं मानसरोवर में उतरा जब भरा पड़ा है।
- 26:59जहाँ वो सम्मान भरा पड़ा है ये वो सरोवर है जहाँ मान भरा पड़ा है
- 27:08जीसको पाकर तुम सही रूप से सम्मानित होते हो वो है मानसरोवर।
- 27:17जपजी साहब की सोलहवीं पौड़ी में बाबा नानक बोलते हैं।
- 27:30पंच परवान पंच पंच कहते संत हो। पंच परवान पंच परधान संत ही उस
- 27:46दरगाह पर परवान होता है जीसको वह एक्सेप्ट कर लेता है।
- 27:52ईशा ने कहा है ओनली दे विल एंटर इन माई गॉड्स किंगडम।
- 27:58हू विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाट किसी भी उम्र का हो, जवान हो,
- 28:08फ्रॉड हो, बूढ़ा हो लेकिन उसका चेतक बच्चे के समान मासूम हो?
- 28:19ओनली दे विल एंटर माइ गॉड्स किंगडम मेरे परमात्मा के राज्य
- 28:25में सिर्फ वही लोग प्रवेश पा सकेंगे।
- 28:29हू विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चा?
- 28:35किसी भी उम्र का हो, चित्त उसका बच्चे के समान निर्दोष हो मशहूर
- 28:43उसको मान मिलता है। बाबा यही कहते हैं सोलहवीं कुड़ी
- 28:48में पंच परवान पंच परधान। पंच किसने कहा?
- 28:54जिसका मन निर्मल है, जो संत हो गया है उसी को प्रमाण करता है, वह
- 29:02उसी को एक्सेप्ट करता है, वह वही उस क्षेत्र तक पहुँच पाता है,
- 29:09पापी झूठ बोलने वाला। गप्पी नहीं पहुँच सकता।
- 29:17पंच परवाण, पंच परधान, पंचे, पांवई, दरगाह, मान संत जो हृदय
- 29:26निर्मल यह होता है, वह उस दरगाह में मान पाता है।
- 29:34मान वहाँ है जहाँ बात बाबा करते हैं, तुम मान खोजते हो मानसरोवर
- 29:45में वह मान नहीं देखिए मानसरोवर में।
- 29:51यहाँ के मानसरोवर में तुमने नाम रख दिया पानी मिलेगा, आनंद नहीं
- 29:59होगा पानी में चेतना नहीं होगी पानी में, जबकि भीतर के मानस्वर
- 30:07में तुम्हें चेतना भी मिलेंगे। तुम्हें आनंद भी मिलेगा और तुम
- 30:17एक्सेप्ट भी किए जाओगे। पंचा पांवई दरगाह मान और उस दरगाह
- 30:23में तुम सम्मानित भी हो। बात थी उसमान शर्वक।
- 30:33जो तुम्हारी जीत है जहाँ जाकर परमात्मा तुम्हें सम्मानित करता
- 30:39है और तुमने जैसे तीर्थ बाहर तुमने खोज लिए वैसे ही तुमने मान
- 30:49भी बाहर खोज लिया। जबकि मान भारत में मान का सर्वर
- 30:54भीतर है। पंच प्रभान पंच प्रधान जो इनोसेंट
- 31:06माइंड के लोग होते हैं। वही परमात्मा उन्हें ही एक्सेप्ट
- 31:11करता है। ओनली दे विल एंटर इन माइ गॉड्स
- 31:14किंगडम हू विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाइल्ड जस्ट लाइक ए
- 31:23चाइल्ड। वही संत होता है।
- 31:28उम्र बच्चे जैसी चाय ना हो। उम्र 7080 100 साल का 40502030 का
- 31:36हो, कोई बात नहीं चले का है, लेकिन छेत छेत छेत बच्चे के समान
- 31:45होना चाहिए। ये जो हमने मूर्तियां बनाई।
- 31:48महात्मा बुद्ध भगवान कृष्ण के भगवान राम महावीर ने कभी सोचा
- 31:58इनकी तस्वीर हमने प्रौढ़ व्यक्ति की नहीं बनाई।
- 32:04मासूमियत की बनाई। कहन के दाढ़ी नहीं आई हो, इनके
- 32:09मुछे नहीं आई हो, लेकिन हमने क्यों नहीं उठाई?
- 32:13हमने इनकी चित्त की दशा का वर्ण दिया।
- 32:17जैसे बच्चे के दाढ़ी नहीं है वैसे ही।
- 32:24संत का चित्र बच्चे के समय हो गया इसलिए हमने इन संत लोगों के दाढ़ी
- 32:33नहीं दिखाई। यद्यपि 14 साल का वनवास हुआ,
- 32:39भगवान। ना कोई ना ही था ना कोई इस तरह
- 32:43साथ लेके गए तो कोई ले के गए दाढ़ी तो आई है मुझसे भी बड़ी।
- 32:51लेकिन हमने उनकी तस्वीर दिखाई कैसे बिना मुँह से दाढ़ी के जस्ट
- 32:58लाइक ए चार इनोसेंट? मासूम कोई शरारत नहीं, कोई
- 33:05धोखेबाजी नहीं। आनंद की मूर्ति जीस सामान को तुम
- 33:16बाहर भीतर नहीं खोज सकते, उनको बाहर तीर्थ बना लेते हो, नाम रख
- 33:21देते हो। मानसरोवर।
- 33:24लेकिन वहाँ जाके मान थोड़ी है मिस्टेक में वहाँ जाकर तो पानी
- 33:27मिलेगा, इस नन कर रहा है, लेकिन इस नन शरीर के मैल को धो देगा, मन
- 33:36के मैल को नहीं धो पाएगा, चित्त को निर्मल नहीं करेगा और निर्मल
- 33:43चित्त अति दिन त्याला चित्त निर्मल होना चाहिए।
- 33:51वो ही प्रवेश कर पाए। मानसरोवर।
- 33:59जहाँ जाकर आपको परमात्मा मान देता है वह मानसरोवर बाहर नहीं है, वो
- 34:06हिमालय के पास मानसरोवर, मानसरोवर असली नहीं भीतर का मानसरोवर जहाँ
- 34:14जाके पंच भावे दरगाह मान। जहाँ जाकर संत व्यक्ति संत उस
- 34:23दरगाह में मान पाता है, वह मानसरोवर है, वह मान की कोई कमी
- 34:29है, वह एक बार पहुँच जाओ, परमात्मा तुम्हें सम्मानित करेगा।
- 34:36अभी तुम परमात्मा ने ठुकराए हो। क्योंकि तुम खुद ही दूर हुए अगर
- 34:44ये मान वापस पाना चाहती हो अपना ख्याल खोया हुआ सनमान तो उस मान
- 34:50सरोवर में उतर जाओ जो तुम्हारे भीतर के अंतर्कल में विराजमान आज
- 34:55भी है। वहाँ पहुंचा।
- 35:04इसलिए कबीर कहते हैं, मैं कागज की लेखी की बात नहीं करता बाहर इसमें
- 35:11तो गड़बड़ी भी हो सकती है। यह किसने लिखा तुम्हें पता नहीं।
- 35:17आज हर पुराण के ऊपर हर किताब के ऊपर वेद व्यास की स्टेप लगी होती
- 35:22है। जो व्यक्ति प्रसिद्ध हो जाता है
- 35:27आप उसका नाम लिख सकते हैं। लेकिन कबीर कहते हैं, मैं इन
- 35:31कागजों में विश्वास नहीं करता। मैं तो उस धरातल में उतरता हूँ और
- 35:38सत्य की खोज करता हूँ जो चेतन है, जो आनंद स्वरूप है, उस शास्त्र को
- 35:48पढ़ता हूँ। तुम्हारे बाहर के कागदी शस्त्र को
- 35:53मैं नहीं पढ़ता तुम कैसे कागज़ की लेखें और मैं कहता आँखों देखी मैं
- 36:05आँखों देखी करता हूँ और जिसने आँखों देखा।
- 36:10उसका भ्रम मिटा जिसने भोजन खाया, उसकी भूख मटी जिसने जल पिया,
- 36:18ठंडा, शीतल, उसकी प्यास सिमटी, जो सिर्फ बातें ही भगाता रहा, बातों
- 36:26ही बातों में जो। जिक्र करता रहा।
- 36:30पानी का जिक्र करता रहा। भोजन का उसकी ना भूख मिटेगी, ना
- 36:34प्यास मिटेगी और आज ऐसा ही हो रहा है।
- 36:37सब जगह देखें एक सिक्का कमाने के कारण तुम ज़िन्दगी को दांव पर लगा
- 36:47देते। ऐसा क्या है?
- 36:53कमी उन लोगों की है जिन्होंने धन पाया और धन पाकर जिन्होंने पाया
- 36:58कि नाक कट गई, नाक काटने के बाद उन्हें ही चाहिए था अपना
- 37:04एक्सपीरियंस सार्वजनिक कर देते सत्य रूप में।
- 37:08दोनों ने किया था। आज अंबानी ने धन पाया बिल्कुल
- 37:13पाया, लेकिन उसने कहा कहा कि मेरी रातों की नींदें हराम है।
- 37:18मुझे रात को नींद की गोरी खाकर सोना पड़ता है।
- 37:24रात को जिक्र रहता है। सैकड़ों फैक्ट्रियां, किसी
- 37:28फैक्टरी में किसी ने हड़ताल न कर दी।
- 37:31किसी फैक्टरी को कुछ दुर्घटना न हो गई हो, कहीं आग न लगी।
- 37:36तुम्हें नींद आती है भला नींद तो उसे आती है जो दिन भर मेहनत करता
- 37:43है, पत्थर कूटता है। और भरी दुपहरी में गर्मी के मौसम
- 37:48में उन अनकटे पत्थरों के ऊपर सो जाता है।
- 37:56उसके पास से डेवलप का उसके पास फोल्डिंग बैटरी है।
- 38:02लेकिन नींद है उसके पास और नींद ही परमात्मा की।
- 38:07नियामत है तुम्हारे पास बहुत से पदार्थ हैं, खाने के 3600 प्रकार
- 38:13के बुजुर्ग तुम अपने भगवान को 56 भोग लगाते हो, लेकिन भगवान को भूख
- 38:19ही नहीं है, तुम पागल हो? लड्डू गोपाल को भोजन कराते हो कभी
- 38:27उसको भूख लगी है एक लड्डू भोपाल को मेरे पास लाया गया कि देखो
- 38:35बाबा लड्डू गोपाल हम इसको स्नान ध्यान करवातें हैं, सुलाते हैं,
- 38:39एसी में खुद पंखे में सो जाते हैं।
- 38:43इसको खिलाती हैं तो बढ़िया चूरमा। मैंने कहा ठीक तो मैंने कहा ये
- 38:53खाता कहाँ है? इसका मुख कहाँ है?
- 38:56कहता है ये देखो ये बना रखा है ठीक है तो इसके दांत कहाँ है?
- 39:01दांत हैं, अंदर हैं। चलो ठीक है, पानी पीता है, हमारा
- 39:06पीता है तो फिर ये बता दो इसको मूर्ति भी तो आती होगी, मूत्र
- 39:12मार्ग कहाँ है ये बताओ अरे वाह वाह तुम गन्दी गन्दी बात मत किया
- 39:18करो क्यों भाई? जब तुमने लड्डू को पाल बना लिया
- 39:24तो मूत्र मार के लगाने में क्या बिगड़ता है?
- 39:26सर तुम्हारा लगा देते हैं भीतर सारा कुछ स्टमक लार्ज लिवर लगा
- 39:37लेते, किडनी लगा लेते। लगा लेते बैंक से लगा लेते क्या
- 39:42बिगड़ता था भाई लगा लेते उल्लू के पठ्ठो चलो यहाँ से जाओ तुम पागलों
- 39:50का यहाँ का काम तुमको यहाँ बुलाया किसी दिन हाँ बहुत से लोग कह देते
- 39:55है मुझे कमेंट आ गया, मैंने प्रेमानंद के बारे में बोला।
- 40:00एक कमेंट आ गया उसके सामने बोलूं नहीं, मैं कहा तुम्हें भी अच्छी
- 40:04तरह पता है, 13 साल से भीतर बैठे हो, मैं बाहर निकलूंगा नहीं, उसके
- 40:08सामने बोलेंगे नहीं। अरे वही मेरे पास आके बोलते हैं।
- 40:16मधु राजा कुंज केली की यात्रा करता है।
- 40:19मैं तो बाहर नहीं निकला और बोल भी दूंगा उसके पास जाके तो बोलती बंद
- 40:25हो जाएगी, ध्यान रखना मैं अपने आश्रम में बैठ के बोल रहा हूँ,
- 40:31मैं अपने आश्रम में बैठ के बोल रहा हूँ, मैं तो यहीं बैठ के
- 40:33बोलता हूँ। मैं किसी राजा कुंज केले की
- 40:36यात्रा ही नहीं करता। मुझको तो मिल गई राधा राधा चेतना
- 40:41को कहते हैं चेतना का वो स्थान जो आनंद के हर्षोल्लास से ऑलआदित है,
- 40:51जहाँ जाकर हृदय की वीणा बाज उठते, संगीत लहरा उठते हैं।
- 41:01इंसाफयो मानसरोवर हमसफाई। मानसरो काल तलेआ क्यों?
- 41:36ताल तले या क्यों बोले? मन मस्त हुआ तो क्यों बोला?
- 41:50मन मस्त हुआ हाँ तो क्यों बोला? मानसरोवर में मान मिलता है और
- 42:00मानसरोवर कहाँ है? तुम्हारे बाहर के हिमालय के पास
- 42:03में पंच बामी दरगाह मान उस दरगाह में जाते हैं निर्मल हृदयों को।
- 42:15सम्मान मिलता है। कौन देता है वह सजनहार वह बनाने
- 42:23वाला जिसने रोए रोए को अपने हाथों से बनाया वह मान देता है और जहाँ
- 42:34जाकर। तुम आनंद के आवेश से ओतप्रभ हो
- 42:41जाते हो, आनंद का रिवास ओढ़ लेते हो चेतन हो जाते हो ना तो
- 42:50तुम्हारे मानसरोवर में चेतना। ना तुम्हारे मानसरोवर में आनंद
- 42:57है, अब ये कर रही हो कैसे? मैंने कहा वो तो ऐसे तो ठीक है,
- 43:06ये तो मैं समझ गया था मेरे पास लेकिन यहाँ चेत न था।
- 43:12यहाँ आनंद कहाँ है ये भी तो बताओ सर चुप हो जाते हैं एक भेड़ चार
- 43:22है कब से चली थी आज हुई बा कायदा शुरू?
- 43:32पहुंचा कोई नहीं है। प्रसाद कह कह के हाथ गोरे हो जाते
- 43:40हैं, अच्छे लगते हैं ऐसे ऐसे करते हैं, बड़े प्यारे लगते हैं, मैं
- 43:45भी कभी कभी जाया करता हूँ इनकी सर्कस देखने के लिए।
- 43:55यही कमी रहे गई तुम्हारे धर्मों में कि तुम्हारे धर्मों के एक
- 44:01परमात्मा नहीं हुए, तुम्हारे परमात्मा ही आप उसमें लड़ रहे
- 44:08हैं। लट्ठ लिखे।
- 44:13विष्णु और शंकर की झटपट हो जाती है।
- 44:18शंकर ब्रह्मा से लड़ पड़ते है असल मा गुथम गुथ हो जाते है झुंडों
- 44:27झुंडों हो जाते है तुमने कभी रोका उनको?
- 44:34सैकड़ों बार मैंने छुड़ाया। तुम्हारे भगवान आप उसमें प्रेम से
- 44:48नहीं रह सकते तो मैं ये अपेक्षा नहीं रह सकता की तुम आनंद और
- 44:53प्रेम से रह सकते हो तुम वो तो पाती क्यों बचाओगे?
- 44:57पक्का पता है क्योंकि तुम्हारे भगवान ही उस बात में जाते हैं आप
- 45:01आप उसमें लड़ लेते हैं, घोटाला उठा लेते हैं, अस्त्र शस्त्र कष्ट
- 45:05लेते हैं तुम्हारे भगवान तुम क्या उम्मीद करोगे?
- 45:16जैसे घर के मुखिया ही आप तुम्हें लड़ रही हूँ गाँव के बच्चे तो आप
- 45:20तुम्हें लड़ेंगे। ऐसे तो हमारे धर्म हैं तो ये धर्म
- 45:26विकृत हो जाता है। जैसे ही साकार रूप में होता है बस
- 45:29साकार रूप में होने का यही नुकसान है।
- 45:34और हिंदुओं को इसके नुकसान की कीमतें चुकानी पड़ीं।
- 45:38आज हिंदुओं के नाम पर के ऊपर दिग्भ्रमित लोग कर रहे हैं।
- 45:47भ्रम में डूबे हुए काल्पनिक हैलो सुनीसन बहुत साल पहले की बात है।
- 45:55यहाँ के जज थे, मेरे शिष्य थे। बहुत सी जीवन में भी आपादापी बहुत
- 46:01होती है, मुझसे पूछ लेते है कोई कष्ट, क्लेश होते है।
- 46:05जजों के ऊपर कौन सा कष्ट क्लेश नहीं होते ज्यादा आते है तभी तो
- 46:10देखा ना? तुम्हारा चीफ जज सुप्रीम कोर्ट
- 46:19पत्थर की मूर्ति गणेश की पूजा अब यहीं से हिसाब लग जाएगा।
- 46:24कितना दिमाग है? गणेश की पूजा करने वाले गोबर गणेश
- 46:32होते हैं। और इन्होंने हिंदुस्तान के बड़े
- 46:35फैसले लिए हैं। मैं इससे क्या कहूं?
- 46:44संत कहते तू चेतना में उतरे। और ये अचेतन जड़ की पूजा करें।
- 46:55खुद ही मूर्ति बनाई बुद्धपरस्तों का निराला भगवान देखा है?
- 47:06बुत परस्तों का निराला भगवान देखा है वो तराशा है और नाम भगवान रखा
- 47:11है। खुद ने ही बनाया और नाम भगवान
- 47:16रखा। ये पागलपन नहीं है तुम्हारा जिसने
- 47:22इतनी सृष्टि गाड़ दी। ज़रा आँखें उठा के देखो, दिन
- 47:27सकोगे सच में है यह कोई कल्पना नहीं शंकराचार्य की इस बात से
- 47:36नहीं बात बनेगी जगत मिथ्या। सर मार के देखो थोड़ा सटककर मार
- 47:44के देखो तुम्हें पता चलेगा जगत मित्या है कि नहीं, ऐसे बातों में
- 47:49क्यों भगाते हो तुम? कभी किसी धर्म में शास्त्रार्थ
- 47:55करते लोग देखते हैं। हिंदू धर्म के अलावा किसी धर्म
- 48:02में लोग शास्त्रार्थ करते थे। एक यही धर्म पागल है जो
- 48:07शास्त्रार्थ करता है जिनके बड़े बड़े बूढ़े जिनकी हम पूजा करते
- 48:11हैं शंकर की और बगल में दबाकर शास्त्रार्थ करते हैं।
- 48:18झंडो। ये मुझको हरा दो, हरा दो झंडा
- 48:22पकड़ लो जब ये झंडा इसको पकड़ा देगा फिर क्या होता है झंडा डंडा
- 48:29ये उठा लेगा तेरे जैसा पागल ये हो जायेगा ये इनकी हालत है।
- 48:38तो मुझे नास्तिक समस्या हो गया, लेकिन शक्ति को देखने के बाद
- 48:46असक्ति का खंडन मंडन करना अगर नास्तिकता है तो मैं ये अपराध
- 48:53करता हूँ। शक्ति को देखने के बाद असक्ति का
- 49:01अंडा फोड़ करना खंडन वंडन करना अगर गलत है तो मैं ये पाप करता
- 49:10हूँ। मैं ये अपराध करता हूँ।
- 49:20बस यही अपराध में हर वार करता हूँ बस यही अपराध में हर वार।
- 49:38करता हूँ आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ, आदमी हूँ आदमी से
- 49:56प्यार। करता हूँ हाँ।
- 50:03मैं सुधर से भी प्रेम करता हूँ जैसे तुम ठुकरा देते हो, घर से
- 50:08लगा लेता हूँ मैं वेश को क्षत्री को, ब्राह्मण को सभी को घर से लगा
- 50:14लेता हूँ मैं इंसान की तरह। इंसान हूँ इंसान से प्यार कर ये
- 50:24अपराध कर, शक्ति को देखकर असत्य का भंडाफोड़ करता हूँ मैं अपराध
- 50:32कर। और इसी गफलत में तुमने कितनों को
- 50:37सूरी दे दी? इसी गफलत में तुमने कितनों को जहर
- 50:41का प्यार अपला दिया? इसी गफलत में तुमने अन अलग अनरहक
- 50:47कहने वाले मंसूर के हाथ पैर कट इस्लाम में ये कहना।
- 50:55का? फिर मैं खुद खुदा हूँ, ला इलाहा
- 51:05इल्लाफ। वहीं पूजा के योग हैं।
- 51:11यही तो मैं हूँ, तुम समझ नहीं पाए।
- 51:15ल इलाहा इलाहा वह एक है और मैं हूँ क्या अपराध कर दिया?
- 51:26अगर कोई व्यक्ति उस स्थान पर पहुँच जाए जहाँ वो ही वो ही रह
- 51:30जाए, तो उसका कसूर क्या है? ऋषि भी तो यहीं पहुंचते हैं जहाँ
- 51:36मैसूर पहुंचा जो नियत के पास खबर गई राजा को समझा ले अपने शिष्य को
- 51:53यह जो कहता है अन्ना हक मैं परमात्मा हूँ, खुद खुजा हूँ।
- 51:59ऐसा हमारा धर्म इजाजत नहीं देता। तुम्हारा धर्म इजाजत क्या देता है
- 52:03ये बताओ तुम्हारा धर्म तो यही कहता है कि सूरज गोमता है पृथ्वी
- 52:08क्या तुम्हारा धर्म क्या है तुम्हारा धर्म शास्त्रों में?
- 52:17और कबीर कहते हैं, मैं शास्त्रों की बात तुमसे करता है तुम कहते
- 52:21कागज की लेख और मैं कहता आँखों देख तुम कहते हो हमारे शास्त्र
- 52:31कहते हो, हमारे कैथोलिक। चर्च की जो है वो कहती है की
- 52:37नहीं, सूरज घूमता है गेलिली हो गेलिली कहते आरसी मैंने देखा है
- 52:47सूरज। ओके चिन्ह हमारा धर्मग्रंथ कभी
- 52:54गलत होता ही नहीं है। इसी पागलपन में कितनों को जान
- 52:59गंवानी पड़ती है? कितनो को जहर फैलाया, कितनों को
- 53:03सूर्य लगाया, कितनो को अस्त्र से तुमने उनके अंग परतेगा को काट
- 53:09दिया? मूड़ता तुम्हारी दंड ज्ञानी मुक्त
- 53:18अपराध तुमने किया अज्ञान तुम्हारा मूड़ता तुम्हारी दंड भुक्ति
- 53:25ज्ञानी ये उल्टा बांस बरेली को। उल्टी गग्गा गंगोत्री को ये
- 53:37दस्तूर संसार का है, लेकिन कबीर कहते हैं मैं शास्त्रों की बातों
- 53:46को मानता तुम माने जाओ। मैं कहता आँखों में देख मैंने जो
- 53:56देखा वहाँ जाकर वो मैं बोलता हूँ एक प्रश्नों और भी आया था आप याद
- 54:05करवा देना मुझे जब जी साहब का एक शब्द है।
- 54:10मन्ने की गत कही न जाए, जे को कहें पीछे पर सच आए, इसका सही
- 54:17अर्थ कहें बाबा रहस्य भीतरी रहस्य से इसका क्या अर्थ निकालो?
- 54:22क्या संक्षिप्त में थोड़ा सा वर्धा मन्ने की गत कही न जाए?
- 54:29जो देख के मानता है वह पूजनीय जो शस्त्र को पढ़ के मानता है वह
- 54:37त्याग जी है, वैसे छोटी सी प्रभाषक है मरने के गत कही न जाए
- 54:44जे को कहे प छः प छताए जो देख के मानता है।
- 54:51वैज्ञानिक जो शास्त्रों की पढ़ा लिखी सुनी मानता है वह अज्ञानी तो
- 55:00यहाँ उसकी बात है जिसने देख के मान लिया है पूरे पूरे कौड़ी का
- 55:06मैं फिर से विस्तार करूँगा। आप कभी प्रश्न पूछ लेना, राधा
- 55:13हमारे भीतर की बैठी हुई आंतरिकता सभी देखने वालों ने अपनेअपने नाम
- 55:23दे दिए, कैसे परमात्मा को नाम दे दिया?
- 55:28अल्लाह राम, वह सतनाम गॉड सभी धर्मों ने अपने अपने नाम दिए,
- 55:39जिन्होंने देखा ऐसे ही उससे चेतना हो, सत्य चित आनंद।
- 55:46उस चेतना को सनातन ने नाम दिया राधा सच पूछो तो सनातन ने नाम
- 55:57दिया छेड़ना सनातन के आगे जो विकृत हुआ धर्म हिंदू, उसने नाम
- 56:05दिया राधा। उसने कहानियों बना ली।
- 56:09सोचा होगा शायद ईमानदारी से काम चला हो शुरू की ऐसा मूर्ति बना के
- 56:15ध्यान लगाना आसान हो जाएगा, लेकिन काम बिगड़ गया।
- 56:18बिगड़ गया बिगड़ के सिगड़ गया आज मूर्तियों है, श्रद्धा नहीं।
- 56:28पूजा है, भावनानी छोड़ सूपजार पूजन करते हो, आनंद खो क्या और जब
- 56:46आनंद खो जाए तो पूजा का रस खो जा। जीस गांव में तुम्हें रस्म ध्यान
- 56:54रखना अगर किसी दिन परमात्मा ऐसी व्यवस्था बना दी के उस आंतरिक
- 57:01गतिविधि में जाने के बाद जिसे तुम संभोग कहते हो, तुम्हें आनंद आना
- 57:08बंद हो जाए। वे तुम करना छोड़ दोगे अंतरंग
- 57:17क्षणों में जाने के बाद भी अगर परमात्मा ऐसी व्यवस्था कर दे की
- 57:22तुम्हे आनंद न आये, तुम नहीं करोगे क्यों भरता है?
- 57:30ब्रेक बाद को यहाँ समझ लेना क्योंकि आंतरिक क्षणों में संभोग
- 57:36के क्षणों में तुम्हें पीक प्वाइंट पे जाके आनंद आता है
- 57:42इसलिए तुम करते हो। पूजा कवि की होगी, कृष्ण बड़े
- 57:55आनंद भाव से की होगी। आज भी हैं लोग जो आनंद भाव से
- 58:01पूजा करते हैं। रामकृष्णा परमहंस ने आनंद भाव से
- 58:04पूजा की उसका कोई खर्चा नहीं। भाव आनंद का है तुम पूजा करो, तुम
- 58:14प्रार्थना करो तुम हरदास का तुम नाम स्मरण करो, देखो बड़े प्रेम
- 58:20की बात है, आनंद को उपजने के बाद। तुम नाम चाहे कोई भी दे दो, स्मरण
- 58:31करो, ग्रंथ पड़ो, नाचो कूदो गाओ शास्त्र पड़ो प्रार्थना करो,
- 58:43अरदास करो, लेकिन आनंद के बाद आनंद सहित।
- 58:47आनंद होता और जीस काम में आनंद नहीं वह फोका है फोका बोका बोका
- 59:05राधा राधा करने में तुम्हें आनंद आता है।
- 59:09वह सीधी सी बात समझ रहे है। एक गलती मत खा जा तुम उत्तेजना को
- 59:21आनंद समझी लेते हो, तुम स्टिमुलेशन को आनंद समझी लेते हो,
- 59:28ये धोखा तो नहीं खा रही कभी? जैसे जीवा पर हम कोई ऐसा द्रव्य
- 59:33रख देते हैं। चटकीला पटकीला मटकीला होती तो है
- 59:41वो सिम्युलेटेड चीज़ तुम कहते हो बहुत मज़ा आया आनंद आया।
- 59:49वो आनंद नहीं होता, वो टेस्ट होता है और टेस्ट अत है।
- 59:53उत्तेजना तुम्हारी पूजा आज है, लेकिन मात्र कर्मकांड तुम्हारी
- 1:00:03अरदास आज है, तुम्हारी प्रार्थना है।
- 1:00:08हमारे पाठ हैं। रामचरित मानस का पाठ आनंद का है,
- 1:00:15जिसके लिए किया गया था भूख हो गया और जब ईख में गन्ने में रस नहीं
- 1:00:22रहता, लोग बिजाई बंद कर देंगे। किसी दिन धरती के अंदर उठने वाला
- 1:00:31फूल अगर सुगंध ना बिखरेगा तो लोग फूल लगाना बंद कर देंगे।
- 1:00:35फिर फैक्टरी से फूल बनेगा। ठीक खेलेंगे लेकिन सुगंध से विहीन
- 1:00:42होगी। परमात्मा ने एक चीज़ जो बीच में
- 1:00:46डाली वो तुम सदा ही चूकते चले जाते हो और उस चीज़ की एवज में
- 1:00:52नकल बना लेते हो, जिसके भीतर आनंदनुमा खुशबू नहीं होती।
- 1:00:58आनंदनुमा रस नहीं होता, आनंदनुमा नृत्य नहीं होता, गायन नहीं होता।
- 1:01:04ये सब खो के आज लकीर बैठ रहे हो सिर्फ तुम बात कर रहे हो आनंद का
- 1:01:13जीस मस्ती से गाया नानक ने शब्द तो उसने ही प्रयोग किया, लेकिन
- 1:01:21मस्ती पहले आई। ध्यान रखना शब्द बाद में तुम्हारे
- 1:01:30पल्ले सिर्फ शब्द रह गए मस्ती नहीं कबीर के शब्द बाद में आते
- 1:01:38हैं सुरती पहले आती है, खुमार पहले आता है।
- 1:01:41आनंद पहले आता है रस पहले आता है, रस से जो उपजता है शब्द वो शब्द
- 1:01:50रस की छाया होती है ये तुम शांति को खोज रहे हो शांति कहाँ है आज
- 1:01:57आनंद की छाया है शांत। तुमने सीधे सीधे शांति को कोई जनक
- 1:02:02शुरू कर दिया नहीं मिलेंगे तुम्हें कोलाहल विहीनता मिलेंगे
- 1:02:11नॉइस लेस्नेस और वो शांति नहीं, शांति होती है वो अवस्था जो
- 1:02:18राष्ट्रपूर्ण होती है। समझे तुम हेमाना में चले जाओगे,
- 1:02:25कोल्हल नहीं होगा। मानते हैं अकेली शांति को क्या
- 1:02:28चाटोगे शांति तो कब्रिस्तान में बहुत होती है।
- 1:02:33सोए हुए थे चैन से ओढ़े हुए कफन। सोए हुए थे चैन से ओढ़े हुए कफन
- 1:02:41यहाँ भी सतानी आ गई। किसने पता बता दी आजमियत आज
- 1:02:56पागलपन के कगार में खड़ी है? पागलखानों को अटक आज धरती ही
- 1:03:06पागलों की होती है। इसको अलग से बनाने की व्यवस्था
- 1:03:09नहीं है। आज देखो फिर कैसी कैसी पागल बन
- 1:03:12रहे हैं जब लड्डू को पालो को। साड़ियों के साथ बांध के आदमी
- 1:03:23चले, बर्थ का भार उठा यार पहले बार कम है तुम्हारे घर इसलिए तो
- 1:03:29हिल स्टेशन घूमते हो तुम तुम्हारे भीतर ठंडक नहीं है, तुम्हारे भीतर
- 1:03:35चैन नहीं है तुम्हारे भीतर सुख शांति अनंत की लहर नहीं है।
- 1:03:41तुम बाहर ढूंढती हो कहीं चलो हिल स्टेशन चलो कुल्लू मनाली, चलो
- 1:03:48वहाँ चलो क्योंकि भीतर नहीं गए भीतर नहीं मिला ऐसा नहीं है अभी
- 1:03:54तक तो मिलता है, गए नहीं। आनंद की तलाश है प्रत्येक प्राण
- 1:04:07जोड़ता है, बाहर मिलेगा भी तुमने आनंद के नाम पर क्या क्या
- 1:04:17विकृतियां खड़ी कर लीं? जी, मैं कर्मकांड हैं आनंद खो गया
- 1:04:29कुछ खो गया है तुम्हारा जो खो गया है उसको ढूंढो वो जुदा।
- 1:04:43क्या हुए ज़िन्दगी हो गई वो जुदा क्या हुए?
- 1:05:01ज़िन्दगी खो गयी, शम्मा चलती रही, ए कर्मकांड तो तुम कर।
- 1:05:18रौशनी खो गई आनंद को वो जुदा क्या हुए आनंद क्या जुदा हुआ जिंदगी खो
- 1:05:37गई। आनंद क्या जुदा हुआ, जैसे जीवन ही
- 1:05:43छीन गया आपसे? शम्मा चलती रही, रौशनी हो गई।
- 1:05:59कर्मकांड वैसे ही चलते रहे आनंद खो क्या?
- 1:06:08और जब आनंद खो जाए तो कृत्य बे रस हो जाया कर।
- 1:06:17नीरस भरतम कोशिश कर ढूंढ़ते हो कावा मक्का मदीना तीर्थ यात्रा
- 1:06:27गंगा सागर, हरिद्वार ऋषिकेश चार धाम।
- 1:06:36बहुत कोशिशों की अगर दिल ना बहला बहुत कोशिशों की।
- 1:06:55मगर दिल ना बहला कई साज छेड़े कई। गीत गाए।
- 1:07:20वो जब याद आए भक्ति याद आया। गमे जिंदगी के अंधेरों में हम
- 1:07:45चिराग महोबत। जलाई बुझाए जब याद आए बहुत याद
- 1:08:06आए। चेतना खो गई, चेतना खो गई, रस खो
- 1:08:12गया, आनंद हो गया, आनंद हो गया, चेतना का स्वभाव था, गुण था रस अन
- 1:08:21चेतना खो गई तुम राधे राधे करते हो बात राधे ही न थी।
- 1:08:30बात आनंद की थी बात खुमार की थी, बात रस की थी रस को दिया तुमने रस
- 1:08:39कहीं मिलता ना बहुत कोशिशों थीं मगर दिल ना बहला।
- 1:08:49कई साझ छेड़े, कई साझ छेड़े, कई गीत गाए, बहुत से गीत भी।
- 1:09:08लेकिन वो भीतर की खुमार, वो भीतर की आवाज, भीतर की तड़प, भीतर की
- 1:09:13काशी से ट्रिक्स जब याद आए बहुत भी याद आया यह तुम छटपटाते फिरते
- 1:09:24हो। हाय गद्दी पान हाय नंबर एक हो
- 1:09:29जाऊं हाय मान सम्मान इकठ्ठा कर लूँ हाय ज्यादा सेफ वाला अपना दूँ
- 1:09:36अब कल ये एक आचार एक अगर मैं ऐड ना लगाऊ।
- 1:09:44तो तुम तक आवाज़ कैसे पहुंचेगी? पड़ी करना जन्मी भाई तेरी आवाज
- 1:09:52क्यों पहुंचनी चाहिए ये तो बताओ इस आवाज में है क्या?
- 1:10:04क्या है जो पहुँचना चाहिए? रस है जरूर रस की है रस है तर्क
- 1:10:18तर्क तो तलवार में भी घना होता है।
- 1:10:22तुम्हारे तर्क से ज्यादा घनी तलवार की धार होती है, तर्क के
- 1:10:29इलावा क्या है? तुम्हारे में ज्ञान के कुछ शब्द
- 1:10:35हैं ज्योत्सवक्र ने कहे जो कृष्ण ने कहे उसकी पुनोरक्ति है।
- 1:10:44और तुम्हारी सड़ात न्यूरोन की उनकी तार्किक शक्ति से निकले हुए
- 1:10:50शब्द शब्दातीत को तुम जानते हो क्यूँ जरूरत है तुम्हें एड्स?
- 1:11:00ऐड की क्यों जरूरत है तुम्हें इतनी इसलिए धन तुम्हें और चाहिए
- 1:11:12अभी 10% ही धन मिलता है तो भाई और दिया करो 90% की कमी।
- 1:11:22क्या मैं इसको इनके भीतर का खोखला बनना कहूँ?
- 1:11:2910% ही भरा है भीतर 90% खाली है अभी और दो भाई।
- 1:11:39ये बहुत सिकंदर हैं, ये सब कमा के जाएंगे और सब छोड़ जाएंगे।
- 1:11:49क्यों कोशिश करते हो तुम? डिक्टेटर हो तुम दुनिया को बदलने
- 1:11:54की चिश्ता क्यों करते हो? तुम्हारी इच्छा क्यों है की
- 1:12:00दुनिया बदले तुम ये समझते हो की तुम ठीक हो कहीं ऐसा तो नहीं है
- 1:12:16के वो मिला नहीं तो वो होता नहीं। तुम तर्क देते हो कल तक ओशो को
- 1:12:26गालिया निकालते थे, आज ओशो के शब्द को दोहरा रहे हो एनलाइटनमेंट
- 1:12:33इस आलाड ठीक हम भी जानते हैं। लेकिन बोला किस संदर्भ में उसने
- 1:12:44लाए? वो है जो चीज़ गुम हुई ही नहीं?
- 1:12:47वे स्मरण हुई थी फिर से याद आ गई। उसका कहो जाना झूठ था उसका मिल
- 1:13:03जाना भी झूठ है यहाँ लाए हैं एनराइटनमेंट तुम्हें तो मिला
- 1:13:12नहीं, तुम कहते हो तन। इन शब्दों को तुम पैरालाइज के में
- 1:13:19कैसे करोगे? ओशो के संदर्भ में बोलते हैं,
- 1:13:32इसका तुम्हें अनुमान है? मैंने कभी ओशो को अच्छा बुरा तो
- 1:13:37कहा। अच्छा व्रत तुम्हें कृष्ण को भी
- 1:13:41कह सकते हैं। तुम्हारे समाज के हिसाब से आज के
- 1:13:47हिसाब से कई बार अच्छा भी कहना पड़ेगा, बुरा भी कहना पड़ेगा,
- 1:13:50क्योंकि समाज रोज़ बदलता है। लेकिन मैंने कभी ऐसा कहा रामदीप
- 1:13:57वेरी विगना। रॉंग दी फेस के ओशो वर नॉट
- 1:14:02एनलाइटन ओशो वास नॉट एनलाइटन पसंद कभी का पहले दिन से मैंने कहा ओशो
- 1:14:11वास एनलाइटन। लेकिन तुम तो पहले कह रहे थे वहाँ
- 1:14:16बात्रा बनी वहाँ से कृष्का ए रजनीशपुरम से और आज तुमने
- 1:14:28कंपैरिजन करना शुरू किया? अपनी बातों को सत्य साबित करने के
- 1:14:33लिए दूसरों का ही तो सहारा लेना पड़ा।
- 1:14:40ये कहा की सत्यता है, सत्यता तो होती अगर तुम खुद अपने भीतर जाके
- 1:14:49देखते। वो हेवी के नहीं है, लेकिन हम जब
- 1:14:55तुम्हारी ज़िन्दगी के ऊपर देखते हैं, फुर्सत के लम्हें उसमें
- 1:15:01खाती, ना ही तुम जन्मजात कृष्ण की तरह पीछे से एनलाइटन हो के आए।
- 1:15:10राम की तरफ भी नहीं आया। इस जन्म में कभी कॉम्पिटिशन लड़
- 1:15:15रहे थे, कभी कुर्सी संभाल रहे थे, कभी त्यागपत्र दे रहे थे, नहीं,
- 1:15:21शोर से अपनों के अंदर तुम्हारा जीवन निकल गया।
- 1:15:24कहीं ऐसा तो है? कि तुम थोड़ी जाद्रा मान की
- 1:15:30सम्मान की मात्रा चाहते हो और और कहीं ऐसा तुम मन की मांग ज्यादा
- 1:15:40हो। ये मन मांगे मोर पर ये तो विषय है
- 1:15:46भाई ये तो वासना है। दूसरों को कागज के मोहरे बनाने की
- 1:15:54चीज़ तुम में रस नहीं है, तो एक्सेप्ट की मेरे में रस नहीं है,
- 1:16:03ये मत कहो की एनलाइटनमेंट नीरस होता नहीं भाई किसी ने पिया है।
- 1:16:10और जिनको तुम मानते हो उन्होंने किया है तुम मानते हो कबीर को और
- 1:16:19कबीर ने ये रस भर भर के दिया। सूरत कलारी भाई मतवारी।
- 1:16:28मदमा पी गई मैंने तोड़ ले कहाँ की बात करते हो तुम पागल बना रहे हो
- 1:16:34उन्हें पागल बना सकते हो उल्लू जो तुम्हारे पीछे लग लेकिन जिसने वो
- 1:16:44रस्पी लिया। उसको तुम कतई पागल नहीं, उसको कोई
- 1:16:49भी पागल नहीं बना सकता। कितने ही हवाले दे दो आज तुम्हारी
- 1:16:55और है बात कल और होगी तुम देख लेना जैसे मैंने नीचे के बारे में
- 1:17:01कहा, मैंने नीचे का साहित्य नहीं पढ़ा था।
- 1:17:07लेकिन मैं जानता था कि इसकी बात गॉड इस दट।
- 1:17:12यह व्यक्ति पागल हो के मरेगा और वह मरा पागल हो के मरा उसको आखरी
- 1:17:17दिनों में 11 वर्ष तक वो पागल रहा सी फीलस का बिमारी हो गया उसको
- 1:17:24यौन रोग से पीड़ित हो गया। वो खारिज कर कर के मरा अपनी यूँ
- 1:17:30नको मैं तुमसे क्या करू राज़ को राजा ये क्या समझाएंगे तुम्हे?
- 1:17:44इतने करोड़वान हो गए हैं दो चार पशुओं को बचाने के उदाहरण देखे,
- 1:17:53खुद को मेहरबान साबित करने लगे भाई मेहरबान तो एक ही है जिसका
- 1:18:00तुम्हें गुणगान करना चाहिए, उसको तुम मानते हो?
- 1:18:05कोई क्या कहे या तो फिर बुद्ध के ही तल पर आ जाओ।
- 1:18:11जो इंकार करने की भावना या क्षमता रखे की वो है नहीं।
- 1:18:17या तो यहाँ आ जाओ, यहाँ भी तो तुम आते नहीं तुम हो।
- 1:18:23ना खुदाई मिला, ना बसा लिसन ना इधर के रह ना उधर के रह तुम बीच
- 1:18:30में आ गए कुर्सी मिल गई गलती से छोड़ बैठ अब अब क्या कह रहे है
- 1:18:39तुम्हें कोई रास्ता नजर आता है इसलिए ऐड लगाते हो?
- 1:18:43असली कारण असली कारण ऐड तो हम भी लगा सकते हैं।
- 1:18:48मांग कर लोगों से ऐड लगाना क्या मुश्किल है पागलपन से कार्य हो,
- 1:19:00लोगों के कह रहे हो अभी और दान दो।
- 1:19:04अरे लोगों से मांग कर अपनी बढ़ियाई करवा लेना, एड्स एड्स के
- 1:19:11द्वारा ये कहाँ का प्रभुत्व खोजा भाई तुमने?
- 1:19:22गलत बातों में मत उलझाओ मैंने पहले ही लिखा था मैं इसलिए तुम
- 1:19:27लोगों को बुद्धिमान लोगों को लताड़ के लिए लगाता हूँ के वो रस
- 1:19:32है, भाई पिया है, हम पिया है और हमारे पीने का लक्षण है कम बैठ
- 1:19:39गए। कोई आत्मा आपकी नहीं, कोई भागदौड़
- 1:19:43नहीं, हम बोल देते हैं अपनी बात कोई सुने तो अच्छा, फिर न सुने तो
- 1:19:48अच्छा कोई गलत कमेंट कर देता है। हम से बोलते हैं भाई तुमने मुझे
- 1:19:52सुना जाए के जज से। किसी व्यक्ति ने मेरे खिलाफ़
- 1:19:58मानहानि कर दिया, दावा कर दिया, मुझे बुलाया गया, मेरे मित्र थे,
- 1:20:03शिष्य थे गुरूजी, आपके विरुद्ध मानहानि का केस हुआ मैंने कब किसी
- 1:20:10भी आपने उसकी भावनाओं को चोट पहुंचाई?
- 1:20:16मैंने कहा मैं नहीं पहुंची, हाँ आपके प्रवचन ने उसकी भावनाओं को
- 1:20:21चोट पहुंचाई। मैंने कहा उल्लू का पट्ठा वो है
- 1:20:24क्या मैं तो जस साहब बोले कैसे? मैंने कहा उसने मुझे सुना ही
- 1:20:30क्यों? मैंने कब कहा मुझे सुन मैंने भी
- 1:20:34ऐड लगाई। मैंने कहा तुम सब्सक्राइब करो,
- 1:20:38मैंने कहा तुम मुझे सुनो, उसने मुझे क्यों सुना गलती उसकी दंड
- 1:20:45में भोगु भला दो उसको बात नहीं है।
- 1:20:52गलती किसकी? दशा ने पूछा गलती किसकी तुमने
- 1:20:55क्यों पढ़ा तुमने इस व्यक्ति को क्यों सुना?
- 1:21:00जब मैं चाहता नहीं कोई मुझे सुन पानी ने कभी कहा मुझे पीओ पानी
- 1:21:07कहता भाई जिसे प्यास लगी वो पी लो, मेरा गुण ये है की मैं प्यास
- 1:21:12को होजा दूंगा। भोजन कभी पुकारना नहीं की तुम खा
- 1:21:16लो मुझे भोजन कहता हूँ भाई जीसको भूख लगी हो, खा लो मुझे भूख मिटा
- 1:21:21दूंगा बस इतना सा ही मैं कहता हूँ मैं एड्स लगाने के बिल्कुल।
- 1:21:32पक्ष में लगाओ, जो भागेगा भागेगा। मैं जानता हूँ किस किस को रोकूंगा
- 1:21:39मैं, लेकिन मैं किसी को कहता नहीं हूँ मुझे सुनो कोई मुझे सुने मैं
- 1:21:49कैसे रोक सकता हूँ? लेकिन मैं इतना ही कह सकता हूँ,
- 1:21:53कृपया करके अगर तुम कमेंट करने के योग्य हो गए हो तो अपना चैनल खुद
- 1:21:57खोल लो। अगर तुम कमेंट करने के योग्य हो
- 1:22:01गए हो तो फिर खुद का चैनल खोल लो कमेंट करने से अच्छा है तुम लोगों
- 1:22:09का जीवन बदलो। तुम मुझे क्या सुना रहे?
- 1:22:27हो? अंसपयो, मानसरोवरु, ताल, तलैया,
- 1:22:48ताल तलैया। क्यों दो ले ये हेड्स फेड्स सब
- 1:22:59ताल तलैया है मन मस्त हुआ। हाँ फिर क्यों दो मन मस्त हुआ फिर
- 1:23:10क्यों? हम बोलते हैं, हम गाते हैं, हम
- 1:23:17गाते हैं और गाना आता है भीतर से हम नाचते हैं प्रफुल्लता की
- 1:23:27मदहोशी में। गीत निकलते हैं सफरित होते हैं
- 1:23:31हमारे लब तक आते हैं और बिखर जाते हैं फिजाओं में खुशबुओं की तरह
- 1:23:41वीडियो बहुत लंबी हो गई। प्रश्न जहाँ से चले गए अगले
- 1:23:46प्रवेश? कबीरा तेरी झोंपड़ी गल करती है के
- 1:23:54पास करण के सो करण के, तू कब है बता?
- 1:24:05कृष्णा कृष्णा। हरे हरे रामा रामा रामा।
- 1:24:53दिलवास।