Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Dec 24 - आत्मा और शरीर का गहरा रहस्य: स्थूल और सूक्ष्म का मेल! Deep Explanation वासांसि जीर्णानि।
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- 0:17वासन, शिजिर्णाणीयथा विवाह नवानिद्रणा तीनरोपण तथा श्रीराण
- 0:33विहार। जी न अन्याय संयाति।
- 0:44नवनि देहि नरोपराण मनुष्य। जीरनानी फटे कटे जीरन शीरन वशनसी
- 1:09वस्त्रों को यथा जैसे। विहाय छोड़ देता है मनुष्य जैसे
- 1:20पुराने वस्त्रों को छोड़ देता है नवानी घृणाती नरो प्राणी ग्रहणाती
- 1:30ग्रहण कर लेता है। नयों को तथा व्यास ही श्री राणी
- 1:40शरीरों को विवाह छोड़कर नवाणी ग्रहणारती।
- 1:51तथा श्री रानी विहाय जीर्णो अनन्या।
- 1:56आणि सैन्यवती नवानी देखिये नए वस्त्र यानी नए शरीर धारण कर लेता
- 2:06है कौन आत्मा? ये शब्द मेरे पास बहुत प्रसन्न
- 2:23थे। ये शब्द बड़ा कीमती है और यह
- 2:30शब्द। गीता को समझने में आपकी बड़ी
- 2:34सहायता करेगा। दूसरे आश्रम में कौन है?
- 2:41अपने जीवन को समझने में बड़ी सहायता करेगा।
- 2:57तीन तलह, एक शूल सीरीज ये जो हम देख रहे हैं ये शूल सीरीज है।
- 3:06ये पंच महाभूतों से बना है। दूसरा सीरीज है सूक्ष्म सीरीज और
- 3:14तीसरी है आत्मा। निश्चित ही यहाँ प्रश्न उठने
- 3:22स्वाभाविक हैं और उठते भी हैं कि जब आत्मा अचल है हेल्ती नहीं।
- 3:35आती जाती नहीं और सर्प व्याप्त है।
- 3:42जब ओमनी प्रेसेंट है वो सभी जगह वो ही वो है तो आत्मा कैसे कहाँ
- 3:52से निकल के कहाँ जाएगी और क्यों जाएगी?
- 3:57ये सवाल बड़ा महत्वपूर्ण है, भरा हुआ है, जिसे ब्राह्मण सारी सृजना
- 4:06जैसे ओतप्रोत है। वह कहाँ जाएगा और कहाँ से
- 4:17छोड़ेगा? ये प्रश्न बिल्कुल जायज है।
- 4:23प्राण्य वस्त्रों को छोड़ देता है, आत्म नए वस्त्रों को ग्रहण कर
- 4:30देता है। आत्म।
- 4:34लेकिन आत्म सर्वव्यापक है मैंने कर्म फिलॉस्पी के प्रवचन में आपसे
- 4:41कहा था कि सूक्ष्म शरीर की यात्रा है।
- 4:50जिसे आप अध्यात्म कहते हो, मैं यहाँ से अमेरिका जाऊं और अपनी
- 5:01किताबें साथ लेकर जाऊं और किताबों को पढ़ने के लिए।
- 5:08क्या मैं विद्युत को भी साथ लेकर जाऊंगा?
- 5:15आपको विद्युत वहाँ है जब विद्युत वहाँ है।
- 5:25तो यहाँ से विद्युत को उठाने की आवश्यकता क्या है वहाँ पर और
- 5:30ध्यान रखना यहाँ कि विद्युत वहाँ जा भी नहीं सकते वहाँ किताब पढ़ने
- 5:41के लिए विद्युत है यहाँ भी है। फिर विद्युत को वहाँ ले जाना
- 5:52जरूरी क्यों है? आत्मा क्यों करती है सफर, जब
- 6:03आत्मा ए मूवेबल है, हिलती नहीं? कहीं जाती नहीं जा सकती।
- 6:09नहीं देखी नई बात बताता हूँ, तुम्हे कहीं नहीं जा सकती।
- 6:16आत्मा क्यों नहीं जा सकती? सब जगह भरी पड़ी है, सब जगह भरी
- 6:24पड़ी है जो। वह कहाँ से हिलेगी और कहाँ जाएगी?
- 6:37गीता के सुनने वालों को सबसे बड़ी कठिनाई इस सूत्र से आती है।
- 6:47कृष्ण का यह सूत्र उलझाया जाता है।
- 6:56और आत्म कृष्ण कहते हैं न जन्मति है, न मरती है, फिर जाति काहे है?
- 7:07ये दो गलपन कृष्ण क्यों कर रहे हैं?
- 7:16कृष्ण कहते हैं, आत्मा न जन्मती है, न मरती है, न आती है, न जाति
- 7:22है कि तुम कहते हो कि आत्मा। जीर्णान यथाविहाय जीर्ण क्षीण
- 7:34वस्त्रों को छोड़कर नवानि ग्रहणति नरोप्राणी नयो वस्त्रों को ग्रहण
- 7:42कर लेती है तो पुराने वस्त्रों को आत्मा।
- 7:50छोड़ती है, क्यों छोड़ती है? आत्मा का तो जन्म नहीं होता और
- 7:56आत्मा का मरण भी नहीं होता। सबसे डिफिकल्ट सूत्र है जो उलझा
- 8:06जाता है। मो।
- 8:10मोक्ष ये दोगलापन क्यूँ है? कृष्ण में कृष्ण कहते हैं आत्मा न
- 8:21जन्मती है, न मृती है, न कटती है, न जलती है।
- 8:33हन्नते न हन्नमानये शरीर। शरीर जलता है, शरीर काटता है,
- 8:40शरीर मरता है, शरीर जन्मता है। तो आइए इस गुत्थी को पहले स्वर्ग
- 8:48कर लें तो शरीर हैं, फूल शरीर जैसे हम देखते हैं।
- 8:59और इसके वितरक सूक्षम शरीर है स्थूल शरीर यहाँ पर है यहीं रह
- 9:08जाएगा जब व्यक्ति मरता है। तो यह यहाँ ढेर हो जाएगा, यह शरीर
- 9:19यहीं रह जाएगा, निकलेगा कौन आत्मा निकलेगी नहीं, आत्मा को निकलने की
- 9:27आवश्यकता नहीं क्योंकि आत्मा का जन्म नहीं होता और आत्मा मरी भी
- 9:32नहीं। मरती भी रहे।
- 9:35तो फिर कौन निकला इस शरीर में से? अब जो चीज़ रह गई वो ही निकलेगी
- 9:40ना? आत्मा निकलती नहीं शरीर यही रह
- 9:45गया सतूल तो बाकी क्या रहेगा सूक्ष्म शरीर तो पहली बात तो आप
- 9:53समझ लो। अध्यात्म की सारी यात्रा मुक्ति
- 9:59का सारा प्रयास सूक्ष्म शरीर की यात्रा है और सूक्ष्म शरीर को
- 10:07बिघलाना है सूक्ष्म शरीर को समाप्त करना है।
- 10:13सूक्ष्म शरीर क्या है? हमारे अनेक अनेक जन्मों के कर्म
- 10:26वासनाएँ आमकांक्षाएं अभीपसाएं। कल्पना है समृतियां जो विचार
- 10:46तुमने किए जो विचार तुमने किए लेकिन उनको कार्य रूप नहीं दिया,
- 10:55इनको ध्यान से समझ लेना। आपने किसी के बारे में बुरा सोचा?
- 11:02किसी की हत्या के बारे में बात सोचा उसकी हत्या की नहीं वो कर्म
- 11:10हो गया। मानसिक कर्म हो गया मनुष्य कर्म
- 11:17हो गया, सूक्ष्म शरीर में वो भीड़ रहता है।
- 11:22कब तुमने किसके बारे में क्या सोचा आज तक की सारी तुम्हारी।
- 11:35मनुष्य वृत्तियाँ तुम्हारे उस भीतर के सुपर कंप्यूटर में स्टोर
- 11:42हैं। पहले तो यह प्रश्न उठता था कि
- 11:47इतने जन्मों की यात्रा? ऐसा क्या है जो दिखता भी नहीं
- 11:52उसके भीतर स्टोर हो जाता है। लेकिन आज इस बात को समझना बड़ा
- 12:01आसान है। छोटी सी चिप के अंदर हजारों लाखों
- 12:08जीबी का डेटा इकट्ठा किया जा सकता है।
- 12:12ये क्लाउड है। इसके अंदर क्या कुछ नहीं जमा
- 12:15होता, ये सभी ऑपरेटर्स जानते हैं। सभी जन्मों की स्मृतियाँ वासनाएँ
- 12:25कल्पनाएँ अविप साएँ विचार। और सभी भोगी हुई और जो भोगी हुई
- 12:35नहीं रही, जो सोच गई सिर्फ वो भी बेहतर स्टोर है।
- 12:42किसी का अच्छा सोच लिया वो तुमसे हुआ नहीं, वो भी स्टोर है।
- 12:50उनका फल अलग से होगा। मनुष्य का फल मनुष्य से मिलेगा।
- 12:55अगर तुमने मन से सोच लिया किसी का अच्छा ध्यान रखना ये बात बड़ी
- 13:00बारीक है तो तुम्हें मानसिक सुख मिल जायेगा।
- 13:06और अगर तुमने मन से सोच लिया किसी का बुरा।
- 13:10तो तुम्हें मानसिक दुख मिल जाएगा। ये जो मानसिक व्याधियां तुम्हारी
- 13:14है ना, ये कानून के कारण है। तुम्हारे मन में आता है इसके
- 13:21चांटा मार दूँ। गर्दन उड़ा दो कतल कर दो।
- 13:29तेजाब करा दूँ इसका चेहरा जला दूँ, लोग जला भी देते हैं, लेकिन
- 13:38तुम कर नहीं पाते। असमर्थ होते हो एक बात बताऊँ?
- 13:49आज सारी दुनिया मनोचिकित्सकों के पास भाग रही है।
- 13:54उसका बेसिक कारण उसे पता नहीं, मनुष्य में सोचा जाता है बहुत कुछ
- 14:04आग लगा दूँ, जला दूँ, फूंक दूँ। बसम कर दूँ, मार दूँ, भिखारी बना
- 14:14दूँ, लूला, लंगड़ा कर दूँ, अंगहीन कर दूँ, ये सब विचार तुम्हारे
- 14:19भीतर है, तुम सोचते हो, लेकिन कार्यान्वित नहीं कर सकते।
- 14:27और तू क्रियान्वित नहीं कर सकते, क्रिया रूप में नहीं आते क्योंकि
- 14:31डरते हो, कानून से वह वेला नहीं है, जब वन मानुष की वेला थी, आज
- 14:41वो वेला है, जब कानून की वेला है। अगर तुम कुछ गलत करोगे तो कानून
- 14:52तुम्हें दंडित करेगा और दंड से तुम डरते हो, तो फिर तुम क्या
- 14:58करते हो? मन में जब बात आई को दबा लेते हो,
- 15:02सुप्रस कर लेते हो। मन के भीतर रह गयी वो जो बहुत
- 15:09ज्यादा ओवरफ्लो हो गए, बहुत ज्यादा ओवरफ्लो हो गए उसको तुम
- 15:17कार्य रूप दे देते हो और कार्य रूप देने के बाद।
- 15:24कानून तुम्हें दंडित करता है, सजा देता है, ध्यान से संजना कर्म
- 15:29फलोस्पी है, लेकिन 99% तुम्हारी भावनाओं उनको तुम क्रियान्वित
- 15:42नहीं कर सकते। मूर्त रूप नहीं दे सकते तो वो दब
- 15:47जाती हैं बेहतर लेकिन सोंची थी तुमने ज़रा सोचना दिन भर में तुम
- 15:53क्या क्या सोचते हो तुम सोचते हो के बॉस के जाके गाड़ी पढ़ लूँ,
- 15:59इसका हैट सावतार दूं? गांज कोपड़ी का?
- 16:04और ईंट दे मारो उसके सर में इसकी आँख फोड़ दो सोइच है दुकानदार
- 16:12सोइच है के सामने वाला दुकानदार इसका गला काट दो।
- 16:19यह मेरे ग्राहकों को तंग करता है। आधे ग्राहक खेच लेता है।
- 16:25सुबह से शाम तक या बराबर का प्रतीक होती है।
- 16:28मैं चीज़ 10 में भेजता हूँ। यह साढ़े नौ में भेज देता है तो
- 16:34ग्राहक किस से ले जाता है तुम न जाने।
- 16:42दिन में क्या क्या सोचते हो? लेकिन उस सोचने को मूर्त रूप नहीं
- 16:50दे सकते हैं। तो फिर उनका क्या हुआ जो तुमने
- 16:54सोचा वो दा बजाती हैं? उसे सुप्रेशन कहते हैं।
- 17:07यह प्रश्न बहुत से लोगों का प्रश्न है।
- 17:12करीब 8000 लोगों का प्रश्न है, जिसका मैंने जवाब नहीं दिया।
- 17:21आज ध्यान से सुन लेना, ध्यान से सुन लेने जैसी बात है क्योंकि
- 17:31इससे पहले मैंने इसे कभी खोल के नहीं समझाया क्योंकि इसका वक्त ही
- 17:39नहीं आया था। आज ही वक्त आया भगवान कृष्ण का ये
- 17:44सूत्र भाषा से जी ऋणा नी अथा ब्याह है, भीतर विचार तोपते हैं,
- 17:55उसे मार दूँ, कतल कर दूँ, आग लगा दूँ, फूंक दूँ, धरती में गड़ा
- 18:02दूँ? क्या कुछ नहीं और उसे मूर्त रूप
- 18:09तुम दे नहीं सकते तो फिर उन भावनाओं का क्या बनता है?
- 18:21वो दब जाती हैं बेहतर। सुप्रस्थ हो जाती हैं।
- 18:26यो भी एक वासना है जो भीतर उपजी और उसे मूर्त रूप नहीं दिया।
- 18:35वह वासना जो तुमने भोग ली, तुम्हें काम उठा तुमने काम भोग
- 18:38लिया। तुमने काम भोग लिया, काम खत्म हो
- 18:44गया, तुमने काम नहीं भोंगा। अब इन बातों को गौर से समझ लेना
- 18:53फिर से शायद कोई समझा पाए कि ना समझा पाए।
- 19:07तुम्हारे भीतर उठी भावना है, मनुष्य में मूर्त रूप तुम दे नहीं
- 19:13सके कहाँ जाएंगे तो काम वासना उठी तुमने बोगली खत्म हो गई, तुम आराम
- 19:24से सो जाते हो। काम पास न उठी तुमने भोगी नहीं,
- 19:36लेकिन उसको ओज में परिवर्तित कर लिया।
- 19:42तो भी वासना खत्म हो जाएगी। जो दो तरीके हैं या तो भोग लो या
- 19:47ओझ में परिवर्तित कर लो, लेकिन तुम्हारी आज कल के ये शंकराचार्य
- 19:59ये कहते हैं, भोगो मत। दवा ओज में परिवर्तित करने का
- 20:09फॉर्मूला इन्हें पता नहीं अब बेचारे लाचार है हाथ में तो लट्ठ
- 20:15पकड़ लिया, हाथ में झंडा पकड़ लिया।
- 20:22ओज में परिवर्तित करने की विधि नहीं जानते।
- 20:29बोगी के तो शंकराचार्य की पदवी छीन ली जाएगी।
- 20:44अब रहीम मुश्किल पड़ी, गाढ़े दो काम झूठे से तो हरी नहीं।
- 21:02साँचे से तो जग नहीं झूठे मिले न रहो सच बोलता हूँ तो जगत की चीजें
- 21:13नहीं कमा सकता झूठ बोलना पड़ता है बाबा नानक ने कहा है पापा बाज न
- 21:19होवे इकट्ठी। मोया संग न जावे झूठे से तो सांचे
- 21:32से तो जग नहीं झूठे मिले न राम झूठ बोलता हूँ तो राम नहीं मिलते।
- 21:39झूठा व्यक्ति राम के पास नहीं जा सकता।
- 21:43ध्यान रखना अगर राम के पास न जाने का मन हो तो फिर झूठ बोल रहे हो।
- 21:52अगर राम के पास जाने का मन हो तो झूठ बोलना छोड़ देना रिटायर हो।
- 22:05समझे से जग नहीं मिलता और झूठे से राम नहीं मिलता।
- 22:12मैं कभी कभी हंसा करता हूँ ये हमारे मार्गदर्शक, ये पाखंडी जगत
- 22:20गुरु। शंकराचार्य इनकी और साइकेट्रिस्ट
- 22:30के मनोवैज्ञानिक की 60 गांठ है। ये आपस में मिले हुए हैं।
- 22:42शुरू से ही मिले हुए हैं। राजनीतिज्ञ और इंडस्ट्रियलिस्ट ये
- 22:50दोनों मिले हुए हैं। साथ में मिल गए धर्मगुरु धर्म
- 22:58गुरु कहते हैं कि तुम? अगर गरीब हो तो पिछले जन्म में
- 23:06किसी का धन चुराया होगा। तुम छोटी जाति में पैदा हुए तो
- 23:12पिछले जन्म में तुमने कोई अपराध किया होगा।
- 23:19तुम अंगहीन हो, तो तुमने कोई बात किया होगा, छोटी जाति में क्षुद्र
- 23:29जाति में जन्मे हो तो अवश्य ही कोई नीच कर्म किया होगा।
- 23:38ये तुम्हारे साधु संत कहता है, जगत गुरु कहता है अछूत को मूर्ति
- 23:50को हाथ मत लगाने देना। मूर्ति भी अशुद्ध हो जाएगी।
- 23:58मैं पूछता हूँ, अगर पारस लोहे को छू दे तो क्या पारस भी लोहा बन
- 24:11जाएगा? मेरी इस बात का जवाब दे देना।
- 24:16आगे चलता हूँ, तुम्हारा हरि हरि नहीं होगा, किसको अछूत छू दे और
- 24:28वह अपवित्र हो जाए? तुम्हारा मंदिर मंदिर नहीं होगा?
- 24:32जिसमें अछूत प्रवेश कर जाए। स्त्री प्रवेश कर जाए और तुम्हारे
- 24:36बंदर अशुद्ध हो जाते हैं। मेरी इस बात का जवाब दे देना पारस
- 24:49को लोहा छू ले तो क्या पारस लोहा हो जाएगा?
- 24:57मुझे जवाब जरूर देना भक्त ये सिर्फ किताबी क्या किताबों में
- 25:10लिखा है और तुम्हारी प्रयास ने छाप दिया।
- 25:18ओह भगवान क्या हुए जिसकी मूर्ति को?
- 25:24अरे जज 16 ईत्री स्पर्श कर लें और भगवान न पवित्र हो जाये, कृष्ण तो
- 25:32पवित्र नहीं हुए। 12 महीने 30 दिन कृष्ण तो रास
- 25:40रचाते हैं, निधिवन में रास रचाते हैं और गोपियों के संग रास रचाते
- 25:50हैं अकेले कृष्ण। और रोज़ चाहते है और स्त्री तो
- 25:57रजस वाला होती है तो वो 28 दिन में वो दिन भी आये होंगे, जब
- 26:05गोपीय रजस वाला हुए होंगे और कृष्ण उनके साथ एलिप्टे होंगे तो
- 26:13कृष्ण थोड़ा शुद्ध हुए ना? कृष्ण तो वैसे ही सुधरा है, कृष्ण
- 26:22तो और भी ज्यादा शुद्ध हो गए। ग्रहण के वक्त ये लोग मंदिरों को
- 26:29बंद कर लेते हैं। पंडित जी मंदिर को बंद कर रहे हो
- 26:33ते भगवान। अशुद्ध हो जाएंगे।
- 26:37मैंने कहा फिर भगवान नहीं है। फिर राक्षस फिर पहले से ही अशुद्ध
- 26:41हैं और अशुद्ध भी क्या करेंगे? ग्रहण इनका क्या बिगाड़ेगा?
- 26:50ये पहले से ही गृहणी युगते हैं। इनको पहले ही ग्रहण लगा हुआ है।
- 26:57दरवाजे मत बंद करो, कुछ नहीं होगा लेकिन कर्मकांड है क्या करें
- 27:03बेचारे मजबूर हैं। पर ग्रहण लगता है, मंदिर बंद कर
- 27:09देते हैं, फिर ग्रहण के बाद मंदिर को खोलते हैं।
- 27:11मूर्ति को स्नान करवातें हैं जैसे जल अपवित्र न हुआ हो।
- 27:18ग्रहण से देखिए इन पागलों की सोच जीस जल से स्नान कराते हैं।
- 27:27वह जल ग्रहण में अपवित्र नहीं हुआ, मूर्ति अपवित्र हो गई,
- 27:35जिसमें चेतना है और जिसमें चेतना बिल्कुल मामूली है।
- 27:42पानी में थोड़ी सी चेतना होती है, किंच मात्र जिसे हम कह देते हैं।
- 27:51सभी पदार्थों में थोड़ी थोड़ी चेतना होती है, वहीं से तो तरक्की
- 27:55होगी। पत्थर में भी भगवान होते हैं।
- 27:59इसका मतलब यही होता है कि पत्थर में भी थोड़ी सी चेतना होती है।
- 28:04किंचित मात्र। यहाँ प्रसंग वर्ष जब तुम पिछले
- 28:10जन्म में जाओगे उस जंक्चर प्लांट में जा के अगर तुमने ये छूट लिया
- 28:20कि मैं पिछले जन्म में जाना चाहता हूँ तो बहुतों का उद्धार कर दोगे।
- 28:27लेकिन वक्त बहुत लग जाएगा। हजारों हजारों में जन्म हुए हैं,
- 28:31फिर सभी जन्मो में जाओगे, आखिर में तुम पाओगे आखिर में कि मैं
- 28:37कभी पत्थर भी था और मेरे ऊपर से कोई रथ भी गुजरे से।
- 28:46कोई घोड़ों के टापे भी थोड़ी सी बिलकुल मामूली जिसे नाम मात्र
- 28:52कहते हैं नेग्लिजि बल इतनी सी चेतना पत्थर में होती है और कर्म
- 28:59से थोड़ी थोड़ी बढ़ती है जल में आगरण में।
- 29:07वायु में आकाश में थोड़ीथोड़ी चेतना बढ़ती जाती है, लेकिन पत्थर
- 29:13में भगवान होते हैं। इसका मतलब यही था कि पत्थर में
- 29:20थोड़ी सी चेतना होती है और दूसरा कोई मतलब नहीं होता।
- 29:31राजस्व वाला स्त्री के छूने से भगवान अपवित्र हो जाते हैं।
- 29:37कृष्ण तो अपवित्र हो, मूर्ति अपवित्र हो जाती है।
- 29:45चैतन्य कृष्ण अपवित्र नहीं हुए रोज़।
- 29:50रास रचाते हैं, रोज़ बाहों में आगोश में ले लेते हैं।
- 29:54गोपियों को चुम्बन चाटी करते हैं, कोई यह पुत्र नहीं होता है।
- 30:11मैं तुमसे पूछता हूँ भगवान ही क्या कि तुम्हें गले से लगा ले?
- 30:22रजस्वला औरत को गले से लगा ले और भगवान अपवित्र हो जाए, ऐसे भगवान
- 30:31को उठा के। गंदे नाले में फेंक देना गंगा नदी
- 30:36में मत फेंकना ये इसी योग्य है जो भगवान सिर्फ एक औरत जिसमें चेतना
- 30:46है, जिसमें चेतना है, वह बिल्कुल। पत्थर जिसमें चेतना नाम मात्र है,
- 30:56उसको छू देती है और वह अपवित्र हो जाता है तो फिर ऐसे भगवान की कोई
- 31:03जरूरत नहीं है अपवित्र? भगवान की पूजा क्यों करनी?
- 31:09ये थोड़ी सी बात से पवित्र हो जाता है।
- 31:14मैं कृष्ण की बात कर रहा हूँ। यह श्लोक दूसरे अध्याय का श्लोक
- 31:21है। भगवान कृष्ण की मध भागवत गीता
- 31:24रोज़ रास रचाते हैं, ज़रा भी पवित्र नहीं होता है।
- 31:34उसे लोग पूछ लेते हैं बाबा फिर ये प्राण प्रतिष्ठा करते हैं
- 31:38मूर्तियों की फिर जब मूर्ति से पट्टी हटाई जाती है तो मिरर टूट
- 31:45जाता है। सब ट्रिक्स किसी जमाने में चलती
- 31:51थी। आज नहीं चलेंगे।
- 31:53आज एक का ज़माना है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज ज़माना बदल गया वो
- 32:08जमाने नहीं रहे जब बारिश होती। तो लोग नीचे से प जाते।
- 32:14इंद्र देवता कुपित हो गए, बिजली कड़कती तो वनों वनों से छुप जाता,
- 32:21इंद्र देवता कुपित हो गए, वो जमाने से ले गए।
- 32:29ये लोग कहते हैं ये जो चमत्कार दिखाते हैं, बाबा बागेश्वर वगैरह
- 32:34क्या सब ठीक से, सुहानी सा ईमानदार है?
- 32:39वो बता देती ये बेईमान है, ये नहीं बताते, मैं कहता हूँ।
- 32:48ऐसा करो, इनका नार्को टेस्ट करो, मैं तो कहता हूँ नार्को टेस्ट
- 32:54होना चाहिए, प्राइम मिनिस्टर का भी होना चाहिए, होम मिनिस्टर का
- 32:58भी होना चाहिए। जो बड़ी पत्नी को ऊपर हम उठाये
- 33:02उसका सबसे पहले शपथ ग्रहण नहीं होना चाहिए।
- 33:06उसका पहले नार्को होना चाहिए। क्यों?
- 33:16क्या चंगा से ही यह कर के आया है? इनका नार्को टेस्ट होना चाहिए और
- 33:25सारी दुनिया देख के सक्रेनी होनी चाहिए।
- 33:28दुनिया के सामने जिन्होंने इन्हें राजा चूना है, उनके ऊपर ये राज़
- 33:33करेंगे। उनके सामने ये स्क्रीनिंग होनी
- 33:37चाहिए। उनके दिमाग की सोडियम पेंट हॉल के
- 33:40इंजेक्शन लगना चाहिए और फिर ये बोलेंगे सब कुछ हमने क्या किया?
- 33:47कई बार ऐसा होता है लाशों के ढेरों के ऊपर सीढ़ियों बना के कुछ
- 33:56राजनीतिक किचड़ते हैं और बहुत ऊंची पत्तियों पर चले जाते हैं।
- 34:02बस उनका यही इलाज है अगर कोई बाबा ऐसी ट्रिप करे।
- 34:09अगर कोई राजनीतिक ऐसा झूठ फैलाए और इतनी बड़ी फकवी तुम में सारा
- 34:16हिंदुस्तान और तुम में सारा हिंदुस्तान है, सारे संसार में
- 34:20यही प्रथा है, वो अमेरिका का प्राइम मिनिस्टर हो, राष्ट्रपति
- 34:25हो। पहले नार्को टेस्ट होना चाहिए।
- 34:29ये देखो इसने क्या कूड़ा बड़ा किया है या धर्म पुण्य के काम
- 34:33किये है? इसने अच्छा किया है, बुरा किया
- 34:35है। हम इसको सर्वोपरि पद दे रहे हैं।
- 34:41जनता के लिए यह राज़ करेगा। जनता का चुनाव हुआ है, जनता के
- 34:49हित के लिए बात करेगा। ज़रा इसका अतिथि भी देख ले।
- 34:53कहीं ऐसा ना हो हमने कोई अपराधी बिठा दिया।
- 34:58ये होना चाहिए, होता नहीं है, बात अलग है कभी हो जाएगा।
- 35:05कभी जनता ये समझेगी हम अगर किसी को कुंजी देते हैं, न लॉ करके
- 35:17बहुत अच्छी तरह से उसको देख कर लेते हैं।
- 35:21इस स्वभाव से कैसा है कहीं चोरी? वोरी तो नहीं करके आया नौकर रखते
- 35:28हैं, पुश पड़ताल करते हैं कहाँ से आया किस किस के लगा?
- 35:34क्या चरित्र है इसका और तुमने देश सोंप देते हो तुम?
- 35:40सिर्फ अब बातों पर कोई कह देता है मैं अमेरिका को नंबर बनाऊंगा और
- 35:47तुम अमेरिका उसके हाथ में पकड़ा देता हो।
- 35:53कोई कहता हो मैं रशियन को एक नंबर बनाऊंगा, पावर बनाऊंगा।
- 35:59रशिया को बर्बाद कर देता है पुतिन जैसे लोग किम योंग जैसे लोग राज़
- 36:11कैसे कर रहे हैं? मुझे हैरानी ये देश बुद्ध के देश
- 36:18होने से। मनुष्य यहाँ आता है, शांति के लिए
- 36:23आता है, झगड़ों के लिए नहीं आता, एक दूसरों को बर्बाद करने या
- 36:32मारने के लिए नहीं आता। माता इस दिन के लिए बच्चे को जन्म
- 36:36नहीं देते। कि मेरा बच्चा बड़ा होकर कतलो
- 36:41गारत का शिकार खून खराबे का शिकार माता इसलिए पर से पीड़ा नहीं हो
- 36:48सकती, जन नहीं जनें तो भक्त जनें। या दाता या सुर नहीं तो जननी बांझ
- 37:00रहे। काहे गवाबी नूर बच्चे बड़े प्यारे
- 37:07हैं, इनको सही दिशा दो, इनको सही दशा में रखो।
- 37:15इनके लिए तुम करो अगर तुम्हें इनने चुन लिया है तो तुम इनके भले
- 37:21की बात सोचो या राजा का कर्तव्य है हम प्रसंग पे लौटे हैं वह
- 37:31शानक्षी जीर्णानिय था विहार। नवानी केहनाती नरोपराण तथा श्री
- 37:37रानी विहाय जीर्णान न नययानी सयाति नवनिते तो मैं कह रहा था कि
- 37:50मैं कभी कभी मजाक किया करता हूँ। कि धर्म गुरु मुझे डॉक्टर मिले
- 38:01हुए साइकोट्रिस्ट साइकोलॉजिस्ट धर्मगुरु इनका दिमाग विकृत कर
- 38:12देंगे तो साइकेट्रिस्ट के पास जाएंगे, वो इलाज करेंगे।
- 38:22इनका इनके लिए ग्राहक पैदा करते हैं।
- 38:26क्यों दमन करो? काम का ज़मन करो, क्रोध का ज़मन
- 38:32करो, जाने झूठे हो जाओ, तुम्हारे भीतर से क्रोध उगता है, तुम दिखाओ
- 38:39मत तुम दबा लो, काम उगता है दिखाओ मत दबा लो लेकिन कहाँ रुकता है।
- 38:48काम उठता है तो बलात्कार होते हैं, कुछ लोग दबा लेते हैं, कुछ
- 38:54लोग नहीं दबा सकते। कुछ लोग क्रोध को दबा लेते हैं,
- 38:57कुछ लोग नहीं दबा सकते, जो नहीं दबा सकते वो गाँधी को भी गोली मार
- 39:06देते है। ये क्रोध का ही तो और छोटी सी
- 39:14उम्र में झूल जाती हैं फंदा ये ज़िन्दगी जीने के लिए थी ये बूढ़ा
- 39:20तो और दो 4 साल में मर जाता तुम लोग क्यों अपनी जवानी खराब थी?
- 39:34यह तुम्हें दबाना हो सखाते हैं दबाओ और मेरे पास रोज़ ये
- 39:44समस्याएं आती हैं। बाबा अचानक बैठे बैठे कर उठा गया,
- 39:51झगड़ा हो गया। थाने के छारी चले गए।
- 39:5515 साल हो गए थाने के छारी 1 मिनट के क्रोध का परिणाम 15 वर्ष हो गए
- 40:02भुगते हैं अब क्या किया जाए? ऐसी अवस्था में वही तो मैं कहता
- 40:10हूँ के थेरसिस करो। घरों में पुजारू मत बनाओ, घरों
- 40:16में कोप भवन बनाओ। भगवान राम बड़े सैन्य थे, दशरथ
- 40:21बड़े सैन्य थे। उन्होंने अपने महल में कोप भवन का
- 40:25निर्माण किया। जीस व्यक्ति को किसी देखे जब।
- 40:31150 बर्तन इकट्ठे पड़े होंगे तो खड़केंगे ये सभाविक है खड़केंगे
- 40:40तो उनकी आवाज भी आई खड़कने स्वभाविक है।
- 40:49तो जो भी कोई ज्यादा परेशान हो जाए वो कोप भवन में चला जाए तो
- 40:54सभी को पता चल जाएगा कि यह सदस्य आहत हो गया है।
- 41:00किसी बात से तो उससे पूछा जाएगा अभी क्या बात हुई बताओ?
- 41:07तुम्हारी पूजा रूम ये हल न कर सकेंगे।
- 41:12कहाँ हल कर पाते हैं? आखिर तुम के पास जाते हो तो क्यों
- 41:18नहीं घर के अंदर तुम कोप बनवा लेते हो, बहुत से लोगों ने बनवा
- 41:23लिए हैं मेरे कहने से तो वहाँ आज़ादी है।
- 41:27ये नॉर्मल हो गया है। किसी को क्रोध आता है, क्रोध में
- 41:32बोलता है, चल्लाता है, गालियां निकालता है, पटक पटक के मारता है,
- 41:37चीजों को नहीं सिराहों को, तकियों को।
- 41:44पटक पटक सब कुछ मारता है चलाके जैसे के के का सीन हम दिखाते थे
- 41:48ना राम वनवास के ऐसे सारा गुस्सा निकाल देता है और बाहर जब आता है
- 41:57बिल्कुल शांत होता है, बुद्ध की तरह तुम को प भवन बनाओ।
- 42:05और तुम देखना ये प्यारा भारत कितना सुन्दर हो गया तुम नहीं
- 42:18करते तुम्हारे गुरु तुम्हें गलत। और भीतर से उठती है चीजें मैं बता
- 42:30रहा था कि तुम्हारे भीतर से बहुत सी ऐसी बातें उठती हैं जो तुम
- 42:34पूरी नहीं कर सकते। कानून के कारण फिर वो कहाँ जाती
- 42:39हैं, कहीं नहीं जाती, वो दब जाती हैं तुम्हारे भीतर।
- 42:43तो मैं समझा रहा था दो तरह के शरीर तो ये जो शरीर था सूक्ष्म
- 42:47शरीर सूक्ष्म शरीर में ये दबी हुई भावनाओं भी हैं।
- 42:54बस यही किसी ने बताया नहीं आपको इसलिए मैं थोड़ा विस्तार से बता
- 42:59रहा हूँ। आपको थोड़ा वक्त ज़्यादा लग
- 43:02जाएगा। तो इसे सुनते रहोगे तो बात बन
- 43:07जाएगी, पूरी बात समझा जाएगी आपको लेकिन अगर किसी कारण छोड़ना पड़े
- 43:17तो फिर इस वीडियो को सुन्ज रोड़ लेना ये तुम्हारे काम के।
- 43:24जदा कदा जहाँ तहां दुकान घर, ऑफिस बाजार बाहर से लाशानी तरंगेतों
- 43:35में घेर रहे हैं। जैसे बाहर बैक्टीरिया से हर चीज़
- 43:40के तुम डॉक्टर से पूछो ना डॉक्टर कहेंगे बाहर कैंसर के बैक्टीरिया
- 43:44भी हैं, टीबी के भी हैं। सभी रोगों के कीटाणु वातावरण में
- 43:51मौजूद हैं। हम पर अटैक करते हैं, लेकिन हमारी
- 43:55जो प्रतिरक्षा प्रणाली है। वो तेज उनको वितर एंटर नहीं करने
- 44:01देते, ना जाने कितनी लासानी रंगें किसी ने कुछ थोड़ा सा टेटा देख
- 44:12लिया लाल आंख कर। तुम क्रुद्ध हुए लेकिन क्रोध
- 44:18प्रकट नहीं कर सके। आदमी बड़ा था, सान शोकत वाला था,
- 44:26डिग्रीधारी था कोई तुम कुछ कह नहीं सके लेकिन वो दब गया भीतर जब
- 44:33उठा। और निष्कासित नहीं हुआ तो समझ लो
- 44:38तो दिया। इस बात को सीधा सीधा नोट कर लें
- 44:43और रोज़ न जाने हजारों हजारों बातें तुम्हारे भीतर मनुष्य में
- 44:47उत्पन्न होती हैं और दब जाती हैं। क्यों?
- 44:50क्योंकि तुम उन्हें कथर्से से नहीं कर पाते इसलिए मैंने एक नियम
- 44:58बनाया कि सुबह उठो या सुबह वक्त नहीं है तो शाम अपनी दुकान बंद
- 45:07करके ऑफिस को बंद होने के बाद कैसे सोर्सेस करो और सारे बाहर
- 45:13निकाल दो। वातावरण को कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 45:17यहाँ अनेकों अनेकों अरबों खरबों क्लाउड्स लगे हैं।
- 45:21इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। बड़ा विशाल है बराठ तो तुम खाली
- 45:30हो जाओगे, तुम इस कचरे को भीतर समटे क्यों हुए हो, मुझे ये समझ
- 45:34नहीं आता। तुम रोज़ रोज़ इसे बाहर निकालो,
- 45:42तुम्हें पता नहीं है, तुम जगते जगते तो इस कूड़े को इकट्ठा करते
- 45:48ही हो, तुम सोते सोते भी इस कूड़े को इकट्ठा करते हो?
- 45:54एक से शेख जैन के जैन फकीर के पास साधना सीखने गया था तो फकीर ने
- 46:04कहा कि मैं जैसा जैसा करता रहूँ, बस सिर्फ देखते रहना, तुमने करना
- 46:10कुछ नहीं देखते रहना मैं क्या क्या कर रहा हूँ?
- 46:17शिष्य देखता रहा। जैन ठकिर ने क्या किया?
- 46:25यो बर्तन हम खाये पिए थे रोटी पानी इसमें और बर्तन उसने खुद
- 46:31मांजे। और माज के उसने धो के रख दिया।
- 46:37सुबह वो फिर उठा अब क्योंकि शिष्य ने तो सिर्फ देखना ही था करना कुछ
- 46:47नहीं सुबह फिर उठा ओके? वो ही बर्तन जो रात को धो के
- 46:55संवार के मांज के रखे थे। वो इस बार उतार लिए।
- 46:58उसने फिर द्वार से फिर मांजे, फिर धोए और फिर वही रखे।
- 47:08कई दिन तक ऐसा चलता रहा। गुरु ने 1 दिन शिष्य से कहा कि
- 47:15बेटे अब तू समझ कि तुने क्या करना है?
- 47:21उसने कहा बस समझ गया, अब मुझे आज्ञा दीजिए घर जाने की क्यों तुम
- 47:28सीखने नहीं आए थे? नहीं बस सीख लिया क्या सीख लिया
- 47:33यही सीख लिया की तुम पागल हो कैसे अब जीसको रात को धो दिया माझ दिया
- 47:42सवार दिया, अच्छी तरह से रख दिया सुबह फिर उसको माझ रहे धो रहे हो?
- 47:47ये पागलपन के निशाने नहीं है। तो मैं तो चला घर मतलब जाओ,
- 47:53तुम्हारी जरूरत भी नहीं, लेकिन जवाब सुनते जानो रात सपने में भी
- 48:03जब तुम्हे सपना आता है ना तो तुम्हारे अचेतन मन में थोड़ी सी
- 48:07धूल जम जाती है। बस यही समझा रात रात को केथर सिसक
- 48:14करके सोना और सुबह उठकर फिर फिर केथर सिसकना क्योंकि रात को सपने
- 48:20में नींद कम आए। थोड़ी धूल धमाल से ज्यादा रात को
- 48:25जम जाए तो सुबह और मांज देनी जरूरी है।
- 48:29सर अब दिन बढ़िया फेशनेस से बीतेगा।
- 48:31प्रेम पूर्वक प्रीति पुरो को बीतेगा।
- 48:35सबको गले लगा के चलोगे? ये हिंसा कतलो गार नफरत नहीं
- 48:42फैलाओगे। सर श्री सिंह ने कहा गुरु जी मैं
- 48:48समझ गया, अब मैं नहीं जाऊंगा तो गुरु ने कहा अब तुम जाओ तो कि तुम
- 48:56रिएक्शनरी स्वभाव के हो इसलिए तत्व क्षण कमेंट करने वालों को।
- 49:03मैं ब्लॉक कर देता हूँ। लोग मुझे पूछते हैं बाबा मुझे
- 49:09ब्लॉक को क्यों कर दिया? मैंने कहा तुम्हारा क्या किया?
- 49:14मेरा ये किसी से कम हुआ। लोग उसी से बढ़ाना चाहते हैं।
- 49:19मेरा ये किसी से कम हुआ और मैंने खुद ही गंवाया।
- 49:23तुम किसी और गुरू के पास चले जाओ, तुमने समझी नहीं पूरी बात और
- 49:30कमेंट लिख दिया। यह समझदारी की निशानी है।
- 49:37मैंने एनलाइटनमेंट की वीडियो डाली।
- 49:41बहुत से गुरु तो कहते हैं लाइटनमेंट होती नहीं जैसे उन्हें
- 49:44पक्का पता हो। अब मेरी एक बात और सुन लेना।
- 49:51चैतन्य सही हो सकते हैं, शंकर सही हो सकते हैं।
- 49:54बुद्ध, महावीर, कृष्ण सभी हो सकते हैं, मैं कहता हूँ।
- 50:00लेकिन मार्क कभी सही नहीं हो सकता।
- 50:03नीचे चार वाक कभी सही नहीं हो सकता क्यों?
- 50:10क्योंकि अगर वो होगा तो ढूंढने से मिल जायेगा।
- 50:16वह आस्तिक हुआ। जिसने ढूंढा ही नहीं, उसने कह
- 50:21दिया कि वो है नहीं, वह नास्तिक ढूंढा है।
- 50:26नहीं ना मार्क्स ने, ना नीचे ने, न चार बाप ने वैसे कैसे होगा, वह
- 50:35सदा झूठा ही रहेगा। मार्क एस बिना खोजे कह देते हैं
- 50:41कि वह नहीं है और कृष्ण खोज के कहते हैं, वह है और वह मैं ही हूँ
- 50:48अहम ब्रह्मस्त्र कबीर कह देते हैं, नानक कह देते हैं, वह है और
- 50:56गुरु की यही महानता है। गुरु सच बता देता है कि है वह है,
- 51:03मैंने देखा है और गुरु कह देता है तुम कहते कागज की लेखी मैं कहता
- 51:11आंखन देख तो एनलाइटनमेंट की मैंने वीडियो डाली।
- 51:17डाली ही थी। अभी उनको कोई पता नहीं।
- 51:20मैं मंदिर जाया करता था, नहीं जाया करता था।
- 51:25शरद पूर्णिमा की रात मेरे साथ ये घटना घटी नहीं घटी लेकिन कहीं
- 51:31अहंकार को ठेस लग जाती है। अहंकार को ठेस कैसे लग जाती है?
- 51:38कि मेरे से पहले ये कैसे पहुँच गया, पहुँच गया तो मुझे चाहिए था,
- 51:44पहले पहुँच गया यह है असल बात ये है अंकार को ठेस लग जाती है।
- 51:52झट से कमेंट लिखती है, वाह भाई, जेट से हैलो से निशा।
- 51:59ये भ्रम है, आपका कोरी कल्पना है, मानसिक भ्रम है, आप देखिए ये
- 52:03अनंतनाद होता है आदि दुनिया को अनंतनाद हो रहा है और डॉक्टर्स
- 52:09कहते हैं इट इस डेनटस और डॉक्टर्स मेरे पास आते हैं कि इसका इलाज ही
- 52:14नहीं होता। टीने टस का इलाज नहीं होता।
- 52:18मैं कहता हूँ बाबा ये टस नहीं है, इट्स अनाथनाथ साउंड ऑफ़ साइलेंस,
- 52:26तो हमें तो पता नहीं हमने तो सब छान लिया।
- 52:30ए एंड टी स्पेशलिस्ट है। मैंने कहा तुम्हें तो कुंडल भी
- 52:34नहीं दिखी। तुम्हें तो सात चक्कर भी नहीं
- 52:37दिखी तुम्हें तो आत्मा भी नहीं दिखी, तुम्हें तो सुखम से भी नहीं
- 52:40दिखी, कितनी चीजे हैं तुम्हें? नहीं दिखी तुम्हें तो सहस्राल भी
- 52:49नहीं देखा, तुम्हें तो परम आत्मा भी नहीं देखा।
- 52:54और तुम कह देते हो बड़े मज़े से कोई है ही नहीं तो अगर ये नहीं है
- 53:02तो भोगो, अगर ये टीनेटर है तो इसका इलाज करो बेटा तो फिर भाग
- 53:10जाते हैं। क्योंकि ये अटल गहराइयों से आती
- 53:18हुई साउंड ऑफ साइलेंस ओंकार की ध्वनि, जिसे बाबा नानक ने भी कहा,
- 53:25अभी ताजा ताजा समाधि से बाहर आये। उन्होंने कहा, एक ओंकार सभी जगह
- 53:31कण कण में। हुंकार की ध्वनि गूंज रही है, सुन
- 53:35के आएगा और बाबा झूठ नहीं बोलते, क्यों बोलेंगे झूठ?
- 53:40उनका कोई लोग है, उन्हें अपनी पदवी चाहिए, उन्हें कोई धन चाहिए,
- 53:49उन्हें कोई मन सम्मान चाहिए, किसी प्रकार का।
- 53:52कोई उनके मन में लोग है, प्रलोभन है नहीं, वो तुम्हारे हित के लिए
- 53:57रहता है। करुणा भश बोलते हैं तो बाबा कहते
- 54:02हैं एक कोण का सत्यम मंत्र चल पड़ता है।
- 54:09खैर मैं वहीं पे आ जाऊं। तो दब जाती है बातें जो मनुष्य
- 54:16में हम सोचते है पूरी नहीं कर सकते कानून के कारण तो दब जाती है
- 54:21कहाँ जाएंगे जो पैदा हो गया और मरा नहीं है वो जाएगा कहाँ?
- 54:31भीतर ही दबेगा। फिर वह सहस उघड़ता है और उघड़ता
- 54:38है और तुम कहते हो बाबा पता ही नहीं लगा, मुझे क्रोध आ गया, मुझे
- 54:42काम आ गया, लोभ आ गया, मुझे मोह आ गया।
- 54:47मुझे अहंकार आ गया, मुझे पता ही नहीं लगा।
- 54:50ये सब दवाई हुई चीजें हैं। अनासुरति में हमें पता भी नहीं था
- 54:56कि मैंने दबा ली। अरे भीतर दब गई इसीलिए दबाने वाले
- 55:08व्यक्ति को। मैं पूरा ही पागल गेनता हूँ वह
- 55:15पागलखाने में होना चाहिए और उसको दबा के कैथोर्सेज़ कराओ।
- 55:21ये जो तुम्हारे भूत प्रेत चिपटे होते हैं ना जो तुम डेरों में
- 55:26जाते हो बाबाओं के। और वह शेर मारते हो और वह चीख को
- 55:30चिल्लाहट करते हो और कुछ नहीं ये एक ऐसा सोर्सेस हैं।
- 55:34ये अपने घर पर भी कर सकते हो। बाबा ने कोई मंत्र जादू नहीं
- 55:39फेरायेगा ये तुम्हारे भीतर अचेतन मन में दबी हुई वो ही चीजें हैं
- 55:45जो तुमने किसी वक्त दबा ली थी। आज वो उखड रही है और देखने वाले
- 55:52कहते है बाबा बड़ा क्रम आती है, ये देखो भूत बोल रहा है, ये जिन्न
- 55:58गिर पड़ा है। मैंने एक जिन्न निकालने वाले से
- 56:02कहा एक आध यार मेरे पास हुए भेज दो भाई तुम क्या करोगे बाबा?
- 56:08हाँ, मैं देख तो लूँगा, इस रमी को मैंने आज तक नहीं देखा है
- 56:15तुम्हारे जिन्न को मैंने आज तक नहीं देखा है किसी के पास तो भेज
- 56:19दे कृपा करके लेकिन किसी ने मेरे पास नहीं भेजा।
- 56:28हो तो भेजे न जाने कितने झूठ पटांग तुमने पित्तर कुल देवता
- 56:37कितनी बकवासियाँ तुमने बना रखी और उनकी पूजा किए जाते हो।
- 56:42ऐसे बिल्कुल जैसे पत्थरों की करते हो।
- 56:46ये मंदिर बना दो या मस्जिद बना दो गुरुद्वारा बना दो सब ढोंग रचाने
- 56:53लोह के फैलाव हैं तुम्हारे यहाँ इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है
- 57:05ये स्टोर होती है तुम्हारे सूक्ष्म शरीर में।
- 57:09तो मेरी एक बात याद रखना आत्मा न मृती है, न जन्मती है।
- 57:15जन्म होता है, सूक्ष्म शरीर का और सूक्ष्म शरीर सथूर शरीर में
- 57:23प्रवेश कर जाता है। वह उसका घर है।
- 57:27जैसे तुम जहाँ से तुम्हारी बदली हो जाए, किसी और शहर की, तुम जाकर
- 57:32उस शहर के उस मकान में कोई किराये पे बैठ जाओ, बस ऐसे ही तुम
- 57:39तुम्हारा सूक्ष्म शरीर असली से है।
- 57:44अब इस बात को फिर अच्छी तरह से समझ लेना।
- 57:46इस वीडियो में बहुत सी बातें अच्छी तरह से समझने वाली हैं।
- 57:51बार बार इस वीडियो को सुरक्षित रख लेना तुम जैसे तुम कहते हो, मैं
- 58:02तुम सूक्ष्म शरीर हो। वास्तव में और तुम्हें मरना होता
- 58:10है, सूक्ष्म शरीर को मरना होता है।
- 58:13सभी इच्छाएं, विचार, वासनाएँ, अतीत, भविष्य की कल्पनाएं,
- 58:19योजनाएं, समृतियाँ। सारी तमाम जन्मों की स्मृति और
- 58:32सारी सोंची गई जो पूरी कर दी और जो पूरी नहीं जो दब गई उनका सबका
- 58:40समूह मिलकर। बनता है।
- 58:44सूक्ष्म शरीर यह विद्युतीय है। यह ठोस नहीं है।
- 58:55पहली बात समझा था जैसे विद्युत ठोस नहीं होती।
- 59:02वैसे यह ठोस नहीं है। यह शरीर विद्युतीय है लेकिन यह
- 59:11शरीर देखा जा सकता है। किस्से छतियंद्रे से।
- 59:19तीसरे नेत्र से इस शरीर का दर्शन हो सकता है।
- 59:25इन आँखों से सूक्ष्म शरीर नहीं देखा जा सकता।
- 59:35ये जो तुम कह देते हो भूत, प्रेत, जिन्न, पिशाच वगैरह प्रश्न रह गया
- 59:40मेरा फिर कभी शुरू करूँगा ये है, लेकिन ये किसी का कुछ बिगाड़ नहीं
- 59:50सकते। मैं फिर कह रहा हूँ।
- 59:55तुम्हें पता भी नहीं होता तुम बैठे होते हो और 1000 जिन्नत
- 59:59तुम्हारे शरीर के बीच में से निकल जाते हैं।
- 1:00:02तुम बाजार में जाते हो और कितने प्रेत चंडाल, यक्षणी, दक्षिणी
- 1:00:08चंडालने पिशाचिनी, वार्ताली? यह तुम्हारे शरीर के भीतर से निकल
- 1:00:14जाती है क्योंकि ये विद्युति या तरंग के इनका तुम्हें ज़रा भी
- 1:00:23आभास नहीं होता, लेकिन ये अपना इफेक्ट छोड़ के जाती है इस बात की
- 1:00:26मैं विस्तृत रूप से चर्चा करूँगा। यह भी बड़ा भ्रम का कारण बना हुआ
- 1:00:32है। असल में ये चीज़ क्या है?
- 1:00:41कल है मेरे पास मेरी बहन भी बनी हुई है।
- 1:00:45मंजू कोटा से उसकी बेटी को थोड़ी सी।
- 1:00:50बेमार्थ मुझे कहने लगी ऐसा जब हम लगा देते हैं, बजरंग बाण तो यह
- 1:01:00कूदने लग जाती है, सिर मारने लग जाती है और जब हनुमान चलीसा लगा
- 1:01:05देते हैं और जब गणेश जी का लगा देते हैं सूती।
- 1:01:10तो ऐसी हरकते करती है, मैंने कहा इन सब को बंद कर दो, कुछ मत करो,
- 1:01:17न बजरंग बांध, न हनुमान चलीसा न ही किसी प्रकार की गणेश स्तुति
- 1:01:26वंदना। कटी फिर नाराज नहीं हो जाएंगे।
- 1:01:32मैंने कहा सुन ले, मेरी बात कोटा से हैं, ये मेरे बाल बच्चे हैं,
- 1:01:44मैं तो गबरा मैंने कहा ये हैं, मेरे बाल बच्चे हैं, हनुमान है।
- 1:01:49गणेश तुम्हारे लिए पूज नहीं है लेकिन मेरे लिए अखबार बच्चे हैं,
- 1:01:55मैं समझा दूंगा तू ही कर मत कर खुशशांत हो गई 1 मिनट भी ना टिकती
- 1:02:07थी, 4 दिन से से सो रही है। ये जो कहते हैं कि हनुमान हमारे
- 1:02:16पास खड़ा हो के बताता है और मैं ऐसा पागल नहीं हूँ जो मैं कहता
- 1:02:20हूँ कि इसको हिलाकर दिखा दे एक छोटे से सिक्के को।
- 1:02:26जो 10 ग्राम का भी नहीं है, उसको एक इंच हिला के दिखा दे।
- 1:02:31मुझे पता है ये नहीं ला सकेगा। मैं ये नहीं कहता कि हनुमान नहीं
- 1:02:37है ध्यान करना। मैं ये नहीं कहता कि गणेश मैं
- 1:02:41कहता हूँ कि उसका प्रारूप तुमने गलत बना दिया है।
- 1:02:44इस नॉट सॉलिड। वह विद्युतीय तरंगें हैं।
- 1:02:51थोड़ी सी कम ज्यादा हो सकती है। जैसे 240 वोल्ट होता है और 11,000
- 1:02:57वोल्ट भी होता है। होता है ना तो 11,00,000 वोल्ट भी
- 1:03:00हो सकता है, करोड़ वोल्ट नहीं हो सकता।
- 1:03:03छोटी बोल्ट नहीं हो सकती एक दो वोल्ट या हम बल्ब लगाते हैं
- 1:03:07दीपावली के दिन बस ऐसे बोल्ट्स होते हैं, उनके क्वांटिटेब देर इस
- 1:03:16क्वांटिटेटिव डिफरेंस बिटवीन मात्रात्मक फर्क होता है हैं ये
- 1:03:24विद्युतीय संरचना लेकिन आपका कुछ नहीं बगा सकते।
- 1:03:30ओके कहता हूँ ना अच्छी आत्मा, ना बुरी आत्मा लेकिन या बड़ा प्रसंग
- 1:03:40गहरा हो जाएगा। ये आपका कुछ नहीं भगा सकते।
- 1:03:44इनसे डरा मत करो इनकी पूजा मत किया करो।
- 1:03:49इसको विस्तृत रूप से आप देखिये भगवान कृष्ण के वचन इतना तुम्हारे
- 1:03:56में सुनने की किवास्टी नहीं है। मैं रोज़ देखता हूँ, 1 घंटे का
- 1:04:01होता है और एवरेज क्यूँ? डायरेक्शन कितना आता है?
- 1:04:04पूछ लो आप हमारे चैनल कंट्रोलर रोहित है।
- 1:04:0830322928 कितने मिनट आता है? इसका मतलब तुम आदि वीडियो सुनते
- 1:04:16हो? 1 घंटे के मैं बोल जाता हूँ बहुत
- 1:04:20से लोग 1 घंटे के सुनते हैं लेकिन बहुत एवरेज ड्यूरेशन जो आ रहा है
- 1:04:27इसका मतलब है ज्यादातर लोग आंधी वीडियो नहीं सुनते तो इतनी लंबी
- 1:04:34वीडियो करने का कोई अर्थ नहीं। मैं इसको यहीं ड्रॉप करता हूँ।
- 1:04:38इसका अगला आन से मैं बिल्कुल अगले ही वीडियो में शुरू कर दूंगा और
- 1:04:46इसके आगे का यह शलोक पाशाण से जी ऋणा निथा विहार।
- 1:04:57नवानि घृणाति नरो प्राणी तथा श्री राणी विहार जृणा नन्याणी संयाति
- 1:05:05नबानी दे ओके? बिलकुल अगली वीडियो में आपको
- 1:05:12मिलेगा शायद ये शाम को ही मिल जाए।
- 1:05:16श्री? कृष्ण गोबिंद, हरे मुरा हनाथ
- 1:05:30नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी
- 1:05:42हेनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:05:55हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव पितमात स्वामी सखा।
- 1:06:17हमारे पितामहात स्वयं सखा हमारे अनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:06:39श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी अनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:06:53श्री? कृष्ण गोविंद।
- 1:06:56अरे मुरारी पितमात स्वामी सखा, हमारे पितमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:07:14हेनाथ नाराँ यन वासुदेव, श्रीकृष्ण बिंद हरे मुरारी।
- 1:07:31नाथ नारायण वासुदेव, धन्यवाद।