Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 Aug 25 - एकांत में ध्यान कैसे करें? एकांत के तल को छूने का सही तरीका! ध्यान और साधना!
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- 0:06एकांत क्या है? बाबा और एकांत का इतना महत्त्व
- 0:13क्यों है? व्हाटस दी सीक्रेट बिहाइंड इट
- 0:29आपको बाबा ने कहा कमी मत बनाना इसकी रहस्यत्मक विवेचना भी करने
- 0:39का कष्ट करें। कई प्रश्न हैं आपको सुन लेने के
- 0:49बाद ऐसा लगता है? किसी और को न सुनें, लेकिन फिर भी
- 0:55दूसरों को सुन लेते हैं। एक बार आपके पास आए, सिर्फ दर्शन
- 1:06किए। लेकिन मन भटकता है कि वे ही जाना
- 1:11है बहुत से प्रश्न हैं, एक ही तल्के हैं इकट्ठों का जवाब दिया
- 1:20जा सकता है पूछने का ढंग अलह है। एकांत क्या है तुम रात को सो जाता
- 1:38पांच 6 घंटे के लिए 7 घंटे के लिए 8 घंटे के लिए 4 घंटे के लिए तुम
- 1:42कहाँ जाते हो? विच कैनट बी डिफाइन्ड एंड कैनट बी
- 1:57डिस्क्राइब्ड जिसकी परिभाषा नहीं हो सकती मात्र इशारा कर रहा हूँ।
- 2:10अगर तुम समझ आओ तो। जहाँ तुम चले जाते हो, वे एकांत
- 2:16है, जो बिटिया कहती है, मैं एक बार आई शिक्षा भी नहीं ली, सिर्फ
- 2:26दर्शन किये थे, लेकिन बार बार मन करता है वहाँ चला जाऊं वहाँ चली
- 2:31जाऊं कारण? जब तुम एक तरफ़े उस एकांत के
- 2:38वाश्य ले जाओगे, अभी तो आप दूर से देखते हो उस एकांत को और मन में
- 2:53यह अभिलाषा गहन हो जाती है, क्योंकि उस एकांत में पड़े
- 2:57व्यक्ति को देखकर। मन के किसी कोने से आवाज़ आती है
- 3:02कि काश मैं भी इसी दल पे हूँ बस यही आवाज़ तुम्हें केंचती है, बार
- 3:08बार वहीं चले जाओ। बाबा ने इसे रे कहा था, कम्यून मत
- 3:18बनाना। क्योंकि कम्यून में तुम साथ साथ
- 3:23बैठे होगे और मैंने पिछली वीडियो में जिक्र किया कि तुम्हारे जितना
- 3:32कद है। उससे सब हीर खींच लिया जाए।
- 3:39उसको सेंटर बना उतनी दूरी तक हमारी रेंज ले जाती है।
- 3:49वो करीब ऐसे समझो कि पांच छः फुट के करीब वो रेंज होगी।
- 3:58और पूरी रेंज जाती है। उसके बाद थोड़ीथोड़ी रेंज घटनी
- 4:02शुरू हो जाती है। बिल्कुल खत्म नहीं होती है।
- 4:07अगर कम्यून बनाएंगे तो प्रवचन नहीं हो सकेंगे, संदेश दिये जा
- 4:14सकते हैं संदेश और प्रवचन में। बेहद फर्क है तुम जो मेरे पास आते
- 4:29हैं, मैं सामूहिक भरोसे इसलिए नहीं करता हूँ अन्यथा मुझे कोई
- 4:36नहीं अब तुम घर पे बैठे एक ही तरह के लोग।
- 4:47तुम्हारी रेंज घुलमिल गई है, उसके तुम अभ्यस्त हो गए हो और तुम
- 4:52इकट्ठे बैठ के सुनते हो, बहुत अच्छा हो अगर तुम अलग अलग कमरों
- 4:57में बैठ के सुनें। आपने कभी देखा भीड़ में व्यक्ति
- 5:13का व्यक्तित्व निदर्द हो जाता है? यही कारण था प्रेम का संदेश लिए,
- 5:23वो भी चलते हैं 50,000 वृक्षों के साथ।
- 5:28प्रेम की ज्योति से ज्योति चलती है, लेकिन अगर यही संभु घृणा का
- 5:35हो तो फिर क्या फसाद हो जाते हैं? दो तबकों के बीच में?
- 5:45दो विचारों के बीच में एक भीड़ इकट्ठी हो जाती है।
- 5:53फिर तुम क्या करती हो? तुम्हें पता होता है नहीं
- 5:57व्यक्तित्व हो जाता है भीड़ के अंदर व्यक्तित्व हो जाता है।
- 6:02इसलिए भीड़ के अंदर मत बैठना, प्रवचन सुनने के लिए यही एकांत का
- 6:09मतलब है। एकांत में तुम अपनी बुद्धि को खो
- 6:14दोगे, जैसे रात को नींद में तुमने अपनी बुद्धि को खोया था।
- 6:21बुद्धि को खोये बिना तुम नींद में जा ही नहीं सकोगे।
- 6:24वह तल ही ऐसा है। वहाँ तक जाने के लिए बुद्धि की
- 6:33कुर्बानी चाहिए ही चाहिए। इसीलिए इस्लाम ने अर्थ गलत कर
- 6:38लिया। अल्लाह को प्यारी है कुर्बानी।
- 6:42कुर्बानी तुम्हारी बुद्धि की चाहिए तुम्हारे तार्की गमन की
- 6:45चाहिए तुम कुर्बानी दे देते हो निर्दोष्य जीवों की यह तुम मार खा
- 6:51गए तुमने कभी सोचा बहुत सी बातों का जवाब?
- 7:00बुद्धि से दिया नहीं जा सकता, लेकिन फिर भी तथाकथित समझदार
- 7:09बुद्धिमान लोग उनका उत्तर देते हैं।
- 7:12क्यों उत्तर देते हैं कि कहीं लोगों में ये प्रभाव न चला जाए?
- 7:19कि आचार्य जी इस बात का जवाब नहीं दे सकते, जबकि जो प्रश्न पूछा
- 7:32उसका जवाब बुद्धि से दिया ही नहीं जा सकता।
- 7:34अनुभव से जवाब आते हैं, आज सुबह ही मेरी किसी शिक्षा ने छोटी सी
- 7:40क्लिप भेज दी। यद्यपि मैंने देखा नहीं उसने जवाब
- 7:43क्या? मैं देखा भी नहीं करता।
- 7:48मैं ऐसी क्लिप से भेजने वाले पे थोड़ा कुपित भी हो जाया करता हूँ।
- 7:56क्यूँ भेजी तुमने ये? लेकिन मैंने खोल के तो नहीं देखे,
- 8:06इसलिए मुझे सुनने वाले मुझे किसी प्रकार की वीडियो मत भेजा कर
- 8:12क्योंकि मैं देखता नहीं हूँ। आचार्य प्रशांत बोल रहे हैं क्या
- 8:24भूत प्रेत होते हैं? अब देखिए ये शुद्ध अनुभव का मसला
- 8:33है। हम्म ज़रा सोंचिए बुद्धि का।
- 8:41क्या ये बुद्धि का मसला है? शुद्ध अनुभव का मसला क्या इसका
- 8:49बुद्धि जवाब दे पाएगी? भूत प्रबद्ध होते है कि नहीं होते
- 8:55है? यह शुद्ध अनुभव का मसला है।
- 9:03चरम चक्षुओं से यह सूक्ष्म रूप में दिखाई नहीं पड़ती इसलिए बहुत
- 9:12से लोग कह देते हैं मैंने वही पुराने शक में जो देखा नहीं वो
- 9:17तन। मैंने नास्तिक, नास्तिक, व्यस्त
- 9:26जो देखा नहीं इन्होंने वो इन्होंने मान लिया के होता नहीं।
- 9:35यद्यपि यह सत्य है या नहीं है, ये इनको नहीं पता।
- 9:40बस जवाब देना है क्योंकि इंटेलीजेंट कहलाना है।
- 9:44आई ए एस का कॉम्पिटिशन लड़ा इनकी जिंदगियों पे आ जाओ।
- 9:52किस चीज़ की जरूरत पड़ी अनुभव की जरूरत पड़ी?
- 9:58क्या बुद्धि की जरूरत पड़ी? बुद्धि की जरूरत पड़ी सूचनाओं को
- 10:03संग्रहित करने के लिए बुद्धि ही तो काम आती है।
- 10:06अनुभव की बात तो आईएएस में पूछ ही नहीं जाती।
- 10:12ऐसे ही मूड लोग हैं प्रश्न पूछने वाले।
- 10:17ऐतिहासिक प्रश्न पूछेंगे सज्जूनाथ ने खब्बूनाथ को क्या कहा था?
- 10:25अब बताओ क्या कहा था और कब कहा था?
- 10:30ऐसे तो प्रश्न होते है। और जो याद रख पाता है वह समझदार
- 10:37कहलाता है। यद्यपि वह अव्वल दर्जे का मुर्ख
- 10:40होता है, इसलिए मैं कहता हूँ हमें शिक्षा पद्धति में बदलाव करना
- 10:45पड़ेगा। हम बुद्धि को शक्तिशाली बनाते
- 10:49हैं, बुद्धि के न्यूरॉन्स को बल देने पे।
- 10:53केंद्रित हैं, जबकि पुराने गुरुकुर बुद्धि को बल नहीं देते
- 10:59थे, तुम्हारे अस्तित्व को बल देते थे, तुम्हें तुम्हारे अस्तित्व के
- 11:06तक पहुंचने का रास्ता बताती थी। तुम पाओगे यह बुद्धिमान लोक गीता
- 11:19की भी श्लोकों की वर्णन करते हैं, उपनिषद की भी करते हैं और यहाँ तक
- 11:30के वो। आष्ठा भकर गीता की भी बरणा कहते
- 11:35हैं। भला परमात्मा का व्याख्यान बुद्धि
- 11:46से हो सकता है। खो देना नहीं जाना नहीं, पक्का
- 11:53है। क्योंकि कब जाना होगा?
- 11:54आई ए एस की होगी, उसके बाद नौकरी की होगी।
- 11:57फिर देखा होगा कि उधर ज्यादा गुंजाइश है और गुंजाइश होती भी है
- 12:05क्योंकि आई ए एस में तो शुद्ध समझदारी काम करती है।
- 12:08अगर पढ़ाओगे तो विकास, दिव्य कीर्ति जैसे लोग है।
- 12:15यह भी कभी कभी घपला कर जाती हैं। आजामिल की कथा कहनी शुरू कर देते
- 12:18हैं जद पी। इन्हें पता नहीं कि आजामिल की कथा
- 12:23के भीतर भारत क्या है? यह शुद्ध मसला है आध्यात्मिकता।
- 12:29और बुद्धिमानी को सिखाने वाले लोग सूचनाओं को सिखाने वाले लोग मैंने
- 12:34बहुत बार कहा जब जीस दिन इन्होंने कथाएं कहनी शुरू कर दी हैं शामिल
- 12:39कि उस दिन समझ लेना कि आध्यात्मिकता गरक गई और शुरू कर
- 12:44दिया। इन्होंने बोला।
- 12:51हौ टु लिवर जॉयफुल लाइफ ये समझाती हैं तुम्हें जब के जॉय कहाँ हैं
- 12:59इनको पता है इनके शब्दों में मैंने बहुत बार सुना छोटी छोटी जो
- 13:05क्लिप भेज देते हैं। चार छः सेकंड के मसला तो वहीं
- 13:11रखिये, हल होगा, मैंने कब कहा वहाँ पर तुम चले गए नार को करा
- 13:21लोगे, मैं करवाने को तैयार हूँ। यह मुसीबत खड़ी हो गई, पोल खुल
- 13:33जाएगी। एक क्षण के लिए जो व्यक्ति उन
- 13:39लम्हों में नहीं उतरा जिन्हें मैं फुर्सत के लम्हे कहता हूँ।
- 13:44वह कैसे जान पाएगा उस एकांत को? प्रश्न तो तुमने पूछ लिया पुत्र
- 13:54एकांत इतना मजेदार है जैसे रात की नींद, लेकिन इसको व्याख्या नहीं
- 14:02किया जा सकता। कितना ही शब्दों का गुढ़तम जाल हम
- 14:13फैला ले, हज़ारों सा नरदिस अपनी बेनूरी पिरोती है।
- 14:20बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा वहाँ जाना कोई खलाजी
- 14:28का बड़ा नहीं है वहाँ जाने के लिए शीश देना होता है शीश जाने
- 14:37तुम्हारा अपना स्वय। स्वय यानी जो तुमने निर्वाण किया
- 14:42वो तुम ईश्वर का बनाया हुआ हो। शीश काटने को तैयार तो हो सकते
- 14:50हो, यह तो बड़ी आसान बात है, लेकिन वह जो तुमने बनाया।
- 15:00वह मैं वह आपकी चिपकहट इल्यूज़ आपकी मान्यता।
- 15:18जो आप जन्मो जनों से माने हुए हो कि आप हैं कौन?
- 15:22मेरे राशी के व्यक्ति आए के दो महीने भर के बाद हो गए अकेले आए
- 15:34थे कहते बाबा मैं आए तो बहुत बार। लेकिन जब समूह में आप दीक्षा देते
- 15:44हो तो आपको बात करने का फुर्सत ही नहीं है और आप इतने गहरे में मगन
- 15:51होते हो कि हमें पता चल जाता है बाबा की आँखें ही नहीं खुलते।
- 15:59इतना मस्ती का आलम हमें चारों तरफ से घेर लेता है तो कुछ पूछने भी
- 16:06आए हैं, वो भी भूल जाते हैं आपको देख के।
- 16:10ये अक्सर होता है बाबा मैं गायत्री मंत्रा तो भूल ही गई।
- 16:19बाबा जी जो आप दीक्षा के वक्त लालचंदन की मालत देते हो, यह तो
- 16:25मैं भूल गया तो मुझे कहने लगे मैं।
- 16:36अक्सर यूट्यूब पे देखता। जैसे ही आपकी वीडियो आती मैं
- 16:40स्किप कर देता। 124 सेकंड चलती होगी लेकिन स्किप
- 16:51कर देता मैंने कभी सुनी नहीं थी आपकी वेशभूषा आपकी बिखरी बिखरी
- 16:57दाढ़ी। यह झूमर लटकता है।
- 17:06कोई मेकअप नहीं कर रखा है। इससे पहले के तुम चार शब्द बोलो,
- 17:12मैं स्किप कर देता हूँ। मैंने कठी पुत्र समझाया।
- 17:17जब एवरेज भी डेरेशन इतना कम क्यों होता है?
- 17:20लोग तो पूरी पूरी सुनते हैं। लोग तो चार चार वर्ष सुनते हैं।
- 17:24कहते बाबा वही तो मैं बता रही हूँ।
- 17:311 दिन वो वीडियो चल पड़ी। और आपने चार अक्षर ही कहे थे और
- 17:39मैं जैसे दीवाना हो गया। मेरे भीतर कुछ रस उतर गया, मेरी
- 17:47आँखें बंद होने लगीं और वीडियो चलती रही और मैं जैसे सो गया।
- 17:55सुना मुझे कुछ भी नहीं बस वह तरंगाई किरणें मेरे भीतर उतर गईं
- 18:05और आनंद के गहरे खुमार में मैं लिपट गया।
- 18:13फिर मैंने वो वीडियो। फिर से सुनी, जागृत अवस्था में
- 18:17सुनी और उसके बाद बाबा मैंने किसी और की वीडियो नहीं सुनी वो दिन और
- 18:25आज मैंने किसी की वीडियो नहीं सुनी।
- 18:31मुझे सब तोते दिखाई देखे। थोसा चना बाजे गाना ये मीडिया के
- 18:40प्रभाव से बटोर लेते हैं अपने सब्सक्राइब लेकिन आपको तो
- 18:52सब्सक्राइब करना पड़ता। इनका पुत्र तुम उस घड़ी में एकांत
- 19:02में पहुँच गए थे। शास्त्रों में अक्सर ही बात
- 19:08मिलेंगे तुम्हें कि जीस व्यक्ति ने।
- 19:14अपना आपा छूट यह है कृष्ण जैसे व्यक्ति इनका एक दर्शन ही बहुत
- 19:18होता है। यह ऐसा छुआछूत का रोग है कि जब एक
- 19:32बार तुम इसकी गिरस्ती में आ जाते हो तो निकल सकते हैं।
- 19:44टेस्ट में ज़ोर नहीं ये वो आतिश है गाली जो लगाए ना लगे और वो जाए
- 19:52ना बने अगर तुम एक बार इसकी गर्फ़्त में आ गए।
- 20:02फिर तुम अपने आपको लाक बिछाने की चेष्टा को तुम बचाने सको, यह एक
- 20:10ऐडिक्शन ऐडिक्शन ऐसी जो तुम्हारे खुद के पास तुम्हें ले जाती है
- 20:18जिसे तुम एकांत करते। बाबा ने कहा कि कमी मत बनाना उसका
- 20:25भी यही कारण था। कितना ही व्यक्ति तुम्हारे पास
- 20:31वाला 10 फुट पे बैठा हो, लेकिन उसकी साँसों की आवाज।
- 20:37उसके भीतर से निकलती हुई तरंगें तुम्हें छेड़ेंगे, इसलिए मैं
- 20:44तुम्हें कहता हूँ जब तुम ध्यान करो तुम्हारे पास कोई भी रहो
- 20:54बिल्कुल अकेले है। और जीस दिन, तुम अकेला रहना सीख
- 21:03जाओगे अकेलेपन में इतना आनंद है, इतना रस है कि तुम उस रस की लत को
- 21:16छोड़ ना होगे। ये वो आतिश है गालिब जो लगाए ना
- 21:21लगे और बुझाए तुम एक बार जाओ तो मैं तुमसे कोई लाइव सेशन में
- 21:40उड़ने के लिए नहीं करता। मैं तुम्हारे प्रश्नों का जवाब
- 21:47सीधे सीधे नहीं देता क्योंकि मैं जानता हूँ कि जीस विद्या पर मैंने
- 21:56बोल रहा हूँ वो कहीं से भी पूछ लो।
- 22:03जरूरी नहीं है कि आमने सामने पूछो और एक व्यक्ति का प्रश्न सारे
- 22:11संसार का प्रश्न तुम दुखी क्यों हो?
- 22:15सारा संसार उसी चीज़ के कारण दुखी है जिसके कारण तुम दुखी हो।
- 22:20अज्ञानता के कारण तुम दुखी हो। और अज्ञात तुम्हारी क्या है
- 22:25तुम्हें आज तक पता नहीं चला कि वास्तव में मैं कौन बात तो यह है
- 22:35हमारी पंजाबी में कहावत है सोह गजरस्सा सेरे, ते गंड बस।
- 22:43ऐसी ही बात है। ये भी जीस दिन तुमने स्वयं को चाट
- 22:49दिया उस दिन गांठें तो खुल गईं उसके बाद रहगा रहस्य अगर तुम
- 22:57रहस्य में ना भी जा पाओगे तो चलेगा जीने का मज़ा आ जाएगा।
- 23:05हौ टु रेवजोयफुल लाइफ? वहाँ पता चलेगा, तुम्हें खोपड़ी
- 23:10से नहीं पता चलेगा, खोपड़ी में तो तुम खोपड़ी के निरंज भर लोगे।
- 23:16जी नहीं पाओगे, फर्क बड़ा साफ है। क्या भूत प्रेत होते हैं कि नहीं?
- 23:24मैंने देखा नहीं आचार्य ने क्या बोला?
- 23:29मैं सुनता भी नहीं। लोगों को मैं जानता हूँ जब एक
- 23:33पक्का हो कि यह व्यक्ति अपने भीतर के उस स्तर पर नहीं पहुंचा।
- 23:40इसका बाहर का उरा बता देता है। कहाँ तक छिपाओगे तुम उरा बताते गए
- 23:48काम बाहर के अस्त्र वस्त्र सुन्दर डालेंगे, उससे खिंचाव करने की
- 23:59चेष्टा करेंगे। और जो ज्यादा मेकअप करते हैं समझ
- 24:03लेना जो स्त्री ज्यादा मेकअप करती है, वह उतनी ही कुरुप होती है जी
- 24:11जो त्रिपुंड सजा लेते हैं, दाढ़ी तक कोपीला कर लेते हैं, यह फसली
- 24:17फसली नस्लें हैं। बहुत जल्दी जैसे ही उमड़ी वैसे ही
- 24:23समाप्त भी हो जाती है, क्योंकि इनके सन्निधि से तुम्हे कुछ नहीं
- 24:28मिलेगा। एक सर्कस के अलावा तुम नमाज़ कर
- 24:34सकते हो, सर्कस की तरह भी कर सकते हो।
- 24:38तुम झुक सकते हो, पूरी जमीन से अपना माथा लगा सकते हो, लेकिन हो
- 24:42सकता है भीतर न झुके। नमाज़ नानक की तरह भी हो सकती है,
- 24:48खड़े रहें और वह नमन हो जाएं, उसके चरणों में नमाज़ खड़े खड़े
- 24:53भी हो सकती है। महावीर ने नमाज़ की खड़े खड़े की।
- 24:57सारा ध्यान कभी बैठे नहीं तो नमाज़ किसी सर्कस का नाम नहीं है।
- 25:06नमाज़ तुम्हारे अंत के जोक जाने का नाम है एकांत।
- 25:20वह एक वह अंत में जो एक आता है उसके आगे एक ही है जब तुमने उस तल
- 25:32को छू लिया छू लिया कहता हूँ देख लिए देखने भर से ही आपकी प्यास।
- 25:39बढ़ जाती है। अब थोड़ा सा यहाँ विस्तार कर लो
- 25:44जब तुम पहली झलक में देखोगे, किसी संत को अडोर अवस्था में कोई भटकन
- 25:55नहीं, कोई तड़पन नहीं, कुछ पाना नहीं।
- 25:59कुछ खोने का भय नहीं। दूर से देखोगे तो तुम उसको दिल दे
- 26:07बैठो कुछ तुम्हारे भीतर कहीं ना कहीं किसी कोने में ये बात
- 26:13उमड़ेगी। काश मैं भी ऐसा हो रहा हूँ।
- 26:18और तुमने श्रद्धा से चाहा है कि मैं ऐसा हो जाऊं इसलिए संतों के
- 26:26आसपास जो भीड़ इकट्ठी हुई वो सिधर थी।
- 26:31राजनीतिक लोगों के आसपास जो भीड़ इकट्ठी हुई वो सिर नहीं थी।
- 26:35अब आए जलसा, जुलूस किया और चले गए घर में लेकिन संतों के पास जो
- 26:40भीड़ आई वो भीड़ नहीं थी। वो महमोक्षु थे, वह तो उनके पास
- 26:45ही बैठ बैठ नहीं होके रह गए, वो उन्हीं के होके रह गए क्यों?
- 26:52क्योंकि उनमें कशिश थी भीतर की। वह उस एकांत के दल को छू चूके थे।
- 27:00तो रात को तुम जहाँ जाते हो नींद में 2468 घंटे तो तुम कहाँ जाते
- 27:07हो, तुम्हें कोई पता नहीं। वैज्ञानिक तुम्हें बता नहीं
- 27:09सकेंगे, साइंटिस्ट तुम्हें बता नहीं सकेंगे।
- 27:13वो और और सा जवाब दे देंगे। घूमा फिराकर सही नहीं जानते,
- 27:19लेकिन संत उसका जवाब जानता है। संत रोज़ जाता है, रोज़ भी कहना
- 27:25ठीक नहीं। हर पल जाता है जब ज़रा गर्दन
- 27:31झुकाई देख ली। दिल के आईने में थी तस्वीरें यार
- 27:40वह तन उसको एकांत कहते हैं इम्यून मत बनाना।
- 27:46इसलिए वह बनेगा रंगों से प्रभावित हो जाओगे।
- 27:54उस पर मौन में न जा पाओगे। जहाँ दिल के धड़कने से भी इबादत
- 28:04में खलल पड़ती है उस पर मौन में जाने के लिए।
- 28:12माहौल बड़ा शानदार चाहिए। पहले पहले और जब तुमने एक बार छू
- 28:18लिया बोतल, फिर तो भरी भीड़ में भी तुम एकांत में हो गए, बात
- 28:26तुम्हारी है। जिनको मैंने संबोधन करना है, मुझे
- 28:32कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ेगा तुम्हें तुम्हारी रिसेप्टिंग
- 28:40कैपेसिटी विल बी रिड्यूस्ड तुम्हारी ग्रहण करने की क्षमता कम
- 28:48हो जाएगी। और उसी को मैंने बढ़ाना।
- 28:53इसलिए मेरे पास सिर्फ एक ही फॉर्म हटा है कार कर वो यही है।
- 28:58आपको एक कहानी सुनाई सीता का अपहरण हो गया जाते हुए जेवरात
- 29:06फेंक जाती है वो। हे वनवासियों, मेरे पति मुझे
- 29:12ढूंढ़ते हुए जहाँ से निकलेंगे तुम बता देना ये जेवर सीता के विदेह
- 29:26कुमारी के हैं। तुम बता दे ना उन्हें उसे दिखा
- 29:35कोई भी नहीं लेकिन पुकार कर रही है मेरी हवाएं पुकारो युक्त
- 29:45हवाएं। बड़ों में खो जाएंगे और मेरे पति
- 29:50मुझे ढूंढ ही लेंगे, क्योंकि वह मेरी बारीक अंतस की आवाज को सुनते
- 29:57अंतर्यामी है तो रास्ते में कुछ गहने मिले।
- 30:06लक्ष्मण को दिखाया भैया देखना ये झुमका, ये हार ये कर्ण फूल ये
- 30:17तुम्हारी भाभी के है लक्ष्मण कहने लगे भैया अक्षम का।
- 30:25मैंने माता के चरणों को सुबह स्पर्श रोज़ करता था।
- 30:30मैंने माता के इन जेवरों को कभी देखा है तुमने तो देखा होगा भैया
- 30:38तुम तो पति हो उसके। तो राम का जो जवाब था उसको सुनकर
- 30:47तुम हैरान हो जाओगे। राम ने कहा भैया जो स्त्री गहनों
- 30:59से ज्यादा सुंदर हो, उसके गहने कहाँ दिखाई पड़ते?
- 31:07गहनों की सुंदरता सीता की सौंदर्य में खो जाती है, इसलिए मुझे गहने
- 31:13कभी दिखाई नहीं। बात बिल्कुल वाजिब।
- 31:20भीतर का लावण्य बाहर के लावण्य को पछाड़ दिया करता है।
- 31:26संतों की आवाज भीतर का लावण्य है। आचारों की आवाज बाहर का मेकअप है
- 31:33बस ऐसे ही बात समझ लेना। एकांत कह है, एकांत उत्तर है जहाँ
- 31:43जाकर तुम्हें बड़ा आनंद और रस आता है, जिसे मैं रस कहता हूँ वो अगर
- 31:54मानना हो तो इन बुद्धिवादियों। का संघ छोड़ देना देखिये,
- 32:00साइकोलॉजिस्ट के पास जाओ या अचारों के पास जाओ एक ही बात है
- 32:06वो भी शब्दों से ही आपको सम्मोहित करेंगे दोनों ही।
- 32:16लेकिन संत आपको शब्दों से समबित नहीं करेगा।
- 32:21संत बोलेंगे शब्दों में और कई बार मौन भी रह जाएगा, लेकिन इसके
- 32:28बोल्य में जो आभा होगी, लाभन होगा, वही उनके मौन में भी होगा।
- 32:36तुम उनके करीब बैठना चाहोगे, तुम चाहोगे कि कुछ भी ना बोले, लेकिन
- 32:43मैं सिर्फ चुप हो के इसके पास बैठ जाऊं।
- 32:54ये क्या है? यह कोई सोचना नहीं है जो जुबान से
- 33:00मैं दे सकूँ। यह वो आनंद का रस है जो जलता है
- 33:10और बिना बोले ही। आज तक पहुँच जाता है सुरत कलारी।
- 33:37सूरत कलारी भय मत बा रे मदवा की गई बिना बोले मन्नू मस्त हुआ।
- 33:58फिर क्या बोले मन मस्त हुआ हाँ फिर क्यों बोले बोले की जरूरत
- 34:11क्या है? जो इतना रस में डूब गया, वह बोल
- 34:17पाएगा? कहीं बोलने की कोई गुंजाइश बाकी
- 34:23रहती है। जैसे ही बोलने के लिए संत उठता है
- 34:30वह चुम्बक उसे भीतर खींच लेता है। इसलिए संत के बोलने में तुम थोड़ा
- 34:35सा द्वन्द पाओगे। जो समझदार हैं वो देखेंगे।
- 34:43इनके बोलने में थोड़ा सा द्वन्द है।
- 34:46ऐसा लगता है जैसे कोई इन्हें खींच रहा है भीतर।
- 34:51बार बार तल बदलते हुए नजर आते हैं।
- 34:55बा बुशकल अपने आप को संभालना है संत तुम्हारे लिए है किसी न किसी
- 35:02तरह जैसे मरता हुआ आदमी अपना संदेश अपनी आखिरी इच्छा तुम्हें
- 35:07बताना चाहता हूँ। बिल्कुल वैसा ही संत को खींचती है
- 35:16वो ग्रैविटेशन फोर्स ऑफ आनंदा और वह अपनी करुणा के वासना के वशी
- 35:28करणेक वासना। तुम्हें कुछ बता देना चाहता है।
- 35:34इन दोनों के भीतर द्वंद्व है और आखिर में संत हार जाता है क्योंकि
- 35:41वह ग्रैविटेशन फोर्ब्स इतनी संरजना में फैली हुई है, उतनी
- 35:46विराट विशाल है। वह आखिर से खींच ही लेती है पर वह
- 35:54चुप हो जाता है। वह बोल नहीं पाता, उसे ही एकांत
- 35:57कहते हैं। मानसरोवर केंद्र।
- 36:09वो जब उतर जाता है तो ताल दलियों में मैं गोते नहीं लगाता।
- 36:18जीसको शुद्ध हीरा मिल जाता है। वो कांच के बंटे और पत्थर नहीं
- 36:24इकट्ठे करता। हीरोपायो गांठ गठ आयो हीरोपायो
- 36:43गांठ गठ आयो। बार बार को क्यों खोलें?
- 36:57मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ।
- 37:06मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ फिर क्यों बहुत
- 37:23इसे कहते हैं एकांत? बोलने का दिल नहीं करता और संत जब
- 37:30बोलता है बड़ी मुसीबत होती है, उसको मुश्किल से बोल पाता है उसके
- 37:42भीतर का अस्तित्व। उसे कहता है मत भूल बोलने की
- 37:49आवश्यकता है। जिसे समझना है वो मौन से ही समझ
- 37:53जाएगा, लेकिन उसकी करुणा की वासना उसे बोलने पर बाध्य कर देती है।
- 38:00यही है एक काम इसका सेवन करो। जीस दिन तुम्हें इसका रस लग गया
- 38:08लत लग गई यू विल बी एडिक्टेड फिर तुम इसे भाग न सकोगे फिर तुम्हारा
- 38:19मन बार बार करेगा नहीं जाने को। बार बार उसके पास जाने के लालसा
- 38:30करोगे, निगाहें मिलाने को जी। छः ता निगाहें मिलाने को जी छः
- 38:54ता। निगाहें मिलान को जी चाहता है,
- 39:09निगाहें मिलान को जी चाहता। आके न जान आके न जाने को जी चाहता
- 39:32है जी चाहता। निगाहें मिला ने कुछ भी चाहता।
- 39:57धन्यवाद।