Latest / Khushei Ki Duniya / Bhooton Ki Baraat | True Horror Story | Haloween Special
Transcript
- 0:00क्या हमारे इस दुनिया के अलावा भी कुछ और भी ऐसी चीजें हैं जो इस
- 0:05दुनिया में एग्ज़िस्ट करती है? क्या हूँ अगर मैं तुमसे कहूं कि
- 0:10जैसे हम जी रहे हैं वैसे कुछ और चीजें भी हैं कुछ और एंटिटीज भी
- 0:16जो इस दुनिया में आज भी है। कुछ को हम देख पाते हैं और कुछ को
- 0:22नहीं। पर इसका मतलब ये नहीं कि वह चीजें
- 0:26वो आत्माएं, वो भूत हमारी दुनिया में एग्ज़िस्ट नहीं करते हैं जो
- 0:31आज की कहानी है वो भी कुछ ऐसी ही है कैसे लड़की की जो अनजाने में।
- 0:38भूतों की बारात में चली गई थी। तो अगर तुम्हें ये कहानी सुननी है
- 0:43तो अपने कानों में अपलग्स लगा लो। दुनिया के थोड़े से करीब आ जाओ,
- 0:48क्योंकि क्या पता कोई भूत तुम्हारे आसपास ये कहानी सुन रहा
- 0:56हूँ। ये कहानी है एक छोटी सी बच्चे की
- 0:59जो बिन बताए अपने घर में एकदम से गायब हो जाती है, उसका कोई अता
- 1:05पता नहीं लगता। पूरा गांव उस लड़की को दो 3 घंटे
- 1:09तक ढूंढता रहता है लेकिन जब वो वापस आती है तो कुछ ऐसे राज़
- 1:15खोलती है क्नॉइस। जिसे सुनकर मानू सुनने वालों के
- 1:19होश उर जाते हैं। ये कहानी है नीलम की।
- 1:24नीलम एक 8 साल की बच्ची थी, जिसे गुड़ियों के साथ खेलना बहुत
- 1:29ज्यादा पसंद था। वो नई नई तरह तरह की गुड़ियां
- 1:32बनाती, उन्हें सजाती। गुड्डे गुड़ियों के खेल खेलना
- 1:36बहुत भाता था उसे कभी कभी वो खुद भी उस गुड़िया की तरह ही सजती
- 1:42अपने सर पर एक पल्लू रख लेती और अपने आप को एक दुल्हन समझने लगती।
- 1:47छोटी सी बच्ची थी उस गुड़िया को हमेशा अपने आप से चिपका के रखती
- 1:51थी अपने कंधे पर लगाकर। उसे बहुत शौक था।
- 1:55इस खेल का जैसे ही शाम के चार बजते थे वो अपने घर की छत पर चली
- 2:00जाती। घरों की छतें जुड़ी हुई थी, आसपास
- 2:04की और बच्चियां भी उसके साथ आ जाती।
- 2:07ये सब मिलकर कुछ देर तक उन गुड्डे गुड़ियों के साथ खेलते रहते थे
- 2:12लेकिन फिर 1 दिन कुछ। ऐसा हुआ 1 दिन नीलम अपनी छत पर
- 2:16गई। जरूर शाम के चार बजते ही वो अपने
- 2:20गुड़िया को लेकर और अपने सर पर एक पल्लू डालकर छत पर चली जाती है।
- 2:26लेकिन काफी देर बाद तक जब वो घर लौटकर नहीं आती नीचे।
- 2:31तो उसकी बड़ी बहन मधु छत पर उसे देखने जाती है।
- 2:34करीब करीब रात के 10:00 बज गए थे। सब अपने कामों में उलझे हुए थे।
- 2:39जब सबको याद आया तो मधु छत पर गई देखने के लिए कि आखिर कहाँ थी
- 2:44नीलम? लेकिन ये क्या छत पर तो कोई भी
- 2:48नहीं था। उसने कई जगह नीलम को ढूंढा तो तीन
- 2:52बार और लोग भी छत पर जा जाकर देख कर आए लेकिन नीलम का कोई अता पता
- 2:57ना लगा। बहुत ही जल्दी ये बात पूरे गांव
- 3:01में फैल गई कि नीलम लापता थी और किसी को नहीं पता था कि आखिर नीलम
- 3:05गई तो गई कहाँ? वो तो 4:00 बजे छत पर चढ़ी थी।
- 3:09अपनी गुड़िया के साथ तो आखिर छत से वो कहाँ जा सकती थी?
- 3:14किसी को कोई अंदाजा नहीं था। पूरे गांव में अफरा तफरी मच गई।
- 3:18उस छोटी सी बच्ची को ढूंढने के लिए की आखिर नीलम थी तो थी कहाँ?
- 3:24रात के 10:00 बजे 10 के बाद 11 और 11 के बाद पारा।
- 3:28अब मधु उसकी और बहने सब रोने लगे। उन्हें डर था कि नीलम के साथ कुछ
- 3:34गलत तो नहीं हो गया और आखिर वो गई तो गई कहाँ?
- 3:39जब उन्हें रोते रोते करीब रात के 1:00 बज गए तो छत के दरवाजे पे एक
- 3:45दस्तक आई। दरवाजे पर रात के 1:00 बजे दस्तक
- 3:53होते ही मधु भाग कर उस तरफ गई कि आखिर इस वक्त दरवाजे पर कौन था और
- 3:58छत पर तो कोई था ही नहीं। कई बार कई लोग जाकर देखकर आ चूके
- 4:03थे, लेकिन ये क्या? गेट खोलने पर उसके सामने नीलम
- 4:08खड़ी थी। वहीं अपनी गुड़िया को अपने कंधे
- 4:11पर रखे हुए सब एक छोटा सा पल्लू डाले हुए और वो मानो जैसे शरमा
- 4:15रही थी। किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था
- 4:18कि आखिर नीलम छत पर से लौटकर कैसे आ सकती है?
- 4:22जब वो छत पर थी ही नहीं। कही बार मधु ने नीलम से पूछने की
- 4:26कोशिश की कि आखिर तू थी कहाँ और छत पर तो मैं कही बार खुद जा चुकी
- 4:32थी, वहाँ तो तू नहीं थी? नीलम इस बात पर कोई जवाब नहीं दे
- 4:37रही थी। अपनी गुड़िया को अपने सीने से
- 4:39लगाए बस वहाँ खड़ी थी कुछ देर बाद।
- 4:43गांव के और लोगों ने भी जब नीलम को देखा तो वो भी भौचक के रह गए
- 4:48कि आखिर कोई कैसे काहे हो सकता है एकदम छत से और फिर वापस उसी छत पे
- 4:53कैसे आ सकता है? कई बार लोग जाके देखकर आ चूके थे।
- 4:58आखिर नीलम को पानी पिलाया गया, उसे बिठाया गया।
- 5:03और फिर से उसकी माँ ने उससे पूछा कि नीलम आखिर तू थी कहाँ?
- 5:08और जो नीलम ने कहा उससे सबके होश उड़ गए।
- 5:12वो बहुत खुश मिजाज़ में बोली कि अरे आप लोग कहाँ थे?
- 5:16वहाँ कितनी अच्छी शादी चल रही थी, बारात हो रही थी।
- 5:20जलेबी थी, खाने को मालपुए थे, खाने की इतनी सारी चीज़ें थी,
- 5:24इतना खुशनुमा माहौल था, इतने मज़े आ रहे थे, नाच रहे थे, गा रहे थे
- 5:29सब आप कहाँ थे? सब के सब इतनी देर से ऊपर जश्न चल
- 5:34रहा था। उसके ये बात सुनते ही मानो सब
- 5:37हैरान थे की ये क्या बात कर रही है।
- 5:41फिर लोगों ने उससे वापस पूछा कौन सी शादी, कौन सी बारात कौन सा
- 5:45खाना? नीलम ने फिर से कहा, अरे वही छत
- 5:50पे छत पे चल रही थी ना शादी बारात थी नाच रहे थे सब तो नीलम की माँ
- 5:56ने उससे पूछा कौन था छत पे? किसकी बात कर रही है?
- 6:01और नीलम ने अपने अंदाज में कहा कि अरे वो चाची थी ना कमला चाची थी,
- 6:06शांति चाची थी और भी तो बहुत सारे लोग थे।
- 6:09आपको नहीं पता माँ अरे कितने लोग थे?
- 6:12रेनू दीदी भी थी ऐसे ऐसे लोगों के नाम सुनकर।
- 6:16मानो नीरम के माँ के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई थी क्योंकि
- 6:21ये उन लोगों के नाम ले रही थी जो कई साल पहले मर चूके थे।
- 6:26ये लोग अब जिंदा भी नहीं थे और नीलामिन लोगों के नाम तक नहीं
- 6:29जानती थी ना उसने कभी ये नाम सुने थे तो आखिर नीलामिन के नाम क्यों
- 6:34ले रही थी? उसने और भी कई लोगों के नाम लिए
- 6:37उस गांव के कि वो भी वहाँ था, वो भी वहाँ था।
- 6:41सब बस सुनकर दंग रह गए की आखिर नीलम थी तो थी कहाँ?
- 6:46सबने झुंड बनाकर एक बार फिर से छत पर जाकर देखने की सोंची सब लोग
- 6:52मिलकर छत पर गए लेकिन छत तो अब भी खाली थी।
- 6:56जैसे वो पहले थी, ये कम खाली ये क्या गुत्थी थी, किसी को कुछ समझ
- 7:02ही नहीं आ रहा था। नीलम ने फिर आगे बताया, अरे माँ
- 7:06मैं तो नाची भी थी, मेरे गुड़िया के साथ भी नाची थी मैं और आपको
- 7:11नहीं पता आपके सामने ही तो मुझे छोड़कर गई थी ना?
- 7:15तो नीलम की माँ ने उससे कहा कौन छोड़ कर गया था तुझे?
- 7:19अरे माँ प्रेमात आई वो छोड़ के गई थी ना मेरे को, उधर मैं खड़ी थी
- 7:25आपने जब गेट खोला मेरे पीछे ही तो खड़ी थी वो मधु दीदी आपने तो देखा
- 7:29था ना? मधु भी कॅन्फ्यूज्ड थी की आखिर।
- 7:33नीलम क्या कह रही है? वो तो अकेली थी वहाँ पर फिर इन
- 7:37लोगों ने एक पंडित जी को बुलाया जिन्होंने इन्हे बताया कि इसीलिए
- 7:43गांव में बच्चों को रात के 10:00 बजे के बाद अकेले नहीं जाने देते।
- 7:47कहीं पर भी नीलम को गुड़ियों से खेलने का शादी का।
- 7:52बहुत शौक था ये सब चीजों का। इसीलिए शायद जब वो खेलने गई और
- 7:57उसे देर रात हो गई तो किसी भूतों की बारात में शामिल हो गई थी वो
- 8:02वहाँ वो नाच रही थी पर वो लोग जिंदा नहीं थे।
- 8:06वो भूतों की बारात थी। जहाँ कई साल पहले मरे हुए लोग भी
- 8:11आए हुए थे और तभी तो ये जानती हो उन सबके नाम नीलम को अभी भी समझ
- 8:17नहीं आ रहा था। उसके आगे तो वो सारी घटना ऐसे घटी
- 8:21थी जैसे एक असली शादी वो नहीं जानती थी कि जिन लोगों के साथ वो
- 8:26नाच कर आई है जिनके साथ वो खाकर आई है।
- 8:28वो भूत थे, जिंदा लोग नहीं थे वो नीलम को कुछ समझ नहीं आ रहा था।
- 8:35यहाँ किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा भी हो सकता है भला
- 8:40भूतों की बारात होती है, ऐसा होता है और कौन थी वो औरत जो उसे सही
- 8:46सलामत? वापस छोड़ गई थी।
- 8:49नीलम ने बताया कि हम मैं नाच रही थी, मैं गा रही थी, फिर वो आई ताई
- 8:54और एकदम से मुझे बोली जा बेटा जा तू अपने घर जा बहुत हो गया तो मैं
- 8:59आ गई। वो मुझे छोड़ने आ गई।
- 9:02उस पंडित ने उन्हें बताया कि वो कोई अच्छी आत्मा थी।
- 9:06जो उनकी बेटी को सही सलामत वापस छोड़कर गई, वरना शायद कोई कभी
- 9:12नीलम को ढूंढ ही नहीं पाता। भूत उसे अपने साथ ले जाते क्योंकि
- 9:17आखिर वो हिस्सा बनी थी। एक भूतों की बरात का नीलम कुछ
- 9:23वक्त बाद ये बात। ऐसे भूल गई जैसे ये कभी उसके साथ
- 9:27गुजरे ही नहीं थे। लेकिन वो लोग जिन्होंने ये बात
- 9:31उसके मुँह से खुद सुनी थी वो इस बात को कभी नहीं भुला पाए।
- 9:36कहते हैं जिसके साथ ऐसी बाधाएं होती हैं वो कुछ वक्त बाद सारी
- 9:41उनकी यादें मिट जाती हैं। ऐसी पर जो उसने सबको बताया।
- 9:46वो आज भी उसको सुनने वालों के दिल में एक घर कर चुका है।
- 9:51वो आज भी डरते हैं कि क्या उनकी बहन सच में एक भूतों की बरात से
- 9:56होकर आई थी और खुशी मनाते हैं कि आखिर वो लौट आई थी?
- 10:03तो ये थी हमारी आज की कहानी। ये कहानी मुझे मेरी वही पड़ोस
- 10:08वाली आंटी ने ही सुनाई थी और उनका रियल नाम मधु ही है तो सॉरी आंटी
- 10:14आपका नाम लेने के लिए ये कहानी पहली बार में सुनने में मुझे भी
- 10:18लगा कि आखिर भूत होगी, बारात होती है क्या?
- 10:23पर जीस हिसाब से उन्होंने मुझे सुनाया।
- 10:26शायद जरूरी नहीं कि हम जिन चीजों को माने वही चीजें हो।
- 10:31बहुत सारी ऐसी चीजें होती है इस दुनिया में जिन्हें शायद हम देख
- 10:35नहीं पाते हैं लेकिन वह चीजें होती है हमारे आसपास।
- 10:40कुछ ऐसे अतिरिक्त आत्माएं, कुछ भूत, कुछ प्रेत जो वक्त आने पर
- 10:46अपना मुना सिद्ध कर देते हैं और हम सिर्फ इंसान बनकर एक सवाल में
- 10:53रह जाते हैं कि जो हमारे साथ हुआ वो एक भ्रम था।
- 10:57यह एक असली घटना। तो तुम मुझे बताना कि तुम अब भी
- 11:02बिलीव करते हो या नहीं कि आखिर भूत होते हैं क्या ये कहानी
- 11:07तुम्हें सच लगी और क्या तुम्हें लगता है कि भूतों की बारात होती
- 11:13है? मिलती हूँ तुमसे हैलोवीन स्पेशल
- 11:16की एपिसोड नंबर थ्री में जहाँ सुनाऊंगी।
- 11:20तुम्हें एक ऐसे लड़की की कहानी, जिसके मरने के बाद उसकी कहानी
- 11:24शुरू हुई, जिसके मरने के बाद पूरे गांव ने उसे देखा था उसकी हाथ माँ
- 11:30को जो जलेबी मांगती थी लोगों से क्योंकि शायद उसे जलेबी बहुत पसंद
- 11:36थी मिलूँगी तुमसे अगली कहानी में। तब तक के लिए अपना ध्यान रखना और
- 11:43भूत प्रेत से दूर रहना।