Latest / Baba ji Vijay Vats / 5/3/26 - समत्व योग का असली अर्थ: क्या आप सुख-दुख से पार जा सकते हैं? गीता अध्याय 2
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- 0:19प्रणाम सदगुरु देव मन में एक प्रश्न काफी दिनों से चल रहा है।
- 0:29कृपया करके मार्गदर्शन करें। श्रीमद्भागवत गीता।
- 0:38दूसरे अध्याय में समितव योग का वर्णन किया है।
- 0:49खुद को समर्थक योग में कैसे स्थापित करें।
- 0:56कृपया मार्ग सेक्शन करें। जितेंद्र वालिया कनाडा
- 1:20सम तुम योग में कैसे खुद को स्थापित करें वह तत्व ध्यान से
- 1:31समझना बहुत गरीब बात है, वह तत्व जो श्रम है।
- 1:40सम ना किसी का शत्रु, ना किसी का मित्र, ना उसके लिए हानि, ना उसके
- 1:49लिए लव, ना उसके लिए खुशी, ना उसके लिए गमी।
- 2:00ना उसके लिए धैर्य, ना उसके लिए अधैर्य, ना पाप, ना पुण्य, एक
- 2:10तत्व ऐसा है। जो द्वंद से पार है और वह कहीं
- 2:23जंगलों में वह कहीं मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च में
- 2:31नहीं। वह तुम्हारे ही भीतर है, वह
- 2:41तत्त्व सम है जब तुम्हारा ये ढांचा खुश होता है।
- 2:53तो वह खुश नहीं होता। जब तुम्हारा ये ढाँचा दुखी होता
- 3:00है तो वह दुखी नहीं होता। इसी बात के परिपेक्ष्य में।
- 3:09कृष्णन कहते हैं, जब तुम्हारा योगी जब मेरा योगी रात को जागता
- 3:19है तो तुम्हारा संसार दिन में वह रात को सोता है।
- 3:31हर काल में, हर देश में, हर परिस्थिति में देशकाल और
- 3:39परिस्थिति से पार है, जो द्वैत भाव से पार है, जो दुई से पार है,
- 3:50जो। नैनम सेदंती शस्त्राणी नैनम दहाती
- 3:58बाबा का ना? उसको आग जलाती ना उसको बाजू
- 4:07सुखाती न जल भगोता। न अग्नि जलाते शस्त्र काट देना वह
- 4:22सब द्वंदातीत द्वंद से पार यही मुश्किलात है तुम्हारे सामने।
- 4:37तमाम दुनिया इन्हीं द्वंदों के बीच में उलझी हुई दुख पार रही,
- 4:50कोई सूचना मिल गई, अच्छी सूचना तुम नाचने लग गए।
- 5:01और कोई बुरी सूचना मिल गई तो हम छाती बैठने लगे।
- 5:10यह अच्छी और बुरी है तुम्हारी बुद्धि के लिए।
- 5:18तुम्हारे लिए सम तुम योग में कैसे बने रहे उस तत्व में आसीन होकर
- 5:33तुम उससे बहुत दूर बैठे? वह तुमसे दूर बैठा है और तुम उससे
- 5:44दूर निकल आये हो, वह तो वहीं है। अभी थोड़ी देर पहले एक कमेंट आया
- 5:52था। का शब्द है।
- 5:58कोई कहे पूछना, कोई कहे बेताला, जब तुम उस तल पर पहुँच जाओगे तो
- 6:08सांसारिक करें। तुम्हें ठीक से समझ नहीं आएगी और
- 6:18संसार वालों को तुम्हारी क्रियाएं ठीक से समझ नहीं आएगी।
- 6:23तुम अनोखा व्यवहार करोगे और तुम कहेंगे, ये पूछना है, ये बेताला
- 6:35है? इसके ऊपर किसी ने जादू तोड़ना कर
- 6:40दिया है तो बाबा कहते हैं दुनिया तुम्हें कुछ भी कहे, दुनिया
- 6:58तुम्हारा सब कुछ छीन सकती है। लेकिन तुमसे तुम्हारा समतमम नहीं
- 7:12छीन सकती, वह तुम्हारी मित्र है, जो छीन सकती है वह बाहर है,
- 7:21पदार्थ छीना जा सकता है तुम जो स्वयं हो।
- 7:29वो नहीं छीना जा सकता। उसे लोग रोज़ कहते हैं, बाबा तुम
- 7:38इतना कुछ बोलते हो, हम तुम्हें गोली मार देंगे।
- 7:44मैंने कहा फिर देरी का ही कर रहे हो।
- 7:48आ जाओ, लेकिन एक बात मुझे बताना तुम सब कुछ ही छीनते हुए भी
- 8:00पदार्थ ले जाओगे, सामान ले जाओगे। यहाँ तक कि शायद मुझे भी उठा के
- 8:11ले जाओ, कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन एक बात का ध्यान रखना एक चीज़
- 8:20जीसको तुम लूट नहीं सकते। कोई डाकू, कोई चोर, कोई लुटेरा,
- 8:28कोई तानाशाह जीसको छीन नहीं सकता, उसको तुम छीन नहीं सकोगे वो क्या
- 8:36है? वो है मेरा आनंद, तुम मुझसे मेरा
- 8:43आनंद नहीं छीन। सब छीन लोगे तुम जैसे टीचर मास्टर
- 8:56उसका धन छीन लोगे, पदार्थ छीन लोगे, ओहदा छीन लोगे, लेकिन क्या
- 9:01तुम उसकी नॉलेज भी छीन लोगे? जो वह जानता है, जो उसने इकट्ठा
- 9:10किया ज्ञान की तरह क्या तुम वह भी छीन लोगे?
- 9:14नहीं छीनोगे और शायद वो तो छीन भी लिया जाए।
- 9:21थोड़ी देर के लिए एनेस्थीसिया दे दो, उसे बेहोश कर दो, क्लोरोफिल
- 9:25सुंघा दो, लेकिन जीस तत्व की मैं बात करता हूँ समतुम और यही सबसे
- 9:37ऊंचे से ऊँचा योग है समतुम योग उचेत है।
- 9:42यह शब्द है सही, सबसे ऊंचा योग है, सबसे ऊंचा, एकाकार होना है,
- 9:56सबसे ऊँचा इन्सर्टनेस है। बूंद सुंद्र में सोना गई बस फिर
- 10:03कुछ बाकी न बचा फिर तुम सब हो गए, मैं रोज़ बोलता हूँ लोग प्रश्न
- 10:15पूछते हैं। मैं जवाब दे देता हूँ, बाद में
- 10:23उनका फ़ोन आता है या मैसेज आता है।
- 10:25बाबा जी बहुत धन्यवाद। हम प्रश्न भी यहीं न हुए।
- 10:35मैंने कहा नहीं पुत्र तुम गलत कहते हो।
- 10:40तुम प्रश्न विहीन नहीं हो और क्या बाबा तुम्हारी खोपड़ी प्रश्न
- 10:48विहीन हो भाई और तुम जानते नहीं तुम्हारी खोपड़ी में कितनी नूरन।
- 10:59आपने मधुमक्खी तो देखी होगी कुदरत की अद्भुत लीला रचना मधुमक्खी के
- 11:17दिमाग का आकार तिल के समान होता है।
- 11:25और उसमें 1,00,000 न्यूरण होते हैं।
- 11:30तिल के समान होता वो सिर्फ मधुमक्खी का दिमाग तिल के समान
- 11:38होता है। और उसमें 1,00,000 नूरन होते हैं।
- 11:45उसकी कारीगरी की मिसाल ये तो कुछ भी नहीं है।
- 11:54आदमी के दिमाग में 86 अरब नूरन होते हैं।
- 12:0086 अरब और कितना? एक और लोग मुझे कहते है कि मैं
- 12:12समझेगा बाबा मैं कहता हूँ पुत्र तुम नहीं समझे तो तुम्हारी न्यू
- 12:18रौंज समझो। तो क्या नुरोंज मैं नहीं हूँ,
- 12:22नहीं उतरा तो मैं कौन हूँ? यही तो देखना तुम उस योग के जरिये
- 12:32समता को प्राप्त हो जाओ वो तुम। और मैं कहता हूँ तुम आज कहे कि
- 12:45आपने जवाब दे दिया आई ऐम सटिस्फीएड वेल सटिस्फीएड लेकिन
- 12:50पुत्र तुम देख लेना, तुम कल फिर प्रश्न पूछोगे और वो ही कल फिर
- 12:56आता है, वो ही प्रश्न पूछ लेते है।
- 13:00क्यों तुम कहते हो कि मैं संतुष्ट हुआ, लेकिन तुम गलती में तुम्हारे
- 13:11एक न्यूरॉन का प्रश्न संतुष्ट हुआ?
- 13:18तुम भूखे होते हो, भोजन खा लेते हो, तुम कहते हो बस में तृप्त हो
- 13:24क्या वास्तव में तुम तृप्त हो जाते हो?
- 13:29नहीं होते क्योंकि कल फिर भूख लगेंगी।
- 13:324 घंटे के बाद फिर भूख लगेंगी, फिर तृप्त करना पड़ेगा।
- 13:38फिर भूख लगेंगी। तुम तृप्ते हो भाई, मैं तुम्हें
- 13:44कहता हूँ सम तुम योग उच्चते उस अवस्था में पहुँच जाओ।
- 13:54उस अवस्था में अपने आप को प्लस कर लो।
- 13:57योग का अर्थ होता है प्लस जीस अवस्था में तुम्हें हानि लाभ
- 14:09जीवन, मरण, यश अप, यश, दिमाग पर कोई इफेक्ट न पड़े।
- 14:18श्रम, लगेज में शीतलता और गरमाहट इन दोनों में फर्क न लगे, उस तर्ज
- 14:37पर जब तुम चले जाओगे तो समतम योग। को उपलब्ध हो जाओगे, फिर तुम्हें
- 14:49हानि होगी। तुम कहोगे नहीं मुझे कोई हानि
- 14:53नहीं हुई। फिर तुम्हें फायदा होगा।
- 14:56तुम कहोगे कोई फायदा नहीं होगा मुझे।
- 15:07संत यही कहता है जो मिल गया उसी को मक्ख दर समझ लिया, बस यही मेरे
- 15:25नसूर में था। क्यों मिल गया उसी को मुकद्दर समझ
- 15:32लिया मुकद्दर समझ लिया जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया।
- 15:46जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया।
- 15:53हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया कोई शक्कर तुम्हारी करीब नहीं
- 16:02आता। कोई शस्त्र तुम्हें चोट नहीं
- 16:06पहुंचाता, कोई आग तुम्हें जलाते नहीं, कोई पानी तुम्हें गीला नहीं
- 16:10करता कोई हवा तुम्हें उड़ाते हैं तुम ऐसे तत्व अभी तुमने क्या ना?
- 16:25तो बाबा कहते हैं कोई कहे पूछना कोई कहे बेताल तुम उनकी बात को
- 16:35समझ नहीं पाए? बाबा कहते शब्दों की तरफ ध्यान मत
- 16:41कर। लोग बहुत खुश कहेंगे।
- 16:49आध्यात्मिक व्यक्ति के अर्थों को अनर्थ करने वाले ये लोग अपने आपको
- 16:56शिष्य कहलाते हैं। पापा कहते हैं लोगों की बातों की
- 17:04परवाह मत करना, कोई कहे पूछना, कोई कहे बेता ला तो फिर किसकी
- 17:15फिक्र करना? शब्दों की फिक्र मत करना
- 17:21स्थितियों की फिक्र करना अगर तुम में कोई गाली निकालता है तुम्हारा
- 17:30अन्तः उससे नहीं हिलता। तुम अडोल खड़े रहते हो, अकंप खड़े
- 17:41रहते हो, तुम्हारे भीतर ज़रा भी हिलचुल नहीं होती, तो तुम
- 17:48समर्थकों को प्राप्त हो। और सारी दुनिया का, गीता का, सब
- 17:57धर्म ग्रंथों का सभी संतों का यही लक्ष्य है।
- 18:01कैसे संत तुम योग को उपलब्ध हुआ जाए जहाँ न शोक है, न हर्ष है।
- 18:13न हानि है, न नलाभ है, न मृत्यु है, न अमृत है, जहाँ न जवानी है,
- 18:22न बुढ़ापे भेद रहित है। जो अभेद है, जो अद्वैत है, जो
- 18:33जहाँ दो नहीं। बस एक ही है।
- 18:36बाबा ने कहा, एकों का एक ही है, दूजा को हिंदूजा कोण बर्म।
- 18:45दूसरा अगर तुम्हें दिखे तो समझ लेना कि यह भ्रम है।
- 18:56बाबा कहते हैं, शब्दों को मत देखना, अगर तुम्हें कोई गाली
- 19:00निकालता है तो शांति से देखना कि बेचारा कितना दुखी है, पहले खुद
- 19:08जला होगा। पहले खुद के भीतर बैड हार्मोन्स
- 19:16पैदा हुए होंगे। काटीसोल अडल नलिन इसने खुद के खून
- 19:20को जलाया होगा, विषाक्त किया होगा और उससे जहरीले खून से क्या
- 19:31निकलेगा? गालियां निकलेंगी।
- 19:36आज बहुत सी संस्थाएँ छोटे छोटे बच्चों को उपयोग कर रही हैं सीखा
- 19:47रही हैं भेद सीखा रही हैं देश जबकि सभी इंसान।
- 19:53परमात्मा ने किसी के माथे के ऊपर लिख के नहीं भेजा कि ये सिख है,
- 19:59मुसलमान है, हिंदू है, पारसी है, ये होती है।
- 20:05कौन है ये? तुम भगवान की बेइज्जती करते हो
- 20:13अपने आप को, शेख कह के, अपने आप को, हिंदू कह के, अपने आप को
- 20:20मुसलमान कह के तुम परमात्मा की बेइज्जती करते हो क्योंकि
- 20:25परमात्मा ने तुम्हें? मुसलमान, हिंदू, सिख, ईसाई की तरफ
- 20:29पैदा नहीं किया, ये तो तुमने बाहर से आगे अपनी पहचान बना ली, किसी
- 20:38ने केस बढ़ा लिए, किसी ने केस कटा लिए, किसी ने दाढ़ी कटवा ली, किसी
- 20:45ने मूंछें कटवा ली। किसने हरा झंडा लगा लिया, किसने
- 20:50गिरवा लगा लिया? यह सभी भेद हैं और जो भेद में उलझ
- 20:57गया, अब इस बात को ध्यान से समझ लेना वह दुखी हो गया।
- 21:03इसलिए सारी मानवता आई दुखी कारण उसे पता नहीं क्यों, क्योंकि सब
- 21:10दुखी हैं। अगर एक कोई व्यक्ति सुखी है, वह
- 21:18इतना सुखी है कि मैं तुमसे मिलना भी नहीं चाहता।
- 21:27वो इतना मौन हो जाता है तो उसे बोलने में रस नहीं आता बल्कि
- 21:34बोलने में तकलीफ होती है। पर मौन की अवस्था में जब मैं बैठा
- 21:42था, मुझे बाबा ने कहा बोलो। मैंने कहा बाबा अब तो बोला नहीं
- 21:50जाता कहते फिर भी बोलो, मैंने कहा बाबा किसी और से कह दो।
- 22:04कहते और कोई है ही नहीं। उस दिन मेरे मन का भ्रम समाप्त हो
- 22:09गया। मैं समझता था दुनिया में बहुत
- 22:12काबिल व्यक्ति हैं एनलाइटन पर्सन जो इसी मुकाम पर पहुँच गए, जहाँ
- 22:17मैं पहुँच गया लेकिन उस दिन मेरी बेतरी आंख खुली जब बाबा ने कहा।
- 22:24जब विश्व नयनता ने कहा नहीं है कोई बोलने वाला तुम्हें ही बोलना
- 22:31होगा उठो, हिम्मत करो बोलो मैंने कहा बोला नहीं जाता होगा, मैं उस
- 22:40आनंद को भी कर इतना सकता हूँ। अब झगड़ा तो बहुत दूर, अब शास्त्र
- 22:50तो बहुत दूर बोलना तक मुमकिन नहीं रहा।
- 22:58मैं चाहता हूँ। नाम खुमारी नाम का छड़ी रहे धनरा
- 23:07वह जो खुमार होता है उसे नाम कहते हैं, तुम्हारे नाम में खुमारी
- 23:11नहीं, तुम्हारे नाम में थकावट है। एनर्जीलेसनेस जिन्हें नशे ज़हान
- 23:19दे उतर जाने पर बात एक कुंवारी ऐसी भी है जिसे नाम की खमारी कहते
- 23:26हैं, वह कभी नहीं उतरती। वो अखंड धारा कैसे मिलेंगे इस
- 23:35सांता? समत्व योग, उपचेते इस दल के पास
- 23:44जो सम है जीसको न सुख है, न दुख है, न शीत है, न पोषण है, न मौत
- 23:53है, न अमृत है। सब द्वंदों से पार है, वह रस है,
- 24:03वह सुख नहीं तुमने आनंद की परभाषा इसीलिए कर ली कि तुमने आनंद को
- 24:10कभी जाना नहीं। इसलिए तुमने महा असीम खुशी को कह
- 24:19दिया कि ये आनंद है, लेकिन नहीं, ये तुम्हारी न्यूरोस की खोज है।
- 24:29आनंद महाखुशी का नाम नहीं है। इसमें कोई क्वांटिटेटिव फर्क नहीं
- 24:38है। आनंद में और सुख में यद्यपि तुमने
- 24:42बना लिया है क्यों कि तुमने आनंद का एक लम्ह्हा भी कभी गुज़ारा है?
- 24:51तुमने कभी उसकी एक बूंद भी चखी नहीं और जीस चीज़ का तुम्हें
- 24:56अनुभव नहीं होगा तुम उसको व्याख्यायित कैसे करोगे?
- 25:00आज तो लोग परमात्मा को व्याख्यायित कर रहे हैं, उस आनंद
- 25:07की एक बूंद को भी। अन।
- 25:10और लोग उपनिषदों के ऊपर प्रवचन कर रहे हैं।
- 25:17ऐश की कुर्सी को लात मार दी ना घर के रहे ना घाट के रहे ना खुदा ही
- 25:22मिला ना बसा लेसन ना इधर के रहे, ना उधर के रहे धोबी का कुत्ता, ना
- 25:28घर का, ना घाट का। तुम लोगों की नजरों में बहुत
- 25:34विद्वान हो सकते हो, लेकिन तुम अपनी नजरों में क्या है?
- 25:39जी देखो तुम तुम आँखों में घुसों दे दे कर रोते हो भाई क्यों?
- 25:49मैंने कितनी कीमती जिंदगी बर्बाद कर दी, यह आनंद भी पिया जा सकता
- 25:55था। इन्हीं कीमती लम्हों में आज अच्छे
- 26:02दिन पाक्ष्य गए गुरू से किया ना हे?
- 26:08मैं उस अंतः में बैठे हुए गुरु से मिला नहीं, अब पच्छताय होत का जब
- 26:16चिड़िया झुक गई खेत अब तो 4050 के हो गए, अब चिड़िया खेत चुभ गई।
- 26:27अब तो इतने तुमने संस्कार पैदा कर दिए कि अगर तुम चुप रहना भी चाहो
- 26:32तो चुप न रह सकोगे। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस
- 26:39होते हैं। ये वो नगमा है जो हर सास में गाये
- 26:44नहीं जाता है। तुम क्या क्या यत्न नहीं करते?
- 27:02ऐड्स लगा लेते हो, शिष्य बना लेते हो, आगे के आगे प्रसारित करते हो,
- 27:09लेकिन तुम्हारी भावना होती है। समूह को ज्यादा से ज्यादा बढ़ें।
- 27:16संस्था को ज्यादा से ज्यादा धनवान करें।
- 27:21ज्यादा से ज्यादा शक्ति को जोड़ें।
- 27:25बोलता तो संत भी है लेकिन उसकी दृष्टि अलग ढंग से होती है।
- 27:35वह बोलता है कि दूसरे का भला हो जाए मेरी गगरिया भर गई और ऊपर से
- 27:43ही झलकता ही जा रहा है अमृत वह छलकता हुआ अमृत जो मेरे आस पास आए
- 27:51कोई तो वो अपील है। यह उसकी मंशा होती है।
- 27:56तुम्हारी मंशा होती है कि मेरे आस पास आ जाए और मेरी गिनती बढ़ जाए
- 28:02और दोनों में बड़ा फर्क है गिनती को बढ़ाना एक विकार।
- 28:14और दूसरे इस रस को पी लें, यह प्रोबकार तुम्हें कई बार देखने
- 28:25में एक से लगेंगे। एनलाइटन पर्सन एंड नॉन एनलाइटन
- 28:32पर्सन कुछ लोग तो कहेंगे ये होता ही नहीं पर मुझको बड़ी हैरानी
- 28:37हुई। प्रथम बार जब मुझे कहा कि आचार्य
- 28:41जी तो कहते है एनलाइटनमेंट होती ही नहीं, मैंने कहा फिर बुद्ध को
- 28:46क्या हुआ था? फिर राम किशन जब रास्ते में उसे
- 28:54राम कहते है और याद आता है राम और घर पड़ते हो छे 6 दिन तक पड़े
- 29:03रहते है क्या? उसको मिर्गी के दौरे पड़ते थे।
- 29:10अगर एनलाइटनमेंट नहीं होता, अगर समाधि नहीं होता, कल तुम कहोगे कि
- 29:15समाधि को जब नहीं होती समाधि तो रहस्य तो होता ही नहीं और रहस्य
- 29:22भी नहीं होता तो लीला भी नहीं होती और लीला भी नहीं होती।
- 29:29जिसके ऊपर मैं आजकल प्रवचन कर रहा हूँ अज्ञात और फिर इससे आगे जो
- 29:38मैं प्रवचन करूँगा अज्ञे। अननोन एंड अननोनबल वह तो बिलकुल
- 29:46ही नहीं होता। तुम्हारा कोई कसूर नहीं है।
- 29:51पुत्र तुमने बस उसे पिया नहीं तो मेरी दृष्टि में कोई गलत नहीं है
- 30:01ना मारकस गलत है। और यहाँ तक की चारबाग भी गलत नहीं
- 30:07और आचार्य भी गलत नहीं और ये सर लोग भी गलत नहीं, फिर गलत क्या
- 30:11है? गलत ये है कि उन्होंने वो
- 30:13अमृत्यशखन जब वो परमात्मा चाहता है।
- 30:22तो अच्छे अच्छे गायकों को राजनीति में प्रवेश करवा देता है।
- 30:30कल वो एक गायिका बोल रही थी अच्छी गायिका क्या नाम है?
- 30:36मैथिली राजनीतिक बातें बोल रही थी।
- 30:40तोतों की तरह पढ़ाया जाता है। तो जब मैंने उसे बोलते सुना तो
- 30:49मैंने कहा तोतली भी बोलनी शुरू हो गयी आज तो आज तो तोतली भी बोल
- 30:56गयी। ये तुम्हारी जिंदगी को आग में
- 31:06झोंकने को उत्साहित हैं। क्यों बदला लेना चाहते हैं?
- 31:10उन्हें पता भी नहीं, खुद दुखी हैं तो तुम्हें सुख ही नहीं देखना
- 31:16चाहते। यह अहिंकार की आदत है।
- 31:20अहंकार अपने से ऊंचा कद किसी को नहीं देखना चाहता।
- 31:24इसलिए अहंकार की पहचान तो मैं बता दूँ।
- 31:29अहंकारी व्यक्ति अपने कद से ऊंचे कद के व्यक्ति को बर्दाश्त ही
- 31:34नहीं कर सकता। मुझे लोग कहते हैं कि मोदी जी।
- 31:39जवाहरलाल को गाली निकालते महात्मा गाँधी को गाली निकालते।
- 31:44मैंने कहा पुत्र तुम कारण नहीं समझे?
- 31:49इनके अहंकार को चोट लगती है। इतना बड़ा कद तो फिर लकीर अपनी तो
- 31:57बड़ी नहीं की जा सकती। दूसरे के मिटा दो सीधा सा उपाय तो
- 32:07ये गाली निकाले निकाल ले जवाहरलाल गया, गाँधी गया इंदिरा गई।
- 32:17राजीव गया इन्हें बोलने दो, जो बोलते हैं और इनका इस तरह से
- 32:25द्वेषपूर्वक बोलना तुम शांत रहो बाबा नानी की वही बात कोई कहे पूत
- 32:31कोई कहे बे ताला तो यह मैं तुम्हे सत्य बताता हूँ।
- 32:38यह अपनी ही भीतर की बात को कह रहे हैं।
- 32:43ये भूत हैं, ये बेताल हैं, ये राक्षस हैं ये दुखी और बेचारे।
- 32:58जिसने सत्य नहीं जाना बहुत बार तुम सत्य के बिलकुल करीब आ जाते
- 33:06हो। हजारों जन्म तुम्हारे हो चूके
- 33:10हैं। यद्यपि तुम्हे पता नहीं।
- 33:14और सभी जन्मों के रिकॉर्ड तुम्हारे भीतर यू कैन सी व्हेनेवर
- 33:21यू वॉन्ट लेकिन तुम्हें पता नहीं है क्योंकि दो जन्मों के भीतर
- 33:30इतनी। पक्की दीवार होती तो तोड़ी नहीं
- 33:33जा सकती। ध्यान के बिना आप ही तोड़ सकते हो
- 33:37आप धरती पे कोई माइका लाल नहीं जो आपको पिछले जन्म में ले जा सके।
- 33:46इसीलिए ये जो। पीएलआर वगैरह करवा रहे हैं, जूठे
- 33:52हैं, पाखंडी हैं, व्यापारी हैं, इनको कुछ पता हैं, इनके अपने घरों
- 33:57में झगड़े चलते होंगे। जाके देख कबीरों के घर में झगड़े
- 34:04नहीं होते, बड़ी शांति होती है। वो भी चार ही होते हैं।
- 34:11देखने में तो कबीर लोई, कमाल कमली कभी झगड़ा नहीं होता और चार ही
- 34:23तुम्हारे होते हैं। तुम सुबह से शाम तक बॉक्सिंग ही
- 34:27करते रहते हो। रेसलिंग ही करते रहते हैं।
- 34:32उसने उसके झुंडे पड़ लिए। उसने उसके झुंडे पड़ लिए।
- 34:36उसने बेलन चला के मारा, उसने उसको छिल कर के मारा।
- 34:40ये कुछ होता रहता है। ऐसे ही तो कोई घर छोड़ के नहीं
- 34:49भागता कुछ तो मजबूरियां नहीं होंगी यही कोई बेवफा नहीं होता,
- 35:03सब तुम जोक उचित है। सुख्रात की घरवाली बहुत तीक्ष्ण
- 35:14से अभाव की थी। हर वक्त झगड़ा करती हर वक्त झगड़ा
- 35:20करती उससे बिल्कुल उलट सोक्रेटिस के भीतर बहुत सहन शक्ति थी।
- 35:29सारे दिन गालियां निकालती है, सोक्रेटिस की घरवाली पर वह
- 35:35मुस्कुरा देता है उसकी घरवाली उसको मुस्कुराता देखकर और दुख
- 35:40होता उसे। क्योंकि जब तुम्हें कोई गाली
- 35:45निकालता है, उसका मन तब होता है तुम्हें छोटा दिखाना।
- 35:50अपने आप को बड़ा दिखाना। लेकिन उसका मंतव्य तो पूरा हुआ
- 35:57नहीं। सोकलेट ही तो हँसते उसकी घरवाली
- 36:01को और गुस्सा आता वह और भारी सी गाली निकाल देते।
- 36:09सोकोरेटिस और ज्यादा ऊंचे हँसते अट्टहास करते तो जयंतिक पे जयंतिक
- 36:14पे था उसका नाम बेल न उठा के मारते, चिमटा उठा के मारती चकला
- 36:21उठा के मारते खून निकल आता। शुक्राथ दिए से उठते डॉक्टर की
- 36:29पासपोर्ट ठीक है बात अब ऐसे व्यक्ति से कैसे निपटा जाए?
- 36:38जैन थिप्पे और सोकोरेटिस के बीच में कभी शांति हुई नहीं।
- 36:47झगड़ते ही रहे। वो यूक्रेन और रूस की तरह 4 साल
- 36:53हो गए। रूस ने समझा था कि ये तो कल सुबह
- 36:57तक मैं जीत लूँगा लेकिन कई बार आदमी मर्म खा जाता है।
- 37:04शायद कल या बरसों चार वर्ष हो गए उनको जोक्रेन जीता ही नहीं गया तो
- 37:16जैन थेपे ने बहुत कोशिशों की तीन पुत्र थे उनके वो भी देखते क्यों
- 37:26डरते हैं ये? अपनी मम्मी से कहते ये क्या कर
- 37:29रही है तू? हमारे पिता तो कुछ बोलते ही नहीं
- 37:33बेचारे तू बेलन उठा के मार देती है, चकला उठा के मार लेती है ये
- 37:39बेचारा जाके पट्टी करवाके आ जाता है।
- 37:45तो सोक्रेट ध्यान में बैठते थे, अगर कोई जॉब करने वाला होता ना वो
- 37:51तो तुम एक मारते और वो चार मारते। मुझे लोग कह देते हैं अगर आज मैं
- 37:59तुम्हारे एक थप्पड़ मार दूँ तो गाँधी ने कहा था दूसरा गाला के कर
- 38:04लेना। मैंने कहा मैं भी दूसरा आगे कर
- 38:06लूँगा, क्यों तुम उसकी नकल करोगे? नहीं नहीं, मैं गाँधी ही तो हूँ,
- 38:15अगले जनम में संस्कार थोड़ी बदलेंगे, वहीं बस वस्त्र बदल लिए।
- 38:25तो अगर तुम्हें गोली मारनी बिल्कुल मारता हूँ, मैं व्यवस्था
- 38:31कर लेता हूँ। बोलो कब आने बाहर आया लेकिन तुम
- 38:35भागोगे, मैं नहीं भागूंगा। अब ऐसे व्यक्ति को क्या कहा जाए
- 38:45क्या किया जाए? 1 दिन सोक्लटीज़ ध्यान में बैठते
- 38:51थे, उसी तल पर जीस तल पर जाकर समतब प्राप्त होता है।
- 39:00उसके लिए जप नहीं करना होता। जप करने से तुम्हारी मशीनरी 23
- 39:09प्रकार की मशीनरी काम करती है तो आवाज निकलती है तुम्हारे 23
- 39:16ऑर्गन्स काम करते हैं। इकट्ठे तो आवाज निकलती।
- 39:2123 मशीनरी जीत चलेंगी तो गर्म होगी।
- 39:26व्यर्थ में ही आप राम राम राधे करके शक्ति व्यय करते हो, करते
- 39:32रहो मुझे कोई इतराज बहुत से प्रश्न मेरे पास आ जाते हैं बाबा।
- 39:39सभी संत नाम लेकर पहुंचे। फिर आप क्यों कहते हो, नाम मत लो,
- 39:47मैंने कहा मैं कब कहता हूँ मैंने तुम्हें कब कहा, मैं तो मात्र
- 39:52बोला उनको जो मुझे सुनना चाहते हैं, सुन लें तुमने क्यों सुना?
- 40:00तुम मत सुनो, तुम्हें जॉब करने में आनंद आता है तो घर चले जाओ,
- 40:06कान बंद कर लो और जॉब करती रहो। मुझे क्या कहती हो, मेरा मतलब
- 40:15तुम्हें सुखी करना है। मेरा मतलब तुम्हे अपने रास्ते पे
- 40:21लेके आना नहीं है, मेरा मतलब ये है कि तुम जीस रास्ते से भी सुखी
- 40:28हो सकते हो उस रास्ते पर चल दो, लेकिन मैं जानता हूँ पुत्रे।
- 40:35के जाप करने से मशीनें गर्म होती हैं।
- 40:41ज़्यादा ठंडी में अगर कार बाहर रख दोगे ना उसको चलाने के लिए गर्म
- 40:49करने के लिए धक्का लगाना पड़ेगा। जम जाएगी वो स्वाभाव होते हैं हर
- 40:59चीज़ के तुमने जाना है शांति की तरफ और जाप करने से पांच नाम जपने
- 41:10से तुम्हारे भीतर एनर्जी। खत्म होती है, समाप्त होती है।
- 41:16बालक झपकने में भी एनर्जी लगती है तो पांच इनाम झपने में एनर्जी
- 41:24नहीं लगती। क्या जो लोग कहते हैं आप निंदा
- 41:31करते हो? मैंने कहा दूसरों को अपना अनुभव
- 41:38बता देना निंदा है क्या? तो उसमें दूसरों की तो गलती
- 41:44निकलती है ना? मैंने कहा दूसरों की गलती निकालना
- 41:48गलत है क्या? अगर सही मार्ग बदला देना हो गलत
- 41:59है तो हाँ नहीं से गलती करता। आज सुन लो फिर सुन लो, लाख साल जप
- 42:08करते रहो। लाख जन्म जप करते रहो, तुम्हें वो
- 42:14नहीं मिलेगा जिसे तुम आनंद करते हो और अगर तुम्हें यकीन नहीं तो
- 42:25तुम पांच नाम जप के देख लो, मुझे क्या सुनाते हो?
- 42:30मेरे पास आने की जरूरत ही नहीं थी।
- 42:35मैंने कब बुलाया? तुम घर बैठो, राम राम करो राधे,
- 42:40रात करो शाम शाम करो मुझे तो पता ही नहीं है तुम क्या कर रहे हो,
- 42:46लेकिन जो जानना चाहता है जीसको। राम, राम, राधे, राधे या कुछ भी
- 42:54बोलने से अभी शांति नहीं मिली। अभी रस नहीं मिला हूँ।
- 43:04वह मेरे पास आ जा थका हरा मांदा दुनिया से परेशान इन गुरुओं से
- 43:10पाखंडियों से परेशान मेरे पास आ जा, लेकिन परेशान हो के आना मेरे
- 43:16पास सीधे सीधे मत आना। फिर तुम्हारा मन तर्क करेगा, तुम
- 43:22उस जुआरी की तरह आना। जो तुमने सारा दांव पे लगा दिया
- 43:26और वह मिला नहीं तुम सब कुछ हार के मेरे पास आना द्रौपदी सब कुछ
- 43:32हार के और सब कुछ हार के फिर पुकार की द्रौपदी ने तुम कहाँ गए
- 43:42महाराज? उससे पहले पुकार सच्ची उठती भी
- 43:46नहीं, तुम कहाँ गए महाराष्ट्र करो मत धैर्य दुख हरद्वार का अनाथ शरण
- 43:56में शरण में व्यक्ति तभी जाता है सच्ची शरण में।
- 44:04जब कर कर के हार जाता है। अगर तुम अभी प्रश्न पूछते हो तो
- 44:13मैं तो जानता हूँ ये बात कि तुम अभी हारे नहीं हो, इसलिए मैं
- 44:18तुम्हें खुरा छोड़ता हूँ कि तुम पहले करके ही देख लो।
- 44:25112 विधियों विज्ञान भैरव तंत्र की करके देख लो तुम्हें पता ही
- 44:31नहीं और 100 ने 112 विधियों क्यों बोली क्यों बोली तुम टूट जाओगे जब
- 44:40मैं बोलेंगे तुम्हें थकाने के लिए।
- 44:47जब तुम थक जाते हो तो तुम गिर पड़ते हो और उस गिरने के बिलकुल
- 44:56साथ एक निष्कर्ष मी संघ संघ चला आता है और निष्कर्ष क्या?
- 45:03कुछ भी करने से कुछ मिलता नहीं। कुछ भी करने से वह नहीं मिलता
- 45:08जैसे हम खोज रहे हैं। इसलिए बाबा नानक ने बड़ा सुन्दर
- 45:15थोड़ी सी शब्दों में तुने कहा। पूरा ग्रण साहब एक तरफ और यह
- 45:29पंक्ति एक तरफ सारे ग्रण साहब का सार एक शब्द में कह दिया बाबा ने
- 45:38और तुमने इस शब्द की तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया।
- 45:44क्या कहते हैं बाबा? ज़ोर न जुगती तुम्हारी किसी भी
- 45:54युवती में तुम्हारी किसी भी प्रार्थना में जाप में तप में।
- 46:03113, विज्ञान भैरव तंत्र की 112 विधियों में ज़ोर न जुगती युगती
- 46:10जैसे कहते हैं युग त तुम जो जुगती बढ़ाते हो, जो ढंग तुम अपनाते हो,
- 46:17परमात्मा तक पहुंचाने के लिए उसमें किसी में कोई ज़ोर नहीं है।
- 46:24ज़ोर न जुगती छूटे संसार संसार की पकड़ से संसार की बेड़ियों से
- 46:35छूटने का कोई भी युवती कोई भी साधना।
- 46:42काम नहीं करती तुम अंदर से हिलोगे इस बात के अर्थ तुमने जाने नहीं
- 46:50शब्द पढ़ें रोज़ पढ़ते हो जब जी साहब सुबह 4:00 बजे उठकर तुम 18
- 46:57मिनट में जब जी पढ़ लेते हो। जबकि इस शब्द का अर्थ तुम 18 जन्म
- 47:04भी नहीं जान पाओगे, पढ़ते रहोगे अगर ज़ोर न झुगती किसी भी साधना
- 47:18में कोई ज़ोर नहीं। इफेक्ट लेस तुम्हारे सभी प्रयास
- 47:35व्यर्थ हैं। तुम्हारे सभी प्रयास व्यर्थ हैं।
- 47:43ज़ोर न जोगती छोटे संसार तुम सभी। संसार के दुखों से मुक्त होना
- 47:50चाहते हो और इन दुखों से मुक्त होने के लिए तुम किसी न किसी
- 47:58युक्ति का सहारा लेते हो। वो नाम जप हो, वो प्रेम हो, वो
- 48:04साधना हो, वो पाठ हो। वो गीता जैन हो, वो बाइबल हो, वो
- 48:10कुरान हो, कुछ भी हो, ये सब युक्तियाँ हैं और नान कहते हैं
- 48:19किसी युक्ति में कोई बल है ही नहीं, तो फिर?
- 48:29क्या किया जाए? तुम इतने मूर्ख हो तुमने बाबा से
- 48:38प्रश्न पूछे क्या जीवंत गुरु से तुम प्रश्न पूछना चाहती नहीं
- 48:45क्यों? जीवत, गुरु आग की तरह है और मृत
- 48:50गुरु राख की तरह है राख में तुम हाथ फ्लोरते रहोगे, लेकिन वह
- 48:57तुम्हें जलाएगी नहीं लेकिन जीवत गुरु तो आग है, जीवत गुरु तो
- 49:04तुम्हें जला देगा। इसलिए जीवंत गुरु से अहंकारी
- 49:09व्यक्ति प्रश्न ने जोरना जोगती छूटा संसार इस एक शब्द को आप हृदय
- 49:17में गांठ बांध लो, किसी तंत्र में किसी यंत्र मंत्र।
- 49:27किसी युवती में कोई ज़ोर नहीं हर ज़ोर कहाँ आता है ये सब ज़ोर है
- 49:36इसमें बताने वाले पाखंडी हैं, लोभी हैं, लालची हैं।
- 49:44बुद्धू हैं, मूर्ख हैं यह मन के प्रभाव में आए हुए लोग हैं,
- 49:55मनमुखी हैं जो गुरू मुखी हो जाता है वह कोई युक्ति नहीं करता।
- 50:05जो भी कोई युक्ति अपनाता है वह मनमुखी है और मन तो तुम्हें
- 50:12भड़काता है मन तो कहता है ऐसे नहीं मिला तो फिर ऐसे ही मिल
- 50:17जायेगा। उत्तर में जाने से नहीं मिला तो
- 50:22दक्षिण में निकल जाओ, कहीं तो मिलेगा ना वो कहता नहीं मिलेगा
- 50:26क्यों? क्योंकि वो कहते हैं, चलने से
- 50:29मिलता ही है तो कैसे मिलता है? मैं भी तुम्हें कहता हूँ चलने से
- 50:38मिलता है। जीस क्षमता की तुमने बात की इस
- 50:43मतलब वहाँ जाने के लिए कोई मार्ग तय नहीं करना होता।
- 50:50यह वो तीर्थ नहीं जो तुम्हे कोई गाड़ी पकड़नी पड़ेगी।
- 50:54आगे बदलनी पड़ेगी। आगे फिर बदलनी पड़ेगी।
- 50:57और फिर तीर्थ यात्रा पर जाना होगा, स्थल पर जाना होगा, फिर
- 51:02गंगा में डुबकी लगानी होगी। सब बकवास है किसी युवती में कोई
- 51:12ज़ोर न जुगती छोटा संसार। फिर बाबा क्या कहते हैं, क्या
- 51:18किया जाए? बाबा कहते हैं, किब कूड़े, तुट्टे
- 51:34पाल फिर इस अहंकार की छलकपट, इसकी बनाई हुई संरचना।
- 51:44इसकी बनाई हुई जंजीरें कैसे टूटें?
- 51:48केव कूड़े तुट्टै पाल खाद्य बताते हैं, बाबा लेकिन यह विधि नहीं है।
- 51:55यह आविदी है हुक्म रजाई चल न न। बस तुम उसके हुक्म में चलो राजी
- 52:10हैं हम उसी में जिसमें तेरी रजा है, मेरी तो यही अर्जी कर वही जो
- 52:19तेरी मर्जी। और वैसे भी कर्तव्य है तुम हो ही
- 52:30नहीं, तो करोगे क्या खास ना तुम हो ना तुम्हारा कुछ है।
- 52:37और मृत्यु तुम्हें बदला देती है, मैं तुम्हें रोज़ बताता हूँ कि
- 52:41तुम कहीं भूल न जाओ, क्योंकि आदमी भुल्लनहार है, भूल ही जाता है तुम
- 52:49कहते हो आदमी हूमनेस्टो एरर्स मैं कहता हूँ नो आदमी भुल्लनहार है।
- 53:01फोरगेटफुल भूल जाता। तो ये अंहकार कैसे टूटे?
- 53:18यह इल्ल्यूशन कैसे मिटे कि मैं शरीर हूँ, मैं मन हूँ, मैं विचार
- 53:23हूँ, मैं वावर हूँ तो पापा कहते हैं इस मैं को ही परमात्मा के
- 53:32अर्पित कर दो। इस समय को ही अपने भीतर बैठे गुरु
- 53:38को समर्पित कर दो, बाहर बैठो, बाहर वाले तो उठाते हैं, अगर
- 53:46लाखों में से एक निकल भी गया तुम पहचान नहीं पाओगे तुम यहाँ
- 53:50तुम्हारे पास, आँखें नहीं। तुम धोखा ही खाओगे?
- 53:55खैर माखनशाह लुबाना ने धोखा खाये माखनशाह लुबरा कहते हैं मेरा जहाज
- 54:07बचा लो हे नवम बादशाह मैं सोह अशरफियाँ तेरी भेंट करूँ।
- 54:17जहाज बच गया। जैसे ही जहाज के किनारे से उतर के
- 54:23बाहर हैं, देखते हैं पंडाल लगे थे बड़े बड़े कोई टोपी पहनने का
- 54:28किश्ती नमक सब ने अलग अलग वेश धारण कर लिए थे।
- 54:35इन्हीं को वेशधारी कहते हैं कोई त्रिपुंड सजाये हैं, कोई लट्ठ
- 54:40उठाये हैं, लेकिन हैं सब सर्कस धारी सर्कसी हैं सब तो
- 54:51माखनशालवाना दिखारे ये तो टेंट बहुत लगे हैं।
- 54:55और सब आवाज जी हमारी परले मकान में रहता था मेरे पास एक गांव की
- 55:04स्त्री मुझे कहते बाबा एक बात बताओ फिर मैं भूल जाऊं मैंने कहा।
- 55:12यह जो पास रहते हैं, तुम्हारी कौन है?
- 55:15मैंने कहा क्यों क्या बात है? कित बताओ?
- 55:18तो मैंने कहा हमारा ही मेरा ही मित्र समझ लो, शिष्य समझ लो हमारी
- 55:27जाति के हैं, कुछ भी समझ लो। मैंने कहा बताऊँ क्या बात कहती,
- 55:35जब हम आपके घर में प्रवेश कर रहे थे तो वो ऐसे कर रही थी औरत से
- 55:39इधर आ जाओ, मैं अच्छा जानती हूँ तो मैंने कहा चले जाना था फिर?
- 55:49यहाँ तो वैसे भी हम नहीं चाहते कि कोई आए तो वी हाँ ही चले जाते।
- 55:57अरे वाह वाह वाह क्या चले जाते दर दर के मारे आपके किनारे आके आशरा
- 56:03मिला है मेरा आपकी। कृपा से सब काम हो रहा मेरा आप की
- 56:23कृपा से। सब काम हो रहा है, करते हो तुम
- 56:36कन्हैया करते हो तुम कन्हैया। मेरा नाम हो रहा है मेरा आप की
- 56:56कृपा से सब काम हो रहा कैसे चली जाती हो हाँ?
- 57:09अब तक कोई भी काम बिगड़ा नहीं। सभी हुए और व्यक्ति अज्ञात में
- 57:16जाने से डरता है। जाना पहचाना?
- 57:23हालांकि तुम कुछ जानते नहीं। किसी के बारे में बस 10 दिन का
- 57:28मिला है। इसमें ही तुम पहचान बना लेते हो
- 57:35और ये पहचान कोई पहचान नहीं होती। हुक्मरजाई जलना, नानक लिखना यह
- 57:47कोई विधि नहीं है। सोने की भी कोई विधि होती है?
- 57:52क्या सोने की कोई विधि होती है? सोने की कोई विधि नहीं होती।
- 57:59जब तुम थक के जाते हो, पांच नाम जपते तो नींद आ जाती है, थक जाते
- 58:05हो एनर्जीलेसनेस हो जाते हो बस ये पांच नाम रात ही रात राम राम ये
- 58:12पाठ पूजा, ये छोड़ शुभ चार पूजन। सभी तुम्हारे कर्मकांड तुम्हें
- 58:23तुम्हें थकाने के लिए कैसे तुम्हारा अहंकार थक जाए और थका
- 58:30हुआ अहंकार समर्पित जल्दी कर देता है, तो 112 विधि बनाई।
- 58:38ऋषियों ने किसी न किसी तरह तो थकोगे वह तुम्हें पहले मैराथन
- 58:45कराते हैं लेकिन आज के गुरु तुम्हें सिर्फ मैराथन ही कराते
- 58:52हैं। उन्हें ठहरना खुद ही नहीं आया।
- 58:57जीने वाले तुझे जीने का, सिलिका ही नहीं रोने वाले, तुझे रोने का
- 59:04सिलिका ही नहीं रोने वाले, तुझे रोने का सिलिका ही नहीं अश्क पीने
- 59:13के लिए है जा के बहाने के लिए। ये आंसू पीने के लिए ज़िन्दगी के
- 59:22रस को ढूंढने वालों छोड़ दो संविधियों को लात मारो सभी
- 59:30साधनाओं को कोई साधना में कोई बल नहीं ज़ोर न झुकती छूटे संसार।
- 59:37तुम इन संस्कारों से मुक्त होना चाहते हो, इन दुखों की बेड़ियों
- 59:41से मुक्त होना चाहते हो, सब प्रयास छोड़ दो तो बाबा कहते हैं
- 59:47उस परमात्मा के ऊपर छोड़ दो। वह बड़ा विशाल है।
- 59:52जो इतनी सृष्टि को घूमा सकता है, तुम्हारा जीवन नहीं घूमा सकता, वो
- 59:57सिर्फ तुम्हारा जीवन कितना बड़ा है?
- 1:00:02इतनी विशाल सृष्टियों को बृहस्पति ग्रह में 1300 पृथ्वीयां संभाल
- 1:00:09सकती हैं। और सूरज के अंदर 13,00,000
- 1:00:14पृथ्वीया सुना सकती हैं और तुम पृथ्वी के ऊपर खड़े हुए एक नन्हे
- 1:00:20से लड़ी हो तो तुम्हारी औकात क्या है?
- 1:00:22और ये तो मैंने थोड़ा सा बताया है।
- 1:00:28पूरी नक्षत्रिय ग्रह नक्षत्रिय प्रणाली।
- 1:00:31अगर तुम सुनोगे तो तुम सुनते सुनते बेहोश हो जाओगे उसने इतना
- 1:00:36कुछ बना दिया, लेकिन कमाल की बात है तुम्हारे हाथ नहीं जोड़तें
- 1:00:43उसकी विरटता की आँखें। यही कमाल है बंदे की इतनी वराटता
- 1:00:50को देखते हुए भी सारा भ्रमण उसकी आरती उतार रहा होता है।
- 1:00:57रात को देखना ये तारे दीपक हैं, उसकी आरती उतार रहे हैं।
- 1:01:05फिर भी तुम अपना छोटा सा दीपक लेके आरती उतारते हो भला यह उसका
- 1:01:11मजाक नहीं है तो और क्या है? ज़ोर न जोगती छोटा संसार।
- 1:01:24तो बाबा कहते हैं सभी युवतियों को छोड़ दो, आज छोड़ दो नहीं अभी
- 1:01:29छोड़ दो डीव ऑल दी एफर्ट्स नौ एंड नौ अभी अभी।
- 1:01:41कल नहीं मन तो कहेगा कल छोड़ देंगे अभी छोड़ दो, मुक्त हो जाओ
- 1:01:47तुम मुक्त होई। तुम शेख चिली की तरह बड़ी बड़ी
- 1:01:59योजनाएं सोचते हो? बस योजनाएं ही सोचते हो, योजनाएं
- 1:02:06ही बनाते हो करते धरते हो। उसे तो शेखशल्ली का बवा नहीं हो
- 1:02:11रहा था क्योंकि पैसे ही नहीं थे। पुराने जमाने की बात है।
- 1:02:20एक सेठ ने कहा ये मेरा मटका है, घी से भरा हुआ तुम इसको ले चलोगे,
- 1:02:29तुमको दो पीसे दूंगा दो पीसे बहुत होते थे उस वक्त कहता हाँ ले सुन
- 1:02:36लूँगा तो उठा फिर इसको। कहता, सेठ जी थोड़ा हाथ लगवा दो,
- 1:02:43सिर के ऊपर मुक्का बांध लिया और घी से भरा हुआ घड़ा घृत पात्र सिर
- 1:02:52के ऊपर रख लिया चल पड़ा। शेख चिली के अंदर परमात्मा जब शेख
- 1:03:06चिली का निर्माण कर रहा होता है तो उसके ए आई कंप्यूटर्स के जो
- 1:03:13कारीगर होते हैं वो कुछ ऐसा पुर्जा लगा देते हैं, जो छोटी बात
- 1:03:18सोच ही नहीं सकते। जो सदा ही बड़ी कल्पना करता है।
- 1:03:24शेख चिली की तरह पूरे कुछ भी नहीं होते।
- 1:03:28अब आगे सुनो वो जा रहा है बस ये गांव तो आया।
- 1:03:36और जब मैं गांव में चला जाऊंगा दो, पीसे में शादी हो जाती थी तब
- 1:03:42इतना बहुत होता था, दो पीसे तो चलो आज दो पीसे मिल जाएंगे और
- 1:03:49शादी हो जाएगी चले जा रहा है। विचारों में मगन शादी हो जाएगी
- 1:04:00फिर मेरे बाल बच्चे हो जाएंगे फिर मेरे बाल बच्चों के बाल बच्चे हो
- 1:04:06जाएंगे, फिर मैं अकड़ के बैठा हूँ, हुक्का पिया करूँ।
- 1:04:19फिर मैं कभी कभी नाराज भी हो जाया करूँगा।
- 1:04:26मैं उलट उलट भी बोल दिया करूँगा और फिर कभी कभी मैं कहूंगा मैंने
- 1:04:34नहीं खानी रोटी जाओ, ले जाओ इसे। बच्चे कहेंगे नहीं पिताजी ऐसा मत
- 1:04:42करो दादू रोटी तो खा ही लो, ऐसा सोचते सोचते चला जा रहा था।
- 1:04:53अभी आधे रास्ते में पहुंचा था। तो बड़ी कल्पना कर रहा है तो किसी
- 1:05:03बात पर रूस गया है। शेक चिली रूठ गया है।
- 1:05:08उसका पोता आया कि दादू रोटी खा ले।
- 1:05:17सेठ सेले का तो नहीं खाऊंगा और इतनी ज़ोर से बोला वो घड़ा लुढ़क
- 1:05:23गया जो सैर के ऊपर का था लुढ़क गया नीचे गिर गया सारा का?
- 1:05:35ओह सेठ कहता है अरे तुने ये क्या किया?
- 1:05:39हाँ, किन विचारों में खोये हुए जा रहा था, मैंने तो पीसा भी नहीं
- 1:05:43घटाया दो पीसे मांगे दो ही दे दिए ये तुने क्या किया मेरा बहुत बड़ा
- 1:05:49नुकसान हो गया। सेक्सली बोला अरे तुम तेरा क्या
- 1:05:59नुकसान हो गया तेरा तो कुछ भी नुकसान नहीं हुआ सेट मेरा बहुत
- 1:06:04बड़ा नुकसान हो गया तो सेट बोला तेरा क्या नुकसान हो गया?
- 1:06:10कहता सेट मेरी तो कबीरदारी यूज़्ड।
- 1:06:16ऐसे ही शेक चिल्लियों की 1 दिन कबीर दारी उखड़ जाती है, उजड़
- 1:06:21जाती है जिनके भीतर परमात्मा के एआई कंप्यूटर्स।
- 1:06:31कि ठीक करने वाले जो पुर्जा उनकी कबिल दरिया उजड़ जाती हैं, घर
- 1:06:38छोड़ के भाग जाती हैं, कोई सम्मान नहीं मिलता, बस दिखावा ही दिखावा
- 1:06:44ऐसे ही रह जाता है। कौन किसी के शंक जाता है?
- 1:06:531 दिन धर्म से सब घर पड़ते है हुत ना ही हुपकार समझ कोई जितना।
- 1:07:08साथ निभा दे उतना ही उपकार समझ कोई जितना।
- 1:07:24साथ निभाते जन्म मरण का मेल है सपना।
- 1:07:45दे जन्म मरण का मेल है सपना। ये सपना बिसरा ले कोई न संग मरे
- 1:08:08कौन बढ़ता है संग? कोई न संग मरे मनरे तू का बिना
- 1:08:23धीर धरे। ये निरमोहे ये बाल बच्चे, ये बाल
- 1:08:35बच्चों के बाल बच्चे, निरमोहे मोह न जाने कोई किसी से मोह नहीं
- 1:08:44करता। 4 दिन की जल्द कहानी।
- 1:08:48दो आर्ज़ में कट गई दो इंतजार में कोई न सॉन्ग मरे मनरे तू का है
- 1:09:05ना? धीरूधर निर्मोहि करे।
- 1:09:26किन का मुँह करता है तू मन रे तू काहे ना दे धरे बड़े सपने लेना
- 1:09:42छोड़। यू आर ऑलरेडी वास्ट इन्फिनिट
- 1:09:51ऑलरेडी तुम अनंत हो, असीम हो, विराट हो विशाल पहले से ही बनना
- 1:09:58नहीं है तुम्हें? बस जानना है और जानोगे कैसे?
- 1:10:09उसके भाणे में रहकर जो तुद पा व साईं गल चंगे।
- 1:10:19छोड़ दो अपने जीवन की नैया को, उसके ऊपर किताब जीवन होता है यही
- 1:10:24सो 50 साल का जीवन तुम बहुत बड़ा समय से कितनी पीढ़ियाँ आईं, कितनी
- 1:10:31चली गईं, सबने इसी तरह सोचा, जीस तरह तुम सोच रहे हो और आई वो कहाँ
- 1:10:37है। ऐसे ही तुम भी कभी ऐसे ही हो
- 1:10:44जाओगे तुम्हारी दसवीं, बीसवीं पीढ़ी पूछे कि आज वो कहाँ?
- 1:10:57सपने देखने छोड़ दो, बड़ी कल्पना करनी छोड़ दो आज का मरण जो जितनी
- 1:11:05बड़ी कल्पना करता है वह उतना बड़ा सरकसिया होता है।
- 1:11:11धरातल पर रहना सीखो। हवा में कभी चला नहीं जाता धीरज
- 1:11:23रखना सीखो, धरातल पर चलना सीखो क्योंकि हवा में कभी कोई चला
- 1:11:31नहीं। तुम धरती के ऊपर चलते नहीं, तुम
- 1:11:40हवा के अंदर चलते हो, लिफाफेबाजी करते हो, हवाई हवा हवाई बातें
- 1:11:46करते हो, इसलिए 1 दिन तुम धर्म से घर पर हो।
- 1:11:53एपिस्टीन में तुम्हारा नाम आ जाता है।
- 1:11:56क्या खाक छोड़ा तुमने कुछ नहीं छोड़ा सब सर्कस है 4 दिन का मिला
- 1:12:09है जन्म मरण का। मिल है सप न ये सप न भीसरा जैसे
- 1:12:24तुम सपने देखने छोड़ दोगे, ऐसे ही तुम उस समता के भीतर प्रवेश कर
- 1:12:31जाओगे। आखिरी बात सुन लो, यह ज्यादा
- 1:12:46कल्पनाएं तुम्हें अपने आप से दूर चली जाओ।
- 1:12:54इन कल्पनाओं के पंख होते हैं धरती के पंख नहीं होते, धरती पे चलना
- 1:13:03सीखो, इन कल्पनाओं के पंखों के ऊपर मत बैठो, 1 दिन धड़म से करो
- 1:13:10पिछवाड़ा टूट जाएगा। इस झूठे संसार में पहले से ही झूठ
- 1:13:22बहुत है। उसके ऊपर भी तुम फिर झूठ बोलते
- 1:13:29हो। पहले तो तुम शरीर ही नहीं हो, यही
- 1:13:31झूठ है तुम्हारा तुम विचार नहीं तुम भावना ही नहीं।
- 1:13:39तुम कहते हो ये तो मैं हूँ, ये तो मेरा है ये गद्दी तो मैं नहीं
- 1:13:43छूटूंगा ये तो मेरी है, कौन रुका है यहाँ कितनी ही बेहतर क्वालिटी
- 1:13:49की फैविक को लगाव उखाड़ने वाले? कॉलर में हाथ देंगे और पुकार
- 1:13:56देंगे भला किसकी ताकत है ये रामदेव रावणदेव जाको बहु परिवार।
- 1:14:11कह नानक थिर कुछ नहीं, सपने हों जो संसार ये सपना है, जन्म मर्ण
- 1:14:19का मेल है, सपना ज्यादा कल्पनाएँ मत देखो, बस आज का सूत्र ज्यादा
- 1:14:26कल्पना देखोगे तो हवाओं में उड़ते रहोगे।
- 1:14:33धरातल पर आना सीखो, धरातल पर आने से तुम समित्व को प्राप्त कर
- 1:14:40पाओगे क्योंकि वह समित्व जहाँ तुम बैठे हो, तुम्हारी पांव तो धरती
- 1:14:49पर ही चल सकते हैं। हवा में कोई नहीं चल सकता है।
- 1:14:58हवा में जल्द उठते है, तुम नहीं उठते तो तुमने पूछा दूसरे अध्याय
- 1:15:09में सम तुम जोग उचित? उस समता को प्राप्त कैसे हुए शेख
- 1:15:18चिली के जैसे सपने देखने बंद करो शेख चिली के जैसे।
- 1:15:34नई नई खोज खोजनी बंद करो दिमागी तुम उलझ जाओगे, अपने आप में से
- 1:15:45उलझ जाओगे, तुम कहीं और ही गायब हो जाओगे।
- 1:15:55और फिर ना रहा।
- 1:16:51किसको दिखाते हो जीसको गलबकड़ी डाल के दिखाते हो?
- 1:16:58वो खुद बहुत ही छोटा है, इस संसार की वैरायता को देखो।
- 1:17:09और उसके नज़रिए से देखो तुम्हारी औकात क्या है और जिसके साथ तुम गल
- 1:17:15बकड़ी डालते हो, उसकी औकात क्या है?
- 1:17:19धरातल पर आना सीखो लीव ऑल दी इमेजिनेशन।
- 1:17:26आज का सूत्र सभी कल्पनाओं को छोड़ दो, तुम अपने आप में आ जाओगे।
- 1:17:37अगर तुम अभी तक अपने आप में नहीं आए तो समझ लेना कोई न कोई कल्पना
- 1:17:43तुम्हें चपेटे खड़ी है। तुम कलिंग हो, किसी ना किसी
- 1:17:50कल्पना से उस कल्पना को खोजो और उसको तोड़ दो तुम पाओगे तुम धरातल
- 1:17:58पर आ गए धरातल पर आने से ही। संत तुम योग उचते बस तुम शम हो
- 1:18:08जाओगे फिर हर्ष नहीं, शोक नहीं लाभ नहीं, हानि नहीं, यश नहीं अप
- 1:18:15यश नहीं मृत्यु नहीं। अमृता फिर अद्वैत है।
- 1:18:21दूसरा कुछ। शिवम् शिवम् शिवम् पर आत्मा
- 1:18:37सचिदानंद। शिवम् शिवम् शिवम् शिवम् सम, तुम
- 1:18:53तुम खुद हो तुम्हारा खुदी तुम्हारा खुद का हो ना?
- 1:19:01क्षमता है और ये तो ढांचा है। ये सब ढांचा है यह इस शरीर में यह
- 1:19:10तुम्हारा घर है, इसके भीतर तुम बैठे हो यह है, तुम नहीं।
- 1:19:20तुम इसके भीतर बैठने वाले वह समता रूपी तत्व जिसे हर्ष नहीं होता,
- 1:19:28जिसे शोक नहीं होता, जिसे हानि नहीं होती, लाभ नहीं होती, जिसे
- 1:19:34यश नहीं होता, जैसे अपि यश नहीं होता, जिसे मृत्यु मारती नहीं।
- 1:19:39जीसको आग जलाती नहीं, पानी डलता है, वायु सुखाती नहीं, वहीं आत्मा
- 1:19:48सच्चिदानंद सेवो हम सेवो।