Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Jan 25 - कैसे होंगे परमात्मा के दर्शन? भीतर जाने का रास्ता और आत्मज्ञान प्राप्त करने का सूत्र!
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- 0:22नीलू प्रेम शर्मा बाबा प्रश्न पूछने से पहले क्षमा करें,
- 0:37क्योंकि ये प्रश्न आपके विरुद्ध जाएगा।
- 0:44आज से 2530 साल पहले हमारा पूरा परिवार झगड़े से ग्रस्त था।
- 0:56कोई भी व्यक्ति एक दूसरे को। फूटी आँखों नहीं सोता था।
- 1:01हम आपस में झगड़ते ही रहते थे और पूरा परिवार आपके पास आया करता
- 1:08था। गरीबी थी लेकिन मेहनती थे,
- 1:19परिश्रम करते थे। तब आपने हमने राधा राधा मंत्र
- 1:31दिया था और हमने सभी ने बह निष्ठा पुरो के जप था, क्योंकि आपस में
- 1:42हम लड़ते थे। लेकिन आपके पांव छूते थे, आपकी
- 1:48कद्र करते थे। उस राधे राधे का ऐसा परिणाम
- 1:54निकला। हमारे घर में शांति आ गई।
- 2:04हम समृद्धि की तरफ बढ़ने लगे और 10 वर्ष के भीतर हम लखपति हो गए।
- 2:18फिर करोड़पति हो गए आज अरबपति। ये सब आपकी बदौलत है।
- 2:28मन टूटता है जब आप ये कहते हैं कि राधे राधे मत करो।
- 2:41क्या इसकी कोई इंटरनल कोरोनोलॉजी है?
- 2:49अगर है तो समझाओ अन्यथा ये बिलकुल विपरीत बातें हैं।
- 3:00हमें समझे नहीं आती। प्रश्न बड़ा सुंदर है, इसके भीतर
- 3:26की क्रोनोलॉजी क्या है ये बता दें यह आपने हमें राधे राधे मंत्र
- 3:33क्यों दिया? आप और भी लोगों को मंत्रा देते थे
- 3:40ओम नम हैं शिवाय ओम नम भगवते रुद्राय ओम नम भगवते वासुदेवय
- 3:48हमने खुद देखा है। हमारे जीवन में क्रांति आई, घरेलू
- 3:59संपदा में क्रांति आई और उसका परिणाम ये हुआ कि हम सभी भाई,
- 4:07बहनें। दुरानी जेठानी आपस में प्रेम से
- 4:13रहने लगे, फिर कोई झगड़ा नहीं हुआ।
- 4:18क्या ये राधे राधे जप का प्रणाम नहीं था?
- 4:31भगवान कृष्ण का एक शब्द है सभी के लिए वह शब्द या श्लोक या मंत्र
- 4:44कारगर है। इसे ध्यान से सुनना है, जहाँ
- 4:57शांति है, वहाँ समृद्धि है शांति के बिना समृद्धि आती है।
- 5:11जहाँ शांति है वहाँ स्मृति है, यह बात व्यक्ति पे भी लागू होती है,
- 5:17परिवार पर भी, समाज पर भी, गांव पर भी, जिले पर भी, राज्य पर भी
- 5:25और देश पर भी और विश्व में भी। इस अभूतपूर्व सूत्र का कोई शान ही
- 5:36नहीं, भगवान श्री के मुख से निकला हुआ ये वचन बड़ा प्यारा है।
- 5:47इसके भीतर की क्रोनोलॉजी क्या है ये तो मैं आज समझाऊंगा।
- 5:53अच्छा किया। बरसों पुरानी यादें तो मैं याद
- 5:57करती। हूँ वो भूली दास।
- 6:10लो फिर याद आ गई वो भूलीदास तां लो, फिर याद आ गई।
- 6:32नजर के सामने खटा से छा गई। भौली दास, ता।
- 6:53अब देखिये मैं भी राधा राधा और कोई भी जप दे देता था आपको हँसी
- 7:07आएगी। खड़ मस्ती में बैठा बैठा मैं कभी
- 7:17कभी ऊंट पटांग नाम भी दे देता था। अट्टा कट्टा बम्बर बो।
- 7:27इसका जाप करते रहे, मेरा सिद्ध किया हुआ है।
- 7:38वो करते हैं, उसके परिणाम आते हैं।
- 7:47पीछे की क्रोनोलॉजी क्या है? नाम कोई भी देता है, मैंने भी नाम
- 7:53दिया है अब भी देता हूँ। लेकिन डॉक्टर के पास जब कोई
- 8:01पेशेंट आता है वह जरूरी नहीं कि सभी पेशेंट एक ही तरह के और संत
- 8:10के पास जो व्यक्ति आते हैं जरूरी नहीं कि उन सब को एक रोक हो, कुछ
- 8:17मानसिक वेदनाओं से। शारीरिक वेदनाओं से त्रस्त होते
- 8:22हैं और कुछ व्यक्ति अपनी अध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं तो
- 8:28सब के लिए एक मंत्र काम नहीं आएगा।
- 8:31सब के लिए एक दवा भी काम नहीं आते।
- 8:40वक़्त की नजाकत देखनी पड़ती है। अब आज तुमने पूछ लिया इब तो इन
- 8:49वर्षों के बाद बाबा की सवाल हैं आज अरबपति ने।
- 8:57अगर आपने तब न बचाया होता, मैं ये बात बताना नहीं चाहता था क्योंकि
- 9:08बहुत से व्यक्तियों की पोल खुल जाएगी और कम से कम मैं इसे
- 9:13सीक्रेट रखना चाहता था। आपके पूछने पर इधर उधर घूम जाता
- 9:17हूँ। प्रश्न के असली जवाब में आया नहीं
- 9:21करता था, लेकिन आज तुमने गले मुर्दे उखाड़ दिया क्या होता है
- 9:33सभी लड़ते थे? मुझे याद है?
- 9:37परिवार के करीब 10 सदस्य थे। और किसी की किसी के साथ नहीं बनते
- 9:44थे। 36 का आंकड़ा सभी के साथ लड़ाई
- 9:47झगड़ा हर वक़्त और जहाँ झगड़ा होगा।
- 9:52भगवान कृष्ण कहते हैं वहाँ दरिद्रता आएगी जहाँ समृद्धि चाहते
- 9:59हो। तो फिर शांति लानी पड़ेगी यही
- 10:10मंत्र मैं आज भी काम करता हूँ और यही मंत्र तुम्हारे नाम देने वाले
- 10:17उनको पता हो न बताओ। कई बार ऑटोप्लाडिज्म में आ जाते
- 10:22हैं, वो खुद को भी सम्मोहित कर लेते हैं।
- 10:30इसका मंत्र जप करते रहो बस सभी ठीक हो जाएगा।
- 10:34नहीं होता भाई सब ठीक। लो, आज खोल देता हूँ इच्छा मेरी
- 10:44यही थी कि मैं खोलूं लेकिन मेरे करीबी शिष्यों को पता है वास्तविक
- 10:56ज्ञान जो किसी और फिराक में हैं, जो कुछ और चाहते हैं।
- 11:03उन्हें देना ही पड़ता है, लेकिन तुम्हारा उस वक्त बुरा हाल था।
- 11:11सुबह उठते थे, एक दूसरे को पीटने लग जाते थे।
- 11:15यहाँ से शुरुआत होती थी, कोई चाय नहीं, कोई नाश्ता नहीं याद है
- 11:22मुझे। और सभी मेरे पास आते थे, यही
- 11:28सौभाग्य रहा। मैंने आपको मंत्र दे दिया ये
- 11:42मंत्र जप और मुझे याद है मैंने वक्त भी बाँटा 3 घंटे कम से कम।
- 11:53इसके भीतर की एंटायर करोनोलॉजी क्या है?
- 11:58तुम्हारी भीतर शक्ति होती है वो शक्ति, रचनात्मक या ध्वंसात्मक
- 12:05किसी भी काम पे प्रयोग कर लो। तुम ध्वनसात्मक प्रयोग करते हो,
- 12:14रचनात्मक तुम करते नहीं तो सब मजेदार आदमी आपको ध्वनसात्मक करने
- 12:20से रोकेगा। यही मेरा फार्मूला है।
- 12:28मैंने तुम सब को काम लगा दिया। करो रात रात हुआ क्या?
- 12:35वो सुबह उठ के झगड़ा करते थे, मार पिट करते थे, थप्पड़ो थपड़ी होते
- 12:41थे, वो सुबह उठ के शांति पानी पीते।
- 12:47अपने अपने स्थान पर बैठ गए। राधे, राधे, राधे, राधे वह शक्ति
- 12:55जो झगड़ों में जाती थी, वह शक्ति राधे राधे में लगनी शुरू हो गई।
- 13:03और 3 घंटे का जप किसी भी व्यक्ति के सिर में दर्द कर देगा।
- 13:08मैं जानता हूँ तुम निष्क्रिय हो जाते, उसके बाद लड़ाई झगड़े के
- 13:12भीतर क्षमता, संभावना और शक्ति तीनों ही न रहते।
- 13:25क्लेश धीरे धीरे खत्म हो गया। वह शक्ति जो झगड़े में जाती थी,
- 13:31राधे राधे में लगनी शुरू हो गई। यह वैज्ञानिक क्रोनोलॉजी है मैंने
- 13:41यह मंत्र तुम्हें क्यों दिया, कब दिया?
- 13:44परिस्थितियों पर विचार करना होगा। मनोस्थियो पर विचार करना होगा और
- 13:51देखिये सीधी सी बात है जब तुम शांत हो गए, ये पेट तो रोटी
- 13:59मांगता है, 3 घंटे जाप करना है। शक्ति तुम्हारी जो लगती थी एक
- 14:11दूसरे को पीटने में वह राधे राधे में लग गए अब काम भी थोड़ा बहुत
- 14:17करना कुछ शक्ति वहाँ भी लगी और शाम थके हारे मांदे।
- 14:26गिर पड़े। बिस्तर पे कौन लड़ेगा, किस से
- 14:29लड़ेगा यही होता है और यही हुआ रोग की जड़ को जो ना पकड़े वह संत
- 14:43नहीं होता, वह डॉक्टर भी नहीं होता।
- 14:49झड़को पकड़ो और भगवान के इस सूत्र को याद रखो, जहाँ शांति है, वहाँ
- 14:57समृद्धि है। मेरे सुनने वालों से मैं सभी को
- 15:02यही मंत्र देता हूँ घर में झगड़ा है।
- 15:06तो राधे राधे करो मैं कहता हूँ कुछ भी करो अगड़ पगड़ बम बाबू
- 15:18शब्द है शब्द कोई भी प्रयोग कर लो क्या बिगड़ता है?
- 15:26मैं अंट शंट शब्द दे देता था और मैं कहता मैंने सिद्ध कर रखे हैं
- 15:32तुम झपो तो परिणाम आयेंगे और आते तुम्हारे पर भी आया।
- 15:40इसके भीतर की क्रोनोलोजी ये थी। जो शक्ति लगती थी, आपसी झगड़े में
- 15:47वो मैंने खपा दी राजराजन फिर पेट भी मांगता है, फिर बच्चे भी
- 15:53मांगते हैं, फिर बच्चों के फीस भी भरने हैं।
- 16:01आज क्या हुआ है समाज में? समाज क्यों विभक्त हो गया है?
- 16:08यही कारण है संयुक्त परिवार में विचार नहीं मिलते।
- 16:15विचार तो कभी किसी का कभी मिलता ही नहीं है।
- 16:18एकाकीय परिवार में भी कहाँ मिलता है?
- 16:21लेकिन मजबूरी है करना पड़ेगा। सूक्त परिवार में नहीं मिलते तो
- 16:27इसलिए भाई अलग हो जाओ। लोग अलग होना शुरू हो गए तो
- 16:35संयुक्त परिवार के अपने लाभ भी हैं, फायदे भी हैं।
- 16:41एक बीमार हो जाएगा, दूसरा संभाल लेगा एकाकी परिवार के अपने लभ
- 16:46हैं, कोई झगड़ा नहीं होगा। अपनी शक्ति, अपने रचनात्मक कामों
- 16:55में लगे हैं। भीतर की एंटायर क्रोनोलॉजी ये है
- 17:04जो भी नाम देते हैं नाम में कुछ भी नहीं है नाम तो कोरे शब्द हैं
- 17:13लिपिया हैं अब आप देखो। जिसे तुम पानी कहते हो, उसे
- 17:25अंग्रेज वाटर कहते हैं। आप कहते हैं मुसलमान प्रत्येक
- 17:39भाषा के लोग सबके अलग अलग नाम हैं।
- 17:47तुम क्या समझते हो? आब मांगोगे, जल मांगोगे, पानी
- 17:53मांगोगे, नीर मांगोगे, एक ही चीज़ आएगी जो सभी भाषाओं को जानता है।
- 18:03शब्द हैं। शब्दों में कोई जान नहीं है
- 18:12क्योंकि शब्द तुम्हारे बनाए हुए हैं।
- 18:15भगवान ने कोई शब्द नहीं बनाया। भूल जाना इन बातों को कि वेद
- 18:20भगवान ने बनाया है लिपि भगवान ने बनाई ही नहीं है, भगवान की कोई
- 18:25लिपि नहीं होती। भगवान की जो लिपि होती है न वो जब
- 18:30आप समझने लगोगे तब आपको समझाएगा वो किस भाषा में बोलता है?
- 18:38इसलिए तो सारी सृजना की रखवाली करवाता है, क्योंकि उसकी एक अलग
- 18:44भाषा है और जीस स्तर पर तुम जाकर उसके संदेश आते हैं वहाँ पकड़ोगे
- 18:52वहाँ तुम्हें ये भाषाएं नहीं मिलेंगी एबीसी नहीं मिलेंगे वहाँ।
- 18:57क्या क्या नहीं मिलेगा वहाँ उसकी भाषाएँ मिलेंगी तुम्हें और बखूबी
- 19:04समझाएंगे वो तल ऐसा कि वहाँ जाकर तुम उसकी भाषाएँ समझने लगोगे।
- 19:15ये भाषाएँ मानव की हैं। मानव निर्मित भाषाएँ तुमने बनाई
- 19:21हैं और कोई भी नाम राम हो, कृष्ण हो, राधा हो, जो भी पांच नाम देते
- 19:31हैं सो हम हो। सभी नाम मनुष्य ने बनाए।
- 19:36परमात्मा ने कोई नाम नहीं बनाया। ये लिपियां तुम्हारी इज़ाद हैं और
- 19:44तुम्हारी इज़ाद से कोई परमात्मा तक पहुंचेगा, यह मुश्किल नहीं
- 19:49असंभव है। इसे मैं बखूबी जानता जानता भी था
- 19:57लेकिन मैंने तुम्हारी समस्या का निदान करना था।
- 20:04मैं प्रैक्टिस किया करता था। डॉक्टर मेरे पास कुछ ऐसी पेशेंट आ
- 20:09जाते हैं जिनको कोई बिमारी नहीं होती।
- 20:13बिमारी क्या होती है? वहम जैसे आपको वहम हो जाता है
- 20:17बाबा जब हम ध्यान में बैठते हैं हजारों चीटियाँ शरीर पर चढ़नी
- 20:23शुरू हो जाती है। ऊपर भाई कहाँ से आ जाती है?
- 20:26चीटियाँ ये मन की सरलता है। चलते फिरते से नहीं कोई चींटी
- 20:37नहीं रहेंगी। अब बैठ गए ध्यान में तो मन ने कला
- 20:43बाजियाँ खानी शुरू कर दीं तो ऐसे पेशेंट भी आ जाते थे।
- 20:49फिर हम क्या करते हैं? एक वाटर फार इंजेक्शन आता था,
- 20:57उसमें से पानी भरते, डिस्टिल्ड वाटर होता था।
- 21:03उसका इंजेक्शन लगा देते हैं। लो भाई एक इंजेक्शन।
- 21:08शाम को लगा देना और 5 दिन इंजेक्शन लगा लेना, तुम ठीक हो
- 21:14जाओगे और पांच दिनों के बाद वो ठीक हो जाता।
- 21:18हमने क्या लगाया कुछ नहीं लगाया। पानी, पानी सब वो ठीक हो गया।
- 21:31ठीक क्यों हो गया? क्योंकि वह व्यक्ति हमारे पर
- 21:35विश्वास करता था कि हमें तो उसकी दवाई लगती है।
- 21:42हम चाहे आग के कुछ भी दे दें, वह ठीक हो जाता है।
- 21:48बिमारी उसका कोई है नहीं, ठीक हम नहीं करना है, कोई लूटना नहीं,
- 21:56कोई लोभ नहीं, कोई गुमराह नहीं करना।
- 22:02हमारी मानसिक इच्छा है कि ये ठीक हो जाये।
- 22:07बिमारी इसको रोग होय नहीं है। रोग नहीं है तो दवाई भी कोई नहीं
- 22:13देनी तो फिर हम इंजेक्शन लगा रहा। वाटर फार इंजेक्शन और वह बीमार
- 22:21पांचवें दिन प्रसन्न मुद्रा में आता।
- 22:25ठीक हो गया। डॉक्टर साहब ठीक हो गया।
- 22:28बहुत बढ़िया दवाई और दवाई ही आपकी लगती है।
- 22:31मुझे आप ने एंटायर क्रोनोलॉजी पूछ ली तो आज मैं बताने पे विवश हो
- 22:43गया। किसी नाम में कोई ताकत नहीं मानव
- 22:51निर्मित किसी भी चीज़ में कोई शक्ति नहीं जो तुम्हें उस
- 22:59विश्वदर्शन को करा सका है। मानव निर्मित कोई भी जीव तुम्हें
- 23:10अपने भीतर नहीं ले जाएंगे। कोई शब्द, कोई प्रार्थना, कोई गीत
- 23:17ये तो तुम्हें सिर्फ बांधने के लिए तुम बैठ सकते हो घड़ी दो
- 23:21घड़ी। तुम्हे अनुशासन सीखाया जाता है,
- 23:25जैसे आजकल छोटे बच्चों को एजुकेशन प्ले से शुरू की जाती है खेल बस
- 23:35उसमें बैठने की तकनीक आ जाती है। कैसे मिल जुल के रहना।
- 23:42बच्चों में बैठना है, क्या शिष्टाचार है?
- 23:51बिल्कुल राधे राधे नाम भैया और भी अंट शंट बहुत नाम दिए हमने और
- 23:57उससे ठीक भी हो गए। बात नाम की है ही नहीं।
- 24:04बात है, तुम्हारे मन में कितनी श्रद्धा है उस व्यक्ति में जब तुम
- 24:12ये सोचते हो सकलजिकली कि मैं ठीक ही उस डॉक्टर से हूँ तो फिर
- 24:20तुम्हें कोई भी बड़े से बड़ा एमडी मेडिसिन।
- 24:23या फोर रिटर्न? तुम्हें कोई दवाई दे दे, तुम ठीक
- 24:28नहीं हो। सवाल है कि तुम्हें रोग कोई नहीं
- 24:34है। रोग है तो उसकी दवा चाहिए।
- 24:38कैंसराइटिस है तो बिल्कुल आपको डॉक्टर चाहिए।
- 24:43खांसी है, नमोनिया है, ट्यूबरक्रलोसिस है, आपको दवा
- 24:47चाहिए, लेकिन अगर है ही कुछ नहीं, सिर्फ होने का भ्रम है तो फिर
- 24:57आपको वैसी ही दवाई देनी पड़ेगी। यही बिमारी आपको है, तब आप आज सभी
- 25:10को यही बिमारी है, ब्रह्म की बिमारी है आज सभी इलूशन में हैं,
- 25:15किसी को यह नहीं पता ऑथेंटिसिटी में।
- 25:20ऑथेंटिकली हूँ आई ऍम आई प्रमाणिक रूप से मैं कौन हूँ बड़े से बड़ा
- 25:28संत भी चिल्लाता है राधे राधे करो और देखिये 4 दिन की चाँदनी फिर
- 25:35अँधेरी रात आप देख लेना नए नए व्यक्ति आते हैं।
- 25:39लाखों की भीड़ होती है। धीरे धीरे धीरे धीरे कम होता जाता
- 25:43है क्योंकि तुम्हारे भीतर की वह मन का उछाल कहता है कि इसका मंत्र
- 25:55ठीक है। मंत्र किसी के भी ठीक नहीं होता।
- 25:59मंत्र ही ठीक नहीं होते तब मैंने बताया होगा आज भी बताता हूँ कुछ
- 26:07लोगों को वो कहते हैं बैठा नहीं जाएगा बाबा मैं समझता हूँ बात को
- 26:13मनोपद्रवी है अभी बैठने में मज़ा नहीं आने लगा।
- 26:18तो फिर तुम ऐसे करो फिर तुम मंत्र जप कर लो यहाँ से शुरू कर लो।
- 26:30ये एक तकनीक है, मुख्य रूप से तुम्हारी दृढ़ता का कारण तुम्हारा
- 26:37कलह। इतनी संख्या में लोग तो मेहनत
- 26:44नहीं करते थे, झगड़ा करते थे, लड़ाई करते थे और फिर वही शब्द
- 26:51कृष्ण भगवान का। जहाँ शांति है, वहाँ स्मृति है और
- 27:01सभी सुन लो अगर आपके घर में कलह है, किसी के घर में भी कलह है,
- 27:09मैं कहता हूँ एक व्यक्ति शांत हो जाओ क्यों कहता हूँ उसका कारण है?
- 27:15अगर एक शांत हो गया, बुद्ध के ऊपर कोई थूक गया, बुद्ध के पास भी यही
- 27:20फार्मूला था और क्या था अगर एक व्यक्ति ने नॉन रिऐक्टिव रहना सीख
- 27:27लिया तो घर में शांति आ जाएगी? बुद्ध के ऊपर थूक गया, पर बुद्ध
- 27:40बड़े शांत रहे। बुद्ध जानते हैं बुद्ध की यह
- 27:47मनोइच्छा है कि विश्व में शांति रह के आनी है।
- 27:54तो कैसे आएगी? इस तरह आएगी जब कोई गाली निकाले,
- 27:58कोई थूक जाए तो ऐसा व्यवहार करना है।
- 28:03हम व्यवहार करना जानते हैं। किसके साथ किस वक्त पर क्या
- 28:09व्यवहार करना है, बखूबी जानते हैं।
- 28:14इसलिए ऐसे व्यक्ति मास्टर ऑफ मास्टर्स कहलाते हैं।
- 28:22यहाँ शिक्षिक भी आते हैं जो टीचर हैं।
- 28:28यहाँ संस्थान भी आते हैं। डॉक्टर्स भी आते हैं इसकी जड़ में
- 28:40चलो आपने मुझे कह दिया मैं तुम्हें मारूंगा, मैंने तुम्हारी
- 28:48चरण पकड़ी है मार दो भाई। 100 में से 99 मौकों पर आप मुझे
- 28:56नहीं मारोगे, जो बीच ही गया इतने चरण ही पकड़ लिए।
- 29:06उसको मारने में अहंकार को दृष्टि नहीं होती तो आप मुझे मारोगे
- 29:10नहीं? यही फार्मूला विश्व शांति अगर
- 29:17चाहते हो तो मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 29:20बाबा हम बारूद को समाप्त करना चाहते हैं जब परमाणु संयंत्रों को
- 29:30इन सभी प्रकार के हथियारों को वेपन सकूँ।
- 29:33नष्ट करवाना चाहते हैं और हमने एक संस्था बनाई है।
- 29:37मैंने कहा तुम औंधे मुँह के रखो, क्यों?
- 29:42क्योंकि तुमने बेस नहीं पकड़ा? बेस ही ये है कि तुम शांत हो जाओ।
- 29:54झगड़े के कारणों में से एक तुम भी हो और शुरूआत हमेशा अपने से हो तो
- 30:02ज्यादा शुभ होती है। मेरे शिष्य मुझे थप्पड़ मार गया।
- 30:09मेरे बायोग्राफी में तुम पढ़ो, मैंने कुछ नहीं कहा, मेरे शिष्य
- 30:16मुझे गाली निकाल देते हैं, मैं कुछ नहीं कहता, लेकिन जब तुम
- 30:23सीखने आते हो, सीखने के भीतर जब तुम कमेंट करते हो तब मैं बोलता
- 30:29हूँ। क्यों?
- 30:30क्योंकि सीखने का ये ढंग नहीं है तुम्हारा अगर सीखना चाहते हो तो
- 30:38फिर ऐसे ही सीखना पड़ेगा नहीं किसी और और के पास चले जाओ भाई
- 30:43ग़लत तो मैंने कुछ भी नहीं कहा है।
- 30:48तुम कमेंट करते हो, मैं तुम्हें कहता हूँ, तुमने सुना क्यों मुझे
- 30:54मैंने कब कहा मुझे सुनो और मैंने आज तक किसी व्यक्ति को नहीं कहा,
- 31:00मुझे सुनो कहूँ कभी नहीं क्यों कहूँ कहूँ?
- 31:08लोभ नहीं लालच नहीं, व्यथा नहीं, आनंद में हूँ मस्ती में हूँ सुरूर
- 31:15में हूँ वास्तव में तुम्हें चाहता हूँ मुझे कोई भी न बुल आए तुम
- 31:24कहता हूँ तुम खुद शांत हो जाओ प्रामाणिक तुम्हें बनना होगा।
- 31:31शुरूआत तुम्हें करनी होगी और जब कोई बोलता है तुम्हें गाली
- 31:38निकालता है घर में और तुम शांत मुद्रा में बने रहे जैसे गाली
- 31:46दीवार को निकाली गई है। दूसरा व्यक्ति भी धीरे धीरे
- 31:51रूपांतरित होने लगेगा क्योंकि तुम्हारी शांति तुमको फल देगी,
- 31:59उसका क्रोध उसको फल देगा, तुम्हारी शांति तुम्हारे मुख मंडल
- 32:04पर अभाव और लावने लेके आएगी। उसका क्रोध उसके चेहरे पर क्रूरता
- 32:11लेके आएगा। उसके कर्मों का परिणाम है।
- 32:21जब वह क्रोधित होगा उसके भीतर ऐन्ड्रनेलन ये जहर पैदा हो गए।
- 32:32जहर खून को गंदा विषैला कर देंगे और खून ही तो फैलता है चाहूँ
- 32:37दिशाओं में वह तुम्हारे मुख मंडल की आभा भी बिगाड़ देगा।
- 32:43इसलिए सौंदर्य प्रेमियों तुम्हें गुस्सा नहीं करना चाहिए।
- 32:51ये स्त्रियाँ मेरे पास आ जाती हैं बाबू ये मुख्य पे लावन्या आ जाए,
- 32:58कांति आ जाए, मासूमियत आ जाए इसके लिए क्या करें?
- 33:03मैंने कहा क्रोध को त्याग दो। वासनाओं को त्याग दो।
- 33:08और संतों ने अगर कहा वासनाओं को त्याग दो तो उसके भीतर का गहरा
- 33:12रहस्य यही था, क्योंकि वासनाएँ स्टिमुलेट करती हैं तुम्हें और
- 33:18स्टिमुलेस तुम्हारे चेहरे पर आके आभा मंडल में।
- 33:27परिवर्तन करती है। देखने वाला तुम्हारी तरफ़ देखेगा,
- 33:33देखने का मन नहीं करेगा। वहीं विकराल बिगडैल चेहरा मन में
- 33:41शांति नहीं है। विश्व को रूपांतरित करना चाहते
- 33:47हो, तो विश्व को रूपांतरित करने की पागलपन त्याग दो।
- 33:55तुम एक रूपांतरित हो जाओ, अकेले बुध एक रूपांतरित होते हैं, लाखों
- 34:00व्यक्ति रूपांतरित हो जाते हैं। हजारों की भीड़ उनके साथ ही चलती
- 34:06है और आज भी उनके जीतने अनुयायी हैं।
- 34:10देख लो बौद्ध धरम के कितने अनुयायी हैं हुआ?
- 34:15क्या वो ये मंत्र जानते थे शान्ति?
- 34:24सूखों का समृद्धियों का जन्म दाता है और इजी नेशन पॉइंट तुम शांति
- 34:37से दुकान पे बैठोगे। सुबह क्रिया योग करके आई हूँ सब
- 34:44खलल बाहर निकल गई। चेहरा शांत हो गया।
- 34:47आप देखना तुम्हारे व्यापार में वृद्धि होगी।
- 34:51कारण जाता हुआ ग्राहक तुम्हारे मुखमंडल की तरफ़ ही खींचे जाएगा।
- 35:03अक्सर तुमने सुना होगा ऋषिगन भरे जंगल में।
- 35:10झोंपड़ी डाल के बैठ जाते थे और हिंसक जानवर उनके पास आकर बैठ
- 35:15जाते थे, उनको नुकसान नहीं पहुंचाते थे।
- 35:21क्या कारण था? वो झोंपड़ी ही तब बनाते थे जब
- 35:26उन्हें समझा आ जाती थी। कि मेरे भीतर की हिंसा समाप्त हो
- 35:30गयी। मैं पूर्ण अहिंसक हो गया और
- 35:34देखिये तुम पूर्ण अहिंसक होते ही तुम्हारा रोमा रोमा एक तरह की
- 35:41मैंने कल एक शब्द बोला था इनेरसिया।
- 35:47इनेरसिया की तरंगें बाहर निकलनी शुरू हो जाती हैं।
- 35:51इनेरसिया की तरंगें जो मैं एक प्रकार के तरंगेतों में आसानी
- 35:57तरंगें रहता हूँ, उससे 1000 गुणा ज्यादा शक्तिशाली होती हैं।
- 36:05दूसरों को परिवर्तित करने में देर नहीं लगाती, इसलिए मैं नागार्जुन
- 36:11को जब बोल रहा हूँ तो बड़ा वक्त लगा दिया कैसे तुम उस इंडर्शिया
- 36:20तक पहुँच जाओ। जीवंत निष्क्रिय था।
- 36:28मर जी वडा पंजाबी में कहते हैं, उसे देखें राधे राधे कहने के
- 36:40परिणाम आए क्यों आए? क्योंकि तुम्हारी मूल समस्या यही
- 36:44थी। शक्ति सभी के भीतर थी, शक्ति को
- 36:52दिशा नहीं मिल रही थी। दिशा मिली लड़ाई झगड़े में एक
- 37:00दूसरे को सुबह पीटना शुरू कर दिया।
- 37:03झगड़ा बढ़ जाता था, गाली गलौज कर देते थे।
- 37:08असभ्याचार्य बातें होती थीं ये संस्कृति बातें होती थीं गाली
- 37:16गलुच हो जाते थे, थप्पड़ थपड़ी हो जाते थे, एक दूसरे के बाल पार्ट
- 37:20लिखते थे, ये सभी मेरे पास आती थीं।
- 37:24आपने ये किया, आपने ये किया हमारे पास एक मस्त फार्मूला है, मुर्दा
- 37:36तो किसी के बाल नहीं ना पाटता बस इसकी शक्ति को क्षीण कर दो।
- 37:47आपने कभी देखा काम से बचने का किसी भी उपाय इतने थक जाओ इतने थक
- 37:56जाओ के घर जाकर? स्त्री या पुरुष ने दिखे, घर जाकर
- 38:08चारपाई दिखे और लोट पोट हो जाओ और सुबह पता लगा कौन मंगेज मारेगा
- 38:21काम में? काम से जो चाहिए वो नींद से
- 38:25मिलेगा। अभी तो नींद घेर रही है हार तुड़
- 38:32मेहनत करो, घर लौटो तो घर लौटना मुश्किल हो जायेगा पांव जवाब दे
- 38:37दे, नहीं चला जाता इतने थक जाओ। तो शक्ति गई जीस शक्ति को तुमने
- 38:46बहाना था वह शक्ति पहले ही तुमने काम धाम पर लगा दी वह काम धाम
- 38:53चाहे तुमने कुछ बनाया नहीं बनाया तुम थक गए।
- 39:00बस ये है भीतर की एंटायर करणो लॉजी संत बताते नहीं दो कारण हैं
- 39:08या तो वो जानते नहीं वो खुद ही सेथ ऑटो हिप्नोटिस्म में हैं, सह
- 39:17सम्मोहित हैं वो। राधा नाम से मैं स्वयः सम्बोधित
- 39:22नहीं हूँ। मेरी समूह अवस्था कभी के टूट गए
- 39:24हैं सम्मोहन में सम्मोहन के दायरे में मैं आ नहीं सकता।
- 39:34मैंने वह मुकाम छू दिया। जो आग से परे जो शस्त्र से परे
- 39:42जिसे बाड़ नहीं बहाती, जिसे तूफान नहीं उडाता जिससे मौत नहीं मारते
- 39:53तो तुम्हारी हिप्नोटिस्म। मुझे कैसे प्रभावित करेगा मैं झट
- 40:01से? मिली है।
- 40:12फर जद भी मिली है। पर जा तू तेरे मुख दी किताब ले
- 40:39बैठा मेनू तेरा शबाब। ले बैठा।
- 40:50जैसे ही फुर्सत में आता हूँ, भीतर उतर जाता हूँ, अंतर्मुखी हो जाता
- 40:58हूँ, वहाँ बड़ा आनंद मिलता है। तुम प्रसिद्ध होना चाहते हो?
- 41:08मेरे पास बहुत बड़े बड़े चैनल के पापा आपके इंटरव्यू लेनी है किस
- 41:13लिए इंटरव्यू क्यूँ हम पूछना चाहते हैं आपकी ज़िन्दगी?
- 41:23मैंने कहा बायोग्राफी पढ़ लो। हम जानना चाहते हैं तुम्हारे
- 41:27विचार मैंने कहा 2000 से ज्यादा वीडियो देख लो दर्शन मैं देता हूँ
- 41:36भीड़ इकट्ठे करने की मेरी तमन्ना ने पैसा इकट्ठा करने की मेरी
- 41:42योजना ने। पांव बुझवाने की मेरी ज़रा भी
- 41:47इच्छा नहीं, तुम पांव पकड़ते पकड़ते, गर्दन पकड़ लो, मैं अच्छी
- 41:53तरह जानता हूँ इसलिए मैं बाहर ही नहीं निकलता।
- 42:00मैंने पंखा खाना ही बंद कर दिया। चलो कोई आता है बेचारा कई व्यक्ति
- 42:081010 दिन तक बैठे रहते हैं। धर्मशाला में आखिर घर वाले थक
- 42:15जाते हैं, अब तो 10 दिन हो गए बुला लो, एक दर्शन ही तो करने
- 42:19हैं, चलो बुला लो भाई। ऐसा माजरा है, कैमरे के ऐसा मत
- 42:27करो सर, कैमरे के सामने आना मेरा स्वभाव नहीं और कैमरे के सामने
- 42:36आने का मतलब होता है स्वयं को प्रचारित करना स्वयं को प्रसारित
- 42:40करना। या तो जो चार अल्फाज़ मैं बोलता
- 42:44हूँ, मेरी मजबूरी है, व्यवस्था है और जरूरत है आपकी और करुणा वशी
- 42:52भीतर से फूट पड़ते है और कुछ बाबा का आदेश है तो बोलना पड़ता है आज
- 43:00नहीं था। 35 वर्षों तक स्वयं मैं ही गोया
- 43:06रहा 35 वर्षों तक वो पिया, मैंने जी भर कर पिया और अब भी जैसे ही
- 43:19थोड़ी सी फुरसत मिलती। भीतर जम्प ले लेता हूँ जो सुख
- 43:25छज्जु दे चुवारे ना बल्क ना पुकार, तुम सिर्फ ये शब्द कहना
- 43:31जानते हो तुमने उस मैं को कभी पिया नहीं तो मैं कहता हूँ शब्द
- 43:39मत कहो। उस मैं की एक बूंद एक बार फील हो
- 43:43गई, बस आमूलचूल परिवर्तन आ जाएगा स्वभाव में।
- 43:56तुम्हारे बातचीत में चलने फिरने में काम करने के सलीके तरीके बदल
- 44:01जाएंगे। तू ने कहा तुम्हें लेकिन उस वक्त
- 44:10तुम्हारी दशा क्या थी, ये देखो मैंने तुम्हारी शक्ति।
- 44:16तुम में शक्ति थी, सभी जवान थे, सभी में शक्ति थी और शक्ति गलत
- 44:23दिशा में जा रही थी। मैंने उस गलत दिशा में जाती शक्ति
- 44:29को रोक दिया, चाहे मुझे पता था कि राधे से कुछ नहीं होगा।
- 44:36लेकिन क्या करें, मजबूरी है राधे कहने से झगड़ा तो नहीं ना होगा और
- 44:40झगड़े को रोकना मेरा मुख्य कर्तव्य था तो ये जो नाम देते हैं
- 44:48वहाँ जो इकट्ठे होते हैं ऐसे ही घरों से जाए।
- 44:53जाने वाले लोग होते हैं अन्यथा कोई क्यों जाके राधे राधे शब्द
- 44:59लेके आएगा क्यों जाके राम राम लेके आएगा?
- 45:05घरेलू परेशानी है, कोई अपनी घरवाली से तंग है?
- 45:14ये मनीष बड़ा से लगते हैं। कोई किसी से परेशान है, कोई किसी
- 45:21से परेशान और ये या तो खुद नहीं जानते या खुद ही ऑटो हिप्नोटाइज़
- 45:31हैं। स्वसम्मोहन से ग्रस्त हैं।
- 45:34इनको भी इनके गुरु ने हड़का दिया होगा के राधे, राधे करते रहो और
- 45:41ये माइक की तरह आगे प्रसारित करें।
- 45:43इनको खुद को कुछ नहीं पता या ये झूठ बोलते हैं।
- 45:52या जे सभी के ऊपर जैसे भेड़ों की कतार होती है ना और भेड़ को चलाने
- 45:59वाले बोलते हैं, ना तो सारी भेड़ें चलती हैं क्योंकि वो ये
- 46:05भाषा समझते है। सब को रात है रात हैं कोई माइक
- 46:14लेके जायेगा कोई खुश कहेगा कोई खुश करेगा बाबा बाबा ये है इन्नर।
- 46:26क्रोनोलॉजिक अगर तुम्हारी शक्ति सही दिशा में नहीं लग रही तो उसे
- 46:39व्यर्थ फेंकने की बजाए। एक मोड़ दे दो, तारफ बोझ बन जाए
- 47:03तो उसको। भूलना बेहतर ताल्लुक रोग बन जाए
- 47:18तो उसको छोड़ना अच्छा। तारुफ रोग हो जाए तो उसको भूलना
- 47:37बेहतर तालुक भोज बन। जाए तो उसको छोड़ना अच्छा वो
- 47:54अफसाना जिसे अंजाम तक। लाना न हो मुमकिन उसे एक खूब सूरत
- 48:14मोड़ देकर छोड़ना अच्छा। चलो अखबार फिर से आज नबी बन आए,
- 48:32हम दोनों चलो अखबार फिर से। अजनबी बन जाए।
- 48:45हम दोनों तारुफ़ रोक हो जाए तो उसको बोलना बेहतर तालुक बोझ बन
- 48:56जाए तो उसको छोड़ना अच्छा। वाफ्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो
- 49:03मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना जब शक्ति हमारी झगड़ों में
- 49:12खपने लग जाए, वह बेहतर विकल्प है राधे राधे कर।
- 49:20झगड़ों से बच हो गए और झगड़े न जाने कहाँ लेके जाएंगे।
- 49:27उम्रकैद काटने वाले इन लोगों से पूछो जेलों में बंद कुछ भी बात
- 49:32नहीं निकलेगी। इनकी बातों को सुनकर तुम्हें हँसी
- 49:37आएगी। छोटी छोटी बातें इतनी बड़ी हो
- 49:43जाती हैं कि आदमी जेलों में पड़ा अपनी सारी जिंदगी सड़ता है, मैं
- 49:52तुम्हें कहता हूँ, नोन ब्रेक? तुम्हें कोई गाली निकाल दो, चब्बत
- 50:00लगा के कुछ न कहो, लेकिन तुम्हें तुम्हारा प्रश्न बड़ा जायज है।
- 50:07तुम कहते हो फिर अगर हम ना भूले तो दूसरा।
- 50:14दूसरे छांट मर देगा। देखिए, मैं बॉर्डर्स की बात नहीं
- 50:19करता हूँ। बॉर्डर्स के ऊपर सैनिकों के लिए
- 50:24संदेश नहीं है। ये संदेश घरों में शांति पहुंचाने
- 50:28के लिए है। बॉर्डर पर बैठे हुए हमारे जमान
- 50:33मेरे इस वीडियो को ना सुनें, ये उनके योग्य बात नहीं है।
- 50:40बैंक की सिक्योरिटी के आगे गान लेकर खड़ा हुआ सिक्योरिटी गार्ड
- 50:46मेरी इस बात को ना मानें अगर कोई डाकू आ गया।
- 50:51तो उसके साथ तो वैसे ही निपटना जैसे तुम्हें वो कम हुआ है।
- 50:56मैं बात करता हूँ घर में क्लेश के लिए तुम्हारे ऐसे घूमते हुए भेजें
- 51:03कि तुम्हारे अस्तित्व के दुख बन जाने के।
- 51:10उसको कैसे ठीक किया जाए? लोग मुझे बॉर्डर पे ले आते हैं,
- 51:14फिर बॉर्डर का क्या होगा? चीन अब कर देगा और हम कहे ठीक है
- 51:19नहीं, नहीं ये तो मैंने कभी नहीं कहा बॉर्डर पर सैनिक अपना दायित्व
- 51:27ना भाए, मुँह तोड़ जभाते हैं। अगर एक मरो तो आप चार मरो वहाँ
- 51:33बात और है, बात घरेलू जबड़ों की है और वो बड़ी है क्योंकि
- 51:41वार्डर्स पर कोई शायद ही हिम्मत करे।
- 51:452050 साल तक। कितने साल हो गए वो बात अलग है,
- 51:52वो देशों की बात है, सीमाओं की सुरक्षा सैनिक करेंगे।
- 51:59उनके लिए ये नहीं हैं। शब्द घरों के लिए शब्द हैं जो
- 52:02घरों में झगड़े रोज़ होते हैं। छोटी छोटी बात पे छोटी छोटी बात
- 52:13पे, आप क्यों नहीं कहा तुम क्यों कहा?
- 52:23क्योंकि झगड़ा हो गया था। किसी एक्ट्रेस ने किसी राजनीति को
- 52:30तो कह दिया था झगड़ा हो गया वो बात मेरे पास हुई आई मैंने कहा तू
- 52:39शब्द तो बड़े फेरा है। तू तो तू कह के तो हम उसे सम्मान
- 52:44देते हैं। तुम गुस्सा क्यों हो गए?
- 52:47तुम्हें पता है भगवान को हम तुम कहते हैं एक तू ही नरंकार तू दाता
- 52:56दातार तेरा दत्ता खावना। परमात्मों को तू कहते हैं जितना
- 53:03प्यार नजदीकी बढ़ती है, आप कह देने से नजदीकी मिटती है, फासला
- 53:11पड़ता है तू कह देने से हम माँ को तू कहते हैं और माँ से ज्यादा
- 53:19प्यार है। ममत व और किसमें होता है?
- 53:25लेकिन पिता को हम आप कहते हैं लोग मुझे पूछ लेते हैं, ये प्रश्न
- 53:33क्योंकि माँ से करीब माँ के तुम अंश हो, माँ के शरीर से तुम्हारा
- 53:38जन्म हुआ है। इसलिए पिता को आप उनसे दूरी है
- 53:46अभी फासला है, लेकिन माँ से दूरी नहीं है माँ के तो तुम जिगर के
- 53:54टुकड़े हो माँ के तो तुम एक। अंश हो, माँ तो माँ होती है,
- 54:07लेकिन पुरुष प्रधान देश में। आप तो नजदीक से।
- 54:17नजदीक तर आते गए। आप तो नजदीक से नजदीक तर आते गए
- 54:35आप से। फिर तुम हुए आपसे फिर तुम हुए फिर
- 54:45तू का उनवा हो गए रफ तरफ ता मेरे। हस्ती का समा हो कर रफ्ता रफ्ता
- 55:05हो मेरी हस्ती का समा हो। आप दूरी।
- 55:17तू नहीं दी की है तू में बड़ा महत्त्व है, तू में बड़ा बात सरल
- 55:24है, तू में बड़ी खिचावट है, तू में बड़ा प्रेम है, तू चुम्बक है
- 55:32तुम तू की। महिमा नहीं जानते, इसलिए हमने
- 55:36परमात्मा को तू कहा बहुत से लोग हैं जो परमात्मा को भी तुसीं कहते
- 55:42हो आप प्यार खो गया और जहाँ प्यार खो गया वहाँ उसमें समाहित क्या हो
- 55:50जाओगे, उसमें तो मिलना होता है। और आप कहने से मिला नहीं जाता आप
- 55:59से तुम और तुम से तुम और तुम जैसे ही हो गया उसमें तुम समझ आओगे
- 56:10नजदीक से नजदीक आना होता है। मानव शरीर बड़ा धन्य था।
- 56:17शक्ति तो बहुत है पशु शरीर में सींग जैसे हिंसक जानवर में बड़ी
- 56:26शक्ति होती है चीता शेर। लेकिन एक मानव ही ऐसा प्राणी है,
- 56:39जिसके भीतर विवेक और बुद्धि है और मानव होकर अगर तुमने विवेक और
- 56:48बुद्धि से कामना लिया। तो तुम जन्मो जन्मो का ये
- 56:54इल्लुजन, जो पत्थर से शुरू हुआ, आज तुम मानव हो गए और तुम अपने
- 56:59आपको आज भी शरीर माने जा रहे हो और देखिए कोई भी भ्रम राधे राधे
- 57:05करने से टूटता नहीं, मैं कहता हूँ तुम्हें भ्रम है।
- 57:12तुम्हें भ्रम है। भ्रम शब्दों से नहीं टूटेगा
- 57:17किस्से, टूटेगा भ्रम भ्रम टूटेगा दर्शन से तुम्हें भ्रम है कि
- 57:23ताजमहल काला है। और भ्रम है, तुम पाले जा रहे हो
- 57:29सारी उम्र बीत गई, बुढ़ापा आ गया तुम सदा ही कहते हो सब से कहते हो
- 57:34ताजमहल काला है, कब टूटेगा बाबा कहते हैं दर्शन से पहले भ्रम
- 57:45टूटने को है नहीं। दर्शन हुआ के भ्रम टूटा उतर गयो,
- 58:07उतर गयो। उतर गए हो उतर गए हो उतर गए हो
- 58:28मेरे? मन का संसार संसार था मुझे ये था
- 58:37मुझे ब्रह्म था मुझे उतर गए हों मेरे मन का संसार।
- 58:49कैसे उतरेगा संसार तुम संसे में हो क्या संसार है?
- 58:55मैं शरीर हूँ ये संसार वास्तव में तुम शरीर नहीं हो।
- 59:01सभी संत कहते हैं, अष्टवक्र कहते हैं।
- 59:06कृष्ण कहते हैं, नैनम चिदंती शस्त्राण तुम वो हो जो कटता नहीं,
- 59:12छेदता नहीं, गलता नहीं जलता नहीं, वो तुम वो हो, लेकिन तुम जो कटता
- 59:20है, जो जलता है तुम उसको आप पर समझे बैठे हो।
- 59:28तो ये संशय कब उतरेगा? यह भ्रम कब टूटेगा?
- 59:33हू विल ब्रेक थिस इलूशन यह भ्रम कौन तोड़ेगा दर्शन, जब देख लोगे
- 59:42कोई जाके? ताजमहल के सामने तुम्हें खड़ा कर
- 59:45देगा। देखो ये है ताजमहल तुम देखोगे
- 59:50काली तो नहीं है, ये तो सफेद है सुनो सफेद मिट्टी की मूर्त।
- 1:00:06तुम इसको आपस समझे बैठे हो? सभी संत कहते हैं, अष्टावक्र भी
- 1:00:12कहते हैं नहीं और तुम कबीर नानक कौन संत है जो कहता है कि तुम
- 1:00:18शरीर हो, एक भी बता दो, सभी कहते हैं तुम शरीर।
- 1:00:27और संशय कैसे खत्म होगा? ये मूड पागल मूर्खानंद ने बहुत
- 1:00:36बार कहा है तुम कितने भी प्रचारित कर।
- 1:00:43आखिर 1 दिन मौत आएगी। मुझे लोग कह देते हैं बाबा आप
- 1:00:47बोलते क्यों नहीं? मैंने कहा देखो जितना बस लगता है
- 1:00:52मैं बोलता हूँ पाखंडों का निवारण करता हूँ, लेकिन आगे ये कहते हैं
- 1:00:57कि हम पाखंडों का निवारण करते हैं, फिर क्या किया जाए?
- 1:01:04तो बाबा इसका हाल देते हैं। बाबा कहते हैं, ये मन की मूडता कब
- 1:01:10मिटेगी? उतर गए हो?
- 1:01:21उतर गए हो, उतर गए हो? उतर गए हो मेरे मन का संसार अब
- 1:01:47देखिए इल्ल्यूसन कैसे टूटेगा बाबा उपाय बताते हैं तो भजन तो रोजगार
- 1:01:52देता। जब तेरा दर सन बायो दर्शन के बिना
- 1:02:03इलूशन नहीं टूटेगा देखोगे ताज महल को आँखों से कि नहीं काला नहीं है
- 1:02:08भाई। घर बैठे ताजमहल ताजमहल ताजमहल
- 1:02:15काला है, काला है, ताजमहल चल के तुम्हारे पास में आएगा, उसके पास
- 1:02:22चलना पड़ेगा यू विल हॅव टु गो तैयार इन फ्रंट ऑफ़ ताजमहल?
- 1:02:31तुम्हें देखना होगा उसके सामने खड़े हो गए जब तेरा दरूशनपायरा
- 1:02:46ठाकुर। तुम सरनाइया ठाकुर ठाकुर ठाकुर।
- 1:03:12ठाकुर ठाकुर तुम सरनाई आई ओह ठाकुर, तुम सरनाई?
- 1:03:37उसके दर्शन के बिना भ्रम नहीं मटेगा कितना ही संत कह लें तुम
- 1:03:45अर्थ के अनर्थ कर ही रो गए। इसलिए आज दुखी द्रद्र कंगार टूटे
- 1:04:00फूट है दीन द्रद्र फिर रहेगा इन तथाकथित मूर्खों के पांव छूते
- 1:04:11छूते। कंगाल तुम्हारी कंगाली नष्ट नहीं
- 1:04:17कर सकेगा, ये खुद कंगाल है। जिसने सम्राट को जाना नहीं वो
- 1:04:23कंगाल पर सहिंसा नहीं और तुम खुद सहन सहाय आलम हो।
- 1:04:31बस करना क्या है? यू अरे टु रेकग्नाइज़ यूरसेल्फ़
- 1:04:38मैंने बहुत बार तुम्हें उदाहरण दिया है चाबी रख के भूल गए हो
- 1:04:43कहीं और उस चाबी में लॉकर में सब कुछ है तुम्हारा?
- 1:04:48गहने हैं, हिरे हैं, जवाहरात हैं, नकदी हैं, सब हैं, प्रमाण पुत्र
- 1:04:53हैं, तुम्हारे डिग्रीज़ हैं, सब हैं और उस लाकर की चाबी तुम रख के
- 1:05:00कहीं भूल गए हो, ऐसे ही तुम्हारे भीतर की चाबी तुम रख के कहीं भूल
- 1:05:04गए हो। कैसे मिलेंगे वो चाबी?
- 1:05:11तो संतों ने सही रास्ता बताया था कि याद करो स्वर्ण करो, कहाँ रखी
- 1:05:16है चाबी और तुमने ऐसा बिगाड़ा दुष्टों ने?
- 1:05:22चाबी, चाबी, चाबी चाबी करते रहो, सब मिल जाएगी, चाबी उछल के आ
- 1:05:27जाएगी, जहाँ भी है इसलिए मैं इनको मूर्ख आनंद देता हूँ।
- 1:05:34अगर मेरे तर्क में सच्चाई में किसी तरह की कोई गलती हो तो मुझे
- 1:05:39बता दो। तर्क की बात नहीं, ये दर्शन की
- 1:05:44बात है, मैंने देखा है ए सीन विथ माइ नेक्ड आईज, मैं कहता आंखन।
- 1:05:54देख। तुम कहते कागज़ की लिखी और मैं
- 1:06:02कहता आंखन देखी और जो आँखों से देख लेता है उसके शब्दों में जान
- 1:06:11होती है उसके शब्दों में शहद जैसा मिठास होता है।
- 1:06:16वहाँ से टकरा के आती हैं हवाएँ ये शब्द जो आप सुन रहे हो ये वहाँ से
- 1:06:24टकरा के आती हैं। इन्हें हृदय के भीतर उतार लेना,
- 1:06:31इन्हें सुरक्षित स्थान पर रख लेना।
- 1:06:35छूम लूँ मैं उस जुबान को जिसपे तिरना।
- 1:06:56तेरे दामों से जो आए उन हवाओं को सलाम।
- 1:07:12झूमलों में उस जुबां को जीस प्यार तेरा नाम।
- 1:07:28सबसे अच्छी तेरी शुभ हो सबसे रंगी तेरी शान तुझपे दिल कुरवा।
- 1:07:50हे मेरे प्यारे वतन हे मेरे बिछुड़े चमन बिछड़ गए वो चमन
- 1:08:05तुम्हारा। हो तो तुम वही फूट गया हो।
- 1:08:13इसलिए संत कहते हैं रिमेम्बर, याद करो, स्मरण करो और तुमने स्मरण
- 1:08:18शब्द का सत्यानाश कर दिया, चाबी, चाबी, चाबी।
- 1:08:24राधे राधे, राधे राधे क्या बकवास है?
- 1:08:30कोई तर्क है तुम्हारे पास धूल में लट फे मेरे इनके चेहरे पे किसी
- 1:08:38तरह की शांति नजर नहीं आती। इनके भीतर से जो हवाएं छू के आती
- 1:08:46हैं लगती नहीं, वो उन तरंगों संयुक्त हूँ जहाँ पर मिठास का वो
- 1:08:53स्वर्ग विद्यमान है, लेकिन ज्यादा ऊंचे बोलने से जूट सत्य नहीं हो
- 1:09:03जाता। और ज्यादा इकट्ठे में बोलने से
- 1:09:10झूठ सत्य नहीं हो जाता। सत्य तो सत्य ही रहेगा, वही जावि
- 1:09:15लगेंगी जो होगी तुम गलत ही जाबियों को इस लॉकर पे लगा रहे हो
- 1:09:22नहीं खुलता। तुम कहते हो नहीं बाबा आनंद तो
- 1:09:26नहीं आया नहीं आएगा भाई लोग ऐसे ऐसे शब्द मेरे सामने रख देते हैं
- 1:09:35जिनका अर्थ न वो जानते हैं, न उनका आचार्य जानते हैं।
- 1:09:42यज्ञों में मैं जब यज्ञ हूँ, अब आगे आएगा ये शब्द गीता चल रही है,
- 1:09:53मैं आपको इसका विश्लेषण करूँ। यह क्या था और तुम क्या ले गए?
- 1:09:59क्या हुलिया बिगाड़ दिया तुमने शब्द का?
- 1:10:07तुमने ठीक पूछा, मैंने राधे राधे कहा था, लेकिन उस वक्त तुम दरिद्र
- 1:10:14थे, कंगार थे, लड़ाई झगड़ा था, शक्ति थी, गाली गलौज होते थे,
- 1:10:20लड़ते थे। तुम्हारी दिशा को मोड़ना आवश्यकता
- 1:10:25तुम्हारी शक्ति को मोड़ना आवश्यकता वापसा न जिसे अंजाम तक
- 1:10:31लाना न हो मुमकिन उसे एक खूब सूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा तो मैंने
- 1:10:38खूब सूरत मोड़ दे दिया। असल में बात ये है लेकिन ये मूड
- 1:10:45लोग चिपक जाते हैं। राधे राधे मैंने भी कहा राधे
- 1:10:49मैंने कब कहा नहीं, लेकिन क्यूँ कहा उसका कारण तो समझो और आज तुम
- 1:10:57अरबपति हो। और अगर तब मैं तुम्हें कह देता और
- 1:11:02थोड़ा सा ज़ोर से जैसे मुल्ला ऊपर चढ़ के अल्लाह हू अकबर की आवाज़
- 1:11:11देता है थोड़ा सा ज़ोर से चला हो जैसे जागरण में चलाते हो।
- 1:11:18फिर मैं भी मूड हो जाता हूँ उनकी तरह, लेकिन क्योंकि मैंने देखा
- 1:11:23मैंने जाना मैंने पहचाना मैंने उसका स्वाद चखा मैंने वो पिया
- 1:11:33मैंने ग्लास नहीं, मैंने अंजलि नहीं।
- 1:11:38मैंने समुद्र भर भर के पिया अब देखिये समुद्र भर के पिया उसको
- 1:11:48स्वाद का अच्छी तरह पता है। वह बड़ी खूबसूरती से व्याख्या कर
- 1:11:54सकता है आपको? लेकिन तब मैं जानता था तुम्हें
- 1:11:59रोक क्या है, तारुफ़रोग हो जाये तो उसको बोलना बेहतर है तुम्हारी
- 1:12:07दिशा को मैंने परिवर्तित कर दिया, मोड़ दे दिया राधे राधे करो सभी
- 1:12:12मेरे पास आते थे यह सौभाग्य रहा तुम्हारा।
- 1:12:15अन्यथा एक भी होता तो घर ले डालता लेकिन उसके बाद जब तुम खुशहाल
- 1:12:24होना शुरू हुए, आपस में प्यार बढ़ने लगा तो मैंने कहा छोड़ दो
- 1:12:31इस राधे को छोड़ दो। शक्ति तुम्हारे पास है संपन्नता
- 1:12:36तुम्हारी बात है जब तुम फुर्सत में हो तो अपने भीतर उतरो, एक
- 1:12:43मानव शरीर ही ऐसा है जिसके पास शक्ति के साथ साथ विवेक है।
- 1:12:48शक्ति तो सभी जानवरों में है मानव से ज्यादा है।
- 1:12:53विवेक नहीं है, बुद्धि भी है, उनके पास विवेक नहीं, विवेक सिर्फ
- 1:13:00मनुष्य को ही दिया गया। इसी जामे को विभूषित किया गया
- 1:13:04विवेक वह अच्छा भला सोच सकता है। तुम अपने भीतर उतरो, ये शक्ति
- 1:13:14तुम्हारे पास है, मौका है, राह दिखाने वाला बैठा है, इससे पहले
- 1:13:25ये ट्रेन छूट जाये, देर मत करो इन मूर्खों से पंडित छुड़ाओ किसी भी
- 1:13:32तरह। मैं ठीक बोलता हूँ, मेरे प्राणों
- 1:13:36का एक एक रोमा रोमा बोलता है और बिना किसी लो बराज के मैं
- 1:13:44तुम्हारे हितार्थ बोलता हूँ तुम्हारे लटके हुए मुखड़े देख के
- 1:13:51बोलता हूँ। मैं चाहता हूँ जीस आनंद में
- 1:13:55देखिये मेरे को 12 साल हो गए बैठे एक स्थान पर कोई टांग बांद नहीं
- 1:14:01टूटी है। सारे अंग सलामत है, बाहर भीतर गए
- 1:14:05लेकिन बैठा हूँ क्यों बैठा हूँ कभी सोचा?
- 1:14:12आराम से बैठ के सोचना एक व्यक्ति कहीं घूमता नहीं।
- 1:14:17बाहर से कौन गुजरा, यह जानना नहीं चाहता कौन आया, कौन गया, कौन खुश
- 1:14:23हुआ, कौन नाराज हुआ, कोई मतलब नहीं क्यों बैठा है?
- 1:14:30इसने समुद्र पी लिया है। मैं खुद ही पिए पिए और खुद ही
- 1:14:37बताता हूँ। न कभी पांडाल लगाई, न कभी लोगो को
- 1:14:43निमंत्रण दिया, न कभी भेड़ो के भेड़ इकट्ठे किए, वरना मैं तो
- 1:14:49भीड़ को यहाँ घुसने नहीं देता। यहाँ आने के लिए 10 मकान लांघने
- 1:14:54पड़ते हैं। फिर वह व्यक्ति मेरे पास आ पाएगा
- 1:15:04और जब एक बार व्यक्ति मेरे पास आ गया।
- 1:15:10तो उसको सब छोड़ना पड़ेगा। अगर नहीं छोड़ा तो फिर मैं उसे
- 1:15:16बाहर निकाल दूंगा। सर्वधर्माण पर तज्जा वामी सब छोड़
- 1:15:22छोड़ के आजा कोई धर्म नहीं, कोई संप्रदाय नहीं, कोई पार्टी नहीं।
- 1:15:30सब छोड़ दे तू इंसान हो जा एक बार भी इंसान बन के आ मेरे पास बाहर
- 1:15:42छोड़ दे गेट के ऊपर तुम्हारे धर्म तुम्हारी पार्टी।
- 1:15:47तुम्हारे ये ख्याली पुलाव तुम्हारे ये सीखे हुए खोपड़े की
- 1:15:52इन्फॉर्मेशन बाहर डोडी पर रख के आया करो।
- 1:15:57उसके बाद मेरे पास आया करो। यही मेरी चाहत है, मैं जैसा हूँ।
- 1:16:06वैसे तुम क्यों नहीं हो जाते? ये मेरे प्राणों की इच्छा है
- 1:16:12इसलिए बोलता हूँ अन्यथा और कोई तमन्ना नहीं है।
- 1:16:20जीवन तक की तमन्ना नहीं है तुम तो दिन में।
- 1:16:27100 बार पूछते हो और तुम्हारे सद्गुरु बताते हैं, सुबह उठते ही
- 1:16:3320 मिनट में तुम्हारा पेट साफ हो जाना चाहिए।
- 1:16:36तुम अध्यात्म टीचर हो या शारीरिक, तुम वैद्य हो या गुरु हो।
- 1:16:46भ्रमित करते है। तुम्हे ये तुम्हारा ध्येय नहीं है
- 1:16:51और फिर क्या तुम खाओ? ब्रेकफास्ट में क्या खाओ तुम लंच
- 1:16:56में क्या डिन्नर में और दोपहर की चाय में खाओ और रात को सोने से
- 1:17:01कितनी देर पहले खा जाओ? ये वैद्य हैं, ये डायटीशियन है,
- 1:17:11ये अध्यात्मिक रोक रहे हैं, इनकी बातों से अब तुम पहचान नहीं सके।
- 1:17:18क्या देते हैं तुम्हें? एक स्टेनलेस स्टील की इतनी बड़ी
- 1:17:25मूर्ति बना के तुम्हारे भीतर कोई आनंद आए?
- 1:17:30मूर्तियाँ तो बहुत पहले ही बहुत हैं।
- 1:17:35मूर्तियाँ तो सभी मूर्तियाँ उसकी हैं।
- 1:17:40यह विराट अस्तित्व उसकी मूर्ति है और तुम्हें ऐसे देख के आनंद नहीं
- 1:17:47आता। तुम्हें ऐसे देख के आश्चर्य नहीं
- 1:17:51होता तुम स्टेनलेस स्टील की ये मूर्ति देखकर।
- 1:17:59वह वह कर जाते हो और उसकी अद्भुत कारीगरी तुम्हारे शरीर के भीतर का
- 1:18:05एंटायर सिस्टम तुमने कभी सोचा कैसे चलता है ज़रा सा बीपी अप
- 1:18:11डाउन हो जाये, तुम्हारी छाती फड़कने लगती है।
- 1:18:18उसकी विराट कारीगरी बे तुम मोहित नहीं हुए तुम इन मूर्खों की बातों
- 1:18:23पे मोहित हो गए चाबी सही लगाओ भाई तुम्हारे लॉकर की चाबी तुम रख के
- 1:18:31भूल गए हो? गुम तो नहीं हुए गुम तो हो भी
- 1:18:35नहीं सकती। वहीं रहेंगी वहीं गुम नहीं होती।
- 1:18:45भूल गए रहो याद करो रिमेम्बर स्मरण और नाम स्मरण नहीं होता है।
- 1:18:55नाम स्मरण होता ही नहीं, जब तक तुम इसको बात को भूल नहीं जाते,
- 1:19:05इस नाम को जब तक आग नहीं लगा देते अब तक।
- 1:19:13उस अनामी के पास तुम नहीं पहुँच सकोगे जिसका कोई नाम नहीं है।
- 1:19:18क्या नाम रखोगे उसका थोड़ा सा ऊपर झांक के देखो उसकी विराट संगरचना
- 1:19:24देखकर तुम्हें आश्चर्य नहीं आता। इसलिए तुम इन मूड मत्तियों के
- 1:19:38प्रभाव में आ जाते हो। ये ऑटो हिप्नोटिक व्यक्ति हैं।
- 1:19:45ये खुद से ही खुद में प्रभावित हो गए।
- 1:19:50तुमको मार डालेंगे। तुम्हारे धय को समाप्त कर देंगे
- 1:20:00चाबी खोजो याद करो, कह रखी चाबी, चाबी का समर्थन मत करो, नहीं आएगी
- 1:20:08चाबी तुम्हारे पास, आज क्या? 100 साल बाद मेरी बातों को सुन
- 1:20:13लेना चाबी नहीं तुम्हारे पास आने को है, तुम्हें ही याद आएगा चाबी
- 1:20:18कहाँ रखे, याद करना पड़ेगा यू आर टु।
- 1:20:30यू अरे टु रीमैंड नॉट टु रिपीट यू अरे टु रिमेम्बर, याद करना है
- 1:20:43कहाँ रखी नॉट टु रिपीट दोहराना नहीं है।
- 1:20:49अभी तो तुम दोहरा रहे हो दोहराने से रेपेटिशन से रिमेम्बरिंग में
- 1:20:57उतर जाओ, रेपेटिशन से रिमेम्बरिंग में आ जाओ दोहराब से याद में उतर
- 1:21:06जाओ। इसे ही याद कहते हैं।
- 1:21:19श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव मिलने से
- 1:21:39पहले नकली नाच मत नाचना मिल जाए तो नाच आ जाता है।
- 1:21:46बड़ा सुंदर नाच होगा जब वो मिल जाए देखना जब रिमेम्बर हो जाएगा
- 1:21:55तो कैसे तुम जो मुड़ते हो बासन सी जीरनानी।
- 1:22:03यथा विहाय नवाणी ग्रहण नरो परम तथा श्रीराणी विहाय जीणा।
- 1:22:23अनन्याणि साया तिनवाणी दे ही श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:22:41हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारीं हे नाथ
- 1:22:56नारायण वासुदेव। पितुमात स्वामी सखा हमारे पितुमात
- 1:23:12स्वामी सखा हमारे हिनाथ नारायण। वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:23:26मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:23:40हेनाथ नारायण वसुदेव पितुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:23:57हे नाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी सखा हमार सखा हमार।
- 1:24:17हे नाथ नारायण वासुदेव, जय कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:24:34वासुदेव। कृष्णा कृष्णा हरे।
- 1:24:56अरे धन्यवाद।