Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Mar 25 - ठहराव क्यों जरूरी है? मन कैसे ठहर जाए? मन किन कारणों से भटकता है?ठहराव पर सबसे गहरा प्रवचन!
Transcript
- 0:11चींटी को खाने के लिए एक कंच चाहिए।
- 0:20हाथी को खाने के लिए एक मंच चाहिए।
- 0:32चींटी उस कण के लिए सोती नहीं, शायद आपको पता हो चींटी कभी नहीं
- 0:47सोती। उसे जरूरत होती है एक कणक और हाथी
- 0:59मस्त होता है। हाथी को जरूरत होती है एक मणक
- 1:09प्रिसर जाता है मौत से। लेकिन चींटी को बड़ा फिक्र रहता
- 1:16है रात रात भर जागती है, जागती ही है, कभी सोती है, इकट्ठा करती है,
- 1:28इतना इकट्ठा करती है। इकट्ठा करती ही रहती है और इतनी
- 1:35चिंता करती है। शायद ही चींटी का नाम चिंता के
- 1:39नाम पर ही बना होगा। बहुत मेहनती है।
- 1:49अंधेरे में भी इकट्ठा करती हैं और हम लोगों के पांव तले आ जाती हैं
- 1:57तो जैन धर्म ने कहा कि रात को ट्रैवेल मत करना, ये छींटियां
- 2:04निकलती हैं। बेचारी भोजन की खोज में पांव तले
- 2:08आ जाएंगी। उस वक्त बिजली तो थी नहीं को कण
- 2:19चाहिए, सोती नहीं, परिश्रम पढ़ा करती है।
- 2:32हाथी को मन चाहिए मस्ती से पेट भरता है, लेट जाता है चींटी फिक्र
- 2:42करती है कल्प चींटी फिक्र करती है बरसों बरसों की।
- 2:54हाथी फिकर नहीं करता शाम के। ये हमारे लिए एक बहुत बड़ा उपदेश
- 3:04है। तुम चींटी की तरह हो, इसलिए दुखी
- 3:25रहते हो, परिश्रम भी करते हो अकरमन्य नहीं, लेकिन नींद का अपना
- 3:36स्वाद है नींद का अपना मज़ा है। चींटी सोती नहीं, हाथी सोता बहुत
- 3:47है, हाथी मज़ा बहुत करता है, चींटी के जीवन में कोई बाहर नहीं
- 4:02हाथी के जीवन में सदा बसंत है। तुमने पूछा अनुराग मल्लूक दास जी
- 4:23कहते हैं अजगर करे न चाकरी पंछी करे न का कहत मल्लू का दास जी सब
- 4:38के दाता रहा। ये अध्याय अलग है।
- 4:55किसी भी बात को सभी डायमेंशन पर डाल लेना।
- 5:00मूढ़ता के सवाल कुछ नहीं। जो बात संसार में काम आती है,
- 5:07परमात्मा में नहीं आती। जो परमात्मा में आती है, संसार
- 5:12में नहीं आती है और तुम दोनों को मिला लेते हो, तुम अन्नकूट बना
- 5:16लेते हो इसलिए तुम कामयाब नहीं होते।
- 5:24न खुदा ही मिला न वसालिसना। ना इधर के रह ना उधर के रह, जीवन
- 5:41को जीना है तो शहंशाहे आलम गजराज की तरह जियो।
- 5:53और जीना कौन नहीं चाहता? शहंसाही के आलम में कौन नहीं जीना
- 6:02चाहता? बस आज का सबक तुम्हारा यही है।
- 6:12जियो जी भर के जियो इसका एक फॉर्मूला मैंने तुम्हें बताया है।
- 6:27एक। तरीके बहुत हैं मुस्तकल फॉर्मूला
- 6:36मैंने तुम्हें बताएं तुम अतीत की चिंता करते हो जो कभी वापस नहीं
- 6:50आता है। छोड़ा हुआ थी।
- 6:55कमान से कभी लौटा है। जो चला गया उसे भूल जा।
- 7:12जो चला गया उसे भूल जा वो न सुन सकेगा तेरी सदा जो चला गया।
- 7:31उसे भूल जाओ पहली बात अतीत अतीत को भूल जाओ अतीत को याद नहीं
- 7:48रखना। जो अतीत को याद रखे और बोझ तले दब
- 7:57के मर गए। इस हर लोग ऐसे ही हैं हिस्टरी
- 8:07बहुत अति है। अतीत का बड़ा बोझ होता है।
- 8:23आपको पता नहीं भविष्य कितना आपको पता नहीं, लेकिन अतीत कितना आपको
- 8:30पता है? तुम 20305070 साल जी लिए तुम्हें
- 8:39पता है भविष्य का पल आएगा नहीं आएगा, तुम्हें पता नहीं तो भविष्य
- 8:52की बात मैं थोड़ी कम करूँगा क्योंकि वह पता नहीं कितना है।
- 9:04न जाने न जाने किस वक्त इस ज़िन्दगी की शान हो जाए उजाले
- 9:19अपनी यादों के हमारे संग्रह निद्ध हो।
- 9:28न जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए, उसकी याद उसकी याद
- 9:40में जो है। वो कहें भी इसलिए संतु ने कहा,
- 9:52उसे याद करना, स्मरण करना और तुमने रेपुटेशन करना शुरू कर
- 9:59दिया। देर इस ए लॉट ऑफ़ डिफरेंस बिटवीन
- 10:02रेपुटेशन एंड रे मेंबर। पूर्ण रूक्ति में और समर में बड़ा
- 10:09फर्क है। हम बटक गए, हम बहक गए, हमे
- 10:16मार्गदर्शक कैसे मिल गया? उन्होंने धरती को नर्क बना दिया।
- 10:24पर हम उनकी पूजा कर रहे हैं, वो रातों को तुम्हें जगाते हैं और हम
- 10:33उनकी पार्थिव देह के दर्शन के लिए रातों रातों भर जागते हैं जबकि
- 10:40नींद किसी कीमत पर मिलती नहीं। ना भूख मिलती ना नहीं मिलती ये
- 10:48अमूल्य देन हैं। प्रकृति के ये तथा कथित संत हमसे
- 10:54छीन लेते हैं। आओ पहले अतीत की बात कर लें, अतीत
- 11:10का बोझा भाग्य है। हमारे निरोंज में भरा पड़ा अतीत।
- 11:27और तुम चाहते हो उस आनंद में उस अमृत की शहद को गटक जाना ये नाम
- 11:42हो सकेगा। तुमने इतना खा लिया है, असली खाने
- 11:57वाली चीज़ बाहर रह गई है तुमने खा लिया वो जो सिर्फ पेट का भूख मिटा
- 12:11सकता था, तुमने ये नहीं वो नहीं खाया।
- 12:16जो वाकई में ही स्वास्थ्यवर्धक था, जो तुम्हें एनर्जिटिक करता जो
- 12:26तुम्हें सुकून देता तुमने वो नहीं खाया।
- 12:35अतीत के बोझ तले दबा व्यक्ति आज अतीत हो गया है।
- 12:47वह गुजर गया कब से तुम समझते हो, हम जिंदा हैं, तुम भी नहीं जानते
- 12:56की तुम जिंदा नहीं हो। सिर्फ लोहार की दुखनी सांस लेते
- 13:02हो और छोड़ देते हो जा घट प्रेम न संचार है सो घट जान मसान।
- 13:21जीस घट में इसको घट कहते हैं। अगर इसमें प्रेम का संचार नहीं
- 13:35होता तो वह शमशान की तरह है शमशान में।
- 13:47रत्ती भर भी प्रेम नहीं होता। दुख ही दुख होता है।
- 13:57मौत का तांडव नृत्य करता हुआ आलम सुमशान में देखोगे तुम?
- 14:08क्यों प्रेम की कमी है जहाँ जीवन है वहाँ प्रेम है अब इस बात को
- 14:17लिख लेना जहाँ मृत्यु है वहाँ नवंबर है।
- 14:28एक बच्चा जन्मता है। सारे घर में खुशी तोड़ जाती है,
- 14:34जीवन आया वही बच्चा मर जाता है, सारे घर में मातम।
- 14:45क्यों जीवन चला गया? जीवन है तो खुशी है, जीवन नहीं तो
- 14:56खुशी। और तुम उसे याद करते हो, जो आज ही
- 15:06जिंदा नहीं है। जो बीत गया, जो चला गया उसे भूल
- 15:18जाए। और अगर तुम जो चला गया उसे भूल
- 15:28जाओगे, तो तुम पाओगे भीतर से प्रेम की लहरें तो मैं तिरंगाइत
- 15:33करने लगी। इससे नक्कों में कोई समझाता है न
- 15:52तुम्हारे भीतर से यह समझ आती है प्रकृति अपना कर्तव्य निभाती है।
- 16:03तुम्हें रात को सुला देती है, सब भुला देती है सो जा भूल जा
- 16:11प्रकृति अपना दायित्व बखूबी निभाती है, लेकिन तुम प्रकृति से
- 16:16भी कोई सबक नहीं सीखते। कोई करे तो क्या करे?
- 16:33जैसे तैसे प्रकृति तुम्हें राज़ सुला देती है क्योंकि सोने में
- 16:43आनंद आया है जागना तो सारे दिन में।
- 16:49परमात्मा ने बड़ा सुन्दर वेधान बनाया दिन के साथ रात बनाई।
- 17:04प्रभुजी ने ऐसी काय नात बांधी प्रभुजी ने ऐसी काय नात बांधी?
- 17:191 दिन के पीछे एक रात बांधी। साथ साथ गाँधी ऐसी कायनात्मक
- 17:31फ़िल्म में परिश्रम करोगे थक जाओगे रात सो जाओ।
- 17:43इन संतों का प्रचार इतना क्यों होगा?
- 17:51तो रात को लोग जागते हैं। तुम देखना फालतू बैह लड़
- 17:58बेरोजगारी घनी क्या करें दिन में सो लेंगे स्वामी जीके दर्शन करना।
- 18:08बेरोजगारी है, रोजगार हो, तुम्हें दिन में इंजन चलाना हो, स्टेशन
- 18:19नापने हो, कोई काम धाम करना हो, दुकानदारी चलाने हो।
- 18:25तो कोई डेढ़ बजे जा के स्वामी जीके पार्थिव शरीर के दर्शन
- 18:29करेगा। वे पागल नहीं है।
- 18:31बिलकुल बेहरा आदमी इनको कोई काम नहीं है, वो रात को इनके दर्शन
- 18:37करेंगे। दिन में सो लेंगे, कोई काम तो है
- 18:47नहीं अतीत के बोझ तले तुम दब गए हो, जो भी अतीत के बोझ तले दबा वो
- 19:01सुख न पा सकेगा। और सुख की चाहत तो प्रत्येक
- 19:07प्राणी का है, भोज तो भविष्य का भी होता है।
- 19:17भविष्य में कल्पनाओं का बोझ होता है, स्वप्नों का बोझ होता है।
- 19:24अतीत में समृतियों का बोझ होता है।
- 19:31क्यों हो, क्या हो? क्या वह वापस नहीं आता?
- 19:41भविष्य अभी आया नहीं, पता नहीं कैसा होगा तो तुम्हें एक बात
- 19:48बताता हूँ, भविष्य की आशा को त्याग दो, ये आपको बात नहीं
- 19:58लगेंगी। क्योंकि हमारे तो मोटिवेशनल
- 20:02स्पीकर्स ने हमे सिखाया है, अतीत के तनाव से मुक्ति पानी है तो
- 20:07भविष्य की आशाओं को सुखा लो, नहीं आशा भर आशा भर त्याग।
- 20:20आशा भर त्याग तो जैसे समृद्धि बोझ है, वैसे आशा भी बोझ अब इस बात को
- 20:36ठीक से समझ लेना। कितनी बार भी सुनना पड़े स्मृति
- 20:44बीत गई अब वे आएँगे नहीं, जो हो गया आएगा नहीं लेकिन तुम्हारे बोझ
- 20:51हैं ऐसे ही आशा का बोझ हैं, कोई बात नहीं।
- 20:58आज नहीं हुआ, कल हो जाएगा चींटी की तरह इतना परिश्रम न करो
- 21:15कि सो भी न सको मानव हो ये जामा बड़ी मुश्किल से मिला।
- 21:25कम से कम लुत्फ तो ले लो सोने का ये प्राकृतिक है प्रकृति तो वे
- 21:36नींद में लेके जाती है तुम जागरण में चले जाते हो छोड़ो जागरणों
- 21:46को। उस माँ को मैं मना लूँगा, तुम
- 21:57नींद का आनंद लो, माँ को मनाने की जिम्मेदारी मुझपे छोड़ माँ को।
- 22:09मैं बना लूँगा तुम ये बोझा मत रखो और वैसे भी कोई माता वाता प्रसन्न
- 22:20नहीं होती जहाँ माताओं की पूजा नहीं होती।
- 22:27वो देश आज हमें हाथों में दे रहे पांवों में जंजीरें मृत्यु को
- 22:35हथेली के लिए हम उन देशों में जाते हैं, डंकी मारते हैं जहाँ
- 22:42लक्ष्मी माता की पूजा नहीं होती। लक्ष्मी माता की पूजने के लिए
- 22:47क्या वो रुको लक्ष्मी भोगने के लिए होती है?
- 22:55समझे? पूजने के लिए जीस चीज़ को भोगना
- 23:01है उसकी तुम पूजा करने लगे। और जीस चीज़ को भोगना है उसकी
- 23:08पूजा नहीं करनी होती, उसको कमाना होता है।
- 23:18संतो ने बड़ा शानदार रहस्य उद्घाटन किया था।
- 23:28गंगा तो पवित्र है लेकिन ये जो गंदे नाले रास्ते में मिल जाते
- 23:32हैं, ये दूषित करते हैं। सनातन बड़ा शानदार है।
- 23:39आज शुद्ध रूप में अग्रिस को बचा लिया जाए, लेकिन सनातन को इन गंदे
- 23:51नालों ने विकृत कर दिया। ये नाव टोपीधारी ये जादूगरी दिखा
- 24:05के ईमानदारी ज़रा भी नहीं है। लाखों लोगों की दिन का चेन छीन
- 24:14लेते हैं। भूख तो जरूरत पड़ता है इन मूर्खों
- 24:27को ये भी नहीं पता अगर हम नफरत फैलाएंगे ज़रा नफरत करके देखो
- 24:33वैज्ञानिक से पूछो जब तुम नफरत करते हो।
- 24:40तो तुम्हारे भीतर खतरनाक टाइप के हार्मोन्स पैदा होते हैं।
- 24:47कॉटेसोल एडबनाइलिन तुम्हारी रगों में जहर फैला देते हैं, कौन
- 24:55भुगतता है? राजनीतिक लोग तो मज़े से जाकर है।
- 25:06एयर कंडीशन रूम में सो जाएंगे। तुम नफरत फैलाती करोगे बगदे का
- 25:18कौन है जिसने नफरत की? और बड़े समझदार लोग ये सफेद जुर्म
- 25:26वाले इन्हें समझ नहीं आता कि नफरत फैला के नुकसान किसका कर रहे हो?
- 25:37प्रेम बांटते तो अमृत का आनंद तुम ही पीते।
- 25:43नफरत फैलाई तो जहर का वैश्य तुम भी दंश्य तुम भी झेलो लेकिन ये
- 25:53फैलाते जाएंगे क्योंकि वैसे भी इनकी ज़िन्दगी नर्क है।
- 26:04जिसने उस अमृत का आनंद एक क्षण के लिए कभी पिया ना हो चखा ना हो और
- 26:18वो यह गलत रास्ते पर निकल जाए। वह विष ही उंडैलेगा।
- 26:24क्योंकि अमृत की मूंद इसने पी। पढ़े लिखे खोपड़ी कितनी ही
- 26:31विद्वान हो गई हो, लेकिन यह बात खोपड़ी की नहीं आनंद खोपड़ी का
- 26:38भीषण। आनंद अस्तित्व का विषय है, खोपड़ी
- 26:49से मिलता भी नहीं और सही पूछो तो खोपड़ी को छोड़ने से मिलता है।
- 27:03तुम्हें कितना चाहिए तुमने चींटी को देखा?
- 27:11इतना फिकर और तुम चींटी की बड़ी महिमामंडन करते हो, मेरी दृष्टि
- 27:19में चींटी का परिश्रम। हाथी की मस्ती बड़ी अच्छी लगती
- 27:27है। मुझे गजराज मन चाहिए, चींटी को कण
- 27:39चाहिए सारी राज़ जागती। हाथी को मन चाहिए पसर जाता है तो
- 27:50क्या सब कामधम छोड़ दें? नहीं तुम एक बात को दूसरी अति पे
- 27:58ले जाते हो, यही तुम्हारी गलती है।
- 28:05मैं कहता हूँ विश्राम करो, तो तुम क्या कहते हो?
- 28:09तुम कहते हो फिर काम छोड़ दे बिलकुल जब विश्राम करो तो काम
- 28:13छोड़ दो जब काम करो। तो पूरी शक्ति से करो, इन्वॉल्व
- 28:24युअर 100% एनर्जी इन दट। और जब विश्राम करो तो परिश्रम का
- 28:32ऊर्जा ये दोनों विपरीत हो रहे हैं, आराम करो तो पूरा करो।
- 28:40और जीस दिन, तुम पूरा आराम करना सीख जाओगे उस दिन तुम उस तल पे
- 28:45पहुँच जाओगे, इस बात को आप कर लेना जीस दिन तुम पूरा आराम करना
- 28:53सीख जाओगे उस दिन तुम उस तल पर पहुँच जाओगे जो सदा से आराम में
- 28:59है। और वो तुम आनंद के सागर, लेकिन ये
- 29:08लोग तुम्हें कहेंगे नहीं, नहीं नहीं, अगर सारे ऐसा हो जाए तो
- 29:12अच्छा होगा। रात को विश्राम करें, दिन में
- 29:15कहाँ करें? पूरी शक्ति से विश्राम करें।
- 29:21कौन रोकता है और पूरी शक्ति से काम करें।
- 29:25यही तो भगवान कृष्ण का है कर्म नेवाधिकार से जब तू कर्म कर पूरे
- 29:35अधिकार से कर। महाफलेश कदाचना जब तू विश्राम कर
- 29:44तो सब छोड़ छाड़ के विश्राम कर घोड़े बेच के विश्राम कर न तुम
- 29:52काम ठीक से कर पाते हो। न तुम विश्राम ठीक से कर पाते हो,
- 29:57ये तुम्हारी आंधी आंधी योजनाएं तुम्हें सफल नहीं होने देती।
- 30:07तुम्हें वो अमृत की मूंद पीने नहीं देती, चखने भी नहीं देते
- 30:11हैं। मुझे किसी ने पूछ लिया बाबा आपको
- 30:25सुनने वाले थोड़े क्यों हैं? मैंने कहा मैं किसी को आमंत्रित
- 30:32नहीं करता इसलिए थोड़े से लोग मेरे पास आएँगे।
- 30:41मेरे जाने के बाद बड़ा समूह गट्टा होगा क्योंकि इन्होंने मेरी बात
- 30:51को सुना है। कोई एक आध बिखरा सुन लिया होगा
- 30:58नहीं इच्छा लगा होगा आगे से सुनना नहीं बंद कर दिया और जब तुम सुनना
- 31:09नहीं चाहते, तो फिर अगर कोई तुम्हें सुनाएगा तो उसका कोई
- 31:15निहित स्वार्थ होगा। अब इस बात को भी नोट कर लेना तुम
- 31:23सुनना नहीं चाहते। हम मीडिया लगा देते हैं और उसे
- 31:29टेलीविज़न चैनल। रिपोर्टर मुझे कॅाटाक्ट करते हैं
- 31:35बाबा आप से इंटरव्यू? मैंने कहा काहे तुम्हारी जीवनी
- 31:43पढ़ लो, छप गई है और इंटरव्यू नहीं कुछ नहीं है, मैंने छुपाया
- 31:52कुछ नहीं इंटरव्यू तो तब करोगे ना जब कुछ इंटर होगा?
- 31:59भीतर कुछ रखा ही नहीं है। दर्शन काहे का भीतर?
- 32:05और इंटरव्यू तो खुद का होता है, किसी का थोड़ा होता है, अपने भीतर
- 32:11तो खुद झांकना होता है। इंटरव्यू खुद का दर्शन।
- 32:19और तुम दूसरे के दर्शन को इंटरव्यू करते हो, खुद का दर्शन
- 32:27तुमने कभी नहीं किया, दूसरों से पूछे चले जाते हो।
- 32:41जिसने अपने भीतर झाँक लिया सभी संतों ने कहा, लेकिन तुम समझ नहीं
- 32:54पाए पतंजलि ने कहा अपने भीतर जाकर।
- 33:01खंगालो सोच, संतोष, तप, स्वाध्याय, स्वय का अध्ययन करो और
- 33:12तुम पढ़ना शुरू कर देता स्वाध्याय तुम्हारी नजर में पढ़ना।
- 33:19जबकि स्वयं अध्याय का मतलब खुद को अध्ययन करो।
- 33:25तुम्हें खुद का तो पता नहीं किताबों का पता है इसलिए
- 33:31शास्त्रों में लोगों की इतनी रूचि हो गई है।
- 33:35स्वाध्याय का अर्थ गलत ले लिया। भगवान कृष्ण भी करते हैं।
- 33:42अमानित्वं दंभित्वं हिंसा शांतिरर्जुन अचारो उपासम शौचम
- 33:49स्तयरम आत्मा विनकरोहा खुद का निग्रह है, करो।
- 33:59तुमने खुद को ही नहीं देखा बाकी सबको देखा, बस यही कमी रह गई।
- 34:12जीस दिन तुमने खुद को देख लिया सब संताव मिर्चन गए।
- 34:19कष्ट, क्लेश समाप्त हो जाएंगे। तुम्हे रोज़ नया कॉन्टैक्ट चाहिए।
- 34:30रोज़ ऐसा लगता है जैसे दुनिया आज। अपने न्यूरोज को ठूंस ठूंस के
- 34:38भरने में लगी है वो जो सर लोग तुम्हें इतना जचते हैं जो
- 34:44तुम्हारे न्यूरोज को ठूंस देते हैं, तुम कहते हो?
- 34:54हमारी जानकारी में वृद्धि हुई। भला ये दुर्भाग्य की बात है कि
- 35:02सौभाग्य की बात है, ये दुर्भाग्य की बात है, मैंने तुमसे कहा अतीत
- 35:13को भूल जाओ। भविष्य को भी याद न करो।
- 35:20वह अभी आया नहीं है, पता नहीं आएगा कि नहीं आएगा कोई भरोसा नहीं
- 35:29भविष्य का और अतीत फिर से आता है। तुमने जो कर लिया वह कमान वापस
- 35:41आता है, वह तीर वापस आता है, जो खींच गया वो खींच गया, लेकिन फिर
- 35:51भी तुम बहुत दिल बनाते हो अपने दिमाग को।
- 35:57आज जितनी आत्महत्याएं हो रही हैं, इसी कारण से हो रहे हैं अब थोड़ा
- 36:11सा। इसके ऊपर, क्योंकि यह जीवन से
- 36:14संबंधित है और तुम्हें यह पता नहीं है, लेकिन हमें पता है हम
- 36:23बता सकते हैं हम बताने का हक रखते हैं।
- 36:33जीवन एक लड़ी है, श्रृंखला है, जीवन एक नहीं है।
- 36:41कुछ धर्मों ने माना ईसाईयत ने माना इस्लामिक ने माना लेकिन उनके
- 36:47कुछ कारण थे। जीवन तो अनेक है, वह जीवन गढ़ती
- 37:04भी होती है और अच्छा भी होता है। मैं तुमसे कहता हूँ यह समाज।
- 37:22समाज की कीमत पर सब छोड़ते समाज को लुटा देना है, अपने जीवन को मत
- 37:35जुटाना है। लोग क्या कहें कहें।
- 37:41बाढ़ में जाएं लोग हम तो अपनी मस्ती में आग लगे बस्ती में अपराध
- 37:59जिंदा से होते हैं, मुर्दा से नहीं होते हैं।
- 38:04तुम जीवित थे तुमने अपराध कर दिया नैचुरली है संभावित है, होता है,
- 38:15हो क्या भूल होनी स्वाभाविक है सबसे होती है।
- 38:26और जो भूल नहीं करता वह मरता है, पत्थर कभी भूल नहीं करता, मूर्ति
- 38:34कभी भूल नहीं करते और ये जो मूर्तियाँ लगायेंगी तुम्हारे
- 38:39मंत्रों में इनका एक अर्थ ये भी था।
- 38:47कि तुम्हारा अंतःष इतना मूर्ति वह तो स्थिल है, शीतल है कि उससे कभी
- 38:53भूल नहीं होते। मूर्ति भूल नहीं करते, तुम भोग
- 39:02लगा देते हो कहाँ खाती है वो? तुम भूल कर देते हो पता है,
- 39:07मूर्ति नहीं खायेगी लेकिन लड्डू गोपाल को खाना खिलाना है मूर्ति
- 39:22भूल नहीं करते मूर्ति कभी मुँह नहीं फाड़ती क्या खिला दी?
- 39:29तुम्हारे भीतर भी एक ऐसा तत्व है जो अचल है, निष्कंप है हिलता
- 39:34नहीं, वह भूल नहीं करता। बस ये बाहर उसका सिर्फ प्रतिबद्ध
- 39:44था। रिफ्लेक्शन।
- 39:49मूर्ति वत हो जाओ न तो भूल करोगे बस इतना फर्क होगा बाहर की मूर्ति
- 39:59जड़ और भीतर की मूर्त चेतन। इस बाहर की अचलता से शुरू करना है
- 40:08भीतर की अचलता तक पहुँच जाना है। बाहर भी निष्कम्प है भीतर भी
- 40:15निष्कम्प है और यह सफर बस यह सफर है इसे जीवन का सफर कहते हैं।
- 40:24इसे आनंद का सफर कहते हैं। ये तुमने करना है खुद की
- 40:38मान्यताओं से खुद की यथार्थता तक का सफर तुमने माना क्या?
- 40:48और तुम हो क्या? बस इसके बीच का सफर होता है।
- 40:53तुमने माना तो अपने आपको बहुत कुछ साहूकार मानते हो, गरीब मानते हो,
- 41:01रोगी मानते हो, सब मानते हो, लोग तो जान भी दे देते हैं।
- 41:09सिर्फ मानकर कि मैंने अपराध किया, जिंदा व्यक्ति से गलती भी होगी,
- 41:21गलती करना व्यक्ति का धर्म है। और जो वृहद काम करेगा वो बड़ी
- 41:30गलती करेगा। बड़े काम करने वालों की गलती
- 41:39निकालना मत, फिर उसकी जगह तुम कर लेना, उसे हटा देना, हम करेंगे
- 41:45तुम हट जाओ, ऐसा मत करना कि तुम भी ना करो और उसे भी ना करना।
- 41:52फिर गलतियाँ तो होंगी फिर गलतियाँ मत निकालो।
- 41:57एक मूर्तिकार ने मूर्ति बना दी है, चौराहे पर लटका दी है।
- 42:04इसमें कोई गलती हो, कांटे का निशान लगा दे ना उसपे।
- 42:12साँझ आया तो मूर्ति गायब थी, कांटी ही कांटी थी ये गलती ये
- 42:18गलती ये गलती मूर्ति नहीं दिख रही थी नैन नक्ष्य सौंदर्य सब खो गया
- 42:24था लाबंज मिट गया था। पता नहीं था ये क्या है?
- 42:34दूसरे दिन दोस्त ने कहा अब तू ऐसा कर ऊपर लिख दे, जो गलती हो उसमें
- 42:41सुधार करो, मूर्ति वही। चुराहे में लटका दिया साँझ कृष्ण
- 42:50ने छेड़ा बिना मूर्ति यथावत्थी गलती निकालना होता है अविश्वास को
- 43:02नोट कर लेना गलती सुधारना नहीं आता।
- 43:11जो गलती सुधार सकता है, वह गलती निकालने की हिम्मत करें।
- 43:23उसे आज लोग कह देते हैं जो औरंगजेब को गालियां निकालते हैं।
- 43:28हिंदू मुसलमान करता था, मैंने कहा तुम क्या कर रहे हो?
- 43:35और जेब जैसी है तुम वह भी हिंदू मुसलमान करता था।
- 43:39तुम भी हिंदू मुसलमान करता फिर फर्क का हो मज़ा तो है तुम छोड़
- 43:47दो और वह तो गया किसको दंड दोगे? और लादों को तो कभी तंत्र नहीं
- 43:55दिया जाता, उनका तो कोई कसूर नहीं हिरण्यकशप का फल प्रहलाद क्यों
- 44:02भोगे भाई और भाई भी क्यों भोगे? रावण के कुकृत्यों का फल पे भीषण
- 44:20का भौंक जो गलती करे वो ही भौंक और इन जेब ने गलती की ईश्वर की
- 44:38सृष्टि में बड़ा शानदार प्रधान है।
- 44:41बस तुम इसीलिए अपने हाथों से दंड देते हो कि तुम्हें ईश्वर का पता
- 44:49खाता नहीं है। पोल खुल जाती है जब तुम्हारे
- 44:53सामने कोई रिवॉल्वर ले के आ जाता है।
- 44:59मैंने जयपुर की घटना आपको सुनाई। वो कहता है, आई ऍम एनलाइटन पर्सन।
- 45:05मैंने कहा ठीक एक खिलौना मांगा लिया, मैंने पिस्टल उसकी छाती पे
- 45:10लगा दिया और चड्डी धारी दोनों तरफ से गीले कर गया।
- 45:17मैंने कहा यू अरे नॉट है। जाओ घर जाके सो जाओ, लोगों को
- 45:30मूर्ख मत बनाओ, क्योंकि एनलाइटन पर्सन के उच्च लक्षण।
- 45:43मीठा क्या खाक हुआ जो मीठे का रसन दे नमकीन क्या खाक हुआ जो नमक का
- 45:53रसन? यहाँ तो हम बाहर की सजावट को
- 46:06वस्तु तय असली समझ बैठते हैं। यही गलती खस्ता है आज भारत इसलिए
- 46:14मैं तुमसे कहता हूँ जीस दिन धर्म। संसार से विदा हो जाएगा, संसार
- 46:24शांत हो जाएगा। सारा झगड़ा अधर्मियों का नहीं है।
- 46:29झगड़ा धर्मियों का है, अधर्मी तो बेचारे झगड़ा करते ही हैं।
- 46:38माउस से टूंगने मैंने उस दिन बात बताई, आपको वेस पकड़ लिया।
- 46:44झगड़ा कहाँ से शुरू होता है? जड़ क्या है?
- 46:48जड़ है धर्म धर्म को मिटा दो और जीस दिन तुम धर्म को मिटा दोगे।
- 46:57उस दिन बुरा ही मठ जाएगी। तुम अपराधी को गोली मार देते हो।
- 47:09यानी कि मानवता में सुधार की कैपेसिटी खत्म हो गई।
- 47:19तुम सुधार नहीं सकते हो। मार सकते हो फिर गलती किसकी कमी
- 47:28कमी किसमें कमी तुम में जेलों का अनाम सुधार के लिए रखा था, तुम
- 47:38सुधारने के बजाय उसको मार देते हो?
- 47:41इसका अर्थ यही है तुम्हारी सहनशक्ति जवाब देगी।
- 47:49कैसे कोई निकल जाएगा जब लोहे की दीवारों के पीछे खड़ा होगा
- 47:58सुधारने के बड़े तरीके? मारने का एक यत्रिका है लेकिन
- 48:06क्योंकि सुधारने की तुम्हारे में हिम्मत नहीं है इसलिए मार देती
- 48:12हूँ। हाथी को मन चाही लेकिन मस्त है।
- 48:23अजगर करे ना शक करिये वह किसी का गलाम नहीं पंछी करे ना काम कोई
- 48:31झूठी नहीं। उसकी कह तो मलूका दासी सब के दाता
- 48:37रहा। अतीत को भूल जाओ, कोई व्यक्ति
- 48:51सुसाइड नहीं करेगा, सुसाइड होता है।
- 48:56सिर्फ अतीत को याद करने से गलती इंसान से होती है।
- 49:08और समाज को गलती के लिए क्षमा करना सीखना होगा।
- 49:19आज तुम इतने असहनशील हो गए हो कि किसी की गलती को क्षमा नहीं कर
- 49:24सकते। उसकी गलती को बखान करता हूँ।
- 49:31आज ये जो मीडिया का द्वंद चल रहा है, दो धड़े आज हो गए हैं।
- 49:39मैं तो खैर टेलीविजन मेरे तो घर में ही नहीं है।
- 49:45हमें खबरों से कोई इंटरेस्ट नहीं है।
- 49:51मुख्य मुख्य बातों से अवश्य हम इन टच रहते हैं।
- 49:58जब भी कभी आनंद की अवस्था से बाहर होते हैं।
- 50:03वो अवस्था भी नरक की होती है। आनंद से बाहर आ जाना नर्क है।
- 50:12जरूर पूछ लेती हैं बाबा जब हम आती हैं, आप इतनी खुशी से स्वार्थ
- 50:16नहीं करते हैं। मैंने कहा मेरे आनंद में बाधा बन
- 50:19जाती हो। और जब तुम किसी के भी आनंद में
- 50:24बाधा बनोगे, वह प्रसन्न तो नहीं होगा प्रसन्न तो वह अपने आनंद में
- 50:31ही है और तुम ऐसे क्यों नहीं हो जाते?
- 50:34मुझसे क्यों पूछती हूँ? तुम भी तो ऐसा हो सकते हो अगर मैं
- 50:45तुम्हें कहूँ कि तुम क्षुद्र हो, तुम पहुँच नहीं सकते नहीं, मैं
- 50:49तुम्हें कहता हूँ तुम भी हो सकते हो शायद मैं पहले हो गया तुम
- 50:56थोड़ा सी देरी से हो जाओ। और मुझसे पहले बहुत हो गया, अतीत
- 51:10के बोझ को गिरा दो, भूल जाओ तुम दुनिया को मिटाने वालों, अतीत की
- 51:18स्मृतियों को मिटाओ, दूसरों पर बम गिराने वालों।
- 51:24अतीत के कटु समृतियों को मिटाओ, दुनिया को मत मिटाओ, ये तुम्हारी
- 51:30बनाई नहीं है, जिसने बनाई वह मिटा दे।
- 51:42तुम्हारा कोई हक नहीं है मिटाने का अतीत कबूल जाओ, भविष्य की
- 51:58योजनाएं बनाओ अतीत से सब को लो अब थीम समझो।
- 52:06अतीत से सबक लो हमने क्या गलती की?
- 52:10भविष्य में कोशिश करें। अब गलती न हो, अतीत से सबक लो,
- 52:17फिर भी गलती हो जाए। घबराओ मत मनुष्य गलती का पुतला है
- 52:24मनुष्य एरर्स। भविष्य अभी आया नहीं है उनकी
- 52:29कल्पनाओं में इतना न उलझूँ जब आएगा मज़ा उठा लेंगे दुख आएगा,
- 52:36दुख भोग लेंगे जो आएगा देख लेंगे तब की तब देख लेंगे इसको
- 52:43मूल्यसूत्र बना लेना। मुझे लोग पूछ रहे थे कि अगर ऐसा
- 52:49हो गया तो क्या करें? मैंने कहा तुम्हें एक मेरे मंत्र
- 52:53को याद रखो, आज तुम्हें एक मंत्र दे रहा हूँ भविष्य की उलझनों से।
- 53:06होने वाले संभावनाओं से अचूक मंत्र क्या तब की तब निपट लेते
- 53:20हैं? अभी वो आएगा, कई बार भविष्य में
- 53:27ये हो जाएगा। भविष्य की संभावनाओं की आहट
- 53:32तुम्हें ड्रा देती है वो तुम्हारे मन की पैदाइश होते हैं।
- 53:40100 में से 90 बार ऐसा न हो जाए ऐसा न हो जाए।
- 53:53संभावना है पता नहीं तुम्हें पक्का नहीं पता।
- 54:02तो अगर भविष्य की कोई भी बात तुम्हें डराए, अगर ऐसा हो गया तो
- 54:08क्या करेंगे? तो योजनाएं बनाओ, सिर्फ बोझ मत
- 54:16रखो। अतीत से सबक सीखो, भविष्य की
- 54:23योजनाएं बनाओ, ना अतीत को बोझ बनने दो, ना भविष्य को बोझ बनने
- 54:35दो। क्योंकि जो तुम्हारा मन भविष्य के
- 54:42पर पसार लेता है ऐसा न हो जाए, ऐसा न हो जाए।
- 54:47100 में से 90 बार वैसा नहीं होता और मैं सच बताऊँ।
- 54:52तो शायद में 100 में से 99 वार्ता होता ही नहीं।
- 54:56पक्का ये तुम्हारे मन के खेल हैं। होता होता कुछ नहीं है तो एक अचूक
- 55:11मंत्र। तुम डर जाओ, संभावनाओं से बह खा
- 55:18जाओ, हाथ पांव कपने लग जाए तो एक मूल मंत्र रहो तब की तब्द देख
- 55:26लेंगे तब की तब्द निपट लेंगे, अभी आये नहीं।
- 55:32जब आएगा तब देखेंगे, 1 घंटे बाद भी अगर कुछ होना है तो हमें पक्का
- 55:44पता नहीं कब होगा और अगर पक्का भी पता है तो भी तब की तब देख लेंगे।
- 55:56यह बात तुम रिलैक्स कर सकी। इंग्लैंड में एक व्यक्ति हुआ जॉन
- 56:08ली। उसको तीन बार फांसी की सजा हुई,
- 56:16वह ज़रा भी नहीं कपा। एक बार फांसी चढ़ाया नहीं, फंदा
- 56:28लगा, फट्टे हटे, फिर जज ने कहा दूसरी तारीख ले लो, इसको लटकाना
- 56:38तो है? दूसरी बार भी फटा नहीं हटा फिर जज
- 56:49ने कहा चलो मारना तो इसे है। तीसरी बार फंदा लगाबो और जॉन ली
- 56:57को तीसरी बार फंदा लगाया गया। फटा फिर नहीं हटा।
- 57:05आज लोग उसके बाद लोगों ने पड़ताल की कोई कुछ कहता, कोई कुछ कहता
- 57:11कोई कुछ कहता असल किसी को पता नहीं क्या हुआ यहाँ चरितार्थ होती
- 57:19है कहानी। जाको राखे साईयाँ मार सके और जाको
- 57:28मारे साइन बजा सके ना कोई क्या होगा भविष्य में तुम्हें कुछ नहीं
- 57:39मालूम भविष्य अज्ञात। लेकिन तुम आज भी उसे ज्ञात मानकर
- 57:46कांपते हो डरते हो, यह संभावना है ये तुम्हारे मन की खेल है।
- 57:53अतीत गया उसका बोझा मत रखो, हटा दो।
- 58:00पर भविष्य अभी आया नहीं जब आएगा हम देख लेंगे तो क्या होगा?
- 58:10अगर तुम सच में इस फॉर्मूलेशन को अपना दिया तो क्या होगा?
- 58:18तुम तत क्षण शांत हो जाओगे, आजमा के देखो मैं तुम्हें कहता हूँ,
- 58:26शांत होकर बैठ जाओ, क्यों कहता हूँ मन में जो चल रहा दौड़ते हुए
- 58:35पता नहीं लगेगा मन में क्या चल रहा है?
- 58:38बैठोगे। आराम करोगे तो पता चलेगा वह
- 58:43तुम्हारे सभी विचार आयेंगे और तुम जब ठहरे होगे तो तुम्हें दिखेंगे
- 58:54तुमने देखा। समुद्र के भीतर तुम्हें तुम्हारी
- 58:58परछाई दिखाई नहीं पड़ती क्योंकि लहरें बहुत हैं, तूफान है लेकिन
- 59:04झील के अंदर तालाब के अंदर तुम अपनी रिफ्लेक्शन देख लेते हो,
- 59:10शीशे में अपना मुख देख लेते हो, क्यों शीशा ठहरा हुआ है?
- 59:16जब तुम ठहरोगे तो तुम्हें दिखेगा क्या चल रहा है तुम्हारे मन में,
- 59:25क्यों तुम भटक रहे हो? बिना ठहरे नहीं दिखेगा।
- 59:30ठहरना जरूरी है। और जहाँ हमने ठहरना था हमारे
- 59:37गुरुओं ने हमें दौड़ाना शुरू कर दिया ये लो ये नाम ले लो नाम एक
- 59:43प्रकार का बटका है, नाम ठहराता नहीं तुम्हें भटकाता है, नाम चाहे
- 59:50कोई भी हो। ओह राम हो रहीम हो, अल्लाह हो
- 59:58सतनाम हो, वह गुरु हो, गॉड हो, राधे हो श्याम हो नाम भटकाता है,
- 1:00:07तुम्हें नाम एक दौड़ है। उसे दौड़ते हुए वक्त में तुम्हें
- 1:00:14ठहरना था, उसे साधना कहते हैं। ठहरने का नाम है साधना, लेकिन
- 1:00:23इन्होंने तुम्हें और दौड़ना सीखा दिया।
- 1:00:27संत की शरण में जाते हो तुम शांति के लिए।
- 1:00:31और शांति मिलती है ठहरने से ये तुम्हें और दौड़ा देते तुम ज़रा
- 1:00:41देखो अगर शीशा भी ठहरा हुआ न हो उसकी पॉलिश ऊंट पटांग हो तो मैं
- 1:00:47तुम्हारा चेहरा नहीं दिखेगा ठीक झील का पानी गड़बड़ हो।
- 1:00:54तो मैं तुम्हारी रिफ्लेक्शन समुद्र में कहाँ तुम अपनी परछाई
- 1:00:58देख पाते हो? जब लहरें घनी होती हैं, ठहरना
- 1:01:07होता है। अतीक को भूल जाओ।
- 1:01:20आराम से बैठ जाओ। अचेतन मन में जो है वह बाहर आएगा।
- 1:01:31अब है तुम्हारी परीक्षा का सवाल। दौड़ते वक्त तुम्हारी कोई परीक्षण
- 1:01:36नहीं थी और तुम्हें पता ही नहीं था मन में क्या है?
- 1:01:46एक डायलॉग है दिन तो किसी तरह भी चलता है।
- 1:01:49चाचा जाम ये रात क्यों आ जाती है? रात को ये भटकता हुआ मन दिखाई
- 1:01:59पड़ता है क्योंकि रात में तुम ठहर जाते हो।
- 1:02:08तुम ध्यान में इसलिए जा नहीं पाते भाग जाते हो राम राम जितना मर्जी
- 1:02:12करा लो, बैंक बैलेंस जितना मर्जी करा लो, राम करा देगा।
- 1:02:19उसमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि तुम्हारा मन पहले से दौड़
- 1:02:23रहा है। अगर दौड़ते ही रहोगे तो कोई फर्क
- 1:02:27नहीं पड़ेगा। जीते जी मरने का यही मतलब है रात
- 1:02:32को तो तुम मर ही जाती हो। दिन में जागते जागते मरो वो होता
- 1:02:40है मर जीवडा जागते जागते मरने का नाम मर जीवडा और इसी को कहा मरो
- 1:02:51हे जोगी मरो मरो मरण है मिठा। ऐसी मरने मरो जैसे मरने मरबोरखती
- 1:02:59था जैसे ही तुम ठहरोगे तुम्हारा मन पहले भी दौड़ रहा था, तुम्हें
- 1:03:12पता नहीं था अब तुम्हें दिखना शुरू हो जाएगा, बस इतना ही फर्क
- 1:03:16है। रोग को मिटाने के लिए रोग क्या है
- 1:03:26इसका पता होना चाहिए। डायगोनल शुड बी देर बिफोर
- 1:03:30ट्रीटमेंट रोग है क्या इसका पता नहीं है?
- 1:03:39तुम्हें तुम्हारा मन भटक रहा है। उसमें अतीत की स्मृतियां हैं,
- 1:03:44गलतियाँ हैं, तुम डरते हो, कंफते हो, तुम उसे एक्सेप्ट नहीं कर
- 1:03:51पाते, तुम कहते हो क्यों की गलती हमने स्वाभाविक है?
- 1:03:57भाई सबसे होती है। कोई संत ऐसा नहीं जिससे न हुई हो।
- 1:04:01भगवान राम से भी गलती हुई तो छिप के तीर मार दिए इसलिए तो भोगना
- 1:04:06पड़ा। कौन है जिसने गलतियों का दंश नहीं
- 1:04:15झेला? लेकिन तुम भुगतते जाना तेरा कोई
- 1:04:31साथ ना दे तो तू खुद से पीठ जोड़ ले।
- 1:04:41बिछोना धरती को करके अरे आकाश ओढ़ ले तेरा कोई साथ ना दे तो तू खुद
- 1:04:54से पेट जोड़ ले। बिछोना धरती को करके अरे आकाश ओढ़
- 1:05:04ले है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख न झेला?
- 1:05:19चल अकेला चल अकेला चल अकेला तेरा मिला पीछे छूटा रही चल अकेला तुम
- 1:05:32अकेले चलो। किसी से स्टेप मत लगाओ कि मैंने
- 1:05:38ठीक किया, गलत किया, जो हो गया, हो गया भोग चलेंगे।
- 1:05:44कोई बात नहीं चिंता और चीता इसमें एक टिप्पी का फर्क है।
- 1:05:53चिंता सीता देवर मत दे। चिंता ऐव अगर ऐसी चेता देहती नर
- 1:05:58जी, वह चिंता देहती जी बता चिंता तुम्हें जीते जी जला देती है और
- 1:06:06चेता तुम मर जाते हो तब जलाते है चिंता क्या एक छोटे से जीवन में।
- 1:06:15चिंता का कोई लाभ ही है, यहाँ भरोसा नहीं अगले पल को इतना छोटा
- 1:06:23जीवन ये तुम सोचते हो तुम्हारी खोपड़ी की इजाद है कि सोशल
- 1:06:34जियेंगे वास्तव में तो तुम अगले क्षण की भी नहीं जानते।
- 1:06:40इसलिए मैं कहता हूँ जिंदगी बड़ी छोटी है क्योंकि ये अगले पल का
- 1:06:45भरोसा नहीं तो छोटी है अतीत को भूल जाओ, भविष्य की भविष्य को भी
- 1:06:59भूल जाओ। अतीत से सब करो, भविष्य की
- 1:07:04योजनाएं बनो, बस बोझ दोनों का मत रखो, जो हो गया जो प्रकृति उसका
- 1:07:13दंड देगी, भुगत लेंगे तब की तब देखी जाएगी।
- 1:07:21इसको मूल मंत्र बना लेना देखेंगे। जब फल आएगा पता नहीं आएगा भी कि
- 1:07:29नहीं आएगा, लेकिन तुम उससे डरते हो जो अभी आया है और जैसे ही तुम
- 1:07:43इस फॉर्मूलेशन को अप्लाई करना शुरू कर दोगे, तुम ठहर जाओगे और
- 1:07:51ठहरने का बुरा शानदार परिणाम आएगा।
- 1:07:56क्या होगा? तुम ठहरे के भीतर के तुम्हारा
- 1:07:59चुम्बक तुम्हें खींचना शुरू करती। तुम भागते हो को चुम्बक नहीं खेच
- 1:08:07पाता, चुम्बक खींचता है लेकिन तुम भागते होते हो, तुम क्या समझते
- 1:08:16हो? पेंडुलम जब इधर से उधर जाता है।
- 1:08:20धरती का ग्रैविटेशन उसे खींचता नहीं खींचता है, लेकिन उसके पीछे
- 1:08:27जो पावर लगी है वो उसे एकदम से ठहरने नहीं देती।
- 1:08:32ऐसा ही तुम्हारा मन भी होगा। कुछ देर के लिए तुम ठहर जाओगे।
- 1:08:38लेकिन वो जो फोर्स लगी है वो पेंडुलम को इधर उधर करती रहेंगी
- 1:08:43और एक वक्त ऐसा आएगा कि अगर तुम ठहरे ही रहे तो पेंडुलम ठहर
- 1:08:51जाएगा। ग्रैविटेशन फोर्स कामयाब हुआ।
- 1:09:01लेकिन तुम्हारी गलती ये कि तुम पेंडुलम को फिर हिला देते हो।
- 1:09:06ठहरते हुए पानी को तुम फिर गजोल देते हो और फिर गंधा हो जाता है।
- 1:09:13ऐसा तुम सारी उम्र बता देते हो, तुम ठहरते हो?
- 1:09:19मेरे इस फॉर्मूले को आज के फॉर्मूले को नोट करले, ठहर जाना,
- 1:09:28भीतर जाने की चेष्टा मत करना। चेष्टाओं ने तुम्हें मारा है।
- 1:09:36चेष्ठानों ने तुम्हें गुमराह किया है, ज्योंजो तुमने दवा की दर्द
- 1:09:45बढ़ता गया तुम सिर्फ ठहर जाओ। परिश्रम करो परिणाम क्या आएगा पता
- 1:09:59नहीं जो आए स्वीकार है परिश्रम करना मेरा अधिकार है हर मन में
- 1:10:07वादिका रस्ते। फल क्या है मुझे पता नहीं, चाहे
- 1:10:15कुछ भी न आए, चाहे सब आ जाए, कुछ भी आ जाए, कोई चिंता मत करो।
- 1:10:24अतीत की चिंताओं को त्याग दो। सबक ले लो, भविष्य की कल्पनाओं को
- 1:10:32त्याग दो, नक्शे बना लो, योजना बना लो, क्या करना है जीते रहे तो
- 1:10:42धीरे धीरे इम्प्लिमेंट करते रहना। मर गए तो इम्प्लिमेंट हो गई खओ
- 1:10:52मुख गया कम लेकिन भविष्य की चिंता मत लेना कल कहाँ से आएगा?
- 1:11:02अगर हाथी ये सोचने लगे उसे तो मन की जरूरत है।
- 1:11:06तुम्हें तो पांव भराटे की जरूरत होती है, बस इतना ही होता है और
- 1:11:19हाथी को चाहिए मन 40 किलो रोज़ कहाँ से आएगा वह तो सोच सोच के मर
- 1:11:28जाएगा इतनी विशाल काया? और चींटी को चाहिए कण तुम चींटी
- 1:11:38जैसे हो, दिन रात परिश्रम करते हो, सोते भी नहीं।
- 1:11:50अपने आनंद की कीमत पर तुम परिश्रम करते हो ये कभी मत करना चींटी मत
- 1:11:57वन, चीटियों से सबक लेने वाले लोगों कान खोल के सुन लो।
- 1:12:08चींटी जैसा परिश्रम मत करना चींटी को कण की जरूरत पर वो दिन भर रात
- 1:12:20परिश्रम करती है, जोड़ती है लेकिन पांव तले आके रगड़ी जाती है चाहिए
- 1:12:29कितना कण? गज हाथी कोई परिश्रम नहीं करता,
- 1:12:41मन चाहिए मैं तुम्हें परिश्रम करने से मना ही नहीं करता, काम तो
- 1:12:52करता ही है, व्यक्ति खाली कोई बैठ नहीं सकता।
- 1:12:59अगर तुम पलक भी झबकाओगे ये भी एक काम है बोलोगे तो ये भी एक काम
- 1:13:05है। ये सर लोग क्या करते हैं, बोझा
- 1:13:10उठाते हैं, बोलते ही हैं बोलने से ही जिंदगानी जल जाती है।
- 1:13:23अतीत की चिंताओं को त्याग दो, भविष्य की योजनाएं बनाओ, बोझ को
- 1:13:27त्याग दो तो मलूक दास कहते हैं, बस यही कहते हैं।
- 1:13:37जिसने सृष्टि बनाई या कर्ता सृष्टि को साज्जा अपने जानें सोई
- 1:13:47जिसने बनाई सृष्टि, वह खुद निपट लेगा।
- 1:13:50चाँद तारों से निपट रहा है। ग्रह नक्षत्रों से निपट रहा है।
- 1:13:54विशाल ब्राह्मणों से निपटाएं, तुमसे न निपटेगा चींटी से सबक ले
- 1:14:05लेना तुम चींटी जैसे हो, हाथी से भी सबक ले लेना, हाथी फिक्र नहीं
- 1:14:14करता। अतीत की समृतियों को त्याग दो,
- 1:14:25भविष्य की योजनाएं बनाओ, इम्प्लीमेंट वक्त आएगा तो हो
- 1:14:31जाएगी, नहीं आएगा तो बस राम राम सत्य है राधे राधे।
- 1:14:43तो क्या करो बस ठहर जाओ और जैसे ही तुम ठहरे बड़े मज़े की बात है
- 1:14:52जो तुमने जन्मो जन्मो से पाया ना था, जिसके कारण फिर फिर से
- 1:14:57तुम्हें इस संसार में आना पड़ा, वो क्षण भर में मिल जाएगा।
- 1:15:06मज़े मज़े की बात है तुम पापी हो तुम कामी हो, तुम क्रोदी हो, तुम
- 1:15:15लोभी हो, तुम्हें मोह ज्यादा है। इन चीजों को नेगेलेक्ट कर देना मन
- 1:15:28पे कभी बोझ आए त्याग देना तुम ठहरने की प्रोग्रामिंग करना कैसे
- 1:15:42ठहरे? और अगर तुम ठहरने में कामयाब हो
- 1:15:46गए, तो तुम पाओगे किसी तत्व ने तुम्हें खींचना शुरू कर दिया
- 1:15:54तुमने देखा जो रॉकेट ऊपर उठ रहा है अपने बल से अगर वो ठहर जाए तो
- 1:16:00क्या होगा? अगर वो धरती के क्षेत्र में हो
- 1:16:03अगर ग्रैविटेशन फोर्स में तो धरतियों से कहीं चलेगी।
- 1:16:11ऐसे ही जब तुम ठहर गए तो परमात्मा का विधान तुम्हें अपने भीतर कह
- 1:16:16चलेगा और तुम वो पा जाओगे जो जन्मो जन्मो से।
- 1:16:23न पाने के कारण तुम्हारा पुनर्जन्म हो रहा था।
- 1:16:34तुम शांत हो जाओगे, आनंद का रस बरसेगा, निहाल हो जाओगे, स्नान कर
- 1:16:43लोगे, धूल ध्वंस सब मिट जाएगी। सत्य उजागर हो जाएगा।
- 1:16:52तुम अमृत हो तुम्हें पता चल जाएगा जीने की कामना मत करना।
- 1:16:57तुम अमर हो ये पता लगा लेना, अमीर बनने की चेष्टा मत करना।
- 1:17:08जरूरत जितना ही रखना सारा विषप तुम्हारा है ये पता लगा लेना
- 1:17:21तुम्हारी ख्याति दग दगंतर में हो जाए, इसको वासना मत बनाना।
- 1:17:27तुम देख दंगतर में फैले हुए हो ओमनी प्रेसेंट हो इसका पता लगा
- 1:17:31लेना तुम ओमनी प्रेसेंट हो इसका पता लगा लेना चक्रवर्ती सम्राट मत
- 1:17:40बनना, बल इकट्ठा मत करना। तुम ऑमनी पोटेंट हो इसका पता लगा
- 1:17:47लेना और वो तल है जहाँ पता चलता है फैल जाओ सब जगह लेकिन ख्याति
- 1:18:00की तरह नहीं। अस्तित्व की तरह होने की तरह ओमनी
- 1:18:08प्रेसेंट हो जाओ, ओमनी शिएंट हो जाओ, ओमनी पोटेंट हो जाओ बाहर से
- 1:18:16नहीं बाहर से तो कभी कोई हुआ भी नहीं कभी कोई होगा भी नहीं।
- 1:18:23धरती को जीत लोगे, गृह तारे रह जाएंगे।
- 1:18:28चंद्रमा को मंगल को सबको जीतना होगा और यह तो मापी ही नहीं जा
- 1:18:34सकती। नहीं, बाहर से नहीं जीत सकोगे।
- 1:18:42सिर्फ संभव है, एक ही दिशा है, अपने भीतर जाकर तुम अमर भी हो
- 1:18:50सकते हो, मरोगे नहीं, खुशहाल भी हो सकते हो, अमृत के समुद्र में
- 1:18:58गोते लगाओगे। ठंडी हवाओं में आनंद लोगे शांति
- 1:19:05की वो तरंगें ओम शांति, शांति करना नहीं है, कुछ नहीं होगा उससे
- 1:19:12ओम शांति का प्रभाव सिर्फ़ तब होगा जब तुम क्रोध में हो।
- 1:19:20बस उस क्रोध को शांत करने के लिए इसको एक जाप का मूल मंत्र बना
- 1:19:24लेना। रिलैक्स, रिलैक्स, रिलैक्स तुम
- 1:19:27शांत हो जाओगे लेकिन परम शांति में जाने के लिए यह मंत्र की तरह
- 1:19:34काम नहीं करेगा। क्रोध को शांत करने के लिए यह
- 1:19:38मंत्र की तरह काम करेगा। अगर वास्तव में तुमने उस परम
- 1:19:45शांति में उतरना है, उसकी शीतल छाया में नहाना है उसे चांदनी में
- 1:19:52शीतलता का आनंद लेना है। विराट बनना है प्रसार तुम्हारा
- 1:19:59अस्तित्व में हो जाए पूर्ण शक्तिशाली बन जाओ तुम में से अगर
- 1:20:07100 में से 100 भी निकाल लिया जाए तो भी 100 ही बच जाए ऐसे होना
- 1:20:13चाहते हो तुम कभी मरते नहीं हो। मैं ना मरूँ, मरे संसारा, मोहि
- 1:20:20मिला जिलाबन हारा तो अपने भीतर उतरने के सिवा दूसरा कोई रास्ता
- 1:20:26नहीं बाहर लाख खंगालू खंगालू कौन रोकता है?
- 1:20:35ये खंगालने के लिए ही है। यही कहते हैं स्टबक कर खंगाल लो
- 1:20:40भाई भोग लो लेकिन भोगने से नहीं मिलेगा।
- 1:20:49भोगने से दुख होगा, तुम्हारी इच्छाएं पूर्ण नहीं होंगी।
- 1:20:55तुम विरक्त हो जाओगे, भोक से दुःख आएगा दुख से बैराग गाएगा बैराग
- 1:21:03गायेगा तो तुम तरती रडाओगे इससे तो नहीं मिला फिर मिले कैसे?
- 1:21:12फिर मोमोक्षा का जन्म होगा। मुक्ति से मिले।
- 1:21:15कहा, मुक्ति का है कि इन मान्यताओं को जो तुमने मान रखी है
- 1:21:24सभी मान्यताओं को अगर तुम एक क्षण में गिराने के योग्य हो जाओ मुझसे
- 1:21:28लोग पूछ रहे थे कि क्या मैं अगले क्षण में पहुँच सकता हूँ?
- 1:21:33अगर तुम सभी मान्यताओं को एक क्षण में गहराने के योग्य हो जाओ तो
- 1:21:40अगले क्षण पहुँच जाओगे और मेरा दावे है आई स्टेप ऑन इट लेकिन बात
- 1:21:47तो ये है हो पाओगे यहाँ तो एक छोटी सी मान्यता।
- 1:21:53मैं तोड़ देता हूँ तुम सारी उम्र के लिए दुश्मन हो जाते हो, मेरे
- 1:21:58कह दो न बाबा विष्णु होते हैं, अब क्या करें?
- 1:22:03ऐसे लोगों को मेरे कहने से विष्णु हो जाएगा, वो है ही नहीं जो क्यों
- 1:22:15पागल हुए हो? आनंद होता है, विष्णु नहीं होता,
- 1:22:20तुम अधर हो जाओगे, तुम अमर हो जाओगे, तुम असीम हो जाओगे, भ्रमण
- 1:22:28के कण कण में तुम समा जाओगे, लेकिन बाहर जाकर नहीं।
- 1:22:32बाहर तुम्हारी चेष्टाएँ बेकार हो जाएंगी भीतर जाकर तुम वो पा जाओगे
- 1:22:36जो तुमने कभी भी चाहा था तीन कालों में से दोनों को छोड़ दो एक
- 1:22:45में हो जाओ वर्तमान में हो जाओ। वर्तमान में ठहरना ही मुक्ति का
- 1:22:54सूत्र है। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:23:12गोपाल हरि। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:23:23गोपाल हरि मेरी नैया पार लगा दे। गोबिंदा गोपाल हरि राधे राधे शाम
- 1:23:42मिला दे गोबिंदा गोपाल हरि। राधे राधे श्याम मिला रे धन्यवाद।