Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Jun 25 - Love vs Arranged Marriage | बच्चे पैदा करने से पहले ये विचार जरूर करें! | Must Listen |
Transcript
- 0:00प्रेम प्रकाश सोंढी बाबा जी प्रणब माँ बाप ने गले में ढोल डाल दिया
- 0:14जिंदगी का। माँ बाप ने गले में ढोल डाल दिया
- 0:20ज़िन्दगी का, अब इसको बजाना ही पड़ेगा बाबा कोई मार्गदर्शियों पर
- 0:30हो मैं क्या मार्गदर्शन को बैठा है?
- 0:38ऐसे रोज़ सैकड़ों प्रश्न मेरे पास आते है।
- 0:44तुम्हारी सारी सामाजिक व्यवस्थाएँ ऐसा लगता है जैसे पागलों की बनाई
- 0:48हुई हो? सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक?
- 0:56ये सभी व्यवस्थाएँ ऐसा लगता है जैसे किसी समीदार व्यक्ति ने नहीं
- 1:02बनाई। पागलों ने बनाई और तुम कहते हो
- 1:07माँ बाप ने गले में ढोल डाल दिया जिंदगी का, अब इसे बजाना ही
- 1:12पड़ेगा। बिलकुल ठीक कहते हो पुत्र और ऊपर
- 1:18से ये राजनीतिक लोग और देखिए कोई बोल्टन है 1 दिन सभी मर जाएंगे एक
- 1:30एक करके। इसके बावजूद भी जीने की तमन्ना है
- 1:41तुम कहते हो गले में ढोल डाल दिया और एक तरफ तुम कहते हो, जीने की
- 1:46तमन्ना है 10 मिनट और कैसे जी जाऊं?
- 1:52लाखों रुपए लग जाए 2 दिन की ज़िन्दगी दे दो, मेरे सामने कैसा
- 1:57है? 2 दिन का जीवन दे दो बाबा खर्चा
- 2:02कितना ही करवा दो। मैंने कहा एक क्षण नहीं मिलेगा,
- 2:07एक एक क्षण नहीं मिलेगा। और अगर कोई ऐसा क्षण आ गया कि जब
- 2:17तुम अमर हो गए, जैसे आज प्रयास चल रहे हैं दुनिया के महानतम सेठ
- 2:25जसवेबा ने। किसी इन्वेस्टमेंट में रिसर्चिक
- 2:31इन्वेस्टमेंट में पैसा लगाया है कि आदमी को अमर होना है, ये गलती
- 2:36मत कर बैठो। आदमी से इतनी जिंदगी भी ठीक से जी
- 2:43नहीं जाता। तुम इसको अमर करना चाहते हो और
- 2:49मेरी बात को याद रखना, मैं चला जाऊंगा, तुम बने रहोगे अगर अमर
- 2:56रहे तो फिर तुम देखना जैसे कहानी है अश्वथम मृत्यु के लिए तरसता
- 3:06फिरता है? ये कहानी है सिर्फ ये तुम्हें एक
- 3:12शिक्षा दे के जाती है। कहीं अमृता मांग मत लेना।
- 3:19अमृता का वरदान अस्वथमा को उसके पिता श्री ने दिया था।
- 3:27गुरु द्रौण जाओ पुत्र तू अमर हो गया लेकिन अमृता का वरदान तो दे
- 3:36दिया तुम भी सभी चाहते हो अमर होना देखो मुझे एक बात बताओ।
- 3:43अस्वस्थ में भटक रहा है घर, घर, गली, गली किसी मंदिर में किसी
- 3:49कोने में किसी पर्वत पर किसी वाण में द्वार, दरवाजे कूचे कूचे
- 3:57भटकता रहता है ये भी कोई जीवन है? माथे के ऊपर जो मनी थी वो कृष्ण
- 4:04भगवान ने निकाल ली। वो घाव रिश्ता रहता है।
- 4:10भगवान कृष्ण ने श्राप दिया तू ऐसा पाप करने चला था कर दिया था।
- 4:18तुने स्वच्छ म। जिसका सृष्टि में कोई फल नहीं
- 4:24होता तो मैंने उसे बचा लिया लेकिन तुने कोई कसर नहीं छोड़ी तो भीम
- 4:33से कहा कि ऐसा करो, इसके माध्यम से मणि निकाल लो, ये मेरे को
- 4:37देता। माथे की मनी निकाल ली गई और ये
- 4:44घाव सारी ज़िन्दगी तक रिश्ता रहेगा दुखता रहेगा दर्द से कराहती
- 4:53हुए तुम जीवन के छात्राओं को नापते रहना, तुम भीख में मौत
- 4:57मांगोगे तुम्हें मौत नहीं मिलेंगे।
- 5:02अब एक श्राप हो गया, एक वरदान हो गया।
- 5:05यह वरदान भी शराब हो गया जो उसके पिता गुरुद्रण ने दिया था।
- 5:12तुम कभी नहीं मरोगे और ये श्राप दे दिया भगवान कृष्ण ने।
- 5:20तुम इस युग के अंतिम प्रहर तक भटकते फिरोगे ये घाव तुम्हारा हरा
- 5:26रहेगा, रिश्ता रहेगा, दर्द करता रहेगा।
- 5:31अब वो मांगता है मौत उससे मृत्यु नहीं मिलती।
- 5:39ईश्वर ना कर ऐसा कोई पल आ जाए कि तुम अमर हो जाओ, मैं रहूं ना
- 5:48रहूं, नहीं रहूंगा। पता है क्योंकि मेरा आखिरी जीवन
- 5:52है, इसके बाद मैं नहीं आऊंगा। चाह गई चिंता मटे मनवा बेपरवाह
- 6:02जिनको कछु न चाहिए वो ही सहिंसा जब वासना खत्म हो जाती है तो अगला
- 6:10जीवन नहीं मेरा करता। तुमने कहा पुत्र प्रेम माँ बाप ने
- 6:18गले में ढोल डाल दिया, पीटना पड़ेगा बड़ी गहरी बात कह दे माँ
- 6:26बाप आप उसमें प्रेम करते हैं, प्रेम भी कहा करते हैं बस।
- 6:32किसी स्त्री ने आदमी को देखा, किसी आदमी ने स्त्री को देखा भागई
- 6:38स्त्री को उसको सुडोल सुडोल शरीर भाग गया और पुरुष को उसका नै नै?
- 6:44नक्ष रंग रूप कद का ये प्रसन्न आ गया।
- 6:51तुमने आपसी में शादी कर ली, यहाँ बीच में रखूँगा, रात को फिर आगे
- 6:58चलेंगे, शादी की प्रथा बंद कर दें, जितनी शीघ्र हो सके।
- 7:06फिर शादी की जगह क्या अपनाया जाए बाबा?
- 7:10शादी की जगह सहमति, शादी बंद, सहमति शुरू सहमति में कुछ मापदंड
- 7:22होंगे, कुछ अग्रीमेंट होंगे अगर बच्चा पैदा हो कल को हमारा झगड़ा
- 7:28भी हो सकता है। झगड़ा सिर्फ दो लोगों के बीच में
- 7:34नहीं होता। जो प्रेम से आपस में बांधते हैं,
- 7:39उनमें कभी झगड़ा नहीं होता। लोई में और कबीर में कभी झगड़ा
- 7:45नहीं होता। बाबा नानक कभी नहीं झगड़ते, शारदा
- 7:52रामकृष्णा से कभी नहीं झगड़ते वहाँ प्रेम है, वहाँ झगड़ा नहीं,
- 8:00प्रेम सर्वोच्च है और सदैव के लिए।
- 8:07प्रेम से कोई बंधन में बंध जाए तो वह बंधन भी स्वर्ग जैसा मालूम
- 8:12पड़ता है। उसमें गुलशन खेलते हैं, सुगंधी
- 8:18पैदा होती है लेकिन जो आज तुम्हारी प्रक्रिया है ये प्रेम
- 8:24से नहीं आए। यह व्यवस्था से आई पर मैं तुम्हें
- 8:31कहता हूँ इसको जितना शीघ्र खत्म हो सके उतना कर दो प्रेम अगर
- 8:37वास्तव में हो जाए, लोई और कबीर की तरह और तुम ऐसे रहसको जैसे
- 8:45नानक। और सुलखें तो ज़िन्दगी मज़े से
- 8:52गुजर जाएगी और रोका टोकी नहीं होगी।
- 8:59भीतर प्रेम का अहसास होगा। जब पुरुष के भीतर और स्त्री के
- 9:07भीतर प्रेम का एहसास होता है तो विश्वास का एहसास होता है, फिर
- 9:14शंका नहीं होती। फिर उस शंका का समाधान नहीं करना
- 9:18पड़ता जितनी शीघ्र हो सके। इस अरेंज्ड मैरिज को बंद कर।
- 9:27लव मैरिज वास्तव में लव मैरिज हो, आज तुम लव मैरिज भी अरएन्ज मैरिज
- 9:34की तरह करते हो, ये बंद होनी चाहिए, उसके बाद एक अग्रीमेंट
- 9:39होना चाहिए। कल को हमारी बिगड भी शक्ति है
- 9:44किसी बात पर। जो प्रेम करते हैं जोड़े वो तो
- 9:49कभी नहीं बिगड़ेगी। निश्चिंत हो जाएं जो प्रेम
- 9:52व्यवस्था से आया, नैन नक से सुंदर लगे सुडोल शरीर सुंदर लगा वो
- 9:57बिगड़ेगी 1 दिन बिगड़ेगी तो एग्रीमेंट जरूरी है।
- 10:04अग्रीमेंट में होगा। अगर बच्चा होगा तो कौन रखेगा?
- 10:11माँ रखेगी जीस लेने में इन्हें बेड में रखा या जो अंधेरे का लाभ
- 10:17उठा के सिर्फ स्वाद ले गया, वह पुरुष रखेगा।
- 10:25या कमिटमेंट होनी चाहिए या शर्त तय होनी चाहिए।
- 10:30जैसे भी शर्त तय हो वो लिखित में हो क्योंकि प्रेम हुआ नहीं।
- 10:37तुम्हे तुम्हे अट्रैक्शन हुआ है। तुम्हें खिंचाव हुआ है।
- 10:44आदमी को स्त्री से स्त्री को प्रेम नहीं, जलना, प्रेम में कोई
- 10:49शर्त नहीं होती, कोई अग्रीमेंट नहीं होती तो बच्चा होगा तो किसका
- 10:55होगा? कौन रखेगा ये कुछ?
- 11:00सेवाएं तय होनी चाहिए। और फिर तुम बच्चे को जन्म देते हो
- 11:04मेरे पास रोज़ ऐसे वो लाने आते कैसे तुमने वो लाना दिया?
- 11:10पुत्र गले में ढोल डाल डाल दिया जिंदगी का बजाते रहो इसको।
- 11:19मैं जानता हूँ तुम्हारी पीड़ा को ठीक से व्यवस्था नहीं दी होगी।
- 11:26माँ बाप ने तुम्हारे जन्म के बाद व्यवस्था बिगड़ जाए, उसमें बाप
- 11:32जिम्मेवारी नहीं माँ जी मैं वर नहीं, लेकिन अगर जानबूझकर
- 11:37तुम्हारे पास सब कुछ है। और तुम दो बच्चे जन्मे दो बच्चों
- 11:44को तुमने जुदा करने की कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी, क्योंकि एक से
- 11:49तुमने प्रेम किया, एक से तुमने नफरत की प्रेम नहीं किया।
- 11:54निश्चित ही ये दोनों बच्चे अलग अलग होंगे, नफरत करेंगे।
- 11:59नफरत के बीच तुमने खुद बोए मांगा जब तुम किसी की एक को प्रेम करते
- 12:05हो तो फिर एक ही जनम ते हो दो तीन जनम ते हो अगर तुमने दो को पैदा
- 12:11किया फिर तुम पार्शियल्टी को रखते हो दोनों को बराबर का प्यार तो।
- 12:18अगर किसी बच्चों को ये महसूस हुआ कि मुझे प्रेम नहीं मिलता, मुझे
- 12:22देखभाल नहीं मिलती मेरी बात नहीं सुनी जाती, दुखद है ये बात बच्चा
- 12:28अगर ऐसी बात महसूस करे और मैंने देखे ऐसे परिवार या तो छोड़ो मैं
- 12:33तो हैरान हूँ धरती पर ऐसे जोड़े मैंने देखे।
- 12:38जो ये कहते हैं कि अगर मेरे ताया जीके पांव पे हाथ लगाएगा तो मेरी
- 12:43जायदाद का हिस्सेदार तू है। अगर नहीं लगाएगा तो मेरी जायदाद
- 12:48नहीं मिलेंगे। ऐसा नहीं होना चाहिए।
- 12:51ये व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। एक बच्चा पैदा करो या दो बच्चा
- 12:58पैदा करो, पहली बात तुमने बच्चे के साथ महा अन्याय किया है
- 13:04जन्मदिन क्योंकि तुम मियाँ बीबी की सहमति है, बच्चे की सहमति कहाँ
- 13:12है कि मुझे पैदा करो। सबसे बड़ा प्रश्न मुँह बाय खड़ा
- 13:16है मानवता की आँखें मुझे किसी ने पूछ लिया बाबा क्या हमारे माँ बाप
- 13:25ने इसलिए पैदा की ये गंधा जहाँ न दिखाने के लिए?
- 13:33यह तानाशाही का जहान दिखाने के लिए जहाँ हम बोल ना सके, खुल के
- 13:37सांस न ले सके, आज पानी तुमने विकृत कर दिया है हवा तुमने विकृत
- 13:44कर दिया, जमीन तुमने विकृत कर दिया, सभी जीवन के साधन तुमने
- 13:49विकृत कर दिया है। और बच्चे जन्म देते चले जाते हो,
- 13:56इतनी लापरवाह हो तुम और तुम्हारी राजनीतिक व्यवस्थाएँ अभी आरएसएस
- 14:02के प्रमुख चीफ कह रहे थे कि तीन बच्चे पैदा करो, मैंने कहा फिर
- 14:08उसको पालन पोषण कौन करेगा? तीन बच्चों का पालन पोषण कौन
- 14:13करेगा? तुम जिम्मेदारी लेते हो, लेकिन
- 14:20जिम्मेदारी तो हम नहीं लेते। फिर सिर्फ इन बच्चों को इसीलिए
- 14:24पैदा करवातें हो पुतिन की तरह? कि तुम बच्चों को जन्म दो, आज
- 14:29पुतिन कह रहा है छोटी बच्चियों से जो पांचवीं, सातवीं क्लास में
- 14:34पढ़ती है, बच्चे पैदा करो क्यों? क्योंकि मैं उन्हें मरवा सकूँ।
- 14:41युद्ध में मरवा सकूँ मैंने यूक्रेन को जीतना।
- 14:46एक मूर्ख व्यक्ति की इच्छा के कारण एक मूर्ख व्यक्ति के शोक के
- 14:50कारण उसने छह बार कपड़े बदल लिए। उसने बार उसने जहाज के ऊपर सारा
- 14:57जहाँ 10 बार घूमना है एक व्यक्ति के शोक के कारण।
- 15:06सारा देश बिक जाए, सारे देश की आजादी छिन दी जाए, ये न्याय नहीं
- 15:16है, जनता को उठना होगा और जनता उठ चुकी है।
- 15:22मैंने देखी है वो तस्वीरें जब आग बबूला होती है श्रृंगारियाँ और
- 15:30लपटे पकड़ने को ही है वो दिन दूर जब हिंदुस्तान जैसे आध्यात्मिक
- 15:38मुल्क में। क्रांति हो के ओके?
- 15:44यहाँ कैसे लोग उनका बोलबाला हो गया।
- 15:50जो लोग गलत है ठीक है कोई बोलेंगे जेल में भटक दो, क्या कसूर है पता
- 15:59नहीं? ना ही न्याय व्यवस्था सुनती है।
- 16:06ये जेल में क्यों है भाई? इसे स्वतंत्रता से जीने का अधिकार
- 16:11है। इसकी स्वतंत्रता क्यों छीन ली?
- 16:15स्वतंत्रता हमारा मूलभूत अधिकार है।
- 16:18जन्म सिद्ध अधिकार है लोक मान्यता लेके और इसी दम पर तो हमने आजादी
- 16:24ले ली स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है यही तुम छीने जा
- 16:32रहा हो किसी को जेल में डालो। ये मत सोचना कि वह मुसलमान है या
- 16:37हिंदू है, सिख या ईसाई? बात उसकी स्वतंत्रता की है।
- 16:42मानव तो है, इंसान तो है, वो बात इंसान की स्वतंत्रता की है ना कि
- 16:49हिंदू और मुसलमान की। तुम आजादी से जी सकते हो।
- 16:56अगर नहीं जी सकते, तुम आज़ादी से बोल सकते हो, जो तुम महसूस करते
- 17:01हो, क्या उसे तुम आज़ादी से प्रकट भी कर सकते हो?
- 17:06लोगों के सामने अगर नहीं कर सकते तो तुम आज़ाद नहीं।
- 17:12जो तुम महसूस करते हो उसके प्रावटीकरण का अधिकार होना चाहिए।
- 17:18इस सभी को यही है। आजादी का मतलब और कोई मतलब नहीं
- 17:22होता अगर तुम्हें देश का प्राइम मिनिस्टर या किसी।
- 17:30स्टेट का चीफ मिस्टर पसंद नहीं आ रहा।
- 17:36तुम महसूस कर रहे हो या गुंडागर्दी कर रहा है, यह
- 17:41तानाशाही कर रहा है तो बोलने का अधिकार तुम्हे होने चाहिए, उसकी
- 17:44कोई सजा होनी चाहिए। सारा मुल्क विद्या है, ऐसा लगता
- 17:49है। सारी संस्थाओं बिक गई हैं।
- 17:52ऐसा लगता है नहीं, बिलकुल इंतहा हो गई है जब बच्चे ऐसा कहना शुरू
- 18:03कर दिए कि माँ बाप ने ढोल गले में डाल दिया है, पीटना ही पड़ेगा।
- 18:10तो समझलो के आने वाला वक्त कैसा होगा?
- 18:17और जब राजनीतिक लोग ये बोलना शुरू कर दे का बच्चे पैसा करो।
- 18:23पांचवीं सातवीं कक्षा की लड़कियों को।
- 18:28तो समझ ले ना कि अब ये पीटने के गृह वाक्य जानता है ये जानता है
- 18:35ये जाग जाए कब पता नहीं और ये कहने वालों के तीन बच्चे पैदा करो
- 18:46तुमने कितने बच्चे पैदा किए? मैं सिर्फ तमाशा ही देखना जानते
- 18:51हो, कोई बच्चा पैदा करे तुम तमाशा देखो कैसे माता पिता उसका मल
- 18:58मुत्र धोते हैं, बिमारी में उसको डॉक्टर के दिखाते हैं आप?
- 19:06कमोबेशी में गुजारती हैं, बच्चों को पूरा ऐशो आराम का साधन जुटाते
- 19:10हैं और तुम कहते हो तीन बच्चे पैदा करो ना तुम्हारे पास नौकरी
- 19:17है, ना तुम्हारे पास पेंशन है ना तुम्हारे पास सुविधाएं हैं?
- 19:26फिर बच्चे क्यों पैदा करे? तो बेटा अगर ऐसी व्यवस्थाएँ होंगी
- 19:32तो ऐसे ही लोग पैदा होते है। फिर इसका हल क्या है?
- 19:41इस तानाशाह डिपार्टमेंट को बदल दो।
- 19:46इस तानाशाह डिपार्टमेंट को पत्र ज़रा भी ना घबराओ, सत्य की रक्षा
- 19:54के लिए बलिदान हो जाए यही भगवान कृष्ण ने कहा कि सत्य की रक्षा के
- 20:01लिए बलिदान हो जाए। तो कृष्ण और बलराम दोनों ने कहा
- 20:07कि हम बलिदान देने को तैयार हैं। कृष्ण ने कंस को मार दिया।
- 20:13उसके अत्याचारों के कारण संघ बलराम थे उसके भाई।
- 20:23ज़रा संत की बेटियां विधवा हो गई, उसने आक्रमण कर दिया।
- 20:29मथुरा के ऊपर वहाँ पर पोस्टर गिराए गए।
- 20:35हम मथुरावासियों से कुछ नहीं कहना चाहते, हमारी कोई दुश्मनी नहीं
- 20:39है। तुम अगर अपनी खैर चाहते हो तो इन
- 20:43दो बच्चों को हमारे हवाले कर दो। इन दोनों बच्चों ने मेरे ज़माता
- 20:49को मार दिया है। बच्चे कौन है?
- 20:53कृष्ण और बलराम जब ये पोस्टर पढ़े गए तो सुर सेन कहने लगे।
- 21:01जो राजा कह लेकिन नहीं बचे तो मैं नहीं कृष्ण ने कहा नहीं नाना हमे
- 21:13जाये तो आप कोई बात नहीं। सारी प्रजा को नहीं मरवाना है।
- 21:20अगर दो व्यक्तियों की कुर्बानी से सारी प्रजा बच सकती है, देश बच
- 21:24सकता है। पूरी मथुरा नगरी बच सकती है।
- 21:28एक देश है हम दो बच्चों की कुर्बानी हो जाये तो कोई बड़ी बात
- 21:33नहीं। इतने से ही ठीक हो जाए।
- 21:37मतलब तो गिनी मत है, आप हमें सौंप दो और कृष्ण तैयार हो गए।
- 21:43बलराम भी तैयार हो गए। दोनों ने दरवाजा खोला और बाहर चले
- 21:47गए। ये लोग आ गए।
- 21:50हम सेनाएं वापस चली गई। खैर।
- 21:55आगे का मसला है। बात यहाँ तक थी अगर एक व्यक्ति की
- 22:00करवाने से दो व्यक्तियों की करवाने से पूरी नगरी बच सकती है
- 22:07अगर लाख 50,000 व्यक्तियों की करवाने से देश बन सकता है।
- 22:122,50,000 लोगों को कुर्बानी की राह पे आना चाहिए, देश बचता है यह
- 22:21व्यवस्था का सवाल है जहाँ तक तुम्हारा प्रश्न है पुत्र माँ बाप
- 22:28ने ढोल गले में डाल दिया, बजाना ही पड़ेगा।
- 22:32बात तो ठीक है मगर माँ बाप दो बच्चों को पैदा करता है और एक
- 22:40बच्चे को महसूस होता है उसकी आत्मा को कि मुझे न्याय नहीं मिल
- 22:44रहा। मुझे प्रेम नहीं मिल रहा।
- 22:45मेरी बातों की तवज्जा नहीं हो रही और सभी चाचे ताए उसे पागल कहते
- 22:51हैं। पागल कह कह के उसको पागल कर दिया
- 22:57ये समझो फिर पागल जो काम करते हैं कल को वही करेगा, वही करेगा।
- 23:12क्या फायदा हुआ उस बात का? तुम इस धरती पे सुख शांति नहीं
- 23:19चाहते। बच्चे की पैदाइश में बच्चे की कोई
- 23:27रजामंदी नहीं होती। बड़ा क्रांतिकारी वचन तुम्हारे
- 23:33जीवन में तुम्हारी कोई सहमति नहीं मांगी गई, जबकि तुम्हारी सहमति
- 23:39आवश्यक थी तुम्हें जीवन दिया गया है तुमने जीवन मांगा।
- 23:49और तुम्हें तरफा जा रहा है। अपना आप संभारो ये गलती किसकी
- 23:56तुम्हारी कोई गलत है क्योंकि तुम्हारी गलती तो होती अगर तुम
- 24:02अपनी इच्छा से जन्मे होते। कोई आज तक धरती पे अपनी इच्छा से
- 24:08जनम है सब माँ बाप की इच्छा से जनम इसलिए माँ बाप को आज माँ बाप
- 24:18इस होश में आई है। अमेरिका में समाज समझदार हो गया।
- 24:27देश समझदार हो गया तो अमेरिका में माँ बाप डिप्रेस्ड रहना शुरू हो
- 24:34गए। बच्चे को कभी कोई गलत बात न कह दी
- 24:36जाए, क्योंकि इसके गले में ढोल डाल दिया है हमने अब बजाना इसे।
- 24:46भरोसा कोई नहीं है हमारी जिंदगी का हम कब खिसक जाएं तुम्हारा
- 24:52क्वेश्चन तो बिलकुल ठीक है। तुम्हारी सहमति नहीं ली गई लेकिन
- 24:59फिर जो माँ बाप के पास है द्रव्य तो चाहिए।
- 25:03सांस लेने के लिए, पानी, पीने के लिए, चलने के लिए धरती ये सब कुछ
- 25:10परमात्मा ने दे दिया, सूरज दे दिया, चाँद तारे दे दिए, मन
- 25:14बहलाने के लिए घने वृक्ष दे दिए। पशु पंछी दे दिए सब दे दिए, ये तो
- 25:20परमात्मा ने दे दिए, लेकिन परमात्मा ने एक चीज़ दी जो तुमने
- 25:25बांटी नहीं क्या धन, धन तुमने बांटा और परमात्मा ने जो चीज़
- 25:35इंसानियत को दी? प्रत्येक जीवों के लिए थी क्योंकि
- 25:41इंसान बेहतर व्यवस्था कर सकता था, किसी और जानवर के हिस्से में नहीं
- 25:47आए। आदमी का कर्तव्य था कि वह सबको
- 25:50बांट के दे। पशुओं को पशुओं का हिस्सा दें।
- 25:55आदमियों को आदमियों का हिस्सा दे, लेकिन तुमने क्या किया?
- 25:59कुछ गिनती चुनती के सेठों को दे रहे हैं, बाकी कहाँ है, बाकी क्या
- 26:06करेंगे, कैसे जी, ये ज़िन्दगी के लम्हे कैसे गुजारेंगे?
- 26:15ये शरारत किसकी शरारत दो व्यक्ति एक जो राज़ सत्ता भोगना चाहते हैं
- 26:25और एक जो अपने पंडित के दम पर अपने अहंकार की पूर्ति करना चाहते
- 26:30हैं, एक जो श्रेय लेना चाहते हैं काम कोई करें।
- 26:35श्रेय हमें मिले और एक जो सम्मान लेना चाहते हैं।
- 26:40पांडित्य का इन दोनों की मिलीभगत इन दोनों ने समाज को गुरू कर
- 26:47दिया। बस यही व्यवस्थाएँ तुम्हें मार
- 26:51रही ना तुम जी रहे हो ना तुम मर रहे हो।
- 26:57और आज ऐसा भी तो कोई संत नहीं है जो तुम्हें अपने भीतर उस स्तर पे
- 27:02ले जाए जहाँ मोज ही मोज है, आनंद ही आनंद है जहाँ सुख ही सुख है।
- 27:15जहाँ कोई आग की तपन पहुंचती नहीं जहाँ कोई शस्त्र की काट चलती है
- 27:24जहाँ कोई हवा का वेग झोंका नहीं देता जहाँ कोई पानी की बाण।
- 27:31गला नहीं शक्ति नैनं चिदंतीशस्त्रण भगवान कृष्ण ने कहा
- 27:38वह तल बताने वाला आज भी है मैं मानवता की व्यथा को अच्छी तरह से
- 27:45जान पाऊँ सभी। सुबह से इस शाम तक मैं देखता हूँ,
- 27:54पर मैं कहता हूँ कि तुमने ये इजात तो बहुत बढ़िया कर दी है।
- 27:59सूचनाओं का इसमें भंडार है, सब कुछ है लेकिन सूचनाओं के भंडार को
- 28:06क्या करें? जो सूचनाएं सुनके व्यक्ति के सिर
- 28:11में दर्द हो जाए जो तुम्हारी तकलीफों को बढ़ाता है 24 घंटे तुम
- 28:19आँख गड़ाई यहाँ रील से देखते रहते हो यकिस दुष्ट ने आदत डाल दी तुम
- 28:25रील से। रील से तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई
- 28:29उत्थान पतन आता है, कुछ भी तो नहीं होता, सिर्फ तुम्हारा वक्त
- 28:37व्यय होता है और तुम्हारे दिमाग में भूसा भरा जाता है।
- 28:45और तुमने सवाल बड़ा गजब का किया है, माँ बाप ने गले में ढोल डाल
- 28:51दिया, पीटना पड़ेगा, बिल्कुल ठीक पीटना पड़ेगा और उनके पास है कुछ
- 28:56है नहीं, बस मेरे को जन्म दे दिया और सभी चाहते हैं कि हमारी।
- 29:03पैदा हो तो श्रवण कुमार पैदा हो, प्रेम किसी को है नहीं।
- 29:14अरएन्ज मैरिज जात के गोत्र के शादी करते हो तुम?
- 29:25परमात्मा की चीज़ जिससे आदमी बढ़ना चाहता है खुद बखुद प्रेम
- 29:31तुम में जन्मन है, अगर प्रेम आ जाए तो तुम खुद बंधना चाहोगे, वो
- 29:38है नहीं। तो अरएन्ज मैरिज तुम करते हो?
- 29:42नाम पूछ लिया गोतर पूछ लिया क्वालिफिकेशन पूछ ली और दो चार
- 29:48आंकड़े होते हैं। वो तुमने पूछ लिया ठीक फिट फिट हो
- 29:53गई बात और तुमने शादी करते हैं तो ध्यान रखना शादी की?
- 30:01रिप्लेसमेंट सहमति के साथ होनी चाहिए।
- 30:06इसमें माँ बाप का कुल जोड़ लें। माँ बाप ने जन्म दिया तो माँ बाप
- 30:12सिर्फ अपनी जिंदगी भर की कमाई बच्चों में बांट दे अपना हिस्सा
- 30:18रख ले। यही होगी व्यवस्था कारगर पर अपने
- 30:25मरने के बाद किसी एक को ना दे जीतने बच्चे हैं उनमें डिवाइड हो
- 30:30जाए पहली बात तो क्योंकि तुमने सहमति नहीं ली तुम को ना?
- 30:37बच्चों को पैदा करने से पहले बच्चों की सहमति लेना आवश्यक होता
- 30:41है। वो तुम ले नहीं सकते और बच्चा
- 30:44सहमति दे नहीं सकता। जब नैसर्गिक रूप से बच्चे पैदा हो
- 30:49गए, पता नहीं लगा किसी अंधेरे कोने में बच्चे जन्म गए, क्या
- 30:56किया जाए? कोई हल भी नहीं।
- 31:00फिर अब क्या व्यवस्था हो? अब व्यवस्था हो की कम से कम जो
- 31:03तुम्हारे पास है वो तो दे दो जितना तुम मार्गदर्शन कर सकते हो
- 31:10मार्गदर्शन कर दो। इसलिए भविष्य में अगर।
- 31:16जल्दी ही समाज बदलने वाला है। भविष्य में सिर्फ संतान पैदा करने
- 31:24की काबिलियत बुद्ध पुरुषों में होगी।
- 31:29बुद्ध जो जीना जानता है, जो मरना जानता है।
- 31:34जो जीने के तरीका जानता है, जो मरने के तरीका जानता है मरना और
- 31:41जीना ये दो नहीं एक ही धागे के दो छोर बस इनको जानना आना चाहिए,
- 31:49तुम्हारी व्यवस्थाएँ समाप्त होनी चाहिए।
- 31:52शादी के बंधन खत्म होने चाहिए तुमने बहुत से बंधन बंधनों के नाम
- 31:58पे खड़े कर दिए। उसमें सबसे बड़ा समाज जाति,
- 32:03प्रथा, सबसे सबसे गन्दी व्यवस्था तुम्हारे समझ के।
- 32:14जीस समाज से व्यक्ति हर वक्त कांपता है, क्या कहेंगे लोग?
- 32:21क्या कहेंगे लोग? हर व्यक्ति समाज से गिरता है जबकि
- 32:29समाज से प्रेम हूँ। तुम समाज से डर रहे हो, समाज इतना
- 32:37सुंदर होना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति समाज के नाम से प्रेम
- 32:41करे। डरे ना लेकिन तुम्हें तो समाज के
- 32:46नाम से। समाज ने इतनी गंदी प्रथाएँ रच दी
- 32:51हैं, उसके नाम से भय आएगा जब तुम हर वृत्ति को दबाने की चेष्टा
- 32:59करोगे और तुम्हारा समाज कहेगा, इस वृत्ति को भी दबा लो, इस वृत्ति
- 33:03को भी दबा लो। तो फिर कैसे लोग पैदा होंगे, कैसे
- 33:08बच्चे पैदा होंगे? दबे हुए बच्चे पैदा हुए दबे हुए
- 33:14क्योंकि तुमने दबा दिया सबकुछ मूढ़मती के बच्चे पैदा होंगे।
- 33:21मैं कहता हूँ, बुद्धों को बच्चे पैदा करने की इजाज़त होनी चाहिए,
- 33:26सिर्फ आम व्यक्ति को बच्चे पैदा करने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए
- 33:35और इजाज़त कौन दे? इजाज़त खुद ही आपस में सहमति
- 33:43सहमति से मियां बेबी शादी करें, सहमति से ही अग्रीमेंट करें, कल
- 33:52को बिगड़ भी सकती है और बिगड़ जाएगी क्योंकि मैं जानता हूँ
- 33:56अरेंज्ड मैरिज कहाँ तक निभूति। जब तक तुमने अंग नहीं खोली, अपने
- 34:04संकोच मत करो अलफाज़ खुल के पूछा है तो अलफाज़ खुल के सुन जब तुम
- 34:17उखड़ जाओ, दोनों एक दूसरे के आगे उखड़ जाए।
- 34:23तो छुपाने को कुछ ना बचेगा। इसी को तुम प्रेम कहते हो, मेरी
- 34:30बात को गौर से समझना और गहराई से सुन तुम एक दूसरे के उगड़े नहीं,
- 34:38कुछ उसने छुपा लिया है। बस लबों पे हँसी ले आया है कुछ
- 34:43उसने छुपाया कुछ गारों पे लाली ले आई है ऐसे तुम्हें प्रेम हो गया
- 34:50है ये प्रेम कितने दिन टकेगा कितने दिन होंठों की हँसी टिकेगी
- 34:57कितने दिन गालों की लाली टिकेगी? आपस में अग्रीमेंट होना चाहिए।
- 35:06बच्चे पैदा हुए हो जाती है। मूर्ख व्यक्ति बच्चे पैदा करे तो
- 35:13ऐसा ही होगा प्रबुद्ध व्यक्ति को पैदा बच्चे पैदा करने की।
- 35:21मिन्नत करनी चाहिए की तुम बच्चे को मूर्ख व्यक्ति, बच्चे,
- 35:28प्रबुद्ध व्यक्ति, बच्चे पैदा करेगा तो उनकी समझ डीएनए की तरह
- 35:33उनकी क्योंकि डीएनए का अंश तो उसमें आएगा।
- 35:39आगे आगे प्रबुद्ध स्त्री भी होनी चाहिए।
- 35:41गार्गी जैसे भारतीय जैसे प्रबुद्ध स्त्रियां भी होनी चाहिए।
- 35:48विद्योत्मा जैसे तो बच्चे वैसे ही पैदा हो गए।
- 35:58और तुम मुझसे पूछना चाहते हो की बाबा तुम्हारी क्या राय है?
- 36:02मैं कहता हूँ बच्चा ही ना पैदा करो क्योंकि जीस समाज में तुम
- 36:06बच्चों को जन्म दोगे वो समाज बच्चों को सहने योग्य है नहीं उसे
- 36:17तुम्हारे डिक्टेटर। बर्बाद कर देंगे, अपनी संस्करणों
- 36:22के लिए उपयोग करेंगे। उनका नस्ली भेदभाव फैला के या
- 36:29धर्म का भेदभाव फैला के दोनों को कुमुद मार देंगे।
- 36:35हिंदू मुसलमान करके मारते थे, सिख ईसाई करके मारते थे इस दुनिया से
- 36:42अभी दूर रहो अभी बच्चे से पैदा करो अभी दुनिया उस मुकाम पे आई
- 36:46नहीं जहाँ बच्चे पैदा किए जा सकते हैं, फिर भी अगर हो जाए क्योंकि
- 36:54बच्चे तो हो जाते हैं। तो फिर इस तरह का अग्रीमेंट होना
- 36:58चाहिए। जैसे मैंने आपको बताया क्योंकि
- 37:02प्रेम से बच्चा नहीं आया, प्रेम से आपस में तुम नहीं आये, तुमने
- 37:07शादी भी तो प्रेम से नहीं की, वो भी तो अरएन्ज थी।
- 37:11बच्चा भी प्रेम से नैचुरली नहीं आएगा।
- 37:15बच्चा भी किन्हीं उन क्षणों से आएगा, परम बेहूशी के हैं, जो परम
- 37:23मूर्छ तक है और मूर्छ समय से जागरूकता नहीं निकल सकती।
- 37:32इस बात का ध्यान रखना आप। मोरू चिंता में से जागरूकता नहीं
- 37:37निकल सकती। डार्क में डार्कनेस में से उजाला
- 37:42नहीं आएगा। ऐसे ही बच्चे पैदा होते हैं।
- 37:52एक वक्त ऐसा आएगा। तुम अपने बच्चों को ले किस लिए
- 37:55जन्म देना चाहते हो की पुतिन तुम्हें जन्मा दे कहें, जन्म हमे
- 38:04चाहिए, रशिया को चाहिए या एक वो उत्तर कोरिया का वादरी बैठा है आज
- 38:11हर किसी की जेब में। परमाणु संयंत्रों के रिमोट हैं और
- 38:21वह मूर्ख कहता है कि मेरे तो टेबल के ऊपर रखा रहता है परमाणु बटन
- 38:29मेरे टेबल पे होता है। अब देखो जिसके ऊपर ये राज़ कर रहा
- 38:34है, करोड़ों की आबादी है, उसमें रुकें।
- 38:38उन्होंने क्या किशोर किया हमें बस जनता जागती नहीं।
- 38:45अगर जनता जग जाए तो तुम्हारे पास कितने हैं, कितने सैनिक हैं?
- 38:52राजा में कितनी ताकत है? लेकिन तुम जान बूझ के मुक्त नहीं
- 38:58होना चाहते क्योंकि तुम यूनाइट नहीं होते है यही तुम्हारी कमी है
- 39:05और आज नहीं कल तुम्हे यूनाइट होना पड़ेगा।
- 39:10यूनिटी ही तुम्हारी स्ट्रेंथ बनेगी और यूनिटी ही तुम्हें
- 39:14लिबरेट करेगी। इस संसार की व्यवस्था तो ऐसा होनी
- 39:20चाहिए और तानाशाहों को तो पैदा ही न होने दो, जब व्यक्ति कोई
- 39:27तानाशाही करे। उसको उसी वक्त संभाल लो।
- 39:31तानाशाह के लक्षण आते ही जैसे हम पागलपन के लक्षण आते ही उसको
- 39:37सैक्रीट के पास ले के जाते हैं कि देखिये हमारा बच्चा ऐसी हरकतें कर
- 39:41रहा है, सामान्य से परे हटते हैं, जैसे ही तानाशाही के लक्षण होते
- 39:48हैं। किसी ने कुछ कहा और तुमने जेल में
- 39:51डाल दिया। ये तानाशाह कि लक्षण है प्रथम
- 39:53लक्षण है। उसके बाद वो तानाशाह का युग आता
- 39:57है जब इमरजेंसी कोई बोल बोल नहीं सकता, कोई लिख नहीं सकता, कोई
- 40:02अखबार में छाप नहीं हो सकता। ये तानाशाही का विकृत रूप है।
- 40:08इससे पहले के वो मुकाम आएगा। तुम इसी मुकाम पे संभाल लो
- 40:14क्योंकि जीस व्यक्ति को हड्डी चूसने की आदत पड़ गई।
- 40:22हड्डी में होता तो कुछ भी नहीं लेकिन अपनी ही मसूड़ों के अंदर।
- 40:28वह गांव कर देती है और गांव में से रिश्ता है।
- 40:30खून और खून होता है, स्वादिष्ट नमकीन और जीसको खून लग जाता है
- 40:39जीव को वह फिर ये नहीं देखता कि ये हड्डी में मांस है कि नहीं वह
- 40:45हड्डी को ही चबाना शुरू कर देता है।
- 40:47ऐसी ही है राजनीतिक व्यवस्था राजनीति में कुछ नहीं होता है,
- 40:52हड्डी है, कुत्ते की हड्डी का स्वाद है, बस इसमें पता नहीं
- 40:57क्योंकि कुत्ता उसमें समझ नहीं होती, विवेक नहीं होता इसलिए
- 41:04कुत्ता उस हड्डी को चूस नहीं होता।
- 41:05उसे पता नहीं कि मेरे ही मसूड़ों में से निकला हुआ खून और तुम कभी
- 41:11हड्डा रोड़ी का कुत्ता देखना उसके भीतर मांस नहीं होता।
- 41:15उसकी सारी बाहर की हड्डियाँ ही हड्डियाँ होती हैं।
- 41:19ढांचा ढांचा होता है क्योंकि जब मांस खाये रोटी खाये तो कोई मांस
- 41:24बने। तो ये कुत्ते के गड्ढे का स्वार्थ
- 41:29है। राजनीति इसको समझदार व्यक्ति
- 41:37गद्दीसीन होना चाहिए, बड़ी खतरनाक व्यवस्था है।
- 41:41आज डर लगता है इस अवस्था से। इस व्यवस्था को जितनी जल्दी तुम
- 41:47बदल सको, बदलो परम कल्याणकारी होगा, आने वाली जैन निरीक्षण
- 41:57तुम्हारा नाम लेकर तुम्हें धन्यवाद देगी।
- 42:02आज लोगों के दिमाग विकृत किए जा रहे हैं।
- 42:05गलत इतिहास पढ़ा के क्यों? क्योंकि इन व्यक्तियों को कुत्ते
- 42:12की हड्डी का स्वाद लग गया है मेरी बातों को समझदारी से समझने की
- 42:19चिष्टा करनी, विवेक से इसकी विवेचना करना।
- 42:26इसे एनालिसिस करना, इसका सत्य देखना और फिर उसके बाद अगर कोई
- 42:32सवाल हो तो मुझसे पूछना तुमने कह दिया पुत्र के माँ बाप ने गले में
- 42:40डाल दिया ढोल। अब तो बजाना ही पड़ेगा ठीक कहा
- 42:45तुमने माँ बाप को बच्चे की रजामंदी के साथ बच्चा पैदा नहीं
- 42:53किया जा सकता, ये संभावना ही नहीं है।
- 42:57बच्चा तो पैदा हो जाता है बस लेकिन बच्चा पैदा हो गया।
- 43:03ठीक बच्चा पैदा हो गया, उसके बाद मोह हो जाता है।
- 43:07बच्चा मरना नहीं चाहता, अब ये नया जाल हो गया।
- 43:13बच्चा मरना नहीं चाहता जो तुमने पैदा कर दिया जिसने जो तुमने पैदा
- 43:17नहीं किया, जो वीर है तुमने वह किया गंदे नाले में।
- 43:23जो राज़ तुमने बहाती गंदे नाले में और ना तो तुमने अपने सहसरार
- 43:30में जड़ नहीं दी ताकि वो विवेक अपनी चरम ऊंचाइयों को छू ले, ये
- 43:36तुमने नहीं किया गंदे नाले में बहा दिया और बच्चे बहा दिए तुमने।
- 43:42लेकिन कोई एक आध अंडाण सुकर्ण मिला और बच्चा पैदा हो गया तो
- 43:46तुम्हारी इच्छा से जैसा कोई उतरा वैसा उतर गया।
- 43:54लेकिन कम से कम इतनी व्यवस्था तो करो, अब उसको जन्म दे दिया गया
- 43:58है। तो तुम्हारे पास जो कुछ है वो तो
- 44:07उसको दे दो, वो तो उसको तरसाओ ना और फिर वह बच्चा जो दूसरे भाई को
- 44:16मिल रहा है। और एक भाई को नहीं मिल रहा एक भाई
- 44:21के साथ तुम सभी क्रैश करते हो। एक बच्चे के ऊपर छोटे बच्चे के
- 44:27दिमाग कितना फर्टाइल होता है, कितना सहनशील होता है।
- 44:33यह है खुंड व्यक्ति जो 60607070 साल के हैं।
- 44:38यह अपनी परिपक्वता जीवन के अनुभव को साथ लिए अगर उस बच्चे के ऊपर
- 44:43हावी हो जाएंगे तो वह पागल ही होगा और क्या होगा?
- 44:47और फिर पागल व्यक्ति जो किया करता है वो योग करेगा।
- 44:51ऐसी तुम्हारी व्यवस्था है। सभी व्यवस्था को आज बदलना होगा।
- 44:57समाजिक हों, राजनीतिक हों, धर्म के नाम पर जिसने वो तल छुआ नहीं,
- 45:06वो तल की बात कर रहा है और वह खुद भी नहीं जानता कि वह उस तल को छुए
- 45:14बिना। जो भी दुखी व्यक्ति को सुझाव देगा
- 45:17वो गलत होगा, ठीक नहीं होगा क्योंकि जब तुमने खुद ही अपना
- 45:26भ्रम नहीं मिटाया, तुम दूसरे का भ्रम कैसे मिटा पाओगे?
- 45:32तुम्हे इतना जिगरा ही नहीं हुआ? कि तुम खुद अपना ही भ्रम मिटा दो,
- 45:39तो जो अपना ही भ्रम नहीं मिटा सका वो तुम्हारे दर पे जो आके प्रश्न
- 45:44पूछेगा उसका भ्रम तुम कैसे मिटाओगे घर लेकिन ये प्रश्न
- 45:49तुम्हारी खोपड़ी में आता है। समझाने की चेष्ठा जरूर कर सकता
- 45:55हूँ लेकिन अगर तुम समझे जाओ तो ठीक है, उपाय करो क्योंकि जैसी भी
- 46:02उपलब्धि है अब डॉक्टर जैसा उपलब्ध होगा उससे वैसा ही उपचार लेना
- 46:07पड़ेगा। क्या करें?
- 46:10लेकिन तुम्हें मैं कहता हूँ इन आचार्यों को इससे पहले किसी की
- 46:16ज़िन्दगी को तुम मार्गदर्शन करो, ये तो देखो कि कहीं ये ज़िन्दगी
- 46:22उनकी तुम खराब तो नहीं करनी चाह रहे?
- 46:26प्रकृति की बड़ी सूक्ष्म व्यवस्थाएँ।
- 46:31और व्यक्ति उसको सारी व्यवस्था को ठीक से समझनी पड़ सकती है।
- 46:37जैसे साइंस 1 दिन नीती नीती कहेगी।
- 46:39आज तो धर्मग्रंथ नीती कहते हैं। 1 दिन साइंस भी नीती नीती कहेगी।
- 46:46नहीं जी नहीं जी नहीं खोजा जाएगा, नहीं खोजा जाएगा।
- 46:51ऐसे ही आचार्यों को भी नीती नीती करनी चाहिए।
- 46:55ऐसे मार्गदर्शन नहीं देने चाहिए। मैंने दिखे हैं ऐसे लोग
- 46:59मार्गदर्शन देते हैं जो मैं समझता हूँ कि आगे चलकर ये बड़े दुख दाई
- 47:05सिद्ध होंगे इनके लिए, लेकिन ये है कि किसी लोग वश बिलकुल बिलकुल
- 47:17बिलकुल मैं इस पाठ को स्पष्ट बोलूं।
- 47:20किसी लोग वश निहित स्वार्थ हेतु ये काम करते हैं।
- 47:25शादी नहीं की तो मैंने प्लानवादी कर दिया।
- 47:30प्रेम हुआ नहीं, बच्चे पैदा नहीं करेंगे।
- 47:36यह सुंदर व्यवस्था है, बच्चे न पैदा करो।
- 47:40मूर्ख खता में पैदा करने की बजाय न पैदा करना अच्छा, लेकिन अब तुम
- 47:50इस ढोल को बेटा बजाना पड़ेगा बस मैं तो सिर्फ उस माँ बाप से
- 47:56गुजारिश करता हूँ। अगर मेरी आवाज तुम्हारे कानो में
- 48:00पड़ जाए तो तुम बच्चों को पैसे रुलाने के लिए पैदा न करो।
- 48:06तानाशाहों के हाथों में सिर्फ बलि देने के लिए बलिदान नहीं करना,
- 48:12बलिदान तो सुईछा से दिया जाता है। बलि दूसरे की इच्छा से दी जाती
- 48:17है। तुम पशुओं की बलि देते हो, लेकिन
- 48:20भगत सिंह ने बलिदान दिया था गुरु तेग भारत ने बलिदान दिया था।
- 48:26गुरु अर्जुन देव ने बलिदान दिया था तो बच्चों को बलि की भेंट ना
- 48:33चढ़ाओ। बलिदान देना पड़े तो ये दें ऐसी
- 48:40इनके भीतर विवेक पैदा हो रहा है। तुम आज बच्चों को बलि का बकरा बना
- 48:46रहे हो कोई पुतिन रशिया के लिए बलि का बकरा बना रहा है।
- 48:52फिर तुम कल को इस बच्चे को क्या जवाब दो की अगर बच्चा कहेगा कि
- 48:56यही संसार दिखाने के लिए पिताजी, माताजी तुमने हमें पैदा किया।
- 49:03इस संसार में तो बदसूरती और बदबू भरी पड़ी है, इसमें तो सड़ाध
- 49:08मारती है। इसकी प्रत्येक अव्यवस्था में चाहे
- 49:11धार्मिक हो, चाहे सामाजिक हो, चाहे राजनीति को बदबू आती है, यह
- 49:17कोई भी स्वच्छ नहीं है। क्या तुम ऐसी ही धरती हमें दिखाना
- 49:21चाहते थे? तुम क्या जवाब दोगे तुम्हारे पास
- 49:26कोई जवाब नहीं होगा, संभल जाओ। अभिवक्ता है, नहीं तो बच्चे पैदा
- 49:32करना बंद कर दो बच्चे पैदा करो तो फिर सीस को तरीके पर रख दो।
- 49:40एस अपने बच्चों के लिए इंसाफ पैदा करके जाओ।
- 49:52बच्चों को ऐसी धरती मत दिखा देना जैसी आज है, न सांस लेने को हवा,
- 49:59न पीने को पानी स्वच्छ, न उपजाऊ धरती स्वच्छ कुछ भी तो स्वच्छ
- 50:06नहीं सब मिलावटें। ऐसी धरती बच्चों को दिखाने के लिए
- 50:11बच्चों को पैसा मत करना, रुक जाना, ये नरक दिखाने के लिए नहीं
- 50:18जीस सब वक्त तुम्हारी धरती स्वर्ग बन जाए तो फिर बच्चों को दिखाना
- 50:22कि देखो बेटा बेटी ये धरती का स्वर्ग है, अब इसका तुम आनंद
- 50:28मानो। इसके प्रेम की प्रकृति में विहार
- 50:32करो, तब मज़ा आए समय बच्चे जनमने का बच्चे अंधेरे में ही पैदा होते
- 50:39हैं। मैं जानता हूँ रोशनाई में बच्चे
- 50:43पैदा नहीं होते। लेकिन संख्या तुम आज तो निर्धारित
- 50:47कर सकते हो इससे पहले तुम नहीं कर सकते थे आज तो तुम संख्या
- 50:52निर्धारित कर सकते हो ना तो बच्चों को संख्या को निर्धारित कर
- 50:59मैंने कहा दो बच्चे को रखा जनसंख्या विस्फोट न हो इसलिए।
- 51:05लेकिन अगर ऐसा ही धरती का वातावरण बना रहे तो मैं कहूंगा कोई बच्चा
- 51:10न पैदा करो, शादी करो, उसमें कोई बंधन न रखो, अरेंज मैरिज करो, कोई
- 51:17बात नहीं, कुछ शर्तें हो लो, कल कल को बच्चे भी पैदा होंगे।
- 51:22फिर वो बच्चा कौन रखेगा? माँ रखेगी, पिता रखेगा, हक तो
- 51:29माता का बनता है, पिता का हक तो नहीं बनता, लेकिन फिर भी जो
- 51:35तुम्हारी कमिट्मेंट कांट्रॅक्ट में हो जाए वो लिखित ले लो।
- 51:40और शादी करते वक्त ये लिखित प्रमाण पत्र जाके अदालतों में
- 51:46जाके प्रमाणित करवा लो। क्या हम शादी कर रहे हैं?
- 51:49हमारी इस व्यवस्था के अंदर कांट्रैक्ट के अधीन हम शादी कर
- 51:53रहे हैं। जब ये व्यवस्था लागू हो जाएगी तो
- 51:56ये व्यवस्था कुछ ठीक होगी। बस ऐसा समझना।
- 52:00बिलकुल ठीक व्यवस्था तो तुम पैदा नहीं कर पाओगे, वह तो कोई बुद्ध
- 52:04पुरुष मैंने तुम्हें याद करा दूँ एस्ट्रल ट्रैवलिंग में मैंने एक
- 52:11ऐसा ग्रह देखा जहाँ पे बड़ी सुंदर व्यवस्था है।
- 52:16वहाँ राजनीति आएगी। जो समझदार लोग हैं वो व्यवस्था
- 52:21करते हैं जो खेती कर सकता है, खेती करता है, जो बाघवानी कर सकता
- 52:27बाघवानी करता है, जो पढ़ाई करवा सकता है, पढ़ाई करवा रहा है।
- 52:32जो ट्रीटमेंट दे सकता है वो चिकित्सा दे रहा है, डॉक्टर बना
- 52:35हुआ है, प्रत्येक व्यक्ति को उसकी काबिलियत के अनुसार काम सौंपा गया
- 52:38है। वहाँ एक चीज़ नहीं है सिर्फ और
- 52:43उसी चीज़ में ये धरती मार खा गई। क्या करेन्सी नहीं है इस करेन्सी
- 52:50ने? बहुत से बलिदान दे दिया है, किसी
- 52:56को भौंके मार दिया, किसी को नंगे मार दिया, किसी को बिना छत के मार
- 53:03दिया, कोई ज्यादा खाने से मर गया, कोई बिना खाने से मर गया।
- 53:10किया है करंसी ये कहते हैं माया महाठगनी हमिझानी करंसी ने जीतने
- 53:19जवानों को निगल लिया उतनी तुम्हारी।
- 53:22कोई भी व्यवस्था नहीं। निकल पाई इस करंसी को।
- 53:26जितनी जल्दी। हो अटक?
- 53:32धरती पे इतना होता है। संसार के लिए खाने पीने मौज
- 53:37उड़ाने के लिए एक सफ्फिशिएंट है। धरती को बचा लो।
- 53:44धरती को बचा लो, मूलभूत समस्याओं को बचा लो।
- 53:48बाबा नानक ने जपजी में कहा था ये तीन चीजों को बचाना आवश्यक है।
- 53:55पवन पिता पवन, गुरु, पानी, पिता, माता धरती, महत पवन गुरु है उसके
- 54:06मार्गदर्शन। के बिना कुछ नहीं हो।
- 54:07सकेगा। 10 मिनट श्वास न लो मर चाव, पवन
- 54:13गुरु पानी पिता पानी पिता की तरह है माता धरती महत धरती माँ है,
- 54:21माँ भी कहते हैं। दिवसरत दुई दाई दाया खेल सगल जगत
- 54:30चंगेइयां बुरइयां प्राच्य तरमदुर। कर्मिं अप्पू अपनी।
- 54:40के निर्णय के दूर। जिन नाम से आया।
- 54:46गए मशककत काल नानकते मुख उजले कीर्ति छुट्टी नार।
- 54:55ऐसे गुरु पैदा करो जिनके। मुख उजले हो मुख, उजले का मतलब।
- 55:03दिल में लोग ना शिवर ना लगाएं ये पाखंडी ना फैले।
- 55:11कामना ही ना हो उनके भीतर। श्रेय लेने की कमना भी ना हो मान।
- 55:17सन्मान। शौहरत ये सबसे बड़ा दुश्मन है।
- 55:32पुत्र जिंदगी को जियो जैसा। भी हो सके जैसे तैसी ही गुजर
- 55:37जाएगी और तुम ख्याल। रखना कि तुम अपने।
- 55:42बच्चे को ऐसे ही जन्म देना अगर तुम्हारे पास कुछ उसे देने के लिए
- 55:49ऐसा ना हो। ये।
- 55:52धरती ऐसी धरती मत दिखाना। अपने बच्चों को ये गंदी धरती, ऐसी
- 55:57वायु। मत।
- 55:59सांस लेने के लिए छोड़ना अपने बच्चों को ऐसा पानी मत बला देना
- 56:03अपने बच्चों को। इस धरती पे आज के।
- 56:08दिन तुम जन्म मत। सभी चीजें विकसित हो गई और
- 56:15राजनीतिज्ञों और धनपतियों ने बेड़ा गर्क कर दिया है।
- 56:25विश्व खान। जितनी जल्दी हो सके।
- 56:30इनसे छुटकारा? प।