Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 May 25 - पहली बार मैं हार गया, तुम्हारे प्रश्न के आगे मैं नतमस्तक हूं! Power of innocence! Must Listen
Transcript
- 0:00अनुपम चौधरी बाबा जी प्रणव आपने हजारों प्रवचन किए।
- 0:19आपने हजारों प्रवचन किये क्या एक प्रवचन ऐसा भी हो सकता है जिसमें
- 0:30सिर्फ सत्य ही बोला जाए? सत्य के सिवा कुछ न बोला जाए?
- 0:44अगर है तो कृपया एक प्रवचन ऐसा बोलें जिसमें सिर्फ सत्य बोला जाए
- 0:56और सत्य के सिवा कुछ न बोला जाए। संयोग संयोग नी में कुफर कमाया,
- 1:14संयोग नी में कुफर कमाया, जेढ़ा बोल्या।
- 1:23नहीं जा सकता मैं बोल बखाया सयों नी मैं कुफर कमाया जेड़ा बोला
- 1:37नहीं जा सकता, मैं बोल बखाया। दो बातों से इसे स्पष्ट करना
- 1:52होगा। सबसे पहली बात अगर तुम सत्य के
- 2:03पास पहुंचते हो तो मन हो जाते हो। और अगर तुम शक्ति को बोलने की
- 2:14चेष्टा करते हो तो वह मौन का आलम खो जाता है।
- 2:24कैसे प्रस्तुति कर पाओगे आप? जब आपने बोतल छू लिया, यंत्र तो
- 2:35है जीवा है, बोलने को आवाज है, गला है, सब है, अनुभव है।
- 2:48लेकिन सत्य के तल पर जाकर बोला नहीं जा सकता।
- 2:56यह बड़ी अजीब दुविधा है। संतों की और सत्य को बोलने की
- 3:04चेष्टा करोगे। तो आपको शक्ति से ऊपर उठना होगा।
- 3:12वो तल जहाँ जाकर आप मौन हो गए वो तल छोड़ना पड़ेगा और जैसे ही आपने
- 3:22वो तल छोड़ा। आप उसको परिपूर्ण रूप से नहीं कह
- 3:26पाओगे, वक्तव्य आपके ढीले हो जाएंगे।
- 3:33संयोग ने में कुफर कमाया, मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया।
- 3:43जीरा बोला नहीं जा सकता मैं बोल बकाया बड़ी दुविधा है, बोले शाख्य
- 4:02वहाँ जाकर मन हो जाता है। ऐसे ऐसा कह लो, वहाँ इतना आनंद हो
- 4:13जाता है जुबां कहाँ फिरती है जुबां हिले में हिचकिचाती है।
- 4:31सभी संत जो सत्य तक पहुंचे उन्होंने यही पाया बोलना होता है
- 4:42अज्ञानता में ज्ञान में बोला नहीं जा सकता।
- 4:52जो ज्ञानी कहे कि मैंने बोल दिया यकीन मत करना, पक्का है कि वह
- 5:00नहीं जानता, जो ज्ञानी कहे, हाँ मैं बोल दिया वो कुफ्फर कमा रहा
- 5:09है। सहयोग में को फर कमाया छिड़ा बोला
- 5:15नहीं जा सकता मैं बोल पकाया बड़ा अजीब प्रश्न किया है तुमने?
- 5:32अनुपम लौस्य को ज्ञान हो गया था, लौस्य तल पे पहुँच गया था और उससे
- 5:50तल पर पहुंचने के बाद। खामोशी हो जाती है।
- 6:03उस तल पे पहुंचने वाले व्यक्ति का ये लक्षण है।
- 6:07वह गूंगा हो जाता है। कबीर ने कहा।
- 6:17क्या कहूं उसके बारे में जों गोंगा गुड़ खाई के कहे कौन
- 6:25मोक्षवात गोंगे के पास जीवा तो है रस उठाने के लिए।
- 6:34ये तो पता कि गुड़ कितना मीठा, लेकिन बोलने के लिए वो जुबान कहाँ
- 6:45से लेके आए? जो उस रस को शब्दों में डाल सके,
- 6:55वह जुबान ही तो नहीं है, खो जाती है।
- 7:02चुप्पी का दूसरा नाम सत्य है या ऐसा समझलो?
- 7:08कि सत्य में तुम उस जगह पहुँच जाते हो जहाँ जो मिलता है वह
- 7:14अकथनीय है, शब्दातीत है अक्षरों में नहीं डाला जा सकता किसी तरह
- 7:27समझ लो। लेकिन एक बात सुनिश्चित है कि अगर
- 7:32मैं बोलता हूँ और दावा करता हूँ कि बोला गया वह सत्य तो मैं
- 7:39अज्ञानी हूँ बस इस बात को आप लिख लेना।
- 7:46अपने हृदय की आंतरिक गुफाओं में छुपा लेना, इस बात को जो बोला जाए
- 7:59वह असत्य। इसलिए मैं कभी सत्य नहीं बोला।
- 8:06मैं जो बोला झूठ बोला। झूठ के सिवा कुछ नहीं बोला सदा
- 8:15सत्य बोला 1000 बोला 2000 वीडियो बोला कितना भी और बोल दो सत्य को
- 8:22नहीं बोल पाऊंगा जो बोलेंगे। बोलते ही असत्य हो जाएगा।
- 8:31बड़ी दुविधा है ये तो तुमने बड़ा अजीब प्रश्न किया है पुत्र तुम्हे
- 8:41क्या बताऊँ? जिसकी बात करते हैं उसकी बात करने
- 8:59के लिए शब्द चाहिए, इशारे चाहिए लेकिन काश।
- 9:07वह शब्दों में आ जाता, काश वह इशारों से समझाया जा सकता, न उसके
- 9:18लिए शब्द हैं, न उसके लिए इशारे हैं तो लव जी को ज्ञान हो गया।
- 9:27वह चुप हो गया। हाँ, लक्षण है जो पहुँच गया वहाँ
- 9:41किसे हम शक्ति कहते हैं बाकी सब झूठ है।
- 9:52वह चुप हो गया। यह इसका लक्षण है और वह जो पहुँच
- 10:02गया। अगर बोलेंगे तो वह जानेगा नहीं
- 10:05बोल पाया जो कहता की मैं बोल पाया।
- 10:11बस क्षण समझ लेना कि वह अज्ञानी नहीं हुआ, वह अज्ञानी क्योंकि
- 10:21उसके लिए कोई शब्द नहीं है। यह शब्दों में डाला ही नहीं जा
- 10:30सकता अफसोस। मैं उसी शब्दों में डाल देता तुम
- 10:39एक प्रवचन की बात करते हो पुत्र काश मैं दो शब्द बोल पाता काश मैं
- 10:49दो शब्द बोल पाता। जिसमें सत्य आ जाता बस यही तो
- 10:56मजबूरी है। तुम एक प्रवचन की बात मत करो, वह
- 11:06तो दो शब्द भी नहीं बोले जा सकता। गुड़ खा लिया बड़ा मीठा।
- 11:17कहूं कैसे? बहुत मीठा और वो रस जो आज तक एक
- 11:25बूंद भी न चखा था और आज तो उसका पूरा सागर उसमें अटकेलिया कर रहा
- 11:32है। संत।
- 11:37कैसे व्याख्यान करें? चुप हो जाने के सिवा और कोई रस्ता
- 11:41नहीं इस संसार के लिए इतना वक्त जाया किया।
- 11:57इस संसार के लिए इतने बढ़ के मिल भी जाता है और नहीं भी मिलता,
- 12:11लेकिन मिल जाता है। तो भी नफरत हो जाती है उस संसार
- 12:16से क्योंकि मिल के भी तो कुछ नहीं मिलता और अगर नहीं मिलता संसार तो
- 12:27भी अंगूर खट्टे में रह जाता है, क्योंकि स्वाद न चखा।
- 12:34वह दूर रह गया। यही दुविधा उस सत्य की नहीं बोल
- 12:44पाऊंगा पुत्र जिसकी बात करते हो? उसको ना भावनाओं से, ना विचारों
- 12:56से, ना शब्दों से, मैं प्रकट नहीं कर पाऊंगा, मुझे क्षमा करूँगा
- 13:03गुजरे। हैं आज।
- 13:25नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से गुजरे हैं आज।
- 13:46में। हम उस मुकाम।
- 13:54से नफरत सी हो गई। है।
- 14:04मोहब्बत के नाम से गुजर रहे हैं आज ईश्वर।
- 14:26यह अकथ नहीं है नहीं कहा जाएगा, पुत्र कुछ और पूछो यहाँ मैं हार
- 14:38गया। यहाँ जीत की कोई संभावना नहीं
- 14:45हैं। हाँ सत्य से बाहर जाते झूठ जितना
- 14:53चाहे बलवा लो, मैं बोलता चला जाऊंगा तुम थक जाओगे सुनते सुनते
- 15:00मैं बोलते बोलते ना थकूंगा। बस यही झूठ की करामात है।
- 15:12झूठ तो जितना चाहे बल वालो, मैं बोलता ही चला जाऊंगा, लेकिन जो
- 15:21प्रश्न किया है पहली बार में हार गया।
- 15:28पहली बार तुम्हारे प्रश्न के आगे मैं ना समझ सकूँ उसके लिए एक
- 15:40प्रोचेन कह दो। सत्य के लिए एक प्रवचन कह दो सत्य
- 15:48पे जाकर क्या होता है बड़ा मुश्किल बात है ये बिल्कुल ऐसा जो
- 15:57बां कट जाए तो थोड़ी शायरी सुना दो, मतलब कैसे हो पायेगा?
- 16:06शायरी सुनाने वाली जुबा कट गई कौन सुनेगा तुम्हें शायरी वो जुबां ही
- 16:17ना रही जो शायरी सुना पाती। वह कर नहीं गया।
- 16:28वह इन्स्ट्रुमेंट ही छीन लिया गया।
- 16:31वह बेकार हो गया, नकारा हो गया। अब वह काम नहीं करेगा।
- 16:43बड़े मज़े की बात है, शांति तो बहुत है।
- 16:58कल एक छोटी सी बिटिया ब्रह्मचर्य के बारे में समझा रही थी मुझे
- 17:04दुखो। आँखों में अश्क उम्र आए छोटी सी
- 17:12उम्र की बच्ची 2022 साल की रही होगी।
- 17:16मेरे ख्याल में ब्रह्मचर्य के बारे में बोल रही है।
- 17:27मुझे किसी ने क्लिप भेजा। उसने आध घंटा बाद पूछा, बाबा उसके
- 17:36बारे में क्या ख्याल है? मैंने कहा शिवा, रोनी के और मेरे
- 17:45पास कुछ नहीं। दो शब्द तो बोलो क्या बोलूं?
- 18:02जीसको मानसरोवर मिल गया जो शक्ति को पुंज में डाल गया।
- 18:13अपनी सारी शक्ति को उस जगह कॉन्सेंट्रेट कर गया जिसे कृष्ण
- 18:19कहते हैं स्थिति प्रज्ञा हो जा यह हमने एक कच्छप अवतार बनाया कछुए
- 18:28का अवतार यह इस चीज़ का एक संकेतिक दृश्य था।
- 18:33चित्र चित्रण था कि कछुए की भांति अपने सारे अंगों को भीतर समेट ले,
- 18:40लेकिन सक्रिय की जा सकती है यह एक परिणाम था।
- 18:51ब्रह्मचर्य घटता है। पुत्री जब शक्ति कंडेश हो जाएगी
- 18:59स्थान पे जहाँ इता आनंद आया, वह व्यक्ति गोफाओं में जाकर बलात्कार
- 19:06करेगा, तुम पागल हो गए हो? वह व्यक्ति ब्रह्मचर्य को साधेगा
- 19:23जीसको इतना आनंद आया जिसके आनंद का व्याख्यान तक वह नहीं कर सकता।
- 19:36तो वह ताल तलैया डोलेगा यही कहते हैं कविश, बस ये लक्षण है।
- 19:47मैंने पहले समझाया लक्षणों से देखना।
- 19:55अगर फिर भी वो खाता है तो उसी से जवाब पूछो।
- 20:05मुझे लोग कहते हैं कि ओशो टिक्की खाते थे और वो भी लाल चटनी वाली।
- 20:14मैं चुप हो जाता हूँ, कुछ तो बोलो नहीं बोलने को कुछ नहीं अभी कहीं
- 20:22कोई वास न सीख महावीर ने कभी समोसे वाली टिक्की वाली तुम्हारी
- 20:33पनीर पकोड़े वाली। लाल चटनी हरी चटनी खानी नहीं
- 20:37चाहिए। उसने तो खाना भी नहीं खाना चाहा,
- 20:45जो उसके शरीर को जिंदा रख पाता। तुम चटनियों के स्वाद की बात करते
- 20:52हो? अब मुझको कुछ बोलना पड़ेगा।
- 21:01दो शब्द मुझे कहने पड़े हैं, क्या तुम खुद नहीं समझ सकते?
- 21:14सभी संतो ने बोला लक्षण देखो लक्षण बताने की तो है तुम किसके
- 21:22चुटकी भर लेते हो आह तो निकलती है वह ना कहे, मुझे दर्द हुआ लेकिन।
- 21:33आह बदला जाएगी कि दर्द हुआ। तुम इतने बड़े अनुभव की बात करते
- 21:44हो। ब्रह्मचर्य ये श्वेत साड़ियाँ पहन
- 21:50के तो नहीं होता। बाहर का आवरण लाद लेने से कभी
- 21:55ब्रह्मचर्य आ जाता है। ये मूड मोड़ने से ब्रह्मचर्य आया
- 22:00है कभी आया किसी को ये लीपापोती करके कभी तुम्हारा स्वयं कभी
- 22:14तुम्हारा होना बीइंग। बदला नहीं वरन बात होती है।
- 22:24तुम अपने होने तक पहुंचे, तुम अपने बीइंग तक पहुंचे, अस्तित्व
- 22:29तक पहुंचे, वो तुम्हारे अल्फाज़ बदल गए।
- 22:39तुम्हारे लिए वस्त्रों की कोई कीमत ना रही फिर गैरवे पहनो, काले
- 22:46पहनो, सफेद पहनो, हरे पहनो जब तक तुम वस्त्र बदलने में गर्व होगे।
- 22:54तब तक दिमाग की खोपड़ी तुम्हारी खराब रहेंगी।
- 23:00तुमने वस्त्रों को ही स्वयं का होना समझ लिया और यही कृष्ण भगवान
- 23:06कहते हैं, ज़रा गौर से समझिए इसकी।
- 23:13अल्फाज और उनके अर्थ वसंशी जीर्णनीय था।
- 23:22जैसे जीर्ण शीर्ण हुए कपड़ों को छोड़ देती है आत्मा।
- 23:32नवानी घृणाती नरो प्राणी और नए वस्त्र ग्रहण कर लेती है।
- 23:40तथा श्री रानी विहाय जृणा अनन्याणी संयति नवाणी दे वैसे ही
- 23:49आत्मा प्राणी जीर्णशण। शरीरों को छोड़कर नहीं, शरीर
- 23:54ग्रहण कर लेती है। क्या हुआ?
- 24:00कृष्ण शरीरों को वस्त्र कहते हैं, तुम वस्त्रों को अपनाओ, ना कहते
- 24:06हो, बस यही फर्क है। अब शब्दों से तुम्हें समझाएं तो
- 24:18तुम्हें समझ पड़ता है, लेकिन काश वह शब्दों में आ पाता कुछ पूछो जो
- 24:31शब्दों में आता हो। बस सूचनाएं तुम गीता के बारे में
- 24:39शब्द पूछ लो, मैं तुम्हें 1000 ढंग से बता दूंगा।
- 24:44उपनिषद के बारे में पूछ लो पष्टाकर गीता के बारे में पूछ लो,
- 24:49वेद, पुराण, कुरान, बाइबल ग्रंथ। इनके बारे में पूछ लो, शब्दों से
- 24:54पूछ लो, मैं बता दूंगा और हजारों ढंगों से बोल दूंगा, हरिक
- 25:03डाइमेंशन से बोल दूंगा, लेकिन जब तुम कहोगे गुरु ग्रंथ साहब के
- 25:10भीतर। के सत्य को सत्य के रूप में बोलो
- 25:14तो मैं खमूश हो जाऊंगा अकथक कहानी प्रेम की कछु कहीं ना
- 25:29जाए अकथक कहानी प्रेम की कछु कहीं ना जाए गोंके के स्वप्न सामान।
- 25:39सुमर सुमर पर जगाए कैसे को कोई शपना होगा याद करेगा याद तो हो
- 25:51जाएगा गूंगा देख तो सकता है बोल नहीं सकता।
- 25:59लेकिन एक बात बता दूँ सूर्यदास को कभी सोपा नहीं आता, अब तुम मेरी
- 26:09बात के ऊपर हँसना मत क्योंकि वह चित्र नहीं देख पाता।
- 26:18और स्वप्न है चित्रों की भाषा स्वप्न आते हैं, चित्रों की भाषा
- 26:28में चित्र ही वह देख नहीं पाता। उसे पता नहीं चित्र क्या होते
- 26:34हैं। तो उससे तुम पूछोगे के सपने में
- 26:40क्या क्या दिखा तुम्हें? वह अगर बोलेंगे तो झूठ बोलेंगे,
- 26:50वह सुन सकता है, आवाज़ को पहचान लेगा, आहट को पहचान लेगा।
- 26:58वे तुम्हें दूर तलक से पहचान जायेगा।
- 27:02तुम्हारी सुगंध है या दुर्गंध अलसेशन कुत्ते के समान अलसेशन
- 27:11कुत्ते की स्मेलिंग पावर बहुत होती है आह हट।
- 27:16तुम दूर से आओगे, तुम्हारी आहट से पहचान जायेगा, तुम्हें नहीं पता
- 27:19चलता, हर व्यक्ति की आने की आहट अलग होती है।
- 27:25तुम्हें नहीं पता चलता अंधे को पता चल जाता है क्योंकि अंधे को
- 27:30आँखों से तो नहीं देखता? और आँखों की शक्ति जो 50% हमारी
- 27:35खराब होती है वह किसी और इन्स्ट्रुमेंट में लग जाती है।
- 27:47अंधा तुमसे ज्यादा समझदार होता है।
- 27:54तुम ये बात समझ नहीं आई अंधा तुमसे ज्यादा बढ़िया ढंग से सुन
- 27:59सकता है अंधा तुम्हारे बढ़िया ढंग से तुमसे ज्यादा गा सकता है।
- 28:13क्यों? क्योंकि इसकी आँखों के द्वारा जो
- 28:16शक्ति प्रवाहित होती थी 50% वो आँखों से मजबूर है क्या करें तो
- 28:28वह कानों में। अन्य अन्य संयंत्रों में चली
- 28:32जाएगी। एक बात और भी बता दूँ कि अगर अंधा
- 28:42अपने अस्तित्व में उतरने की चेष्टा करें तो एक तिहाई वक्त में
- 28:50पहुँच जाएगा। आप तीन वर्ष में पहुँचोगे वह एक
- 28:55वर्ष में पहुंचे क्योंकि तुम चित्र देखते हो और चित्रों को
- 29:03देखने के बाद ये चित्र ही तुम्हें खराब करते हैं।
- 29:09सच में पूछो तो ब्रह्मचर्य को समाप्त करने में इन चित्रों की
- 29:13बड़ी सहायता है, इसलिए मैंने तुम्हे पहला सिद्धांत दिया।
- 29:20बुद्ध ने भी पहला सिद्धांत दिया कि मेरा भिक्षुक छः फुट से आगे ना
- 29:27देखें। स्ट्रीट लाइन में देखें छह फुट
- 29:33देख के उस वक्त बसी नहीं होती थी। आज तो कोई डर जाएगा।
- 29:38उस वक्त की कहानी है 2500 साल पहले जब ऐसा कुछ गडबड मटेरियल
- 29:46नहीं हुआ करता। तो मेरा भिक्षु पीछे फुट पे देखे,
- 29:54बस इतनी तेजी से कोई आएगा नहीं। उस वक्त रफ्तार नहीं पकड़ी थी।
- 29:59दुनिया ने बहुत ठहरी दुनिया थी। इसलिए तुम अगर अपने अतीत में जाते
- 30:09हो तो बड़ा सुखद मालूम पड़ता है। तुम्हें नहीं पता कि क्यों मालूम
- 30:13पड़ता है बचपन क्यों इतना मीठा लगता है?
- 30:19बचपन तुम्हें आज जो स्वप्नवत लगता है और बड़ा प्यारा लगता है क्यों?
- 30:25क्योंकि तब मन की रफ्तार नहीं थी। मन ही तुम्हें भटकाता है, मन ही
- 30:34तुम्हें विश्लेषण करने में वाद्य करता है।
- 30:38लेकिन बच्चे थे तो विश्लेषण करना आता नहीं था।
- 30:41वह चीजों को देख लेते तो वह हैरान हो जाते।
- 30:46इसलिए शिव सूत्र में एक बात कही विश्व में ईश्वर तक पहुंचने की
- 30:54धरा है, तरातल है, नींव है। फाउंडेशन है।
- 31:00विश्व में तो बच्चा और कुछ नहीं कर सकता, समझ नहीं सकता।
- 31:05एनालिसिस नहीं कर सकता इसलिए वह विश्व में में खोया रहता है।
- 31:10उसे हर चीज़ बड़ी शेयर जिनक दखाई पड़ती है।
- 31:16एल। तुम्हें तो आवाज कुछ भी ऐसे ऐसे
- 31:18दिखाई पड़ता बच्चे को हर चीज़ खींचती है इसीलिए बच्चा जिद्द
- 31:26करता है, मुझे बाहर लेके जाओ वह रंग रंगीली नई नई दुनिया को देखने
- 31:33के इच्छुक हो गया है। उसके थोड़े थोड़े तंत्र काम करने
- 31:38लग गए, शरीर के यंत्र काम करने लग गए।
- 31:41वह जिद करेगा, बार बार रोएगा और उसके पास ढंग भी नहीं होंगे।
- 31:46वह जिद करेगा। जो बच्चा जितनी ज्यादा जिद करता
- 31:51है, बाहर जाने के लिए समझो, वह उतना ही ज्यादा।
- 31:55अलबादी है, शरारती है उतना ही शौकीन है बाहरी दृश्यों को देखने
- 32:07में, बच्चे के लिए हर चीज़ अश्चर्य बन जाती है और अश्चर्य
- 32:18बड़ा प्यारा है। अब इन शब्दों को और उसे समझ लेना
- 32:24विस् में प्यार का भंडार है, बच्चा विस्मय में होता है।
- 32:37क्यों होता है विस्मय में? क्योंकि एनालिसिस करने की पावर
- 32:41नहीं है अभी उसके नुरों। इतने डेवलप नहीं हुए हैं कि वह
- 32:45एनालिसिस कर सके। एनालिसिस करने पर मजबूर तो बच्चा
- 32:52देख सकता है, आँखें हैं। देखने पर वो एनालिसिस नहीं कर
- 32:57सकता। उसे पता नहीं लगता ये क्या है पता
- 33:00तो तुम्हें भी नहीं लगता। पता लगता है यह चाँद दा रहा हूँ
- 33:06यह सूरज कैसे घूमता कभी तुम्हारी खोपड़ी घूमी इस धरती को घूमते हुए
- 33:14दो ढंगो से गोमती सूरज के गर्द घूमती और अपनी धुरी के गर्द घूमती
- 33:19कभी तुमने सोचा? देखते तो तुम भी हो, लेकिन कहाँ
- 33:28देखते हो? विष में नहीं पैदा होता, तुम्हारे
- 33:32अंदर कुछ और पैदा होता है। क्या मैं इसको जीत रहा हूँ?
- 33:39यहाँ तक चला जाऊं, मंगल तक चला जाऊं, धरती के आखिरी कोर तक चला
- 33:43जाऊं ये उत्पन्न होता है और ये उत्पन्न हुआ कि तुम मरे क्यों
- 33:55कहा? ईशा ने डोस हूँ विल बी इनोसेंट
- 34:01जस्ट लाइक ए चाइल्ड। विल एंटर इन मैं गॉड्स किंगडम, जो
- 34:16बच्चों के समान निर्दोष होंगे वह मेरे परमात्मा के राज्य में
- 34:20प्रवेश कर जाएंगे। क्यों कहा?
- 34:24क्योंकि बच्चा जो देखता है, मासूमियत से देखता है।
- 34:28और उसके लिए हर चीज़ आश्चर्य होती है वंडर और वंडर इस ए फाउंडेशन टु
- 34:35गॉड विश्व में ही परमात्मा तक ले जाने की एक सीढ़ी प्रथम चरण है।
- 34:47विश्व में ही तुम्हें उत्पन्न कभी हुआ था?
- 34:50बचपन में वह बड़ा प्यारा था इसीलिए तुम बचपन में आकर्षित हो
- 34:55गया? वह वंडर फिर ढूंढ़ते हो?
- 35:04दिल छोड़ता है फिर वो ही दिल छोड़ता है।
- 35:16फिर वो ही फुरसत के। रात दिन बैठ रहे हैं त सबरे जाना
- 35:34किए हुए। दल ठोडता।
- 35:41हैं। फिर बाकी बैठे रहे तो सब रे जाना
- 35:48किए हुए दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात के जब तुम्हारे
- 35:55नेरोन्स काम नहीं करते एनालायसिस नहीं करते वह बचपन का वक्त।
- 36:00तुम ताज ज़िन्दगी नहीं बोल सकते, बूढ़े हो जाते हो, बचपन बड़ा
- 36:03प्यारा लगता है इसलिए दादा को पोता बड़ा अच्छा लगता है।
- 36:10ये साइकोलॉजिकल बातें हैं। तुम समझ नहीं पाओगे लेकिन कोई
- 36:14समझाएगा तो समझा बखूबी। बूढ़े को बच्चे से प्रेम होता है
- 36:23क्योंकि बूढ़ा अपना बचपन याद कर कर के बड़ा खुश होता है।
- 36:28कितना शोगद था मेरा बचपन कोई कांठ शाट नहीं तुम तो आज बुद्धि को
- 36:36कांठ शाट को एक क्वालिफिकेशन करते हो।
- 36:40जबकि यह एक मोड़ता है। तुम तो जिसके पास जितनी डिग्रीज़
- 36:46है, जो जितना जाल बिछा देता है उसको उतनी ही तुम डिग्री से
- 36:54सम्मानित कर देते हो और तुम्हें पता नहीं।
- 36:58ये डिग्री धारी कितने मूर्ख होते हैं?
- 37:01जितनी डिग्रीज़ उतनी मूर्खता पे डिग्री पागलपन से कमाई हुई,
- 37:08मूर्खता से कमाई हुई ये डिग्रीज़ क्यों?
- 37:12क्योंकि इनोसे हो गई। और इनोसेंस ही बोल था परमात्मा का
- 37:20यही तुमने गवा दिया इसलिए बूढ़े को बचपन बड़ा प्यारा लगता है
- 37:26इसलिए बूढ़े को अपने पोते से बड़ा प्रेम होता है क्योंकि वह बच्चों
- 37:31की हरकतें कभी करता था, वो ज्यादा थी।
- 37:35वह इनोसेंस मासूमियत बस इसीलिए कहा ईसा ने जो बच्चे के समान
- 37:46मासूम हो जाएगा वह मेरे परमात्मा के राज्य में प्रवेश कर जाएगा।
- 37:53तुम होना चाहती हो बच्चों की तरह मासूम।
- 37:56लेकिन क्या करें ये बुद्धि कांड शांड करती है ये बुद्धि देखती है
- 38:03दो धुरियों पे ये पृथ्वी घूमती तो है लेकिन तुम जानते हो कैसे घूमती
- 38:08है? यस भी तुम कुछ भी नहीं जानते बताओ
- 38:12कैसे घूमती है? ये फोर्स ऑफ अट्रैक्शन के कारण
- 38:16घूमती है। मैंने कहा ये फोर्स ऑफ अट्रैक्शन
- 38:19आया कहाँ से ये ग्रैविटेशन फोर्स आया कहाँ से?
- 38:22वो तो पता है तो फिर तुम्हें खाक पता है।
- 38:28इसी को तो संत कहते हैं रहस्य और रहस्यमय होता है विश्व में।
- 38:33और रहस्य तक तुम पहुंचे नहीं तुमने उस आखिरी छोर पे जाना है
- 38:43जहाँ विस्मय ही विस्मय है जहाँ रहस्य ही रहस्य है।
- 38:49जहाँ तुम्हारी खोपड़ी कोई जवाब नहीं दे पाती इसलिए खोपड़ी पहले
- 38:53ही उड़ जाती है। तुम्हारी बुद्धि जंक्चर पॉइंट से
- 38:59उठना शुरू हो जाती है, जैसे जैसे जंक्चर पॉइंट से तुम स्वय के गरीब
- 39:04आते हो। बुद्धि वैसे वैसे थोड़ी थोड़ी
- 39:08मात्रा में वाष्प विभूत होती है और एक वक्त आता है अपने स्वभाव से
- 39:14थोड़ा सा पहले तुम बुद्धि से बिल्कुल मुक्त हो जाते हो इसलिए
- 39:21संतों ने कहा परमात्मा तक जाना हो।
- 39:25तो बुद्धि को पहले बाहर निकाल जाना, जहाँ अपने जूते निकालते हो।
- 39:30बस बुद्धि का यही स्थान है जिसे तुम इतनी मान्यता देते हो।
- 39:35सर कहते हो आचार्य कहते हो उनका स्थान जूतियों में है।
- 39:42क्यों वे बुद्धिमान हो गए? वो सब जानते हैं जो जितना शरारती
- 39:49होगा, जितना जालबाज होगा, जितना शैतान होगा जितना जाल के मोहरे
- 39:55बिछायेगा तुम कहोगे वाह क्या बात है, बड़ा जाल फैलाया।
- 40:01तुम ये नहीं कहते कि बड़ा दुष्ट है।
- 40:06अब जिसने जाल फैलाया, शकुन ने भिवानी से जीता दुर्योधन जो कहता
- 40:14मैं एक सुई जितनी जगह भी नहीं दूंगा, 500 गांव में पांच गांव
- 40:19नहीं दूंगा। हम कहते बड़ी छाती है इसकी भगवान
- 40:27कृष्ण के आगे अड़ गया और देख चुका था वह शिशु पाल का वध।
- 40:33वहीं सागर पूजा के वक्त जब गालियाँ निकाल रहा था, शिशु पाल।
- 40:42और गिन रहे थे कृष्ण 9092, 9900 व सब चुप हो जा शिशुपाल अब मेरा
- 40:56प्रण पूरा हुआ जो मैंने बुआ को दिया था, अब तू बोलेंगे।
- 41:02तो फिर उसका जिम्मेदार तो ही होगा लेकिन वो चुप नहीं होता।
- 41:08ढीठ लोग ऐसे ही होते हैं। ये कहानियों हैं सुदर्शित चक्र ने
- 41:18उसका गला काट दिया। वास्तव में ये कला थी।
- 41:22ये 64 कलाओं में से एक कला होती है संग्रहणी विद्या क्षण मंत्र
- 41:29में तुम ध्वस्त कर सकते हो। मुझे लोग कह सकते हैं बाबा तुम सब
- 41:33कुछ कर सकते हो। इन पाकिस्तानियों को क्यों नहीं
- 41:36उड़ा सकते? छिनियों को क्यों नहीं उड़ा देते?
- 41:40मैंने कहा मैं वो भी हूँ। सेम को बड़ा पाकिस्तानी में वो भी
- 41:48तो मैं हूँ एक नूरते सब जग उपजा कोण पले कोण बंदे तुम्हारे लिए है
- 41:55क्योंकि तुम उस स्थान पर विराजमान जहाँ कोई भला और कोई बुरा।
- 42:01लेकिन मैं वहाँ हूँ यहाँ कोई बुरा नहीं, कोई भला नहीं सब मैं ही हूँ
- 42:08फिर किसको उड़ाऊंगा ये तुम्हारी जगह अगर मैं होता खोपड़ी में तो
- 42:15मैं भी यही अल्फाज़ कहता। इसमें ऐश्वर्य की कोई बात नहीं
- 42:20है। तो बाबा तुम इनको उड़ा क्यों
- 42:23देते? बिल्कुल उड़ा देता भाई अगर मैं
- 42:26तुम्हारी जगह पे होता, लेकिन बता दूँ तुम्हें एक बात अगर मैं
- 42:30तुम्हारी जगह पे होता तो मैं इतना शक्तिमान न होता।
- 42:34हाँ बस ये दोनों ही बातें विपरीत। जीस तल पे तुम बैठे बुद्धि इच्छा
- 42:41करती है कि मैं उस तल पे गए हुए व्यक्ति की शक्ति को पालु बस यही
- 42:49दुविधा है तुम्हारी बुद्धि में बैठा हुआ इंसान स्वय पे गए हुए
- 42:56इंसान। जो कि भगवान हो जाता है कि शक्ति
- 43:00माना जाती है और यह असंभव है क्योंकि स्वयं में जाने के लिए
- 43:07बुद्धि को समर्पित करना होता है। वहाँ जाकर बुद्धिनी बचेगी।
- 43:12मैंने कहा स्वयं से बहुत पहले। बुद्धि समाप्त हो जाती है वह रख
- 43:17देना जहाँ तुम जूतियां उतारते हो तुम कहते हो हम दुविधा में हैं बस
- 43:24इस दुविधा के ये कारण है अगर समझाए तो समझ लेना नहीं, मुझे पता
- 43:30है समझ तो नहीं आएगी तुम बैठे हो दूसरे छोर पे।
- 43:35और तुम कामना करते हो दूसरे छोर की और तुम चाहते हो की मैं उसी
- 43:41छोर पे बैठा हुआ, दूसरे छोर की उपलब्धियों को पालू आउट, इस
- 43:46पॉसिबल दूसरे छोर पे जाए बिना? इस छोर पे बैठे बैठे तुम कैसे
- 43:56पालोगे तुम कहो बुद्धि को भी नहीं छोड़ते, अहम को भी नहीं छोड़ते
- 44:03इल्यूज़न भी नहीं छोड़ते लेकिन पहुंचना चाहते हैं वहाँ बस यही तो
- 44:07द्वंद है तुम्हारे भीतर और ये द्वंद ही तो दुख का कारण है?
- 44:13और तुम मांगते हो आनंद बैठे हुए यहीं यहीं बैठे हुए बुद्धि के तल
- 44:21पे बैठे हुए तुम आनंद की अभिलाषा करते हो जो तुम्हें कभी नहीं
- 44:26मिलेगा, यही मुश्किल है तुम्हारा सवाल इसलिए मैं सवालों से इतना।
- 44:32मैं नमस्कार कर देता हूँ, क्योंकि ज्यादा प्रश्नपंथी होता है मेरे
- 44:37पास उसे ब्लॉक करने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं होता।
- 44:43मैं बस इतना कह सकता हूँ कि तुम पूछो मत सुन तो कोई भी सकता है।
- 44:50शून्य से तो ऐसा विधान बनाया ही नहीं कि तुम सुन भी ना सको।
- 44:56बस तुम सिर्फ टिप्पणी नहीं कर सकोगे क्योंकि मैं जानता हूँ तुम
- 45:03टिप्पणी करने के स्तर पर नहीं पहुंचे।
- 45:07जीस दिन तुम टिप्पणी करने के स्थल पे पहुँच जाओगे उस दिन मैं
- 45:11तुम्हें ब्लॉक नहीं करूँगा, उस दिन मैं तुम्हें प्रणाम करूँगा,
- 45:17यही मुश्किलात है, शब्दों से बोल रहा हूँ, लेकिन शब्दों से परे की
- 45:23बात बोल रहा हूँ किसी को समझ आएगा।
- 45:26और किसी को नहीं भी आएगा। ये तो हमारी समस्या है।
- 45:32मेरी समस्या खत्म, वो कब के हो गई?
- 45:37वह तो 28 अक्तूबर 1985 को खत्म हो गई।
- 45:41तुम्हारी समस्या भी खत्म हो जाएगी।
- 45:44ईश्वर करे। नद्री मोख द्वार तुम पर उसकी रहमो
- 45:51करीम की नजर हो और तुम भी उस स्थल पर पहुँच जाओ जहाँ विराट होता है
- 46:01वह तुम कहाँ होती हो। और जहाँ तुम होते हो वहाँ विराट
- 46:07कहाँ होता है यही तुम्हारी दुविधा है, तुम तुम भी रहना चाहते हो और
- 46:17विराट भी होना चाहते हो बस इस खेंचा खेंची में तुम मर जाते हो
- 46:22तुम फिर कहते हो, हम दुखी हैं। इस दुख का इलाज किसी के पास हुआ
- 46:26है न कृष्ण के पास, न बुद्ध के पास।
- 46:29कृष्ण भी कहे कि नहीं ऐसा नहीं चलेगा।
- 46:32शृंख आत्मा बनिश्चति एक दान्त से तो तुम विनिष्ट हो जाओगे तुम्हें
- 46:40एक तरफ़ा होना ही पड़ेगा। इस सहनशय को मिटाना ही पड़ेगा फिर
- 46:46ही तुम सुखी हो पाओगे या तो यहीं बैठे बैठे दुखों को भोगते रहो
- 46:52दुखों को भोगने की तुम्हारे में शक्ति नहीं बची तो दूसरे छोर पर आ
- 46:59जाओ। कृष्ण कहते फिर मुझे समर्पण करते,
- 47:05बस यही तुम्हारी जिंदगी की दुविधा है।
- 47:10तुम चाहते हो वहाँ का आनंद भोगना और तुम चाहते हो यहीं यहीं बैठ के
- 47:15भोगना ये दोनों चीजें हो नहीं सकतीं।
- 47:21यह मुश्किल नहीं है, यह असंभव है, इट्स इम्पॉसिबल है मान को बोलने
- 47:31के लिए तुम्हारे शब्दकोश में कोई शब्द नहीं है।
- 47:37मौन बोला नहीं जा सकता। मौन हुआ जा सकता है।
- 47:44तुम पूछ लेते हो बाबा तुम कहते हो परमात्मा के बारे में बोलो।
- 47:53और बाबा आप कह देते उसके बारे में नहीं बोला जा सकता, वह तो पिया जा
- 47:57सकता है। बस ऐसा ही जैसे जल बोला जा सकता
- 48:02है और बोलने से प्यास नहीं बुझती। भोजन बोला जा सकता है, लेकिन भोजन
- 48:12बोलने से। भूख नहीं मिटती भोजन को खाना होता
- 48:18है, पानी को पीना होता है प्यास तो फिर बुझेगी भूख तो फिर मटेगी
- 48:27तुम बोल बोल कर। भूख और प्यास को मिटाना चाहते हो
- 48:33जो असंभव है, लेकिन बहुत से लोग समझते हैं हम क्या करें समझते
- 48:42नहीं तो अपने ही पांव पे कोई लड़ी मारते हैं, किसी का क्या बिगाड़
- 48:47लेते हैं? मुझे लोग कहते हैं बाबा आप ऐसा
- 48:54क्यों बोलते हो? मैंने कहा आपके आपके लिए है क्यों
- 49:01दुख होता है? दुख इसलिए होता है ये मूड आपका
- 49:06मूर्ख भरमा रहे हैं। राधे राधे कहने से शांति कैसे मिल
- 49:11जाएगी भला? शांति, शांति कहने से शांति कैसे
- 49:15मिल जाएगी भला? ओम ओम करने से उस ओंकार के नाटक
- 49:19कैसे पहुँच जाओगे भला? ये तो बिल्कुल ऐसा ही है जैसे एच
- 49:23टू ओह एच टू ओह एच टू ओह करते रहो और तुम्हारी प्यास बुझ।
- 49:34खाने में नमक कम तुम नकल नकल नकल कहते रहो और तुम्हारा खाना नमकीन
- 49:41हो जाए, कभी ऐसा हुआ हाँ नहीं हुआ शायद हो गया हो हो जाता है।
- 49:53कुछ सन तो आज भी पुकार रहे हैं, करते रहो करते रहो हम तो डूबे हैं
- 50:06सनम आपको भी लो डूबे होंगे। वह बोला नहीं जा सकता, वहाँ जाकर
- 50:21बोला नहीं जा सकता, उसके बारे में बोला नहीं जा सकता, वह तो पहुंचा
- 50:28जा सकता है। पहुँचना तुम चाहती हो ना तुम यहाँ
- 50:33बैठे बैठे उसका आनंद चाहते हो मैंने तुम्हें बोला तो तुम इसी
- 50:39छोर पर बैठे हुए हो उस छोर की शक्तियां को पाना चाहते हो उस छोर
- 50:48पर तुम सर्वशक्तिमान हो जाते हो। और जब तुम्हें संत कोई कहता है
- 50:53तुम उस छोर पर जाकर शक्तिमान हो जाओगे, सर्व शक्तिमान हो जाओगे तो
- 51:00तुम्हारे भीतर नैचुरली ये प्रश्न उठता है कि फिर बाबा तुम तो हो गए
- 51:06ना? तुम क्यों नहीं इन पाकिस्तानियों
- 51:09को उड़ा देते क्यों नहीं इन छीनियों को उड़ा देते?
- 51:18बस यही दुविधा है, मैं कहता हूँ वहाँ जाके देख लो, बस मेरे पास और
- 51:26कोई शब्द नहीं है। वहाँ जाने से तुम पाओगे के भेद मट
- 51:31गया वहाँ जाने से एक नूरत है छः बजा को बजा मुसलमान भी तुम्हारे
- 51:39भाई। चीनी भी तुम्हारे भाई अमेरिकन भी
- 51:45तुम्हारे भाई इस संसार का हर मनुष्य ने, हर जीव तुम्हारा ही
- 51:50अंश है फिर तुम किसको काटना चाहोगे?
- 51:57फिर तुमको किसको काट के खाना चाहोगे?
- 52:02बताओ तुम उस तल पर बैठे हुए उस तल की शक्तियां को पाना चाहते हो और
- 52:12मैं तुम्हें कहता हूँ वहाँ जाकर देख लो वहाँ जाकर अगर तुमसे मारा
- 52:16जाए पाकिस्तानी तो मार दो, लेकिन तुम पाओगे वहाँ जाकर?
- 52:21हिंसा ही मर जाती है। असल में वहाँ हिंसा को साथ लिए
- 52:25लिए पहुंचा ही नहीं जा सकता। यही मुश्किल है यही दुविधा है।
- 52:31यहाँ बैठे बैठे आग फैलाई जा सकती है।
- 52:35वहाँ इस आग को साथ लिए वहाँ नहीं पहुंचा जा सकता।
- 52:40यही दुविधा है और तुम्हारा मन सदा कहेगा ये झूठा है बाबा अगर है तो
- 52:51करो ना हम क्या करे भाई तुम पहुँच जाओ।
- 53:03तुम्हें पता है वहाँ जाकर इतना प्रेम अमड़ता है कि तुम सोच भी तो
- 53:12नहीं सकोगे हिंसा की बात? जो सुख पाया राम भजन जो सुख पाया।
- 53:39राम भजन मैं वो सुख न है। फकीरी में फकीरी?
- 54:28में। ना कछु लेना।
- 54:40ना कछु लेना, ना कछु लेना ना। कछु देना कबीरा मग्न कबीरी में
- 55:04मन्नू लाग् मेरा फकीरी में। फकीरी।
- 55:14में मानो लाग्यो मेरा मेरा। लीजिए, सूक्ष्म का प्रश्न सुनिए
- 55:25क्या कहते हैं प्रश्न सुनने वाले होते हैं बोलिए?
- 55:39ये कहते हैं कि आप मस्ती को पीते हो क्या आपने एनलाइटनमेंट के वक्त
- 55:46इतनी शक्ति नहीं इतनी मस्ती नहीं पी।
- 55:49वो कभी खत्म न हो बड़ा प्यारा शब्द है बड़ा प्यारा प्रश्न है
- 56:02मुझे वो मस्ती क्यों भी नहीं होती है तुम्हें बांटने के लिए तो क्या
- 56:09तुम्हारे पास घट जाता है? ये प्रश्न आ रहे हैं लगातार मैं
- 56:12आपको जवाब दे रहा हूँ। हाँ, खाली हो जाता है जैसे तुम
- 56:19किसी बड़े टैंक में से छोटे टैंक को भर लो।
- 56:24किसी छोटे टैंक में से एक बाल्टी को भर लो।
- 56:27टेम्पर को भर लो। और उस कैंपर में से तुम पानी पीते
- 56:31जाओ कैंपर खाली हो जायेगा, हो जायेगा ना?
- 56:35फिर क्या करना होगा? उस कैंपर को फिर से भरना होगा, उस
- 56:42बाल्टी को फिर से भरना होगा और जहाँ से होद में से तुम लेके आये
- 56:48थे। वो होद भी कहीं और से भरता है।
- 56:53उसको भी भरना होगा। अब समझिये पूरी बात समझ में आई
- 56:58नहीं होगी, कोई बात नहीं, मैं जो बोलता हूँ मैं जो बोलता हूँ।
- 57:09यह उपकरण है यह अस्तित्व का आनंद नहीं है, यह वहाँ से पीता है
- 57:21अस्तित्व में जाकर जो भंडार है जो समुद्र है।
- 57:27समुद्र में जाकर इकट्ठा करना होता है।
- 57:30क्यों इकट्ठा करना होता है, क्योंकि बांटना होता है, बांटना
- 57:33होता है, क्यों बांटना होता है तुम्हें बांटने के लिए तुम्हें
- 57:38आनंद देने के लिए और जब चूक जाता है सब?
- 57:48फिर ये बर्तन खाली हो जाता है तो इस बर्तन को फिर से आनंद को भरने
- 57:55के लिए मुझे वहाँ उतरना पड़ता है, जहाँ पर इस चेतना की कोई थान।
- 58:06आनंद भरा पड़ा है वहाँ से आनंद भरना होता है परिपूर्ण रूप से
- 58:14भरना होता है और तुम्हें बांटना होता है और वहाँ से भरने में।
- 58:24करीब 4:00 बज जाते हैं। दोपहर के शाम के समय रात को जब
- 58:33मैं सोया तो शरीर के टिश्यूज़ रिपेर हुए अब ये पूरी बात समझ लो
- 58:39साइंटिफिकली पे समझ लो। रात को जब सोया तो शरीर के
- 58:45टिश्यूस जब टूटे थे। बोलने में ये भी तो टूटते हैं,
- 58:51ब्रेन के न्यूरोन की मरम्मत होती है, सोते में दिन में टूटते हैं,
- 58:56बोल रहा हूँ, टूट रहे हैं, बहुत कुछ टूट रहा है।
- 59:00तो यह तो सोने से पूरा हो जाएगा, जब मैं सोऊंगा या खुराक से पूरा
- 59:04हो जाएगा, यह तो उससे पूरा हो जाएगा।
- 59:10शरीर यानी यंत्र जिसे मैं बोलता हूँ वह रात को।
- 59:21सो कर ऊर्जावान हो जाएगा, अपने आप की मरम्मत कर लेगा।
- 59:30यह इंस्ट्रूमेंट रिपेर हो गया। रात को सोते वक्त हो गया।
- 59:35अब जो मैंने आपको बांटना है वह मस्ती।
- 59:44जब मेरे पास ये मस्ती का सागर था नहीं फिर तो इस मस्ती में मैं
- 59:50जाता नहीं था, यद्यपि वहाँ जाने की इच्छा तो बहुत थी।
- 59:57लेकिन जा नहीं पाता था। जैसे आज आपकी इच्छा होती है आप
- 1:00:00नहीं जा पाते, लेकिन जब मुझे रस्ता मिल गया तो मैं वहाँ जाने
- 1:00:07लगा। वहाँ जाने लगा और बड़ा पिया।
- 1:00:1135 वर्ष तक पीता रहा जन्मो जन्मो की व्यास?
- 1:00:19बोरे हो गए। इत्ता पिया इत्ता पिया 35 साल
- 1:00:23कितने होते हैं, देखो बहुत पिया, बहुत पिया ये ठीक मित्रब्ध हुआ,
- 1:00:29जन्म की प्यास बुझी लेकिन रोज़ बाटने के लिए थोड़ी सी जरूरत
- 1:00:35तुम्हें भी होती है। वह मुझे उस असमुद्र में से एक
- 1:00:41थोड़ी सी बाल्टी भर के ले के आनी होती है, वह मैं दिन में रोज़
- 1:00:46इकट्ठे करता हूँ और इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ कि आप मुझे
- 1:00:55डिस्टर्ब मत किया करो, तुम गुस्सा खा जाते हो।
- 1:01:03बाबा फिर किस्से कहें ये तकलीफ ये दुख किस्से कहो मुझसे कहो तुम
- 1:01:12चिट्ठी पत्र लिख दो और भी साधन हैं।
- 1:01:16जब ये नहीं होते थे मोबाइल तो फिर क्या करते थे?
- 1:01:19चिट्ठी तो लिखते थे और चिट्ठी पहुंचते पहुंचते पहुंचती थी।
- 1:01:29आज तुम्हें व्हाट्सएप मिल गया, साधन मिल गए।
- 1:01:34तुम इसका इस्तेमाल करते हो, लेकिन तुम भूल गए कल क्या था?
- 1:01:38तो वही संचार साधनों का उपयोग करो।
- 1:01:41दोनों काम हैलो हो जाएंगे। आपका प्रश्न भी हल हो गया, आपकी
- 1:01:45तकलीफ भी हल हो गई और मैंने वो घूँट भी पी ली जो पीना चाहता था।
- 1:01:54दोनों काम हो गए। आपको बांटने के लिए सामान मिल
- 1:01:57गया, लेकिन आप तो कहते हो कि नहीं हमें तो अभी अभी हाल तो तोहर में
- 1:02:04मेरे पास अंगूठा है, ये देखलाता नहीं मैं लगाता हूँ।
- 1:02:16यह जरूरत आपकी है, तुम कृष्ण को कल ही कब?
- 1:02:24किसी ने प्रश्न पूछा अहंकार ही लगती है, बिल्कुल लगते होंगे,
- 1:02:29लेकिन आपका अहंकार को मापने का पैमाना सही भी है, तुम जानते हो?
- 1:02:36यह अहंकार है, यह स्वय का बोध है। मेरा फैलाव और छोर कोई नहीं, मैं
- 1:02:47अनंत हूँ, मैं अनंत सागर हूँ, मेरा कोई और छोर नहीं।
- 1:02:54यह अहंकार है या स्वयं का बोध है? बस तुम्हें यही पता नहीं, क्योंकि
- 1:03:01तुम्हें स्वयं का बोध नहीं हुआ, तुमने आज तक अहंकार देखा, लाल
- 1:03:05आँखें करते हुए लोग देखे, तुमने स्वयं के बोध वाला व्यक्ति देखा
- 1:03:11नहीं। इसलिए मैं दोनों तरह की छूटा आपको
- 1:03:14देता हूँ मैं कहता हूँ अगर तुम शब्द सुनना चाहते हो मेरे आनंद से
- 1:03:20ले पड़ते पड़ के आए हुए तो ये वीडियो सुन लेना इनसे तुम्हें झलक
- 1:03:25मिलेंगे इस बूंद बूंद को पीते पीते भी तुम जहाँ भी बैठे हो।
- 1:03:32वहाँ तुम्हारी चेतना तरक्की कर जाएगी।
- 1:03:34एक तो यह रास्ता है, दूसरा रास्ता है।
- 1:03:38फिर मेरे पास आकर बुद्ध का बहुत स्वरूप भी देखो कि कैसे शिथिलता
- 1:03:44होती है, कैसे शिथिलता होती है, कैसे व्यक्ति जीवंत जागृत।
- 1:03:52मूर्ति वत हो जाता है। ये तुम यहाँ आकर देख सकते हो।
- 1:03:57बहुत से लोग कहते हैं बाबा 4 घंटे आपका पांव भी नहीं हिला पल के
- 1:04:06नहीं, जबकि। अगर बुद्ध का स्वरूप देखना हो तो
- 1:04:12यहाँ आके देख लो अगर मेरे अल्फाज़ में लिबड़े तिपड़े अमृत का रस
- 1:04:18पीना चाहते हो तो मेरी वीडियो सुन लो और अगर कुछ भी नहीं करना है तो
- 1:04:25जैसे ही चाहे सुन लो कौन इंकार करता है।
- 1:04:30जिसे भी सुनोगे वो मैं ही हूँ, मेरे अतिरिक्त कुछ तुम सुन न
- 1:04:37पाओगे, जो सुनोगे, मुझे ही सुनोगे, मैं झूठा हूँ तो झूठे की
- 1:04:44तरह बोलेंगे। मैं सच्चा हूँ तो सच्चे की तरह
- 1:04:48बोलेंगे। मैं निर्लिप्त हूँ तो निर्लिप्त
- 1:04:52की तरह बोलेंगे और मैं लिप्त हूँ तो लिप्त की तरह बोलेंगे।
- 1:04:56लिखा हूँ मैं सभी में, मेरे से बात कुछ नहीं बस इन गहराइयों को
- 1:05:04तुम। अलफाजों में समझाया नहीं जा सकता,
- 1:05:08समझाने की चेष्टा भर कर रहा हूँ। अगर शायद तुम समझी जाओ तो तो
- 1:05:16इसलिए मुझे आनंद को इकट्ठा करने की जरूरत होती है।
- 1:05:19आपको बांटनी पड़ी। जैसे फूल पहले करी की तरह बंद
- 1:05:26होता है। तुम्हें नहीं पता होता व्हाट
- 1:05:31प्रोसेसिंग इनसैड इस गोइंग ऑन भीतर क्या प्रक्रिया हो रही है?
- 1:05:35वो खुशबू को इकट्ठी कर रहे हैं आपके लिए।
- 1:05:43बांटना है उसे तुम में सुगंध तो उसकी पंखड़ियाँ बंद रहती हैं।
- 1:05:48कली फिर कली अपना मुखड़ा खोल देती है, पंख फैला लेती है और वो सुगंध
- 1:05:55तुम्हारी नशा पुटों में बड़ा आनंद देती है।
- 1:06:08लेकिन तुमने कभी ये नहीं सोचा, यह सुगंध बाटने से पहले कभी इकट्ठी
- 1:06:13भी की गई होगी? बस वो इकट्ठी करने का मौसम होता
- 1:06:18है जब तुम टर्न टर्न कर देते हो, बाप का पेट दुख रहा है।
- 1:06:25गरीब भाँति जानते हो जब मैं ना रहूँगा तो पेट फिर किस्से ठीक
- 1:06:29कराओगे जब मैं ना था तो पेट किस्से ठीक होता, पेट तो फिर भी
- 1:06:35ठीक होता। आज भी डॉक्टर्स तो अवेलेबल हैं,
- 1:06:39हर चीज़ के मास्टर्स हैं, सुपरमास्टर्स हैं।
- 1:06:42तुम उनके पास जा सकते हो, मैं कुछ गलत नहीं करता, मैं तुमसे कहता
- 1:06:52हूँ, एक बहुत वृहद घटना घट रही है, उसे घटने दो, जो किसी और के
- 1:06:59भीतर न घटेगी। शायद।
- 1:07:01ईश्वर करे, घट जाए, लेकिन तुम मुझे अपना वृहद काम करने दो।
- 1:07:09डू नॉट डिस्टर्ब मी एट दैट टाइम मुझे आपके लिए इकट्ठी तो कर लेने
- 1:07:17दो। फिर थोड़ी सी पिलाऊंगा और बाकी से
- 1:07:26नहला। दूंगा।
- 1:07:29दो कुट पीला देसाकिया, दो कुट पीला देसाकिया।
- 1:07:43बाकी मेरेत रोड दे दो कुट पीला दे सा किया, बाकी मेरेत रोड दे।
- 1:08:02दो गुट पीला देसाकिया श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी।
- 1:08:20श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी, हेनाथ नारायण वासुदेव व श्री
- 1:08:35कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारायण बसु दे
- 1:08:52पितु मात स्वं सका। हमार पितुमात स्वामी सखा हमार
- 1:09:12पितुमात स्वामी सखा हमार। हे नाथ नारा यन व सु देव श्री
- 1:09:27कृष्ण व विंद हरे मुरारी हे नाथ? नारायण यन वासुदेव।
- 1:09:54धन्यवाद।