Latest / Baba ji Vijay Vats / 10/3/26 - डेल्टा वेव्स और काले रंग का महत्व!! शरीर बनाम देही: रहस्यों से भरपूर प्रवचन!! 100% चेतना
Transcript
- 0:11प्रबोध चंद्र बाबा जी आप सर पर अयातुल्लाह अली खमने की तरह काला
- 0:30गुल्ली बंद क्यों पहनते हैं? बरके का काला होना काला रंग ही
- 0:42क्यों चुना गया? और दूसरा प्रश्न है अमर वीर का।
- 0:56हत्या कृष्ण भी करते हैं करवातें हत्या हिटलर भी करते हैं करवातें
- 1:04हैं दोनों की हत्याओं में फर्क क्या है?
- 1:11दोनों ही प्रश्न गंभीर है। हाँ जी, इसका उत्तर जाने के लिए
- 1:17थोड़ा शांत हो जाएगा। काले मुर्के का रंग इसलिए रखा
- 1:26गया। कि सूरज की अल्ट्रा वायलेट
- 1:30रेडिएशन सूर्य के रूप में रेडिएशन होता है, अल्ट्रा वायलेट रेडिएशन
- 1:38कहते है, वह हमारी चमड़ी पर पड़ता है।
- 1:43मेलन नाम का एक रसायन बनता है। उस मेला नीम के अधिक हो जाने से
- 1:50रंग का लग जाता है। काला रंग उस अल्ट्रा वॉल्यूट रेडी
- 2:00इशू को चूस लेता है, त्वचा पर नहीं पड़ने देता इसलिए बुरखा पहने
- 2:07वाली स्त्रियां? थोड़ी जवान और खूबसूरत दिखाई
- 2:12पड़ेगी और लावण्या से युक्त दिखाई पड़ेंगे।
- 2:17यह तो था भरकेगा पर महत्वपूर्ण बालों का रंग काला कुशना।
- 2:31हालांकि बुरे रंग के भी होते हैं। आप ये गुलबंद क्यों पहनते हैं?
- 2:37अय्यातुल्ली अली कु मैंने गुलबंद बिल्कुल आपके जैसा मैं तो बरसों
- 2:44से पहन रहा हूँ। मुझे खम नहीं का पता नहीं था,
- 2:54लेकिन इसका कारण हमारे भीतर। जब डेल्टा वेव से पैदा होना शुरू
- 3:08हो जाते हैं, तो वह हमारे दिमाग के किसी अंग से बाहर न निकलें।
- 3:17ना पेनेल ग्लैंड से, ना पिच्यूटरी से, ना बाहरी दिमाग से, ना
- 3:25ब्रह्मदृ से 1000 से किसी भी स्थान से बाहर न निकलें इसलिए
- 3:33परमात्मा ने काला रंग। बालों का दिया पूरब में क्या होता
- 3:41है? पश्चिम में बाल भूरे होते हैं,
- 3:43वहाँ कोई अध्यात्म में जाता है। परमात्मा बहुत होशियार है सहस्य
- 3:51सेणप लखोव तय करना। वह जानता है अपनी सृजना में सृजित
- 4:00अंगों को, लेकिन प्रबुद्ध तो नॉर्वे, फिनलेंड जैसे देशों में
- 4:14भी हो। तो वह ऐसे ही काला मफलर मानते
- 4:20हैं। उन्हें मैंने बदला दिया था।
- 4:24जैसे ही डेल्टा वेव पैदा होने शुरू हो जाए, आप मेरी तरह काला
- 4:31मफलर। यह डेल्टा वेव्स को बाहर नहीं
- 4:39निकलें क्योंकि वो डेल्टा वेव्स बड़ी शांत होती है इसलिए आप
- 4:44देखोगे। जब खूम नहीं बोलते हैं, उनकी आवाज
- 4:56में ठहराव होता है, करेजियस भी होता है तो जब ट्रंप बोलते हैं,
- 5:07आवाज में ठहराव नहीं होता जल्दबाजी में।
- 5:13और वो थर्राते हुए लगते हैं। उनके भीतर किसी प्रकार का साहस
- 5:18नहीं दिखाई पड़ता। डेल्टा बेस अपने आप में।
- 5:28अभूतपूर्व साहस भी देता है। इसलिए संत के भीतर साहस नहीं है।
- 5:38बही, साहस, समर्पण का रूप लेने का बात अलग है।
- 5:43क्षमा कर देना बीरों का भूषण होता है।
- 5:48क्षमा मांग लेना वीरम का भूषण कायरो का भूषण होता है।
- 5:55क्षमा कर देना वीरम का भूषण होता है।
- 6:02क्षमा मांग लेना कायरो का भूषण होता है।
- 6:08हम गुलाम हो जाते हैं। किसी भी देश के किसी भी व्यक्ति
- 6:11के कारण मृत्यु का व्यय बस हमारा आकार सोचता है।
- 6:24कि शायद बलि के पांवों की धूल बन जाऊं तो मैं बच जाऊंगा नहीं कोई
- 6:30नहीं बचा जीस पांव की धुली तुम बने हो बचे तो वो भी ना वो भी भर
- 6:36गए कहाँ बचे सिकंदर? तो दो टू के आगे के दो टू के पीछे
- 6:48मौत तो आएगा फिर जिंदगी को जियो। अगर किसी ने कहा जिंदगी वो है जो
- 6:58जी जाते है जिंदगी धक्के दिनों को धक्के मारने का नाम जिंदगी नहीं
- 7:03होती। इसका थोड़ा सा गहरा अर्थ ही है कि
- 7:09जीते जी उस सतल पर बैठ जाओ जहाँ जीवन है वह कौन सतल है मेरी सभी
- 7:17पुरानी वीडियो सुनो आपको पता चलेगा जीवन का वह कौन सतल है।
- 7:23जहाँ जिया जाता है मस्ती में कोई दुख नहीं है, कोई दर्द नहीं है,
- 7:31कोई चिंता नहीं है, कोई चिंता नहीं है।
- 7:36असल में तुम अगर जब करते हो तो आपको पसंद है।
- 7:43मृत्यु के भय के कारण जप करते हो कि कोई हमें बचा लेगा, कोई हमें
- 7:50दर्द से नहीं मरने देगा। यह लोग होता है मरने के बाद
- 7:56सच्चखंड जाएंगे, मरने के बाद स्वर्ग जाएंगे बस ये यकसन लोग है
- 8:01पंडितों ने। सड़क बना लिए।
- 8:05डेरों वालों ने इसे झगड़ा बना लिया और कबीर के शिष्यों ने सतलोक
- 8:11बना लिए नहीं, सतलोक हमारे भीतर है और सतलोक का मज़ा निराला है।
- 8:24सतलोक में होना सच अखाड़े में होना, अपनी स्थिति प्रकृति में
- 8:33होना अपनी स्वभाव में होना। यह एक ही बात है कहने के अंदाज
- 8:41अलग अलग है, जो जीता वह है जो अपने उस तल पर बेतरी तल पर पहुँच
- 8:51गया जहाँ कोई बह नहीं जहाँ कोई वैर नहीं।
- 9:00यहाँ कोई द्वैत नहीं, यहाँ कोई खोपड़ी का भय सताता नहीं।
- 9:15हम उस स्तर पर जब पहुँच गए जीस दिन पहुँच गए।
- 9:20तो उसी तल को संतों ने कहा अब द्विज हो गया, दूसरा जन्म हो गया,
- 9:24उसका पहले डर डर के जीता था, मौत फिर भी आती थी और मौत देखो
- 9:33तुम्हें नहीं आती, मौत आती है। खंडहर इस ढांचे को मौत आती है।
- 9:39यह तुम जप कर लोगे तो भी आएगा नहीं कर लोगे, फिर भी आएगा इसका
- 9:45तो स्वभाव है यह तो मृत्यु की अमानत है, वो अमानत है 1 दिन
- 9:54मृत्यु आके तुमसे ले जाए। फिर तुम चाहे जाप भी करते हो तो
- 9:58कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भगवान का सिमरण करती हो तो भी कोई
- 10:01फर्क नहीं पड़ेगा। यहाँ तो लड़ाइयां हो जाती हैं।
- 10:07कहते हैं अजामीर भगवान का नाम ले रहा हो।
- 10:11यमदूत आ गए। उधर विष्णु के पार्षद आ गए।
- 10:15वो कहते ये हमारा है, वो कहते ये हमारा है, ऐसे झगड़े भी हो जाते
- 10:19है लेकिन ये झगड़े पागल होंगे। जीवन उस तल पर विद्यमान है।
- 10:28जीस तल पर भेद मर जाता है अभेद हो जाते हो तुम?
- 10:36और भेद के मठने से द्वेष मिट जाता है, वैर मिट जाता है और वैर के मठ
- 10:43जाने से वेद के मठ जाने से तुम्हें आनंद बड़ा आता है और उस
- 10:50आनंद के कारण तुम ब्रह्मचारी हो जाते हो।
- 11:01जिसने अमृत का रस पे लिया वह छोटे मोटे रसों को क्यों मीठा पानी
- 11:10क्यों पिएगा? जिसने अमृत का रस पे लिया।
- 11:20हंसा पायो मानसरोवर हंसा पायो, मानसरोवर ताल तलैया क्यों डबरा?
- 11:35फिर वह इधर उधर स्वाद लेने के चक्कर में नहीं पड़ता।
- 11:39यह आपको लक्षण बता दूँ? मुझे लोग पूछ लेते हैं हौ टु
- 11:44रिकॉग्नाइज़ ए रेल गुरु मैंने कहा वो इतने आनंद में है।
- 11:54कि द्रव्यों से पदार्थों से इंद्रियों से आनंद लेने की चाहत
- 11:59समाप्त हो जाएगी। ऐट दट वेरी मोमेंट उसी क्षण उसके
- 12:07बाद वह इंद्रियों से स्वाद नहीं लेगा।
- 12:11बस यह मुख्य पहचान। मानसरोवर पाया ही क्यों?
- 12:20जो ताज तलैया में ही तुम डुबकियां लगाते रहे, तो मानसरोवर मिला
- 12:27नहीं, बस यही पहचान है। किसी को मापदंड बनाकर मैं न्याय
- 12:35किया करता हूँ, यही मापदंड है, फिर क्यों बोलें?
- 12:54मन मस्त हुआ फिर क्यों बोलो हीरो पायो गांठ घटिया हीरो पायो।
- 13:20गांठ गठियायो बार बार बा को क्यों खोले मन मस्त?
- 13:37हाँ, हाँ फिर क्यों वो यह राज़ बुर्के का भी यही अगर बुर्के तुम
- 13:50किसी और रंग का पहन लोगे तो उसका कोई अर्थ नहीं काला।
- 13:58काला फ्लूक वह सूरज की अल्ट्रावयरलेट रेडिएशन से
- 14:06तुम्हारी त्वचा को बचाता है। मैलानी पैदा होना कम हो जाता है।
- 14:16एक्स्ट्रा मेलनिन पैदा नहीं होता और तुम लावण्या से युक्त रहते हो
- 14:24और स्त्रियों का लावण्या से युक्त रहना जरूरी है, क्योंकि इसके सिवा
- 14:31स्त्रियों के पास और कुछ होता है। मर्द मरता है तो हुस्न आलम पे
- 14:39मरता है इसलिए ये ब्यूटी पार्लर। ये फिश पाउडर ये लाली ये क्रीम,
- 14:55ये नेल पोलिश अलग अलग तरह की ये बालों की बनावट, ये जुल्फें
- 15:07तुम्हें शायद पता न हो। जीस हिस्टरी के भीतर से स्वाभाविक
- 15:13अलावा नहीं आता। सीता की तरह द्रौपदी की तरह उसको
- 15:20फिर बाहर से ही यत्न करना पड़ता है और उन जत्नों में।
- 15:29ये तुम्हारे सारे सौंदर्य प्रसाधन हैं उन्हीं जत्नों के कारण
- 15:36क्योंकि स्त्री में इसके सिवा और कुछ नहीं है।
- 15:41मर्द कितना ही अट्रैक्ट क्यों न? लेकिन प्रथम सेंसर के बाद मृद
- 15:53स्त्री की छिपाई हुई चीज़ की असलियत जान लेता है और मृद के लिए
- 15:59स्त्री उतनी प्रभावित नहीं रहती। तुम क्योंकि भोंकते हो?
- 16:11भोगते हो मरे मरे से मूर्छित मूर्छ।
- 16:20इसलिए तुम्हें पता नहीं चलता। बा होश तुमने कभी भोगा तो तुम्हें
- 16:26पता चल जाएगा अकेले स्त्री नहीं पुरुष की अस्त्रियां तुम्हें पता
- 16:34चल जाएगा कि नहीं है दूसरे में नहीं है सुख।
- 16:41जो सुख पायो राम भजन में जो स्वयं के दर्शनों में सुख है, वह दूसरे
- 16:47में नहीं है। स्त्री पुरुष में चाहती है पुरुष
- 16:50स्त्री में चाहता है दोनों में नहीं तुम पदार्थों में चाहते हो
- 16:56दान में चाहते हो? मान सम्मान में चाहते हो, दुनिया
- 17:00को झुका लेना चाहते हो, धन इकट्ठा करना चाहते हो, अंबार लगा देते
- 17:05हो, वंशों को बताते हो तो तुम यही कृष्ण कहते हैं।
- 17:22सतीप्रग हो जा छोड़ इन झंझटों पर तू सतीप्रग हो जा तू अपने आप में
- 17:33स्थित हो जा, अपने आप में स्थित हो जा कैसे हो अपने आप का तो कोई
- 17:39पता ही नहीं। हम भूल गए।
- 17:41एक बड़ी प्यारी बात बताऊँ, एक जप करने वाला व्यक्ति मेरे पास आया
- 18:01करता था, मैंने इधर उधर आले वगेरा वो सब ढूंढ रहा था कोई चीज़ कैसे
- 18:11क्या ढूंढ रहा है? अच्छा वो क्या होता है?
- 18:26खूटू खूटू गवाच गया घूम हो गया उसको ढूंढा।
- 18:34वो क्या होता है कुर्द? मैंने कहा देखा तो मैंने कभी नहीं
- 18:40देखा नहीं फिर ढूंढ़ते क्या है जमाख में फर्क है क्या?
- 18:48मैंने कहा जमाख में है तुम्हारी फर्क, फिर तक क्यों?
- 18:52भगवान देखा है तुमने? फिर तेने फिर सिमरन किसका?
- 18:58जब मैंने खुटु देखा नहीं और मैं उसको ढूंढ रहा हूँ।
- 19:03तुमने भगवान देखा नहीं आला देखा नहीं वह गुरु देखा नहीं राम देखा
- 19:08नहीं, रहीम देखा नहीं। तुमने गॉड नहीं देखा, अल्लाह नहीं
- 19:15देखा तुमने फिर तुम ढूंढ कैसे रहे हो?
- 19:22सामान किसका कर रहे हो? मैंने खूटू देखा नहीं लेकिन ढूंढ
- 19:28रहा हूँ। बस तुम वैसे ही ढूंढ रहे हो,
- 19:35किसका शरण करोगे? पहले से देखी हुई चीजों का स्मृति
- 19:39हुआ करता कि हाँ, मैं उस स्टेशन पे गया था उस स्टेशन पर नाम लिखा
- 19:46था। मैं वहाँ गया था वहाँ पर ये नाम
- 19:51था ऐसा नजारा था। ईश्वर के बारे में तुम क्या जानते
- 19:56हो जानता तो करते है कुशवे तो फिर ये हाथ में तस भी ये माला इसका
- 20:07आर्थिक है। बस मेरे गुरु ने बता दिया और
- 20:13थोड़ा सा गुरु से पूछ लो तुमने देखा उसका गुरु कैसे देखा तो
- 20:19मैंने भी सौभाग्य से उसका गुरु भी उससे पूछ लो।
- 20:27के तभी देखो बात है आदि काल से परंपरा चली आर्य देखा तो मैंने
- 20:32पहले जीसको देखा है उसको याद का ख्वाब करो।
- 20:42जो चीज़ देखी जाती है उसकी स्मृति बन जाती है।
- 20:47कि तुमने अब मेरे को देखा है, तुम्हारे मन में इस भर्ती तुम झट
- 20:54से पहचान जाओगी, जब मेरा चैन आ जाए, झट से पहचान जाओगी या भाभी
- 20:58जी का चैन कैसे पता चला? पहले कभी देखा?
- 21:05वहाँ से पहचान बनी स्मृति में स्मृति के नूरोंच में इन्हें कैच
- 21:11कर दिया। अगर ना दिखा होता तुम बाबा जी का
- 21:13चैन नहीं कंगाल सकते थे। अब थीम के रूप में ले लो देखने के
- 21:21बाद पहचान शुरू होती। जब तुमसे पूछेगे कि तुम्हारी
- 21:29प्रेमिका कैसी है तुम बताओगे ऐसी है नहीं नहीं न न तुम्हारा प्रेम
- 21:35ही कैसा है तुम बताओगी, हमारा प्रेम ही ऐसा है तुमने देखा ना?
- 21:44अगर नहीं देखा होता तो अज्ञात से प्रेम तुम कर नहीं पाते और मैं
- 21:55तुम्हे एक बिलकुल नया सबक सीखाता हूँ मैं कहता हूँ तुम्हारे बनाए
- 22:01हुए परमात्माओं को। कभी स्मरण न करो पूजो न अज्ञात
- 22:09इसे प्रेम का जीसको तुम जानते भी नहीं कभी देखो लेकिन करण भाग कौन
- 22:22कर पायेगा? श्रद्धा सुहास रूप में?
- 22:28जिसने देखा उसके ऊपर अगाध ही श्रद्धा जिसकी है वह मान पाएगा कि
- 22:36हाँ होता है तुम अगर कहो आचार्य प्रशांत मान ले नहीं मानेगा, वो
- 22:42ठीक भी है, ये मानता रह। तुम कल को कहो के मार्कर्स मान
- 22:48ले, चार वाक मान ले के लेने के देने होते हैं।
- 22:53नहीं मानेगा? ऐसे ही लोग हिटलर और ट्रंप हो
- 22:57जाते हैं जो हमारी हुकूमत ना मने उसके ऊपर एटोम बम कराते हैं।
- 23:08इससे पूछने वाला हो उल्लू के पट्ठे जीने का अधिकार सिर्फ में
- 23:14कीड़े मकोड़े जलचर, तलचर नक्श। सबको जीने का अधिकार है, जिनके
- 23:22भीतर भी जीतना गूंजती है। सबको जीने का अधिकार है।
- 23:29तुम क्यों तानाशाह बने बैठे हो? तुम क्यों किसी का जीवन अपनी
- 23:33शर्तों पर मोल लेना चाहते हो? और बड़ी बात तो ये है।
- 23:39कि चलो आदमी का ये स्वभाव होता है कि मैं दूसरों पर हुकूमत कर दू,
- 23:53लेकिन अपराधी कौन होते हैं जो बिक जाते हैं?
- 23:59अपराधी वो जो बिक जाते हैं, किसी मोल भी बिक जाते हैं कोई एपिस्ट
- 24:07इन कांड में उनका नाम आ गया। कोई छोटी बच्चियों की लेग पीस
- 24:13खाती है उसका। शीन ट्रंप के पास है और ट्रंप ने
- 24:21उसकी जान तेल में ले ली। ये बच्चों तुम भक्तों का भगवान
- 24:28बना फिरता है, मैं ये दिखा दूंगा। अब तू इससे चाहे जो चाहे काम
- 24:35लेगा। बस मैं आगे से बोलूँगा हीटर भी
- 24:44मारते हैं। कृष्ण भी मारते हैं।
- 24:52हिटलर भी अपने सिपाहियों से हत्या करवातें हैं।
- 24:56कृष्ण भी अर्जुन से हत्या करवातें हैं दोनों में भर क्या है?
- 25:01है तो हत्या बड़ा सुंदर स्वाद है। हिटलर खुद भी मार देते हैं और
- 25:16अपनी सेना से भी लोगों को मरवाते हैं।
- 25:20चेम्बरों में भी मरवा देते हैं दम घुटके मर जाते हैं, अलग अलग के
- 25:25इस्तेमाल होते हैं। और खुद भी मारते हैं।
- 25:36कृष्ण कंस को मार देते हैं, शिशु पाल को मार देते हैं।
- 25:42जरा संत को मरवा देते हैं हत्या तो ये भी है हत्या तो हीटर और
- 25:50मसोलनी। स्टालिन चंगेस सभी ने की मावने भी
- 25:57की। अब ध्यान से समझिए अब आपका निचोड़
- 26:01आने वाला है, हिटलर मार देते हैं या अपनी फौजों से या किसी से मरवा
- 26:11देते हैं। लेकिन भीतर से ये जानते हैं कि
- 26:15मैंने इसे मार दिया। कृष्ण खुद भी मार देते हैं,
- 26:22अर्जुन के हाथों भी मरवा देते हैं।
- 26:24नारायणी सेना के हाथों भी मरवा देते हैं लेकिन भीतर से जानते हैं
- 26:28कि मरे नहीं। और यह अंतर लगता छोटा होगा बड़ा
- 26:37विराट क्योंकि इस अंतर को बांटने के लिए एक बहुत बड़ी तपस्चर्या की
- 26:43आवश्यकता होती है और उस तपस्चर्या को मैं कहता हूँ अहंकार को गला
- 26:50देना मिटा देना। अहंकार को नष्ट कर देना अहंकार
- 26:58तुम्हारा इलूशन है, सच में है नहीं।
- 27:02अहंकार जैसी कोई चीज़ सच में नहीं होती, जैसी छाया जैसी चीज़ सच में
- 27:07नहीं होती है क्या? छाया का प्रारूप सच में होता है।
- 27:16बताइए सर, स्वप्न का प्रारूप होता है क्या?
- 27:21स्वप्न तुमने देखा तो है चाय भी तुमने देख के रोज़ देखते हैं क्या
- 27:27वह होती है? नहीं होता ठीक सही जवाब है, चाय
- 27:34भी नहीं होती, शॉपिंग भी नहीं होता क्योंकि वास्तविकता आँखें
- 27:40खुलने पे पता चलता है कि चाय नहीं गुप अंधेरे में चाय नहीं बनती।
- 27:49छाया हमेशा रौशनी में बनती है। रौशनी जहाँ से क्रॉस नहीं कर पाती
- 27:56वो छाया करो ले लेती है तो कृष्ण जानते हैं कि मैंने इसे मार दिया,
- 28:11अर्जुन ने इसे मार दिया। गुरु द्रोण को मार दिया, भीषणों
- 28:15को मार दिया। लेकिन ये मरने और कृष्ण बोलते
- 28:21हैं। नय हन्निते अने मानी शरीर गुरु तो
- 28:27नहीं मरा तुम्हारा, तुम्हारे दादा तो नहीं मरे उनका शरीर मर गया नय
- 28:34हन्निते अनेमानी से। तो फिर अर्जुन पूछते हैं, फिर
- 28:44क्या होता है? यह है सबका है।
- 28:50कृष्ण कहते हैं जैसे वाशनशी हृणानी अथा बिहार हमारे वस्त्र
- 28:56जीर्णीषण हो जाते हैं। वासंकी जीर्णनी अथवा बिहारी नवानी
- 29:03घृणाती नरपराण हम उन्हें बदल कर न डाल देते हैं तथा श्री रानी के
- 29:10साथ वैसे ही शरीर के बूढ़े होने से जीनसी न होने से।
- 29:16जृणा अनन्याणी संहाति न वाने दे दे ही अपने वस्त्रों को बदल लेता
- 29:22है, बस इतना सा खेल है, दे ही नहीं मरता है, वस्त्र बदल जाते
- 29:39हैं। और आगे पचड़ा सारा देही के मरने
- 29:41का है। तुम लाख वस्त्र बदल लो अगर देही
- 29:47बचा रह गया तो तुम्हारा इल्ल्यूसन बचा रहेगा क्योंकि देही के भीतर
- 29:51ही इल्ल्यूसन भरे पड़े हैं वासनाओ की तरह विचारों की तरह।
- 29:58भ्रांतियों की तरह मान्यताओं की तरह स्वप्नों की तरह योजनाओं की
- 30:06तरह समृतियों की तरह देही के भीतर ही फीड है।
- 30:11उस सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर में तुम्हारी सारा कुछ एक कूड़ा
- 30:16कबाड़ा छुपा हुआ है। मान्यता हो, संस्कार हो और
- 30:23तुम्हारे स्वप्न हो तुम्हारी आने वाली भविष्य की योजनाएं हो, सब
- 30:33उसके भीतर छुपा पड़ा है तुम्हारे लिए हुए कर्म।
- 30:39और बहुत जन्मो के कृष्ण कहते हे अर्जुन तू ये मत समझ के मैं और तू
- 30:47सिर्फ आज ही हैं नहीं, हमारे बहुत से जन्म हो चूके हैं और कृष्ण
- 30:56कहते हैं कि मैंने हेयर अर्जुन। यह ज्ञान सर्वप्रथम सूर्य को
- 31:01दिया। आज तुझे यह ज्ञान आज तुझे दे रहा
- 31:07है। इससे पहले मैंने सूरज को उससे
- 31:13पहले विकृतियों को और को। मैंने यह ज्ञान दिया था।
- 31:19ये किस मई की बात कर रहे हैं, यह उस मई की बात कर रहे हैं जो देही
- 31:31का वस्त्र है। तो तुम्हारी सारी इल्यूश़न जैसे
- 31:38तुम सारी गंदगी को ढाप देते हो, किसी कपड़े के साथ वैसे ही
- 31:44तुम्हारी देही की सारी मान्यताएँ, सारी स्मृतियाँ, सारी योजनाएं,
- 31:54सारे भ्रम। सपने सब उसके ऊपर तुमने कपड़ा ढंक
- 32:00दिया है। यह शरीर एक वस्त्र है।
- 32:04तुम्हारी मान्यताओं के ऊपर देही के ऊपर बस उस देही में क्या छिपा
- 32:13हो। उस देही में तुम्हारे पिछले जन्म
- 32:19की सारी बदबों में छुपी है उसके ऊपर यह जैसे शरीर के ऊपर चमड़ी
- 32:33ढांप दी जाती है। जब चमड़ी को हटाओगे तो पता चलेगा
- 32:39भीतर क्या है? हमारे यहाँ एक डॉक्टर होते थे।
- 32:47अब तो पता नहीं है कि संग्रिया सर्जन थे वो उनके पास कोई पेशेंट
- 32:55ही जाता है। उसका मायना करते, ब्लड प्रेशर चेक
- 33:00करते, टेम्परेचर देखते, अच्छी तरह से पिट वगैरह सब देखते, चेक करते,
- 33:08फिर कहते ऐसा है, देखते हैं कि हर्निया थोड़ी सी बड़ी।
- 33:16देखता है कि थोड़ा सा पेट में भी गड़बड़ है, पैंक्रियाश भी थोड़ी
- 33:34सी बड़ी लगती है लगता है पीते के अंदर भी पथरी है जेगर भी कुछ बड़ा
- 33:44हुआ लगता है। अमरीश पुश्ता कहते बाकी जब मैं
- 33:57खोल लूँगा ना, अब उसने तो खोलना ही होता है।
- 34:02उसकी भाषा में तो वो ये ही रहेगा बाकी जब मैं खोल लूँगा।
- 34:10तो सारा पता चल जायेगा और क्या गड़बड़ है ये खोलने के बाद पता लग
- 34:15गया। इसीलिए ये खाना जो मैं गर्मियों
- 34:32में रखता हूँ देख। प्रकृति बड़ी शानदार तुम्हारे बाल
- 34:45पहले काले होते हैं नेचुरल अगर डेल्टा वेव्स बननी शुरू हो गए
- 34:52उनको बाहर जाने से रोकते हैं बस। मेन कारण है कि टु प्रोटेक्ट दी
- 35:01डेल्टा वेव्स पर वो बेहतर पैदा होती है, बाहर नहीं होती उन
- 35:08डेल्टा वेव्स को बाहर न निकल जाए। उनको रोकने के लिए यह काला वस से
- 35:13इस्तेमाल किया गया। और तुम्हें पता नहीं आज चाहे
- 35:15गर्मी है। लेकिन यह एक नहीं है।
- 35:18इसके भीतर एक और है तुम अगर मैं इसको खोल के दिखा दू, तुम कहोगे
- 35:26ये पागल है हाँ बिलकुल इतासत पागल हूँ मैं हर चीज़ की समझ रहा।
- 35:36सेंटीफेट के लिए उसका अनुगामी भी है।
- 35:42डेल्टा रेंज बिल्कुल नहीं बिखर नी चाहिए, लेकिन जब तुम यहाँ आओगे
- 35:51आखिर कितना ही रोक लूँ मैं? फिर भी डेल्टा वेव इतनी ज्यादा
- 35:56स्ट्रांग होती हैं। वह इन दोनों को भी क्रॉस करके
- 35:59बाहर रह गए हैं तो रात को मुझे दो रखने पड़ते हैं क्योंकि जब मैं
- 36:08ध्यान की अटल गहराइयों में जाता हूँ।
- 36:12तो समुद्र बरसता है रोज़ और उस बरसते हुए समुद्र में से बाहर
- 36:20ज्यादा ना छलके। हित नहीं रहे जो छलके वो तो छलक
- 36:26जाए इसलिए मैं दो। इधर से एक टोपी काली और ऊपर से ये
- 36:35मफलर और दोनों काले इसलिए सुबह सुबह।
- 36:51मन डेल्टा से मदहोशी के उस आलम के स्वरूप से भरा होता है क्योंकि
- 37:06सुबह इस पात्र को लुढ़ाना। जो भी आएगा, वह इन तरंगों को भी
- 37:16जाएगा। खुद के भीतर तो पैदा नहीं है
- 37:21लेकिन यहाँ जितनी ज्यादा से ज्यादा तरंगें ली जाएंगी, यह है
- 37:24उसकी अमानत है। इसलिए बार बार कहा कृष्ण ने
- 37:30आचार्यों उपासनों आचार्यों उपासनों यदा कदा आचार्य के
- 37:37सांनिध्य में जाना। पहले के लोग गुरुकुल में आज तो
- 37:46मेकाले का आशीर्वाद है। कृपया के कॉनवेंट फूलगण हौ, डू यू
- 37:54डू ये हो रहा है मिस्टर मोदी मोस्टेड ट्रम्प आज तुझे हो रहा है
- 38:05हाउ डी मोदी? वो वेला खिले एक जब एक गुरु अपने
- 38:15अनुयायियों को अपने शांत में रखता था जितना उसके भीतर डेल्टा बेब्स
- 38:23पैदा होता था। एक्स्ट्रा।
- 38:27जो उसके अंदर रिज़र्व है वो तो रिज़र्व है, वह वह नहीं कम होगा।
- 38:33रिज़र्व तो रिज़र्व है, रिज़र्व में से कभी कुछ कम होता भी नहीं।
- 38:40रिज़र्व सिर्फ जब चेतनासा छोड़ देगी इसका।
- 38:45मैं आपको एक नई बात बता रहा हूँ। जब चेतना इसका खंडहर का साथ
- 38:54छोड़ते ही बाहर निकल आएगी तो इसका जो रिज़र्व भंडार है, जो उस क्षण
- 39:00पिया था जीसको एनलाइटनमेंट कहते हैं।
- 39:05जो आचार्य प्रशांत की दृष्टि में होती नहीं तुम हसोगे उस क्षण में
- 39:15जो पिया था समुद्र का सूत्र चेतना के बाहर परमानेंटली निकलने के
- 39:22बाद। वह बिखर जाएगा।
- 39:26थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा बिखरेगा और तुम उस स्थान पे जब जाओगे तो
- 39:35पाओगे, बड़ा मज़ा है, एकाग्रता है तुम्हारे सारे दुखड़े दूर हो
- 39:41जाएंगे। क्योंकि वो रेंज ही ऐसी है तो मैं
- 39:48तुम्हें तुम्हारा आपा बुला देती हूँ, तुम दुखी हो तो तुम आपा ही
- 39:56भूल जाओगे, जैसे रात को तुम अपना आपा भूल जाते हो में।
- 40:01तुम्हे पता होता है कि तुम चोर हो या तुम भानु हो, तुम लुटेरे हो या
- 40:06तुम हत्या करके नहीं पता चलता। ऐसी ही ऐसी व्यक्ति की कमर के पास
- 40:16कम से कम 60 फुट तक। इसलिए मैं अब जो समाधि बना रहा
- 40:21हूँ, ये 60/60 के बना रहा हूँ। अंतिम छोर तक बैठा हुआ व्यक्ति
- 40:27रेंज को आखिरी रेंज को पीस के और परिपूर्ण त्याग बाकी आगे कमजोर
- 40:32होती जाए, लेकिन कम नहीं होती, बिल्कुल खत्म नहीं होती।
- 40:39तो उस दायरे में जो व्यक्ति बिल्कुल अंतिम कोर में बैठा है,
- 40:44वह भी उतनी ही पिएगा जो बिल्कुल समाधि के साथ सट के बैठा है,
- 40:53क्योंकि 60 फुट की रेंज में 20 गज की रेंज में।
- 41:05यह परिपूर्ण रूप से समानांतर बिखरती है।
- 41:13उस रेंज में जो व्यक्ति बैठा होगा वह उसको पिएगा।
- 41:26तो यह काले रंग का यह मतलब था और काले मुर्के का भी यह मतलब था कि
- 41:31अगर कभी कभी स्त्री भी हो जाती है एनलाइटन थोड़ी सी मुश्किलें हैं
- 41:40उसके शरीर के बनावट ऐसी। पीरियड्स के खत्म होने के बाद
- 41:51स्त्री पहुँच ही सकती है अगर वह कोशिश करे और जल्दी पहुँच सकती है
- 42:00क्योंकि उसके भीतर का जो बनावट है वो बड़ा शानदार बनावट है।
- 42:10वह क्योंकि रिसेप्टर और रिसेप्टर बहुत जल्दी पहुँच जाता है, आदमी
- 42:18क्योंकि रिसेप्टर नहीं है, अटैकिंग मोड में रहता है, इसलिए
- 42:24वह देर से पहुंचता है। तो स्त्रियों को कई काम संपन्न
- 42:30करने होते है। तुम बच्चा पैदा करो ना करो,
- 42:35प्रकृति अपना काम करे इसलिए बिल्कुल अगर व्यक्ति 50 साल में
- 42:47पहुंचता है। तो पीरियड्स के बाद स्त्री दसवां
- 42:54हिस्सा 5 साल में पहुंचेगा, आदमी 50 में पहुंचेगा, इससे पांच में
- 43:00पहुंचेगा 6 साल में जो पहुंचे 12 वर्ष में 12.5 वर्ष में पहुंचे
- 43:11मांग। तो स्त्री करीब सवा डेढ़ साल में
- 43:16पहुँच जाएगी। अगर पीरियड्स न हो तो लेकिन
- 43:23क्योंकि प्रकृति ने जो है दायित्व स्त्री को दिया।
- 43:31तो उस कालकंड में तो उसे शरीर का ख्याल रखना होता है और यहाँ
- 43:34दिव्यंते बहुत है। मुझे कुछ बोलने की आवश्यकता भी
- 43:40नहीं है। क्यों?
- 43:45हमारे देश का प्रधानमंत्री बार बार?
- 43:50जो तेल हमारे हिंदुस्तान में होता है, बाहर से खरीदा जाता है।
- 43:54डालरों में वह क्यों विदेशों की यात्रा पर रुका देता है?
- 44:01इसलिए मैं आपसे कहता हूँ कि उस व्यक्ति को गद्दी पर बिठा देना,
- 44:07जिसके अंदर वासनाएँ कम हैं। बिल्कुल वासनाओं से हीन व्यक्ति
- 44:10तो बैठेगा नहीं, फिर उसका गद्दी के ऊपर बैठना भी एक वासना है,
- 44:17लेकिन जिसकी वासनाएँ बहुत कम हैं, जिसकी इच्छाएं बहुत कम हैं, जिसकी
- 44:23जरूरतें भी बहुत कम हैं, ऐसे व्यक्ति को बैठा देना।
- 44:27वह 1 साल में इतना काम कर देगा कि 100 साल में तुम्हारे वो तो
- 44:33बिगाड़ेंगे, 100 साल में बिगाड़ देंगे।
- 44:36लेकिन ऐसा व्यक्ति 1 साल में इतना निर्माण कर देगा कि 100 साल में
- 44:43तुम नहीं कर। क्यों, क्योंकि तुम्हारी वासनय
- 44:54बहुत है और वासनय कभी पूरी नहीं हो सकती अपूर्व नहीं है, और मन जब
- 45:05एक वासन से भर जाएगा। यह कार्य जो पुरानी होगी इसका
- 45:13मोटर नया लेके आओ एक जया किशोरी कहती है, मुझे तो नया मोटर चाहिए।
- 45:26नया मॉडल चाहिए। मुझे और एक विशेष तरह का इस्तेमाल
- 45:32करती हैं। जब झूठ बोलने के 30 ₹35,00,000
- 45:37लेती है तो वह चोरी का माल डांगों के गज पूरे डांग का गज होगा।
- 45:45ऐसे ही लूट जाया करता है मरते मरते मर जाएंगे ये लोग लेकिन संत
- 45:54एक चीज़ साथ लेकर जाता है। ये लोग जो कमाते हैं उसका जरिया
- 45:59भी साथ नहीं जाता। ये लोग जो पदार्थ कमाएंगे,
- 46:04गद्दियाँ कमाएंगे। जो इनका सम्मान होगा सब खत्म हो
- 46:11जायेगा। मरने के बाद जवाहर लाल ने कहा,
- 46:17मेरे मरने के बाद मेरी राख को हिंदुस्तान के प्रति कोने में
- 46:22दरिया में। खेतों खलिहानों में बिखेर देना और
- 46:26बिखेरी भी गई थी। मैंने देखी जहाज के ऊपर से बिखेर
- 46:30गई थी ताकि मैं इस धरती माँ का भारत माँ का अटूट अंश बन जाऊं
- 46:38क्यों उनकी वसीयत? लेकिन कौन याद रखे आने वाले लोग
- 46:48कैसा व्यवहार करेंगे? मरने वाले तो चले गए।
- 46:53आने वाले लोग गालियां निकालेंगे या पूजा करेंगे, इससे फर्क भी
- 46:58नहीं पड़ता है। तुम कृष्ण को गाली निकालो या
- 47:03पूजो, इससे कृष्ण को कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 47:06इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ तुम्हारी सब पूजाएं बेकार हैं, वो
- 47:12छोड़ सो प्रचार, पूजन करो जब वो सिंपल तुम दिया जला के पूजन करो,
- 47:18वो मनुष्य का पूजन करो, वाचिंग। या मंत्रों के द्वारा पूजन करो।
- 47:25तुम्हारी पूजन ही बेकार है, क्योंकि पूजन करके तुम अपने
- 47:30अहंकार को बढ़ाते हो। एक व्यक्ति मेरे पास आया कहते
- 47:38मैंने 10। 10 एकड़ जमीन किसी धार्मिक संस्था
- 47:42को दे दी। मैंने कहा फिर कहता मैंने गुरु का
- 47:49उपकार चुका दिया, मैं शोका मैंने कहा उपकार चुका दिया।
- 47:57गुरु का उपकार तो उस वक्त होता है।
- 48:00जीस वक्त तुम उस तल को छू लेते हो जहाँ की तरफ गुरू इशारा करता है
- 48:06क्या तुम छु लिए हो उस तल को तुम्हारा औरा तो नहीं हो सकता
- 48:12कहते नहीं है छुए तो नहीं हो, फिर मैं तो नाम जाप करता हूँ।
- 48:19ठीक ठीक ठीक फिर मुझे सुन रहे हो क्या?
- 48:23गुरु ने नाम दान दिया तुमने जमीन दान दे दी, हिसाब किताब बराबर हो
- 48:29गया। बस ठीक है, हम किसी का लेके नहीं
- 48:31जायेंगे। ऐसी ऐसी मनोवृत्तियों के रोक पड़े
- 48:40इसलिए मैं दान में कोई चीज़ मांग कर नहीं लेता जब तुम्हारे मन में
- 48:50श्रद्धा उत्पन्न होती है। तो तुम वो फूल मेरे पैरों में
- 48:55चरणों में भेंट कर देते हो उसे मैं लात भी नहीं मारता, यह भी
- 49:01तुम्हारा अपमान होगा, यह है तुम्हारी श्रद्धा का अपमान मैं
- 49:08बांधता भी नहीं और मैं ठुकराता। तुम्हारे लिए ही व्यवस्थाएँ पैदा
- 49:16कर देता हूँ ये कहाँ साहब जहाँ आज बैठ कर मैं बोलता हूँ, ये शब्द
- 49:23तुम्हारा दिया हुआ है, वह जो बन रहा है।
- 49:31बस सब तुम्हारा दिया है, हमारा नहीं है।
- 49:36इसमें कुछ और ध्यान रखना तो हमारा भी है।
- 49:39इसमें कुछ नहीं उसका है जो अपनी खेल खेलता है।
- 49:45उसने ये खेल ऐसे ही खेलना था फिर जो तू।
- 49:52पलिका तू सदा सलामत निरंकार। उसने ये खेल ऐसे ही खेला था, नहीं
- 50:00तो 10 बार कौन किसको बचाता है 10 बार बिल्कुल मौत के मुख में है।
- 50:07और दो तीन बार तो साक्षात् मौत के मुख में जाते जाते देखने वाले लोग
- 50:13प्रत्यक्षदर्शी आज में 10 बार मरने से बचाया तो कोई कारण होगा
- 50:27उसने कुछ और खेल खेलना होगा, इसमें मुझे कुछ नहीं मिलेगा।
- 50:32ना ही मेरा कुछ कम होगा, ना ही मेरे से कुछ गिन सकता है।
- 50:37कोई ना ही मेरे में कुछ जोड़ सकता है कोई वह अपनी लीला अपना खेल
- 50:44खेलता है अपनी प्रसन्नता के लिए। वह बनाता है, सृजना करता है।
- 50:55अपनी प्रसन्नता के लिए वह खेल खेलता है और उसकी कोई शर्त नहीं
- 51:00है कि तुम मेरा नाम जपोगे तो मैं तुम पर कृपा करूँगा।
- 51:08ये तो तुमने खुद ही पैदा कर लिया है और खुद ही ये भ्रांतियां पैदा
- 51:15कर रही हैं। कोई कहता है वेद ईश्वर के द्वारा
- 51:20देखी गई किताब मुसलमान कहते नहीं, यह है कुरान परमात्मिक खुदा नहीं।
- 51:29इसाई कहते हैं और यहूदी कहते नहीं, ओल्ड टेस्टमेंट परमाणु इसाई
- 51:40कहते नहीं, न्यू टेस्टमेंट परमाणु सिख कहते हैं यह गुरु ग्रंथ साहब
- 51:47पर। तो किसने लिखाई?
- 51:53किसी ने भी तो नहीं लिखा। उसी ने लिखवा दिया, अपनी ही
- 52:00मूर्तियों से उसकी ही कर्मी थी, उसकी ही शाही थी।
- 52:06उसका ही विचार था, उसकी ही खोजें थीं।
- 52:10उसने ही लिखवा लीं जो लिखवाना चाहता था जिसे ए लिखे तिसे सर नाम
- 52:18जब वह फरमाए ते वह ते पापा जिसने यह लिखी, जिसके द्वारा वह लिखवा
- 52:25रहा है। उसका कुछ नहीं है।
- 52:29पापा कहते हैं, मेरा कुछ नहीं है उसमें पर मैं भी तुमसे कहता हूँ,
- 52:34मेरा इसमें कुछ नहीं है। यंत्र बोलता है कि यंत्र मैंने
- 52:38बनाया है, वह जो चाहे वो मैं बोलता हूँ जैसा चाहे वह मैं बोलता
- 52:44हूँ। इसमें मेरा कुछ नहीं, वह बुलवाता
- 52:48है और यह कोई शब्द चोरी किए हुए शब्द नहीं है।
- 52:53यह अनुभूति से आए हुए शब्द हैं। मैं चाहूं भी तो कुछ कर नहीं सकता
- 53:02क्योंकि उस अंतिम तल पर जाकर व्यक्ति देखता है कि चाहता तो मैं
- 53:09हूँ मेरे चाहने से सब कुछ होता है और यह ठीक भी है।
- 53:18ज़रा सोचो थोड़ा सा उदाहरण देता हूँ अगर मैं हाथ को कर लूँ।
- 53:24अपने आप उठ जायेगा नहीं उठेगा अगर मैं आपको नहीं अपने आप नीचे आ
- 53:32जायेगा नहीं कोई बिमारी हो तो आ सकता है ये पैरालायसिस हो जाए,
- 53:37फिर मैं इसको आदेश करूँ कि अब उठूं ये कहेगा नहीं उठ सकता।
- 53:43लेकिन अगर यह है सवस्थ जो उठेगा, अगर जो बात सवस्थ है बोलेंगे अगर
- 53:49कंठ सही है वो गाय तो फिर अगर कण को इसे भ्रम हो जाए कि मैं तो
- 53:59स्वयं उठती हूँ, मैं तो स्वयं लिखती हूँ।
- 54:03जुबां को भ्रम हो जाए, कंठ को भ्रम हो जाए, मैं तो स्वयं गाता
- 54:08हूँ, मैं तो स्वयं बोलता हूँ जीबा को भ्रम हो जाए।
- 54:11यह टेस्ट वर्ड्स यह टेस्ट मैंने खुद लिया है।
- 54:16यह भ्रम है, तुम्हारा जीबा का भ्रम है।
- 54:21जैसे यह सारा एक गुथा हुआ एक सारा गुथा हुआ ढांचा है बिलकुल वैसे ही
- 54:36यह सारा आलम यह सारा ब्राह्मण एक गुथी हुई संरचना है आपस में।
- 54:45अगर यहाँ कोई किसी को मारेगा तो याद रखो, वह दुख उसके पास भी
- 54:53ततक्षण पहुँच जाएगा। यहाँ इतना सूक्ष्म प्रवाह होता है
- 54:58सूचनाओं का तुम देखो तुम्हारे पैर के लग जाते हैं।
- 55:04नंगे पांव चलते हो नीचे कोई कांटा पड़ा कांटा पांव में छुप गया तुम
- 55:09जल्दी से उठाते हो पांव कांटा निकाल लेते हो कहाँ दिमाग है कहाँ
- 55:16पांव है पांव में चूहा कांटा सूचना यहाँ पहुंचती है।
- 55:27फिर क्या यहाँ काँटा छुहा तो यहाँ पहुँच गया क्या उस आंतरिक सवेरे
- 55:36में नहीं पहुंचता होगा? बिल्कुल पहुंचता है क्योंकि सब
- 55:40गुस्सा हुआ है आपस में। इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ के
- 55:45किसी जीव की हत्या करना किसी शास्त्र में नहीं लिखा है।
- 55:50शास्त्रों से कुछ मत मानना वो तो अपनी अपनी बुद्धि की बात है, कोई
- 55:55कहता है परमात्मा है, कोई कहता नहीं है, कोई कहता है कर्मों की
- 56:00कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ लेना देना यहाँ होता नहीं।
- 56:04भस्मभूत से देह से पुनर आगमनम कुत्ता जद्दा, जी वेत सुखी जी वेत
- 56:12ऋण कृत व ग्रंथम पी वेत भस्मभूत से देह से पुनर आगमनम कुत्ता।
- 56:19वो कहते हैं कि कोई लेने का लेना यहाँ होता नहीं है, कोई कर्म
- 56:25व्यवस्था नहीं है। देर इस नो एक्शन देर इस नो
- 56:30रिएक्शन ऑफ़ एनी एक्शन तो ठीक है, तुम माने जाओ भाई।
- 56:37इसमें किसी को क्या फर्क पड़ता है परमात्मा अपना संविधान या अपनी
- 56:44सारी नियम? व्यवस्था थोड़ी बदलेगा।
- 56:46तुम्हारे कहने से नहीं वो तो यार वो तो सुनता भी नहीं तुम्हारी
- 56:50इसलिए अंधा है, बहरा है तुम्हारे लिए, वैसे उसे दुखता है।
- 56:57दिखता है, सुनता है पगबी ने चली सुनी फिर गाना कान दिखते नहीं,
- 57:11उसके कान दिखते नहीं उसके, लेकिन वो चलता है कान दिखते नहीं उसके
- 57:18लेकिन वो सुनता है। और इतनी बड़ी सृष्टि का अगर कोई
- 57:30मूर्ख उसे मूर्ख मैं इन सब को मूर्ख कहता हूँ सर, लोगों को
- 57:36आचार्यों को यह किताबें भर भर के। भूल जाएंगे, किताबें छप जाएंगी
- 57:43निह तो सार्थों के हेतु बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स खड़ी कर देंगे।
- 57:48बड़े बड़े बैंक अकाउंट्स खड़ी कर देंगे, बड़ी बड़ी जमीनें खरीद
- 57:54लेंगे, लेकिन बात ये नहीं है। बात ये है कि जब तुम जाओगे क्या
- 58:04जर्रा भी तुम्हारा कमाया हुआ साथ हो जाएगा, जो समझदार कोन है
- 58:11समझदार को जो जब मरे तो वह लेकर जाए जो उसके संग जाए।
- 58:18जो इस ज़िन्दगी में कमाए था तो क्या कुछ ऐसा है जो हम यहाँ कमा
- 58:22सकते हैं? हाँ ऐसा है क्या लेके जाओगे तुम
- 58:28साथ यहाँ क्या कमाओ जो तुम्हारे साथ जाए क्वांटिटी ऑफ कॉन्शसनेस।
- 58:39चेतना का परिमाण और यही चल रहा है।
- 58:45हम पत्थर से भगवान हो जाते हैं और सन्तो ने इशारे तो बहुत किया।
- 58:54उन्होंने इशारे रख छोड़े सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स के रूप
- 58:58में अब्रीविएशन के रूप क्योंकि ये शब्द कम पड़ते हैं शब्द कभी तुम
- 59:05समझते हो, कुछ सभ्यताएं उन शब्दों को नहीं समते, लेकिन यह जो।
- 59:15सुदर्शन चक्र शिशु पालिका वध करके फिर कृष्ण के पास आ जाता है।
- 59:23यह सिम पर जो जोड़ दिया गया है। ये कुछ मिसाइल्स ऐसे भी हो सकते
- 59:28हैं जो अपना प्रहार करके दुष्टों का वध करके।
- 59:35बिना शाय के दुष्क्रेतान संतों को बचाकर पृथ्रानाय संत पृथ्रानाय
- 59:47साधुना। तो कुछ बेजाइज़ ऐसी भी हो सकती
- 59:54हैं जो अपना है ना के खत्म न हो। तुम्हारी मिज़ाइज़ तो खत्म हो
- 59:59जाती है, इसलिए और बनानी पड़ती हैं, लेकिन तुम्हारे वैज्ञानिक को
- 1:00:07अभी थोड़ा और आगे चलना होगा, ऐसी मिज़ाइलें हैं।
- 1:00:11जो खत्म नहीं होता जो अपना लक्ष्य साध के वापस हमारे पास आ जाएंगे।
- 1:00:17बिना किसी का बिना अपना नुकसान किया तो अभी विज्ञान को और आगे
- 1:00:25बढ़ना होगा। तो ऋषियों ने यह सिंपल छोड़ दिया।
- 1:00:31जीतने विज्ञान वैज्ञानिक प्रयोग हुए सनातन के सिंपल के कारण हुए
- 1:00:41अगर सनातन सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स को छोड़कर न जाता
- 1:00:47इन अब्रीविएशन्स को छोड़कर न जाता।
- 1:00:52तो आज ये साइंटिफिक इतनी अचीवमेंट हो नहीं सकती थी।
- 1:00:59कुछ वेदों से निकाला, कुछ उपनिषदों से निकाला कुछ हमारे
- 1:01:04धर्म ग्रंथों से ऋषियों ने सिंबल के रूप में बनाया।
- 1:01:09शिवलिंग बनाया, सिंबल है, ये मूर्तियां बनाई है ये सिंबल है,
- 1:01:19लेकिन अगर तुम इसके साथ चिपड़ जाओ तो फिर इस सिंबल का कोई अधिक कोई
- 1:01:26मायने नहीं रहता था। तुम समझो के सिंबल बनाए क्यों
- 1:01:37बहुत कारण है इस एक ही चीज़ में बहुत कारण है तुम्हारे भीतर एक
- 1:01:46ऐसा तत्व है। जो बिलकुल मूर्ति की तरह बिना
- 1:01:56हिला हेले डुले बिना कम्पे स्टेचू की तरह खड़ा रहता है।
- 1:02:03एनलाइटनमेंट के वक्त में कितने ही घंटे तक?
- 1:02:07एक स्टैच्यू के रूप में खड़ा रहा और मेरे शरीर में ज़रा भी दर्द
- 1:02:11नहीं हुआ। एक व्यक्ति इतने घंटे लगातार खड़ा
- 1:02:16है और कोई शरीर में कोई ऐसा दर्द नहीं है।
- 1:02:21कहीं भी क्या हुआ? जब भीतर से हम स्टेच्यू के रूप
- 1:02:30में हो जाते हैं, यह मन और यह शरीर दोनों से इंटर कनेक्टेड है।
- 1:02:40जब मन बीमार होता है तो शरीर बीमार हो जाता है।
- 1:02:47जब शरीर बीमार होता है तो मन बीमार हो जाता है और जब कोई समाज
- 1:02:58बीमार होता है तो देश बीमार हो जाता है।
- 1:03:03जब देश बीमार हो जाता है। तो विश्व बीमार हो जाता है।
- 1:03:07जब विश्व बीमार हो जाता है तो यह ब्राह्मण बीमार हो जाता है या आपस
- 1:03:12में घुसा हुआ है इसलिए अगर तुम मुर्गे को काटोगे तो यह मत समझना
- 1:03:19मुर्गे को काटकर तुम खा जाओगे नहीं।
- 1:03:23तुम खा जाओगे, प्रोसेसर होगी डायग्नेशन की, व्यापम की
- 1:03:27मेटाबोलिज्म की, वह तुम्हारे शरीर का एक अंग बन जाएगा लेकिन मिड
- 1:03:31होगी तो तुम लेके कहाँ जाओगे। कृष्ण कहते हैं एक चीज़ तुम अपने
- 1:03:43साथ ले जा सकते हो। क्या जो तुम्हें सत्य की अनुभूति
- 1:03:50कराते हैं, बस वही चीज़ है जो तुम कमा सकते हो या साथ में जा सकते
- 1:03:56हो और वही तुम्हें अंतरिम आनंद तक पहुंचायेगी?
- 1:04:04उसकी पराकाष्ठा आनंद की क्या होती है?
- 1:04:09आनंद की पराकाष्ठा क्या होती है, कहाँ होती है यह तुम्हें वहाँ
- 1:04:14जाकर पता चलेगा। तथ्य जो तो महाबल सुर।
- 1:04:23दिन में राम रे परफूर न ओह मरे, न ठगे जा जिनके राम बसे मनमा और थीम
- 1:04:35के रूप में समझ लें आज का प्रभचन यू कैनट क्रिएट एंड यू कैनट
- 1:04:42डिस्ट्रॉइ। मैटर कैननॉट बी क्रिएटेड नोरकेन
- 1:04:45बी टेस्ट ड्राइव यह तो मैटर का स्वभाव है, जहाँ तक चेतना का
- 1:04:52स्वभाव है, वह भी बिल्कुल ऐसी है। नैनम सिदंती शस्त्रण नैनम राहती
- 1:04:59पावका न जैनम कली जनतयाप और न शोसती मारूता।
- 1:05:04तो फिर मिटता यहाँ कुछ नहीं, अगर कोई कहे के मैंने ज्यादा पा लिया
- 1:05:09वे गलती में यहाँ कुछ बढ़ता नहीं, कुछ घटाता नहीं इसलिए उपनिषद में
- 1:05:17कहा गया अगर तुम 100 में से 100 भी निकालो।
- 1:05:20पूर्ण से पूर्ण मादाएँ पूर्ण मेवा मशीषय थे।
- 1:05:23पूर्ण में से पूर्ण को भी निकाल लो तो भी पूर्ण रहेगा।
- 1:05:26अरे जाओगे कहाँ उसको लेकर उसके सिवा कहीं कुछ और कोई है ही नहीं
- 1:05:32है ही वो लेकिन तुम बढ़ा सकते हो साथ ले जा सकते हो कुछ।
- 1:05:42बाकी तुम्हारा कमाया धमाया बना तो तुम कुछ सकती हो, इस बात को तो आप
- 1:05:49कांटा मार दो, बढ़ा सकते हो तुम अलग अलग मायनों में क्या बढ़ा
- 1:05:59सकते हो? मात्र चेतना की मात्र क्वांटिटी
- 1:06:09ऑफ कॉन्शसनेस क्वालिटी ऑफ कॉन्शसनेस कॉन्शसनेस की क्वालिटी
- 1:06:14तो बढ़ती ही है, कॉन्शसनेस की क्वालिटी तो आनंद है।
- 1:06:21शक्ति और आनंद का मेलजोल, इसके लिए ही इसे अर्धनारीश्वर रूप दिया
- 1:06:28गया। शक्ति और चेतना का मेल
- 1:06:35अर्धनारीश्वर। यह दो चीजों से बना संसार विश्व
- 1:06:40सारा ब्रम्हंड इसको तुम बढ़ा सकते हो पत्थर के अंदर जड़ होता है
- 1:06:54चेतन बहुत थोड़ा सा होता है नेगलिजबल।
- 1:06:58फिर बढ़ता बढ़ता पेड़पौधा फिर यूनीसेल्युलर अमीबा फिर
- 1:07:08मल्टीसेल्युलर फिर दो टांगों वाला मुर्गा फिर चार टाँका आपके भी चार
- 1:07:15टाँगे है ये बात अलग है। कि आप खड़े हो गए तो दो टाँगें और
- 1:07:20दूसरे दो दो टाँगें आगे वाले उनके हाथ बन गए।
- 1:07:24हम भी आज जानवरों की तरह चल सकते हैं।
- 1:07:31हम पुराने जमाने के जानवर ही तो हैं बस आदमी ने उठने की करासी की।
- 1:07:37मंदिर भी उठ सकता है और ज़रा सोचो हाथ ही अगर उठेगा तो कैसा लगेगा
- 1:07:47ऊंट? अगर उठ जाएगा तो कैसा लगेगा हाथ?
- 1:07:50हाथ पांव तो उसके भी दो दो हैं आगे वाले जो हैं हाथ हो जाएंगे
- 1:07:55पीछे वाले जो पांव हो जाए। उछलना शुरू करते है, बस थोड़ी सी
- 1:08:00सीखना ही है, ट्रेनिंग है थोड़ी सी तो कौन से स्नेक्स को तुम
- 1:08:08मात्रा को बढ़ा सकते हो। क्यों बढ़ाना है कौन सी नेक्स की
- 1:08:13मात्रा को? मतलब क्या है पर्पस क्या है?
- 1:08:19मतलब यही है कॉन्शसनेस की मात्रा को अगर तुम बढ़ा लोगे तो तुम्हारे
- 1:08:27दुख, चिंताएं, कष्ट, क्लेश, चिन्तनाएं, दर्द सब खत्म हो
- 1:08:35जाएंगे। और इसी से मानवता त्रस्त है।
- 1:08:41तुम्हारी कॉम्पटीशन तुम्हारी भाग दौड़ तुम्हारी मैराथन सब खत्म हो
- 1:08:51जाएगी। और तुम आज दुखी दुनिया की तरफ
- 1:09:03देखो, लटके हुए चेहरे ट्रंप जैसे देखो गौर से देखने ये सुवर जैसे
- 1:09:09लगता है हंसो, शुगर भी तो। हमारी संस्कृति में भगवान वरहा
- 1:09:19अवतार यह वरहा का अवतार लगता है। गौर से भी जब यह बोलता है तो वह
- 1:09:32बोलता है कि मैंने कहा। मेरी घरवाली गंदगी ऐसे कैसे बोलता
- 1:09:36है? मैंने कहा इसके गले में गुल्ला
- 1:09:39फंसा और गुल्ला पूरा नहीं फंसा है।
- 1:09:45थोड़ी सी वायु इधर से निकाली है। थोड़ी सी वायु इधर से निकाली है
- 1:09:49इसलिए आदि वायु इधर से निकाली है आदि उधर से निकाली है इसलिए ऐसा
- 1:09:54बोलता है। अब तुम गौर से सुन रहे कभी ट्रंप
- 1:09:59को बिल्कुल ऐसा लगेगा। दोनों तरफ फंस रही आवाज आती है
- 1:10:05जैसे बंसरी की सा रे, गामा का धनी सा पता नहीं कहाँ से आवाज आती।
- 1:10:17कॉन्शसनेस का बगना तुम साथ लेके जाओगे पत्थर से चली थी ये चेतना
- 1:10:30और जब अपनी अंतरिम परिणति तक पहुँच जाते हैं।
- 1:10:37तो पूर्ण हो जाती है। जब चेतना चली थी तो पूर्ण नहीं
- 1:10:45थी। जब चेतना चली थी तो पूर्ण चेतना
- 1:10:51इस तरह की थी कि समुद्र में मिलने के लोग।
- 1:10:56यह समझ में नहीं आएगा। इसलिए इसको मैं अज्ञे कहता हूँ,
- 1:11:01अज्ञे है, इसलिए मैं आखिर में बोल रहा हूँ, तुम कहोगे चेतना तुम
- 1:11:08चेतना होती है हाँ होती है, लेकिन उस चेतना में जो पात्र के पीछे।
- 1:11:16जो अमीबा के भीतर और जो मुंशी के भीतर इन में फर्क है मानस के भीतर
- 1:11:30आके मानव शरीर के भीतर आकर चेतना की।
- 1:11:34क्वालिटी बदल जाती है। बुद्धि तो सब के भीतर है।
- 1:11:45सांप के भीतर ही बुद्धि है, वो भी बच जाना चाहता है, चेतना तो है।
- 1:11:53देखिये मैं अज्ञेय बोल रहा हूँ, मैं तुम्हें बार बार याद कराता
- 1:11:57हूँ, खोपड़ी बहुत कुछ उठाये खोपड़ी को उठाने दे, मैं कहता हूँ
- 1:12:06आनंद लो उन लम्हों का परम रस का आनंद लो।
- 1:12:11खोपड़ी को मगज खपाई मत करना, यह तुम्हारी इतनी बस में होनी चाहिए
- 1:12:18कि तुम्हारी इच्छा के बिना यह सोचिए ना, यह चलता ही रहता है।
- 1:12:24कहाँ है तुम्हारा आदिपत्य इसके ऊपर?
- 1:12:30ये बड़े, बड़े आचार्य, लोग, बड़े बड़े सर लोग इनका भी मन चलता है।
- 1:12:38इनको जल्दी जल्दी सोते ही नींद नहीं आती।
- 1:12:40विचार चलते हैं और देखिए जिसकी परिपूर्ण चेतना हो गई।
- 1:12:48उस लेबल की चेतना हो गई, वह लेट से ही सो जाएगा, आराम से उसका मन
- 1:12:59चलेगा नहीं या नहीं, प्रश्न नहीं उठाएगा, वह सोचेगा समझेगा।
- 1:13:08सारे यंत्र है सोचो समझने का, लेकिन उसकी इच्छा से सोचेगा उसकी
- 1:13:16इच्छा के बगैर नहीं सोचेगा जब वो चाहेगा तो सोचना बंद हो जाएगा तो
- 1:13:22बुल्लेशा ने शब्द कहा, राति सपना आवे, उन जड़े अल्लाह वारे हो।
- 1:13:28बड़ा गहरा शब्द है क्योंकि तुम्हारी इन्द्रियाँ और तुम्हारा
- 1:13:34मन तुम्हारे वश में हो गया तो तुम कल्पना नहीं करोगे और हिंदू धर्म
- 1:13:39तो टीका ही कल्पनाओं में। और बी के धर्म ही कल्पनाओं में और
- 1:13:46तुम्हारे सभी धर्म कल्पनाओं में टिके हुए हैं।
- 1:13:52कल्पना करो कि मैं धरती का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हूँ।
- 1:13:58फिर सभी भाग्यशाली हो गए। ये देखो।
- 1:14:03युद्ध की कगार पर कभी भाग्यशाली लोग आया करते हैं, युद्ध की कगार
- 1:14:11पर नहीं आया करते हैं। भाग्यशाली लोग आनंद के अंदर बैठकर
- 1:14:18आनंद का आदान प्रदान किया करते हैं।
- 1:14:21शास्त्रों का मिसाइलों का एटम बम्बों का आदान प्रदान नहीं किया
- 1:14:26जाता है। जीस दिन धरती है इतनी ज्यादा
- 1:14:29समझदार हो जाएगी। उस समय संत आपस में बैठकर जैसे
- 1:14:35शास्त्र करते थे, वो आनंद का आदान प्रदान था, शब्दों का आदान प्रदान
- 1:14:40नहीं था। तुमने उसको गर्त धारण में ले
- 1:14:45लिया। आनंद प्रधान जैसे प्रेमी प्रेमिका
- 1:14:50के पास बैठा कुछ भी न बोले। लेकिन फिर भी वहाँ से उठने का मन
- 1:15:07नहीं करता है अभी ना और तुम्हारा दिल कभी भरेगा कितने
- 1:15:43साल से मैं पी रहा हूँ 85 के बाद 41 वर्ष लगातार पी रहा हूँ, लेकिन
- 1:15:53दिल अभी बार आ रहा है। हमने ऐसे ऐसे वजन बना लिए।
- 1:16:07क्या लेकर आया तू बंदे क्या लेकर तू जाएगा मुट्ठी बांधे आया जगत
- 1:16:13में हाथ बसा ले जाएगा लेकिन यह संसार के द्रव्य के बात में।
- 1:16:23लेकर भी कुछ आया है। कॉन्शसनेस का परिमाण जितनी मात्रा
- 1:16:32में कॉन्शसनेस तो देके आया है जाते हुए।
- 1:16:37उस कॉन्शसनेस को पूर्ण करके जाना, उस आंतरिक लेवल को छू कर जाना
- 1:16:43जहाँ तुम विराट हो जाओ, जहाँ शूद्र न रहे, जहाँ ब्राह्मण न
- 1:16:50रहे, जहाँ भेद मिट जाए और तुम एक ही हो जाओ एक हो अहम्।
- 1:16:56द्वितीय नष्ट, एक ब्रह्म, द्वितीय नष्ट, एक ओंकार उस स्तर पर जब तुम
- 1:17:06जब तक तुम पहुँच नहीं चाहते, तब तक तुम पूर्ण आनंद को पी नहीं
- 1:17:13पाते। यह संसार नीरस नहीं, ठीक है,
- 1:17:21तुम्हें कभी कभी अच्छा नहीं लगता तो तुम इसे मिटा देना चाहते हो
- 1:17:25परिस्थितियों को, लेकिन इस संसार का आंतरिक का रहस्य आनंद से भरा
- 1:17:32पड़ा है। जो चीजें तुम्हें दिखती हैं, वैसी
- 1:17:38हैं और इन दिखती हुई चीजों के गर्व में ऐसी ऐसी आनंद की धारा
- 1:17:48पड़ी है जीसको पीकर तुम नया हो जाओ।
- 1:17:56तो उस आनंद की कॉन्शसनेस की मात्रा को बढ़ाओ, पूर्ण हो जाओ
- 1:18:02परिपूर्ण 100% कॉन्शसनेस हो जाना तुम्हारा टारगेट है, लक्ष्य
- 1:18:10क्यों? क्योंकि 100% कॉन्शसनेस।
- 1:18:14100% आनंद और जब तुम 100% आनंद हो जाओगे तो फिर वही होता है
- 1:18:25परमात्मा परमात्मा की 1000 हाथों वाला नहीं होता।
- 1:18:30कॉन्शसनेस का अपरिशीम हो जाना ही परमात्मा होती है।
- 1:18:37जाने का, उस रसपान का अप्रियसीम हो जाना ही परमात्मा हो जाना है,
- 1:18:42फिर वहाँ तुम्हें पता ही नहीं चलेगा।
- 1:18:45हू आर यू एंड व्हेर आर यू सब लुप्त हो जायेगा।
- 1:18:52कौन हो तुम कहाँ हो तुम खो जाएगा ही जैसे निद्रा में तुम्हे निद्रा
- 1:18:59में तो जगाया जा सकता है, लेकिन उस आनंद की पीती हुई।
- 1:19:10अवस्था में तुम्हें उससे बाहर नहीं निकाला जा सकता।
- 1:19:13तुम पीते ही रहो, पीते ही पीते जैसे किसी शराबी को तुम बुला लो,
- 1:19:20वो पीते पीते बाहर आ जाएगा, अपनी बोतल संगी रखेगा बस ऐसा तुम्हें
- 1:19:28समझाने की चेष्टा कर रहा हूँ। लेकर जाते हो भाई तुम लेकर भी आते
- 1:19:33हो कॉन्शसनेस का जो लैब है तुम लेकर आते हो बिलकुल नीचे तो गिर
- 1:19:39नहीं सकता यह जो कहते तुम बैल बन जाओगे, तुम भैस बन जाओगे।
- 1:19:44यह तो पाखंडियों की बातें हैं, जिन्होंने जाना नहीं जिन्होंने
- 1:19:47देखा नहीं। उनकी सोच है, बुद्धि की निर्मित
- 1:19:50है, लेकिन वास्तव में जो कॉन्शसनेस डेवलप हो गई कॉन्शसनेस
- 1:19:57ऐसा पदार्थ नहीं है जो गाटे जाए। अब एक आखिरी प्रश्न राधा स्वामी
- 1:20:03का ले लेता हूँ कहता हमारे गुरु कहते हैं कि आप अगर भजन ने किया।
- 1:20:08तो बैल की योनी में पड़ोगे उसकी योनी में पड़ोगे उसकी योनी में
- 1:20:11पड़ोगे तुम्हारी कॉन्शसनेस कट जाएगी नहीं है।
- 1:20:14सुनिए अब सुनिए तुम वो चीज़ हो तुम वो चेतना हो जो मरती नहीं, जो
- 1:20:23कटती नहीं, जो जलती नहीं जो सूखती नहीं, जो गलती नहीं।
- 1:20:27नैनम चिदंती शस्त्रानी नैनम, दोहती पावता नहीं चैनम
- 1:20:32कीर्जनत्यपु नै सुसति मारो ता तो फिर ज़रा बताओ जो जलता नहीं, जो
- 1:20:39गलता नहीं, जो सूखता नहीं, जो काटता नहीं।
- 1:20:47वेलकम कैसे होगा? और उपनिषद का ये वाक्य के सो में
- 1:20:54से तुम सो भी निकाल लो तो कुछ घटेगा नहीं सो ही बाकी रहेगा।
- 1:20:59इसका मतलब ही ये था जितनी कान्शस्नस तुम्हारी बढ़ गई, उससे
- 1:21:04नीचे नहीं, तुम आ सकते। बुद्धि का परिमाण तो कम ज्यादा हो
- 1:21:10सकता है। आज तुम्हारी मेधा शक्ति बहुत है।
- 1:21:14कल तुम बूढ़े हो गए, शीजोफ्रेनिया हो गया, तुम्हें याद नहीं रहता
- 1:21:20कुछ, ये है बुद्धि की बात। इसको अस्तित्व पे अप्लाई मत कर
- 1:21:25लेना। बुद्धि कमजोर भी होती है, बुद्धि
- 1:21:31तीव्र भी होती है, तेज भी होती है, तार्किक भी होती है, समर्पित
- 1:21:37भी होती है, लेकिन होती बुद्धि है।
- 1:21:41हम बात करते हैं उस तल की जो तल मनुष्य के जामे में आया वह परिमाण
- 1:21:52जो मनुष्य के जामे में आया है इसलिए मनुष्य का जमा सर्वश्रेष्ठ
- 1:21:56कहलाया। वह चेतना कभी कम नहीं होती, जितनी
- 1:22:01तुम देके आ गए, जो जलता नहीं, जो गड़ता नहीं, जो सूखता नहीं, जो
- 1:22:09गलता नहीं, जो उड़ता नहीं, वह कम कैसे हो सकता है, वह बंद कैसे हो
- 1:22:16सकता है? बंध सकती है तुम्हारी बुद्धि
- 1:22:21इसलिए बहुत से कायररो आचार्य लगा लेंगे आगे आईएसबी कर देंगे,
- 1:22:26कुर्सी को विराज मर देंगे लेकिन बंधन के मामले में वो कहेंगे
- 1:22:32नहीं, हम शादी नहीं करेंगे। क्यों बंध जाएंगे, बंधेगा कौन?
- 1:22:37तुम्हारी बुद्धि बंधे कबीर को तो कोई बंधा नहीं सोचता और कृष्ण एक
- 1:22:45तो बंधनों की इंतहा करता 16,108 कितना बंधन लगाओगे तुम इसके ऊपर
- 1:22:53यह तो उन्मुक्त? उसने तुम्हें दिखला दिया कि
- 1:22:57उन्मुक्त व्यक्ति किसी भी बंधन से पार होता है तुम उसको फुरादी
- 1:23:04जंजीरों से भी झकड़ दो तो भी कहाँ झकड़ा जाएगा वो तत्व भी ऐसा है जो
- 1:23:11बांधा नहीं जा सकता भाई। जो जगता नहीं, जो गलता नहीं, जो
- 1:23:15कटता नहीं, तुम्हारे अनुभम अगर बिखर जाएगा तो इतने साल से ही
- 1:23:20होता है व्यक्ति तुम्हारे अनुभम भी घर जाएं तो यह ना क्या स्कैटर
- 1:23:26हो जाएगा लेकिन समाप्त नहीं होगा स्कैटर हो जाएगा।
- 1:23:36पदार्थ पदार्थ में मिल जाएंगे, अलग हो जाएंगे लेकिन मिटेगा कुछ
- 1:23:41नहीं। यहाँ मिटता कुछ है ही नहीं तो ये
- 1:23:48आचार्य लोग व्यर्थ के बंधन बनाए जाते हैं, बना लो यहाँ तक भी आना
- 1:23:55जरूरी होता है। तुम्हें बंधन जैसा लगने तो लगे
- 1:24:00बहुत से मूर्खों को तो बंधन में पता ही नहीं चलता कि मैं बंधन में
- 1:24:04हूँ तो कम से कम इतनी सी होस्ट तो आए कि तुम बंधे हुए हो, फिर ही तो
- 1:24:12मुक्त हुआ जा सकता है। इसी को तो वैराग्य कहा, जब
- 1:24:18तुम्हें दुख आएगा, भूखों से तो वह दुख तुममें वैराग्य पैदा करेगा और
- 1:24:26वैराग्य की आग में जलकर तुम मुक्त होने की चेष्टा करोगे?
- 1:24:32उसे मोहमुख्य कहा गया है। जब कोई मोमुख हो जाता है, मुक्त
- 1:24:38होने की इच्छा करता है, कौन इच्छा करेगा जो बंधा हुआ है?
- 1:24:43जो जाग गया जिसने देख लिया मेरे ऊपर तो बंधन बहुत हैं।
- 1:24:47मैंने तो बहुत सी मान्यताएँ ठोक लीं जब बिल्ली रस्सा कट गई।
- 1:24:53ये फल हो गया ये फल हो गया लाख हम मान्यताएँ हैं, ये ग्रहण में ऐसे
- 1:25:01हो गया, भगवान अप मित्र हो गए, दरवाजे बंद कर लो।
- 1:25:06अरे भाई ऐसा कैसे होता है? मैंने बहुत देर पहले बोला था राहु
- 1:25:11केतु नाम की कोई? जी दो तीन यह एक परछाई है इसलिए
- 1:25:16उनको छाया ग्रह मैंने इसलिए कहा कि आपने विशोत्री पद्धति में जो
- 1:25:25यह राहु की महादशा और केतु की महादशा बनाई है या व्रत।
- 1:25:33राहुल की 18 साल और केतु की 7 साल यह है 25 साल व्यर्थ तो मनुष्य की
- 1:25:41उम्र 120 साल गिने गए। 25 -2 सही नक्षत्रिय अव्यवस्था से
- 1:25:48सही उम्र आती है 95 साल। अगर तुम 95 साल जी लेते हो तो
- 1:25:54तुमने अपना पूरा जीवन भोग लिया। इसलिए वेदों में करीब 100 साल की
- 1:26:00उम्र जी मांगेगी। 120 नहीं मांगी छत जी वेद काम से
- 1:26:09निस्तम जीवेद 100 साल जीव उम्र में।
- 1:26:15लेकिन शो नहीं। ये एस्ट्रोलॉजिकल व्यवस्था से 95
- 1:26:19बनता है। अगर राहु की अठहड़ साल केतू की 7
- 1:26:24साल हम निकालते हैं लोग के होता नहीं यह मात्र एक छायाग्रह यह
- 1:26:31ग्रह है कि नहीं? दिखा दो अगर कोई है कोई वजूद तो
- 1:26:36होगा कहीं कौन से तारामंडल में है ये अश्विनी में, वर्णी में कृतिका
- 1:26:42मेरोनी में मृक्षरा पुनर्वासुबुक किसी में तो होगा कहाँ है फिर ये?
- 1:26:52फिर तुम चुप हो जाते हो। तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं
- 1:26:59क्योंकि कुछ है नहीं। राहु, केतु जैसे हमारे लोग ये शनि
- 1:27:06को शनि करता है न्याय शनि कैसे करता है न्याय?
- 1:27:11शनि हमारा क्या करता है? हमारी कर्म करते हैं शनि तुम्हारा
- 1:27:17उचका हो कर्म तुम निष्ठा के करो तो शनि बेचारा क्या करेगा?
- 1:27:22शनि तो खुद ही एक धरती माटी का पुतला है।
- 1:27:26उसके ऊपर भी गैसीय, अंग्रेजी है शायद।
- 1:27:30वह कैसे न्याय करेगा? उस समय कोई चेतना थोड़ी, लेकिन
- 1:27:35तुमने तो शनि की भी तस्वीरें बना दी, तुमने तो यमराज की बनाती,
- 1:27:39तुमने तो नरक और स्वर्ग के योजन बना दिए, इतने में दूर है,
- 1:27:44तुम्हारे पागलों का क्या कहना है? इसीलिए मैंने कहा हिंदू कभी नहीं
- 1:27:48पहुंचेगा। हिंदू के जो पूर्व थे सनातन,
- 1:27:52उन्होंने ऐसे सूत्र खोज लिए थे और उन्हें पता था कि हमारी आने वाली
- 1:27:59मूड़ मतियाँ हमारे अपने ही बच्चे वंशज महामूर्ख हो गए, इसलिए शबत
- 1:28:06मत छोड़ के जाओ। अब्रीविएशन छोड़ जाओ, सिम्बोलिक
- 1:28:12रिप्रजेंटेशन छोड़ जाओ। जब कोई समझदार आ जाएगा तो इनके
- 1:28:18अर्थ खोल देगा और समझा देगा तुम हर चीज़ को कल्पना में डाल देते
- 1:28:25हो। और कल्पना से कुछ होता नहीं।
- 1:28:27कल्पना से जो आगे आगे कहते हैं तो माजरे बहुत बढ़िया है।
- 1:28:32क्यों फिकर करना आई ए एस बनने का? ये काम बढ़िया है, मूंड, मड़ाई
- 1:28:42तीन गुण। मट जाए सिर की खाज ये योगी जी है
- 1:28:48ना आदित्यनाथ मंड मंडालित्य तीन गुण होते हैं मंड मंडई तीन गुण
- 1:28:55सिर की मट जाए खाज अच्छे से मार्क खाज।
- 1:29:01खाने को अच्छा मिले और लोग कहें महाराज अच्छा खाने को मिलेगा
- 1:29:08मशरूम वगैरह लोग कहें महाराष्ट्र। लेकिन मैं बात यहाँ की नहीं करता।
- 1:29:15मैं बात वहाँ करता हूँ जहाँ मशरूम खाने की इच्छा नहीं होती, यह भी
- 1:29:19एक इच्छा। यो जहाँ जीवन की भी इच्छा नहीं
- 1:29:24होती, महावीर का वो लेवल जहाँ जीवेशणा भी मर जाती है, तुम जीना
- 1:29:33भी नहीं चाहते इसलिए तुम किसी को मारते हो?
- 1:29:39यह बहुत गहरी बात है। तुम जीना नहीं चाहते और जो
- 1:29:44व्यक्ति दूसरों को मारते हैं, याद रखना, वह उतना ही ज्यादा जीना
- 1:29:48चाहते हैं। आज ये जो लोगों को छोटी छोटी
- 1:29:53बच्चियों को उनके अंग काट काट कर खा रहे हैं, वह पागल हो गए।
- 1:30:00इनको तुम समझदार मत समझना, क्योंकि मनुष्य के शरीर के भीतर
- 1:30:06हम क्यों चलाते थे? मनुष्य के शरीर के भीतर, खून में
- 1:30:12और मास में टिश्यूज में कुछ ऐसे जहर होते हैं।
- 1:30:16जिनको अगर तुम खाओगे अग्नि से वो खत्म नहीं होते तो तुम पागल हो
- 1:30:20जाओगे तो अवश्य ही अगर मोदी जी वहाँ पहुंचते हैं तो इन्होंने
- 1:30:26किसी बच्ची की टांग वगैरह खाई हो। इन्होंने तो खाई है पक्का हैक
- 1:30:32ट्रंप वगैरह इसलिए तो इतने पागल हैं।
- 1:30:35क्या ये पागलपन नहीं है कि मैं सारे संसार को ऊपर आधिपति कर लूँ?
- 1:30:41मांस खाने वाले व्यक्ति ऐसा ही काम करते हैं क्योंकि मांस के
- 1:30:45अंदर एक जहरीला तत्व होता है और वैज्ञानिक ने अभी खोजा नहीं इसलिए
- 1:30:50उसका नाम नहीं रखा गया। हम उसे अवशेष कहते हैं।
- 1:30:55अवशेष अवशेष वैसे हम बसम को भी कह देते हैं लेकिन हमारी भाषा में
- 1:31:02उसको अवश्य से कहते हैं। जो वह खा लेता है, वह पागल हो
- 1:31:07जाता है, उसकी कन्सेशन्स बढ़ती है, इसलिए तुम पशुओं को शेर को
- 1:31:13ज्यादा समझदार मत समझना। शेर से बड़ा मूर्ख कोई होता है
- 1:31:19तुम लाख कह दो जारे मेरे शेर तुम उसको गाली निकाल दो कुत्ता मांस
- 1:31:25भी खा लेता है, दूध भी पी लेता है बिल्ली मांस भी खा लेती है, दूध
- 1:31:29भी पी लेती है। मांस के भीतर एक ऐसा जहरीला तत्व
- 1:31:34होता है। जो अगर आदमी खा ले तो वह पागल हो
- 1:31:40जाता है शीजोफ्रेनिया हो जाता है धीरे धीरे और इन राजनीतिज्ञों को
- 1:31:48मैं किसी को खाने से नहीं रोकता। मैं कोई 10 कमेंट से नहीं कर रहा
- 1:31:53हूँ। बिलकुल खाओ, मैंने कहा खाओ और
- 1:31:57पागल हो जाओ और मनुष्य के शरीर में ज्यादा रूप से वह जहर बनता है
- 1:32:04जिसे हम आप के लिए कहते हैं। वैज्ञानिक जिससे खोजने के उत्तन
- 1:32:09पाएंगे और उस समय वैज्ञानिक भी कह देंगे।
- 1:32:12खबरदार। हसकाया तो जानो में जाओगे, उसका
- 1:32:19मतलब यही है, दुख हो गया, 1000 तरह की बीमारियाँ हो जाएंगी।
- 1:32:25यह बिमारी है शीजोफ्रेनियों की पागलपन की कहीं चैन नहीं आता।
- 1:32:33परमात्मा निगाह फेर लेता है, वह जीवन का रस निगाह फेर लेता है।
- 1:32:42फिर तुम याद करते हो अपने पुराने दिल क्या हम कितने खुश नसीब हुआ
- 1:32:49करते थे? है, दिन है सोना।
- 1:33:09थोड़ा अँधेरी है जब से तुने अब सितारे भी कम।
- 1:33:47निकलते चाँद भी अब नजर नहीं आता, अब सितारे भी कम निकलते हैं याद
- 1:33:58में ते किसकी याद आनंद की याद बच्चे थे, निर्दोष थे, बड़े सूखे
- 1:34:05थे। बहे आनंद की एक भीनी भीनी सी
- 1:34:09सुगंध तुम्हारे बेटा निर्दोषता के कारण आती है जाग जाग के हम रात भर
- 1:34:23कर। बदलते हर घड़ी दिल में तेरी उल्फत
- 1:34:36के दी में दी में चिराग जलते हैं। हर घड़ी दिल में तेरी उलफज के
- 1:34:49धीमे धीमे चेहरा बिछते हैं ये सीजोफ्रेनियां होता है तुम कल्पना
- 1:34:58करोगे तुम्हें चीज़ दिखनी शुरू हो जाएगी, होता कुछ नहीं।
- 1:35:03तुम कहोगे देखो वो शेरों वाली बैठी है, देखो वो कान्हा मुरली
- 1:35:11बजाए देखो ये बाबा दादी में अरे भाई, दादी में कैसे उतर जाएगा?
- 1:35:20दादी के ऊपर तो उतर सकता है? हसोग दादी के भीतर कैसे बढ़ जाएगा
- 1:35:30पागल हुएगा और बाबा कहते दादी के बीच तो ये सीजो फन है पागलपन।
- 1:35:41अर्ध पागलपन विक्षेत्र अवस्था पूरे पागल भी नहीं और धरती आज इन
- 1:35:49पागलों से भरी पड़ी कोई एक सयाना है और कबीर उन्हीं को कहते हैं वो
- 1:35:56थोड़े से हैं बस। वही सयाने सबय सयाने एकमत, मूर्ख
- 1:36:06अपनों अपनी मूर्ख का तो फिर यह कोई कहेगा ऐसा है, कोई कहेगा ऐसा
- 1:36:10है मूर्खों की सब मती अलग होती है यानी जिसकी मती अलग अलग होती है
- 1:36:14वह मूर्ख जिसकी मती सेम होती है वह सयाना।
- 1:36:21सयाना कभी नहीं कहेगा वो चाहे कभी रहे, वो नानक है, वो चाहे कोई भी
- 1:36:26है जो सयाना है, वो कहेगा वह आनंद रूप है।
- 1:36:32वह केंद्र में स्थित है। उसमें इतना मीठा इतनी लहरें हैं,
- 1:36:39इतनी सुगंध हैं, इतना आनंद है ही कैनट बी एक्सप्लेन्ड ताकियाँ
- 1:36:46गल्ला कथिया ना जाए धन्यवाद।