Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Dec 25 - कुंडलिनी जागृत करने का असली फार्मूला - 3 मिनट में सहस्रार! दिन में सोने का महत्व! Part 1 Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:15अगला सूत्र लेहम गोरखनाथ का अधेखी देखी बा अधेखी देखी बा देखी
- 0:31बेचारी बा। अदि से टे राखे बा चिरा पाताल की
- 0:40गंगा ब्राह्मण चढ़ाई बा तहा विमल विमल जल पिया।
- 0:55तीन तरह के लोग होते हैं पहले वाले।
- 1:17तेरा मंगल मेरा मंगल सबका मंगल होय रे सबका कल्याण हो ये पहले
- 1:31वाले लोग होते हैं तेरा मंगल। मेरा मंगल पहले तेरा मंगल हो फिर
- 1:43मेरा मंगल हो फिर सबका मंगल होय रे फिर सभी का मंगल हो।
- 1:55जो इस विचारधारा के लोग हैं वो शांति को प्राप्त होते हैं और यही
- 2:08आज के इस दोहे का मतलब है। दूसरों के लिए जो जीता है वो ही
- 2:19देवता है। अपने लिए तो पशु भी जी लेते हैं
- 2:30और सब के लिए जो जीता है वो भगवान।
- 2:39तेरा मंगल मेरा मंगल सबका मंगल होय रहा है, परमात्मा सबका मंगल
- 2:48चाहता है, इसलिए अपनी सृजना को अपने बन्दों के हवाले कर दिया हूँ
- 2:55क्योंकि वह सबका मंगल चाहता है। दूसरे तरह के लोग होते हैं जो
- 3:11कहते हैं मेरा मंगल मेरा मंगल मेरा मंगल होय रे।
- 3:23मेरा ही मंगल हो, मेरो का ही मंगल हो, जो मेरा है, उसका मंगल हो, जो
- 3:40मेरे करीब है उसका मंगल हो। और जो मेरे दायरे में है, मेरी
- 3:48हदऊद में है उसका मंगल हो। ऐसे लोग होते हैं लोग भी और ऐसे
- 4:02लोगों का मंगल कभी नहीं होता। ये स्वार्थी तरह के लोग होते हैं
- 4:16जो कहते हैं बस मेरा ही मुगल हो मेरा और मेरों का मंगल हो मेरा
- 4:25मुगल, मेरा मुगल, मेरा मुगल होए। एक तीसरे, वे तरह के लोग तेरा
- 4:41अमंगल होए चाहे मेरा अमंगल होए रे ये निकृष्टतम प्राणी।
- 4:54दूसरे का विनाश हो जाए, उसमें चाहे मेरा विनाश हो जाए, ये
- 5:03निक्कर सिस्टम यौनी की निशानी है। तेरा अमंगल होय चाहे मेरा अमंगल
- 5:20होय रे जो दूसरों का भला नहीं करना चाहता, जो खुद का भला चाहता
- 5:32है और खुद के जो। खुद के करीब है जो उसका मंगल
- 5:40चाहता है, दूसरे का मंगल नहीं चाहता तो पहले वाला भी और दूसरे
- 5:49वाला भी ये चलते हैं। लेकिन तीसरे वाला बड़ा खतरनाक है
- 6:01जो कहते हैं तेरा अमंगल होय चाहे मेरा अमंगल होय रे, बस तेरा विनाश
- 6:11हो जाए। उसकी एवज में चाहे मेरा बिना
- 6:16सोचें यह तीसरे तरह के लोगों के निशान में और ऐसे ही लोग मानवता
- 6:30के लिए। प्राणी मात्र के लिए विष का काम
- 6:36करता है। संसार में तीनों प्रकार के लोग
- 6:44हैं। पहला, सर्वश्रेष्ठ, दूसरा
- 6:53न्यूट्रल। तीसरा हिटलर मसोलनी चंगेस खान
- 7:05स्टालिन जो कहते बस तेरा अमंगल हो जाए।
- 7:14उसके बदले चाहे मेरा पिता भी अमंगल हो जाए, इस प्रकार के लोग
- 7:20निक्कृष्टतम श्रेणी में आ जाते अदेखी भी देखी वह जो देखा नहीं जा
- 7:42सकता चर्म चक्षुओं से। गौरख के शब्द हैं, ध्यान से सुनें
- 7:54जो देखा नहीं जा सकता। चर्म चक्षुओं से सबसे पहले उसको
- 8:00देखो। फिर उसको देखकर मनन कर विचार कर
- 8:14यानी जो देखा उसे बांटो। क्योंकि उसको देखकर तुम तुम
- 8:22प्रसन्न हो जाओगे ये देखी देखी व देखी बेचारी व अदि सती, रब्बी व
- 8:39छिया। जो नहीं देखा जा सकता उसको सबसे
- 8:46पहले देखो वह कैसे दिखेगा। ठहरने से देखेगा ठहरना कैसे है
- 8:57दौड़ना बंद कर दो। ए देखी देखिए बा देखी वो विचार।
- 9:05विवा देखकर उसका विचार करो, बांट दो क्योंकि उसके देखने से तुम्हें
- 9:13परम प्रसन्नता मिलेंगे। रहस्य का अमृत तुम पियोगे अधि
- 9:24सीटी राखी बा चिया क्षेत्र में रखिए राखी बा चिया।
- 9:34आदि सेती राखी भचिया जो आँखों से नहीं देखा जा सकता उसको हृदय में
- 9:44बसाव आदि सेती राखी भचिया। सबसे पहले उसको देखो जो देखा नहीं
- 9:55जा सकता कैसे दिखेगा बाहर नहीं दिखेगा कहीं गुर्ग बताता है
- 10:07तुम्हें कि तुम्हें मिलेगा कहाँ न शब्दों में मिलेगा।
- 10:12ना भगोड़े बन के मिलेगा, ना जाप, ना तप।
- 10:24असल में तुमने परमात्मा को एक चीज़ समझ लिया है।
- 10:29जीसको परिश्रम से पाया जा सकता है।
- 10:36तुम परमात्मा को पदार्थ की तरह देखते हो, यही गलती लग जाती है
- 10:46परमात्मा को पदार्थ की तरह जो देखेगा।
- 10:50वह पदार्थ की तरह उसे पाने की चेष्टा करेगा, क्योंकि पदार्थ
- 10:55चेष्टा से मिलता है तो परमात्मा को भी वह चेष्टा से पाने का यज्ञ
- 11:04करेगा। परमात्मा चेष्टा से नहीं मिलता और
- 11:13तुम्हारी सारी विधियों, चेष्टा के सिवा और कुछ नहीं।
- 11:21विज्ञान भैरव तंत्र की 112 विधियों।
- 11:27चेष्टा के सिवा और कुछ नहीं अधेखी बा देखी बा देखी बा बेचारी बा आदि
- 11:43सीटी राखी बा चिरा जो आँखों से देखा नहीं जाता, चर्मचक्षु से
- 11:50दिखता नहीं उसको देखो। फिर देखो उसको बांटो क्योंकि उसको
- 11:59देखने से तुम्हें चरण आनंद का अनुभव होगा।
- 12:05उस चरम रस के अनुभव को तुम बांटो। बांटोगे नहीं तो दूसरों को पता
- 12:13कैसे चलेगा और बाटना पड़ेगा बोलके बड़ी मुसीबत है जो आँखों से देखा
- 12:23नहीं गया यानी इंद्रियों से देखा नहीं गया।
- 12:28वह इंद्रियों से बोला भी नहीं जा सकता।
- 12:33लेकिन मुश्किल आती है कि जो बोला नहीं जा सकता, फिर सन्तु से बोलते
- 12:41हैं, और करें भी क्या बिचारे उनके पास और कोई साधन भी नहीं है।
- 12:53आ देखी बा देखी बा देखी बा बेचारी बा अद्दी सीटी राखी बा चिया।
- 13:08फिर उसको अपने हृदय में ले जाओ, जो तुमने देखा उसे हृदय में ले
- 13:14जाओ परमात्मा को पदार्थ की तरह मत देखो आज का पहला संदेश।
- 13:31परमात्मा पदार्थ नहीं है, परमात्मा पदार्थों का रचनाकार है
- 13:40और पदार्थ नहीं है तो पदार्थों की तरह परिश्रम से पाया भी नहीं
- 13:45जाएगा। कैसे पाया जाएगा?
- 13:50परिश्रमहीनता से तो क्या नकारा हो जाए?
- 13:55नहीं तुम विश्राम भी करते हो क्या नकारा होने के लिए करते हो तुम
- 14:11रात को सो जाते हो। क्या तुम नकारा हो जाती हो?
- 14:18तब नहीं एनर्जेटिक होने के लिए तुम रात को विश्राम करते हो?
- 14:31फ्रेशनेस? सुख मिला है शांति तो क्या उस
- 14:41धर्म शांति को पाने के लिए यह ध्यान यानी कुछ न करना आदर्श है
- 14:50क्या? यह नकारा होना है।
- 14:53क्या रात को थकावट को मिटाने के लिए थके मारते होते हो?
- 15:00दिन भर के काम करके तुम नकार में उतर जाते हो तो क्या उस परम आनंद
- 15:09को पाने के लिए? कुछ न करने में उतरना आलसी है
- 15:14क्या नहीं बड़े से बड़ा परिश्रम है ये तुमने अभी किया नहीं, इसलिए
- 15:27तुम्हें पता नहीं। बड़े से बड़ा परिश्रम क्यों है,
- 15:32क्योंकि जूं जूं आगे जाओगे। तू तू तुम्हारी कल्पनाएँ तुम्हारी
- 15:37मान्यता तुम्हारे मन ने जो जाल बचाये जो समाज ने जाल बचाये, समाज
- 15:48ने जो माना। राज़ करने वालों ने जो मनवाया
- 15:55राज़ करने वालों, जो नियम कायदे कानून बनाए वो सब तुम्हारे ऊपर
- 16:00जंजीरों का काम करते हैं। रात को तुम सोते हो।
- 16:11काहे को सोते हो, नकारा होने के लिए सोते हो तो न सोया करें।
- 16:16क्या ये आलस्य नहीं है? तुम कहोगे नहीं बाबा ये तो
- 16:24फ्रेशनेस मिलती है, तो उसी फ्रेशनेस की बात गोरख कर।
- 16:35राहतें और भी हैं। फसल की राहत के सिवा सिर्फ फसल की
- 16:44राहत ही राहत नहीं होती, सिर्फ सोना ही राहत नहीं होता।
- 16:48फ्रेशनेस का जरिया सिर्फ रात भर सो जाना ही नहीं होता।
- 16:54इससे पार भी कुछ होता है तो गौरव कहते हैं इस तरह रात को सोकर
- 17:04आलस्य में जाकर, परिश्रम में जाकर कुछ न करने से तुम।
- 17:13थोड़ी खुशी को महसूस करते हो, वैसे ही परम खुशी को अगर महसूस
- 17:18करना है तो बिलकुल परिश्रम ही नहीं हो जाओ, यह आलसी नहीं है
- 17:28बड़े से वीर बड़ा अमूल्य हीरा पाने के लिए।
- 17:36शांति पाने के लिए आनंद का रस पाने के लिए तुम रात को भी सोओ
- 17:46तुम दिन को भी सो जाओ। यह आज का दूसरा सूत्र रात को सोते
- 17:56हो? फ्रेशनेस के लिए योग निद्रा में,
- 18:00सो योग निद्रा इसलिए नाम रखा उसका रात को सोना निद्रा, दिन को सोना
- 18:07योग निद्रा। फ्रेशनेस के लिए तुम रात को सोते
- 18:15हो और उस महारस के लिए तुम दिन में सो जैसे ही तुम्हे संसार के
- 18:30कर्तव्य कर्मों से निजात मिले। तुम योग निद्रा में चले जाओ योग
- 18:38निद्रा यानी दिन में सो जाओ वेल जद में मिले ये फर जा तुम।
- 18:58वेलजद भी मिली फर रातों तेरे मुख भी।
- 19:14किताब ले बेटा मेनू तेरा शबाब ले बेटा।
- 19:32रात को सोने से तुम्हें एक शबाब दिखता है, उसकी सुंदरता बखान नहीं
- 19:38की जा सकती तो गुर कहते हैं रात को सोने से तुम्हें वो शबाब मिलता
- 19:46है, वो शराब मिलती है। जिसके नशे में तुम इतने फ्रेश हो
- 20:00जाते हो। मज़े की बात है, क्या करें?
- 20:02शब्दों की तकलीफ है, यह नशा तुम्हें ताजगी देता है।
- 20:12एक नशा संसार का जो ठेकों पर शराब उपलब्ध वो तुम्हे तरजगी नहीं
- 20:17देती, वो तुम्हे बेहोश ही देती है एक नशा तुम्हारे अंत में उतरने का
- 20:30वो तुम्हे तरजगी देता है। उसे हम योग नेत्र कहते हैं।
- 20:41रात को हम थके मांगे थे। टिशूज को रिपेर करने के लिए हम सो
- 20:49गए, वह कोई लेह ही नेस नहीं था, उसके बिना तो जीवन चलता ही नहीं।
- 20:57वैज्ञानिक कहते हैं, अगर 17 दिन तक कोई व्यक्ति न सोए, लगातार
- 21:03नौवें दिन से लेकर 17 दिन तक कोई व्यक्ति जाग नहीं सकता, लगातार वो
- 21:08मर जाएगा। बड़े से बड़े अगर किसी अपराधी को।
- 21:13दंड दिया जाता था। चाइना में तो उसकी नींद छीन ली
- 21:17जाती थी। सोने में तो ऐसे कोई दंड नहीं।
- 21:24खाना पीना तो जो मांगता है लेकिन सोने में तो दो।
- 21:33क्योंकि सोना सबसे बड़ा सोना है हीरा खजाना है सोने में तुम उसके
- 21:44पास पहुँच जाते हो जहाँ परम ताजगी से भरपूर होके तुम वापस आते हो
- 21:50दिन में। तो गुर कहते हैं एक और भी ताजगी
- 21:54है जो रात की नींद में नहीं मिलते हैं उसके लिए तुम्हें दिन में
- 22:00सोना होगा। अद्भुत सूत्र है।
- 22:11अतिशिट्टी राखी बो चिया जो तुमने ज्ञान चक्षुओं से दिव्य चक्षुओं
- 22:26से निहारा, वह अपने हृदय में बसा लो।
- 22:35रात को सोए, ताजगी मिले अब दिन को सोना भी सीख जाओ आओ मैं तुम्हे
- 22:41दिन में सोना, पाताल की गंगा, पाताल की गंगा।
- 22:53ब्राह्मण चढ़ाई बा तहाँ विमल विमल जलपिया पाताल की गंगा ब्राह्मण
- 23:08चढ़ाई बा तहाँ विमल विमल जलपिया। दिन में कैसे सोऊ आराम से बैठ जाओ
- 23:35सुख आसन में बैठ जाओ, देखिए ध्यान रखना सवस्थ शरीर जरूरी नहीं है।
- 23:47रोगी शरीर भी पहुँच जाता है और सच बताऊँ रोगी शरीर जल्दी पहुँच जाता
- 23:53है। यह बात तुम्हें सुनने में अटपटी
- 23:56लगेंगी। मैंने आपसे सबसे पहले कहा कि तीन
- 24:03तरह के लोग होते हैं। पहले सबका मंगल होए रहे, दूसरा
- 24:12मेरा मंगल होए रहे, सिर्फ मेरा ही मंगल होए रहे और तीसरा दूसरे का
- 24:20अनिष्ट हो जाए, चाहे मेरा भी अनिष्ट हो जाए।
- 24:29तीसरे तरह के लोग हिटलर जैसे लोग होते हैं।
- 24:37पुतिन, हिटलर, जो पुतिन आज यहाँ हिंदू राष्ट्र में बैठे हैं।
- 24:51125 देशों के अक्यूस्ड हैं भगोड़े 125 देश उन्हें ढूंढ रहे हैं वो
- 25:06वहाँ जाता नहीं। उसने अपने डुप्लीकेट से पैदा कर
- 25:11लिए। किसी को पता ही नहीं चलेगा।
- 25:18पुतिन कौन? अगर नकली पुतिन के मन में बेईमानी
- 25:24आ जाए तो वह असली पुतिन को मारकर खुद बैठ जाएगा।
- 25:30पुतिन को इस खतरे का आवासी 125 देशों का भगोड़ा पुतिन भाई जो
- 25:46हिटलर बनेगा तो हिटलर हो के। अंजाम, इन लोगों ने देखें मसोलनी
- 25:53के अंजाम स्टालिन का अंजाम चंगेज का अंजाम इन्होंने देखा है तो फिर
- 26:01नई नई करकी में बचने की सोच लेते हैं।
- 26:05लेकिन एक बात याद रखना तानाशाह। जिसने सृजना की है, वो तुमसे
- 26:11ज्यादा होशियार है गौरख कहते हैं कि पहली तरह के व्यक्ति बन जाओ,
- 26:30खुद भी उस भ्रमण में चले जाओ में चले जाओ।
- 26:38जहाँ ब्रह्मानंद का शिक्षा लगता है, भर भर प्याले पियो, इससे बड़ा
- 26:49सुख परमात्मा की संरचना में। पाताल की गंगा ब्राह्मण चढ़ाई वो
- 27:19अब आ गया असली शब्द जिसकी बाट में जोह रहा था मेरी जितनी भी वीडियो
- 27:31आज तक आयी उनका साथ। पाताल की गंगा ब्रवंड चढ़ाए हो,
- 27:42ये लोग पूछ लेते है बाबा पहले आप कहते को भीतर जाओ, शास्त्रों में
- 27:50लिखा है की तुम ऊपर भ्रमण में जाओ।
- 27:521000 और दल कम्बल में जाओ, यह क्या?
- 27:56गोरख जिंदा है। मैंने कहा ये गोरख जिंदा ही है।
- 28:02ये गोरख के ही शब्द हैं जो सब जगह रुटेट हो रहे हैं।
- 28:10भ्रमण की गंगा? को पियो जाट शुरू कहाँ से करूँ
- 28:19पाताल की गंगा से पाताल की गंगा ब्राह्मण चढ़ाईबो वेल जदवी में ली
- 28:32है फर्ज़ा। तेरे मुख दी किताब ले बैठे संसार
- 28:38में कर्तव्यकर्म भी होते हैं सत्य और नहीं तो शरीर की पालना तो करनी
- 28:45ही होती है तो मैंने तुमसे कहा वेल जद भी।
- 28:53मिली ये फर, सातों तेरे मुख भी किताब विलय जैसे ही तुम्हे फुर्सत
- 29:12के लम्हे। मिले तेरी मुख दी किताब ले बैठा
- 29:19अपने भीतर उतर जाओ, क्या करना है कोई राम राम नहीं, कोई पांच नाम
- 29:26नहीं देखो मैं तुम्हें फिर से आगा ये लुटेरे हैं।
- 29:31यह व्यापारी है। ये ठग हैं इनकी ठगी को तुम चलाते
- 29:44हो जैसे ही तुम्हे खसत मिले। वैसे ही तुम कुछ न कहो, न पाठ न
- 29:56पूजा, न तप, न जाप, न शोड़ सूप, जार पूजन, न भोग लगाना, कुछ नहीं
- 30:06करना, मूर्ति खाती कभी। आज अमृत की धारा रसातल में चली गई
- 30:18है। जीसको पीने के लिए तुम पुष्प हो।
- 30:25परमात्मा ने यह सृष्टि को बनाई यह सृष्टि बनाई उस अमृत का भान करने
- 30:30के लिए। और तुमने उस अमृत को रसातल में
- 30:35धकेल दिया, पाताल में धकेल दिया पाताल की गंगा ब्राह्मण चढ़ाई हो,
- 30:49हमारी नाभी के पास कुंडलनी शक्ति। उसमें अमृत भरा पड़ा है यानी उसका
- 31:00कनेक्शन अमृत के साथ है। उस अमृत के कुंड के साथ उस अमृत
- 31:07के सरोवर के साथ उस कुंडालिनी का संबंध है।
- 31:12जीस अमृत के कुंड से कभी अमृत खत्म नहीं होता, कभी कम नहीं
- 31:18होता। उसके साथ कुंडलिनी का कनेक्शन है।
- 31:24अगर तुम इस कुंडलिनी को जगा दोगे और देखिए।
- 31:29कोई परिश्रम करने की आवश्यकता नहीं।
- 31:32यह बड़े मज़े की बात है। मूडो ने मूर्खों ने न जानने वालों
- 31:39ने, न अभ्यास करने वालों ने जिनकी जगह नहीं कुंडलनी।
- 31:44सिर्फ भ्रम पैदा कर दिया। बहुत से लोग मेरे पास आते हैं।
- 31:47बाबा मेरी कुंडली तो 68 में जग गई थी 68।
- 31:54मैंने फिर कहा हुआ फिर आगे पता नहीं कहाँ रुक गए।
- 32:01वह ब्राह्मण में चढ़ी ही नहीं। मैंने चपुत्रे वो जगी ही नहीं
- 32:10क्योंकि कुंडल नी जगने के बाद 3 मिनट से ज्यादा नहीं लगते।
- 32:15सहस्रार में जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा 3 मिनट।
- 32:3172 24 मिनट की एक घड़ी होती है तीन घड़ी से ज्यादा नहीं लगता
- 32:52क्षमा करना यहाँ थोड़ा सा उलट हो रहा है पाताल की गंगा?
- 33:04ब्राह्मण चढ़ाई पहले भी तो पहले तुम रसातल में खुद जाओगे, रसातल
- 33:18में कौन जा सकता है, जो निर अहंकारी हो?
- 33:25मिट्ठ नी हुए नान का गुण शंग है। यहाँ तक उस अमृत को पीने के लिए
- 33:34अंजलि बांध लो और अंजलि बांधो को झुकना पड़ता है।
- 33:42पहले नमन करोगे? झुकोगे तो जैसे जैसे झुकोगे वैसे
- 33:51वैसे तुम अपने भीतर उतरोगे। और जैसे जैसे तुम भीतर उतरोगे रस
- 34:01गाना होगा, फिर तुम कुंडलिनी के पास पहुँच जाओगे।
- 34:08जब तुम कुंडलिनी के पास पहुँच जाओगे तो कुंडलिनी जब जाएगी।
- 34:16इसका एक आसान फॉर्मूला मैंने बाबा ने बताया था, मुझे मैंने आपको
- 34:23बताया हुआ है लंबे लंबे सांस लो छोड़ो, नाक से लो, मुख से छोड़ो,
- 34:31नाक से साँस लो, मुख से छोड़ो। नाक से स्वास्थ लो मुख से सो 1
- 34:40घंटे के लिए अगर तुम यह करो सुबह शाम तो यह तुम्हारी कुंडलिनी
- 34:46जागरण में बड़ी मदद करेगी। दिन भर शांति बनी रहेंगी, लेकिन
- 34:52एक बात का ख्याल रखना। इस स्वास्थ्य को लेने में और
- 34:57छोड़ने में जो धूल उठेगी तुम्हारे चेतन मन में उसके साथ तुम एकाकार
- 35:03मत बजाना काम भी उठेगा, भय भी उठेगा, आक्रोश भी उठेगा, लोप भी
- 35:08उठेगा, मुँह भी उठेगा, तुम उसके साथ चिपट मत जाना।
- 35:13अगर चिपट गए तो अपने जीवन को नर्क बना दोगे जहाँ इसलिए सन्तु ने कहा
- 35:18भी आ गया जागो जागो कहूं जब यह भीतर का अचेतन खाली होने के लिए
- 35:32धूल। तुम्हारे चेतन में जाएगी तो तुम
- 35:36उसके संग हो लेते हो, तुम स्थिति प्रज्ञा नहीं रह पाते, तुम सिथर
- 35:42नहीं रह पाते, तुम इसके संग हो लेते हो इसलिए काम उठे तो तुम काम
- 35:47को घोल लेते हो। क्रोध उठे तो तुम क्रोध कर लेते
- 35:52हो। यह पशु ता है, इसमें मनुष्यत्व
- 35:57ज़रा भी नहीं है। पशु ऐसा ही करता है, भूख लगती है
- 36:08तो किसी की भी रेडी के ऊपर मुँह मार लेता है।
- 36:12ये पूछता थोड़ी है कि ये किसके बाप की सब्जी मंडी में देखता हूँ,
- 36:17बड़े सांड फिरा करते हैं, किसी की बरेड़ी में जाके मुँह मार लेते
- 36:22हैं क्यों? उन्हें भूख लगी है।
- 36:29जब कामग्रस्त होते हैं तो काम को भोग लेते हैं।
- 36:33जब क्रोध में होते हैं तो लड़ने लग जाते हैं आपस में तो जब तुम उस
- 36:41कुंडली से तुम्हारे श्वार से टकराई तो इस चोट से तुम्हारी
- 36:50कुंडली शक्ति जग जाएगी। यह हो गया पाताल पहले तुम्हें
- 36:58पाताल में ही करना पड़ेगा स्वास्थ को भीतर खेचो नार्क से खेचो पूरी
- 37:09खेचो। परमात्मा ने पूरा फेफड़ा दिया है
- 37:13तुम्हें तुम 1/4 का उपयोग करते हो बाकी पूरा छोड़ देते हो उपयोगी
- 37:21नहीं करता पूरा श्वास खचो नाक से श्वास खचो से छोड़ दो इसे क्रिया
- 37:30योग का नाम दिया मैंने। 1 घंटे तक तुम करो या फिर जीतने
- 37:39तुम्हारा सामर्थ्य है उतना करो, लेकिन एक बात का ध्यान रखो खींचना
- 37:50है नाक क्योंकि नाक में। एडा पिंगला और सुसुमना का खेल है।
- 37:58ये लंबी बात है। फिर कभी सुन रहा हूँ नाक के दोवें
- 38:03नोस्टिल से एडा पिंगला और सुसुमना का खेल है।
- 38:11नाक से सांस लेना है, मुँह से छोड़ देना।
- 38:18इस श्वास की चोट से तुम्हारी कुंडली शक्ति पर प्रहार होता है
- 38:28और इस प्रहार से तुम्हारी कुंडली शक्ति जग जाती है।
- 38:34जब तुम नाक से सहस लेते हो तो सहसरात पर चोट पड़ती है।
- 38:43यह जब तुम छोड़ते हो की आवाज़ करके तो तुम्हारी कुंडली पर
- 38:52प्रहार होता है। और ये दोनों ही बिंदु हैं।
- 39:00एक ही धागे के दो छोर एक छोर है। कुंडली एक छोर है सहसरा दोनों को
- 39:10ही जगाना है। इस चोट से जैसे ही कुंडली जगेगी,
- 39:19हमारा शरीर भी काँपेगा तुम्हें भय भी लगेगा और उसके कारण तुम्हारे
- 39:28भीतर का रेत जो। अचेतन में छुपा हुआ है वो चेतन
- 39:33में आ जाएगा, क्रोध भी आएगा, वह भी आएगा, काम भी आएगा।
- 39:41लेकिन तुमने अब यह रहना है, यह सूत्र को खास याद रख लो।
- 39:51ध्यान बंद नहीं होना चाहिए। तुम्हारी तुम्हारी एकाग्रता नहीं
- 39:56टूटनी चाहिए। तुम जागते रहो, सो मत।
- 40:03इसे योग निद्रा कहते हैं। उसके साथ योग हुआ।
- 40:10उसके साथ युक्ति हुई और तुम्हें निद्रा से भी ज्यादा आनंद मिलेगा।
- 40:21पाताल की गंगा? पे चोट करो कुण्डली पे चोट करो।
- 40:30ब्राह्मण चढ़ाई हो तो वह जब जगेगी तो तुम्हारे मेरु दंड में से सारे
- 40:38चक्रों का आवेदन करते हुए। सहसरार में ब्रह्म यंत्र में
- 40:43प्रवेश कर जाएगा और ब्रह्म यंत्र पर चोट पड़ पड़ कर वो पहले से ही
- 40:50सारे व्यवधान वहाँ साफ कर चूके हो तुम क्योंकि ये स्वास्थ्य की
- 40:55क्रिया दो तरफ़ा चोट है। एक तरफ़ा चोट कुंडली में एक तरफ़ा
- 41:02चोट दूसरी ब्रह्मरेंद्र में कुछ हमने ब्रह्मरेंद्र के पास से खाली
- 41:09किया जो बाधा था कुछ हमने कुंडली के पास से खाली किया जो बाधा था
- 41:15तो एक रास्ता बन गया ताकि कुंडली जगे।
- 41:19तो वह तीव्र वेग से जगेगी और 3 मिनट के भीतर भीतर यह कुंडलिनी शु
- 41:35शुभ ना के द्वारा ब्रह्मरेंद्र में पहुंचाएगा और कुंडलिनी में
- 41:43चेतना। मैं पहले भी बताया था कुंडली में
- 41:49रस भरा पड़ा है और उसका कनेक्शन है समुद्र के साथ जो रस का समुद्र
- 41:56है तुम्हारी कुंडली का जो फ्यूज जुड़ा है।
- 42:06वो उस सागर से जुड़ा है जिसे परमात्मा कहते हैं।
- 42:13जब तुम्हारी कुंडली जगेगी तो उसकी शक्ति खत्म होने वाली नहीं है,
- 42:19क्योंकि उसकी शक्ति अनलिमिटेड है। वो शक्ति जब जगेगी तो उसका जो
- 42:27फ्यूज है वो मिला हुआ है समुद्र के साथ जो कभी खत्म नहीं होता।
- 42:34इसी के बारे में बात कही है अपने क्षेत्र में।
- 42:45पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लिया जाए, वो भी पूर्ण ही शेष बचता है।
- 42:51पूर्ण से पूर्ण माताएं पूर्ण मेवा विशेष के तुम सारे भी अपनी कुंडली
- 42:58को जगा लो, जीतने भी मानुष हो, मानुष के अतिरिक्त।
- 43:04किसी अन्य पशु की कुंडली नहीं जागती होती।
- 43:09नहीं तो तुम सारे मानव आठ अरबों के इससे ज्यादा हो।
- 43:20अगर सारे यक् सांक अपनी कुंडली को जगा लें।
- 43:25तो आपका सब के भीतर का रस जग जाएगा और ब्रह्मवंद्र में चला
- 43:32जाएगा और उस समुद्र में ज़रा भी फर्क नहीं पड़ेगा।
- 43:37क्यों फर्क नहीं पड़ेगा? अब अब आज मैं तुम्हें इस रहस्य को
- 43:41खोल दूँ हैं गहरा। समुद्र में से रस जाएगा तुम्हारे
- 43:50सहसरा में और सभी के कुंडलिनी जगल तो समुद्र में से रस गया हमारे
- 44:02ब्राह्मणन्द्र में सहसरा में। तो तुम क्या समृत्य हो के समुद्र
- 44:12का रस कम हो जाएगा नहीं कम नहीं होगा क्यों क्योंकि जहाँ रस जाएगा
- 44:22वहाँ भी वो ही है, वहीं वहाँ भी उसका ही समुद्र है।
- 44:29ही इज़ प्रेसेंट एव्रीवेयर एक समुद्र वो जहाँ से उठेगी शक्ति
- 44:38कॉन्शसनेस और पहुंचेगी ब्रह्मरद्र लेकिन वह भी परमात्मा का।
- 44:46ही फैलाव है, यह सारा समुद्र है अनंत विश्व ब्राह्मण ये सारा
- 44:52समुद्र है जाएगा कम समुद्र की चीज़ समुद्र में ही समा जाएगी।