Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Apr 26 - अनाहत नाद क्या है और यह हमें क्या संकेत देता है? नाद को और ज्यादा देर तक कैसे सुनें?
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- 0:11बाबा जी प्रणब आपने 5 अप्रैल को दर्शन दिए हैं, मुझे अन्नदनाथ
- 0:31सुनाई देता है। लेकिन जितनी देर मैं चाहती हूँ
- 0:40उतनी देर सुनाई नहीं पड़ता। कुछ ऐसा उपाय बताइए इस नाद की?
- 0:51बैठी सुरीली आवाज के भीतर मैं दिन भर रात खोई, क्योंकि मैंने अपने
- 1:04ही भीतर बहुत गहरे जाना है उस स्तर पर जहाँ कि मैं स्वयं।
- 1:24सविता आहूजा गिलस संसार को पाने की इच्छा सिर्फ
- 1:44इच्छा नहीं होती। परमात्मा को और आनंद को पाने की
- 1:51इच्छा भी इच्छा होती है। तुम कहोगे फिर बाबा अगर इच्छा
- 2:06नहीं जगेगी तो चलेंगे कैसे? प्यास के कारण यूं ही कोई पानी की
- 2:27तलाश में नहीं निकला करता। यूं ही कोई भोजन की तलाश में नहीं
- 2:35निकला करता। पेट भूखा होता है।
- 2:44जकंठ सूखा होता है तो पानी की तलाश आरंभ होती है, भोजन की तलाश
- 2:56आरंभ होती है। समझे फर्क लगेगा बड़ा सूक्ष्म है
- 3:08बड़ा कहना परमात्मा को पाने की इच्छा तो तुम्हारी डेरों में भी
- 3:21हो सकती। किसी भी गुरु के पास हो सकती है,
- 3:31किसी को भी देखकर हो सकती है मदमस्ती में झूमते हुए।
- 3:42ना झकती हुई मीरा को गाते हुए नानक को सुरती में लीन कबीर को
- 3:51देखकर हमारे मन में इच्छा हो सकती है।
- 3:59कि मैं भी इन जैसा बनूँ लेकिन ध्यान रखिएगा ये मात्र इच्छाएं
- 4:14हैं तुमने कभी देखा? तुम रोज़ जीस डॉक्टर की दुकान से
- 4:25आगे निकल जाते हो 1 दिन तुम घर से सोचकर दुकान पे जाते हो डॉक्टर के
- 4:35पास और उसी दुकान से रोज़ निकले से बाजार में से।
- 4:43क्या फर्क हो गया? आज तुम्हें कोई शारीरिक कष्ट है
- 4:55जिसके कारण तुम डॉक्टर के पास गए हो।
- 5:00अन्यथा की दुकान तो हमने बहुत बार नागी थी।
- 5:06फिर आज अचानक इस डॉक्टर के पास जाने की विरोध क्या पड़ गई?
- 5:17रोक था। कोई कष्ट था, तकलीफ था, शरीर का
- 5:21रोग था या मनुष्य का रोग था। अपने भीतर जाने की इच्छा अगर
- 5:42तुम्हारे भीतर से पैदा होती है। तो बड़ी शुभ है मेरे पास बहुत से
- 5:55लोग आ जाते हैं बाबा 2530 35 साल से अनाधनाध्य चल रहा है।
- 6:09और हमें पता ही नहीं है। यह अनंतनाथ की आवाज बेहतर से उठे,
- 6:30लेकिन तुम्हें प्यास नहीं दिखी। जीस दिन तुम्हें प्यास जगेगी तुम
- 6:39इस नाद को शांति से बैठके सोने लगोगे।
- 6:46ये दो चीजें मैंने पहली भी बताई थीं।
- 6:51अलग नामों का जिक्र कर के श्रद्धा और मार्ग श्रद्धा उत्पन्न करेगा।
- 7:03नाथ मार्ग तय करोगे तुम? बहुत से लोगों के नाद सुनाई पड़ता
- 7:18है। नाद सुनाई का मतलब यही है कि
- 7:22परमात्मा ने उन्हें चुन लिया है, वो चाहें तो आ सकते हैं।
- 7:36तुमने परमात्मा की परीक्षा पास कर ली है अब अगर तुम 20 साल 30 साल
- 7:46गलत मार्ग भटक जाओ मंदिरों गुरुद्वारों मस्ज़िदों में माता
- 7:53टीको। तो रास्ता तुमने रथ पकड़ा है, अगर
- 8:03अनाथ जगा है तो परमात्मा ने तुम्हें भीतर से पुकारा है और
- 8:10परमात्मा आवाज दे रहा है। कि आ जाओ जहाँ से मैं पुकार रहा
- 8:19हूँ, वो ही मेरा नमाज़ सटल है और वहीं तक आ जाओ और मैं तुम्हें
- 8:27तुम्हारे भीतर से पुकारना बिलकुल साफ है।
- 8:42आनंदनाथ का पैदा होता है। प्रथम तो यह बताता है कि
- 8:54ब्रह्मात्मा ने तुम्हें चुन दिया है, काहे के लिए आनंद का रेसिपी
- 9:01पीने के लिए। अब तुम जा सकते हो उसकी तरफ और
- 9:14तुम देखो नाद एक बार शुरू हो जाए फिर वो कभी बंद नहीं होता।
- 9:29आज नाज पर बोलने वाली तो बहुत है लेकिन बड़ी मुश्किल ये है आज के
- 9:39जमाने में कि ऑथेंटिसिटी किसके भीतर है?
- 9:50तुम किसी के पास भी चले जाओगे, नाद के बारे में पूछोगे, वह
- 9:54तुम्हें बता देता हूँ और वह जानता होगा नहीं, उसके खुद के नाद शुरू
- 10:01नहीं। उसने वो मधुर स्वाद का रस पिया
- 10:08नहीं। लेकिन वो तुम्हें सब बता देगा।
- 10:14यह सूचनाओं की तरह है। जैसे हम कहते हैं कि एच टू वो
- 10:20पानी होता है, यह मात्र सूचना है और जैसे कोई तुम्हें सोना के पास
- 10:26ले जाए। के वे देखो ऐसे टू वो है भरा हुआ
- 10:30है इतना विशाल फर्क है दोनों में तो पुत्री तुमने प्रश्न पूछा कि
- 10:47नाद में जाती हूँ? घंटों घंटों बैठी रहती हूँ, मस्त
- 10:52रहती हूँ, उस रस को पीती हूँ, वक्त कब गुजर जाता है, कोई पता
- 10:58नहीं चलता, लेकिन मैं इसमें और ज्यादा देर तक बनी रहना चाहती
- 11:07हूँ। शुभ विचार और सटीक भी सटीक क्यों?
- 11:21क्योंकि जो पिएगा उसमें पीने की प्यास और बजिए।
- 11:27बढ़े यही निशानी जिसमें एक बार उस रस को पिया, उसके पीने की तमन्ना
- 11:44बढ़ती गई। और फिर तो वह सागर तक पी लेता है।
- 11:56छोटी मोटी बूंदों से या प्यालों से उसकी प्यास नहीं होती।
- 12:06फिर 1 दिन ऐसा होता है। कि उसको समुद्र ही पीना पड़ता है।
- 12:20तुम्हारा रास्ता बिलकुल ठीक है, बैठी है और तुम्हारी प्यास भी
- 12:24बिलकुल ठीक है। प्यास बताती है कि और पीना और रस
- 12:35बताता है कि तुमने उसे पी लिया है।
- 12:47किसी गुरु की आवश्यकता नहीं मत भट्ट को तीर्थ क्षेत्रों में।
- 13:06मत वटको हरिद्वार ऋषिकेश में इन धामों में इन तीर्थस्थलों में एक
- 13:24कावा मक्का मशीन। यह है मनुष्य की बनाई हुई है,
- 13:37लेकिन मैं तुम्हें एक बात कहता हूँ ये मूर्तियां, ये मंदिर ये
- 13:46गुरुद्वारा, ये तीर्थ। सब मैं मेड लेकिन पुत्र अनंतनाथ
- 13:58मैं मेड यह परमात्मा का बनाया हुआ है इसीलिए।
- 14:09गुरु तुम्हें धोखा दे सकता है। गुरु लालची हो सकता है।
- 14:19गुरु क्रोधी, कामिल, लोधी मोहग्रस्त हो सकता है।
- 14:27परमात्मा का ये आनंद नद नहीं हो सकता, यह विशुद्ध है, यह तुम्हें
- 14:37रुखा नहीं देखा है क्योंकि यह विशुद्ध विशुद्ध।
- 14:46तुम्हारे ही भीतर से प्रकट हुआ है, इसलिए जैसे ही नाद शुरू हो
- 14:54जाए गुरु की तलाश छोड़ दी नहीं। गुरु लोभी, गुरु, लाडची गुरु,
- 15:16चंचल गुरु चोर। जब बाखते गुरु आज लोभियों की कतार
- 15:34बैठे है, लारीचियों की कतार बैठे है, चोर बैठे हैं लुटेरे बैठे।
- 15:51इन्होंने उस रस को पिया नहीं, यह रूखे सूखे आनंद के रस के बिना
- 16:03सिर्फ वोकबुलरी इकट्ठे कर। तुम्हें गीता भी पढ़ाएंगे, उपनिषद
- 16:12भी पढ़ाएंगे, वेद भी पढ़ाएंगे, अष्टा व का गीता भी पढ़ाएंगे।
- 16:19हर प्रश्न का जवाब देते हैं और खुद की ज़िन्दगी भी बर्बाद कर
- 16:26लेंगे। पुत्री तुमने पूछा कि ललक बढ़ती
- 16:40जाती है। बहुत अच्छा संकेत है यह वो रहस्य
- 16:50है। जो कितना भी पीए जाओ प्याज बढ़ती
- 16:59जाती है। हर बूँट के बाद भीतर से काम न और
- 17:09उठती है। थोड़ा सा और पी लो।
- 17:17मन उठने को नहीं करता। मेरे पास हर तरह के मेसेजेस आती
- 17:28हैं। बाबा मन भटकता है, ज्यादा देर
- 17:33बैठा नहीं जाता। फिर आखिर में थक हार, चूरकर,
- 17:41रूखे, रूखे, सूखे सूखे खड़े हो जाते हैं, वह रस मिलता नहीं और
- 17:55पुत्रे तुम्हे तो ना ही सुनाई पड़ने लगता है।
- 18:01यह तो परमात्मा ने तुम्हें पुकार यह पुकार है और ध्यान रखना, यह
- 18:092400 घंटे की पुकार है तुम सो जाते हो नाक नहीं सोता उसकी पुकार
- 18:18कभी नहीं सोती। क्योंकि वह सदा जागृत रहता है, वह
- 18:24ना मूर्छित होता है, ना सोता है। वह सदा जगता है टोटली अवेयर और
- 18:38पुकारना रहता है। यद्यपि तुम ही उससे दूर निकल जाते
- 18:45हो निद्रा कारण लेकिन मैं तुम्हें ये नहीं कहता बेटे कि निद्रा को
- 18:55कम कर दो न। फिर तुम्हारे शरीर के ऑर्गन्स
- 19:02कमजोर हो जाएंगे। कानों की श्रणा शक्ति दिमाग की
- 19:11सोचिन शक्ति पर प्रभाव पड़ेगा। निंद्रा का काम लेना।
- 19:221000 रोगों को आमंत्रित करता है। दूसरा प्रश्न ले लूँ मैं बीच में
- 19:32बाबा अगर नींद का वक्त हो और मुझे किसी कारण।
- 19:45कोई जागरण में कोई संत महात्मा बोल रहा है, कोई सत्य संघ हो रहा
- 19:56है और मेरा वक्त तो सोने का है। और मुझे ना दिल शुरू हो गया तो
- 20:11मुझे बताइए मुझे उस सत्संग में जाना चाहिए या किसको जाना चाहिए?
- 20:26बड़ा भूत पुरुष वाले है तुमने तुम्हें पुत्र सो जाना चाहिए
- 20:34क्योंकि नींद परमात्मा की देर जागरण मनुष्य का दिन तुम सारी
- 20:43रात। डोल पिटोगे नाचों के चलाओगे भजन
- 20:51गुण गुणाओगे माँ माँ करोगे यह बकवास नींद परमात्मा के दिन?
- 21:03नींद परमात्मा ने बनाई इसलिए तुम परमात्मा की दांत की तरफ चले जाना
- 21:10शोषण फिर तुम कहती हो लोग नाराज हो जाएंगे, हो जाने दो।
- 21:22मेरा। रुसेना मेरा रुसेना कलगियाँ बाला
- 21:36के जग्पों में सारा रुसेजा है। मेरा रूसेना कलगियाँ वाला।
- 21:56जग पाएं सर रुसे। तुम सो जाना पुत्र ध्यान रखना,
- 22:09मैं सभी की बात। नहीं कर रहा हूँ।
- 22:13अगर कोई बीमार है। हॉस्पिटलाइज्ड और तुम्हें नींद आ
- 22:21रही है तो पुत्री तुम्हें पेशेंट के पास जाना अधिमान्य होगा।
- 22:36ये वक्त वक्त की बात है। मैन मेड चीजों को छोड़ देना
- 22:42बेफिक्र लेकिन जो शरीर पर आफत आई, व्यक्ति तकलीफ में हुआ।
- 22:53हॉस्पिटलाइज़्ड हुआ उसकी सेवा बंद की कारण क्योंकि तुम्हारा फर्ज इन
- 23:04दोनों चीजों को ध्यान से समझे। भूख लगी है और कोई कहत है?
- 23:17कीर्तन का आनंद उठा तुम कीर्तन को छोड़ देना पुत्रे तुम भूख को शांत
- 23:33करना पहले। क्योंकि कीर्तन तुम्हारे बनाए हुए
- 23:39पाखंड एक जगह से जाया करता था। वहाँ एक स्त्रियों की सशंग सभा
- 23:51फुल करती थी। आज भी हो।
- 23:59तो उन्होंने मुझे बुलाया। क्या आप कभी कभी बाबा एक बार
- 24:08दर्शन और एक बार मैं ज़रा वो भजन कर रहे थे?
- 24:21मैंने कहा क्या कर रहे हो कहती हम सत्संग कर रहे हैं, मैंने कहा
- 24:30पुत्र इनमे सत वर्ष कौन है? वो तो तर्रा सत पुरुष का संघ करना
- 24:45ही तो सत्संग कहलाता है। जिनके नाद शुरू हो गया है, उन्हें
- 24:51शायद पता भी नहीं होगा कि वो हर वक्त सत्संग में रहते हैं।
- 24:59सत्य की आवाज उनके भीतर से निरंतर प्रवाहित हो रही है।
- 25:08चौबीसों घंटे उस रसीली मथुर आवाज की टंका।
- 25:16उनको भीतर से उन्मादित कर रही है तो मैंने पूछा यहाँ सत पुरुष कौन
- 25:26है? कहते नहीं बाबा सत पुरुष तो यहाँ
- 25:31कोई नहीं है, इमानदार थी। अन्यथा कोई न कोई स्त्री खड़ी हो
- 25:38के क्या कि मैं पहुंची हुई, लेकिन ईमानदार लोग तो कहते देखो हम तो
- 25:49हर मंगलवार को इकट्ठे हो जाते। जहाँ हनुमान चालीसा पड़ते है जहाँ
- 26:00और भी भजन कीर्तन करते है, बस हम तो ऐसा ही सत्संग करते है इसलिए
- 26:14तो आपको बुलाया था? कि आप कभी कभी आकर वर्ष भर में एक
- 26:26आध बार आकर हमें अपने प्रवचनों से आलादित कर दिया था।
- 26:38ताकि हम सच्चे सत्संग का लाभ उठा सकें।
- 26:45मैं सद ही वहाँ से गुजरता रहा और सद ही वो मंगलवार को सत्संग करते
- 26:52रहे। और मैं वहाँ से गुजर जाता हूँ,
- 27:05सत्य पुरुष के बिना सत्य संख्या मैंने का पुत्रिय तुम तुम्हारा
- 27:16समय गुजारने के लिए आती हो। किसी की सास तंग करती होगी, घर पर
- 27:26किसी की बहू परेशान करती होगी, किसी का घरवाला पुत्र, पुत्री तंग
- 27:34करते हो और बहाना बढ़िया है सत्संग के बहाने।
- 27:40तुम 2 घंटे यहाँ गुजार जाते हो मनुष्य जीवन सर्वश्रेष्ठ है,
- 27:51निश्चित ही सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन पुत्री।
- 27:59इस संसार में हम समाज की व्यवस्था से बंध जाते हैं।
- 28:11इस संसार में आपका समाज हमारे साथ तानाशाह जैसा।
- 28:19व्यवहार करता है। तुम्हें पता नहीं होता तुमने समाज
- 28:27की बातों को चुपके चुपके से कब मान लिया और कब तुम समाज के हाथों
- 28:36के कष्ट, पुत्र? संत तुम्हें यही सखाता है आज तुम
- 28:44बहुत समाज की गृहस्थ से बाहर हो जाओ, तुम्हारा मन करता है।
- 28:58कि मैं इन नकली ढकोंसलों में नहीं जाना चाहती और ये कहते हैं कि अगर
- 29:06तुम सत्संग के ऊपर जागरण के ऊपर नहीं आएगी तो हम नाराज हो जाएंगे
- 29:14तो फिर हम भी नहीं आएँगे। तुम कह देना पुत्री के तुम मत
- 29:20आना, हम ऐसे डंकोसले करते हैं, आओगे तो तभी ना जब हम ऐसे डकोसले।
- 29:34यह बनावटी फूल है। हमने जान ली है ये परमात्मा
- 29:40तुम्हारी ही बनाव, हाथों की खूबसूरत तस्वीरें लेकिन आदमी भूल
- 29:50जाता है। खुज सो खुज रंग दाहिना तस्वीरा
- 30:18है, ये जान देओ कुज। रंग जे शोक जे रंग दाहिना तस्वीरा
- 30:38है। जद हठ इश्क।
- 30:46दी जा बैठे मल। कर बैठे तस वीराधा।
- 30:58कि पुश्दे हाल फकीराना। साडू नदियों बिछुड़े निरांधा।
- 31:12ये सब तुम्हारे बनाए हुए हैं डकोस में लेकिन भूल जाते हो ये जानते
- 31:20हो कुछ शोक जो है रंग का ही न तस्वीरा।
- 31:26जगह हट, इश्क दी जा बैठे मुलकर बैठे तस्वीरें तुम्हें पता ही
- 31:37नहीं चलता बचपन से आज तक। तुम समाज के गुलाम कब हो गए और
- 31:51समाज पागलों का सम तुम समाज में कभी विचार लेने मत निकलना पागल हो
- 32:02जाओ। क्योंकि कोई कहेगा परमात्मा है और
- 32:08उसने देखा नहीं होगा और कोई कहेगा वह नहीं है और उसने खोजा नहीं
- 32:16होगा। यह दोनों की मान्यताएँ न उसने
- 32:24देखा न उसने खोजा। दोनों ही मूर्ख तुम इनसे पूछना ही
- 32:32न? परमात्मा के बारे में समाज को पता
- 32:38भी नहीं होता। और जीस व्यक्ति को ब्रह्मात्मा का
- 32:43पता चल जाता है वो समाज में रहता है वो समाज से छिन्न भिन्न हो
- 32:52जाता है। उसको ऐसा रस तत्व में मिल गया।
- 33:02समाज में तो कड़वाहट है, समाज में तो व्यापार है, समाज में तो
- 33:11हजारों गर्दीशी हैं। लेकिन जीस परमात्मा को उसने पाया
- 33:20वह पुत्री मधुर आनंद है रस है आनंद नाथ का उसमें मेरी शिष्य,
- 33:29मेरी शिष्य ही मुझे पूछती है अब हम क्या करें?
- 33:35तुमको किसी ने गुलाम नहीं बनाया, तुम समाज के गुलाम कब बन गए?
- 33:43तुम्हें पता भी न चला इसलिए समाज की बातों को छोड़ दो।
- 34:00दूसरों से सहानुभूति प्रकट करना छोड़ दो, तुम कहोगे फिर हमारे से
- 34:09सहानुभूति प्रकट कौन करने आएगा? कोई जरूरत भी नहीं होती।
- 34:19मेरे जीवन में कितनी घटनाएं घटी, सहानुभूति घटनाएं कोई प्रकट करने
- 34:30नहीं आया। और मुझे उनकी जरूरत भी नहीं होती
- 34:37और किसी भी व्यक्ति को जरूरत नहीं होती।
- 34:41यह मात्र छल है, कपट है, दिखावा है, कोई किसी से सहानुभूति करके।
- 34:52भला उसकी गई हुई चीज़ वापस कर सकता है, नहीं कर सकता इसलिए समाज
- 35:02के गुलाम मत बनो समाज की इन जीर्ण शीण।
- 35:12गली, छड़ी, मान्यताओं को छोड़ दो और उस अवस्था में निकल जाओ जहाँ
- 35:23सुगंध ही सुगंध न कुछ न गलता है, जहाँ।
- 35:31ना सड़ता है वहाँ ना पुरातन होता है वहाँ जो नूतन होता है वहाँ
- 35:40वहाँ एवर फ्रेशनेस है, सदा ही सदा ही तरोताजा।
- 35:58सत संघ जाते हो तुम्हारा, नकली को सुनने जाते हो तुम्हारा नकली।
- 36:12मैंने एक संत को सुना, मेरे ही जमाने में ऐसे संत हुआ करते थे।
- 36:23मैं 171617 वर्ष का हूँ मौका। और हमारे धर्मशाला में यहाँ संत आ
- 36:33गए धव आखिरी दिन उन्होंने सत्संग किया, बड़ा प्यारा सत्संग करते थे
- 36:44उनकी आवाज में बड़ी बैठस। जब वो कहानी कहते थे तो हवाएं ठहर
- 36:53जाते थे, लेकिन अंतिम दिन समापन आया।
- 37:047 दिन का था उनका सत्संग। अंतिम दिन उन्होंने समाप्त किया
- 37:16और सुबह उनका कोई पता ना चला। लोग उनके पास उनके कमरे में आ रहे
- 37:26थे। लेकिन वो तो कमरे से गायब था, शोर
- 37:33मच गया। कानाफूसी होने लगी।
- 37:39यह संत कहाँ गायब, कुछ चोरी छुपोरी तो नहीं करके भाग गए?
- 37:48लेकिन नहीं किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं की।
- 37:55साँझ पड़े वो फिर आ गए, लोगों ने प्रणाम किया।
- 38:04लोगों ने पैसे टेकने शुरू किए के प्रभु आपने कल इतनी श्री कह दिया
- 38:13था तब दक्षिणा भेंट तो ले जाओ और संतों की बात मुझे आज तक याद है।
- 38:24दो संतों का नाम मुझे याद नहीं। आज वो कहने लगे, देवियो प्रभु।
- 38:39शरीर को जो जरूरत होती है आपने बहुत अच्छे से मुहैया कराया।
- 38:44सुबह है शाम दो वक्त का खाना शरीर को वस्त्र की जरूरत होती है।
- 38:52तुमने मुझे वस्त्र दिए डालने के लिए स्नान करने के लिए जल दिया।
- 38:59आराम करने के लिए बिस्तर दिया। बस यही तो जरूरत होती है, फिर
- 39:12पैसे ठीक नहीं क्यों आया? लोग तो बड़ा हैरान हैं।
- 39:25लोग कहते बाबा यह तो संत जब जाते हैं, समापन वेला में हम सभी
- 39:34उन्हें श्रद्धानुसार भेंट करते हैं।
- 39:39संत कहते नहीं। ये तो मैं कुदरती आ गया।
- 39:44एक गुरु साहिब से ये मेरे गुरु जी अपनी लठियां भूल गए थे।
- 39:52वृद्ध थे तो लठियां के सहारे चला। और फिर सोचा कि किसी से भी क्या
- 40:00मांगेंगे? वहीं धर्मशाला में जाके उठा ले
- 40:05आते हैं। अभी ही तो किसी ने नई नई लाके दी
- 40:12है तो लठिया उठाने आ गए। अन्यथा हम कोई पैसा ले रहे नहीं
- 40:18है और उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया।
- 40:25खो गए आज ऐसे संत ना उन्हें मान चाहिए था, उन्हें ना प्रतिष्ठा
- 40:33चाहिए थी। न धन चाहिए था, जो जरूरत थी वो
- 40:37कहते हमें खाना चाहिए था, आपने बड़ा सुंदर खाना या पुष्प मुझे
- 40:45वस्त्र चाहिए थे, आपने मुझे गेरुआ वस्त्र माहिया कराये।
- 40:52स्नान करने के लिए जल की आवश्यकता थी।
- 40:56आपने हमें जल दिया, पीने के लिए जल दिया चाय हम पीते नहीं दो वक्त
- 41:07का खाना खाते हैं सो तुमने बहुत बढ़िया से वहैया कराया।
- 41:16संत इसका नाम है संत मेरे सामने की बात है ये।
- 41:30नो दसवीं के दसवीं पढ़ता होगा। मुझे पक्का याद नहीं, संत ऐसे भी
- 41:43होते हैं, लेकिन आम आदमी भ्रम में पड़ जाएगा।
- 41:48आम आदमी तो कथा कहने वाले को संत ही मान बैठे।
- 41:55जब कि ये किशोरियां जब बूढ़ी हो जाती हैं तो इनकी वास्तविकता
- 42:02सामने आती है। फिर से कहते हैं, ठीक है, मेरा
- 42:09खर्चा उठा लो, मैं तुम्हारे से शादी कर लूंगी।
- 42:13यह तो व्यापार हो गया, इसका मतलब तुमने भगवान से भी व्यापार किया
- 42:21होगा। जिसके गीत गुनगुना के तुम रोया
- 42:27करती थीं, क्या वो जाली जा रही थी?
- 42:30क्या? वह पैसे बटोरने का एक डंगा मात्र
- 42:33था। ऐसा ही था इन किशोरियों की अपनी
- 42:40बात सुनाएँ होती थी। हम तो घड़ी के बिना चला लेते हैं
- 42:46क्योंकि वक्त गुजर जाता है, पता ही नहीं चलता और वक्त की जरूरत भी
- 42:51क्या है? तो फिर घड़ी की क्या आवश्यकता है?
- 43:00इनको तो मोबाइल चाहिए बिलकुल। लास्ट मॉडल का फ्रेश मॉडल और वो
- 43:12भी चाहिए सबसे बढ़िया एप्पल का। मॉडल यही जो नया निकला है आवाज
- 43:31सुनाई मरी नहीं तुम ऐसे लोगों से परमात्मा की गाथे सुनने निकल गए।
- 43:42एक संत का वचन है। इच्छाएं बहुत हैं तो खुदाई हैं
- 43:47क्षमा करना। इच्छाएं बहुत हैं तो रुलायी हैं
- 43:54तो इन देवीयों की इच्छा बहुत होती है।
- 43:56मैंने पहले भी कहा था। आपको शायद याद ना हो लेकिन
- 44:03जिन्होंने मेरे शब्द सुने होंगे आज फिर सुन लें और खुद तसूरी सुन
- 44:15लें यह इस स्त्री की भी, कभी ज़िन्दगी में किसी से।
- 44:19समझौता नहीं कर पाए थे क्यों? क्योंकि इसकी अपनी वासनाएँ बहुत
- 44:29ज्यादा है। जो व्यक्ति झूठी कहानियों कह के
- 44:35लोगों से लाखों करोड़ो रुपए ठग लेता है।
- 44:40उसकी वासनाएँ कितनी होगी? आप अंदाज लगा सकते हैं और मैं
- 44:49तुमसे कहता हूँ। दिखावे के कारण शायद के हम बाबा
- 44:55को गलत करते हैं। जैसे वो जोड़ा भीतर से जूट पटांग
- 45:02हो के आता है बाहर मेकअप करके हंसते खेलते हाथों में हाथ
- 45:09ताड़ियाँ बजाते हुए बाहर निकलते हैं दिखावे के लिए तो तुम कर सकते
- 45:14हो। लेकिन सच में तुम खुश नहीं हो
- 45:17पाओगे कारण कारण इच्छाएं बहुत हैं और इन इच्छाओं को पूरा करने के
- 45:30लिए ही धन एकाग्र दिया। अन्यथा धन संग्रह करने की
- 45:36आवश्यकता क्या थी? धन संग्रह करने की आवश्यकता?
- 45:44तभी तो आई के इतनी इच्छाएं पूरी भी तो करनी है।
- 45:55तो वक्त रहते खूब घना जोड़ दूँ तो सारी उम्र ये गाथाएं कहती जाती
- 46:16हैं। जवानी में आदम के वास्ते सामान
- 46:24करगा फील अभी जवानी है अभी इकट्ठा कर।
- 46:31अभी गालों पे लाली है, अभी फ्रेशनेस दिखती है, फिर जुड़ ना
- 46:36जाएगी। मुसाफिर सब से उठती हैं, जो जाना
- 46:44दूर होता है। तो ज्यादा आम कक्षाएं पूरी करनी
- 46:51हैं। इसलिए ज्यादा धन की और सामग्री की
- 46:54आवश्यकता पड़ेगी। इच्छाएं बहुत हैं तो रो लायी हैं,
- 47:07इच्छाएं कम हैं। शहनशाही तुम अपने भीतर खंगाल के
- 47:16देखन कि अगर तुम्हारे ये शरीर के कपड़े फटे हों, तो क्या तुम रोने
- 47:25तो नहीं लगोगे? नहीं संत नहीं रोएगा।
- 47:31संत कहेगा तन धन तन ढकने को कपड़ा चांदी जो मैला न हो, मैला हो तो
- 47:42हम दो रहेंगे, खाने को भोजन चाहिए जैसा भी हो।
- 47:53बुध तख्तों ताज को लात मारकर भिक्षा पत्र उठा लेते हैं और उनके
- 47:59पास कोई टाइम टेबल नहीं होता। क्या ब्रेकफास्ट में क्या लेना,
- 48:03लंच में क्या लेना? टी ब्रेक में क्या लेना और डिनर
- 48:08में क्या लेना और रात को सोते वक्त क्या लेना?
- 48:13सब को लात मार के निकल गए क्योंकि भीतर वो उमंग थी जो देवी तुम्हारे
- 48:20भीतर है। कि मैंने और गहरा जाना है।
- 48:27बिलकुल सही रास्ते पर होते हैं यह और पीने की तमन्ना जिसने पी लिया
- 48:35है, थोड़ा सा उसी के बढ़ती है। जिसने थोड़ा सा रस वो पी लिया है
- 48:49और ज़रा। सी दे देसा की और ज़रा सी और और
- 48:56ज़रा सी दे देसा की और ज़रा सी और।
- 49:02कैसे रहूं चुप के? मैंने पी ही क्या है होश।
- 49:09अभी तक है बाकी और ज़रा सी दे हिस्सा की और ज़रा सी।
- 49:20तो मांगते ही रहोगे। मर्ज बढ़ता ही गया जूं जूं दबा के
- 49:30जैसे जैसे तुम घूँट भीतर उड़ेलोगे प्यास और घनी हो जाती।
- 49:37यह तो बड़ा प्यारा है यह तो बड़ा स्वादिष्ट।
- 49:42इसको तो और पीने की कामना जगेगी। तुम्हारा ठीक है कृष्ण तुम्हारी
- 49:52प्यास भी सही है तो पुत्री तुम सिर भाव से शीतल भाव से बैठ।
- 50:02रिलैक्स कंप्लीट्ली यूरसेल्फ़ छोड़ दो सब कुछ क्योंकि यह सब तुम
- 50:09नहीं हो यह ढांचा यह शरीर, तुम नहीं यह विचार यह भावनाएँ।
- 50:26यह सारा न्यूरोन से भरा हुआ ब्रेन मन, बुद्धि, चित्र, अहंकार, यह
- 50:33तुम नहीं पाँचों करभेन्द्रिया तुम नहीं।
- 50:42और पाँचों क्या रहने नन्द्रे वे तुम नहीं हो, धीरे धीरे तुम्हें
- 50:49पता चल जाएगा कि जब ये सारे शून्यता की तरफ बढ़ते जाएंगे, तब
- 51:00ये एक होश की किरण ज्वाला भीतर। जल्दी ही रहेंगी चौबीसों घंटे वो
- 51:05होश के द्वारा क्या है? अनंतनाद अनंतनाद होश के उस तर से
- 51:14आता है जहाँ तुम्हारा स्वय का वजूद मौजूद है।
- 51:24बाहर से आती है ये आवाज़ इसलिए मैंने पहले दिन ही जब अनहत नाद का
- 51:361.75 घंटे का प्रविशन किया। तो उसमें बताया कि अगर नाद जग गया
- 51:46तो परमात्मा ने तुम्हें पुकार दिया तुम चुन दिए गए।
- 51:51उसके दरबार के लिए यह क्वालीफाई है।
- 52:01बस अब तुम नहीं चलना क्योंकि उसका बलवा आ गया है, तो तुम और पीना
- 52:12चाहती हो। यही लक्षण है पुत्र।
- 52:19और बिल्कुल सटीक लक्षण कैसे रहूं चुप के मैंने पी ही क्या है होश
- 52:31अभी तक है जब तर्क में पूरी मदहोश हो।
- 52:37के। अपने होश को भी उसमें तेली न कर
- 52:40दूं, बस एक वो ही बचे। बाकी ना मैं रहूं ना मेरी आर ज़ोर
- 52:52है। समाज से मुक्ति आज का एक शब्द
- 53:09मैंने बोल रहा हूँ दीन दुखियों की सेवा ये दूसरा शब्द बोल रहा हूँ।
- 53:24अन्न द नाद कहो रस पीना ये तीसरा शत्रु को सामूहिक रूप से परमात्मा
- 53:33का वजन न करो, ये तुम्हें दुविधा में डा सत संग भजन कीर्तन।
- 53:43जागरण या तो मैं दुविधा में डांटता हूँ।
- 53:48बहुत से लोग मैंने देख हमने तो जपजी साहब का पाठ कर लिया, बस यही
- 54:01करना होता है। अब इनसे मैं क्या कहूँ?
- 54:14क्या बाबा नानक ने सिर्फ जप जी का पाठक बनाया था?
- 54:19सिर्फ सुखमणि साहब का पाठक जी जप जी और सुखमणि तो उस परम सुखी
- 54:26व्यक्ति के भीतर से आई। लेकिन किया उसने क्या कोई सत्संग
- 54:34किया, कभी बाबा नानक को किसी सत्संग में बैठा देख बाबा नानक तो
- 54:48आराम से अपने कमरे में बैठ कर। और पीहे के साथ होड़ लगा लेते हैं
- 54:58और मस्त होकर परमात्मा के गुणों का वर्णन करते हैं।
- 55:12साहिबा सब तेरी। यहाँ बढ़िया यहाँ सारी रात गुरु
- 55:28बनाती। उसकी शलाघा करते रहते हैं और
- 55:33देखिए कितना भी गुण बनाओ शलागा उसकी होती नहीं है क्योंकि वह
- 55:39शब्दों में आता नहीं है। शलागा उसकी तभी पूर्ण होगी जब तुम
- 55:50उसके भीतर ही रस रूप हो जाओगे। तीरथ नवा जयते सपावे जब वह
- 56:02प्रबर्धगार अपने में ही तुम्हें समेट लेगा उस दिन तुम।
- 56:14सच्चे बादशाह के साथ एकाकार बौद्ध समुद्र में मिल के आनंद महा आनंद
- 56:24में दीन हो के। ज्यादा पचड़ों में मत उलझना।
- 56:37पुत्र पढ़ पढ़ गड्ढे लतिए ते पढ़ पढ़ हुई ये ख्वाब इनको पढ़ने में
- 56:49मत लग जाना। बहुत से लोग मुझे सुन रहे हैं।
- 56:57और जब मेरे पास आते हैं, मैं उन्हें कहता हूँ कि कोई जरूरत
- 57:00नहीं है मेरे पास आने की क्यों क्योंकि तुम सिर्फ सुनकर ही
- 57:09पर्याप्त समते हो। जैसे कोई व्यक्ति केमिस्ट्री
- 57:14ज्योलोजी को पढ़कर सफिशिएंट समझ ले यह सभी सूचनाएं हैं, लेकिन कभी
- 57:26लैबोरेट्री में गाना हो प्रयोगशाला में जाना हो।
- 57:32कभी उसने टेस्ट के भीतर कोई प्रयोग न किया हो, कभी उसने चीर
- 57:39फाड़ करके ना देखी हो कि कौन से प्राणी के भीतर कौन सा अंग कैसे
- 57:47विद्यमान होता है। तो वह कभी डॉक्टर बन पाए नहीं बन
- 57:57पाएगा। थियरी आवश्यक तो है, लेकिन
- 58:03सुफ्फिसिएंट नहीं पर्याप्त नहीं। प्रैक्टिकल हो साथ में फिर थ्योरी
- 58:13जो है वो सही होते है, परिपूर्ण होते है तुम प्रैक्टिकल भी करते
- 58:23हो मुझे खुशी। मुझे सुनती भी हो क्योंकि मेरे
- 58:28सुनने से तुम्हें राह मिलेगा। 1 दिन ऐसा भी आता है जब बाहर मेरी
- 58:36वीडियो चलती है और तुम अपने अंत के उस सागर में आनंद में डूबे हुए
- 58:43होते हो। तुम्हें पता ही नहीं चलता मैं
- 58:48क्या भूल गया कब वो बोल गया और मैं उसी वेला के इंतजार में बोल
- 58:56रहा हूँ, मैं चाहता हूँ कब वो मुकाम आए।
- 59:05जब बाहर से मेरी वीडियो चलती रहे और तुम अपने भीतर गोताखा लो, तुम
- 59:13अपने भीतर रुक जाओ, उस रस के ब्याले में तुम खुद भी उड़ जाओ,
- 59:21एकाकार हो जाओ। यहाँ किसी का कोई कुछ नहीं है।
- 59:32मात्र कुछ देर के परछावे हैं और हम उनको ही अपना मान बैठते हैं,
- 59:46लेकिन यहाँ श्रद्धा के लिए कोई किसी का संजना साथी नहीं होता।
- 59:54कौन जाने तुम्हारा अपना ही कोई खास खास रिश्तेदार तुम्हारा पिछले
- 1:00:03जन्म का दुश्मन? तुम्हारा इस जन्म का दुष्यमन
- 1:00:14तुम्हारा पिछले जन्म का मित्र हो कौन जनता ये सब तुम्हारे मन में
- 1:00:24जचाई हुई चीजें। सत्य कोई नहीं जानता और सभी आज
- 1:00:29तुम्हें उजाने की अपनी अपनी कवायद बिछाये बैठे हैं।
- 1:00:33कोई पीएलआर कर रहा है, कोई नाम जपा रहा है।
- 1:00:43कोई राधे राधे, राम राम जपा रहा है, कोई कृष्ण, कृष्ण जपा रहा है,
- 1:00:48मैं पूजा करता हूँ। जब से राधा नहीं हुई थी तो लोग
- 1:00:52पार कैसे होते थे? अगर राधे के नाम के जप करने से ही
- 1:00:59व्यक्ति पार होता है, यह सृष्टि तो बहुत प्राणी है।
- 1:01:08और हमारे सनातन धर्म के ऋषि तो कहते हैं कि एक अरब 97
- 1:01:152,00,00,000 पुरानी सृष्टि है ये और ये सिर्फ कहते हैं, अंदाज है
- 1:01:25ये पता किसी को भी नहीं। सनातन धर्म अपना आंकड़ा से ही
- 1:01:43बताता है। इस्रान सियासत अपना आंकड़ा से ही
- 1:01:48बताती है और जबकि यह स्पष्ट हो चुका है कि इन किताबों में झूठ
- 1:01:56लिखा है। गैलीली ओह गैली सारी उम्र दुख
- 1:02:02भौंकता रहा। ही वास् अरेस्टेड इन हिज़ ओन हाउस
- 1:02:08टिल डेथ। जीवन भर के लिए उसे अपने ही घर
- 1:02:13में कैद कर दिया गया क्योंकि उसने कहा था।
- 1:02:17के पृथ्वी सूर्य के आसपास घूमते हैं और कैथोलिक ग्रंथ कैथोलिक
- 1:02:26चर्च के प्राजादुओं ने कहा नहीं हमारे वाइबल में लिखा है सूर्य
- 1:02:34घूमता है पृथ्वी के आस पास। हमारी वाइबेल गलत नहीं हो सकती,
- 1:02:39लेकिन उनकी वाइबेल गलत हो गई। 350 वर्ष बाद जब वैज्ञानिक ने खोज
- 1:02:49कर ली, कैथोलिक चर्च के एक पादरे ने कहा, क्षमा मांगी गैलरी से।
- 1:02:59कि हमसे गलती हुई है। किसको पता है न इस्लामियत को पता
- 1:03:07है न यह हुदियत को पता है, न ही सनातन को पता है और मैं तुम्हें
- 1:03:16बताऊँ। परमात्मा की बनाई हुई सृष्टि का
- 1:03:22एक अंश का भी तुम पता नहीं कर सकती परमात्मा की तो बात छोड़ो
- 1:03:35कौन सा वेला वक्त गवन कौन सा वक्त था वो?
- 1:03:40और कौन सा वेला था? वो प्रभात वेला थी, सांय वेला थी,
- 1:03:44दोपहर थी, रात थी कबन सा वेला वक्त कवन कबन तित कवन वार बताओ
- 1:03:52कौन सी तिथि थी और कौन सा वार था? सोमवार था शनिवार था, रविवार था।
- 1:04:01कौन सी रुत महाकमन रुत क्या थी वारसी, गर्मी थी, सर्दी थी, वसंत
- 1:04:07थी, कौन सा रुत था महाकमन कौन सा महीने था?
- 1:04:17अशुवणी था, माघ था, पौ था कार्तिक था, चैत था बैसाख कौन सा महीना
- 1:04:26जित होया आकार जब परमात्मा ने यह सृष्टि बनाई बताओ कौन से दिन
- 1:04:34मनाई? लिखने वालों ने सब लिख दिया, देखा
- 1:04:46किसी ने कुछ नहीं इसलिए बाबा कहते हैं पखंडियों की बातें तो पखंड ही
- 1:04:53हुआ करते हैं ये नामधारी। पांच नाम जपलो चार नाम जपलो
- 1:05:00पाखणियों की बातें तो पाखण्ड हुआ करती।
- 1:05:06कौन सी ऋत महाकवं जीत होया आकार वेरन पाया पंडित किसी पंडित ने?
- 1:05:18बेला नहीं बता सका दुपहरी को बनाया था यह सृजन सृष्टि सुबह का
- 1:05:30बेला था, दोपहर का था, रात्रि था। वीर न पाया पंडित जो होवे लेख
- 1:05:45पुराण अगर पंडितों ने पा लिया होता तो प्राणों के लेखों में
- 1:05:52लिखा होता लिखा है भाई, लेकिन बाबा कहते हैं वो जो लिखा है,
- 1:05:58नकली है। वक्त न पायो का दिया नहीं, इस्लाम
- 1:06:10में काजी न प ये लिखण लेखक कुरान नहीं तो कुरान में लिखा होता लिखा
- 1:06:22है भाई। लेकिन दोनों आंकड़े मिलते कहाँ
- 1:06:27है? ठीक बोल ये दोनों के आंकड़ों का
- 1:06:33अलगाव बताता है कि दोनों ने बुद्धि, लड़ाई और बुद्धि तो ठगणी
- 1:06:42है। माया महा ठगनी हम जानी यह तो
- 1:06:50अंदाज लगाती है, आचार्यों के तट और अंदाजे अनुभव तक नहीं जाया
- 1:06:57करते। क्योंकि परमात्मा तक पहुंचने के
- 1:07:02लिए बुद्धिरूपी अंदाजों को वर्णित करने वाली इस यंत्र को छोड़ के
- 1:07:10जाना होता है। वहाँ बुद्धि नहीं पहुँच सकती,
- 1:07:13वहाँ तुम्हारा मन नहीं पहुँच सकता, वहाँ जाकर तुम अमन की
- 1:07:17अवस्था में आ जाओगे। बुद्धिहीनता की अवस्था में आ
- 1:07:20जाओगे बुद्धि नहीं होगी, तुम छोड़ो, परमात्मा की बातें रात को
- 1:07:26सोये सोये तुम्हारा मन होता है क्या?
- 1:07:30गहन के आरंभ में क्या मन और बुद्धि होती है?
- 1:07:38नहीं होती तो फिर उस परम जागृत अवस्था में तुम कहाँ ढूंढ़ते हो?
- 1:07:44बुद्धि जब सुशूक्ति के आलम में बुद्धि और मन खो जाता है तो उस
- 1:07:55परम जागरण की वेरा में। तुम बुद्धि का आलम कहाँ से खोजोगे
- 1:08:02नहीं? यह बुद्धियों की सोच समझ पाखंड
- 1:08:08चाल है, व्यापार है, सब व्यापारी है, वक्त न पायो का दिया।
- 1:08:17ये लिखण लेख कुरान स्थित अवर्ण जोगी जाने जो अपने आपको योगी कहता
- 1:08:23है, जो परमात्मा से कहता मैं युक्त हो गया, वह भी नहीं जानता,
- 1:08:30तुम गलती में मत रहना कि कोई जानता है।
- 1:08:35मैं आज तुम्हें घोषणा कर दूँ इस बात की ही इज़ अननोन नॉट ओनली
- 1:08:41अननोन बट ऑल्सो अननोन एबल। वह सिर्फ अज्ञात ही नहीं है बल्कि
- 1:08:48वह अज्ञे भी है। वह कभी जाना नहीं जा सकेगा।
- 1:08:53कोई नहीं जान सकेगा। न्यूटन, आइंस्टीन, स्टीफन हॉकिन
- 1:08:59वगैरह की तो बेचारो की औकात ही क्या है?
- 1:09:04वक्त न पायो का दिया ये लिखन लेख कुरान छत वार न जोगी, जाने रूत
- 1:09:14माह, न कोई न रूत न महीना, योगी भी नहीं जानता कौन सी छत थी, कौन
- 1:09:21सा वार था? नहीं जानता कौन सी तारीख थी नहीं
- 1:09:25जानता। जा करता शिरठी को सा जय आप पे
- 1:09:32जाने से जिसने इस सृष्टि का निर्माण किया है वही जानता है
- 1:09:38सिर्फ जा करता शिरठी को सा जय जिसने इस सृष्टि को।
- 1:09:48सजा सजाया बनाया क्रिएट किया ओनली ही नोस आप क्या जानें सो नहीं
- 1:09:58जानता है। सिर्फ दूसरा अगर कहे कि मैं जानता
- 1:10:02हूँ तो उसके जूते मारें हरामखोर हैं।
- 1:10:08वो लुटेरा वो व्यापारी है, वो डाकू है, वो चोर है, वो बदमाश है,
- 1:10:15वो तुम्हें लूटने है, कोई नहीं जानता।
- 1:10:22पर मैं तुम्हें कहता हूँ ही इस नॉट ओनली अन्नोन ऐसा नहीं कि अब
- 1:10:26तक नहीं वो जाना गया। नो ही इस ऑल्सो अननोनबल वो कभी
- 1:10:34नहीं जाना जा सकेगा नेवर। मुझे हैरान होती है कभी इतनी वृहद
- 1:10:47सृष्टि का निर्माण करने वाले परमात्मा के बारे में लोग कहते
- 1:10:56हैं। कि मैं उसका तर्जमा कर रहा हूँ,
- 1:11:05व्याख्यान कर रहा हूँ जबकि उसने उसकी आबोहवा देखी ही नहीं होती।
- 1:11:13उसको यही नहीं है पता। तेरे दामन से।
- 1:11:20जो उन हवाओं को सरा तेरे दान से जो।
- 1:11:40उन हवाओं को सलाम झूम लूँ मैं उस जुबां को जीस प्याय तेरा नाम।
- 1:12:02सबसे अच्छी सुबह तेरी सब से रंगे, तेरी शान, तुझ पे दिल कुरबान।
- 1:12:19ए मेरे प्यारे वतन ए मेरे बिछुड़े चम्म, तुझ पे दिल कुरबा।
- 1:12:40माँ। का दिल बन के कभी सीने से लग जाता
- 1:12:50है तू माँ का दिल बन के कभी। किसीने से लग जाता है तू और कह
- 1:13:06नन्ही सी बेटी बन के याद आता है तू।
- 1:13:19जितना याद आता है मुझको उतना तड़पाता है तू।
- 1:13:33तू छुपे दिलखुरवा है मैं। जीस पर।
- 1:13:52इस सारी षष्ठी को बनाया वो ना कहने में आता ना सुन में।
- 1:13:59आता ना गायन में। आता ना संबोधन में आता।
- 1:14:07वो बड़ा प्यारा है। बस इतना सा ही कह दें और तुम
- 1:14:14समझलो तो काफी प्यारी से प्यारा है अगर इतने से ही तुम समझलो
- 1:14:29अनहंकार से। तो काफी है मोर थान इंसफिशिएंट तो
- 1:14:39बाबा कहते हैं सब बकवास है, लोगों के सब झूठ बोलते हैं, झूठे हैं
- 1:14:47कौन जानता है? जा करता सिर्फ ही को सजा अब कजाने
- 1:14:54वही जानता है, सिर्फ आदमी नहीं जानता न मौलवी जानता, न कादिया
- 1:15:04जानता, न पंडित जानता। ना विद्वान जानता ना आचार्य जानता
- 1:15:12कोई नहीं जानता लेकिन सभी कहते हैं कि हाँ मैं जानता हूँ उसकी एक
- 1:15:19हवा का झोंका जिसने नहीं पिया वह गीता का भश्य करने चला है।
- 1:15:29उसकी हवा का एक झोंका जिसने नहीं महसूस किया, वह परमात्मा के रस को
- 1:15:36पीने के दावे करता है। उन्हें बाबा कहते हैं सब फंड है
- 1:15:44पाखंड। इनको छोड़ दो क्योंकि वह तुम्हारे
- 1:15:50भीतर है ही इज़ इन यूर हार्ट उसको भीतर चला शो।
- 1:16:08बाहर तलाशना बंद करो, ढा दो मंत्र ढा दो, मस्जिद ढा दो जो कुछ ठेंद
- 1:16:19बोले शाह एक दिल ना थैंक यू, इस दिल बसी दिल पर रहने दो।
- 1:16:29वह जो सृष्टि करता है, सिरठी का मालिक है, रचयिता है वो यहाँ रहता
- 1:16:36है दिल के आईने में थी तस्वीरें यार वह मिलता कैसे है जब ज़रा
- 1:16:45गर्दन झुकाई? देख ले धन्यवाद।