Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Aug 25 - ग्रंथ संपूर्ण हुआ – बाबा जी का अंतिम संदेश! बुद्ध से कृष्ण का सफर,Karma Philosophy,गायत्री मंत्र
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- 0:07फारूकी जाबान से बाबा जी प्रणब। मैंने स्वयं को को लिया है।
- 0:31हमारे यहाँ बुद्ध धर्म ही प्रचलित है, नास्तिकवाद भी है।
- 0:46आपके प्रोजन और अपने आप तक पहुँच गया।
- 1:01आपने कहा कि बुद्ध से कृष्ण का मार्ग है शेष बचता है।
- 1:13बुध से कृष्ण का मार्ग सर्ज शब्दों में समझाने का कष्ट के
- 1:23करेंगे। बिलकुल समझाऊंगा पुत्र।
- 1:33हार ओके प्रसन्नाता की बात है की तुमने श्रेष्ठ तत्व छुआ अब पाने
- 1:55को कुछ बाकी ना रोका। सच में अब तुम मस्त रह सकते हो,
- 2:07आनंदित रह सकते हो खुमार जड़ेगा मुझे तुम्हारी अवस्थाएँ बताने की
- 2:14जरूरत नहीं है। तुम जीस मुद्रा के प्यारे भर भर
- 2:20के दिन रात पीते हो, उसको मैं आपके लिए व्यावसायिक नहीं कर रहा
- 2:26हूँ श्रोताओं के लिए व्यावसायिक कर रहा हूँ जो अभी अधौर है।
- 2:36फिर भी एक बात आपने पूछी पर मैं अच्छी तरह से समझता हूँ कि जहाँ
- 2:44प्रश्न हो गए वहाँ ये कोई प्रश्न नहीं किया जो आपने पूछा।
- 2:56ये एक यात्रा है बूंद के समुद्र हो जाना तो अमित रहस्य की यात्रा
- 3:07पर चले। इससे पहले के मैं हार की।
- 3:13के प्रश्न का जवाब शुरू करो। एक छोटा सा प्रश्न नितिन को सुनें
- 3:23बाबा आपने समाधि से सम्बोधिक यात्रा कब की?
- 3:38मेरे साथ ये घटनाएं दोनों यकस्म भी थी।
- 3:43अज्ञानता से समग्रता की ओर बीच में कोई बुद्धतों का पड़ाव नहीं
- 3:49आया। सीधी गाड़ी एक्सप्रेस वे।
- 4:00एक ही दिन में 28 अक्तूबर शरद पूर्णिमा की रात ये दोनों ही
- 4:06घटनाएं घट गईं। प्रथम पड़ाव पे मैंने जाना में
- 4:11कौन? रूस से अगला पड़ाव मुझे ठहरना
- 4:17नहीं पड़ा। फिर मैं विस्तृत होता चला गया,
- 4:22विस्तृत होता चला गया, फैलता चला गया, अनंत मैं खोता चला गया, अनंत
- 4:28होता चला गया और अनंत होते होते होते होते मैं खो गया।
- 4:39मेरी यात्रा समाधि से बुद्ध की बुद्ध से कृष्ण तक की यात्रा नहीं
- 4:49थी। मेरी सीधी यात्रा अज्ञान से कृष्ण
- 4:54तक की थी। भूत की यात्रा अज्ञान से भूत तक
- 4:59की यात्रा होती है, लेकिन ऐसा मेरे साथ नहीं होता, इसमें कोई
- 5:07चमत्कार भी नहीं। सारे रस्ते एकदम से तय हो जाये,
- 5:17इसमें कोई हैरानी भी नहीं। वैसे भी तो स्वयमेव तय हो जाने तो
- 5:28मेरी दोनों यात्राएं यात्रा तो एक ही है।
- 5:34पहले स्वयं के खोजने की, फिर स्वयं के होने की स्वयं के खोजने
- 5:40में तुम पाते हो डायल सेल्फ। और उससे आदि की यात्रा होती है।
- 5:52कृष्ण की यात्रा पहले तुम होते हो फिर तुम खोते हो, स्वयं का आभा भी
- 6:02खो देते हो वो है समग्र तलीनतापा पूरे वाष्प बने।
- 6:10और कहीं खुले आसमान में निशान भी न बचा आपका आप ऐसा कोई कि डोडे से
- 6:19नहीं मिलोगे। अब हम दूसरे खुशी पे आते है भारू
- 6:28पे बुद्ध से कृष्ण। आत्म से परमात्मा तक की अर्थ कल
- 6:42शिवरात्रि थी, बाबा बोले अब चुप हो जाओ।
- 6:58बाबा मजाक करने लगे किसी परिवार ने पूछा कि तुम्हारा बच्चा बोलने
- 7:10लग गया है? मोके तन्ने अभी बोलने नहीं लगा
- 7:16है। दो वर्ष के बाद फिर आए, बोले
- 7:25तुम्हारे बच्चा बोलने लग गया है, कहते हैं हम अब तो हम उसे चुप करा
- 7:30ना सकें, कहीं तुम्हारी ये अवस्था ना हो जाए।
- 7:40मैंने कहा बाबा आप को अच्छी तरह से जानते हो।
- 7:49इतने वर्ष लगातार कोई तरह 35 वर्ष बोरा तो सिर्फ पांच वर्ष।
- 8:02जब बंद होशी का एडिक्ट मैं नहीं हुआ तो सिर्फ मद का एडिक्ट कैसे
- 8:09हो सकता गहरे ही हैं थोड़ा सा ध्यान से समझने की चेष्टा करना।
- 8:1635 वर्ष में मदहोशी का एडिक्ट में नहीं हुआ तो पांच वर्ष में सिर्फ
- 8:22मद का एडिक्ट कैसे हो जाऊं? मद है बुद्धि बुद्धि अहंकार की
- 8:37जननी। अहंकार का मतलब तुम गलत समझ गए।
- 8:51बुद्धि का मतलब है मैं ही करूँ अपने मार्ग प्रदर्शित अप दीपो
- 9:01बाबा। जो बुद्धि के तल पे रह जाएंगे और
- 9:09उस खुमारी में खो जाएंगे तो यही बात कह सकते हैं।
- 9:16यही बात पुत्र ने कह दी। यद्यपि ये दशा बड़ी प्यारी है।
- 9:25बुद्ध अत्यंत भरे संसार के लिए ऋषियों के लिए ऋषियों ने तो भगा
- 9:32दिया था। क्योंकि ऋषि जानते हैं कि और भी
- 9:39मुकाम हैं, राहतें और भी हैं, वसल की राहत के सिवा और भी दुख हैं
- 9:48जमाने में मोहब्बत के सिवा बुद्ध कहते हैं, जीवन दुख है।
- 9:57संसार दुःख तुम्हें अपना मार्ग स्वयं प्रकाशित करना होगा।
- 10:03अप्रदिभव भव बुद्धि यही कुछ कह सकती है अनंततः और बुद्ध ने अंतिम
- 10:12वाक्य कह दिया। मृत्युशैया पे पड़े पुत्र ने
- 10:19अंतिम शब्द कह दिया अप दीपो अब बुद्धि के तृप्त कर रहा हुआ
- 10:27व्यक्ति यही बात कहें उससे और कुछ अपेक्षा की भी नहीं जा सकती।
- 10:36लेकिन याद की ये बात ना कह पाए कृष्ण ये बात ना कह पाए कुरान ये
- 10:46बात ना कह पाएगी। कल ही एक व्यक्ति का कमेंट है
- 10:53मेरे पास बाबा मैंने कुरान पढ़ी, बैल को काट दो, गाय को काट दो,
- 11:02मैंने फौरन बंद कर दी, मैंने कच्छा किया बहुत अच्छा।
- 11:15तुम एक पशु को काटने की बात करते हैं, क्यों करते हैं यह तुम्हें
- 11:19पता नहीं तो यहाँ 40,00,000 लोगों का हत्यारा कृष्ण?
- 11:29उसकी गीता को सर के ऊपर उठाएगा। वह व्यक्ति शायद किसी मुस्लिम
- 11:42कंट्री में था। उसका नाम भी लिखा था मैं भूल गया
- 11:54बाबा क्षमा करना। मैं यहाँ मुस्लिम कंट्री में रहता
- 11:58हूँ जहाँ के लोग कोई ज्यादा अच्छे नहीं है।
- 12:01इनका व्यवहार कोई ज्यादा अच्छा नहीं है।
- 12:05मैंने कहा फिर हजरत मुहम्मद क्या करें?
- 12:11अगर शिष्य गर्ग का गाय तो गुरु क्या करें?
- 12:19क्या करे? अगर ग्रंथी घर के जाए तो नानक का
- 12:23कोई कसूर है? अगर आज बुद्ध घर के जाए तो बुद्ध
- 12:29का कोई कसूर है? जैनी घर के जाए।
- 12:34तो महावीर का कोई कसूर है? महावीर कहत अहिंसा परमो धर्म और
- 12:46कीड़े मार दवाइयों की जितनी फैक्टरी तुम जैनियों की पाओगे।
- 12:52उतने किसी और के नहीं पाओगे। गोरों का क्या कसक है अगर शिष्य
- 13:04गर्ग जाए सनातन का क्या कसक है अगर हिंदू गर्ग जाए?
- 13:26क्या करे मूसा अगर येहू दे घर के जान क्या किया जा सकता है तुम रोई
- 13:41धर्म बदल लेती है। तो मैंने जब लिखा कि 40,00,000
- 13:56लोगों का उपचार अर्जुन के द्वारा शृंगार करवा देता है, उस गीता को
- 14:03तुम सिर पर रखते हो और एक गऊ को। एक बैल को काटने की बात करता है,
- 14:16वो भी क्यों करता है? उसका कारण नहीं होता तुम्हें बस
- 14:24मैंने पहला ही चैपटर पढ़ा था। आपने कहा कुरान बड़ी शानदार किताब
- 14:29है और मैंने बंद कर दिया। वाकई ही बाबाजी कुरान पड़ी शानदार
- 14:34किताब है। मैं सदा ही कहता हूँ तुम शब्दों
- 14:47से बंध जाते हो, पूरा पढ़ो कुरान को पूरा।
- 14:58इसमें कंकड़ पत्थर भी मिलेंगे, कांटे भी मिलेंगे, चुभन भी होगी,
- 15:06फूल भी मिलेंगे और हीरे भी मिलेंगे।
- 15:10लेकिन पार्थी जौहरी की नजर रहनी चाहिए।
- 15:19इसलिए मैंने कहा इसको छेड़ना मत। ओशो कहते हैं कि मेंडमेंट की
- 15:26जरूरत थी, कोई मेंडमेंट की जरूरत नहीं, इसको ऐसा ही रहने दो
- 15:32क्योंकि तुम्हारी निगाह न जानी। पत्थर के बहाने किसी है हीरे को
- 15:39ही फेंक दे बाहर और वो ही किताब का हीरा।
- 15:45वो सबसे बहुत गया इसलिए इसको यथास्थिति अपनाये रखो बड़ी शानदार
- 15:53किताब है। बुद्ध जो अपने आप को पाकर भी
- 16:02बुद्धि में स्थित रह गया, उसको बुद्ध कहते जान गया।
- 16:08मैं कौन? अब उसको कोई झंझट नहीं होगा, कोई
- 16:14क्लेश नहीं होगा, कोई दुख नहीं होगा, कोई दर्द नहीं होगा, कोई
- 16:17चिंता नहीं होगी, कोई चिंता नहीं होगा, कोई तनाव नहीं होगा, कोई
- 16:21ब्रह्म नहीं होगा, उन्माद नहीं होगा, अवसाद नहीं होगा, मति भ्रम
- 16:24नहीं होगा, बहुत अच्छी तरह से जायेंगे कि दर्द कांव में हो रहा
- 16:34है। बस यही फर्क था तुम में और बुद्ध
- 16:42में यही फर्क था उस बुद्ध में जिन्होंने घर को छोड़ा और आज के
- 16:49बुद्ध में जिन्होंने अपने आपको पाया यही एक मात्र फर्क था।
- 16:58इसे ही इलूशन कहते हैं। इसे अहंकार कहते हैं।
- 17:01इसे ईगो कहते हैं, लेकिन एक बार फिर बता दो सर।
- 17:29शांति है, कोलाहलहीनता की शांति है, कोई विचारों का छोर नहीं,
- 17:39गहरी बातें हैं और शायद आखिरी प्रवचन हो।
- 17:47शायद सर छंटती नहीं है काफी मुँह पर लगी अच्छे से सुन लेंगे।
- 18:04क्योंकि मेरे प्रश्नों में से सिर्फ एक ही प्रश्न बचा था और
- 18:09कृष्ण के बाद कोई यात्रा नहीं होती।
- 18:12जब वो समुद्र में एक आकार हो जाती है, अपना अस्तित्व खो देती है तो
- 18:20फिर कोई यात्रा शीष नहीं रहती है। समुद्र की कोई यात्रा नहीं।
- 18:24समुद्र तक की यात्रा होती है। गंगा की जाती समुद्र में नर्मदा
- 18:29की जाति ब्रह्मपुत्र को जाती, हमारी सारी नदियां जाकर समुद्र
- 18:34में मिल जाती हैं, लेकिन समुद्र कहीं नहीं।
- 18:50बुद्ध बुद्धि शेष रह जाए जानकारों ने अगर नाम रखा बुद्ध तो बुद्धि
- 19:03का ही शॉर्ट फॉर्म था बुद्ध। ज्यादा से ज्यादा आचार्य बुद्ध के
- 19:10तंत्र तक पहुँच सकते हैं। अगर कोशिश करें तो लेकिन वहाँ तक
- 19:15भी नहीं पहुँच पाएंगे। मैं जानता हूँ क्योंकि बुद्धि की
- 19:20चिपका बड़ी बहुत विशाल अडैसिव की तरह है।
- 19:27चिपका लेती है तुमको तुम सूचनाओं से चिपक जाते हो तुम सूचनाओं को
- 19:34जग फट डाल लेते हो, ये मेरी है, ऐड लगाते हो एडटाइसमेंट मात्र
- 19:54अपना चेहरा मोहरा दिखाने के लिए जो बाकी नहीं रहेगा आज है, कल
- 20:00नहीं रहेगा। किसका चेहरा बचा है कितनी ही
- 20:05होल्डिंग्स लोकल, बड़े बड़े लोकल। चेहरा न किसी का बचे, न किसी का
- 20:12बचे और जीसको ये चेहरा दिखा रहे हो वो भी तो नहीं बचेगा किसको
- 20:24बहका रहे हो किसको बहला रहे हो किसको फुसला रहे हो कौन बचेगा?
- 20:30कोई नहीं है बच्चा। कोई रहा ना कोई रहे, गाना कोई
- 20:45रहा। मैं कोई राह है ना कोई रहे गा ना
- 20:56कोई रहे बुद्ध से कृष्ण तक की यात्रा बोध से समुद्र तक की
- 21:03यात्रा अज्ञान से आनंद तक की यात्रा।
- 21:12बुद्ध कहते हैं जीवन दुख है, संसार दुख है या गवल का?
- 21:24कहते हैं राहतें और भी हैं। वसल की राहत के शोक, सिर्फ संसार
- 21:33ही दुखी ने। और बुद्ध ने संसार से दुख से
- 21:38निजात पाने का फॉर्मूला इजाद कर लिया।
- 21:43शहीद बुद्ध के रास्ते तक सभी को आना पड़ता है।
- 21:47मैंने बहुत बार बताया आपको लेकिन यज्ञ बलक कहते हैं।
- 21:54और भी गम है जमाने में मोहब्बत के सिवा दुख अभी बाकी बचाता है थोड़ा
- 22:02सा जब भी वो इतना महीन है, इतना सूक्षम है कि तुम्हें सिर्फ उसका
- 22:09अहसास ही होता है। फल का सा एहसास नेब्यू इस दुख को
- 22:18मिटाओगे तो चलेगा लेकिन चलेगा रातों की नींद हरामनी होगी।
- 22:29शरीर कट फट जाए, दर्द होगा तुम देखोगे लेकिन दर्द तुम्हें नहीं
- 22:40होगा। जो कटा है, जो फटा है उससे होगा
- 22:47बड़ी सुन्दर उपलब्धि है। कोई कम उपलब्धि नहीं है।
- 22:53अपने आप को खोज लेना सर्च कर लेना, सर्च युअर सेल्फ दुख को
- 23:02मिटा देती। क्रिकेट मैं इससे आगे का कदम
- 23:09बोलता हूँ। कृष्ण कहते हैं, और भी दुख हैं,
- 23:14जमाने में मोहम्मद के सिवा अभी और भी दुख है, बुद्ध कहते हैं संसार
- 23:20दुख है, जीवन दुख है। और भूत ने उस जीवन के दुखों से
- 23:25निजात पाली। बिल्कुल ठीक सही पाली।
- 23:29लेकिन क्या होगा कृष्ण कहा जो कहते हैं राहतें और भी हैं वसल की
- 23:36राहत किसी बुध कहते हैं, जीवन दुख है और दुख का कारण है और दुख के
- 23:42मिटाने के उपाय। कृष्ण कहते हैं और भी दुख हैं और
- 23:48उन दुखों के होने का कारण है और उन दुखों को मिटाने का भी डंग है।
- 23:57बात बड़े सूक्ष्म हैं। बुद्ध कहते हैं तुम्हारे दुख
- 24:04समाप्त हो जाएंगे सिनसार बिलकुल ठीक है शोक प्रशिक्षण लेकिन कृष्ण
- 24:12कहते हैं एक दुख फिर भी बना रहे पर वही दुख मीरा को दुख देता है,
- 24:23वही बिछोड़ा। वो बिरहा की आंख बुद्धतों से आगे
- 24:34लगती तो मैं जानकर बड़ी हैरान मेरा के बिरहा की आग बुद्धतों के
- 24:45बाद लगती। बुद्धत्व में संसार के सभी कष्ट
- 24:50समाप्त खुद को जानती है? इसके बाद कोई जरूरत नहीं होती।
- 25:06लेकिन हल्का सा जैसे काँटा निकल गया हो, जख्म रह गया।
- 25:13जख्म भी हल्का सा दर्द करता है, मौजी भरना पड़ता है, यहीं बिछोड़ा
- 25:25मेरा को तड़पा जाता है। आनंद मेला पूर्णानंद मेला आनंद तो
- 25:37तुम अंतरम का क्षणों में भी। लेकिन अंतरंग क्षणों में तुम अनंत
- 25:45का दूर से दर्शन करते हो और बुद्ध के तल के ऊपर आकर तुम आनंद से
- 25:51करीब बैठ जाते हो। आचार्य उवासनम आचार्य के करीब बढ़
- 25:57जाते हो, लेकिन कृष्ण कहते हैं। राहतें और भी अभी और भी राहत बाकी
- 26:12है। कांटा चुहा तुमने कांटा निकाल
- 26:15दिया लेकिन अभी और भी राहतें हैं वसल की राहत के सिवा अब कौन सी
- 26:23अंग है जो तड़पाती है? कृष्ण फिर से जन्म नहीं लेते हैं,
- 26:31खुद को फिर से जन्म लेना पड़ेगा। क्यों जन्म लेना पड़ेगा बोध कहते
- 26:42हैं कुछ गर्म बाकी रह गए हिसाब किताब बराबर करके।
- 26:46बहुत ही बंद करके जाना होता है। ये भी है लेकिन एक और भी कम है।
- 26:55थोड़ी सी यात्रा शेष और भी कम है। जमाने में मोहब्बत के सिवा थोड़ी
- 27:03सी तरीण बाकी रह गयी। मैं कहता हूँ बुद्ध को थोड़ा सा
- 27:08सफर और करना है। हिसाब किताब भी चुकता करना है और
- 27:22थोड़ा सा सफर भी। क्या करना है सफर?
- 27:26बुद्ध नहीं करी, वह सफल परमात्मा खुद ही करवा ले, लेकिन उनका होना
- 27:33जरूरी है क्योंकि आखिर में उस बूंद ने भी समाहित होना है।
- 27:38सागर में उसकी प्रजेंस अवश्य है। बिछोड़ा अभी बाकी।
- 27:51और बिछोड़ा चाहे करुणा के कारण हो, चाहे लोभ के कारण हो बिषोड़ा
- 27:56हो। सांसारिक व्यक्ति का लोभ के कारण
- 28:00बिषोड़ा होता है, बुद्ध का बिषोड़ा है, करुणा का सुंदर है,
- 28:06प्यारा है लोक हित में। कहीं ना कहीं किसी तल पर उनका
- 28:19आंतरिक हृदय ही धड़कता है, धड़कता है और जानता है।
- 28:31इस स्थिति में आकर जाना जाता है क्योंकि उसे जीने से पर्दे के
- 28:35पीछे कुछ अज्ञात हालचाल नजर आती है।
- 28:43वहीं तक जाना है वो ही है हमारा अंतिम गंतव्य।
- 28:50जिससे मीरा सीधा सीधा तय करती है। मीरा बीच में नहीं रुकती है।
- 28:57हज होरा बालमा। आए बालमा सावन भी ता जा।
- 29:46हाय रे सवन अभी ताजा। अभी पूर्ण विश्राम नहीं मिला,
- 30:09विश्राम मिल गया। यहाँ से आगे ना जाएंगे।
- 30:14बुद्ध तो कोई बात नहीं। सृष्टि के प्रलय तक यहीं रहेंगे,
- 30:21आनंदमय रहेंगे। करुणा भी एक वासी है लोगों का भला
- 30:30पर बिलकुल भला पर है। लोगों को मार्गदर्शन की हो सकती
- 30:36है। झूठे गुरु पसारे किए बैठे तंबू
- 30:40लगाए बैठे। किसी में तो प्रवेश करेंगे।
- 30:45आपके किसी को तो कहेंगे कि तुम बोलो जो सीधे सुन सकते हैं उनको
- 30:55सीधे सुनायेंगे। जो सीधे नहीं सुन सकते उनको बाएं
- 31:00मीडिया सुनाएंगे लेकिन करना है काँटा निकल गया काँटा जो छुपा था
- 31:12आपको पता हो ना हो थोड़ा सा जख्म तो कर ही जाता है।
- 31:18जो भरेगा, अपने आप भरेगा, शरीर की रक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं
- 31:23में भर लेगी, उसको बुद्ध से कृष्णा तक की यात्रा जो बुद्ध
- 31:38होगा, वह नियमों की बात करेगा। जो बुद्ध होगा वो प्रकृति तक ही
- 31:45सीमित रह जाएगा। अब ये बातें ध्यान से सुन लेना
- 31:51बुद्ध कहेगा लाज आज सपुष्य नियम पर्याप्त?
- 32:02क्योंकि कर्म व्यवस्था का चक्र ही तो है, बिलकुल ठीक बुद्ध नियमों
- 32:16तक सीमित रहेगा। बुद्ध नियमों की व्यवस्था तक
- 32:22सीमित रहेगा। लेकिन बुद्ध ये जानता है कि और भी
- 32:30दुख हैं जमाने में मोहब्बत के से भाई ये जानेगा अज्ञान का नाश हो
- 32:37गया लेकिन महाज्ञानी अभी हुआ नहीं।
- 32:46ये बात आपको चक्र करेगी। लेकिन मैं क्या करू?
- 32:49मजबूर शब्दों में ही आपको समझा सकता हूँ।
- 32:54अज्ञान का नाश हुआ लेकिन महाज्ञानी अभी हुआ नहीं।
- 32:59अब इसको समझ आए तो समझ लेना। इशारा, इशारे, इशारे होते हैं,
- 33:08स्ट्रेट लाइन को बताते हैं, लेकिन यहाँ इशारा खत्म नहीं होता।
- 33:13उसकी लाइन में सीधा जांच करना पड़ेगा।
- 33:18तो मैंने कहा बुद्ध अज्ञान का नाश होगा।
- 33:21महाज्ञानी नहीं हुए जागे बल्कि की तरह महाज्ञानी नहीं हुए।
- 33:27कृष्ण की तरह छोटा सा प्रश्न और साथ लेते चलें, अब तो बहाव में बह
- 33:37जाएगा। आप कहते थे मासा भार का एक नुकसान
- 33:42और भी है जो आज वैज्ञानिक को अभी तक पता नहीं लगा।
- 33:47वैज्ञानिक ने सब कुछ नहीं खोजा, इस बात का ध्यान रखा और बड़े बड़े
- 33:58साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन कहते हैं वह कभी खोजा जा ही नहीं सके।
- 34:05इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोन एबल अज्ञात ही नहीं है वो अग्य भी
- 34:13है इसलिए कभी मत सोचना कि साइंस ने इतना खोज लिया, बस पर्याप्त
- 34:20होगा नहीं, कभी भी पर्याप्त नहीं होगा।
- 34:25अभी नहीं कभी भी पर्याप्त नहीं हो पाता आई नो नो एबल फॉर एवर आपने
- 34:36कहा था बाबा मांसाहारी का एक और नुकसान?
- 34:41जिससे विज्ञान अभी खोज नहीं पाए। हैलो बता देता हूँ आपने ब्लड
- 34:53ग्रुप तो सुने होंगे ज़रा सोचिए ए ग्रुप वाले को ए भी ग्रुप चिढ़ा
- 35:04दिया जाए तो क्या आपको? आपका अभी मर जाएगा, रिएक्शन कर
- 35:17देंगे। मैं ये नहीं कहता जब तुम मांस
- 35:24खाते हो। तो खून नहीं जाता, खून का ब्लड
- 35:30नहीं जाता। हालांकि जानवरों के भी खून होती
- 35:33है। मांस के साथ खून भी तो जाएगा तो
- 35:36खून तो हर टिश्यू के भीतर है। हीमोग्लोबिन खून को सभी टिश्यू तक
- 35:43लेके जाती है ऑक्सीजन देने के लिए तभी तो वो जिंदा रहती है।
- 35:52और खून उनमें भी अलग अलग होता है या बात ध्यान में रखना जैसे
- 35:58मनुष्य को ए ग्रुप वाले को ए भी चिढ़ा दिया जाए, मर जाए।
- 36:07एंटीबॉडीज पैदा नहीं कर सकेगा। वैसे तो मांस खाते हो मरके का
- 36:17खाते हो, तुम्हें पता है उसका ब्लड प्रूफ कौन सा है?
- 36:25अब ध्यान से सुन? प्रत्येक ब्लड ग्रुप के साथ एक
- 36:31जहर होता है अगर तो उसका ग्रुप आपके साथ मेल खा गया, लेकिन
- 36:39जानवरों में ब्लड ग्रुप मनुष्य जैसे नहीं होते, ये भी ध्यान में
- 36:44रखो। कुछ में समान होते हैं, कुछ में
- 36:50अलग होते हैं। एक जहर का नाम है खोनित।
- 37:03अभी तक साइंस खोजने का प्रयास करना चाहिए।
- 37:13वो खून हमारे रेड वर्ड कार्पसर्स के साथ लगा होता है जब हम मांस
- 37:25खाते हैं माना खून नहीं पचता। खून को अगर सीधा बाई नर्व दिया
- 37:32जाएगा तो वो एक्शन करेगा लेकिन अगर तुम मांस को खा लोगे।
- 37:39तो खून तो नहीं पचेगा लेकिन वो कोनेट कोनेट कोनेट वह तुम्हारी
- 37:49पाचन प्रणाली पचालेगी और ब्लड में मिला दे।
- 37:55इसलिए जब गोर से देखना मांसाहारी व्यक्ति अल्पायु में बहुत से तो
- 38:02कम अल्पायु पे मर जाते। ध्यान करने के बावजूद समाधि में
- 38:10जाने के बावजूद रामकृष्णा पर्व। 50 साल जी विवेकानंद 39 वर्षीय जी
- 38:29और वैज्ञानिक कहेंगे कि शाकाहारी व्यक्ति 6 साल ज्यादा जीता है,
- 38:36कारण नहीं पता। कृष्ण भी कहते हैं युक्त हार
- 38:43बिहार से युक्त युक्त पशु खाने के लिए ही अपने।
- 38:58खाने के लिए परमात्मा ने और 3600 प्रकार के भोजन तुम्हें दिए
- 39:04शाकाहारी पशु मासनी का हाथी मासनी तुम डाल के देखो एक सिर्फ मनुष्य
- 39:14ही ऐसा पशु है। जब मांस खा लेता है, अपने पेट को
- 39:21कब्रिस्तान बना लेता है कब्रिस्तान जहाँ मुर्दे दफन होते
- 39:25हैं, तुम भी तो मुर्दो को चबा के दफन कर लेते हो, अपने पेट में
- 39:29कब्रिस्तान ही तो है तो ध्यान रखना जो लोग कहते हैं।
- 39:37कि डाइजेस्ट नहीं होता बिल्कुल नहीं होता।
- 39:42मास डाइजेस्ट नहीं होता, खून भी डाइजेस्ट नहीं होता, लेकिन ध्यान
- 39:46रखना एक एक तत्व होता है जो अभी तक खो जाने का कोने और जीस दिन
- 39:52वैज्ञानिक ने ये चीज़ खोज ली। उस से स्ट्रिक्टली 1 वो कहेगा
- 39:58मांस नहीं खाओ खौनेट नाम का इंतजार होता है अगर तुम में बी वो
- 40:10ही जहर है तो तुम पचा जाओगे। अगर तुम में वो जहर नहीं है, जीस
- 40:21पशु का मांस खाया, उसमें वो जहर नहीं, कोई और कई प्रकार के होते
- 40:27हैं मेल नहीं खाया तो वही रिएक्शन होगा जो ए ग्रुप वाला।
- 40:33और एक भी ग्रुप वाले के साथ होता है।
- 40:39मांसाहारी का ये वैज्ञानिक गहरा रहस्य था जो मैंने तुम्हें बता
- 40:45दिया। एक ही गहरा रहस्य और भी बहुत
- 40:50रहस्य। उनको छोड़ एक गहरा रहस्य जो आपको
- 40:55पता नहीं था जो मैंने कहा था मैं फिर बताऊँगा।
- 41:00वो मैंने आज बता दिया। कॉनट नाम का एक जहर होता है जो
- 41:04ब्लड के साथ होता है। रेड ब्लड का सर्ज में होता है।
- 41:08आर पीसी। वह मरता नहीं, वह घुलता है खून
- 41:15में और इनकी कई प्रकारें होती हैं।
- 41:24अगर तो तुम्हारे भीतर जो तुम्हारे भीतर भी आरबीसी में है वो अगर तो
- 41:30उसके साथ मेल खा गया। जो पशु तुमने खाया फिर तो कोई
- 41:35विशेष फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर उसके साथ मैंने नहीं खाया तो
- 41:39तुम परम रोगों से ग्रस्त हो जाओ। चलो हम अपने प्रश्न पे आ जाएंगे।
- 41:52अब बात शुरू हो गई। जो आपने प्रश्न पूछा है, उसकी
- 41:57बुनियाद तो मैंने आपको बता दी। मुख्य प्रश्न पे आ जाऊ।
- 42:06संसार में धर्म ग्रंथों में सिर्फ दो ही धर्मग्रंथि जो नियमों से
- 42:11पार की बात करते हैं, बाकी सभी नियमों की बात करते हैं।
- 42:19लाश और सफीशियंट परमात्मा को क्यों मालूम?
- 42:25जब नियम ही काफी है, नियम ही चलाते हैं ठीक, लेकिन कहीं कहीं
- 42:32अंदेशा भी होता है। उसकी रिफ्लेक्शन भी महसूस होती
- 42:38है। उसकी इतनी विशालता, विराटता
- 42:41देखकर, विहृता देखकर कभी कभी शक भी होता है।
- 42:46वैज्ञानिक को तो बहुत ज्यादा शक होता है, रोज़ नए ब्राह्मण खोजे
- 42:50जाते हैं, बड़े अजूबे रोज़ रोज़ खोजे जाते हैं और अभी तो तुम खोज
- 42:58रहे हो जी ने कहा, बिल्कुल। बिलकुल ठीक है।
- 43:02कलेक्टेड ओनली ए फ़्यू पेपल्स ऑन एसी शॉर व्हाय दी ओशन्स ऑफ नॉलेज
- 43:07स्टिल में नानक प्लाटेड अभी तो हमने समुद्र ही नहीं खोजे हैं,
- 43:12कितने हैं? और मैंने तो एक कस्टमर को के
- 43:18किनारे के ऊपर रेत में से कुछ कंकड़ पत्थर ही तो उठाए हैं।
- 43:23तुम मुझे भीष्म पिता कहते हो, साइंस का बुद्धिकी का अभी बहुत
- 43:32कुछ खोजना बाकी है खोजने ऐसे नहीं के सिद्धांत।
- 43:37तुम सिद्धांत ही खोज सकते हो। पहली बात बना तो सकते हैं और
- 43:42सिद्धांत भी। तुमने क्या अभी तो तुमने मात्राएं
- 43:45ही नहीं खोजी, कितने ब्रम्हंड ये ब्रम्हंड कितना लम्बा चौड़ा क्या
- 43:54मेज़रमेंट इसका यही नहीं पता। रोज़ नए भ्रमण खोजने को मिल जाते
- 43:59हैं और ये सिलसिला शुरू रह गई कभी खत्म नहीं हुई।
- 44:08ईश्वर पर बीजा पाने वालों एक बात ध्यान से सुन लो।
- 44:16तुम कभी विजेता नहीं हो तुम सीधा हर हो उससे कैसे तुम जीत सकते हो
- 44:26जिसने तुमको बनाया बस कृष्ण में और बुद्ध में यही फर्क है।
- 44:33बुद्ध कहते हैं लार्ज अरे सुफ्फिसिएंट कृष्ण कहते हैं।
- 44:38नियम बनाने वाला भी कोई है? मैं हूँ नियम बनाने वाला और ये
- 44:44बड़ा विशाल अंतर है। बुद्ध कहते हैं, नियम काफी हैं।
- 44:53कृष्ण कहते हैं, नियम काफी नहीं हैं, नियंता भी चाहिए, न्यामक भी
- 44:58चाहिए। मैं न्यामक हूँ और मैं एक दो
- 45:02शास्त्र हैं, सिर्फ जो नियमों के पार की बात करता है एक एक।
- 45:13जो व्यक्ति साधुता से नैतिकता से परमात्मा को व्याख्यायित करने
- 45:22चलेगा, उससे बड़ा बुद्ध हो कोई? वह बुद्धिमान होगा, सिर्फ बुध्धू
- 45:34होगा, वह भगवान नहीं है, सब उसने खोजा नहीं, उसने पाया।
- 45:47उसके चेहरे पे नूर न होगा इलाही नूरे इलाही न हो छलक न होगी उस
- 45:59नूर की जो भीतर से आता है उसकी आवाज सुनें।
- 46:04अंदाज। आनंदा का खुमार नहीं होगा, कुछ
- 46:10निशानी हो भगवान कृष्ण ने बताये, गीता एक ऐसा शस्त्र है वही तो
- 46:20मैंने कहा तुमने बैल को काटना। सुनकर कुरान बंद कर दी।
- 46:2840,00,000 लोग मरवा दिए कृष्ण ने अगर कृष्ण वीरता का उपदेश न देता
- 46:35तो अर्जुन भाग जाता छुपता छपाता हिमालय की किसी।
- 46:44कोफा में बैठा होता, राम राम कर रहा होता, क्योंकि तब राम तो थे
- 46:52उससे पहले कृष्ण से पहले राम तो हुए थे, ये तो कृष्ण क्यों है
- 47:05सारे युद्ध के लिए जिम्मेदार कृष्ण?
- 47:08और कृष्ण को ही शराब मिला, युद्ध के बाद लौटने लगे।
- 47:19कृष्ण गांधारी के पास गए गांधारी के तीपूत्र हे वासुदेव एक बात का
- 47:24जवाब दे। क्या तुम ये युद्ध रोक नहीं सकते
- 47:29थे? कृष्ण कहने लगे माता मैं रोक सकता
- 47:43हूँ सर। अगर मैं हट जाता तो रुक गया।
- 47:50अगर रुकने की ही तो बात है तो फिर मैं हट जाता तो रुक जाता।
- 47:55अर्जुन में इतना बल नहीं क्योंकि अर्जुन उस सतल पे पहुंचा नहीं।
- 48:02उसको उस सतल पर पहुंचाने वाला मैं जिम्मेवार भी मैं।
- 48:10रोक सकते थे, बिल्कुल रुक सकता था, मैंने कोशिश की सचिन क्या
- 48:19करें औनी होकर ही तो रहती है माँ से।
- 48:26तो गांधारी अपने 100 पुत्रों की मृत्यु से क्षोभित थी।
- 48:32गांधारी बोलीं, हेवस्ते, मैं तुम्हें श्राप देती हूँ जीस तरह
- 48:38मेरा कुल मेरी आँखों के सामने। विध्वंस हो गया।
- 48:45ऐसे ही तुम्हारा यदु कुछ तुम्हारी आँखों के सामने देखते देखते
- 48:49विध्वंस हो जाएगा। लेकिन कृष्ण कृष्ण कृष्ण कहते हैं
- 48:59माते टैबमस्तो ऐसा ही। कोई शिकर नहीं, कोई चेहरे पे शिकर
- 49:16दो ही शास्त्र रीता और कुणाल। जिनमें ये हीरे छिपे हुए हैं।
- 49:32बुद्ध से आगे हीरे मिलेंगे। महारस महारस आनंद का मंत्र?
- 49:43बुद्ध सरोवर तक तो आ गए थे, लेकिन सरोवर के किनारे बैठे उस आनंद के
- 49:49वाष्पों को पी रहे हैं। सर और कृष्ण उस समुद्र में गोता
- 49:55लगा के कबीर उस सागर में सम। बूंद सामान्य संबंध कृष्ण समा गए।
- 50:08नानक समा गए। कबीर समा गए मेरा समाग कहानी यह
- 50:17मीरा वृंदावन में कृष्ण की मूर्ति में समा गई।
- 50:22बस ये एक प्रतीकात्मक चिन्ह थे। मीरा कृष्ण में समाहित हो ऐसा
- 50:38नहीं है कि मीरा की देह नहीं मिली, बिल्कुल मिली।
- 50:43मीरा की देह का विधिवद्ध संस्कार भी हुआ, लेकिन मीरा बौद्ध समुद्र
- 50:50में समा गई। मीरा कृष्ण में समा गई वक्त भगवान
- 50:57में समा जाता है तो उसकी यात्रा पूरी।
- 51:01बस ये बाकी रह गया। बुद्ध का रश्ता अभी बाकी है और भी
- 51:11राहते हैं वसल की राहत के सिवा वसल बहुत प्रेम बहुत मिरम।
- 51:21लेकिन अभी और राहत नहीं। बाकी अभी महाप्रेम बाकी अभी वह
- 51:28जाना रस्त बूंद में भी बहुत है, लेकिन बूंद समद्र हो जाए।
- 51:38तो क्या मज़ा है? बस यही जानना बाकी है।
- 51:43बुद्ध को बूंद का नशा, बूंद का नशा होता है और समुद्र का नशा
- 51:51समुद्र का आगाज नशा होता है, असीम नशा होता है।
- 51:57यही जानना बाकी है। बुध को जब तक चाहे बने रह सकते
- 52:06हैं कौन रोकता है क्योंकि सब जान गए जो जानने योग्य था।
- 52:14अब ध्यान रखना मैं जो शब्द दूंगा बड़े भारी।
- 52:17सब जान गए जो जाने योग्य थे, सब पी नहीं लिया जो पी नहीं योग्य था
- 52:30सब पी नहीं लिया जो पी नहीं योग्य था अभी अमृत का सरोवर पीना बाकी।
- 52:38कहते हैं अगस्त मणि ने सारा सरोवर पी यह प्रतीकात्मक चिन्ह पूरा
- 52:47सरोवर ही जब तक तुम पी ना दोगे, बूंद को पीने से प्यास बुझती तो
- 52:54है। लेकिन उतनी ही बढ़ती जितनी बूंद
- 53:00है नियमों से पार जाने वाली दो ही शास्त्र गीता।
- 53:13और ज़रा हिचक नहीं होती? कृष्ण को कृष्ण आमादा हैं कृष्ण
- 53:21आमादा हैं इन 40,00,018 अक्षुहोनी सेना को?
- 53:30मार देने में उत्सुक है। तुम कहोगे जे एक बैलों की हत्यारा
- 53:40तुम्हें कबूल नहीं होता। 40 लोगों का हत्यारा 18 सोनी सेना
- 53:47का दायरा तुम कबूल कर लेते हो सर क्यों परख बैठे हो उसकी पूजा करते
- 53:52हो बस मित्र कारण नहीं है तुम्हारी वेद बुद्धि अभी बक
- 54:01बकायदा जिंदा है, वेद मिटे। तो सत्य नजर आये तो तुम इतनी सी
- 54:13बात को देख कर वो घबरा गए। किसके तू अलसूरा में ये लिखा है?
- 54:22बिल्कुल लिखा है कौन कहता है नहीं लिखा?
- 54:28तो मैंने कहा दो ही शास्त्र, एक गीता, एक कुरान कुरान को अगर बाच
- 54:39नहीं पाए उसो तो कसूर कुरान का नहीं।
- 54:45तार्किक हैं, वोकबुलरी बहुत है, प्रोफेसर रहे हैं, साइकोलॉजी की
- 54:51पीएचडी हैं, साइकोलॉजी की मास्टर्स डिग्री है।
- 54:55बच जाएंगे पता है शाब्दिक रूप से बच जाएंगे तुम तुमको कोई पता तो
- 55:00है ही नहीं। जब तुम्हें अनुभव ही नहीं है तो
- 55:03पता क्या है? तो बच जाएंगे।
- 55:06तुम लोगों को अपने पीछे लगा दो, ओके कुरान ने मानोगे भी के कुरान
- 55:19है लेकिन यह छांटना बाकी है। वक्त से इसमें अमेंडमेंट नहीं
- 55:24हुआ। इसमें अमेंडमेंट कर भी मत बैठो तो
- 55:31ठीक लिखा हजरत मोहम्मद में कि इसने इसमें एक शब्द मात्रा को भी
- 55:42बदल मत देना। यह है गुनाह है अरे, आप क्या एक
- 55:58शब्द बता दीजिए, शैतान से घृणा? राबिया बड़ी उच्च श्रेणी की
- 56:11साधिका थी, संत थी कुरान का एक शब्द शैतान से घृणा करो, उसने
- 56:25घृणा काट दी। उसने लिख दिया प्यार करो, शैतान
- 56:32से प्यार करो उसके पास बाजी का है राबिया तुने नर्स कर दिया?
- 56:49अलेही वसल्लम मोहम्मद साहब ने लिखा है कि कुरान की आय किसी भी
- 57:00प्रकार की तरमिम न की जाए। तुमने तो शब्द ही बदल दिए, शैतान
- 57:07से घृणा कर, तुमने देखा शैतान से प्यार कर तुमने गुनाह किया है
- 57:15रबिया रबिया कहती, क्या कर? अब राबिया ठीक नजर आएगी।
- 57:27राबिया कैसी है? क्या जब से उसे देखा है तब से
- 57:40घृणा नाम की चीज़ खत्म होगी? प्रेम ही बचा है और कुछ बचा है।
- 57:46प्रेम ही बचा है तो मैं यही लिख सकती हूँ कि शैतान से प्यार कर
- 57:52घृणा बची है। नहीं मैं क्या करूँ?
- 57:58मैं अपनी स्वय अनुभूति को ही तो लिख सकती हूँ, नहीं तो गलत हो
- 58:02जाएगा। तमीम करने वाला कर लेगा लेकिन
- 58:12बुद्धि से तमीम मत करना, अनुभव से तमीम आए तो वह तुम्हें पता ही चल
- 58:19जाएगा उसको छोड़ दो। वो एक्सेप्शनल केस है।
- 58:26अब हम आगे चलें। कुरान में अल्लाह को हर रहमान रहम
- 58:43कर लेता। आर रहमान हर रहीम बार बार क्षमा
- 58:51करने वाला शक, सल्ला बहुत माफ़ करने वाला अत्यंत धयालु तुम पाप
- 59:08करो। क्षमा मांग लो, वह तुम्हें क्षमा
- 59:12कर कर, निश्चित रूप से बुद्धिमान लोगों के मन में उठेगा की फिर तो
- 59:23धोखा हो गया, तुम पाप करते ही चले जाओ।
- 59:30कह देंगे साफ हशर में पूछेगा वर प्रॉब्लम लाखों गुनाह की है तेरी
- 59:37रहमत के ज़ोर पे ये जिसने भी लिखा शेयर गलत।
- 59:46अगर मन में बेईमानी रख कर तुम पाप करो, क्षमा तो कर ही तुम पाप कर
- 59:54लो और माफी मांग लो, मैं माफ़ कर देता है कुरान की 39।
- 1:00:0753 बार बार पाप करो, बार बार माफ़ कर देगा।
- 1:00:23लेकिन चालाक लोग राजनीतिक लोग इसमें भी छिद्र निकालने के कानून
- 1:00:29के थ्रू लेकिन परमात्मा के घर में छिद्र निकाले नहीं जा सकते।
- 1:00:37मोहे का पट्ट छल छिद्र ना भावा निरमान जन सोई मोय।
- 1:00:49ध्यान रखना व्यापार करने वालों को क्षमा कर देता है, तौबा करो और
- 1:00:58सुधार करो। अब देखिए और भी प्रश्न बीच में ले
- 1:01:03चलें आज भी प्रश्न आई रोज़ प्रश्न।
- 1:01:08रसोईघर में बाथरूम में कॉकरोच मर जाते है, कीड़े मकोड़े मर जाते
- 1:01:15है, पांव के नीचे आ जाते है, मर जाते है, क्या करें बाबा पाप हो
- 1:01:19जाता है हो जाता है। कुरान देगी जवाब उसको जानबूझ कर
- 1:01:32नहीं किया। तुमने सत्य से हो जाए तो उसको बचा
- 1:01:39भी नहीं सकते थे। मेरे बोलने से तुम्हें शक्ति का
- 1:01:51मार्गदर्शन होता है और मेरी जीवा। कुछ ऐसे सूक्ष्म बैक्टीरिया के
- 1:02:01लिए हिमालय पर्वत से भी भारी पड़ती है और वो मर जाते हैं।
- 1:02:07लाखों करोड़ों किस्से तो इसीलिए मैं बोलना बंद करता हूँ।
- 1:02:16किसी संत ने बोलना बंद किया है मस्ती का आलम हो बोला ना चाय वो
- 1:02:26बात अलग लेकिन हत्या हो जाएगी इस डर के कारण ला उसे नहीं बोलते ऐसा
- 1:02:33नहीं। मस्ती के आलम में इतना घूम जाता,
- 1:02:37मैं भी 4:00 बजे से पहले बोर नहीं पाता बड़ी कोशिश की मेरे
- 1:02:45पारिवारिक सदस्यों ने कि बाबा पहले ही शुरू कर दिया और रश्म।
- 1:02:54मैं कहा मैं मजबूर हूँ जब वो केयर लेता है मुझे अपनी गर्त में उस
- 1:03:00आनंद के सरब वो की अवस्था में मैं खुद ही नहीं रहता बोलेंगे कौन?
- 1:03:21बेखुदी में आ। जाता।
- 1:03:36कितना कुछ याद रहे आज इस दर जब ला दो कितना कुछ याद।
- 1:03:57बेखुद नी बढ़ा दो के न कुछ। आ जी इस दर मुझे अब ला दो के न
- 1:04:22कुछ। कौन याद रखे?
- 1:04:31इतनी कुमारी मैं बोलेंगे कौन याद रखेगा कीड़े मकोड़े।
- 1:04:37कितने कीटाणु बैक्टीरिया मरते हैं मैं जानता हूँ तुम रसोई का काम
- 1:04:49करोगे मरे? बाथरूम में जाओगे नहाओगे मरीन
- 1:04:57स्वाभाविक है तुमने मारे और तुमने मारे भी नहीं, फिर भी तुम
- 1:05:04प्रयासित कर रहे हो। इट्स सफिशिएंट मोर दैन सफिशिएंट।
- 1:05:10बस तुम जान बूझ कर मत लो बहुत बार प्रश्न पूछे हैं रोज़ पूछ लेते
- 1:05:17हैं लोग हिंदू घरों में चौके का काम करने वाली स्त्रियाँ अक्सर
- 1:05:24मुझे पूछ लेती हैं बाबा दुख बड़ा होता है।
- 1:05:27मैंने कहा बस ये दुख का पक्ष होगा।
- 1:05:30तुम्हारे पापों को नष्ट कर देता है तुमने जानबूझ के थोड़ी पराय
- 1:05:45निस्संदेह मैं बहुत माफ़ करने वाला हूँ कुरान कहती है, बार बार
- 1:05:54पाप कर बंदे। बार बार माफी मांग ले तो भाकर और
- 1:06:02सुधार कर, लेकिन इसका मतलब ये नहीं लाखों गुनाह किए तेरी रहमत
- 1:06:10के ज़ोर पे ये काम। तुम ये समझ के की मार्क्स तो वो
- 1:06:17कर ही देखो हर रही हर रहे माँ दयालु है, बहुत दयालु है, है अभी
- 1:06:31देखो क्या कुछ किया उसने? हमने कुछ किया नहीं था, उसने
- 1:06:36ऑक्सीजन पे दिया, शरीर पे दिया, शरीर के सारे अंक सकुशल काम कर
- 1:06:41रहे हैं। कितना कुछ दिया बेनामा दे दिया आर
- 1:06:46रहमान आर रहीम दयादु शमा से। एकन क्षमा सील का राजनीतिज्ञों की
- 1:07:04तरह दुरुपयोग मत कर लेना, पाप कर लें बर्बादें आदमी को साजिश रच
- 1:07:12के। राजनीतिक शतरंज बैठा के यह तो तुम
- 1:07:17जानते हो, यह तो तुम जो मरवाओगे किसी को और तुम जानोगे कि यह
- 1:07:27मैंने मरवाया। स्क्रीन तो तुम पश्चात अपने इसके
- 1:07:34लिए तुम खुश हो सकते हो तुम तुम्हारी शरारत तुम्हारी शतरंज के
- 1:07:47विशाल कामयाब होंगे तुम प्रयास नहीं करोगे यहाँ पर किसान के लोग।
- 1:07:57कीड़ों मकोड़ों पर तुमने प्रयासित किया गलती से आदमी मर जाए तुम
- 1:08:00प्रयासित करो लेकिन यहाँ तुम प्रयासित नहीं करोगे यहाँ तो
- 1:08:06तुम्हारी बिसात है सतरंजकी गोटी सही जगह टिक गई।
- 1:08:15तुम्हारी शरारत हमारा शतरंज का मोहरा ठीक से चला गया, वह मर गया
- 1:08:26तुमने मार दिया, बिल्कुल ठीक मार दिया, तुम जानती हो?
- 1:08:35तोबा कर तुमने तोबा किया। ये कितने लोग मरे गए ये ध्रुव
- 1:08:44राठी बोलते हैं। श्याम मीरा सिंह बोलते हैं।
- 1:08:50नाम तो इस वक्त नहीं याद आ रहा मेरे कौन कौन से कांड हुए, गुजरात
- 1:08:56में किस किस व्यक्ति को मरवाया गया?
- 1:09:00साजिश के अधीन वो मरवाया गया या मर गए।
- 1:09:09जिसने भी किया या तो नाम भी लेते हैं।
- 1:09:16लेकिन चलो हो सकता है गलत ठीक भी हो सकता है दोनों संभव नहीं,
- 1:09:28लेकिन एक बात ध्यान में रखना तुम मानो या ना मानो।
- 1:09:33वह सर्वज्ञ सर्वज्ञकार थी। गट गट के अंतःस की जान वह जानता
- 1:09:40है, भले भरे की हुई खुशियां। तुमने मरवाया या किसी और ने
- 1:09:53मरवाया या खुद मरा कोई नहीं जानता तुम तो जानते हो तुम तो जानते हो
- 1:10:03क्या बताया? ज़किया जाफरी कांग्रेस के नेता थे
- 1:10:09और। हीरेन पांड्या अब ज्यादा कर
- 1:10:15इज्जाकी या जाफरी तो मैंने पहली बार सुना।
- 1:10:18खैर इसका दोष लगाव हमारे प्रधानमंत्री किसने मरवाया?
- 1:10:28किसने नहीं मरवाया क्योंकि? उसके बाद जब दाल तो मैं इन्हें
- 1:10:33बातचीत बरी कर दिया। मैं इसकी बात नहीं करता।
- 1:10:42मैं कहता हूँ कि तुम अगर इस तरह से बात करोगे लाखों गुनाह की ये
- 1:10:47तेरी रहमत के तौर पर वह पागल नहीं हैं।
- 1:10:54पक्षपाती क्योंकि एक बात समझलो सब उसके बनते हैं, सब उसके बच्चे
- 1:11:00हैं, ऐसा नहीं हो सकता एक पर एक के ऊपर जुल्म हो जाए वो बर्दाश्त
- 1:11:06कर जाए ज़ालिम के ऊपर वो कृपा कर दे माफ़ कर दे ऐसा नहीं।
- 1:11:14ये कीड़ा मुकुटों का मरना जाने मैं नहीं अनजाने में पाप होते मैं
- 1:11:25जानता भी हूँ मेरी जीवा। हिमालय पर्वत की तरह बहुत से
- 1:11:31कीटाणुओं को मार दी थी। ये मैं जानता हूँ, लेकिन जानता
- 1:11:37हुआ भी मैं जानता हूँ कि मैं इससे कहीं ज्यादा।
- 1:11:49सत्य के प्रसार की कोई कीमत नहीं। हाँ, अगर इसी से मैं झूठ बोलूं तो
- 1:12:01फिर डबल गुनाह हो जाएगा, कटानु भी मर जाएंगे और झूठ बोलने का पापा
- 1:12:07अलग होगा। तो कुरान कहता है कि ठगी ठोरी
- 1:12:14बेईमानी से वैसे तो हमारे शास्त्रों में सारी चीजें लिखी
- 1:12:18हैं, लेकिन तुम दोनों में तब्दील करके उसका अर्थ नहीं समझती मोहे
- 1:12:24कम्फर्टे शैल सिद्र न बाबा? निर्मल मान जन सोई मोई पावा,
- 1:12:30किसका अर्थिक है अगर तुम जानबूझकर पाप करोगे शतरंज की बसात बसा के
- 1:12:39पाप कराओगे कत्लोगारत करोगे कुसुम पापी।
- 1:12:49किसी की आजादी के ऊपर अगर तुम बाहर बन के खड़े हो जाओगे बिना
- 1:12:56कार जैसे आज उत्तर कोरिया में हो रहा है।
- 1:13:05प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र है, परमात्मा ने उसे स्वतंत्र पैदा
- 1:13:09किया है। अन्यथा कड़ियाँ लगा के अगर वो
- 1:13:16परतंत्र पैदा करता हूँ तो बंधन समेत वही था, लेकिन तुम?
- 1:13:24गुलाम बनाने के लिए मानसिक गुलाम बनाने के लिए अपनी शर्तों को थोप
- 1:13:29कर जनता पर जो पैदा करते हो गुनाह वह पाप।
- 1:13:43वह मुनाफिक है, पखंडी है जो पाप करते हुए यह जानता है कि वह क्षमा
- 1:13:52तो कर ही देगा लाखों को ना किए तेरी रहमत के चोट पे, उसको माफी
- 1:13:58नहीं करेगा सच्चे दिल से तो। जैसे दक्षिण से हो गया था, लेकिन
- 1:14:12पाप की वजह से नहीं मरा दशरथ मैं पहले भी कठिन दशरथ ने जान बूझकर
- 1:14:19तीर नहीं चलाया था। श्रत ने श्रवण कुमार को जानबूझकर
- 1:14:25नहीं मारा था। उसको तो पता ही था लेकिन इतना
- 1:14:29कसूर तो था कि उसने किसी के ऊपर तो शस्त्र चलाया ही था।
- 1:14:34कोई तो मरेगा ही, वह मरेगा, मरेगा या श्रवण कुमार मरेगा?
- 1:14:43बस यही गलती थी। राजा लोग अक्सर ये गुनाह करते थे।
- 1:14:47आज भी कर रहे है। अगर कृष्ण ने कहा है तपो राज़
- 1:14:57राजो नरक। तप से राज़ मिलता और राज़ से नर्क
- 1:15:01मिलता तो नर्क ऐसे मिलते जैसे ही पावर तुम्हारे हाथों में आती तुम
- 1:15:09पाप करोगे ही करोगे और जब तुम पाप करोगे जानबूझकर करोगे फिर तुम उस
- 1:15:16पाप को। कहीं खुल न जाए इसकी फाइल दूसरे
- 1:15:20के हाथ में सत्ता देने से गुरे करोगे फिर सत्ता में बैठे तो मेरा
- 1:15:27बंदा बैठे, मेरा ही हमराज बैठे। दूसरा कोई ना बैठे जो इस राज़ को
- 1:15:40जानता है वही बैठे ये कोशिश करोगे?
- 1:15:44और इस कोशिश में तुम और गुनाह करते चले जाओ तो प्रश्न पूछना
- 1:15:52सूक्ष्म से। तो फिर तो बंदा पाप ही करता रहेगा
- 1:15:56नहीं, कुरान में यह हिदायत मिलती है के बंदे तू इसीलिए पाप मत कर
- 1:16:02देना अल्लाह तो गफरूर रहीम गफरूर रहीम।
- 1:16:13माफ़ कर ही देगा। अगर ये सोच कर तुम बात करोगे तो
- 1:16:18तौबा न हुआ वो तो तुमने पहले ही षड्यंत्र रच लिया।
- 1:16:25गफ्फ रूट रहिम है? लाखों गुनाह किये तेरी रहमत के
- 1:16:32ज़ोर पे उसको भी ज़ोर बना दिया तुने जाने के पाप करने की तुने एक
- 1:16:39चोर मोरी ढूंढ ली लेकिन कुरान कोई छिद्र नहीं होने देता अपने।
- 1:16:48कुरान साथ साथ कहते हैं, तौबा करें, सच्चे दिल से तौबा करें और
- 1:16:59बदलाव करें गलतियाँ होती रहेंगी। अज्ञान वर्ष जाने अनजान जाने नहीं
- 1:17:16अनजान जो जानबूझकर करोगे उसका दंड भोग न पड़े जो अनजाने में हो
- 1:17:26जाएगी। जैसे कीड़ी मकौड़ी मर गई चौके
- 1:17:33कॉकरोच मर गए यह कोई पाप नहीं, कुरान गति वो क्षमा से।
- 1:17:48लेकिन बुद्ध नहीं कह सकते वो अक्षम हिल बुद्ध कहेंगे, लाज और
- 1:17:52सब और लाज कभी किसी को बख्श के लिए एवरी एक्शन देर इस एन इक्वल
- 1:17:58एंड अपोज़िट सेक्शन न्यूटन का थर्ड लॉ सभी जानते हैं।
- 1:18:05जीस मात्र में गुनाह होगा उसी मात्र में सजाओ दीवार के ऊपर हर
- 1:18:10किसी गेंद फेंकोगे भाई, शायद वो यहीं रह जाए।
- 1:18:14दीवार के पास बड़ी ज़ोर से गेंद फेंकोगे तो शायद वो तुम्हें ही
- 1:18:18लगे वापस। एक्शन का बल देखा जायेगा वेलोसिटी
- 1:18:25देखी जाएगी कितने वेलोसिटी से तुमने गेंद फेंके, उतने वेलोसिटी
- 1:18:30से ही एक्शन आएगा। कृष्ण भगवान भी यही बात कहते हैं
- 1:18:40तुम्हें जानकर बड़ा हैरान की हो। बिल्कुल सेम बात जो कुरान मिली
- 1:18:50कृष्ण क्या कहती? कुरान कहती वह बड़ा पर रहीम।
- 1:19:02अर रहे मान द्या दे क्षमा कर देता है, बार बार क्षमा कर देता है वही
- 1:19:14कृष्ण कहते है अहम तम सर्वा पापे भव मोक्ष श्याम नी माँ सोच।
- 1:19:22मैं तुम्हारे सारे पापों को क्षमा करता हूँ।
- 1:19:30बताओ कहाँ फर्क रह गए कुरान में और गीता में कहाँ फर्क रह गए जो
- 1:19:39कुरान में बताया परमात्मा ने खुदा?
- 1:19:47पहले हे मुसल्लम आदरत महमूद ने कहा कि मैंने लिखी वो कहते है ऊपर
- 1:19:52से उतरी यह है उतरी उसका फरमान जब फरमाए, मेरी खोज नहीं है जब
- 1:20:07परमात्मा जिसका कोई और। आर पार कुछ पता नहीं उसका कहाँ
- 1:20:13शुरुआत कहाँ अंत कहाँ मध्य उस रहम रहीम के पास आर रहीम आर रहमान।
- 1:20:31वहाँ आनंद इतना गहरा है। बुद्ध के पास आनंद तो है लेकिन
- 1:20:40तृप्ति दायक अभी भटकेंगे अभी जन्म और लेंगे।
- 1:20:47बुद्ध से कृष्ण तक की यात्रा विल हॅव टु कंप्लीट क्योंकि भीतर की
- 1:20:56आत्मा मांगती है। अभी भूख ही है, बुद्ध को जन्म
- 1:21:03लेना ही पड़ेगा हिसाब किताब चुकता करने के लिए भी।
- 1:21:08और इस यात्रा को पूरी करने के लिए बुध को 1 दिन कृष्ण होना ही
- 1:21:13पड़ेगा। तब ये यात्रा समर्थकों की अन्यथा
- 1:21:18समाप्त नहीं हुई तो कुरान में लिखा कि वह अर रहीम अर रहे हैं
- 1:21:25माँ। मैं माफ़ कर देता है, बेलाशक माफ़
- 1:21:28कर देता है, बार बार माफ़ कर देता है तुम तौबा करो, तौबा करो, कमीं
- 1:21:37करो बदलो अपने आप को गुना होते रहेंगे रोज़ चौके में।
- 1:21:46सीढ़ियाँ मरेंगी रोज़ बाथरूम में कापरोसे मरें, और भी बहुत से पाप
- 1:21:57होते हैं तुम्हें क्या क्या करें? बोलते हो तो पाप होते हो तुम अपने
- 1:22:02ही सोंस को रोज़ मार देते हो तुम्हें कभी कभी फश्चाताफ हुआ
- 1:22:09क्या क्या कहना? बहुत कुछ गना सकता हूँ, लेकिन जो
- 1:22:14खुद ही खुद ही बातें हैं। अरे हसो मत वो बता देता हूँ।
- 1:22:23काप तो और भी बहुत होते हैं तो कुरान में यही लिखा है।
- 1:22:30अल्लाह बड़ा शमा श्री गुनहगार के गुनाह माफ़ कर देता अर रहीम है अर
- 1:22:39रहे क्या करू तौबा तौबा शब्द समर्पण।
- 1:22:50अल्फाज़ बदल गए, भाषा बदल गई। वो अरबी भाषा में लिखा गया।
- 1:22:56यह संस्कृत में लिखा गया संस्कृत में बोलते हैं कृष्ण
- 1:23:01सर्वधर्माणपत्र जयमा में कम। धर्म पाप है, कमल का शब्द है, फिर
- 1:23:13भी तुम धार्मिक होना पसंद करोगे और कृष्ण कहते हैं धर्म पाप है और
- 1:23:20तुम बचने के लिए अलग अलग अर्थ करोगे धर्म?
- 1:23:24तुम कहोगे नहीं तो हिंदू धर्म का लिखा ये मुसलमान धर्म का लिखा
- 1:23:31ईसाई का लिखा ये तो यहूदी का लिखा ये पारसी का लिखा हिंदू का थोड़ी
- 1:23:38लिखा वो कहते हैं, धर्ममात्र ही पाप है।
- 1:23:45धरम मात्र ही पाप, क्योंकि धर्म तुम्हें भेद पैदा करता है और जो
- 1:23:51भी चीज़ तुम्हें भेद पैदा करती है वो शिन्ह है, वो पाप है।
- 1:24:01पाप है तो इसलिए कहते हैं इस पाप से दूर हो जाओ मेरी शरण में आजाओ
- 1:24:08सर्वधर्माण प्रतिज्ञ छोड़ दे इनको ना हिंदू रह, ना मुसलमान रह ना
- 1:24:19सिख ना ईसाई। नपस कुछ न रे तो क्या होजा तो
- 1:24:29मेरे शरण में आज इंसान होजा इंसान है।
- 1:24:41तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा, तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा?
- 1:25:00इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा। इंसान बन जा।
- 1:25:20सर्वधर्माण प्रतिज्ञ माम एकम, शर्म वृक्ष और समर्पण में आजा
- 1:25:26तौबा कर ले माम एकम, शर्म वृक्ष मेरी शर्म में आजा तौबा का मतलब
- 1:25:37मेरी शर्म में आजा सुधार कर। गुनाह फिर न कर थोड़ा सजग रहे
- 1:25:53चेतना को जगह, जागरूकता को जगह अवेयरनेस को जगह साक्षी को जगह।
- 1:26:09माँ एकम शर्म प्रक्ष आगे वही जो कुरान में लिखा है।
- 1:26:15आर रहमान और रहीम अहम तवांग सर्व पापे बहुमुखी श्यामी माँ सुचार
- 1:26:25मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त करता हूँ।
- 1:26:34अब तुम्हें इस बात पे तो आपत्ति नहीं होती लेकिन कुरान की इस बात
- 1:26:38पे आपत्ति होती है। जब तक भेद बुद्धि कायम रहेंगी
- 1:26:43आपत्तियाँ होती है रंग तुम ये मत सोचो कि तुम ही कुरान को देख कर
- 1:26:52हंसते हो। मुसलमान भी गीता को देखकर हस्ता
- 1:26:56है और मुसलमान तो छोड़ो बिल्कुल जो समकालीन है।
- 1:27:03जैन धर्म और उसी पीढ़ी से है। मन्नू जी महाराज की पांचवीं पीढ़ी
- 1:27:08ऋषभदेव। उसी पीढ़ी से है, उसी वंश से है
- 1:27:16वो जैन धर्म भी कहता है। जैन धर्म ने कृष्ण को सातवें नरक
- 1:27:22में गिरा रखा है। क्यों?
- 1:27:27क्योंकि उसने गुनाह किया? साथ में नर्क में गिरा रखा है और
- 1:27:37उस जैन धर्म में जो समकालीन है मुसलमान की तो बात ही छोड़ो, तुम
- 1:27:43जिन कुरान के ऊपर हंसते हो, ताली मार मार के।
- 1:27:49तुम्हारी किताबों पर वो हँसते हैं, एक तरफा बात नहीं है, लेकिन
- 1:28:02दोनों के मतलब। अब ये पागलों की ही तो बातें हो
- 1:28:07गई जो कुरान में लिखा वो ही मैंने बता दिया कि वही लिखा वही बोला
- 1:28:12भगवान कृष्ण ओके तो वो आ रही वो आ रहे हैं माँ और कृष्ण कहते हैं,
- 1:28:18महामेकम शरणम ब्रज, हम तो हम सर्बबापे मोक्ष श्याम।
- 1:28:26मैं तुझे माफ़ कर दूंगा कहाँ गए कर कर्मों को खा गया, कृष्ण
- 1:28:34कर्मों को खा गई कोरल तुम झिखाई मारते रहोगे रस्सी फिर कर लो
- 1:28:43झिखाई मारते। इतने बराह दुर्बन्ध में क्या है
- 1:28:53तुम्हें पता है एक छोटा सा छोटा सा हूँ जो दिखता भी नहीं सारी को
- 1:29:00कर सकता है। मुझे जब टोटके बताये गए शमशान
- 1:29:10साधना के द्वारा तो मुझे बड़ा हैरान भी हुई इतनी छोटी सी टूट के
- 1:29:16क्यों बदलेंगे, कैसे बदलेंगे और पाप को कैसे पूंजी में डाल देंगे?
- 1:29:20पाप को कैसे क्षमा कर देंगे? वो कहते देखो जिद मत करो, बहस मत
- 1:29:24करो। इनको आजमाके देखो हमने आजमाके
- 1:29:27देखा, बिल्कुल ठीक पाया, अब क्या कहें ये बिल्कुल वैसा था जैसे बीज
- 1:29:34को देखकर मैं कहूँ कि ये वट वृक्ष बन कैसे जाएगा?
- 1:29:37छोटा सा बीज मेरा तर्क बिल्कुल ठीक।
- 1:29:44ये छोटी सी गुठली कैसे वट वृक्ष आम का वृक्ष कैसे बन जाएगी?
- 1:29:49छोटी सी गुठली मीठे, मीठे आम के फल देगी।
- 1:29:54मैं तो नहीं मानता लेकिन देती है भाई।
- 1:29:59ये गुठली ही तो वृक्ष बनती है आम का।
- 1:30:04जी बीज यही तो वृक्ष बनता है वट वृक्ष पीपल का वृक्ष एक छोटा सा
- 1:30:13अन्न छोटा सा स्वर्म अंडाण महारती भीष्म को जन्म दे देता है, भीम को
- 1:30:20जन्म दे। तुम कहोगे ये कैसे हो सकता है?
- 1:30:25देखो हो गया कहाँ से शुरुआत हुई इस परम और अंडन बन गया महारथी
- 1:30:33भीष्म देवव्रत बन गया भीम लेकिन। जैसे बीज को देख कर हसोगे तुम ये
- 1:30:44कैसे बन सकता है नहीं बन सकता बस तुम्हारा हँसना बिल्कुल ऐसा ही है
- 1:30:50तुम बीज को देख कर हँस रहे हो फलीभूत हो के वट वृक्ष बन जाएगा
- 1:30:55शाखाएं होंगी चों दिशाओं पता तब किसकी शक नहीं हो रही, तुम भूल
- 1:31:00जाती हो, भूल नहीं जाती तो मैं पता नहीं होता अज्ञान के कारण ऐसा
- 1:31:05होता जब तुम जान जाओगे तब तुम बहस नहीं।
- 1:31:17अंत में थोड़ी सी और भेंट की कर दूँ क्या प्रवचन शायद रोजाना नौ
- 1:31:30सप्ताह में दो बार और फिर शायद सप्ताह में।
- 1:31:36बहुत ही जरूरी प्रश्नों का जो रह गया है मेरी संघ से बाहर जो आपने
- 1:31:42पूछा नहीं एकदम से तो बंद नहीं करूँगा।
- 1:31:55आप पिछली वीडियो को सुनिए, आपने सुनी नहीं।
- 1:31:59पिछली वीडियो करीब 3000 के करीब वीडियो रोज़ की एक वीडियो सुनोगे
- 1:32:06तो 8 साल लग जाएंगे तुम्हे सुनने में और वीडियो तुमने पूरी सुनी।
- 1:32:16क्योंकि सब्सक्राइबर इतने नए आए, 4 दिन पहले सब्सक्राइबर आया
- 1:32:23प्रश्न कर दिया। वो इतनी रहमत नहीं उठाता कि मैं
- 1:32:31पिछली वीडियो को सुन लूँ। उसमें प्रश्नों का जवाब दिया हुआ
- 1:32:35है। उसमें क्या मैंने झाड़ के थोड़ी
- 1:32:38मार रखा है। प्रश्नों के ही तो जवाब दिए वो ही
- 1:32:41सुन लो और एक बात और बताओ वीडियो को तुम जितनी बार सुनोगे।
- 1:32:55हर बार तुम्हे नया अर्थ मिलेगा, उसमें हर बार नया अर्थ मिलेगा।
- 1:33:05तुम जानकर चकित हो जाओ ये मत सोचना कभी भी ये वीडियो तो मैंने
- 1:33:11सुना हुआ है। नहीं सुना।
- 1:33:16जश्न तुम ठीक से मुझे सुन लोगे और मैं क्या बोल रहा हूँ सुन जश्न
- 1:33:23तुम ठीक से मुझे सुन लोगे मैं कहाँ से बोल रहा हूँ मैं मुँह को।
- 1:33:34उस दिन तुम्हें किसी को सुनने की जरूरत नहीं रहेंगी, बस तुम सम्यक
- 1:33:47श्रवण कर लो किसी तरह। तुमने पूर्ण आत्मा से जश्न सुन
- 1:33:55लिया, मुझे मेरे शब्दों को तुमने अपने अंतर में प्रवेश होने दे
- 1:34:00दिया बिना किसी सेंसरशिप के उसके बाद तुम्हें कुछ और सुनने की
- 1:34:07आवश्यकता बचेगी नहीं। मैं जहाँ से बोला तुम समझेंगे,
- 1:34:14बहुत से लोग समझते हैं हमेशा ही फ्रम दी वेरी बिगिनिंग मैं वहाँ
- 1:34:22से बोला, जहाँ से कृष्ण कहते हैं। अनन्या चिंतन तो मम ये जनः
- 1:34:32परिवास्त तिशा नृत्या गुप्ता नाम योग शमम वहमम यहाँ से कृष्ण कृत।
- 1:34:51सर्वधर्माण प्रतिजमा में का मिश्रण ब्रज मैं कृष्ण कृष्ण मेरे
- 1:35:02से अलग नहीं, मैं मैं ही हम ब्रह्म।
- 1:35:14मेरे से अन्य कोई जुदा और कोई कृष्ण और कोई भगवान नहीं बस मैं
- 1:35:24ही। जीस दिन तुम यह समझ जाओगे मैं
- 1:35:31जहाँ से बोला वो तो सटीक स्थान कौन सा है उस दिन तुम्हें किसी और
- 1:35:44शब्द को सुनने की जरूरत कभी महसूस है?
- 1:35:53फिर तुम पा गए जो पानी और ध्यान रखना लक्षण है परम रस मदहोशी के
- 1:36:04आलम में तुम नाचोगे गाओगे। तुम्हें कोई कष्ट नहीं होगा, कोई
- 1:36:11तकलीफ नहीं, कोई चिंता नहीं सताएगी।
- 1:36:13कोई चिंता ना नहीं है। तुम सब कुछ करते हो भी अगर तब
- 1:36:19नहीं रहोगे बाहर बाहर प्रति पे सब कुछ होगा भीतर भीतर केंद्र पर
- 1:36:27सिर्फ होगा। सिर्फ और सिर्फ अभयारण्यास होते
- 1:36:32हैं, कर्म सभी होंगे। जैसे महाभारत के भीतर भी कृष्ण
- 1:36:43होते हैं, वो ही कृष्ण। भरी मारधाड़ में मारकाट में वही
- 1:36:49होते हैं और निधि बन के भीतर गोपियों के भीतर रास्की को ही
- 1:36:56रचाती है। बिलकुल विरोधी, बिलकुल विरोधी
- 1:37:04चेहरे। व्यक्ति एक अपने भीतर बुद्ध से
- 1:37:19कृष्ण की यात्रा पहले तुम अपने आपको पहचानो।
- 1:37:25हरी का घनाई से हरी का घनाई सबसे पहले अपने आपको जानोगे पहचान, फिर
- 1:37:33तुम मुझे पहचानोगे हू एम आए पहले तो तुम जानोगे हू एमआइ फिर तुम
- 1:37:40जानोगे कि मैं कौन मैं कौन? ये मैं के दो तल, एक तो हमारा मैं
- 1:37:48का तल माँ सब कष्ट क्रेज का एक और तल बाकी है महारस का जो निधिवन
- 1:37:59में कृष्ण बखेरते हैं। वह मेरा असल होना है और वो होना
- 1:38:08कणकन में है। मैं कणकन में मौजूद हूँ मैंने ना
- 1:38:13हीं कोटा जेता तेतता तेतता मैं अपनी सारी सृष्टि की संग रचना
- 1:38:20करके। उस सृष्टि के भीतर ही संभागाया
- 1:38:23हूँ उस कण कण के भीतर ही मेरा वजूद है ईसा पश्चिमथम सर्वमजात के
- 1:38:31इनसे जगत के भीतर भी मैं। जगत के बाहर भी नहीं, मैं नहीं
- 1:38:47मैं। हमें
- 1:39:17तुम बुला। महोबती में तो नाहम का सता हुआ।
- 1:39:42हमें तुम बुलाओ महोबत में तू ना ना हम कौन सता?
- 1:40:00बर्बाद हो गए, कहीं नहीं गया, कहीं नहीं जाऊंगा, यहीं हूँ, यहीं
- 1:40:09रहूंगा। मैं सांसों की हरता में छुप रहा
- 1:40:26हूँ मैं सांसों की हरता। अरे मैं चुप रहा, तुम्हारी सांस
- 1:40:40आती है, सांस से आती है गौर से जब मैं ही तू आ रहा, मैं ही तू जा
- 1:40:48रहा। मैं धड़कन के हर राग में बस रहा
- 1:41:01हूँ, मैं साँसों की हर तार में छुप रहा हूँ मैं धड़कन के हर राग
- 1:41:21में छुप रहा हूँ, ज़रा दिल के जान।
- 1:41:31ज़रा दिल के जान अपने बेहतर उतरो। ज़रा दिल के जाने निगाहें झुका।
- 1:41:48ज़रा दिल की रानी बनेगाहें, जोका दिल तुम्हारे कुछ मैं धड़कन के हर
- 1:41:56राग में भस्त्र हूँ तुम्हारा दिल धड़कता है रात दिन धड़कता है
- 1:42:03चौबीसों घंटे धड़कता है। ज़रा गौर से देख मैं उसकी अखबार
- 1:42:10धड़कन में राग बनकर चुप रहा। बसरा थोड़ा सा जब ज़रा गर्दन
- 1:42:19झुकाई देख ली दिल के आईने में थी तस्वीरें यार।
- 1:42:26ज़रा। तेरे किसान निगाहें जुका ज़रा
- 1:42:35भीतर तो देखो जहाँ दिल धड़कता है जहाँ सांसों का राग चलता है।
- 1:42:47ज़रा अतिल किसान निगाहें जुका मोहब्बत में तेनालीना।
- 1:43:02ना हम को सताओ और आवाज़ उदे, बस तुम।
- 1:43:12पुकार लेना कहीं दूर, मैं पास से पास पाओ।
- 1:43:23तुम पुकार मातृ पुकार, दत्त क्षण हाजिर होते हैं कृष्ण द्रोपदी
- 1:43:33पुकारना तुम्हारी पुकार भी द्रोपदी की तरफ निर्बलता किस आई?
- 1:43:40मेरा वलंबर दा से आये पाओगे मैं कहीं गया ज़रा दिल की ज़ानब
- 1:43:49निगाहें अपने बेटे को करो बाहर मत बढ़ते रहो मिलेगा नहीं बस सिर्फ
- 1:43:57वटकन है बाहर। उलझन है बाहर सुलझन तो भीतर है
- 1:44:02तुम्हारी सुलझन भीतर है थोड़ा सा गायत्री के बारे में भी बता दो।
- 1:44:16गायत्री पर लगातार जितनी देर चला उसको चला ये उच्चारण नहीं है।
- 1:44:27एक धुन और काम करती है धुन। उच्चारण तो मात्र धन को ठहराने के
- 1:44:40लिए होता है। तुम इसको लगातार अरे, इसकी गूंज
- 1:44:46को अपने नवास के ऊपर होने दे गुंजायमान।
- 1:44:54दीवारें पी जाएं, छत और वर्ष पी जाएं, तुम्हारी सारी वस्तुएं पी
- 1:45:01जाएं, तुम्हारा सारा पूजा रूम पी जाएगा, तुम्हारा सारा घर पी
- 1:45:08जाएगा। ये गायत्री मंत्र के उच्चारण के
- 1:45:18धन पवित्र करते थे। हमारे मन को निर्मलता प्रदान
- 1:45:26करें। और तुम क्या पांव शांत भगवान
- 1:45:39कृष्ण ने कहा, जहाँ शांति है, वहाँ समृद्धि है समृद्धि, तो
- 1:45:50हमारे पांव बड़े से बड़ा रोग। कष्ट बड़े से बड़ी तकलीफ, क्लेश
- 1:46:00बड़े से बड़ी चिंता व्याधियां किसी भी आपदा में किसी भी आपदा
- 1:46:08में आप रोगी को सुना। जहाँ ये चौबीसों घंटे धुन चलती
- 1:46:22अलग से रखते हैं एक मोबाइल को किसके लिए?
- 1:46:25ये धन धुन को बुखेरता है, ये धुन पीने योग्य है, तुम्हारी दीवारें
- 1:46:32पी जाएं। तुम्हारे शरीर का रोवा रोवा पी
- 1:46:36जाएगा और तुम्हें मिलेंगे शांति शांति अंतिम मुकाम है, व्यक्ति का
- 1:46:46शांति से आता है समृद्धि शांति वो ही शांति।
- 1:46:53जो आनंद की छाया की तरह आया करते हैं।
- 1:46:58यह गुंजार भी आनंद की छाया की तरह आया है।
- 1:47:02इसमें आनंद कूट कूट के भड़क पड़ा है।
- 1:47:07तुम इसको जितना सुनोगे, जितना मीठा डालोगे, जितना गुड़ डालोगे?
- 1:47:13उतना ही मीठा होगा। तुम इसको लगातार चल लेंगे।
- 1:47:22तुम्हारी हवाओं की की चाल बदल जाएगी, गुणवत्ता बदल जाएगी।
- 1:47:32फिर उस परिवेश में जो भी दाखिल होगा हतब्रब रह जाएगा, सब बदल
- 1:47:38जाएगा। रोगी को नरोक्ता मिलेंगे, अब अब
- 1:47:48समाप्त हो जाएंगे। रोग, कष्ट, क्लेश।
- 1:47:51सब कुछ न बचेगा, तुम्हें चिंता देने वाला कुछ न बचेगा।
- 1:47:58तुम्हें चिंतन कराने वाला शांति होगी।
- 1:48:04महज शांति और शांति तभी हुआ करती है जब किसी किसी चीज़ का अभाव
- 1:48:10नहीं होता। सवस्थ होंगे, शांत होंगे, पदार्थ
- 1:48:22होगा, वैभव होगा, मान मर्यादा होगी।
- 1:48:30प्रचुरता होगी, वैभव होगा, सम्पदा होगी समृद्धि, मानसिक शांति से सब
- 1:48:43कुछ यही तो मिल जाता है। और जिसके पास सब कुछ होता है,
- 1:48:48सिर्फ उसी के घर में शांति होती है।
- 1:48:51ध्यान रखना। जिसने शांति पाली उसके पास सब कुछ
- 1:48:55आ गया। समझी भगवान सिंह की अनुपम देन?
- 1:49:06ध्वनि को पुरोहित करके इसके भीतर उस गुंजार को मैंने शब्दों में
- 1:49:16समेटा, उस गुंजार को सुनना, 24 मिनट तक सुनना।
- 1:49:24कम से कम ज्यादा भी सुन सकते हो। तुम्हारा ध्यान भी रख सकता है।
- 1:49:29सुनते सुनते अन्यथा दीवारों को सुनने देना, दीवारों को पीने देना
- 1:49:36तुम्हारा घर पवित्र हो जाएगा। ये संदेश गायत्री के लिए।
- 1:49:43ये वो मंत्र है जिसके बल से ब्राह्मण ब्रह्मस्त्र को पा जाता
- 1:49:50था इस गायत्री को गूंजने देना, दिन भर रात गूंजने देना।
- 1:50:04बीमारों को सुनाना अभावग्रस्त व्यक्तियों को सुनो कष्ट क्लेश
- 1:50:09चिंताओं से पीड़ित व्यक्तियों को सुनाना तुम्हारे रोग घर लिए
- 1:50:15जाएंगे। तुम्हारी चिंताएं पीड़ाएं समाप्त
- 1:50:18हो जाएंगी सुनो। सुनिए दुख पाप का हश जब तुमने
- 1:50:27नहीं सुना तो सुनने को हवाएं हैं, फिर लाए हैं, दीवारें हैं, सत्य
- 1:50:34हैं, फर्श हैं समान उनको सुनने देना, उनके भी कान होते हैं।
- 1:50:42दीवारों के भी कान होते हैं ज़रा दिल किसानी, निगाहें, जुका।
- 1:50:59ज़रा दिल किसान, निगाहें जुगाड़ मोहब्बत में न हम को सता हो।
- 1:51:19हवा आज देश में सांसों की हड़ताल में छुप रहा हूँ।
- 1:51:35मैं सांसों की हड़ताल में छुप रहा धड़कन हर राग में बस रहा हूँ।
- 1:51:52मैं धड़कन के हर राग में बस रहा हूँ।
- 1:52:03ज़रा दिल किसाने, अंतर्मुखी हो जाओ, अंतर्मुखी हो जाओ, अंतर्मुखी
- 1:52:10हो जाओ। बाहर से खींच लो, अपनी सारी शक्ति
- 1:52:14को जब ज़रा गर्दन चौंकाई देख ले दिल के आईने में थी तस्वीरें जा
- 1:52:25ज़रा दिल किसाने। निगाहें जुगा ज़रा दिल के जाने
- 1:52:38निगाहें जुगा महोबत में त न। न हम खोसता आवाज़ देख हमें तो
- 1:52:59भुला। यन वासु दे श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:53:38मुरा हे नाथ। नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी
- 1:53:56सखा हमार पितुमात स्वामी। सखा हमारे हैं नाथनाराम यानी
- 1:54:13वासुदेव श्रीकृष्ण का मंत्र हर मुरारी।
- 1:54:24हे नाथ नारायण? धन्यवाद, सर।