Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Feb 25 - कृष्ण ने अकेले ही महाभारत कैसे जीता? बुद्ध अभी तक जन्म क्यों नहीं ले पाए? गीता का ज्ञान!
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- 0:22अध्याय चौथा श्लोक 15 एवं ज्ञातवा कृतम कर्मम पूर्व रपी मोमक्षि भी।
- 0:39कुरुकर। में तस्मत तुम पूर्वई पूर्वताम
- 0:47कृत्रिम। पूर्णकालिक मुमक्षों ने भी इस
- 0:55प्रकार ज्ञान कर। कर्म किया है इसलिए?
- 1:02तो भी पूर्वजों के। द्वारा सदा से किए।
- 1:08जाने वाले कर्मों को ही उन्हीं की तरह ज्ञान।
- 1:13कर कर। बड़ा प्यारा शब्द है।
- 1:24ज़िन्दगी के जीने का। रस निकाल देते हैं।
- 1:28कृष्ण ऐसे शब्द चुनकर। लाते हैं।
- 1:35कृष्ण कि जिनका कोई? मुकाबला नहीं।
- 1:45आज से 5000 साल। पहले जब लिपि इतनी जागृत?
- 1:49नहीं थी तब ऐसे। शब्दों को कह देना।
- 1:57आश्चर्य से कम नहीं। कृष्ण कहते हैं।
- 2:04पूर्वजों ने भी ऐसे ही कर्म किये। थे।
- 2:12अब यहाँ ध्यान देना। पूर्वज अगर।
- 2:19डाका मार रहे हो तो डाका मारो, चोरी करते हो।
- 2:27हत्या कतल करते। हो लुटेरे हो झूठे।
- 2:33हो पाप करते हो? अगर वैसा ही करें।
- 2:42नहीं, कृष्ण कहते हैं। इसे संसार।
- 2:45की बात नहीं करते कृष्ण? इसलिए एक।
- 2:50शब्द कृष्ण ने जोड़ दिया बड़ा प्यारा।
- 2:56मो। मोक्ष पूर्वकाल में मोमोक्षुओ।
- 3:02ने जानकर जो कर्म किया है। हे अर्जुन, तुम।
- 3:08भी उन पूर्वजों की तरह जानकर ही कर्म कर।
- 3:19एक। शब्द को ध्यान से सुनें शब्दों
- 3:23में बड़ी जान है अगर जाने भी न सिर्फ मान कर काम कर।
- 3:31लिया। वह कर्म उत्तम नहीं।
- 3:38होगा वह कर्म गलत। भी हो सकता है।
- 3:45और निम्न स्तर। का भी हो।
- 3:47सकता है बहुत। से लोग कह देते हैं कि जैसे पूर्व
- 3:59आचरण करते रहे। वैसा ही आचरण करो।
- 4:04देखिए संसार में तो। ये ठीक है।
- 4:09संसार में प्रत्येक पूर्वजों के घरों के अलग अलग जीन का ढंग।
- 4:15है। समाज में सभी ढंग बराबर नहीं
- 4:21होते, कुछ विभिन्नताएं होती हैं समाज में।
- 4:31कुछ समानताएं भी होती। हैं।
- 4:37लेकिन समाज की बात नहीं कर रहे हैं।
- 4:39कृष्ण यहाँ बात करते हैं, मुमुक्षु भी यानी जो मुक्त होना
- 4:45चाहता। है।
- 4:49आइए। हम बात को थोड़े गहरे में ले
- 4:53चलें। तो आपको मेरे बोलने का मर्म।
- 4:57समझाया जाएगा कृष्ण का यह चौथे अध्याय का।
- 5:03पंद्रहवां स रोग समझा। जाएगा।
- 5:06क्या कहते हैं कृष्ण? कृष्ण कहते हैं।
- 5:17प्रत्येक व्यक्ति के जीवन। की एकलिप्तता होती है।
- 5:28जीने का ढंग है, राजनीतिज्ञ भी सुन लें।
- 5:33राजनीतिज्ञों के ज्यादा काम पड़ेगी।
- 5:36यह बात सांसारिक। लोगों के भी ज्यादा।
- 5:42काम पड़ेगी और मोक्षों के काम तो पड़ेगी ही पड़ेगी।
- 5:48पहला पहला वचन जो तीनों के काम। पड़ता है।
- 5:56चौथे अध्याय का पंद्रहवां। श्लोक प्रत्येक व्यक्ति की
- 6:07लिप्तताएं। होती हैं।
- 6:11महाभारत में कृष्ण ने यही। पद्धति अपनाई।
- 6:18आपको पता। भी नहीं चला।
- 6:19आप बखान कर देते हो। इतिहास।
- 6:23को लिख देते हो? इसके भीतर का मर्म नहीं जान पाते?
- 6:29खेल खेली कृष्ण ने। कैसे खेली इसका नहीं।
- 6:34पता। वह जानना जरूरी है।
- 6:39कोई जानता नहीं इसलिए समझा भी नहीं पाता।
- 6:43तो आइये उस मृग में चलते हैं जो। कृष्ण ने अपनाया है।
- 6:50कृष्ण कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक।
- 6:55लिप्त बिंदु है। ध्यान से सुन्ना अगर।
- 7:03इस पूर्वजों को चूक। गए तो बुनियाद चूक।
- 7:06जाओगे प्रत्येक व्यक्ति का। एक लिप्त बिंदु है।
- 7:20चिपकाहट है प्रत्येक व्यक्ति। की।
- 7:26और ये भी ध्यान। रखा के।
- 7:29प्रत्येक व्यक्ति की चपकाहट एक जैसी नहीं होती।
- 7:34सभी की चपकाहटें अलग होती। हैं।
- 7:38कोई मीठा खाके खुश। कोई नमकीन, कोई मिर्च वाला।
- 7:48सभी एक जैसा स्वाद। का भोजन नहीं।
- 7:51खा सकते लिप्तताएं अलग अलग। हैं।
- 8:01तो आपको थोड़ा सा। पहले संक्षेप में बता दूँ फिर
- 8:06विस्तार में चलेंगे लिप्तता हूँ। को कैसे परखा?
- 8:17कृष्ण है। ये तो बड़ा आसान।
- 8:20है। किसी भी।
- 8:27छठी। इन्द्रिय के खुलने वाले?
- 8:29व्यक्ति के लिए बड़ी। आसान बात है तुम्हारी लिप्तता को
- 8:34जान लेना। तुम कम्पोगे कैसे कम्पोगे?
- 8:41तुम्हे बहादुरी आएगी कैसे आएगी? बड़ी प्रगाढ़ता से जान सकता है वो
- 8:52और इम्प्लिमेंट? भी कर सकता है।
- 9:00कृष्ण जानते हैं दुर्योधन? बह के बिना बाज नहीं आएगा।
- 9:15कृष्ण लोभ ही हैं। लेकिन कायर है।
- 9:21बहादुर नहीं मसलमेन है मसल। उसके बहुत तगड़े हैं।
- 9:31बलवान है, कसरत करता रहा है। लेकिन शरीर से ब्लिस्ट।
- 9:37होना। अलग बात है मन?
- 9:40से साहसी होना अलग बात है। शरीर भैस जैसा हो और दिल।
- 9:50चढ़ी ही जैसा। फिर क्या करोगे?
- 9:59तो कृष्ण कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति का एकलिप्त।
- 10:03बिंदु है दुर्योधन लोभी है। वह लोभ चाहे मान कहो।
- 10:14मैं राजा बनु मुझे मान मिले। लोभ चाहे धरती कहो।
- 10:23ज्यादा जमीन हो मेरे पास। ज्यादा बल्ब हो मेरे पास करीब
- 10:31करीब। 50% दुनिया आज दुर्योधन की राखी।
- 10:35है। और तुम्हारे।
- 10:39आचार्य इस बल। को बढ़ाने में योगदान।
- 10:43देते। हैं।
- 10:51वो कहते हैं, बाल? इकट्ठा।
- 10:52करो इसलिए तो इतनी। लूटपाट मची।
- 10:57है। अगर सभी बाल इकट्ठा।
- 11:06करने लग गए तो लूटपाट मचनी स्वभाविक।
- 11:12है। कॉम्पिटिशन का दौर है।
- 11:18तुम एक। क्लास में बैठे हुए बच्चों को
- 11:20देख। लेते हो हजारों?
- 11:21की संख्या में। और तुम्हें?
- 11:25लगता है ये हजारों? मित्र बैठे हैं, तुम गलती में हो।
- 11:29ये हजारों शत्रु बैठे। हैं।
- 11:37प्रत्येक व्यक्ति दूसरे को पछाड़ने की होड़ में एक ही जगह
- 11:41बैठा। है और एक ही।
- 11:44क्लास में बैठा है। और एक।
- 11:46ही टीचर से सीख। रहा है।
- 11:50देखिये कितनी मजेदार बात। है।
- 11:55सभी। कॉम्पिटिशन लड़ना चाहते हैं?
- 11:59एक ही? स्थान पर विराजमान है।
- 12:02एक ही टीचर उन्हें। पढ़ा रहा है।
- 12:06लेकिन हैं सबके दुश्मन एक दूसरे के प्रतिद्वंदी दुश्मनी तो।
- 12:11होता है। कॉम्पिटिटर इस एनीमी।
- 12:17जो मुकाबला करे दूसरे अर्थों में वह शत्रु।
- 12:21है। जो झुक जाए दूसरे।
- 12:25अर्थों में वह भक्त। है।
- 12:34तब दुर्व्यधन जाते हैं ज्यादा जमीन हो, ज्यादा पैसा हो।
- 12:39मैं राजा बनूं 1000। तर्क खोज।
- 12:43लेते हैं उसके लिए। मेरा पिता तो अंधा।
- 12:47था। वो तो नहीं बन।
- 12:49सका। तो फिर बैठा दिया गया।
- 12:56पांडु को। और अगर उत्तराधिकार ही।
- 13:02चुनना है तो उत्तराधिकार युधिष्ठिर का तब बनता था।
- 13:11अगर पांडु जीवित। होते है।
- 13:15बात। उनकी ठीक है।
- 13:16जज दिया निरोधन का पक्ष यह है। कि बड़े पुत्र को राजगद्दी मिलनी
- 13:26चाहिए। प्रविस्थति।
- 13:30यही व्यवस्था दशरथ। के काल में थी।
- 13:35राम को राज्य मिलना था। बड़े को।
- 13:41राज्य मिलना है। वह चाहे वागले।
- 13:43क्यों न? प्रतिभा को यहाँ कोई।
- 13:49मूल्य नहीं। 2 साल।
- 13:54पहले जो जन्म। किया उसका मूल्य है।
- 13:59व्यवस्था थी तो व्यवस्था का पालन होता था।
- 14:03ठीक थी या गलत थी? और थोड़ा सा विश्लेषण।
- 14:09कर रहे हैं। अगर तुम आई एस बनने में कॉम्पटीशन
- 14:16करते हो ही इस दी मोस्ट इंटेलीजेंट।
- 14:19पर्सन तो फिर? जिसने राज़ करना है।
- 14:25जिसके हाथ में सारे साधने हैं। वो बेटा सबसे बड़ा हूँ।
- 14:33या सबसे छोटा हूँ। क्या फर्क पड़ता है?
- 14:37उनमें भी कॉम्पटीशन? होना चाहिए।
- 14:46शाहजहाँ के 14 बच्चे। थे।
- 14:51और चौहद में बच्चा उसका गोहर जब जन्मी।
- 14:56तो चौहद में बच्चे। को जन्म देते वक्त वो मर गयी
- 14:59प्रसूति काल में। प्रसव का।
- 15:06पीड़ा वो सह न सकी मर गयी। तब व्यवस्था नहीं थी एनेस्थीसिया
- 15:11की। 14 बच्चे सिर्फ।
- 15:18मुमताज़ से थे और मुमताज़ के नाम। पर ताजमहल पड़ा।
- 15:25मुमताज़ से बड़ा प्रेम करते थे। तो?
- 15:33चोदें बच्चों में कॉम्पटीशन होना चाहिए, वो लड़का हो या लड़की हो,
- 15:38क्या फर्क पड़ता है? लेकिन गलती कहाँ हो?
- 15:52समाज धीरे। धीरे बदल जायेगा मुझे।
- 15:55शक है। क्योंकि लोग ही लोग।
- 16:06समाज से गश्त हटाने को राजी नहीं। होंगे।
- 16:12अब अगर। 14 बच्चे सिर्फ।
- 16:13मुमताज़ से हैं। तो उन 14 बच्चों।
- 16:18में राज़ कौन? करेगा।
- 16:19अभी तो। शाहजहाँ जवान है, बच्चों को पैदा
- 16:23कर रहा है, जवान है। और।
- 16:30कुछ लोग कहते हैं। कि दारा सीको का कदल करके औरंगजेब
- 16:35ने ठीक। किया।
- 16:38और कुछ लोग? कहते हैं कि।
- 16:40दाराशिकों का कतल? करके औरंगजेब ने समाज की उस
- 16:44व्यवस्था को तोड़। दिया।
- 16:47दाराशिकों सबसे बड़ा पुत्र था। वह समाज की नीती के अनुसार राज़
- 16:56पर बैठने की थी। क्योंकि बड़ा।
- 16:59अच्छा। लेकिन।
- 17:04और मुझे अब दुष्ट। था अगर छोटा दुष्ट।
- 17:08हो तो बड़ा उसके। सामने टिक ना पाएगा।
- 17:13इसलिए तो मैं ध्यान करवा दूंगा अगर।
- 17:15छोटो को राज़ चाहिए। तो उन्हें दुष्ट बनना होगा।
- 17:23अगर वो योग्यता। रखते हैं तो।
- 17:26अन्यथा चुप करके बैठ। जाए।
- 17:35एक ही। बाग की संतान में।
- 17:41मुकाबला कॉम्पिटिशन और। यहाँ तो मैंने बात।
- 17:46की कि 1000। बच्चा बैठा है एक।
- 17:48कलश में और एक टी शुरू में पढ़ा रहा है पढ़ाने का ढंग।
- 17:53एक बताने का ढंग। एक।
- 17:56पद्धति एक। और मुकाबला 1000 लोगों में और
- 18:021000। प्रतिद्वंदी यानी दुश्मन।
- 18:05इकट्ठे बैठे हैं। कौन क्या गठ कर?
- 18:10पायेगा और कौन कॉम्पिटिशन? में प्रथम आएगा।
- 18:17एक ही टीचर का? पढ़ाया हुआ।
- 18:18कोई तो आएगा? कॉम्पटीशन होना चाहिए।
- 18:33लेकिन तानाशाही व्यवस्था। राजव्यवस्था राजतंत्र आज खत्म हो
- 18:39गया। कुछ मुल्कों में भी।
- 18:42है। भारतवर्ष इससे निजात।
- 18:48हो गया है। लेकिन ध्यान रखना।
- 18:56कोई भी व्यवस्था पूर्णकालिक। पूर्ण नहीं होती।
- 19:01शब्दों को ध्यान से सुनें कोई भी व्यवस्था।
- 19:05पूर्णकालिक पूर्ण नहीं होती। वक्त आता रहेगा, वक्त बदलता
- 19:10रहेगा। और व्यवस्थाएँ भी बदलती रहेंगी।
- 19:15वह पूर्णतः 1 दिन अपूर्ण। भी हो जाएगी।
- 19:18उसमें फिर बदलाव करना पड़ेगा। लेकिन।
- 19:37और मुझे हमने धाराशकों। को मार दिया।
- 19:40अपने बाकी के भाई। भी मार दिया, बाप को कैद कर दिया,
- 19:45बहनों को कैद कर दिया। जहाँ आरा।
- 19:48को कैद कर दिया। जाने बिना कॉम्पिटिशन किए खुद को
- 20:00योग्य। समझ।
- 20:00ले मैं योग्य हूँ कोई मुकाबला नहीं हुआ कोई महफिल नहीं हुआ।
- 20:09बुलाई किसी पारखी। को नहीं बुलाया।
- 20:15जजेस से नहीं। पूछा के बताइए?
- 20:18कौन मुकाबलेबाजी कुछ नहीं हुई? बस।
- 20:23कतल कर दिया और। बैठ गया हमेशा।
- 20:28से संसार में धांधलियां होती रही हैं।
- 20:33और मुझे आसार। कम दिखाई पड़ते हैं कि ये
- 20:37दांदरियां कभी रुक जाएँगी। खैर।
- 20:42इन बातों को छोड़ दीजिए, कृष्ण जानते।
- 20:45हैं कि प्रत्येक व्यक्ति। की।
- 20:50लिप्तताएं होती। हैं विरोधन की लिप्तता।
- 20:56है। अपने आप को बड़ा दिखाने की और
- 21:04अक्सर। अपने आप को बड़ा दिखाने की।
- 21:11लिप्सा उसी। व्यक्ति में होती है।
- 21:14जो भीतर से। कमजोर मनोवृत्ति का।
- 21:16होता है। जिसके शरीर से बदबू।
- 21:27आती। है।
- 21:30डो डोरैंट तो वहीं। छिड़केगा सेंटर।
- 21:33इतर तो वहीं छिड़केगा महावीर के शरीर शरीर से वैसे ही।
- 21:39सुगंध आती। है।
- 21:41उसे किसी प्रकार के। इतर को छिड़कने की आवश्यकता है।
- 21:46कहते हैं मुनि के महावीर के मल। में से भी।
- 21:52दुर्गन्ध नहीं आती थी। अपने आपको बड़ा।
- 22:04दिखाने की कवायद वही। करेगा, जिसका भीतर।
- 22:09उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा। है।
- 22:12कि यू अरे इंफेरिअस? यू अरे इंफेरिअस तो कमजोर?
- 22:19है। उसकी आत्मा उसको।
- 22:22लताड़ेगी तो वह। अपने आप को बड़ा बनाने की चेष्टा
- 22:29करेगा। बढ़िया, पहरावा, बढ़िया, खूबसूरत
- 22:36सब बाल संवारेगा। बाहर से देखने में सुंदर।
- 22:41लगेगा। कपड़ों की जोड़ियाँ बहुत।
- 22:44होंगी सांझ तक 10। बार बदल देगा।
- 22:48हेयर स्टाइल बोतल देखो। आम पजामा डालेगा कभी पठानी।
- 22:55डालेगा। कभी बंगाली डालेगा कभी।
- 22:59इरानी डालेगा अलग अलग। बात का है।
- 23:06बात। है कि इसकी आत्मा?
- 23:08इसको प्रताड़ित करती। है।
- 23:14भीतर से कमजोर। है।
- 23:18भीतर से इंफेरिअल है। बड़े बड़े हार्डिंग लगाएगा।
- 23:23और कार्नर पे लगाएगा? तुम इन होर्डिंग्स को देख के साध
- 23:29मचाने के लिए बहुत वीर व्यक्ति है।
- 23:32कायर से कायर व्यक्ति अपनी होर्डिंग्स रहया करते हैं, जो
- 23:40जानते हैं। कि मैं।
- 23:45बलिष्ट हूँ मैं वाद्र हूँ, वह अपना प्रचार नहीं।
- 23:50करता। कृष्ण कभी प्रचार नहीं।
- 23:53करता है कृष्ण? मगर रहते हैं रास।
- 23:56रह जाते हैं। लोग भला बुरा कहते हैं।
- 24:03निधि वन में नाचे चले जाते हैं। रस्म खेरते।
- 24:06हैं। यही तो है ज़िन्दगी।
- 24:14यहाँ। राजनीति का रस्म करता।
- 24:16है। और राजनीति से कड़वा?
- 24:19कुछ भी नहीं होता। मैं अक्सर ही कहता।
- 24:23हूँ। जो राज़ करते हैं वो हमारे पे
- 24:25उपकार करते हैं। कुकी।
- 24:30बोझा बोझा या तो। राजनीतिक उठाते हैं देश?
- 24:39का या फिर वो उठाते हैं? आप समझे जाना हसा।
- 24:46मत कह। कौन बोझा ढोएगा बोझा।
- 24:55या तो राजनीतिक ढोते हैं उनका धन्यवाद।
- 24:59मैं अक्सर धन्यवाद करता हूँ राजनीतिकों का।
- 25:02अच्छा है आप। देश को संभालना रहेगा।
- 25:09या फिर वो ढोते? हैं।
- 25:19इन दोनों के अलावा कोई बोझा नहीं। ढोता।
- 25:22और देखिए किसी को। कुछ नहीं।
- 25:24मिलता। आप मेरी बातों का मजाक में मत।
- 25:28लेना मैं अनुभव। की बात बताता हूँ।
- 25:33मैं भी किसी जनम में। गधा।
- 25:35था। और मैंने।
- 25:39अपनी बायोग्राफी में बोला। हुआ है।
- 25:42अगर गधा न होता तो मानव ना बनता। जड़ से।
- 25:49चेतन और परम चेतन। की यात्रा।
- 25:53के पड़ाव के भीतर। सब आ जाता है।
- 25:56मैं कुत्ता भी था। हँसा मत।
- 25:59करो मैं सुअर भी। था।
- 26:03मल। भक्ष भी बहुत किया।
- 26:08गद्दा भी था बाहर भी बहुत धोया। बोझा बहुत।
- 26:11रोया क्या करें फ्रम। अनकॉन्शियस टु सुपरकॉन्शियस एक
- 26:22यात्रा है अनुभारी। इसमें से।
- 26:26गुजरना पड़ा और मुझे तो पता नहीं लगता शायद।
- 26:32अगर मैं उस पद्धति को ना जानता। हूँ।
- 26:36मैंने कुछ वर्ष इधर भी गुजारे हैं, प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का
- 26:47एक कलिंगिंग। पॉइंट होता है।
- 26:52चिपक जाता है। किसी व्यक्ति।
- 26:56को मान सम्मान नहीं। चाहिए उसे धन चाहिए वो कहते धन सब
- 27:02कुछ है धन से सब खरीद। लूँगा किसी व्यक्ति।
- 27:09को धन नहीं। चाहिए।
- 27:12उसे हुस्न चाहिए। वो कहते धन।
- 27:15कुछ भी नहीं। हुसैन बालों के चरणों में धन।
- 27:19लौटता है, कोई कहता नहीं ना। बल चाहिए, बहू।
- 27:27बल से सब। जीता जा सकता।
- 27:30है। होषन भी जीता जा सकता।
- 27:32है। धन भी पैदा किया जा सकता है।
- 27:38कोई कहता है राजबल। चाहिए राजबल से सब।
- 27:42मिल जाता है तुम जो। चाहोगे मिल जाएगा।
- 27:48कृष्ण कहते हैं, सभी का एक। लिप्त बिंदु है और कृष्ण ने
- 27:58महाभारत में यही। किया।
- 28:02उस लिप्त बिंदु का। उसने उपयोग किया और।
- 28:08सिर्फ। कृष्ण जानते हैं।
- 28:12आज तुम्हारे समक्ष खोल। रहा हूँ शायद कभी।
- 28:18किसी ने ना खोला। हो?
- 28:19ये राज़ तुम्हारे। आगे आज खोल।
- 28:27रहा हूँ ये राज़। जो कृष्ण ने अपनाया।
- 28:32और जो सन्तों ने नहीं बताया प्रत्येक व्यक्ति का एकलिप्त?
- 28:38बिंदु है जीस ढंग। से।
- 28:46एक व्यक्ति मारा गया, वह उसका लोपपोल था।
- 28:51जीस ढंग से दूसरा व्यक्ति। मारा गया वह उसका लूप पोल था।
- 28:56दूसरे शब्दों में लिप्त बिंदु को लिपोल।
- 28:59कहते हैं और प्रत्येक। व्यक्ति का अपना।
- 29:07एक लिप्त बिंदु। होता है।
- 29:13करण मारे जाते हैं। करण के भीतर प्रेम है करण बड़े
- 29:21प्यारे। व्यक्ति हैं।
- 29:23कुंती का पहला पुत्र कुंवारी का बेटा करण कुंती कुंवारी थी तो
- 29:32कर्ण पैदा हुआ है। सूर्य जनन।
- 29:39के किसी व्यक्ति के साथ उसका। संबंध हो गया।
- 29:43और वो गणपति हो गई उस सूर्य से नहीं।
- 29:47वह सूर्य तो आ जाएगा। तो तुम्हारी धरती न बचेगी।
- 29:51130। गुणा बढ़ा है धरती?
- 29:53से। ध्यान रखना, ये पागलपन में मत
- 29:57पड़ना, इसलिए मैं कहता हूँ कि प्राणों।
- 30:00को आग लगा। दो।
- 30:03सूरज नाम का कोई? व्यक्ति।
- 30:05था। उसका पूरा विवरण।
- 30:10चाहिए तो मैं बता। दूंगा।
- 30:12लेकिन अभी। वक्त नहीं है इतना फिर तो वीडियो
- 30:15खत्म होने को आ गई आंधी, वीडियो तो होगी।
- 30:24वह संपर्क में आया। कुंती का?
- 30:26कुंती उसको दिल? हार बैठी।
- 30:30और कर नुस्पन होगा। समाज में प्रथा तभी यही थी।
- 30:36अजमेर ही है। कवारी का बच्चा पैदा हुआ, उसने
- 30:42कहा, मारना तो नहीं। उसने एक संदूक में बंद किया शेफ
- 30:51लकड़ी में। और बहादिया नदी में।
- 31:03वो। हाथ लग गया, सूत उनके औलाद नहीं
- 31:08थी। उन्होंने बच्चा पाला बड़ा।
- 31:10खुशबू है। सूत पुत्र कहलाये।
- 31:22समाज की व्यवस्थाएँ कई बार। वो होती।
- 31:25हैं। कई बार बदल जाती हैं, लेकिन एक
- 31:29बात तुम्हें। बता दो यह श्रद्धा।
- 31:33के लिए सत्य। इसको दिमाग में बेजमे रख ले।
- 31:41समाज की मान्यताओं को एक तरफ रख देना अपने जीवन के बारे में जब
- 31:46सोचने लगो बेड़ों की तरह मैं मैं करते हुए।
- 31:54एक दूसरे के पीछे। मत जानो।
- 31:57जब तुम्हारे जीवन। का सवाल हो।
- 32:02तो समाज की मान्यताओं। को एक तरफ रख देना है।
- 32:08मैंने क्या कहा जब तुम्हारे जीवन? का सवाल हो।
- 32:14पूर्ण ज़िन्दगी के जीवन मरन का। खुशी गमी का?
- 32:18सवाल हो? सब समाज की।
- 32:23व्यवस्था को एक तरफ रख देना है। इस शब्द को आप गांठ बांध।
- 32:28लेना क्योंकि समाज में रहने वाले सामाजिक।
- 32:31बरणी हो हम? समाज में तो रहते।
- 32:35हैं। लेकिन समाज से पार।
- 32:39रहते हैं समाज। में नहीं रहते हैं।
- 32:42तुम्हें पता भी नहीं चलता। मन।
- 32:49की कोलहल के बीच। मन की कोलहल से।
- 32:53पार यह। शायद तुम्हें समझे न आए।
- 32:58संत सदा। कोलहल के बीच रहता।
- 33:01है। और कोलहल से पार।
- 33:04रहता है। कोलहल को देखता।
- 33:07हुआ रहता है। कोलहल के बीच में उलझता नहीं।
- 33:14होने देता है कोलहल को। और दूर बना रहता है नर्लिप्त भाव
- 33:22से। उसी के।
- 33:23बाद मैं कर रहा हूँ। लिप्त बिंदु होता है।
- 33:27प्रत्येक मृति। का?
- 33:33कर्ण को प्यार नहीं मिला। माँ का?
- 33:37प्यार ही जिसने ना पाया हो जन्म। होते ही जिसे।
- 33:41त्याग दिया गया हो। माँ का महमत्व ही न मिला।
- 33:44हो वह। इसी चीज़ से ही।
- 33:48लूटा? जाएगा कोई राजनीतिक व्यक्ति?
- 33:54सारे दिन बैठ के इसी। बात का हिसाब?
- 33:56लगाते हैं। कौन व्यक्ति कैसे लूटा?
- 33:58जाएगा। कौन खरीदा जाएगा, कौन भैसे अपनी
- 34:06तरफ आएगा? गंगा स्नान करेगा?
- 34:12किसको डॉलर? दिखाएंगे, फिर आएगा किसको दंड दे
- 34:17देने की व्यवस्था करेंगे, फिर आएगा।
- 34:20किसी को दंड का वेद। खाएंगे तो आएगा।
- 34:25बहुत पहले जान्य के बोलने से बहुत पहले कृष्ण ये नीतियां अपना चूके
- 34:31थे। ऐसे ही।
- 34:32पूछो तो इसके आगाज। कृत्य कृष्ण और चाणक्य।
- 34:40कोई प्रबुद्ध व्यक्ति नहीं थे। चालाक थे कृष्ण, प्रबुद्ध थे
- 34:47भगवान। जब व्यक्ति तुम्हारी सोच से परे।
- 34:52हो जाता है। जो तुम्हारी समझ में नहीं।
- 34:56आता तुम हाथ जोड़। लेते हो उसकी पूजा?
- 35:00करनी शुरू कर देते हो एम्पल कांट ने कहा है।
- 35:07जो व्यक्ति तुम्हारी। समझ से परे हो जाए।
- 35:10या तो वो पशु। है या देवता?
- 35:14ठीक है उसकी बात। जो समझ में नहीं।
- 35:18आता? वो या तो पशु।
- 35:20है पशु का बवार। समझे में नहीं आएगा।
- 35:24वह। दुलत्ती मारेगा या प्रेम?
- 35:26करेगा? काटेगा या जाटेगा या देवता?
- 35:33है। वह भी तुम्हारी समस्या पार
- 35:35बजाएगा। तो जब चाणक ने।
- 35:41यह नीती घड़ी निश्चयति वो। कृष्ण को पढ़ते कृष्ण को देखते
- 35:46उसने नीतियाँ घड़ी होंगी। कैसे कृष्ण?
- 35:50ने महाभारत जीता अकेले। कृष्ण ने।
- 35:55तुम कहते हो सभी। लड़े नहीं लड़े।
- 35:58कोई नहीं लड़ा सिर्फ कृष्ण। लड़ा।
- 36:03और एक कृष्ण हो। और दूसरे तब सारे।
- 36:06संसार हो। कृष्ण जीतेगा दुनिया हार।
- 36:11जाएगी कृष्ण सर्वज्ञे हैं, सर्व व्यापी भी हैं।
- 36:17सर्व शक्तिमान भी हैं। कृष्ण को कोई नहीं।
- 36:21हरा सकता। प्रत्येक व्यक्ति का एकलिप्त।
- 36:31बिंदु होता है। देखिये।
- 36:33आज का प्रवचन। बड़ा गहरा भी है।
- 36:36सर करके बोल। रहा हूँ।
- 36:41बीच बीच मैं कुछ उदाहरण इसीलिए देता हूँ।
- 36:45कि तुम्हें समझी? ठीक से आ जाए।
- 36:49लिप्त बिंदु होता है। प्रत्येक व्यक्ति और भगवान कृष्ण
- 36:53ने यही लिप्त बिंदुओं का। उपयोग किया।
- 37:06करण मारा नहीं। जाता था, कवच था।
- 37:09कुंडल। थे सूर्य।
- 37:13का दिया हुआ कवच। सूर्य भगवान का नहीं, गलती मत
- 37:24खारजाना एक बलवान व्यक्ति था उसकी कहानी किसी वक्त फिर।
- 37:31उसने कवच दिया था। उसको वरदान था कि।
- 37:38उसका जो बच्चा पैदा। होगा।
- 37:42वह। कवच से पैदा होगा।
- 37:44और कुंटल से पैदा होगा। तो वो जानता।
- 37:54था इससे प्यार? नहीं मिला माँ का?
- 37:59कवारी का बच्चा। है।
- 38:02कृष्ण जानते थे कुंती पुत्र है। बुआ का बेटा है, कुंती बुआ थी।
- 38:09कृष्ण की। एक अर्थ में भाई था।
- 38:14उसका। और जब ऐन मौके पर कर्ण की जरूरत
- 38:19पड़ी, बेशम गए, द्रोण गए, कर्ण की जरूरत पड़ी, उसके बाद कोई और
- 38:25महारथी बचा ही नहीं था, सिर्फ। तो कृष्ण ने करण को।
- 38:34नर्वस कर दिया। ये कह के।
- 38:42कृष्ण ने सिर्फ नर्वस? किया।
- 38:45कृष्ण की एक नीती दुश्मन को जीतना।
- 38:48तो नर्वस कर दो। और ध्यान रखना कृष्ण?
- 38:56जो नीती को खेलते हैं वो। उस नीती को खेलते हैं, कृष्ण खुद
- 39:00नर्वस कभी नहीं। होता कृष्ण जानते हैं।
- 39:08के इस व्यक्ति की ये राग है इससे ये नर्वस।
- 39:11हो जाएगा। लेकिन तुम कहोगे फिर तो कृष्ण का
- 39:18भी कोई। रूप और होगा नहीं।
- 39:19कृष्ण का कोई लूप हो गया। जो?
- 39:22उस तल पर पहुँच। गया।
- 39:25उसका कोई? लिप्त बिंदु नहीं होता।
- 39:27क्योंकि वो। सब तरह से लिप्तता को पार कर जाता
- 39:31है। सब चिपकाटें खत्म।
- 39:34हो जाती हैं उसकी वह पूर्ण त्याग में।
- 39:37लिप्त हो जाता है। उसका कोई लोबोल नहीं होता।
- 39:41वह किसी तरह से जीता। जा ही नहीं सकता।
- 39:47इट इस इम्पॉसिबल। तो डिफीट हिम उसको।
- 39:52हराना असम्भव है। क्योंकि उसकी कोई लिप्तता।
- 39:56नहीं बची। वह सभी भांति से।
- 40:01निर्लिप्त हो गया। अले प सर्वव्यापी सदा अले प तोहे
- 40:07संग समाये गुरुवार जिंदे के ये बच्चन?
- 40:13काहे रे बन? खोजन जाए सर्वव्यापी सदा अले प।
- 40:21जो निर्लिप्त हो गया। फिर उसके ऊपर कोई।
- 40:27नीती काम नहीं आएगी, सब तुम्हारी राजनीति में फिर हो जायेंगे।
- 40:30तुम्हारी चोसर बिछाने वाले सब। कृष्ण जायेंगे।
- 40:33फिर जरासंधा कंस था। कितने बरी थे, कितने समझदार थे,
- 40:43कितनी कितनी इनको वरदान मिले हुए थे।
- 40:47ज़रा संत मारा ही नहीं जाता था। अगर कृष्ण नौ।
- 40:52क्योंकि जब उसको मारा जाता काटा जाता बीच।
- 40:55में से दो फांक हो जाती पर वो मिल जाता।
- 40:59कि जैसे ये मिलता। है इनके।
- 41:05टुकड़ों को अलग अलग फेंक दो। कैसे मिलेंगे बाएं को दायें फेंक
- 41:12दो दायें को बाएं फेंक दो मिलेंगे कैसे वह?
- 41:17कभी जुड़ ही नहीं। पाएगा?
- 41:20कृष्ण पकड़ गए बाद। को और आखिर।
- 41:25में कृष्ण की प्रतिभा ही काम आई। कितने कितने बली थे जरा संत की दो
- 41:33बेरियाँ कंस के साथ वे ही थीं। और कृष्ण की मामिया थीं।
- 41:39ज़रा संत की बेटियां। थीं।
- 41:41इसलिए ज़रा संत को। क्रोसा।
- 41:46कि मेरा जमाता मार दिया इन्होंने। इसने यह थी कहानी।
- 41:56प्रत्येक व्यक्ति का एकलिप्त। बिंदु होता है।
- 41:59और उस लिप्त बिंदु। को कोई दिमाग की खोज नहीं है ये।
- 42:09क्षति इन्द्रिय जिसकी जाकी वह देखते।
- 42:12ही पहचान जाएगा। यह व्यक्ति कैसे कौन सा लिप्त
- 42:17बिंदु है, इसका कैसे? कब वो आएगा जाये?
- 42:21ये जान जायेगा। बे?
- 42:23कृष्ण के लिए कुछ भी। असंभव नहीं है, जान।
- 42:27बशर्ते कि वो कृष्ण? के तट पर पहुँच।
- 42:30गया हो, नृलिप्त हो गया हो सभी। लिप्तताएं उसने तोड़ती हैं।
- 42:36शिप्र काहटें सभी। तोड़ती हैं।
- 42:39वह अकेला हो। गया हो।
- 42:42तुम अकेले होने से डरते हो मुझे रोज़ मैसेज आती हूँ, मैं अकेला
- 42:49हूँ, मैं अकेली हूँ मेरी माँ मर गई।
- 42:53मेरा बाप मर गया। मरे वर्षों बीत।
- 42:58गए लिप्तता नहीं। खत्म हुई।
- 43:02और जब तक लिप्तता। खत्म नहीं होगी तब तक।
- 43:05खुशी नहीं मिलेंगे मेरे। पास ऐसे अजूबे अजूबे मैसेज आ जाते
- 43:12हैं जिनको सुनकर मेरे होश। फख्त हो जाते हैं।
- 43:23व्यक्ति की लिप्तता। कहाँ तो काम करती।
- 43:25है। व्यक्ति की लिप्तता से व्यक्ति का
- 43:33तल बुझाना जाता है। एक बिटिया नाम तो नहीं बताऊँगा।
- 43:46उसका मैसेज मेरे पास। आता है बाबा मेरी माता का ख्याल।
- 43:51रखना। चार वर्ष पहले मर।
- 43:53गया। कमर है जो मर।
- 43:58गया। जो चला गया उसे भूल जा जो चला गया
- 44:15उसे भूल जा। वो न।
- 44:18सुन सकेगा तेरी सगा जो चला गया उसे भूल जा क्या रखु?
- 44:36क्या क्या रखु? अपने कर्मों के हिसाब।
- 44:40से उसे जन्म मिल। जाएगा प्रकृति ख्याल?
- 44:44रख लेगी उसके। मैं क्या ख्याल रखूं?
- 44:47मेरी प्रकृति सफीशियंट वो सही। काम करेगी उसमें किसी।
- 44:52प्रकार की कोई रिश्वत। नहीं होती।
- 44:57मैं क्या? ख्याल रखूं उसका?
- 45:01लेकिन क्या करूँ मुझे? पता है लिप्तता के हाथों यह
- 45:06बढ़िया मजबूर। है।
- 45:12ऐसे कमेंट से बहुत। लोगों के आते हैं।
- 45:18मेरे। पिता चला गया उसका।
- 45:19ख्याल रख जा। उसको अच्छी जगह जन्म।
- 45:23दे देना मेरी माता। चलेगी उसका ख्याल रखना।
- 45:31अच्छी। जगह जन्म दे देना।
- 45:34एक मज़े की बात। बताऊँ वैसे।
- 45:39मेरी बातें तुम्हें लगेंगी गबोड़। गबोड़ ही लगती है।
- 45:42होती है ये मैं ईमानदारी से कहता हूँ मेरे भाई की मृत्यु हुई
- 45:53इंडियाना। स्टेट में हार्ट के डॉक्टर।
- 45:59थे बड़े सुप्रीम टेंटेंट। चीफ थे वो, ओके?
- 46:07कोरोना काल में उनकी। मृत्यु हो गई 2021।
- 46:142000। 23 में वह मेरे पास आए।
- 46:20जीवन में भी। जदा गदा आते।
- 46:22रहते थे। 1970।
- 46:24में वह अमेरिका में गए और सारे परिवार।
- 46:27को साथ ले गए। 2000।
- 46:3823 में मेरे पास है। मैंने कहा, तून रमेश हाँ भाई है
- 46:49यहाँ फिर रहा है। हाँ।
- 46:52कोई गर्भ उपलब्ध नहीं। हुआ।
- 46:56अंधों को रंगों। की बात।
- 46:58सदा ही गबोड़ लगती। है इस बात को हृदय में भगा लेना।
- 47:05अंधों को रंगों की बात गबोड़। लगती है।
- 47:08रंग नहीं होते उसे यह नहीं पता कि आँख नहीं है मेरे।
- 47:14पास। रंग नहीं होते।
- 47:19और पक्का है, सही है वह सत्य। है।
- 47:22झूठा नहीं है उसके। लिए रंग वाकई नहीं होते।
- 47:27अंधों के लिए रंग कहाँ होता है? मुझे रोज़ आ जाते हैं कमेंट बाबा।
- 47:32इतने गपोट तो कृपा किया करो मत बोला।
- 47:35करो, मैंने कहा, भाई। थोड़ा सा कम बोलता।
- 47:38हूँ देखो। तुम इतने।
- 47:40प्रभावित हुई मत रोया करो। और अगर ज्यादा प्रभावित।
- 47:44होते हो हम तो? बाबा रोने लग जाते हैं।
- 47:49तो फिर मत रोया करो ना मत सुना करो।
- 47:52और क्या कर सकता हूँ? मैं तो इतना नहीं कर?
- 47:54सकता हूँ और पापा। सुने बिना भी नहीं रहा जाता।
- 47:59क्या करूँ तुम्हारी आवाज? ही इतनी प्यारी है।
- 48:06जब तुम बोलते हो तो फूल जाते हैं। हवाएं।
- 48:12ठहर जाती हैं पंछी। चह चहाना बंद कर।
- 48:15देते हैं। मोर नाचन बंद कर।
- 48:18देते हैं। फूल ठहर?
- 48:20जाते हैं अपनी खुशबुओं। को लेके तो इसमें मेरा क्या कसूर
- 48:30है? मैं क्या करूँ?
- 48:37देखिए मैं क्या विश्वास दूँ, आपको आँखें तो दे नहीं।
- 48:42सकता। रंग होते नहीं, यह तुम्हारी
- 48:46कल्पना है मेरे लिए सत्य है क्योंकि मेरे पास आँखें।
- 48:53जब तुम्हें मिल जाएंगी। तो तुम भी।
- 48:55कहोगे ठीक कह दो। चला गया बेचारा अच्छा।
- 49:00होता था यही। कहोगे और क्या कहोगे?
- 49:12भाई कहने लगा मुझे प्रकृति ने गर्भ उपलब्ध नहीं कराया तो मैंने
- 49:18कहा तुम्हें गर्भ उपलब्ध करवा दूँ।
- 49:21करवा दो भाई। मैंने उसे गर्व उपलब्ध करवा दिया।
- 49:26बड़ी शालीन आत्मा बड़ी। शालीन आत्मा क्या बताऊँ?
- 49:33तुम्हें वो है नहीं। तब मैं आज्ञानिक।
- 49:40था। दिल चाहता है सामने।
- 49:45हो तो उसके चरण सुन लें इतना प्यारा व्यक्ति और इतना।
- 49:50प्रयोगकारी व्यक्ति। मैंने जीवन में अपने जीवन में
- 49:54अपने परिवारों में नहीं देखा। धरती पर तो बहुत।
- 50:01से हम लोग के। तो मैंने उसे एक जगह प्रतिष्ठित
- 50:07कर दिया। एक परिवार में लेकिन देखिए।
- 50:20गर्भपात हो गया सातवें। महीने में मेरा बच्चा।
- 50:27ठहर? नहीं सका जब वो।
- 50:34फिर मेरे सामने आया मैंने कब आई मैंने तुझे प्रतिष्ठित करा दिया
- 50:39था। के तो भाई वो मेरे तेज को सहन।
- 50:43नहीं कर सके। झूठे लोग हैं ऐसे।
- 50:47घर के अंदर मुझे पुनः प्रतिष्ठित कर देना।
- 50:54व्यक्ति वगैरह का नाम गोपनीय। रखूँगा।
- 51:01कैसे दुष्ट? परिवार में जन्म दे दिया।
- 51:04ओह, मैं भूल गया था। मैंने कहा वेल एस्टाबलिश ठीक सब
- 51:12कुछ है। यही कर दे।
- 51:19तब से मैं इंतजार में हूँ। कोई ठीक गर्व मिले।
- 51:26तो मुझे समझाया। कि इस व्यक्ति को।
- 51:29यह तो बड़ा शालीन है। बड़ा शालीन गर्व चाहिए।
- 51:36वो तो आज तक जन्म नहीं ले पाए। और शायद कुछ सैकड़ों।
- 51:42वर्ष और भी लग। जाये और शायद अभी।
- 51:47जन्म न ले पाए क्योंकि दुनिया दिन ब दिन।
- 51:55हल्के। गर्भ पैदा कर रही।
- 51:57है। बुध ठहर जाए, जिनमें।
- 52:01वो गर्व पैदा। नहीं कर रहे हैं।
- 52:04औरतें शराब पीने लगी। हैं, नशा करने लगी हैं।
- 52:16सभी व्यसन करने लगी हैं। औरतें और मनुष्य भी करने लगी हैं।
- 52:23क्या किया जाये? गर्व कमजोर हो रहे।
- 52:25हैं। और तुम आज ही।
- 52:28चाहते हो की? आज गर्व के अंदर।