Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Jan 25 - जब हम ध्यान में उतरते हैं तो शरीर सुन्न क्यों हो जाता है? ध्यान के गहरे सूत्र!Must Watch
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- 0:27नागार्जुन का शून्य वाद क्या है? कई प्रश्न हैं एक एक प्रश्नों को
- 0:38हम। खोलते जाएंगे।
- 0:43नागार्जुन का शून्यवाद क्या है? जब हम ध्यान में उतरते हैं तो
- 0:52शरीर शून्य क्यों हो जाता है? कभी कभी लुढ़क जाने की नौबत भी आ
- 1:04जाती है। राम प्रसाद शून्य बाद क्या है?
- 1:24जब हम ध्यान में जाते हैं तो शरीर सुन्न क्यों हो जाता है?
- 1:33समझना शरीर तुम्हारी कारण जीवंत है।
- 1:44तुम हो चेतन शरीर है पंचभौतिक तत्वों से बनो जड़ तुम्हारे
- 1:54संपर्क में चेतन के संपर्क में शरीर।
- 2:01जो जड़ है वह चेतन नजर आता है। 111 शब्द को ध्यान से समझना, हृदय
- 2:11में उतार लेना यह सत्यता है किसी धर्म से संबंधित नहीं।
- 2:19यह जीवन का सत्य है। तुम चेतन हो, शरीर पंच भोतक जड़
- 2:34है तुम्हारे दोनों के मिलन से शरीर काम करता है।
- 2:47इसलिए जब तुम बाहर निकल जाते हो तो शरीर जड़ है, जड़ हो जाता है,
- 2:59चेतनता के बाहर निकलते ही। शरीर अपनी यथार्थ स्थिति में आ
- 3:08जाता है। वह जड़ है, जड़ हो जाता है जैसे
- 3:18तुम्हारे घर में जो बिजली आती है। पंखा चलता रौशनी होती के सारे
- 3:28इन्स्ट्रुमेंट्स चलते हैं। ये चलते हैं पावर के कारण एनर्जी
- 3:35के कारण और जब स्विच ऑफ कर दिया जाता है पावर हॉउस का।
- 3:42तो तुम्हारे सभी इंस्ट्रूमेंट्स ठह जाते हैं, शरीर सुन के होता
- 3:51है, क्योंकि जब तुम अंदर जाओगे। जब तुम अपनी चेतना को अपने भीतर
- 4:01खींचोगे यही मतलब था कच्छप अवतार का कछुआ, अपने अंगों को खोल में
- 4:11समेट लेता है हाथ पांव। और उस खोल में इकट्ठा हो जाता है।
- 4:21ऐसे ही आपने अपने सारे अंगों को बाहर मुखी से अंतर्मुखी कर लेना
- 4:28है तो क्या होगा? आपका कनेक्शन कट जाएगा पावर हॉउस
- 4:39से। और तुम्हारा शरीर जड़ हो जाएगा
- 4:49तुम अभी अपने आप को शरीर मानते हो, लेकिन तुम्हें पता नहीं।
- 4:58कि तुम्हारा शरीर जीवंत है, इस चेतनता की शक्ति के कारण यह
- 5:08चेतनता के साथ तुम्हारा संबंध टूटा और तुम यथास्थिति में आ
- 5:13जाओगे, जो हो वास्तव में तुम वो ही हो जाओगे।
- 5:18और तुम हो पंचभौतिक शरीर के जड़ के बने हुए ये कारण है कि ध्यान
- 5:29में तुम अंतर में जाते हो धीरे धीरे कर सकते हो अपने भीतर।
- 5:35और भीतर खिसकने का अर्थ है चेतनता का भीतर जाना।
- 5:41जैसे कछुआ अपने अंगों को अपने खोल में समेटता है।
- 5:48जैसे जैसे तुम अपने भीतर गहरे जाओगे तो एक वक्त ऐसा आ जाएगा।
- 5:57जब तुम्हारी सारी चेतना जो बाहर बिखरी पड़ी है, वह इकट्ठी हो
- 6:07जाएगी। एक स्थान पर उसे ही समाधि कहते
- 6:14हैं। सारी शक्ति का संग्रहित होकर एक
- 6:20स्थान पर एकत्रित हो जाना कंडेंस हो जाना तो तुम्हारा शरीर गिर
- 6:27पड़ेगा। क्योंकि जीस चेतनता की जीस शक्ति
- 6:34के प्रभाव में शरीर चेतन दिखता था वह शक्ति वापस खींच ली गई।
- 6:45मुर्दे के साथ भी यही होता है समाधिष्ट व्यक्ति के साथ भी यही
- 6:50होता है। इसलिए शरीर सुन्न हो जाता है।
- 7:01अब यहीं एक प्रश्न और ले लें, तुम्हारी ही शक्ति से यह मन भी
- 7:07चलता है। जैसे शरीर से तुम अपनी शक्ति खींच
- 7:14लेते हो, ऐसे ही अगर मन से अपनी शक्ति खींच लो तो यह मन भी ठहर
- 7:24जाएगा, काम नहीं करेगा। जैसे शरीर ठहर गया, जड़ हो गया,
- 7:32तुम रोज़ शिकायतें करते हो, मन बड़ा भटकता है, मन बड़ा तंग करता
- 7:39है, मन ईराम चाहु देश करेगा, यह तो उससे अमरन है ना?
- 7:46ठीक कहते हो तो इसका इंतजाम क्या है?
- 7:48इलाज क्या है? इसका इलाज है।
- 7:52तुम्हारी शक्ति से मन चलता है, तुम्हारी शक्ति से शरीर चलता है,
- 8:00अगर शरीर को नहीं चलाना चाहते तो अपनी शक्ति को खैच लो, रात को
- 8:04नींद में। तुम अपनी शक्ति को खेंच लेते हो।
- 8:08शरीर कहाँ चलता है? तुम सो जाते हो।
- 8:15ऐसे ही रात को तुम शक्ति मन से भी खेंच लेते हो तो मन भी ठहर जाता
- 8:21है, लेकिन तुम इस घटना से कोई सबक नहीं उठाते।
- 8:30मैं लोगों से कहता हूँ रात को तुम्हारा मन चलता है नहीं चलता
- 8:36बाबा तो जीस क्रिया के द्वारा रात को मन बंद हुआ था।
- 8:44उसे ही तुम अपना लो मन ठहर जाएगा। कौन सी थी वो क्या जिससे रात को
- 8:53मन ठहरा था आपने अपनी शक्ति को अंतर्मुखी कर लिया था।
- 9:03अगर दिन में भी आप अपनी शक्ति को अंतर्मुखी कर सको तो मन ठहर
- 9:08जाएगा, शरीर भी ठहर जाएगा। ध्यान में आप अपनी शक्ति को
- 9:17अंतर्मुखी कर लेते हो तो शरीर सुन्न होने देता है।
- 9:22मन धीरे धीरे ठहरने लगता है। यह तुम्हारी ही चेतना बंटी हुई,
- 9:28जो मन को जाती है तो मन को प्रज्वलित कर जाती है, शरीर को
- 9:34जाती है तो इन्द्रियों को चला जाती है, तुम अपनी ही शक्ति को
- 9:40वापस खेंच लो। तो ये जो वास्तव में हैं वो हो
- 9:45जाएंगे, मन ठहर जाएगा, शरीर भी ठहर जाएगा क्योंकि इनका वजूद
- 9:54तुम्हारे कारण है। अगर तुम इनके साथ कनेक्शन में न
- 10:03रहे तो न शरीर चलेगा, न मन चलेगा। शरीर भी जड़ हो जाता है, मन भी
- 10:12जड़ हो जाता है। मुर्दे का न शरीर चलता है, न मन
- 10:15चलता है। कहाँ मुर्दा बोलता है?
- 10:21मुर्दा मौन हो जाता है, शरीर जड़ हो जाता है फिर उसको आग भी लगाओ
- 10:26तो वह नहीं कहता। मुझे क्यों चला रहे हो?
- 10:29लेकिन जीवंत व्यक्ति की तरफ आप लाल आँखें करके भी देखोगे तो वो
- 10:34कहेंगे ऐसे क्यों घूर रहे हो? शरीर शून्य क्यों हो जाता है?
- 10:45आपकी शक्ति से शरीर चलायमान है, मन भी चलायमान है।
- 10:51आप ही चाहो तो इसको ठहरा सकते हो। तुम खुद ही चिल्लाते हो।
- 11:03इन्द्रियां बड़ी तंग करती हैं, मन बड़ा तंग करता है और खुद ही इनको
- 11:09शक्ति देते हो बेस में तुम गए नहीं अगर तुम बेस में चले जाओ।
- 11:19तो तुम्हें पता चलेगा कि यह जो पावर आती है ये पावर हॉउस से आती
- 11:23है तो तुम अपनी शक्ति को इंद्रियों तक जाना और मन तक जाना
- 11:33बंद कर दोगे। स्विच ऑफ कर दोगे।
- 11:38कल पूछा किसी ने मुझे? प्रश्न बाबा जब आपको ट्रैन का
- 11:45इंसिडेंट हुआ तब आप 20 साल के थे, बिलकुल ठीक 20 का नहीं था, 18 का
- 11:52था। 1970 की बात है।
- 12:02उस उम्र में भरपूर जवानी छलांगें मारते हैं।
- 12:11आपने कैसे कंट्रोल किया? इन सारे विचारों को हमने सुना है।
- 12:20कि आप कॉलेज के वक्त भी बड़े शांत सहनशील हुआ करते थे और कभी आपकी
- 12:28कोई शिकायत नहीं थी? आपने क्या किया?
- 12:33मैंने कुछ नहीं किया ईश्वर की कृपा से।
- 12:41शक्ति मेरे भीतर अपने आप अंतर्मखी होने लगी, तुम भी देखना जब कभी
- 12:51काम का वेग उठे, तुम अपने मन को किसी और तरफ ले जाना।
- 13:04आपका मन काम से ग्रस्त है, क्रोध से ग्रस्त है।
- 13:10अचानक आपको किसी ने संदेश दिया कि आपका बच्चा सड़क पे गिर गया, चोट
- 13:18लगी ज़रा सोचो क्या उस घड़ी में? काम का वेग आपको रोकना पड़ेगा।
- 13:31काम का वेग रुक जाएगा आप भागोगे प्रतिक्षण भागोगे अपने बच्चे के
- 13:38पास कहाँ गिरा है क्या हुआ? यू हॅव मोल्डेड युअर एनर्जी काम
- 13:47से आप अपनी शक्ति को मोड़ दिये अपने बच्चे की तरफ काम से ज़्यादा
- 14:05प्रभावी ढंग अपनाना होगा। गाँधी जी लिखते हैं कि मेरे
- 14:12पिताजी करमचंद अंतिम अवस्था में सुहास गिन रहे थे।
- 14:20ऑन दी डेथ बेड एंड आई वास् इन दी बैडरूम विथ कस्तूरबा।
- 14:29ऐसे विलक्षण लोग बहुत कम होते हैं, छुपाने वाले लोग बहुत होते
- 14:36हैं, वो तो मीडिया को भी ऑर्डर कर देते हैं।
- 14:40देखो उसके बाहर नहीं निकलना चाहिए।
- 14:47ऐसे दिलावर रोक ऐसे साहसी व्यक्ति बहादुर व्यक्ति धरती पे खोजने से
- 14:55बहुत कम मिलेंगे। कम मात्रा में कुछ एक लोग बुद्ध
- 15:01जैसे। इस सहायत में यह है कि अपने पापों
- 15:10को स्वीकार कर लो अभी से तो कह गया, लेकिन पता है कि अपने पापों
- 15:18को स्वीकार करना मुश्किल कितना है?
- 15:24टूट जाता है सारा अंकार तो फिर एक उपाय बना लिया गया कि पादरी
- 15:33सुनेगा आप भूलोगे और दोनों के बीच में एक मोटा पर्दा होगा, वह
- 15:40देखेगा नहीं तुम कौन हो। बस तुम अपने बापों को बोलो।
- 15:47इससे मन को शांति रही कि पता नहीं लगेगा उससे कौन अपने गुनाहों का
- 15:53प्रायश्चित करके गया। लेकिन ये तरकीब है जब पादरी को
- 16:00पता ही न चला। कि यह अपने पापों का बखान कर कौन
- 16:07गया, वह आपको देखना पाएगा। तो आप तो छुपे के छुपे रह गए
- 16:17कन्फेशन का यह तरीका गलत था। कन्फेशन का तरीका हमारे ऋषियों ने
- 16:25खोजा था। गुरु शिष्य सम्मुख बैठ कर शिष्य
- 16:30बोले, मैंने ये अपराध किया समाज तुम्हारा जिसे अपराध मानता है आज।
- 16:40तुम देखना 50 साल के बाद वो ही समाज मान्य करेगा।
- 16:43उन चीजों को कोई वेला था। जब कोई लड़की लड़के के साथ भाग
- 16:54जाती तो सारे शहर में ढेंढोरा टूट जाता।
- 17:01तब सामाजिक मान्यता ही थी, लेकिन आज सरे आम ये होता है कौन फिक्र
- 17:08करता है? क्यों ऐसा हुआ?
- 17:12समाज ने मान्यता दे दी। यह स्वभाविक है।
- 17:17लड़की लड़के के साथ नहीं भागेगी तो और किस के साथ भागेगी।
- 17:24कंप्यूटर के साथ तो भागने से रहे जीवंत लड़के के साथ और लड़का
- 17:30लड़की के साथ भागेगा पॉज़िटिव नेगेटिव है।
- 17:35तो समाज धीरे धीरे समझदार होता चला जाता है।
- 17:40वो बातें जो गुण थी 50 साल पहले आज बहुत चीज़े समाज में स्वीकृत
- 17:47होगी वो ही समलैंगिकता। जो समाज निषेध करता था, हीन भावना
- 17:58से देखता था। आज शिखरता हो गया है, वो ही गेल
- 18:06आज शिखरता हो गया है। समाज बदलता रहता है।
- 18:12इसलिए किसी भी व्यक्ति को सामाजिक दृष्टिकोण से हे कर्मों को खुलने
- 18:21के डर से आत्महत्या नहीं करनी चाहिए।
- 18:25समझना मेरी बात को फिर से समझ लेना।
- 18:27बहुत से बच्चे इस अपराधबोध से ग्रसित हैं।
- 18:34मेरे पास रोज़ इस तरह के मैसेज आते हैं।
- 18:40बहुत से लोग तो ऐसे हैं जो व्हाट्सएप पे मैसेज नहीं करते हैं
- 18:47कि छपा रह जाएगा। वो सिर्फ कॉल करते हैं, रूबरू बात
- 18:53करते हैं, समाज जिसे अपराध करता है और समाज मापदंड नहीं है।
- 19:05यह समझे न? समाज मूर्खों की एक जमात है।
- 19:12फिर से बोलेंगे आप फिर से सुन अज्ञानियों की जमात है, समाज और
- 19:20अज्ञानी मूर्ख होता है। मूर्खों की जमात है समाज।
- 19:28और बहुत से मूर्खों ने मिल के एक नियम बना दिया जैसे बहुत से अंधे
- 19:36मिल के नियम बना दे के हरा रंग देखना नहीं है।
- 19:50ये पाप है तो अंध ये तो जानते नहीं हो कि अंधा देख नहीं सकता वो
- 19:59रंग हरा हो या सफेद हो या पीला हो या कर हो अंधों का समाज।
- 20:10यह समाज अंधों का समाज ही है, आँखों वाला तो कोई एक जन्मता है,
- 20:18कभी कभी तो बेफिक्र हो के मैं बोल सकता हूँ के समाज मूर्खों का समाज
- 20:27है। अंथों का समाज है, अज्ञानियों का
- 20:31समाज है। इसमें कोई आँखों वाला जन्मेगा तो
- 20:37आपको सही निर्देश देगा। आज जो समाज कानून बनाई है।
- 20:46वो अन्धो के कानून में हरा रंग देखना पाप कोई अंधा ये नहीं कहेगा
- 20:54के रंग तो हम देख ही नहीं सकते न हरा, न पीला, न काला, न लाल, न
- 20:58गुलाबी न बैगनी, लेकिन वो कोई आँख वाला कहेगा।
- 21:06अंधा कभी प्रतिकार नहीं करेगा, प्रतिकार करेगा आँखों वाला जब
- 21:12किसी को आंख आ जाएगी मिल जाएगी वह कहेगा भाई तुम क्यों नियम बनाते
- 21:17हो, तुम्हें पता ही नहीं रंग हरा क्या है?
- 21:21जामनी क्या है? भगवा क्या है?
- 21:25पीला क्या है लाल क्या है गुलाबी क्या है बैंगणी क्या है तुम्हें
- 21:31कुछ पता नहीं। अब धीरे धीरे मान्यताएँ बदलेंगी
- 21:40अंधेर समाज की। इसलिए एक शब्द बीच में ले लूँ।
- 21:47मैं इसके अर्थ बड़े विस्तार गए विस्तृत गए।
- 21:55बुद्ध ने कहा आप दिबो भव अपने दीपक स्वयं बन।
- 22:04मतलब ये कि समाज को अपना दीपक न बनने दो।
- 22:11हम समाज से डरे हुए लोग डरते डरते ज़िन्दगी जीते है और मर जाते है।
- 22:19क्या हम इसी लिए पैदा हुए है? क्या आपने इसीलिए जन्म लिया है?
- 22:28क्या आप डरते डरते जीवन को जियो और मर जाओ नहीं तो बुद्ध ने एक
- 22:36दिव्य सन्देश दिया अब दीपो भ। समाज की बात मत मानो अपने दीपक
- 22:44स्वयं बनो। अगर समाज को दीपक बनाओगे तो बड़ी
- 22:54मुश्किल पेशा है क्योंकि समाज? अलख अलख तरह के प्राणियों से भरा
- 23:03हुआ है। यहाँ दो पत्थर भी यक्सा नहीं दो
- 23:09मनुष्य यक्सा होंगे ये उम्मीद मत करो किसी एक आदमी का सिद्धांत।
- 23:18दूसरे व्यक्ति पे लागू नहीं होता क्योंकि दोनों अलग है।
- 23:24सबके स्वभाव अलग है। यहाँ किसी को कणक भी एलर्जी कर
- 23:30जाती है, किसी व्यक्ति को कणक जीवन देती है गेहूं।
- 23:38और किसी व्यक्ति को गेहूं एलर्जी कर जाती है, फिर वह क्या करे?
- 23:46वह गेहूं खाना शुरू रखे नहीं इसलिए बुधने कहा अप दीपो भाभा
- 23:54अपनी ज़िन्दगी का जीवन का सलीका तरीका।
- 23:57को धतरश समाज को अपना अग्रणी मत बनाओ।
- 24:08बुद्ध से बड़ा क्रांतिकारी वक्तव्य कोई संत पुरुष दे नहीं
- 24:15सकता है। बुद्ध ने बड़ा क्रांतिकारी शब्द
- 24:19कहा, इसके मतलब नहीं समझे वह बात अलग है।
- 24:24बुद्ध ने समाज से विद्रोह। किया।
- 24:31छोड़ दिया सबकुछ राज़, महल, तख्त, तोतास सब छोड़ दिया।
- 24:39यह विद्रोह था। और बुध भर सिद्धांत देते हैं अप
- 24:46दीपो भवा अपने दीपक स्वयं बनो। समाज क्या कहता है समाज ने
- 24:52निर्धारण किया है क्या? 10 कमेंडमेंट्स के भीतर मत रहो।
- 25:01तुम्हारा लक्ष्य है मुक्त और ये कमेंट तुम्हें देते हैं बंधन समाज
- 25:13बंधन बनाता है ये मत करो, वो मत करो, ये मत करो वो मत करो।
- 25:19गैरजाति में शादी मत करो गैरगोत्र में शादी करो समगोत्र में शादी मत
- 25:32करो। अभी कल ही मेरे पास एक मामला आया।
- 25:37एक व्यक्ति ने समगोत्र में शादी कर लिया।
- 25:41अब वो घरवाले उसको मारने को फिर रहे।
- 25:45क्यों समगोत्र में सर्दी ये बात ठीक है समगोत्र में शादी करना
- 25:55क्रोमोसोम के हिसाब से कहीं हेरेडटरी कैरेक्टर को?
- 26:01आपके बच्चों में ले आएगा। यह बात अलग है, लेकिन जहाँ प्रेम
- 26:06है, वहाँ ये बातें महत्वहीन हो जाती हैं।
- 26:15प्रेम सब चीजों को नकार देता है। प्रेम ऐसी छुरी है जो काटता ही
- 26:22चला जाता है। इन बातों को सैंट्रिक रूप से
- 26:32सिद्ध किया जा सकता है। सिद्ध हैं सम गोत्र में शादी
- 26:37करोगे तो बच्चों में आपके क्रोमोसोम में बेकार आ जाएंगे।
- 26:43हर ट्रिक वेक्टर्स से कह देते हैं हम आ जाएंगे तो आजा नहीं तुम अब
- 26:50वो कहते हैं कि अपने बच्चे ही नहीं पैदा करते तो माँ बाप फिर
- 26:57होते हैं, क्यों नहीं करना है हमें तो पोतियाँ चाहिए, हमें तो
- 27:01पोतियाँ चाहिए। आप डिक्टेटर बन जाते हो बच्चों
- 27:09को, शायद बच्चों को जन्म देते बच्चों को जन्म देने में बच्चों
- 27:16को कोई बच्चों की कोई रजामंदी नहीं होती कब कहा किसी बच्चे ने
- 27:21तो मुझे जन्म दो? तुम बड़ी खुशी से बच्चे को जन्म
- 27:26देते हो और जब बच्चा जन्म जाता है तो उस पर तुम तानाशाही तप देते
- 27:34हो। तुम्हे पता है तुम्हारे बच्चे के
- 27:40कोमल दिमाग पर। कितने बंधन अनचाही तुम्हारा समाज
- 27:49बिठा देता है, तुम्हारा घर बिठा देता है, परिवार बिठा देता है,
- 27:52कोल बिठा देता है, तुम इन चीजों से अनभिज्ञ हो?
- 28:00तुम्हारे समाज के पहरे, मान्यता, तुम्हारे कुल के पहरे, मान्यता ये
- 28:08सब बच्चे के अज्ञात बंधन बन जाते हैं।
- 28:10दिमाग में उनके न्यूरोन्स को बांध लेते हैं और बुद्ध कहते हैं
- 28:18तुम्हारा। लक्ष्य क्या है मुक्ति जन्मजात
- 28:24तुम बंधन फेंक देते हो बच्चे के दिमाग पर ये जाति का बंधन ये धर्म
- 28:32का बंधन अब किसी भी धर्म में जन्मा बच्चा।
- 28:39माँ बाप यह अपेक्षा करेगा कि इस्लाम में जन्मा तो इस्लाम में,
- 28:44मुसलमान में, हिंदू धर्म में जन्मा, हिंदू धर्म का पालन करें,
- 28:50सिख में जन्मा से करे, इस्लाम में जन्मा तो हुआ हूँ, इस्लाम का पालन
- 28:58करें, क्यों करें? सब एक एक रास्ते हैं, कोई एक्टिव
- 29:08रास्ता है, कोई पैसिव रास्ता है, कोई संकल्प है, कोई समर्पण है, और
- 29:15प्रत्येक व्यक्ति की मनोदशा। अलग अलग है, कोई पैसिव है, कोई
- 29:24एक्टिव है लेकिन तुम कहते नहीं आपको नमाज़ भी पढ़नी पड़ेगी
- 29:33क्योंकि आप हमारे कुल में पैदा हुए हो।
- 29:37बच्चा तो मैं पूछता नहीं कि मैंने कब कहा?
- 29:42ऐसा मेरे साथ हुआ। मेरे माता पिता कहने लगे तुम्हें
- 29:46शादी करनी पड़ी, मैंने कहा क्यों करनी पड़ेगी?
- 29:50हमने तुम्हें जन्म दिया, मैंने कब कहा तुम मुझे ये जन्म दो झगड़ा
- 29:56हुआ इस बार। माँ हंसने लगी बातों ये गैबी
- 30:02दिमाग कहाँ से पैदा हो गया ये नई बात ही कर दी इसने अरे भाई मेरे
- 30:08को भी पूछ लिया उतना मन्नत? बिना पूछिए जाम दिया इब अपनी
- 30:20तानना सही तो तू ब्याह कर ले कोई नहीं करो आखिर में नका कु में
- 30:27पड़ा मत कर तुम बताओ तुम बच्चे को जन्म देते हो, पूछ के देते हो?
- 30:42ये बात अलग है। बच्चा जब जन्मता है, हमारी हिंदू
- 30:47यूनाइटेड फैमिली होफ, उसके अनुसार आज की अदालते ठीक फैसले नहीं
- 30:54करने, मैं ये बोलता हूँ छाती जान के बोलता हूँ क्योंकि उन्हें पता
- 31:00ही नहीं। जो बच्चा जीस स्कूल में जन्म गया
- 31:11वह उसका उत्तराधिकारी है। संपत्ति का आपकी सुप्रीम कोर्ट
- 31:17आपका हाईकोर्ट कुछ भी निर्णय न दे क्योंकि उस बच्चे को पूछ के जन्म
- 31:22नहीं दिया गया। उस बच्चे की इच्छा के बगैर जान
- 31:27देते हो तुम? इतना तो उसका अधिकार है।
- 31:33वो अपना जीवन तो जी सके, जिसके पास नहीं है वह मजबूर है।
- 31:42क्षमा योग्य है, भाई है नहीं, मेरे पास जो है वो ले लो प्रयोग
- 31:48कर लो जिसके पास है वो भी झोंकड़ी मार के बैठ जाते है शर्ते थप देते
- 31:57है डिक्टेटर की तरह। मेरे ही संपर्क में एक बच्चा है
- 32:06जिसका बाप और माँ कहती कि मेरे बड़े भाई के पांव के हाथ लगाओ
- 32:09चूमो उसको जाके फिर हमें तुम्हें हम तुम्हें संपत्ति में हिस्सा
- 32:15देंगे। यह घोर अनर्थ और पाप है इन चीजों
- 32:25के फल फिर तुम कहते हो, हमने तो कोई पाप नहीं किया।
- 32:28इससे बड़ा पाप और क्या होगा तुमने जीते जी बच्चों को मार दिया?
- 32:37बच्चे को जन्म देना एक मूक, एक मूक कॉंप्रमाइज़ होता है।
- 32:45लिखित अग्रीमेंट नहीं होता, बस मौखिक अग्रीमेंट होता है।
- 32:50बच्चे को उसकी रजामंदी के बगैर जन्म देना एक मौखिक अग्रीमेंट है।
- 32:57कि मेरे पास जो है पदार्थ संपत्ति वो तुम्हें मिलेंगे बराबर के
- 33:05हिस्से के फिर तुम शर्ते लगा देते हो, जो मेरा कहा मानता है उससे
- 33:09ज्यादा जो मेरा कहा नहीं मानता उससे कम और न्यायालय में भी वो
- 33:14जीत हार जाते है। लेकिन न्यायालय तो खुद बुद्धू है।
- 33:18वो तो छोड़ो मैंने तो पहले ही कह दिया मूर्ख लोग बैठे हैं गद्दियो
- 33:21पे और मूर्ख लोग बैठे हैं जस्टिफिकेशन उन्हें बेसिक चीज़ का
- 33:27कोई पता नहीं। वो ऐसे ही फैसले करते रहेंगे।
- 33:34मानवता को कभी नहीं देखेंगे वो कभी नहीं देखेंगे के बच्चे बेकसूर
- 33:40होते हैं। देखो बच्चे के हाथ में जन्म न
- 33:44लेना नहीं होता, तुम्हारे हाथ में जन्म न देना होता है, फिर जब
- 33:52तुम्हारे हाथ में जन्म न देना है। तो तुमने क्यों उस बच्चे को पैदा
- 33:57किया? और फिर अगर तुम्हारे पास नहीं है,
- 33:59कुछ तो तुम क्षम्य हो, सब कुछ होते ही सोते तुम डिक्टेटरशिप
- 34:08दिखाते हो हिटलरबाज ये गलत। और बच्चा ठीक रहता है।
- 34:16ठीक चल रहा था और तुम उसको दुख पे दुख देते चले जाते हो, मैं नहीं
- 34:24समझता यह कोई बात शल्य है या यह कोई मम्मत तो है?
- 34:31लोग कहते हैं मात कुमात न होत पूत कपूत तो होत है गलत यहाँ पूत सपूत
- 34:38है मात कुमात है पिता कुपिता है। तो मैंने माता से कहा माँ मैंने
- 34:50कब कहा मुझे मैंने पहले चावल भेजे थे तो माँ हँसने लगी, बात तो ठीक
- 34:58है बेटा ये कहाँ से नई फिलॉसोफी तू उठा रहा है चलो ठीक है तू मत
- 35:05कर। तो ठीक है, नहीं करा मेरी जब
- 35:10इच्छा होगी कर मैं स्वतंत्र हूँ। स्वतंत्र सत्ता के रूप में मैंने
- 35:16जन्म लिया और स्वतंत्र सत्ता के रूप में मेरे भी कुछ आदर्श हैं,
- 35:25कुछ एम्स हैं। जब वो पूरे हुए, उसके बाद मैं
- 35:29कराऊँ या न कराऊँ यह शादी कराना, न कराना मेरी निजी व्यवस्था है,
- 35:37तुम्हें कोई अधिकार नहीं है, बस तुमने बिना पूछे जन्म दे दिया
- 35:44तुम्हें क्षमा की। बड़ी मुश्किल बात आई, बिरादरी
- 35:50मुश्किल ताऊ चाचू के पास गयी या बच्चा ऐसे बोलता है, लेकिन ताऊ
- 35:55चाचू जब में जा के बहस की तो वो चुप हो गए।
- 35:59बात तो ठीक है, वो भी मुँह को ढकने नहीं लगे अंगोछे से।
- 36:04हँसने लगे यह चर्चिल दिमाग कहाँ से आ गया, ये नई ही बात करता है।
- 36:14बिलकुल नई बात करता हूँ ये जो कहते है ना तीन तीन बच्चे पैदा
- 36:19करो, इनसे को कर देंगे भाई। लेकिन बच्चों का सहारा जिम्मा
- 36:25पालन पोषण तक तुम आके करना मेड तुम बनना।
- 36:31बच्चा रोये तो तुम उसको देखना क्या बात है पेट में दर्द जा के
- 36:35भुख गए कहना बड़ा आसान होता है। बच्चे को जन्म देना, उसको पालना
- 36:45फोसना बड़ा करना फिर बच्चा का दिखता है तुमने क्या किया?
- 36:49मैं तो इतना ही बड़ा पैदा हुआ। अरे तो इतना बड़ा पैदा हुआ भला
- 36:54इतने बड़े पैदा होते हैं बच्चे। पागल जैसी बात करने में तुम्हारा
- 37:05कोई सानी नहीं तो बच्चे ठीक कहते हैं क्योंकि जब तुमने उनकी
- 37:13रजामंदी से जन्म नहीं दिया तो वो इतने ही बड़े पैदा हुए थे।
- 37:19ठीक कहते हैं। तुम चेतना हो, शरीर जड़ है
- 37:32तुम्हारे संपर्क में जैसे बल्लभ पावर के संपर्क में आने से
- 37:37प्रकाशमान होता है। ऐसे ही तुम्हारे संपर्क में आने
- 37:42से यह जड़ शरीर। चेतन होता हुआ प्रतीत होता है।
- 37:48अब ये ऊंट बोल रहे हैं, कंठ से आवाज निकल रही है, लंग्स हवा को
- 37:55दे रहे हैं, जीवा बोल रही है मस्तिष्क के न्यूरॉन्स ऑर्डर दे
- 38:01रहे हैं। सब स्टेबल है लेकिन है किस के
- 38:07कारण उस पावर के कारण और वो वो पावर कौन है?
- 38:14वो पावर तुम हो अगर तुम्हारा शरीर तुम्हे तंग करता है, तुम्हारा मन
- 38:21तुम्हे तंग करता है। तो शरीर और मन के गुलाम मत बनो।
- 38:28रोज़ मुझे लोग कह देते हैं काम बड़ा तंग करता है, तुमने कैसे
- 38:34निपटाया होगा? जैसे भी निपटाया ऐसे निपटाया
- 38:40संदेश छेद कर के। विच्छेद कर लो असूल सीधा अपनाओगे
- 38:48तो तुम कोई चीज़ घोल के तुम्हें नहीं पीला सकता।
- 38:53मैं तुम्हें फॉर्मूलेशन दे सकता हूँ एंड यू कैन अडॉप्ट दट।
- 39:02तुम्हारे शरीर में विकार पैदा होता है।
- 39:06तुम्हारे शरीर के साथ संपर्क में आने से जब शरीर गटर मस्ती करता है
- 39:14तो अपनी शक्ति ओके चलो देखो शांत हो जाएगा बिलकुल।
- 39:21ध्यान को दूसरी तरफ ले जाओ, ध्यान को काट लो, दोनों में से कुछ भी
- 39:25कर लो बेकार नहीं आएगा बेकार आता है तुम्हारे प्रभाव में जब जड़
- 39:39शरीर। तुम्हारे प्रभाव में आता है, तो
- 39:43तुम करते हो इशारा तुम देते हो कमांड यह शरीर वैसे ही चलता है
- 39:51बिलकुल जैसा तुम चाहते हो उसके अतिरिक्त यह हाथ भी नहीं ला सकता।
- 40:01रात को सिर्फ अनैच्छिक क्रराएं ही चलती हैं।
- 40:05एच्छिक क्रराएं नहीं चलती और वो अनैच्छिक क्रराएं उस विराट के
- 40:10हाथों में है। बस उसने इतनी कृपा कर दी तुम्हारे
- 40:15को। के बड़ी बड़ी घटनाएं जिसके बिना
- 40:19जीवन खत्म हृदय का चलना, लंग्स का सांस लेना, भोजन का पचना, सारी
- 40:28भीतर प्रोसेसिंग होनी, लिवर का जुइसेस पैदा करना, सभी ऑर्गन्स का
- 40:34अपने अपने कामों में। लगे रहना यह उसकी कृपा से हो रहा
- 40:40है और देखो उसकी कृपा से जो जीवन पैदा होता है उसको जब तुम प्रयोग
- 40:48करते हो उसकी शक्ति लेके भोजन पचा शक्ति बनी तुमने भोजन पचाए नहीं।
- 40:57तुमने मात्र खाने का स्वाद लिया जी बस भोजन पचार उसकी कृपा से
- 41:07शरीर में नक से शिखा तक, सर्कुलेशन ऑफ ब्लड हुआ उसकी कृपा
- 41:13से। शरीर बेपरीफिकेशन ऑफ ब्लड हुआ
- 41:21किस्से उसकी कृपा से लंग्स अपने आप ये काम करते है हार्ट बीटिंग
- 41:27अपने आप सर को रेट करते है ब्लड को तुम्हारे इसमें क्या योगदान है
- 41:32बताओ? तेरा गोर से देखना डॉक्टर से पूछ
- 41:36लेना किस से हमारा कोई योगता नहीं जब शक्ति उसकी कृपा से पैदा हुई
- 41:46तुमने तो सिर्फ खाने का स्वास्थ लिया।
- 41:51वो भीतर गई पाचन की प्रोसेसर हो गई।
- 41:55जो भी मेटाबोलिज्म वगैरह हुआ उससे शक्ति उत्पन्न हुई।
- 42:03उस शक्ति का प्रयोग तुमने किया और तुमने लेबल क्या लगाया?
- 42:11मैं करता तुम कैसे करते हो भाई जिसने शक्ति से किया वो तुमने
- 42:17पैदा किया? वो तो तुम्हारी ऑर्गन्स नहीं पैदा
- 42:22किया जो तुम्हारी इच्छा से नहीं चलती उन ऑर्गन्स ने पैदा की है
- 42:27शक्ति। जो तुम्हारी इच्छा से नहीं चलते
- 42:32ना हर्ट तुम्हारी इच्छा से धलकता है नहीं तो तुम इसको बंद ही न
- 42:36होने दो ना स्वास्थ्य तुम्हारी कृपा से आता है ना भोजन तुम्हारी
- 42:43कृपा से पछता है फिर इस शक्ति के प्रोडक्शन में।
- 42:49तुम्हारा हाथ है कहाँ जब खर्च करने में तुम कह देते हो कि मैंने
- 42:56किया तो मैं पूछता हूँ जीस शक्ति से तुमने किया वो शक्ति कहाँ से
- 43:01आई? उसकी कृपा से आई?
- 43:07सारी प्रोसेसिंग उसकी कृपा से हुई तो फिर किया तुमने कैसे किया?
- 43:14बस यहीं गड़बड़ पैदा हो जाती है। बाबा नानक कहते हैं कि उसी ने
- 43:20शक्ति बनाई और उसकी ही कृपा से सब काम होते हैं।
- 43:28करता तो वो है लेकिन तुम ठप्पा लगा देते हो।
- 43:32मैंने एक चुटकुला सुना है चुटकुला सुना है राष्ट्र भक्त नराज ना
- 43:36होना एक कोई इन्वेंशन हुई है। अमेरिका में तो साइंटिस्ट ने करके
- 43:52उसको आगे भेजा इंग्लैंड में इंग्लैंड वालो ने देखा तो उसको
- 44:00थोड़ी सी अमेंडमेंट कर दी। थोड़ा सा और बढ़िया बना दिया
- 44:03उसको। इंग्लैंड वालो ने भेज दिया
- 44:07फ्रेन्डस के पास फ्रांसीसियो ने देखा, उसमें थोड़ा सा और
- 44:11अमेंडमेंट कर दिया, ज्यादा बढ़िया बना दिया वहाँ से जर्मनी में गया
- 44:18थोड़ा सा और मॉडिफिकेशन, फिर जापान।
- 44:27सभी मुल्कों में घूम लिया, इज़रायल में गया, सभी में घूम
- 44:30लिया और उसके बाद आया इंडिया में। सबसे बाद इंडिया तब तक इतनी
- 44:40बॉन्डिफिकेशन हो चुकी थी। क्योंकि उसमें और कुछ किया ही
- 44:44नहीं जा सकता था। चुटकुला है।
- 44:52मैंने पहले ही क्षमा प्रार्थना कर दी तो इंडिया के साइंटिस्ट ने
- 44:59देखा। इसमें किसी तरह का सुधार नहीं हो
- 45:03सकता। लेकिन वहाँ एक बहुत बड़े ओह देके
- 45:09बैठे थे, पॉलिटिकल कनाडा का हो सकता है क्या हो सकता है,
- 45:16उन्होंने उठाई, स्टैम्प पर लगा दिया मिड इन इंडिया इतना तो हम कर
- 45:20ही सकते है न? बस तुम इतना ही कर सकते हो तुम
- 45:28कहते हो, मैंने किया यह स्टेम्प लगाने का काम तुमने किया मिड इन
- 45:34इंडिया आत्मनिर्भरता इसे कहते हो तुम।
- 45:46तुम कुछ नहीं कर सकते जब फरमाए तेब तेब अप्पा जीस ए लिखया ते से
- 45:55शरण चार शब्दों में जीवन का निजोड़ बना देते हैं, सृष्टि का
- 46:07निजोड़ बना देते हैं। बाबा नानक और तुम रोज़ जब भी
- 46:15पढ़ते हो, तुम इसकी अर्थ नहीं समझ पाते और जीवन में उतार नहीं पाते,
- 46:24तुम स्टैम्प लगाने में बड़े दक्ष हो।
- 46:29इसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता होक मैं अंदर सबको?
- 46:39मेरा हक की कृपा से। सब काम हो रहा है मेरा आप की कृपा
- 47:02से। सब काम हो रहा है, करते हो तुम
- 47:15कन्हैया करते हो तुम कन्हैया मेरा।
- 47:25नाम हो रहा है। मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा
- 47:41है। उसकी कृपा से होता है जो कुछ होता
- 47:45है और जब तुम अपने अंतर में जाते हो इन्नर मोस्ट बॉटम बिलकुल आखिरी
- 47:54अंतिम तल पर जब तुम पहुंचते हो तो तुम जो सत्य देखते हो वो देखा बा
- 48:02बनाने। अंतिम सत्य इंटरमोस्ट बॉटम वहाँ
- 48:10पहुँचकर जो सत्य दिखाई पड़ता है वो यहीं दिखाई पड़ता है कि जो
- 48:17करता है वो ही करता है। यह कोई नियम, सिद्धांत लिखा हुआ
- 48:24सिद्धांत नहीं है। यह सिद्धांत नहीं है।
- 48:29समझना बात को यह सत्य है और सत्य सिद्धांत नहीं होते बल्कि
- 48:36सिद्धांत सत्य होते हैं। यह सिद्धांत सत्य है कि वह करता
- 48:48है और जो करता है वह ठीक करता है। यही लव्स ने कहा, जो करता है वही
- 48:58करता है। और वह जो करता है तुम्हारे भले के
- 49:02लिए करता है, बुरे के लिए नहीं करता, इस बात पर तुम्हारा मन
- 49:09तुम्हारा मस्तिष्क लाखों कर देता है, बड़े आक्रोश में आ जाते हो
- 49:15तुम। बड़े क्रोधित हो जाते हो तुम वह
- 49:23कैसे करता है मैं करता हूँ मैं हूँ तो मुमकिन नहीं तुम एक ज़रा
- 49:31भी नहीं बना सकता। न पानी का, न माटी का।
- 49:39तुम सिर्फ कह सकते हो मैं करता हूँ, बस इसके सिवा कुछ नहीं।
- 49:49अहंकार के सिवा तुम कुछ और हो ही नहीं।
- 49:58कल मेरे पास एक कमेंट आ गया। कितना ही कह लूँ या कमेंट करने
- 50:05वाले लोग ज्यादा पहुंचे होते हैं, मेरे से ज्यादा पहुंचे होते हैं,
- 50:11ऐसा ये कमेंट कर ही देते हैं। बाबा आपकी बातों में दोगुला पर
- 50:19नजर आता हूँ, समझ नहीं आया देखो मैं कितनी बार घोषणा कर चुका हूँ,
- 50:28संसार समझा जा सकता है, परमात्मा समझा नहीं जा सकता।
- 50:40संसार समझा जा सकता है क्योंकि संसार नियमों में आवद है और नियम
- 50:47समझे जा सकते हैं। तुम रोज़ नियमों को समितो,
- 50:52फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलोजी, जियोलॉजी पार्ट में सब समितियों।
- 50:56उसमें सब नियम हैं, नियमों से पार संसार जाता है।
- 51:03संसार समझ में आ सकता है लेकिन वही आदतों में यहाँ पड़ गई है एक
- 51:10महीने पहले यह व्यक्ति। मेरे चैनल पे आया सिर्फ महीने
- 51:16पहले और जितनी वीडियो मैंने बोली करीब 2200 के करीब बोली लंबी लंबी
- 51:23वीडियो बोली, मैं नहीं समझता कि एक महीने में कोई इतनी वीडियो सुन
- 51:28सकता है, लेकिन प्रश्न करने में मेरे बड़े होशियार हैं।
- 51:35बाबा ये कुछ डारिटी सी नजर आते हैं आपने?
- 51:42तब तो ये कहा था कि व्यक्ति को कर्मों का भुगतान करना पड़ता है
- 51:47तो मैं तो अब भी कह रहा हूँ। और आज तुम कहते हो कि परमात्मा
- 51:52निर्धारण नहीं करता, मैं तो आज भी कह रहा हूँ, कल भी यही कहता था,
- 51:57आज भी यही कहता हूँ कहीं तुम्हारी सब्ज़ में गड़बड़ है भाई कहता मैं
- 52:05कन्फ्यूज हूँ में आ गया। तो मेरे भक्त कौन सा कम है?
- 52:12किसी ने वहाँ लिख दिया कि तुम खुद ही कॅन्फ़्यूज़न हो और बात कोई
- 52:16ठीक है तुम सभी कॅन्फ़्यूज़न हो कॅन्फ़्यूज़न मैं नहीं हो लिसनर्स
- 52:26को से बोल रहा हूँ मैं। जो मुझे सुन रहे हैं यू अरे नॉट
- 52:33इन कन्फ़्यूज़न यू यूर सेल्फ इस कन्फ़्यूज़न मैं तुम्हें इंगित कर
- 52:40रहा हूँ क्योंकि अहंकार खुद कन्फ़्यूज़न है अहंकार हट जाए।
- 52:48यही तो कॅन्फ़्यूज़न है, यही तो अलूशन है अलूशन क्या है तुम्हें?
- 52:56तुम क्यों दुखी हो तुम हो तो चेतन जड़ता के संपर्क में आकर।
- 53:06यह जड़ बोलने लग जाता है। यह जड़ सोचने लग जाता है।
- 53:11यह दिल धड़कने लगता है, स्वास्थ्य चलने लगती है, भोजन पसीने लगता
- 53:16है। तुम इस पर ठप्पा लगा देते हो?
- 53:19मैं का यह इल्यूज़न है तो मैं और तुम इस इल्यूश़न को मैं को अपना
- 53:31होना समझते हो यही यही मार खा जाते हो तुम संत तुम्हें यही
- 53:38समझता है यू आर नॉट इन कन्फ़्यूज़न यू यूर सेल्फ इज़
- 53:43कन्फ़्यूज़न। तुम ही कॅन्फ़्यूज़न हो।
- 53:48इसीलिए संत कहते हैं तुम्हें ही मरना पड़ेगा ये तो प्रेम मिला की
- 54:00चाल। शीश तलीधर घर मेरे आं शीश तलीधर
- 54:19घर मेरे आं? घर मेरे यहाँ जे तो प्रेम मिलन
- 54:32किचा तुम्हें खुद ही मिटना होगा क्यों?
- 54:39यू अरे सर्फ आर कॅन्फ़्यूज़न? तुम इल्यूश़न हो तुम कॅन्फ़्यूज़न
- 54:45हो तुम कॅन्फ़्यूज़न में नहीं हो ये गलती मत खा लेना फिर तुम दूसरे
- 54:52पे थोप दोगे ये कॅन्फ़्यूज़न तो कोई और है कुछ हम कॅन्फ़्यूज़न
- 54:57में हैं नहीं नहीं। तुम ही कॅन्फ़्यूज़न हो तुम ही
- 55:04इल्ल्यूज़न हो तुम्हें ही हटना होगा और तुम हटने से डरते हो मरने
- 55:11से डरते हो यही है कमजोरी तुम्हारी, यही है कंपन तुम्हारा
- 55:16यही है थ्रिलिंग तुम्हारी। तुम मरने सकते हो और मरना तो होगा
- 55:24ही। जे तो प्रेम मिलन की इच्छा उस
- 55:28विराट आनंद को पाना चाहता है, उस विराट प्रेम के सागर में डूबना
- 55:33चाहता है, तो तुम इस क्षुद्र? अहंकार की बलि देनी ही होगी।
- 55:43स्वतंत्रता से निर्णय कर लो कोई सिर पे तलवार थोड़ी रखी है तुम
- 55:52मिटने को राजी हो। तुम मेरे घर आओ अन्यथा मत आओ,
- 56:04तुम्हें किसी ने बुलाया मैं कोई शिवर्स नहीं लगाता।
- 56:10यहाँ कोई एंट्री फीस तो नहीं होती।
- 56:12यहाँ कोई बराबर थोड़ी न जाता है, कोई पीले चावल नहीं जाते किसी को
- 56:19बेला शक मत आओ बेला शक मत सुनो मुझे कहते थे आपने बाबा ये क्यों
- 56:24कहा, मैंने कहा आपने ये क्यों सुना सुना तुमने कसूर तुम्हारा
- 56:30पूछ रहे हो मुझसे? मैं जवाबदेही नहीं रखता किसी चीज़
- 56:36के मैं सिर्फ अपना अनुभव बोलना चाहता हूँ बोल देता हूँ तुम जवाब
- 56:46तलवी की उम्मीद कभी न रखना। तो मैंने सदा से कहा संसार समझाया
- 56:57जा सकता है। विकास संसार कानूनों पे बना है और
- 57:03कानून खोपड़ी समिति है। नियम खोपड़ी में आ जाते हैं।
- 57:13तुम बात करते हो परमात्मा की, अब तुम आ गई दूसरे पर तुम्हारा
- 57:18डायमेंशन बदल गया। संसार से हट के तुम परमात्मा में
- 57:21आ गया संसार है तर्क, तर्क, नियम। बुद्धि से समझे जा सकते हैं लेकिन
- 57:31तुम अब मांगते हो प्रेम तुम मांगते हो आनंद तुम मांगते हो परम
- 57:39खुशी अखंड खुशी जो टूटे ना। और ध्यान रखो, यह संसार नहीं है,
- 57:52यह बिल्कुल विपरीत रहे हैं। एक दिशा जाती है संसार बिलकुल उलट
- 58:00दिशा जाती है परमात्मा अब तुम अगर परमात्मा।
- 58:06की तरफ उन्मुख हुए हो तो ध्यान रखो, नियमों से परे आना पड़ेगा।
- 58:14फिर तुम आगे से ये बात मत कहना कोई विजय पावा नाम का व्यक्ति
- 58:20मुझे ये कमेंट ना करेगा। मुझे समझ नहीं आ रहा मैं बिल्कुल।
- 58:27स्पष्ट शब्दों में तो मैं कहता हूँ कि वह समझता ही नहीं है।
- 58:33ही इज़ नॉट ओनली अननोन बटाल्सु अननोनबल वह गेबी है।
- 58:42एक हफ्ते पहले इसका प्रश्न आया था।
- 58:43मैंने जवाब दे दिया। लावा भी बहुत की आपको पता है मैं
- 58:49छित्तर तो नहीं मारता, लेकिन का मैं कोई छोड़ता नहीं।
- 58:54फिर फिर कल यही याद है अगर आप जैसा कोई भक्त इसको उठ के पढ़ता
- 59:01है और मैं झगड़ा देख नहीं सकता। अभी झगड़ा ही करना है।
- 59:08गोल करना है तो मैदानी जंगल इस चैनल को क्यों बनाते हो?
- 59:13बाहर झगड़ लो तो मैंने उठ के ब्लॉक कर दिया।
- 59:18चलो आपको स्पष्ट बात समझाती हूँ। तुम जीस राह पे चले हो वो समझ में
- 59:30आता नहीं और कृपा करके मेरी कर वध, प्रार्थनाएँ ये शब्द मुझसे
- 59:38कभी ना करना है कि बाबा समझ नहीं आया।
- 59:45क्योंकि समझे में वो आया नहीं करता।
- 59:49समझ में आता है संसार क्योंकि वो नियमों में अभद्र होता है।
- 59:54परमात्मा समझ में नहीं आता क्योंकि वो नियमों से पार।
- 1:00:01ये तुम बिल्कुल ऐसे ही बात करते हो जैसे मैंने एथेंस के समुद्र तट
- 1:00:07की कहानी सुनी। एक छोटा बच्चा रो रहा है, वहाँ एक
- 1:00:14लंबी सफेद दाढ़ी वाला आ जाता है। व्यक्ति कहता है बच्चे क्यों रो
- 1:00:18रहा है बाबा? मैं रो रहा हूँ कि मेरी इस प्यारी
- 1:00:26में समुद्र समाता नहीं हूँ, सुबह का मैं समुद्र खाली करने की
- 1:00:30चेष्टा करता हूँ, यह समुद्र खाली नहीं हो रहा, सुबह से लगाऊं पोखा
- 1:00:36प्यासा यह समुद्र है कि उड़ेला जाता ही नहीं।
- 1:00:42तो शुक्र तुमसा वह सफेद दाढ़ी वाला था।
- 1:00:48सिक्योरिटी सिक्योरिटी कहने लगा बैठे है, यही समस्या तो हमारी है।
- 1:01:00जैसे समुद्र तुम्हारी छोटी सी प्याली में आता नहीं, वह परमात्मा
- 1:01:06हमारी छोटी सी बुद्धि में आता है, लेकिन आज आँख खुल गई।
- 1:01:11पुत्र तो छोटा सा बच्चा है, लेकिन तुझे मेरी नादानी का।
- 1:01:19एहसास करा दिया तो जीस चेष्टा में लगा है।
- 1:01:25मुझे समझाई कि मैं भी तो उसी चेष्टा में लगा हूँ तो समुद्र को
- 1:01:31खाली करने की चेष्टा में लगा है छोटी सी प्यालीस और मैं छोटी सी
- 1:01:36बुद्धि से परमात्मा को। खोजने में लगा हूँ।
- 1:01:42ये दोनों काम असंभव है। पुत्र तो भूखा होगा, खाना खादे ये
- 1:01:48असंभव है, ये नहीं होगा, उसने कहा ऐसा नहीं होगा छोटा बच्चा।
- 1:01:59सामने वृद्ध व्यक्ति, श्वेत दाढ़ी, लंबी बड़ा ऊँचा सा माथा
- 1:02:10देखते देखते उस बच्चे ने उस प्याली को समुद्र में फेंक दिया।
- 1:02:17कहता कोई बात नहीं बाबा इस प्याली में समुद्र तो नहीं आता लेकिन
- 1:02:25प्याली समुद्र में खपत तो हो सकती है ना, प्याली तो समा सकती है
- 1:02:32समुद्र में। और सोकरतेस अपने संस्मरण में
- 1:02:36लिखते हैं कि मेरा सारा शरीर एक जन्नाटक आ गया।
- 1:02:44मुझे सूत्र मिल गया जीवन का कि वह तो नहीं खाली हो सकता, वह तो
- 1:02:52बुद्धि में नहीं आ सकता। बुद्धि तो उसमें कप सकती है ना?
- 1:02:56बस यही हम कहते हैं, वह समझ में नहीं आएगा, तुम अपनी समझ को उसमें
- 1:03:03कर दो तो मन हो जाओ, कोई प्रश्न मत उठाओ जो उस छोटे बच्चे ने
- 1:03:11किया? और सो क्रिटिस लिखते हैं कि वह
- 1:03:14बच्चा अंतर द्याना दिखाना सो क्रिटिस लिखते हैं कि वह परमात्मा
- 1:03:23था ही वास् अल्टीमेट पावर, जो मुझे बताने के लिए आया था।
- 1:03:32मैं बहुत वक़्त से खोज रहा था, मिला नहीं, आज मिल गया सूत्र कि
- 1:03:40वह तो मेरी छोटी सी खोपड़ी में नहीं आएगा।
- 1:03:45दूसरा मार्ग भी है, इस बच्चे ने मुझे बता दिया।
- 1:03:50कि मेरी छोटी सी प्यारी समुद्र में खपत हो सकती है, बस यही है।
- 1:03:55मसला ऐसे ही हल होगा। तुम उस पानी में बूंद की तरह समा
- 1:04:06जाओ तो वह तुम्हें। अपना लेगा।
- 1:04:13तुम समुद्र हो सकते हो, समुद्र को बूंद में भर नहीं सकते, यही
- 1:04:19मुश्किलात है। आज मानवता के सामने बड़ी बड़ी
- 1:04:23खोपड़ी वाले आ गए। बड़ी बड़ी खोपड़ी वाले नए नए
- 1:04:28सिद्धांत दे गए। गॉड पार्टिकल खोजने का दवा तक कर
- 1:04:33गए कहाँ खोजा गया खोजा जाएगा, वह खोजा जा ही नहीं सकता क्योंकि वह
- 1:04:42जाना नहीं जा सकता ही इज़ अननोअबल।
- 1:04:48और खोजेगी तुम्हारी खोपड़ी जानेगी भी तुम्हारी खोपड़ी और खोपड़ी की
- 1:04:53पकड़ में वो आता नहीं क्योंकि खोपड़ी छोटी है तुम्हारा पात्र
- 1:04:58छोटा है, समुद्र व्याट है, परमात्मा भी व्याट है मेरी बातें।
- 1:05:07सिर्फ तुम्हें मेरी बातों के साथ जो लिबड़ तिबड़ के आता है, बस उसे
- 1:05:19पी लेना, मेरे शब्दों से बंध मत जाना।
- 1:05:24मैंने आपको एक बात बताई थी जापानीज़ को जानने वाला व्यक्ति
- 1:05:29हिंदी नहीं जानता, मेरे प्रवचन सुनने शुरू कर दिया है और वो अंतः
- 1:05:36उस बॉटम पर पहुँच गया इन्नर मास्ट बॉटम।
- 1:05:42जहाँ सत्य विराजमान है, जहाँ स्थिति प्रज्ञा है जहाँ तुम स्वयं
- 1:05:47हो जहाँ से द्वार खुलता है, विराट का वहाँ पहुँच गया मेरे पास खबर
- 1:05:58आई ये कैसे हो गया? बाबा दूसरे शिष्यों ने पूछा मैंने
- 1:06:10कहा शब्द जरूरी नहीं है, शब्द माध्यम भी नहीं है जरूरी तो छोड़ो
- 1:06:19और। यह संतो की आवाज़ के साथ जो वह रस
- 1:06:25भीगा भीगा लिपट झपट के आता है वह जब तुम सुनते हो और तुम्हारे भीतर
- 1:06:32के घड़े में बूंद बूंद इकट्ठा होता है, सुनते जाओ, सुनते जाओ।
- 1:06:40बूंद बूंद से घड़ा भर जाएगा। यही तो मैं कहता हूँ, अनंतनाथ को
- 1:06:48सुनते जाओ, सुनते जाओ। संत बोले तो उसकी लिवड़ के आई हुई
- 1:06:54वाणी को सुनते जाओ। ये दोनों एक ही तल से आती हैं।
- 1:06:59संत की वाणी भी उसी तल से आती है और ये अन्नदाता का स्वर जिसे
- 1:07:05डॉक्टर टिनटिस कहते हैं, ये भी वहीं से आता है।
- 1:07:09लिबड़ा तिब्बदा इसको सुनो सिर्फ सुनो, सिर्फ सुनो।
- 1:07:17और सुनने से तुम्हारे भीतर यह है संगीत का कोमल रस मधुर भीतर के
- 1:07:24घड़े में भरता जाएगा और 1 दिन ऐसा आएगा कि तुम्हारी तपस्या सम्पूर्ण
- 1:07:30हो जाएगा, घड़ा भर जाएगा। और तुम आनंद मग्न मीरा की तरह
- 1:07:39नाचोगे फिर नाचोगे भी और मीठा मीठा उसकी विरह का स्वाद भी आएगा,
- 1:07:53हेरी मैं तो। प्रेम दीवानी मेरा दर्द न जाने
- 1:08:10को। हेरी में तो प्रेम दीवाने में
- 1:08:21मेरा दर्द न जाने को घायल की। गति घायल जाने या जिन घायल हो या
- 1:08:50जिन घायल। तेरी मैं तो प्रेम दीवाने मेरो
- 1:09:05दर्द न जाने को। तेरी में तो ऐसे आनंद को पीना
- 1:09:20महाभाग्यशाली महाभाग्यवान व्यक्ति होता है।
- 1:09:28तुम शब्दों को संग्रहित करने की फिराक में बैठे हो।
- 1:09:34बिल्कुल वही प्रयास जो वह बच्चा इस छोटी सी प्यारी से समुद्र को
- 1:09:41खाली करने में जुटा था। यही प्रयास कुमार है, कभी सफल
- 1:09:45नहीं होंगे। मेरी बात को रिकॉर्ड वैसे तो
- 1:09:49रिकॉर्ड हो ही गई है। इस प्यारी में कभी समुद्र नहीं खा
- 1:09:54लिया होगा और सोक्रेटीज़ की छोटी सी बुद्धि में परमात्मा आएगा
- 1:10:02नहीं। मैं तुमसे एक करबद्ध प्रार्थना
- 1:10:07करता हूँ प्रवचनों को सुनना कोई बात का खुलासा चाहिए हो तो ले
- 1:10:18लेना कोई बात अधूरी रह गई हो तो पूरी करवा लेना।
- 1:10:25लेकिन यह कभी मत कहना कि समझो में नहीं आया।
- 1:10:28समझ में वो कभी आता भी नहीं। तुम इन शब्दों को सुनो इन बूँधों
- 1:10:39को पीओ सुनिए, दुख बाप का नाश बाबा ने कहा।
- 1:10:44क्या सुनने से पापुकोनाश हो जाता है?
- 1:10:48या तो संतों की वाणी सुन संतों की वाणी संतों के पास बैठो, वाणी
- 1:10:56नहीं तो उनकी तिरंगों को पियो। उनके पास बैठ जाओ।
- 1:11:02आचार्य उपवासनम शोचम स्तेरिम आतुम बिन ग्रहों आचार्य के पास बैठ
- 1:11:09जाओ, उसकी तरंगे तुम्हारे भीतर लिफ्टेंगे।
- 1:11:19और अथः शीतलता का प्रवाह तुम्हारे भीतर रोम रोम में संचारित होगा या
- 1:11:37या इस रस को पियो जो अनादर स्वर। लगातार चलता है।
- 1:11:42देखो 2400 घंटे चलता है, कितनी सेवा कर रहा है परमात्मा में यही
- 1:11:50बाबा कहता था ये कभी बंद न हो जाए सबना जियाँ का इकदाता सो मैं विसर
- 1:11:58न जाए। या जिसे मैं सुन रहा हूँ वह बंद
- 1:12:03ना हो जाए, लेकिन बंद होता नहीं है शबना जियाँ का इक दाता सो मैं
- 1:12:10विसर ना जाए वह मुझे विसर ना जाए, नहीं विसरता वह विराट है।
- 1:12:19बस अगर तुम ये समझते हो कि मैं कुछ कर सकता हूँ तो तुमने उसकी
- 1:12:24वराटता को ठीक से समझा नहीं, मैं बहुत कहता हूँ कि तुम परमात्मा को
- 1:12:33गाली भी निकाल लो। शिकायत भी कर लो, कोई बात नहीं।
- 1:12:39लेकिन परमात्मा को गाली निकालने से पहले पानी की एक बूंद या रेत
- 1:12:49का एक ज़ारा बनाने के समर क्या है तुम में?
- 1:12:54तो तुम जी भर के गाली निकालो, उसने तो आवारा खंड हर पैदा कर
- 1:13:00दिया है, ये जो एस्टरॉइड घूम रहे हैं तुम्हारे और उन एस्टरॉइड
- 1:13:08आवारा एस्टरॉइड का एक कण मात्र जीस दिन तुम बनाने में सफल हो गए।
- 1:13:14या छोड़ो बनाने में यह बना कैसी यह जानने में तुम समर्थ हो गए।
- 1:13:22उस दिन तुम परमात्मा को गाली निकाल देना, यह बना कैसी ये भी
- 1:13:29तुम्हें अगर पता चल जाए। तुम कह दो कि इसमें कार्बन है,
- 1:13:33इसमें सिलिकॉन है इसमें ये है पदार्थ इसमें ये है कंटेंट नहीं
- 1:13:39है सर वो सिलिकॉन को बनाने में समर्थ हो जाओ या ये देखो कि ये
- 1:13:45सिलिकॉन बना कैसे। यह सल्फर बना कैसे या कार्बन आया
- 1:13:50कहाँ से? तो उस दिन तुम परमात्मा को गाली
- 1:13:54या जूते मार लेना कोई बात नहीं, लेकिन काश ये वक्त आएगा नहीं, तुम
- 1:14:06तो पानी के बुलबुले हो, तुम्हे तो इतना भी नहीं पता।
- 1:14:12कि तुम कब फूट जाओगे पानी केरा बदबदा असमानस के जात देखते ही छिप
- 1:14:24जाएगा जो तारा प्रभात। तुम बोलते हो, तुम्हें ये भी नहीं
- 1:14:31पता कि अगले क्षण तुम बोल भी पाओगे या नहीं?
- 1:14:37अगले क्षण यह शरीर सांस ले पाएगा, अगले क्षण या हृदय पंप कर पाएगा।
- 1:14:47तुम इतना भी तो नहीं जानते? और तुम चैलेंज करते हो उस विराट
- 1:14:52महाशक्ति को फिर जब समझ में नहीं आता तो इनके पास समझदार
- 1:15:01व्यक्तियों के पास एक शब्द है जिसे मार्कर्स भी दोहराते हैं।
- 1:15:07जिसे आचार्यगण भी दोहराते है, परमात्मा है नहीं, तो फिर उनका
- 1:15:15क्या होगा जिन्होंने देखा हो किसको माना जाए?
- 1:15:22जिसने नहीं देखा वह कही के ताज में नहीं है।
- 1:15:28ही इज़ ऑथेंटिक पर्सन या जिसने देखा ताजमहल है।
- 1:15:33ताजमहल की खूबसूरती, निहारी और उसके गुणगान किए वह ऑथेंटिक है।
- 1:15:44के परमात्मा है, ताजमहल है या वह ऑथेंटिक है?
- 1:15:49जिसने ताजमहल नहीं देखा, परमात्मा नहीं देखा, नहीं खोजा, उसकी बात
- 1:15:55ऑथेंटिक है या जिसने देखा और वो बोला कि वो है कौन?
- 1:16:00ऑथेंटिक लव से ऑथेंटिक है। कबीर ऑथेंटिक है, नानक ऑथेंटिक
- 1:16:07है। मीरा ऑथेंटिक है या मार्क्स
- 1:16:11ऑथेंटिक है? पश्चिम कहता है मार्क्स ऑथेंटिक
- 1:16:17है, इसलिए दुखी है। जहाँ मार्कर्स पैदा हुए, वहाँ बम
- 1:16:25के गोले परिस रहे हैं, आज साल से ज्यादा हो गया।
- 1:16:32ये गोले रुक नहीं रहे और जहाँ बुध पैदा हुए वो देश शांत है।
- 1:16:45ये बुद्ध का देश है, वो बुद्धियों का देश है या कहलों के?
- 1:16:53वो बुद्धुओं का देश है जहाँ मार्कस पैदा हुई है, ये सब बुद्धु
- 1:16:59थे। बुद्धिवान व्यक्ति बुद्धु ही हुआ
- 1:17:02करता है। वह बुद्धि में सब समेटने की
- 1:17:05चेष्टा में संलग्न रहता है और बुद्धि में वो कभी आता है मैं
- 1:17:13तुम्हें ये कहता हूँ परमात्मा की राह बिछड़े हो तो अगर तुमने
- 1:17:20परमात्मा की राह पे चल के। उस आनंद का एक बूंद नहीं पीया तो
- 1:17:28तुम हतभागी हो तुम निर्भाग हो जिसने उस राह पे चल के उसकी एक
- 1:17:39बूंद का स्वाद चख लिया। उसे ही भाग्यवान कहते हैं और
- 1:17:45भाग्यवान को ही शर्ट में भगवान कहते हैं भगवान का शब्द भाग्यवान
- 1:17:52वो भाग्यवान जिसने उस बूंद उस आनंद की बूंद का स्वाद चख लिया पी
- 1:17:58लिया। गले से नीचे उतर के घूँट तुम
- 1:18:06शास्त्रार्थ कब तक करते रहोगे? ये कभी बंद भी करोगे कि नहीं तुम
- 1:18:14कब भवन में उतरोगे? या राधे राधे की बकवास ही करते
- 1:18:19रहोगे कभी मौन में भी उतर जाओ कभी मौन में जाके देख लो तुम हो कौन?
- 1:18:29इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ रिमेम्बर योरसेल्फ रेकग्नाइज़ यूरसेल्फ़।
- 1:18:36सभी संत कहते हैं और असंत कहते हैं अरे पीठ रामा अरे पीठ कृष्णा
- 1:18:47अरे पीठ राधा देखो किस चीज़ से शांति मिलती है तुम अपने जीवन में
- 1:18:54थोड़ा अपना के देखो। यह पीने की चीज़ है देखो मज़ा
- 1:19:05किसमें है अगर रेपुटेशन में मज़ा है, तो रिपीट करो, तुम स्वतंत्र
- 1:19:11रहो, तुम मार जाओ। अगर पीने में मज़ा है रिकग्निशन
- 1:19:17में मज़ा है रिमेम्बरिंग में मज़ा है तो रिमेम्बर करो नो दाय सर,
- 1:19:27लेकिन तुम्हें एक बात बता दूँ स्वतंत्र तो तुम हो।
- 1:19:33तुम दुखी भी हो सकते हो। तुम्हारी इच्छा है और तुम सुखी भी
- 1:19:37हो सकते हो और तुम आनंदित भी हो सकते हो।
- 1:19:42ऑल इस इन युअर हैंड्स सभी तुम्हारे हाथों में हैं होते तुम
- 1:19:47क्या हो जो तुम्हारा अपना निर्णय है।
- 1:19:57अगर इस राह पे चले हो अगर अध्यात्म में आ गए हो तो उस बूंद
- 1:20:06को कैसे पिए? यह जानना है उस बूंद को पीने के
- 1:20:14लिए लालायित रहना। शब्दों को न्यूरोस में भरने के
- 1:20:20लिए लालाई का न रहना शब्द तो इन सर लोगों के पास बहुत हैं और
- 1:20:29झगड़े भी इन सर लोगों के पास बहुत हैं।
- 1:20:31तुम देख लेना ये सभी सर लोग। 1 दिन राजनीति में चले जाएंगे।
- 1:20:36जो कि महा नरक का कूड़ा है। वहाँ झगड़ा झूठ के अलावा और कुछ
- 1:20:43भी नहीं वहाँ कॉम्पिटिशन है झूठ का, जो ज्यादा झूठ बोलेंगे वह
- 1:20:50बड़ा राजनीतिक। ये झूठ नहीं बोलेंगे।
- 1:20:56वह राजनीति में जाई न जोशीस तली पे धर न सके वह प्रेम।
- 1:21:15आए क्यों जोशी इस तली पे धर न सके, वो प्रेममंगली में आए क्यों?
- 1:21:34अगर शीश तले पे नहीं रख सकते तो फिर राजनीतिक क्योंकि कतार में
- 1:21:40शुमार हो जाओ। वहाँ बड़े से बड़ा नर्क है वहाँ
- 1:21:50भय का दंड। दंड, डंडा या लोभ धन का दो चीजों
- 1:22:03से काम होता है या तो वैद खाओ या खरीद लो।
- 1:22:12और काश इन्हें वैध खाके या खरीद के वह आनंद किए एक बूंद का भी मिल
- 1:22:20जाती वह आनंद बिकाऊ नहीं। वह आनंद वय से नहीं मिलता, निर्भय
- 1:22:31हो के मिलता है। इसीलिए बाबा नानक ने कहा निरपों
- 1:22:35निर्भय दंड दिखा के वैर से नहीं मिलता, अकाल मूरत अजूनी, सेपम
- 1:22:46गुरप्रसाद। यह तो खुद से ही मिलता है।
- 1:22:53गुरु प्रसाद से मिलता है जा पर कृपा राम की होई।
- 1:23:08जाप कृपा राम की होई तापर कृपा करे सब होई।
- 1:23:24फिर सारा अस्तित्व पे कृपा लुटाता है दिप्पा राम की कृपा होती है बस
- 1:23:32राम को पहचानते है गलती करके तुम पत्थरों वाले राम में उलझ गए
- 1:23:40जीवंत राम का तुम्हें कोई पता सता नहीं।
- 1:23:44जीस दिन जीवंत राम में तुम्हारी रुचि हो गई।
- 1:23:49उस दिन तुम इन शब्दावली के चक्कर में उलझना बंद कर दोगे उस दिन तुम
- 1:23:56सूचनाओं को संग्रहित करना बंद कर दोगे जितना कूड़ा कबाड़ा है, सब
- 1:24:00बाहर फेंक दोगे? सब बेकार शास्त्रों का कूड़ा भी
- 1:24:05बेकार, संतों का बोलना भी कूड़ा मैं जो आज बोलता हूँ यह कूड़ा है
- 1:24:12ध्यान रखना यह सिर्फ एक काँटा है तुम्हारे पांव में काँटा चूहा।
- 1:24:22और मैं इस कांटे से उस कांटे को निकाल लूँगा और तुम इस कांटे को
- 1:24:29जिसने तुम्हारा कांटा निकाला, फिर उस जख्म के भीतर मत रख लेना, नहीं
- 1:24:36तो वह दर्द बना ही रहेगा। फिर तुम इनको सहेज लेते हो, बड़ी
- 1:24:44मुश्किल बात है। शब्दों को शब्दों से समझाना अति
- 1:24:50मुश्किल असंभव है, लेकिन क्या करें तुम्हारे बुझे हुए लटके हुए
- 1:24:58मायूस चेहरे। सुख विहीन शांति विहीन तड़पते हुए
- 1:25:06भटकते हुए हमें देखकर गलानी होती है, दुख होता है।
- 1:25:19बोलने पर हम मजबूर हो जाते हैं, बोलना पड़ता है बहुत प्रसन्न रह
- 1:25:28गए वक्त फिर हुआ जाता है श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:25:41हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेववा श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:25:58हरे मुरारी हिनाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:26:16ित, महत स्वामी सखा हमारे हेनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:26:33गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:26:42वासुदेववां अनन्या चिंतितों माँ ये जना।
- 1:26:54परोपसते तेशाम नित्य भुगतानम योग से मम।
- 1:27:17श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री
- 1:27:36कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:27:49सर्वधर्माण प्रेतज्य माँ में कं शरणं ब्रज अहं तांम सर्वपथ ब्यो
- 1:28:07वक्ष स्वामी। माँ सुचार श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:28:18मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:28:29अरे मुरारी एनाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वाम पितुमात स्वामी सखा
- 1:28:43हमारे। भितमात स्वामी सका हमारे हेनाथ
- 1:28:54नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हेनाथ नारायण।
- 1:29:06वासुदेव व धन्यवाद।