Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Jul 25 - मैं क्यों कहता हूँ कि ब्रह्मांड से ऐसी वैसी चीज मत मांग लेना | तुम्हारा यहाँ क्या है? V imp Topic.
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- 0:00ब्रह्म प्रकाश श्रीदान बाबा जी प्रणब आपने कहा बाबा जी कि
- 0:14ब्रह्मंड से, परमात्मा से? कोई गलत चीज़ मत मांग लेना,
- 0:25क्योंकि वह तुम्हारा मांगा हुआ 1 दिन तुम्हें दे देगा इसके गहरे
- 0:35अर्थों में चले। आप कहना क्या चाहते है?
- 0:47मनुष्य सड़क भड़क में आके बाहरी दृश्यों का अवलोकन करते है, उन
- 0:58दृश्यों से प्रभावित हो जाता है। और उन्हें मांग लेता है।
- 1:03परमात्मा से परमात्मा विराट है और कहीं ना कहीं तुम्हारा परमात्मा
- 1:17से सीधा सीधा नाता है। तुम जो भी मांगते हो, मैं ये कहना
- 1:25चाहता हूँ कि तड़क भड़क से प्रभावित हो के मत मांग लेना,
- 1:35क्योंकि अक्सर तुम्हारा मन तड़क भड़क से प्रभावित हो जाता है।
- 1:42सम्मोहित हो जाता है। उस सम्मोहन काल में तुम जो भी
- 1:49मांगोगे गलत मांगोगे। प्रश्न बहुत लंबे जोड़े बीच बीच
- 2:01में मैं समझाता चला जाऊंगा। तो क्या हम ये भी ना मांगे कि हम
- 2:06प्राइम मिनिस्टर हो जाए, चीफ मिनिस्टर हो जाए, हम दुनिया पे
- 2:13राज़ करें, ये तो बिल्कुल ही मत मांगो आपने कहा पीएम, सीएम?
- 2:28इन औरदों में कोई रस नहीं। ठीक कहा फिर ये मांगते क्यों है?
- 2:36क्योंकि तृप्त नहीं होते और दूसरा और बता दो आपको जो मुख्य कारण है।
- 2:46पीएम अपनी गद्दी छोड़ दे, आराम से छोड़ दे मुश्किल क्या है?
- 2:54मुश्किल है कि जब सत्ता हाथ में आती शक्ति हाथ में आती।
- 3:02तो बहुत से ऐसे गलत काम हो जाते हैं जिनके न्याय प्रणाली में दंड
- 3:12बड़ा भारी होता है। मृत्यु, दंड ऐसे कर्म ये कर्तिये
- 3:20हैं। इसीलिए ये गद्दी छोड़कर नहीं छत
- 3:28और गद्दी छोड़ेंगे भी तो नालंदा यूनिवर्सिटी की तरह सब फाइल्स
- 3:35आपकी जला देंगे। सब आंकड़े मचा देंगे।
- 3:42बस डर ही है गद्दी में कोई रस नहीं है, गद्दा भरड़ होता है, गली
- 3:53का कुत्ता भोंकता है, उसे कुछ मिलता है, कुछ नहीं मिलता।
- 3:59फिर भी भौंकता है, फिर भी गदा भाड़ घूमता है।
- 4:02बस ये राजनीतिक योनियां, गधे और कुत्ते की योगना है।
- 4:11मेरी बातों को आज तुम मजाक में मत लेना।
- 4:18यद्यपि मैं मजाक तो करता हूँ, लेकिन आज बड़ी गंभीरता से तुम्हें
- 4:24मैं समझा रहा हूँ क्योंकि प्रश्न तुम्हें ऐसा कुछ ऐसा मत मांग लेना
- 4:30कि मैं पीएम बन जाऊं, मैं सीएम बन जाऊं यह मांग गलत है तुम्हारी।
- 4:36इसलिए ऋषि कहता है ये मत मांग लेना की दुनिया पे मराज करूँ
- 4:41चक्रवर्ती सम्राट हो जा क्योंकि सत्ता का स्वभाव है माया महाठगनी
- 4:51हम जानें। माया सत्ता को ही कहते हैं सत्ता
- 4:59का स्वागत तुमने जब सत्ता मांग ली, तुम्हारे हाथों में बल आ गया,
- 5:11यह बड़े से बेवकूफ लोग हैं जो कहेंगे बल को इकट्ठा करो।
- 5:16दानव बल इकट्ठा करो, शक्ति बल इकट्ठा करो, पदवी बल इकट्ठा करो,
- 5:26ये इतने कमजोर दिमाग के लोग हैं या कमजोर अनुभव के लोग हैं कि
- 5:32अपने गहरे अंतस में जा के न न सत्य को दे कर।
- 5:39और प्राइम मिनिस्टर गद्दी तो छोड़ दे, कोई मुश्किल नहीं है सब कुछ
- 5:45तो भोग लिया सारा संसार घूम लिया जो करना था कर लिया बात ये नहीं।
- 5:55कि गद्दी छोड़ने में कोई मन को दुख होगा वरना मन खुश होगा।
- 6:03सारा झंझट सारा बोझ गधे से उतार लिया जाए।
- 6:10गधा प्रसन्न होता है। गधा भी चाहता है मैं एक स्थान पर
- 6:16खड़ा रहता हूँ, आराम करता हूँ मेरे ऊपर वो झना लेकिन अब क्यों
- 6:21नहीं छोड़ना चाहते? वो कारण आपको गलत दिए जाते हैं या
- 6:24आपको गलत समझ में आ जाते हैं। तुम समझते हो शायद इस में रस अब
- 6:32रस नहीं। रस बनने से पहले था तुम्हारे में
- 6:37जीरा से है शायद तड़क भड़क ये छह बार कपड़े बदलने इस बात का सूचक
- 6:46नहीं है कि छह बार कपड़े बदलते हो।
- 6:49मैं कहता हूँ ये छह बार कपड़े बदलने के ऊपर चले।
- 6:59कपड़ों में रस नहीं, सुंदर कपड़े कोई भी पहन लो।
- 7:05ये सेट लोग क्यों सोने के कपड़े पहनते हैं?
- 7:10क्योंकि सोने से तरक्की नहीं मिलती तो दिखलाती हैं तुम्हें
- 7:14भड़काते हैं कि देखो। हमने तो सोने की पुषा की में रखी
- 7:21इनकी चाल बाजियों में मत आ जाना मैं, मैं इनका कोई एजेंट नहीं है,
- 7:31मैं बिलकुल उस गहरे तलों पे जाके सत्य बोल रहा हूँ।
- 7:36और ये सत्य शायद आपको कोई और ना समझा पाए।
- 7:40समझाएंगे, अष्टावक्र समझाएंगे, कबीर समझाएंगे, नानक समझाएंगे,
- 7:50कृष्ण समझाएंगे, ये राजनीतिक नहीं समझा।
- 7:59अगर तुमने गलती से मांग लिया बल जहाँ भी ध्यान रखना, मैं ये नहीं
- 8:08कहता कि तुम खाना न मांगो, करवार न मांगो रोजगार नमगो।
- 8:16ये नहीं कहता मैं बल का मतलब व्हिच यू नीड यू नीड एक्स्ट्रा
- 8:24फ्रम दट। जो तुम्हें चाहिए उससे ज्यादा तुम
- 8:29मांगते हो। इन्हें डर ही नहीं अगर गद्दी छूट
- 8:37गई तो हमारा दबदबा खत्म हो जाएगा। हम भूकंप करने के योग्य नहीं
- 8:44रहेंगे, ये तो बात ही नहीं है। असल बात समझो असल बात ये है कि जो
- 8:51गड़बड़ घोटाले की है इन सालों में।
- 8:55जो हम 253040 वर्ष से राज़ कर रहे है और उसमें जो हमने अपराध किए
- 9:01है, उनकी सजा इतनी भयंकर होगी, इतनी भयंकर होगी की मनुष्य की
- 9:11कल्पना से परे हो जाती है। कल्पना की यही फाइलें किसी दूसरे
- 9:16के हाथ में लग जाएंगी और वह सीटी पिट्टी गुम कर देगा।
- 9:24इतनी इतनी। कानून से परे के काम नीती छोड़ो
- 9:38बात कानून की है, इतना कानून का हनन हो जाता है और करवाती कौन
- 9:46माया? महा ठगनी हम जानें।
- 9:49जब सत्ता हाथ में आ जाती है तो भले से भरा पुरुष ठगा जाता है से
- 9:59ठगनी के द्वारा माया तो ठगनी भाई ठग त फिरत सब देश।
- 10:10गोरखनाथ कहता है जा ठगने ठगने ठगी वह ठग को आदेश माया ठगती है
- 10:24तुम्हें? माया छायां दिखाती है कल्पनानों
- 10:32की तुम्हें ख्वाब दिखा के ठग लिया जाता है गौरख की इस बात को।
- 10:46गहरे से समझने की चिष्टा करो माया तो ठगनी भाई ठग फिरत सब देश सबको
- 10:58ठग लेती है। जा ठगने ठगने ठगी वह ठग को आतिश
- 11:14जिसने इस बाल गद्दी कमाने की वृद्धि को ठग लिया।
- 11:23अपने वश में कर लिया उस को। गोरख कहते हैं मेरा आदेश सर
- 11:32नमस्कार करता हूँ सर तुम ये कथा भी मत मांग लेना क्योंकि।
- 11:42इतना वक्त लगेगा इतनी दूर की मंजिल तुने मांग ली और जब
- 11:50पहुंचोगे तो पाओगे फल कट्टे और खट्टे ही नहीं जहरीले हैं कड़वे।
- 12:05किसी भी कीमत पर दो चीजों को खोना मत, शांति और जीवन का आनंद ये दो
- 12:22चीजों को बचा कर कुछ भी कर लेना। मेरे शब्दों को फिर समझो तुम्हारी
- 12:31शांति बरकरार रहे, तुम्हारा आनंद बरकरार रहे भीतर का फिर जो चाहे
- 12:39करो अब तुमको हो गया आपने जो सब छीन लिया।
- 12:46क्योंकि जैसे ही हम दौड़ेंगे हमारा आनंद गया, हमारी शांति गया।
- 12:53बस यही सूत्र है जीने का ये कसौटी मपदंड मेज़रमेंट पैमाना है।
- 13:04शांति को बचा लेना, आनंद को बचा लेना, फिर चाहे जो करना और तुम
- 13:14पाओगे, तुम गलत नहीं कर सकोगे तुमने पूछे पुत्र।
- 13:20ब्रह्मंड से गलत चीज़ मत मांगे जाग के मांगना, जो मांगना तो क्या
- 13:27मांगना अगर मांगना ही है तो प्रमंड से मांगना शांत प्रमंड से
- 13:40मांगना धैर्य। सहनशीलता, आनंद यह मांगने जैसी
- 13:50चीजें तू दातार दातार तेरा दित्तर खामना।
- 14:00जिसका सब माल है, जो मालिक है वह सब दे सकता है तुम्हें उसने कुछ
- 14:08छुपाया नहीं तुमसे अगर तुमने कुछ मांगना तो शांति और आनंद मांग
- 14:21लेना। धैर्य और सहन शक्ति मांग लेना, ये
- 14:26बड़े काम की चीजें इन्हें खोना मत किसी की भी।
- 14:44गलती निकालते ना बड़ा आसमान है, गलती सुधारना बड़ा मुश्किल है।
- 14:53मुझे लोग कह देते हैं बाबा आप सभी संतों की गलतियाँ निकाल देते हैं।
- 14:58मैंने कहा सो गए गलतियाँ निकल जानी चाहिए।
- 15:02अगर आज कोई वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की फॉर्मूलेशन में इ इस
- 15:09टु एम सिक्स स्क्वेर में गलती निकाल दे तो तुम उसको दंडित करोगे
- 15:15या पुरस्कृत करोगे। तुम उसको पुरस्कृत करोगे।
- 15:22ऐसे ही अगर कोई आने वाला भक्त, कोई संत ऐसा पैदा हो जाए, कोई
- 15:28गलती निकाल दे या मैं ही निकाल दू और तुम उसको गाली कौन निकालते हो?
- 15:35उसकी बातों पे गौर करो ना फिर। उसकी बातों पे गौर करके देखो भजन
- 15:44है बात में दम है, ऐसे ही तो मैं भी ऐसे भी तो कोई संत नहीं कहेगा
- 15:52किसके पास सुबह का है यहाँ तो लोग एक लेक्चर करने का हज़ारों रुपए
- 15:59फीस लिए। यहाँ शिविर रखते हैं, एंट्रेंस
- 16:04फीस अभी कुछ बताया नहीं होता, समझाया नहीं होता, एंट्रेंस फीस
- 16:09जमा करो, फिर तमाम आपने बातों बातों में हजारों रास्ते सुजात
- 16:16दिए हमें जीने का। आनंद आया जीने का राह मिला सचमुच
- 16:25बाबा वह मरना चाहते थे वी वांटेड टु कमिट सुसाइड, लेकिन आपने जीना
- 16:37सखा दिया। जैसे आपका बताया हुआ क्रिया योग
- 16:46हम सुबह करते है, सारा दिन मस्ती से भरे रहते है।
- 16:52ऐसा ही कोई फॉर्मूला समझाते हो? इतना कारगर है।
- 16:58कि सुबह का किया हुआ क्रिया योग एक घंटा भर किया हुआ क्रिया योग?
- 17:03चौबीसों घंटे हम बड़े मज़े से गुजारते थे, वो ही दिन था।
- 17:09जब हम खीच के बात करते थे, वो ही दिन थे जब हम ग्राहकों की गल पड़
- 17:16जाते थे। वो लौट जाते हैं।
- 17:18हमारे पास नहीं आते, कोई दिन थे जब हम बॉस थे और अपने ही करिंदों
- 17:29से काम लेते हैं और काम वो काम लेना एक अब गुणा होता है।
- 17:42क्योंकि जो काम कर नहीं सकता उसे जबरदस्ती कहना नहीं, ये पूरा करके
- 17:47जाना है। कुछ व्यक्ति में अगर ऊंचे पद भी
- 17:51हो जाए, उसमें रहम भी होना चाहिए। ये बात काम की है समझ लेना।
- 17:58अगर ईश्वर ने तुम पे कोई तदमा लगा दिया, कोई क्षत्र दे दिया, कोई
- 18:03मुकुट दे दिया तो तुम अपने भीतर रहम पैदा करना, क्योंकि वह
- 18:12सर्वोच्च शक्ति का मालक है। परमात्मा रहम करीम है, रहम की
- 18:26मूर्ति है, वो रहम ही रहम है ये कह दो।
- 18:33दया ही दया है, उसके भीतर अगर तुम्हे कोई तमगा मिल जाए, कोई सिर
- 18:46पे छत्र लग जाए, तुम बॉस बन जाओ, तुम ऊंची पद्दी पे आ जाए,
- 18:52तुम्हारे हाथ में शक्ति आ जाए। एक बात को याद रखना, हमारा
- 19:02व्यवहार उतना ही मृत्यु होता जाएगा जितनी ज्यादा तुम शक्ति
- 19:08संपन्न होते जाओ अपने जूनियर्स के प्रति।
- 19:16तुम इतने सौहार्द से भर जाओ कि उनकी तकलीफ तुम्हें अपनी तकलीफ
- 19:24रखे। उनका दुख तुम्हें अपना दुख नजर
- 19:32आए। ऐसा बर्ताव करना और तुम उल्टा
- 19:42बर्ताव कर जाओ, तुम्हारे आत्म ताकत है कि तुम बॉस बन के सताना
- 19:47शुरू कर देते हो। किसी न किसी स्तर पर तुम अपने रहम
- 19:54को खो देते हो। और मैंनेत में इशारा किया उस परम
- 20:00की तरफ जो रहम से भरा हुआ है। तुलसी का एक शब्द है दया, धर्म का
- 20:09मूल है दया रहम। दया धर्म का मूल है मर्सी पाप मूल
- 20:19अभिमान अगर धर्म करना है तो इसका लक्षण है कि तुम्हारे मन में दया
- 20:28आ जाएगी, रहमा जाएगी। फिर तुम ये नहीं देखोगे।
- 20:34इसने क्या किया? फिर तुम इसने क्यों किया इसकी तरफ
- 20:42ख्याल करो। इसने चोरी की भौंक मिटाने के लिए
- 20:49किया। इसके पास तो वस्त्र नहीं थे।
- 20:52तो सुरी आज तो तुम्हारे कानून की आईपीसी की धाराएं मुड़ों की
- 21:01धाराएं धर्म के साथ संयुक्त नहीं होती है रेल।
- 21:11आईपीसी की धाराओं में कुछ और जोड़ना होगा।
- 21:20दया धर्म का मूल है। मैं थोड़ा धीमे में बोटा हूँ ताकि
- 21:25बात आपके भीतर उतर जाए। पाप मोर अभिमान तुम्हें अगर कोई
- 21:34बड़ी गद्दी मिल जाए तो तुम अभिमान से मत भर जाना।
- 21:40मैं तुम्हारी बात का जवाब दे रहा हूँ।
- 21:44मैं क्यों कहता हूँ ब्राह्मण से ऐसी चीज़ मत मांग लेना?
- 21:48क्योंकि तुम तड़प भड़क के कारण उपद्रव कराना शुरू कर देता है।
- 21:54हिंदू मुस्लिमों को लड़ा दिया, धर्मों में दरार पैदा की कर दी,
- 22:02भाइयों में आग लगा दी, परिवार में आग लगा दी।
- 22:08व्यक्ति अपनी सर्वोच्चता के लिए पूरे परिवार को कुर्बान कर देता
- 22:14है तो मैं शायद ये बात समझ में नहीं है कि मैं सर्वोच्च बना
- 22:22रहूँ। अगर तुम्हारे हाथ में परमात्मा
- 22:28शतर दे देता है तो तुम्हें रहम जितनी बड़ी पदवी तुम पा जाओ।
- 22:40एक बात को याद रखना और रहम तुम्हारा बढ़ता ही जाएगा पदवी के
- 22:44अनुसार फिर तो तुमने अपनी पदवी की अपनी ताकत की अपने बल्कि से ही
- 22:52कीमत डाली अगर तुम पदवी के साथ साथ आनन्दकारी।
- 22:59होते चले गए पाप मूल अभिमान फिर तुमने पाप कर दिया, अब शब्द को
- 23:06फिर सुन लेना मैंने बड़े कारणों से चुनी है।
- 23:10ये शब्द दया धर्म का मूल है अगर तुम्हें कोई।
- 23:18उच्च पदवी मिल जाए, तुम धनपति हो जाओ, कारखानेदार हो जाओ, बड़ी सी
- 23:25बेडकों के स्वामी हो जाओ, घनी सी जमीनों के मालिक हो जाओ।
- 23:33तो सुमल की इसका तभी फायदा है कि तुम्हारे हृदय में रहम भी उतर
- 23:37जाए, उतनी ही मात्रा प्रपोर्शनेटली सिर्फ शक्ति को
- 23:46पाने के लिए ही जैसे आचार्य बोलते हैं शक्ति को ग्रहण करो, शक्ति को
- 23:51ग्रहण करो। लेकिन ये भूल जाते हैं।
- 23:53दूसरा पाठ पढ़ाना जो बैलेंस करता है, शक्ति को कोई बात नहीं, लेकिन
- 24:03शक्ति के साथ साथ इस बात को खो मत देना, वह परम शक्तिमान है
- 24:09सर्वशक्तिमान्। और वह पूर्ण रहमो करीम है।
- 24:20ये हुआ शक्तिमान होने का मज़ा तुम शक्तिमान हो जाते हो और रहम कह
- 24:27देते हो, यही गडबड हो जाती है। फिर तुम करते हो अन्याय फिर तुम
- 24:32बनते हो तानाशाह फिर उस तानाशाही के दौर में तुम जो कुछ कर देते हो
- 24:40वो पाप होता है क्योंकि अभिमान वश किया होता है पाप।
- 24:46मोरू अभिमान। तुलसी कहते हैं तुलसी बेयाना
- 24:52छोड़िये, जब लग घाट में प्राण तुम जैसे जैसे ऊंचे उठते चले जाओ,
- 25:02वैसे वैसे रहम दिली तुम्हारी बढ़ती जा।
- 25:07अगर ऐसा तुम कर सकते हो तो चाहे जो मर्जी बन जाना, तुम दुनिया के
- 25:13मालिक बन जाना, चक्रवर्ती सम्राट बन जाना, लेकिन ये शर्त है पर
- 25:20पोर्शनेटली। दया बढ़नी चाहिए और रहम बढ़ना
- 25:26चाहिए बल के साथ साथ और बल के साथ साथ अगर अभिमान बढ़ गया तो घर को
- 25:36ये दो शब्द बड़े क्रांतिकारी हैं। इस शब्द का अर्थ पूछा था।
- 25:44मित्र वृंदा मित्र वृंदा दया धर्म का मूल है।
- 25:53अगर तुम्हे शक्ति आ जाए तो शक्ति के साथ साथ तुम और रहम को पैदा
- 25:59करते जाना। वह परम शक्तिमान वह सर्वशक्तिमान
- 26:06परमदयालु भी है। अब तुम्हारी बुद्धि इस बात को समझ
- 26:11नहीं सकी लेकिन ये सलामियत इस बात को समझ गई है तुम?
- 26:21बहस करने लग जाते हो लेकिन ये सत्य है बात जो इस्लाम ने जाना वो
- 26:29सत्य जाना इस्लाम कहता हूँ कहता है कह दूंगा साफ हसर में पूछेगा
- 26:39घर खुदा। कह दूंगा साफ हशर में पूछेगा कर
- 26:45खुदा लाखों गुनाह की ये तेरी रयामत के ज़ोर पे हमें तेरे बल पे
- 26:52इतना यकीन था क्योंकि तू जितना बलवान है उतना रहमो करीम भी है।
- 27:00तो हमें माफ़ कर देगा बस तेरी रहमत के ज़ोर पे हमने प्राप्त
- 27:06किया ज़ुल्म किया। ये बात बड़ी गहरी है तुम्हारी
- 27:12छूत्रबुद्धि में समाएगी नहीं, लेकिन सत्य।
- 27:17एक कोने में जाकर के कोने में जाकर तुम यही पाओगे कि वह रेमू
- 27:22करीम तुम्हें माफ़ कर देता है। ये शब्द कानून के खोपड़ी धारियों
- 27:29की समझ में नहीं आएगा, लेकिन मैं तुम्हें कहता हूँ, एक तल ऐसा आता
- 27:35है जहाँ तुम जाती हो। वहाँ आता है तुम्हारी करोड़ों
- 27:41गुनाह माफ़ हो जाते हैं, वहाँ जाने से मात्र वह है तीरथ, वह है
- 27:48मक्का हच, वह नमाज़, वह है प्रार्थना, वह है अरदास।
- 27:58वो ऐसा तीर्थ तीर्थनामा जे देश का है, अगर वो तुम्हे तीर्थ का स्नान
- 28:09करवा दे किसी दिन तब तुम उसकी महत्ता को जान पाओगे तुम्हारी
- 28:14कुम्भ में किये हुए तीर्थ सब बेकार है।
- 28:18मत जाना, भगदड़ में मरे जाओगे और ये खोपड़ीधारी बाबा कहेंगे अच्छा
- 28:23तुम्हारी मुक्ति हो गयी, मोक्ष हो गया, इनके पीछे मत लग जाना, ये
- 28:31अव्वल सिरे का मूड है। यह राजनीति के बने हुए लोग धर्म
- 28:42का लबादा उड़े भरते हैं। इनकी किसी बात को मत मानना।
- 28:46यद्यपि मैं जानता हूँ कि तुम भी उतने ही मूड हो, तुम्हारी संख्या
- 28:53घटेगी रे। लेकिन तुम्हारा कोई दुख मिटेगा भी
- 28:57नहीं यह भी बात लकीर के लिख लेना पत्थर के ऊपर तुम्हारा दुख भी
- 29:03नहीं मिटेगा फौकी किस्तियां हैं कागज़ की फौके जहाज हैं, कागज़ के
- 29:12और कागज़ के जहा। उड़ान नहीं भरते और कागज़ की
- 29:20किस्तियां तुम्हें बाप सागर से पार नहीं करते।
- 29:25ये रामधम जपना, ये राधे राधे जपना, ये कागज़ की किस्तियां डूब
- 29:29जाती हैं, बीच मजेदारों के नहीं। मंजेदार तो बड़ी दूर है, ये
- 29:35किनारे से ही डूब जाती है, चलती ही नहीं क्योंकि कागजी लिफाफें
- 29:42हैं, मैं बोलता हूँ उसका कुछ कारण।
- 29:53क्या कारण? कारण ये कि तुम मेरे बच्चे हो और
- 30:03मैंने कोई साहित्य नहीं बनाया, कोई पुस्तक नहीं लिखी।
- 30:11मैं सीधा सीधा बोलता हूँ आपसे मखाति और तुम मेरे बच्चे हो इसलिए
- 30:18कभी कभी तो मैं समझाता हूँ किसी दिन तो समझोगे बोलता जाऊंगा,
- 30:28बोलता जाऊंगा लेकिन किसी दिन। तुम्हें समझायेगी मेरी बात उस दिन
- 30:35तुम तब्दील हो जाओगे, बकायदा सर्व रूप से तुम बाहर भीतर से तब्दील
- 30:45हो जाओगे, ट्रांसफर्मेशन हो जायेगा तुम्हारे।
- 30:53तुम शक्तिशाली बनो, लेकिन ध्यान रखना, इन आचार्यों के पीछे मत
- 30:59रखना यही पागलपन है, यही मैं कहता हूँ भ्रमण से मांगना लेकिन
- 31:07बैलेंसिंग पावर सदा बनाए रखना बल मांग लो।
- 31:11गद्दी मांग लो, बड़ी से बड़ी गलती मांग लो चक्रवर्ती सम्राट हूँ ना
- 31:18मांग लो वह पूरा कर देगा लेकिन जनाब ऐसा ना हो की अपनी शक्ति को
- 31:26बैलेंस ना कर सकूँ। बैलेंस कैसे होगी?
- 31:33जब शक्ति आएगी तो तुम्हारे भीतर अहंकार न आ जाए।
- 31:41अहंकार आ गया तो तुम पाप करोगे फिर वो पा न तुम्हे जीने देगा, न
- 31:48तुम्हे सोने देगा। यहीं चूक हो गई।
- 31:52आज के राजनीतिक उछल सांप के मुँह में कोढ़ कर लिया।
- 32:02निगले तो कोढ़ ही उगले तो कलंक के बीच में फंस गया।
- 32:12तो तुम बल्क तो मांगना, गद्दियाँ मांगना, लेकिन एक चीज़ और भी मांग
- 32:22देना जो जरूरी है और उससे तुम्हारी सभी समस्याएं भी हल हो
- 32:28जाएंगी। मैं रोज़ सुनता हूँ कोई न कोई
- 32:34क्लब पे मेरे पास भेज देता है बल मांगो तुम्हें जैसा भी है कोपड़ी
- 32:38को धन मांगलो वक्त पे जरूरत पे धन ही काम आता है अपने बिगाने सब
- 32:45छोड़ जाते हैं ठीक है। इकट्ठा कर गद्दियाँ मांग लो,
- 32:56सुविधाएं मांग लो, बड़े से बंगले, कोठी, कार मांग लो लेकिन पैरलल।
- 33:06संतुलन बनाए रखना बस ये बात मत भूलना तुम कुछ भी मांगो, अगर
- 33:14तुमने संतुलन खो दिया तो फिर तुम्हे अपराध ही होगा।
- 33:21इन्होंने संतुलन खो दिया। इनका कोई गुर नहीं था
- 33:25राजनीतिज्ञों का। ये राम जैसे लोग, राजनीतिज्ञ
- 33:33कृष्ण जैसे लोग मुर्ख इनके धार्मिक गुरु हुआ करते थे।
- 33:42दूर दराज कहीं बैठे हुए हैं। मिलों दूँ।
- 33:48एकांत कुटिया वह मगन में बैठे रहते और जब उलझ जाते तो उनके पास
- 33:56जाते। इन्हें पता समाधान उसी तल पर बैठा
- 34:01हुआ व्यक्ति देगा। और चाहे प्रजा को हो, चाहे राजा
- 34:06को हो, इस शब्द को अंडरलाइन कर कर समाधान वही व्यक्ति देगा जो उस
- 34:17स्तर पर पहुँच गया। वो समस्या चाहे राजा की हो, चाहे
- 34:22प्रजा की हो। समाधान कौन करेगा जो उस तल पर
- 34:28पहुँच गया? जीस तल की मैं बात करता हूँ जहाँ
- 34:32जाकर सब आग तो मैं जलाती हूँ जहाँ जाकर सब।
- 34:44शस्त्र तुम्हें काटते हैं जहाँ जाकर कोई भी बाढ़ तुम्हें बहाती
- 34:51नहीं कोई भी तूफान तुम्हें उड़ा के नहीं ले जाता, तुम उस स्तर पर
- 34:59पहुंचा हुआ व्यक्ति। अगर कोई समस्या का हल मांगना तो
- 35:06ऐसे लोगों से मत मांगना जो तुम्हें सिर्फ नियम सीखाता है।
- 35:12नियम तो सीधे साफ है, बातें थोड़ी गहरी हैं।
- 35:17पैरेलल हो के सुन सिर्फ। बल कमाओ, शक्ति कमाओ गदियाँ कमाओ
- 35:25राजनीतिक उच्च पदस्थ पहुँच ही जाओ बड़े बंगले ले लो, कार ले लो
- 35:31बिलकुल ले लो परमात्मा ने बनाई है तुम्हारे लिए बनाई तुम पोगो भाई।
- 35:40तुम्हें दिखाने के लिए थोड़ी बनाई है भोगने के लिए बनाई भोगो मज़े
- 35:46से भोगो संसार में तुम पीएन से लेकर पीएन तक पीएन से लेकर पीएन
- 35:57तक। कोई भी रुतबा पालो, एक चीज़ को मत
- 36:05भूल जिससे ठगने ठगनी ठगी वह ठग को आदेश इस ठगनी को अपने ऊपर हावी मत
- 36:15होने देना। यह ठगनी क्या है?
- 36:20एक ठगनी है जो तुम्हारे मति भ्रम कर देती है।
- 36:25मति भ्रम से रहम तुम छोड़ देते हो और जिसने रहम का बल्ला छोड़ दिया,
- 36:33वह भटक गया, दया ना छोड़िए। जब लग्घट में प्राण इस सूत्र को
- 36:41बंध लूँ, इसको अंडरलाइन भी कर लूँ और पल्लू से भी बांध लूँ।
- 36:51दयाधर्म का मूल है दया। पाप मूल अभिमान अगर तुम्हारे पास
- 36:59कोई पावर आ गई बल आ गया पोधा आ गया कुछ चार सूचनाएं आ गई
- 37:06तुम्हारे पास, तुम बड़े सर बन गए तुम्हें लोग ज्यादा मानने लगे
- 37:13तुम्हारी बातों में। थोड़ा बल था उससे तुम्हारे भीतर
- 37:22कहीं ऐसा न हो के अहंकार आजा पाप मूल अभिमान फिर तुम पाप करो।
- 37:35फिर तुम संशधनाओं के लिए धन मांगोगे, फिर तुम और और और ये मन
- 37:42मांगे मोर यहीं से गड़बड़ पैदा हो जाएगी तब कमाओ जितना कमाना है
- 37:51कमाओ। पर ये समझ के कमाओ कि मैं इसको
- 37:59छोड़ के चला जाऊं, मन को दिलासत देने की चिश्ता मत करो कि मैं चला
- 38:05जाऊंगा, कोई बात नहीं, मेरे बच्चे खा लेंगे, मेरे बच्चे ही चले
- 38:12जाएंगे, कोई बात नहीं। उसके बच्चे का दिल के बहलाने को
- 38:17गाली भी ये ख्याल अच्छा है मोह की मूडता के कारण तुम ऐसी बातें
- 38:26सुनती हो कौन किसका है? तुम पागल मत मानो कोई किसी का।
- 38:42होगा मसीहा सामने तेरे फिर भी न तुम बच पाएगा मसीहा तेरे सामने
- 38:58होगा। लेकिन फिर भी तू बच न पायेगा तेरा
- 39:05अपना खून ही आकर तुझको आग लगाएगा। आसमान पे हे आसमान पे उड़ने वाले
- 39:31माटी में मिल जाएगा। कसमें, वादे प्यार वफा सब बातें
- 39:45हैं बातों का, क्या कोई किसी का नहीं है झूठे?
- 39:56नाते हैं नातों का क्या कसमेवाद प्यार वफा सुख में तेरे साथ
- 40:14चलेंगे। दुःख में सब मुख मोड़ेंगे तेरे
- 40:27अपने तेरा बन कर तेरा ही। दिल तोड़ेंगे, देते हैं, देते हैं
- 40:48भगवान को धोखा। इंसा को क्या इंसा को क्या
- 41:01छोड़ेंगे कसमें वादे प्यार वफा देते हैं भगवान को दुख।
- 41:13हिंसा को क्या छोड़ेंगे? भगवान को धोखा देते है, भगवान को
- 41:19बच्चा बना देते है उसकी ऊँगली पकड़ के चलो तुम्हें मंदिर छोड़
- 41:23दे ऐसे ऐसे मुर्ख लोगों को जन्म दिया है इस धर।
- 41:35तुम बल शक्ति, ओह दा सोचना है, सब कमाओ।
- 41:51किस तरफ तुम्हारी शक्ति जाती है कम आउट सिर्फ कमा ही सकते हो तुम
- 41:58बना तो कुछ सत्य यू अरे अनेबुल टु क्रियेट समथिंग बना, तो तुम कुछ
- 42:06भी नहीं सकते हो, कमा ही सकते हो और कम आउट।
- 42:11बल कमाओ, धन कमाओ पदबी कमाओ सूचनाएं कमाओ शब्द कमाओ शास्त्र
- 42:21पढ़ो एक छोटा सा बच्चा 6 साल का पूरी गीता सुना देता है।
- 42:30संस्कृत में गीता सुना देता है। मैंने कहा इसमें क्या खास बात
- 42:38गीता तो तोता भी सुना देता है राम राम ये तोता ही डंप है।
- 42:46बात तो ये है कि उस गीता की वीता है क्या?
- 42:49वो गीत गाता कैसे है? प्रभात यह नहीं जानते।
- 42:55कबीर के शब्दों का गहरे रहस्य में जाकर अवलोकन किया और आपको बताया।
- 43:06ऐसे ही हर शब्द के भीतर गहरा अर्थ शिवपा पड़ा उसे रहस्य कहता हूँ।
- 43:11मैं उस रहस्य को आप नहीं जानते उस रहस्य को जो जानता उसे आप
- 43:16डॉक्टरेट दे देते है और शब्द किसके?
- 43:23शब्द उसके जो कहता है कागद कर्म छुओ नहीं, तुम कैसे समझते हो शब्द
- 43:30उसके यही गलती कर जाता है। ये शब्द उसके होते तो उसने तो
- 43:37कागद कर्म कभी छू आए। ये शब्द कबीर का है।
- 43:44ये शब्द विराट का है। विराट के यहाँ से आए कबीर के मुख
- 43:51से उच्चारित हुए हैं। कबीर इंस्ट्रूमेंट बने एपरेट्स
- 43:58बने उपकरण बने। बोलने के माध्यम बने बाबा नानक
- 44:05साहब कह दे जीस से ए लिखे थिस से सर ना जो ये लिख रहा है ये उसके
- 44:12सर की खोजने जब वो फरमाए, तेवत है पापा।
- 44:19कैसा ए लिखें? जैसे से रहना कैसे जैसे हुक्म आता
- 44:26चला गया। मैं लिखता चला गया ऐसा ही कबीर
- 44:33लोग कह देते हैं कबीर भगवान है, परमात्मा है, बिल्कुल है।
- 44:38और एक तल पर जाकर तुम भी परमात्मा ये मत भूलना एक कल अकेले कबीर ही
- 44:47परमात्मा नहीं है, उस तल पर जाकर सभी परमात्मा हो जाते हैं, वो
- 44:54केंद्र ही कुछ ऐसा है। परिधि से जो रेखा चलेगी वो
- 45:00परमात्मा हो ही जाएगी। केंद्र तक पहुंचते पहुंचते फिर
- 45:06समझना इस बात को परिधि से जो रेखा चली वो केंद्र बिंदु तक पहुंचते
- 45:14पहुंचते परमात्मा हो जाएगी। तुम भी परमात्मा हो स्थल पे जाके
- 45:20जीस स्थल पे जाके कबीर परमात्मा हो लेकिन अगर तुम ये कहो के कबीर
- 45:26ऐसे ही परमात्मा हैं तो तुम्हें समझ नहीं आए कबीर फिर तुम समझें
- 45:33नहीं कबीर ऐसे ही तो। पंचभौतिक शरीर के बने हुए मिश्रण
- 45:40हैं। बिल्कुल ऐसे ही जैसे तुम देख रहे
- 45:44हो लेकिन एक तल पर जाकर वह परमात्मा हो जाते हैं और उस तल पर
- 45:54जाकर कोई भी परमात्मा हो जाता है। एक ध्यान में रखना एक अकेले कबीर
- 46:01पर महात्मा होते है सनी एक अकेले नानक कृष्ण शमीरा वहाँ जाके भगवान
- 46:12होते है सनी तुम भी वहाँ जाकर? जो भी रेखा चलेगी इस पैर से और
- 46:20केंद्र की तरफ उन्मुख होगी वह एक अध्ययन परमात्मा हो जाएगा तो भी
- 46:28कोई कम नहीं है ध्यान में रखना। अपने आपको इन्फिनिटी कॉम्प्लेक्स
- 46:36में मत ले क्योंकि तुम कभी भी परमात्मा से चूके नहीं अब इन
- 46:47शब्दों को ध्यान से सुन लेना। एक क्षण के लिए तुम परमात्मा को
- 46:53चूके नहीं हो कभी बस भोले हो और भूलना खोना नहीं होता भूलना खोना
- 47:08नहीं होता। भूलना चूकना नहीं होता।
- 47:15तुम रात को भूल जाती हो सो जाते हो।
- 47:20सोते वक्त राजा को याद नहीं रहता कि मैं राजा हूँ, भूल गए ना?
- 47:27ऐसे ही कंगाल को भी याद नहीं रहता कि मैं कंगाल भिक्षु गरीब हूँ,
- 47:37दरिद्र हूँ, भूल जाता है ऐसा ही तुम भी भूल जाते हो।
- 47:49ऐसा ही कबीर भी भूल जाते हैं। नानक भूल जाते हैं, कृष्ण भूल
- 47:58जाते हैं, सब भूल जाते हैं, लेकिन भूलना खोना नहीं।
- 48:08एक वक्त आता है जब तुम याद करते हो इसलिए गुरजीव ने बड़ा शानदार
- 48:15शुल्क है। गुरजीव कहते हैं, रेमेम्बेर योर
- 48:21सिर। अपने आप को याद करो, तुमने क्या
- 48:28याद किया राधा राधा भटका दिया ने मूड फंड इन मूड होने तुम्हें भटका
- 48:38दिया? गुरजफ कहते हैं, अरे मैं पर
- 48:45योरसेल्फ याद करो तुम, तुम कौन और इन मूढ़ों ने ये शब्द सुन लिए समझ
- 48:56तो नहीं सके, क्योंकि मूढ़ व्यक्ति के भीतर समझ कहाँ होती?
- 49:02तो इन्होंने प्रचार करना शुरू कर दिया।
- 49:04रेमेम्बेर राधा राधा राधा इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, इनके पीछे मत
- 49:18लग जा, बात कुछ और कही। इन्होंने पकड़ी कुछ और बाबा नानक
- 49:31ने कहा वहाँ पहुँच जाओ जहाँ पर अनेक कतरा के गुंजार हो रहे हैं।
- 49:37ओंकार, अनंतनाग बाजेनाद अनेक अशंका।
- 49:44अनेक प्रकार के नाग बज रहे हैं। अनस्ट्रक्टर साउंड वह और इन
- 49:54मूर्खों ने धर्म बना लिया हुंकार का हुंकार को।
- 50:01आसमान की तरफ मुकरो ओम कुत्तों की तरह बोलो कैसी कैसी मूडताएं?
- 50:12इस संसार में बिखेरने वाले लोग बैठे हैं और मात्र सिर्फ अपना नाम
- 50:19बनाने के लिए। जो कभी रहता नहीं है।
- 50:23कब किसका नाम रहा है श्रद्धा के लिए और नाम भी रहा है तो तुम क्या
- 50:29जानो वो कौन कृष्ण को तुम लास्ट पूछते रहो।
- 50:38राम को तुम लाख पूछते रहो इससे राम को कोई फर्क पड़ेगा, कृष्ण को
- 50:45कोई फर्क पड़ेगा ज़रा सोच के बताना मुझे जो चला गया, जो समुद्र
- 50:54में लीन हो गया, जिसकी बूंद समुद्र हो गई।
- 50:58उसको याद करने से कोई फर्क पड़ेगा उसे और उसको अगर गाली भी निकाल
- 51:04दोगे कह दोगे वो है नहीं। बहुत से परयार जैसे मूर्ख लोग आए।
- 51:12वो अपने भीतर तो उतरे नहीं जहाँ जाकर समाधान हो जाता है हर चीज़
- 51:15का। वो करते हैं, खोपड़ीधारियों को
- 51:22खोपड़ियों से समझाने की चेष्टा करते हैं जैसे तुम्हारे आचार्य
- 51:26करते हैं, खोपड़ियों से खोपड़ियों को समझाने का काम प्रेम क्या है।
- 51:35बंधन को कैसे तोड़ें लीव इन में कैसे अरे भाई तुम्हें तसल्ली नहीं
- 51:42पड़ेगी तुम कोई भी समाज का तरीका अपना समाज ने सभी तरह के तरीके
- 51:50अपनाए और अपना अपना के व्यर्थ पाएं।
- 51:55और छोड़ दिए हैं। समाज कोई आज का नहीं है।
- 51:58समाज बहुत पुराना है, लाखों साल पुराना है ये जो तरीके तुम आज
- 52:04ईजाद कर रहे हो, ये बहुत बार समाजो ने अपना अपना कर छोड़े।
- 52:13फिर सही तरीका क्या है? सही तरीका है उस सतह पे चले जाओ
- 52:23जहाँ जाकर बंधन जैसी कोई चीज़ नहीं है फिर तुम्हें कोई रिश्ता
- 52:30नहीं बांध पायेगा। अब थोड़े से यहाँ ठहर के बात कर
- 52:35ले, ये थोड़े से आराम से बोलने वाली बात है क्योंकि तुम्हारी
- 52:38ज़िन्दगी से संबंधित है ये आज चले हैं ना नए नए काम पश्चिम में
- 52:47सिर्फ एक ही सेट बेक दिया है। कोई बात नहीं हम से दन छीन लिया,
- 52:56यह भी गलत किया। हम से हमारा संस्कार छीन लिया।
- 53:04यह भी गलत किया लेकिन सबसे बड़ा। जो हमें सेट बेक दिया वो दिया कि
- 53:14हमसे हमारी सभ्यता छीन ली। हमारी सभ्यता को देखकर मैं काले
- 53:26के होंठ फटाने लगे थे। कांपने लग गया था।
- 53:31मैं काले हमारे गुरुकुरों को देख ऐसे व्यवस्थित बच्चे ऐसे शानदार
- 53:38आनंद में बैठे हुए झूमते गाते नाचते उसने अपने मुल्क में कभी
- 53:45देखे नहीं और वह ईर्ष्या खा गया। और ईशा खा क्या गया?
- 53:53ईशा को नवा गया आज ये तुम कॉनवेंट स्कूल्स देखते हो कॉलेजेस कॉनवेंट
- 54:00स्कूल्स अंग्रेजी बोलना आज इस सम्मान का विषय समझा जाता।
- 54:13जबकि अंग्रेजी से गरीब भाषा और कोई भी सूत्र नहीं कहता।
- 54:18मैं मैं कहता हूँ गरीब पुअर लैंग्वेज जितनी इम्प्यूर शुद्ध भी
- 54:26नहीं। और गरीब पुअर लैंगुएज अंग्रेजी
- 54:31है। इतनी कोई भी लैंगुएज में उससे तो
- 54:35हमारे हिंदुस्तान में जनमी हुई, ये जीतने भी लैंग्वेजेज हैं, वो
- 54:40तमिल हो, मराठा भी हो बेंगाली सभी स्टेटस में करीब करीब अपनी अपनी
- 54:52लैंगुएज पंजाब में पंजाबी ये ज्यादा प्रचुर हैं, ज्यादा संपन्न
- 54:59है, अंग्रेजी इतनी पुअर लैंगुएज है के बहुत सी चीजों के और विशेष
- 55:04अध्यात्म के तो शब्द ही नहीं। मैंने हिंदी में बायोग्राफी बोली,
- 55:16उसका अंग्रेजी संस्करण करने वाले, अंग्रेजी तरमीम करने वाले,
- 55:24ट्रांसलेट करने वाले लोग। सही सही शब्द नहीं मिले उन्हें
- 55:28अंग्रेजों में बाबा क्या करें? मैंने कहा मिलता जुलता शब्द लिखा
- 55:34दो और क्या करोगे? है ही नहीं जब अंग्रेजी इतनी पुअर
- 55:39लेग बस है। इसकी 12 खड़ी ही 26 है सिर्फ।
- 55:48और संस्कृत की हिंदी की बारकड़ी देखो किधर पंजाबी की ज्यादा
- 55:57हिंदुस्तान की सभी भाषाओं की बारकड़ी वरन बाला अंग्रेजी से
- 56:03ज्यादा है। अंग्रेजी में सिर्फ 26 साक्षर
- 56:06हैं। उसे पता ही नहीं लगेगा।
- 56:10उसने कानून बना दिया, वो सिर्फ संविधान की तरह नियम बना दिए।
- 56:15अब करते जाओ उसको हल करते जाओ, कोई कहेगा ये धारा लगेंगी उसको
- 56:22दूसरी धारा काट दे दिया। कोई कहेगा ये धरा लगेंगी इसको
- 56:27दूसरी धरा काट दी। मग चकपाई यह वकीलों वाली शुद्ध
- 56:32भाषा है। शुद्ध भाषा है जो हमारे यहाँ
- 56:37हिंदुस्तान में उपजी संस्कृत और संस्कृत की पैदाश यानी बेटी उसकी।
- 56:45हमें सिखलाया जाता बचपन में हमारे टीचर थे हेडमास्टर मास्टर की
- 56:51सारण। मेरे रिश्ते में ताऊ जी भी लगते
- 56:58थे दूर से वो सिखाते है हमें। एम् आ ई ई हम ऐसे बोलते एम् और
- 57:07कहते एम् अरे बकरी की तरह क्यों करे एम् बोल ये अः हाँ मैं आँखी
- 57:18मात्र जुड़ेगी तो एम् बनेगा। अन्यथा ये जो ए है ये दो चीजों का
- 57:25संयोग है ये और आ के बीच में आ की मात्रा फिर बनेगा।
- 57:31ए उसमें फिर आ की मात्रा लगाओगी फिर बनेगा आ?
- 57:39ऐसे समझाया उन्हें और अगर कोई बच्चा ठीक नहीं बोल पाता तो उसको
- 57:46यहाँ से पकड़ के बगल में से उनके पास एक नर्व चटोरी थी, थोड़ा सा
- 57:52उसे पुश कर देते, दबा देते और चीखें निकल जाती बच्चे।
- 57:58नर्व में आज तक नहीं खंगाल पाया तो कौन सी नर्व दबाते थे चीखे
- 58:05निकल जाती थी वो सिखाते थे बकरी की तरह एम् एम् मत करो आह।
- 58:18ख ग ऐसे ये सब जो अक्षर हैं इनमें ए जुड़ता है प्लस प्लस करके फिर
- 58:28ये बनते हैं कै खै गै घै न ऐसे बोलोगे तब क ख ग घ न ऐसे बोला।
- 58:39बड़े साइंटिफिक रूप से समझाते, लेकिन अंग्रेजी में साइंस की
- 58:47इन्वेंशन्स जरूर हुए। हम भी क्योंकि गुलाम रहे बहुत से
- 58:52शब्द आज हम अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं।
- 58:56सिर्फ गुलामी के कारण लेकिन जब तक गुलाम नहीं हुआ तो अंग्रेजों को
- 59:01यहाँ कोई नहीं जानता। हिंदी संसद या अपनी अपनी स्टेटस
- 59:07की भाषा है। अंग्रेजी का कहीं नाम निशान नहीं
- 59:13था, वो पुअर भाषा है। तो बायोक्रोफी को जब ट्रांसलेट
- 59:18करने लगे बड़े शब्द फंस गए, उन शब्दों का अंग्रेजी के अंदर शब्द
- 59:25ही नहीं था तो फँस जाते मैंने कभी कुछ भी देखते जैसा आपको समझाए।
- 59:33थोड़ा सा नहीं दी कि रिश्तेदार मालूम पड़े, वो लगा दो और क्या
- 59:37आवश्यकता है ऐसी शूद्र भाषा? ऐसी पूर्व भाषा एकदम से फातिया ही
- 59:48पढ़ दिया। चाची हो मामी हो।
- 59:53बुआ हो, आंटी, मामा हो फूफड़ हो एक ही बस और बड़ी बात तो ये है।
- 1:00:10साला हो जीजा हो तो एक ही शब्द साली हो, भाभी हो एक ही शब्द।
- 1:00:29सिस्टर इन लॉ इन लॉ का यानी भातिया काटने वाली बात मैं
- 1:00:46बीमारियों के नाम बढ़ रहा था मेडिकल में शब्द आगा निमोनिया।
- 1:00:54तो मैंने जैसे लिखा था वैसे बोल दिया जोड़ के जैसे हम हिंदी में
- 1:00:58बोलते है चर है चर पे ले पल पी लगता है पे मैंने कहा पी
- 1:01:10न्युमिनिया। कहते नहीं न्यूमोनिया मैंने कहा
- 1:01:17ये पी लगा है पहले न्यूमोनिया क्यों बोलूं?
- 1:01:21पी न्यूमोनिया बोलेंगे कहते नहीं न्यूमोनिया ऐसे ही बोल रहे है
- 1:01:27सिद्धांत है हमारा, मैंने कहा सिद्धांत है क्या?
- 1:01:33ये पी लगी ये कोई शब्द नहीं है, आवाज नहीं देता, ये कहता नहीं,
- 1:01:40हमारे यहाँ आवाज नहीं देता तो मैंने कहा फिर पी का कोई काम भी
- 1:01:44नहीं भाई पीस प्रेसेंट यार। इट शुड बी एग्ज़िट थ्रोन आवे हैक
- 1:01:56दो इसको पी के बिना भी तो निमोनिया बोला जाएगा और पी के साथ
- 1:02:04भी निमोनिया बोला जाएगा। फिर पी।
- 1:02:06यहाँ क्या कर रही है? उसके पास से कोई जवाब नहीं था।
- 1:02:13अंग्रेजी में पड़ा रहा। हमारे सभी लेक्चर्स अंग्रेजी में
- 1:02:16थे। उसे समझ नहीं आया कि बात तो ठीक
- 1:02:20है अगर पी हटा भी दी जाएगी तो बात तो निमोनिया की बिमारी वही बनेगी
- 1:02:26ना? ऐसा है तुम्हारे अंग्रेजी का
- 1:02:30हिसाब ये ठीक है अंग्रेजी वर्ल्ड लेवल की सारे वर्ड में बोले जाते
- 1:02:38हैं सब गधे हो तो गधे ही होना पड़ेगा क्योंकि गधे की भाषा गधे
- 1:02:43ही समझेगा। जबकि परफेक्ट भाषा अगर कोई है
- 1:02:52भाषा वैसे ही परफेक्ट कोई भी नहीं।
- 1:02:54भाषा कोई भी परफेक्ट नहीं होती तो ऐक्युरेसी हम कह सकते हैं
- 1:03:00परफेक्शन इन ऐक्युरेसी तो वह हिंदी ही नहीं जाएगी हिंदी के
- 1:03:05ऊपर। क्या और भी बड़ी वर्णमालाएं हैं?
- 1:03:12लेकिन हिंदी से ही जन्मी हुई है क्रीब क्रीब संस्कृत जन्मदाता है,
- 1:03:24हम प्रसंग पे आ जाये। तो हम थोड़ी सी बात को रिपीट कर
- 1:03:31लें क्योंकि वीडियो लम्बी बहुत होती है, हमारे शब्द आता है 100
- 1:03:37हाथों से इकट्ठा कर बल को जोड़ कमाल और 1000 हाथों से बांटता है।
- 1:03:45ये शब्द भूल गए हमने 100 हाथों के बजाय 1000 हाथों से इकट्ठा किया
- 1:03:52है और हमारे ऋषियों ने कहा था 100 हाथों से इकट्ठा कर 1000 हाथों से
- 1:04:01बांट। हम पार्टनर भूल गए, नानक का एक
- 1:04:10शब्द भूल गए, वंड छको और एक शब्द के चूक जाने से सब चूक जाता है।
- 1:04:22एक साध है, सब सिद्ध है, एक को साध लिया तो सब साध जाता है,
- 1:04:30इकट्ठा करो। परमात्मा ने यह सृष्टि भोगने के
- 1:04:36लिए बनाई। इकट्ठा करो, लेकिन जितना तुमने
- 1:04:42इकट्ठा किया भोग पाओगे नहीं उतना इकट्ठा करो जितना भोग सकते हो।
- 1:04:53जीतने बड़े बड़े संत हुए। जितना भोग सत्य थे उतना इकट्ठा
- 1:04:59किया बिशर्ते का भोग राज्य से घराने में इकट्ठे ना हो जन्मे ना
- 1:05:06हो 24 के चूक तीर्थंकर जैनियों के राजा।
- 1:05:18राजपाट छोड़कर वनों में निकल गए। संकटों का सामना करते हुए वही
- 1:05:29सूत्र संकट हित में अपने अन्तश में लेके जाएगा।
- 1:05:37तुम संकट को तो लवे नहीं, तुम इन सुविधाओं को जोड़तें हो, संकटों
- 1:05:46को इग्नोर करते हो, भाग जाओ, यहाँ से संकटों को कहते हो, संकट न
- 1:05:52इसका प्रयास करते हो। इसलिए बुद्धू के बुधू रह जाते 24
- 1:06:03के 24 तीर्थ होकर राजा हुए, महावीर भी राजा थे।
- 1:06:11वो जानते थे इकट्ठा करो। भोगने के लिए कहा।
- 1:06:17100 हाथों से इकट्ठा करो बोगो बच जाएगा कुछ पर उसे 1000 हाथों से
- 1:06:24बात ये भूल गए हम बाबा नानक की एक बात भूल गए इकट्ठा करो।
- 1:06:34इसलिए बाबा नारायण ने कहा जितना कमाओ शुद्ध मुनाफ़े का 10% दान कर
- 1:06:40दो 90 तुम्हारे पास से गए 10 थे दान करो इस्लाम ने कहा देह
- 1:06:51दुनिया। 70।
- 1:06:53आख़िर जो तुम दान करोगे उसका 10 गुणा तुम्हें इस धरती पर मिल
- 1:07:03जाएगा, ये बात लालच की है, मैं समझता हूँ।
- 1:07:11तुम से अगर धन छुड़ाना हो तो उसके लिए लालच देना पड़ता है।
- 1:07:16यह छोड़ दो स्वर्ग में तुम्हें सिंघाक्षण मिलेंगे सोने के तो
- 1:07:23लालच देना पड़ता है तुम्हें तुम्हें छुड़ाने के लिए क्या कोई?
- 1:07:29₹10 तुम छोड़ दोगे तो 10 गुना तो यही मिल जाएंगे 70 गुना आखिर में
- 1:07:36मिल जाएंगे। तुम इस लोभ के कारण छोड़ पाते हो?
- 1:07:41ये नहीं समझ पाते कि संतों का मंतव्य क्या है?
- 1:07:45संत कहते छोड़ना सीखो। यहाँ से शुरुआत करोगे?
- 1:07:51धन को बड़े आसानी से छूट सकते हो लेकिन वो भी कहाँ छोड़ते हो वो भी
- 1:07:55लोभ दिखाना पड़ता है कि 10 दान कर दो इस दुनिया में तुम्हें 10 गुना
- 1:08:03मिल जाएंगे। 10 के 100 मिल जाएंगे 70 आखिर।
- 1:08:07और 700 मिल जाएंगे। तो अगले जन्म में ये लोग दिखा के
- 1:08:14तुम सीतान कराना पड़ता है। जब की बात ऐसा नहीं था, ऐसा कोई
- 1:08:18हिसाब किताब नहीं है। बात तो ये है कि तुम्हें छोड़ने
- 1:08:23की आदत पड़ जाएगी। बड़े समझदार लोग हैं, तुम्हारी
- 1:08:28जड़ पे वार करते हैं, तो मैकाले ने यही चीज़ छीन ली।
- 1:08:33हमसे मैकाले ने हमसे हमारी सभ्यता छीन ली है।
- 1:08:45गुरुकुल छीन ली है कॉनवेंट क्या करोगे तुम कॉन्वेंट में पढ़ोगे?
- 1:08:54वैज्ञानिक बन जाओगे तुम बाहर की दुनिया को खोजोगे, मेरी बात को
- 1:09:02ध्यान से समझ लेना कितना भी खोज लो।
- 1:09:08सुविधाएं जुटा लोगे? वातावरण को अपने अनुकूल कर लोगे,
- 1:09:16लेकिन एक पीढ़ी अनुकूल कर लेगी। आने वाली पीढ़ियां भुगतेगी।
- 1:09:21ये तुम्हारे आज एयर कंडीशनर है, जितनी गर्म बना देंगे।
- 1:09:26इस प्रकृति को तुम्हें पता नहीं विस्फोट हो जाएगा।
- 1:09:33वो ज्यादा समझदार थे, हमारे और खे के अगर प्रकृति से कोई भी खेलवाड़
- 1:09:41किया तो प्रकृति उसका दंड देगी हमें।
- 1:09:46मूर्ख नहीं थे। वो कहते हैं, इमेन टी को बढ़ाओ
- 1:09:51अभी कल मेरे पास प्रश्न आ गया, अगर मच्छर काट लिया फिर क्या करे?
- 1:09:55तो मैंने कहा अपनी इमेन टी को बढ़ाओ और क्या करे, इमेनिटी को
- 1:10:04बढ़ाओ। क्योंकि तुम्हारे भीतर भी शक्ति
- 1:10:07है लड़ने की तुम मच्छरों को क्यों मारते हो?
- 1:10:12इमेनिटी को क्यों नहीं बढ़ाते? लेकिन अंग्रेजी सभ्यता ने हमने
- 1:10:17यही सिखाया है। बाहर की चीजों को खत्म कर दो
- 1:10:20सर्कमस्टैंस को खत्म कर दो सर्कमस्टैंस बदल लो बस।
- 1:10:25आखिर शब्द बोल के मैं विश्राम लूँगा क्योंकि फिर वीडियो लंबी
- 1:10:32बहुत हो जाती है, आपसे सुनी नहीं जाती।
- 1:10:39अंग्रेजी सभ्यता कहती है, सर्कमस्टैंसेस को बदल दो समाज को।
- 1:10:49बाहर के वातावरण सब प्रभाव को बदलते हैं।
- 1:10:58हमारे संत कहते हैं ज़रा भी मत छिड़ो।
- 1:11:03बाहर के सर्कमस्टैंस को ज़रा भी मत छोड़ो किसको बदलो सर्कमस्टैंस
- 1:11:13को वैसे ही बने रहने दो वृत्ती को बदलो एक्सेप्ट करो।
- 1:11:23जो है जैसा है कब तक बदलोगे? तुम किस किस को बदलोगे?
- 1:11:30तुम बदलते बदलते थक जाओगे यार तुम्हारी उम्र छोटी सी है बदलते
- 1:11:37बदलते तुम खत्म हो जाओगे। कुछ न बदल पाओगे, संत कहता है जब
- 1:11:48तक यह दुनिया में तुम्हारा जीवन है, तुम विश्राम कब करोगे, तुम व
- 1:11:57भीतर के आनंद का हो, जो तुम्हें मिला है।
- 1:12:00जन्मजात। वो रस पियोगे कब क्या ऐसा है के
- 1:12:05सोने ही आये थे, रस ही नहीं आये थे और सोने ही चले जाओगे और वो
- 1:12:11आनंद का रस वैसे का वैसा ही पड़ा रहेगा।
- 1:12:17कितने जन्म बीते तुम्हें? पोस्टपोन करते करते एक जन्म तुम
- 1:12:28उसके लेखे नहीं लगा सकते एक जन्म तुम उसके लेखे लगा दो एक जन्म भी
- 1:12:37नहीं तुम ऐसा करो। 2 घंटे के लिए तुम उसके हो के रह
- 1:12:42जाओ पर स्थितियों को मत बदलो मानव स्थितियों को बदलो, परिस्थितियों
- 1:12:54को सर्कमस्टैंस को मत बदलो उनको वैसा ही।
- 1:12:59मनोस्थितियां को बदलो मनोस्थिति को क्या बदलो एक्सेप्ट विथ फुल
- 1:13:09हार्ट विथ दी इन्नर कोर ऑफ युअर हार्ट उसे स्वीकार कर लो, जो भी
- 1:13:17कुछ करता है। हमारा कुछ ज्यादा बिगड़ने को है
- 1:13:24भी नहीं और देखा जाए तो तुम्हारा कुछ है भी नहीं।
- 1:13:30ज्यादा बिगड़ेगा का खाक जब तुम्हारा है ये अगर गहरे से
- 1:13:36सोचोगे। तो जब तुम यहाँ आए थे, दो तीन
- 1:13:41किलो के थे और जब तुम माता के गर्भ में प्रवेश किये तो देखते भी
- 1:13:46ना एक स्वर्म था एक अंडर में यहीं से दुनिया चली तुम्हारी माता के
- 1:13:55गर्भ में तुम बड़े पड़े दो तीन किलो के हो गए।
- 1:13:58बाहर आ गए। बढ़ते ही चले गए, आज दो क्विंटल
- 1:14:05के हो गए, डेढ़ क्विंटल के हो गए, एक क्विंटल के हो गए ये तुमने
- 1:14:11कमाया खा के पी के जो तुमने कमाया।
- 1:14:18बनाया तुमने कुछ नहीं लेके क्या माता के गर्भ में जब प्रवेश किया
- 1:14:26तुम कितने सिर्फ एक धर्म थे, एक अंडे थे, बिलकुल वो जो दिखते नहीं
- 1:14:36थे। अनविज़िबल बढ़ते चले गए।
- 1:14:42यहीं से लेकर माता के गर्भ में फिर बड़े हुए बाहर आते पड़े साथ
- 1:14:52कर लाए थे। और फिर छोड़ो यहाँ कमाया तुमने
- 1:15:00क्यों कमाया उनमें से सात क्या ले जाओगे सात क्या ले के आए माता के
- 1:15:09गर्भ में जब तुम गए वह, वो भी तुम्हारा नहीं, वो भी तुम्हारे
- 1:15:13बाप और तुम्हारी माता के। दोनों के अण्डाणु और वीराणु
- 1:15:19सुक्रणु दोनों मिले तो तुम बने तुम्हारे इसमें क्या है कभी सोचा
- 1:15:26नहीं तुम्हारे इसमें कुछ है स्पर्म तुम्हारे बाप से।
- 1:15:34अंडाणु तुम्हारी माता से आये और आगे से उनके भी स्पर्म और अंडाणु
- 1:15:42कहीं और से आये। फिर तुम्हारा कखा के प्रकृति
- 1:15:49तुम्हें ची तो सब दखाती है, आँखें भी हैं।
- 1:15:54लेकिन बस तुम्हारे मूड की बातों में तुम और जाते हो तुम्हारे यहाँ
- 1:15:59पर झुंझुनूं है झुंझुनूं बजाते रहो उसे कुछ नहीं है तुम्हारा
- 1:16:06यहाँ माता के गर्भ में आए तो इतने इनविजिबल थे और वो भी आए कहाँ से?
- 1:16:12आगे आगे? इसलिए हम अपनी पीढ़ियों का धनवाद
- 1:16:16देते हैं क्योंकि उनके अंडाणु और उनके शुक्राणु से हम आए तुम्हारे
- 1:16:24यहाँ क्या है? ज़रा सोचोगे तो कुछ नहीं पाओ और
- 1:16:29फिर जो तुमने जहाँ कमाया इकट्ठा किया वो कमाए।
- 1:16:34मेहल अटरियां बनाई 1000 चीजें बनाई, लाखों द्रव्य बनाई मौत
- 1:16:44तुम्हें बता देती है तुम्हारा क्या है तुम धड़म से घर जाते हो
- 1:16:50और तुम्हारा क्या है बताओ ज़रा। उस वक्त पूछ लेना लेकिन काश तुम
- 1:16:57बहुत जब तुम घृ होते हो इतना क्रोधी व्यक्ति कि आँखों से
- 1:17:03घोरोगे तो वो कहेगा अरे तुमने घोर कैसे लिया?
- 1:17:0756 इंचे हुए थोड़ा जड़म से घर जाता है।
- 1:17:13लकड़ियों में पड़ा होता है तुम आग लगा दे तो ज़रा भी नहीं बोल वो ही
- 1:17:19जो कल को कह रहा था, ऐसे कैसे घूम रहे हैं?
- 1:17:24अरे देखा नहीं हमारी शादी किसने? वो ही धर्म से डर पड़ता है, आग
- 1:17:31लगा देते हो, कुछ नहीं बोलता, तुम चाहे छूटे मारो, कुछ नहीं कहेगा।
- 1:17:37थूक दो कुछ नहीं कहेगा, लेकिन जिंदा के ऊपर थूक रहे हैं, वो तो
- 1:17:41कोई बुद्धि ही सहन सकते हैं। ओके बुध नहीं, वो भीतर के प्राण
- 1:17:47देख लिए। उनके ऊपर थूकेंगे तो वो जायेंगे
- 1:17:52के माटी पर थूक दिया मैं तो फिर भी अनछुवा रह गया।
- 1:18:00यही फर्क है यहीं तक पहुंचना है। बल इकट्ठा करो, कुछ भी करो पाती,
- 1:18:07इकट्ठी करो गद्दी इकट्ठी करो दो बातें मैंने समझाई आज लेकिन पैरलल
- 1:18:16बनाए रखो, अपने आप को शक्ति संतुलन रखो, शक्ति भी कमाओ।
- 1:18:22संतुलन के लिए रहम भी उतना ही होना चाहिए।
- 1:18:26जूं जूं शक्ति बढ़े। क्यों तू रहम भी बढ़े फिर तुम्हें
- 1:18:32कभी अहंकार नहीं आएगा, फिर तुम सत्य को सत्य की तरफ प्रकट भी
- 1:18:39करोगे, अनुभव भी करोगे। उसको जिंदगी में उतार भी दोगे,
- 1:18:47अपने स्वभाव में भी तुम्हारी आएगा, तुम्हारी क्रिया में भी
- 1:18:50आएगा शक्ति के साथ साथ तुम भढ़ाव अपने रहें।
- 1:19:03और ध्यान रखो दूसरा शब्द मैंने बोला ये ऐसा ही नहीं कृष्ण कहते
- 1:19:11कि तुम क्या लेके आए थे? ये ठीक सच है।
- 1:19:14बात मैंने तुम्हें वैज्ञानिक के हिसाब से समझा दिया।
- 1:19:19लेकिन कृष्ण तुम्हें सीधा सीधा संदेश दे देते हैं।
- 1:19:22राष्ट्र स्वरूप तुम यहाँ कुछ नहीं ले के आये और तुम यहाँ कुछ नहीं
- 1:19:27ले के जाओगे तुम्हारा कुछ है नहीं बीच में थोड़े से साल की लीला है
- 1:19:35उसमें से आधा जीवन तुम सो लेते हो।
- 1:19:39और बाकी आधा जीवन तुम अगर ठीक से गुजारो आनंद को पीने में इन
- 1:19:46मूर्खों के पीछे मत रखो ये अपनी देह को दिखाने के लिए आएँगे, कोई
- 1:19:53राजनीतिक बन के आएगा, कोई धार्मिक बन के आएगा।
- 1:19:58ये तुम्हे रात को 1:30 बजे उठाएंगे, लेकिन उठना मत ये नींद
- 1:20:03बड़े भाग्य से मिलती है मेरे पास रोज़ आते हैं इन सौमनियों के पीछे
- 1:20:09बाबा नींद नहीं आती, मैंने कहा किस दुष्ट की नजर रखे?
- 1:20:16कहते किसी बाबा को देखने जाते थे। रात को 1:30 बजे ऐसे संस्कार
- 1:20:20पड़े, अभिनंदन तुम या तो फिल्मों में वक्त घूमा देते हो या बापों
- 1:20:29को देखना वक्त गुवा देते हो। इन बाबाओं न तुम्हें सवाई भ्रमों
- 1:20:35की ओर दिया क्या है? ये क्यों अपनी बॉडी को दिखाती है?
- 1:20:41अपने शरीर को दिखाती क्यों है ये समझ इन्हें कहने तुम तो समझ जाओ,
- 1:20:51ये तो मूड है इन्हें मूड बने रहने का।
- 1:20:55इनकी हालत पर तरस आना चाहिए। तुम्हें इनको तुम ईर्ष्या के भाव
- 1:21:04से मत देखो की ऐसा हम भी हो जाए, तुम बहुत दुखी हो जाओगे, तुमने
- 1:21:13इनका अंतर नहीं देखा है, बहुत दुखी हूँ।
- 1:21:16तुमने सिर्फ इनके शब्द सुने पर कृष्ण एक बात कहते हैं, बस ये बात
- 1:21:22कह के मैं खत्म कर रहा हूँ। कृष्ण कहते हैं शब्दों को मत
- 1:21:26देखो, ये व्यक्ति कहता क्या है, इनके लक्षणों को देखो क्या जो?
- 1:21:35ये कर रहे हैं सर्कस नहीं कर रहे हैं।
- 1:21:38जो ये बोल रहे हैं वो ठीक बोल रहे हैं ना तो जो कर रहे हैं वो ठीक
- 1:21:47है ना? जो बोल रहे हैं वो ठीक ये सर्कस
- 1:21:51कर रहे हैं तो मैं अपना शरीर दिखा रही हूँ।
- 1:21:56पंचभोतक तथ्यों से बना हुआ शरीर और यह 1 दिन कर जाएगा आज है कल को
- 1:22:02नहीं और ये जो तुम्हें सिखाते हैं राधे राधे राम राम कुछ भी करते
- 1:22:08हैं पांच न यह शब्द शोर? शोर है तुमने पहुंचना है पर मौन
- 1:22:19में और पर मौन में पहुंचने के लिए मौन से शुरू किया जाता है शोर से
- 1:22:26शुरू नहीं किया जा सकता। शोर से शुरू करोगे तो परम शोर में
- 1:22:31पहुँच जाओगे, कोलहल में पहुँच जाओगे, मौन से शुरू करोगे तो परम
- 1:22:37मौन में पहुँच जाओगे। पैंट ऑफ स्टाइलेंस वहाँ इतनी भी
- 1:22:45आवाज़? खटकती है वो आ रहे हैं साँसों
- 1:22:59ज़रा आहिस्ता चला वो आ रहे हैं साँसों ज़रा।
- 1:23:05अहिंसा सर धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ती है।
- 1:23:14जब ऐसा हो जाए मन तुम्हारा सांस की धड़कनों से दिल के धड़कनों से
- 1:23:21भी इबादत में खलल पड़नी शुरू हो जाए।
- 1:23:26तो समझ लेना अच्छे दिन आ गए। शुभ दिन आ गए, सही मार्ग पे तुम
- 1:23:36निकले शांति के ओर तुम्हारे कदम उठने शुरू करें।
- 1:23:43ऐसे ही शोर गुल में गंवा मत देना हीरा जन्म अमोर ये बड़ी मुश्किल
- 1:23:50मिला है। इन बुद्धों ने तो गंवा दिया अब ये
- 1:23:56आगे प्रचार करेंगे आपको बुद्धू बनाने के लिए?
- 1:23:59दूसरा प्रश्न बाद में जुआ दूंगा। दूसरा प्रश्न था इनका बता दूँ?
- 1:24:06जो जो ईसाई लोग हैं आज धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, ये क्यों
- 1:24:13इतने हिंदू परिवर्तित हो रहे हैं? ये मैं बताऊँगा इसका मूल कारण
- 1:24:17बताऊँगा। लेकिन आज इतना ही समझलो।
- 1:24:23के इन मूर्खों के पीछे मत रखो, हम तो डूबे हैं सनम आपका विलय में गए
- 1:24:37धन्यवाद।