Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Apr 25 - 30 से 40 की उम्र में लोग अधिक प्रबुद्ध क्यों होते हैं? क्या है रहस्य? ध्यान गहरा कैसे होगा?
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- 0:01कल्याण अवस्थी, नागपुर से बाबा आपने एक बात मुझसे कही, 30 वर्ष
- 0:18से 40 वर्ष तक या 10 साल? आध्यात्मिकता के लिए बड़े
- 0:28महत्वपूर्ण होते हैं। कृपा करके इस बात को विस्तार से
- 0:40कहने का कष्ट करें। छोटा सा प्रश्न हम पहले उठा ले
- 1:13पूछा है ध्यान की प्रभाषा क्या है?
- 1:19ध्यान कहते किसको हैं? और उसका मापदंड क्या है कि हम
- 1:25ध्यान को उपलब्ध हो गए हैं? नॉन रिएक्टिवनेस जब फलीभूत हो
- 1:41जाती है, पूर्णतया तो समझ लेना। कि ध्यान की अवस्था से विभूत हो
- 1:50गई और उस घड़ी में तुम ऐसी आनंद की अवस्था को प्राप्त हो गए।
- 2:04के बोलना तो दूर, आँखें खोलना भी मुश्किल हो जाएगा।
- 2:13अक्सर एक कहानी मैं भी कहा करता हूँ।
- 2:16शास्त्रों में भी वर्णित है हिमालय की कंदुओं में।
- 2:26चार सादक बैठे थे। दूर दराज से आए हुए कहीं घर
- 2:35गृहस्थी से तंग थे, शोर शराबे से परेशान थे, घर छोड़ कर आ गए।
- 2:43और कहीं रस्ते में चारों व्यक्ति मिल कर आए।
- 2:49फैसला किया कि एक जगह जा कर किसी हिमालय की कंधा में बैठ जाएंगे।
- 2:59खाने पीने का इंतजाम? एक व्यक्ति के जिम में लगेगा कभी
- 3:08कोई जाएगा कभी कोई जाएगा बैठ गए शुरू हो गया एक वर्ष बीत गया।
- 3:32जब बैठे थे तब कुछ ही दिन बाद एक घोड़ा निकला बाहों से घुड़सवार जा
- 3:41रहा था। बड़ी तेजी से एक वर्ष तक सभी चुप
- 3:48रहे। एक वर्ष के बाद एक व्यक्ति बोला
- 3:58घोड़े का रंग काला था और चुप हो गया।
- 4:08एक वर्ष और बीत गया, दूसरे का नहीं।
- 4:17घोड़े का रंग काला नहीं था, घोड़े का रंग लाल था।
- 4:28वर्ष भर फिर पीट गया। तीसरे ने कहा वर्ष भर के बाद न
- 4:38घोड़ा दाल था, न काला था, मिक्स सेशन थी, लाखा सा रंग था।
- 4:51एक वर्ष फिर बीत गया। शोध सा कहने लगा अगर तुमने ऐसा ही
- 5:03बकवास जारी रखनी है तो मैं तो चला।
- 5:12ध्यान क्या है इस प्रसंग से समझने की चेष्टा कर लेना अगर समझ में आ
- 5:20जाये तो वर्ष भर बीत गया पहली प्रतिक्रिया को।
- 5:31दूसरी प्रतिक्रिया को दो वर्ष, तीसरी को तीन और चौथी को चार वर्ष
- 5:37विथ ऐसी ही तुम नॉन रिएक्टिवनेस का अभ्यास करना।
- 5:53अभी पांचवा वाहन नहीं था। अगर पांचवा होता तो वह चुप रहता।
- 6:01कुछ ना बोलता कुछ भी हो जा रहा है आप?
- 6:11त्वरित रूप से उसी वक्त दूसरे वाला व्यक्ति अपनी बात पूरी भी
- 6:18नहीं कर पाता। तुम रिएक्शन देना शुरू कर देते हो
- 6:23और तुम्हें पता नहीं होता वह क्या बोलेंगे?
- 6:26बात आंधी अधूरी होती है। ओर तुम रिएक्शन देना शुरू कर देते
- 6:32हो, जिसमें ध्यान फलित होगा, तुम नॉन रिएक्टिव हो जाओगे, कोई
- 6:47प्रतिक्रिया नहीं दोगे। शांत मोहन आनंद।
- 6:55बहुत से लोग आज जेलों में बंद है, जो प्रबुद्ध होते हैं।
- 7:04किसी एक जगह पे बैठे कोई हादसा हो गया पूछ्ताछ के लिए बुलाया गया।
- 7:12किसी बात का कोई जवाब नहीं दिया। यह तो जासूस है, इसी ने किया
- 7:16होगा। बहुत से व्यक्ति पागल खाने में
- 7:21सड़ रहे हैं। तुम भी कहोगे ये कैसी जिंदगानी।
- 7:32नॉन रिएक्टिवनेस का ऐसा ही प्रभाव होता है।
- 7:38वह बड़े मज़े में है। तुम समझते हो कि वह जेल में है?
- 7:46तुम समीते हो की वह पागल खाने में है, लेकिन वह बड़े मज़े में है
- 7:52किसके भीतर का? तुम क्या जानो तुम सारे दिन बकवास
- 7:58में उलझे रहते हो। तीर्थ यात्राएं कर आते हो, बाज कर
- 8:04आते हो। और समय से हो, के वहाँ से मिल
- 8:10जाएगा नहीं मिलेगा इस लक्षण को पहचान लेना।
- 8:22कोई प्रतिक्रिया जब होनी बंद हो जाए पूर्ण रूपेण तो ध्यान फलीभूत
- 8:29हुआ और उसका लक्षण है कि तुम महा आनंद के रस से सराबोर हो जाओगे।
- 8:36तुम्हे भीतर से ऐसी खुशी प्राप्त होगी।
- 8:39बाहर की कोई चारदवारी। बाहर के कोई जेल, कोई सलाखें, कोई
- 8:47पागल खाना तुम्हें डिस्टर्ब नहीं करेगा।
- 8:55अनोखी परभाषा है, लेकिन ऐसा ही होता है।
- 9:08अब हम दूसरे क्वेश्चन पे आ जाएं। आपने कहा 30 से 40 तक की उम्र
- 9:15बड़ी क्रांतिकारी होती है आध्यात्मिकता के लिए इसमें राज़
- 9:21क्या है? 30 वर्ष से शुरू और 40 वर्ष तक
- 9:35इसे पैमाना मत समझी लेना 246 महीने इधर 246 महीने उधर भी हो
- 9:41सकता है जैसे मैंने कैलकुलेशन। ऋषियों से संतो से महात्माओं से
- 9:53खोजियों से की है मेसी तथ्य के निष्कर्ष से पहुंचा हूँ के इन
- 10:08वर्षों के दौरान शरीर के भीतर और मन के भीतर कुछ ऐसी रिएक्शन्स
- 10:18होती है। जो की अभूतपूर्व होती है और तुम
- 10:28पाओगे जीवन के इन्हीं वर्षों में कोई बहुत आध्यात्मिक रूप से या
- 10:41संसारिक रूप से। या तो तरक्की किया या गिर गया,
- 10:48कुछ ऐसा गठित होता है। इधर कुछ ऐसी रासायनिक प्रक्रियाएं
- 10:55होती हैं। सब कुछ उलटपुलट कर देते हैं।
- 11:06बुध तीसवें वर्ष में घर छोड़ देते हैं।
- 11:13कपिल वस्तु छोड़ देते हैं। करीब करीब महावीर भी इसी उम्र में
- 11:20घर छोड़ देते हैं। 35 वर्ष की उम्र में बुद्ध
- 11:30प्रबुद्ध होते हैं और इस मुकाम तक करीब करीब महावीर भी पहुँच जाते
- 11:40हैं। इसी उम्र में।
- 11:46करीब 40 के आस पास महावीर कैवल को उपलब्ध होते है।
- 11:56जीतने संत आपको मिलेंगे। इसी अवस्था के मिलेंगे।
- 12:03बाबा नानक भी इन्हीं वर्षों में उपलब्ध हुए हैं
- 12:16या बड़ी क्रांतिकारी उम्र होती है तीसवें वर्ष से 40 वर्ष तक।
- 12:27इसमें कुछ ऐसा रासायनिक बदलाव होता है।
- 12:31अस्तित्व की तरफ से यह अस्तित्व बड़ा गहरा है।
- 12:34रहस्यमय खंगाला नहीं जा सकता, समझा नहीं जा सकता क्या होता है?
- 12:47लेकिन कुछ वृहद होता है जो सब उलटपुलट कर देता है।
- 12:53इसलिए आप या तो गिरते हुए इंसान को इसी उम्र में भावुक है।
- 12:58बदल जाता है एक फैसला सब कुछ या उठता हुआ इंसान।
- 13:04इसी उम्र में हो गया। ये 10 वर्ष बड़े क्रांतिकारी होते
- 13:08है मानसिक संरचना शारीरिक संरचना कुछ ऐसे हार्मोन पैदा होना कुछ
- 13:23ऐसी रेंज ब्राह्मण फेंकता है। उन्हें महसूस तो करते हैं, लेकिन
- 13:35वो है क्या यह नहीं पता जा सकते कुछ है।
- 13:54ईरान के दक्षिणी प्रांत में अमोहाजी नाम का एक व्यक्ति रहता
- 13:59था। वह इसी उम्र में करीब करीब 3435
- 14:08की उम्र में प्रबुद्ध हो गया। चुप हो गया, बोलता ना था उससे
- 14:19पहले बला चंगा था, एक जगह पे जा के बैठ गया।
- 14:28उसने गड्ढा खोदा और गड्ढे के बीच में बैठ गया।
- 14:34थोड़े दिन देखते रहे लोग लोगों को तकलीफ होनी शुरू हो जाती है।
- 14:43उसे बुलाते न बोलता हूँ, कहीं से कुछ मिल जाता, खा लेता हूँ।
- 14:54और आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी। वह आमतौर से मांस खाया करता, जैन
- 15:08बनी तो कहेंगे वो कैसे पहुँच गया ये धूम्रपान करता?
- 15:18वह ऐसे ऐसे ही काम करता जो आप घृणित मानोगे उसके बाद वो कभी न
- 15:27आये। जो अपने भीतर नहा लिया उसे बाहर
- 15:41की गंदगी परेशान नहीं करते। हमारे सभी पंथों में गौर पंथ को
- 15:49सबसे ज्यादा सम्मान दिया गया। बड़े बड़े ऋषि मणि और घोरपंथियों
- 15:58को सम्मान देते हैं। वो पता नहीं नहायेंगे कि नहीं
- 16:05नहायेंगे खोपड़ी में शराब पियेंगे, खोपड़ी में खाना खाएंगे।
- 16:14मूर्द की राख से शरीर को मल लेंगे, कभी हँसेंगे, कभी रोएंगे
- 16:29आपको उनकी बातें बड़ी अजीब सी लगेंगी।
- 16:32आप उनको पागल करार दे दोगे? पागल खानों में बंद कर दो क्या?
- 16:39मैंने कहा ऐसे बहुत से लोग पागलखणों में बंद हैं जो आपकी
- 16:45बातों का प्रॉपर जवाब नहीं दे पाया।
- 16:51क्या चीज़ लोग में बंद है? जो आपकी पूछी गई बातों को सही से
- 16:58ही बदला नहीं हो सके, वो किसी और दुनिया में खोए रहते हैं।
- 17:07बस तुम्हें इस दुनिया का पता नहीं होता।
- 17:13तुम्हारी दुनिया से बेखबर और किसी और लोक में भ्रमण करते हैं।
- 17:28इनको सबसे ज्यादा सम्मान दिया गया अघोर को अघोर उनका पता नहीं।
- 17:36नहायेंगे कि नहीं नहायेंगे क्या खाएंगे, क्या पीएंगे?
- 17:41खोपड़ी के भीतर मरी हुई खोपड़ी के भीतर जल भी पीएंगे।
- 17:49खाना भी खाएंगे और श्मशान में बैठेंगे।
- 17:55तुम कहोगे ये भी कैसी जिद कानी है, इससे अच्छा तो न पहुंचते,
- 18:03लेकिन नए पहुंचने में कहाँ सुख है?
- 18:07नए पहुँचकर तो तुम सारी उम्र दुखी रहती हो।
- 18:13और डरते डरते कँपते कँपते बह के मारे, दर्द से युक्त, तकलीफ में
- 18:26बंधन युक्त, तुम प्राण त्याग देते हो, तुम्हें पता ही नहीं चलता।
- 18:34कि जो अघोरी बैठी हैं, श्मशान में उनकी दशा क्या है?
- 18:41इस सिर्फ एक तरीके से पहचान में आते हैं इनका और देखकर और दूसरा
- 18:46कोई तरीका नहीं है। कोई औरा देखने वाला व्यक्ति इनको
- 18:54पहचान लेगा, यह है कहाँ? इनका अस्तित्व विराजमान कहाँ है?
- 19:03ये उस तल पर चले गए हैं जीस तल पर।
- 19:07कोई शोर शराबा नहीं, कोई आवाज नहीं, मस्ती ही मस्ती है, आनंद ही
- 19:15आनंद है, खेल ही खेल है, लेकिन तुम इन्हें समझ नहीं पाओगे।
- 19:2830 से लेकर 40 तक आपके भीतर कुछ ऐसी क्रांति होगी?
- 19:33आध्यात्मिक जीतने लोग भी पहुंचे। यह बड़ी घटनाएँ घटी इसी उम्र में
- 19:42घटी। शंकर आचार्य 33 वर्ष की उम्र में
- 19:46शरीर छोड़ गए। किसी को नहीं पता क्या हुआ अचानक
- 19:56से भीतर जीने का मौसम आप? जीबेशन खत्म और दे छोड़ दिया
- 20:05उन्होंने तुम्हें पता भी नहीं चला, भनक भी न लगे इन 10 वर्षों
- 20:18में बड़ी घटनाएं अद्भुत घटतीं ये 10 वर्ष महा क्रांतिकार्य।
- 20:28इसलिए आध्यात्मिक व्यक्ति जो इस उम्र से गुजर रहे हैं, उनको विशेष
- 20:33ध्यान रखना होगा। भ्रमंड इस उम्र के लोगों पर कुछ
- 20:41ऐसी तरंगे फेंकता है। जो तुम्हें उस स्तर तक पहुंचा
- 20:48सकती है। अचानक से बैरक पे होता है भौंकते
- 20:57भौंकते बुध को सब हो जाता है, शादी हो जाती है पुत्र हो जाता है
- 21:05अचानक से बैरक। इसी उम्र में छोड़ देते हैं घर
- 21:16सभी सांसारिक सुखों का त्याग करके पीपल के पेड़ पर बैठ जाते हैं।
- 21:22भटकते हैं गुरुओं के पास। और करीब इसी उम्र में ज्ञान को
- 21:33उपलब्ध हो जाते है। 80% लोग जो एनलाइटन हुए इसी उम्र
- 21:46के है। करीब करीबी सी उम्रकत है,
- 21:55ब्राह्मण अपनी उर्जाएं फेंकता है, तरंगे फेंकता है, विशेष तरंग है।
- 22:08इस बात का ध्यान रखना इस उम्र में बड़े बदलाव होंगे।
- 22:15आध्यात्मिक क्रांतियां इसी उम्र में होती हैं और वैसे देखा जाए तो
- 22:20क्रांतियां भी इसी उम्र में होती हैं।
- 22:24मैंने इतिहास ज्यादा खंगाला नहीं। लेकिन जब मैं सुनता हूँ तो पता
- 22:32हूँ इसी उम्र में विशेष चमत्कार होते हैं।
- 22:403233 की उम्र में सिकंदर चल देते हैं महान व्यक्ति।
- 22:49जिनके नाम आज भी हैं महत्त्व कार्य इन वर्षों में होते हैं
- 22:58क्योंकि भ्रमण विशिष्ट कारणों को फेंकता है।
- 23:01इस उम्र के व्यक्तियों के ऊपर क्या संबंध है?
- 23:05इसको मैं न बता सकूंगा। कभी आविष्कार होगा अध्यात्म की
- 23:15दुनिया में तो वह व्यक्ति बता पाएगा क्या होता है इतना जानता
- 23:21हूँ कुछ सतरंगें उतरती हैं। उस विराट से जिसे हम ब्राह्मण
- 23:29कहते हैं, अस्तित्व से और इस उम्र के व्यक्तियों पर उतर जाती है।
- 23:39मुझे भी ऐसा हुआ। मैं करीब 34 वर्ष का रहा हूँ काम
- 23:46एक दम से इन रंगों ने घेर लिया एक दम से उतरी ऊपर और ज़रा भी आहट न
- 23:55हुई ज़रा भी खबर न थी मुझे उससे पहले।
- 24:01क्या अगले क्षण ये हो जाएगा? रोज़मर्रा के में जाया करता था।
- 24:05आज कोई नई विशेष बात नहीं थी। उस दिन भी चल जा रहा था उस दिन भी
- 24:12वही रास्ता, वही टॉम, वही धर्मदास की समधी।
- 24:20उधर ही चला था, वो ही रास्ता था रोज़मर्रा का।
- 24:23करीब के वो ही वक्त था लेकिन किन्हीं अज्ञात तरंगों ने खेल
- 24:30लिया क्या होता है ये मत पूछना इतनी बेईमानी मैं नहीं करूँगा।
- 24:40मैं जानता नहीं क्या होता है। मैं ये जानता हूँ कि कुछ होता है।
- 24:45ब्राह्मण इस उम्र में कुछ फेंकता है तो इन विशेष वर्षों का ख्याल
- 24:54रखना। अगर तुम अध्यात्म में उन्नति करना
- 24:58चाहते हो तो? जो भी घटनाएं घटेंगी, इस उम्र में
- 25:02ज्यादा घटेंगे। बस बाकी उम्र में 20% लोग ही
- 25:07पहुंचते हैं। 80% लोग इसी उम्र में पहुँच जाते
- 25:11हैं, जो मिल जाता खा लेता। तम्बाकू पीता है, नहाता ना सारी
- 25:24उम्र ने ही नहाया उसके बाद आफ्टर एनलाइटनमेंट वह नहाया ही नहीं या
- 25:33तो मैं जानकर बड़ी हैरानी हो तुम तो पास से गुजरोगे।
- 25:37नाक बहुत से कोड लगे लोगों ने दयावश वहाँ एक छोटी सी झोपड़ी
- 25:44डालते हैं, लेकिन उसने नहीं कहा कि झोपड़ी डालते हो।
- 25:52जीस माहौल में आप बैठते हो आप जानकर हैरान होते हो।
- 25:57के -30 के अंदर भी लोग होते हैं, जीतते हैं, शरीर उसी तरह की
- 26:04व्यवस्था कर लेता है जैसे माहौल में वो रहता है।
- 26:09यह शरीर की अद्भुत शक्ति है। तुम अगर।
- 26:16वातानमूलित एसी रूम्स में रहना शुरू कर दोगे तो तुम बड़े कोमल हो
- 26:22जाओगे ज़रा सी गर्म हवाएं लगी तुम बीमार हो जाओगे ज़रा सी ठंडी
- 26:30हवाएं लगी तुम बीमार हो जाओगे शरीर।
- 26:35खुद सुरक्षित करता है। अपने आपको अपने भीतर ऐसी
- 26:38प्रक्रिया परमात्मा की तरफ से है तो हमने दवाई खोज ली।
- 26:45लोग मुँह से पूछ लेते हैं बाबा जब ये दवाई नहीं खोजी गई थी तो लोग
- 26:50कैसे जीते थे? मैंने कहा मज़े से जीते थे।
- 26:54को की। परमात्मा ने यह संरचना के भीतर सब
- 27:00कुछ कर दिया है। ये हमारे टोन सील्स बाहरी तंतुओं
- 27:08से बाहरी बैक्टीरिया से हमें बचाते हैं।
- 27:12शरीर के भीतर की व्यवस्था कुछ ऐसी है कि वह रोग के कीटाणु को अपने
- 27:16आप ही लड़ लेती है। भीतर महा युद्ध हर वक्त होता रहता
- 27:20है। खुद बचाता है शरीर अपने आप को तुम
- 27:27कमजोर होने शुरू हो। जब तुमने खुद अपना फिकर करना शुरू
- 27:34कर दिया, जब तक तुमने परमात्मा पे छोड़ा तो परमात्मा की व्यवस्था
- 27:41तुम्हें बचा रही थी। व्यक्ति कमजोर से कमजोर होता चला
- 27:46गया जैसे जैसे उसने वस्त्र ही जात किया।
- 27:52सर्दी गर्मी से प्रभावित होता है। पशु पक्षी आज भी बिना वस्त्रों के
- 27:59घूमते हैं। कोई भूत नहीं डालता।
- 28:05तुम तो चार चार मोज़े पहन लेते हो?
- 28:13तुम तो गर्म कपड़े पहरे नीचे से, फिर ऊपर से ऊपर से कोट फिर ओवर
- 28:19कोट सर्दी फिर भी नहीं रूकती सहारा लेना पड़ता है का क्या हुआ
- 28:29कभी सोचा कभी ऐसा भी ज़माना था? जब कुछ भी नहीं था ना शरीर डाँपने
- 28:37को पर व्यक्ति कैसे जीता था? शरीर अपनी सुरक्षा खुद कर लेता
- 28:50है, यह परमात्मा ने व्यवस्था की है।
- 28:56लेकिन हम कमजोर होते चले जाएंगे और रोज़ कमजोर होते चले जाएंगे,
- 29:03क्योंकि हमने अपनी रक्षा करनी स्वयं शुरू कर दी।
- 29:07यही अध्यात्म का अहम फार्मूला है। जब हम।
- 29:13अपने नाव की पतवार को अपने हाथ में रख लेते हैं, तो वह पतवार को
- 29:20छोड़ देता है, हम दुखी हो जाते हैं, जब पतवार हम उसके हाथ में दे
- 29:28देते हैं। तो निर्बोध हो जाते हैं और सुखी
- 29:32हो जाते हैं, तो एक तला आता है जब हम वहाँ पहुँच जाते हैं, यहाँ कोई
- 29:43प्रतिक्रिया नहीं होती है। शांति ही शांति है।
- 29:45आनंद ही आनंद जी कुछ उदाहरण मैंने ऐसे दी।
- 29:51आज भी लोग हैं बस हम रमाते हैं भगवान शंकर, इसका उदाहरण शमशान
- 30:05में निवास है उनका बागम भर पहनते हैं बाघ की खाल।
- 30:16ये क्या इशारा है? जेटा झूठ हैं, किसी नाई की दुकान
- 30:27पे नहीं जाते, बाल छंटवाने के लिए प्रकृति जो कर रही है, ठीक कर रही
- 30:33है और त्रिशूल हाथ में ये सांकेतिक है।
- 30:40तीन गुणों के अनुसार चलता है, उनका शरीर चलने देते हैं, हम
- 30:45त्रिष हो, प्रकृति अपना काम करती है और ये डमरो बजाते हैं।
- 30:54ये नाचते हैं, तांडव करते हैं, नृत्य करते हैं।
- 30:58कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो इस सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स से हम
- 31:05इनको भूल गए। हम इनको चुक गए।
- 31:11वह व्यक्ति इस उम्र में करीब करीब पहुंचा।
- 31:17और उसने अचानक जो मिल गया, खा लिया, तम्बाकू पीता था, पीता रहा
- 31:29अब तुम ये ना पूछना तम्बाकू पीने वाला भी उपलब्ध हो जाता है।
- 31:34बिल्कुल हो जाता है क्या तकलीफ? मैं किसी को नहीं रोकता, ये बूटी
- 31:45चढ़ाव देते हैं। भगवान शंकर के बारे में अक्सर या
- 31:48प्रसिद्ध है घोटा भांग धतुरा। सब पीस के खा जाते हैं और तुम
- 32:02उनकी नकल करते हो, लेकिन जीस तल पे वो हैं उस तल पर नहीं पहुंचते
- 32:06तुम बस तुम सिर्फ नकल करते हो यहीं चूक हो जाती है।
- 32:16तुम संत पुरुषों की नकल करते हो, उस तल को नहीं छूते, यहाँ चूक हो
- 32:21जाती है तुमसे वह उस तल पर पहुंचे होते हैं तो उन्हें बाहर का हिसाब
- 32:27किताब मालूम ही नहीं होता, लेकिन तुम्हें सब मालूम होता है बाहर
- 32:32का। तुम तो क्रीज़ तक देख लेते हो,
- 32:38पैंट शर्ट की कमीज़ की, क्रीज़ बनी की नहीं बनी, ये बेल्ट ठीक से
- 32:45लगाई नहीं लगाई, ये बाद सफे काले ये कैसे समारोह?
- 32:53जो जच्चू लेकिन ये भीतर से जंच गए हैं, भीतर ठहर गए हैं, बाहर से
- 33:04ठहरने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब दिखावा करने की कोई जरूरत ना
- 33:08रहे। हम राजी हैं, हम इतनी सृजना करने
- 33:18वाला विराट तुम क्या समझते हो? जो सूरज को चाँद सितारों को अपनी
- 33:26गतिशील उसी परिभ्रमण में चलाए रखता है।
- 33:30तुम्हारे छोटे से शरीर को नहीं चला पाएगा, बिल्कुल चलाएगा।
- 33:38लेकिन आदमी के पास आज तर्क बचा है और तर्क ने आदमी की खुशी छीन ली।
- 33:50तर्क ने आदमी का आनंद छीन लिया। बूढ़ा रोता है बचपन को क्योंकि जब
- 34:03से बुढ़ापा आया जब से जवानी आई उसने ठहाका नहीं मारा।
- 34:08मैं कभी हँसा नहीं, बचपन था। तो खूब मज़े लेता है, खूब तालियाँ
- 34:16बजा बजा के हँसता था, नाचता था, कूदता था, फुदकता था, हँसता था
- 34:23ठंके मार मार के और भीतर से हँसता था नकली बनावटी, ऐसे नहीं होती थी
- 34:29उसके। जो जो तुम बूढ़े होते हो, तू तो
- 34:35तुम तार के कहो दे और तर्क दुख की जननी है किसी बात का तर्क तुम कर
- 34:47सकते हो कौन रोकता है। तर्क तो दो धारु तलवार इधर चलेगी
- 34:57तो भी काटेगी, उधर चलेगी तो भी काटेगी तर्क से आनंद पानी की
- 35:06चेष्टा मत करना, यह बुद्धि की कोशिशों हैं।
- 35:10समर्पण से आनंद मिल ही जाता है। वह कोशिश मत करना।
- 35:18तर्क से परमात्मा को पाने की तुम्हारी चेष्टा व्यर्थ सिद्ध
- 35:22होती है। आखिर में तुम पूरे हो जाते हो,
- 35:28आनंद नहीं मिलता, खुशी ही नहीं मिलती आनंद तो छोड़ो।
- 35:34हर चीज़ तुम्हें बे स्वाद लगती है जो बच्चा मिर्च नहीं खा सकता तुम
- 35:45उस मिर्चों को ऊपर से डालते हो तुमने देखा बच्चा एक तरफ कर देगा
- 35:52नहीं मिर्च नहीं। बड़ा प्राकृतिक है नेचुरल वे
- 35:59लेकिन जो जो तुम बूढ़े हो गए तुम तुम मिर्च मसाले डालते ही चले
- 36:06जाते हो, तुम्हारे टेस्ट बड्स मांगते हैं और मांगते मांगते।
- 36:13उनकी मांग बढ़ जाती है। यही वासनाओं का है।
- 36:18वासनाएं कभी शांति नहीं होती, वर्ण दुगुनी हो जाती है, बढ़ती
- 36:22जाती है तो वह व्यक्ति कभी ना है। आस पास के लोग गुज जाते हैं।
- 36:33कुछ फिकरमंद लोग थे उसको कपड़ा दिए जाते, कोई फिकरमंद लोग थे
- 36:43उसको खाना दिए जाते, कुछ लोग नाक भुस गोड़ के गुजर जाते तरह तरह की
- 36:51दुनिया है। भांति भांति के लोग हैं।
- 36:54परमात्मा की सृष्टि बड़ी अजीबो गरीब है।
- 37:02यह सब तरह के लोग हैं। यहाँ ऐसे भी लोग हैं जो कपिल
- 37:11वस्तु को लात मार के। पीपल की छैया में बैठ जाते हैं।
- 37:19यहाँ ऐसे भी लोग हैं जो पीपल की छैया को छोड़कर महलों का और
- 37:29गद्दियों का स्वाद चखने के लिए निकल आते हैं।
- 37:34दुनिया बड़ी टेढ़ी मेढ़ी है इसलिए तुम अपना रास्ता खोदी चुनना बुद्ध
- 37:41ने यही बात कही किसी की तरफ़ मत देखना किसी को आइकॉन मत बनाना अप
- 37:47दीपो भावा अपना रास्ता तुम खुद खोजना।
- 37:51अपने दीपक पथ प्रदर्शक मार्गदर्शक तुम खुद बनना चिल्ला तो में ही
- 38:02पड़ेगा और ध्यान रखना बाहर नहीं मिलेगा ना मक्का मिलेगा, ना तीर्थ
- 38:09मिलेगा। न नहाने से मिलेगा नहतियाँ
- 38:17तोतियाँ जे रबम मिलता तमिलता डडवा मछिया मछि 24 घंटे पानी में रहती
- 38:26है, फिर तो वो एनलाइटन हो जाए। ना रब मिलता तीर्थ, मक्के तुम
- 38:46तीर्थों में जाते हो मक्कु में जाते हो वहाँ नहीं मिलता किस खुशी
- 38:53की तुम तलाश कर रहे हो। वो बाहर है ही नहीं बाहर तो
- 39:01कृत्रिम चीजें तुमने बना ली और तुम भटक गए बस इतना सा काम किया
- 39:07है मनुष्य के बुद्दीन ने जहाँ था वहाँ ज्ञान।
- 39:13जहाँ था वहाँ खो जा नहीं, और वो तो तुम्हारे भीतर है उसको बाहर
- 39:20ढूंढना बेकार, सच पूछो तो उसको ढूंढना ही बेकार, इसलिए मैं रोज़
- 39:27तुम्हें कहता हूँ, तुम कहीं न ढूंढो।
- 39:31कहीं न खोजो, कहीं न जाओ, बस ठहर जाओ, ठहर जाओ और धीरे धीरे तुम
- 39:38वहाँ पहुँच जाओगे जो तुम्हारा गंतव्य है आनंद से भरपूर है,
- 39:45खुशहाली ही खुशहाली है चारों तरफ़।
- 39:51आनंद की हवाएं बहती हैं, नशीली हवाएं बहती हैं, लेकिन तुम
- 40:02तुम्हें तर्क चलाता है खोजते हो आनंद को तर्क के ऊपर सवार हो जाते
- 40:11हो। और जो तर्क के ऊपर सवार हुआ वो
- 40:16आनंद को न खोल पाएगा। मेरे इन शब्दों को ध्यान से सुन
- 40:22लेना, तर्क की तीखी तलवार को एक तरफ़ रख देना।
- 40:31तर्क तुम्हें कहीं नहीं पहुँच जायेगा, उसी चीज़ का काट करेगा और
- 40:38उसी चीज़ को बनाएगा। दोनों संभावनाओं हैं दो धारु
- 40:45तलवार होती है, इधर भी उधर भी जिधर जायेगा उधर काटेगा।
- 40:54और वह काँटा छाटी से नहीं मिलता, वह तो गहरे में उतरने से मिलता है
- 41:03इसलिए उसको कहीं मत खोजना, बस खोज को बंद कर देना यही सूत्र है।
- 41:12संतो ने बोला तो बहुत लेकिन तुम ठहर कहाँ पर तुम और दौड़े संत
- 41:26बोले ठहर जाओ, तुम और तेज दौड़े। तुमने मैराथन का दावा होने की
- 41:31जैसी कसम कर ली, वह जहाँ है वहाँ मिलेगा और वह तुम्हारी भी तरह है।
- 41:48तुमसे खोजना तो मात्र ठहर जाना मैं बहुत बार तुमसे कहा एक यह
- 41:56सूत्र अगर तुमने हृदय में प्रवेश कर लिया तो किसी संत को बोलने की
- 42:03जरूरत नहीं पड़ेगी। कोई तीर्थ यात्रा नहीं, कोई मक्का
- 42:09मदीना नहीं, कोई हाज्य यात्रा नहीं कोई गंगा शरण बस ठहरना है
- 42:21जहाँ है वहीं ठहर जाना है। और तुम पाओगे जिसे ढूंढ रहे थे
- 42:30जन्मो जन्मो से वह मिल गया मिल ही जाता है, जो ठहर जाता है।
- 42:42जो दौड़ता रहता है, उसे कभी नहीं मिलता।
- 42:48ठहरने से ही साफ होती हैं चीजें ठहरने से ही तुम अपने भीतर उतरना
- 42:54शुरू होते हो। लोगों ने उसे पागल करार दे दिया
- 43:01लोगों ने उसे। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने
- 43:06उसका नाम दर्ज कर दिया। सबसे गंदा व्यक्ति जो करीब 60
- 43:11वर्ष तक का नया है और बड़े मज़े की बात है।
- 43:162022 में 94 वर्ष की आयु में उसका निधन हो गया और निधन भी कैसे हुआ?
- 43:22बड़ी मजेदार घटना है, लोगों को तकलीफ हो जाती है, तो तुम
- 43:32रिएक्शनरी प्रवृत्ति के लोग हो और सब तुम्हें कहते हैं नॉन
- 43:38रिएक्टिव। बुध वे थूक जाते हैं, बुध कुछ
- 43:41नहीं कहते। बुध बस इतना सा पूछते हैं ये तो
- 43:46मैं समझ गया कुछ और भी कहना है लेकिन तुम तो उठोगे झापट मार दोगे
- 43:54उसका वो ऐसा नहीं करते। ये दुनिया आज इतनी दुखी और इतनी
- 44:00गंदी इसलिए है कि यहाँ कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ अपना नाम हिटलर
- 44:08मेरा नाम रहे करोड़ों लोगों को मार देता है, वो कितने लोगों को
- 44:14मार देता है तुम्हें पता ही नहीं सकता।
- 44:18क्यों मेरा नाम रहे नाम? कभी किसी के रहे नाम बस इक्का
- 44:26रहता है, इसलिए बाबा नानक कहते हैं, कबीर कहते हैं बस उसका ही
- 44:37नाम रहता है। बाकी तो कोई आता है, कोई चला जाता
- 44:43है। आज तुरिया किसे?
- 44:50कल टूर जाना आज तुरिया किसे? कल टूर जाना।
- 45:01दुनिया इक सरा जो बनी आंसू मिटना आकर रहना रब्द न?
- 45:17जो बने आंसू मिठना आकर रैना रब दाना जो सा आवे, समझ घणी मत, जो
- 45:33सा आवे, समझ घणी मत। हो रसा की केहना तुम बा जिंदड़ी
- 45:41दा सदा नी बज दे यहाँ रहना तुम बा जिंदड़ी दा सदा नी बज दे यहाँ
- 45:51रहना ये ज़िन्दगी का तार सदा नी बजेगा।
- 46:001 दिन तुम यहाँ से विदा हो जाओगे, नाम तुम्हारा नहीं रहेगा, नाम
- 46:08जिसका है उसी का रहेगा। सभी नाम उसके हैं।
- 46:14इसलिए हमारे सनातन ने उसके अनेक नाम कह दिए और आखिर में कह दिया
- 46:18सभी नाम उसके हैं, राम भी वही, कृष्ण भी, वही अल्लाह भी, वो ही
- 46:25ईसा भी, वो ही माधव भी, वही केशव भी, वो ही सब नाम उसके।
- 46:33कृष्ण भी बोही राम भी बोही फासला करती है।
- 46:40तुम्हारी तार्किक गुत्थी नाम तुम्हारा नहीं रहता।
- 46:46नाम जिसका है, उसी का रहता है बस तुम आखिर में।
- 46:53धर्म से घर पड़ते हो और तुम्हारा वजूद खत्म हो जाता है।
- 47:01तुम गलत समझे थे, सारी उम्र तुम नाम को वजूद समझ रहे थे, लेकिन ये
- 47:07वजूद खत्म हो जाता है। तुम ये समझे थे?
- 47:12कि मेरा वजूद सदा रहेगा, नाम के रूप में रहेगा नहीं रहता जब
- 47:17तुम्हारा वजूद ही खत्म हो गया तो तुमने नाम से क्या करना है?
- 47:22हिटलर था कभी हुआ कौन जाने वो कौन था आया था।
- 47:32चला गया। ऐसे ही तुम भी चले जाओगे।
- 47:37बात तो ये है जो अपने जीवन का लक्ष्य पूरा करके गए नाम तो उनके
- 47:43रहते हैं, अमर वजूद उनका रहता है। तुम नामों के पीछे जिंदगियां खराब
- 47:52कर देते हो। अपने भी लोगों के भी आज पुतिन
- 47:58कहता है स्कूल की लड़कियां बच्चे पैदा करें, क्यों करें?
- 48:07क्योंकि पुतिन ने जंग के अंदर वहाँ के जवान मरवा दिए।
- 48:16लड़कियां भी वहाँ फौज में हैं, लड़के भी वहाँ फौज में हैं और
- 48:21यूक्रेन के जंग में लोग मरवा दिए। अब उन्हें आदमी चाहिए स्त्रियाँ।
- 48:29बच्चे हैं नहीं, जनसंख्या घट रही तो फरमान जारी किया, लार्ज दिखाया
- 48:36इनके पास राजनीतिक के पास दो चीजें होती हैं या तो लोग होता है
- 48:40या भय होता है तो लोग दिखाया। 10,00,000 मिलेंगे 20,00,000,
- 48:48मिलेंगे पहला बच्चा और दूसरा बच्चा तो 30,00,000 मिलेंगे ऐसा
- 48:59लुप्त कर स्कूली लड़कियों से जो मात्र 15 वर्ष तुम बच्चे पैदा
- 49:10करो। क्यों पैदा करो ताकि मैं मरवा
- 49:15सकूँ इनको युद्ध में जंग में इसे पता नहीं, जो आज बच्चे पैदा
- 49:20करेगा, जब तक वो बड़े हुए लड़ने के योग कहेंगे, तुम यहाँ से खिसक
- 49:25जाओगे। इतना नहीं पता उसे।
- 49:29तुम कहाँ रहोगे इनके जवान रहने तक?
- 49:35लेकिन ये कहता बच्चे करो, बच्चे को ऐसा करो ताकि मैं जंग में मरवा
- 49:42सकूँ। राजनीतिक अपना स्वार्थ करने के
- 49:49लिए पूरा करने के लिए उद्देश्य पूरा करने के लिए तुम्हारा
- 49:54इस्तेमाल करता है। उनकी बातों में आ मत जाना थोड़ा
- 49:59बुद्धि दी है भगवान ने कुछ भी सोच लेना।
- 50:06अभी आर एस आरएसएस के प्रमुख ने कहा, तीन बच्चे पैदा करो ताकि मैं
- 50:14मैं उसे स्वयंसेवक को बना सकूँ। और क्या करोगे?
- 50:17इस समय से को बना के ये गुंडागर्दी खिला रहोगे ये लोगों
- 50:24को मरवाओगे। ये धर्म अधर्म की बात करोगे, ये
- 50:31फालतू की बकवास लोगों के दिमाग में सड़ांध पैदा करोगे, इसलिए
- 50:37बच्चों को पैदा करो और तुमने कितने बच्चे पैदा किए?
- 50:42लेकिन इसका कोई जवाब उसके पास नहीं।
- 50:46इनके पास एक ही जवाब है जेल में डाल देंगे, ऐफ़ आई आर कर देंगे,
- 50:52फांसी पर लटका देंगे लटका दो भाई जो फांसी पर नहीं लटकते वो तो मर
- 50:59जाते हैं जिनको तुम नहीं मारते। वो भी तो मृत्यु मार देती है उनको
- 51:04वो कौन सा बच जाती है? कौन अमर हुआ आज तक जिनको तुमने
- 51:13जिनका नाम अमर माना, राम का कृष्ण का मृतोबल विक है?
- 51:22जीसको तुमने फांसी दे दिया ईसा उनका नाम तो आज ही अमर है जुदाश
- 51:30को शायद कोई न जाने और अगर उसके नाम से घृणा आती है तो कोई बड़ी
- 51:35बात भी नहीं है। जुदाश को आज गद्दार।
- 51:41कहा जाता है बेकसूर को कसूरवार कह दिया मनसूर के तुम हाथ पैर काट
- 51:51लेते हो सुख रात को तुम जहर पला देते हो, वो पी लेते हैं वो जानते
- 51:56हैं। अगर यह नहीं मारेगा, मुझे तो मौत
- 52:01तो 1 दिन मार ही देगी और जिसने इस बात को जान लिया के अगर यह नहीं
- 52:11मारेंगे, मुझे तो मौत तो मुझे मार ही देगी।
- 52:14मौत मुझे नहीं बक्शेगी वह बेखौफ़ हो जाता है।
- 52:23मौत उसी दिन से शुरू हो जाती है। जीस दिन तुम जन्म लेते हो सही
- 52:29पूछो तो जीस दिन तुम गर्भ में आ जाते हो।
- 52:32मृत्यु उसी दिन से शुरू हो जाती है।
- 52:35तुम्हें पता नहीं लगता। धीरे धीरे उसकी आहट भी नहीं होती,
- 52:40यह पता भी नहीं चलने देती कब अपने आगोश में तुम्हारा गला बेच देती
- 52:46है मौता के, लेकिन राजनीतिज्ञ कोई ज्यादा समझदार नहीं होता।
- 52:56समय दार्थ होता है। संत जो खुद भी शांति में जाता है
- 53:05और तुम्हें भी शांति में ले जाता है।
- 53:07महावीर कहते हैं, जीओ और जीने दो। असली दुनिया का कल्याण किया तो इन
- 53:18लोगों ने किया। तभी तो कहते हैं संत न होते जगत
- 53:23में तू जल मरता संसार मरना तो सभी न है, लेकिन जल के मरा।
- 53:34यह बड़ी खौफनाक होता है तुम वासनाओं से कुंठाओं से, बोझों से
- 53:46तनावों से भैंसे। जल जल के मरते हो, तिल तिल जलते
- 53:55हो मरते तो फिर भी हो और संत मज़े से मर जाता है।
- 54:03संत को तो तुम जागती हुई तवी के ऊपर बैठा देते हो, वह बैठ जाता
- 54:10है। संत को तो तुम बुला लेते हो, यहाँ
- 54:13आ जाओ या धर्मांतरण कर लो या गर्दन कटवा लो और संत कह देते हैं
- 54:19गुरु तेग बेहतर। गर्दन का क्रम, इन बातों को
- 54:26सिर्फ़ तुम लिख सकते हो, अपना नहीं सकता।
- 54:30और जिसने अपना लिया वह प्रबुद्ध हो गया, अमुहाजी को नहला दिया
- 54:39गया। कुछ लोगों की तबियत खराब होती थी
- 54:42वहाँ से उसको देखकर अरे 60 वर्षो से ऐसी बैठ।
- 54:51चलो नहलाओ इसको पकड़ा नहला दिया, अच्छी साबुन लगा के और थोड़े से
- 54:57दिनों में वह मर गया दुनिया में पहला व्यक्ति जो नहाने के कारण
- 55:04मरा हो, तुम्हें पता नहीं है। तुम्हें आज ये मेरा पर्वचन सुना
- 55:12होगा। एलिजाबेथ महारानी एलिजाबेथ दो दो
- 55:17महीने नहाती नहीं थी और उससे पुरानी पुरानी रानियों सहजातियां
- 55:27कुछ। कई कई महीनों तक नहाते नहीं थे।
- 55:31क्यों? क्योंकि खोस था मन में अगर नहाया
- 55:37तो हमारे रोम खुल जाएंगे और इन रोम से बैक्टीरिया बड़े सूक्ष्म
- 55:42होते हैं। बैक्टीरिया प्रवेश कर जाएंगे।
- 55:46समय समय की बातें समय समय के भ्रम हैं समय समय की मान लेते हैं बहुत
- 55:54सी मुगल शहजादियाँ नहाई नहीं इसलिए कि रोम घुल जाएंगे, रोम घुल
- 56:00जाएंगे तो बैक्टीरिया प्रवेश कर जाएंगे।
- 56:02हम मर जाएंगे। डर मरने का है।
- 56:13नॉन रिऐक्टिवनेस एक बार तुम उस तल को छू लो तो फिर संसार में विचरण
- 56:21भी करो तो संसार तुम्हे अपने आगोश में नहीं लगा।
- 56:25तुम भीड़ में से ऐसे गुजर जाओगे जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं।
- 56:32तुम शोरगुल में ऐसे खड़े रहोगे जैसे परम सन्नाटा है तुम्हारा
- 56:40भीतर आनंद में अलहादित रहेगा, तुम नाचते रहोगे बाहर से दिखने में
- 56:47तुम मूर्ति वत दिखोगे। यह सितल है, लेकिन किसने देखा
- 56:55भीतर तुम भीतर से जलते हो और संत भीतर से आयलादित होता है, नाचता
- 57:06है। देखने वालों ने देखा है धुआँ
- 57:21देखने वालों ने देखा है धुआँ। किसने देखा दिल मेरा सलता हुआ कल
- 57:37चमन था कल चमन था आज एक सेहरा हुआ।
- 57:47देखते ही देखते ये क्या हुआ कल चमन था देखने वालों ने देखा है
- 57:58दुआ किसने देखा दिल मेरा जलता हुआ संत को बाहर से देखकर।
- 58:07ये मत समझ लेना के प्राण विहीन है।
- 58:11यह शीतल है, नहीं वह इतना प्राण बान है कि वह बाहर से शीतल है
- 58:18भीतर से नाच रहा है। और संसारिक को बाहर से खुश देखकर
- 58:27ये मत समझ लेना के मेकअप किए हैं। होंठों पे लाली है।
- 58:33वह सुर्खी लिपस्टिक की है। उसके भीतर के लावने से नहीं आई,
- 58:40वह नकली है। और तुम दिखावा करने में दक्ष हो।
- 58:46तुम अपनी तबियत को सुधारने में दक्ष नहीं हो।
- 58:49काश तुम अपनी तबियत को सुधारने में लग जाता है, भीतर का बोतल छू
- 58:57लेते हैं, फिर बाहर तुम कुछ भी करते रहो।
- 59:04कृष्ण 40,00,000 लोग मरवा देते हैं अर्जुन हथियार नहीं उठाता
- 59:12अर्जुन अपना धनुष गांढ़ी फेंक देता है नहीं करूँगा अयुद्ध मैं।
- 59:20लेकिन कृष्ण कृष्ण जानते हैं। कृष्ण कहते हैं ये मैंने मार दिए
- 59:27हैं। अर्जुन ये देख ये मरे हुए हैं और
- 59:34कृष्ण उसे दिखला देते हैं कि ये मरे हुए हैं।
- 59:42तुम बस श्रेय ले ले तो उठा अपना धनुष मामनूष मर युद्ध च मुझे याद
- 59:53कर और युद्ध में कोद जा। 40,00,000 लोगों को मरवाने वाला
- 1:00:01व्यक्ति एक क्षण के लिए भी बीड़ा महसूस नहीं करता और तुम कृष्ण को
- 1:00:10देखकर थर्रा जाते हो। ये कैसा मानव है?
- 1:00:17इसने 40,00,000 लोग मरवा दिए। ज़रा भी शिकन नहीं आए गांधारी ने
- 1:00:23जिसके 100 पुत्र मरे थे शराब दे दिया ये वासुदेव जैसे मेरी आँखों
- 1:00:33ने अपना कोई नाश होते देखा। ऐसे ही तुम भी अपना को ना सोते
- 1:00:38देखो जाओ मैं तुम्हें शराब देती हूँ।
- 1:00:41कृष्ण कहते हैं ए मस्तू, मैथ ऐसा ही होगा, कैसा तल है ये जो ये लोग
- 1:00:52छू लेते हैं? तुम्हें तो नहीं मिलता येतल
- 1:00:57क्योंकि तुम येतल छूने की कोशिश नहीं करते?
- 1:01:04जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला, जाने वो कैसे लोग
- 1:01:24थे जिनके प्यार को प्यार मिला। हमने तो जब कलियाँ मांगी कांटों
- 1:01:39का हाल मिला हमने तो जब कलियाँ मांगी।
- 1:01:50कांटो का हार मिला जान वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार
- 1:02:06मिला, कैसे लोग थे? 40,00,000 लोगों को करवा देते हैं
- 1:02:13कृष्ण और अर्जन बिल्कुल तैयार नहीं अपना धनुष उठाने को और फिर
- 1:02:21माँ गंधारी श्राप देते देती है। तुम अपने ही वंश को अपनी आँखों के
- 1:02:26सामने उजड़ता हुआ देखो और देखते भी हैं कृष्ण ज़रा भी मायूसिया
- 1:02:31नहीं होते क्यों नहीं होती एक कतल छू लिया है जीस स्थल पर वो जानते
- 1:02:40हैं नैनम् चेतन तीशास्त्रण। नैणम दाहती पावकाह नै चैनम क्ले
- 1:02:46दिन त्यापम नै सुस्यती मरो ताह वासन शी जीर्णनी यथा विहाय नवानी
- 1:02:52घृणाती नरो प्राणी तथा श्री राणी विहाय जीर्ण अनन्याणी संयाती
- 1:02:57नवानी देही उस स्थल पर पहुँच गए। तुम भी उस स्थल पर चले जाओ बाहर
- 1:03:07से मूर्तिमत हो जाओगे भीतर से नाचोगे कूदोगे हँसी वो खेली वो
- 1:03:14दरि वो ध्यान। काश एक शब्द भी तुम्हारे भीतर उतर
- 1:03:24जाता। तार्किक बुद्धि को एक तरफ रख दो
- 1:03:28या तुम्हें कहीं नहीं पहुंचाएगी, डुबो दोगे, ये तुम्हें उस तल पर
- 1:03:34जाने से रोक देगी, यही वादा है। और तुम तर्क से ही सारी चीजें
- 1:03:41करना चाहते हो। अध्यात्म का तल रोज़ मुझे फ़ोन
- 1:03:44आते हैं, रोज़ मुझे मैसेज जाते हैं।
- 1:03:46बाबा समझ नहीं आ रही और मैं 1000 बार कह चुका, वह समझा नहीं जाता
- 1:03:55और तुम फिर फिर से पूछ लेते हो। समझ नहीं आई अब क्या करें
- 1:04:01तुम्हारा ये इलाज तुम बोलते ही जाओगे बाबा समझ नहीं आई और संत
- 1:04:09बोलते ही जाओगे वह समझ में आता नहीं इस नॉट ओनली अननोन।
- 1:04:17बट ऑल्सो अननोअबल। यह संतो ने ही नहीं कहा।
- 1:04:21अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी कहा आज तो वैज्ञानिक भी कहना शुरू हो गए
- 1:04:26हैं, कुछ तो है, अन्यथा यह सृजना अपने आप पहुँच सकती थी।
- 1:04:33लेकिन इतनी। व्यावस्थापिक संरचना इतनी एकोरेट
- 1:04:39इतनी नियमों में डली हुई संरचना अपनी अपनी हो सकती, इसको बनाने
- 1:04:45वाला मूर्त रूप देने वाला कोई तो है।
- 1:04:56राधे राधे श्याम मिला दे राधे राधे श्याम मिला दे।
- 1:05:15गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिलाधे गोविंदा गोपाल हरे
- 1:05:31पेंडुलम की तरह अन्तियो पे मत जाओ।
- 1:05:37ना इधर अति करो ना उधर अति करो बस एक ही फॉर्मूला तुम्हें बार बार
- 1:05:42पता चला ठहर जाओ जहाँ हो वहीं ठहर जाओ तुम्हें वो मिल जाएगा जिसकी
- 1:05:52जन्मो जन्मो से तुम्हें तलाश हो। बस ठहर जाओ, मेरी नैया पार लगा दे
- 1:06:04गोबिंदा गोपाल हरे। राधे राधे शा मिला दे गोबिंदा
- 1:06:19गोपाल हरे राधे राधे शा मिला दे गोबिंदा।
- 1:06:31गोपाल हरि मेरी नैया पार लगा दे पार लगा दे गोबिंदा गोपाल हरि
- 1:06:46राधे राधे। शाम मिला दे गोविंदा, गोपाल हरे
- 1:07:03और धन्यवाद।