Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Dec 25 - हिम्मत-ए-मर्दा मदद-ए-खुदा का रहस्यमय अर्थ! बाबा के संग कैलाश यात्रा और गंगा का शुद्धिकरण! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:14आशुतोष एक कहावत है, हिम्मत ई मर्दा, मद दे खुदा।
- 0:35कृपा करके इसका गहरा रहस्यत्मक वर्णन करने का कष्ट कर है।
- 0:44यह उगति अमीर खुसरो की उगति है। बहुत बड़े शांत हुए।
- 0:55उर्दू और फारसी से तालुकात हैं महान पुरुषों के तालुकात।
- 1:10किन किन अन्य भाषाओं से हो सकते हैं?
- 1:15इसलिए भाषाओं का भेदभाव न किया करो भाषाएं कण पर शीर्ष में
- 1:21सहायता करने के लिए सिर्फ तो उर्दू, फारसी।
- 1:30इस जुबान के लिए प्रसिद्ध है ये आमिर खुसुर का वाक्य।
- 1:37इसे सूफी संतों की जीवनियों के अंदर भी देखा गया है।
- 1:47इसका अर्थ लाया बाबा निश्चित ही जो अर्थ आपको अब तक समझाया गया वह
- 2:00नहीं है गॉड हेल्प्स। दोज़ हू हेल्प देमसेल्व्स इसका
- 2:17वास्तविकृत क्या है हिम्मत ए मृदा मृदा।
- 2:33अगर व्यक्ति हिम्मत करता है तो उसकी सहायता परमात्मा करता है।
- 2:41शायद कहीं चूक हो गई समझने वालों से।
- 2:51मेरी दृष्टि में देखोगे तो खुदा बाद में सहायता नहीं करता।
- 3:03खुदा की रहमत पहले होती है तो हिम्मत आती है।
- 3:12हिम्मत ए मर्दा, मद दे खुदा मैं कहता हूँ मद दे खुदा तो हिम्मत ए
- 3:19मर्दा। पहले इनायत होती है उस परवर्ती
- 3:25गार के। फिर व्रती करता है हिम्मत अगर
- 3:36परमात्मा तुमसे अपने शक्ति प्राण के चले चेतना सोचो, पल भर के लिए
- 3:45ठहरों। और गहराई से सोचो, परमात्मा अपनी
- 3:52चेतना की शक्ति आपसे खींच लें तो मर्द क्या करेगा?
- 4:03चेतन विहीनता में चला जाएगा। मरता हो जायेगा या तो दर्शन कर
- 4:08दिया जायेगा या दहन कर दिया जायेगा।
- 4:17अर्थ मूर्ख होने निकाला है उक्तियाँ।
- 4:25संतो की कार्यक्रम उक्तों के अर्थ गलत लिए गए, यही हमारा दुर्भाग्य
- 4:33है। अब हम शास्त्र तो पढ़ लेते हैं
- 4:41अरबों शास्त्रों के अंदर जो उक्तियां।
- 4:46वो उन संतों की हैं जो दरगाह तक पहुँच गए और उनका भाषाई व्याख्यान
- 4:58करने के लिए आज वो लोग हैं जो उस दल को छुए नहीं हैं।
- 5:07कैसे आएगी ऐक्युरेसी इन द एक्स्पला मिशन?
- 5:18यही कारण है कि हम अतिज्ञ हैं, मानवता आज दुखी है तो उसका कारण
- 5:26यही है। कि उसने कहा हिम्मत करो तो
- 5:32परमात्मा तुम्हारी सहायता करेगा, मैं तुम्हें गलत कहता हूँ और कहता
- 5:36हूँ मैं तुम्हें उलट बात कहता हूँ, तुम्हारे में शायद से तब
- 5:46आएगा। जब वह तुम्हें कर्ज देगा और कर्ज
- 5:54एक ऐसी गुणवत्ता है जो तुम खुद से पैदा नहीं कर सकते, कर्ज उसका
- 6:07पुरस्कार। साहस उसका पुरस्कार है यू कैनट
- 6:17क्रिएट दैट उसकी रहमत बरसेगी तो तुम्हें साहस से उतरेगा।
- 6:27फिर, उस साहस को तुम प्रयोग कैसे करते हो दैट डिपेंड्स अपॉन यू फिर
- 6:35तुम उस साहस को रचनात्मक वे में प्रयोग करते हो अल्बर्ट आइंस्टीन
- 6:45की तरह? या डिस्ट्रक्शन के लिए उपयोग करते
- 6:56हो एटम वम बना के? लेकिन जो हिम्मत आई प्रेरणा आई।
- 7:11मैंने बहुत से वैज्ञानिक की बायोग्राफीज पढ़ी।
- 7:19उन बायोग्राफीज से मैंने एक तंत निकाला।
- 7:25उन्होंने कहा हमने कुछ नहीं करा कराया।
- 7:29आइंस्टीन तो कहते हैं कि मैंने तो बिल्कुल कुछ नहीं किया, मैं तो 10
- 7:35घंटे तो सोता था, खूब मज़े से उगता था और दिन में भी कई बार
- 7:41झपकी ले लिया करता था। अपन कुछ नहीं किया।
- 7:46तो फिर इतना बड़ा सिद्धांत कैसे उतर गया?
- 7:49इज़ इक्वल टु एम सेस का। न्यूटन भी यही कहता है बड़ी से
- 7:56बड़ी साइंटिस्ट मेरी क्यूरी भी यही कहता है।
- 8:02पीरो भी यही कहता है। आर्किमटिस भी यही कहता है,
- 8:13रदरफोर्ड भी यही कहता है किन्नी? अज्ञात लम्हों में हम बैठे थे,
- 8:22सुस्ता रहे थे। मन ठहर गया था।
- 8:31आराम की घड़ियों में से यह विश्राम करने जा रहे थे या
- 8:39विश्राम करके उठे थे? और वह उतरा लेकिन उतरा जिसे कबीर
- 8:54कहते है गगन मंडल जिसे गौरख कहते है गगन मंडल।
- 9:10वहाँ से उतरा और न्यूरॉन में उतर गया
- 9:24अज्ञात घड़ियों में इन दी मूवमेंट्स ऑफ नॉन बिज़नेस।
- 9:38बुध को ज़रा भीत मनाना था। 49 दिन के व्रत के बाद सुजाता नाम
- 9:49की स्त्री अच्छा खाने पीने का सामान दे दी थी।
- 9:57और तृप्त हो के पहले दिन खाया पुत ने बहुत बढ़िया निद्राएं अति
- 10:13सर्वत्र वर्जे एक्सेस ऑफ एवरीथिंग इज़ पैड।
- 10:21इसलिए मैं कहता हूँ उपवास मत करना।
- 10:23ज्यादा सप्ताह होने एक बार आधे दिन का दट इस सुफ्फिसिएंट फॉर यू।
- 10:40काफी है तुम्हारे लिए मशीनरी को आराम मिल जाएगा।
- 10:57तो मैंने कहा या तो आराम की मुद्रा में थे आप सुस्ता रहे थे,
- 11:05ऐसी अवस्था में थे कि सोने जा रहे थे।
- 11:10अभी कुछ नहीं करना है, बस सोना है या फिर सारी रात उस चेतना के सागर
- 11:22के पास बैठे रहे बुद्ध। सुश्री की अवस्था में और सुबह उठे
- 11:28बड़े फ्रेश महसूस कर रहे थे। आज पहली बार खाया था 49 दिन के
- 11:33बाद पेट भर गया तो नैरोस भी। रिलैक्स हो गए और उस पर रिलैक्स
- 11:52की घड़ी में कुछ न कर रहे थे। जब अभी उठे उठे भोर का तारा डूबने
- 11:59जा रहा था, उनकी आँखें उठी भोर के तारे की तरफ।
- 12:12प्रबुद्ध को ज्ञान हो गया, लाउड जी पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे
- 12:22पतझड़ का मौसम एक पत्ता जो अपनी उम्र पूरी कर चुका था।
- 12:30वृक्ष की टहनी ने उसे त्याग दिया और वह झूलता झालता हवाओं के
- 12:37झोंकों के भीतर नीचे गिरा लाउसी के सामने गिरा और लाउसी।
- 12:48उस दशा को उपलब्ध हो गया। ये भला कोई घटनाएं हैं?
- 12:52इन्होंने क्या किया, क्या किया इन्होंने?
- 13:00सो कर उठे थे या सोने जा रहे थे या आराम से बैठे थे पीपल के नीचे?
- 13:14या आराम की मुद्रा में बैठे थे और कोई इन्वेंशन ऊपर से उतरी और
- 13:21तुम्हारे नूरन में छा गई या कोई कविता उतरी, बड़ी सुन्दर थी और
- 13:31तुम्हारे नूरन ने उसे फीड कर दिया।
- 13:36लेकिन मनुष्य की कमजोरी क्या है कि वह परमात्मा के द्वारा प्रदत्त
- 13:43ज्ञान को भी अपना ज्ञान समझ लेता है और फिर महंगे कवियों की तरह
- 13:48बांटता है? इनायत है पर सुकरगुजार उसका नहीं
- 13:56होता, लेकिन संत बेशर्त बांटता है, संत बेशर्त क्यों बांटता है,
- 14:14कभी बेशर्त क्यों नहीं बांटता? संत जानता है मेरे प्रयास से नहीं
- 14:22मिला तो बांटने में हर्षित क्या है?
- 14:31कभी के भीतर कहीं न कहीं ये कड़ी रहती है।
- 14:36कि ये मैंने कमाया है, बस तुम उसकी दाँतों पर अपनी मोहर लगा
- 14:41देता हो। तुम्हारे दुख का मात्र यही कारण
- 14:46है दिया उसने स्टेम्प तुम लगा देते हो।
- 14:56यह तो मेरी खोज है, लेकिन आइंस्टीन बड़े ईमानदार है।
- 15:04आइंस्टीन कहते नहीं अपन तो ज़रा भी खोज नहीं है।
- 15:10अपन तो आराम से बैठा था मेरी कुरी का घर वाला कहता पिरो।
- 15:15आराम से बैठे थे और एक ही दिन दोनों के भीतर वो ही चीज़ रेडियम
- 15:24जो खोजा गया बहुत लेकिन जब आराम की मुद्रा में थे।
- 15:40उस वक्त तुम कुछ नहीं कर रहे थे, कभी इसे पकड़ नहीं पाता।
- 15:47ऋषि इसे पकड़ लेता है। नहीं ये मेरा कुछ मैंने नहीं
- 15:53किया। यह तो आया है कहीं अज्ञात स्रोतों
- 15:58से इसमें मेरा कुछ भी तुने ऐसे ही तुमने न जाने संतों के कितने
- 16:15शब्दों का अनर्थ कर दिया। गाल दिए उनके शब्दों के अर्थ जो
- 16:22आपके लिए चेतन्य का कारण बन सकते थे।
- 16:29मनुष्य दुखी इसीलिए है कि मनुष्य का मन?
- 16:38इस बात को समझ नहीं पाया। हल्क से नीचे नहीं उतार पाया यही
- 16:50मनुष्य खो गया यही मनुष्य ने अपनी।
- 17:04प्रज्ञा को खोद किया ऋषि जानता है मेरा इसमें कुछ नहीं ऊपर से उतरा
- 17:12है गगन मंडल में। गगन शिखर में शब्द प्रकाशा तहबूजे
- 17:29अलखवेनानी गगन मंडल में शब्द प्रकाशा तहबूजे अलखवेनानी।
- 17:42गोरख इसका अर्थ करते हैं, बिल्कुल सही सटीक अर्थ करते हैं।
- 17:54गगन मंडल से आता है, जो अज्ञात है रहस्यमयी।
- 18:04तुम दुखी इसलिए हो कि तुम गलत चीजों को मान लिए हो।
- 18:11तुम कहते हो हम करेंगे मेहनत तो परमात्मक करेगा अब ज़रा बताओ।
- 18:24थोड़ा शांत होके सुनना तुम्हारा भटकता हुआ भागता हुआ मन मेरी
- 18:33बातों को ग्रहण नहीं कर सकेगा। इसलिए संत कहते हैं ठर जो।
- 18:42ठहर के सुनो भागते भागते बात सुनी नहीं जाएगी और सुन लोगे तो गुनी
- 18:50नहीं जाएगी और ठहर के सुनना रुक जाओ फिर सुनो।
- 19:11गगन मंडल में शब्द प्रकाश से ऊपर से उतरता है।
- 19:18वो अमीर खुसरो कहते हैं। मद दे खुदा तुम इसके आगे जोड़
- 19:38लेते हो, हिम्मत है मर्दे मर्दे खुदा मर्द दे खुदा आइए।
- 19:50थोड़ा बाबा नान की तरफ चला। बाबा नानी कहते हैं पहले वो कृपा
- 19:58करता है। कर्मी आवे का पड़ा।
- 20:07पहले वह कृपा करता है, फिर उस कृपा के कारण।
- 20:13तुम मदहोशी की अवस्था में जाती और उसकी कृपा के बिना कुछ भी तो नहीं
- 20:20है? इस इंसान ये जो फूल महक रहे है ये
- 20:26जो सुगंधी लिए मंद मंद हवाएं चल रही।
- 20:31जो पक्षी चह चहा रहे हैं घने काले मैक सर के ऊपर से गुजर रहे हैं।
- 20:38गर्मी का मौसम है, यह जो मोर खिलखिलाता हुआ नाचता है, एक कोयल
- 20:54को हुहु की आवाज देते हैं। झरना कल कल के नाद करता हुआ बहता
- 21:05माँ गंगा सुन्दर मंद मंद गति से अपना प्रवाह जारी रखें।
- 21:17संत कहते है ये सब उसकी कृपा है। नानक कहते हैं गर्मी आवे कपड़ा यह
- 21:28मानस खत्म, उसकी कृपा से मिला यहाँ थोड़ा ठहर जाए, ठहर जाते
- 21:37हैं। तुम कहते हो मानस खत्म, हमने पाया
- 21:43अच्छा क्या बताओ क्या किया तुमने मानस का तन पाने के लिए तुमने
- 21:50क्या किया सोच लो सोच के बता देना।
- 21:581 दिन 2 दिन 10 दिन 20 दिन 10 साल 20 साल 50 साल 1000 साल ये मानव
- 22:08स्तन पाने के लिए तुमने किया क्या?
- 22:11और कोई भी तन पाने के लिए तुमने किया क्या?
- 22:22कर्मी आवै कपड़ा मान स्तन 100% कॉन्शसनेस लेवल को छू सकता है।
- 22:34उसकी संरचना ही ऐसी है बाहर भीतर के।
- 22:42लेकिन तुम जो कहते हो हिम्मत ही मरदा क्या हिम्मत की थी तुमने जो
- 22:53मानव का जामा मिला हिम्मत बनाई है मुझे?
- 22:57स्वास्थ्य तो ना सकते हो हिम्मत गण जी क्या ये हिम्मत है?
- 23:04यह बेकार में फँस जाने का स्वार्थ था इसलिए परमात्मा ने काम वासना
- 23:09कोई इतनी? इतनी मोर्चा से एनेस्थीसिया से
- 23:17युक्त कर दिया। इस शब्द को गहराई से समझना शांति
- 23:23परमात्मा ने काम वासना को इतने एनेस्थीसिया से युक्त कर दिया कि
- 23:29यह काम वासना आपको। बेहोश कर देते है।
- 23:39फिर तुम्हारा कहाँ बस रहता है और तुम कहते हो इसके ऊपर वीजा
- 23:45प्राप्त करना। यही सबकी मुसीबत है।
- 23:56सारी दुनिया आज पहले दुखी थी, आज भोग रही है।
- 24:02उसने कहा क्यों दुखी होते हो, पागल हो समझदार?
- 24:08डॉक्टर ने कहा इसको घेराने से कुछ नहीं होता है।
- 24:12ज़रा भी नहीं बिगड़ता है तुम मज़े से किया करो साथ साथ वार किया करो
- 24:16रोज़ भला वो डॉक्टर सरवत है क्या? क्या उसने सरजना को बनाया है?
- 24:33वो किस बल पर कह रहा है तुमने अगर एक बार सभी धातुओं के रस को वीरे
- 24:43को गंवा दिया तो क्योंकि यह। संसार को जारी रखने के लिए
- 24:52अनिवार्य प्रक्रिया है, तो सबसे पहले शरीर इसकी संरचना करेगा भूल
- 24:58जाएगा उन चीजों को व्यर्थ का काम दे दिया अपने शरीर को अच्छा भला
- 25:09सब ठीक चल रहा है। लेकिन परमात्मा बड़ा खुशहाल है,
- 25:17परमात्मा समझता है। अँधेरी कोठरियों में तुम्हें ले
- 25:23जाना होता जहाँ तुम्हें प्रकाश का दर्शन नहीं होता।
- 25:31अंधकार ही अंधकार है। एनेस्थीसिया दे दिया गया फिर
- 25:38तुम्हारे शरीर में खुजा सिंचाई काटी, पीटेगा काम?
- 25:44बासना एनेस्थीसिया। और इस काम वासना के ऊपर विजय
- 25:53प्राप्त कर लेना। उसको कहते हैं महावीर वर्धमान को
- 26:01नाम दिया गया महावीर सिर्फ मात्र कारण यही था कि उन्होंने इस विकार
- 26:08के ऊपर। ऊर्जा का वो स्वरुप जो विकृत हो
- 26:13गया था, उसके ऊपर विजय पारी यानी उसके साक्षी हो रहे हैं।
- 26:22उसके ओब्सर्वर हो रहे। उसके देखने वाले हो गए।
- 26:29अगर उन घड़ियों में तुम जाग सको तो वो घड़ियाँ तुम्हारे लिए
- 26:34मुक्ति का साधन बन जाएगा। यही है सारे तंत्र की रस सारे
- 26:43तंत्र कार्य है से यही। अगर तुम उन घड़ियों में जाग सको
- 26:51लेकिन तुम कहाँ जागते हो, तुम तो सो जाते हो काश तुमने महावीर की
- 26:58तरह उन घड़ियों में अपनी ऑब्सर्वनेस खोई न होती।
- 27:07निरंतर तुम दुष्टा बने रहते साक्षी बने रहते तो तुम्हारे ये
- 27:15सबसे कीमती तत्व खोने से बच जाता। तंत्र की सारी।
- 27:24गुप्त विधियों का एकमात्र रहस्य तुम्हें बता दिया और उस दिन तुम
- 27:34जाग जाओगे और उसी का गहन अध्ययन किया महात्मा गाँधी ने।
- 27:47नए जानने वाले लोग यथा दृष्टि तथा सृष्टि भीतर उनके काम बस न भरे
- 27:59पड़े उखड़ न जाए, इसके सब इंताजामात कर रखे, किसी को पता न
- 28:06चले। बस मैं ब्रह्मचारी हूँ, मीडिया से
- 28:15कह दो वो इस आवाज़ को उठाये कि मैंने देश सेवा के लिए घर बार को
- 28:24छोड़ दिया, पत्नी को त्याग दिया। यह पुण्य है यह पाप मैंने कल कहा
- 28:36था वो क्षण जब मैंने रिकॉर्डिंग में जाके देखे ब्राह्मण की
- 28:43रिकॉर्डिंग में। जो अभिनय मैंने 14 वर्ष तक श्री
- 28:49राम का रोल किया और मैं क्योंकि एनलाइटन था ऐट दट टाइम और आफ्टर
- 29:01एनलाइटनमेंट शायद धरती के ऊपर पहला व्यक्ति जिसने ली दाखेली हो
- 29:08भगवान राम। आफ्टर एनलाइटनमेंट 1987 में 86 या
- 29:2987 बस हुआ हुआ था अभी एनलाइटन 85 में।
- 29:38मुझे अच्छी तरह से याद नहीं है सन अच्छी तरह से याद नहीं है और
- 29:46हमारे यहाँ राम नाट्यम क्लब के दो फार हो गए थे।
- 29:50राम का रोड नहीं मिल रहा था उन्हें।
- 29:56तो मेरे घर के ऊपर राम नाटक क्लब के बहुत से सदस्य आ गए।
- 30:05मुझे नीचे बुलाया गया। मैं फर्स्ट फ्लोर पे रहता था।
- 30:10किराये का मकान था। मैंने पूछा तो गणमान्य व्यक्ति
- 30:17बैठ और मुझे कहने लगे, बेइंतती करने लगे, हाथ जोड़ लिए आपसे एक
- 30:28प्रार्थना करने आए और प्रार्थना भी ऐसी करने आए है जो आप इनकार
- 30:33नहीं करोगे। ये वचन कैसा वचन का है लाईये खोज
- 30:44के लाइये, मैंने कहा आप हमारे चाचू प्यारा लाज।
- 30:58वैसे मेरे पांव हाथ लगाते थे, लेकिन अग्रवाल थे, रिश्ते में
- 31:07बड़े थे, उम्र में तो हम उन्हें चाचू को कहते थे।
- 31:12प्यार से राम का रोल बड़ा प्यारा करते थे।
- 31:17नाम भी प्यारे लाल। मुझे कहते बाबा एक विन थी, मैं
- 31:30करता हूँ इनको तो छोड़ दो एक बच्चे मैंने राम का रोल किया, अब
- 31:36मैं वृद्ध हो गया। हमारा क्लब हो गया है, हमारे पास
- 31:43राम का रोल नहीं है, मैं इनका रोल करूँ।
- 31:47राम का कहते है हम आवाज बड़ी प्यारी है, आपकी मिश्री से ही
- 31:55बोलती है। कितना मज़ा आएगा अगर आप राम का
- 32:00रोल करोगे? मैंने कुछ देर के लिए सोचा, मैंने
- 32:14कहा ठहर जाइए, मैं थोड़ा सा अपनी अर्धांगणी से पूछ लूँ।
- 32:23आधा अंग है मेरा बाम अंग से पूछ लो कैसे पूछ लूँ?
- 32:36मैंने धर्मपत्नी से पूछा राम का रोल करना।
- 32:43तो आगे धर्मपत्नी भी मजाक कर रही थी।
- 32:46कहती फिर कहीं त्याग तो नहीं दोगे?
- 32:52मैंने कहा नहीं ये रोल मैं नहीं करूँगा।
- 33:01वो जो मूड था राम ने कर दी वो मैं नहीं करूँगा क्योंकि मैं जानता
- 33:05हूँ वो मूड था तो फिर करो बस रावण वध तक इससे आगे नहीं ठीक मैं
- 33:15करूँगा ही यहाँ तक मुझे पता है। अमिर खुसरो का ये वाक्य हिम्मत ए
- 33:27मर्दा मदद ए खुदा इसको उलट पुलट कर।
- 33:38बहुत सी भाषाओं में ऐसे ही होते हैं जिनका सार पहले आ जाता है।
- 33:48अर्थ पहले आ जाता है, बोले बाद में जाते हैं, संस्कृति में अक्षर
- 33:52ही ऐसा होता है। अंग्रेजी में भी ऐसा हो जाता है
- 33:57और फारसी अरबी में तो खास ही मिलता है।
- 34:01आपको तुमने कुछ सोचा नहीं सोचा हिम्मत
- 34:19है मृदा मदर दे खुदा, मैं कहता हूँ पहले।
- 34:22मदद करता है खुदा फिर हिम्मत आती है बंदे में तुम्हारे व्याख्या
- 34:34करता कुछ भी कहले तुम्हारे जन्म में तुमने कुछ हिम्मत नहीं की।
- 34:41अगर की हो तो बताओ आज तक धरती पर जीतने मानव हुए मनुष्यतरूपा से
- 34:53लेकर या आदम ईव से लेकर आज तलक। मानव जामा पाने के लिए अगर किसी
- 35:11ने कुछ भी कभी किया हो तो उसको मैं प्रार्थना पूर्वक याद करता
- 35:21हूँ कि वे मुझे बता दे कि उसने क्या किया अगली पीढ़ी को जन्म
- 35:25देने के लिए? मात्र उन्होंने स्वाद लिया उससे
- 35:32तुम्हारा जन्म हुआ। कितनी कितनी पीढ़ियों से हमारे
- 35:36बाप बताते जब बदमाश थे, उस हिसाब से जीस हिसाब से संगीत कहते हैं।
- 35:44कि शादी मत करो, ये बदमाशी है तो ये बदमाशी नहीं है जो शाखाओं में
- 35:49तुम बच्चों का शोषण करते हो, अच्छा माल मिलता है, बाहर से फंड
- 35:55बड़ा आ जाता है और फंड हराम का होता है।
- 36:05इसलिए अच्छा माल खाते हैं। ऐसे थोड़ी 56 इंच हो जाती है और
- 36:11फिर वो रात को निकालेंगे कौन बस यहीं से?
- 36:20नफरती कहानियों शुरू हो दो हराम का माल है दान में आगया मुफ्तों
- 36:31में आगया वो टाटा बिरला ने दिया। या अदानी अंबानी ने दिया इससे कोई
- 36:43फर्क नहीं पड़ता। चंदा और उन्होंने चंदा दिया तो
- 36:50किसी कारण से दिया। अब कल मुझे कोई पूछ रहा था ये
- 36:56वापस जो वैक्सीन लगाई गई। मैंने बाबा से पूछा वैक्सीन लग
- 37:01रही थी, तब और मैंने अपने जिसने भी मेरे संबंध ताल्लुकात थे,
- 37:09उन्होंने मुझसे पूछा बाबा वैक्सीन लगवा ले, मैंने कहा बिलकुल मत
- 37:15लगाओ। बाबा कहते नहीं है लगवाने अब इसको
- 37:22साइकोलॉजिकली मैं कुछ नहीं बोलेंगे क्योंकि बहुत से लोग
- 37:25मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। बाबा के शब्द मैं नहीं बोलेंगे।
- 37:33मतलब आपको समझा दिया है? ये जो आजकल कोई हट्टा किट्टा
- 37:39बच्चा प्रेस कर रहा है, उग्र पड़ता है, ये सब दुष्परिणाम है
- 37:46पहले कब कहाँ ऐसा हुआ करता था? ये सब परिणाम है वैक्सीनेशन।
- 37:56तो पूना वाले ने 400 रूपया इलेक्टोरल बॉन्ड में ऐसे ही तो
- 38:00नहीं डाला। हत्या हत्या होती है किसी भी ढंग
- 38:15से की जाए चाहे 750 किसानों को गुरुहों पर बैठा के मारो।
- 38:23या हजारों लाखों लोगों को वैक्सीनेशन दे के मारो।
- 38:35इस वैक्सीनेशन का प्रभाव तुम्हें गुलाम बनाने के लिए किया गया।
- 38:45मुझे बाबा ने कहा है इसलिए आज इतने अंधभक्त जम गए, मैंने कल
- 38:54अपने शिष्य से कहा अपने परले रिश्तेदारों से कह दो।
- 39:02कि जो बीजेपी से संबंध रखता है उनसे सामान न ले, वोट न डालें।
- 39:08कहते है नहीं हम तो वो मैंने कहा फिर देखो हम दंड तो देते नहीं
- 39:13अहिंसिक बंदे है तो फिर आप न हमारे पास आना न हम तुम्हारे पास।
- 39:21खुदा खैर खैर तुम अपने घर मस्त रहना, हम अपने घर मस्त रहेंगे।
- 39:29कोई विपत्ति का वक्त आ गया, हम तुम्हारे पास नहीं आयेंगे और कोई
- 39:33विपत्ति का वक्त तुम्हारे ऊपर आ गया तो हम आपको कुछ पूछेंगे।
- 39:43यानी अपने टाटा बाय बाय और बाबा का फार्मूला काम करता है तो मेरा
- 39:57शिष्य निकला बाजार में। कहता बोट किसको डालते हो?
- 40:05हाँ इस तरह बैठी थी कोई हो गई बेचारी किसी का आदमी मर्द नहीं
- 40:10काम करता या होता है ना जब भाग गया होता है छोड़ के।
- 40:19ऐसा मत करो, तो कहती वोट वो कहता वोट किसको डालता है?
- 40:27कहती मैं तो शुरू से ही बीजेपी की भक्त नहीं हूँ तो मैंने मैंने कह
- 40:33रखा था कि इन्हें कहना कुछ नहीं, कोई प्रतिकार नहीं करना।
- 40:39कोई रिएक्शन नहीं करना। नॉन रिएक्शन नॉन रिऐक्टिवनेस
- 40:47चुपचाप आगे चले जाना है। अगली रेहड़ी पे ले लो।
- 40:54दुकानें और भी बहुत हैं। राहतें और भी हैं बसल की राहत के
- 41:03सिवा और भी दुखें हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा अगली रेड्डी पे
- 41:10हो लिया तो बात किया यू वस्त्र कहती क्या बात हो?
- 41:19वोट तो आप जीसको कहो के डाल देंगे, लेकिन हमारी ग्राहकी तो
- 41:27खराब न करो। हमें बीजेपी ने क्या देना है?
- 41:34हम तो अपन कमा के खाते हैं। भाई हमारे घर कौन सब कुछ रख के
- 41:41जाता है? राशन हमें मिलता है मिलता है
- 41:46जिनको तो उनको बाकी भी तो सामान चाहिए, बूट चाहिए जुराब चाहिए
- 41:52ठंडी में। गर्म साल चाहिए, कोठी चाहिए, टोपी
- 41:59चाहिए और बहुत कुछ चाहिए। मकान नहीं, झुग्गी झोपड़ी, कच्ची
- 42:12झुग्गी झोपड़ी। और उसकी दीवारें छतें लीप दी जाती
- 42:17है। कच्चे पता नहीं कब गिर जाये बारिश
- 42:21के मौके पर और मेरे शिष्यगण थे, मैंने निकाल दिए।
- 42:27खैर अब तो और पंचायती। पंजाब की पंचायतें होती है, इनमे
- 42:38लगे हुए लगे हुए हैं। आज इतनी बेईमानी की उन्होंने
- 42:4750601000 की तन्ख्वा में। इतने बड़े बड़े महल दुकानें
- 42:55बठिंडा शहर में बन सकती है जहाँ फुटों के इंचों के हिसाब से जमीन
- 43:01है, लेकिन है इनके पास बरापुरा सोना खेत खलिहान।
- 43:13तो कोई भी व्यक्ति सहेजे सहेजे अंदाजा लगा सकता है कि फिर ये
- 43:18क्या है। मैंने इन्हें त्याग दिया कि आप
- 43:24यहाँ से जाइए और फिर मत आइये। यहाँ जाइएगा न, फिर आइएगा हम उलटे
- 43:41भी हो जाते है कृपा करो, तस्वीर रह जाओ।
- 43:48ये पनौती हैं पनौती का अर्थ कहते चोर हरामखोर कहते जबर कर जाहूं
- 43:59ज़ोर कितने चोर हैं कितने हरामखोर?
- 44:05हमारे टैक्स के पैसे पर वो दुनिया घूम लेते हैं जो अपने ज़ोर से
- 44:13राज़ किये जाते हैं। हालांकि राज़ वो होता नहीं वो
- 44:17मात्र इन्द्रियों की थकावट उतारने का एक साधन होता है।
- 44:22दट इस स्टिमुलेशन। बहुत से प्रश्न ऐसे आए बाबा अगर
- 44:4125,00,00,000 आपने दे दिए लोग काम नहीं करेंगे।
- 44:47मैंने कहा तुम अब कह रहे हो जब 25,00,00,000 आ गए ना बेटा?
- 44:56तो फिर देश भक्ति भीतर से उठेगी ये लोग हीजनों ने बिना किसी लोग
- 45:02लालच के सर कटारिया फांसी के तखते चूम लिए है और जो लोग कहते हैं कि
- 45:10भगत सिंह की फांसी क्यों नहीं रखवाई, पहले भगत सिंह से तो पूछ
- 45:14लेते जाके? तुम उसकी शहादत को कमजोर कर रहे
- 45:19हो। तुम भगत सिंह को कायर बना रहे हो
- 45:24अपनी जैसे यथादृष्टि तथा सृष्टि तुम समझते हो।
- 45:30सावरकर ने माफी मांग ली। तो भगत सिंह से भी माफी मांगने को
- 45:35तैयार था, बस उसे कोई माफी दिला देता।
- 45:37अरे भाई माफी देने को बिल्कुल तैयार था।
- 45:40इर्बन इर्बन ने से शर्त माफी देने की शर्त रख दी थी, मान लिया था
- 45:49समझौता हो गया था। अब तुम्हें अंदर की बात क्या
- 45:53तुम्हें सारी चीजें बताइए राजा अपनी बात को या जो आपका नेतृत्व
- 46:06वो करता है वो सारी बातों को आपको बता दे?
- 46:12इत्तफाकन ये तो मैं आ गया अगर न आता तो ये बातें आगे चल चल के पता
- 46:18नहीं कहाँ होती और फिर वहाँ होती कि गोली तो मारी थी गाँधी ने और
- 46:24शहीद हुआ गोडसे। और फांसी के ऊपर लटका महात्मा
- 46:29गाँधी सारी न्यायिक प्रक्रिया चली।
- 46:32महात्मा गाँधी के विरुद्ध ये इतिहास हो जाता है जैसे बदलने की
- 46:36तासीर तुमने चालू कर रखी है। इत्तेफ़ाकन ये भी ईश्वर की कृपा
- 46:45ही है, लीला है। हिम्मत ई मृदा मदर दे खुदा इसको
- 46:59उलट लो अगर इसके सही अर्थ जानिए पद्य में बताई गई बात गद्य से ही
- 47:11हल हुआ करते हैं। पद्य में शब्दों का तालमेल भार
- 47:19मात्राएं पैरेलल करने के लिए कभी बहुत कुछ करता है।
- 47:25शब्दों को आगे पीछे ना पतोलता है, भार बैठाता है।
- 47:33लेकिन गद्य में साफ साफ बातें कहीं जाती हैं।
- 47:36इसलिए गद्य आज की भाषा है। प्राणी भाषा थी पद्य, उससे तुम
- 47:46कुछ ज्यादा समझ नहीं पाई? इसीलिए समझदारों ने गद्य का
- 47:51निर्माण किया। सीधा सीधा बोलो सरल बोलो गद्य की
- 47:59भाषा में बोले प्रश्न तो उनके हर छंद में, हर श्लोक में आपको।
- 48:10एक मुरली की धुन सुने, बैलेंस बटाया हुआ है, तुलसीदास के
- 48:16रामचरित मानस में बैलेंस बटाया हुआ है।
- 48:20कहा सोरड़ा कही छंद कही छू पाई कही दोहा बिल्कुल छंद बटाए हुए
- 48:26है। मत दे खुदा है कृपया पहले को करता
- 48:39है, मैंने तुमसे पूछा था जवाब आया नहीं अब तक और मैं अच्छी तरह से
- 48:48जाता हूँ जवाब कभी आएगा भी। तुमने ये मानस शरीर पाने के लिए
- 48:56क्या प्रयास किया? बता दो तुम्हारे बाप और माता ने
- 49:03उस घड़ी में उत्तेजना के वर्षीभूत होकर रातों का रंगीन किया था।
- 49:12तुम्हारी भाषा में चतपु रंगीन नहीं था।
- 49:17अपनी शक्ति को खो देना, अपनी पूंजी को खो देना रंगीनियत नहीं
- 49:24हुआ करती, वह तो नुकसान हुआ करता है।
- 49:27तुमने इसे रंगीनी का नाम दे दिया, तो ठीक मैं भी उसी भाषा में बोलता
- 49:33हूँ, नगरी मोख दवार करमी आवे कपड़ा
- 49:54उसकी कृपा से मानस का जमा मिलता है।
- 50:00यानी अब हम रसपी आ जाए। मानस का जामा पाने के लिए
- 50:08तुम्हारा कोई प्रयास नहीं है। यद्यपि तुम्हें संतो के बहुत से
- 50:12वचन मिलेंगे ऐसे वो संत के वचन में।
- 50:18वो संत ने वचन जो बोला होगा उसको बिगाड़ा तगड़ा गया।
- 50:24गुलामी के वक्त में बोला होगा, जो गुलामी के वक्त में तोड़ मरोड़
- 50:28लिया गया होगा, संत ने तो ठीक ही बोला होगा।
- 50:37गर्मी आवे कपड़ा नगरी मुख्य द्वार परमात्मा की कृपा से यह मानस का
- 50:43जामे मिलता है। मानस के जामे के लिए तुम मानस के
- 50:48जामे में हो जो मुझे सुन रहे हो और जो मानस के जामे से बाहर हो वह
- 50:53भी मुझे सुन रहे हो उनके साथ दे ही तो है।
- 50:57अभी तुम्हारा देह तो मिटा नहीं, तुम भी मुझे सुन रहे हो।
- 51:01ध्यान से सुन लो वह मानस का जामा अब जब तुम्हें मिलेगा उसमें
- 51:07तुम्हारा कुछ भी नहीं होगा और प्रकृति अपने ढंग से तुम्हें मानस
- 51:12का जामा दे देगी। तुम भीतर बाहर के ऑर्गन अपनी
- 51:17मर्जी से नहीं बना सकते बल्कि आपके कर्मों के हिसाब से प्रकृति
- 51:22बनाएगी। गर्व के अंदर तुम्हारा उसमें कोई
- 51:28योगदान नहीं होगा। नतरी मोख्तवार हम वाकई की बाधा के
- 51:38यह जामा मैं नहीं हूँ यह गुरू कृपा से ही पता चलता है जामा देती
- 51:55है प्रकृति तुम्हारे कर्मों के अनुरूप नहीं अपनी किसी।
- 52:02लीला के अधीन इसमें तुम्हारा कुछ भी नहीं है।
- 52:07ज़रा सोचो तुमने क्या किया था? मन्नू शत्रुपा ने क्या किया था?
- 52:13आदम ईव ने क्या किया था? उनको क्यों मिला जाम?
- 52:21क्या मशक्कत की थी, क्या प्रयास किया था, जो शुरू शुरू में जो
- 52:25पहली महिला हुई या पुरुष हुआ उन्होंने मानस का जामा पहनने के
- 52:33लिए क्या किया था? कोई बता दे मुझे प्रयास आज बता दे
- 52:37आज से लाख साल बाद बता दे मैं जहाँ भी होगा मुझे उत्तर मिल
- 52:42जाएगा और मैं यहीं होगा, कहीं नहीं जाऊंगा तुम कहीं भी चले
- 52:50जाना, मैं तुम्हें वहीं मिलूंगा। तुम कुछ भी कर लो, तुम्हारे सब
- 53:14प्रयास बेकार है, इसलिए बाबा नानक ने कहा तुम मुक्त होने की इच्छा
- 53:21रखते हो दुख से। आज ये वाक्य सरे आम हो गया है के
- 53:30बाबा मैं मुक्ति चाहता हूँ, मैंने कहा किस्से कहते हैं इन बंधनों से
- 53:39तो मैंने कहा जब तुमने ये पता कर लिया कि ये बंधन दुख का कारण है
- 53:43तो बंधन तो तुमने ही बांधे हैं तो तोड़ भी दो इनको।
- 53:48ये बंधन तुम्हारे ही तो हैं तुम्हारे यहाँ नहीं है बंधन लड्डू
- 53:56गोपाल बेटा दे देता है तो फिर सभी बड़ा आसान रस्ता है।
- 54:06लड्डू गोपाल को बांध लें। फिर तुम कहोगे हमारे ऊपर कृपा
- 54:11होगी। अरे भाई परमात्मा ने 5050 अपने
- 54:17सारी कायनात की बैलेंस की रखनी है, तुम्हारे हिसाब से नहीं चलता
- 54:25हूँ। उसने जो देना है वो देता है, उसने
- 54:30बैलेंस रखना है। हाँ ऐसे तरीके हैं, पल्टू लिखा
- 54:39नसीब का संत देते हैं। फिर वो बात कुछ अलग की बात है।
- 54:47उसकी बात मैं पहले कुछ कर भी चुका हूँ, बहुत रह भी गई है वो कभी
- 54:54वक़्त आएगा तो कल तू लिखा नसीब का संत देते हैं, फिर संत पलट देते
- 55:02हैं। हिम्मत ए मर्दा, मदद दे खुदा इस
- 55:16शब्द को ज्यों की क्यों मत परिभाषित करो, उलट पुलट करो, मद
- 55:28दे खुदा। पहले परमात्मा आपकी कृपा करता है
- 55:35फिर फिर आप पर मेहर करता है नदरी मुख द्वार कर्मी आवय कपड़ा नदरी
- 55:42मुख द्वार यानी परमात्मा तो आप पर कृपा करता ही रहता है।
- 55:50चाहे वो जामा देने की कृपा हो, चाहे वो आपको सभी बंधनों से मुक्त
- 55:55करने की कृपा हो, वह तो कृपा बरसाता ही रहता है, वह मंगता नहीं
- 56:01है वड्डा दाता तिलना तमाम वह इतना बड़ा दाता है।
- 56:10कि तुम उससे बड़े बनने की चाहत में राम को बच्चा दिखा देते हो और
- 56:16अपने आपको ऊंचे कदका दिखा देते हो।
- 56:20शर्म आपकी है या नहीं? भगवान तक को आप नीचा दिखा देते
- 56:28है। ये अहंकार की आदत है और अहंकार एक
- 56:40व्याधि है। अहंकार एक रोग है, इसको जितनी
- 56:44जल्दी हो नेस्त नाबुद कर दो। तो संत अगर कहते हैं अहंकार को
- 56:50खत्म कर दो तो संत हिंसा की बात नहीं कर रहे हैं।
- 56:55जद भी मारपीट की बात हिंसा की बात हुआ करते हैं, संत कहता है मार
- 57:02डालो अहंकार को। क्योंकि अहंकार एक व्यादि है
- 57:09तुम्हारे लिए जैसे तुम रोग के कीटाणुओं को मार देते हो।
- 57:14डॉक्टर को कोई पाप नहीं लगता। ऐसे ही अहंकार के कीटाणु हैं
- 57:20तुम्हारे अहंकार का इल्ल्यूजन है तुम्हारे में।
- 57:25वहाँ तो कोई पाप भी नहीं लगता क्योंकि यह बिल्कुल सपने की तरह
- 57:30है और सपने को तोड़ना होता है। तुम्हें सपना आ रहा है, सुन्दर आ
- 57:38रहा है या बुरा आ रहा है और कोई तुम्हें झंझोड़ के उठा दे।
- 57:43और तुम्हारा वो संपन्न टूट गया तो क्या कोई हानि हुई?
- 57:51तुम्हारी कोई किसी का वध हुआ, कोई हिंसा हुई, कोई कतलोग अर्थ हुई,
- 57:59कुछ ऐसा हुआ जीसको तुम पाप कह सकते हो?
- 58:04बस तुम सोये थे सोये सोये अपने मनस पटल पर चल चित्र देख रहे थे,
- 58:13और तुम अपने आप ही को भूल गए थे और उस व्यक्ति ने किसी कारणवश
- 58:18तुम्हे जगाया और तुम जग गए। या कोई हिंसा नहीं।
- 58:29अहंकार से भरवा व्यक्ति इसी तरह सोया होता है, गोराड़े मर रहा
- 58:32होता है और संत उसे जगा देता है कि छोड़ो स्वपन देखा?
- 58:44तुम जागो, तुम्हारे पास आँखें हैं तो किसी को जगह देना कोई पाप
- 58:51नहीं, इसलिए मैंने अपने पुराने प्रवचनों में बोला कि मुझे पाप
- 58:55नहीं लगता है, मैं जो तत्व हूँ वह पर न।
- 59:01तीर तीर की न पानी की, न आग की किसी की भी पहुँच नहीं है, न
- 59:10चिंता की, न चिंता की। वहाँ तुम्हारा जाप पाट भी नहीं
- 59:14पहुंचता, यह ध्यान रखना। वहाँ चिंता तो पहुंचती ही नहीं,
- 59:20चिंतन भी नहीं पहुंचती। जो तुम फिकर करते हो, वो तो वहाँ
- 59:27पहुंचता ही नहीं, उसकी आग और उसकी गर्माईश वहाँ नहीं पहुंचती।
- 59:33वर्ण तुम्हारी चिन्ना भी नहीं पहुंचती, जो तुम रेपेटिशन।
- 59:38उर्फ वर्ड्स करते हो, राम भ्रमरा दे राते यह भी नहीं वहाँ पहुंचता
- 59:42यह भी हमारे यंत्र द्वारा उचचारित है होंठ ऊपर नीचे जीवा ऊपर नीचे
- 59:49हो रहे हैं लेकिन वहाँ तक नहीं पहुंचता, न चिंता।
- 59:58न सीता, न चिंतन, न चिंता वह इन सब चीजों से परे है हिम्मत ए
- 1:00:16मर्दा। मत देखो देखो बच्चो तुमने पूछा
- 1:00:26इसका अर्थ बताइए तुम गुम हो गए हो, ठीक किया, तुमने पूछ लिया यह
- 1:00:32है प्रश्न पूछने लायक था। वह हिम्मत तुमसे करवा लेगा, साहस
- 1:00:42उसकी देन है या बहुत अच्छे से बताऊँ तो वह साहस है, वह संकल्प
- 1:00:50है। और संकल्प साहस से भरा होता है
- 1:00:58इसलिए जो माफी वीर होते हैं वो संकल्प रहित होते हैं।
- 1:01:05जो माफी नहीं मानते वो संकल्प से युक्त होते हैं, सामर्थ्य से
- 1:01:10युक्त होते हैं। गाँधी पंचम के सामने जार्ज पंचम
- 1:01:16के सामने 36 इंच थी के 32 इंच थी छोड़ो बाहर 46 किलो था 46 किलो
- 1:01:27700 ग्राम। उचाई भी पांच फुट पांच इंच थी।
- 1:01:38हड्डियों निकली हुई कोई मांस जब भी नहीं थी, मैं गोट से से कहूँगा
- 1:01:45कहा करता हूँ अरे तुने बंदा भी मारा तो क्या मारा जब कोई बंदा
- 1:01:51था। तुने हार्ड भाई मास्क तो था ही तू
- 1:01:58ठीक से बंदा तो चुन लेता अच्छा इसके थोड़ा सा चर्बी तो जड़ा होता
- 1:02:08हसो मत। चर्बी वाले लोग है भाई हमारे देश
- 1:02:14में बहुत है और अपने आप को मस्कुलर बॉडी कहते है जहाज के ऊपर
- 1:02:25दिखाने के लिए खूब तेज गति से। वो चिड़िया होता, कोई अच्छा सा
- 1:02:32बंदा तुमने लटकना ही था, अगर शहीद होने की इच्छा ही हो गयी थी तो
- 1:02:40फिर किसी अच्छे मस्कुलर बॉडी को ढूंढ लेते, इसको भी मारा तो क्या
- 1:02:46मारा या कोई बंदा था? अरे मत हसो भाई ये तो बेचारा बड़ी
- 1:02:55मुश्किल से लाठी का सहारा लेके चलता था।
- 1:03:01दो सहारे लेकर तो इसे 1020 कदम तय करने होते थे।
- 1:03:06इतना बूढ़ा अठहतर साल का 2 साल बाद 80 का हो जाता अब तुम देखो 80
- 1:03:14साल के बूढ़े को मरने क्या बात रही है क्या?
- 1:03:20और फिर कहते है भागा नहीं है। अरे भाई भागने कौन देता?
- 1:03:25कोई भाग नहीं देता। भाग के देख लेता और बाहर पुलिस
- 1:03:30खड़ी थी। भाई ठीक है नहीं, निगरानी करके
- 1:03:34अंदर आने दिया। गाँधी का हुक्म था जब से सुना है
- 1:03:43मरने का नाम है जिंदगी सर पे कफन बांधे कातिल का इंतजार करते।
- 1:03:52सर पे कफ़न बांधे कातल को ढूंढ़ते कोई आ जाए और हमें मार जाए मैं
- 1:04:04पूछा करता हूँ गोडसे से? मेरे प्रवचन सुनने आते है अरे
- 1:04:09तुने मारा भी तो कैसा? बंदा मारा तो शर्मसार हो जाता है,
- 1:04:13क्या करूँ सब? वो भी मर गया और मुझे एनलाइटनमेंट
- 1:04:22वो 66 में मर गया मुझे एनलाइटनमेंट 85 में मिली नहीं,
- 1:04:25उससे पूछ लेता। तुने बंदा मरवाया तो कैसा मरवाया?
- 1:04:30या कोई बंदा था इससे ही डर के फिर मोटा बाइक से तो डर ही जाते है या
- 1:04:48है सूरज ऐसा अरे मत सो आये। हिम्मत ए मृदा मध्य दे खुद
- 1:05:08तुम्हारे सारे अर्थ परमात्मा से वृद्ध हैं।
- 1:05:13हाँ इनको अंडरलाइन। तुम्हारे संतों के सारे अर्थ संतो
- 1:05:19के शब्दों में बोले के सारे अर्थ परमात्मा के विरुद्ध जाते हैं,
- 1:05:25जबकि आज तक तुम मूड हो, तुम्हें यह भी नहीं पता चला कि संसार का
- 1:05:30एक कण भी तुम बनाने में समर्थ हो मिट्टी का, जल का।
- 1:05:35वायु का वस्तु विकृत करने में समस्त हो इसलिए बाबा नानक कहते है
- 1:05:42देखो इन तीन चीजों को खराब मत कर देना पावन गुरु, पानी, पिता,
- 1:05:47माता, धरती, महत्त्व और तुमने तीनों को सड़ाध कर दिया।
- 1:05:56मैं शराब की सारी फैक्टरीज़ बंद कर दूंगा, जो पानी नमामि गंगे की
- 1:06:04बात करते हो, कोई 20,000 30,000 करोड़ देश का बर्बाद करने की
- 1:06:09आवश्यकता नहीं। एक तो जिसने गंगा स्नान करना हो
- 1:06:16अपनी बाल्टी साथ लेके आइए या उनको बाल्टियां वहाँ मिलेंगी गंगा के
- 1:06:22भीतर में कुजना बाल्टी भरो मैं जब भी कभी नहाया हूँ गंगा में।
- 1:06:30वहाँ जो लगी होती है संगल्स मैंने कभी उसका सहारा लेकिन कूदा नहीं
- 1:06:35सुना बाल्टी लिखे वहाँ से गंगा जल है और बाहर ही नहा लिया।
- 1:06:45हर हर गंगे ही तो कहना होता है। बस पवित्र हो गए और जो रेंजेस थी,
- 1:06:52इसके भीतर जो कोई संत कभी समा गया था वो आय तक चल रही हैं।
- 1:07:00जब भी कभी मैं न आया तो मैं बाल्टी से न आया।
- 1:07:10कोई व्यक्ति गंगा के भीतर छलांग नहीं लगा सकेगा।
- 1:07:15इससे प्रदुषित होती है और गंगा को 1 साल में दो महीने तक बंद रखा
- 1:07:23जाएगा। हैलो?
- 1:07:24गंगा व्यक्त हो गए। 20,000 करोड़ की क्या जरूरत है?
- 1:07:33करोना काल में मुझे बाबा कहने लगे, जब आए मुझे आदेश दिया
- 1:07:40उन्होंने तब मैं ठीक ठाक था। उस वक्त शरीर को छोड़ दिया करता
- 1:07:45था। एस्ट्रल ट्रैवलिंग बड़े मज़े से
- 1:07:50करता था। बाबा कहते चलोगे मैंने कहा चलेंगे
- 1:07:56कहते है फिर चलो मैंने देहा से बाहर निकला।
- 1:08:06सिल्वर कॉर्ड से आदमी जुड़ा रहता है।
- 1:08:09ये बातें आपको मैंने बहुत पहले बताती हूँ।
- 1:08:12नास्तिक व्यक्ति इन बातों को न सुनें क्योंकि खिजेगा व्यर्थ में
- 1:08:18ही अपने खून को गर्म करेगा और तोड़ेगा 30 को तो बाबा कहते है
- 1:08:30कैलाश चलना मैंने कहा हाँ चलना हम चले, रास्ते में गंगा पड़ी कहते
- 1:08:42है ये देखो गंगा तुम्हारी। ऐसा निर्मल जल वाह नीचे पड़े
- 1:08:49सिक्के नजर आ रहे थे। नीचे पड़े सिक्के नजर आ रहे थे।
- 1:09:07क्यों बहुत दिनों से वहाँ कोई आया ही नहीं था लॉकडाउन के कारण?
- 1:09:14ये बात मैं 2021 की कर रहा हूँ। गाहे बगाहे मैं बहुत बार गया आता
- 1:09:27हूँ। एक बार में गया, इतने दूषित पानी
- 1:09:31था, इतना दूषित पानी था। कौन दूषित करता है तुम दूषित करते
- 1:09:35हो? गंगा साफ हो गई दो महीने के लिए
- 1:09:41लॉकडाउन फिर जाके देखो गंगा के पानी के सब निर्मल मिलेगा ऐसे ही
- 1:09:50नहीं कहा कभी निर्मल मान जन सोई मोही बाबा।
- 1:09:57जूं गंगा को नीर तब भाई गंगा का नीर पवित्र हुआ करता था।
- 1:10:03आज तो तुमने भगा दिया शराब की फैक्ट्रियाँ पता नहीं कौन कौन सी
- 1:10:07फैक्ट्रियाँ सब बंद करवा दूंगा सब बंद करवा दूंगा दुष्टों अब
- 1:10:16तुम्हारी खैर। तुम क्या कुछ गंध कचरा घोंड देते
- 1:10:22हो? हम घर ले के आते हैं उसको गंगा जल
- 1:10:25में हम पंचामृत बना के रोज़ पीते हैं, यह सनातन है क्या?
- 1:10:33तुमने गंगा को, उसके मुख्य अंश को जो चरना, मृत में डाला जाता है,
- 1:10:38उसके मुख्य अंश को ही तुमने दूषित कर दिया और तुम खुद को सनातन का
- 1:10:43अपमान नहीं सहेंगे, ऐसी बातें करते हो, तुम्हें लज्जा नहीं आती?
- 1:10:50टाट में एक दरअसल डर रही है तुमने।
- 1:11:02पहले कृपा करता है ईश्वर तो कृपा किस चीज़ की करता है?
- 1:11:07हम इस बात पे आगे है ईश्वर संकल्प का स्वरूप है चेतना संकल्प में
- 1:11:14कोई फर्क नहीं है और जब वह आपको। चेतनता में वृद्धि करता है, तो
- 1:11:21आपकी साहस में वृद्धि होती है। अब ये वैज्ञानिक दृष्टिकोण को
- 1:11:26अच्छी तरह से समझ लो। आप वह संकल्प की साहस की मूर्ति
- 1:11:33है, सागर है। वह जब कृपा करे मतलब आप पर बरसेगा
- 1:11:42और जो ही वो आप पर बरस गया तो आपका कॉन्सेस्नेस लेवल 100% हो
- 1:11:48जायेगा और कॉन्सेस्नेस लेवल 100% हो जायेगा।
- 1:11:57तो आपका डैयर कार्य से सौप्रदिक्षित हो जाएगा, मृत्यु से
- 1:12:04निजात मिल जाएगी और तुम मरने से डरोगे नहीं मृत्यु तुमसे डरेगी,
- 1:12:10तुम मृत्यु से नहीं डरोगे कारण कारण परमात्मा की कृपा।
- 1:12:17नगरी मुख्य द्वारा मद दे खुदा खुदा ने मदद की।
- 1:12:26यह शब्द संसारिक नहीं है। तुमने संसारिक बना लिया तो यह
- 1:12:32विकृत हो गया। बहुत से शब्द संसारिक हैं नहीं,
- 1:12:39लेकिन तुमने बना दिया एक शराब सुरा यह संसारिक थोड़ी है।
- 1:12:47यह तो उस क्षेत्र की गुणवत्ता है। जीस क्षेत्र में हमने पहुंचना है।
- 1:12:54मंजिल की गुणवत्ता है मधोसी का अरण चारो तरफ जो फेरे, सुगंधित
- 1:13:06हवाएं बहते ठंडी शीतल फुहारें। और आनंद ही आनंद चारों से फेरे चम
- 1:13:19और उमर खैया अमीर खुसरो इनकी वाणियों को बिगाड़ लिया गया।
- 1:13:40ये सुर का जिक्र करते हैं तुम सुर समझते हो?
- 1:13:44ठेके पे बिकने वाली सुर है हमारे शब्द आता है सुर असुर जिसे सुर
- 1:13:57पान करते हैं वो सुर। जिसे असुर पान करते है वह असुर तो
- 1:14:09सुरा शब्द सुर से बनाएं जो सुर यानी मदहोसी को पी जागता है।
- 1:14:19उस शराब को पी जाता है अब क्या कहें, अल्फाज़ हैं अल्फाज़ तो न
- 1:14:25संसारी कहें और न ही अध्यात्मिक हैं, मात्र अल्फाज़ हैं।
- 1:14:32लेकिन ये शब्द थे आध्यात्मिक अमीर खुशरोखे।
- 1:14:37और तुमने डाल दिए संसार में कि कर्म करो तो फल मिलेगा, नहीं तो
- 1:14:43नहीं मिलेगा। अरे भाई बहुत से कर्म लोग करते
- 1:14:46है, दिन भर रात मशक्कत करते है, मेरे पास रोज़ बैगाम आते है बाबा
- 1:14:50कोई फल नहीं खूब मेहनत करके देख। डॉक्टर खूब मेहनत करता है।
- 1:14:55ईमानदार डॉक्टर बाद में हाथ खड़े कर लेता है।
- 1:14:58क्या कहते है घर ले जाओ, इसकी सेवा करो।
- 1:15:00अब क्या खाद सेवा करेंगे? या तो मुर्दा है, कहने का ढंग है
- 1:15:06सिर्फ के हमारे हाथ खड़े है। यह शब्द है अमीर खुसरो का और अमीर
- 1:15:21खुसरो आध्यात्मिक व्यक्ति पर। ऊचाइयों को छुए हुए गगन मंडल पर
- 1:15:28विराजमान हुए।