Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Jan 26 - कर्म का असली गणित: अनजाने में हुए पाप का क्या फल मिलता है? कीड़े-मकोड़े मरने का पाप लगता है?
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- 0:17स्वामी अमृत्युनंद पंचाल पुन से पूछते हैं।
- 0:35बहुत से व्यक्ति अच्छे कर्म करके भी दुखी और बहुत से व्यक्ति बुरे
- 0:49कर्म करके भी जिंदगी का लुत्फ उठा रहे हैं।
- 0:57कर्मों की इन व्यवस्था को कृपा करके गहन तन तल पर जाकर व्याख्यात
- 1:08करने का कष्ट करें। अपने जीवन की कहानी से।
- 1:20स्वामी अमृता आपके प्रश्न का जवाब दूंगा।
- 1:30मैं 1415 वर्ष का हुआ करता था। एक बिल्ली हमारी छत के ऊपर है
- 1:48सूहे को पकड़ के खा रही थी मुझे माता ने आवाज़ दी।
- 2:03कि बिल्ली ने चूहे को पकड़ लिया खा रही अभी पूछ उसके मुँह में है,
- 2:12मैं जल्दी से भगा हो कर चला गया जाक्र मैं।
- 2:18बिल्ली को पकड़ना फर्स्ट फ्लोर के ऊपर था, बिल्ली ऊपर से कूद गई और
- 2:37करीब 15 फुट के ऊपर तो था ही। ऊपर कूदने से बिल्ली मर गई चूहा
- 2:46बच गया। काफी देर से सकती रही बिल्ली।
- 3:03और मुझे उस कर्म का फल थोड़ा सा मिला।
- 3:13मैंने जब इस प्रश्न इस वारदात का। विस्तार मांगा तो मुझे विस्तार
- 3:25दिया गया। के फल मिलते हैं मंशा प्लस कर्म।
- 3:41इन दोनों का जब संयोग हो जाता है तो फल मिलता है।
- 3:49अकेली मंशा और अकेला कर्म यह फल तो देते हैं पर बहुत कम देते हैं।
- 4:09क्योंकि मेरे मन में मैं ऊपर भागा दौड़ा बच्चा ही था किशोर अवस्था
- 4:20में भी नहीं आया था खूब तेजी से भागा और बिल्ली मुझे देख कर।
- 4:29भागने लगी। फिर जो बाजरा होता है, तीन चार
- 4:34फुट का उसके ऊपर से उसने छलांग लगाई और नीचे गिर पड़ी।
- 4:41नीचे सड़क थी, वह तड़पती हुई मर गया।
- 4:48चूहे की पकड़ उसने छोड़ दी। क्या हुआ भाग्य?
- 4:57मुझे इसका फल तो मिला लेकिन बहुत कम फल मिला।
- 5:10विस्तार से जब मैंने पूछा, कर्मों के फल का तो बाबा ने बताया कर्म
- 5:18मनिषा और कर्मणा जब दोनों के संयोग से कर्म होता है।
- 5:28तो वह पूर्ण फल ही बहुत होता है। अगर सिर्फ मनशा हो और तुम कर्म न
- 5:37करो तो उसका फल 5% बाबुश करो और अगर सिर्फ कर्म।
- 5:48और मंशा न हो। आपकी तो भी 5% मंशा और कर मना जब
- 5:56दोनों बैठ जाएंगे 200% अपने जीवन की कहानी सत्य कहानी किसी ने कहा
- 6:10बिल्ली मर गई है। सोने की बिल्ली बनाकर दान करनी
- 6:16होगी। पिताजी इतने अमीर तो थे नहीं तो
- 6:25उन्होंने वैसे कुछ थोड़ा बहुत दान बंद कर दिया।
- 6:35पहली बात तो समझ लेना अगर कभी किसी से छोटे मोटे पाप हो जाए, जो
- 6:48पाप करने की इच्छा न हो, मंशा न हो, कर्म हो जाए।
- 6:57जैसे बहुत बार हमारे से कीड़ियां मर जाती है किचन में क्योंकि वहाँ
- 7:11पर आटा होता है, बिखरा पड़ा और भी चीजें खाने वाली होती है और
- 7:18कीड़ियां आ जाती है कीड़ियां खाने के लिए आती है।
- 7:24और हम वहाँ से पोछा फोड़ देते है, कीढ़ी मर जाती है, मंछा तो न आती
- 7:31बल्कि मन दुखी होता है और मेरे साथ प्रश्न भी बहुत आते है।
- 7:37बाबा ऐसे? अब इस हत्या का निराकरण कैसे
- 7:45करें? नहीं, यह हत्या नहीं है।
- 7:52इसका फल सिर्फ आपको 5% लगेगा और उसकी एवज में।
- 7:59हमारे ऋषि बड़े समयदार थे, जीवंत प्राणी को थोड़ा भोजन दे दो, उसको
- 8:08जीवन जीने में सहायता करो, पहली रोटी गउ की आखिरी रोटी कुत्ते की।
- 8:19आप जो किचन में है अब उसका फल बराबर हो जाएगा पैदल क्योंकि
- 8:26जानबूझ करने की हमारे परंपरा चल पड़ी है।
- 8:37हमारे आज तक पहली रोटी माता पकाती पहली रोटी गाय को।
- 8:46आखिरी आखिरी का तो कोई बात नहीं पहली का मुश्किल हो जाता है,
- 8:51बच्चों को भूख लगी होती है और माँ कहती है पहली रोटी गाय वहाँ
- 9:01मुश्किल खड़े होते हैं। लेकिन ऋषियों ने सोच समय के बनाया
- 9:08था। अगर आपके मन में कोई पाप करने की
- 9:14तमन्ना आ गई आपने वो पूरी नहीं की।
- 9:23या किसी कार्य वंश पूरी नहीं हो सकी तो आपको उस कर्म का फल नहीं
- 9:28मिलेगा अगर आपके मन में मंशा ना होती लेकिन आप से बात हो गया
- 9:39अनजाने में हो गया। तो आपको उसका भी फल नहीं मिलेगा।
- 9:44परमात्मा की सृष्टि के हिसाब से मैं जवाब दे रहा हूँ, क्योंकि इस
- 9:50पुत्र ने प्रश्न पूछा है पर आप परमात्मा की सृष्टि के हिसाब से
- 9:57दंड दोगे? तो उसकी सृष्टि में दंड कैसे होता
- 10:01है, उसकी सृष्टि में दंड कैसे होता है?
- 10:08अकेला कर्मणा और अकेला मनसा वाचा की तो बात छोड़ दो।
- 10:17वाचक की बात छोड़ दो मनसा वाचा कर्मणा मनसा और कर्मणा।
- 10:27जब दोनों मिलेंगे तो 100% दल मिलेगा।
- 10:30आपको अकेला मनसा और अकेला कर्मणा? पांच 5% कर्म इसलिए रसोई में काम
- 10:41करने वाली माताएं, बच्चियां, बहनें इस दोष से मुक्त हो जाएं।
- 10:57कि उन्होंने कोई पाप किया नहीं या कोई पाप नहीं, वरन तुम्हारी इच्छा
- 11:05तो ये है कि किड़ी न मरे, लेकिन फिर भी मर जाती।
- 11:17तो दोस्त तो लगता है, लेकिन 5% और वह कोई इतना दोष नहीं होता।
- 11:34एक और प्रश्न है, ईश्वर के हिसाब से राजनीति में 100% से स्पष्टता
- 11:44लाने के लिए परमात्मा की प्रणाली क्या कहती है?
- 12:03मैंने आपसे एक जिक्र किया और जिसके न होने के कारण न्यायालयों
- 12:10का बोझ बढ़ता जा रहा है, झूठे गवाह भी।
- 12:18सच्चे गवाह मुकर रहे हैं। उदाहरण उनका मैं साफ साफ उदाहरण
- 12:28हूँ हमारे प्राइम मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी।
- 12:39ये शुभ्रमण्यम स्वामी कहते लड़कियों से छेड़छाड़ करते थे।
- 12:44क्या इसका चरित्र उजागर नहीं होना चाहिए था?
- 12:49हम इतने वैज्ञानिक जमाने में जी रहे हैं।
- 12:54और फिर भी इतने बुद्धू क्यों है? क्योंकि वैज्ञानिकता को अपनाया
- 13:01नहीं गया। वैज्ञानिकता को सिर्फ खोजा गया
- 13:09है। पीछे से कतलोगारक हत्या के करम ले
- 13:18के आया था। लोग कह देते हैं वो तो झूठे थे।
- 13:23न्यायालय ने फैसला दे दिया। देखिये न्यायालय तीसरा नेत्र नहीं
- 13:30रखते हैं, पहली बात तो मैं बता। अगर कोई न्यायालय का जच तीसरा
- 13:41नेत्र रखता हो तो कृपया मेरे से संपर्क करें।
- 13:48न्यायालय का कोई भी जच। वासना से तो बेशक मैंने ऐसे रुख
- 13:58देखे हैं। बहुत पुरानी बात है, मेरे एक
- 14:03मित्र का बेटा जैज लगना था, मैं राम जी का रोल किया करता था।
- 14:13वो जो कह तो राम जी राम जी प्रभु मेरी भी अर्जी लगा दो 55,00,000
- 14:21तो लगा दिए मैंने अब और क्या लगाऊ बेटे को मैंने जज लगाना है।
- 14:32तो मैंने कहा थोड़े शोर लगा दे, जब खरीदने ही लगा है तो सब्जी की
- 14:38बोली होती है ना? वो कहता है ₹2 कहता है ₹2.25 ढ़ाई
- 14:40रुपए ₹3 जिसकी ज्यादा बोली होती है वो जीत जाता है ऐसी बोलियाँ
- 14:44लगती है आंच। तो आखिर में बात बन गई बात क्या
- 14:55बन गई? आखिर में उसका बेटा भी जज लगा और
- 15:00उसकी धर्मपत्नी भी जज लगी। बेटे की धर्मपत्नी और दोनों आज भी
- 15:07जज है। नाम नहीं पता ये मेरा काम है नाम
- 15:17बताऊँगा। मैं उन अपराधियों का जिनको मैं
- 15:21100 प्रतीक्षा थी जानता हूँ कि ये अपराधियों।
- 15:26अन्यथा नाम लेने की जरूरत किसमें होती है?
- 15:30ये प्राती है भाई तो इसका हल्का है ज़रा दिखिएगा जो व्यक्ति पीछे
- 15:38से कतलो गारत के अपराध ले के आता है, वह देश के सर्वोच्च पद के ऊपर
- 15:52आसीन होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए?
- 15:58कोई भी नहीं कहेगा, होना चाहिए इसको जूते मार के भगाना चाहिए।
- 16:05फिर ये कह देगा ये तो न्यायालय ने कह दिया कि दोषमुक्त है नहीं।
- 16:09न्यायालय की बात मैं तो नहीं मानता क्योंकि मैं जानता हूँ
- 16:15तीसरे नृत्य का रखने वाला व्यक्ति अच्छी तरह से जानता है कि जिसका
- 16:20तीसरा नेत्र नहीं खुला। वह मूर्ख है।
- 16:27वह जजमेंट न्याय के रूप में नहीं देगा।
- 16:30वह जजमेंट फैसले के रूप में देगा। सुन के इधर का सुन लिया, उधर का
- 16:35सुन लिया और फिर देखो यह जजमेंट का ख्वाब है।
- 16:42तेज तर्रार तार के जीत जाते हैं जो झूठे होते हैं और हल्के फुल्के
- 16:54वकील हार जाते हैं जो बिचारे ज्यादा।
- 17:02तर्कवादी नहीं होती? जिनकी बुद्धि इतनी पैनी धार नहीं
- 17:08रखती चाहे वो सच का पक्ष ही लेते हो लेकिन वो हार जाते है।
- 17:13अक्सर ही यह चलता है न्यायालय में आप देख लेना इसमें जज का प्रदूषण।
- 17:22तो क्या होना चाहिए? बस मेरी सार ऊर्जा, जीवन की ऊर्जा
- 17:31इन्हीं कामों पे किसी ना किसी तरह व्यक्ति अपने गहरे तलों पे पहुँच
- 17:38के। अगर तीसरा नेत्र जागृत न कर पाए
- 17:42तो कम से कम तीसरे नेत्र के करीब आ जाए।
- 17:50वे शुद्धिचक्र से पार हो जाए, थोड़ा सा वह न्याय को ठीक ठीक ढंग
- 17:56से कर पाएगा। पूर्व न्याय नाम से, लेकिन न्याय
- 18:01के करीब व्यवस्था वह बैठा देगा। मेरा सारा प्रयास सीख रहा संसार
- 18:11को बदलना बहुत आसान है आध्यात्मिकता के द्वारा।
- 18:21तुम्हारी विद्या तुम्हारी विद्यालय बेकार क्योंकि वो
- 18:28तुम्हें सूचनाएँ देते हैं, वो तुम्हें दक्षता नहीं देते,
- 18:36सूचनाएँ देते। मैं तुम्हे दक्षता देना चाहता हूँ
- 18:43सुप्रीम कोर्ट तक के जज अभी बहुत से जज मैंने देखे अभी मूल आधार पे
- 18:56केंद्रित स्वादिष्टान पे मणिपुर पे।
- 19:03कुछ थोड़े से अनाहत पे क्या किया जाए, ये न्याय कर पाएंगे नहीं।
- 19:15और एक बात को और भी ध्यान में रख लेना जीतने निचले तल पर तुम हो के
- 19:22मूलाधार। स्वादिष्ठान मणिपुरक उतने ही तुम
- 19:27सिनशय से ग्रस्त हो गए और जितना सिनशय से ग्रस्त व्यक्ति होता है,
- 19:34उतना ही निर्णय लेने में नपंसक होता है इसलिए भोगी व्यक्ति।
- 19:43ठीक से निर्णय कर नहीं पाता क्योंकि भोग ही व्यक्ति का भोंक
- 19:51भोंकते वक्त अगर वह एनलाइटेड न हो, उसका दल गिरकर मुल्लत पर आ
- 19:59जाता है। बहुत से लोग मेरे से दीक्षा ले
- 20:04जाते है काम फिर वही शुरू रहता है चोरी सफर और मैं जब देखता हूँ फिर
- 20:15दूसरी बार आते है ये क्या कबाड़ा कर दिया उसने?
- 20:20फिर फिर उसके चक्करों को जगाता हूँ, उठाता हूँ, लेकिन क्या किया
- 20:32तुमने? दीक्षा लेने के बाद तुम्हारा
- 20:37कर्तव्य था जीस चक्कर पे तुम पहुंचा दिए गए।
- 20:45बलपूर्वक उस चक्कर पर बने रहने का अधिष्ठित रहने का प्रयास करो,
- 20:56अच्छे कर्म करके मानवता की सेवा करके झूठ न बोल के।
- 21:04सत्यवादिता को अपना के प्रेम से आनंद से अपना जीवन व्यतीत करके
- 21:15शुद्ध शाकाहारी भोजन करके तेज मिर्च मसालों से युक्त।
- 21:24ये चाउमीन, चुग्गा वगैरह न खा के अपनी उस शक्ति को उस चक्कर तक
- 21:32सीमित रखो, नीचे न आने दो, लेकिन में जब दूसरी बार व्यक्ति आता है
- 21:37दो चार महीने के बाद मैं देखता हूँ फिर वो ही मूलाधार काम।
- 21:45क्या किया जाए ये है तुम्हारा कर्तव्य है।
- 21:55गुरु ने अपना काम कर दिया 30% लोग अपनी ऊर्जा को।
- 22:03वहीं रखे होते है, थोड़ा सा ऊपर भी ले जाते है और उन्हें देखकर
- 22:10मुझे प्रसन्नता होती है। 70% तक के लोग अपनी ऊर्जा को करा
- 22:17देते है और फिर स्वादिष्ट स्थान पे आ जाए।
- 22:21तो फिर मणिपुर पे आ जाएं या बिल्कुल घर पे जाएं, मूलाधार पे आ
- 22:26जाएं तो मेरा प्रयास व्यर्थ हुआ। फिर ये कहेंगे बाबा आपने वायदा
- 22:36किया था, हाँ किया था फिर क्या झूठ बोलते हो?
- 22:41नहीं फिर ये क्या हुआ? ये तुम्हारी एआसी के कारण होगा
- 22:50तुमने छह बार सूट बूट बदले होंगे तुमने हवाई यात्राएं की होंगी
- 22:57बाहरी मुल्कों पे जाके। तुम्हारे कामगारों ने चटाईयां
- 23:04बिछाई होंगी। ऐसा व्यक्ति मलाधार पर ही स्थित
- 23:09रहेगा और कहाँ रहेगा? और मूलाधार पर स्थित होने का मतलब
- 23:14निर्णय की स्थिति संख्यात्मक। अगर शंख आत्मा वनिश्चिति का
- 23:21चक्रों के हिसाब से मैं व्याख्यान करने लग जाऊं तो वह व्यक्ति जो के
- 23:27मूलाधार पे स्थित है, वह शंशाह है।
- 23:35जैसे जैसे आप मूलाधार से ऊपर उठे। और आगया चक्कर पे पहुंचे और कम से
- 23:45कम विशुद्धि चक्र पे पहुंचे तो आप निर्णय लेने की क्षमता से युक्त
- 23:55हुए फिर जैसे आगया चक्कर पे पहुंचे।
- 24:00तो निर्णय लेने की क्षमता से भरपूर हुए ध्यान रखना।
- 24:05मैंने दो शब्द बोले निर्णय लेने की क्षमता से युक्त हुए जब तुम
- 24:16विश्वुद्धि पे पहुंचे जब तुम अज्ञाप्य पहुंचे।
- 24:20तो निर्णय लेने की क्षमता से भरपूर हुए वहाँ तुम पूर्ण पूर्ण
- 24:25निर्णय कर पाओगे तीसरे नेत्र क्या मैं जालतों में गया हूँ मुझे
- 24:37ज्यादातर जज। बिल्कुल ईमानदारी से बोलता हूँ,
- 24:46अनाज से ऊपर नहीं मिले कोई व्यक्ति मुझे विष्णुती चक्र के
- 24:50ऊपर मिले और ज्यादातर उनमें से ज्यादातर।
- 24:59के उपर खाओ पियो करवाना। ये जो 55,00,000 रूपये दे के
- 25:10व्यक्ति आज जैसे लगा कल को मुवक्कलों से ये खैर गुजरेगा।
- 25:20यह फिर निर्णय को बेचेगा कि नहीं बेचेगा?
- 25:26तो फिर गलती किसने की? गलती उसने की जिसने इसमें इसको जज
- 25:33बना दिया। कोई काबिलियत के विस पे बने
- 25:38शुद्ध। और कोई काबिलियत के वेश पे न बने
- 25:45दान देके बने वह अशुद्ध वह फिर कोई भी फैसला कर देगा वह तुच्छतम
- 25:57फैसला। वह फैसला विपरीत भी कर सकता है।
- 26:01ध्यान मेरे को तब मैं कह रहा था जब मोदी जी महाराज इतने अपराधों
- 26:15से युप्त होकर आए थे अपराध। तो लगे थे जिन न्यायालयों ने
- 26:26इन्हें मुक्त किया। जिन न्यायालयों ने उन्हीं
- 26:29न्यायालयों ने इन्हें डिग्री दे दी, उन्हीं संस्थाओं ने इन्हें
- 26:34डिग्री दे दी। ये सब अंधे लोग हैं, कोई डिग्री
- 26:38दे देता है। कोई हाईकोर्ट का जच अपनी कुर्सी
- 26:48को छोड़कर बीजेपी जॉइन कर लेता है।
- 26:50भला इसमें कितनी सी शुद्धता बची होगी, जो एक भ्रष्ट पार्टी को
- 26:59जॉइन करे। नहीं नहीं, गुस्सा मत करो यहाँ
- 27:06गुस्सा निकल चलेगा भी हमारी आँखें खुली हैं 70,000 करोड़ रुपए और
- 27:18कितने ही अपराधी हम बहुत देखते हैं, फाइल खुल गई।
- 27:24चलो गंगा स्नान करो और दो 3 दिन के बाद अब बीजेपी के मंच के ऊपर
- 27:31दिखेंगे। ये क्या है?
- 27:38तो फिर क्या व्यवस्था होनी चाहिए? बाबा व्यवस्था होनी चाहिए।
- 27:43जब किसी व्यक्ति को हम इतनी सारी शक्ति दे देते है, क्या तुम किसी
- 27:53याचक को किसी मंगते को जो भिक्षा पत्र ले के आया है उसे अपनी
- 27:59तिजोरियों में रखा हुआ धन मार्ग? डाल देते हैं उसके भिक्षापत्र में
- 28:05तुम कहोगे ना क्या देते हैं उसे पैसा दो पैसा ₹2410 या खाने को
- 28:16रोटी, दाल और चाय दूध? बस यही देके बगास भी तो जाओ यहाँ
- 28:22से जीसको आप देश की सर्वश्रेष्ठ कुर्सी दे रहे हो तो फिर क्या
- 28:31होना चाहिए? पैमाना जनता ने चुन दिया है,
- 28:35बिलकुल चुन दिया है। लेकिन सत्ता सत्ता सीन होने से
- 28:44पहले उसका नार को टेस्ट होना चाहिए।
- 28:49इसलिए मैंने आपसे कहा रेप लोग छोड़ते है और मैं हीजड़ों का
- 28:58मुल्क बना दूंगा। क्योंकि लोग रेप छोड़ेंगे नहीं।
- 29:03आज अंकिता भंडार कल, कोई और परसों, कोई और और कल कोई और था
- 29:14जिसके लिए सारी दुनिया मोमबत्तियां, कैंडल, मार्शन का
- 29:24क्या स्त्री होना अपराध है। स्त्रियों की सुरक्षा में इतने
- 29:31ढील कम जब भी हम किसी व्यक्ति के हाथ में शक्ति देते हैं, उसकी
- 29:40योग्यता। परिरक्षित होनी चाहिए।
- 29:47प्रमाणित होनी चाहिए प्रमाणित कैसे करें हमारे पास टेस्ट है
- 29:53नार्को नार्को टेस्ट में व्यक्ति को अर्ध बेहोशी की अवस्था में
- 30:01लाया जाता है। और पूरे होश में नहीं होता और
- 30:05पूरी बेहोशी में भी नहीं होता। अर्ध बेहोशी, अर्ध क्षेत्र
- 30:09व्यवस्था वहाँ पर उसको सॉल्ट दिया जाता है।
- 30:15इंजेक्शन दिया जाता है सोडियम पेंटाथर।
- 30:21सोडियम पेंटाथल इसको ट्रुथ सीरम भी कहते हैं के नाम से भी जाना
- 30:27जाता है। यह एक बार्बाच्यूरेट सैडिएटिव है
- 30:33सैडिशन ले के आता है और व्यक्ति इसके प्रभाव से।
- 30:41जो बोलता है वह सत्य बोलता है, व्यक्ति की चेतना सोच कम हो जाती
- 30:48है जिससे वह बिना ज्यादा सोच विचार के स्पष्ट उत्तर दे देता है
- 30:56और स्पष्ट उत्तर का मतलब है सत्य। नार्को टेस्ट कभी फैल नहीं होता,
- 31:09नार्को टेस्ट शक्ति को सामने ले आएगा।
- 31:12ज़रा देखो अगर प्रधानमंत्री कुर्सी पर बैठने से पहले।
- 31:22तुम सत्ता दे रहे हो, उसे तुम अपने लाकर का सारा सामान हीरे,
- 31:27जोहरात वगैरह सब उसे सौंपने जा रहे हो जल और अगर वह उसका
- 31:32दुरूपयोग करना शुरू कर दे, तो तुम क्या करोगे?
- 31:35और खासतौर से वह व्यक्ति जो घर के गहने ले के भागा था।
- 31:40इतिहास को तो देख लेना चाहिए तो वह चोर की मृत्यु का है, उसे हम
- 31:56लाकर का सारा कीमती सामान सौंपने जा रहा है।
- 32:02ही शुड बी जज। वह स्वभाव से कैसा है?
- 32:07ईमानदार तो होना ही चाहिए ना आज जो परिणाम आते हैं क्या होता अगर
- 32:17तुम नार को करा लेते पहली बात? भक्तों को झूठ बोल कर वर्क लाया
- 32:26नहीं जा सकता था। आज इतने भक्त न होते अगर आज भी
- 32:30तुम करा लो मैं तुमसे कहता हूँ जनता सिर्फ या न कहे वोट चोर
- 32:38गद्दी चोर न जनता कहे इस करना को। और जब सारी जनता यह कहेगी कि इसका
- 32:49नार्को करो और नार्को में अगर यह व्यक्ति साफ पायेगा तो दंड मैं
- 32:55सहने को तैयार हूँ। अगर नारकों में यह व्यक्ति
- 33:03बिल्कुल साफ पाया गया, लेकिन ध्यान रखना नारकों वाले भी खरीदे
- 33:08जा सकते हैं व्यक्ति हम लेके हैं वे नारकों के लिए जो प्रजातंत्र
- 33:19को खरीद सकता है। जो राजीव कुमार, ज्ञानेश कुमार को
- 33:24खरीद सकता है जो सभी संशोधकों को खरीद सकता है।
- 33:27वैध खाके या धंध खाके वह व्यक्ति नारकों को भी खरीद सकता है।
- 33:34नारकों का व्यक्ति पहले तो मैं ही एक्स्पर्ट हूँ।
- 33:36नारकों का। तो मैं ध्यान कर रहा हूँ मैं किसी
- 33:44भी सत्य को उगलवाने में लक्ष्य अगर पहले दिन गद्दी पर बैठने से
- 33:51पहले क्या परीक्षा नहीं होनी चाहिए, इसकी हम सारा देश सौंप रहे
- 33:57हैं और कैसे देश को यह बेच रहा है?
- 34:01और उल्टा नेहरू जी को रुलाना दे रहा है, उसने कुछ नहीं किया।
- 34:09यह कितनी देर तक बात चलेगी? आखिर तो नवरतन खत्म भी होंगे।
- 34:15फिर क्या बेचेगा जब रात बेचने से सूझ गया था।
- 34:20घर से शुरू किया था और फिर कुछ ही लोग क्यों दिखते हैं?
- 34:27भाई के लिए जनता भूख से मरी जा रही है।
- 34:32क्या जनता पांच किलो अनाज के ऊपर ही गुज़ारा करते रहेंगे?
- 34:35क्या जनता को ये शब्द बोलकर? नमक हराम मत कर देना यह शब्द सुना
- 34:43के लोगों की भावनाओं को बहकना तो इसका बायका होना चाहिए बाबा नार
- 35:01को। और अगर नार्को से भी कोई बच जाएगा
- 35:10तो मुख्य गद्दी पर बैठने वाला मेरे पास ले आओगे।
- 35:14मेरे पास ऐसी गद्दियाँ हैं जो नार्को उसके बराबर।
- 35:21सोवा ऐसा है, फिर मेरे सामने झूठ नाम बोल सकेगा, मैं उन किरणों को
- 35:29उत्पन्न कर लूँगा, सभी प्रकार के किरणों को उत्पन्न करना, सभी
- 35:33प्रकार के वेव को उत्पन्न करना, मैं भली भांति जानता हूँ, मैं इस
- 35:38चीज़ का मांस। अभी कल, परसों 14 तारीख को मकर
- 35:44संक्रांति का दिन दीक्षा तो देनी नहीं थी।
- 35:49मैंने कहा सिर्फ दर्शन तो लोगों ने सोचा कि दर्शन बस जाएंगे, देख
- 35:56के चले जाएंगे। लेकिन नहीं।
- 35:57मैंने नई प्रणाली याद करके डेल्टा वेव्स फिर बोल रहा था।
- 36:03मैंने कहा आज डेल्टा वेव्स इनको पिलाते हैं क्या होती हैं डेल्टा
- 36:06वेव्स मैं मैंने अपने भीतर का समुद्र खोल दिया।
- 36:13नार्को का? बाप है ये डेल्टा इस समुद्र के
- 36:27आगे तुम झूठ ना बोल पाओ डेल्टा वेव्स को मैं।
- 36:40सत्य की पर मूर्ति बना करता हूँ इसलिए उस तत्व के पास पहुँचकर
- 36:46व्यक्ति झूठ नहीं बोल पाता तो पतंजलि ने कहा सत्य से शुरू करो।
- 36:55महावीर ने कहा सत्य से शुरू करो, बुद्ध ने कहा सत्य से शुरू करो
- 37:04कहाँ पहुंचोगे सत्य से शुरू करोगे और सत्य तुम्हें सोच समझ के सत्य
- 37:13बोलना पड़ेगा। यहाँ से ही तुम शुरू करोगे वो तो
- 37:16तुम शुरू करोगे लेकिन पहुंचोगे वहाँ जहाँ चाहकर भी झूठ नहीं बोला
- 37:22जा सकता जहाँ जो बोलोगे, सत्य बोलोगे यहाँ कसम तो उठवा लेते
- 37:31हैं, मैं गीतना की कसम खाता हूँ। जो बोलेंगे, सत्य बोलेंगे और सत्य
- 37:36के सेवा कुछ नहीं बोलेंगे। लेकिन गीता तो महज कोई मुसलमान भी
- 37:42हो सकता है, फिर क्या करोगे? कोई भीतर से नास्तिक भी हो सकता
- 37:47है। फिर क्या करोगे ज़रा बताओ।
- 37:52सिख भी हो सकता है फिर क्या गीता के ऊपर आता होगा?
- 38:00पतंजलि कहता सत्य बुध कहते हैं सत्य महावीर कहता है सत्य इन से
- 38:06शुरू करो और बाल पूर्व को शुरू करो, झूठ मत बोलो, चाह कर भी झूठ
- 38:11न बोलो। तुम्हारा मन कहेगा झूठ बोल दो,
- 38:14तुम कहो नहीं बोलना हमने सत्य बोला सत्य से शुरू करो प्रयास के
- 38:22रूप में और उस सत्य तक पहुंचो जो प्रयास में बोला जाता है, पर तुम
- 38:28झूठ बोलोगे, झूठ बोल सकोगे। अगर नार्को टेस्ट हो जाता, चाहे
- 38:42तुम अंधेरे कमरे में कर लो, वहाँ पर विपक्ष के लोग होने चाहिए।
- 38:47ध्यान रख लो विपक्ष कभी खरीदते नहीं जाते।
- 38:53विपक्ष के मुख्य से यह लोग नहीं खरीदे जाते।
- 38:57ये नायडू वगैरह तो खरीदे जाते है नायडू, नीतीश ये खरीदे जाते है,
- 39:02विपक्ष के मुख्य लोग नहीं खरीदे जाते।
- 39:07अब राहुल को कैसे खरीदोगे नहीं खरीदे जायेगा क्योंकि मुख्य पाठ।
- 39:17मुख मैं किसे कहता हूँ, जो तुम्हारे बराबर उस गद्दी का इच्छा
- 39:25रखता है? वह मुख्य विपक्षी थे उसकी
- 39:31प्रेसेंस में करो। जितनी पार्टी है 101215।
- 39:35सबको खड़े करता हूँ। फिर यह एक और आखिरी उपाय वह
- 39:47व्यक्ति बता देगा। मैं ये कुछ करके आया हूँ फिर आप
- 39:50उसे गद्दी सब हो गए। जब उसकी बोली हुई खुद की वीडियो
- 39:57लोगों को सुनाओगे चलो भाई तुमने जिता तो दी, अब बताओ इसको गद्दी
- 40:03सौंप दे, फिर क्या इतने भक्त पैदा होते जो नकली हैं?
- 40:08क्या इनके साथ बहस करने की जरूरत पड़ती नहीं पड़ती?
- 40:15क्या ये इतना घटियापन और उच्च शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं?
- 40:21ये करते ये अपनी आत्मा को गंदगी से भरते गलत बोल के ये नहीं भरते।
- 40:28बहुत से नुकसान बच जाते। एक नार्को से और नार्को को तुने
- 40:37करीब करीब बैन कर रखा है। नार्को को कराएँगे, लेकिन पूछ के
- 40:41कराएँगे क्या मतलब भाई पूछ के कराएँगे का?
- 40:47मतलब जिसने सर्व श्रेष्ठ सत्ता को होता है ना?
- 40:55उससे ही पूछेंगे हम वह तो झूठ बोल देगा, तो कहेगा नहीं मैं सच हूँ,
- 41:00बस ये सवाल ही मत उठाओ ये सवाल बेमानी?
- 41:19अगर प्रथम पड़ाव पे झूठ और पाप को रोक लिया जाए, अगर बीज को ही नष्ट
- 41:26कर दिया जाए तो वृक्ष पैदा नहीं होगा।
- 41:33पाप के बीज को नष्ट कर दिया जाए। तो पाप का वट वृक्ष कवि बनेगा
- 41:40नहीं, बस मैं ऐसी ही पद्धति लाने की इच्छा रखता हूँ, किसी गद्दी की
- 41:54इच्छा नहीं। और मैंने बहुत बार पहले भी बोल
- 41:58दिया बार बार दोहरा था, मैं अच्छा भी नहीं लगता जीने तक के बीच में,
- 42:07लेकिन इतना है कि माँ भारती। का सिर गौरान्वित हो, माँ भारती
- 42:23के आगे श्रद्धा से नमन करें। विदेशी लोग इसमें अभूतपूर्व
- 42:29क्षमता है। यह पुनः ऋषियों ने जन्म लिया है,
- 42:34जो पूज्यनीय पूजनीय थे नहीं पूजनीय हैं।
- 42:39आज भी जहाँ कृष्ण जैसे लोगों की धरती राम जैसे मर्यादा पुरुषोतों
- 42:48की धरती। जिन गद्दियो के लिए तुम लारें
- 43:05टपकाते फिरते हो। यह उन महानुभावों की धरती है
- 43:14जिन्होंने पल के झपकते ही इसको छोड़ दिया और सही मालिक थे।
- 43:21मालिका नाक था। बड़े थे राम।
- 43:27ऐसे ऐसे अभूतपूर्व लोगों ने जन्म लिया इसलिए हमने इनको मर्यादा
- 43:35पुरुषोत्तम का नाम दिया पुरुषोत्तम।
- 43:42ऐसे छोड़ देते हैं जैसे हम मिट्टी के ठेले छोड़ देते हैं।
- 43:52तुम इन्हें हीरे जवाहरात समझते हो, लेकिन राम के लिए यह मिट्टी
- 44:00के ढेले हैं, कंकड़पत्थर हैं। पल भर में नहीं छोड़ देते है।
- 44:05उनकी धर्मपत्नी भी पल भर में छोड़ देती है।
- 44:08उनका भाई भी पल भर में छोड़ देता है।
- 44:11यह एक अकेला राम मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं सभी मर्यादा
- 44:16पुरुषोत्तम है। हाँ लक्ष्मण कोई कम नहीं है, सीता
- 44:19कोई कम नहीं है। ये स्त्री उत्तम समझलो तो आपने
- 44:37पूछा मनसा और कर्मण? इन दोनों के संयोग से जो घटित
- 44:46होता है कर्म वह परिपूर्ण कर्म? 100% उसका फल मिलना चाहिए।
- 44:53परमात्मा ऐसे ही फल देता है अगर सिर्फ कर्म हो गया इसलिए 12 वर्ष
- 44:58की उम्र तक कर्म का परमात्मा झंडी ही नहीं देता।
- 45:05परमात्मा की सृष्टि में 12 वर्ष तक देखिये।
- 45:12यह कोई आनुपातिक व्यवस्था नहीं है।
- 45:14परमात्मा किसी किसी व्यक्ति को आठ वर्ष के बाद भी कर्म करने की
- 45:24मनाही है अपनी इच्छा से। यह लेबरिंग है परमात्मा की उस
- 45:30मापदंड के ऊपर कसी जाती है, लेकिन आमतौर से ये 12 वर्ष तक निर्धारित
- 45:36किया गया है। 12 वर्ष के बच्चे को बहलाया जा
- 45:41सकता है, बहकाया जा सकता है इसलिए वह है स्वतंत्र।
- 45:4918 वर्ष का बच्चा जाकर स्वतंत्रता से सोच सकता है निर्भीकता से अगर
- 45:57उसके पास दबाव न हो। मनुषा याने भावना कर्म याने
- 46:10अक्षन। एमोशन एंड एक्शन जब दोनों मिल
- 46:16जाता है तो वह कर्म कहलाता है। अगर अकेला एमोशन हुआ तो नहीं फलदा
- 46:23ही होगा। अगर अकेला कर्म हुआ अक्शॅन हुआ तो
- 46:26नहीं फलदा ही होगा अक्शॅन प्लस एमोशन जस्टिस कार्ट कर्म यह फल
- 46:36देगा कर्म की अवस्था परमात्मा की इस हिसाब से परमात्मा जीस अंग से
- 46:52जानबूझकर आपने गलत करम लिया। फिर अगले जन्म में मेरी जान चार
- 46:58ईच हो गए। मेरी जहाँ जिला जलंधर हँसा मत
- 47:05करो। इस वीडियो को गौर से कॉर्नर में
- 47:13बैठकर किसी एकांत स्थान पर सुनना तो समझना।
- 47:17अगर प्रथम दृष्टया यह बात लोगों को पता चल जाता कि मोदी है तो
- 47:24मुमकिन है का नारा देने वाला व्यक्ति।
- 47:29ऐसे कर्म करके आया है तो क्या यह आज लंबी डार जो लगी है वो लग सकती
- 47:35है? देश के 11 अमूल्य वर्ष खराब है,
- 47:4611 है अमूल्य वर्ष। मैं जब तक बैठा हूँ, इस पद्धति को
- 47:57सुन्दरम ढंग से बना के जाना चाहूंगा।
- 48:01खराब तो मानव कर ही लेता है, लेकिन कभी भी इतना खराब नहीं कर
- 48:05पाओगे जितना आज। ऐसी व्यवस्था सौंप के जाऊंगा तो
- 48:09मैं सितारे व्यक्ति हैं ऐसे मैंने पहले भी बताया था सितारा व्यक्ति
- 48:19का अनार को परिणाम अगर जो मैं कहता हूँ नाई।
- 48:27तो दंड आपका, आप दंड देना अपने हिसाब से जो भी चाओ सतारा
- 48:43व्यक्तियों के नाम आपको उनमें से तीन तो मैं अक्सर बोलते हैं पांच
- 48:49ही बोलता हूँ। मोदी जी, अमित शाह जी, अडानी जी,
- 49:01अंबानी जी और अजित डोभाल जी ये पकड़ लिए गए।
- 49:10ये कहते हैं नौजवानों में आग होनी चाहिए।
- 49:13बदले की देश को आजाद हुए, कितने साल हो गए?
- 49:19जिद लबालजे तुम आज़ादी से पहले पैदा तो?
- 49:25हो गए लेकिन बच्चे ही हो गए। अभी माँ की गोदी में आए, दूध पीते
- 49:33हो गए। दो 3 साल के हो गए अब क्यासी साल
- 49:43के हो जाओगे दो 3 साल के तुम माँ की गोदी में जलते होगे।
- 49:49स्वतंत्रता संग्राम में आपका कोई योगदान नहीं है तो डोभा जी मैं
- 49:57आपसे पूछता हूँ भद्रा किस्से लेना क्या तुम बदलो में ही उलझे रहोगे
- 50:06इन्हीं कामों के लिए? इस देश का सत्यानाश कर दिया तुमने
- 50:15तुम एनएसए की पदवी पर जाने की युग थे, इतनी घृणा कि आग नफरत की आग
- 50:22दिल में पालकर कोई देश चला सकता है।
- 50:26देश चला सकता है कोई बुद्ध राजा के हृदय में आग नहीं होनी चाहिए
- 50:36और राजा के सिर पर कलंक का बोझ भी नहीं होना चाहिए।
- 50:39ये दोनों चीजें जीस राजा में हैं। वह देश को बहुत अभूतपूर्व ढंग से
- 50:44चलाएगा। फिर सुन लो सर हृदय में और
- 50:54मस्तिष्क में नफरत की आग, न और शांति।
- 51:08ऐसे व्यक्तित्व का मालिक ही देश को चला सकता है, लेकिन कमजोर भी
- 51:15ना हो, कृष्ण बड़े कर रहे हो, प्रेमी राज़ सब जाती हैं और राज़
- 51:23भी करते हैं। और कृष्ण आज तक पूजे जाते हैं।
- 51:29तुम मस्तिष्कों पर राज़ करना चाहते हो?
- 51:32नहीं नहीं मैं तुम्हें कहता हूँ हरदा पर राज़ करो और मैं तुम्हें
- 51:38हरद्यो पे राज़ करना सीखा दूंगा जो तुमने।
- 51:43किसी ने भी तुम्हें नहीं सिखाया ह्रदयों पे राज़ करना ही असली
- 51:48राज़ होता है, मस्तिष्कों पे राज़ करना राज़ नहीं होता वो तो
- 51:52तानाशाही होती है, मस्तिष्कों को तो हमें स्वतंत्र छोड़ना होगा इन
- 52:01वेंशंस के लिए। हृदयों पर राज़ करना होगा करुणा
- 52:06बरसा के प्रेम बरसा के आनंद अव भाव बरसा के मस्तिष्कों को हमें
- 52:13इंडिपेंडेन्ट करना होगा कि जाओ खोज करो वह अध्यात्म की करो, वह
- 52:18विज्ञान की करो, वह किसी भी सर्किल की फील्ड की करो।
- 52:23कोई बात नहीं, लेकिन मस्तिष्क हम स्वतंत्र कर देंगे और सही
- 52:32प्रोग्रेस के लिए सही विकास के लिए हृदय का स्वतंत्र होना आवश्यक
- 52:39है तुम काम जो करते हो। वह हृदय को और मस्तिष्कों को सही
- 52:46सही रूप से चला नहीं, तुम मस्तिष्कों पर राज़ करना चाहते
- 52:52हो, मस्तिष्कों को स्वतंत्र छोड़ना होगा, बुद्धि को स्वतंत्र
- 52:58छोड़ना होगा, राज़ करना होगा। प्रेम बरसा के सबसे सद व्यवहार
- 53:04करके करुणा बरसा के आनंद बरसा के, अहो भाव बरसा के सुकराना बरसा के
- 53:12हितों को आनंद के तौर पुलकित करना होगा, फिर राज़ करने के तुम
- 53:19अधिकारी हो सकोगे। तो 17 लोगों की लिस्ट मैं तुम्हें
- 53:25दे देता हूँ जिन्होंने इस देश को खोखला करती है।
- 53:3417 लोगों के आप लड़कों को सबसे पहले तो सबसे मूलभूत लोगों का।
- 53:41नार को होना जरूरी है। वो मूलभूत लोग तीन हैं।
- 53:46नरेंद्र मोदी, अहमद शाह, अजीत बवाल आज अजीत बवाल पहले नंबर पे आ
- 53:52गए आखिर तरकश का तीर आखिर में निकला।
- 54:04हम उस देश के वासी हैं जीस देश में गंगा बहती है नया युग है।
- 54:20नई आवाज, नई सोच और नई राजनीतिक व्यवस्था हमें ईमानदार आदमी की
- 54:35आवश्यकता है कृपया। अगर आप सच में ईमानदार हो तो हमें
- 54:42आप कॅाटाक्ट करो, बस कॅाटाक्ट सिर्फ आप अपना नाम और एड्रेस भेज
- 54:50दो। किस दिशा में काम कर सकते हो?
- 54:59हमें जरूरत है आज बुद्धिमान व्यक्तियों की, सत्यवादी
- 55:10व्यक्तियों की कर्ममठ व्यक्तियों की देशप्रेमी व्यक्तियों की
- 55:17जिनमें। देश प्रेम का जज्बा जो मैंने उन
- 55:24दिनों में देखा जब देश का स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था, वही
- 55:33जज्बा मैं फिर ढूंढता हूँ। तेरी ढोंढ सा।
- 55:42है फिर वही फुर्सत के रात दिन। बैठे रहे तस बुरे जाना किए हुए।
- 56:06दिल ढूँढता। है, फिर होगी।
- 56:14हमें बुद्धिमानों की बालशालियों की और देश पर देश सेवा करने वालों
- 56:27का देश पर मर मिटने वालों की जन्म धरा है।
- 56:33अगर आप चाहते हैं। तो हमें अपना नाम और एड्रेस भेजने
- 56:39का कृपा खिज आज देश को? आपकी जरूरत है।
- 56:55लेख किसी के समझ न आते हैं वेदनाते।
- 57:14लेख किसी के समझ न आते हैं जन जन के प्रिय।
- 57:31राम लखन सिया बन को जाते हैं। हो ना तेरे?
- 57:50लेख किसी के समझ न आते हैं जन जन के प्रिया।
- 58:09राम लखन सिया बन को जाते हैं। हो।
- 58:27देख किसी समझ न आते हैं, धन्यवाद।