Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Dec 24 - संत पुरुष परिग्रह, दिखावा क्यों नहीं करते? अनहद नाद के कुछ गूढ़तम रहस्य! Must Listen
Transcript
- 0:14कर्मण्ने वाध का रस्ते माँ फलेशु गलाचन माँ कर्मफलहेतुर बर्मा ते
- 0:27संघो अस्थ कर्मणे। दूसरा अध्याय 47 वर्ष से पहले दो
- 0:46क्वेश्चन ले लें। संतोक सिंह।
- 0:54संत पुरुष परिग्रह क्यों नहीं करते हैं?
- 0:59जोड़तें क्यों नहीं कुछ और कपूरचंद संत पुरुष दिखावा क्यों
- 1:05नहीं करते हैं? तुम कभी बाहर जाते हो, किसी भी
- 1:26मकसद से जाते हो, वह व्यापार करना है या सैर सपाटा।
- 1:36कोई फ़िल्म देखने चले हो या किसी अन्य कारणों से क्या तुम अपने
- 1:46घल्ले के सारे पैसे ले जाते हो नहीं?
- 1:54तुम उतने ही पैसे लेके जाते हो जितनी किस्त में आवश्यकता बढ़
- 2:00सकती है। उससे थोड़ा ज्यादा अब इस बात को
- 2:07थोड़ा ध्यान से समझ लेना। कई बार प्रश्न छोटे होते हैं।
- 2:15लेकिन छोटे तो एटम बम भी होते हैं।
- 2:21एटम भी छोटे होते हैं लेकिन उनके अर्थ बड़े विराट होते हैं।
- 2:32संत परिग्रह क्यों नहीं? करते हैं, जिसने जान लिया हो कि
- 2:45सब मेरा है। वह परिग्रह क्यों करेगा?
- 2:56तुम कभी अपने ही पैसों को चोरी करते हो नहीं करता है क्योंकि तुम
- 3:08जानते हो कि सब तुम्हारे हैं। कहीं बाहर जाते हो तो जरूरत के
- 3:14लिए उतने पैसे ले जाते हो। बस ऐसा ही संत होता है इन शब्दों
- 3:27को। बड़े आराम से सुनना, एकांत में
- 3:32सुनना, कोलाहल के बीच न सुनना, जिसने ये जान लिया कि सब मेरा है,
- 3:47वह क्या जुड़ेगा? और क्यों जोड़े इस विराट फैलाव के
- 3:55भीतर जो फैल गया है, जिसने अस्तित्व में अपने पांव अपने पंख
- 4:04पसार लिए हैं? वे कभी शुद्ध चीजों को जोड़ेगा
- 4:16नहीं जोड़ेगा और जो जोड़ता है वह अभी संत हुअन है।
- 4:27इस शब्द को सर्किल में ले लेना जो जोड़ता है वह संत हुआ नहीं और जो
- 4:39संत हो गया वह जोड़ता नहीं। इसलिए बुद्ध हूँ के पतंजलि हों के
- 4:47महावीर हूँ। पहले यम के पांच नियमों में सत्य,
- 4:54अहिंसा, अस्त्रे, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, परमात्मा तक पहुंचने
- 5:03का। पहले यम उसका पहला उपाय बताया।
- 5:13प्रग्रह जोड़ मत इससे उल्टा भी चले हैं जिसने उस विराट को देख
- 5:23लिया। वह परिग्रह करेगा।
- 5:29इसको आप एक मेज़रमेंट के लिए की तरह ले लेना।
- 5:34इस कसौटी पे तुम कसना ये कसौटी ठीक उतरती है।
- 5:43ये जो मैं जिसे सुन रहा हूँ उसका हेतु क्या है क्या कारण है?
- 5:54क्यों ये बोलता है कुछ लोग ऐसे मूर्ख होते हैं सच्चाई?
- 6:08छुपते में तुम कितना ही छुपा लो कहावत है कि चोर अपने पद चिन्ह
- 6:16कहीं ना कहीं छोड़ जाता है। कुछ वक्त पहले एक व्यक्ति आए जो
- 6:26कहते मैं मैं किसी का अवतार हूँ। और मैंने सारे सृष्टि का सृजन
- 6:36किया है और मुझे धन दे जाओ। सारा क्यों मैंने आश्रम का
- 6:45निर्माण करना है? वो क्लिप मेरे पास हुई है।
- 6:54मैंने कहा भाई जिसने सृष्टि का निर्माण कर दिया, वह अपना आश्रम
- 7:00भी बना ले, तुमसे क्यों मांगता है?
- 7:07कुछ लोग भ्रम में होते हैं। पकड़े जाएंगे ये उन्हें पता नहीं
- 7:12होता। पिग्रह जो करेगा पिग्रह।
- 7:18जो? जोड़ेगा।
- 7:23वह संत हुआ नहीं और जो संत हो गया।
- 7:30वह परिग्रह करेगा ना इसपे बहुत से प्रश्न उठ सकते हैं, उठेंगे लेकिन
- 7:38वो बाद में सूर्य लेंगे। अब हम आगे चलें, प्रीग्रह क्यों
- 7:44नहीं करता? क्योंकि सारे विराट में वो फैल
- 7:46चुका है। अब अलग से वो क्या जोड़े जो जानता
- 7:53है सब मेरा है, वह और क्या जोड़े जोड़ने को खुश है?
- 8:02दूसरा प्रश्न है कपूर सिंह का। संत कभी दिखावा क्यों नहीं करता?
- 8:12संत और दिखावा दो विरोधी छोर हैं। संत वह।
- 8:26जो प्रमाणिक है, हाथ गंगन को अर्शिका प्रत्यक्ष को प्रमाण की
- 8:37जरूरत नहीं है। दिखावा वो करता है।
- 8:49जिसके पास है नहीं ध्यान से समझना मेरी बात को जिसके पास सुख है वो
- 9:01दिखावा करेगा। लेकिन जिसके पास आनंद है वह
- 9:11दिखावा नहीं करेगा। कारण क्या है?
- 9:21सुख क्षणिक है, आज है। कल नहीं होगा।
- 9:29थोड़ा सुख है, ज्यादा सुख है, घटाया बढ़ाया जा सकता है।
- 9:35तुम पे डिपेंड करता है तुम्हारे पास ज्यादा है तुम्हारे पास कम है
- 9:41तुम्हारी इच्छाएं। कितनी पूर्ण हो गई है उसके ऊपर
- 9:45सुख निर्भर करता है, लेकिन आनंद एक ऐसी तत्व को कहते हैं जो
- 9:55किन्हीं कारणों पे निर्भर नहीं करता है।
- 10:00आनंद अकारण है। आनंद दिखाब नहीं करता बलम मीरा
- 10:09नाचने का दिखावा करती है, वह तो बस नाचती है, क्यों नाचती है ये
- 10:19भी पता है। उसके भीतर इतना आनंद का झरना फूट
- 10:24गया है कि उसे नाचने पे विवश कर देता है।
- 10:32वह नाचती है, जश्न मनाती है वह जो भीतर से झरना फूटा है।
- 10:41उसको पीपी के परग घुंघरू बांध के नाचती है मीरा नानक गाते हैं, उसी
- 10:50झरने को पीकर और सुरती में समा जाते हैं कबीर उसी झरने को पीकर।
- 11:00पूजा न काहे का आनंद का कोई दिखावा नहीं करते, न नानक, न
- 11:06कबीर, न मीरा। दिखावा कौन करेगा?
- 11:13इसको अभी तृप्ति नहीं मिली है। ध्यान से समझे जनों शब्द।
- 11:19अलगाव करके तो बोल रहा हूँ, लेकिन तुम भी समझने की चेष्टा करना सुख
- 11:28से तृप्ति कभी नहीं होती और तुम्हारे जीतने बड़े बड़े
- 11:35पोहदेदार पूँजीपति इंडस्ट्रियलिस्ट।
- 11:39बड़े बड़े पदों पर बैठे हुए लोग उनके पास सोक बहुत है घना लेकिन
- 11:49जब वो अपने हृदय में झांकेंगे शून्य पायेंदा है एक।
- 11:58अभाव उन्हें सदा ही खटकता है खाना तेरी।
- 12:09मैं तो वे दीवान। तेरी मैं तो प्रेम जवानी मेरा
- 12:29दर्द न जाने को। मेरी में तो प्रे दीवानी मेरा
- 12:44दर्द न जाने को मेरी में तो। प्रेम दीवाने।
- 12:58कुछ पाने के लिए जो नाचता है वह कलाकार है, जिसे कुछ मिल गया और
- 13:10उस मिलने की खुशी से जो नाचता है। वह सांता है, जिसके भीतर इच्छा है
- 13:22कि कुछ पांव वह कला सीखेगा और जीसको कुछ मिल गया।
- 13:28अद्भुत, अनोखा अमूल्य वह उसके मिलने की जश्न में नाचेगा बहुत
- 13:36फर्क है। शायद तुम इस बात को समझ सको।
- 13:43संत दिखावा क्यों नहीं करता, क्योंकि उससे सब कुछ मिल गया है।
- 13:51उसके भीतर के झरनों की आहट उसकी बातों में?
- 13:58उसकी आवाज के खनकार में उसके चेहरों के मनोभावों में उसकी चाल
- 14:07ढाल में उसके क्रियाकलापों में उसके बैठने उठने के अंदाज में
- 14:14प्रकट हो जाए। जिससे मिल गया है उसका बॉडी
- 14:23लंगुइज कुछ और होगा। जीसको नहीं मिला है, सिर्फ दिखावा
- 14:31करता है उसका बॉडी लंगुइज कुछ और होगा।
- 14:37लेकिन क्योंकि तुम इतने दक्षिण हो और क्योंकि तुम अध्यात्म की
- 14:44यात्रा पे हो इसलिए मैं भीतर से ही बताना तुम्हें उचित समझूंगा
- 14:51जिससे वो रस मिल गया है। वह उस रस को पिएगा और उस रस को
- 14:58पीने के कारण जो भाव उभरेंगे वो प्रकट हो जाएंगे।
- 15:04वह करेगा भी नहीं। मेरा नाचती है तो मेरा खुद नहीं
- 15:08नाचती। मेरा को वो झड़ना निचवाता है आनंद
- 15:14का मेरा खुद से नहीं नाचती तो में से एक छोर रुपए रखता हूँ।
- 15:25दूसरे छोर रुपए जिनके पास सुस्त वो होता है।
- 15:32आनंद की एक भूत भी नहीं है और उनके भीतर कहीं ना कहीं कोई ना
- 15:41कोई तल प्यासा है, पुकारना है, कहीं कोई कमी है, उसे पूरी कर लो।
- 15:49उस कमी का उन्हें पता नहीं चलता कि वो कमी है क्या?
- 15:56ढूंढ़ते ढूंढ़ते थक जाते हैं, आइडिया लगाते हैं।
- 16:03कहीं ऐसा तो नहीं कि पदवी में हो कहीं ऐसा तो नहीं?
- 16:09के डिग्रीज़ में हो, सूचनाओं में हो, पैसे में हो, मान सम्मान में
- 16:18हो और वह उनके पीछे भागता है, उन्हें कमा भी लेता है।
- 16:28लेकिन अंततः अपने आप को रिक कर पाता है सब कमाया, लेकिन रीता का
- 16:37रीता रह गया व्यक्ति रीता क्यों रह जाता है।
- 16:46एक चीज़ न कमाने के कारण हरिता रह जाता है।
- 16:52वो चीज़ है आनंद अगर तुमने सब कमा लिया सुख के साधन कमा लिए, सारी
- 17:02सृष्टि को कमा लिया। सारे भ्रमण को कमा लिया तुम
- 17:08चक्रवर्ती हुए लेकिन ध्यान रखना तुम सुखी हो गए, आनंदित नहीं हो
- 17:14गए चक्रवर्ती सम्राट सारे अस्तित्व का मालिक हो सकता है
- 17:22सुखी। कभी आनंदित नहीं हो सकता।
- 17:28सुख गणना है। वो चाहे इंडस्ट्रियलिस्ट हो, चाहे
- 17:36चीफ मिनिस्टर हो, प्राइम मिनिस्टर हो या संसार की, कोई भी ताकतवर।
- 17:46इंसान हूँ, उनको सुख करना है, उनके एक इशारे से दुनिया नाश्ती
- 17:55है, उनके एक इशारे से बाग खिल जाते हैं।
- 18:02और एक इशारे से मुरझा जाते हैं। पर वो समझती हैं कि हम ताकतवर
- 18:09हैं, नहीं, ताकतवर हैं, वो कमजोर हैं, ताकतवर किसी को दिखाता नहीं।
- 18:20परमात्मा कभी किसी को बल दिखाता है, परमात्मा अपनी निर्मित दिखाता
- 18:28है, परमात्मा सृजन करता है और छोड़ देता है और तुम उसकी सृजना
- 18:39को निहारते हो। और कभी नमन भी नहीं करते।
- 18:45व्यक्ति की औकात इतनी एक जगह रेत का भी नहीं बना सकता और उस इतने
- 18:55भ्रमण को विराट को रचने वाले को नमस्कार भी नहीं करते।
- 19:02यह अहंकार का द्योतक है। अहंकार की सूचना है, संत दिखावा
- 19:12कभी नहीं करेगा। संत के भीतर से प्रगटीकरण आएगा
- 19:18आनंद का अनुभूतियाँ छलकेंगी बाहर जैसे झरना भीतर से आता है अब तक
- 19:29दबा पड़ा था। जैसे ही पत्थर हटाया फूट पड़ा
- 19:33झरना भीतर से आया। संत दिखावा नहीं करता, दिखावा हो
- 19:41जाता है, मीरा के नाचने का, नानक के गाने का, कबीर की सुस्ती का,
- 19:52दादू के समर्पणों का। और वीका के निरहंकारिता का यह
- 20:04सामने प्रगटीकरण होता है, वो जानबूझ के नहीं करता है जो सुखी
- 20:11होता है। वह दिखावा करता है जो व्यक्ति
- 20:18तुम्हें दिखावा करता हूँ वे मिले एक बात समझ लेना उसे मिला नहीं
- 20:30जिसके भीतर से झरना फूंकता हो। जिसके पास बैठकर आनंद की ठंडी
- 20:39ठंडी मीठी मीठी हवाएं तुम्हें भी लहरा जाती हों जिसके संग जलके
- 20:49तुम्हें भी लोलियाँ सुनाई जाती हों।
- 20:53और तुम भी मस्ती का और आनंद का अनुभव करते हो।
- 21:03वह व्यक्ति समझो के उस अंतिम सत्य को पा चुका है।
- 21:09शब्द थोड़े से गहन हैं। लेकिन क्या करें?
- 21:14हम इतने दूर निकल आए हैं कि शब्द थोड़े से गहरे इस्तेमाल करने
- 21:20पड़ेंगे। सरल शब्द हैं, यद्यपि बड़े सरलता
- 21:27से बोल रहा हूँ। लेकिन अगर आपके समझे में ना आए तो
- 21:34फिर फिर से सुनना इसको बार बार सुनना समझ आ जाएगा।
- 21:42फिर भी ना समझ में आए तो फिर प्रश्न करते।
- 21:52संत दिखावा क्यों नहीं करता? संत को दिखावा करने की आवश्यकता
- 21:56नहीं होती, वह तृप्त हो गया। दिखावा वो करेगा जो अभी तृप्त
- 22:07नहीं हुआ। जो तृप्त हो गया वह दिखावा करेगा,
- 22:16नहीं लक्षण दिख जाएंगे। आपको ये बात अलग है, भीतर से उस
- 22:24आनंद का फूटना है। उस झंकार का वजन, उस नाद का
- 22:35गूंजना ये लक्षण है उसका। उसके चेहरे से छलके की उसकी आवाज
- 22:53में एक कृषि शोक है। क्योंकि ये आवाज उस परम कृषि से
- 22:59आती है जिसने सारी कशिशों का निर्माण किया।
- 23:06जिसने फोर्स ऑफ ग्रैविटेशन बनाया। आप चीज़ को ऊपर कराओगे, धरती
- 23:14मैग्नट है उसे कैंच लेगी। जिसने इतना बड़ा चुम्बक बना दिया
- 23:19इतनी धरतियाँ बना दीं। वह खुद कितना बड़ा मैग्नट होगा?
- 23:26कभी सोचा तुमने ये सारी धरती एक मैग्नट है ब्रम्हंड एक मैग्नट है
- 23:38तुमने कभी सोचा? जीस इस मैग्नेट का जिसने क्रिएशन
- 23:48किया वह कितना बड़ा मैग्नेट होगा उसमें आकर्षण की तीव्र शक्ति है।
- 24:03वह ऐसा खींचता है जैसा कोई भी उसका बनाया हुआ पदार्थ नहीं खीच
- 24:10सकता। इसलिए मैं तुम्हें एक बात कहा
- 24:14करता हूँ कि तुम किस तरह उस शुद्धि चक्कर के भीतर प्रवेश कर
- 24:21जाओ। ये चक्कर हैं तुम्हारे मूलाधार
- 24:28स्वादिष्टान, मणिपुर वगैरह। किसी तरह तुम विशुद्री चक्कर के
- 24:37दायरे में प्रवेश कर जाओ। वहाँ से परमात्मा का दायरा शुरू
- 24:45होता है और उसकी पहचान क्या है आज के वीडियो।
- 24:57कई बार सुननी पड़ेगी शायद तुम्हें एक बार समझ ना आए।
- 25:03विशुद्धि चक्कर के भीतर प्रवेश तुम कर गए कि लक्षण क्या है पहचान
- 25:08क्या है सबसे बड़ी पहचान। तो मैं अनाधनाद शुरू हो जाएगा वह
- 25:20मीठी मीठी पुकार, अनस्ट्रक्टेड साउंड ऑफ साइलेंस, वह प्यारी
- 25:30प्यारी मीठी मीठी ध्वनि मुझे रोज़।
- 25:37मैसेजस आते हैं। बाबा इतने साल से शुरू है, इतने
- 25:42साल से शुरू है। बहुत मैसेजस आते हैं, लेकिन क्या
- 25:48करें पहचान रास्ता नहीं होता है, मैंने कैसे पियो?
- 25:55बाबा कैसे पियें इसको सुनें? बाबा ने एक शब्द कहा है जब जी मैं
- 26:02सुनिए दुख पाप का नाश कल ही मेरे पास एक मैसेज आया राजस्थान से।
- 26:20बाबा, मैं तुम्हारी वीडियो सुनती हूँ, सिर्फ और कुछ नहीं करती और
- 26:28तुम्हारी वीडियो सुनने से ही इतना आनंद छा जाता है कि सारा दिन मज़े
- 26:34से गुजर जाता है और कई बार तो। सोंची हुई।
- 26:39बातें सही हो जाती हैं, कई बार जो मांगा जाता है वो मिल जाता है।
- 26:46ऐसा क्या जादू है मेरे में तो कोई जादू नहीं मैं यंत्र हूँ।
- 26:57यंत्रों में कोई जादू नहीं होता। यंत्र के भीतर में जो आवाज आती
- 27:04है, उसके भीतर से जो आवाज आती है वह मैग्नेट से आती है, उसके भीतर
- 27:12कशी शैवड़ी भाभी और अमृत का यर्ण? उससे टकरा के आती है ये आवाज मैं
- 27:22तुम्हें एक बात आज बताता हूँ अगर तुम किसी से उपकार करना चाहते हो
- 27:30और वह कुछ नहीं कर सकता, बेड पर पड़ा है।
- 27:37हाथ पांव भी नहीं हिला सकता, लेकिन वह सुन सकता है तो उसको
- 27:44सिर्फ़ वीडियो सुना दिया करो। कुछ ही वर्षों में सुनते सुनते ही
- 27:53वह दुखों से मुक्त हो जाएगा। कही बात बाबा ने कही है।
- 28:00सुनिए दुख बाप का नाश जीस तल से अनाहत नाद का उदगम होता है, उसी
- 28:10तल से संत बोलता है। उसकी वाणी उसी तल से टकरा के आती
- 28:16है। उसको पी लिया करो उसको पीने से
- 28:25तुम्हारे भीतर अगाध शांति का प्रगटीकरण होगा तुम झूम उठोगे उसे
- 28:32सुनके। वि शुद्धि चक्र के भीतर जो
- 28:38व्यक्ति प्रवेश कर जाता है वो निहाल हो गया है, उसके बाद उसे
- 28:47कुछ नहीं करना होता है। ध्यान रखना अगर तुम्हें अनाहत नाद
- 28:54शुरू हो गया है। तो तत क्षण परमात्मा तक पहुंचने
- 28:59के सारे प्रयास बंद कर दो। बाबा ने एक बड़ा प्यारा शब्द कहा
- 29:05है जब जीव में ज़ोर न झुगती छोटे संसार।
- 29:17सभी चक्रों की अपनी अपनी पहचान है, लेकिन सबसे बड़ी पहचान और
- 29:27सबसे प्यारा चक्र। जब तुम उसकी परिधि को पार करते हो
- 29:36तब यह अनदनाद शुरू होता है, यह तो तुम्हें पहचान पदक थी एक मज़े की
- 29:43बात तुम्हें बताऊँ अनंतनाद पे पहले कोई वीडियो।
- 29:51डालता नहीं था। 1 दिन मेरे पास प्रश्न आया डॉ।
- 30:00हरविंदर कौर बाबा ये झुंगर की आवाज।
- 30:12यह अस्तित्व की आवाज़ साउंड ऑफ एक्जिस्टेंस ये क्या है?
- 30:21ये बागे इलाही है। यह इतना प्यारा क्यों है?
- 30:28तो मैं बड़ा हैरान हूँ। कर इतने महत्त्व सब्जेक्ट पे इतने
- 30:35संताय कोई नहीं बोला और अगर बोला तो बड़े संक्षेप में बोला।
- 30:41जबकि ये ऐसी बात है कि सिर्फ इसी के कारण इसी का सहारा लेके।
- 30:51व्यक्ति उस परम तत्व को छू लेता है तो मैंने सारा यूट्यूब खंगाल
- 30:58दिया। नहीं मिला मुझे अनंतनाथ के ऊपर
- 31:03वीडियो मिला ही नहीं। और मिला तो छुट पुट एक 2 मिनट 10
- 31:08मिनट 5 मिनट मैं समझ गया मैंने इसके ऊपर प्रथम बार लेक्चर किया
- 31:211.75 घंटे का। क्योंकि अनंत नाद मेरा फेवरिट
- 31:31पॉइंट है। मैं जानता हूँ कि जो व्यक्ति वे
- 31:37शुद्धि चक्र को पार कर गया वह पार हो गया।
- 31:46मैं कोशिश करता हूँ जो मैं कहता हूँ कि जिसके माथे पर अंगूठा लगा
- 31:56दूंगा, वह पार हो जाएगा। मेरा सारा मंत्र भी है ये है।
- 32:04कि अगर इसके आनंदनाथ शुरू हो चुका है इसको पावर देके उस स्तर पर ले
- 32:11जाऊं और अगर नहीं शुरू हुआ है तो इसको पावर देके शुरू कर दूँ मात्र
- 32:19यही प्रयोजन है मेरा। क्योंकि मैं बखूबी जानता हूँ।
- 32:26अन्नदनद एकमात्र ऐसा साधन है। हमारी कहावत है एक हींग लगे ना
- 32:34फटखड़ी रंग भी चोखा दे अपने से शुरू हो जाता है जी।
- 32:42और उस प्यारे प्रीतम की पुकार है और वो तुम्हें कहता है कि खड़े
- 32:50खड़े क्या दिख रहे हो कब से तुम्हें पुकारना तुम आते क्यों
- 32:57नहीं? या उस परमात्मा की उस परम प्यारे
- 33:01की पुकार है और अफसोस की बात है कि तुमने आज तक सुना नहीं और किसी
- 33:09व्यक्ति ने तुम्हें मार्गदर्शन किया नहीं।
- 33:12खैर, उसके बाद। और भी वीडियो मैंने बहुत डाले और
- 33:17उसके बाद यूट्यूब पर अम्बार लग गया।
- 33:22सीधी सी बात थी अगर उनका अनुभव होता तो पहले वीडियो आ जाती लेकिन
- 33:30बाद में बहुत वीडियो आई हर किसी ने।
- 33:35यूट्यूब पर अन्नादनाथ की वीडियो चालू अनुभव हो या न हो, बस इसे ही
- 33:42कहते हैं। देखाबा पूछा कपूर चने दिखावा
- 33:49क्यों नहीं करता? संत करते हैं, व्यापारी दिखावा
- 33:52करते हैं। राजनीतिक दिखावा करते हैं,
- 33:58सांसारिक लोग दिखावा करते हैं। मैंने बहुत बार आपसे मैं मजाक
- 34:04किया करता हूँ के भीतर जूत पटांग हो के आते हैं और बाहर हाथों में
- 34:09हाथी डाल के चटकारे ले ले के हंसते हैं।
- 34:18जैसे कि बड़ा खुशहाल इनका गृहस्थ जीवन हो काश ये सच में होता सच
- 34:32में होता नहीं। तो मनुष्य की ये फितरत है कि वह
- 34:39दिखावा करता है। कोई सच में परमात्मा नहीं बन सकता
- 34:47तो वह दिखावा करता है कि मैं परमात्मा हो गया।
- 34:51मैं नॉन बायोलॉजिकल हो गया। लेकिन वो जानता नहीं कि नॉन
- 34:57बायोलॉजिकल है। एक ऐसा तत्व है जो सह पं।
- 35:03जो बाबा ने कहा जो खुद से ही प्रकाशमन है, वो उस तत्व को कहते
- 35:10हैं। एक हुंकार सतनाम कर्तापुर को
- 35:13निर्पण। निरवैर, अकाल मूरत अजुनी शपम गुरु
- 35:21प्रसाद वह शपम जो है शपम वह नॉन बायोलॉजिकल है, जो व्यक्ति
- 35:32परमात्मा हो नहीं सकता। वह दिखावा करता है और निश्चित ही
- 35:37ऐसे लोग राजनीतिज्ञ होते हैं, लेकिन एक बात को प्यारी श्रोताओं
- 35:48अच्छी तरह से अपने भीतर उतार लेना।
- 35:52तुम्हें दिखावा करने की जरूरत न पड़े।
- 35:56तुम सच में ही ऐसे मिश्रित मिश्री जैसे स्वभाव वाले हो, जाओ के
- 36:04तुम्हें दिखावा करने की जरूरत न पड़े।
- 36:07आनंद का रस तुम हर वक्त पीते रहो। नाद तुम्हारी शुरू हो जाये और उस
- 36:13मीठे मीठे रस को हर वक्त तुम पीते रहो, सोते जगते, उठते, बैठते चलते
- 36:20काम करते यह नाद जग जाये। विशुद्धि चक्र के भीतर जब
- 36:27तुम्हारी चेतना पर विष कर जाती है।
- 36:32तो यह नाथ की आवाज़ सुनती है। इसे उर्दू में बांगे इलाही कह दो,
- 36:41हिंदी में परमात्मा की पुकार कह दो।
- 36:50यह पुकार है परमात्मा तुम्हें कहता है ए क्या कर रहे हो बैठे
- 36:55बैठे क्यूँ टकरे मार रहे हो, संसार में ताश खेलते हो, फ़िल्म
- 37:02देखते हो जिनका कोई मतलब नहीं बनता।
- 37:08नाद शुरू हो गया है। इसमें खो जाओ, इसका सहारा लो और
- 37:13ये सहारा ये दागा ये सूत्र तुम्हें उद्गम सतल पे पहुंचा देगा
- 37:19जहाँ मैं विद्यमान हूँ वहाँ आ जाओ तुम तुम बैठे बैठे सुनो मत।
- 37:263535 वर्ष हो गए लोगों को और बड़ी तकलीफ देहवाद है के बैठे हैं, कोई
- 37:37बताने वाला नहीं, वह पुकार रहा है।
- 37:45और तुम खड़े खड़े संसार के दुखों से रो रहे हो चल रे सजने।
- 38:01अब क्या सोचे? चल री सजने।
- 38:10अब क्या सोचे, खजराना बह जाए रोते रोते?
- 38:24चल रही सजनी अब। क्या सोचें, कजरा न बह जाए, रोते
- 38:36रोते चल रही। सजनी?
- 38:42अब क्या सोचे, खजराना बह जाए रोते रोते?
- 38:56चल रही सजनी अब क्या सोचे? संसार के दुखों से पीड़ित था।
- 39:05खड़े खड़े क्या देख रहे हो? भीतर झंकार उठ चली है परमात्मा की
- 39:14पुकार शुरू है बरसों बीतकर लेकिन तुम?
- 39:21अनजान खड़े खड़े संसार के दुखों से तश्त रोना धोना ही तुम्हारा
- 39:30खत्म नहीं हुआ है। त्यागो इसको अगर तुम्हारे नाग
- 39:37शुरू हो के आए। तो उसको पियो सुनो, इसमें बड़ा रस
- 39:45मिलेगा पर इतना रसीला है। यहीं से समझना कि रस के स्रोत से
- 39:52आया है इतना रसीला है। कि यरस के सरोध से आया है तो मलिक
- 40:03कहता है क्या सोचता है ऐसे तो रोते रोते जनगानियाँ गुजर गईं
- 40:10तुम्हारी। आनंद अगर शुरू हो गया है तो झट से
- 40:19संभल जाओ, एकांत में बैठ जाओ, इस रस को सुनो, पीओ सुन ना ही पीना
- 40:31है। तुम्हें एक सूत्र मिल गया त्याग
- 40:37दो सब कुछ पूजा पाठ कर्म कांठ जात पर्दाश सब छोड़ दो इसको पियाओ पर
- 40:51बाबा तुम्हें जिम्मेवारी देते हैं, गारंटी देते हैं।
- 40:54सुनिए दुःख पाप का नष्ट तुम्हारे पापों के कारण जो तुम दुख झेल रहे
- 41:03हो, इसको सुनने से नष्ट हो जाएगा और तुम अगाध आनंद के समुद्र में
- 41:12उतर जाओगे। खजराना बहजा रोते रोते।
- 41:27चली सजनी। अब क्या सोच ज्यादा सोच विचार मत
- 41:40करो, बहुत ही जीवन तुमने गंभाती है और वह लगातार तुम्हें पुकार
- 41:50रहा है। तुम थोड़ा उधर पे ही ध्यान दो।
- 41:59सिर्फ राज्यसभा की सीट पक्की करनी है।
- 42:03इसी तरफ ध्यान मत रखो इस संसार के सब अलंकार।
- 42:11शरीर के डरते धड़ाम से छिन जाएंगे।
- 42:17मैं तुम्हें अपनी सृजना में से एक जर्रा भी नहीं ले जाने दूंगा, तुम
- 42:26आजमों के देख लो। किसी ने कितने भी कहर की हो, किसी
- 42:34ने कितने भी पाप अत्याचार हत्याएं की हो, लूटपाट की हो धमियों को
- 42:43दुख और दर्द बांटा हो मेरी सिस्टर को, लेकिन एक बात ध्यान में रखना।
- 42:52तुम मुझसे ज्यादा होशियार नहीं हो सकता है, तुम मुझसे ज्यादा
- 43:00होशियार नहीं हो सकते हो। सजन हारा सजना से ज्यादा होशियार
- 43:05होता है। और मैं सृजन आ रहा हूँ, तुम मेरी
- 43:10सृजन हो, तुम मुझसे चालाकी करने की चेष्टा मत करना और तुम्हारी
- 43:19चालाकियाँ चलेंगी बिन से से सेणपु लखव मज़ा तो तब है।
- 43:30अपनी चालाकियों से तुम मेरी सृष्टि का एक जर्रा साथ ले जाके
- 43:37दिखा दो फिर तुम चालक जब साथ जा ही नहीं सकता तुम्हारे।
- 43:47साथ ले जा ही नहीं सकते तुम फिर तुम काहे के चालाक हो?
- 43:52तुम तो बुद्धू हुए तुम तो मूड हुए तुम्हें चालक कौन कहेगा?
- 43:59चालक तो वो होता है जो कुछ ले जाने में समर्थ हो जाए और तुम कभी
- 44:05समर्थ न हो पाओगे। तुम इतने होशियार कभी नहीं हो
- 44:09पाओगे जितना मैं हूँ मुझको चकमा देने की सिस्टम करो, क्यों मैं कण
- 44:24कण में साक्षित हूँ? कण कण का मैं साक्षी तुम्हें
- 44:29निहार रहा हूँ चलाकी करोगे कहाँ गुंजाइश की नहीं बोरी।
- 44:37सृष्टि के भीतर मैंने कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी की तुम चालाकी कर सको
- 44:44हर जगह। मेरी आँख तुम्हें देख रही है तो
- 44:53क्षण तुम्हारी चालाकी पकड़ ली जाएगी तुम करके देख लो और तुम
- 45:02कितनी चालाकियाँ करते हो? सारा जीवन तुम्हारा चालाकियों में
- 45:07ही गुजर जाता है, सारा जीवन तुम्हारा इकट्ठे करने और शतरंज की
- 45:15बिछाते बिछाने में ही बीत जाता है, लेकिन मेरी सृजना का एक अंश
- 45:22एक ज़रा कभी तुम साथ ले जा पाए? कभी कोई भी साथ ले जा पाए नहीं ले
- 45:33जा पाया ये जो मेरे भीतर से उदगम स्रोत क्षेत्र में आवाज़ सुनाई
- 45:42पड़ती है। इसको प्रेम सब सुनो और धीरे धीरे
- 45:50इस उद्गम स्रोत का पीछा करो वहाँ पहुँच जाओगे जहाँ से ये आवाज।
- 46:03वो तो बहुत ही है बनाना तो बहुत दूर मेरी सृजना के एक अंश का अनंत
- 46:20में हिस्सा भी तुम खोज नहीं पाए, तुम इंवेंट भी नहीं कर सके।
- 46:28बना कहाँ से पांव के अपनी चालाकी को छोड़ दो इस आवाज़ के साथ साथ
- 46:41चलो ये दुख। दर्द, पीड़ाएं, चिंताएं सब समाप्त
- 46:50हो जाएंगे तुम वहाँ पहुँच जाओगे, जहाँ आनंद की बिसात बिछी हुई है।
- 47:04तेरे दा मन से जो। आए उन हवाओं को सलाम तेरे दामन
- 47:27से। जो आयें उन हम को सला झूमनों में।
- 47:49उस जुबा को जिसपे आई तेरा नाम। सबसे अच्छी सुबह हो तेरी सबसे रंग
- 48:14में तेरे शान। तुझसे कुरवा तू ही मेरी आरजू।
- 48:42तू है मेरे आगरू, तू ही मेरे शान। मेरे माँ का दिल बनके कभी सीने।
- 49:16से। लग।
- 49:20जाता है तू माँ का दिल बन के कभी सीने से लग जाता।
- 49:38है तू? और कभी नन्ही सी बेटी बन के या
- 49:49दाता है तो जितना ज्यादा ता है। मुझको इतना तड़पाता है तू तुझपे
- 50:10दिल कुरबान मेरे। ये प्रश्न आ रहा है सूक्ष्म लोक
- 50:24से बाबा जिनके नाद शुरू हो गया वो तो सुन लेंगे लेकिन जिनके शुरू
- 50:35नहीं हुआ वो क्या करे? पुष्प है प्रकाश चोपर प्रकाश चोपर
- 50:46जिनके शुरू नहीं हुआ वो क्या कराय?
- 50:52कल ही मेरे पास एक कमेंट आया था। इस वीडियो का बड़ा प्रभाव पड़ा है
- 51:04जो रोहित ने वीडियो डाला। आपने व्यर्थ के मैसेजस करने बंद
- 51:11कर दिए और मुझे प्रश्न भी मिलने शुरू हुए लोगों की तकलीफें भी
- 51:16मिलनी शुरू हुई। मैं उनका निदान भी कर सका।
- 51:20कुछ लोगों ने ऑनलाइन दीक्षा मांगी, दीक्षा भी दे पाया।
- 51:24आगे गुम हो जाते थे। ऐसे ही तुम अपने व्यवहार में इसी
- 51:33प्रकार का संतुलन बनाए रखना। लोग पूछते हैं कि हमें अच्छा लगता
- 51:40है बाबा जब आपकी वीडियो सुन लेते हैं तो आभार प्रकट करने का जी
- 51:45करता है तो करें लेकिन व्हाट्सएप पे न करें।
- 51:49कमेंट बुक्स को लाएं वहाँ प्रकट। खूब मन के उदगार प्रकट करें।
- 51:56कौन रोकता है? लेकिन व्हाट्सएप को स्पेयर करते
- 52:01हैं उन लोगों के लिए जो बेचारे दुखी हैं, त्रस्त हैं, जो प्रश्न
- 52:07पूछना चाहते हैं, जहाँ फंस गई है, उनकी किल्ली कोई गांठ उलझ गई है?
- 52:13ये उनके लिए स्पेयर छोड़ दो मेरी स्तुति करने के लिए बढ़िया करने
- 52:21के लिए सलाह करने के लिए कमेंट बॉक्स खोला है वहाँ करते रहो
- 52:28दुखयारों के लिए प्रश्न पूछने वालों के लिए।
- 52:33गुंडियां जिंदगी अड़ गई हैं, बेचारे बरसों से बैठे हैं, उनके
- 52:38लिए व्हाट्सएप को शेयर करता हूँ तो रोहित का ये वीडियो बड़ा
- 52:43असरदार रहा। सिर्फ आज मेरे पास तीन ही ऐसे
- 52:48मैसेज आए जिनको मैंने ब्लॉक कर दिया।
- 52:56बेलोक दुख मत मान तुम अपने उदगार प्रकट करना चाहते हो?
- 53:03कमेंट बुक्स खोला है, जितनी चाहे उदगार प्रकट करो, तुम्हें कौन
- 53:08रोकता है? तुम्हें अच्छा लगता है तुम रोते
- 53:14हो, खुशी के आंसू बिरहा के आंसू, तुम यहाँ प्रकट करो, एक
- 53:23प्लेटफार्म तुम्हारे लिए खुला है, लेकिन व्हाट्सएप को छोड़ दो।
- 53:29ये सभी लोगों के लिए जो प्रश्न पूछना चाहते हैं, उनके लिए छोड़
- 53:33दो, वो क्या करे प्रकाश, जो ऊपर पुस्तक?
- 53:49जिनको नाद शुरू नहीं हुआ, ये जो आवाज आती है उसी तरसे आती है।
- 54:07जहाँ से ये नाद का उदगम स्रोत है वो वहीं से मेरी आवाज लिपटतीबड़
- 54:18के आती है इसको सुनाए। बाबा ने कहा सुनिए चाहे तो इसको
- 54:28सुन लो, नाद को अगर प्रकट नहीं हुआ है तो मैं जो बोल रहा हूँ, यह
- 54:35नाद ही है। भीतर से उस उद्गम स्थल से छूकर
- 54:42आती हैं तेरे दामन से जो आये उन हवाओं को सलाम मैं उस जुबा जिसपे
- 54:53आए तेरा नाम। ये जो आवाज आती है पितृ से उसी तल
- 55:03से लिबड़ते आती है और लिखते हैं जितेंद्र वालिया कनाडा से कि ऐसा
- 55:10लगता है जैसे बहुत सी वाद्य यंत्र वज्र हो।
- 55:15और उससे टकरा के आपकी आवाज आती है।
- 55:18जब आप गाते हो या बोलते हो, बिलकुल ठीक पकड़ा, उसी तज से
- 55:25आवाज़ लेबड के आती है। बाबा ने लिखा है, वाजय नाद अनेक
- 55:31अशखा। केते बाबन हारे केते राग पर
- 55:37शिवग्रहण केते काबन हार वहाँ बड़े वाद्य यंत्रों से सुशोभित गाने
- 55:45वाले और वाद्य यंत्रों को बजाने वाले वहाँ सुशोभित वहीं से आती है
- 55:52ये आवाज़। चाहे आनंदनाथ की हो, चाहे मेरे
- 56:00प्रवचनों की हो, ये दोनों वहाँ से आती हैं, कोई सुन लो, ये बंद नहीं
- 56:10होगा। 2400 घंटे तुम सो जाओगे।
- 56:15तुम्हें सिर्फ पता लगना बंद हो जाएगा, लेकिन ये चलेगा सारी रात
- 56:21चलता रहेगा तुम देखना सुबह उठ के पाओगे तुम सो गए थे ये चलता ही
- 56:28रहा कभी बंद नहीं होता। और 24 घंटे हमेशा वही चीज़ चल
- 56:34सकती है जो अखंड हो, जिसकी धारा और अखंड यहाँ एक ही है एकोंकार।
- 56:48वहीं से आती है ये धारा जो कभी टूटती नहीं और तुम इसी की तलाश
- 56:53में हो। टूट जाने वाले सुख तो तुम्हें
- 56:58मिलते हैं वो तो तुम अपनी इंद्रियों से ले लेते हो कोई
- 57:03स्वाद से कोई किसी से, कोई दर्शन से, कोई कानों से।
- 57:07ले लेते हो, टूट जाते हैं वो खंड खंड सुख है लेकिन ये जो भीतर से
- 57:14धारा आती है अखंड यह उस अखंड तत्व से आती है और जब भी टूटते नहीं
- 57:22इसलिए चौबीसों घंटे बंद नहीं होते।
- 57:26उस अखंड से आई हुई आवाज़ हर वक्त चलती रहती है, गुंजायमान रहती है।
- 57:36सुनाई तुम्हें तभी पड़ती है जब तुम सुनने के योग्य होते हो।
- 57:41जब तुम साइलेंस में होते हो, तभी सुनते हो।
- 57:45लेकिन जब तुम ही बोल रहे हो तो मेरा मन ही इतने ऊंचे ऊंचे चिल्ला
- 57:50रहा है तो ये सुनाई नहीं पड़ती। चल तो सभी के भीतर रही है, वो
- 57:58क्या करें? प्रकाश पूछते हैं वो क्या करें?
- 58:04जिन्हें अभी शुरू नहीं हुआ वो मेरी आवाज़ सुनिए, बिल्कुल उतनी
- 58:15ही सुरीली है क्योंकि वहीं से आई है बिल्कुल वही गुण।
- 58:25वो ही सास वो ही रंगत, वो ही सब कुछ वो ही अकेलापन से आई हुई।
- 58:34फिर वो ही शान। वो ही तन आई है फिर वो ही शान।
- 58:53वो ही है वहीं से आती है और तुम्हें याद कराएगी।
- 59:02तुम्हारे उस तल का जहाँ तुम विद्यमान हो मत भटको बाहर गलियों
- 59:06में मत भटको, बाहर तीर्थों पे मत भटको हज छोड़ दो कुछ छोड़ दो।
- 59:19मंत्र छोड़ो मंत्र छोड़ो मच्छर छोड़ो तीर्थ छोड़ो, हज छोड़ो, सब
- 59:25छोड़ो ये बाहर की अंठों सरियों समेत मिट्टी से बना हुआ है यह जो
- 59:34आवाज आती है। या किसी तत्व की बनी हुई नहीं।
- 59:43श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी। नाथ, नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण,
- 1:00:06गोविन्द हर। अनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:00:27श्री कृष्ण। गोविन्द हरहे मुरह।
- 1:00:55सखा हमारे पितुमात स्वामी सखा हमारे है नाथ?
- 1:01:11नारायण वसुदेव, श्रीकृष्ण गोल हर मुरारी।
- 1:01:31हे। नाथ नारायण, वासु दे।