Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Nov 25 - मेरी जादुई छड़ी क्या है? इच्छाएँ कैसे पूरी होती हैं? किसी से भी लड़ाई कैसे खत्म करें? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:04बाबा जी प्रणब बाबा जी, मेरी माता ने मुझे बहुत उकसाया कि मैं मर
- 0:18जाऊं। मुझे बहुत गलत शब्द बोले, जीस
- 0:24कारण से मेरे अंदर ठेस पहुंचे, कोई नाम नहीं है, कोई एड्रेस नहीं
- 0:37है कहाँ से हो? नाम प्रश्न पूछने वाले लिख देते
- 0:51हैं ए जेड अकेला भाई एम चोरों की तरह।
- 1:07जैसे कहीं पहचान न लिया जाए। मैं अपने चैनल कंट्रोल से कहूंगा
- 1:19कि अगर शॉट नेम मिले, जिनकी पहचान न आए, पूरा एड्रेस न हो और प्रश्न
- 1:26मेरे तक न पहुंचने पर उन्हें ब्लॉक कर दे।
- 1:32मेरी माता ने मुझे बहुत उकसाया कि जा मर जा और मुझे बहुत गलत शब्द
- 1:43बोले। और मुझे बहुत ठेस लग जिसे ठेस
- 1:52लगती है वह अहंकार है, तुम्हारे स्वभाव को कभी ठेस नहीं लगती।
- 2:09और इसे मोक्ष द्वार का चौथा रोचन मान लो तुम्हारे स्वभाव को कोई
- 2:23ठेस नहीं रखते। तुम्हारे स्वभाव का वर्णन करते
- 2:29हैं भगवान कृष्ण। जो कटता भी नहीं, जो मरता भी
- 2:35नहीं, जो जलता भी नहीं, अजर है, अमर है, तो भला उसे ठेस कैसे
- 2:44पहुंचेगा? आजकल बड़ा ट्रेंड चला है।
- 2:52बाबा बंध जाएंगे अगर शादी की बाल बच्चे की, मैंने कहा हाँ अहंकार
- 3:03तो बंध जाएंगे लेकिन जब तुम उस तल पर जाओगे तो पाओगे।
- 3:12बंधन नाम की कोई चीज़ है ही नहीं। तुम सदा से उन्मुक्त हो, सदा से
- 3:23बंधन हीन हो कोई बंधन तुम पर कभी आया ही नहीं आ सकता भी नहीं।
- 3:36मुझे बड़ी ठेस लगी है, ठेस लगती है जिसे वह अहंकार आत्मा को न ठेस
- 3:46लगती, न ठेस की गर्मी लगती। और फिर मैंने भी कुछ बोल दिया।
- 4:02ये प्रश्न मैंने तो उठाया। प्रश्न तो कूड़े में फेंकने योग्य
- 4:08था, क्योंकि उसमें एक तत्व छिपा है।
- 4:14जो मैं बोल सकता हूँ और वह तत्व आपके काम का है, अन्यथा यह कूड़ा
- 4:19है। प्रश्न ऐसे प्रश्न मेरे पास मत
- 4:21किया करो। घर घर में झगड़े हैं, क्योंकि घर
- 4:26घर में अहंकार युक्त प्राणी है। निर अहंकार युक्त प्राणी घर में
- 4:32रहता ही नहीं। और अगर घर में रहेगा तो घर में
- 4:38ऐसे रहेगा जैसे महावीर है, जैसे संसार में आएगा तो ऐसे आएगा जैसे
- 4:46बुध आए तथ आगत जैसे आए वैसे चले गए।
- 4:53घर में रहेगा तो ऐसे रहेगा जैसे है ही नहीं ठेस लगती है अहंकारों
- 5:02को और इसका पैमाना भी नोट कर लो। जितनी मात्रा में ठेस लगती है
- 5:09उतनी मात्रा में अहंकार है। अगर ठेस बिलकुल नहीं लगती तो समझो
- 5:18अहंकार है ही। जितनी मात्रा में अहंकार उतनी
- 5:27मात्रा में ठेस लगेंगी। अगर इतनी ठेस लगी कि तुम ने जाकर
- 5:40न्यायालय का दरवाजा खटखटा दिया और 500,00,00,000 का मावजा मांग लिया
- 5:46तो समझो के तुम्हारे से बड़ा शायद ही कोई अहंकारी व्यक्ति हो।
- 5:55भला ऐसा पुर्जा दिखाऊ, तो हमारे भीतर जो लगा हो पुर्जा जो
- 5:58₹500,00,00,000 का हो शास्त्रज्ञ तो कहते हैं ₹5 छियाने का माल है।
- 6:12तुम कहते हो ₹500,00,00,000 न्यायाधीश को संभलकर जजमेंट दिया
- 6:17करें। ₹5 छियाने के माल को
- 6:23₹500,00,00,000 ये अहंकार ही की तो ही घोषणा है अहंकार अपने आप
- 6:31को। बड़े से बड़ा दिखाना चाहता है अगर
- 6:38पड़ोस ने चार मंजिला मकान खड़ा कर लिया।
- 6:42तुम रात भर सो नहीं पाओगे भला तुम्हारा क्या घट गया?
- 6:50तुम तो उसी मकान में हो। लेकिन ठेस लगी तुम्हारे अंकार से
- 6:58और ओचार्य ने कुछ भी नहीं कहा, तुम्हारे अहंकार को ठेस लगी।
- 7:14जितनी मात्रा में अंकार उतनी मात्रा में ठेस लगे।
- 7:18500,00,00,000 का माजा? न्यायालय से मान लिया कि इसने
- 7:22मेरी बेइज्जती की। इसने मुझे चोर कह दिया भाई जो चोर
- 7:30होगा उसे चोर ही तो कहना होगा। साधु थोड़े ही के तुम सिद्ध
- 7:40करोगे, हम चोर हैं तो लोग सिद्ध भी कर देते हैं, ये देखो तुम चोर
- 7:52जितनी मात्रा में अहमकार होगा, उतनी मात्रा में ठेस लगेंगी।
- 7:56और उतनी मात्रा में तुम अपनी वैल्यू सेल्फ हिप्नोटाइज़्ड इसे
- 8:02नर्सिंग सिस्टम कहते हैं आत्मशिलाक है आत्म प्रशंसा।
- 8:17माता ने मुझे कह दिया जा मर और कुछ अल्फाज़ भी गलत प्रयोग कर
- 8:25दिया। मैंने भी कुछ कह दिया तो फिर
- 8:28हिसाब बराबर हो गया। बाबा के पास शिकायत ले के क्या
- 8:33है? कोई काम की बात मुझे तो लगती नहीं
- 8:37है, सब कूड़ा है, सब कचरा है, तुम बोतल तो हो जीसको कोई बंधन
- 9:00नहीं मान सकता। तुम एक तुम्हारे आचार्य तुम्हें
- 9:05समझाते हैं, शादी मत को क्या गुनाह है?
- 9:11भाई बच्चे मत पैदा करो, वो बात अलग है, देखो जब पाल नहीं सकते या
- 9:19अगर दो जन्म दिए। तुम इनको बराबर सा व्यवहार नहीं
- 9:23कर सकते, व्यवहार न सही, तुम अगर बांट के बराबर नहीं दे सकते तो
- 9:29फिर तुम पैदा करने की आवश्यकता क्या जैसे बाकी तुम कूड़े में
- 9:33फेंक देते हो रोज़ रोज़ तुम अपने बच्चों को।
- 9:42निरोधकों के अंदर फेंक देती तो इस एक को भी फेंका होता।
- 9:47फिर दो क्यों किये थे? एक ही कर लेते बच्चे और पिता के
- 9:54मामले में मैं कभी भी बच्चे कसूरवार नहीं समझता।
- 10:00कसूरवार सदा ही वाक रहेगा, चाहे वो कितना ही भला जुंगा बाला पोशा
- 10:10लेकिन तुम्हें नहीं पता उसमें कुछ गुप्त कारण होते हैं।
- 10:17हम तो पिता भी हैं। पर हम जानते हैं बच्चों को माँ
- 10:26बाप कैसे पालते हैं? तुझे देख कहूँ या तारा।
- 10:45मेरा नाम कर गा रोशन जग मैं मेरा राज़ दोला तुझे सूरज या चंदा?
- 11:05तुझे देवकां या तारा मेरा नाम कर गा रोशन जग में मेरा।
- 11:25तुझे सो र चुका या चंदा? मादाद की परवर्ती किशोर होती है।
- 11:38तुम अपनी थोपना को बच्चों पर थोप देते हो मेरे वंश की बढ़ोतरी।
- 11:44और जो निर्वंश हो रह जाता है, मैं अपने आप को अभागा मानता है,
- 11:51तुम्हें नहीं पता बहुत सी मान्यताएँ हमें भीतर से खोखला कर
- 11:56देती हैं। भला कोई स्त्री?
- 12:01इतनी पीड़ा को प्रसव पीड़ा को सहन करने के लिए तैयार होगी।
- 12:06नहीं होगी। क्यों होती है उसे बाँझ न करे,
- 12:12मैं बेहतर की व्यथा बताता हूँ तुम्हें उसे कोई बाँझ न करे, एक
- 12:18बच्चा हो जाए बस। लड़की हो जाये लड़का हो जाये, कोई
- 12:21बात नहीं, वो तो निपट लेंगे लेकिन यह थोड़ा मुश्किल बात माँ ने मुझे
- 12:30कहा जा मर और मैंने भी कुछ गलत शरत बोल दिया।
- 12:37यह मसला अहंकार का है। तुम अहंकार के मान्यताओं पर ही
- 12:43टिके हो, ये अहंकार ही तुम्हें निचाए जाता है।
- 12:50कठपुतली की तरह इसी माने। जब तुम जन्मी होगे तो रसगुल्ला
- 13:00बांटे होंगे। आज इतना क्लैश हुआ कि मेरी 2 साल
- 13:12की बच्ची अब रोज़ घबरा के। उठ के रोने लग जाती है।
- 13:24क्लेश का कारण है अहंकार और शायद वो मुझे अभी अभी सुनना शुरू हुआ
- 13:37है। या तुमने सुन लिए होंगे?
- 13:41फौके फौके शब्द गुनाह नहीं होगा, अमल नहीं किया होगा।
- 13:52ये अहंकार बड़ा चकमा देता है। तुम्हें ग्रास की बात बताता है,
- 14:04बताई है, शायद पहले मुझे वरदान है।
- 14:14कि अगर मेरे सामने कोई अपनी समस्या को रखेगा जैसे बाली को
- 14:19वरदान था, जो उसके सामने आएगा उसकी आंधी शक्ति उसमें है तो फिर
- 14:29बाली हारेगा कैसे? नहीं हारेगा?
- 14:34क्योंकि आंधी शक्ति सामने वाले की बाली में आ गई, लेकिन भगवान को
- 14:45अगर दुष्ट को नाश करने के लिए झूठ का भी सहारा लेना पड़े।
- 14:51पाप का भी सहारा लेना पड़े तो भगवान पाप भी करते हैं।
- 14:56ये नई बात तुम्हें बतला दी मैं आज भगवान कहता है इससे तो पीछा
- 15:03छुड़ाओ इसको तो चलता करो। अब ये मेरे जीवों को परेशान करने
- 15:10लग गया। तो फिर पीठ के पीछे से मारने में
- 15:15भी कोई गुरेस नहीं करते वो ध्यान से समझना।
- 15:23अवतार सभी बुद्ध जैसे नहीं होते। राम ने धोखे से तीर मार दिया।
- 15:33मालिक और मज़े की बात है कि राम भुगतेंगे बिना अब ये कहानी बड़ी
- 15:41लंबी जाएगी। आप पिछली वीडियो को सभी को सुनें
- 15:45तो आपको समझा जाएगा। क्यों राम राम केंद्र पर विराजमान
- 15:49है। आग लगी है सफियर में राम बैठे
- 15:55केंद्र में सफियर जलता है तो जलने दे आंसू ना वाह फरियाद ना करे।
- 16:08आज जले अभी जल जाए अभी जल जाए तो उससे पहले जला क्यों नहीं राम उस
- 16:17सतल पे बैठे राम बैठक केंद्र पे? आग लगी सफीर पर और मज़े की बात
- 16:31तुम्हें बताऊँ, आग सफीर से पार आ ही नहीं सकती।
- 16:36जैसे ही तुमने जंक्चर प्वाइंट को क्रॉस किया, थोड़ी सी दूर बस
- 16:41थोड़ी सी दूर दो स्टेप आगे। उसकी गर्माहट, उसका शेक, उसकी हिट
- 16:55वेव्स केंद्र तक नहीं पहुंचते। यही कहते हैं कृष्ण नैनम दहती
- 17:03पाबका आग मुझे जरा नहीं सकती। जलाने की बात छोड़ो आग की हिट सेक
- 17:16गरमाहट भी केंद्र तक नहीं पहुंचती रामबह, राजमन और मज़े की बात जैन
- 17:26मुनियों ने कृष्ण भगवान ने 40,00,000 लोग मरवा दिए बिल्कुल
- 17:32उसने मरवा दिए कोई शक ऐसे ही तो काम करते हैं वह दारु और क्या
- 17:39करते हैं? ये मरवा दिया कटवा दिया मार दिया
- 17:45खुद शिशुपाल को। तुम सहनशक्ति में तो देखो, कृष्ण
- 17:53क्या सो, गालिया माफ़, तुम तो पहली ही गाली पर गले में हाथ डाल
- 18:03लेते हो तुमने गाली निकाली तो कैसे निकाली?
- 18:09सहन शक्ति देखो एक भेड़िया पानी पी रहा था कैसी नदिया से बड़े
- 18:20मज़े से पानी पी रहा ठंडा ठंडा गर्मी का मौसम था ठंडा ठंडा पानी
- 18:25पी रहा था। और थोड़ी सी दूर आकर एक ले ला
- 18:30मासूम मैं बना पानी पीने लगा। धीरे धीरे बोझ बोझ के पूछ पूछ
- 18:45करके पानी पी लेगा। छोटा बच्चा था, प्यास लगी थी
- 18:51नदिया का शुद्ध जल पीकर बड़ा तरफ हो रहा था।
- 18:57भेड़िए ने देखा के माल तो बड़ा लगा है।
- 19:05ऐसा मत करो बेटा कोमल कोमल सा है खाने को मन हुआ बोला रे बदमाश।
- 19:22तू पानी को झूठा कर रहा है, तुम्हें दिखता नहीं भेड़िया पानी
- 19:29पी रहा है, तेरे झूठे पानी को कैसे पिएगा?
- 19:33भेड़िया मैंने बोला जी महाराज मैंने आते हुए बोला।
- 19:44जी महाराज पानी पानी तो आपकी तरफ से मेरे पास आ रहा है ज़रा गौर से
- 19:51देखो आँखें है ना अब नियत बदनीयत हो गई थी, माल लबालब ऐसा है कच्चा
- 20:00कच्चा। अभी जी करे खालूं लेकिन खाना भी
- 20:06है और दोस्त लगा के खाना है, निर्दोष भी रहना है और खाना भी
- 20:15है। अब कोई ना कोई अहंकार बहाने
- 20:19ढूंढता है। मैंने देखा पानी तो वाकई ही
- 20:28बेड़िए से गुजर के फिर लैला के पास जा रहा कहते है ना तुने पिछले
- 20:37साल भी मैं पानी पीने आया तुने गाली निकाली थी मेरे को?
- 20:44मासूम मैं मैं ना बेचारा मैं मैं आके फिर बोला महाराज, मैं तो
- 20:49पिछले साल जन्मा ही नहीं था, मैं तो जन्मा ही थोड़े से महीने पहले
- 20:58उसने कहा बात करेंगे माल कच्चा कच्चा है खाना है।
- 21:05और बहाना भी बनाना है। निर्दोष भी साबित रहना है।
- 21:10बस ऐसे ही होते हैं। अहंकारी रोग माल कच्चा कच्चा है,
- 21:19खाना भी और पता भी ना लगे। चरित्र भी साफ रह जाए और बदमाशी
- 21:27भी कर लूँ? संसार को घूम फिर भी लूँ, 82 भी
- 21:37कर लूँ और त्यागी भी बना लूँ। वैसे तो अंधभक्त मुझे सुनता ही
- 21:50नहीं है, थोड़ा बहुत अगर सुनते है तो देखो भाग जाते है, मुझे पता
- 21:57है, भागना पड़ता है। ठहरना मुश्किल हो जाता है, तो
- 22:03बेड़िया बोला, तुमने गाली नहीं निकाली थी?
- 22:06कहता जी मैं तो। पैदा ही नहीं हुआ था।
- 22:09मैं तो पैदा ही अभी दो तीन महीने का हूँ तो फिर जरूर तेरे माँ बाप
- 22:16ने निकाली होगी, तेरे बाप ने निकाली होगी।
- 22:19हाँ हाँ मुझे याद है वो तेरा बाप ही था।
- 22:27कहते हैं कि मेमनों की कोई शक्ल वक्ल थोड़ी होती है।
- 22:32तुमने पहचान लिया कि मेरा ये बात कहता है, बिल्कुल पहचान लिया मेरे
- 22:39पास तीसरी आंख है और झपड़ पड़ा खा गया उसे।
- 22:46मतलब तो खाने का था, बाकी तो सब बहाना था।
- 23:00अच्छा है नाम लिख दिया करो भाई मैं कई बार नाम बीच में बोलता हूँ
- 23:08या फिर कह दिया करो कि नाम नहीं लेना।
- 23:12सेम लिखा है सेम सेम तो मैंने कुछ कह दिया, मैंने भी कुछ बोल दिया
- 23:26अपनी बातों को तो घना नहीं है ना कि हमने क्या कहा, ये तो घना नहीं
- 23:32है। दूसरे ने क्या कहा ये कहना है।
- 23:39बस बात तो खाना है, मेमने को किसी तरह भी खाना है, खाना है बा
- 23:51मुश्किल काबुआ है अपने आप ही काबुआ का देखो।
- 23:58अपने आप ही का बुआ क्या लबा लबा सा माल है, खा ही रहना चाहिए,
- 24:07वैसे भी तो भूख लगी है, खा लो मैं आपसे दीक्षित हूँ।
- 24:18सिक्का भी मेरे पास है पर महात्मा जी कोई हल निकाली है?
- 24:29मैं भी मेरी माँ को गलत बोल देता हूँ और बाबा जी आजकल माँ बाप।
- 24:37वे बच्चों के साथ ऐसा ही व्यवहार क्यों करते हैं?
- 24:47आपने मुझे दीक्षा के लिए बुलाया भी है।
- 24:5116 तारीख को सिक्का भी पास है। 3 साल हो गए बाबा जी मेरी शादी
- 25:08हुई है माफ़ करना अगर कोई गलती हो गई, फिर तो कुछ हुआ ही नहीं, सब
- 25:15गलती हो गया। अभी 16 तारीख को आना है नाम लेने
- 25:19के लिए। मैं भला इसे दीक्षा दे पाऊंगा,
- 25:28सिक्का बेचारा क्या करेगा? जब तुमने वेमने को कहना ही है शेक
- 25:37लगता है अहंकार को। जहाँ भी तुम्हें गुस्सा मुठिया
- 25:53बिजने लगे, दांत पीसने लगे रोज़ अपने लक्षण पहले से ही बता देता
- 26:01है। कमिंग इवेंट्स कास्ट देयर, शैडोज
- 26:03बिफोर चेहरा तम तम आने लगता है खून तेज दौड़ जाता है, हार्टबीट
- 26:11बढ़ जाती है, ब्लड प्रेशर हो जाता है कमिंग इवेंट्स कास्ट देयर
- 26:18शैडोज बिफोर? अरे भाई अभी आए नहीं, अभी दीक्षा
- 26:29नहीं रही, अभी 16 को आना है, तुम मत आना भाई, बाबा ने मुझे वरदान
- 26:42दिया। जो तुम्हारे समक्ष आके अपनी
- 26:47समस्याओं को माने मन बोल देगा, उसकी समस्याएं समाप्त हो जाएँगी
- 27:00यह मेरे तब का फर्क। मैं उसी दिन से भीतर बैठ गया।
- 27:10मैं सब ना बाहर रहूंगा, न किसी से बोलेंगे, न किसी के सन्म को
- 27:16होऊंगा। सन्मुख होए जीवमहि जब हीं जन्म
- 27:21कोट यज्ञ से हीं तब एक स्विच बटन मुझे दे दीजिये, देखो आपका
- 27:34डायरेक्ट कनेक्शन मेरे से रहेगा। आउटलाइन पर जो भी आपके समक्ष
- 27:42समस्या कहेगा, ततकक्षण मेरे पास पहुँच जाएगी और जो समस्या मेरे
- 27:47पास पहुँच जाती है, ततकक्षण हल हो जाती है भ्रमण के पास सीधी।
- 27:55डायरेक्ट होट लाइन लेकिन ये ऑन ऑफ का बटन है बाबा इसे जब आप आपने
- 28:06कॅाटाक्ट करना हो तो इसे ऑफ कर लिया और जब आपने सार्वजनिक।
- 28:14किसी की बातों को मेरे तक पहुंचाना है तो फ़ोन कर लिया करो।
- 28:19सीधा सा फॉर्मूला है, वह बटन भी मुझे दे दिया।
- 28:26अब कई बार भ्रम लग जाता है क्योंकि।
- 28:32हमारी पंजाबी में कहते हैं कि खादी पीती कई ज्यादा है तो खादी
- 28:38पीती में खाई पीई में कहा जाता है, कई बार भूल जाता हूँ, मैं बटन
- 28:47ऑफ करना भूल जाता हूँ, सामने वाला कह के चला जाता है, उसका काम हो
- 28:51जाता है। ये फ़ोन पर भी कह दिया।
- 28:57अगर तो थोड़ा बहुत तो असर फिर भी आदम जात होता ही है।
- 29:06लेकिन बात जब मेरे पास पहुंची तो अगर बटन ऑन रह गया।
- 29:11तो वह उस भ्रमण के मालिक असीम के पास पहुँच जाएंगे, लेकिन मनुष्य
- 29:21बड़ा लोभ भी है। मेरे पास रहते रहते इतने वर्षों
- 29:31बीत जाने के बाद भी। व्यक्ति का मन लालच खा जाता है,
- 29:44कोई समस्या आ गई चलो बाबा से बजा दे हाल हो जाएगा।
- 29:53हैरानी की बात है। आप पत्तों को काटना चाहते है,
- 29:59तनों को काटना चाहते है, वृक्ष की शाखाओं को काटना चाहते है वृक्ष
- 30:05की जड़ों को कभी नहीं काटना चाहते।
- 30:14और मैं तुम्हें सीखाता हूँ सदा के लिए कि तुम मेरे अधीन मत रह जानो
- 30:23क्योंकि जैसे मैं आया हूँ आज बोल रहा हूँ आपके समक्ष वैसे बहुत से
- 30:31संत आये और चले गए। गृहस्थ को तो भ्रम हो सकता है कि
- 30:37मैं सदा बना रहूंगा, लेकिन मुझे कतई भ्रम नहीं है कि मैं सदा बना
- 30:42रहूंगा, बिलकुल सत्य सत्य साफ मैं देख रहा हूँ कि यह शरीर जाएगा।
- 30:51लेकिन मैं बना रहूँगा जो मैं, मैं का तत्व मेरा है, जहाँ तक शेक
- 30:58नहीं पहुंचता। जहाँ तक कटु वचनों की गरमाहट नहीं
- 31:04पहुंचती, तो फिर कृष्ण को गरमाहट कैसे आ गई?
- 31:14राम को गर्माहट कैसे आती, जो पीठ पर जाकर मरना पड़ा, कृष्ण को
- 31:22सुदर्शन चक्र क्यों चलाना पड़ा, यही मुश्किल सवाल है।
- 31:37यही रात अंतिम यही रात भर यही रात अंत जही रात भर।
- 31:56बस एक रात की कहानी है सारी यही रात अंतिम यही रात।
- 32:12बस एक रात की अब कहानी है सारी यही रात अंत यही रात इसी बात को
- 32:30ठीक तरह से समझ। लेना।
- 32:33अंतिम बात यही भारी है, तुम पत्तों को मत काटो, तुम टहनियों
- 32:45को शाखाओं को मत काटो, काटो। जड़ों को काटो और जड़ों को भी
- 32:56इतना काट दूँ कि दूर दूर तक जड़ें दिखाई ना पड़े।
- 33:00उसके जिसे ठेस लगती है उसको काट दूँ।
- 33:14रात अंत यही बात हाल बस इस बात की अब कहानी है सारी।
- 33:29यही बात अंतिम यही बात भारी बसिक बात की अब कहानी है सारी यही बात
- 33:46अंतिम। यही बात वह लेकिन मुश्किल लगता है
- 33:52तुम्हें सबसे मुश्किल धरती पर अगर कोई काम है तो यही है।
- 34:03इसने बड़े बड़े जवा मार दिए। जमीं खा गई आसमान कैसे, कैसे
- 34:18जमाने ने मार जमा कैसे कै। जमीं खा गई आसमान कैसे कैसे ध्यान
- 34:40से सुन लो। पत्तों, टहनियों, शाखाओं को मत
- 34:52काटो, वृक्ष की छालों को मत काटो, काटो तो जड़ों को काटो और शमूल
- 35:03जड़ों की गहराई डेथ तक काटो, पूरी की पूरी जड़ों को काटो।
- 35:19राम अगर मारते हैं तो राम के पास उस केंद्र में बैठे हैं जहाँ पर
- 35:27ताप पहुंचता नहीं पाप का एक्शन का रिएक्शन तो आता है, राम को भी
- 35:35एक्शन का रिएक्शन आता है। कृष्ण को भी।
- 35:38तुम भूल जाते हो अगर कृष्ण ने 40,00,000 लोक महाभारत के युद्ध
- 35:51में मरवा दिए। अर्जुन तो भागने को तैयार था,
- 35:57अर्जुन तो बड़ा मेम ने की तरह निर्दोष था।
- 36:02मैं तो कहता था भाग जाऊं कैसे मारूंगा अपने ग्रुप को अपने बाबा
- 36:12को जिसकी गोदी में बैठ के छोटी छोटी बुर्की खा के में बड़ा भला
- 36:20हुआ? कैसे मरूँगा उसकी छाती में तीर
- 36:26आत्मा कब ती है कार्बन दोषो पर स्वभाव परिक्षामितों धर्म समूह
- 36:34जीता यह श्रेय श्या अनिश्चित तन में।
- 36:39शिष्य से अहम् शादी माँ ऍम पंपन, हे प्रभु मैं कायरता से कह रहा
- 36:47हूँ, इस विकट परिस्थिति में कृपा करके मेरा मार्गदर्शन कर।
- 36:58कांपता अहंकार ही कमता है, आत्मा तक कंपन जाता ना कांपता है अहंकार
- 37:13गुस्सा आता अहंकार को। अंकार टूटता अंकार ही बनता
- 37:20तुम्हारी कोई बुढ़ाई कर दे, स्तुति कर दे तो तुम फूल के कुपवा
- 37:24हो जाते हो तो तुम्हारा अंकार बहुत बढ़ जाता है और तुम इतने
- 37:30अहंकारित हो जाते हो कि कोई तुम्हें अवतार घोषित कर दे करके।
- 37:41अगर अहंकार की कामना है, कलकी के अवतार होने की, तो वह झूठा है।
- 37:49सच में जो अवतार होते हैं कृष्ण भी हुए, राम भी हुए, कलकी अवतार
- 37:58भी हूँ, मैं हूँ। मुझे घोषित नहीं किया गया।
- 38:03मैं हूँ, मेरे सामने जो समस्या बताई जाएगी, ब्राह्मण तक सीधे
- 38:19पहुँच जाएंगे। लेकिन मेरे पास रहने वाले लोग इस
- 38:29चीज़ का नाजायज फायदा कि चलो बाबा की सेवा तो करते हैं तो इतना सा
- 38:42मांग लो। ये संकट आ गया है विकेट परिस्थिति
- 38:47आ गई है बाबा ठीक करो पता है ठीक तो हो ही जाएगा, लेकिन तुम्हें
- 38:59पता नहीं यह विकट परिस्थिति किसी कारण से आई है, अब यहाँ पर थोड़ा
- 39:07ठहर जाओ। वेकट परिस्थितियां दो कारणों से आ
- 39:11सकती है। एक तो तुमने कुछ कर्म किया होगा।
- 39:15उस कर्म का परिणाम फलीभूत होकर सामने आया।
- 39:19विकट परिस्थिति तो आई एक दूसरा तुमने कोई ऐसा कर्म नहीं किया।
- 39:29लेकिन यह ताजा कर्म किसी और ने किया।
- 39:34तुम्हारे साथ कोई ठगी मार गया। तुम्हारे साथ कोई बेईमानी कर गया।
- 39:39झूठ का फर तोल गया कि भाई मैं तो 15,00,000 लूँगा तुम्हें यह फिर
- 39:45गलती उसकी है। यह तुम्हारी गलती नहीं है, जो एक
- 39:52व्यक्ति 140,00,00,000 लोगों को बेवकूफ बना देता है वह टंगना
- 39:59चाहिए कि नहीं टंगना चाहिए मुझे बताओ वह टंगना चाहिए कि नहीं
- 40:09टंगना चाहिए। और फिर बिना सोचे समझे दिमाग है
- 40:16नहीं, अर्थशास्त्री है नहीं, कोई कानून लागू करता है।
- 40:20कहता है अगर फेल हो जाए तो चौराहे पे खड़ा कर लेना और ज़ाहिर सजा
- 40:26देना। तो भाई चौराहे पर खड़ा करेंगे और
- 40:29सजा देंगे, अभी ठहर जाओ। बिलकुल वो वक्त आएगा, एक नहीं सभी
- 40:41गुनहगारों को सजा मिलती है। इस संसार में कोई बच के जाता ही
- 40:45नहीं। जो इस कचहरी से बच जाता है।
- 40:50तुम्हें नहीं पता लेकिन संत जानता है एक और बड़ी कचहरी यहाँ कोई
- 40:54पूरे पापों का परिणाम तो मिलता ही नहीं है, आत्म तो बड़ी अल्पबुद्धि
- 40:59है, वह आपको सजा न दे पाएगा। लेकिन सही सजा तो उसके दरबार में
- 41:09मिलती जितनी सजा यहाँ मिल गई मिल गई।
- 41:12लेकिन वो याद रखना पूरी सजा नहीं होती क्योंकि जज ने देखा नहीं।
- 41:23जज ने वो दर्द नहीं सहा। न्यायिक कुर्सी के ऊपर बैठे हुए
- 41:29व्यक्ति साक्षी नहीं, उसके सामने यह घटना घटी नहीं।
- 41:35वह गवाहों के प्रत्यक्षीकरण से ही फैसला देता है और उसके भीतर वो आग
- 41:40नहीं जलेगी। उबाल नहीं खायेगा उसका खून लेकिन
- 41:45साक्षी का खून उबाला खाता है और साक्षी है एक कण कण में व्याप्त
- 41:52एक साक्षी श्रद्धा से चौबीसों घंटे तुम्हें देखता है तो हमारे
- 41:57कर्मों पर बराबर उसकी निगाह है। वह तो फिर जो दंड यहाँ मिल गया
- 42:08अदालत में अगर यहाँ तुम बच भी गए तो फिर वह नहीं छोड़ेगा, तुम नहीं
- 42:15जानते उसे लेकिन मैं कहता आंखो देखे।
- 42:21तुम बच नहीं पाओगे, इसलिए न मैं खुद पाप करता हूँ और तुम्हें भी
- 42:30कहता हूँ कि तुम पाप मत करना क्योंकि फिर अहंकार।
- 42:37पाप तो करता है लेकिन पाप का फल कोई दूसरा भोग ले यह उसकी चेष्टा
- 42:42रहती है। लेकिन यह उसकी प्रणाली के नियमों
- 42:46के अंतर्गत नहीं आता। उसकी प्रणाली के नियमों के
- 42:50अंतर्गत यही आता है। जो करेगा वो ही भरेगा।
- 43:01करता ही भोगता है। कृष्ण भी गर्म होते हैं, राम भी
- 43:15गर्म होते हैं, 40,00,000 लोगों का वध करवा देता है।
- 43:21कृष्ण अर्जुन के हाथों करवा देता है।
- 43:25लेकिन ऐसा थोड़ा तुम किसी को सुपारी दे के कतल करवा देते हो।
- 43:32इस दरगाह से तुम बच जाते हो, सबूतों के अभाव में तुम बरी हो
- 43:36जाते हो। मैं किस्से मुखातिब हूँ।
- 43:38वो अच्छी तरह से जानते हो लेकिन ध्यान रखना वह एक सत्ता।
- 43:47जो तुम्हें बिलकुल बिलकुल सही दंड देखी वह मौजूद है और मैंने देखी
- 43:53है महात्मा गाँधी को अपने आखिरी दिनों में उसकी झलक मिल गई थी।
- 44:03सुतुर एक। किसी पटेल ने कहा कि मेरी सीक्रेट
- 44:14जो डिपार्टमेंट है उसने ये पता की है बापू आपको मार देंगे।
- 44:23आप सिक्योरिटी लेलो? जो भीतर आए उसकी तलाशी लेने की
- 44:29व्यवस्था हम कर देंगे। गृह मंत्रित आपको कह देना है अब
- 44:41मैं नहीं कर रहा हूँ अभी क्या है मतलब?
- 44:48कोई लोभ नहीं, कोई लालच नहीं, यह मेरा कर्तव्य था और मैं कर सकता
- 44:53था तो मैंने कर दिया। ईश्वर की कृपा से आजादी मिल गई,
- 45:00अब मैंने करना भी क्या है? अगर कोई अपना शोक पूरा करना चाहता
- 45:08है वो कर ले लेकिन वो जान गए थे कहीं उन्हें झलक मिल गई थी।
- 45:20मुझे मार देंगे लेकिन मेरे उस वितरी तत्व को नहीं मार पाएगा।
- 45:29यह एक सुसरी की झलक होती है। जो पता चल जाता है वह आदमी रोतन
- 45:36वह आदमी दुःखित नहीं होता। तुलसी ने पटेल से कहा आप तू जाओ।
- 45:46मुझे कोई सुरक्षा वगैरह नहीं चाहिए।
- 45:49अगर किसी का शौक है मुझे मारने का वह मार जाएगा।
- 45:54मैं भी यही कहता हूँ। अगर किसी को शौक है मुझे मारने का
- 45:58तो आओ मार जाओ लेकिन तुम पाओगे जैसे आज गाँधी बैठे।
- 46:07वैसे तुम पाओगे अगर कुछ कर्म शेष रह गए तो फिर से फिर गाँधी आएगा।
- 46:23कृष्ण उबाल खाते हैं लेकिन कृष्ण का ये भारी ढांचा उबाल खाता है,
- 46:30केंद्र तक वो उबाल नहीं जाता। राम भी उबाल खाते हैं लेकिन राम
- 46:37के भीतर को उबाल नहीं करता जहाँ केंद्र पे वो स्वयं मौजूद है।
- 46:45ऐसे ही सारी सुनते हैं कबीर हो या नानक हो, मीरा हो।
- 46:51या पलटू रिया दास सभी संत जानते हैं, मैं न मरूँ, मरे संसारा, मैं
- 47:05न मरूँ, मरे संसारा। यह संसार के पंचभौतिक तत्व मरेगा।
- 47:12मोहे मिला जिलावनहरा मैं तो केंद्र में बैठ गया हूँ, वह कभी
- 47:17मर्तान नैनम छिद्दीन तीर्थस्त्राणी नैनमदाहती पावका
- 47:29अगर। तुम गुस्सा हो जाते हो, तुम
- 47:39क्रोधित हो जाते हो और तुम भी कुछ कह देते हो, तुम भी उल्लू और
- 47:47तुम्हारी माँ भी उल्लू दोनों बराबर हो।
- 47:58दोनों ही तुम अहंकार से और मैंने तुम्हें फॉर्मूलेशन बताया फिर
- 48:04तुमने मुझे सुना क्या तुम्हारी माथे तो मुझे नहीं सुनती होगी?
- 48:08चलो मान लिया लेकिन तुम तो सुनते ही होगी जो दीक्षा लेने आ रहे हो,
- 48:16अगर नहीं सुनते मुझे। सिर्फ प्रश्न कर दिया तो यहाँ से
- 48:19वापस कर दिया जाओगे। कल दो गाड़ियां भर के आ गई यहाँ
- 48:28चलो दीक्षा लो, दीक्षा लो मैंने कहा भाई ये कोई इरादा समय डराव
- 48:34जहाँ तुम बड़ों की तरह गए हो, सुना है मुझे।
- 48:41हाँ, सुना तो नहीं है बाबा लेकिन भजन तो बहुत करता हूँ।
- 48:46मैंने कहा इसी भजन का ही मैं बहिष्कार करता हूँ, फिर बात बनेगी
- 48:53कैसे? जो भजन तुम करते हो?
- 48:58उसी का मैं उसी को कंडम करता हूँ, फिर बात बनेगी कैसे?
- 49:04फिर मैं घूंठा लगा दूंगा, फिर तुम कहोगे बात बनी नहीं, या तो हृदय
- 49:09के अंदर नहीं जाते बात उतरती नहीं, मैं कैसे एलेबोरेट हो
- 49:14जाऊंगा आपके अंगूठा लगाने से? उसका कोई फायदा न हुआ।
- 49:19व्यर्थ वक्त खराब न किया करो, मैं बहुत बार कहता हूँ, मैंने गिनती
- 49:24नहीं बदानी भाई अब कितनी बार कहूं, कितनी बार कहूं, मेरे
- 49:35शिष्यों से पूछ लिया करो, सभी को पता है।
- 49:38कि मैंने गिनती कतई नहीं बदलनी। मुझे चाहिए मुझे चाहिए क्षुदा से
- 49:48ग्रस्त लो। जिनको भूख लग गई है, जिनको भोजन
- 49:52चाहिए। जिनका कंठ सुख गया है, रेगिस्तान
- 49:56में चलते चलते डिहाइड्रेतेद् हो गया है, उनका शरीर पसीना निकल
- 50:00निकल के कंठ सुख गया और पानी पानी कर रहे हैं, जिसका कंठ सुख गया।
- 50:15पानी की कीमत वही तो जान सकता है, मैंने सुना है रेगिस्तान में
- 50:25सिकंदर जा रहा अपनी पूरी फौज के साथ यद्यपि भंडार था पानी के,
- 50:29लेकिन घर में बहुत। लंबा रास्ता पसीना निकल कर
- 50:37डिहाइड्रेशन हो गया। प्यास लगी और पानी खत्म तो सभी
- 50:45व्यवस्थापकों से पूछा। वो कहते राजा जी पानी खत्म हो
- 50:52गया, इतनी फौज है, पानी खत्म है, पानी है नहीं और दूर दूर तलक पानी
- 51:02कहीं दिखाई नहीं पड़ता, सिर्फ मृग मारी।
- 51:07तरह दिखाई पड़ता है। सांप नहीं चमकता हुआ रेत वो दिखाई
- 51:14पड़ता है, होता नहीं। सिकंदर बोला फिर क्या करें, घोड़े
- 51:24वापस भी दौड़ायेंगे। तो भी दूर घनी है हम तो आधे
- 51:29रास्ते आ गए इतने एक पानी वो खाल होती है खाल भरी हुई खाल लेके आ
- 51:46गए आराम से चले जा रहा है पानी ठंडक।
- 51:50पीठ के ऊपर लाते मश्क कहते हैं उसे पानी की मश्क उसने देखा रे
- 52:00भाई पानी है पानी तो है लेकिन तुम्हारे लिए इतनी फौज।
- 52:09फौज कहने लगी बस राजाजी को पानी पिलाओ तो कहता नहीं पानी मैं नहीं
- 52:17पिलाऊंगा राजाजी साथ लेके क्यों नहीं आए तो सिकंदर बोला देख बात
- 52:24यह है अगर तुमने मुझे पानी नहीं पिलाया तो सिकंदर मर जाएगा।
- 52:33मर जाएगा तो मर जाएगा मुझे क्या है?
- 52:36मैं तो अपने लिए लेके आया हूँ, मैंने भी बड़ी लंबी यात्रा करनी
- 52:40है भाई ऊपर से धूप गहरी दुपहरी का वक्त।
- 52:47बड़ी लम्बी सफर है मेरी भी वो कहते है, देख मैं तुझे आधार राज़
- 52:54दे दूंगा तो मैंने राज़ का क्या करना है अगर मेरा जीवन न रहा,
- 53:01मेरा सफर बड़ा लम्बा है, मैं पानी नहीं दूंगा तो मैं।
- 53:08और फिर छीनने की कोशिश करूँगा, मैं बिखेर दूंगा, फिर मैं भी गया
- 53:13और तुम भी गए। राजा ने कहा, काम तो रख रहा राजा
- 53:22कहता है, अच्छे से कर। कौन भर राजू तुझे दे दूंगा चौथाई
- 53:29भर राज्य में अपना रख लूँगा बस गुजर बस कर लूँगा किसी तरह कौन भर
- 53:34राजू तुझे दे दूंगा थ्री फोर्थ वो कहता है नहीं भाई तुम्हें पानी
- 53:39नहीं दूंगा राजा जी। सिकन्द्र बोला तू ऐसा कर तुझे
- 53:47सारा राज्य तो मुझे पानी पीला दे, जी भर के पानी पिला दे दो कुट
- 53:58पीला देसाकिया? दो कूट पीला जैसा बाकी मेरे तिरोड
- 54:13दे दो कूट पीला जैसा किया। बाकी मेरे तेरो दे सारा राजे तुझे
- 54:28दे दूंगा बड़ी कत्लोगार से छुपाया धन वह भी दे दूंगा सारा धन सारा
- 54:37सोना। सारी जागीर तुम्हारी हो गई, तुम
- 54:45बस पानी पीला दो पानी की प्यास अगर ऐसी लगी हो तो पिलाने वाले को
- 54:51मज़ा आता है तुम्हें प्यास तो लगी नहीं।
- 54:59तुम यहाँ डेरा समझ के लोगों को भर भर के भेज देते हो, थोड़े से असूल
- 55:07कायदे नियम तुम्हें अभी तक नहीं पता लगा पांच वर्ष हो गए मुझे
- 55:14बोलते हैं, मुझे चाहिए प्यासे। मुझे अंधभक्त नहीं चाहिए, मैंने
- 55:22कौन सा राज़ करना है? मैं राज़ कर ही रहा हूँ, राज़
- 55:29करता हो व्यक्ति और मेरे से बड़ा राज़ कौन कर सकता है?
- 55:38मेरे पास प्यासा है, बस करुणा है मेरे पास किसी कीमत से नहीं करुणा
- 55:50के कारण तुम्हें तृप्त कर दूंगा तुम्हारा कंठ जो सूखा हुआ, पानी
- 55:55पानी मांगता। इस रेगिस्तान की धरा पर
- 55:58डिहाइड्रेशन हो गया। तुम्हें पानी तुम्हें पीला दूंगा
- 56:03और तृप्त तुम्हें कर दूंगा। बस यह पानी उन लोगों के लिए है।
- 56:14राजा ने सास भरी राजा कहता होगा। कैतनी कतुल गारथ खूनखराबा किया
- 56:26धरती खून से लाल हो गई गरीबों का लहू पसीने का कमाई किया हुआ सोना
- 56:33हड़प लिया, जमीनें हड़प लीं, उनकी जायदाद हड़प ली, सिक्के हड़प लिए
- 56:40क्या उसकी कीमत? एक बोतल पानी भी नहीं है।
- 56:46बस इतनी सी कीमत है जो मैंने कतलोगार्थ की।
- 56:50हाँ इतनी सी कीमत है राजा जी राजा की सारी अकड़ चूर चूर हो गई सारा
- 57:02अहंकार मटिया मेट हो गया। राजा घोड़े से उतरा और उसके चरणों
- 57:10में जा पड़ा और तलवार उसको दे दी ये ले मुसाफिर अनजान मुसाफिर,
- 57:21मुझे पता नहीं वो कौन है? अगर मरना ही है तो ये ले नंगी
- 57:29तलवार बड़ी तीखी तलवार है मेरे, इससे न जाने सैकड़ों हजारों लोगों
- 57:34के मैंने गर्दनें उड़ाईं आज इसी तलवार से मेरी गर्दन में उड़ा दी।
- 57:48ताकि मुझे मेरे किय का फल मिल जाए क्या जितना मैंने कतलो गारस से
- 57:53इकट्ठा किया उसकी कीमत एक पानी की बोतल से भी कम है तो उस आगुंतक ने
- 58:06तलवार पकड़ी। लोग तो डरे जो आस पास घर थे या तो
- 58:13मारते घर हमारा राजा है और तलवार फेंक दे पर उठा के गले से लगा
- 58:21दिया, बोला अब तुझे पानी की कीमत का पता चला।
- 58:30अब तू सिर्फ देने को राजी हो गया? देखिए ये कहानी है क्या अब तू
- 58:38सिर्फ देने को राजी हो गया? तो अब मैं पानी पिलाने को ही राजी
- 58:43हो गया। एक बात अंजलि।
- 58:49और धाब के पीले और तू भी पीले और तेरे सिपह सालारों को भी पीला दे
- 58:59भयंकर गर्मी है प्यास सभी को लगी हुई राजा अकेले तुम्हें नहीं लगी
- 59:07प्यास तू सभी को लगी। लेकिन जब तक यह स्थिति नहीं आती
- 59:15और तुम्हें पता नहीं चलता तुमने आज तक जो कमाया लोगों को मरवा
- 59:21मरवा के सुपारियां दे दे के वो जो कमाया उसकी कीमत कितनी?
- 59:30तब तक तुम्हें अक्ल नहीं आएगी अगर उसी दिन आएगी।
- 59:41जीस दिन सिकंदर की तरह तुम एक पानी की बोतल के लिए अपना समग्र
- 59:47लुटाने को राजी हो जाओगे। वो वक्त कब आता है?
- 59:56इंतजार करो लेकिन ऐसी प्रस्तुति जब तक नहीं आएगी तब तक यहाँ
- 1:00:09गाड़ियां भर के न भेजना ये बड़ा पाप है।
- 1:00:14जिनको प्यास नहीं लगी, तुम उन्हें मेरे पास भेज देते हो, मैंने यहाँ
- 1:00:19संख्या थोड़ी इकट्ठी करनी मैंने ना आरती उतरवानी ना स्तुति
- 1:00:25करवानी, ना पूजा करवानी, ना राज़ करना, ना गद्दियाँ चाहिए, ना कोई
- 1:00:31अलंकार चाहिए, मुझे कुछ नहीं चाहिए।
- 1:00:36फिर तुम काहे? ये भीड़ बड़का मेरे पास है क्या
- 1:00:46इनको जो सोने से जो धन से जो गद्दियो से?
- 1:00:58जो अपनी पूजा प्रतिष्ठा से प्रसन्न होता है उसे पानी ऊँचा
- 1:01:09लगेगा। उसे पानी की जरूरत को मेरी क्षण
- 1:01:18में वो तब आएँगे। जैसे सिकंदर शरण में पड़ गया ये
- 1:01:23दे तलवार मुझे मार दे प्यासा तो मैं भी नहीं मरना चाहता खैर तेरी
- 1:01:27शरण में ही मरना चाहता हूँ, जिसके पास पानी है उसकी शरण में ही मर
- 1:01:32जाओ। यही कहते हैं कृष्ण सर्व धर्माण
- 1:01:36पृथ्वजमा मेकम शरण ब्रज। इन किताबों की शरण में मत मर जाना
- 1:01:43इन अनपढ़ों की जिन्होंने देखा नहीं अज्ञानियों की शरण में पढ़
- 1:01:51के मत मर जाना तुम्हारी गति नहीं होगी तुम दुर्गति को उपलब्ध हो के
- 1:01:58मरना। तो सहिंसा के कदमों में मरना जो
- 1:02:03सहिंसा वास्तव में हो गया हो, जो नकली नकली प्लिस्टिक का बना हुआ
- 1:02:08सहिंसा फूल है उसमें सुगंध नहीं होती।
- 1:02:18मरना तो जरूरी है। एक छोटी सी बात थी, कुछ 10 साल
- 1:02:28पहले बीती एक व्यक्ति मरने जा रहा था।
- 1:02:38उस वक्त मैं बाजार में चला फिर करता था।
- 1:02:46अरे मेरे पास आया कहता है मैं मरने चला उनका मरने चला है क्यों
- 1:02:55मरने चला कहता बस ये दुनिया से मन भर गया।
- 1:03:01मेरे दिल कहीं और चल। गम की दुनिया से दिल भर गया ढूंढ
- 1:03:13ले ढूंढ ले अब कोई घर नया एम् मेरे दिल कहीं और चल।
- 1:03:25जब गम की दुनिया से दिल भर जाए। देखिए सुसाइड दो तरीके से होता
- 1:03:31है। व्यसनों की अतृप्ति से भी तुम
- 1:03:36सुसाइड कमिट करते हो, तुम्हारी कोई वासना अतिरिक्त है, फर्ज समझ
- 1:03:43लेना बड़ा भारी। कोई वासना अतिरिक्त रह गई?
- 1:03:47वासना पूर्ति नहीं हुई तो तुम कहते हो छोड़ो क्या जीना है ये
- 1:03:54जीना भी कोई जीना है तुम मर जाते हो यू कम एट सुसाइड एक दूसरी भी
- 1:04:01होती है, यह दुनिया गम है। बैराज्ञा गम की दुनिया से दिल भर
- 1:04:09गया ढूंढ ले अब कोई खरना किसी और मुकाम पे चला जा ही कैन बी
- 1:04:16एनलाइटन ऐट दी स्पॉट ए फर्क बहुत। महीन है, सूक्ष्म है तो मैंने
- 1:04:28उसका और देखा और उसकी उस रग पे हाथ रख दिया जिसे हम विवेक्षा
- 1:04:40ग्रंथि कहते हैं। ये सारा खेल विभिक्षाक्रंति का है
- 1:04:45रामकृष्णन परमहंस ने जब विवेकानंद के स्थिर का अपराध रखा तो वह
- 1:04:52विभिक्षाग्रंथि के प्रयास का था। संत जानता है यही ग्रंथि है, जो
- 1:05:00चूस जाएगी सब कुछ। और तुम बहुत जल्दी से भीतर उतर
- 1:05:05जाओगे, लेकिन साहस होनी चाहिए। मरने का ध्यान रखना जो मरने चला
- 1:05:12है व्यक्ति अगर वो अतिरिक्त वासनाओं की पूर्ति न होने के कारण
- 1:05:18वो मरने चला। उसका कुछ नहीं किया जा सकता।
- 1:05:24अगर किसी व्यक्ति को दुख ही मिला संसार में और वह अपनी वासनाओं से
- 1:05:30ही दुखी हो गया है, बात समझ ले ना, बड़ी बारीक है।
- 1:05:34एक की वासनाएँ पूर्ण नहीं हुई। वासनाय पूर्ण नहीं हुई के कारण वह
- 1:05:42सुसाइड कमेंट करता है। एक दूसरे को वासनाय दुख का कारण
- 1:05:48बन गई। केंद्र बिंदु बन गई वासनाय उसे
- 1:05:52दुख देने लगी ही कैन बी ट्रांसफर्ड ही कैन बी एनलाइटन।
- 1:05:59मैंने उसका उरा देखा, बिल्कुल वही था।
- 1:06:03अगर कोई ऐसा व्यक्ति जो मरने चला है उसमें साहस बड़ा विराट होता
- 1:06:10है, उसको एनलाइटन करना पल भर का खेल है।
- 1:06:24गोशाला के किनारे नहर की पटड़ी के ऊपर जब वो मुझे मिला, उसने अपनी
- 1:06:35बात मुझे बताई कि मैं चला हूँ, मरने चला हूँ।
- 1:06:45और इस कारण से मरने चला हूँ संसार कुछ है नहीं, ध्यान रखना संसार
- 1:06:53में कुछ मिला नहीं। यह बात अलग है, अतिरिक्त वासन कुछ
- 1:06:57चाहिए था, वो हुआ नहीं, लेकिन दूसरा।
- 1:07:02जो चाहिए था मिल गया, लेकिन उससे तृप्ति नहीं हुई।
- 1:07:07दूसरी तरह का व्यक्ति पल भर में अपने अंतर को छू सकता है।
- 1:07:15मैंने उसकी विवेक्षा ग्रंथि पे हाथ रख दिया।
- 1:07:19सन्नाटा था कोई न था अक्सर। सन्नाटा रहा करता था वो गौशाला
- 1:07:26मंदिर में तब कोई याताजाता भी विशेषण था और वह गरीब गरीब बेहोशी
- 1:07:38की हालत में वृक्ष के किनारे डोई लगा के बैठ गया बैठ।
- 1:07:46घंटों तक बैठा रहा और उसने अपना वो तत्व अबा लिया।
- 1:07:53मैं वहीं घूमता फिरता रहा। घंटों तक मैं भी घूमता फिरता
- 1:07:58रहता। क्रिया योग करता रहता।
- 1:08:02आफ्टर एनलाइटनमेंट भी मैं क्रिया योग करता रहा, क्योंकि यह है शरीर
- 1:08:07के लिए बड़ा लाभदायक है। शरीर और मन के लिए बड़ा लाभदायक
- 1:08:11है। तुम्हारे न्यूरॉन्स को प्राण वायु
- 1:08:15देता है, ऐसी जो प्रसन्न रहते हैं सेरिटोनियन।
- 1:08:23डोपामाइन अपने आप पैदा होता है, तुम ज़रा क्रिया रूप तो अवश्य कर
- 1:08:29लिया करो, नास्तिक हो या आस्तिक, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:08:33नास्तिक भी स्वास्थ्य तो लेता ही है।
- 1:08:37करोना में नास्तकी मरे और आस्तकी मरे और वैसे तो सभी नास्तकी हैं
- 1:08:42जो मानता है और जिसने देखा नहीं वह भी नास्तिक है और जो नहीं
- 1:08:48मानता वह तो नास्तिक है ही तो जैसे ही मैंने उसकी विवेक्षा
- 1:08:56ग्रंथि में। हाथ रखा और पूरी पावर ढेल दी।
- 1:09:01मुझे पता था मरने तो चला ही और पूरी पावर भी फेंक दूंगा तो मरेगा
- 1:09:08नहीं, मरोगे नहीं, ध्यान रखना। जब भी तुम्हें कंपनी आई अपने भीतर
- 1:09:14जाते हुए बहुत कुछ आएगा। मृत्यु का भी सबसे ज्यादा आएगा
- 1:09:19क्योंकि तुमने सबसे ज्यादा दबाया ही मृत्यु को है और वो ही चीज़
- 1:09:23बाहर निकलेगी जो तुमने दबाई जीसको तुमने सुब्रहस किया दबाया, वो ही
- 1:09:33निकलेगा बाहर। क्योंकि उसकी तहे जमी पड़ी है।
- 1:09:40क्रोध भी आएगा, अहिंकार भी आएगा, काम भी आएगा, वासनाएँ भी आएंगी,
- 1:09:45लेकिन सबसे ज्यादा आएगा वह और मैं हैरान होता हूँ, उस बात में के
- 1:09:49इतने ऋषियों ने ग्रंथ लिख दिए। लेकिन भय को विकार के भीतर शामिल
- 1:09:54नहीं किया, जबकि वह सबसे बड़ा विकार है, जिसने भय के ऊपर से
- 1:10:02विजय प्राप्त कर ली, निर्भय हो गया निरपु, निर्भय, अकाल मूरते
- 1:10:10वही हेतु परमात्मा। जिसका वह खत्म हो गया।
- 1:10:16वह परमात्मा होने की योग्यता पा गया, फिर उसे चाहिए गुरु और गुरु
- 1:10:22उसकी विवेक्षा ग्रंथी पर हाथ रख दे, वह ततक्षण एक पल में घटना घट
- 1:10:27जाती। और वह एनलाइटेड हो गया।
- 1:10:38उसके बाद वह व्यक्ति काफी साल जीया आनंद में रहा।
- 1:10:48संसार से तो पहले ही वो उकता चुका था तभी तो इच्छा हुई कि बस छोड़
- 1:10:59तू ढूंढ ले, अब कोई घर नया यात्रा को मैं कहाँ से बोल रहा?
- 1:11:06इस ठिकाने पे आनंद नहीं प्यार में जलने वालों को इस मरहले के ऊपर
- 1:11:19रहने वाले इस। स्टेट के ऊपर रहने वाले लोगों को
- 1:11:24चैन कहाँ हाय आराम कहाँ हम प्यार में?
- 1:11:38जलने वालों को। संसार के प्यार में जलने वाला
- 1:11:45हूँ, धन के प्यार में जलने वाला हूँ, गद्दियों के प्यार में चलने
- 1:11:48वालो, मान प्रतीक्षा के पैर भिजवाने के लिए मेरा नाम जुगों
- 1:11:52जुगों तक अमर रहे। यह ही भासना है और यह तो बड़ी
- 1:11:56भयंकर भासना है। इसने तो लाखों करोड़ों लोगों को
- 1:12:01निगल लिया। इसके प्यार में जो जल जलता ही है
- 1:12:12संसार के प्यार में जलने वालों को चयन कहाँ?
- 1:12:19हाय आराम का ना आराम है, ना चैन है और जब तुम इस स्टेज पे आ जाते
- 1:12:32हो और नाक मुड़ जाती है जीवन से। वह घड़ी निर्णायक हो सकती है।
- 1:12:40ऐथेर यू कैन डिस्ट्रक्ट युअर वर्क।
- 1:12:44इसके इसे स्कैटर भी कर सकते हो तुम लेकिन अगर वक्त पर तुम्हें
- 1:12:49गुरु मिल गया तो वह तुम्हें उस स्थान पर ले जाएगा।
- 1:12:55ढूंढ ले अब कोई घर न आ ए मेरे दिल कहीं और चल यह जब परिस्थिति आ जाए
- 1:13:05संसार से जियरा न लगे सब कुछ होने के बावजूद भी जैसे बुद्ध के पास
- 1:13:11सब कुछ था भरा पूरा। सम्राट साम्राज्य बौघ की सारी
- 1:13:19सामग्रियाँ दास दासियाँ सब था उसके पास हीरे, मोती, मुकुटमणियां
- 1:13:30सब कुछ था। लेकिन कुछ कमी थी।
- 1:13:36ऐसा ऐसी अवस्था में अतिरिक्त हुआ मानव कैन गेट दी एनलाइटनमेंट ये
- 1:13:45जो आचार्य कहते हैं एनलाइटनमेंट होती नहीं तो बिल्कुल ठीक कहते
- 1:13:51हैं। क्योंकि ऐसी अवस्था जब आई ही
- 1:13:54नहीं। बेचारा कब पढ़े, एक कॉम्पिटिशन
- 1:13:58लड़ा, यू पैसे के आया इस बने नौकरी मिली।
- 1:14:05इनकी तो वासना है कि अगर इतना अच्छा बोल लेता हूँ कबूलरी इतनी
- 1:14:11ज्यादा है। इतनी ज्यादा स्मरण शक्ति है और
- 1:14:16नॉलेज जिसे तुम ज्ञान कहते तो है वो सूचनाएं, सूचना इतनी है तो फिर
- 1:14:23इससे बेहतर भी कर गुजर सकता हूँ। फिर आओ संस्थान ही खोल ले तो फिर
- 1:14:29संस्था को दान दो भाई। लेकिन यह वासन और बड़ी भयंकर वासन
- 1:14:37और यह लोग तुम्हें सिखाएंगे गीता यह लोग सिखाएंगे तुम्हें अष्टवकर
- 1:14:44गीता यह लोग सिखाएंगे तुम्हें उपनिश्चित यह कहेंगे गीता का
- 1:14:49ज्ञान हो, आचार्य के सांग हो। गीता के रंगों में क्या बात हुई?
- 1:14:55सुंदर सुंदर शब्द अल्फाज़ इनके पास लेकिन भीतर अनुभव के नाम पर
- 1:15:00शोन्य आए हम प्यार में जलने वालों को चैन कहा आराम कहा अगर ऐसी
- 1:15:13मनोस्थिति। बुद्ध के जीवन से आजाय तो वह भरे
- 1:15:19पूरे साम्राज्य को छोड़कर चला जाता है।
- 1:15:25उस्तत्व की तलाश में जो अज्ञात राही जो अनजान राही अज्ञात मंजिल।
- 1:15:37कहाँ जाना है पता नहीं, लेकिन है कुछ ऐसा उनकी भीतर की आत्मा पुकार
- 1:15:44करती है, कुछ है ऐसा यहाँ तो जो है वह तो देख लिया कुछ नहीं।
- 1:15:57हुका है सब तो। फिर फिर उनका मन कहता है घर के
- 1:16:12आसना मिले। पत्थर के देवता मिले शीशे का दिल
- 1:16:24लिए जाऊं कहाँ? साथी ना कोई मंजिल दिया है ना कोई
- 1:16:45महफिल चला मुझे लेके ए दिल। अकेले कहा साथी ना कोई मंजिल दिया
- 1:17:05है ना कोई महफिल चला मुझे। ले के है दिल अकेले कहाँ।
- 1:17:21बुद कहा चले कोई पता नहीं, लेकिन यहाँ से जी भर के आ ढूंढ ले अब
- 1:17:30कोई। बुद्ध को नहीं पता मैंने कहाँ जा
- 1:17:36कैसे मिलेगा वो कोई पद्धत नहीं है मालूम कोई विज्ञान भैरव तंत्र
- 1:17:43उसने पढ़ा लेकिन एक समझ ऊपजी। कि कम से कम यहाँ तो नहीं है।
- 1:17:54इतना तो पक्का यहाँ तो नहीं है। भोगों में तो नहीं है और यही अगर
- 1:18:01समझा जाए तो काफी है। पत्थर के आश्रय न मिले।
- 1:18:08पत्थर के देवता मिले शीशे का दिल लिए जाऊंगा साथी न कोई मंझिल दिया
- 1:18:19है, न कोई महफिल, कोई राह दिखाने वाला बिल कोई रह गुज़र भी नहीं कि
- 1:18:26उससे पूछ लूँ। अकेले आंधी रात्रि को चलें, बुद्ध
- 1:18:32जाना कहाँ है? पता नहीं मंजिल कहाँ है, पता नहीं
- 1:18:38मार्ग क्या है, पता नहीं मार्ग दर्शक कौन है, कोई नहीं, लेकिन
- 1:18:45फिर भी चला है। क्यों चला है?
- 1:18:49क्योंकि यहाँ कुछ नहीं। अगर तुम्हारा मन इन भोगों से भर
- 1:18:55गया है तो फिर याद रखो फिर तुम्हें क्षण में ही।
- 1:19:06क्योंकि एक मकान तुमने ठीक से देख लिया है।
- 1:19:11एक मुकाम तुमने पूरा तलाश लिया, वह नहीं मिला फिर दूसरे मुकाम की
- 1:19:18तरफ जाना ही उचित रहेगा। तुम्हारा अंतः क्या मांगता है यह
- 1:19:25तुमने उसकी पुकार सुन दी तुम्हारा अंतः हर वक्त कह रहा है एम् मेरे
- 1:19:31दिल कहीं और चले यह जो अनहत की उठती हुई आवाज़ यह तुम्हें पुकार
- 1:19:38रही है लगातार। इसे गौर से सुनो ये तुम्हें किसी
- 1:19:43की खबर देती है अंजान की अज्ञात राही है इसका उदगम सथल वहाँ बैठा
- 1:19:53है वो मालिक सरजन हारा वहाँ जाना है।
- 1:19:59बुद्ध के पास तो अभी आनंदनाथ भी नहीं है, लेकिन संसार के सब स्वाद
- 1:20:09चक लिए हैं। यहाँ तो कुछ नहीं एक पासा तो
- 1:20:13सिक्के का हुआ बेकार अब दूसरा ही भाषा तलाशना पड़ेगा।
- 1:20:17और चले हैं। बुध आंधी रात को चोरी चोरी चले
- 1:20:21हैं। देखिए अपने लोगों ने अपनी गरीबी
- 1:20:25तो छोड़ी गरीबी के कारण तो घर से निकले परदेश हुए धनोपार्जन के लिए
- 1:20:34लेकिन एक अकेला व्यक्ति। जिसके पास सब कुछ होते हुए घर से
- 1:20:39निकल गया। परदेसी हो गया अकेला बुध मिलेगा
- 1:20:42तुम्हें वे और भी बहुत हैं लेकिन नाम सिर्फ बुद्ध का ही चलेगा
- 1:20:51क्योंकि वो सम्राट थे। और सम्राट जितनी जल्दी उकता जाते
- 1:20:57हैं उतनी जल्दी गरीब व्यक्ति नहीं उकता सकता।
- 1:21:05सम्राट उकताएगा जब तो पल भर में उकता जाएगा और जब भागेगा तो चोरी
- 1:21:11छिपके भाग जाएगा। चेतक से कहेगा चलो बस ऐसी
- 1:21:20परिस्थिति जब तुम्हें आ जाए तो आवश्यकता होती है गुरु तब आना
- 1:21:27प्रिय मेरे पास मेरा दर खुला है। खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए जब ये
- 1:21:41संसार तुम्हारा मन तोड़ जाए तुम्हें न मिले वो तृप्ति दायक
- 1:21:47अंश जिसकी तलाश तुम्हारी आत्मा के भीतर से।
- 1:21:50हाँ, मैं नाद की पुकार तुम्हें पुकार रही है, यह तुम्हें उस
- 1:21:55अज्ञात की खबर देती है काश तुम्हारे अन्धनाथ शुरू हो गया
- 1:22:02होता और काश तुमने जीस उदगम सतल से अज्ञात राहों से यह।
- 1:22:09उपजता है उसकी तरफ चलना शुरू किए होते।
- 1:22:13तुम तो फिर तुम्हें नई नई मंझले रोज़ मिलते हैं।
- 1:22:20रास्ता दूर है मानो लेकिन किताब भी दूर हो।
- 1:22:27जब तुमने पहला कदम उठा लिया तो एक कदम कम हो गया।
- 1:22:31मंजिल एक कदम कम हो गई तो चलना, उस वक्त ऐसे गाड़ियां भर भर के मत
- 1:22:41आया करो। मैंने कोई पार्टी नहीं खड़ी करनी
- 1:22:45है जा। जब दुनिया दुख से दुखी हो गई, तब
- 1:22:52मेरे पास खुद ही आ जाता। खुद ही कहेंगे बाबा अब आप ही गाइड
- 1:23:00करो, अब आप ही मार्गदर्शक करो। जब तलक कोई और मार्गदर्शक है, इस
- 1:23:08दुनिया को दिशा दे रहा है तब तक मुझे न तो कोई आवश्यकता है, न
- 1:23:14मेरी कोई जरूरत है। मैं उनके लिए व्यर्थ हूँ, मैं
- 1:23:20उनके लिए जब सार्थक हो जाऊंगा। तो मुझे वोट ढूंढ लेंगे और मैं
- 1:23:24उन्हें बता भी दूंगा। देखिये आपके राजनीतिक लोग कहते
- 1:23:31हैं कि 50 दिनों में मैं हल कर दूंगा, वो तो न हल कर पाए लेकिन
- 1:23:3630 दिनों में मैं जरूर हल कर दूंगा।
- 1:23:40मैं झूठ कभी नहीं बोलता, मेरे पास है वो जादू की छड़ी मेरे पास
- 1:23:50वास्तव में जादू की छड़ी है। यकीन मानो मेरे पास छड़ी है,
- 1:23:55लेकिन आना तब जब तुम थक जाओ इस संसार के तपेड़ों से।
- 1:24:02तू आ जाना मेरे पास, 30 दिनों में मैं तुम्हें गोल्डन स्पैरो बना
- 1:24:09दूंगा। मेरे पास तकनीक है तब तुम मेरे
- 1:24:14पास दोनों ही तरीकों से बोल रहा हूँ।
- 1:24:19अगर भीतर जाना है, तो भी आ जाना फिर मेरे पास पानी है, तुम्हारी
- 1:24:24प्यास में जाना अगर तुम बाहर की गरीबी से उत्पाद से तंग आ गए हो
- 1:24:33नफरत से दुखी हो गए हो। नफरत की गर्माहट तुम्हें तकलीफ
- 1:24:41देह मालूम पड़ती है तब भी तुम मेरे पास आ जाना मैं तुम्हें
- 1:24:46निजात दिला दूंगा इन सबसे मैं तुम्हें उस मुकाम पे ले जाऊंगा
- 1:24:50जीस मुकाम पर मैं मुमक्खियों को लेके जाता हूँ।
- 1:24:55कोई जब। तुम्हारा फिदा तोड़ दे तड़पता हुआ
- 1:25:06जब कोई छोड़ दे और ये राजनीतिक लोग तुम्हे तड़पता हुए छोड़ के
- 1:25:13जाएंगे ऐसे गप्पू थग्गु झूठ बोलने वाले लोग तुम्हें तड़पता ही छोड़
- 1:25:21के चले जाएंगे तुम देख लेना मैं रहूं ना रहूं तब तुम मेरे पास
- 1:25:31कहाँ ना प्रिय? तब तुम मेरे पास आना प्रिये, तब
- 1:25:44तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है।
- 1:25:53खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए।
- 1:26:08तो अगर ठेस लगती है तो आपमें अहंकार बना।
- 1:26:14ज्यादा ठेस लगती है तो बहुत घना है।
- 1:26:17अगर कम ठेस लगती है तो अहंकार थोड़ा है।
- 1:26:21बुद्ध को बिलकुल ठेस नहीं लगती क्योंकि उनके भीतर का अहंकार गया,
- 1:26:27तादात में टूटा, धर्म टूट गया, मन टूट गया।
- 1:26:34तो भ्रम पे टूट गया, मन ही भ्रम है।
- 1:26:41श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हे हे नाथ नारायण यन वासुदेव श्री
- 1:27:06कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारायण यन वासु
- 1:27:24दे। पितुमात स्वामी सखा हमार पितुमात
- 1:27:38स्वामी सखा हमार। श्रीनाथ नारायण, वासुदेव,
- 1:27:55श्रीकृष्ण, गोविंद रे, मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री
- 1:28:08कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:28:29धन्यवाद।