Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Aug 25 - साधना का चौथा तरीका! निर्विकल्प समाधि, भक्ति और गुरु का महत्व! संतों की अमूल्य शिक्षाएँ!
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- 0:01प्रणाम बाबा जी आपने कहा कि मीरा ने अपने आपको श्रीकृष्ण में
- 0:10इन्सर्ट कर दिया था और हम अपनी आस्था के अनुसार।
- 0:18किसी मूर्ति में भी अपने आप को इनसर्ट या झोंक सकते हैं।
- 0:26बाबा जी मेरा आपसे प्रश्न यह है कि क्या हम अपने आप को आप में
- 0:36इन्सर्ट कर सकते हैं? यह ठीक नहीं होगा।
- 0:45मैंने यह प्रश्न आपसे से लिए किया, क्योंकि आप ये भी कहते हैं
- 0:51कि गुरू सबसे बड़ी चिपकाहट है। कृपया जो आप अवश्य दें, मैं
- 1:03दुविधा में हूँ, मैं आपसे दीक्षित में हूँ और अपने आपको आप जी में
- 1:13झोंकना। निराकार ईश्वर में झोंकने से शायद
- 1:20थोड़ा आसान है, शायद धन्यवाद, शायद।
- 1:42मेरी ज़िन्दगी का कठिन संप्रेषण आज मेरे सामने आया जहाँ मुझे
- 1:56परमात्मा से ज्यादा महत्त्व ग्रुप हो।
- 2:02चलिए हम सीढ़ी दर सीढ़ी पायदान खंगालते हैं।
- 2:18मैंने बिलकुल कहा मीरा ने अपने आपको कृष्णमय इन्सर्ट कर दिया।
- 2:31और भक्त को अपने आपको भगवान में इन्सर्ट करना ही होता है।
- 2:37फिर वो भगवान जी से भी माने हैं उसमें।
- 2:43धन्ना ने अनघट पत्थर में इन्सर्ट कर दिया।
- 2:46अपने आपको मूर्तियां भी इसके लिए बनाई गईं थीं।
- 2:56कई कारण थे ये भी एक कारण था। क्या आप इन मूर्तियों में धीरे
- 3:07धीरे धीरे श्रद्धा विश्वास को बढ़ाए जाएंगे, हर सुख दुःख के
- 3:14सामने बैठ के करेंगे? तो आपको इनसे स्नेह हो जाएगा और
- 3:30स्नेह होते होते श्रद्धा प्रबल होगी और श्रद्धा के बिना।
- 3:40स्वयं को 100% झोंकने के बिना यह कोई रास्ता नहीं है।
- 3:45अध्यात्म में न ही संसार में संसार में भी अगर बोलंतियों की
- 3:52ऊंचाइयों को छूना हो तो यू विल हैव टू इन्सर्ट कंप्लीटली इन दी
- 3:57ऑब्जेक्ट? थोड़े थोड़े दो है छबी के तो बाबा
- 4:18क्या हम? अपने आपको आप में इन्सर्ट कर सकते
- 4:25हैं। इतनी दूर बैठे हैं यूएस ए दूसरे
- 4:33किनारे पर वहाँ से आप तो न सकेंगे रोज़।
- 4:42लिसन क्या है सर का अब आइए एक एक पायदान को खंगालते हैं हम।
- 5:01बिल्कुल ठीक है ये प्रश्न के निराकार जिसे हमने कभी देखा नहीं
- 5:09उसमें श्रद्धा न बन पाए और वह मूर्ति जीसको हमने जाना नहीं।
- 5:18उसमें भी इतनी श्रद्धा प्रबल न हो सके।
- 5:22तुम्हें क्या पता ये सरस्वती माता होती है कि नहीं?
- 5:28फिर तोड़ने वाले बहुत हो जाएंगे ये लक्ष्मी ये दुर्गा विकली।
- 5:42ये शंकर तुम्हें कभी जाना तो है नहीं, ये कृष्ण जो चलेगा तो
- 5:57मूर्ति भी जड़ है। और वह जो कृष्ण जिसमें तुम
- 6:05इन्सर्ट कर रहे हो? अपने आपको वह भी आज तो जड़ है,
- 6:11कभी था तब आप चूक गए थे तो तब भी लेकिन चूक गए।
- 6:21बस तुम चोंकते ही चले जाते हो, यही तुम्हारी तुमने नियति बना ली
- 6:28है चोंकना तुम्हारे जैसी स्वभाव हो गया फिर अब क्या रास्ता भेजता
- 6:36है? मीरा ने अपने आपको इनसर्ट किया।
- 6:44रामकृष्णा परमहंस ने भी अपने आपको इनसर्ट दी।
- 6:49बड़े मज़े की बात है, अंतरिम बातों तक हम जाते नहीं, अंतिम
- 6:55छोरों को हम छू नहीं पाते। रामकृष्णा की वो कहानी जो
- 7:00तुलतापुरी ने कहा कि काटदु इसकी गर्दन को ये कल्पना है तुम्हारी
- 7:10तो रामकृष्णा का काटू कैसे कहते? जैसे काली बनाई।
- 7:17कल्पना से वैसी ही कल्पना की तलवार ले लो, काली की कल्पना और
- 7:24तलवार भी अब तुम कल्पनाओं में बना लो और कल्पना से कल्पना का गला
- 7:30भेज दो। डड से अलग कर दो, समझ आया उस स्थल
- 7:35पर जाकर। रामकृष्णा को पहली बार उसने जट से
- 7:42कल्पना की तलवार उठाई और काली का सिर धड़ से अलग कर दिया।
- 7:46काली है नहीं, तुम्हारी मान्यता है बस यही धोखा है फिर ये।
- 7:56पुराण पैदा होता है। फिर विष्णु के चार हाथ बनाए
- 8:03जाएंगे। चारों हाथों में अलगअलग अस्त्र
- 8:06शस्त्र होंगे। फिर लक्ष्मी के किसी के हाथ में
- 8:15कमी का पर्व होता है। किसी के हाथ में गुलाब, किसी के
- 8:20हाथ में कड़क चक गदा किस्मत, हमारी कल्पना और तुम झगड़ोगे नहीं
- 8:31बात। फिर तुम कहोगे नहीं वो सभी धर्मों
- 8:43में मूड बन ऐसे सोपन खोज लेता है। मुसलमानों ने शिया सुन्नी बना
- 8:55लिया। कौन धर्म जो बचा जैन कितना अहिंसक
- 9:02धर्म है? उसने दिगम्बर से तांबर बना दिया।
- 9:07हिंदू धर्म में शैव और वैष्णव हो गए।
- 9:12क्या करोगे? इन मूड लोगों का क्या करोगे?
- 9:23ये तो बगयार्ड को शेर की खाल पहेलाने में ज़रा भी पीछे नहीं
- 9:30हटेंगे, क्योंकि जानते नहीं हैं तो फिर रास्ता क्या फस्ता है?
- 9:41और फिर तुम्हारे पर आपत्ति आई तो ये कहानियों गढ़ेंगे, नई नई
- 9:46कहानियों गढ़ेंगे, नर्सरी का वात भर होगा।
- 9:53लेकिन नर्सरी की समर्पित भावना तुमने दी थी।
- 10:02क्या तुम उस समर्पित भावना में आ सकते हो तो फिर भगवान तुम्हारा
- 10:08बात भरेंगे? कोई शक्ल यह अटल सत्य है, लेकिन
- 10:15बात तो यही है। कैन यू इन्सर्ट योरसेल्फ क्या तुम
- 10:22अपने आपको गँवा सकते हो झोंक सकते हो?
- 10:29सवाल ये है। तुम अपने आप को गवाने का साहस
- 10:37रखते हो, जैसे परवान क्षमा में अपने आपको झोंक देता है और आग की
- 10:44भीड़ से रह जाता है, मर जाता है, फना हो जाता है, उसकी बसम भी तो
- 10:49नहीं बचती? अपनी योग्यता को देखो, तुम डरते
- 11:00हो कि कहीं आग के भीतर हाथ न जल जाए और तुमने बड़े अंतरिम बातें
- 11:08बोलनी शुरू कर दी। अहम ब्रह्मास्व।
- 11:11लोग जलता नहीं कटता नहीं, गलता नहीं, सूखता नहीं।
- 11:18ये बातें बोलना शुरू कर दिया और इनका जाप शुरू कर दिया।
- 11:22अहम् ब्रह्मास्त्र अहम् ब्रह्मास्त्र नहीं, ऐसा तो नहीं
- 11:27है। छींक न कबो तल छूने के लिए राधा
- 11:33राधा करना नहीं होगा। उस चेतना के तल तक जाने का असीम
- 11:39दुस्साहस से जुटाना होगा। रात रात से करना तो पड़ा आसान।
- 11:48यह एक तोले की जीवा हिलाने में जाता क्या है?
- 11:54ज़रा भी तो कुछ नहीं जाता तो क्या कर रहे बाबा?
- 12:07सभी चीजों में अपने धोखे मूर्तियों में अपने धोखे हैं,
- 12:17क्योंकि मूर्तियों में फिर तुम दो हाथ लगाओगे, वो चार लगाएंगे, वो
- 12:22सहरस्त्र हाथ लगाएंगे और फिर ओह ही ओह जैड वन।
- 12:26अब तुम कहते हो, मैं दुविधा में हूँ तो पुत्री तुम दुविधा में ही
- 12:30रहोगे क्योंकि जिसने कहा नहीं नहीं ये दो नहीं, उसके तो 1000
- 12:36हाथ है और बात तो उसकी भी ठीक है, फिर क्या करोगे?
- 12:48और कोई कहेगा सभी हाथ उसके हैं तो बात उसके भी ठीक हैं, ये ज्यादा
- 12:53ठीक है, सभी हाथ उसके हैं। रामकृष्णा परमहंस को कहा
- 12:57विवेकानंद ने नरेंद्रन माँ से कह दो, पानी भी नहीं पिया जाता एक
- 13:04अग्रास रोटी भी नहीं खाई जाती माँ तो इतना तो करते हैं बाप रे की
- 13:15गुप्तभोग लूँगा ज़रा थोड़ा सा पानी गल सूखता है प्राण कपते हैं
- 13:22पानी के बिना। थोड़ा पानी पी सकूँ एक ग्लास रोटी
- 13:28खा सकूँ क्या तुम इतर सह नहीं कर सकते?
- 13:37बहुत दिन कहा सुबह पूछते आके गोर्दे?
- 13:45आपने कहा अरे मैं भूल गया नरेंद्र आज कहूंगा पुत्र मना ये भी कोई
- 13:55बोल ले कैसी बात? 1 दिन तो हद हो गई, 1 दिन हद हो
- 14:08गई जब डॉक्टर आए और उनके कैंसर के भोले में मवाद भरी हुई थी और
- 14:18डॉक्टर उस मवाद को निकालने लगे और हाइजीनिक का कॉटन से साफ करने
- 14:24लगे। और उस हाइजीनिक कॉटन को से साफ
- 14:29करके उस पानी में रख देते, उस कॉटन को पानी गंदा हो गया, सड़ात
- 14:42मरने लगी, दुर्गंध आने लगी, सभी दूर हट गए।
- 14:47नरेंद्र वहाँ खड़े रहे, डटे देखते रहे, वो बीजते रहे थोड़े को और
- 15:00वहाँ निकलती रही दुर्गंध बहुत ही घनी थी।
- 15:06डॉक्टरों ने नाक पर फटी ले ली, लेकिन नरेंद्र वैसे ही खड़े
- 15:14नेखाशीष से दूर हट चूके थे। ये कादू कादू सब बाहर हो गए थे।
- 15:24जब खून आने लगा, मवाद खत्म हो गए तो डॉक्टरों ने चैन की सांस ली।
- 15:34और क्या किया अचंभित करने वाला यह वातावरण नरेंद्र दत्ताय।
- 15:43गिलास उठाया और गट से पी गए। सरापन वो गंदा पानी जो मवाद से
- 15:49पानी नहीं सब ने रोका अरे डॉक्टरों ने रोका सभी भाग की आय
- 15:58क्या करता है, पागल हो गया है? नरेंद्र की आँखों में आंसू थे
- 16:09गुरु भक्ति से भरा हुआ उसका हृदय जो देखा उस जल पर जाकर दृश्य।
- 16:20उस दिन उसने अपना आपा खो दिया, वो जान गया कि मैं हूँ कौन?
- 16:26वो जान गया कि इस को चलाता कौन? जिसने बनाई वो चलाता, और ये सृजना
- 16:32बड़ी भारी है। इस विराट विलक्षण सृजना का कहीं
- 16:38कोई और छोर नहीं। और उसने देख लिया वहाँ जाकर उस
- 16:44छोर पर कि मैं इस विहार के संसार में।
- 16:53अपने आपको जर्रा भी तो नहीं कह सकता कण भी तो नहीं कह सकता कण तो
- 16:58मेरे से बहुत बड़ा है अरब गुना बड़ा है मैं करीब प्रिय नेगलिजबल
- 17:06हूँ नगण्य हूँ। सारा कैंसर का मवाद वो पी गया और
- 17:18बड़े मजाक की बात है। सभी गरीब आ गए उसको दूर उठा के ले
- 17:29गए नरेंद्र को। उसके गले में उंगलियां मारी ताकि
- 17:33उल्टी हो जाए। उल्टी नहीं हुई और पानी पिलाया।
- 17:42डॉक्टर बैंडेज करने लगे, पट्टी बांधने लगे, काम पूरा करके वो चले
- 17:50गए। शीशों से भूल गए, इसका ख्याल रखना
- 17:56बड़े विषाक्त कटाणु इसने पी लिया तुमसे एक बात बताऊँ, शायद इतनी
- 18:04छोटी उम्र में नरेंद्र का मर जाना उनचालीस उम्र की।
- 18:10कोई उम्र नहीं होती। 39।
- 18:19एक कारण रहा होगा, कहीं ना कहीं उस वृक्ष ने घर कर लिया होगा,
- 18:26कहीं ना कहीं उसके कीटाणु बेहतर के लड़े होंगे।
- 18:32नुकसान पहुंचा होगा उसके टिश्यूज़ को ये भी उसकी अल्प आयु का एक
- 18:39कारण बना है, लेकिन इतनी दूर तक आपकी समझी जाती है।
- 18:52भक्तिभाव गुरु का प्रत्यय एक अद्वितीय उदाहरण तो मीरा भी पति
- 19:04मानती थी कृष्ण को, जबकि कृष्ण को देखा नहीं था।
- 19:10उस निराकार से इस निरंकार से प्रगाढ़ संबंध जीसको जाना नहीं
- 19:17देखा नहीं अनजाना अज्ञा। उसके प्रति प्रेम मुश्किल तो
- 19:33बहुत। होता है।
- 19:39मूर्ति से प्रेम करोगे, चिप के जाने का पूरा भय छिप कहीं नहीं
- 19:45जाओगे, वरना विखंडित हो जाओगे। आज ये जो हिंदुस्तान पागल होने की
- 19:51कगार पे खड़ा इसका मुख्य कारण मूर्तिवाद हमने इतने भगवान बना
- 20:01लिए हैं और रोज़ भगवान बढ़ते ही चाहते हैं।
- 20:07हर रोज़ एक नया भगवान खड़ा हो जाता है।
- 20:12हर रोज़ कोई नई माता की खड़ी हो जाती है।
- 20:16ये लड्डू के अपार अभी अभी जन्मे है, कभी संतोषी माता जन्म लेती
- 20:26है। कभी कोई माता जन्म ले लेती है,
- 20:32किसी को गधे पे बिठा देते हो, किसी को उल्लू की सवारी करा देते
- 20:37हो, ये तो ही नहीं और क्या है तुमने देवी देवताओं का मजाक तक
- 20:43बना लिया लेकिन अंधभक्तों ने चेपटना नहीं छोड़ा।
- 20:49तुम छित्रों का हार भी पहना दो, जूतियों का टूटी, जूतियों का, तो
- 20:55भी ये उसकी पूजा करने लग जाएंगे। ये ऐसे शानदार लोग हैं, मैंने एक
- 21:06भक्त को गोबर का अति देखा। और यही नहीं उसने गोबर की पार्टी
- 21:12बना ली और यही नहीं खाने वाले पार्टी पर इनविटेशन पाकर बड़े
- 21:21खुशनसीब समझने लगे। अपने आपको मैंने कहा भाई गऊ का
- 21:26गोबर ही क्यों? फिर मानव मल चलने दो वो ज्यादा
- 21:31बढ़िया होता है। ऐसे ऐसे मूर्ख लोगों की जमात अगर
- 21:40मैं कह दूँ कि यह पागलपन की कगार और ऐसे ऐसे लोग।
- 21:45हमें रीड करने के लिए आर निकले हैं तो फिर क्या होगा?
- 21:54और देश मंगल की सतह के ऊपर खोज रहे हैं।
- 21:58चट्टान टूटी और सल्फाइट है इसके भीतर।
- 22:04और हम खोज रहे हैं किसी अमारत के नीचे कोई मंदिर निकले, पूजा का
- 22:14ढंग हमने सीखा नहीं, मंदिरों की संख्या बढ़ाते जाओगे।
- 22:21सली का पूजा का आयन है। सारी धरती पे मंदिर भी उषाड़ दो,
- 22:33मस्जिद भी उषाड़ दो चर्च गुरूद्वारे भी उसहार दो जो कि आज
- 22:38प्रत्येक धर्म की संभावना है। बोलबाला हो हमारा दरअसल में उनका
- 22:47अहंकार कहता है कि हमारे अहंकार का बोलबाला हो, बहाना है,
- 22:52मूर्तियों को बहाना है। मंदिर को मंदिरों की आड़ में इनके
- 22:59भीतर ये छिपा है। कि मेरा अहंकार प्रबल हो।
- 23:05मेरा डंका वजह मेरी ध्वजा फहराए, इनको कोई मतलब नहीं है।
- 23:12राम से कोई मतलब नहीं है। हनुमान से डंका फहरना चाहिए इनका।
- 23:22ये है असली भीतर की कीमियां ये क्रोनोलॉजिक है वस्तुविकता तो यही
- 23:32है भक्तजन नाराज तो होंगे नाराज न हूँ इसके लिए।
- 23:43मैं अग्रिम प्रार्थना करता हूँ और अगर नाराज भी हो गए तो मेरा कोई
- 23:47भुगाड़ दो कुछ है मेरे पास तुमने कहा, पुत्री।
- 24:01फिर क्या करें? मैंने कहा कठिनतम सवालों में से
- 24:09एक आज मेरे सामने आया है। क्या हम गुरु में इन्सर्ट कर सकते
- 24:17हैं? यह भी बड़ा खतरनाक।
- 24:21मैं कैसे कह दूँ कि गुरु में इन्सर्ट करता हूँ?
- 24:25तो मैंने एक चौथा तरीका सोचा था पहले जो मैं इसे इम्प्लीमेंट कर
- 24:31रहा हूँ, आज खुद पर इम्प्लीमेंट कर रहा हूँ, अपने आश्रम पर यहाँ
- 24:40कोई नहीं रुकेगा। कोई कमी नहीं होगा और बड़ा किया
- 24:46बाबा ने कमीने मत बनाना। बाबा वो जानते थे, अच्छी तरह
- 24:52जानते थे, फिर गुफाएं बनेंगी, फिर कुंवार और कुंवरियाँ।
- 25:01आप उसमें एकांत में प्रेमा लाभ करेंगे, फिर बाहर होगा श्वेत और
- 25:13भीतर होगा काला और बीच में होगा लाल लहू का रंग।
- 25:19समझने वाले समझे जाएंगे। ना समझे बो अनाड़ी, जीस सब जगह
- 25:28चलता है तो इस धूप से इस आग से बचा कैसे जाए।
- 25:37फिर मैंने अपना तरीका सोचा। यह तरीका शुभ रहेगा और मैं बाजित
- 25:43हो गया। नहीं आएगा कोई यहाँ आएगा तो सिर्फ
- 25:50तब आएगा जब हम बुलाया और समूह में आओगे।
- 25:55और दीक्षा ले के अपने अपने घर चले जाओगे, बस यही है व्यवस्था आप भी
- 26:01आई थी पुत्री मुझे पता है तो अब आप अपने घर बैठी और मुझे जब आपसे
- 26:14कह तुम अपने घर जाओ मुझे। पवन पुत्र के वो शब्द याद आ जाते
- 26:20हैं जो उन्होंने मुझे संदेश दिया था।
- 26:24बिलकुल वही संदेश मैं आपको सुना देता हूँ जब मिलेगा घर बैठे
- 26:28मिलेगा तुम यहाँ से चले जाओ यहाँ ठग बैठे हैं सब हरिद्वार में।
- 26:37तुम इनसे क्या ढूंढते हो? न हरिद्वार में न कहीं ओह न रब,
- 26:48मक्के न रब तीर। तो मक्का कर लो या तीर्थ कर लो
- 27:04पुलिस शाह कहते हैं रब मक्के जाने से नहीं मिलता, न हज करने से
- 27:12मिलता है, न तीर्थों पे जप करने से मिलता है।
- 27:20ना तप करने से मिलता है, ना जप से ना तप से।
- 27:25बुले शाह कहते हैं, रब वहाँ नहीं बसता जहाँ केवल किताबें पढ़ी जाती
- 27:32हैं, रब दिलों में वास करता है। अपने दिल की सफाई करो
- 27:50तुमने कहा जीवत करो। यहाँ आके अटक जाती है इंटेंशन इन
- 28:01पत्थर की मूर्तियों को तो तुम बहुत गढ़ते जाओगे पहले एक शिव की
- 28:07मूर्ति होती थी शंकर और वो भी मूर्ति नहीं थी, वो भी एक।
- 28:15सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन जस्ट एस ए अब्रीविएशन जीसको हम लिंग कहते थे
- 28:21चिन्ह साइन वह शिव का चिन्ह था बस चिन्ह जैसे एच टू वो।
- 28:32यह पानी का चिन्ह है, सिम्बोलिक चिन्ह है, प्रतीकात्मक चिन्ह है।
- 28:38सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन ऑफ़ वाटर हेच टू ओह।
- 28:43इसका मतलब है दो अणु हाइड्रोजन और एक अणु ऑक्सीजन।
- 28:52लेकिन हमने उसके बाद क्या कुछ बना दिया?
- 28:55शंकर की मूर्ति बना ली, फिर शंकर का परिवार बना लिया।
- 29:02पार्वती कार्तिक के गणेश। और फिर दुर्गा, बनारी और लक्ष्मी
- 29:09पर सरस्वती सब बना लिया। आज ये झुंड है कैसे?
- 29:1433,00,00,000 के भी देवता है, सब भगवान है, फिर तुम इतने भीड़
- 29:22भड़के में पागल न होओगे तो क्या शांत हो जाओगे?
- 29:30आज सब गड़बड़ हो गया, ऐसी भीड़ भड़के में शोरपुल में खो गया है
- 29:37संत उसे तुमने पागल कहना शुरू कर दिया और ऐसे भीड़ भड़के में तुमने
- 29:43कुछ पागलों को संत कहना शुरू कर दिया?
- 29:46यही कविता है तो पुत्री मूर्ति में है तो सब कुछ, लेकिन मूर्ति
- 29:56पर तुम कुर्बान हो जाओ, तुम न बचो, इन्सर्ट हो जाओ।
- 30:05लेकिन यह संभव नहीं है प्राकृतिक रूप से काव्यवत्क रूप से यह है
- 30:14काव्यत्क रूप से यह तथ्य है, लेकिन प्रयोगात्मक रूप से यह नहीं
- 30:24है। मशकर और अगर तुम कहो कि कुछ ऐसा
- 30:40भी होता है जो नीम से हट के होता है, बिल्कुल होता है।
- 30:48लेकिन वो बड़े छोटे लोग होते है। समूह नहीं चल सकेगा।
- 30:55वो मूर्तियों को ठुकराना नहीं है, लेकिन मूर्तियों को बस भूल जाना
- 31:01है। मूर्तियों।
- 31:05ना तो बेचारी बोलती ना खातीं, ना उनमें आवाज़, ना सोती, ना जागती
- 31:14ना तुम्हे कुछ राहत दिखा सकती हूँ मूर्ति तो जड़ है क्या करोगे?
- 31:23दुख रोओगे आगे से दुख का जवाब नहीं मिलेगा, रोते रहोगे?
- 31:28कोई जवाब नहीं मिलेगा। मूर्ति मौन है क्योंकि जड़ है।
- 31:40तुम लाख प्राण प्रतिष्ठा कर लो, लेकिन वो सिर्फ तुम्हारे डकोसले
- 31:45हैं। पंडितों की चाल बाजियां पत्थरों
- 31:50में प्राण नहीं पड़ते तो कबीर ने कह।
- 31:59पत्थर पूजे हरि मेले तो मैं पूजों पहाड़ मैं पूरे पहाड़ को ही पूज
- 32:04देता हूँ लेकिन मिलता नहीं ना अनघड़ पत्थर में मिलता ना मूर्ति
- 32:12में मिलता हाँ गन्ना पहुंचे रामकृष्णा पहुंचे।
- 32:18बिल्कुल पहुंचे, लेकिन निर्विकाल पर समाधि तक नहीं पहुंचे।
- 32:22वह मूर्ति व अनगढ पत्थर आड़े आ जाता है।
- 32:28अनघढ़ पत्थर या मूर्ति या कोई भी ऑब्जेक्ट अब आप समझ लेना इस सेम
- 32:33को अनघढ़ पत्थर दन न निभाया। जब मूर्ति रामकृष्णा परमंत्र ने
- 32:43पाया जब कोई भी ऑब्जेक्ट जिससे कोई भी पहुंचा जी तुम्हें से
- 32:52विकल्प समाधि तक ले जाएंगे। बड़ा सुखद मालूम पड़ेगा।
- 32:57तुम इससे संवाद करोगे, हंसोगे खेलोंगे इसको खिलाओगे और ऐसे लोग
- 33:02हैं जो इनकी कहानियों बनाएंगे। कृष्ण तुम्हारे लिए पानी भर के ले
- 33:08आएगा, तुम्हारे बाप का बुरा है क्या कृष्ण तुम्हारे लिए आटा बिसा
- 33:15के लिए आएगा? कृष्ण तुम्हारे बात हुई है, नृसि
- 33:21बनके कहानियों हैं, संवेदना प्रकट करने के लिए तथ्यगत सत्य नहीं है,
- 33:32मैं तुमसे कह दू बेटी इसमें ओरिजिनल मत।
- 33:35का व्यापक कल्पनाओं में खो जाओगी तुम और हाथ कुछ भी ना आएगा, हाथ
- 33:44लगेगा अंधेरा खोजने चलोगी रोशनाई को, क्योंकि इनमें खुद ही चेतन
- 33:52नहीं। अब राधे राधे शब्द में चेतनता
- 33:57नहीं, राधा खुद जड़ता हो गई। शब्द सदा ही जड़ होते हैं, मुझे
- 34:06लोग कह देते हैं गायत्री गायत्री श्रीराम आचार्य ने प्राण
- 34:12प्रतिष्ठित करके। 24,00,000 पुरुष आमंत्रण करके इसे
- 34:18जागृत कर दिया। मैंने कहा वह मूर्ख था 3200
- 34:25शस्त्र रच दिए, मैंने कहा उसे जला दो।
- 34:32तो गायत्री परिवार बिखर जाएगा। बिखर जाने दो अगर कुछ मूडों को
- 34:39विदा करना पड़े तो कर दो ये कोई कीमत नहीं चुकाने के लिए ज्यादा
- 34:50क्योंकि इन्होंने झूठ। उसे जिसे कोई नहीं जान पाया और
- 34:58जाना ना ही उसे कोई जान पाएगा। उसे जानने का भरोसा दिलाना क्षय
- 35:06में एक मुघता है। बस उसकी झाईं पा लेना, दूर से वह
- 35:21अवस्था जिसे सटोरी कहा होगा। या तो झाई मिल सकती है तुम्हें
- 35:29सटोरी के रूप में समझो या दूसरे बिटिया जो तुमने कहा इन्सर्ट हो
- 35:34जाओ, उसमें मिलना पड़ता है, बूँद बनकर समुद्र में खो जाओ, उसका
- 35:43स्वाद चखना होता है। उसे ऐसा पियो की मदहोशी के आलम
- 35:50में तुम उसी में समा जाओ, उसके साथ एकाकार हो जाओ, बूंद समुद्र
- 35:58को जानती नहीं पीती है, उसका स्वाद चखती है, जान ना और पीना।
- 36:05इसमें बड़ा आभारी वेद है और तुम यहीं चूक जाते हो।
- 36:11तुम पीने जो पिया जाता है उसे जानने की चिष्टा करते हो, पीना है
- 36:18स्वाद तुम्हारे भीतर उतर कर तुम्हारे प्राणों की रूह में बस
- 36:24जाता है। और जानना तुम्हारी खोपड़ी में आना
- 36:29हमारा समुद्र कभी खोपड़ी में समर्थ है क्या ये तो बिल्कुल
- 36:34सोक्रेट की वही बात हुई की प्यारी में समुद्र को भरने की गागर में
- 36:38सागर को समाने की तुम्हारी व्यवस्थाएँ?
- 36:45सारी गलतियाँ इसलिए अगर तुम ये कहते हो कि वह गागर में समा जाएगा
- 36:56सागर तो फिर तुम परमात्मा को मानोगे नहीं समझ लेना?
- 37:02तुम इसको पी भी नहीं पाओगे क्योंकि तुमने बेसिक फार्म उड़ा
- 37:07पाया ही नहीं, सर्च ही नहीं किया। अगर इन मूडताओं में उलझे रहे कि
- 37:13हम जायेंगे तो फिर तुम इसे पी भी नहीं पाओगे।
- 37:19शराब को जाना नहीं जाता। शराब को सिर्फ पिया जाता है, उसका
- 37:24लुत्फ उठाना होता है। बस इसके अलावा उसका कोई उपयोग
- 37:30नहीं और सिर्फ यही उपयोग है। अगर देखते रहो एनालायसिस करते रहो
- 37:35तो तुम्हें मिलेगा क्या ज़रा सोचना।
- 37:42एनालिसिस करने वाले उसके तत्वों को इतने परसेंट, इतने परसेंट,
- 37:48इतने परसेंट इसके अलावा कुछ भी क्या पाते हैं और उसमें कुछ आनंद
- 37:54मिलता है? नहीं मिलता, फिर कोई कहे के मद
- 37:59में बड़ा शराब में बड़ा निशाना होता है।
- 38:05फिर कोई कैसे मानेगा? जब तुमने पी ही नहीं तुमने तो
- 38:09सिर्फ उसका एनालायसिस किया। इतने परसेंट पानी, इतने परसेंट
- 38:14अल्कोहल। इस फैक्टरी की बनी फैक्टरी इतनी
- 38:20दूर है। ये सब सूचनाएं हैं।
- 38:27नावा की फैक्टरी में बना कि भोपाल की किसी फैक्टरी में बना ये
- 38:33सूचनाएं हैं। और महज सूचनाओं से वो रस नहीं
- 38:36मिलता, शराब तो पीनी पड़ती है। शराब के बारे में जानने की चेष्ठा
- 38:46तुम्हें उलझाती की प्रतीक जानना मत।
- 38:52अगर तमन्ना है तो पीना और मदहोश हो जाना।
- 39:00बस इन्सर्ट का मतलब यही था तुम न बचो, तुम्हारा वजूद न बचे, बाकी न
- 39:09मैं रहूँ। न मेरी बंदगी रहे, न मेरी बंदगी
- 39:17रहे, न मेरी आवाज रहे, न मैं रहूँ, बस तू ही तू रहे तो बाकी सब
- 39:27रास्ते बेकार होते। लेकिन एक रास्ता जिसमें आशा की
- 39:32उम्मीद है ओह है गुर ना मूर्ति बोलेंगे, ना सुनेगी ना खायेगी तुम
- 39:43लाख कोशिश करो एयर कंडीशन में लोग उसको सुला देते हैं।
- 39:48खुद गर्मी में पंखा झेलते हैं। रात को इनसे बड़े मूड मैंने
- 39:53दुनिया में कहीं नहीं देखा। गहजू लड्डू गोपाल गंदे नाले में
- 40:06फेंकने योग्य था। उसको तुम सुलाते हो एसी में और
- 40:12खुद तुम सोते हो। बिना पंखे के कमरे में ज़रा सोच
- 40:20कर देखना फिर तुम अपने आपको क्या कहोगे?
- 40:24तुमने सेल्फ एनालिसिस किया ही नहीं।
- 40:30आज सारी दुनिया किसी न किसी मूर्खता में बैठी हुई है।
- 40:34ये मूड़ताएं हैं, तुम्हें गुलाम बनाए रखती हैं।
- 40:37यही तुम्हें उस आनंद तक पहुंचने में वादा है और मूड़ता कोई भी हो
- 40:45मैंने थोड़े से बाल कटवा लिए नहीं तो बुलाता नहीं, मैं खुद ही काट
- 40:50लेता हूँ। रोटेट, वेटे कट जाते हैं।
- 40:55फिर कोई बाल बड़ा है, कोई छोटा है, कुछ लोग कहते हैं बाबा अच्छे
- 41:03से बुला लिया करो, अच्छे नाईको। और कोई कहते हैं कि ये बाल कटवाये
- 41:11को आपने तो कतल कर दिया अब मैं किसको क्या कहूँ मैं वो तो हूँ
- 41:18नहीं जो दुविधा में हो जाऊंगा, मैं शांत रहता हूँ, बस जब
- 41:28समझाएगी। तो दोनों ही समझ जाएंगे।
- 41:32एक समझ जाएगा के शृंगार में कुछ नहीं रखा मैंने काट लिए टेड़े
- 41:38मेढ़े काट लिए अगर एक पूरे का पूरा भी हिस्सा काट लिए तो क्या
- 41:42फरक पड़ता? तुम हस्ते से रहो।
- 41:44ज़रा सोचिए क्या कल्पना होती उसकी एक हिस्सा पूरा काट देते।
- 41:49और फिर बोलता यह मजाक था ना और फिर यह पूरे इतने ऐसे ही कर देता
- 41:59कि ये होंठ भी दगाई न पड़ती। फिर तुम्हें पता ही नहीं लगता ये
- 42:04सारे ढक लिए जाते। तुम कहते ये कौन बोल रहा है?
- 42:08ये आवाज़ कहाँ से आ रही है? ये लंबे लंबे बाल हैं, ये रीच है
- 42:13या बंदा है? मत हंसो भाई ऐसी मूर्खताओं ने
- 42:22हमको गिर लिया है। जिन केसों को हम कतल करते हैं,
- 42:33उनको रखने का भी क्या प्रयोजन है? वह भी दू दू करके सबसे पहले जलने
- 42:39में सहायता करते हैं। मुर्दे की।
- 42:42बस एक लकड़ी की शुद्ध लकड़ी की तरह काम करते हैं।
- 42:47वो घने होंगे, अच्छे से जला देंगे।
- 42:51खोपड़िया को और खोपड़ी ही सबसे ज्यादा मुश्किल होती है तभी इसे
- 42:56कपाल क्रिया करके तोड़ना पड़ता है।
- 43:01और शायद भगवान ने इसलिए इतने लंबे बांध दिए हो।
- 43:05ये थोड़े से अच्छे से जल जाए। आखिर तो सभी का आता है, वो तो
- 43:18कयामत की रात होती है। वो आता है, दवे पांव आता है और वो
- 43:26नहीं देखता कि तुमने मेकअप कर रखा है।
- 43:31केस बढ़ा रखे हैं या नहीं बढ़ा रखे।
- 43:35तुम कर क्या रहे हो? तुम गीता पढ़ रहे हो, कुरान पढ़
- 43:42रहे हो, ग्रंथ पढ़ रहे हो या बाइबल पढ़ रहे हो, वो देखता ही
- 43:46नहीं तुम क्योंकि वो जानता है। पड़ पड़ गड्ढे नदी ते पड़ पड़ हुए
- 43:56ख्वाह नान के लिखे एक अगर ते भक्ति चकना चार आप गड्ढे लदे जो
- 44:06पड़ पड़ हुए फार खराब होने वाली बात है।
- 44:12नानक लिखे एक गल वो एक बात लगती है देखी क्या इस अहंकार को गला
- 44:20दो, यह बात लिखे लग जाती ते बाकी चकण चार तुम्हारे सभी
- 44:26फ्लेक्सिफिकल मेथड्स क्रियाएं। विज्ञान भैरव तंत्र के 112 या
- 44:34हजारों सब बेकार हो जाते हैं। रस्ते बस एक ही बात लगती है तो
- 44:43तुम किसी न किसी तरह उस केंद्र तक पहुँच जाओ।
- 44:47अभी कल मुझसे किसी ने प्रश्न पूछा इसका मतलब बहुत से रास्ते हैं
- 44:51वहाँ तक जाने के लिए। मैंने कहा केंद्र से परिधि तक
- 44:56जाने के कितने रास्ते हैं ज़रा बताओ।
- 44:59प्रत्येक बिंदु में 1000 रास्ते छिपे पड़े हैं और कितने बिंदु हैं
- 45:04इस फेयर पर? ज़रा गोले में झांक के देखो, एक
- 45:09केंद्र ले लो प्रकार ले लो और उसे एक गोला खेंच लो सर्कल, फिर उस
- 45:17सर्कल पर तुम पॉइंट्स बिंदु कितने होते हैं गिनो।
- 45:22और उस एक बिंदु में 1000 रहते हैं।
- 45:25परमात्मा की तरफ जाने से प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है और तुम उसे
- 45:31कहते हो कि आप मुसलमान बन जाओ, आप हिंदू बन जाओ, आप ये बन जाओ, आप
- 45:40ईसाई बन जाओ, लालक्ष्य दिखाते हैं।
- 45:42ये व्यक्ति जो लालच दिखाते हैं ये खुद मूड होते हैं, ये पहुंचे नहीं
- 45:48है। अभी बस ये संख्या इन्होंने एक
- 45:53सीखा कि पार्टी को जैसे बढ़ाते हैं, वैसे धर्म की धार्मिकों की
- 45:58संख्या को बढ़ाएंगे। तो दुनिया सुखी हो जाएगी, यह गलती
- 46:02में इन्होंने थीम को पकड़ा नहीं। बेश को पकड़ा नहीं तो फिर किस पर
- 46:10विश्वास करें? न तुम मूर्ति न अनघट पत्थर न
- 46:17निराकार को तुमने जाना। न देखा लेकिन गुरु को तुमने देखा
- 46:24है यहाँ आकर बात टिकती है यहाँ आकर दिल ठहरता है यहाँ आकर मचलता
- 46:37हुआ दिल। शांत होता है एक गुरु ही बचता है
- 46:48उपाय, इसलिए कबीर बात करते हैं सिर्फ गुरु।
- 47:02आ आ बेना गुरु ज्ञान कहाँ? से।
- 47:21आ? दी।
- 47:25जो दान हरे गुण ग सब गुण जन को। मन तड़पा त हारी दर सने को आ मोरे
- 48:11तुम बिना बिगरे सागर। आ?
- 48:23बिनती। करत हो रखी हो लाज मन, ताड़ पत।
- 48:38अरे, इधर सने को पहली बात? मन में धड़प हो यहाँ से आगाज़,
- 48:54प्यास न होती हो। तो पानी अवांछनीय हो जाता है,
- 49:01प्यास प्रथम प्यास में तड़प उठती है और तड़प से।
- 49:15उठी हुई प्यास उसे आप खोजते हो पानी और खोजते हो ये न खो जाते न
- 49:25पाई तो मिल भी जाता है, प्यास तरफ से भी हो जाती है प्यास से जगनी
- 49:34चाहिए। गुरु मिल जाएंगे, प्याज से तृप्त
- 49:40कर देगा गुरु लेकिन गुरु से चब्बत मत जाना।
- 49:50मैंने कहा। तो मैंने ये नई व्यवस्था कुछ
- 49:58दीक्षा लो, दीक्षा के वक्त मैं सब उड़ेल दूंगा, जो तुममें समझ सकता
- 50:03है, जैसा पत्र लिख के आओगे, वैसा तुम्हें उड़ेल दिया जाएगा और तुम
- 50:11घर चले जाओ। न बनों में मिलेगा न 15 में
- 50:17मिलेगा वह तो भटकन है न? पहाड़ों में मिलेगा।
- 50:31न मठों में मिलेगा न तीर्थों पे न काबा इनमें कहीं नहीं मिलेगा
- 50:41मिलेगा तुम्हें तुम्हारे अंतर से और प्यास जगनी चाहिए तो वेतर की
- 50:48यात्रा शुरू हो जाती है। अंत में जाना नहीं होता।
- 50:51जब तक प्यास नहीं जगी होती तो लोग पूछ लेते हैं लेकिन प्यास नहीं
- 50:57जगी होती तो प्यास के बिना अपने अंत में उतरोगे क्या सर पहले
- 51:04प्यास जगनी आवश्यक पानी की फिर खोज शुरू हो जाती है।
- 51:14नेसेसिटी इस दी मदर ऑफ इन्वेंशन जरूरत कार्ड की माता है खोज की
- 51:23माता है तुम खोज लोगे गुरु को। निक्षा लेना वह बैठ मत जाना, फिर
- 51:32गुफाएं पैदा होती हैं, यात्रिका मेरे पास फिर आते हैं।
- 51:37कृपालु जी महाराज, मैंने तो पूछ के किया सब किया एक खाक पूंछ के
- 51:44किया। तुमने तोता रिटर्न की तरह बुलाया,
- 51:54ये खाक पूछना हुआ, पहले वचन ले लिया, मैं जैसा कुछ कहूंगा, करोगे
- 52:01हाँ करो, वो आपके वचन में बंद गया, फिर तुमने कहा ऐसा बोलो।
- 52:06तो बोल दिया फिर उसने कहाँ बोला? तुम्हारे हुक्म ने बुलवाया या फिर
- 52:15वो पैदा हो गए जिनको उम्रकैद हुई होगी और राजनीति के मोहरे बनकर
- 52:23बार बार आएँगे। क्या ऐसे व्यक्तियों को संत कहना
- 52:32वाजिब है? वहीं से ठगे ठगे आध्यात्मिकता की
- 52:39खोज बंद हो जाएगी। एक मछली सारे तालाब को गंदा कर
- 52:46देती है। यहाँ तो एक मछली ही बची बाकी
- 52:51तालाब गंदा है, उस मछली को चाहिए वह छलांग लगा के बाहर आ जाए और
- 52:58कोई दूसरा तालाब खोज लें। अब बस यही उपाय बचा।
- 53:07गुरु के विनाथू ज्ञान सब गुनी यान पे तुमरा राज़ मन तड़पत हरि दर्शन
- 53:23को आज जब भी कभी मन तड़प जाए उसकी बिरहा की अगिन में मेरा की तरह।
- 53:31तुमने कहा मेरा समा गई कृष्ण प्यास इतनी गहरी हो तो पत्थरों
- 53:37में भी इन्सर्ट हुआ जा सकता है लेकिन ये प्यास की क्वांटिटी पे
- 53:46निर्भर करता है। 100% प्यास हो।
- 53:51तो भुज ही जाया करती है फिर वह खुद खुदा उतरा करता है।
- 54:01गुरु बन के उतरा करता है तुम अपनी प्यास की फिकर करना, तुम गुरु की
- 54:08फिकर मत करना। और दीक्षा लेके अपने स्थान पे चले
- 54:12जाना वहाँ जाके अभ्यास करना नहीं तो चूक जाओगे जो।
- 54:27मैं ऐसा जान की। डंडोरा की पित नगरी ओह।
- 55:11जो मैं। ऐसा जानती प्रीत के दुःख हो नगर।
- 55:30डंडोरा बीट नकरियों को। मैं भूल गए सांवरिया, आ भूल गए
- 56:02सांवरिया आवन। कह गए।
- 56:10आजू हो न आए आवन कह गए, आजू हो न आए ली न ही मा रे खबरिया।
- 56:30माहे भूल गए, सांवरिया आह भूल गए सांवरिया?
- 56:50और जब तड़प लगेंगी पानी ना मिलेगा, वो तड़पते हुए जीरे से
- 56:58शिकायतें भी उठेंगे, अल्फाज़ भी शिकायत का स्वरूप धारण कर लेंगे।
- 57:11दिल को दिए क्यों दुख इरहा के। तोड़ दिया।
- 57:28क्यों महल बनके दिल को दिए? दुःख बिरहा के तोड़ दिया क्यों
- 57:52महल बना के आस दिला के ओह। वेदर भी आश दिला के ओह वेदर भी
- 58:16फिर ली काहे नजरिया? फिर लिखा है नजरिया मोहभोलवय
- 58:35सांवरिया आ। हो गए सावरिया और नैन कहें रो।
- 58:56रोके सजना नैन कै रो रोके सजना देख चूके हम।
- 59:15प्यार का सपना देख चूके हम प्यार का सपना प्रीत है जोठी प्रीतम।
- 59:35झूठा प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा झूठी है सारी नगरिया।
- 59:57झूठी है सारी नगरी, मोहे भूल गए सांवरिया आह।
- 1:00:14भूल गए सांवैया आवन कह गए आज हो न आय आवन कह गए आज हो न।
- 1:00:33आय ली नहीं म रेहरिया मोहे भूल। ऐसा है बिरहा का स्तर इतना झुंझला
- 1:00:51जाती है मेरा। दिल को दिए क्यों दुख फिर हक है
- 1:01:05तोड़ दिए क्यों महल बना के प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा झूठी है सारी
- 1:01:17नगरी। ऐसे लहने ताने भी उठेंगे, शिकायत
- 1:01:23भी आएगी उठने देना जय प्रेम का प्रवाह यूं ही तो चला करता है
- 1:01:32इसकी नरजिरा में। इसके साथ ही जल जाना चल पड़ना।
- 1:01:41जीस तरफ ये आवेग चले इसके भाव में बह जाना तेरा पाना मीठा लगे और
- 1:01:53जैसे ही तुम बहाव में बह जाओगे। बस गुरु तुम्हें बाहर उतरने का
- 1:02:01तुम पाओगे अंतिम क्षण में गुरु है नहीं है दूर है पाश है, गरीब है,
- 1:02:10कुछ भी है, लेकिन पाओगे गुरु गोविन्द दोनों खड़े।
- 1:02:17का किला दूं का बलिहारी गुरु आप ने।
- 1:02:33जिनको इंदरिया मिला है गुरू गोंगे गुरु पांव रे।
- 1:02:50गुरु के रहियो दास गुरु जो हे जे नरक में तो सर्गी की रखियो आ।
- 1:03:11श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी।
- 1:03:19श्री? कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए नाथ
- 1:03:25नारायण वासुदेव। जय कृष्ण।
- 1:03:29गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव भितुमात स्वामी सखा हमार
- 1:03:45भितुमात स्वामी। सखा हमार हे नाथ नारा यन वासुदेव।
- 1:03:57श्री कृष्ण। गोविंद आरे मुरारी हे नाथ नारा यन
- 1:04:05वासुदेव। हे विराट तेरी ढीला को सलाह आपका
- 1:04:23कल्याण हो।