Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Mar 25 - पुराणों के भीतर का रस क्या है? साधक के जीवन में गुरु की क्या भूमिका है? भागवत पुराण।
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- 0:04बाबा जी, प्रणब प्रवीण। सहाय अक्सर आप।
- 0:21प्राणों का विरोध करते हो और विरोध।
- 0:27बड़ा खतरनाक ढंग से अगर मैं ये सब इस्तेमाल करू तो क्या प्राणों को
- 0:36गालियां निकालते तो कोई अतिशयोक्ति ना हो?
- 0:45लेकिन दूसरी तरफ आप कहते हो की पुराण ऐसी जलेबी की तरह है जो
- 0:54देखने में टेढ़ा मिटा लगता है लेकिन इसके भीतर रस बहुत है।
- 1:04और वो रस क्या है? हम मूड जनों को, ये क्या मालूम,
- 1:12इसमें रस क्या है, क्या कृपा करेंगे?
- 1:23इन जलेबी के उलझनों को सुलझाने के।
- 1:31हाँ। बिलकुल करूँगा क्योंकि अब मेरे
- 1:34पास वक्त आ गया है, कुछ तो बोलेंगे।
- 1:42बोल तो बहुत कुछ सकता हूँ बिना बोले अगर चला गया तो एक समुद्र को
- 1:53साथ लेके जाऊंगा ये ध्यान में रखो।
- 2:08पहल ऑपरेशन कई प्रश्नों के जवाब शार्ट में होंगे और कुछ प्रश्नों
- 2:21के जवाब में विस्तार से दूंगा। क्योंकि वो विस्तार के बिना।
- 2:27समझे नहीं आएँगे शास्त्रों? में कहा जाता है गुरु बिना गप्त
- 2:36नहीं कह तो तो आप भी हो मार्गदर्शक तो चाहिए, कोई तो
- 2:48चाहिए। इसका अर्थ समझाए, देखिये, मैंने
- 3:01आपको एक उदाहरण दी थी जहाँ पावर प्रोडक्शन होता है, एटोमिक पावर
- 3:08प्लांट है। वहाँ से वायर्स आती हैं आपके
- 3:15पावरहाउस स्टेशन तक फिर वहाँ से वायरिंग होती है, क्या जाता है
- 3:27आपके घर के सामने का ट्रांसफार्मर?
- 3:33उस ट्रांसफार्मर से बहु गिनती में लोग विद्युत का कनेक्शन ले सकते
- 3:43हैं, लेकिन अगर ये सब कुछ हो जाएगा।
- 3:54एटोमिक पावर प्लांट हो वहाँ से आपके शहर तक गांव तक बिजली पहुँच
- 4:02जाए, वहाँ से आपके घर तक आ जाए और आपके घर में।
- 4:11सारी फिटिंग करा दी जाए, सब सुविधाओं की लाइट भी हो, पंखा भी
- 4:21हो, एसीबी हो, हीटर भी हो, पानी ऊपर चढ़ाने वाली मशीन भी हो।
- 4:31सभी का कनेक्शन हो, लेकिन एक चीज़ अगर न हो तो सब बेकार वो क्या है?
- 4:47वी हॅव शूज? एक फूसे तो हमारे भीतर है, जिसकी
- 4:53मैं बात कर चुका हूँ, उसने मुक्त होना है एक फूसे बाहर से चाहिए।
- 5:12वह है गुरु इसलिए कहा गुरु बिना गति में गुरु कौन?
- 5:24यहाँ हम छुप गए। ऐसा नहीं है कि प्राणों में।
- 5:32कुछ नहीं प्राणों में सांकेतिक भाषा है जो मैंने कल कहा था।
- 5:38सांकेतिक भाषा ज्यादा देर तक चलती है पानी की सांकेतिक भाषा।
- 5:51लिपि की भाषा, जल नीर, वाटर इत्यादि हो सकता है किसी दिन लिपि
- 6:00समाप्त हो जाए लेकिन पानी की सांकेतिक भाषा अगर शिलालेख के ऊपर
- 6:08एच टू वो लिखा हो। तो उसको कोई ना कोई पढ़ने वाला
- 6:13मिल जाएगा। हमारे मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद,
- 6:24गरजा घर। ऑल आर सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स
- 6:31दट्स कॉल्ड अब्रीविएशन सभी सांकेतिक भाषाएं हैं।
- 6:39हम चुक गए, हमने इन सांकेतिक भाषाओं को पकड़ लिया।
- 6:49अब शाम को मूर्ति के आगे एक फिक्स वक्त पे आरती करना है।
- 6:57अब भूल गए इसका मतलब मंदिर में प्रवेश करते हो, घंटा बजाना है,
- 7:03भूल गए, शंख भूल गए। ये सब दुनिया हमारे भीतर है।
- 7:12फिर हमने बाहर की दुनिया को पकड़ लिया और फिर हम 1 दिन आया कि हम
- 7:17चूक गए। आज हम मंदिर के घंटों से लटके हुए
- 7:23हैं। भीतर के घंटों में कोई फिक्र
- 7:27नहीं, कोई जानकारी नहीं कौन देगा इस जानकारी।
- 7:31को लिखी हुई। हैं।
- 7:43शास्त्रों में प्राचीनता शास्त्रों में इन प्राणों में
- 7:49लिखी हैं। लेकिन बांचने वाली तो ये मूर्ख
- 7:55किशोरियां हैं या मूर्ख पण्डे हैं, क्या करे?
- 8:00कोई अब मुझे आप। चाइनीज भाषा दे दो मैं क्या
- 8:10करूँगा कुछ नहीं करूँगा। मुझे आती है प्राणों में सांकेतिक
- 8:28भाषाएं हैं। पहली बात तो ये याद रखो और उन
- 8:33सांकेतिक भाषाओं में बड़े गहरे अर्थ हैं जो कभी खोयेंगे ना ये
- 8:39चित्रों की भाषा है। और प्रकृति बिल्कुल ऐसी ही है।
- 8:45सेब सेब ही रहेगा, सेब का रंग भी वैसा ही होगा, आकार भी वैसा ही
- 8:53होगा, वृक्ष भी वैसा ही होगा। इच्छितों की भाषा ज्यादा मस्त कर
- 9:00होती है। एप्पल बदल सकता है, सेब बदल सकता
- 9:08है तुम्हारी मान्यताएँ बदल सकती हैं।
- 9:11यह तुम्हारी मान्यताएँ हैं, लेकिन प्रकृति की संरचना सेब।
- 9:18नहीं हो सकता है। सेव एक पल हो जाये किसी और भाषा
- 9:26में कुछ और हो जाये आपकी लिपियों से बदल जाती है, लेकिन प्रकृति की
- 9:35भाषा एक है। वह चित्रों की भाषा वो कभी नहीं
- 9:43बदलेगी। पेड़ पेड़ ही रहेगा हरा, क्योंकि
- 9:55उसके भीतर क्लोरोफिल है। सारी प्रोसेसेस इसलिए मैं कहता
- 10:04हूँ साइंटिफिक जिसने साइंटिफिक समझ लिया, वो मूल तत्व को समझ के।
- 10:18उसने जान लिया कि हाइड्रोजन का दो और ऑक्सीजन का एक जब मिल जाता है
- 10:28एटम तो पानी बनता है बेसिक। स्ट्रक्चरल ढांचा उसने पकड़ लिया।
- 10:41अब उसे कोई बहका नहीं सकता, लेकिन गुरु होगा क्या?
- 10:48गुरु एक फूसे है। मैंने कहा फूसे के बिना
- 10:52ट्रांसफार्मर से। आई हुई शक्ति आपके घर में प्रवेश
- 11:00नहीं करेगी इसलिए शास्त्रों में लिखा कि जाक मत मारना खुद है तो
- 11:09तुम्हारे भीतर है। लेकिन तुम इतने वर्षों से गुम हुए
- 11:16हो, अपने ही घर का पता भूल गए हो तो किसी जानकार से पूछ लेना वह
- 11:26जानकार गुरु होता है गुरु बिना गति नहीं जिसने जाना।
- 11:38आँखों से जाना ये प्रसार प्रचार करने वाले किसी कारणवश प्रचार
- 11:57प्रसार करते हैं, उनका कोई निहित स्वार्थ है।
- 12:06आज तो अध्यापकों के भी निहित स्वार्थ होते हैं, लेकिन मैं
- 12:12अध्यापकों की बात ही नहीं करता हूँ।
- 12:16मैं बात करता हूँ गुरुओं की और गुरु?
- 12:22इस जमाने में ढूँढना मुश्किल तो। है असंभव नहीं जब।
- 12:32तक का सृष्टि रहेंगी। कोई न कोई तुम्हें मार्ग बदलने
- 12:38वाला मौजूद रहेगा। तुम अंधे हो तुम देख न पाओ, बाते
- 12:43जुदा है, मैं रोज़ खोलता। हूँ नहीं।
- 12:51मिलेगा। जितनियों से नहीं मिलेगा, जप से
- 12:56नहीं मिलेगा, तुम्हारे शब्दों से वह शब्दा तीर है।
- 13:00बियॉन्ड वर्क्स लेकिन तुम कुछ न कुछ खोज लेते हो तुम भगवान कृष्ण
- 13:08की गीता का जग्गों में मैं जपजग्नि हूँ मैं क्या जवाब दूँ?
- 13:18मैंने तो वो भी जवाब दे दिया। लेकिन तुमने जब करना छोड़ा सीधी
- 13:30सरल भाषा बोल रहा हूँ, खुद को तलाशना है तो जब छोड़ दो।
- 13:46स्वयं को चाहिए तो प्रयास छोड़ दो, स्वयं से अतिरिक्त कुछ ही
- 13:56चाहिए पदार्थ मान सन्मान गद्दी तो प्रयास करो।
- 14:04सीधा सा फार्मूला तुम समझ ही नहीं सकते।
- 14:08इससे ज़्यादा सरल और क्या बोले। लेकिन साथ मैं ये कह देता हूँ
- 14:21दूसरों को वह भी लोक है सुमेरु पर्वत जीतने धन इकट्ठे कर लो मान
- 14:27सम्मान। सर्वोत्तम गद्दियो पर बैठ जाओ,
- 14:31चक्रवर्ती सम्राट हो जाओ की शांति न मिलेंगे।
- 14:37ओह शान्ति। ही तुम्हारा मूल।
- 14:49भीतर की पुकार है जैसे रेगिस्तान की महा गर्मी के भीतर तगते हुए
- 15:06सूरज। और जलते हुए रेत के भीतर चलता हुआ
- 15:10पसीना सारा बह गया और राहगीर प्यासा हुआ और राहगीर आवाज से रहा
- 15:20हो पानी और तुम उसे पीला दो घी। देसी गिरे लो पी लो यह है ज्यादा
- 15:33बढ़िया है, बिल्कुल बढ़िया है, लेकिन क्या घी से प्यास बूझ
- 15:44जाएगी? ज्यादा बढ़िया तो है देसी घी
- 15:53देखने में भी करीब करीब पानी जैसा ही लगता है।
- 16:03लेकिन क्या रेगिस्तान में जब तुम डिहाइड्रेशन का शिकार हो गए हो?
- 16:10तो पानी की जगह घी चलेगा। नॉर्मल सैलान की जगह घी की भूत
- 16:17लगा दें, क्लिनिक में हॉस्पिटल्स में चल जाएगा।
- 16:28बस ऐसे ही पुराण हैं प्राणों में तो अतुल संपदा छिपी पड़ी है।
- 16:38यह है हमारे आदि गुरुओं की आदि रिश्तों की वो संपदा है जीसको
- 16:43छुपा के रख ली। कोई न कोई खोजी कभी आएगा और इसको
- 16:53बांच लेगा। खोजी ही से बांच सकता है, वह खोजी
- 16:59आएगा कहाँ से? अब थोड़ा वक्त है मेरे पास थोड़ी
- 17:15सी शास्त्रों के भीतर इस जलेबी की ट्रेड मैड को सीधा कर जाऊं, बचने
- 17:26वाली तो किशोरिया। ये पंडित जन, जिन्हें हम पद्म
- 17:36भूषण दे देते हैं, क्या ये बांछपा है?
- 17:46मोरक पाण्डेय भागवत प्राण को बाच रहे हैं और ऋषियों ने ये सम्पदा
- 17:55छोड़ी थी 18 पुराण में और। भी हैं क्या?
- 18:05भागवत प्राण को बाचने योग्य हैं। या इनका कोई नहीं तो स्वार्थ है
- 18:12बस कोई बढ़िया सा बैग लेना। हस्ते क्यों बस?
- 18:22कोई घड़ी बांधनी है। बाहर के लोगों को बेवकूफ बनाना
- 18:35अरे ज़रा किसी डॉक्टर से तो पूछो हॉस्पिटल में जाके नॉर्मल सेलाइन
- 18:42की बोतल की जगह घी की बोतल चलेगी? घी अच्छा होता है।
- 18:49रोटी के ऊपर पानी चपरो उसके बजाए ये अच्छा होता।
- 18:56है लेकिन मरते हुए। मरीज के नॉर्मल सेलाइन की जगह
- 19:05देखिए वो तो लगा दो तो बचेगा। सारी मानवता आज हॉस्पिटल के भीतर
- 19:13डेथ बेड पे लेटी हुई मेरी वॉर्निंग को समझ लेना, तुम अब मरे
- 19:21तब वो मरे। और क्या तुम अपने आप को जीवित
- 19:30समझते हो? तुम जीवित हो सच में कभी एकांत
- 19:39में बैठ के अपने भीतर उतर कर देखना, क्या तुम सच में जीवित हो?
- 19:47तो तुम रोने लगोगे मेरे पास बहुत से व्यक्ति यहाँ आकर रोने लग जाते
- 19:53हैं। मेरा पुत्र पूछता है पापा ये
- 20:02क्यों रोते हैं? मैंने कम्पुतर यह इसलिए रोते हैं।
- 20:09के जीने का सलेका इन्हें मैंने सीखा दिया ये आहो आपसे रोकती ये
- 20:202000 के कारण है। अहो हप से भी रोना आता है, किसी
- 20:35को इतना सुख दे तो किसी की उलझनों को इतना सुलझा।
- 20:38दो आँख में। अश्क उसके भियाने के लेकिन वो
- 20:47प्यार के अश्कों के। धन्यवाद के अश्कों के शुक्र रानी
- 20:51के अश्कों के विपत्ति से निकले हुए दुख से दर्द से भरे हुए अश्क
- 20:56नहीं होंगे भावनाओं का अतिरेक है दुख से निकले हुए आंसू।
- 21:07दुख की भावनाओं का आतिथक सुख से निकले हुए आंसू सुख की भावनाओं का
- 21:14आतिथक है और आंसू सदा एक्सेस में आता है।
- 21:29एक ग्रेस यहाँ पर आकर उसने जलेबी खाई बड़ी स्वादिष्ट थी।
- 21:44उस वक्त में जलेबी भी देसी घी की होती थी।
- 21:48बढ़िया चासनी होती थी शुगर। खाकर बड़ी श्वास ली उसे लेकिन फिर
- 22:02पोषण लगा ये श्वाद तो पड़ी है इट इस टू टेस्ट बट।
- 22:11फ्रम व्हेर दी शुगर एंटर खांड कहाँ से घुसी कोई पोर तो दिखता
- 22:17नहीं किस सरिंज के जरिए अगर इसमें घुसीड़ा भी होगा तुमने तो पोर
- 22:27कहाँ है? रास्ता तो बड़ा स्वाद है।
- 22:34यही हिंदुस्तान यहाँ की कारीगरी मकान है।
- 22:43यहाँ शास्त्रों के अर्थ बदल लिए जाते हैं।
- 22:50इसके भीतर छिपा हुआ खजाना, दुनिया त्राहिमाम, त्राहिमाम कर रही है,
- 22:57भरे बचाओ है। कोई और नहीं तो फिर राम चरित्र
- 23:06मानस का पाठ रखो। और नहीं तो हनुमान चलीसा का पाठ
- 23:12रखो और नहीं तो यजी हवन करवालो कोई रात का जागरण रखो।
- 23:33कोई रुद्रभिषेक करवा लो कोई महाकालेश्वर का पूजन करवा लो सब
- 23:42कर कर के हार गए वो न मिला। तू ना मिला एक तू, ना मिला सारी
- 24:07दुनिया। मिले भी तो क्या है?
- 24:16मेरा दिल ना खिला। मेरा दिल ना खिल सारी बगिया।
- 24:36खिले। भी तो क्या है?
- 24:44एक। ये टेढ़ी मेढ़ी बातें जलेबी की
- 24:58तरह। तुम बड़े आसानी।
- 25:04से मुर्ख बन जाओगे। और मैं तो रोज़।
- 25:09कहता हूँ क्या करें? पापी पेट का सवाल है।
- 25:17और पेट का? सवाल होता तो हल हो जाता।
- 25:21मुश्किल तो ये पैदा होती है कि वासना ही दुसपुर है।
- 25:28पेट तो कब का भर गया? किशोरियों का जब जरूरत से वासनों
- 25:37पे अटक जाती है तो दुष्पुरे हो जाती है।
- 25:44अब इनकी। जरूरत इनके वासनों में ढल गई।
- 25:50ये कभी पूरी। नहीं होगी।
- 25:53ये पूरे हो? जाएंगे।
- 25:58बस नहीं। तुम इनकी वासनाओं को पूरा नहीं कर
- 26:04पाओगे। अब हिंदुस्तान?
- 26:08के लोगों को बेवकूफ बना लिया। चलो बाहर चले दुखी तो सारा जहाँ
- 26:17है। सब जगह।
- 26:19इंसान है, सबकी जरूरत आनंद है। तो किसी भी।
- 26:30जगह जाके मूर्ख बना लो। सारा संसार।
- 26:37लूटने को पड़ा है। सुनने वाले की।
- 26:43शमा करें। मेरे शहर।
- 26:47के शून्य बालिक क्षमा करें हमारी मंडी में एक स्वार फैक्टरी है, आज
- 26:52भी उसके बड़े मालिक नाम नहीं लूँगा बस इतनी कृपा कर दूंगा तुम
- 26:59बता ज़रा उसके बेटे। उन्होंने बुलाया गरीबी बहुत थे।
- 27:15सस्ता ज़माना। था।
- 27:211000 पति। होना मुश्किल था।
- 27:24लखपति की बात छोड़ो, तुमने गाना सुना गरीबों की सुनो।
- 27:32वो तुम्हारी सुनेगा, तुम एक पैसा दोगे वो 10,00,000 देगा ये क्या
- 27:39कहती है बात? 10,00,000।
- 27:42बहुत होते थे। वो ज़माने की।
- 27:47बात उससे बहुत पहले की बात है। जब दो आनें।
- 27:54होती थी। सैलरी और घर का सारा खर्चा चल
- 27:59जाता था। एक बूढ़े दादा ने अपने गोदी में
- 28:09बैठे हुए पोते से कहा पोता जी बोला हाँ, दादू?
- 28:15पुत्र, मेरे जमाने में हम मेरे जमाने।
- 28:20में हम ₹1 लेके जाते थे और महीने भर का सामान ले आते थे खाने का।
- 28:37₹1 घर से लेके जाते थे महीने भर का सारे घर का सामान ले आते थे और
- 28:47बीच में दूध का भी बिल हो जाता था।
- 28:52कुल मिला के। सारा निपट जाता था ₹1।
- 29:01तो पोता जी। कहने लगे बाबू दादू आज ज़माना बदल
- 29:08गया है। दादू कहने लगा।
- 29:13हाँ। पोता जी।
- 29:15बिल्कुल ठीक, ज़माना बदल गया। पिता जी करने लगे दादू और सब
- 29:24दुकानों पे सीसीटीवी लगा है तो मत रसो आज वो ज़माना नहीं है।
- 29:37हर दुकान। पर सीसीटीवी लगा है।
- 29:43अब इस बेचारे को नहीं पता। तो उसने।
- 29:49सभी बेटों को बुलाया पुत्रो। लखपति होना।
- 29:57चाहते हो? हाँ हाँ बिलकुल बागें खल गई बांचे
- 30:02खल गई मैं तुम्हें करोड़पति बना दूँ तो?
- 30:07तो दिल थाम लिया। अरे थोड़ा।
- 30:16हाइट वेट बढ़ गई। जल्दी बताओ हिंदुस्तान की?
- 30:26आबादी कितना है? देखिए जब देश आजाद हुआ तो कहते
- 30:37हैं। गाया करते।
- 30:39थे। 33,00,00,000 आबादी तेरी।
- 30:43डिस्म करती शोर, दहल जाएंगे दिल दुश्मन के छोड़ जाएंगे प्राण शीशे
- 30:53झुकाकर भारत माता करते हैं प्रणाम।
- 30:59हम तेरे। प्रियबाद हमको दो वर्धन।
- 31:09तो 33,00,00,000। 35,00,00,000 हो गया।
- 31:17ठीक अगर तुम सारी। उम्र में एक व्यक्ति से ₹1 लूट
- 31:26लो। तो कितने हो गए वो तो बैठेगा?
- 31:35वहाँ पर तो कहते है, हमारी तो आरटी वो तो बहुत ज्यादा हो गयी।
- 31:41थोड़ा पिताश्री? डॉक्टर को बुलाओगे ये सत्य बात
- 31:46है। कल्पना की।
- 31:52बातें उस मूर्ख को ये नहीं पता था कि हिंदुस्तान में कितना बड़ा है।
- 32:05हर घर तक जाओगे कैसे और हर घर से एक कृपा लूटोगे कैसे?
- 32:13ये उस मूर्ख को पता नहीं था। बस ऐसी ही योजनाएं बनाते हैं कि
- 32:18भागवत पुराण के लोग और अगर किसी तरह।
- 32:29विदेश यात्रा करके झूठ बोल के कफर बोल के नहीं पता वो बता के कि
- 32:35मोरनी कैसे गर्भवती होते? मुझे दो कहते बाबा आप मत बोला
- 32:46करो। ये दो शाप।
- 32:49पर आ जाएगा। मैंने कहा बाकी तो कोई बात नहीं
- 32:53है, लेकिन मेरा नाम ले के लिख के मर न जाए।
- 32:59फिर तो 300। सात पक्का।
- 33:05लेकिन ऐसे लोग? मरा नहीं करते।
- 33:11इनको तो मैं रोज़। फटे लाने देता हूँ।
- 33:15लोगों को कह। दे और साथ ही क्या लेके जाओगे?
- 33:18ऐसी ही भरल भरल रोटी? वो ग।
- 33:23मसीहा सामने तेरे। फिर भी न।
- 33:32तू बच पाएगा? तेरा?
- 33:41अपना। खो नहीं।
- 33:44आखिर। तुझको।
- 33:49लगाएगा आसमान पे आसमान पे उड़ने वाले माटी में।
- 34:08मिल जाएगा कसमे वादे प्यार वफा सब।
- 34:22बाते हैं बातों का क्या? कोई किसी का नहीं।
- 34:35है झूठ। न।
- 34:38ते हैं न तो क्या? कसमे।
- 34:46वादे प्यार वफा। सब बातें हैं।
- 34:53बातों का क्या? और तुम मुग्ध हो।
- 35:01जाते हो। वाह क्या बात है?
- 35:11हमारे घर में भी प्रस्पाति आ जाए, हम भी भागवत प्राण का सप्ताह रखवा
- 35:22लें और तुम भी रखवा लेते हो। मैंने ऐसे लोग।
- 35:27देखे हैं। जो बाबाओं को।
- 35:36मेमना? भेंट करने के लिए कर्ज पे पैसा
- 35:39उठा के ले के आते हैं मैंने दे दिया ऐसे लोग।
- 35:46और उन्हें पता। नहीं है।
- 35:49तो उस बकरे। के मारने का दोष में लगेगा।
- 35:54क्योंकि खरीदा। तुमने बैट तुमने किया।
- 36:12भागवत पुराण। के भीतर।
- 36:15बड़ा खजाना। छुपा है लेकिन वो खजाना है उस
- 36:21तरह। सिम्बोलिक।
- 36:30रेप्रेसेंटेशन्स डाइआयडो हाइड्रोक्सी क्विनोलीन
- 36:34हाइड्रोकॉलराइट तुमसे बोला भी नहीं जाएगा।
- 36:38डायोडो हाइड्रोक्सीनोलिन हाइड्रोक्लोराइट।
- 36:45येस, सिम्बोलिक? रीप्रेसेंटेशन ओएफ ड्रग अक्रॉस
- 36:53टाइबर। एसआइ तुम नाम।
- 37:01बदल सकते हो? सॉल्ट के फॉर्मूलेशन कैसे बदलो?
- 37:06के एनएससी आर। सी।
- 37:09ओह टू एच टू ओह। ये नहीं बदली जात इस भाषा को अगर
- 37:16सबको सीखा दिया जाए। तो शिलालेख।
- 37:22के ऊपर लिखी हुई ये लिपिया बेकार हो जाएंगी सिम्बोलिक लिपिया
- 37:29चलेंगी। और तुम्हें संभल।
- 37:32के लिखिया ही सीखनी चाहिए। प्राणों में।
- 37:41बड़ी अतुल संपदा है। पूछा है गुरु गुरु एक?
- 37:49की तरह काम करता हूँ। और अगर शूज।
- 37:58नहीं तो तुम्हारे लिए पावर प्लांट एटोमिक पावर प्लांट बेकार।
- 38:10बनती होगी। कहीं।
- 38:13विद्युत आती। होगी पावर प्लांट में।
- 38:22हमारे बिजली घर में आती होगी, ट्रांसफार्मर में आती होगी, हमारे
- 38:26घर में भी आती होगी, लेकिन यहाँ तो कुछ भी नहीं चलता तब सब बाँच
- 38:34लेते हो। मेरे पास लोग आ।
- 38:39जाते हैं। बाबा, मैं अरबपति हो गया।
- 38:48मैंने कहा अच्छा। हुआ लेकिन आनंद आया वो तो नहीं
- 38:57आया। फिर अरबपति नहीं।
- 39:02हुए। फिर अरबपति।
- 39:08ना भी हुए होते तो कोई फर्क नहीं होता।
- 39:11आत्मा जलती। रहेंगी।
- 39:13हृदय तपता। खून उबाल।
- 39:22खाता रहा। हिंदू मुसलमान करते रहे और तलाश
- 39:29करते हो शांति का। खुद जन्म देते हो, अशांति के कारण
- 39:38ढूँढते हो, शांति जिनके अपने घर शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों
- 39:54पर पत्थर नहीं फेंके। निशा अगर तुम अपनी।
- 39:59मानसिक शांति चाहते हो? तो अपनी।
- 40:02रगों को सवस्थ। रखो हिंदू मुसलमान।
- 40:10करना किसी के लिए लाभकारी हो सकता है।
- 40:16वह तो राज़। करेगा, लेकिन राज़ तो होगी नहीं
- 40:18करेगा। मेरी बात को ढंग।
- 40:22से सुनोगे? तो हिंदू मुसलमान।
- 40:27करवाने वाले भी एक बार की सोचेंगे।
- 40:32आनंद तो हमें। भी नहीं रहा गद्दी निस्चिन्ह हो
- 40:35गए। कितनों की भली।
- 40:38दे दी। आनंद तो नहीं?
- 40:41आया आएगा। सब मिल।
- 41:01जाए। एक वो ना।
- 41:05मिले तकदीर। की में कोई भूलुहा।
- 41:22दाल। से बिछुड़ा।
- 41:26वह फूलों तकदीर की मैं कोई भूलू डाली से बिछुड़ा।
- 41:44हुआ। फूल हाँ, हाँ 713 नहीं, 713 नहीं।
- 42:01संग। दुनिया।
- 42:05चले भी। तो क्या है एक तू न मिला?
- 42:17धनपति हो गद्दीन शि हो। लोकतंत्र का चुनाव हुआ।
- 42:25व्यक्ति हो, तानाशाह हो, पावरफुल हो, सब कुछ हो।
- 42:34कल्पवृक्ष। हो स्वर्ग हो।
- 42:38लकनेंद्र भी दुखी रहते हैं, तुम्हें पता है।
- 42:44ये कहानी। क्या कहती है वास नहीं है तो चैन
- 42:53है, तपती है तो चैन है। गो धन, गज, धन, बाज, धन और रतन धन
- 43:08खान। सब हो तुम्हारे पास जो सुवेला की
- 43:17बात है। जब यही जायदाद हुआ करती थी, गौ धन
- 43:22गउ हो, गज धन हाथी। बाज धन।
- 43:26और रतन धन खान सब रतन हीरे जो आरा था।
- 43:33शांति नहीं आती। यह उन संतों।
- 43:39की बातें हैं जो तृप्त हो गये। मुझे लोग कहते है मत जाओ छोड़ कर।
- 43:50तुम जीने। की योजनाएँ बना दो।
- 44:0010 दिन और। जीना चाहते हो?
- 44:0110 मिनट और जीना चाहते हो? और हम जीवन।
- 44:06से तृप हुए हमें तुम कहते हो मत। ये पूछो हम।
- 44:13तृप कैसे हो जाएं? सवाल ठीक।
- 44:16है। और मैंने आज तक और क्या बोला यही
- 44:22तो बोला। आई नो युअर।
- 44:26बेसिक डेट? इसलिए मैं बल को इकट्ठे करने की
- 44:31बात नहीं करता आचार्य की तरह। मैं तो इनसे भी कहता हूँ काश इतना
- 44:40वक्त खराब किया होता। और आखिर में।
- 44:43तुमने निचोड़ निकाला होता एनलाइटनमेंट होता ही नहीं।
- 44:47बिल्कुल मार्क्स की तरह परमात्मा नहीं होता, नीच से कहता मैंने
- 44:51परमात्मा को दफन कर दिया ही इस डैड।
- 44:55और चार। वा कहता कर्ज लेलो, घी भी लो।
- 45:04और घी प्यास। नहीं बजाता।
- 45:08नरेंद्र रहने। वाला नरेंद्र रहने वाला दोनों बसम
- 45:12बुतत से दे हस्य। ओनर आगमनम कोतह मैंने मुँह रख
- 45:20रखा। हम तो तरफ।
- 45:25हो कर जा रहे हैं। तुम हमें रोक दो।
- 45:32और हमारे भी कोई बोलता है नहीं अगर तुम चले जाओगे, एक अन कह
- 45:41समुद्र साथ ले जाओगे। अन कह?
- 45:51समुद्र यही पुराण? ये हमारी साइंटिफिक ऋषियों की खोज
- 46:03है। बड़ा कुछ भरा।
- 46:06पड़ा है उसमें लेकिन बांचेगा कौन कौन बांचेगा?
- 46:18बचने वाली ये बुद्धिहीन किशोरियों जिन्हें शोक।
- 46:23है। हर साल एप्पल का नया फ़ोन करी
- 46:25देने का वो बचेंगी? यह यह पंडित जी महाराज, त्रिपुण
- 46:34धारी यह बांचेंगे। नहीं ऐसा कोई संत।
- 46:41मान सके। और संत आज।
- 46:45है नहीं अफसोस। तो तुम रोते तो?
- 46:49ठीक हो, बेटा है। मैं गया।
- 46:54तो बाचा। को बाद में तो।
- 47:01घसी टू घसी टू ग्राम रह गए। ये।
- 47:06तो मैं भी जानता हूँ, लेकिन क्या करूँ?
- 47:11जीवेशन जब समाप्त हो जाती है लाख रोको आप महावीर को कहाँ रुकते हैं
- 47:26इस दृष्टि से तो साबरक्र भी महान था, उनके भी जीवेशन मर गए थे।
- 47:35जाते जाते। आपको जानकर हैरानी होगी।
- 47:41सावरकर? निर्लेव हो के गए यहाँ से तुम्हें
- 47:45नहीं पता इस बात को। जीते जी कुछ।
- 47:50भी किया। चरण चुंबन।
- 47:53किया। कुछ भी किया लेकिन जाते हुए
- 47:55निर्लेव हो के गए। ये खुशी की बात है।
- 48:03समथारा करके। शरीर को छोड़ दिया बेनवा की तरह
- 48:10मनियों की तरह, और मैं उस महान पुरुष को नमन करता हूँ।
- 48:18इस मसले में चलो जाते जाते भी बहुत बड़ा सुधार आया।
- 48:29जोनी को सुधार गए, यही सुधारण होता है।
- 48:38अंत तक जाते जाते फल सफा भी अच्छा निकले तो जीवन में क्या किया वो
- 48:44छोड़ देना चाहिए। गो धन गज।
- 49:00धन, बाज, धन और रतन धन खान। तो कबीर कहते।
- 49:05हैं। जब आब है संतो ख धन।
- 49:09तुम इकट्ठा। करो तो मैं नहीं रोकता।
- 49:13मैंने कभी। रोका?
- 49:17तुम गंदगी खाना चाहती हो खाओ। कौन रोकता है
- 49:35कोई नहीं? रोकता लेकिन मूल उदगम जीस दिन
- 49:40मिलेगा। उस दिन तुम।
- 49:46कहो क्या? आज मज़ा आया उस दिन आती है तृप्ति
- 49:56जब आ वे संतो का धन। जब तृप्ति का।
- 50:00धन मिल गया, लाख पंगत में बैठे हो पंगते उठेंगी, आएँगी जाएँगी।
- 50:09तुम लंगर की। पंकज में बैठे रहो लेकिन तृप्त ना
- 50:12हो। तो पंकज में।
- 50:15बैठे ही रह जाओ कहे। और ये भी कोई?
- 50:18जीवन खाते ही रहो, जोड़तें ही रहो।
- 50:27लोग पांव ही छूते रहे। दौ दौ के पीते रहे।
- 50:33लोग तुम्हारा नाम ही लेते रहे, हमारा नाम अमर हो जाए, क्या मिल
- 50:37जाए? जो नाम।
- 50:41आज लोग ले रहे हैं, वो था कौन ये पता है लोगों को?
- 50:48कृष्ण कृष्ण? राधे राधे करने वाले जानते हैं
- 50:51राधा कोंत कृष्ण कोंत देखा है कभी किसको याद करते हो?
- 50:59आखिर आगे ना? अपनों पे आज नाम जपना शुरू कर
- 51:03दिया। कृष्ण कृष्णा राधे राधे थे कौन
- 51:07कैसे थे पता नहीं जब मूल तत्व को भूल गए कृष्ण थे कैसे?
- 51:19तो नाम क्या? खाप नाम का करना क्या है?
- 51:26घड़ा ही फूट। गया।
- 51:27तुम्हें घड़ा ही नहीं पता कैसा था सुराही थी।
- 51:32कैसा था? घड़ा मटका था कैसा?
- 51:37रंग कैसा था, चाल कैसी ढाल कैसी जब फूट ही गया तो पंच बहुतक मचा।
- 51:55और पंचभोतिक के नाम को तुम पूछ रहे हो बड़े मज़े की बात है
- 52:11सब कुछ है पूछा गुरु गुरु एक फुस का काम करता है अनिवार्य फुस के
- 52:21बिना। तुम्हारा जीवन।
- 52:27जगमगाए गाने। ये है।
- 52:30तृप्ति जो मैं कहता हूँ ये कबीर कहते हैं, ये तुम्हारे जीवन की
- 52:35जगमगाहट है। शरीर के ऊपर।
- 52:39कपला हो न हो, खादी हो, महावीर लग्न हो जाता है।
- 52:47लेकिन जीवन। जिए के बस वर्ष गुजारे दिनों को
- 52:52धक्के दिए। सच बोलूं?
- 52:57तुमने दिनों को धक्के दिए, जीवन जिया तो महावीर ने जिया।
- 53:05जीवन जिया। कृष्ण ने जिया तुमने नहीं जिया?
- 53:11और अफ़सोस। तुमने नहीं जिया?
- 53:15जीवन शास्त्र। पढ़ने योग्य नहीं था।
- 53:19एक छोटे बच्चे को तुम गीता पढ़ा देते हो।
- 53:23पाप कर रहे। हो तुम गीत गाने योग्य से नहीं
- 53:28बनाते, गीता पढ़ा देते हो रडा देते हो?
- 53:34बहुत बड़ी। दुश्मनी निकाल रहे हो बच्चे से
- 53:36तुम। यह कभी जी।
- 53:39नहीं पाएगा। यह कागजों में उलझा रहेगा,
- 53:43लिपियों में उलझा रहेगा और शास्त्र अर्थ करता रहेगा।
- 53:48और कभी आनंद। का लम्हा इसके लिए आएगा नहीं।
- 53:53सुख का प्रचलन। होगा।
- 53:56बस उसी। को तुम आनंद समझे जाओ।
- 54:01और तुम्हारे परले। कुछ ना?
- 54:08लोग वाह। वाह करते रहे।
- 54:12तुम चार छः। बार कपड़े बदलते रहो किस चीज़ का
- 54:15परिचायक? कपड़े बदलने में सुख है, सुख
- 54:21तुम्हारे भीतर नहीं है, ये इस चीज़ का प्रयोग है धन इकट्ठा करो
- 54:27किस चीज़ का परिचायक धन इकट्ठा करने में, धन में सुख है तुम्हारे
- 54:32भीतर सुख नहीं। गद्दियाँ इकट्ठी करो, उसके लिए
- 54:42किसी की बलि भी दे न पड़े तो दो किस चीज़ का परिचायक?
- 54:51सुख तुम्हारे भीतर। रहे।
- 54:53बस ऐसे ही। लोग आज दुनिया को गुमराह कर रहे
- 54:57हैं। बागत को बचने वाले लोग ऐसे ही हैं
- 55:04जब आवे संथो का धन कबीर कहते हैं, तृप्ति नहीं आई तो फिर संघ दुनिया
- 55:14चले भी तो क्या है? 713 नहीं।
- 55:29साथ। तेरा न?
- 55:33संग। दुनिया।
- 55:36चले भी तो क्या है? एक तू?
- 55:46न मिला। सब धन।
- 56:01धुड़ समान अगर तृप्ति मिल गई, एक क्षण तृप्ति का?
- 56:15एक पल। तृप्ति का तुमसे ने लिखा सात
- 56:26स्वर्ग अपवर्ग सुख। स्वर्ग और अप।
- 56:30वर्ग धरती के और सभी लोगों के सुख धरिये तुला एक अंग एक पलडे में धर
- 56:39तात, स्वर्ग अप वर्ग सुख जरिये तुला एक अंग तुलना ता यह शक्ल
- 56:46मिली। जो सुख।
- 56:49लव सत्संग जो सत्संग का एक क्षण सत्संग किसे कहते हैं?
- 56:57तुलसे? तुलसे किसे?
- 57:00भी कहते हो लेकिन सत्संग वो होता है।
- 57:04जब तुम सत्य के साथ होते हो, अन्यथा तुम झूठ के साथ हो।
- 57:11सत्य संघ वो। होगा जब तुम जान जाओगे सत्य है
- 57:13क्या? आध सच जुगाद सच है भी सच नानक हो
- 57:17सिंबी सच ए तो वो सदा से अरे हेगा भी सदा।
- 57:23लेकिन सत्य है क्या यह तुमने जाना नहीं और जीस तिन जानोगे उस तिन ये
- 57:28आएगा तृप्ति फिर सब बेकार हो जाएगा।
- 57:37तो ननता। ही शक्ल मिली।
- 57:41उस सत्संग का एक पल उसे ही रोता है गायक तो न मिला सारी दुनिया
- 57:56मिले भी तो क्या है? सारी दुनिया।
- 58:00चले भी तो क्या है उसको रोता है, उसकी बात करता है।
- 58:13गुरु एक फूसे। की तरह है, फूसे नहीं।
- 58:17सब बेकार। है भीतर की फिटिंग बेकार।
- 58:22बाहर के। थर्मल पावर प्लांट बेकार।
- 58:29सब है। सरस्टी में तुम देख रहे हो।
- 58:34तुम और जाते। हो किसने बनाया, क्यों बनाया,
- 58:39कैसे बनाया, ये व्यर्थ के प्रश्न है।
- 58:44मत पूछो अगर रस। प्यारा है तो पियो।
- 58:55मत पूछो। कहाँ की बनी है सराफ, कौन सी
- 58:59फैक्टरी की कैसे बनी? अंगूरों की बेटी है या किसके?
- 59:05बस इतना न जानो कि इसको पीने से मज़ा बड़ा आता है और पियो, पियो
- 59:12और जियो। सुध विसरा गयो मोरी रे।
- 59:26कर। गयो मन की जो ओं कला इक बांसुरी
- 59:39वाला। शुध।
- 59:45बिसरा गयो मोरी रे शुध बिसरा गयो। मोरे माखन चोरों नंदकिशोर जो।
- 1:00:11कर गयो। मन की चोरिरे।
- 1:00:20देखिये हम भगवान को चोर कर देते है।
- 1:00:22वो ज़रा भी गुस्सा? नहीं करता।
- 1:00:31कर गए हो? मन्नू की चोरी ओह काला?